The Hindu Analysis | 24th May 2025 | The Hindu NewsPaper Today With Practice Questions

Brief Summary

आज के द हिंदू न्यूज़पेपर एनालिसिस में राइजिंग नॉर्थ ईस्ट, साउथ ईस्ट एशिया में ऑक्सीजन की कमी, नक्सलिज्म, चगोज़ आइलैंड डील और इंस्पायर फेलोशिप जैसे टॉपिक्स पर चर्चा की गयी है। कल होने वाले प्रीलिम्स एग्जाम के लिए टिप्स भी दिए गए हैं।

  • चगोज़ आइलैंड का मुद्दा और भारत के लिए इसके मायने
  • नॉर्थ ईस्ट की डेवलपमेंट और साउथ ईस्ट एशिया के लिए इसका महत्व
  • साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया में ऑक्सीजन की कमी के कारण
  • नक्सलिज्म की समस्या और सरकार के प्रयास
  • इंस्पायर फेलोशिप स्कीम की जानकारी

चगोज़ आइलैंड्स: एक महत्वपूर्ण विश्लेषण

चगोज़ आइलैंड्स, जो इंडियन ओशन में स्थित आइलैंड्स का एक ग्रुप है, पहले फ़्रांस के कब्जे में था, फिर ब्रिटिश ने इसे मॉरीशस से अलग करके ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी बना दिया। यहां डियागो गैसिया आइलैंड पर यूके और यूएसए का मिलिट्री बेस है। मॉरीशस लगातार इस आइलैंड पर अपना दावा करता रहा है, जिसे भारत का समर्थन मिला। हाल ही में, यूके ने पूरा चगोज़ आइलैंड मॉरीशस को दे दिया है, लेकिन डियागो गैसिया को 99 साल के लिए लीज़ पर ले लिया है, जिसके लिए यूके मॉरीशस को सालाना भुगतान करेगा।

नॉर्थ ईस्ट: विकास और संभावनाएं

नॉर्थ ईस्ट, जिसे अष्टलक्ष्मी भी कहा जाता है, साउथ ईस्ट एशिया का प्रवेश द्वार है। यहां राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट जैसे इन्वेस्टमेंट समिट होते रहते हैं। नॉर्थ ईस्ट भारत के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है: यह देश के लंग्स हैं, यहां विभिन्न कल्चर के लोग रहते हैं, और यह स्ट्रेटेजिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। सरकार एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत नॉर्थ ईस्ट में डेवलपमेंट और शांति स्थापित करने पर ध्यान दे रही है, जिससे साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज के साथ कनेक्शन बढ़ाया जा सके। बायोइकोनॉमी, बम्बू प्रोडक्शन, टी प्रोडक्शन, स्पोर्ट्स और इको टूरिज्म यहां की मुख्य संभावनाएं हैं।

यूएसए की ट्रेड पॉलिसी और इंडिया पर असर

ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन ने यूरोपियन कंट्रीज को धमकी दी है कि उन पर 50% टेरिफ लगाया जाएगा। एप्पल को भी धमकी दी है कि अगर वह इंडिया में मोबाइल फोन बनाकर यूएसए में लाता है तो उस पर 25% टेरिफ लगेगा। इसके अलावा, यूएस यूनिवर्सिटीज में फॉरेन स्टूडेंट्स पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। ऐसा लग रहा है कि यूएसए और इंडिया के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है, जिसकी वजह बांग्लादेश से होकर गुजरती है। यूएसए, इंडिया में एप्पल के इन्वेस्टमेंट को लेकर भी दादागिरी दिखा रहा है।

साउथ एशिया में ऑक्सीजन की कमी

साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी है, जिसके पीछे मुख्य कारण फंड की कमी, टेक्नोलॉजी की कमी और ट्रेंड वर्कफोर्स की कमी है। लसेट ग्लोबल हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया में सबसे कम है। इस ऑक्सीजन गैप को भरने के लिए वर्ल्ड को इन्वेस्ट करना चाहिए। शॉर्टेज ऑफ़ इक्विपमेंट्स, फाइनेंसियल बर्डन और ट्रेंड बायोमेडिकल इंजीनियर्स की कमी जैसी समस्याएं हैं।

नक्सलिज्म: कारण और समाधान

नक्सलिज्म एक कम्युनिस्ट मूवमेंट है जिसकी शुरुआत 1967 में वेस्ट बंगाल के नक्सलबाड़ी से हुई थी। इसके पीछे मुख्य कारण लैंड नहीं होना, एक्सप्लइटेशन, पावर्टी और अंडर डेवलपमेंट हैं। ट्राइबल एलिनेशन और स्टेट नेगलेक्ट भी इसके कारण हैं। नक्सलिज्म से प्रभावित राज्य हैं छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, बिहार, वेस्ट बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरला। सरकार ने समाधान जैसे कई इनिशिएटिव लिए हैं। बंदोपाध्याय कमेटी ने रिहैबिलिटेशन पर फोकस करने और ट्राइबल फ्रेंडली लैंड एक्विजिशन करने की सिफारिश की है।

इंस्पायर फेलोशिप: रिसर्च को बढ़ावा

रिसर्च स्कॉलर्स स्टाइपेंड समय पर नहीं मिलने से नाराज हैं। इंस्पायर फेलोशिप एक महत्वपूर्ण स्कीम है, लेकिन फंड की कमी के कारण रिसर्च प्रभावित हो रही है। सरकार को जल्द से जल्द फंड रिलीज करना चाहिए, वरना ब्रेन ड्रेन की समस्या हो सकती है। इंस्पायर स्कीम के कई कंपोनेंट्स हैं, जैसे इंस्पायर इंटर्नशिप, स्कॉलरशिप फॉर हायर एजुकेशन (SHE), इंस्पायर फेलोशिप और इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप।

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Transcript

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0:00 कैसे हैं आप सभी? मैं आशा करता हूं आप सभी अच्छे होंगे। अपना ध्यान रख रहे होंगे और मन लगाकर पढ़ाई तो कर ही रहे होंगे। आज दोस्तों 24 मई है और सैटरडे का दिन है और द हिंदू न्यूज़पेपर में कुछ बहुत ही इंपॉर्टेंट आर्टिकल हैं। आज मल्टीपल आर्टिकल्स हैं। कई सारे टॉपिक जैसे एक टॉपिक लिखूंगा तो उसमें कई सारे आर्टिकल्स क्या है? हम कवर करने वाले हैं। तो सबसे पहले अगर हम देखते हैं तो एक तो राइजिंग नॉर्थ ईस्ट से रिलेटेड आर्टिकल है। अब इसी में ही आप सभी को ध्यान होगा एक फेस्टिवल हुआ था अष्टा लक्ष्मी करके। याद होना चाहिए आप सभी को वो नॉर्थ ईस्ट से रिलेटेड था। प्लस में यहीं पर ही आपके आसियान की भी बात की गई। गेटवे ऑफ साउथ ईस्ट एशिया ऐसी बहुत सारी चीजें क्या किया गया? जिक्र किया गया। उसके बाद में इस आर्टिकल के अंदर में तीन आर्टिकल कवर हैं। एक एप्पल वाला आर्टिकल कवर है। एक आपके हां क्या

0:47 नाम है? फॉर एग्जांपल यहां पर आप देखेंगे यू ईयू के साथ में टेरिफ वाला हो गया और एक यूनिवर्सिटीज के अंदर में फॉरेन स्टूडेंट्स को नहीं लिया जा सकता। वह भी इसके अंदर में क्या है? कवर किया गया है। उसके बाद में देखा जाए तो हमारा जो साउथ ईस्ट एशिया है और खासतौर पे देखा जाए साउथ एशिया है इन दोनों रीजंस के अंदर में आपके पास में वो अवेलेबल नहीं है। ऑक्सीजन अवेलेबल नहीं होता। ऑक्सीजन ज्यादा अवेलेबल है। तो क्या कारण है? क्यों ऑक्सीजन अवेलेबल नहीं है? उस चीज को देखेंगे। उसके बाद में ये टॉपिक आप सभी कह रहे थे इंटरनल सिक्योरिटी से रिलेटेड है नक्सलिज्म। तो अभी एक छत्तीसगढ़ में एक नक्सलिज्म वाला इशू एक हुआ है जिसके अंदर में क्या किया है जो टॉप मोस्ट क्या नाम है हमारे क्या नाम है डिमांड में या वांटेड जो क्या नाम है नक्सलम नक्सलिज्म के का जो लीडर था उसको हमने क्या है मार

1:32 गिराया तो ये इंटरनल सिक्योरिटी का मामला और ये टॉपिक क्या करेंगे हम डिटेल में डिस्कस करने वाले हैं। उसके बाद में देखेंगे इंस्पायर फेलोशिप। तो मैं ना जब स्कीम करा रहा था तभी इंस्पायर से रिलेटेड एक टॉपिक न्यूज़ में आया था। तो मैंने यहां पर सारी चीजें डाल दी है कि इंस्पायर से रिलेटेड कौन-कौन से उसमें क्या-क्या चीजें मिलती हैं। और उसके बाद में आता है चगोज़ आइलैंड। ये डील तो आपको पता ही है। हमने डिस्कस किया था ना जब ये डील अनाउंस हुई थी यूके एंड क्या नाम है? मॉरीिशस के बीच में तो ये दोबारा से फाइनलाइज हो चुका है। और इसके अंदर में क्या नाम है? कितने रुपए दिए जाएंगे। सारी चीजें इसके अंदर में हो चुकी है। और इवन जो डियागो गैरसिया नाम की जो एक आइलैंड है वो भी क्या किया गया? मॉरीशियस को ट्रांसफर कर दिया गया है उसकी सोवनिटी। ठीक है? लेकिन उसको 99 इयर्स के लिए लीज़ पर ले लिया है यूके ने।

2:19 वो उसको क्या करेगा? एक बेस के रूप में मिलिट्री बेस के रूप में यूज़ करेगा। तो इतने सारे टॉपिक हैं जिनको हम डिस्कस करने वाले हैं। और इस सेशन की पीडीएफ आपको कहां मिलेगी? इस टेलीग्राम चैनल पर इसकी पीडीएफ आपको मिल जाएगी। ठीक है? और गुड मॉर्निंग। जी हां, गुड मॉर्निंग। गुड मॉर्निंग। इस टेलीग्राम चैनल पर आपको इसकी पीडीएफ मिल जाएगी। और आप सभी जानते हैं दोस्तों 25 तारीख यानी कि कल आप सभी का प्रीलिम्स का एग्जाम है। अब इसमें कुछ फालतू की चीजें क्या ज्ञान दिया जाए? सिंपल सी बात है भाई जितना पढ़ा है उस हिसाब से जाकर शांति से वहां पर क्या नाम है अपना जो भी इंफॉर्मेशन है जो भी आपको लगता है कि इसका आंसर ये होगा वहां पर आंसर लिखना है। ज्यादा कोई इधर-उधर की बातें नहीं लिख सोचनी है ना ही कोई टेंशन लेनी है कि क्या होगा। लास्ट मोमेंट पर और ज्यादा पढ़कर कुछ ऐसा नहीं होगा कि आप कुछ

3:05 एग्जाम के अंदर में कुछ कर देंगे। तो आपने जो ऑलरेडी पढ़ा है वही आपके क्या करने वाला है? काम आने वाला है। तो ज्यादा लोड लेने की जरूरत नहीं है। ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। जो होना है वो होगा और बिल्कुल भी रिलैक्स रहना है। किसी भी तरीके की टेंशन नहीं लेनी है। ठीक है? तो सीसेट को कैसे करें भाई? पहले कोशिश करना रीजनिंग के क्वेश्चन सॉल्व करो। फिर उसके बाद में रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन के। अगर रीजनिंग के बाद में थोड़े बहुत मैथ्स के क्वेश्चन सॉल्व हो जाते हैं तो वेल एंड गुड है। फिर रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन के क्वेश्चन को सॉल्व कर लो। ठीक है? तो ये सारी चीजें अब आज के दिन की शुरुआत क्योंकि आज सैटरडे है, कल संडे होगा। आप में से बहुत सारे बच्चे ऐसे होंगे जो क्या करेंगे? कल थोड़ा सा रिलैक्स करेंगे। तो मेरा एक सजेशन है जैसे फॉर एग्जांपल 2026 के लिए भी जो बच्चे देना चाहते हैं अटेम्प्ट या 2027 के लिए अटेम्प्ट देना चाहते हैं। कल जो न्यूज़ कल जो एनालिसिस

3:53 होगा ना एग्जाम का पेपर का वहां पर क्या करना उसको जरूर देखना। इसलिए कह रहा हूं कि 2026 के स्टूडेंट्स को भी आईडिया लग जाएगा कि भाई अगले साल 24 मई को पेपर कैसा आएगा। तो उसके लिए आपको ना एक रियलिटी चेक मिल जाएगा कल ही जिसके कारण में जो हवाबाजी में रहते हो कि हम तो कर लेंगे। उससे थोड़ा सा बाहर आ जाओगे और मेहनत करना शुरू कर दोगे। कुछ भी काम नहीं करेगा। जब तक आप काम नहीं करोगे तब तक कुछ भी काम नहीं करेगा। तो सबसे पहला टॉपिक है चगोज़ आइलैंड्स को लेकर। बहुत इंपॉर्टेंट है। अभी इस साल तो मुझे लगता है वैसे आ सकता है क्योंकि ये न्यूज़ में तो पिछले एक साल से है। ठीक है? लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि अगले साल आने के भी इसके काफी ज्यादा चांसेस हैं। तो चगोज़ आइलैंड है क्या? चगोज़

4:38 आइलैंड बहुत सारे आइलैंड्स का एक ग्रुप है। ठीक है? ये कहां पर है? हमारा जो इंडियन ओसियन है ना वहां पर है। अगर मैं इसको आपको को मैप पर दिखाने की कोशिश करूं तो आप देखेंगे ये हमारा प्यारा भारत है। प्यारे भारत से जब आप नीचे की तरफ में जाएंगे तो ये देखिए यहां पर क्या लिखा होता है? ब्रिटिश इंडियन ओशनियन टेरिटरी। ठीक है? और यहां से अब आप जब नीचे की तरफ में जाएंगे तो यहां पर आपको क्या नजर आएगा? मॉरीशस नजर आएगा। अगर मैं ज़ूम और कर दूं तो यहां पर आपको मतलब एक सेकंड। हां ये रहा मॉरीशस। ये रहा क्या है? मॉरीशियस है ना? उसके बगल में रीयनियन फिर मॉरीशियस से इधर आप चले जाएंगे तो मेडागास्कर ऐसे सारी की सारी चीजें हैं। तो ये जो चगोज़ आइलैंड का पूरा का पूरा ग्रुप है इसी ग्रुप के अंदर में एक और आइलैंड होता है जिसको हम बोलते हैं क्या? डियागो गैसिया भी बोलते हैं। क्या बोलते हैं?

