0:00 डोनल्ड ट्रंप दुनिया में एक रिसेशन लाना चाहते हैं क्यों बिकॉज़ ही बिलीव्स केओस इज अ लैडर अगर अमेरिका को एक सुपर पावर बने रहना है देन रिसेशन इज नॉट एन ऑप्शन रिसेशन इज अ नेसेसिटी ये ये मेरा पूरा वीडियो रेडी था और फिर ट्रंप ने जाकर टैरे्स पर 90 डे का पॉज लगा दिया पूरा प्लानिंग बर्बाद चाइना पर 125% टैरे्स रहेंगे और बाकी के देशों पर 10% ट्रंप ने ऐसा क्यों किया आई एम श्योर यू मस्ट बी कंफ्यूज्ड एज वेल लेकिन एक्चुअली दिस केओस दिस कन्फ्यूजन इज ऑल दैट ही वांट्स आज डोनल्ड ट्रंप थनोस की तरह बन चुके हैं जो एक चुटकी में यूनिवर्स डिस्ट्रॉय कर सकता है लेकिन थनोस के पास भी एक लॉजिक था उसे दुनिया में बैलेंस लाना था वैसे ही ट्रंप
0:46 को भी दुनिया को रिबैलेंस करना है कैसे और इसका आपके वॉलेट पर इंपैक्ट क्या होगा आइए जानते हैं आज के इस वीडियो में अमेरिका को अगर सुपर पावर बने रहना है तो उन्हें यह तीन स्टेप फार्मूला यूज करना होगा स्टेप वन स्टार्ट द फायर स्टेप टू बर्न द वर्ल्ड स्टेप थ्री कलेक्ट द ऐशेज़ और इसी फार्मूला को हम इस वीडियो में एक्सप्लेन करेंगे अगर आपको ऐसे ही जिओपॉलिटिक्स को एग्जाम्पल्स और स्टोरीज के थ्रू समझना पसंद है तो नीचे कमेंट्स में ट्रंप इज़ थनोस स्पैम कर दीजिए अगर 9,000 कमेंट्स आए तो हर कमेंट करने वाले को दो दिन के लिए वाइट हाउस की ट्रिप मिलेगी बिल्कुल फ्री सच्ची पिंकी प्रॉमिस अब आप कन्विंस हो गए या मैं और झूठ बोलूं यह है हमारी नई सीरीज ट्रंप वर्सेस द वर्ल्ड जहां हम डोनल्ड ट्रंप के दुनिया पर
1:31 होने वाले इंपैक्ट को गहराई से देखेंगे वो भी एक इंडियन पर्सपेक्टिव से डॉनल्ड ट्रंप ने दुनिया पर टेरिफ वॉर अनलीश किया है और उसका इंपैक्ट हमारे फाइनेंसियल मार्केट्स पर दिख रहा है जब से ट्रंप ने टेरिफ्स बढ़ाए हैं सारे स्टॉक मार्केट्स क्रैश कर रहे हैं इसी क्रैश में सब लोगों के स्टॉक और म्यूच्यूल फंड पोर्टफोलियोस रेड में है लेकिन लॉजिकली आप किसी भी ऐज के क्यों ना हो आपके सारे के सारे पैसे स्टॉक्स में लगा देना यह सही स्ट्रेटजी नहीं है आपके पोर्टफोलियो का कुछ हिस्सा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में होना जरूरी है जो एक फिक्स रेट पे रिटर्न देते हैं फाइनेंसियल स्टेबिलिटी देते हैं व्हिच इज इंपॉर्टेंट इन दीज़ अनसर्टेन टाइम्स आज फिक्स्ड डिपॉजिट्स 9.1% इंटरेस्ट रेट दे रहे हैं भारत में
2:18 बैंक एफडीस ₹5 लाख तक डीआईसीजीसी ने इंश्योर किए हैं जो एक एडेड सेफ्टी लेयर देता है आप भी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट्स में इन्वेस्ट कर सकते हो विथ द पार्टनर ऑफ़ टुडेेस वीडियो स्मॉल केस स्मॉल केस ऐप पर आप फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स कंपेयर कर सकते हैं ऑनलाइन ही फिक्स्ड डिपॉजिट बुक भी कर सकते हैं विद फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स गोइंग अप टू 9.1% यहां आपको 6 महीने से 5 साल तक के फिक्स डिपॉजिट मिल सकते हैं नो नीड टू गो टू अ बैंक आप पैन और आधार से डिजिटल आईडी वेरिफिकेशन कर सकते हो एंड द बेस्ट पार्ट इज आपको कोई नया बैंक अकाउंट ओपन करना ही नहीं पड़ता यू कैन ट्रैक ऑल ऑफ योर फिक्स्ड डिपॉजिट फ्रॉम वन ऐप एंड मैनेज देम एज वेल 100% डिजिटल एंड पेपरलेस आरबीआई ने हाल ही में अपने रेट्स कम कर दिए है व्हिच मींस फ्यूचर में बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट रेट्स भी कम होने वाले
3:04 हैं सो चेक आउट द लिंक इन आवर डिस्क्रिप्शन एंड बुक योर फिक्स्ड डिपॉजिट ऑन स्माल केस टुडे चैप्टर वन ट्रम्प का मास्टर प्लान ट्रम्प के प्लान का पहला स्टेप है स्टार्ट द फायर ट्रम्प चाहते हैं कि वर्ल्ड ऑर्डर डिसरप्ट हो जाए केओस में चले जाए लेकिन ये थोड़ा कंफ्यूजिंग नहीं लगता क्योंकि अभी तो अमेरिका टॉप पर है वो चीजें बदलना क्यों चाहेगा द आंसर इज डे आज अमेरिका का डेप्ट काफी बड़ा बोझ बन चुका है कितना पता है $36 ट्रिलियन अमेरिका का जीडीपी है 30 ट्रिलियन और डेप्ट है $36 ट्रिलियन यूएस गवर्नमेंट अपने बजट का 13% इंटरेस्ट पेमेंट्स पर खर्च करता है अमेरिका का 30% डेप्ट फॉरेन एंटिटीज जैसे चाइना और जापान ओन करते हैं यूएस गवर्नमेंट खुद कहती है कि 33% ऑफ यूएस डेप्ट विल मैच्योर इन द नेक्स्ट 12 मंथ्स
3:50 इसका मतलब यह है कि यूएसए को $2 ट्रिलियन कहीं ना कहीं से तो रेज करने पड़ेंगे तो यूएस इतने पैसे लाएगा कहां से दिस इज अ बिग प्रॉब्लम फॉर अमेरिका लेकिन फिकर नॉट अमेरिका एक सुपर पावर है वो अपनी करेंसी कुछ इस तरह से मैनपुलेट कर सकता है कि उनका डेप्ट बन जाएगा ज़ीरो क्योंकि अगर रिसेशन आता है तो अमेरिकन सेंट्रल बैंक यानी फेड जो डॉलर को कंट्रोल करती है वो अपने रेट्स गिराएगी जब पेंडेमिक आया और इकॉनमी क्रैश होने लगी तो फेड ने रेट्स गिराए 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद फेड ने रेट्स गिराए और यही पैटर्न ट्रंप जानता है और अब फिर से फेड रेट कम करने वाली है ओके लेट मी टेल यू कि यह सब करने के बाद भी अमेरिका का डेप्ट कम नहीं होगा लेकिन उस डेप्ट की वैल्यू कम जरूर होगी
4:37 इससे क्या होगा इससे डॉलर होल्ड करना कम फायदेमंद होगा क्योंकि डॉलर की वैल्यू गिरेगी एक एग्जांपल के थ्रू समझते हैं सपोज चाइना ने अमेरिका को $1000 डेप्ट में दिए हुए हैं और आज डॉलर और युवान का एक्सचेंज रेट है 7 यू पर डॉलर कल जाकर अगर डॉलर की वैल्यू कम हो जाती है तो एक्सचेंज रेट हो जाएगा से फॉर एग्जांपल 6 यूआर पर डॉलर जब डेप्ट रिटर्न करने की बारी होगी तो अमेरिका तो अपने साइड से $000 रिटर्न कर देगा लेकिन चाइना सोचेगा अरे मेरे हाथ में तो 7000 युवान की वैल्यू होनी चाहिए थी मेरे हाथ में सिर्फ 6000 युवान कैसे आए दिस इज द गेम पिछले वीडियो में हमने एक्सप्लेन किया है कि कैसे ट्रंप चाहते हैं कि डॉलर थोड़ा कमजोर हो जाए बट इतना भी नहीं कि लोग डॉलर को रिजर्व करेंसी की तरह ही यूज करना बंद करें यह सारे गेम्स
