Think Better Than 99% of People (full live process)

Brief Summary

The video discusses methods for improving thinking skills, presenting five key strategies to enhance one’s thought process. The methods include branching techniques, situational thinking, understanding brain-rot thinking, structural pattern recognition, and the difference between reflection and overthinking. The speaker encourages viewers to adopt these practices to think better than the majority of people.

  • Introduction of five thinking methods.
  • Emphasis on reflection versus overthinking.
  • Importance of situational awareness and pattern recognition.

The Branching Method

The video starts with an introduction to the Branching Method, illustrating how to take a single word and break it down into its fundamental components, similar to splitting atoms. Two techniques for this are discussed: Abstract Branching and Contextual Branching. The Abstract Branching allows free association of words, fostering rapid thinking by connecting various thoughts, such as memories associated with words like "home" or "father". Contextual Branching, on the other hand, contextualises the word within personal experiences. This method aids in forming deeper analyses and connections in conversations and readings, enhancing overall comprehension.

Situational Thinking Method

The speaker introduces Situational Thinking, advocating for a detached perspective during emotionally charged situations. This method allows individuals to observe their reactions and the context of situations without emotional involvement. Two techniques within this method include Occurred Situations and Visualised Situations. Occurred Situations involve reflecting on past experiences to learn from them rather than replay them emotionally, thus transforming them into data points for personal growth. Visualised Situations encourage mental preparation for future events by exploring various outcomes and responses, thus creating a strategic mindset that prepares one for both success and failure.

Brain-rot Thinking Mechanism

The Brain-rot Thinking Mechanism explains the lower levels of human thinking and how it can lead to confusion and dysfunction in thought processes. The speaker critiques superficial thinking prevalent in society, urging viewers to dissect low-quality thought patterns that distract from deeper, meaningful understanding. By engaging with casual or trivial thoughts, individuals risk reducing their cognitive engagement. The speaker highlights the importance of developing awareness of underlying motivations and biases that shape our perceptions and reactions.

Structural Pattern Recognition

The Structural Pattern Recognition method focuses on identifying patterns behind repeated incidents instead of merely recalling individual events. This method encourages thinkers to reflect on recurring themes in their lives, allowing for a better understanding of why certain situations keep arising. By recognising these patterns, individuals can learn valuable lessons about their behaviours and choices. This analytical approach encourages proactive changes rather than passive acceptance of events, fostering personal growth and improved decision-making.

Reflection vs Overthinking

The video delineates the distinction between reflection and overthinking. Overthinking leads to circular patterns where a person becomes fixated on past pains or regrets without gaining insight. In contrast, reflection serves as a deliberate process aimed at extracting lessons from experiences. The speaker emphasises that true thinking involves understanding situations, making conscious efforts to learn, and moving forward rather than being trapped in repetitive loops of negativity. This method encourages actionable insights and practical solutions to life’s challenges.

Exercise for you

In the final section, the speaker encourages viewers to practice the methods discussed. Viewers are prompted to engage with their thought processes, share their experiences in the comments, and reflect on which steps resonate with their thinking patterns. The invitation to participate in this mental exercise aims to foster a communal atmosphere of growth and mutual learning through shared insights on thinking better. The speaker concludes by reiterating the importance of understanding and utilising one's mind effectively.

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Transcript

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0:00 हाउ टू थिंक बेटर देन 99% ऑफ़ पीपल? भैया बहुत जरूरी हो गया। आज की डेट पे दिमाग और बुद्धि जो कि लोग घरों पे छोड़ के आ जाते हैं पर्टिकुलरली अपने देश में। बट कोई बात नहीं। और हम आधे घंटे बक लिए। फिर देखा रिकॉर्डिंग ही नहीं हो रही थी ऑडियो की। कोई बात नहीं। हम यहां पे समझेंगे कि कैसे हम अपने थॉट प्रोसेस को बेटर बना सकते हैं। मैं यहां पे पांच स्टेप्स देने वाला हूं या पांच मेथड्स देने वाला हूं। पहले शुरुआत करते हैं थोड़ा सा बेसिक से समझने में। हम ब्रांचिंग मेथड के बारे में बात करेंगे शुरुआत में कि एक वर्ड लिया आपने उसको तोड़ते गए तोड़ते गए तोड़ते गए तोड़ते गए उसके फंडामेंटल पार्टिकल्स में जैसे एटम को तोड़ा जाता है जो भी आपके माइंड में आता जा रहा है इसको करने के दो मेथड है जिससे आप अपने इंडिविजुअल थॉट को बेटर कर सकते हैं सबसे पहला है एब्स्ट्रैक्ट ब्रांचिंग आपने एक वर्ड लिया

0:47 ठीक है और उससे रिलेटेड चीजें रैंडमली सोचने लग गए भैया टॉयलेट ठीक है कमोड सुबह तो कमोड में बैठे हैं हम हां ठीक है कोई भी वर्ड ले लिया। कंपाउंड में बैठते हैं। हां भाई हां सोचते हैं और कैसे जिंदगी में आगे बढ़ना है यार। कल तो उसने मेरे साथ बेबदमीजी से बात कर दी थी यार। कल तो उसने मेरी बेइज्जती कर दी थी। गलत किया था यार। उसको नहीं ऐसे बात करनी चाहिए थी। पापा से बात करूंगा गोवा के ट्रिप पे जाने की नहीं। या फिर कुछ भी हो सकता है। आपने माउस ले लिया। उससे रिलेटेड सोच रहे हो। माउस है भाई। ये आजकल टेक्नोलॉजी नहीं आ गई। ये इस तरीके की टेक्नोलॉजी पहले माउस कट कट कट कट करते थे। अब ये कट कट नहीं करते हैं। या फिर आपने ये बोतल ले ली या ये एमएस धोनी बने। दसानी की बोतल पे भैया एमएसडी है। हमारे कप्तान रह चुके हैं। इतने अच्छे कैप्टन थे। ये आपने मेमोरी स्टिक ले ली उसके बारे में सोच रहे हैं। आपने ये ट्राईपॉड ले लिया उसके बारे में आप सोच रहे हो। बस एब्स्ट्रैक्ट थिंकिंग कर रहे हो। उसको तोड़ते जा रहे हो। वर्ड्स

1:33 कहां से कहां तक कहां से कहां तक जा सकते हैं। अब इसके प्रोज़ क्या है? इसके प्रोज़ हैं। वक्त के साथ-साथ आप जल्दी सोचना शुरू करने लग जाएंगे। चीज लेंगे दिमाग में आ जाएगी। यू थिंक चीज लेंगे दिमाग में आएगी। यू थिंक दिस हेल्प्स यू इन योर डेली लाइफ। बट कौन ये है इसका कि बहुत थोड़ा वक्त लगेगा आप चीजों के बारे में सोचने में, शुरुआत में ढंग से सोचने में। उसको एक स्ट्रक्चर देने में। बट एक बार सोच लोगे मजा आ जाएगा। दूसरा इज़ कॉन्टेक्चुअल ब्रांचिंग। अब ये क्या होता है? ये कौन सी नई तोप है? कॉन्टेक्चुअल ब्रांचिंग इज़ कि एक आपने वर्ड लिया और उसको एक कॉन्टेक्स्ट में रख के उसकी बात करी। फॉर एग्जांपल मैं बोलूं आपसे फादर और मैं बोलूं मेरे फादर। दोनों अलग चीज़ हैं। फादर इज़ एब्स्ट्रैक्ट ब्रांचिंग। फादर अच्छा किसी के भी फादर हो सकते हैं। जो है चिंटू के पापा जो है बगलौली करते हैं। गलत नजर से देखते हैं।

