अमित शाह के लिए Modi, योगी को किनारे करेंगे, BJP टूट जाएगी? | Dekhi Jaayegi

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简要总结

本视频深入探讨了印度人民党(BJP)内部的权力动态,以及纳伦德拉·莫迪之后的潜在领导人问题。主要讨论点包括:

  • 尼廷·纳文被任命为人民党执行主席的意义,以及这如何反映了阿米特·沙阿的影响力。
  • 瑜伽士·阿迪蒂亚纳特在党内的地位,以及他与阿米特·沙阿之间的潜在冲突。
  • 国民先驱报案件,以及它对索尼娅·甘地和拉胡尔·甘地的影响。
  • 将“吉拉姆吉”纳入政府计划,以及它对圣雄甘地遗产的影响。

介绍

该节目介绍了本期节目的主题,包括对国大党和印度人民党的政治分析,以及对德里和北方邦局势的讨论。节目还提到了国民先驱报案件、尼廷·纳文的任命、RSS的角色以及潘卡杰·乔杜里的任命等议题。

尼廷·纳文的崛起

讨论了尼廷·纳文的政治崛起,以及他在一夜之间从邦议员晋升为国家领导人的过程。强调了政党在提升领导人方面的重要性,以及政治家们对占星术的信仰。还提到了尼廷·纳文所属的卡亚斯特种姓,以及他在人民党办公室的谦逊态度。

阿米特·沙阿的影响力

分析了阿米特·沙阿在印度人民党内的影响力,以及他如何通过任命关键职位来巩固自己的地位。讨论了他在北方邦任命潘卡杰·乔杜里为邦主席的案例,以及这如何与瑜伽士·阿迪蒂亚纳特的意愿相悖。还提到了RSS在党内的角色,以及莫迪总理如何阻止桑杰·乔希担任主席。

莫迪之后的印度人民党

探讨了莫迪总理卸任后,谁将成为印度人民党的自然继承人的问题。讨论了瑜伽士·阿迪蒂亚纳特和阿米特·沙阿之间的竞争,以及人民党品牌价值在莫迪卸任后是否能够维持的问题。强调了政党组织在塑造领导人方面的重要性,以及人民党在选举中利用印度教牌的策略。

尼廷·纳文的未来

分析了尼廷·纳文被任命为执行主席的意义,以及他是否会成为人民党的正式主席。强调了人民党对他的大力支持,以及他在党内的未来前景。还讨论了哈里亚纳邦的政治局势,以及首席部长纳亚布·辛格·赛尼如何巩固自己的权力。

印度人民党与RSS

讨论了印度人民党与国民志愿服务团(RSS)之间的关系,以及RSS在党内的影响力。强调了莫迪总理如何阻止桑杰·乔希担任主席,以及人民党在赢得四个邦的选举后,如何削弱了RSS的影响力。

圣雄甘地的遗产

分析了将“吉拉姆吉”纳入政府计划的意义,以及它对圣雄甘地遗产的影响。批评了政府试图抹去甘地遗产的做法,并强调了甘地在世界范围内的重要性。还讨论了反对派应该如何应对这个问题,以及他们是否应该反对将甘地的名字从政府计划中移除。

国民先驱报案件

详细解释了国民先驱报案件的背景,以及它对索尼娅·甘地和拉胡尔·甘地的影响。讨论了苏布拉马尼安·斯瓦米在该案件中的角色,以及执法局(ED)对该案件的调查。强调了该案件的政治性质,以及媒体在塑造公众舆论方面的作用。

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文字稿

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0:00 बीजेपी में बड़ा कौन? अमित शाह या नरेंद्र मोदी। आज जो भी ब्रांड वैल्यू बीजेपी की है ना, वह दैट बिकॉज़ ऑफ़ मोदी। राइट? मोदी सबसे बड़ा ब्रांड है। और मैं तो यह भी कहता हूं कि मोदी ही बीजेपी और बीजेपी ही मोदी है। हम और ये लोग तलाश रहे हैं कि मोदी जी के बाद कौन? जो लोग राजनीति में उनकी कुंडली बड़ी स्ट्रांग होती है। एक आदमी जो कल तक एमएलए था, एक राज्य का मंत्री था। एक ही रात में वो इस देश का राष्ट्रीय नेता के स्तर पर पहुंच गया। जो नितिन नवीन जी हैं ये बड़े हमंबल आदमी है। अक्सर जब ये बीजेपी के ऑफिस में होते थे तो हमेशा इनको कहते थे संजय अयूब साहब कि थोड़ा सा वेट कर लीजिए। बोले जी भैया ठीक है। और मैंने उस वीडियो में देखा कि जब वो गुलदस्ते रिसीव कर रहे हैं वो पीछे पकड़ा रहे हैं। तो

