0:00 हेलो दोस्तों वेलकम टू माय चैनल आज की वीडियो में हम जानेंगे सन 1600 का चार्टर चार्टर को बहुत जगह पर राज लेख भी बोला जाता है तो आज की वीडियो में हम जानेंगे सन 1600 का चार्टर और ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कैसे हुई यानी कि जो ईस्ट इंडिया कंपनी है जिसने भारत पर इतने साल तक राज किया भारत को इतने साल साल तक अपना गुलाम बनाकर रखा इस कंपनी की स्थापना कैसे हुई ठीक है तो सबसे पहले जानते हैं चार्टर क्या होता है देखो चार्टर एक इस तरह का दिखने वाला डॉक्यूमेंट होता होता है ठीक है और इस डॉक मेंट के अंदर बहुत सारी प्लानिंग होती है बहुत सारी योजनाएं होती हैं बहुत सारे उद्देश्य होते हैं ठीक है अब आपने एक चीज सोची कि हम 1600 का चार्टर और ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में एक साथ क्यों पढ़ रहे हैं क्योंकि यह 1600 का जो चार्टर था इस चार्टर की हेल्प से ही भारत
0:46 में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना करी गई थी यानी कि इस चार्टर ने ही ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना भारत में करी थी ठीक है तो इसलिए हम इन दोनों को साथ-साथ पढ़ रहे हैं ठीक है अब सुनो कि हुआ क्या था हुआ ये कि 2000 सॉरी 216 और 219 के आसपास एल्डरमैन यानी कि जो मर्चेंट ऑफ लंदन थे यानी कि मर्चेंट वह होते हैं जो व्यापार वगैरह करते हैं ठीक है तो जो मर्चेंट थे उन्होंने 1599 में रानी एलिजाबेथ से व्यापार करने के लिए इजाजत मांगी ठीक है यानी कि इस तरह से यह लोग मर्चेंट थे व्यापारी थे यह रानी एलिजाबेथ के पास गए 1599 में और इन्होंने बोला कि हमें भारत में व्यापार करना है और आप उस व्यापार की परमिशन हमें दो ठीक है इन मर्चेंट की एक जॉइंट स्टॉक कंपनी थी यानी कि इनकी कंपनी थी और इन्होंने देखा कि भारत में बहुत
1:32 अच्छी अपॉर्चुनिटी हैं बहुत सारी चीजें हैं तो भारत में जाके हम व्यापार कर सकते हैं अब ऐसा तो है नहीं कि यह लंदन में रहते हैं जहां इनका मन किया वहां प व्यापार कर लिया ठीक है तो व्यापार करने के लिए इन्हें चाहिए थी परमिशन किसकी परमिशन जो उस टाइम पे क्वीन थी क्वीन थी एलिजाबेथ ठीक है तो इन मर्चेंट को इन एल्डर मैनस को इनकी क्वीन एलिजाबेथ की परमिशन लेनी पड़ी ठीक है फिर क्या होता है कि 31 दिसंबर 1600 को यानी कि 1600 में 31 दिसंबर वाले दिन क्वीन एलिजाबेथ ने चार्टर के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी का निर्माण किया यानी कि क्वीन एलिजाबेथ 1600 में चार्टर लाई और उस चार्टर के द्वारा उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी को बना दिया ठीक है और कंपनी का नाम रखा गया द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट्स ट्रेडिंग इनटू द
2:19 ईस्ट इंडीज ये क्वेश्चन बहुत बार शॉर्ट में बनता है पूछ लेते हैं कि ईस्ट इंडिया कंपनी का पूरा नाम बताओ ठीक है तो ईस्ट इंडिया कंपनी तो हम शॉर्ट में बोल देते हैं लेकिन इसका पूरा नाम है द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर चेंस ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इंडीज क्यों क्योंकि हम कहां हम कहां से थे हम इधर के पोर्शन से थे ईस्ट इंडीज से ठीक है अब क्या हुआ 1600 में तो