2:21 लोगों को जज करते हैं। लोगों को अपने लौंडे की नौकरी नहीं लग रही। सबके ये फादर तो इसी तरीके के होते हैं। फ्रस्ट्रेटेड रहते हैं। एक पेट्रियाकल सोसाइटी है। ये है वो है। कल्चरर्स में डीप रूटेड है। ये आपकी एब्स्ट्रैक्टिंग हो गई। आपने रैंडमली उठाया। अब आप बोलो मेरे फादर। अब मैंने उसको कॉन्टेक्स्ट में डाल दिया। एक बबल में डाल दिया। अब आपको अपने फादर अपने पिताश्री के बारे में बात करनी है। तो भाई मेरे फादर हैं। बहुत अच्छे हैं। मैं उनको हीरो फिगर की तरह देखता हूं। मेरे फादर है मैथ्स पढ़ाते हुए पीटते बहुत हैं, गलत करते हैं। मेरे फादर हैं। मम्मी के साथ बहुत झगड़ा करते हैं। इन हर वक्त झगड़ा ही चलता रहता है। मेरे फादर हैं। बहुत अच्छे हैं। भाई बिज़नेस में बहुत अच्छा कर रहे हैं। तो आपने अपने कॉन्टेक्स्ट में अपने फादर की बात करी। इसके प्रोज़ क्या हैं? इट इज़ ये आपको बेटर बना देगा टू एनालाइज़ स्टफ इन बुक्स। किताबों में, फिलॉसोफीज़ में और लोगों में लोग पढ़ना सीख गए ना भैया। असली

3:08 मौज तो तब हो जाएगी। तो यू आर एबल टू रीड पीपल ईजीली। बट इसके क्स क्या है? मेथड वन से पहले रूबरू होना पड़ेगा। मेथड वन पहले अपना बेटर करना पड़ेगा। जो हमने एब्स्ट्रैक्ट ब्रांचिंग की बात करी। तब आपकी कॉन्टेक्स्चुअल ब्रांचिंग अपने आप बेटर हो जाएगी। उसके बाद आगे बढ़ते हुए हम लोग एक एग्जांपल ले लेंगे जिससे हम एब्स्ट्रैक्ट ब्रांचिंग और बेटर तरीके से समझ लेंगे। अब एब्स्ट्रैक्ट ब्रांचिंग ना कुछ लगता है एक एक यू नो ये अगर आप देख रहे होंगे एक डायग्राम जो कि एग्जांपल है टू कैलकुलेट जीनोटिपिक एंड फिनोटपिक रेशियो जेनेटिक बायोलॉजी में यूज़ होता है। बट उस तरीके से हम लोग ब्रांचिंग करते हैं। कुछ एग्जांपल लेते हैं। ठीक है? हम लोग घर का एग्जांपल लेते हैं और ये आप मेरे साथ कर सकते हैं। ये एक्टिविटी कर सकते हैं। कॉपी कलम पेंसिल उठा के मेरे साथ-साथ लिख सकते हैं। इट वुड बी इज़ियर फॉर यू। इफ यू वांट पॉज दिस वीडियो। अपनी ले आओ जो भी करना है जैसे भी कहीं पे लिखना है। इट वुड बी एन एक्सरसाइज। हमने

3:54 लिया होम। होम एब्स्ट्रैक्ट। होम से दिमाग में आता है भैया सेफ्टी। हां भैया सेफ्टी। पुरानी दीवारें, घर। अब होम और हाउस में भी डिफरेंस हो गया ऐसे तो कि भाई हाउस इज़ मोर ईंटा पत्थर मतलब ऐसे बनाया और होम इज मोर अबाउट यू नो सेफ्टी अपना मतलब घर अपनापन अपनी वार्म अब आपने बोला होम होम से आया भैया सेफ्टी सेफ्टी से आया मदर मदर बचपन और आप बात कर रहे हो अपने दोस्तों से बैठ के हॉस्टल में या घर की याद आती है वो माहौल था ना कि चल रहा है या क्रिकेट खेल रहे हैं अपने वो घर गए मां की ममता और वो बचपन की यादें और उससे क्या निकल के आ सकता है होम से है ना एब्स्ट्रैक्टली ओल्ड वॉल्स ओल्ड वॉल पुरानी दीवारें एक शांति एक चुप्पी भैया मजा आता था अपने सुबह उठे

4:40 भैया पिताश्री अखबार पढ़ रहे हैं ओ सुनो जी चाय बना के लाओ चाय बना के लाए नाश्ता हो रहा है शीला तपम खा रहे हैं दिन का नाश्ता आज तो सरवना भवन में करेंगे इस कनोट प्लेस में जाके अरे मजा आ जाएगा मस्त खाना खाएंगे शाम में बिरयानी खाएंगे जामा मस्जिद में जाके अरे आज का संडे का दिन तो मजा आ भैया वो वो जो फीलिंग है ना पानी भी आ गया वो जो फीलिंग है वो फीलिंग आपको देती है हां भाई ये एक एक चुप्पी थी एक खामोशी थी एक मजा था एक सेफ्टी थी फिर कभी होता है ना घर में एक खाने की खुशबू कोई आप सूंगे इधर-उधर एक एक यादगार आ जाती है कि हां भाई ये तो दिस इज़ हाउ यू ब्रांच होम इंटू फीलिंग्स इमोशंस सेफ्टी मदरहुड पेरेंटहुड सब कुछ तो यह एब्स्ट्रैक्ट है

5:25 मैंने एब्स्ट्रैक्टली होम होम उठाया और उसको ब्रेक करने की कोशिश करी अब हम करेंगे कॉन्टेक्चुअल एग्जांपल कॉन्टक्चुअल एग्जांपल के लिए मैं द ग्रेट जर्मन फिलॉसफर फ्री ड्रग नेचर नीचे बाबा उनका एग्जांपल लूंगा। उनकी जो वन ऑफ़ द मोस्ट डिफिकल्ट किताब्स हैं 10 बॉक्स ज्यादा मैं ज्यादा उसमें डेप्थ में नहीं घुसूंगा। ऊपर ऊपर से आपको समझाऊंगा कि उसमें हम कैसे होम को समझ सकते हैं। तो उनका जो शुरुआत है किताब का प्रोलोग मैंने वैसे इस इस हिल गया थोड़ा सा। हम हमने इसके ऊपर बना रखा है। क्या नाम है? एंबुलेंस की आवाज़ आएगी तो माइंड मत करिएगा कि लग गई होगी कुछ इधर-उधर। तो हमने पहला पैराग्राफ उठाया और मैंने इस पहले पैराग्राफ पे पूरा 30 40 50 मिनट का वीडियो बना रखा है। आप जाके देख सकते हैं। टाइप करेंगे तो तो मैं पढ़ देता हूं। फिर इसके होम को समझेंगे। व्हेन द रथसरा वाज़ 30 इयर्स ओल्ड, ही लेफ्ट हज़ होम एंड द लेक ऑफ़ हिज़ होम एंड वेंट इंटू द

6:13 माउंटेस। अब इस इनका होम बड़ा ही अलग तरीके का होम है। यहां पे हम कॉन्टक्चुअल ब्रांचिंग करेंगे। ठीक है? अभी क्या है? यह होम है एक इनहेरिटेड आइडेंटिटी अकॉर्डिंग टू फ्रेडरिक नेचर। अब इनहेरिटेड आइडेंटिटी इंसान की क्या होती है? रिलीजन होती है। मोरालिटी हो सकती है। रिलीजन में आओ ब्रांच करो तो कल्चर आ सकता है। सोसाइटी आ सकती है। मोरालिटी में गुड आ सकता है, बैड आ सकता है। अब आपकी कल्चर और सोसाइटी ही आपको डिफाइन करती है। आपके रिलीजन को डिफाइन करती है। अरे भाई जब हवन में था शर्मा जी बुलाया था शर्मा जी ने कि भैया हवन में आइएगा भंडारा भी होगा वहीं खाएंगे। यार वो क्या दिन थे भैया भंडारा एक एकता थी मजा आता था कोई किसी के जा रहा है कोई किसी के जा रहा है कोई किसी के कुछ कर रहा है कोई किसी के दिवाली मना रहा है कोई किसी की ईद मना रहा