5:25 डियागो गैसिया। अभी हम बहुत इंपॉर्टेंट डिटेल में पढ़ने वाले हैं। डियागो गैसिया की स्पेलिंग क्या है? अगर आप देखेंगे डी आई डीओ गैसिया। ठीक है? ये भी चीज़ नोट कर लीजिएगा। एग्जाम के पर्सपेक्टिव से ये भी इंपॉर्टेंट है। अब हुआ क्या कि ये जो आइलैंड है या फिर ये जो ग्रुप ऑफ आइलैंड है इसको पहले फ्रेंच ने ऑक्यूुपाई किया। ठीक है? अब उसके बाद में फ्रेंच और ब्रिटिश की डील होती है एंड ब्रिटिश क्या करते हैं? इसको पूरा का पूरा दे देते हैं। याद रखिएगा ये मॉरीिशियस प्लस में ये आइलैंड ये एक एंटिटी हुआ करते थे। यानी कि जब फ्रेंच ने इसको ऑक्यूुपाई किया, एक्वायर किया तो इसका मतलब कि ये मॉरीिशस का हिस्सा हुआ करते थे। अब क्या हुआ? जब ब्रिटिश के पास में गया तो ब्रिटिश ने इसको मॉरीशस से अलग करके एक

6:12 अपनी एक टेरिटरी बनाई जिसको मैंने अभी जस्ट आपको दिखाया ब्रिटिश इंडियन ओसियन टेरिटरी ऐसा करके इन्होंने बनाया और यहां पर इन्होंने ब्रिटिशर्स ने प्लस में यूके प्लस में यूएसए इन दोनों ने मिलकर इन चगोज़ आइलैंड के अंदर में जो सबसे इंपॉर्टेंट आइलैंड है डियागो गैसिया वहां पर एक मिलिट्री बेस बनाया। वो मिलिट्री बेस सबसे इंपॉर्टेंट है। इवन आप इराक, ईरान, अफगानिस्तान, यमन जितने भी मिलिट्री एक्शन आज तक यूएस ने लिए हैं, ये डियागो गैसिया से ही लिए हैं। अब मॉरीिशियस बार-बार कहता रहा कि भाई हम तो आजाद हो गए हैं ब्रिटिश से। और आजाद होने के बाद में ये जो आइलैंड्स हैं ये भी तो हमें मिलने चाहिए थे क्योंकि हमारे हैं। लेकिन वो

6:58 ब्रिटिशर्स उनको नहीं दे रहे थे। और इस बात को लेकर इंडिया यह पॉइंट प्लीज नोट करिएगा। इंडिया लगातार सपोर्ट करता था मॉरीिशस को। अभी मॉरीशस के अंदर में हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी गए थे और वहां पर भी हमने कहा कि भाई साहब हम तो सपोर्ट करते हैं कि ये पूरा का पूरा आइलैंड किसके पास में होना चाहिए? मॉरीशस के पास में होना चाहिए। तो क्या हुआ? लास्ट ईयर मॉरीिशस प्लस में यूके गवर्नमेंट के बीच में एक डील साइन होती है और इस डील के अंदर में यूके इस बात को राजी हो जाता है कि पूरा चगोस आइलैंड का पूरा जो ग्रुप है वो क्या करेंगे मॉरीिशस को दे देंगे लेकिन उसके अंदर में जो डियागो गैरसिया नाम का जो ये आइलैंड है यह नहीं दे पाएंगे अब इसके लिए

7:44 क्यों नहीं दे पाएंगे क्योंकि यह मिलिट्री बेस है और वो भी यूके एंड यूएसए का है तो उसके के बाद में काफी ज्यादा क्रिटिसिज्म होना शुरू होता है। काफी ज्यादा क्रिटिसिज्म होना शुरू होता है। अब क्या हुआ है? फाइनली मॉरीिशस को यूके ने पूरा चगोज़ आइलैंड दे दिया है। पूरा जिसके अंदर में क्या किया है? जिसके अंदर में इवन आपका जो डियागो गैसिया है वो भी आता है। लेकिन उन्होंने कहा कि भाई साहब हम तो क्या करेंगे? इसको हम वापस नहीं कर सकते अभी इतनी जल्दी। तो उसके लिए क्या किया है? 99 इयर्स के लिए लीज़ पर ले लिया है यूके ने डियागो गैरसिया नाम के इस आइलैंड को जिसके लिए वो हर साल मॉरीिशस की

8:32 गवर्नमेंट को क्या करेंगे? पे करेंगे। तो ये है पूरी न्यूज़। आर्केपलागो क्यों कहा जाता है? क्योंकि जब ग्रुप ऑफ आइलैंड्स होता है तो उसको हम क्या बोलते हैं? आर केपलागो बोलते हैं। तो इसीलिए आप देखेंगे कि इसको हम चगोज़ आर केपलागो भी कई बार बोलते हैं। ठीक है? तो ये याद रहेगी चीजें जो हम यहां पर डिस्कस कर रहे हैं। ठीक है? आनवी कह रही हैं सर पिटी रिवाइज करवा दीजिए कल के लिए। दोस्त हो चुकी है ऑलरेडी। अब मत परेशान हो। अब परेशान होने की जरूरत भी नहीं है। जो आपने पढ़ा है वो ऑलरेडी पढ़ा है आपने। अब रिलैक्स रहो। थोड़ा सा गानेवाने सुनो। थोड़ा सा अपने अपने मन को रिलैक्स करो। एग्जाम के लिए जाने की तैयारी करो। तो ये देखिए इंडिया नीचे की तरफ आएंगे। ये देखिए चागोस आर के पलागो। ठीक है? और यहां पर क्या है? मॉरीशसरा इतना पास में है। है

9:19 ना? और अगर हम ज़ूम करते हैं तो आप देखेंगे मालदीव्स, लक्षद्वीप। फिर नीचे आते हैं चगोज़ आर्क पगो। ठीक है? मॉरीशस ये रहा, मेडागास्कर ये रहा। और इसी चगोज़ आइलैंड ग्रुप के अंदर में यानी कि चगोज़ आर्क पगो के अंदर में क्या है? आपका एक आइलैंड है डियागो गैरसिया। जो कि एक मिलिट्री बेस है किसका? यूके एंड यूएसए का। तो कॉन्टेक्स्ट समझ में आ रहा है कि यूएस ने और क्या नाम है? यूके ने यहां पर जो मिलिट्री बेस बनाया वो उनकी इंपॉर्टेंट है। काफी ज्यादा उनके सिक्योरिटी के लिए या फिर कह लीजिए इंडियन ओसियन में जो उनकी प्रेजेंस है ना उसके लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। ठीक है? और ये पूरा का पूरा चगोस जो आर्क प्लागो है ये पूरा का पूरा किसको? मॉरीशस को दे दिया

10:04 गया है उनकी सोवनिटी के अंदर में। ठीक है? तो ये कहां पर लोकेटेड है? इंडियन ओशन के अंदर में है। मालदीव से जब नीचे की तरफ जाते हैं 500 कि.मी. तब आपको नज़र आता है। और मैंने आपको बताया हिस्ट्री अगर देखा जाए पहले यहां पर कोई भी नहीं रहते थे। तो यहां पर मतलब आप सोचो मैं सोच के हैरान रहता हूं कि ये ब्रिटिशर्स ने या फिर यूरोपियंस को अगर देखा जाए इन्होंने वर्ल्ड का कहां-कहां पर जाकर क्या किया है? एक्सप्लॉयटेशन किया है। इस आइलैंड में पहुंचे हैं और इन्होंने फ्रेंच ने पहले अपने कंट्रोल में ले लिया। और यहां पर कोकोनट की क्या करते हैं? खेती करना शुरू करते हैं अफ्रीका से, इंडिया से लेबर्स को लाकर। ठीक है? फिर उसके बाद में 1814 के अंदर में एक ट्रीटी होती है। याद होगा आप सभी को मॉडर्न हिस्ट्री में आपने पढ़ा होगा। कई सारी ट्रीटीज आपने पढ़ी होंगी।

10:51 तो ट्रीटी ऑफ़ पेरिस के तहत में क्या करता है? फ्रांस। ये जो पूरा का पूरा चगोज़ आर्किपलागो है। ये किस और साथ में कौन सा? मॉरीिशस भी किसको दे देते हैं? ब्रिटिश को दे देते हैं। ठीक है? ब्रिटिश को दे देते हैं। यानी कि मॉरीिशस के अंदर में चागोस आके पलागो है। और यह पूरा हिस्सा किसको दे दिया जाता है? मॉरीशस ब्रिटिश को दे दिया जाता है। ब्रिटेन को दे दिया जाता है। अब 1965 में ब्रिटेन इसमें एक बहुत बढ़िया काम करते हैं दिमागदार क्योंकि इनको पता है कि फ्रीडम की मूवमेंट चल रही है। हर कंट्री फ्रीडम चाहती है। मॉरीिशस भी आगे जाके फ्रीडम मांगेगा। अलग होगा ही होगा। तो उससे पहले ही जो एक एंटिटी हुआ करती थी मॉरीिशस प्लस में चगोज़ आर्कीपलागो उन्होंने इन चगोज़ आर्कीपलागो को अलग कर दिया और 1965 में ब्रिटेन ने जब इसको डिटच

11:38 किया किससे मॉरीशस से अलग अलग करके और इसका एक अलग नाम रख दिया क्या ब्रिटिश इंडियन ओशियन टेरिटरी नाम रख दिया ठीक है क्लियर है चीज यहां तक अब उसके बाद में देखा जाए मॉरीशस लगातार मांग करता रहता है 1968 में मॉरीशस को क्या मिलती है? आजादी मिलती है। लेकिन उसके बाद वह बार-बार कहता रहता है कि भाई चगोज़ आर्कपलागो हमें चाहिए क्योंकि हमारा हिस्सा है। लेकिन ब्रिटेन ने तब से इसको अपने कंट्रोल में रख रखा था। देखिए आप प्लंड वे में किया था ना उनको पता था कि भाई मॉरीशस को कभी भी हमें इंडिपेंडेंस देनी पड़ सकती है। तो इसलिए उन्होंने पहले ही अब इससे आप अंदाजा लगाइए कि जो ये ओशियन में बेस होते हैं जो ओशियन के अंदर में फॉर एग्जांपल छोटे-छोटे आइलैंड्स होते हैं वो कितने इंपॉर्टेंट है। आर्कपलागो अभी जस्ट हमने डिस्कस किया

12:23 कि ग्रुप ऑफ आइलैंड्स को हम आर्क्यपगो बोलते हैं। ठीक है? ये चीज आपको क्लियर है। और मैं आपको ये समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि इससे अंदाजा लगाइए। चाहे यूएस हो, चाहे यूके हो, चाहे अभी आप चाइना की स्ट्रेटजी देखते हैं। उससे आपको समझ में आता है कि जो ओशियन के अंदर में आइलैंड्स बने होते हैं, ये कितने इंपॉर्टेंट है उस देश की सिक्योरिटी के लिए, उस देश की जो स्ट्रेटेजिक लोकेशन है ना या फिर मान के चलिए जो पावर दिखाने का तरीका है, उसके लिए कितना इंपॉर्टेंट है। वही यहां पर शोकेस कर रहा था कौन? ब्रिटेन। काफी ज्यादा बातचीत होती है। मॉरीिशस हर जगह पर इस चीज को बात करता है। इवन इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में भी मामला जाता है। 2019 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ये कहता है कि भाई मॉरीिशस जो कह रहा है वो बिल्कुल सही कह रहा है। और यह जो पूरा का पूरा चागोस आर के पलागो है ये किसके पास में होना चाहिए? मॉरीिशस के पास में ही होना चाहिए। ठीक है? तो याद रखिएगा। तो

13:11 यहां पर यूके एंड यूएसए मिलकर कौन सा? जो हम बार-बार बात कर रहे हैं डियागो गैसिया यहां पर क्या करते हैं? अपना एक बेस बना लेते हैं। कब बनाते हैं? 1967 में और उसको फिर बाद में क्या बनाते हैं? 1986 में एक मिलिट्री बेस में कन्वर्ट कर लेते हैं। ठीक है? और इस जो मिलिट्री बेस है डियागो गसिया ये जो अभी एग्रीमेंट हुआ है ना उसके अंदर में 99 इयर्स की लीज़ पर यूके ने लिया है। जिसके लिए वह हर साल मॉरीशस को अब क्या करेगा? पे करने वाला है। ठीक है भाई? क्लियर है? क्लियर है? तो याद रख लीजिएगा। और डियागो गैसिया अभी भी मिलिट्री बेस रहेगा अगले 99 साल के लिए और वह लीज़ पर है। और यह याद रखिएगा ये बेस यूके एंड यूएस का है। और