5:24 ये टेरिफ वगैरह सब कुछ इसी रीजन से हो रहा है लेकिन यहां पर मेरा एक डाउट है अगर डॉलर सस्ता होता है तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान उनको ही होगा जो सबसे ज्यादा डॉलर पकड़े हुए हैं राइट राइट तो इस लॉजिक से सबसे ज्यादा नुकसान तो अमेरिकनंस का हुआ ना यस बट यहीं पर तो बात सामने आती है दैट अमेरिका इज टू बिग टू फेल चैप्टर टू ट्रंप रिसेशन क्यों चाहता है ट्रंप के मास्टर प्लान का दूसरा स्टेप है बर्न द वर्ल्ड थिंक अबाउट इट दिस वे एक शानदार लश ग्रीन फॉरेस्ट है इस फॉरेस्ट का नाम है वर्ल्ड इकॉनमी जहां बड़े-बड़े पेड़ हैं वह सारे पेड़ नीचे रूट से कनेक्टेड हैं और मुसीबत आने पर रिसोर्सेज एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं बेसिकली ट्रेड करते हैं हर पेड़
6:09 मिट्टी के अलग-अलग हिस्से से जुड़ा हुआ होता है तो हर पेड़ की एक वैल्यू होती है हर पेड़ काेंस होता है इसीलिए हम पूरे फॉरेस्ट को एक इको सिस्टम कहते हैं किसी के पास देने के लिए न्यूट्रिएंट्स होते हैं तो किसी के पास एक्स्ट्रा पानी उनमें अपने आप में एक तरह का ट्रेड चलता रहता है नेचुरल ऑर्डर यही है और इन्हीं में से सबसे बड़े पेड़ का नाम है यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका अब होता यह है कि इस फॉरेस्ट में एक लकड़हारा आता है लेकिन यह लकड़हारा ईमानदार किसी भी एंगल से नहीं है यह फेवरेटिज्म करता है अब ट्रंप ने पेड़ काटना स्टार्ट किया है और वो सब पेड़ काट रहा है लेकिन एक-एक फीट से ही तो एक समय ऐसा आ जाएगा कि बाकी सारे पेड़ एकदम से छोटे हो जाएंगे कुछ भी नहीं बचेगा और इस
6:56 प्रोसेस में अल्टीमेटली अमेरिका नामक पेड़ कटेगा जरूर लेकिन अमेरिका सबसे बड़ा पेड़ होने की वजह से पूरी तरह से नहीं कटेगा इंस्टेड बाकी पेड़ पहले कट जाएंगे और फिर बाद में वो सारे कटे हुए पेड़ अमेरिका पर ही निर्भर होंगे फिर अमेरिका खुद डिसाइड कर सकता है किसको मदद करनी है किसको नहीं किसको जिंदा रखना है किसको मरने देना है और आज अमेरिका इतना बड़ा पेड़ है कि उसी के पास सारे रिसोर्सेज हैं उनके पास खुद का ऑयल एंड गैस है उनके पास खुद की टेक इंडस्ट्री है और दुनिया भर में उन्हीं का सॉफ्टवेयर चलता है उनके पास दुनिया की लार्जेस्ट मिलिट्री है न्यूक्लियर आर्सनल है और तो और उनकी सबसे बड़ी शक्ति उनका नेचुरल एडवांटेज है कि वो किसी भी एनिमी