7:00 है एक एक अच्छा खुशमजाज माहौल था भैया कोई किसी के भंडारा खा रहा है कोई किसी की ईद की बिरयानी खा रहा है कोई सेवयां खा रहा है कोई भैया रम केक खा रहा है है ना क्रिश्चियन के जाके सब पेल जाइए तो वो एक होम एक कल्चर एक सोसाइटी उधर मोरालिटी क्या सही है क्या गलत है है ना मैंने चिंटू कि चिंटू के पाप्पा ने मिटू के मिटू के पापा को चमेट बजा दिया। क्या झगड़ा हुआ था? अब तो बड़े अच्छे मित्र हैं। लेकिन वो क्या झगड़ा था? तो वो सही था या गलत था? मोरली सही भी था। उनकी तरफ से सही था बट गलत भी था। बट ये वापस इन्हहेरिटेड आइडेंटिटी में वापस पीछे लेके जाओ। तो होम का घर का एक हिस्सा है। तो सब कुछ इस रिलेटेड रिलीजन मोरालिटी। तो फ्रेडरिक नीचर के कॉन्टेक्स्ट में अगर लें फ्रेडरिक

7:45 ने नीचर जी ने जो होम समझाया वो आपके रिलीजन और मोरालिटी के अराउंड है या इन्हहेरिटेड आइडेंटिटी के अराउंड है उनका होम तो हमने उस आइडेंटिटी के आइडेंटिटी के बारे में बात करी क्योंकि उससे पहले हमारा एब्स्ट्रैक्ट था वो कुछ भी हो सकता था वो हो सकता था कि भाई जो है घर होम है होम किसी भी चीज से बन सकता है ईंटे से बन सकता है आप ईंटे के ऊपर बात करें भाई ईंटा जो होता है ले रेड सैंड से बनता है रेड सैंड जो है इंडिया के क्षेत्र में मिलता है तो आप कॉन्टेक्स्ट से भटक गए यहां पे आप एक एक क्या कह सकते एक फ्रेमवर्क के अंदर बात कर रहे हैं। ठीक है? तो इस तरीके से मैंने आपको समझा दिया। दो मेथड्स हो गए। इन मेथड्स के बारे में और मैंने अपने मास्टर क्लास में समझाया हुआ है। इफ यू आर इंटरेस्टेड तो फर्स्ट लिंक इन द डिस्क्रिप्शन जाके उसको चेक आउट कर सकते हैं। स्टेप टू अब एक चीज जिसने मेरी बहुत ज्यादा मदद करी है इन थिंकिंग बेटर वो है

8:33 सिचुएशनल थिंकिंग। अब सुनने में भैया बहुत कॉम्प्लिकेटेड लगेगा। बट इट्स एक्चुअली वैरी सिंपल। ज्यादातर लोग ना एक सिचुएशन के अंदर जाके उसको सोच नहीं पाते। वो रिएक्शन दे देते हैं। कुछ भी होता है कोई कुछ आपको कह देगा। यू गेट एंबरेस्ड बेइज्जती हो गई भाई। गुस्सा आ जाएगा। यू गेट रिजेक्टेड, यू गेट नर्वस। एंड सडनली आपका दिमाग जो है ना क्लेरिटी से सोचना बंद कर देता है। क्योंकि अब आप सिचुएशन को नहीं देख रहे हो। आप बस उस सिचुएशन में ट्रैप हो गए हो। अपने इमोशन के साथ समझ लो कमरे में अपने जानी दुश्मन के साथ ट्रैप हो गए हो। और यहां पे ज्यादातर लोग अपने आप को खो देते हैं। बिकॉज़ वो जो सिचुएशन है वो अपने आप में ही प्रॉब्लम नहीं है। प्रॉब्लम है कि आप उस सिचुएशन से ज्यादा अपने आप की आइडेंटिटी को अटैच कर रहे हो। तो सिचुएशनल थिंकिंग का मतलब होता है आप एक सिचुएशन ले रहे हो। अपने आप को उससे डिटच कर रहे हो। एंड देन लुक एट द सिचुएशन

9:20 विथ अ थर्ड पर्सन पर्सपेक्टिव। मतलब यू आर पुटिंग योरसेल्फ अवे फ्रॉम योर शू। इट्स सिमिलर टू कि आप एक मूवी हॉल में बैठ के अपने आप को देख रहे हो। एक विक्टिम की तरह नहीं, एक हीरो की तरह नहीं। एक ऐसे इंसान की तरह नहीं जो सब कुछ जस्टिफाई करना चाह रहा है। बस बैठ के एक ऑब्जर्वर की तरह। और उस मोमेंट पे जब आप यह काम करते हो, आप चीजें क्लियरली देखना शुरू कर देते हो। बिकॉज़ नाउ यू आर नॉट इमोशनल। अब इसमें भी दो मेथड्स हैं। इस सिचुएशनल थिंकिंग को कैरी करने के दो मेथड है। पहला मेथड है ऑकर्ड सिचुएशन। और दूसरा मेथड है विजुअलाइज़ सिचुएशन। दोनों को तोड़ेंगे। सबसे पहले मेथड वन से शुरू करते हैं। ऑकर्ड सिचुएशन। ऑकर्ड सिचुएशन इज़ कि ऐसी सिचुएशन जो पहले हो चुकी है आपके साथ। क्या पता आपके साथ कभी हुई बेइज्जती हो गई हो। है ना? किसी ने आपकी इंसल्ट कर दी हो। आपका किसी के साथ झगड़ा हो गया हो। किसी

10:06 ने आपको रिजेक्शन दे दी हो। एक बड़ी [ __ ] सी स्टूपिड सी मिस्टेक कर दी हो या यू हैड अ वेरी गुड एक्सपीरियंस। गुड एक्सपीरियंस भी हो सकता है। बहुत नेगेटिविटी बोल दी। इट कैन बी एनीथिंग। द पॉइंट इज़ वो सिचुएशन हो चुकी है। पहले से जा चुकी है। नाउ नॉर्मली लोग क्या करते हैं? लोग या तो उसको भुलाने की कोशिश करते हैं और उसको या फिर उसको रिप्ले करते रहते हैं अगेन एंड अगेन एंड अगेन लाइक अ लूप लूप ऑफ अ वीडियो इन देयर माइंड। दोनों ही यूज़लेस है। अगर आप उसको भूल जाएंगे तो आप उससे कुछ सीख नहीं पाएंगे और अगर आप उसको इमोशनली रिप्ले करते रहेंगे तो आप सफरिंग के लूप में बार-बार जाते जाएंगे, जाते जाएंगे, जाते जाएंगे। सो इंस्टेड ऑफ रिप्लेइंग इट इमोशनली बार-बार बार-बार आप उसको समझना और पढ़ना शुरू करते हैं। फॉर एग्जांपल लेट्स से समवन इंसल्टेड यू। 10 लोगों की भीड़ के बीच में आपको इंसल्ट दे दी। ठीक है? आपका

10:53 नॉर्मल माइंड कहेगा कि भाई इसने तो मेरी बेइज्जती करी। मेरे को तो उसको ऐसे रिप्लाई देना चाहिए था। सब लोग सोच रहे होंगे भाई ये तो वीक है। इसकी तो औकात ही नहीं है। इसका तो ये है और मैं तो भाई मैं तो भाई बेवकूफ लग गया। भबोच टिक गया इसके सामने। भौकाचोदा हो गया। बट यह सही थिंकिंग नहीं है। यह सिर्फ आपकी ईगो है जो ब्लीड कर रही है। थिंकिंग जब शुरू होती है, जब आप पॉज करते हैं, पूछते हैं कि एग्जैक्टली हुआ क्या? एग्जैक्टली उस बंदे ने बोला क्या? एग्जैक्टली मैंने क्या अस्यूम किया? क्या मैं हर्ट हुआ? बिकॉज़ ही वाज़ रोंग। और बिकॉज़ मेरा मेरे अंदर का कुछ पार्ट है, कोई टुकड़ा है जो बिलीव करता है कि ही वाज़ राइट। क्या मैं साइलेंट इसलिए रहा बिकॉज़ आई वाज़ काम एंड स्टइक? या फिर मैं डर गया। क्या मैंने अगर रिस्पांस दिया अभी तो मैंने मैच्योरली एक्ट किया और मैं सिर्फ फ्रीज हो गया। अब यहां पर असली

