0:00 अमेजन के जंगल के जंगल कट रहे हैं हमारी लाइफ स्टाइल की वजह से दो पेड़ लगा रहे हो और जिंदगी ऐसी जी रहे हो कि 2000 पेड़ कटने पड़ रहे हैं हमारी लाइफ स्टाइल के लिए एक एक आदमी की तो दो पेड़ लगा के क्या मिलेगा यही सब जो जीडीपी वाले हैं यह आप तक क्लाइमेट क्राइसिस की पूरी खबर आने से रोक रहे हैं यह खबर कोई नहीं पहुंचने दे रहा आप तक कोई अखबार नहीं कोई टीवी नहीं कोई मीडिया नहीं सरकार नहीं सरकारें तो खास तौर पर छुपा रही है यह जितने बड़े-बड़े इकोनॉमिस्ट हैं यह सब बिल्कुल पगलाए हुए हैं यह अभी भी सोच रहे हैं कि मुझे जीडीपी बढ़ाना है जीडीपी बढ़ाना जैसे आपके घर में आग लगी है और आप भीतर बैठ के नोट गिन रहे हो हम मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के बहुत होशियार आदमी है यह बताते हैं 2070 तक हम ऐसा ऐसा कर देंगे 2070 में तुम
0:45 जिस शहर की बात कर रहे हो शहर ही नहीं बचने वाला कृपा करके जो परंपरावादी है यह ना कहे कि अरे हां आजकल जमाना खराब आ गया है यह नई चीज है वेस्टर्न कैपिटल जम इसने पृथ्वी बर्बाद कर दी सॉरी सर आपकी जो इंडियन परंपरा है वह भी यही कहती है भोगो भोगो सर मैं क्लाइमेट चेंज से रिलेटेड थोड़ा सर्च कर रही थी और मैंने आपके वीडियोस भी देखे तो आप उसमें सीधे-सीधे यह क्यों नहीं बताते हैं कि क्लाइमेट चेंज की सबसे बड़ी वजह फॉसिल फ्यूल्स का अंधाधुन कंजमपट्टी फॉरेस्टेशन है बल्कि राद आप यह बोलते हैं कि ए फॉरेस्टेशन एक इनफेक्टिव मेथड है और आज हम देखते हैं कि एक ट्रेंड है कि जो भी
1:30 थोड़े पढ़े लिखे लोग हैं वह अपने बर्थडेज में एनिवर्सरीज में एक संकल्प ले रहे हैं कि हम पेड़ लगाएंगे तो क्लाइमेट चेंज से बाहर निकलने का सही तरीका क्या है एक जब मैं छोटा था तो सरकारी नारा चलता था जो अपनी उम्र के हैं उनको ध्यान आएगा कि बच्चे तीन और पेड़ कुछ इस तरह का था क्या था याद आ रहा है किसी को कहते थे कि बच्चे दो या तीन होने चाहिए सरकार का था आज से 30 साल पहले 40 साल
2:17 पहले कि बच्चे दो या तीन होने चाहिए और पेड़ लगाओ कम से कम पाच या 10 कुछ ऐसा था सरकार कहती थी सारी गड़बड़ यह है कि यह गणित बहुत खराब है एकदम गलत हिसाब है पेड़ निसंदेह बहुत जबरदस्त चीज है पेड़ों ने ही बहुत कुछ संभाल कर रखा हुआ था आज तक प्रय जब आप ए फॉरेस्टेशन की बात करते हैं ना ए फॉरेस्टेशन माने क्या पेड़ लगाना पौधे रोपना पेड़ तो नहीं लगाए जाते पौधे रोपे जाते हैं इते इते
3:03 एक पेड़ जब आप क्लाइमेट चेंज की दृष्टि से देखते हैं तो एक पेड़ प्रतिवर्ष बस 203 किलो कार्बन डाइऑक्साइड सोख सकता है पेड़ क्या करता है कार्बन डाइऑक्साइड सोक के उसको लकड़ी बना देता है लकड़ी पत्ती जो पूरा ऑर्गेनिक मटेरियल है वह सब बन जाता है पेड़ में ठीक है और पेड़ भी कर सकता है जब पहले पेड़ कम से कम 10 20 साल 25 साल पुराना पेड़ हो तब यह पेड़ कर सकता है उसमें भी अभी गड़बड़ है पेड़ अगर ज्यादा पुराना हो गया तो यह नहीं करेगा पेड़ मरेगा नहीं पर करेगा नहीं
3:48 क्यों क्योंकि अब व बड़ा हो गया ना पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड लेता है और उससे क्या बनाता है लकड़ी अब पेड़ का आकार तो बड़ा हो गया अब आप बन एक हाइट है आप हो गए हो पाच चार के मान लो अब उसके बाद हमेशा तो नहीं बढ़ते रहोगे तो पेड़ भी कार्बन डाइऑक्साइड तभी तक सोख रहा था जब तक अभी उसे और लकड़ी का निर्माण करना था उसके बाद भी लेगा पर कम लेगा कम लेगा और इसी तरह से जब पेड़ बहुत छोटा है तब भी वह बहुत कार्बन डाइऑक्साइड नहीं सूखे क्यों क्योंकि अभी उसके पास इतना सा तो उसका तना है वो कितनी कार्बन डाइऑक्साइड उसमें लाकर उसको लकड़ी बनाएगा पतला सा तो है तो पेड़ बस अपने यवन के कुछ दशकों में
4:38 कार्बन डाइऑक्साइड इफेक्टिवली सोखता है पहली बात तो यह समझो जो पेड़ की पूरी लाइफ साइकिल है उसमें जो उसके ग्रोइंग अप इयर्स है जो एकदम जब छोटू हुई था आप तो इतना सा लगाते हो ना इतना सा लगाते हो धीरे-धीरे तो जो उसके ग्रोइंग अपीयर्स है उसमें बहुत कार्बन डाइऑक्साइड नहीं सोखता इसीलिए पेड़ क्लाइमेट चेंज की दृष्टि से इनफेक्टिव है अप्र भावी कह सकते हो अनुपयोगी जब वह अभी छोटा है फिर वह उपयोगी होता है जब अभी वह मर्द बनने लग जाता है जब उसके तने पर लकड़ी चढ़ने लगती है उसका घेराव बढ़ने लगता है तब वह उपयोगी हो जाता है कार्बन डाइऑक्साइड सोखने की दृष्टि से फिर
5:23 एक दिन आता है जब पेड़ ने अपनी पूरी ऊंचाई पा ली अब उसके बाद फिर बहुत कार्बन डाइऑक्साइड नहीं सोखता क्योंकि अब क्या करेगा सोख के सोखता है पर अब उसके सोखने की दर कम हो जाती है तो एक तो यह दूसरी बात पेड़ जब अधिकतम भी सोखता है मैक्सिमम तो मैंने क्या बोला कितनी सोख लेता है 20 से 30 किलो प्रति वर्ष 20 से 30 किलो प्रति वर्ष और आप जो एक बच्चा पैदा करते हो जो हर जो एक इंसान दुनिया में आता है वो प्रतिवर्ष कितनी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करता है एमिट करता है चलो सब लोग गेस