13:57 कितने पैसे हर साल दिए जाएंगे मॉरीिशस को? यूके पे कितना पे करेगा? 3.4 बिलियन टोटल अगर देखा जाए और अगर हर ईयर में देखा जाए 1001 मिलियन यूरो जिसको हम 129 मिलियन डॉलर के अंदर में कन्वर्ट कर सकते हैं। तो ये भी चीज़ याद रखिएगा। बहुत इंपॉर्टेंट है। और डियागो गैसिया कोऑपरेट किया जाता है किसके द्वारा? यूके एंड यूएस के द्वारा। एंड एक और चीज़ याद रखिए डियागो गैसिया उसने आज तक जितने भी मिलिट्री इंगेजमेंट हैं जैसे रेड सी के अंदर में फॉर एग्जांपल हुथज़ के अंदर में फॉर एग्जांपल आपके क्या में इराक के अंदर में, ईरान के अंदर में, आपके में अफगानिस्तान के अंदर हर उसके अंदर में क्या किया? उन्होंने काम किया है। तो, यह बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। ठीक है? नहीं कोई भी आयरलैंड कोई भी कंट्री कैसे कैप्चर कर लेगी भाई यार यह तो बड़ी बेसिक

14:44 सी बात है उस समय पर ब्रिटिश ब्रिटिश का कंट्रोल था ब्रिटिश वरना आप खुद सोचो ब्रिटिश इंडिया के ऊपर में क्यों थे क्योंकि उन्होंने इस समय पर हमारे ऊपर में रूल कर रहे थे तभी तो हम ब्रिटिश से आजादी मांगते थे ना तो वो उस समय की चीज थी ठीक है सर क्या कोई भी आइलैंड नहीं भाई कोई भी आइलैंड कोई भी कैप्चर नहीं कर सकता फिर आप बार-बार कमेंट कर रहे हैं कोई भी आइलैंड कोई भी कैप्चर नहीं कर सकता यहां पर ये चीज समझने की कोशिश करिएगा सबसे इंपॉर्टेंट क्या होता है कि किसकी टेरिटरी के आसपास पे है और इंडिया के ऊपर में इंपैक्ट इसका क्या पड़ेगा वह भी हम डिस्कस करते हैं। लेकिन सबसे पहले यह टॉपिक बिलकुल क्लियर है। सबसे पहली बात तो ये इंडिया के लिए क्या पॉजिटिव है कि इंडिया जो की जो फॉरेन पॉलिसी है जिसमें हम लगातार ये बात करते थे कि मॉरीशियस का इस पे क्लेम है। तो एक तो वो डीलोनाइजेशन वाला जो एस्पेक्ट है उसके लिए हमारे लिए

15:29 क्या है? विनविन सिचुएशन है। फर्स्ट पॉइंट। दूसरा पॉइंट यहां से आप कनेक्ट करने की कोशिश करेंगे कि इंडिया के लिए क्या है चीज? तो ये एक तरीके से ये एक तरीके से यूके एंड यूएस के लिए एक सेटबैक है। एक क्योंकि यूके एंड यूएस इंडिया का विरोध इसलिए भी कई बार करते थे क्योंकि हम मॉरीिशियस का साथ देते थे। तो ये भी एक चीज देखेंगे। तीसरा यहां से आप समझने की कोशिश करेंगे कि ये जो डियागो गैसिया है क्योंकि यहां पर यूके एंड यूएस की प्रेजेंस होने के कारण में जो चगोज़ आइलैंड में इंडिया की इंगेजमेंट उतनी नहीं हो पाती थी। अब हमारे मॉरीशस के साथ में अच्छे रिलेशन हैं और ये जो चगोज़ आइलैंड है ये हमारी क्लोज प्रॉक्सिमिटी में है। तो ये हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट हो जाएगा। तो ये सारी की सारी चीजें हैं। प्लस में इससे मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि इंडिया

16:14 एंड यूएस के रिश्ते क्या होंगे? थोड़े से और गड़बड़ हो सकते हैं। तीसरा और चौथा पॉइंट अगर आप कनेक्ट करना चाहेंगे कि 99 इयर्स के लिए लीज़ पर क्यों लिया है? लीज़ पर इसीलिए क्योंकि वो चाइना को भी काउंटर करना है। आप देखेंगे ना क्योंकि इंडियन ओसियन में चाइना कई बार मैं आपको बताता हूं कि चाइना इंडियन ओसियन में अपने बेस बनाना चाहता है। क्यों बनाना चाहता है? वो ये डियागो गैसिया जो बेस है यूएस का उसको काउंटर करना चाहता है। ठीक है? ठीक है? रजत हमने सोचा नहीं। रजत रजत का क्वेश्चन है कि सर इंडिया की प्रेजेंस ऐसी क्यों नहीं है? हमने नहीं सोचा। हम हमेशा वही वह ज्ञान वाले पोश्चर में रहे कि हम युद्ध नहीं करना चाहते हैं। हम कभी भी किसी टेरिटरी को नहीं चाहते हैं। हम ऐसा नहीं चाहते हैं वैसा नहीं चाहते। और इंडिया के अंदर में जैसे फॉर एग्जांपल यार

17:00 मतलब कितनी बार वही चीज दोहरवाओगे। ये बांग्लादेश में जो चीजें हो रही है वो क्यों हो रही है? क्योंकि हमारे पास्ट में हमने ऐसी गलती करी है। उसमें भी हम ज्ञान ही तो दे रहे थे ना कि अरे हमें कुछ नहीं चाहिए। हमने ये कर दिया है। अब आप खुद सोचो यूएस अगर होता तो यूएस क्या ये वाली मतलब एक छोटा सा क्योंकि आपने डिस्कस कर लिया है तो यहां पर एक और चीज मैं आपके साथ डिस्कस करता हूं कि इंडिया की फॉरेन पॉलिसी आइडियलिस्टिक फॉरेन पॉलिसी थी। हम आइडियलिज्म में ज्यादा जीते थे। ठीक है? हम आइडियलिज्म के अंदर में ज्यादा जीते और ये आप अगर फॉरेन पॉलिसी कभी पढ़ते हो तो वहां पर आपने देखा होगा इंडिया की फॉरेन पॉलिसी के अंदर में हम आइडियलिस्टिक आदर्शवादी इन सब चीजों के ऊपर में क्या

17:46 करते थे? हम बात करते थे। ये पॉइंट आपने पढ़ा होगा। एंड रीसेंट टाइम के अंदर में ये सबसे बड़ा चेंज हमें देखने को मिला कि आइडियलिज्म से हम रियलिज्म की तरफ में गए हैं। तो अगर फॉरेन पॉलिसी को आप देखते हैं तो दो हिस्सों में उसको डिवाइड किया जाता है। एक होता है रियलिज्म और एक होता है आइडियलिज्म। तो रियलिज्म क्या होता है? जहां पर आप कहते हो कि हमारे लिए क्या बेनिफिशियल है नेशनल इंटरेस्ट के लिए और उसके लिए कुछ भी हमें करना पड़ेगा हम करेंगे और आइडियलिज्म में क्या होता है कि आप कहते हो नहीं आइडियल सिचुएशन क्या है भाई इस समय पर क्या हो सकता है हमें अच्छा आदर्शवादी सिचुएशन में हमें क्या करना चाहिए ये चीज होती हैं तो इसीलिए आप देखेंगे कि इंडियन फॉरेन पॉलिसी को रियलिज्म साथ में रियल पॉलिटिक भी बोला जाता है रियल पॉलिटिक पावर यह भी इस समय

18:33 के लिए वर्ड यूज़ किया जाता है। तो इस समय पर हम रियलिज्म की तरफ में ज्यादा जा रहे हैं। जैसे मैं एक और एग्जांपल देने की कोशिश करूंगा। अगर आइडियलिस्टिक सिचुएशन होती तो क्या होता? म्यांमार के अंदर में कूप हुआ था। है ना? तख्तापलट हुआ था। तो इंडिया क्या करता? इंडिया कहता कि भाई साहब हमारे प्रिंसिपल्स ये कहते हैं कि हम उन कंट्रीज के साथ में इंगेज नहीं करेंगे जहां पर डेमोक्रेटिक गवर्नमेंट नहीं है। हमारे आइडियल्स ये कहते हैं। है ना? यह चीज आप समझ रहे हैं। लेकिन क्या है? अब हम रियलिज्म की तरफ में जा रहे हैं। हम कह रहे हैं भाई साहब म्यांमार में भले ही किसी की भी सरकार हो, चाहे मिलिट्री रूल हो। हमें ये देखना है ये हमारे लिए क्यों इंपॉर्टेंट है। ये एग्जांपल आप देख सकते हैं। फॉर एग्जांपल आपको एक और एग्जांपल दूं। रशिया यूक्रेन वॉर हुई

19:20 थी। तो अगर हम आइडियलिज्म में होते तो हम रशिया से कोई भी प्रकार की बातचीत नहीं करते। लेकिन भारत ने क्या कहा? नहीं भाई साहब रशिया से ऑयल भी खरीदेंगे और उसी ऑयल को कन्वर्ट करके यूके कंट्रीज को बेचेंगे भी यूरोपियन कंट्रीज को भी बेचेंगे। ये है रियलिज्म। एक और एग्जांपल देता हूं। जैसे तालीबान के साथ में हमारे रिश्ते थे। अगर आइडियलिज्म होता तो हम तालीबान के साथ में अभी बात नहीं कर रहे थे। लेकिन अभी हम क्या कर रहे हैं? रियलिज्म को फॉलो कर रहे हैं। इसलिए आप देखेंगे हम तालीबान के साथ भी बात कर रहे हैं बैक डोर चैनल में। तो यह चीज आपको समझ में आ रही है कि यह जो क्वेश्चन आता है कि इंडिया ऐसा क्यों नहीं कर पाया? तो उसके पीछे में ऐसा नहीं है कि भारत के पास में पावर नहीं थी। अगर भारत के पास में पावर नहीं थी तो पाकिस्तान को दो हिस्सों में डिवाइड नहीं किया जाता। इंडिया के पास में पावर थी। हमेशा से पावर

20:07 थी। ऐसा नहीं है कि भारत कभी भी पावरफुल नहीं रहा है। लेकिन बात यही है वो जो हम हमेशा से क्या हमेशा हर किसी की ना पॉलिसी फॉरेन पॉलिसीज उनके कुछ आइडियल्स के ऊपर में चलती हैं। तो हमारी फॉरेन पॉलिसी हमेशा से आइडियलिज्म वाले आइडियल्स के ऊपर में चली है जो कि गलत नहीं है। अगर देखा जाए तो आइडियलिस्टिक ही चीजें होनी चाहिए। लेकिन अगर आप दूसरे वर्ल्ड की दूसरी कंट्रीज को देखेंगे। ठीक है? जब दूसरी कंट्रीज को देखेंगे तो वहां पर नजर आता है कि उनके रियलिज्म आइडियलिज्म के ऊपर में ज्यादा हावी होते हैं। ऐसा नहीं है कि आप सिर्फ और सिर्फ रियलिज्म को फॉलो कर सकते हैं या फिर आइडियलिज्म को फॉलो कर सकते हैं। आपको एक बैलेंस बनाना पड़ेगा। किसी जगह पर आपको रियलिज्म भी फॉलो करना पड़ेगा। किसी जगह पर आइडियलिज्म भी फॉलो करना पड़ेगा। तो जो वेस्टर्न कंट्रीज हैं, जो यूरोपियन कंट्रीज हैं, जो यूएस है, इवन जैसे आप चाइना को देखते हैं, उनका जो

20:54 रियलिज्म है, वो हावी है आइडियलिज्म के ऊपर में और वही फॉरेन पॉलिसी को हम क्या कर रहे हैं? समय पर अपना रहे हैं। ठीक है? जैसे फॉर एग्जांपल देता हूं। मैं एक थ्योरी आपके सामने रख के जा रहा हूं। आपको क्या लगता है कि इंडिया और पाकिस्तान के बीच में जो वॉर हुई थी और उसके बाद में जो अफगानिस्तान क्रिएट हुआ था वो क्यों हुआ था? दरअसल आप सभी को मैं बता दूं कि यूएस हमेशा से चाहता था इस साउथ एशिया में भी अपनी प्रेजेंस बनाना। आप खुद सोचो नेटो के थ्रू यूरोप में है। साउथ ईस्ट एशिया में है। वहां पर जापान और क्या नाम साउथ कोरिया के थ्रू आपके वेस्ट एशिया के अंदर में भी है। है ना? है ही। इंडियन ओसियन में इधर अफ्रीकन कंट्रीज के पास में भी आ चुका है। ये भी चीज आप देख रहे हैं। अब बात अगर करें साउथ एशिया जो पूरा इंडिया वाला सबक्टिनेंट है वहां पर यूएसए नहीं

21:40 है। तो यूएसए पाकिस्तान के साथ मिलकर जो आपका ईस्ट पाकिस्तान उस समय पर हुआ करता था जिसको आज बांग्लादेश आप जानते हो। वहां पर अपनी इंगेजमेंट इनक्रीस करना चाहता था। वहां पर अपने प्रेजेंस बनाना चाहता था। तो एक थ्योरी यह कहती है कि रशिया यानी कि यूएसएसआर ने इंडिया के साथ में मिलके पाकिस्तान को क्या किया? दो हिस्सों में ब्रेक किया। और जो यूएसए के सपने थे जो ईस्ट एशिया के अंदर में अपना एक मिलिट्री एक नेवल बेस क्रिएट करने का उसको क्या किया था? हमने रोल आउट कर दिया था। कैंसिल कर दिया था। एंड अगर आज के 2025 की चीजों को आप सीक्वेंस को क्या करोगे? नोट करना शुरू करोगे। तो यूएसए ने क्या किया है? दोबारा वही किया है। डीप स्टेट को एक्टिवेट किया। बांग्लादेश में ओवरटर्न किया। अपने पर्सन को वहां पर नॉमिनेट किया