11:40 थिंकिंग शुरू होती है व्हेन यू बिकम बेटर देन 99% पीपल। बिकॉज़ सडनली अब सिचुएशन एक इंसल्ट की तरह नहीं है। वो एक डेटा पॉइंट बन गया है। अब वो सिचुएशन अपने बारे में चीजें रिवील कर रही है। वो हो सकता है आपको ये दिखाए कि यू केयर टू मच अबाउट पीपल ओपिनियन। आप बहुत ज्यादा सोचते हैं। लोग क्या कहेंगे और अवॉयड करते हैं कंफ्रंटेशन। मे बी वो आपको यह दिखाता है कि आप बहुत ईजीली ट्रिगर हो जाते हैं किसी ना कुछ कि आप फट से ट्रिगर हो गए या फिर वो आपको यह दिखा रहा है कि जो सामने वाला था वो साला इनसिक्योर था वो इनसिक्योर था वो आपकी बेइज्जती करने की कोशिश कर रहा था और आपने उसकी इनसिक्योरिटी अपने ऊपर पर्सनली ले ली। तो दिस इज़ हाउ यू टर्न एक एक्सपीरियंस को बुरा एक्सपीरियंस इंटू इंटेलिजेंस। तो ज्यादातर लोग ना भाई इस पेन के थ्रू जाते हैं बट या किसी भी पेन

12:27 के थ्रू जाते हैं। बट बहुत कम लोग होते हैं जो मैं 1% की बात कर रहा हूं हु एक्सट्रैक्ट विज़डम फ्रॉम इट। तो दिस इज़ मेथड वन व्हिच इज़ ऑकर्ड सिचुएशन। यू टेक व्हाट इट ऑलरेडी हैपेंड। अपने आप को उससे डिटच करो। उसको ऑब्ज़र्व करो क्लियरली एंड आस्क कि इस सिचुएशन ने मुझे क्या सिखाया। नाउ दूसरा मेथड इज़ विजुअलाइज़ सिचुएशन या विजुअलाइज़ेशन ऑफ़ अ सिचुएशन। यह तब होता है व्हेन समथिंग हैज़ नॉट हैपेंड येट। अभी वो चीज हुई नहीं है बट मेंटली आप उसके लिए प्रिपेयर कर रहे हो। आप एक ऐसे फ्यूचर को इमेजिन कर रहे हो जो हुआ नहीं है बट आप उसमें एंटर करने वाले हो। दिस कुड बी एनीथिंग। वो एक इंटरव्यू हो सकता है। एक डिफिकल्ट कन्वर्सेशन हो सकती है। एक स्पीच हो सकता है। एक मीटिंग हो सकती है। एक फाइट हो सकती है। एक डिसीजन हो सकता है। रिस्क हो सकता है। एक डेट हो सकती है। एक पब्लिक अपीरेंस हो सकता है। जैसे मेरे केस

13:13 में वो रणवीर के पडकास्ट में जाने से पहले आई वाज़ प्रिपेयरिंग कि मैं कहां पे हमंबल कर सकता हूं, कहां पे गड़बड़ कर सकता हूं। कहां पे? तो मैंने सॉलिड पॉडकास्ट दिया बिकॉज़ आई वाज़ प्रिपयर्ड। ज्यादातर लोग ना भाई फ्यूचर सिचुएशन में एंटर करते हैं सिर्फ एक प्लान के साथ कि भाई हम उम्मीद करते हैं ये अच्छा होगा। बट होप इज़ नॉट प्रिपरेशन। जैसे बहुत लोग एग्जाम देते हैं कॉम्पिटिटिव एग्जाम में और निकलेगा और निकलेगा। अच्छी सोच है। नहीं निकला तो। और जो नहीं निकलता फिर लोग गलत कदम उठाते हैं जैसे आत्महत्या। बिकॉज़ दे वर नॉट प्रिपयर्ड कि क्या होगा। मेरे साथ ये हुआ था जेईई मेंस में इंजीनियरिंग वाला जो होता है उसमें आई वाज़ कि भाई कुछ ना कुछ तो हो ही जाएगा। कोई ना कोई एनआईटी तो मिल जाएगा। और मैं हग के आ गया पेपर में। एंड आई वाज़ नॉट प्रिपयर्ड फॉर दैट हगाज़। और जो बदबू करी है उसने जो मेरी जिंदगी खराब करी है उस वक्त उस एक हफ्ते में। सब ऐसे मेरे

13:59 को ट्रीट कर रहे हैं मेरे घर पे जैसे पता नहीं भाई क्या ही मैं मर्डर करके आ गया किसी का। हुआ था मर्डर लेकिन पेपर का मर्डर हुआ था। बट मैंने अपनी जिंदगी का मर्डर नहीं किया। तो मैंने वहां से सीखा कि यू नीड टू बी प्रिपयर्ड फॉर द वर्स्ट। एंड इन मेथड टू ये जो विजुअलाइज विजुअलाइज़ सिचुएशन की मैं बात कर रहा हूं। आप बैठते हो और अलग-अलग तरीकों से सोचते हो कि सिचुएशन किस तरीके से प्ले आउट होती है। व्हाट इफ ये अच्छे से व्हाट इफ डिस्प्लेस वेल? व्हाट इफ इट गोज़ बैडली। व्हाट इफ मैं नर्वस हो गया। व्हाट इफ मुझे रिजेक्शन मिल गया। व्हाट इफ उन्होंने ऐसी चीज़ पूछ ली जो मुझे प्रिपयर्ड ही नहीं है। अगर आप इंटरव्यू में जा रहे हो। व्हाट इफ मेरी बेइज्जती हो गई। व्हाट इफ मैं पैनिकिक करने लग गया। व्हाट इफ मैं सक्सीड कर गया। और फिर मेरे को पता ही नहीं हैंडल कैसे करना है। ये नेगेटिव थिंकिंग नहीं है। ये है स्ट्रेटेजिक थिंकिंग। नेपोलियन बोनोपार्थ का नाम सबने सुना होगा।

14:44 नेपोलियन द ग्रेट फ्रेंच कॉनकरर। वो यही करते थे अपनी सारी बैटल से पहले। हर बैटल से पहले वह हर एक वो पहलू इमेजिन करते थे जिसमें वो हार सकते हैं। उनको कोई मार रहा है। डिफरेंट वेज़ दैट थिंग्स कुड गो रॉन्ग या डिफरेंट वेज़ जिसमें वो मरने वाले हैं। मर सकते हैं। और बिकॉज़ उन्होंने इतने तरीके से उस केओस को अपने माइंड में रिप्ले किया था कि रियल केओस उनको शॉक ही नहीं करता था। एंड ही वाज़ क्योंकि क्या होता है ना यार व्हेन यू आर नॉट प्रिपयर्ड फॉर द वर्स्ट। वो वर्स्ट होता है तो उस सिचुएशन में तुम्हारी बॉडी फाइट ऑफ़ फ्लाइट सिचुएशन में चली जाती है। पैनिकिक करने लगते हो। हकलाने लग जाते हो। जैसे मेरे साथ रणवीर के पडकास्ट में आई वास प्रिपयर्ड कि वो कुछ ऐसा भी पूछ सकते हैं व्हिच आई एम नॉट प्रिपयर्ड फॉर बिकॉज़ इन्होंने कहा फ्री फ्लोइंग कन्वर्सेशन है। एंड आई डोंट वांट टू [ __ ] अप। तो आई वाज़ प्रिपयर्ड। उन्होंने कुछ ऐसे सवाल पूछे एंड स्पॉनटेनियस जवाब आया। थोड़ा सा सोचा 5