6:12 करो पेड़ सोखने में लगा हुआ है हम पेड़ पेड़ करते हैं कि चलो पेड़ लगाएंगे तो इससे ठंडक आ जाएगी क्लाइमेट चेंज रुक जाएगा ये सब हो जाएगा ऐसी बातें पढ़ने को मिलती है ना जहां बात करो क्लाइमेट चेंज की तहां सब ये जितने उत्साही लोग हैं य जाते हैं कहते हैं चलो वृक्षारोपण करें जैसे रोपण सेब कुछ हो जाना है एक पेड़ लगाओगे तो वह एक साल में 20 से 30 किलो कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेगा बढ़िया मस्त पेड़ यह झाड़ झड़ नहीं जो हमें य देखने को मिलते हैं बबूल कीकर इनसे नहीं होगा हम वृक्ष की बात कर रहे हैं बड़े वृक्ष वह भी 20 30 किलो सोख लेंगे बहुत हुआ तो 35 किलो और जब एक सदस्य दुनिया में जो मनुष्य
6:58 प्रजाति है बढ़ता है माने एक बच्चा पैदा होता है तो बताओ वो एक साल में कितनी कार्बन डाइऑक्साइड एमिट करता है चलिए कौन बनेगा करोड़पति बताओ भाई एक साल में पेड़ का कितना आया 20 30 किलो तो अब बताओ बच्चा एक साल में बच्चा माने जो पैदा हुआ है उसका कितना आता होगा दो टन हथौड़ा होना चाहिए दो टन एक दो टन दो आगे बताओ 60 ढाई 70 हज पेड़ 20 30 और बच्चा हजार बच्चा हजार पता नहीं हां आगे
7:43 आगे आगे आगे आगे य कोई और उत्साही खिलाड़ी नहीं बैठा हुआ है खतरे उठाने वाला कोई नहीं बैठा हां भाई उद कितना चार चार टन या यही बता दे प्रश्न करता आप बताइए ना पहले तो आपको बताना चाहिए हम इधर उधर से का को ले रहे हैं हा 10 टन छोटा सा तो होता है बच्चा क्या करेगा 10 टन से ज्यादा क्या कर इस तो पोटी भी
8:30 नहीं करता हां भाई बताओ कौन बताएगा असली आंकड़ा पेड़ सोखता है फिर से इसको जरा भीतर उतरने दीजिए छाती में ताकि पेड़ पेड़ की रट लगाना बंद करो पेड़ सोखता है अधिक से अधिक 20 से 20 से हम बात कर रहे हैं वो अमेजन वाले वृक्षों की यह छोटे मोटे पेड़ों की नहीं बात कर रहे जैसे हमारे यहां पर ये एस्टोनिया है य एस्टोनिया नहीं वृक्ष कहलाता बच्चा कितना उत्सर्जित करता है बोलो बोलो 600 किलो तो वृक्ष का है साल में वह अधिक से अधिक बेचारा पूरा पंपिंग करेगा सोखे का तो 20
9:16 30 किलो कार्बन डाइऑक्साइड व अपना ले लेगा उसकी लकड़ी बना देगा और जो एक इंसान पैदा होता है वह साल में 6000 किलो कार्बन डाइऑक्साइड एमिट करता है अब बताओ पेड़ लगाने से कुछ होगा एक पेड़ 20 30 किलो अधिक से अधिक बेचारा सोख पाएगा इससे ज्यादा उसकी औकात नहीं है जबरदस्त वृक्ष भी अधिक से अधिक 3035 किलो सोख लेगा और वह भी व ऐसा नहीं कि तुमने आज लगाया तो आज सोखना शुरू करेगा पहले तो उस बेचारे को बचना चाहिए पहले तो वह बचे आप जानते हो कि इसमें ए फॉरेस्टेशन आपने टर्म यूज करी ए फॉरेस्टेशन में सक्सेस रेट क्या है यह सब आपको पता करके आना चाहिए सवाल पूछने से पहले फॉरेस्टेशन में जो सर्वाइवल रेट है
10:01 वह 2 पर से 15 पर का है वो भी जब वह किसी ऑर्गेनाइज एजेंसी द्वारा करा जाता है यह नहीं कि आपने अपने घर में लगा दिया मोहल्ले में लगा दिया उसमें तो शायद और कम होगा जब सरकार या एनजीओ वगैरह करते हैं तो भी उन्हें दो से 15 पर का सक्सेस रेट मिलता है दो से 15 पर मतलब समझ रहे हो कि अगर 10 लगाते हैं तो उसमें से एक पेड़ बचता है बाकी बकरी खा गई पानी नहीं दिया कुछ हो गया वो मर गया मर गया माने उसको वृक्ष बनने में बहुत समय लगता उतने समय तक वो जी नहीं पाया ये नहीं कि आज ही मर गया आज मर सकता है एक साल बाद मर सकता है दो साल बाद मर सकता है चार साल बाद मर सकता है पर व पूरा वृक्ष नहीं बनने पाया पूरा वृक्ष अगर बन भी जाए तो अपने
10:48 पीक एब्जॉर्ब पीरियड में वह 30 किलो कार्बन डाइऑक्साइड प्रतिवर्ष सोखे सिर्फ 30 किलो प्रति वर्ष और एक इंसान जो पैदा हुआ है वोह 60000 किलो प्रति वर्ष निकाले एक इंसान जो पैदा हुआ 6 हज किलो प्रति वर्ष निकालेगा एक पेड़ बेचारा 203 किलो सूखे का बताओ पेड़ क्या कर सकता है पर हम अपने आप को धोखा देने में माहिर है हम अपने आप बता रहे हैं कि नहीं मैं अपनी जिंदगी वैसे ही चलाऊंगा आबादी वैसे ही बढ़ाऊ मैं पेड़ लगाऊंगा तुम्हारे पेड़ लगाने से कुछ नहीं होगा तुम्हारी जो लाइफ स्टाइल है ना वह पेड़ों की लाश पर बनी है तुम दो पेड़ लगाते हो तुम 10 खाते हो तुम जिन तरीकों से जी रहे हो वह तरीके
11:36 संभव ही नहीं है वनों के विनाश के बिना और आप अपने आप को धोखा देने के लिए अपनी नजर में पाक साफ रहने के लिए दो पेड़ पांच पेड़ लगा देते हो 20 पेड़ लगा देते हो उससे क्या हो जाएगा किसको धोखा दे रहे हैं हम यह पेड़ लगा कर के हम किसको बेवकूफ बना रहे हैं अमेजन के जंगल के जंगल कट रहे हैं हमारी लाइफ स्टाइल की वजह से दो पेड़ लगा रहे हो और जिंदगी ऐसी जी रहे हो कि 2000 पेड़ कटने पड़ रहे हैं हमारी लाइफ स्टाइल के लिए एक एक आदमी की तो दो पेड़ लगा के क्या मिलेगा हमारा कुछ भी ऐसा नहीं है जो नेचुरल रिसोर्स इंटेंसिव ना हो हमारी एक एक सांस प्रकृति के विनाश पर