7:43 के साथ बॉर्डर शेयर नहीं करते और इसी वजह से सेकंड वर्ल्ड वॉर में यूरोप का जितना नुकसान हुआ उतना अमेरिका का नहीं हुआ एंड डॉनल्ड ट्रंप नोस दैट अमेरिका हैज़ अ नाइस ओशन टू प्रोटेक्ट इटसेल्फ और यही बात जेलस्की ने ट्रंप के साथ मीटिंग में हाईलाइट भी की थी बट यू हैव नाइस ओशन ट्रंप चाहता है कि अमेरिका और बाकी देशों के बीच वाली गैप और भी ज्यादा बढ़े मानो लाइफ इज अ रेस जहां अलग-अलग देशों की गाड़ियां अलग-अलग स्पीड से दौड़ती हैं अब जब रिसेशन आएगा तो क्या होगा सारी गाड़ियां स्लो हो जाएंगी हर देश की गाड़ी का स्पीड 50 किमी/ घंटे से कम होगा जिससे चाइना की गाड़ी जो 70 किमी से आगे बढ़ रही है 20 की स्पीड पर आ जाएगी यूरोप की गाड़ी जो 30 की स्पीड से जा रही है रुक ही जाएगी लेकिन अमेरिका की गाड़ी फास्ट है आगे है
8:30 जो 100 की स्पीड से जा रही है स्पीड कम होने के बाद भी वो 50 कि.मी की रफ्तार से आगे बढ़ सकती है प्रोग्रेस कर सकती है अब आप इस स्ट्रेटजी को स्टूपिड कह सकते हैं लेकिन इतिहास में अमेरिका ने यही किया है ताकि वो नंबर वन पर रहे लेकिन यह वाला प्लान बड़ा रिस्की नहीं लगता बिल्कुल नहीं क्योंकि हिस्ट्री में यही होता आया है और अमेरिका हमेशा टॉप पर ही निकला है चैप्टर थ्री अमेरिका ऑलवेज विंस लास वेगस कसीनोस के लिए फेमस है लेकिन यहां गैंबलिंग करने वाले हर इंसान को पता होगा दैट द हाउस ऑलवेज विंस क्योंकि कसीनोस यही चाहते हैं कि आप थोड़े से पैसे जीत जाए फिर आपको थ्रिल मिले और फिर लत लग जाए फिर एक मोमेंट ऐसा आ जाएगा जब आप हारने लगेंगे और तब आप गलती करने पर कसीनो पैसे कमाएगा
9:17 ब्लैक जैक जैसे खेलों में अगर कोई बहुत जीतने लगा या फिर कार्ड्स काउंट करके गेम समझ गया तो कसीनो के लोग आते हैं और उस प्लेयर को निकाल कर बाहर फेंक देते हैं द हाउस ऑलवेज विंस क्योंकि अगर वो गेम जीत नहीं सकते तो गेम के रूल्स बदल सकते हैं और अमेरिका की हमेशा से यही स्ट्रेटजी रही चलिए हिस्ट्री में पीछे जाते हैं कई लोग समझते हैं कि करेंसी गोल्ड से लिंक्ड होती है एक्चुअली यह एक मिथ है एटलीस्ट 2025 में यह सच नहीं है दुनिया की सारी करेंसी फियट करेंसी है गोल्ड स्टैंडर्ड कब का खत्म हो चुका है हुआ यह कि 1819 में जब ब्रिटेन आधी दुनिया पर हुकूमत करता था उन्होंने सारी कॉलोनीज़ से बहुत सारा गोल्ड चुराकर ब्रिटेन में लाया था तो उनके पास एक्सेस ऑफ गोल्ड था जिसके साथ वह दूसरे
10:03 देशों से ट्रेड करते थे गोल्ड को अपनी करेंसी से लिंक करने की प्रथा ब्रिटेन ने शुरू की लेकिन 1914 में वर्ल्ड वॉर वन शुरू हुआ यूरोप के सारे पैसे वॉर में ही खर्च होने लगे सोने से लिंक होने की वजह से अपने सोल्जर्स को पैसे देने के लिए ब्रिटेन एक्स्ट्रा पैसे प्रिंट नहीं कर पा रहा था वॉर के समय अगर पैसे खत्म हो गए तो देश बर्बाद हो जाएगा 1931 आते-आते ब्रिटेन ने गोल्ड स्टैंडर्ड छोड़ दिया था बचे अमेरिका और फ्रांस ऐसे दो ही देश जो अपने करेंसी को गोल्ड से लिंक रखते थे 1934 में एक आंस गोल्ड की कीमत $20 थी लेकिन अपनी इकॉनमी को बचाने के लिए यूएस ने यह कीमत बढ़ाकर $35 पर अंउंस कर दी क्योंकि गोल्ड तो लिमिटेड है तो डॉलर की वैल्यू कम हो गई पॉइंट यह है कि अमेरिका अपने प्रॉफिट के