15:31 6 सेकंड 10 सेकंड का पौध बट जवाब आया। वहां पे मैंने गंदगी नहीं करी। तो दिस इज़ अ वेरी पावरफुल आईडिया। दिस इज़ व्हाट नेपोलियन यूज़्ड टू डू। बिकॉज़ उस सिचुएशन में अगर अचानक से यहां से एनिमी निकल के आता। उसकी फड़ गई होती। ही वाज़ प्रिपयर्ड। यहां से आएगा तो वो डिसीजन क्विक लेने की क्षमता होती आपके पास। मोस्ट पीपल ऐसी सिचुएशन में कोलैप्स कर जाते हैं। नॉट बिकॉज़ उसकी सिचुएशन इंपॉसिबल है। बट बिकॉज़ उन्होंने उस सिचुएशन को भी मेंटली विजिट ही नहीं किया। वो हमेशा सोचते थे ये होगा वो होगा। उस प्रेशर को इमेजिन नहीं किया। वो सिर्फ सक्सेस इमेजिन करते थे। जब भी मैं मिक्स मार्शल आर्ट्स की कोचिंग क्लास में जाता हूं या पहले मैं जब क्रिकेट खेलता था कोचिंग में जाता था। हमें विजुअलाइज़ेशन एक्टिविटीज़ कराई जाती थी। बड़े-बड़े एथलीट्स को लुसिड ड्रीमिंग कराई जाती है कि यू आर इन योर ड्रीम कंट्रोलिंग योर ड्रीम। कंट्रोलिंग योर आउटकम्स। बट यहां पे ना एक

16:17 फाइन लाइन ऑफ़ डिफरेंस है भाई। फेक विजुअलाइजेशन कभी-कभी डेंजरस भी बन जाती है। सिर्फ अपने आपको जीतते हुए इमेजिन करना इज़ नॉट इनफ। वो आपको हां फील गुड जरूर करा सकता है बट इट डज़ नॉट मेक यू प्रिपयर्ड। रियल विजुअलाइजेशन बहुत डिफरेंट होती है। तुम विन भी इमेजिन कर रहे हो बट यू आल्सो इमेजिन द फेलियर। यू इमेजिन कॉन्फिडेंस। बट यू आल्सो इमेजिन नर्वसनेस कि मैं नर्वस भी हो सकता हूं। आप तालियां भी इमेजिन करोगे बट यू आल्सो इमेजिन साइलेंस कि अगर मेरे जोक पे कोई हंसा नहीं तो मेरी स्टैंड अप कॉमेडी चली जाएगी। यू इमेजिन थिंग्स गोइंग योर वे बट ज्यादा इंपॉर्टेंट है आप ऐसी चीजें भी इमेजिन करो कि अगर सिचुएशन मेरे अकॉर्डिंग नहीं गई तो क्या होगा? दिस वाज़ मेथड टू विजुअलाइज़ सिचुएशन। यू प्रिपेयर योर माइंड बिफोर लाइफ आपके एल लगाने आ रही है। सो वन मेथड पीछे की तरफ देखता है जो पास्ट में

17:02 हुआ और दूसरा मेथड आगे की तरफ देखता है फ्यूचर में क्या होने वाला है। और दोनों मेथड मेथड वन जो कि ऑकर्ड सिचुएशन है वो आपको सीखने में मदद करता है कि पास्ट से मैं क्या सीखता हूं। एंड मेथड टू आपको प्रिपेयर करता है आपके फ्यूचर के लिए। और टुगेदर दे मेक यू डेंजरस इन अ वेरी वेरी क्वाइट एंड सेटल वे। बिकॉज़ आप आप जिंदगी के थ्रू ऐसे लल्ल लोरी करते हुए नहीं चल रहे हो दोस्त। आप उसको रिव्य्यू कर रहे हो, ऑब्जर्व कर रहे हो, प्रिपेयर कर रहे हो, उसमें पैटर्न्स ढूंढ रहे हो और अपनी जिंदगी से सीख रहे हो, अपनी ही जिंदगी सीख रहे हो। लोग दूसरों की जिंदगी से सीखते हैं भैया ये मेरी इंस्पिरेशन है। भैया ये मेरा आइडल है। आइडल है। मेरा अपनी जिंदगी से सीखो भाई। तूने अपनी जिंदगी से क्या सीखा? कुछ नहीं सीखा। फिर वो आइडल थोड़ा सा इधर-उधर चला जाता है तो तुम उस आइडल से चिढ़ने लग जाते हो। एंड ऑनेस्टली, यह जो थिंकिंग है ना, दिस इज़ व्हाट मेक्स यू बेटर। इट इज़ नॉट अबाउट साउंडिंग कि मैं इंटेलिजेंट बन गया। इट इज़ नॉट अबाउट

17:47 यूजिंग बिग वर्ड्स। बड़े-बड़े शब्द फेंक दिए। इट इज नॉट अबाउट विनिंग कि डिबेट्स जीत ली। मैंने उसकी यहां मार ली, उसकी वहां मार ली। एक एबिलिटी है टू स्टेप आउट ऑफ अ सिचुएशन। सिचुएशन से बाहर निकल के पूछना यहां हो क्या रहा है? इस सिचुएशन में क्या चीज रियलिटी है? इस सिचुएशन में क्या चीज मेरी ईगो है? एंड इस सिचुएशन से मैं खुद क्या सीख सकता हूं? और इस सिचुएशन को मैं बेटर हैंडल कैसे कर पाऊंगा अगली बार? बिकॉज़ एक बार तुमने दो वो कर लिया ना लाइफ एक तुम्हें बहुत लोगों को लगता है लाइफ इज अ सीरीज ऑफ रैंडम इवेंट्स कि कुछ भी हो रहा है भैया मेरे को तो पता ही नहीं अनप्रिडिक्टेबल लाइफ है। जिस दिन तुमने ये करना शुरू कर दिया ना तुम्हारी जिंदगी प्रिडिक्टबल हो जाएगी। जैसे जब मैंने अपना चैनल खोला था या अपना बिज़नेस किया था। मेरे को पता था बिज़नेस में मैंने पहले ही सोच लिया था एक दिन ₹20 लाख पर मंथ

18:33 रेवेन्यू पे जाऊंगा। 30% प्लस प्रॉफिट्स रखूंगा किया। एक दिन मैंने शुरू किया था कि मैं YouTube चैनल शुरू करूंगा। बड़े पॉडकास्ट पे जाऊंगा इस चैनल को। को इंडिया का सबसे बड़ा फिलॉसफी चैनल बनाऊंगा। करा अब प्रेडिक्टबल ये रैंडम तो था नहीं कि भैया ऐसी बन गया ये चैनल। हां भाई [ __ ] वाला कंटेंट डाल रहा हूं बन गया। तो आपको जिंदगी को इवेंट को हटा के एक मटेरियल बनाना है व्हिच यू कैन एक्चुअली मैनिफेस्ट। हर एंबरेसमेंट मटेरियल बनना चाहिए। हर फेलियर मटेरियल बनना चाहिए। हर कॉन्वर्सेशन मटेरियल बनना चाहिए। हर फ्यूचर फियर मटेरियल बनना चाहिए। और धीरे-धीरे आप उस तरीके के बंदे बनने लग जाओगे जो ईजीली घबराता नहीं है। नॉट बिकॉज़ की लाइफ इजी बन गई है बट बिकॉज़ आपने इतना ज्यादा सोचने की क्षमता अपनी बढ़ा ली है कि आप केओस में आराम से सोच पाते हो। आगे

19:21 बढ़ते हुए हम थोड़ी देर बगलोल [ __ ] किस्म के इंसान हैं। मैं घुस गया भाई साहब ब्रेन रट थिंकिंग मैकेनिज्म में। अब इससे पहले सबकी फटनी शुरू हो जाए स्क्रीन पे जो भी आपको दिख रहा है। मैं बता दूं इसमें कुछ वियर्ड नहीं होने वाला है। इन द सेंस कुछ दिखाने नहीं वाले हम आपको। बट मैं क्या करता हूं ना पब्लिक फोरम्स पे चला जाता हूं और फाड़ने के लिए कि किस तरीके से लोएस्ट लेवल ऑफ ह्यूमन थिंकिंग काम करती है। इंसान एकदम लोएस्ट स्टेट में जिसके बारे में एक फिलॉसफर ने बात करी थी महान फिलॉसफर ने उसके ऊपर बात करेंगे और लोएस्ट जो स्टेट होता है एपिटेटिव स्टेट उसको उसके बारे में लोग कैसे सोचते हैं और किस तरीके से बात करते हैं अब हम गए यहां पे ठीक है TikTok पोंड रेडेड के ऊपर अब मैं जिस देश में हूं वहां पे पोनोग्राफी नहीं चलती है तो ये सब ऐसे दिख रहा होगा डेड पेज की तरह बट यहां पे एक मोहतरम ने कोई