इन्हें परमिशन मिल गई लेकिन बिल्कुल लास्ट में मिली 31 दिसंबर को ठीक है फिर ये क्या हुआ 1601 में भारत आए ठीक है और अगर आपसे पूछे कि ईस्ट इंडिया कंपनी का उद्देश्य क्या था तो ईस्ट इंडिया कंपनी को व्यापार के उद्देश्य से बनाया गया था कहानी समझ आई सिंपल सी कहानी है कि जो 216 और 209 के आसपास जो मतलब व्यापारी थे मर्चेंट थे उन्होंने रानी से परमिशन ली ली रानी ने उन्हें परमिशन दे दी रानी ने एक चार्टर के द्वारा एक डॉक्यूमेंट के द्वारा उन्हें
3:04 परमिशन दे ी कि जाओ भारत में जाकर व्यापार कर लो कंपनी का नाम भी रख दिया गया ठीक है अब क्या हुआ कि ईस्ट इंडिया कंपनी के पास खुद के सैनिक भी थे जो तीन प्रेसिडेंसी यानी कि बंगाल मद्रास और मुंबई में थे ठीक है और जो सैनिक थे उनकी संख्या थी 260000 यानी कि इतनी भारी मात्रा में इनके खुद के सैनिक भी थे यानी कि अगर कोई भी प्रॉब्लम हो रही है कोई भी प्रॉब्लम हो रही है कुछ भी सॉर्टेड आउट आपको करना है तो आप सैनिकों की हेल्प ले सको ठीक है अब जान लेते हैं कि रानी एलिजाबेथ ने जो 1600 में जो चार्टर दिया उसमें क्या-क्या प्रावधान थे सबसे पहले तो इस चार्टर के द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई थी ठीक है तो कंपनी से संबंधित इसमें प्रावधान थे पहला प्रावधान था कि कंपनी का निर्माण 15 वर्ष के लिए किया गया है यानी कि ये जो कंपनी भारत में व्यापार करने के लिए भेजी है ये 15 साल के लिए भेजी गई है
3:51 और अगर कंपनी कोई भी प्रॉफिट यानी कि कोई भी फायदा नहीं बना पाती है तो 2 साल का नोटिस देकर कंपनी को बंद कर दिया जाएगा ठीक है समझे पहला प्रावधान था कि कंपनी 15 साल तक भारत में व्यापार करेगी और अगर व्यापार अच्छा चल रहा है तो ठीक है लेकिन अगर प्रॉफिट नहीं हो रहा तो ऐसी कंडीशन में 2 साल का नोटिस देकर कंपनी को बंद कर दिया जाएगा और कंपनी को एक मोनोपोली दी गई यानी कि एक विशेष अधिकार दिया गया ये जो ईस्ट इंडिया कंपनी थी इसे विशेष अधिकार दिया इसे बोला गया इस चार्टर में कंपनी को एशिया और अफ्रीका में व्यापार करने के लिए विशेष अधिकार थे मतलब यहां पे केवल यही व्यापार करेंगे कोई और व्यापार नहीं करेगा ठीक है अन्य ब्रिटिश को यहां व्यापार करने की इजाजत नहीं दी गई थी यानी कि यहां केवल और केवल ईस्ट इंडिया क ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करेगी ठीक है और अगर अगर यदि किसी
4:36 को बिना लायसेंस के व्यापार करते पाया जाता है तो उसके जहाज और उसके धन को छीन लिया जाएगा क्यों क्योंकि भाई यहां पे केवल और केवल ईस्ट इंडिया कंपनी व्यापार करेगी ठीक है तो इनकी रानी ने चार्टर में लिखा कि 15 साल तक तुम वहां व्यापार करोगे और अगर नहीं कर पाए प्रॉफिट तो तुम्हें बंद कर दी जाएगी मतलब कंपनी ठीक है अगली मोनोपोली ये दी गई कि कंपनी एकलौती कंपनी है जो वहां व्यापार करेगी ठीक है जैसे कि मान लो यहां पे दो समोसे की दुकान है ठीक है तो दो समोसे की दुकान है तो सारे लोगों के पास ऑप्शन है कि या तो नंबर वन से ले लो या नंबर टू से ले लो ठीक है लेकिन मान लो यहां पे केवल और केवल एक समोसे की दुकान है तो सबकी मजबूरी है सबको समोसे इसी से लेने पड़ेंगे ठीक है तो यही सिस्टम था कंपनी को मोनोपोली दी गई कि केवल और केवल ब्रिटिश ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ही यहां पर व्यापर करेगी कोई और नहीं कर सकता और अगर कोई करेगा तो उसका जहाज भी हम