12:24 आधारित है ऐसा नहीं कि वह आवश्यक है पर हमारी विचारधारा ऐसी आइडियो जीी ऐसी है जो हमारा फिलोसॉफिकल इंडोक्ट्रिनेशन हो गया है हमें जीवन जीने का जो तरीका बता दिया गया है व तरीका ही यही है कि प्रकृति के विनाश के बिना हम जी ही नहीं सकते हम प्रकृति के विनाश के बिना जी ही नहीं सकते तो यह जो पेड़ लगाने वाले डू गुड्स हैं मैं उनसे कह रहा हूं कि थोड़ा आंकड़े देख लो उसके बाद शोर मचाओ कि पेड़ लगाना है पेड़ लगाना है पेड़ अगर लगाने हैं तो फिर इतने लगाने पड़ेंगे कि अरबों पेड़ लगाने पड़ेंगे ये दो चार पेड़ से नहीं होगा और अरबों पेड़ लगाने ही नहीं पड़ेंगे भूलना नहीं कि उनका सर्वाइवल रेट कितना होता है तो जितने पेड़ चाहते हो कि बचे उसके 10 गुना लगाने पड़ेंगे जितने पेड़ चाहते हो कि बचे उसके
13:12 10 गुना पेड़ लगाओ और फिर उनको तब तक पालो पोसो जब तक कि वह कम से कम 510 साल में बड़े वृक्ष ना बन जाए तो यह तो पेड़ बाजी हुई इसको समझना बहुत जरूरी था यह स्पष्ट हो गया पेड़ अब इस पर और बोलेंगे जितना मतलब गला अनुमति देगा अब इस पर आते हैं जो दूसरी बात है इनकी कि फॉसिल फ्यूल मत जलाओ फॉसिल फ्यूल मत जलाओ उसे हो जाएगा इसमें क्या चल रहा है इसमें यह चल रहा है कि हम इलेक्ट्रिक व्हीकल लेकर के आएंगे उससे हो जाएगा इलेक्ट्रिक व्हीकल बिना आंकड़े देखे आप फिर से आ जाते हो मैं 100 बार बोलता हूं आओ तो आंकड़े लेकर आओ
13:59 एक ईवी जो होती है इलेक्ट्रिक व्हीकल वह अपने पूरे लाइफ साइकिल में जो एक फॉसिल फ्यूल कार होती है इंटरनल कंबशन इंजन वाला जो व्हीकल होता है उसकी अपेक्षा बस 25 से 50 प्रत कम एमिशन करती है आपको खुश हो जाना चाहिए ताली बजाओ बच्चा लोग माने अगर आपके पास एक पेट्रोल या डीजल गाड़ी होती और उसकी जगह आपने क्या ले ईवी ले ली तो पेट्रोल गाड़ी अगर 100 यूनिट कार्बन डाइऑक्साइड एमिट करती तो आपकी जो ईवी है वह 50 से 75 एमिट करती है अपने पूरे लाइफ साइकिल में जिसमें मैन्युफैक्चरिंग और फिर उसकी रीसाइकलिंग डिस्पोजल सब इवॉल्वड
14:46 है तो खुश होने की बात है हो जाए खुश नहीं क्योंकि हमने आंकड़े पूरे नहीं देखे साधारण सा एक गगल करो कि अमेरिका में हजार लोगों पर कितनी कारें हैं और भारत में हजार लोगों पर कितनी कारें हैं करो जरा सा जल्दी से करो भाई अमेरिका में हजार लोगों पर लगभग हजार ही कार है अगर अगर मेरे आंकड़े दुरुस्त है तो और भारत में लगभग 75 प्रतिशत घरों में कार है अगर हम एवरेज फैमिली साइज पांच या छह मान ले भारत में तो इसका मतलब हुआ कि भारत में 500 लोगों पर कितनी कार हुई
15:32 75 75 प्र घरों में कार है तो 100 में से सा 100 परिवारों में साढ़े कार 100 परिवार माने 500 लोग तो 500 लोगों पर साढे कार तो 1000 लोगों प 15 कार ठीक जा रहा हूं कुछ गड़बड़ कर रहा हूं जी भारत का अनुमान है कि 2022 में भारत में 24 पैसेंजर व्हीकल्स से पर 1000 हां तो मैंने 15 बोला उसको 24 मान लो ठीक है क्योंकि मैंने एवरेज फैमिली साइज फ ले लिए वह फाइव से घट के फोर हो गई होगी तो इसीलिए शायद 400 लोगों पर सा था तो 400 प सा लोगे तो हज प फिर वो आ जाएगा इतना 24 ठीक है और अमेरिका में 860 860 से 910 के बीच में 860 से 90 मैंने माना था हज ही है वो 900 मान लो ठीक है 860 से 910 अमेरिका
16:19 में हज लोगों पर 900 गाड़ियां है 900 कार ठीक है अभी ऑथेंटिक डाटा आ गया एप्रोक्सीमेट भी नहीं है अमेरिका में हजार लोगों पर कितने हो गई 900 कारें हो गई भारत में हज लोगों पर कितनी कार हो गई 24 24 ईवी क्या करता है कि आपका एमिशन मान लो 30 प्र कम कर देता है 30 प्र आप एमिशन कम कर लो लेकिन भारत को तो क्या बनना है अमेरिका भारत को क्या बनना है अमेरिका अमेरिका बनने के लिए जरूरी है कि भारत जो अपनी व्हीकल डेंसिटी है पर कैपिटा
17:06 नंबर ऑफ कार्स जो है उसको 30 गुना करें 24 को 30 से अगर गुणा भी कर दोगे तो कितना हो गया 720 व तब भी अमेरिका जितना नहीं हुआ और हम तो विकास का क्या मतलब समझते हैं यही भाई ऑटो उद्योग की तरक्की होनी चाहिए घर घर में कार आनी चाहिए यही तो विकास है ना तो कुल हजार में बेचारे भारतीयों के पास कुल 24 ही तो कार है हज आदमी पर कुल 24 कार है तो विकास का मतलब ही क्या हुआ अनुज 24 कार को कम से कम कितना कर दें 30 गुना तो करें तब भी हम अमेरिका की टक्कर में बराबर नहीं आएंगे 24 को 30 गुना भी कर दोगे तो हज लोगों पर कितनी कार हो गई 720
17:52 और अमेरिका में हज लोगों पर कितनी कार है तो 30 गुना हम करना चाहते हैं और इलेक्ट्रिक व्हीकल लोगे तो 30 प्र कम होगा और 30 गुने में 30 प्र कम कर दो तो भी क्या हो जाएगा कितने गुना बढ़ गया 21 गुना 30 गुने में 30 प्र कम कर दो तो भी 21 गुना बढ़ गया इलेक्ट्रिक व्हीकल लाकर भी तुम एमिशंस कम नहीं कर रहे 21 गुना और बढ़ा रहे हो पर बहुत लोगों को लगता है मेरे पास इलेक्ट्रिक व्हीकल आ गया अब मैं तो क्लाइमेट एक्टिविस्ट हो गया उसकी पट्टी भी हरे रंग की लगती है सरकार लगवा हरे रंग की पट्टी भाई टोटल एमिशन एमिशन पर व्हीकल मल्टीप्ला बाय नंबर ऑफ व्हीकल्स होता है ना तो एमिशन पर