0:46 संजय अय साहब भी पकड़ रहे थे। ये होता है राजनीति भाग्य कब किसकी कुंडली पलट जाए। अपॉइंटमेंट तो पंकज चौधरी की भी हुई है जो उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बनाए गए हैं। जिस कम्युनिटी से वो आते हैं यानी कि ओबीसी कम्युनिटी उसी कम्युनिटी से योगी भी चाहते थे कि बने और स्वतंत्र देव सिंह उनकी पसंद थे। लेकिन बनते हैं पंकज चौधरी। आपने लिखा भी है कि अमित शाह अपने के लिए बिसाद जो है वो बिछाई जा रही है। तो किसी भी तरीके का कॉन्फ्लिक्ट अमित शाह और योगी के बीच में आप देख रहे हैं नियर फ्यूचर में। नहीं देख क्या रहे वो साफ-साफ दिख रहा है। वो तो जग जाहिर है। योगी जी जो चाहते हैं वो नहीं हो पाता है। उसका उसका उल्टा ही होता है। छोड़ के एक मुख्यमंत्री की कुर्सी को बाकी सब दिल्ली जो चाहती है वो होता है।

1:31 भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस क्योंकि जब अध्यक्ष पद की चर्चा हो रही थी तो कहा जा रहा था बहुत सारा स्टेक जो है वो आरएसएस के पास भी रहेगा। उनका से भी रहेगा और सबसे ज्यादा जो नाम चल रहा था आरएसएस की तरफ वो संजय जोशी का था। संजय जोशी को किसी भी कीमत पर प्रधानमंत्री मोदी एक्सेप्ट नहीं कर सकते थे। अब एक सरकारी योजना जो है वो जीराम जी की बन गई है। इससे पहले वो पूज्य बापू करके भी कुछ बन रही थी और आपने इसको पॉलिटिकली डिकोड करके Twitter पे लिखा भी है कि मनरेगा में से महात्मा गांधी को हटा के राम जी को लाने का प्रयोजन क्या हो सकता है? मेरा ऐसा मानना है कि जो इतिहास लिखा गया वो लिखा गया है। अब आप जब से सत्ता में हो आप कुछ अपना लिखो। आप गांधी के कंट्रीब्यूशन को आप गांधी की विचारधारा को

2:19 छोटा नहीं कर सकते। ये एक सवाल है जिसका जवाब नहीं मिल पाता कि जो ब्रांड वैल्यू आज बीजेपी की है जब हम बात कर रहे हैं। क्या मोदी जी के हटने के बाद रहेगी? नमस्कार दोस्तों, देखी जाए के नए एपिसोड में आप सभी का स्वागत है। बातचीत करने के लिए हमारे साथ हमारे कंसल्टिंग एडिटर आदेश रावल जी बैठ चुके हैं। बहुत-बहुत स्वागत आदेश जी। थैंक यू। यात्रा करते हैं इस शो में। यात्रा इस बार भी होगी। यात्रा करेंगे दो पार्टियों के बीच हम। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी। यात्रा करते हुए दिल्ली की भी बात होगी। उत्तर प्रदेश की भी बात होगी। नेशनल हेराल्ड में भी हम लोग जाएंगे। क्या मामला रहा? राउन्यू कोर्ट ने क्या कहा? उसके आगे

3:04 की राजनीति रणनीति कैसे क्या रहने वाली है? नितिन नवीन जो बीजेपी के नए कार्यकारी अध्यक्ष बने हैं उनके इक्वेशंस क्या है? आरएसएस अब गेम में कहां है? पंकज चौधरी बनाए गए तो बाबा पे क्या गुजर रहा होगा? ये सब कुछ जानने की कोशिश करेंगे और इन सब चीजों पर बातचीत चर्चा करेंगे इस नए एपिसोड में। आपसे गुजारिश पूरा एपिसोड जरूर देखिएगा। आदेश जी शुरू करते हैं। तो आपके हां आपके Twitter से शुरू करेंगे साहब। आपने एक ट्वीट किया है बड़ा शानदार उसमें आपने एक लाइन लिखी है कि कब किसकी कुंडली जाग जाए यह पता नहीं है मतलब बड़ा अनिश्चित सा होता है ये और एक वीडियो आपने डाला है अपने उस twिटर पोस्ट में जिसमें नित्य नवीन है गुलदस्ता पकड़ रहे हैं किसी को गुलदस्ता दे रहे हैं कोई स्वागत कर रहा