5:23 जप्त कर लेंगे और उसका धन भी छीन लेंगे ठीक है इसके सिवाय जहाज की पहचान के लिए और जहाज की रक्षा के लिए उस पर ब्रिटिश झंडे का प्रयोग करने की इजाजत दी गई जैसे कि आप शिप्स में देखते होंगे शिप्स में ऊपर की साइड जो फ्लैग लटके हुए रहते हैं ठीक है उसी तरह फ्लैग लगाने की इजाजत दी गई और कंपनी को खुद के लिए सैनिक रखने का भी अधिकार दिया गया और कंपनी को कानून और नियम बनाने का अधिकार दिया गया जिससे वहां पर लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन हो सके ठीक है क्योंकि कंपनी ओबवियसली बड़ी बात है ठीक है कंपनी इतनी बड़ी वो बना रहे हैं तो उन्हें लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन रखने के लिए कानून बनाने पड़ेंगे नियम बनाने पड़ेंगे तो कंपनी को अधिकार दिया गया कि भैया अपने लिए तुम कानून बना सकते हो और अपने लिए तुम नियम बना सकते हो ठीक है और फैक्ट्री एस्टेब्लिश करने का भी अधिकार दिया गया जिससे माल को जिसमें माल को
6:09 स्टोर किया जा सके यानी कि उन्हें यह अधिकार दिया गया कि आप चाहो तो आप भारत में जाकर अपनी फैक्ट्री बना सकते हो जिसमें माल स्टोर किया जा सके ठीक है और कंपनी को कुछ विधाई यानी कि कानूनी शक्तियां भी दी गई जैसे कि जनरल कानून बनाने का अधिकार यानी कि जो बेसिक बेसिक कानून होते हैं वो कानून आप बना सकते हो ठीक है और इसमें कारावास जुर्माना और शारीरिक सजा देने का अधिकार भी कंपनी को दिया गया यानी कि अगर आपको कोई प्रॉब्लम है कोई बात नहीं मानना तो आप उसे कारवास दे सकते हो जुर्माना दे सकते हो और आप शारीरिक सजा भी उसे दे सकते हो ठीक है लेकिन कुछ प्रतिबंध भी थे यानी कि कुछ ऐसी चीजें थी जो कंपनी को नहीं करनी थी पहला था मर्डर डकैती आदि मामले यानी कि इन मामलों से संबंधित फैसले कंपनी नहीं ले सकती थी और कंपनी ऐसा कोई भी कानून नहीं बना सकती थी जिससे इंग्लैंड की मूल विधि प्रभावित हो यानी कि मान लो इंग्लैंड के लॉ में लिखा हुआ है कि चोरी करने पर हम
6:56 जेल में डाल देंगे ठीक है तो तुम चोरी करने पर जेल में ही लोगे ऐसा नहीं हो सकता कि तुमने उसे फांसी दे दी ठीक है तो कुल मिलाकर कंपनी को ऐसा कोई काम नहीं करना जिससे इंग्लैंड की मूल विधि प्रभावित हो अब कंपनी द्वारा बनाए गए कानूनों की एक विशेषता थी इसकी विशेषता यह थी कि यह भारतीयों पर लागू नहीं हो सकती थी यानी कि कंपनी जो भी कानून बनाएगी जो भी नियम बनाएगी वह केवल और केवल अंग्रेजों के लिए है वो भारतीयों पर लागू नहीं हो सकते क्यों नई नई कंपनी आई है और अगर भारतीयों पर अपनी मर्जी चलाएगी तो बहुत भारी बढ़ जाएगा ठीक है तो ये इसके प्रतिबंध थे तो इस चार्टर में कुल मिलाकर इतनी बात बात थी अब देखते हैं कंपनी का प्रशासन यानी कि जो कंपनी थी उसे कौन-कौन चलाता था कैसे चलती थी अब एक बात बताओ लंदन की कंपनी है यहां पे आई है तो कैसे चलती थी तो कुछ लोग थे जो इसे चलाते थे कौन-कौन ध्यान से सुनो