10:49 लिए अपने स्ट्रेटजी के अनुसार डॉलर की वैल्यू कम कर सकता है और यह कॉमन भी है सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद हुआ ब्रिटेन वुड्स एग्रीमेंट पहले हर देश की करेंसी गोल्ड से लिंक थी फिर अमेरिका ने कहा कि आप टेंशन ना लो आप सारी करेंसीज डॉलर से लिंक कर दो हम डॉलर को गोल्ड से लिंक्ड रखेंगे तो इनडायरेक्टली आपकी करेंसी गोल्ड से लिंक्ड रहेगी प्राइस फिक्स हुई $35 फॉर वन आउंस ऑफ गोल्ड इससे दूसरे देशों को ज्यादा नोट्स प्रिंट करने का फ्रीडम मिला जिससे वो वॉर के बाद अपने देशों को रिबिल्ड कर पाए अमेरिका का क्या फायदा हुआ कि उनके पास दुनिया का 75% गोल्ड रिजर्व आ गया और उनकी करेंसी दुनिया की इकलौती करेंसी हो गई जो गोल्ड से लिंक थी लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं अब हुआ यह कि अमेरिका के लिए फिर से गोल्ड के प्राइस
11:36 बढ़ाना मुश्किल हो गया फास्ट फॉरवर्ड करते हैं बाकी देशों की रेस कार्स अच्छे खासे स्पीड से आगे बढ़ने लगी जापान तो एक समय इतने स्पीड से ग्रो करने लगा कि लोगों को लगा कि वो अमेरिका को ओवरटेक कर देगा द कसीनो वाज लूजिंग ऐसे प्लेयर्स आ चुके थे जो गेम के रूल्स समझ गए थे मास्टर बन गए थे अमेरिका को अमेरिका के ही खेल में हरा रहे थे मई 1971 में वेस्ट जर्मनी ने ब्रिटेन वुड सिस्टम छोड़ दिया उन्होंने जर्मन डइशमा को यूएस डॉलर में कन्वर्ट करना बंद कर दिया बाकी के देश भी अपने यूएस डॉलर्स के अगेंस्ट गोल्ड मांगने लगे स्विट्जरलैंड ने जुलाई 1971 में 50 मिलियन ले लिए फ्रांस ने 191 मिलियन ले लिए स्विट्जरलैंड ने भी ब्रिटेन वुड सिस्टम छोड़ दिया ब्रिटेन भी यूएसए से अपने गोल्ड
12:21 रिजर्व्स वापस मांगने लगा यूएसए पैनिकिक करने लगा क्योंकि उनके गोल्ड रिजर्व्स धीरे-धीरे कम हो रहे थे दुनिया का मॉनिटर अगर ऐसे फेल होने लगा तो कैसे चलता तो 15th अगस्त 1971 को यूएस प्रेसिडेंट रिचर्ड निकन ने दुनिया के फाइनेंशियल और ट्रेड सिस्टम को फिर से हिला दिया उन्होंने यूएस डॉलर की गोल्ड कन्वर्टेबिलिटी रोक दी सो बेसिकली फॉरेन गवर्नमेंट्स उनके पास जो डॉलर्स थे उन्हें कन्वर्ट ही नहीं कर सकते थे यानी उनके पास जो डॉलर थे वो वैसे देखा जाए तो यूज़लेस हो गए उन्होंने इंपोर्ट्स पर 10% टेरिफ लगाए यानी उन्होंने जापान और जर्मनी जैसे देशों को ओपनली आर्म ट्विस्ट किया कि अपनी करेंसीज को यूएस डॉलर से अप्रिशिएट होने दो ताकि यूएस डॉलर चीप हो जाए एट द सेम टाइम अमेरिका में अलग ही प्रॉब्लम्स हो