18:39 व्हीकल तो 30 पर कम कर रहे हो ईवी लाक के पर नंबर ऑफ व्हीकल्स तुम बढ़ा रहे हो गवर्नमेंट पॉलिसी द्वारा क्योंकि तुम्हारी विकास की परिभाषा ही जीडीपी सेंट्रिक है तुम बोल रहे हो जीडीपी बढ़ रहा है तभी तो विकास हो रहा है और जीडीपी कैसे बढ़ेगा ऑटो उद्योग नहीं बढ़ेगा ऑटो उद्योग बढ़ने का मतलब ही यही है कि घर-घर में कार पनी चाहिए और घर घर में कार पहुंचाओ तो तुम ईवी भी लेकर के आओ तो भी एमिशंस 211 गुना बढ़ेंगे और तुम्हें एमिशन बढ़ाने नहीं है तुम्हें एमिशन घटाने हैं जितने एमिशन आज हैर इतने भी चलते रहे तो हम पृथ्वी को नहीं बचा सकते जितने कार्बन एमिशंस आज है अगर इस पर स्टेबलाइज भी कर ले तो भी हम पृथ्वी को नहीं बचा सकते और जो आप ईवी पॉलिसी लेकर चल रहे हो वो तो 21 गुना और बढ़ा देगी एमिशंस
19:26 को पर यह दो बातें हैं जिनको लेक के पढ़े लिखे लोग भी बहुत उत्साहित रहते हैं एक तो पेड़ लगाओ और दूसरा ईवी चलाओ ना ईवी चलाने से कुछ हो सकता ना पेड़ लगाने से कुछ हो सकता जिससे हो सकता है कहिए तो उसकी बात करू नहीं तो घर चलते हैं आप में से कुछ लोगों ने ईवी वगैरह बुक भी करा रखी होगी बेकार में काहे को मैं बुकिंग कैंसिल कराऊ बड़ा प्रचलन है आजकल छोटे-छोटे सेपलिंग ले लेंगे एक दूसरे को दिखा रहे हैं एक सज्जन थे पहले ऐसे लोग यहां गुलाब खोज के चलते थे व यहां पर सेपलिंग लेकर चलते हैं बोलते जो मिलता उसको दे देता लगाओ बोलते इस तरीके से पृथ्वी को बचा रहा हूं ऐसे पृथ्वी नहीं बचने
20:13 वाली तुम बिना आकड़ों के बात कर रहे हो तुम बेतुकी तर्क हीन बात कर रहे हो ऐसे नहीं होता जो मूल वजह है व समझो मूल वजह है हमारी वि की गलत अवधारणा बैड फिलॉसफी ऑफ लाइफ इट सेल्फ हमें बता दिया गया है कि हम पैदा हुए हैं प्रकृति को नेचर को भोगने के लिए और इसी का नाम तरक्की है डेवलपमेंट कंसिस्ट ऑफ एक्सप्लोइटेशन ऑफ नेचर मैं अलग हूं यह अलग है और मेरी खुशी इसमें है कि मैं इसको भोग लू
21:00 मैं अलग हूं यह अलग है मेरी खुशी इसमें कि मैं इसको भोग लू हमें फिलॉसफी पढ़ा दी गई है यह पूरे तरीके से एक वेस्टर्न फिलॉसफी है डलिस्टेड सुनते नहीं हो जब हम बोलते हैं कि भाई यह सब जानवर क्यों खा रहे हो तो कई हमारे दोस्त आके कह रहे हैं क्योंकि यह तो बनाए ही गए हैं खाने के लिए मैं ऊपर हूं या नीचे यह सब कुछ बनाई इसीलिए कि मैं इसको एक्सप्लोइट करूं यह जो फिलॉसफी है ना यह जब तक नहीं बदलेगी तब तक पेड़ और ईवी से नहीं
21:46 होगा और यह फिलॉसफी सिर्फ राइट एजुकेशन से बदल सकती है कोई इस बात को समझ नहीं रहा है मैं चिल्ला चिल्ला के बोल रहा हूं क्लाइमेट चेंज का इलाज शिक्षा है लोगों को ताज्जुब होता है कहते हैं शिक्षा से थोड़ी होगा मैं कह रहा हूं शिक्षा के बिना कुछ नहीं होगा ये जो तुम्हारे पॉलिसी मेकर्स हैं इन्हें कुछ नहीं पता सब कैसे हो रहा है यह सोच रहे हैं कि क्लीन एनर्जी और यह सब करके हो जाएगा नहीं होगा क्लाइमेट चेंज का कोई टेक्नोलॉजिकल सॉल्यूशन नहीं हो सकता क्लाइमेट चेंज एक स्पिरिचुअल क्राइसिस है और उसका सिर्फ एक स्पिरिचुअल सलूशन ही हो सकता है समझ में आ रही है कुछ बात
22:34 आपको भारतीय दर्शन आपसे कहता है मैं इसलिए आपसे वेदांत की इतनी बात करता हूं तुम इससे भिन्न नहीं हो बार-बार आपको यही समझाता हूं ना मैं पूरे गीता पाठ्यक्रम में तुम इसी महा समुद्र की एक लहर मात्र हो यही कृष्ण बोलते हैं य अष्टावक्र बोलते हैं यही संतों ने गाया है तुम भिन्न हो ही नहीं जब तुम इससे भिन्न नहीं हो तो तुम्हें इसको एक्सप्लोइट करके क्या मिल सकता है एक लहर को पानी पी पी के क्या मिलेगा बताओ जो लहर है वही पानी है तो लहर को और पानी पी के कुछ मिलेगा यह भारतीय दर्शन है तुम इससे अलग हो ही नहीं तो फिर एक्सप्लोइटेशन से कोई फायदा भी नहीं है लेकिन वहां पर एरिस्टोटल से शुरू करके एरिस्टोटल से
23:21 भी पीछे और चले जाओ तुम प्लेटो से शुरू करके और अभी में आ जाओ तुम सबसे जो बड़ा उदाहरण है डेकार्ट वहां लगातार फिलॉसफी यही रही है हम अलग है माइंड मैटर डाकोटिन नेचर एंड इन दैट लाइज हिज कंस्ट एंड हैप्पीनेस एंड दैट इज व्हाट इज क्लाइमेट क्राइसिस द एक्सप्लोइटेशन ऑफ नेचर जब तक हम अपनी खुशी के अच्छे बेहतर सूक्ष्म तरीके नहीं ढूंढेंगे तब तक हमें खुशी बस एक चीज में मिलेगी क्या जो सामने उसको काटकूट