7:42 सबसे पहला है कोर्ट ऑफ डायरेक्टर ये एक मतलब एक ग्रुप था और इसमें 24 डायरेक्टर थे ये क्या करते थे यह कंपनी की पॉलिसी बनाते थे और डिसीजन लेते थे यानी कि कोर्ट ऑफ डायरेक्टर 24 लोगों का एक ग्रुप था और ये जो 24 लोग थे ये कंपनी के लिए पलिसी बनाते थे और डिसीजन लेते थे ठीक है उसके बाद आता है गवर्नर एंड डिप्टी गवर्नर ठीक है डिप्टी गवर्नर बोल लो या फिर वाइस चेयरमैन बोल लो ठीक है तो ये कोर्ट ऑफ डायरेक्टर के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन होते थे या तो गवर्नर बोल लो या फिर चेयरमैन बोल लो ठीक है तो ये कोर्ट ऑफ डायरेक्टर के गवर्नर और डिप्टी गवर्नर होते थे इनका क्या काम था ये कंपनी की डे टू डे की एक्टिविटीज को मैनेज करते थे यानी कि कंपनी पर नियंत्रण रखते थे आज क्या हुआ कल क्या हुआ था ठीक है और गवर्नर जो होता था ये एक ऊंचा अधिकारी होता था
8:28 कंपनी का ठीक है सबसे तो कोर्ट ऑफ डायरेक्टर थे उसके बाद आता था गवर्नर ठीक है ये कोर्ट ऑफ डायरेक्टर के साथ मिलकर पॉलिसी बनाने में हेल्प करता था ठीक है और इसका काम था कंपनी के नाम और प्रतिष्ठा को बनाए रखना यानी कि जो कंपनी का नाम है वो बना हुआ रहना चाहिए ठीक है कोई नाम को खराब ना करे इस चीज का ध्यान रखो ठीक है और अगर मान लो कभी-कभी यह गवर्नर नहीं होता था तो इसके ना होने पर जो वाइस गवर्नर होता था जो डिप्टी गवर्नर होता था वो रिस्पांसिबिलिटी संभाल लेता था ठीक है तो ये दो पश्न हमने पढ़ लिए अगला है सेक्रेटरी अब एक बात बताओ यह है इंडिया यहां से यहां व्यापार ठीक है इतनी दूर व्यापार हो रहा है तो ऐसा तो है नहीं कि उस टाइम पर टेलीफोन चल रहे थे ठीक है उस टाइम प पत्र होते थे कागजात होते थे ठीक है तो जो पत्र यहां से भारत से इंग्लैंड जाएगा या फिर इंग्लैंड से भारत आएगा तो इन्हें कौन रखेगा ऐसी जहाज से पानी में भा
9:15 देंगे नहीं ना तो इन्हें भी संभाल के रखना होता था और इनकी जांच वांच करनी होती थी ठीक है तो उसके लिए होता था सेक्रेटरी ये सेक्रेटरी क्या करता था पत्र व्यवहार कागज आदि का प्रबंधन करता था यानी कि डॉक्यूमेंट वगैरह को संभाल के रखता था उसके बाद आता था एक और कर्मचारी उसे बोलते थे खजांची यानी कि ट्रेजरर ये क्या करता था ये धन और संपदा आदि को संभालने का काम करता था यानी कि पैसे से संबंधित जितने भी काम होते थे उन सबको संभालने का काम करता था ट्रेजरर यानी कि खजांची तो ये कुछ लोग थे जो कंपनी को मिलकर चलाते थे अब हमने पढ़ लिया कि 1600 के चार्टर में क्या-क्या प्रावधान थे ईस्ट इंडिया कंपनी किस तरह भारत में आई ठीक है और हमने सब कुछ देख लिया अब हमें देखना है कि 1600 के चार्टर की कमियां यानी कि 1600 का चार्टर वो चार्टर है के द्वारा क्वीन एलिजाबेथ ने
10:01 भारत में कंपनी की स्थापना करी लेकिन इसकी कमियां बताओ पहली कनी पहली कमी है कि कंपनी को प्रदान की गई विधाई शक्तियां सीमित और प्रतिबंधित थी यानी कि कंपनी को जो कानून बनाने की शक्ति दी गई थी उसपे बहुत ज्यादा लिमिटेशन थे यानी कि तुम्हें कानून बनाने की शक्ति दी गई है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि तुम कुछ भी कानून बना सकते हो ठीक है तो पहली कमी तो ये थी कि उन्हें ज्यादा शक्ति नहीं दी गई थी दूसरा कंपनी के पास गंभीर अपराधों के मामलों से निपटने का कोई अधिकार नहीं था जैसे कि हमने अभी पीछे देखा जो प्रति बंध थे उसमें साफ-साफ लिखा हुआ था कि अपराध वाले यह लिख रहा है देखो जो प्रतिबंध थे वहां साफ-साफ लिख रहा है कि मर्डर डकैती आदि जैसे मामले में कंपनी इंटरफेयर नहीं कर सकती ठीक है तो यही था कि कंपनी एक तो तुमने उसे बहुत कम शक्तियां दी हुई है दूसरा है कि कंपनी के पास गंभीर अपराधों अपराधी जो मामले