13:07 रहे थे तो अमेरिका ने क्या किया गेम के रूल्स ही बदल दिए गोल्ड स्टैंडर्ड को छोड़ दिया थनोस की तरह चुटकी बजाई और गेम बदल दिया इस नसन शॉक के बाद यूएस डॉलर काफी फास्ट डिप्रिशिएट होने लगा इसका मतलब बाकी करेंसीज की वैल्यू यूएस डॉलर के रिलेशन में बढ़ने लगी उनके लिए यूएस डॉलर्स खरीदना यूएस में घूमने जाना सस्ता हो गया और यह सारी बातें जब चल रही थी तब भी लोगों को लगा था दैट अमेरिका इज फिनिश्ड बट दैट वाज़ंट ट्रू देन एंड इट इजंट ट्रू नाउ व्हाई बिकॉज़ अमेरिका कैन राइज फ्रॉम ऐशेस चैप्टर फोर द अमेरिकन ड्रीम चलिए मैं आपको एक सवाल पूछता हूं इन अमेरिकन कंपनीज़ में कॉमन क्या है बताओ जनरल Motors D्नी Microsoft Airb BNB Uber ये सारी
13:53 बड़ी-बड़ी अमेरिकन कंपनीज़ आज एक हाउसहोल्ड नेम बन चुकी हैं लेकिन डिड यू नो ये सारी कंपनीज़ तभी पैदा हुई हैं जब एक रिसेशन चल रहा था या फिर डिप्रेशन जनरल मोटर्स 1907 के बैंकर्स पैनिकिक के बाद बनी D्नी जो आज हमारे चेहरे पर मुस्कान लाती है वो 1929 के ग्रेट डिप्रेशन में पैदा हुई Microsoft 1975 में जब ऑयल क्राइसिस चल रहा था Air BNB और Uber 2008 और 2009 में बनी आफ्टर द 208 फाइनेंसियल क्राइसिस यह एक पैटर्न है जो अमेरिका ने पिछले 100 सालों में देखा है एंड दिस इज द पैटर्न दैट मेक्स अमेरिका ग्रेट जब भी कोई फाइनेंसियल क्राइसिस होता है तब वह एकदम सही कंडीशंस बनाता है जिससे नए सॉलशंस उभरे एक प्रॉब्लम सामने आता है
14:39 दो कंपनीज़ ले ऑफ करते हैं तो टैलेंटेड लोग अचानक फ्री हो जाते हैं तीन रिसोर्सेज सस्ते हो जाते हैं चार इन्वेस्टर्स भी स्ट्रांग फाउंडेशंस बिल्ड करने पर फोकस करते हैं हाइप पर नहीं और पांच लोगों की रिस्क टेकिंग एबिलिटी बढ़ जाती है क्योंकि और कोई ऑप्शन ही नहीं होता इसीलिए क्राइसिस पीरियड को एक इकोनॉमिक रिसेट बटन कहते हैं क्योंकि टफ टाइम्स क्रिएट टफर इंडिविजुअल्स अगर आप आज किसी मुसीबत से गुजर रहे हो तो यह मैसेज हमेशा हमेशा के लिए याद रखो वीडियो पर वापस आते हैं आज ट्रंप चाहते हैं कि उनके चार सालों में अमेरिका ऐसे ही क्राइसिस से गुजरे उनका मोटिवेशन क्या हो सकता है इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता लेकिन जैसे एक फिनिक्स पक्षी ऐशेस से उभरता है और ज्यादा
15:24 स्ट्रांग बनता है ट्रंप भी अमेरिका के साथ कुछ ऐसा ही करना चाहते हैं चैप्टर फाइव कंक्लूजन तो आज तक के महाभारत की कहानी यह है लेकिन इसका आपके वॉलेट पर और देश के वॉलेट पर क्या असर होने वाला है तीन मेजर चेंजेस समझते हैं नंबर वन इज वोलेटिलिटी एक दिन ट्रंप भाई साहब अनाउंस कर देते हैं कि भारत से जो भी इंपोर्ट्स होंगे उन पर 26% टेररिफ्स लगेंगे और एक्सपोर्टर्स उस हिसाब से एडजस्टमेंट्स करते हैं फिर कुछ दिनों बाद टेरिफ्स पॉज हो जाते हैं लेकिन ये सेलिब्रेशन का समय नहीं है इनफैक्ट दिस इज अ टाइम टू वरी मोर क्योंकि कल उठकर वो बोलेंगे दोस टेरिफ्स वेल यू डिर्व देम सो या 90 डेज का पॉज कैंसिल और वैसे ही 90 डेज के बाद यह टैरे्स लगने ही वाले हैं तो रिसेशन पॉज हो गया है कैंसिल नहीं बिकॉज़