24:08 दो उससे अपने उपयोग का कुछ सामान बना लो यही क्लाइमेट क्राइसिस है तो क्लाइमेट क्राइसिस सॉल्यूशन है हाईयर प्लेजरस कि तुम्हें आनंद भी मिल जाए और प्रकृति का नुकसान भी ना हो जब तक तुम्हें एक ही चीज में खुशी मिलती है कि फ्यूल जलाओ फ्यूल जलाओ तो तुम फ्यूल जलाओ ग तुम्हें कोई नहीं रो सकता जब तक तुम्हें एक ही चीज में खुशी मिलती है कि बीफ खाओ पोर्क खाओ मटन खाओ चिकन खाओ तुम यह सब खाओगे कोई कानून तुम्हें नहीं रोक सकता शिक्षा दर्शन की शिक्षा जीवन की शिक्षा तुमको ऊंचे आनंद देती है तुम्हें बताती है कि बिना किसी को मारे काटे भी जॉय कैसे हासिल किया जा सकता है फिर तुम्हें कुछ
24:54 मारने काटने की जरूरत नहीं है समझ में आ रही है बात ये हम बहुत मूर्खतापूर्ण राह चल रहे हैं आप अखबार उठाओ आज का ही अखबार है उसमें आर्टिकल्स रहते हैं बड़े-बड़े अगले 20 सालों में हमें कैसे कैसे कैसे तरक्की करनी है और व बड़े-बड़े पदाधिकारी हैं जो आर्टिकल्स लिख रहे हैं कोई जी 20 के किसी पद पर आसीन है कोई कुछ है कोई इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के सदस्य हैं सेक्रेटरी हैं वो सब लिख रहे हैं और उस पूरी बात में क्लाइमेट वर्ड एक बार नहीं होता एक बार क्लाइमेट शब्द नहीं आता और वहीं पर कहीं पर छोटा सा कुछ उसी
25:41 पेज में कोई आर्टिकल लिखा होगा क्लाइमेट चेंज के बारे में जब तक एक ही पेज पर इकोनॉमिक डेवलपमेंट की बात हो रही होगी एक आर्टिकल में और क्लाइमेट चेंज की बात हो रही होगी दूसरे आर्टिकल में तब तक क्लाइमेट चेंज नहीं रुक सकता नहीं समझे तुम कह रहे हो मुझे जीडीपी तो बढ़ाना ही बढ़ाना है हां साथ में देखो क्लाइमेट क्राइसिस का अगर कुछ समाधान हो सकता है तो कर लेंगे यह जो तुम्हारी जीडीपी सेंट्रिक फिलॉसफी है ना यह बैड फिलॉसफी है वेरी वेरी बैड फिलॉसफी और यह हमें अगले कुछ दशकों के भीतर ही पूरी तरह खत्म कर देगी हमें कोई तकलीफ नहीं होने वाली
26:29 हम जड़ से उखड़ने वाले हैं ऐसा नहीं कि छोटा मोटा कुछ कष्ट हो जाएगा हम विलुप्त होने वाले हैं मुझे दर्द ज्यादा इस बात का रहता है कि करतूत हमारी और हमसे पहले लाखों दूसरी ऐसी मासूम प्रजातियां विलुप्त होंगी जिनका कोई दोष नहीं उन्होंने बेचार ने कुछ करा नहीं यही सब जो जीडीपी वाले हैं यह आप तक क्लाइमेट क की पूरी खबर आने से रोक रहे हैं आप क्या सोच भी सकते हो कि प्रतिदिन 1000 प्रजातियां एक्सटिंक्ट हो रही है विलुप्त मैं बोलू तो आपको लगेगा यह तो एजरेट
27:17 है यह खबर कोई नहीं पहुंचने दे रहा आप तक कोई अखबार नहीं कोई टीवी नहीं कोई मीडिया नहीं सरकार नहीं सरकारें तो खास तौर पर छुपा रही है यह जितने बड़े-बड़े इकोनॉमिस्ट यह सब बिल्कुल पगलाए हुए हैं यह अभी भी सोच रहे हैं कि मुझे जीडीपी बढ़ाना है जीडीपी बढ़ाना जैसे आपके घर में आग लगी है और आप भीतर बैठ के नोट गिन रहे हो और योजना बना रहे हो कि किस तरह से अगला नोट हासिल करूंगा रा घर ही जल चुका है तुम भी जलने वाले हो तुम्हारे नोट भी जल जाएंगे कुछ बचना नहीं है पागल बिल्कुल पागल विक्षिप्त
28:06 समय ऐसा है जब किसी भी बातचीत में दो अगर लोग बात कर रहे हैं किसी भी बातचीत में क्लाइमेट शब्द का होना जरूरी है किसी भी मुद्दे पर कोई भी आर्टिकल है उसमें क्लाइमेट शब्द का होना जरूरी है कोई मूवी बन रही है उसमें क्लाइमेट शब्द का होना जरूरी है कोई इलेक्शन मेनिफेस्टो है उसमें क्लाइमेट का होना जरूरी है कोई सिलेबस है एजुकेशनल उसमें क्लाइमेट शब्द का होना जरूरी है उसकी जगह आर्टिकल्स आते हैं लेख आते हैं प्रोजेक्शंस आते हैं कि 2070 में भारत को और कैसे-कैसे इंफ्रास्ट्रक्चर
28:53 की जरूरत होगी और यह बता रहे हैं कि 2070 में हम मुंबई में कैसा और इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा कर सकते हैं 2017 में मुंबई है किन खवाबों में हो किन ख्यालों में हो और इन्होंने बड़े-बड़े प्लान बना रखे हैं कि हमें मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस के बहुत होशियार आदमी हैं यह बताते हैं 2070 तक हम ऐसा ऐसा कर देंगे 2070 में तुम जिस शहर की बात कर रहे हो शहर ही नहीं बचने वाला 20 सेंटीमीटर जल स्तर बढ़ चुका है पहले ही
29:40 पागल किस दुनिया में है मीन सी लेवल 20 सेंटीमीटर बढ़ चुका है 2070 में हो सकता है 100 सेंटीमीटर बढ़ चुका हो तुम किस दुनिया में हो बांगला देश पूरा साफ हो जाएगा बैंकॉक पूरा साफ हो जाएगा भारत के बहुत सारे तटीय शहर पूरी तरह साफ हो चुके होंगे ग्लेशियर्स हिमालय के सब पिघल चुके होंगे नदियां हमारी जितनी है जो हिमालय के ग्लेशियर से आती है सब सूख चुकी होंगी हम कौन सी इकोनॉमिक प्लानिंग कर रहे हैं किस जीडीपी की बात कर रहे हैं हेलो कितना मीन अभी सी लेवल
30:29 एकदम आज का डटा देना 90 प्रतित जो हीट होती है वह ओशन ही तो अब्जॉर्ब कर रहा है क्लाइमेट चेंज का सबसे ज्यादा बड़ा असर वटर बॉडीज पर पड़ रहा है जिसमें ग्लेशियर आता है ओशनस आते हैं नदियां आती हैं नदियों में पहले बाढ़ आएगी क्योंकि बर्फ तेजी से पिघले गी उसके बाद नदियां सूख जाएंगी क्योंकि बर्फ बचेगी ही नहीं सी लेवल ऐसे ऐसे ऐसे राइज करते रहेंगे इतना राइज करने सोचते हो कहां तक पहुंच जाएंगे यूरोप के बहुत सारी राजधानियां जो तटीय हैं वह डूबने वाली है उनको है वह समझ रहे हैं इस बात को उन्होंने अपनी अप्रोच बदल दी है वह अपनी बजटिंग जीडीपी के हिसाब