10:48 होते थे उनसे निपटने की कोई भी अधिकार या फिर कोई भी शक्ति नहीं थी ठीक है चाहे कंपनी के आदमी ने किसी का मर्डर कर दिया हो कुछ भी कर दिया हो वो उसमें एक्शन नहीं ले सकती थी अगला है कि यह जो रॉयल चार्टर क्वीन एलिजाबेथ के द्वारा लाया गया था इसमें क्षेत्र किसी भी क्षेत्र या फिर क्षेत्रीय शासन का उल्लेख नहीं था इस प्रकार कंपनी का कोई क्षेत्र अधिकार प्राप्त नहीं था यानी कि मान लो मुझे मुझे पुलिस बनाया जा रहा है ठीक है लेकिन यही नहीं पता कि मुझे दादरी का पुलिस बनाया जा रहा है या फिर ग्रेट नोएडा का पुलिस बनाया जा रहा है बुलेंड शहर का पुलिस बनाया जा रहा है तो दिक्कत होगी ना उसी तरह इस चार्टर में भी मतलब किसी भी क्षेत्र या फिर क्षेत्रीय शासन का उल्लेख नहीं था जिससे कंपनी को कोई क्षेत्र अधिकार प्राप्त नहीं था जिससे कंपनी को यह नहीं पता चलता था कि भैया हम कहां के हेड हैं
11:34 हम कहां का क्षेत्र संभाले ठीक है तो यह कुछ कंपनियां सॉरी ये कुछ कमियां थी 1609 वाले चार्टर में ठीक है अब देखते हैं चार्टर ऑफ 1609 यानी कि 1609 का चार्टर ये महत्त्वपूर्ण चार्टर है क्यों क्योंकि अभी हमने पहले पढ़ा कि सन 1600 सन 1600 में जो एलिजाबेथ ने चार्टर लाई उन्होंने बोला कि कंपनी हमने 15 साल के लिए बनाई है ठीक है और अगर 15 साल में कंपनी ने कोई भी भी प्रॉफिट नहीं करा तो फिर 2 साल का नोटिस देकर उसे बंद कर दिया जाएगा क्योंकि अगर कोई चीज प्रॉफिट नहीं कर रही तो हम क्यों चला के रखें क्यों यहां से यहां आ है व्यापार करने के लिए ठीक है तो उन्होंने ये बोला अब यह चैप्टर इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसके अंतर्गत व्यापार को सदैव के लिए आज्ञा मिल गई है ना 15 वर्ष के समय सीमा के स्थान पर अब कोई समय सीमा नहीं थी
12:20 यानी कि तुम लाइफ टाइम तक तुम कभी तक भी भारत में व्यापार कर सकते हो ठीक है तो 1609 में चार्टर ऑफ 169 को लाए किंग जेम्स फर्स्ट ये कुछ इस तरह के दिखते थे किंग जेम्स फर्स्ट चार्टर 1609 को लेके आए इन्होंने बोला इन्होंने देखा होगा कि भैया भारत में व्यापार हो रहा है अब इतने साल मतलब 9 साल हो गए भारत में व्यापार हो रहा है बहुत अच्छा चल रहा है तो इसलिए इन्होंने कंपनी को सदैव के लिए परमिशन दे दी इन्होंने बोला आप कभी तक भी व्यापार कर सकते हो अब कोई समय सीमा नहीं है ठीक है परंतु यदि कंपनी ब्रिटिश हितों की अवेल करती है तो ऐसी कंडीशन में कंपनी को खत्म कर दिया जाएगा 3 साल के नोटिस के साथ यानी कि आपको हमेशा के लिए परमिशन तो मिल गई लेकिन अगर आप कोई भी नियम कायदे तोड़ते हो या फिर ब्रिटिश हितों के विरुद्ध जाते हो अवेल ना करते हो तो ऐसे में आपकी कंपनी को बंद कर दिया जाएगा ठीक है तो यह था आज का
13:07 लेक्चर कमेंट करके बताना समझ में आया हो तो लॉ रिलेटेड आपको लीगल नोट्स चाहिए हो तो आप इस नंबर पर डीएम कर सकते हैं क्या टर्म एंड कंडीशन है बता दिए जाएगा लरिया नाम से मेरा egramswaraj.gov.in