20:08 वीडियो डाला होगा गेट रेडी विद मी टू गॉथ ठीक है अब एक बंदे का उसमें कमेंट आया हम पढ़ देते हैं इनका ओमनियस रेकुनटर का जो भी इनका नाम है। आई थिंक इट्स काइंड ऑफ़ वियर्ड कंसीडरिंग हाउ हॉट एंड डैश यू आर बट आई जस्ट वांट टू से आई रियली एप्रिशिएट द वर्क यू पुट इंटू योर एडिटिंग टू मी दैट स्टफ इज़ एजेंट एज ल्जरी लिंगी जो भी आप बोले बट अब इसकी साइकोलॉजी समझने की कोशिश कर रहे हैं। ये है ब्रेन रोट कंटेंट। बट इनके पीछे की पीछे की थिंकिंग मैकेनिज्म क्या है कि ये बंदा आया था किसी और चीज के लिए शायद गूनिंग के लिए लेकिन लग गया किसी और चीज में एडिटिंग अप्रिशिएट करने लग गया। अब आप सोचें हो सकता है वीडियो एडिटर हो। हो सकता है इसके पास अटेंशन टू डिटेल हो या ऑन अ डेली बेसिस चीजों को अप्रोच

20:54 करता हो विद एन अटेंशन टू डिटेल। और हमको सोचने वाली बात ये है कि ये कैसे ऑपरेट करता होगा ऑन अ डेली बेसिस। किस तरीके से लोगों को ये देखता होगा? किस तरीके से लोगों को जज करता होगा? इसका थॉट प्रोसेस क्या है? क्या ये ऐसी चीजों में जहां पे सीरियस चीजें चल रही हैं या ऐसी चीजें जिसमें इतनी बेसिक चीजें जहां पे इंसान इज फ्री टू हिमसेल्फ। एक कमरा वैसलीन की शीशी बैठा है देख रहा है। कभी भी टिश्यू निकल सकता है। उसमें वो बंदा प्रोफेशनलिज्म के बारे में सोच रहा है। एडिटिंग बड़ी अच्छी है। ये बड़ा अच्छा है। तो क्या वो पूरे टाइम कॉन्सेंटली उसका माइंड उसके प्रोफेशन के बारे में सोचता रहता है। एक एग्जांपल हो गया। एक और एग्जांपल ले लेते हैं। डोरा नोज़ हाउ टू शेक इट। यहां पे मोहतरम ने क्या करी होगी जो बचपन में एक कार्टून आया था डोरा द एक्सप्लोरा उसको इन्होंने बहुत

21:42 ज्यादा पोंडोफाई कर दिया या बहुत ज्यादा क्या कह सकते हैं उसको सेक्सुअलाइज़ कर दिया गलत वर्ड यूज़ कर दिया तो यहां पे ये दो-तीन आप एग्जांपल देख सकते हैं डोरा एंड द मैजिक थॉम नेवर वांटेड टू बी अ बैक पैक अंटिल नाउ कैन यू से डिलीसियोसो जैसे डोरा कहती थी ना कैन यू से दिस कैन यू से अ माउंटेन कैन यू से दैट जिसने देखा होगा वो कार्टून पता होगा बट एक बंदे ने पॉइंट आउट कर यह चीज़ व्हिच इज़ यू आर नॉट श्योर अबाउट कॉस्ट प्लेइंग चाइल्ड कैरेक्टर्स इन दिस मैनर कि भाई देख के समझ में आ रहा है कि आपने चाइल्डहुड कैरेक्टर्स के इमेज को भी डिस्टोर्ट कर दिया। एक और मैं यहां पे बेंटेन का भी डालने वाला था बट वीडियो लंबा हो जाता। बट बेंटेन की भी चाइल्डहुड मेमोरीज़ को सेक्सुअलाइज़ करती है। तो ऐसे लोग जो ये ऊपर के तीन लोग हैं जोली एडिशन वंडरिंग ऊस और समवन वियर्ड ये बच्चों को

22:29 किस तरीके से देखते होंगे? क्या यह जो मोहतरम जिन्होंने यह कंटेंट क्रिएट किया है डोरा वाला क्या यह ऐसा मेन स्ट्रीम कंटेंट क्रिएट करती हैं जिससे कि द वर्ल्ड गिव्स बर्थ टू सच पीडीएफ फाइल्स बच्चों को किस तरीके से देखते होंगे इनमें से हो सकता है कितने बाप हो तो कुछ कमेंट्स उठाए हैं 30-40 कमेंट कितने बाप हो क्या वो अगर [गला साफ़ करने की आवाज़] बाप हैं उनकी बेटियां हैं तो उनको किस नजर से देखते होंगे क्या वो सही नजर होगी क्या वो गलत नजर होगी तो इस तरीके से आप सोचते हो कि सोसाइटी में लोग कैसे फंक्शन करते हैं और इसके बारे जो मैंने बोला था एक फिलॉसफर ने बात करी थी महान प्लेटो ने बात करी थी भाई अपने का्सप्ट ट्राइप्टाइट सोल में ट्राईप्टाइट सोल का मैं कांसेप्ट आपको बेसिकली बेसिक से समझा देता हूं मैं कि इंसान के तीन पार्ट्स हैं प्लेट होने का पहला है रैशन माइंड दूसरा है स्पिरिटेड ठीक है आपकी

23:15 स्पिरिट विल और तीसरा है एपिटेटिव गला बैठना शुरू हो गया हमारा आप [गला साफ़ करने की आवाज़] सुन पा रहे होंगे बट तीसरा है एपिटेटिव एपेटाइट सेक्स मदीरा शराब खाना अब इन्होंने बोला कि हमारी जो सोसाइटी है तीन तरीके से डिवाइडेड है कि जो एपिटेटिव है ना कि भैया ये जो वर्किंग क्लास होती है बच्चे पैदा करवा लो शराब पिलवा लो खाने दो वक्त की रोटी मिल जाए वाली माइंडसेट वर्किंग क्लास उससे ऊपर सोल्जर्स कि भाई मर कट जाएंगे अपने देश के लिए जिनके पास एक करेज होता है और सबसे ऊपर होते हैं जो दिमाग से चलते हैं वो होते हैं रूलिंग क्लास नेता संत्री संत्री तो नहीं मंत्री आपके वो एक ही बात हो गई बट राजा जितने भी टॉप के लोग हो गए तो इन सब में एक वर्चू होती है एक आपके दिमाग में विज़डम होता है। आपकी स्पिरिट

24:00 में करेज होती है। आपके डिज़ायर में टपरेंस होता है। कंट्रोल करने की कोशिश। तो प्लेटो ने कहा कि ये जो प्रिमिटिव पार्ट्स हैं वो होते हैं जो इंसान को पूरी तरीके से कंट्रोल कर लेते हैं। और प्रिमिटिव पार्ट में ही असली गोल्ड माइन छुपा है टू अंडरस्टैंड ह्यूमन साइकोलॉजी इन ह्यूमन नेचर। तो ये भी एक मेथड है टू अंडरस्टैंड कि कैसे इंसान का दिमाग काम करता है। तो उसके लिए आप ऐसी अनशंड वेबसाइट्स पे जाके चेक कर सकते हैं कमेंट्स। कुछ और मत करने लग जाइए। गलत हो जाएगा। बोलेंगे देसी फिलॉसफर ने हमें बोला था जाने को बट गोल्ड माइन स्टेप फोर जो मैं यूज़ करता हूं व्हिच इज़ स्ट्रक्चरल पैटर्न रिकॉग्निशन। एक और तरीका है जिससे आप बेहतर सोच सकते हैं। व्हिच इज़ इंफॉर्मेशनेशन कलेक्ट करना छोड़ दो। यहां से मैंने सीख लिया भैया,