31:14 से नहीं कर रहे अब पर खासकर हिंदुस्तान में हम अभी पता नहीं किन खाबों में और क्लाइमेट चेंज से दुनिया के जिन देशों पर बिल्कुल बल गाज गिरने वाली है उनमें भारत सबसे आगे है जो देश बिल्कुल तबाह होने वाले उनमें भारत सबसे आगे है उन छोटे-मोटे देशों को छोड़ दो बस जो कि बिल्कुल द्वीपीय देश हैं आईलैंड नेश जो डूबी जाएंगे जैसे मालदीव्स उनको छोड़ दो उनके बाद जिन पर सबसे बुरा आघात होगा वह भारत जैसे देश हैं भारत बांग्लादेश पाकिस्तान
32:06 एक डिग्री से ऊपर हम जानते ही हैं कि तापमान बढ़ चुका है औसत ग्लोबल टेंपरेचर इतना तो पता ही होगा दो डिग्री पर फीडबैक साइकिल्स लच हो जाएंगे फीडबैक साइकिल्स की लंचिंग का मतलब समझते हो क्या होता है अब उसे रोका नहीं जा सकता मिसाइल लॉन्च हो गई है अब उसको आप इंटरसेप्ट या बॉट नहीं कर सकते 2 डिग्री पर मामला हमारे हाथ से निकल जाएगा और अभी हम कह रहे हैं कि देखो हम किस तरीके से देश के अलग-अलग शहरों में मैं ऐसा और स्मार्ट सिटीज बनाएंगे अभी यह करेंगे और
32:53 और अर्बनाइजेशन करेंगे हम भी बहुत सारा उसी अर्बनाइजेशन का नतीजा है कि तुम्हें रात में नींद नहीं आती बच्चे अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट अर्बनाइजेशन जिस अर्बनाइजेशन को आप समाधान समझ रहे हो वह मौत है पर भारत की पूरी पॉलिसी इसी पर है कि हमें तो अभी अपने सब लोगों को अर्बनाइज करना है और बहुत तेजी से हमें जीडीपी आगे बढ़ाना है पहाड़ काट दो नदियों पर अभी और बांध बनाओ हाइड्रो पावर यह वो हाइडल कोल निकाल लो इलेक्ट्रिक व्हीकल की बात कर रहे थे इलेक्ट्रिक व्हीकल
33:39 भी कार्बन एमिशन 25 पर कम करता है या 50 व इस पर निर्भर करता है कि व जो एनर्जी उसमें आ रही है चार्जिंग हो रही है वह चार्जिंग कोल से आ रही है कि सोलर से आ रही है कि न्यूक्लियर से आ रही है हमारी तो सारी किससे आती है कोल से ही आती है व अभी हसदेव में क्या करा है कोल के लिए ही तो सब करा है हमारा तो सब कोल से आता है जब कोल से आता है तो इलेक्ट्रिक व्हीकल हमारे यहां कोई सेंस ही नहीं रखता कोल फाय इलेक्ट्रिसिटी है जिससे तुम अपना ईवी चला रहे हो क्या सॉल्यूशन है सॉल्यूशन है रिड्यूस द अर्ज टू कंज्यूम एंड दैट विल रिक्वायर एजुकेशन वो जो सेंट्रल अर्ज टू कंज्यूम है ना वही दो रूप लेती है अब यह बात यहां से
34:27 बोरिंग होगी जिन्ह बोरिंग लग रही है उठ के चले जाए पर असली बात यहां से शुरू हो रही है वह जो हमारी बैड फिलॉसफी है ना वह हमें क्या भर देती है कूटकूट के द अर्ज टू कंज्यूम वो जो अर्ज टू कंज्यूम है वह दो शकल लेती है पहला अपनी आबादी बढ़ाओ दूसरा अपनी खुराक बढ़ाओ खुराक माने भोग कंजमेट सारा कजम भी करेंगे हम दोनों बातें बढ़ाएंगे नंबर ऑफ हेड्स और कंजमेट च बेसिकली मींस कंजमपट्टी
35:15 है और कुछ नहीं है मुझे खुश होना है मेरे पांच बच्चे होने चाहिए अमीरों के जो बच्चे हैं वह आम आदमियों के बच्चे उसे दोगने तिगने होते हैं जनसंख्या के दो तबके होते हैं जो अंधाधुन पैदा करते हैं एक तो बहुत गरीब होते हैं एक तो बहुत अमीर होते हैं और जो बहुत अमीर होते हैं व बहुत गरीबों से भी ज्यादा पैदा करते हैं कंजमेशन आई विल कंज्यूम एस मेनी मेमन एस पॉसिबल एंड प्रोक्रिएट ए मेनी किड्स एस पॉसिबल फ्रॉम
36:03 देम कंजमेट अफोर्ड इट आई विल डू दैट बज ट्स वेर हैप्पीनेस लाइज माय फिलोसोफर टोल्ड मी मैं बहुत सारा हो जाऊंगा और मैं बहुत सारा कंज्यूम करूंगा जब तक यह फिलोसोफी नहीं चेंज होगी आप नहीं रोक सकते कैसे रोकोगे यार फिलॉसफी वही है आज मैं बात कर रहा था संस्था की वह बोल रहा है कि मैं संस्था में आया हूं मुझे लगता है कि आई एम लूजिंग आउट ऑन लाइफ आपकी सारी बातें सही है दिल से इज्जत करता हूं आपकी लेकिन मैं वह हूं जो
36:49 पहले मुर्गा मटनी नहीं वह जहां से है जिस क्षेत्र से देश के वहां बीफ भी खाया जाता है बोला मैं तो यह सब भी खाया करता था आपके पास आया आपने मुझे वीगन बना दिया मैं बन गया एकदम कट्टर हूं मैं नहीं छूता कोई भी दुखत पदार्थ बट आई फील एस इफ आई एम लूजिंग आउट ऑन लाइफ माय सिस्टम न इट लुक्स एट माय बैचमेट्स एंड अदर्स इट सेस यार मेरे को भी चाहिए मेरे साथ के लोग बेल्जियम में गेट टुगेदर कर रहे हैं आई फील आईम मिसिंग आउट ऑन इट कोई किसी तरीके से पैसे उड़ा रहा है कोई किसी तरीके से उड़ा रहा है सब बोल रहे हैं कि यही तो हैप्पीनेस है जब तक जो परवे ंग
37:37 फिलॉसफी है समाज की उसको नहीं बदलो इसका कोई समाधान नहीं है आप लोग बोलोगे यह इंप्रैक्टिकल बात है इ प्रैक्टिकल नहीं बात है दिस इज द ओनली सलूशन एंड इट कैन बी इंप्लीमेंटेड यू जस्ट नीड टू चेंज द एजुकेशन छोटे बच्चे में यह भाव मत डालो य खुशी और बहुत सारे खिलौने इकट्ठा करने में है उसको हाईयर प्लेजरस से रूबरू कराओ उसको बोलो यह रही किताब इसको पढ़ और इसमें जो जॉय है वह तुझे 10000 के और खिलौने दिलवा भी दू तो भी नहीं