22:26 यूसुफ को। उसके बाद में कहा कि हम यहां पर अपना क्या करेंगे? एक बेस बनाएंगे। और उसी के लिए उनकी नेवी के उनके फर्सेस के जो प्रमुख हैं वो वहां पर पहुंच भी गए। बातचीत ऑलमोस्ट चल ही रही थी। अब इसी बीच में आता है कि यूसुफ को बोल दिया गया है कि भाई जल्द से जल्द क्या करो? रिजाइन करो। तो ये सब चीजें आपस में इंटरकनेक्टेड ही हैं। इंटरकनेक्टेड ही हैं। ठीक है? तो रियलिज्म और यह आइडियलिज्म वाली बात समझ में आ गई है? ठीक है? क्लियर है किसी को भी कोई डाउट इससे रिलेटेड? तो ये प्रीलिम्स के अंदर में क्वेश्चन आएगा। ठीक है? ये प्रीलिम्स के अंदर में क्वेश्चन आएगा। और रियलिज्म और आइडियलिज्म भी चलो आपने आज डिस्कस कर लिया। मतलब ये तो क्वेश्चन हर कोई पूछ ही सकता है ना कि यार ऐसा क्या रहा कि भूटान अलग है, नेपाल अलग है, श्रीलंका अलग है। श्रीलंका जैसी सिचुएशन

23:11 जो कि हमारे लिए इतना ही ज्यादा इंपॉर्टेंट है। आप सोचिए जो हम क्या नाम है? हम कोको आइलैंड की बात करते हैं। कितना इंपॉर्टेंट है आइलैंड? इनको हम सभी ने क्यों दे दिया? वो अब आइडियलिज्म की तरफ में थे। ठीक है? तो आगे बढ़ते हैं और आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूं कि स्टडी आईक्यू आईएस पर परसों से एक बैच शुरू हो रहा है। तो आप सभी उस बैच में एनरोल कर सकते हैं। उस बैच के अंदर में एनरोल करने के लिए आपको पीआरटी लाइव कोड यूज़ करना पड़ेगा। ठीक है? चल तो ये है क्या नाम है? Instagram और tlegram प्रोफाइल। आप फॉलो कर सकते हैं। नेक्स्ट टॉपिक है नॉर्थ ईस्ट। नॉर्थ ईस्ट भी इसी चीज से रिलेटेड है। रियलिज्म और आइडियलिज्म से ही रिलेटेड है। सर व्हाई ओनली ब्रिटिश रूल्ड इन मेनी कंट्रीज? क्योंकि ब्रिटिश उस समय पर सुपर पावर हुआ करते थे। इवन ब्रिटिशर्स ने ही यूएस को भी

23:58 रूल किया था एक समय पर। आप सभी को पता होगा। है ना? तो सबसे ज्यादा पावर सबसे ज्यादा इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन की जब हम बात करते हैं सबसे ज्यादा पैसे की बात करते हैं तो उस समय पर उन्हीं के पास में था। और ऐसा नहीं था कि क्या उनके पास में कोई सुप्रीमेसी थी। आप उस वो ना उनका एक मैकेनिज्म था। जैसे कैसे फॉर एग्जांपल ट्रेड रूट के लिए आए। ट्रेड रूट के लिए आए तो और जब नीचे की तरफ और यूरोपियन वर्ड्स यूज़ करते हैं हम। यूरोपियन का मतलब क्या? आपके डच भी आ गए, आपके फ्रेंच भी आ गए। सारे के सारे लोग इन्होंने रूल करने की कोशिश करी। तो ये ट्रेड रूट्स को क्या करना चाहते थे? कंट्रोल करना चाहते थे। तो ट्रेड करने के बहाने ये हर जगह पर गए हैं। हर जगह पर इन्होंने ट्रेड करने के बहाने ही गए हैं कि भाई हम यहां पर ट्रेड करना चाहते हैं। हम बिज़नेस करना चाहते हैं। तो हमारे यहां के बढ़िया-बढ़िया लोग होते थे। आपस में लड़ते थे सब के सब। उनको लगता था

24:44 जैसे आपस में आजकल पड़ोसी भाई-भाई की लड़ाई होती हुई थी तो किसी दूसरे को बुला लिया जाता था। ऐसे बहुत सारी चीजें होती थी। तो वहां पर सेंस ऑफ यूनिटी एक ये बहुत बड़ा कारण था जिसके कारण में आप देखेंगे कि इंडिया के अंदर में वो रूल कर पाए और वहां पर क्या किया उन्होंने धीरे-धीरे करके अंदर की तरफ में आना शुरू किया। सबसे पहले कहते हैं एक फैक्ट्री लगा लेते हैं। तो व कहते हैं हां भाई फैक्ट्री लगा लो कोई दिक्कत नहीं है। हमारे राजा महाराजा बढ़िया खा पी रहे थे। ऐसा ऐश कर रहे थे। तो फैक्ट्री जब लगाई तो उनसे कहा गया कि अच्छा यार ये फैक्ट्री अच्छा एक और चीज मतलब सॉरी बट इसके अंदर में आप देखेंगे कि जो सेट ऑफ इन्वेशंस हैं जब हम सेवंथ सेंचुरी से पढ़ना शुरू करते हैं तो उसने वो सेंस ऑफ यूनिटी को वहीं से ब्रेक करना शुरू किया था। अगर आप इंडिया की इंडियन गवर्नमेंट का स्टांस देखते हैं जो बजट अगर आप पढ़ते हैं कभी भी तो एक और चीज आप नोट

25:30 करिएगा कि हमेशा हम जिक्र करते थे कि ये जो ब्रिटिशर्स इंडिया में आए या फिर कह लीजिए यूरोपियंस इंडिया में आए एडवेंट ऑफ यूरोपियंस वर्ड यूज़ किया जाता था। लेकिन पिछले चारप सालों से गवर्नमेंट यह बार-बार इवन यूनाइटेड नेशंस के अंदर में प्राइम मिनिस्टर ने स्पीच में ही बोला कि अगर सेट ऑफ इन्वेजंस देखे जाए तो ब्रिटिशर्स का ही नहीं है बल्कि इंडिया ने सेट ऑफ इन्वेशंस सेवंथ सेंचुरी से फेस कर रहा है लगातार और जब आप सोचिए 700 या फिर कह लीजिए सेवंथ सेंचुरी से अगर आपको लगातार इन्वज़न हो रहे हैं तो वहां पर क्या होगा 17th नहीं सेवंथ सेंचुरी की बात कर रहा हूं। सेवंथ सेंचुरी तो वहां पर ये प्राइम मिनिस्टर की स्पीच के अंदर में था कि सेवंथ सेंचुरी और यूनाइटेड नेशन ऑफिशियल स्पीच की बात कर रहा हूं। मैं कोई पॉलिटिकल रैली की बात नहीं कर रहा हूं कि वो कंटीन्यूअस जो

26:17 इन्वज़ंस थे उन्होंने सेंस ऑफ यूनिटी को सेंस ऑफ जो कहते हैं ना सेल्फ कॉन्फिडेंस को उसको ब्रेक करना शुरू किया था। दैट इज व्हाई आप देखेंगे कि हम बार-बार बात करते हैं कि डीलोनाइज करना है। हमारे जो माइंड के अंदर में एक तरीके से सेंस ऑफ इनफीरियरिटी क्या हो चुकी है? घर कर चुकी है। ठीक है? वो सब चीजें हम डिस्कस करते रहेंगे। लगातार वो सब टॉपिक हैं। ठीक है? चल तो अब नेक्स्ट टॉपिक देखते हैं। नॉर्थ ईस्ट की हम बात कर रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट की हम बात कर रहे हैं। यानी कि आप देखेंगे जिसको हम अष्टलक्ष्मी भी बोलते हैं। ये प्लीज नोट करिएगा। बहुत इंपॉर्टेंट ये प्रीलिम्स के अंदर में क्वेश्चन आएगा। अष्टलक्ष्मी फेस्टिवल लास्ट ईयर क्या किया गया था? सेलिब्रेट किया गया था। तो यहां पर आप समझने की कोशिश करिएगा। इस चीज के अंदर में सबसे बड़ा एक इंपॉर्टेंट पॉइंट ये है कि यहां पर हम कंटीन्यूअसली कई सारे

27:03 इन्वेस्टमेंट के समिट करते रहते हैं। तो उस इन्वेस्टमेंट के समिट के अंदर में एक और समिट हुआ है राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट। ठीक है? और उसके कारण में आप देखेंगे यहां पर नॉर्थ ईस्ट में कौन-कौन से क्या नाम है? बिज़नेस सेटअप हो सकते हैं। फॉर एग्जांपल ठीक है? जैसे आप देखेंगे बिजनेस के साथ-साथ में यहां पर सॉफ्ट इंडस्ट्रीज कैसे इंपॉर्टेंट रोल प्ले कर सकती हैं। यहां पर जॉब क्रिएशन कैसे हो सकता है? क्योंकि जो नॉर्थ ईस्ट है वो एक गेटवे है साउथ ईस्ट एशिया के लिए। यही बात मैं बार-बार कह रहा हूं। यही बात मैं बार-बार कह रहा हूं। ये मेंस के अंदर में क्वेश्चन आएगा। ये नॉर्थ ईस्ट के अंदर में स्टेबिलिटी हमारे साउथ ईस्ट एशिया के लिए क्या है? एक तरीके से गेटवे है। ठीक है?

27:48 क्या कह रहे हैं? इन्वजन के बाद यूनिटी बढ़ेगी। नहीं भाई, बढ़ती कैसे है? वीक हो गए। हर किसी को अपना-अपना लालच दिखने लग गया। अपना-अपना फायदा दिखने लग गया। तो मतलब ये कहां से आप कैसे कह सकते हैं? आप वो वाली भूल जाओ। थ्योरीज और मूवीज वाली बातें भूल जाओ कि किसी ने अटैक किया, हमला किया तो आप सब एक हो जाओगे। नहीं हर कोई अपने आप को बचाने के लिए भाग रहा था। और वो मल्टीपल इन्वेशंस ने आपने देखा होगा कि इंडिया को अलग-अलग सूबों में, अलग-अलग राजाओं में, अलग-अलग उन चीजों में क्या किया था? डिवाइड कर लिया था। ये चीज आप सभी देखेंगे। ठीक है? तो अगर आप देखते हैं ये हमारा प्यारा भारत है और प्यारे भारत के अंदर में जब यहां पर हम ज़ूम करते हैं तो ये हमारा नॉर्थ ईस्ट हमें नजर आता है। ठीक है? अब इसके अंदर में देखेंगे आप सभी अरुणाचल प्रदेश हो गया, नागालैंड हो गया, मणिपुर हो गया, मिजोरम हो गया, त्रिपुरा हो गया, मेघालय हो गया, असम हो गया। एंड

28:35 इवन आप सिक्किम को भी इसमें अष्टलक्ष्मी के अंदर में ऐड कर सकते हैं। और अगर आप देखते हैं मैप के थ्रू देखेंगे तो मैं कई बार कहता हूं ना कि नॉर्थ ईस्ट हमारा गेटवे है साउथ ईस्ट एशिया के लिए। यही वर्ड यूज़ कर रहे हैं कि जो साउथ ईस्ट एशिया है उसके लिए गेटवे है नॉर्थ ईस्ट। तो नॉर्थ ईस्ट के अंदर में अभी सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या है? यहां पर इंसर्जेंसी भी एक प्रॉब्लम है। प्लस में यहां पर पीस का नहीं होना। एंड जो यूथ हैं उनके मन में एक तरीके से क्या कहना डिसफेक्शन होना बिल्कुल एक थोड़ा सा प्रॉब्लम मतलब कह रहा मैं कि हम मेन स्ट्रीम से कनेक्टेड नहीं है सारी चीजें होना। ठीक है? तो ये नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए कई लेवल पर इंपॉर्टेंट है। सबसे पहले अगर देखा जाए मैं नेचुरल उसकी बात करता हूं। तो इसको कहा जा सकता है कि ये

29:21 लंग्स हैं हमारे देश के क्योंकि सबसे ज्यादा आपको ग्रीनरी यहां पर देखने को मिलेगी। तो इकोसिस्टम के लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। आप देखेंगे हमारी कल्चरल लेवल पर भी अगर देखते हैं तो ट्राइब्स सबसे ज्यादा यहां पर आपको देखने को मिलेंगे। इवन आप अगर यहां पर देखते हैं तो हमारे बॉर्डर के साथ में हमारी स्ट्रेटेजिक अगर सिक्योरिटी की बात भी करते हैं तो भी हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। इवन आप देखेंगे जब हम कनेक्टिविटी की बात कर रहे हैं किसके साथ में? साउथ ईस्ट एशिया के साथ में। आप फॉर एग्जांपल म्यांमार के साथ में थाईलैंड, वियतनाम। तो यहां पर कनेक्टिविटी के लिए क्या है? ये आपके लिए कनेक्टिविटी के लिए भी क्या है? बहुत ही इंपॉर्टेंट है। एंड इसलिए आप देखेंगे कि ये नॉर्थ ईस्ट को हम हमारी हर पॉलिसी का सबसे इंपॉर्टेंट हिस्सा मानते हैं। ठीक है? ये चीज आप समझने की कोशिश करिए। पहले हमारी पॉलिसी हुआ करती थी लुक

30:09 ईस्ट। यानी कि भारत के ईस्ट की तरफ में देखना है। क्या करना है? जो ये भारत है हमारा प्यारा भारत इसके ईस्ट की तरफ में देखना है। अब हमने इसको कहा है कि एक्ट ईस्ट और एक्ट ईस्ट के अंदर में हमने कहा हमारा जो नॉर्थ ईस्टर्न रीजन है वो हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। अगर यहां पर डेवलपमेंट होगी, यहां पर पीस इस्टैब्लिश होगी, तो यह क्या करेगा? यह चेंज कर देगा। हमारे जो डायनामिक्स हैं, हमारा जो इंटरेक्शन है साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज के साथ में। ठीक है? अब आप सभी एक और चीज समझिएगा। ये साउथ ईस्ट एशिया हमारे लिए क्यों इंपॉर्टेंट है? ये फाइनेंशियली भी बहुत इंपॉर्टेंट है। इकोनॉमिकल लेवल पर हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। आप सभी जानते हैं कि यहां पर हम क्या कर सकते हैं? बहुत चीजें एक्सपोर्ट इंपोर्ट कर सकते हैं। ये सारी चीजें प्लस में यहां पर

30:54 चाइना के इन्फ्लुएंस को काउंटर करने के लिए हमारे लिए काफी ज्यादा इंपॉर्टेंट है। ठीक है? और दैट इज व्हाई हमारे बहुत सारे प्रोजेक्ट्स यहां पर चलते रहते हैं। इवन हम जो एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस उनके साथ में क्या कर रहे हैं? इंगेज कर रहे हैं। लेकिन इस पूरे नॉर्थ ईस्ट में अभी तक की सबसे बड़ी प्रॉब्लम रही है पीस का नहीं रहना, स्टेबिलिटी का नहीं रहना। तो पीस एंड स्टेबिलिटी कैसे आएगी? हर किसी का ये क्वेश्चन था। तो गवर्नमेंट कहती है कि पीस एंड स्टेबिलिटी जब जब आएगी जब यहां पर इन्वेस्टमेंट होगी। यहां पर जब जॉब अपॉर्चुनिटीज क्रिएट होनी शुरू होंगी। जो यूथ है वो जॉब में इंगेज होना शुरू होंगे। यहां पर कनेक्टिविटी इंक्रीज होगी। यहां पर रोड बनेंगे। यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप होगा। प्लस में साथ में ये भी एनश्योर करना है कि जब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप हो तो यहां के जो लोकल कल्चर हैं, लोकल जो रिचुअल्स हैं उनको किसी भी प्रकार से क्या किया जाए?