24:47 वहां से मैंने सीख लिया। नहीं, पैटर्न्स डिटेक्ट करना शुरू करो हर जगह। बिकॉज़ ज्यादातर लोग इंसिडेंट्स रिमेंबर करते हैं। बट उसके उस इंसिडेंट उस सिचुएशन के पीछे को पैटर्न नहीं समझ पाते कि वो हुआ क्यों? किस लिए? कहां जाएगा? कैसे जाएगा? एक नॉर्मल इंसान कहेगा कि यार ये मेरे साथ ही क्यों होता है भाई? ये मेरे साथ ही क्यों होता है? मेरी जिंदगी में लगे पड़े हैं। बट एक थिंकर जो होता है ना जो 99% पापुलेशन से बेटर सोचता है। वो ऐसे सोचता है कि इस सिचुएशन के पीछे रिपीटिंग स्ट्रक्चर क्या है? फॉर एग्जांपल लेट्स से आपकी बेइज्जती करते रहते हैं लोग। यू आर बीइंग डिसरिस्पेक्टेड। अब एक नॉर्मल इंसान हर चीज याद रखेगा। मेरे को उसने ऐसी गाली बोली थी भाई ऐसा रड कमेंट दिया था। बट अ थिंकर कैसे सोचेगा? ये मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? या मेरे अराउंड ही क्यों हो रहा है? मेरे साथ ही क्यों उससे ज्यादा

25:33 मेरे अराउंड क्यों हो रहा है ये? इज इट बिकॉज़ कि मैं बाउंड्री सेट नहीं करता? या फिर इज इट बिकॉज़ आई ट्राई टू हार्ड टू प्लीज़ पीपल? क्या ये इसलिए होता है कि मैं चुप रहता हूं जहां मेरे को बोलना चाहिए? या फिर ये इसलिए होता है कि मैं उन्हीं तरीके के लोगों को बार-बार चूज़ करता हूं कि आओ मेरी मार के फोकट में चले जाओ। अब आप सिर्फ पेन को इंफॉर्मेशन की तरह रिमेंबर नहीं कर रहे हैं। आप पैटर्न स्टडी कर रहे हैं बिहाइंड दैट पेन। और यहां से असली इंटेलिजेंस शुरू होती है। बिकॉज़ एक इंसिडेंट दोज़ बड़ा रैंडम हो सकता है। कोइंसिडेंस हो सकता है। बट दो इंसिडेंट कोइंसिडेंट्स नहीं होते हैं। क्योंकि अगर एक ही चीज रिपीट हो रही है अगेन एंड अगेन एंड एंड अगेन तो उसके पीछे एक पैटर्न है। मे बी आप बहुत ज्यादा एशियस हो जाते हैं। बिफोर इंपॉर्टेंट मोमेंट्स फटनी शुरू हो जाती है। मे बी आप बहुत ज्यादा प्रोकस्टिनेट करते हैं। चीजें टालते हैं।

26:19 व्हेन जो अभी चीज करनी जरूरी है उसको आप टाल टाल के बोल रहे हैं कि भाई जो अभी मैटर करता है उसको तुम टाल रहे हो मे बी यू ऑलवेज अट्रैक्ट द रोंग पीपल ऐसे लोग जो आपको यूज़ करते हैं मे बी यू ऑलवेज गेट एंग्री व्हेन समवन क्वेश्चंस योर इंटेलिजेंसी ओ भाई मैं इतना मेरे पे कैसे सवाल उठा लिया मे बी यू ऑलवेज लूज़ डिसिप्लिन आफ्टर स्मॉल सक्सेस हां भैया हो गया अब तो आराम करेंगे भाई मजा आएगा अब तो आराम है ऐश की जिंदगी है दीज़ आर नॉट सेपरेट इंसिडेंट्स माय फ्रेंड ये पैटर्न है और अगर ये पैट डिटेक्ट नहीं करोगे ना तो तुम्हारी लाइफ वही चीज़ रिपीट करती रहेगी। सेम लेसन बट विद डिफरेंट पीपल डिफरेंट प्लेसेस या डिफरेंट सिचुएशन। लेकिन लेसन सेम रहेंगे। ये रीज़न है कि एक डम इंसान सिर्फ इंसिडेंट रिमेंबर करता है। बट एक थिंकर उसमें

27:05 पैटर्न डिटेक्ट करता है। मैं क्या करता हूं? मैं पहले करता तो भाई मेरे को ऐसे बोल दिया। मेरे चैनल पे आके मेरे कमेंट सेक्शन में ऐसे बोल दिया। फिर मैं बोला ये तो मैं हर रो रहा हूं मैं कर रहा हूं। ये तो नहीं चलेगा। फिर मैंने उन कमेंट्स को डिसाइफर करना। वीडियोस भी बनाता हूं मैं। मैं तो बहुत करता हूं। जैसे अभी मैंने किया जैसे ब्रेन रॉट कंटेंट अपने उस पे कंटेंट जो अपने उस पे कमेंट्स आ रहे हैं। डिसाइफर किया उसको समझा क्या हो रहा है? क्या हो रहा है? उसके ऊपर वीडियो बनाया। समझ रहे हो? क्या है? मैंने ऐसा क्या बोला? इसने क्या समझा? क्या ये सच है? क्या ये गलत है? बिकॉज़ एक बार आप पैटर्न देखना शुरू कर दो ना, तो आप ये पूछना छोड़ देते हो कि ये जिंदगी मेरे ही एल क्यों लगा रही है? फिर आप पूछते हैं कि मैं ऐसा क्या कर रहा हूं? रिपीटेडली। क्या अवॉइड कर रहा हूं? क्या चूज़ कर रहा हूं? क्या इग्नोर कर रहा हूं? कि मेरे साथ ही सेम रिजल्ट प्रोड्यूस हो रहा है। ये सवाल बड़ा पेनफुल है दोस्त। बट ये सवाल तुम्हें

27:52 इंटेलिजेंट दूंगा। स्मार्टर जरूर बनाएगा। बिकॉज़ इंफॉर्मेशनेशन आपको सिर्फ ये बताती है क्या हुआ। और पैटर्न आपको बताता है ये क्यों हो रहा है। क्यों होता जाएगा? एंड द मोमेंट यू अंडरस्टैंड द पैटर्न तुम्हें ताकत मिल जाएगी उसको कंट्रोल करने की। स्टेप फाइव। एक और इंपॉर्टेंट थिंग यू नीड टू अंडरस्टैंड इज़ दिस। रिफ्लेक्शन दोस्त ओवरथिंकिंग नहीं होता। बहुत लोग उन दोनों को कंफ्यूज कर जाते हैं। दे थिंक ब्रो मैं बहुत ज्यादा सोचता हूं। पहले से ही बहुत ज्यादा सोचता हूं। मेरा दिमाग कभी रुकता ही नहीं। बट यह रिफ्लेक्शन नहीं है। ये यूजुअली ओवरथिंकिंग है। और इन दोनों के बीच में बड़ा डिफरेंस है। ओवरथिंकिंग एक सर्कुलर पैटर्न में चलती है। रिफ्लेक्शन डायरेक्शनल होता है। एक डायरेक्शन लेके चलता है। ओवरथिंकिंग जो है ना आपको उठा के सेम पेन पे, सेम ट्रॉमा पे बार-बार लूप