38:23 मिलेगा ले खेल एक साधारण सी में तेरे को गेंद दिया देता फुटबॉल दे देता हूं खेल और इसमें जो प्लेजर है वह तुझे 10 जगह प्लेन पर ट्रेवल करके भी नहीं मिलेगा गाना सीख नाचना सीख और यही बात में आप सब लोगों से बोल रहा हूं जो फाउंडेशन संबंधित है हायर प्लेजरस अपनी जिंदगी में नहीं ला रहे हो ना तुम संस्था में भी नहीं टिक पाओगे यूं ही नहीं हमने यहां पर यह बैडमिंटन कोर्ट खरा करा है वो टीटी टेबल यह जिम बार-बार बोला करता हूं म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजाना सीखो नाचना सीखो गाना सीखो खेलो
39:09 जाओ जिम जवाइन करो गर्मियां चल रही है स्विमिंग क्यों नहीं करते यह सब नहीं करोगे तो वही होगा कि व जो घटिया किस्म के प्लेजर थे वह तो सर आपने हमारी जिंदगी से हटा दिए पर अब मेरा पूरा सिस्टम कहता है कि वेयर इज द अल्टरनेट प्लेजर तो वो जो अल्टरनेट प्लेजर है बाय वि आई मीन द हायर प्लेजर उसको तो जिंदगी में लाना पड़ेगा ना यही एजुकेशन है हमें बच्चों को सिखाना पड़ेगा कैसे आनंदित हुआ जा सकता है बिना कंजमपट्टी
39:57 पशु कुछ मरे कुछ नहीं हुआ आनंद भी मिल गया जब तक मानवता इस तरीके से आनंद पाना नहीं सीख तब तक वह अपनी घटिया खुशी के लिए पूरी पृथ्वी का नाश करती ही रहेगी वही है क्लाइमेट कैटास्ट्रोफीज है ना ईवी खरीदने से हो जाना है झूठ बोलना बंद करो अपने आप से जो बिल्कुल जेनुइन सिंपल इन एक्सपेंसिव प्लेजरस ऑफ लाइफ है हमने अपने आप को उनसे तो कर लिया वंचित दो लोग हैं वह चुपचाप एक पतली सी सड़क पर जा रहे हैं बात कर रहे हैं घंटे भर बात करते रहे यह एक एपिसोड ऑफ जॉय
40:42 क्यों नहीं है बताओ पर ऐसा रिश्ता हमारा किसी के साथ होता ही नहीं मजेदार चीज है हींग लगे ना फिट करी रंग भी चोखा एक रुपैया नहीं लगा एक रुपैया भी नहीं लगा दो लोगों ने सिर्फ क्या करा वॉकिंग करी और उसमें आनंद आ गया बिल्कुल कुछ भी लगा क्या कुछ नहीं लगा बल्कि कैलोरी और जला ली घंटे भर वॉक करा बढ़िया पर हमें यह प्लेजर नहीं पता हमें प्लेजर यही पता है कि ओए चल पार्टी करते हैं ओए और पार्टी माने क्या वहां जाकर बोल रहे तू ये टंगड़ी चिकन ले आ
41:33 तो हमारे खुश होने का मतलब य होता है कि दुनिया बर्बाद हुई होमो सेपियंस मनुष्य खुश हुआ और प्रकृति तबाह हुई आपकी खुशी में देखिए आप कितनी तबाही करते हो सबसे ज्यादा तबाही आप करते ही तब आप खुश हो जाते हो आप खुश हो जाते हो आप टूरिजम के लिए निकल जाते हो कर दी प्रकृति बर्बाद आप खुश हो जाते हो पार्टी करने लगते हो आप खुश हो जाते हो आप सेक्स करने लग जाते हो आप खुशी में जो कुछ भी करते हो या खुशी के लिए जो कुछ करते हो उसी में तो दुनिया बर्बाद हो
42:21 गई और हमारी जो ये नहीं है मैं अभी इसमें कुछ कैपिटल जम को दोषी नहीं ठहरा रहा हूं इस मामले में कैपिटल जम जो कहता है भोगो भोगो भोगो पूंजीवाद और परंपरा दोनों इसमें बिल्कुल एक साथ है दोनों का चोली दामन का साथ है कृपा करके जो परंपरावादी है यह ना कहे कि अरे हां आजकल जमाना खराब आ गया है यह नई चीज है वेस्टर्न कैपिटल जम इसने पृथ्वी बर्बाद कर दी सॉरी सर आपकी जो इंडियन परंपरा है वह भी यही कहती है भोगो भोगो भोगो वेस्टर्न कैपिटल जम जो बोल रहा है वही बात आपकी देसी परंपरा भी बोल रही है सिर्फ एक चीज है जो इन दोनों से अलग बात बोल रही है वह है भारतीय दर्शन भारतीय दर्शन एक तरफ है भारतीय
43:07 परंपरा और पाश्चात्य पूंजीवाद यह एक तरफ है भारतीय परंपरा और भारतीय दर्शन बिल्कुल अलग-अलग हैं बिल्कुल अलग है भारतीय परंपरा तो भोग का बहुत ही समर्थन करती है सबसे पहली दूधो नहाओ पूतो फलो यह क्या है यह परंपरा है ना दूधों नहाओ पूतो फलो माने बच्चे पैदा करो और प्रकृति का दोहन करो भैंस पकड़ लो गाय पकड़ लो ऊंट पकड़ लो जो मिले पकड़ लो और उसको बांध लो उसका गर्भधान करा दो उसका दूध धोते रहो दूधो नहाओ पूतो फलो खुशी का मतलब ही क्या होता है घर में गाड़ी आती है उसको मंदिर ले जाओ पंडित जी
43:52 उस पर स्वास्तिक बनाते हैं धर्म स्थलों का मतलब क्या होता है कि हमारी जितनी भोग की कामना होती है वह सारी कामनाएं लेकर वहां जाते हैं और कहते हैं कि हमारी कामना पूरी हो जाए और जिन जगहों पर मनोकामना पूरी होने कि जितनी प्रसिद्धि हो जाती है वह जगह उतनी विख्यात है वहां उतना फुट फॉल होता है तो हमारी परंपरा भी भोगवा दी ही है इसमें कोई शक नहीं है हां हमारा दर्शन भोगवा दी नहीं है भारत का दर्शन अद्भुत
44:44 है जब तक भारतीय बच्चे को भारतीय दर्शन में दीक्षित नहीं किया जाता क्लाइमेट कैटास्ट्रोफीज यह बात पश्चिम थोड़ी-थोड़ी समझने भी लग गया है वह करने लग गए हैं बात वह कहने लग गए हैं कि ग्रोथ और डेवलपमेंट अलग-अलग चीज है हमें डेवलपमेंट चाहिए ग्रोथ नहीं और डेवलपमेंट सटल भी हो सकता है डेवलपमेंट इनर भी हो सकता है ग्रोथ इ आउटर ग्रोस ग्रोथ नहीं चाहिए डेवलपमेंट चाहिए डेवलपमेंट तो ये भी हो सकता है ना कि