31:41 हर्ट ना किया जाए। ये प्लीज समझिएगा। दोनों दोनों में बहुत बड़ा फर्क है। नॉर्थ ईस्ट की इन्वेस्टमेंट को आप वैसे इन्वेस्टमेंट नहीं समझ सकते जैसे कहीं प्लेन में इन्वेस्टमेंट करी जाती है। नॉर्थ की इन्वेस्टमेंट वहां के लिए होनी चाहिए और वहां के लोगों के लिए होनी चाहिए। ठीक है? जिससे वहां के जो लोग हैं जो नॉर्थ ईस्ट के लोग हैं वो मेन स्ट्रीम के साथ में कनेक्ट कर पाएं। और जब वो मेन स्ट्रीम के साथ में कनेक्ट करेंगे तो वो बाय डिफॉल्ट हमारी नेशनल ग्रोथ में भी कंट्रीब्यूट करेंगे। उनकी भी ग्रोथ होगी। साथ में हमारे जो हम एक्ट इस पॉलिसी की बात करते हैं उसके साथ भी कनेक्शन इस्टैब्लिश होगा। एंड दैट इज व्हाई आप देखेंगे कि हम बार-बार कहते हैं कि हमें यहां पर बायोइकोन इकोनॉमी के अंदर में टी प्रोडक्शन में, बमबू के प्रोडक्शन में,

32:27 स्पोर्ट्स में, इको टूरिज्म इसके ऊपर में क्या करना पड़ेगा? हमें काम करना पड़ेगा। ठीक है? एंड इसीलिए आप देखेंगे कि बहुत सारे स्कीम्स शुरू करेंगे। इवन जो नॉर्थ ईस्ट है उसके डेवलपमेंट के लिए बकायदा एक मिनिस्ट्री है और हर समय पर ऐसे समिट होते रहते हैं। अब जैसे राइजिंग नॉर्थ ईस्ट समिट है ये क्या है? ये इन्वेस्टमेंट समिट है। इन्वेस्टमेंट समिट के अंदर में बहुत सारे लोग बड़े-बड़े जैसे आपके अंबानी साहब, आपके अडानी साहब, टाटा साहब बहुत सारे लोग क्या कर रहे हैं? यहां के अंदर में बार-बार कह रहे हैं कि हम यहां पर इतनाइतना क्या करेंगे? इन्वेस्ट करेंगे। ठीक है? क्लियर है? तो ये सारी की सारी चीजें उसी चीज से रिलेटेड है। ये वही तो बता रहा हूं। शिववी का क्वेश्चन है कि सर नॉर्थ ईस्ट पे इतना फोकस क्यों कर रहे हैं? दो कारण है। हां इको फ्रेंडली इको फ्रेंडली शिका दो कारण है। अभी जस्ट बताया

33:12 है कि वो हमारे लिए नेचुरल रिसोर्सेज के लेवल पर ट्राइब्स के लेवल पर देखा जाए। हमारी कनेक्टिविटी हमारी स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी और हमारी जो बॉर्डर कंट्रीज के साथ में लगते हुए एरिया है वो एक बहुत बड़ा कारण है। प्लस में एक और चीज आप देखेंगे। जैसे हम फॉर एग्जांपल कई बार हमारे यहां पर हम सोश सोसाइटी के लेवल पर भी बात करते हैं ना। हमने रिजर्वेशन का प्रोविजन क्यों रखा? कि जो पिछड़ा तबका है उसको हमें आगे की तरफ पुश करना है। ऐसे ही हमारे देश के अंदर में एक हिस्सा ऐसा है जो सही में क्या है? पिछड़ा रह गया है। पिछड़ा एज इन ऐसे रह गया कि जो मेन स्ट्रीम है कभी भी उन्होंने उसके ऊपर में फोकस किया ही नहीं। जो नॉर्थ ईस्ट के अंदर में इंसलजेंसी का कारण क्या है? कि जो नॉर्थ ईस्ट के अंदर में जो वहां पर ह्यूमन कैपिटल है उनका सबसे बड़ी नाराजगी यही है कि हमारे रिसोर्सेज का तो यूज़ किया जा रहा है बट उतना शेयर हमें नहीं मिल रहा है

33:58 डेवलपमेंट के नाते उतने ज्यादा हमारी ग्रोथ और प्रोग्रेस नहीं है। यही एक कारण है ना? तो वहां पर क्या कर रहे हैं? इंडिया यहां पर इसीलिए आप देखेंगे कि पिछले 20 साल में, 10 साल में, 15 साल में हम नॉर्थ ईस्ट के ऊपर में जरूरत से ज्यादा क्या कर रहे हैं? फोकस कर रहे हैं क्योंकि एक और चीज़ समझिए कि यह बॉर्डर के साथ में लगता है। अब बॉर्डर के साथ में लगता है तो बहुत ज्यादा चांसेस हैं कि यह जो वनरेबिलिटीज़ हैं इनका मिसयूज़ कर सकता है चाइना। इनका मिसयूज़ कर सकता है म्यांमार। इनका मिसयूज़ कर सकता है बांग्लादेश और इनका मिसयूज़ कर सकता है पाकिस्तान। एंड इसी के कारण से और इसी कारण से आप देखेंगे कि जो नॉर्थ ईस्ट के अंदर में इंसजेंसी काफी ज्यादा क्या हो चुकी है? बढ़ चुकी है। इवन आप देखेंगे जो ट्राइब्स हैं उनके बीच में कॉन्फ्लिक्ट बढ़ता जा रहा है। और

34:45 वो कॉन्फ्लिक्ट भी कई बार बढ़ाने में क्या है? जो आपके बाहर की ताकतें हैं जैसे फॉर एग्जांपल यूएस हो गया। यूएस का डीप स्टेट हो गया। आपका क्या नाम है? चाइना हो गया। इनका भी बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले इसके अंदर में रहता है। इवन आप जो इंसजेंसी की बात कर रहे हैं। चाइना बहुत सारे सोफिस्टिकेटेड हाई एंड के वेपंस क्या करता है? सप्लाई करता है। बहुत सारे ऐसे ग्रुप्स हैं उनको लगातार यह कहता रहता है कि अरे आपको तो क्या चाहिए? यहां पर आजादी चाहिए और उनको फंडिंग के थ्रू उनको ट्रेनिंग के थ्रू कैसे ट्रेनिंग प्रोवाइड करता है एग्जांपल देता हूं जो आपका भूटान है ना तो भूटान के अंदर में जो साउथ भूटान है वहां पर काफी सारे फॉर एग्जांपल फॉरेस्ट एरिया है तो वहां पर क्या करता है काफी ज्यादा पैसे काफी ज्यादा पैसे के साथ-साथ वेपंस प्रोवाइड करता है जिससे वो जाएं और वहां पर क्या करें इंसर्जेंसी क्रिएट करें ऐसे ही आप देखेंगे बहुत सारे ग्रुप्स हैं उनको वो पैसा प्रोवाइड करता

35:31 है फंडिंग प्रोवाइड करता है कहता है आप इधर आओ म्यांमार के अंदर में म्यांमार में बहुत सारे कैंप्स लगते हैं और वो जाकर क्या करते वहां पर ये इंसजेंसी को क्या करते हैं? काफी ज्यादा बढ़ा देते हैं। ठीक है? तो ये एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है जिसके ऊपर में क्या है कि काम करने की जरूरत है। और हर जगह पर जैसे फॉर एग्जांपल जितने भी इंटरनल सिक्योरिटी का मामला है जैसे फॉर एग्जांपल जम्मू कश्मीर भी देखें आप ख़स्तान मूवमेंट भी देखें आप नॉर्थ ईस्ट भी देखें और इवन आप अपना नक्सलिज्म मूवमेंट भी देखें। हर जगह पर सॉल्यूशन के रूप में एक ही चीज़ देखी जाती है कि डेवलपमेंट टॉक, डेवलपमेंट, इन्वेस्टमेंट, डेवलपमेंट, टॉक और साथ में जॉब क्रिएशन। ये सब चीजों के ऊपर फोकस किया जा रहा है। इसीलिए नॉर्थ ईस्ट के ऊपर में फोकस किया जा रहा है। ठीक है? ठीक है? क्लियर है? ठीक है? क्लियर है ये चीज? समझ में आ रहा है आप सभी

36:18 को? आएंगे। नक्सलिज्म के ऊपर में भी आएंगे। कभी आप नोटिस करना। एक समय था जब आईएसआई और जो डीप स्टेट है उन्होंने जम्मू कश्मीर को सबसे ज्यादा यूज़ किया। जहां पर इंसर्जेंसी को या फिर कह लीजिए सेपरेटिस्ट मूवमेंट को क्या किया? आगे बढ़ाने। अरे भाई इंसर्जेंसी के बारे में बोल तो दिया आप कॉपी पेस्ट कॉपी पेस्ट क्या और इंसजेंसी के बारे में क्या बोलूं? बता तो दिया भाई कि ट्राइबल कॉन्फ्लिक्ट है। क्या नाम में बाहर से चीजें आ रही है उनको ग्रुप को क्या किया जाता है? ट्रेनिंग प्रोवाइड की जाती है। यही तो इंसजेंसी है भाई कि सेपरेटिज्म की बात करना, अलग स्टेट की मांग करना, अलग नेशन की मांग करना, अलग रीजन की मांग करना, अलग बिल्कुल हमें कि हमें बिल्कुल ऑटोनॉमस रीजन चाहिए। ऑटोनमस हमें ज्यादा चाहिए। वो सब चीज की मांग करना। यही तो इंसजेंसी का कारण है। और क्या कारण है?

37:04 ठीक है? हां। अब मैं क्या बताने की कोशिश कर रहा था कि आप सभी ने आजकल नोट किया होगा कि आईएसआई का रोल बहुत ज्यादा था किसके अंदर में? आपके फॉर एग्जांपल जम्मू कश्मीर में। और जम्मू कश्मीर में ये हुआ कि जब से 370 हटा और सिक्योरिटी एस्टैब्लिशमेंट वहां पर जाने लगी। तो एक तरीके से आप देखेंगे कि जो लोकल लोगों में एक सेंस ऑफ क्या नाम है? डेवलपमेंट की तरफ में जाना शुरू हो गया था। ये बात हुई थी। तो इसीलिए आपने नोट किया है कभी कि एकदम से आईएसआई ने ये जो खाली मूवमेंट है इसको ट्रिगर करना शुरू कर दिया था। मतलब अगर आप देखते हैं इंडिया के अंदर में हम तीन जगह की बात करते हैं। ठीक है? तीन जगह की बात करते हैं या चार जगह की बात करते हैं। अगर इंटरनल सिक्योरिटी देखिए एक्सटर्नल सिक्योरिटी का मतलब क्या हो गया कि चाइना के साथ हमारी लड़ाई हो जाए। फॉर एग्जांपल

37:50 आपकी पाकिस्तान के साथ लड़ाई हो जाए। तो यह एक्सटर्नल सिक्योरिटी हो गया। इंटरनल सिक्योरिटी जो कि जीएस पेपर थ्री का हिस्सा है। हमारे देश में कुछ ऐसे ग्रुप हैं जिनके ऊपर में क्या करना है? हमें काम करना है। जिनको कंट्रोल करना है। वो हमारे लिए एक सिक्योरिटी का कंसर्न है। वैसे ही जम्मू कश्मीर में तो जैसे आप देखेंगे पत्थर क्या नाम है? टेररिस्ट जो इंटरनल टेररिस्ट ग्रुप सेपरेटिस्ट अप्रोच ये सब चीजें थी। ऐसे ही आप पंजाब के अंदर में देखेंगे कि वो कहते थे कि हम तो पंजाब को अलग करके क्या करेंगे? हम अह अलग से खाली स्थान बनाएंगे। ठीक है? ऐसे ही आप देखेंगे नॉर्थ ईस्ट के अंदर में जो इंसर्जेंसी की बात कर रहे हैं। जो हम विद्रोह की बात कर रहे हैं जो वहां पर हम वेपंस का यूज करना, कॉन्फ्लिक्ट क्रिएट करना, राइट्स क्रिएट करना, गवर्नमेंट फंक्शनरीज को काम कहीं नहीं करने देना। वो सब चीजें होती थी। डिमांड करना कि हमारा सेपरेट नेशन होना चाहिए, सेपरेटिज्म होना चाहिए, सेपरेट में