16:12 ऑफ़ ऑल ऑफ़ दिस स्टॉक मार्केट्स बहुत ऊपर नीचे होने वाले हैं एंड दैट कैन अप्लाई टू योर जॉब एज वेल अगर आप एक ऐसे सेक्टर में काम करते हैं जहां ट्रेड और इंटरनेशनल डायनामिक्स बहुत ज्यादा बड़ा रोल निभाते हैं देन माय फ्रेंड आपकी राइड बड़ी ही रोमांचक होने वाली है सो ब्रेस योरसेल्फ लेसन नंबर टू है गवर्नमेंट के लिए आप और मुझ जैसा इंसान भी समझ सकता है कि अमेरिका कोई रिलायबल दोस्त नहीं है वो एक सेल्फिश दोस्त है वो आज अपनी इकॉनमी को एज अ वेपन यूज कर रहा है इसके लिए हमने लास्ट वीडियो में एक इमेज दिखाई थी यह वाली भारत आज यहां पर है ठीक मिडिल में व्हिच इज अ डेंजरस प्लेस टू बी इन क्योंकि अगर कभी भी हमने ट्रंप की बात नहीं मानी तो वो हमें एनिमीज़ की कैटेगरी में शिफ्ट करने से कतराएगा नहीं यानी आज दोस्ती के बेनिफिट्स नहीं है और दुश्मनी का डर है हमारे लीडर्स
16:59 को यह समझना ही होगा दैट इफ वी डोंट गेट अ सीट एट द जिओपॉलिटिकल टेबल वी विल बी ऑन द मेन्यू बड़े-बड़े देश हमें कच्चा चबा जाएंगे लेकिन लाइक ऑल थिंग्स दिस आल्सो हैज़ अ सिल्वर लाइनिंग लेसन नंबर थ्री दिस इज द टाइम टू इन्वेस्ट यह समय हमारे रिस्क एपेटाइट को एडजस्ट करने का है व्हाट डू आई मीन जैसे हमने पिछले चैप्टर में कहा था कि बड़ी-बड़ी कंपनियां होती हैं जो ऐसी ही आर्थिक मंदी में जन्म लेती हैं माय क्वेश्चन इज व्हाई कांट दैट हैपन इन इंडिया हमने एक वीडियो बनाया है जहां पर हमने बात की है दैट व्हाई इज इट टफ टू डू बिजनेस इन इंडिया आज हमें उन्हीं मुद्दों पर वन बाय वन गौर करके हर्डल्स हटाने की जरूरत है ताकि इस वोलेटिलिटी का फायदा इंडियन बिजनेसेस ले पाएं इफ यू वांट टू
17:46 इन्वेस्ट इन योरसेल्फ इफ यू वांट टू स्टार्ट अ बिज़नेस और लर्न अ न्यू स्किल दिस इज गोइंग टू बी द परफेक्ट टाइम इंडियंस को यह देखना चाहिए कि अमेरिकनंस को क्या चाहिए और उनकी डिमांड क्या हम फुलफिल कर सकते हैं अमेरिका एक कंजम्पशन सुपर पावर है और उन्हें चीजें चाहिए वी एज अ कंट्री नीड टू पुश फॉर ट्रेड डील्स सो दैट आवर एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट्स आर क्लोथ्स आर फुटवेयर फाइंड अ बिगर मार्केट इन अमेरिका और सिर्फ अमेरिका में ही क्यों अगर अमेरिका और चाइना में ट्रेड वॉर चल रहा है तो वी कैन प्ले बोथ साइड्स इंडिया नीड्स टू इन्वेस्ट इन इटसेल्फ अगर आपको इस वीडियो से वैल्यू मिली कुछ नया सीखने मिला तो फिर वो लाइक बटन प्रेस कर दीजिए टारगेट रखते हैं 5,000 लाइक्स का क्योंकि राइट नाउ समय ऐसा है दैट इफ इंडिया डजंट हैव अ सीट एट द टेबल इट विल बी ईटन फॉर डिनर और
18:33 यही इंपॉर्टेंट बात आप तक पहुंचाने से मुझे फर्क पड़ता है