45:29 मैंने शेक्सपियर के सारे नाटक पढ़ डाले ये भी है तो पश्चिम कहने लग गया है कि हम हम हम हमको और उपभोग नहीं करना हम जहां तक पहुंच गए पर्याप्त है बल्कि अगर इससे भी नीचे जाना हो तो हम तैयार हैं वो इसके लिए भी तैयार है डी ग्रोथ यह कांसेप्ट वहां चल रहा है बोल रहे हम डी ग्रोथ के लिए भी तैयार है पर भारत में भी यही चल रहा है और चाहिए और चाहिए और चाहिए ओए और ला भाई पिछले 100 200 साल का ना हमारा भुखमरी का इतिहास हो गया है और जिसका भुखमरी का इतिहास हो जाता है उसको जब मिलना शुरू होता है तो फिर व अंधा धुंद खाता है हम अभी उसी फेज से गुजर रहे
46:21 हैं अंधाधुंध खाओ य अंधा दुं खाना नहीं चल पाएगा भारत दुनिया का इस वक्त तीसरा सबसे बड़ा कार्बन अमीटर है हम अगर चाहेंगे कि हम अपनी जनसंख्या भी जैसे बढ़ा रहे हैं ऐसे ही बढ़ाए या जितनी है इतनी रखें और जो पर कैपिटा कंजमेट जर्मनी जितना करें नहीं चलेगा जितनी जनसंख्या है उतनी भी नहीं चल सकती जनसंख्या को कम होना पड़ेगा मैं जनसंख्या नियंत्रण की नहीं बात कर
47:06 रहा मैं जनसंख्या घटाने की बात कर रहा हूं बहुत लोगों को बहुत बुरा लगेगा खासकर उन्हें बहुत बुरा लगता है व बोलते हैं देखो इनकी बातें सिर्फ हिंदू सुनते हैं हिंदुओं की जनसंख्या कम हो जाएगी सब मुसलमान छा जाएंगे भाई मैं हिंदू मुसलमान सबसे बोल रहा हूं और पृथ्वी हिंदू मुसलमान नहीं देखती प्रकृति पर्यावरण हिंदू मुसलमान नहीं देखते मेरी बात मुसलमान भी सुन रहे हैं हम 810 करोड़ हैं अभी कितने हैं पृथ्वी पर हम 810 करोड़ हैं 810 करोड़ लोग पृथ्वी नहीं झेल सकती इसे कम होना होगा और जितना अभी भी पर कैपिटा
47:53 कंजमेट उसे भी कम होना होगा और अभी जो कंजमेट है बहुत थोड़े से लोग हैं जो लगभग 50 प्र कंजमेशन दो च प्रत आबादी है पैसे के मामले में वह दुनिया के लगभग 50 प्र कंजमेशन की जिम्मेदार है इनको पकड़ के ठीक करना पड़ेगा यह तो छोड़ दो कि रोल मॉडल बनेंगे इनको जेल में डालना पड़ेगा या इनसे सीधे कहना पड़ेगा कि कंजमपट्टी
48:56 अर्थ नहीं रखती कुछ नहीं है ई मैं नहीं कह रहा हूं डीजल गाड़ी खरीद लो उल्टा मत समझ लेना कि कल से आके पेड़ काटने शुरू कर दिए कि देखिए आपने ही कहा था पेड़ लाने से कुछ होता नहीं तो काट ही देते इनको दादा कुतर्क मत करने लगना मैं कह रहा हूं ईवी निश्चित रूप से पेट्रोल या डीजल से बेहतर है लेकिन उससे कुछ क्योंकि समस्या बहुत बड़ी है और ईवी उसका बहुत छोटा इलाज है नो कजम है ना इसको यह भी दिखाया इसको नहीं
49:42 चाहिए यह भी दिखाया इसको नहीं चाहिए तुम लोग क्या समझ रहे हो यह यूं ही है वो नस्टे दे रहा है कि छोटा सा हूं लेकिन सबको बताऊंगा जीना कैसे है कोई कुछ दिखाए हमें क्या बोलना है हाईयर प्लेजर ले रहा है आचार्य जी बोल रहे हैं वो रस विभोर है एकदम वह गीता गंगा में इस वक्त डुबकियां ले रहा है आनंद क्या करेगा वह इस तरह के सब भोग पदार्थ का ऐसे ही होना है समझ में आ रही है बात ये
50:28 यही पीढ़ी है जो बचा सकती है इन्हीं को सही शिक्षा दे दो तो बच जाएंगे नहीं तो कोई उम्मीद नहीं है नमस्ते मेरा नाम चेन्नई है मैं उड़ीसा से ह लेकिन अभी मैं कोलकाता में रह रही हूं तो मैं स्टूडेंट हूं आचार्य जी से मैं कुछ ही दिनों चार पांच दिनों से जुड़ी हूं य में मैंने आचार्य जी के बहुत सारे वीडियोस दे उनके थ्रू मुझे पता चला कि एक्चुअली मेरे माइंड में बहुत सारे थॉट्स थे बहुत सारी चीजों को लेके मैं कन्फ्यूज भी रहती थी जिसका क्लेरिटी मुझे नहीं था
51:14 लेकिन जब मैं आचार्य जी का सुनने लगी तो मुझे धीरे धीरे उस चीज का क्लेरिटी आया तो फिर मुझे पता चला इस के बारे में तो मैं उसम जवाइन हुई हूं कल ही मैं जवाइन हु हूं तो जो आज का सेशन था मेरी सीख यही है जो दुनिया में हम प्यार या प्रेम जो भी कहते हैं उसका वास्तविक अर्थ है कि वो फ्रीडम है क्योंकि अगर आप स्वतंत्र नहीं हो तो फिर आपको प्यार करने का एक तरफ से हम बोल सकते हैं कि आप प्यार के काबिल नहीं है क्योंकि प्यार के काबिल बनना पड़ता है और दूसरी चीज जो मैं सीखी हू जो हमें लगता था कि जो साइंस है वो स्पिरिचुअलिटी से कुछ अलग है जैसे कि साइंस जो है वो स्पिरिचुअलिटी का
52:00 एक सबसेट ही है और मेरी समझ से मुझे यह लगता है की जो साइंस है वो दरअसल एक माध्यम होता है जिसम जिके थ्रू हम स्पिरिचुअलिटी को अच्छे से समझ सकते हैं जो ऐसे ही बोल देते हैं कि हा ये आध्यात्मा है यह वो है लेकिन जो साइंस वो माध्यम है जो हमें य बता पाता है कि है क्या जो आध्यात्म बोलते है वो है क्या तो साइंस के माध्यम से ही अगर हम स्लिटी की तरफ बढ़ेंगे तो जो सच में जो स्पिच है जो एकचल में है उसको हम जान पाएंगे मेरे ल से आज कीरी य
52:57 आ [संगीत]