38:35 कंट्री बन जाना चाहिए, सेपरेट स्टेट बन जाना चाहिए। ऐसे बहुत सारे इशूज़ हैं। और ऐसे ही आप देखेंगे नक्सलिज्म जो आप उड़ीसा देखेंगे, आंध्र प्रदेश देखेंगे, छत्तीसगढ़ देखेंगे, झारखंड देखेंगे, कुछ एरिया बिहार का भी देखेंगे, कुछ एरिया तेलंगाना का भी देखेंगे, कुछ एरिया क्या नाम है? वेस्ट बंगाल का भी देखेंगे। इस पूरे रीजन में नक्सलिज्म अभी हम पूरा उसके अंदर में बात करेंगे। नक्सलिज्म भी एक इंटरनल सिक्योरिटी का बहुत बड़ा कंसर्न रहता है। तो नॉर्थ ईस्ट हम बार-बार यही बात कर रहे हैं नॉर्थ ईस्ट के अंदर में कि नॉर्थ ईस्ट हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है। और जैसे फॉर एग्जांपल हम यहां की बात करते हैं म्यांमार की। अब म्यांमार के साथ में अगर सोचो हमारा रोड एंड रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ जाए। तो ये क्या करेगा? हमारी क्या नाम है? ट्रांसपोर्ट को हमारे ट्रेड को कितना ज्यादा बेहतर कर सकता है। प्लस में क्या करेगा? हमारी हां किसी भी रीजन की

39:21 स्टेबिलिटी को बढ़ाता है। जब आप क्या करेंगे? इसको कनेक्ट कर लेंगे। बट इसमें प्रॉब्लम क्या आती है? नॉर्थ ईस्ट के अंदर में इंसजेंसी सबसे बड़ी प्रॉब्लम आती है। प्लस में बांग्लादेश का सबसे बड़ी प्रॉब्लम आती है। इसीलिए तो हमने क्या किया था? मल्टीमॉडल कालादन प्रोजेक्ट हमने इसीलिए शुरू किया था ना कि क्या हम क्या करेंगे? हमारे वेस्ट बंगाल से हम म्यांमार में जाएंगे। म्यांमार से फिर मिजोरम से होते हैं। अब नॉर्थ ईस्ट के अंदर में कनेक्टिविटी इंक्रीज करेंगे। तो ये प्रोजेक्ट्स इसीलिए जैसे हाईवेज बनाना रेल अब जैसे आपको ध्यान होगा बांग्लादेश के साथ में भी तो हम काम कर रहे हैं ना आप खुद सोचो नेपाल भूटान बांग्लादेश ये सब कंट्रीज अगर आपस में इंटरकनेक्टेड हो जाए और यहां पर क्या होने लग जाए ट्रेड होने लग जाए रोड बन जाए रेलवे बन जाए तो ये पूरे रीजन की डेवलपमेंट के अंदर में कितनी ग्रोथ कर सकता

40:07 है अरे गिलगित बल्तिस्तान मेरे प्यारे प्यारे दोस्त गिल्गित बल्तिस्तान ये है जो पाकिस्तान ऑक्यूपाइड कश्मीर है ना वहां की हम बात कर रहे हैं वो है गिल्गित बल्तिस्तान ऊपर ऊपर बूचिस्तान इधर है नीचे ये मतलब यार अब वही चीज है ना कि हम छोटी-छोटी बेसिक चीजों के अंदर इतना परेशान होते हैं ठीक है रेलवे प्रोजेक्ट ये सब चीजें क्या करेंगी इसके अंदर में हेल्प कर सकती हैं ठीक है तो ये सब चीजें इसी चीज से आपस में क्या है इंटरकनेक्टेड हैं और ये नॉर्थ ईस्ट के अंदर में तो वहीं पे बात किया गया कि आने वाले समय में यह फ्रंटियर रीजन नहीं बल्कि यह आने वाले समय में फ्रंट रनर हो जाएगा हमारी ग्रोथ के लिए और यह आठ स्टेट मैंने आपको बताया ना अष्टलक्ष्मी इन

40:53 एट स्टेट्स को अष्टलक्ष्मी करके गवर्नमेंट कई बार इसको क्या करती हैं डेमोंस्ट्रेट करते हैं। इवन गवर्नमेंट ने अष्टलक्ष्मी एक इन्वेस्टमेंट समिट बनाई थी जिसके अंदर में इन आठ स्टेट्स के अंदर में इन्वेस्टमेंट के लिए क्या किया था? काफी ज्यादा कहा था कि सभी के सभी इसमें क्या करें? इन्वेस्टमेंट करें। ठीक है? तो याद रख लीजिएगा। अब ये इवेंट इसलिए भी इंपॉर्टेंट है क्योंकि आप सभी देखेंगे बांग्लादेश ने क्या क्लेम किया था? बांग्लादेश ने यह क्लेम किया ना चाइना के पास में जाके कि भाई साहब ये नॉर्थ ईस्ट पूरा का पूरा कट किया जा सकता है। इसका कोई एक्सेस नहीं है किसके साथ में? बे ऑफ़ बंगाल के साथ में सिलीगोरी कॉरिडोर वाला। और इसी कारण से आप देखेंगे बांग्लादेश के साथ में हमने ट्रेड और क्या नाम है? हमने इंपोर्ट इन सब चीजों के ऊपर में रोक लगा दी है। मतलब उनको रोक लिया ना कि हम वहां से क्या गारमेंट्स वगैरह हमारे देश में नहीं आएगा। ठीक है? तो ये सारी की सारी

41:40 चीजें ठीक है तो ये प्लीज याद रखिएगा बहुत इंपॉर्टेंट है ये पूरा का पूरा रीजन इस समय पर वैसे भी काफी ज्यादा न्यूज़ में इवन अभी हम नेक्स्ट टॉपिक भी डिस्कस करेंगे बांग्लादेश वाला तो नॉर्थ ईस्ट ठीक है ठीक है तो ये चीज नोट कर लीजिएगा बहुत इंपॉर्टेंट तो वही वो कह रहे हैं कि आने वाले समय में बांग्लादेश के कारण में और भी ज्यादा इंपॉर्टेंट है नॉर्थ ईस्ट के अंदर में इन्वेस्टमेंट करना जहां पर बांग्लादेश चाइना को बार-बार कह रहा है कि चाइना उसके अंदर में क्या करे इन्वेस्ट करे ठीक है चलिए चलिए तो याद रखिएगा बायोइकोनमी, बमबू, टी प्रोडक्शन, पेट्रोलियम, स्पोर्ट, इको टूरिज्म ये सब आने वाले समय में इस रीजन के अंदर में इमर्जिंग हब के रूप में इसको क्या कर सकते हैं? आगे बढ़ा सकते हैं। और अष्टलक्ष्मी एट फॉर्म्स ऑफ गॉडेस लक्ष्मी उन्होंने इसके अंदर में इसका जिक्र किया था। तो याद

42:25 रख लीजिएगा इस फेस्टिवल के अंदर में हम क्या ब्यूटी कल्चर डायवर्सिटी ऑफ एथ नॉर्थ ईस्टर्न स्टेट्स की हम बात करते हैं। जैसे अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा एंड सिक्किम की हम बात करते हैं। और ये अष्टलक्ष्मी फेस्टिवल उसी चीज से रिलेटेड है। ठीक है? और यह फेस्टिवल किसके द्वारा? नॉर्थ ईस्ट की यूनिक आइडेंटिटी से रिलेटेड, इन्वेस्टमेंट को अट्रैक्ट करने से रिलेटेड, उसके रीजन की ग्रोथ से रिलेटेड ऐसे कई सारे प्लेटफार्म डेवलप किए गए हैं जिसमें क्या किया जा सके? इन्वेस्टमेंट आई जा सके। ठीक है? ठीक है? क्लियर है ये चीज़? किसी को इससे रिलेटेड? किसी को इससे रिलेटेड कोई भी डाउट? ठीक है? किसी को कोई डाउट इससे रिलेटेड बायोइकोनमी मैंने आपको बताया। आप उस

43:12 इकोनमी के अंदर में उस चीज के ऊपर हम फोकस कर रहे हैं जो क्या नाम है? फॉर एग्जांपल सस्टेनेबल है। अब आप सभी जानते हैं कि जो नॉर्थ ईस्ट है नॉर्थ ईस्ट के अंदर में बायोफ्यूल का बहुत ज्यादा क्या है? स्कोप है। नॉर्थ ईस्ट के अंदर में जैसे बंबू का बहुत ज्यादा एस्केप है। स्कोप है। नॉर्थ ईस्ट के अंदर में आप देखेंगे कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट के साथ-साथ में जैसे आप देखेंगे बायोमास का भी बहुत ज्यादा क्या है? स्कोप है। तो उसके ऊपर में फोकस किया जा सकता है। बायो एनर्जी को क्या किया जा सकता है? वहां पर जनरेट किया जा सकता है। इवन इस टॉपिक के अंदर में मैं एन नंबर ऑफ़ टाइम रिपीट कर चुका हूं। इसी टॉपिक के अंदर में बार-बार जिक्र किया गया आशियान। आशियान क्या है? हमारे नॉर्थ ईस्ट का बहुत इंपॉर्टेंट रोल है। इस एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन कंट्रीज के अंदर में भी। ठीक है? तो एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन नेशन कंट्रीज कौन-कौन सी हैं? 10 कंट्रीज हैं। आप देखिए म्यांमार, लाओस, वियतनाम,

44:00 कंबोडिया, थाईलैंड, मलेशिया, ब्रूनाई, फिलीपींस, सिंगापुर, इंडोनेशिया। तो आप खुद सोचिए इसके लिए नॉर्थ ईस्ट कितना इंपॉर्टेंट है? इसके लिए नॉर्थ ईस्ट कितना इंपॉर्टेंट है? हां, प्रोजेक्ट चल रहा है। अनिल भाई, प्रोजेक्ट चल रहा है। जहां पर हम भूटान और नेपाल के साथ में भी हाईवेज के ऊपर में काम करने की बात कर रहे हैं। ठीक? तो आसियान क्या है? एसोसिएशन ऑफ़ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस। यह 1967 में बैंकॉक डिक्लेरेशन से बना था। 10 कंट्रीज़ याद कर लेना। प्लीज़ याद कर लेना। इंडिया इसका हिस्सेदार नहीं है। ये कहीं आप सब के सब लिखा दो कि कहने में आसियान का इंडिया भी है। नहीं इंडिया उसका मेंबर नहीं है। लेकिन हां उसके साथ में हम इंगेज कर रहे हैं क्योंकि हमें वहां पर ट्रेड, डेवलपमेंट क्योंकि बहुत बड़ी पॉपुलेशन वहां पर रहती है। बहुत बड़ी डेमोग्राफी वहां पर रहती है। वो काफी ज्यादा इकोनमिक ग्रोथ कर रहे हैं। इसलिए हम वहां पर इंगेज

44:46 कर रहे हैं। ठीक है? यह तीन चीजें आज इसमें पढ़ेंगे। ट्रंप साहब ने सबसे पहले तो यूरोपियन कंट्रीज को धमकी दी है कि तुम्हारे ऊपर मैं 50% और टेरिफ लगा दूंगा। एक तो यह बात बोली है। ठीक है? दूसरा क्या बोला है? एप्पल को धमकी दी है। एप्पल यानी कि वो सेव वाला एप्पल नहीं कि मोबाइल वाला एप्पल। वो क्या कह रहे हैं कि अगर तुम इंडिया के अंदर में मोबाइल फोन बनाओगे और उनको यूएसए में लेकर आओगे तो तुम्हारे ऊपर मैं 25% टेरिफ लगा दूंगा। क्या करूंगा? टेरिफ लगा दूंगा। ठीक है? ये भी चीज आप देखेंगे। अब साथ में भाई ने एक और चीज बोला है जहां पर हम कह रहे हैं कि वो जो यूएस की

45:32 यूनिवर्सिटीज हैं उनमें फॉरेन से आने वाले स्टूडेंट्स के ऊपर में भी क्या कर रहा है? वो रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। ठीक है? तो ये तीन चीजों के कारण में क्या है? न्यूज़ में काफी ज्यादा है। तो हावर्ड जो कि एक हब रहा है कल्चरल एक्सचेंज का। वहां पर भाई ने बोला है कि बाहर से आने वाले फॉरेन स्टूडेंट्स हावर्ड के अंदर में नहीं आएंगे। तो ये तीन आर्टिकल इसी के अंदर में क्या है? कनेक्टेड है। ठीक? अब इवन आप बांग्लादेश के अंदर में भी देखेंगे। पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है कि कुछ ना कुछ यूएस की दुखती रग दब चुकी है। तभी आप सोचो ना कि एकदम से उसको भाई को क्यों लग रहा है एक समय पर वो भाई यूएस इंडिया का गलबैया दोस्त बना हुआ था। ऐसा क्या हुआ इंडिया और पाकिस्तान वॉर के बीच में कि

46:18 बीच में उसको आना पड़ा। पाकिस्तान को आईएमएफ के द्वारा लोन भी दिलवाना पड़ा। फिर पाकिस्तान को बचाने के लिए बीच में यह कहना पड़ा कि हमने सीज फायर कर दिया। भारत के मना करने के बाद भी बार-बार चिल्लाते रहना कि हमने किया। और इंडिया के अंदर में जब इन्वेस्टमेंट Apple कर रहा है। अब आप यह सोचो ये दादागिरी तो है ना। ये कितनी बड़ी दादागिरी है कि आप एक कंपनी को कह रहे हो कि भाई तुम दूसरे किसी देश में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करोगे। अगर करोगे तो तुम्हारे ऊपर मैं टेरिफ लगा दूंगा। ये कितना ज्यादा है। प्लस में आप देखिए कि बाहर से अब एक और चीज आप देखेंगे। कई बार कहा जाता है, कई बार लिखा भी जाता है कि जैसे जो वीजा वाला फॉर्म है हम कहते हैं कई बार यू जो यूएस के वीजा नॉर्म्स हैं उनका सबसे ज्यादा फायदा इस समय इंडिया को मिल रहा है या फिर चाइना को मिल रहा है। तो उसके ऊपर में रिस्ट्रिक्शन लगा दी। जैसे आप देखेंगे फॉर एग्जांपल ये हावर्ड