28:37 में, लूप में लूप में लाता रहेगा। बट रिफ्लेक्शन उस पेन को लेता है और पूछता है कि मैं इससे क्या समझ सकता हूं? कैसे आगे बढ़ सकता हूं? फॉर एग्जांपल एग्जांपल ले लेते हैं। लेट्स से किसी ने आपको रिजेक्ट कर दिया। ठीक है? ओवरथिंकिंग कहेगी कि भाई मेरे साथ ये क्यों हुआ? क्या मैं अच्छा नहीं हूं? व्हाट इफ आई नेवर फाइंड समवन अगेन? व्हाट इफ सब लोग ही मुझे छोड़ के चले गए इसके तरह। मेरा तो दिल का प्यार था। मेरा तो दिल का मेरा जिगरी दोस्त था। मेरा ये था। मेरा कलेजे का मेरे मेरे बाएं उसका टुकड़ा था। और फिर यही सेम थॉट रिपीट होता जाएगा अगेन एंड एंड अगेन एंड अगेन लाइक अ लूप। बट अगर रिफ्लेक्शन करोगे तो कुछ और होगा। व्हिच इज रिफ्लेक्शन आस्क क्या हुआ असल में यहां पे? क्या मैं क्या पॉइंट्स मैं इग्नोर कर गया? क्या मैं सीखा इस सिचुएशन से अपने बारे में? क्या मैं इस इंसान से बहुत जल्दी बहुत ज्यादा अटैच हो

29:23 गया? क्या मैं इससे बहुत ज्यादा एक्सपेक्ट कर रहा था? क्या ये इंसान सही में सही था मेरे लिए? समझ रहे हो डिफरेंस? ओवरथिंकिंग पेन को रिपीट करता है। बट रिफ्लेक्शन उसका मीनिंग एक्सट्रैक्ट करता है। ओवरथिंकिंग आपको ऐसा फील करवाएगा कि यू आर ट्रैप्ड। उसी सिचुएशन में यू आर ट्रैप्ड। लूप में चल रही है मूवी की तरह। बट रिफ्लेक्शन हेल्प्स यू उससे बाहर निकल के स्टेप आउटसाइड और उस सिचुएशन को बाहर से समझने की कोशिश करो। क्योंकि ओवरथिंकिंग भाई इमोशनल रिप्ले की तरह है। रिफ्लेक्शन क्या है? कॉन्शियस रिव्य्यू कि मैं कॉन्शियसली बैठ के अपनी आज्ञा लेके बैठ के रिव्यु कर रहा हूं सिचुएशन को। यही रीज़न है व्हाई अ पर्सन कैन थिंक ऑल डे एंड स्टिल बिकम मोर कंफ्यूज। पूरे दिन सोचो कंफ्यूज रहोगे दोज़। बिकॉज़ ज्यादा सोचना मतलब यह नहीं होता। यू आर थिंकिंग बेटर। अगर आपके थॉट बार-बार घूम फिर के घूम फिर के उसी सेम

30:09 फियर, सेम बेइज्जती, सेम शेम, सेम रिग्रेट, सेम फेंटसी, सेम इमेजिनरी कन्वर्सेशन पे आ रहे हैं तो आप रिफ्लेक्ट नहीं कर रहे। आप बस ब्लीड कर रहे हैं। मेंटली आपका मेंटल ब्लीडिंग चल रहा है। रिफ्लेक्शन का मूवमेंट होता है। वो आपको दर्द जरूर देगा बट वो आपको कहीं मूव करवाता है। फॉरवर्ड डायरेक्शन में यूजली। वो आपको एक कंक्लूजन देता है, एक लेसन देता है, एक डिसीजन देता है। या फिर एटलीस्ट यार यह सब भी ना मिले तो एक क्लियर क्वेश्चन मिलता है। ओवरथिंकिंग कुछ नहीं देता दोस्त। वो बस आपका जो घाव है उसको बड़ा करता है। सो मैं ये कहूंगा द नेक्स्ट टाइम आपका माइंड इज स्टक ऑन समथिंग। फंस गया एक चीज पे अपने आप से ये पूछो। क्या मैं ये चीज सोच रहा हूं टू अंडरस्टैंड दिस सिचुएशन और मी? या फिर मैं वापस से सफर होना चाह रहा हूं। यह जो एक सवाल है ना यह आपके घंटे दिन साल बचा देगा

30:56 मेंटल टॉर्चर के। बिकॉज़ असली थिंकिंग होती है ना वो ये नहीं होती कि आप उसी घाव को बार-बार रिप्ले कर रहे हैं। रियल थिंकिंग इज अबाउट आस्किंग कि ये घाव मुझे क्या सिखाना चाह रहा है और ये घाव आगे कैसे ना रिपीट हो। मैं घाव खाता जाऊंगा तो खत्म हो जाऊंगा। तो दोस्त यही था होल पॉइंट ऑफ़ द वीडियो। अगर आप बेहतर सोचना चाहते हो तो इट इज़ नॉट अबाउट साउंडिंग इंटेलिजेंट और इंटेलेक्चुअल। इसका मतलब यह नहीं कि आप बड़े-बड़े शब्द फेंक के ओ भाई यह तो इंटेलेक्चुअल बन गया। मैं आर्गुमेंट जीत रहा हूं ऑनलाइन। उसकी मैंने ऐसे मार ली। उसकी मैंने आवाें मार ली। उसने सत्य बोल दिया तो मैंने उसको गाली गलौज कर दी। इस तरीके से उसको मैंने डिफेम कर दिया। तो भैया मैं बड़ा बन गया। तुम्हें भी पता है तुम गलत कर रहे हो। तो इसलिए इट इज़ अबाउट बिकमिंग अवेयर ऑफ योर ओन माइंड। अपने माइंड की अवेयरनेस। कैसे तुम रिएक्ट कर रहे हो? कैसे तुम पेन प्रोसेस कर रहे हो?

31:43 देखो चुटकी नहीं बजी। यहां बजा देते हैं। कैसे आप पेन प्रोसेस कर रहे हैं? आप कैसे डिसीजन मेक कर रहे हैं। आप अपने फेलियर्स अपने आपको कैसे समझा पा रहे हैं? क्या आप फेलियर्स की लैंग्वेज में बात कर पा रहे हैं? क्योंकि एक बार आपने थिंकिंग प्रोसेस समझ लिया ना तो आप अपने खुद के दिमाग के विक्टिम बनना छोड़ देंगे। आप पैटर्न देखना शुरू कर देंगे। रियलिटी को और इमोशन को सेपरेटली देख पाएंगे। यू स्टार्ट रिफ्लेक्टिंग इंस्टेड ऑफ़ ओवरथिंकिंग और धीरे-धीरे आपका माइंड कम केस में रहेगा और ज्यादा इस्तेमाल कर पाओगे अपने दिमाग का। और दिमाग का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। भाई एक दिमाग एक जिंदगी है। उसका सही इस्तेमाल करो। तो अब आई वांट यू टू डू वन थिंग। नीचे कमेंट सेक्शन में जाना और अपना थिंकिंग प्रोसेस एक्सप्लेन करना कि भाई आपका क्या थिंकिंग प्रोसेस है? हाउ डू यू यूजुअली थिंक जब कुछ गलत जाता है। आप ओवरथिंक करते हो या फिर आप डिटच करके

32:30 ऑब्जर्व करते हो। आप सेम पेन को रिप्ले करते हो या फिर यू नो यू फाइंड पैटर्न्स? डू यू प्रिपेयर फॉर सिचुएशंस पहले से कि भाई ये हो सकता है वो हो सकता है। और मेरे को ये भी बताना कि भाई इस वीडियो में जो मैंने स्टेप्स दिए कौन सा स्टेप तुम्हारे थिंकिंग पैटर्न को बहुत ज्यादा रिसेंबल करता है। मेरे को पढ़ के बड़ा मजा आएगा। द मोमेंट यू कैन डिस्क्राइब हाउ योर माइंड वर्क्स। यू हैव ऑलरेडी स्टार्टेड थिंकिंग बेटर। तो भाई अगर आपको यह वीडियो पसंद आया तो मैं थोड़ा साइड हट जाता हूं। तो आपको यह वीडियो भी जरूर पसंद आएगा। तो मैं चाहता हूं आप सीधा इसके ऊपर जाइए। लेकिन इसके ऊपर जाने से पहले नीचे जाके मास्टर क्लास उठाइए। अगर अभी तक नहीं उठाई है। आप बहुत कुछ खो रहे हैं। तो वह उठाइए और यह वीडियो देखिए। चलिए, अभी जाइए।

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