47:04 के अंदर में फॉरेन जो क्या नाम है? स्टूडेंट्स हैं वो नहीं आएंगे। वो रोक लगाने का मतलब क्या वो इशोर कर रहा है कि इस समय कहीं ना कहीं यूएसए और इंडिया के बीच में कुछ सही नहीं है। और इसकी जो कहानी है ना वो मानो चाहे ना मानो बांग्लादेश से होकर ही गुजरती है। ये बांग्लादेश से होकर ही गुजरती है। मुझे पर्सनली ऐसा लगता है कि बांग्लादेश में कुछ ना कुछ ऐसा चल रहा है जिसमें इंडिया क्या कर रहा है? काम कर रहा है कुछ। जिसके कारण में जो यूएस की जो क्या नाम है? डीप स्टेट है या यूएस के जो मनचाहा चीजें थी या फिर यूएस जो वहां पर चाहता था यूसुफ के द्वारा वो इंडिया शायद नहीं होने दे रहा है या फिर इंडिया ने इंटरनल लेवल पर वहां पर किसी कूप को क्या किया है आगे की तरफ में बढ़ाया है और शेख हसीना को शायद मेरे ख्याल में वहां पर

47:50 दोबारा से रीस्टैब्लिश करने की कोशिश हो रही है और वो इनको पसंद नहीं आ रहा है ट्रंप को उसी के कारण सारी की सारी चीजें चल रही हैं ठीक है ठीक है तो सब कुछ कुछ ना हां हां यूएस का मतलब ओनली यूनाइटेड स्टेट है। वो कभी भी किसी और दूसरे के बारे में नहीं सोचता। सर ये टेरिफ वॉर हर जगह क्यों चल रही है? हर किसी कंट्री को पावरफुल होना है। हर किसी कंट्री को सामने वाले देश को ये बताना है ना कि देख भाई मैं ज्यादा ताकतवर हूं। ज्यादा हवाई जहाज बनने की जरूरत नहीं है। वो कोशिश कर रहा है इस समय पर यूएस। ठीक है। तो होने दो खराब। अब तो होने दो। कोई दिक्कत नहीं है।

48:35 ठीक है? तो आप देखेंगे जैसे कि उसने क्या बोला कि सिंपल आप सोचो क्या स्टेटमेंट है? क्लियरली बोला कि अगर iPhone ने अपने फोन मतलब Apple ने अपने फोन iPhone इंडिया में बनाए और उसको यूएसए के अंदर में लेकर आया तो क्या किया? उसके ऊपर 25% टेरिफ लगा देगा। तो यह कितनी बड़ी चीज है। यह कितनी बड़ी चीज है कि 25% टेरिफ आप लगाने की बात कर रहे हो अपनी कंपनी के ऊपर में कि अगर दूसरी जगह पर आप मैन्युफैक्चरिंग कर रहे हो और वहां से सामान को लेकर आ रहे हो। तो वो बार-बार कह रहे हैं कि भाई साहब क्या करो हमारे देश में यानी कि यूएस अमेरिका बार-बार ये एप्पल को कह रहा है कि आप अपनी जो फैक्ट्रीज हैं वो सभी के सभी यूएसए में लेकर आओ। बाहर से मैन्युफैक्चरिंग करा कर आने की जरूरत नहीं है। तो इंडिया या चाइना हो गया या मेक्सिको हो गया ये सभी के सभी

49:21 क्या है? चीप लेबर के लिए फेमस है। है ना? तो Apple कोई हमारे ऊपर में दान वगैरह नहीं कर रहा है। जो Apple है उसको दरअसल यहां पर चीप लेबर मिल रही है। सस्ते में उसकी मैन्युफैक्चरिंग हो जा रही है। गवर्नमेंट उनको बहुत सारे रिलैक्सेशन दे रही है। और इस कारण से वो यहां पर मैन्युफैक्चरिंग कर रहे हैं। बट इस तरीके से पुश करना ये शोकेस करता है कि इंडिया के प्रॉस्पेक्ट में थोड़ा सा कुछ ना कुछ चीजें यहां पर चेंज नजर आती है। ठीक? ठीक है? इंडिया को से ट्रंप को प्रॉब्लम क्या है? ग्रोथ। देखो एक चीज समझो। आप कभी किसी एरिया के दादा हो और आपने हमेशा से सोचा है कि क्या नाम भाई मेरे कहने पर यह काम हो जाना चाहिए। अब सपोज़ करो कि आपके कहने से वो काम नहीं हो रहा है या आपके कहने के बाद में भी वो काम नहीं हो रहा

50:07 है। तो इट शोज़ कि आप थोड़ा सा गुस्सा कर जाएंगे। और दूसरा चीज आप मानो चाहे ना मानो। ट्रेड सबसे इंपॉर्टेंट है। ये चीज मैंने आपको ध्यान होगा उसी समय बोला था। ट्रेड सबसे इंपॉर्टेंट है। देखो अह मैं इंफॉर्मेशन कई बार गलत हो सकती है। लेकिन सब कुछ गलत हो जाएगी। ऐसा नहीं है। ठीक है? ऐसा नहीं है। जैसे फॉर एग्जांपल जब ये न्यूज़ आई कि यूएसए के F16 को मार गिराया। F16 यूएसए ने ये प्लेन क्या किए हैं? सप्लाई किए हैं यूएसए को पाकिस्तान को। तो मान के चलो एक खबर गलत हो सकती है। दो खबर गलत हो सकती है। अगर लेकिन यह बोला गया है कि भाई सात या आठ एयरक्राफ्ट को गिरा दिया गया है। इसका मतलब कुछ तो उसके पीछे कहानी होगी। और ऐसा क्या हुआ कि न्यूज़ पर आने के बाद में

50:53 एकदम से पिन ड्रॉप साइलेंस हो गया। तो मैंने ऑलरेडी आपको बताया था ये कई बार मैंने डिस्कस किया है कि मेन जो गेम है रशिया यूक्रेन वॉर में भी क्या गेम चल रही थी? यूएस के वेपन यानी कि वेस्ट के वेपन प्लस में रशिया के वेपन यही गेम चल रही थी। और इसीलिए आप देखेंगे इसीलिए आप देखेंगे पूरे वर्ल्ड के अंदर में वॉर ही क्यों है? पूरे वर्ल्ड के अंदर जो फैक्शन क्रिएट किए गए वो क्यों क्रिएट किए गए हैं कि भाई हमारे वाले वेपन को आप खरीद सको। अगर मान के चलो हर जगह पर पीस हो जाएगी। तो वेपन जैसी इंडस्ट्री क्यों बढ़ेगी? वेपन इंडस्ट्री कभी भी आगे बढ़ ही नहीं पाएगी। और आप देखेंगे चाहे रशिया को देखें चाहे यूएसए को देखें। इवन अब चाइना को भी आप देखें। चाइना भी क्या

51:38 कर रहा है? कमाई का उनका सबसे बड़ा कारण क्या है कि वो वेपंस बेच रहा है। तो अगर इन वेपंस को बेच नहीं पाएंगे तो कैसे काम चलेगा? ठीक है? क्लियर है? तो ये चीज आप समझ रहे हैं कि मेन जो लड़ाई की जड़ शुरू हुई है वो कहां से शुरू हुई है? यूएसए सप्लाइड S16 वेपंस प्लस में इधर राफेल और प्लस में S400 तो यह एक तरीके से मार्केट में एक परसेप्शन बिल्ड करता है कि भाई यूएस की जो कंपनी है या यूएस के द्वारा बनाए गए जो डिफेंस इक्विपमेंट है क्या वो फाइट कर सकते हैं रशिया के द्वारा बनाए गए ठीक है ठीक है अब जो गोल्डन डोम की बात कर रहा है कि हम अपना खुद का एक एयर डिफेंस सिस्टम बना रहे हैं अब एयर डिफेंस सिस्टम की बात एकदम से क्यों आ जाएगी मतलब आप सोचो को आज से 10 दिन पहले

52:24 भाई को नहीं पता था कि एयर क्या नाम है एयर डिफेंस सिस्टम नाम की कोई चीज हम बना रहे हैं। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि जैसे S400 न्यूज़ में आता है तुरंत ट्रंप साहब की आंख खुल जाती है और वो कहते हैं हम भी एक ऐसा वे ऑफ़ डिफेंस सिस्टम बना रहे हैं जो पूरे के पूरे वर्ल्ड को क्या करेगा? चेंज कर देगा। सब कुछ क्या हो जाएगा यहां से? बढ़िया हो जाएगी। तो ये क्या है? यह यही शो के अब आप सोचिए उन्होंने जो इंडिया को पुश करने की कोशिश करी थी यही पुश करी थी ना कि वेपंस हमसे खरीदी दिए यह हमसे कोशिश करी थी अब इंडिया के पास में क्लियर डेमोंस्ट्रेशन है और ये वर्ल्ड के लिए भी डेमोंस्ट्रेशन है वर्ल्ड के लिए भी डेमोंस्ट्रेशन है यूएस के आप समझो इस चीज को थोड़ा सा और

53:10 सीरियस हो के समझो ये चाइना के लिए भी डेमोंस्ट्रेशन हो गया ना ये वॉर जैसे हालात यानी कि ये चीज समझिए कि चाइना को भी तो तो ये समझ में आ रहा है कि भाई यूएसए के वेपन्स कितने कैपेबल हैं और क्या कैपेसिटी है। ठीक है? यूएस ने दी है भाई। यूएस बहुत चालाक है। बहुत चतुर है। बहुत मतलब वो शब्द मैं यूज़ नहीं कर सकता वो है और इसने ये काम किया है और ये जो इंडिया और पाकिस्तान के बीच में जो कॉन्फ्लिक्ट है उसी के बाद से ही सारी की सारी चीजें शुरू हुई हैं। ठीक है? और मैंने कई बार आपके साथ डिस्कस किया है जो मैं पर्सनली उम्मीद करता हूं कि अगर चाइना कुछ मामलों को लेकर अपने क्लेम को छोड़ दे कुछ चाइना को लेकर कुछ चाइना की चीजों को लेकर और इंडिया के साथ में इंडिया के टर्म्स एंड कंडीशन प्लस

53:56 में रशिया ये तीन चीजें अगर ऐड हो जाए। ठीक है? तो ये सब कुछ बहुत बढ़िया काम कर सकते हैं। नहीं एशियन यूनियन नहीं है दोस्त। सार्क की हमने बात करी थी। सार्क की हमने बात की थी लेकिन वह हो नहीं पाया। अरे हां यार मतलब S400 रशिया से है। मैं काफी समय से बोल रहा हूं। पढ़ातेपढ़ाते हो सकता है मैंने गलती से मुंह से निकल गया। मेरे से गलती हो गई। मुझे माफ़ कर दो भाई। ठीक है? वो वाला जो मीम आता है ना मुझसे गलती हो गई। माफ़ कर दो। तो ये वाला काम किया जा सकता है। ठीक? ठीक है? तो ये एक वही चीज है। वही चीज हम बात कर रहे हैं। तो ये ठीक है? तो ये वाली चीज है और मैं डिस्कस यही कर रहा हूं कि ट्रंप ने दोबारा थ्रेट किया है यूरोपियन कंट्रीज को भी कि 50% टेरिफ लगा

54:43 देंगे 25% एप्पल पर लगा देंगे। तो ये चीज नजर आ रहा होगा इस समय पर आपको कि ट्रंप मानो चाहे ना मानो इस समय में इंडिया के अगेंस्ट में सामने खड़ा हुआ नजर आता है और इधर दूसरी तरफ में रशिया इंडिया के फेवर में नजर आता है। ठीक है भाई क्लियर है? ठीक है? क्लियर है यह चीज़? किसी को इससे रिलेटेड डाउट? ठीक। हां, इंडिया S500 परचेस करेगा और उससे अलावा हम अपना खुद का भी क्या नाम एयर डिफेंस सिस्टम बना रहे हैं। ईशा मतलब देखो चांसेस बहुत कम है कि क्या नाम है ये एसएससी के अंदर में इससे रिलेटेड क्वेश्चन आएगा। bricks bricks जैसे आप देखेंगे ब्रिक्स के साथ में दिक्कत क्या है कि चाइना ना अपने एंबिशंस को आगे बढ़ा रहा है। अगर मान के चलो चाइना इन वाली जो चीजें हैं ये फालतू की जो

55:29 बकैती वाली चीजें हैं कि पाकिस्तान को भी घुसा लो हर जगह पर। उसके साथ ये वाला चल रहा है कि किसी भी क्लब में जा रहा है। किसी भी डिस्क में जा रहा है। कहीं भी घूमने फिरने जा रहा है। अपने साथ में क्या है वो लेकर चलता है साथ में पाकिस्तान को। कहता है अरे अरे इसको भी अंदर घुसवा लो। अरे अरे इसको भी अंदर ले चलो थोड़ा सा काम करने के लिए खा पी लेगा। तो वो वाली हरकत अगर छोड़ दे चाइना तो इस समय पर चाइना इंडिया और रशिया एक साथ मिलके बैंड बजा सकते हैं यूएसए की। लेकिन वही है। ठीक है? और मैंने कई बार बोला है कि चाइना को देख लो या फिर रशिया को देख लो। इवन इंडिया को भी देख लो। तो वहां पर आप देखोगे ट्रंप बहुत बड़बोले हैं। ठीक है? बहुत बड़बोला और वो बड़बोलापन आपको नजर आ रहा है इस समय पर है। WHO की साउथ ईस्ट एशिया की रीजनल डायरेक्टर हैं। वो कहते हैं मेडिकल

56:15 ऑक्सीजन के कमी हमें साउथ ईस्ट एशिया में देखने को मिल रही है। इवन ट्रंप तो वो क्या नाम है? वहां के एक कॉन्स्टिट्यूशन ही क्या नाम है? चेंज करना चाहता है। और वो कॉन्स्टिट्यूशन में चेंज करके चाहते हैं कि n नंबर ऑफ़ टाइम हम क्या बन सकते हैं? क्या नाम है? प्रेसिडेंट बन सके ऐसा काम करने वाले हैं क्योंकि आप सभी को पता है ना कि यूएस के अंदर में एक पर्सन दो बार प्रेसिडेंट बन सकते हैं बस खाली तो ट्रंप साहब चाहते हैं कि मैं n नंबर ऑफ टाइम प्रेसिडेंट बन जाऊं इसलिए वहां के कॉन्स्टिट्यूशन में ही चेंज कर दूं। ठीक है? तो ये चीज देखना पड़ेगा कि आने वाले समय पे। ठीक है? मागा मागा मागा मेक अमेरिका ग्रेट अगेन। हां चलो अब देखते हैं। कोविड के समय पर आपको क्या लगता है? सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या थी? नो डाउट बेड की कमी होना। नो डाउट आपके पास में फॉर एग्जांपल हॉस्पिटल्स नहीं थे। फॉर एग्जांपल आप सभी देखेंगे हमारे पास में दवाइयां नहीं थी। ये सब चीजें बहुत थी।

57:02 इवन एक समय ऐसा था जब हमारे पास में पीपीई किट भी नहीं थी। हमने पीपीई किट को भी क्या किया था? मैन्युफैक्चर करना शुरू किया। बहुत चीजें हुई। लेकिन अगर आप देखते हैं कि पूरे के पूरे वर्ल्ड में देखते हैं तो एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम नजर आती है। वो नजर आती है ऑक्सीजन की कमी होना। हमारे मैक्सिमम जो हॉस्पिटल थे जो डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल थे वहां पर भी ऑक्सीजन नहीं था। तो ये कह रहे हैं इस टॉपिक में कि ये प्रॉब्लम सिर्फ और सिर्फ इंडिया में नहीं है। यह प्रॉब्लम पूरे साउथ एशिया में एंड साउथ ईस्ट एशिया में देखने को मिलती है। और यहां पर ये चीज समझने की कोशिश करिए। इसके पीछे दो कारण है। एक सबसे पहला पॉपुलेशन तो कारण है ही कि पॉपुलेशन बहुत ज्यादा है। लेकिन वो कह रहे हैं कि हर कोई ऐसा थोड़ी है कि देश के अंदर में 141

57:49 करोड़ लोग जाकर ऑक्सीजन की मांग करते रहते हैं। ऐसा थोड़ी है। जितनी बेसिक नीड होनी चाहिए उतनी भी बेसिक ऑक्सीजन हमारे पास में नहीं है। समझिए इस चीज को। फिर कह रहा हूं कि ऐसा नहीं है कि हमारे पास में पापुलेशन बहुत ज्यादा है। तो इसका मतलब 200 करोड़ लोग जाकर हॉस्पिटल में खड़े हो जाते हैं कि हमें क्या करिए? हमें जाकर क्या करिए? ऑक्सीजन दे दीजिए। जितनी नीड है उतनी भी ऑक्सीजन नहीं है। अब उसके पीछे का कारण क्या है? उसके पीछे का कारण है सबसे पहला कारण है पैसा। फंड यह सबसे पहला कारण है जो साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया के अंदर में आपको देखने को मिलता है। दूसरा टेक्नोलॉजी ये भी आप देखेंगे। तीसरा बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट कह रहे हैं कि कई जगह पर

58:34 हमारे पास में जो ऑक्सीजन जनरेशन की कैपेसिटी है वह हमने इस्टैब्लिशमेंट कर रखा है। बट हमारे पास में ट्रेंड वर्क फोर्स ही नहीं है। तो यहां पर यह नजर आता है कि साउथ एशिया साउथ ईस्ट एशिया के अंदर में ऑक्सीजन गैप है बहुत बड़ा और उसको ब्रिज करने की जरूरत जिसमें वर्ल्ड को इन्वेस्ट करना चाहिए। एंड हर कंट्री को भी अपने-अपने लेवल पर इन्वेस्ट करना चाहिए जिससे इस ऑक्सीजन गैप को क्या किया जा सके? फिल किया जा सके। ठीक है? ठीक है? तो याद रखिएगा वो क्या कह रहे हैं? ऑक्सीजन एक लाइव सेविंग एसेंशियल मेडिसिन है जिसका कोई सब्सीट्यूट नहीं है। लेकिन आप देखेंगे कि इसकी सप्लाई, मैनेजमेंट, अफोर्डेबिलिटी, क्वालिटी, अवेलेबिलिटी ये सब क्या करते हैं? बहुत इंपैक्ट करते हैं। इवन आप देखेंगे 5

59:21 बिलियन लोग जो हैं वर्ल्ड के अंदर में वो सेफ क्वालिटी एंड अफोर्डेबल मेडिकल ऑक्सीजन उनको मिलता ही नहीं है। यही बात हम बात कर रहे हैं ना कि सेफ और जो क्वालिटी वाला और अफोर्डेबल कम कॉस्ट में मेडिकल ऑक्सीजन मिलता ही नहीं है बहुत सारे देश के अंदर में। ठीक है? और लसेट ग्लोबल हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट कहती है कि जो मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई है वह सबसे ज्यादा साउथ एशिया और साउथ ईस्ट एशिया में सबसे कम है। जिसके कारण में आप देखेंगे इस समय पर अर्जेंट नीड है कि उसको क्या किया जाए? रेक्टिफाई किया जाए। कोविड-19 के समय पर यह वलनेरेबिलिटीज क्या हो गई थी? काफी ज्यादा एक्सप क्या आप सभी के सामने एक्सपोज हो गई थी। ये चीज आपने देखा होगा। जैसे फॉर एग्जांपल जो पर्टिकुलरली लीस्ट डेवलप्ड कंट्रीज लो इनकम कंट्रीज आप

1:00:07 देखेंगे उनके अंदर में आप देखेंगे इमरजेंसी के समय पर ऑक्सीजन ही अवेलेबल नहीं थी। तो इसलिए क्या करने की जरूरत है कि वो कह रहे हैं कि हमें लॉन्ग टर्म में काम करने की जरूरत है जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई करी जा सके। अब यहां पर कई सारे बैरियर्स हैं ऑक्सीजन से रिलेटेड। सबसे पहला आता है शॉर्टेज ऑफ इक्विपमेंट्स। ओनली 54% ऑफ हॉस्पिटल्स जो आप देखिए लीस्ट और मिडिल इनकम जो ग्रुप हैं लो मिडिल इनकम ग्रुप के अंदर में वहां पर पल्स ऑक्सीमीटर्स हैं। 58% के पास में तो मेडिकल ऑक्सीजन ही नहीं है। ये बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। आप नॉर्मल के हॉस्पिटल्स में भी चले जाएंगे। वहां पर जल्दी आपको ऑक्सीजन देखने को नहीं मिलेगा। सबसे पहली प्रॉब्लम ये है। दूसरी प्रॉब्लम क्या आती है? चलो इक्विपमेंट के अलावा क्या होता है कि इक्विपमेंट की अवेलेबिलिटी। साथ में

1:00:53 देखा जाए फाइनेंसियल बर्डन। यह भी एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। ठीक है? प्लस में आप देखेंगे ट्रेंड बायोेडिकल इंजीनियर्स ही नहीं है, टेक्नशियंस ही नहीं है। ऑक्सीजन प्लांट्स भी हैं, कंसंट्रेटर्स भी हैं लेकिन स्किल्ड प्रोफेशनल ही नहीं है कि वो इंस्टॉल कर सके, मेंटेन कर सके और रिपेयर कर सके। तो इसलिए इंडिया को जरूरत है जो हम इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन की बात करते हैं ना। तो मेरे प्यारे दोस्त इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन इसको आप दो टॉपिक से जीएस से कनेक्ट कर सकते हैं। एक देखिए हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर आपके जीएस पेपर टू में आता है। यह चीज आपको ध्यान है और जीएस पेपर थ्री के अंदर में इंडस्ट्री को आप कनेक्ट कर सकते हैं जो मेडिकल ऑक्सीजन क्या कर सकता है? सप्लाई कर सकता है हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को और यह हमें फ्यूचर के लिए क्या कर सकता है? रेडी कर सकता है। इवन आप चाहे तो इसको एजुकेशन सिस्टम से भी

1:01:38 कनेक्ट कर सकते हैं कि हमारे पास में ट्रेंड स्किल्ड बायोेडिकल इंजीनियर्स ही नहीं है। जो काम कर सकें तो उससे भी आप इसको कनेक्ट कर सकते हैं और यह सही में अलार्मिंग है भाई। यह बहुत बड़ा कंसर्न है। मान के चलो अभी आपने देखा होगा दिल्ली के अंदर में दोबारा से कोविड के केसेस आने लग गए हैं। दोबारा से कोविड के केसेस आने लग गए। ऐसा तो है नहीं कि कोविड के केसेस ही आएंगे तभी ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। मैं एक एग्जांपल देता हूं। नॉर्मल सिचुएशन में भी अगर कहीं पर कोई ऑपरेशन वगैरह होता है तो अगर छोटे हॉस्पिटल्स में आप चले जाओगे डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में। इवन मैं आपको ये कहता हूं कि डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल आप गवर्नमेंट के हॉस्पिटल में चले जाओगे। कई जगह पर आपको ऑक्सीजन ही नहीं मिलेगा। अगर ऐसी जरूरत पड़ती है तो आपको तुरंत कहेंगे कि भाई साहब दूसरे एरिया में जाओ। यहां पर

1:02:25 तो नहीं हो सकता। ठीक है? तो ये चीज आप समझ रहे हैं। ये इसलिए बहुत बड़ी प्रॉब्लम है कि आने वाले समय में ऑक्सीजन की डिमांड हो सकता है और ज्यादा बढ़े। ठीक है? तो ये एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है जिसके लिए हम क्या कर सकते हैं? काम कर सकते हैं। तो इंडस्ट्रियल लेवल पर भी इन्वेस्टमेंट इनक्रीस करना पड़ेगा। प्लस में नेशनल गवर्नमेंट्स को भी यहां पर इन्वेस्ट करने की बहुत ज्यादा जरूरत है। ठीक है? क्लियर है? क्लियर है ये चीज? तो मैक्सिमम हॉस्पिटल्स में आप देखेंगे वही आपको ये कहेंगे जी हमारे पास में ऑक्सीजन नहीं है। आप कहीं दूसरी जगह ले जाओ। भाई वंश ने पूछा कि क्या इंडिया को फ्यूचर के डिजास्टर के लिए तैयार रहना चाहिए? सच है भाई। हिस्ट्री अपने आप को रिपीट करेगी। अब हिस्ट्री अगर अपने आप को रिपीट करेगी तो भाई आपको जरूरत है ना इस चीज के लिए कि आप कोविड जैसे अब दोबारा तो वेट नहीं कर सकते कि दोबारा कोविड आएगा ऑक्सीजन की डिमांड पड़ेगी तब करेंगे नहीं अभी से काम

1:03:11 करना पड़ेगा और किसी ने कहा कि करप्शन करप्शन का एक एग्जांपल देता हूं कोविड के समय पर आप सभी को ध्यान होगा ऑक्सीजन की बहुत बड़ी कमी थी है ना ऑक्सीजन सिलडर्स वगैरह नहीं मिल रहे थे ऑक्सीजन भी नहीं मिल रहा था लोग सिलेंडर खरीद ले रहे थे और उसके बाद में उसको भरवाने के लिए घूमते थे इंडस्ट्री उस सब चीजों में घूमते थे तो एक जगह क्या हुआ? फॉर एग्जांपल ऑक्सीजन आई। अब मजे की बात सुनो। ऑक्सीजन आई तो उसके अंदर में हमारे जो नेता जी हैं मिनिस्टर साहब और जो हमारे डीएम साहब हैं वो नहीं पहुंचे थे। थोड़ा सा लेट हो गए थे। मीटिंग्स होती है। इतना सारा काम होता है। मतलब ऐसा तो है नहीं कि वो हमारी तरह अले बैठे हैं। अब आप देखो हॉस्पिटल में ऑक्सीजन चाहिए। लोग मर रहे हैं ऑक्सीजन के लिए। भाग ब्लैक में परेशान हो रहे हैं। लेकिन वहां पर जो ऑक्सीजन पहुंचा हुआ है सिलेंडर के पहुंचे हुए हैं। जो ट्रक पहुंचा हुए हैं बड़े-बड़े वो रुके

1:03:57 हुए हैं बॉर्डर पर। क्यों रुके हुए हैं? क्योंकि जी अभी नेता जी घर से निकले थोड़ा सा कुर्ता वर्ता चेंज करेंगे। थोड़ा सा डीएम साहब अपना चश्मा-वश्मा ठीक करेंगे। अपने कुर्सी के पीछे तौलिया वो लगाएंगे। अपनी जो गाड़ी जिसमें बैठकर आएंगे उस पे तौलिया लगाएंगे। पर्दे लगेंगे। फिर उसके बाद में वो जूते के फीते-वते ठीक करेंगे। फिर घड़ी वड़ी पहनेंगे। फिर उतरेंगे। फिर वो लीन वाली वो थोड़ी सी थोड़ी सी क्रंच वाली शर्ट पहनेंगे। नेताजी भी वो बिल्कुल क्रंच वाली बिल्कुल एकदम से मार चढ़ी हुई बिल्कुल एकदम से वो कुर्ता पहनेंगे फिर उतरेंगे फिर फोटो खिंचवाएंगे फिर वो जाएगा ठीक है फिर वो जाएगा तब जाएगा तो ये सारी की सारी चीजें क्या नाम है होती हैं कभी-कभी जिसके कारण में ऑक्सीजन की कभी-कभी कमी हो जाती है ठीक है ठीक है सर

1:04:43 इतनी एथिक्स पढ़ने का क्या फायदा कोई फायदा नहीं है इवन आप सभी मैं कई बार मेरा प्रश्न होता है ये लोग मुझे कई बार बुरा मान जाते हैं आजकल मेरे से मेरे मेरे खास

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