3:50 है और आपने यही कहा है कि पढ़िए किसकी कुंडली कैसे जागती है और समझने की कोशिश करिए आप तो समझे ही होंगे गुलदस्ता कौन पकड़ रहा है स्वागत कौन कर रहा है नितिन नवीन क्यों बनाए गए हैं बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष थोड़ा सा समझाइए हमें। ये दो सवाल हैं आपके इस सवाल में। एक सवाल तो यह है कि नितिन नवीन की कुंडली जी उसका अध्ययन करना चाहिए। जो जानकार लोग हैं जो ज्योतिष को समझते हैं और मैं हमेशा की बात कहता हूं कि जो लोग राजनीति में उनकी कुंडली बड़ी स्ट्रांग होती है। हम वो कब कहां से कम बैक करते हैं। ये मैंने कुंडली वाली बात इसलिए लिखी कि जिस दिन इनके नाम की घोषणा हुई उसके आई थिंक ये रविवार की बात है। जी। तो सोमवार को जब मैं आ रहा था नई दिल्ली में तो मैक्सिमम राउंड अबाउट्स पे बड़े-बड़े कट आउट्स लगे हुए थे नितिन नवीन जी के। मैंने देखा यार देखो एक आदमी जो कल

4:38 तक एमएलए था, एक राज्य का मंत्री था एक ही रात में वो इस देश का राष्ट्रीय नेता के स्तर पे पहुंच गया। हम तो कई लोग बोल रहे थे कि नहीं नहीं ये तो कार्यकारी अध्यक्ष है। ऐसा कुछ नहीं है कि इन्हें कोई बनाया जाएगा। तो मैंने कहा जब प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट ही कर दिया और बधाई दे दी इनको तो उसमें कोई संदेह तो बचा नहीं था। तो मैं कुंडली की बात मैंने इसलिए कही कि मैं जब मैंने वो कट आउट्स देखे और कैसे राजनीति में किस तरीके से लोग लोगों को प्रमोट किया जाता है और मैं हमेशा एक बात कहता हूं कि पार्टी का बहुत बड़ा महत्व होता है किसी भी नेता को बड़ा बनाने में। हम् क्योंकि पार्टी आप में इन्वेस्ट करती है। पार्टी आपको उस स्तर तक लेके आती है कि आपको कार्यकारी अध्यक्ष, अध्यक्ष, महामंत्री, जनरल सेक्रेटरी जितने भी पद

5:24 अलग-अलग पार्टीज में होते हैं वो सब आप बनते हैं और फिर कभी-कभी आप मुख्यमंत्री बन जाते हैं कोई ऐसा नेता हो। तो इस तरीके से नेताओं का भाग्य जो है वो बदलता है। तो इनकी कितनी स्ट्रांग कुंडली है। तो मैंने उसे लिखा था कि जो लोग ज्योतिष पे विश्वास करते हैं। जी और राजनेता बहुत मानते हैं कुंडलियों को। हर नेता के पास तीन व्यक्ति जरूर होते हैं। एक बढ़िया ज्योतिष, एक बढ़िया वकील और एक बढ़िया डॉक्टर। जी जो नेता बड़ा है दिल्ली में मैंने देखा है अपनी आंखों से। आपने कई बार चर्चा की भी है इस। उनके पास ये तीन चीज तीन लोग बड़े हाई प्रोफाइल होते हैं जो इस देश के सबसे बेस्ट जो सबसे बेस्ट ज्योतिष होगा जो सबसे बेस्ट डॉक्टर होगा जो सबसे बेस्ट वकील होगा वो उनके पास

6:09 पक्का होता है तो कुंडली की बात तो मैंने इसलिए कही थी कि नितिन दवीन की कुंडली का अध्ययन करना चाहिए कि ऐसा कौन सा ग्रह बदला है कि वो रातोंरात पटना से ले दिल्ली पहुंचे और आज इस इस लुटियंस जोन का बीजेपी का हर बड़ा नेता उनका स्वागत कर रहा है। वो वो कईयों के वो घर जा रहे हैं। उनके घर आ रहे हैं। गुलदस्ते पकड़ाए जा रहे हैं। अब मैं उस वीडियो पे आता हूं जो मैंने वीडियो ट्वीट किया। गुलदस्ते वाली बात थी। जो नितिन नवीन है ये कायस्त हैं। हम संजय मयू के एक आदमी है बीजेपी के जो मीडिया के आसपास ज्यादा रहते हैं। वो भी कायस्त हैं। और रविशंकर प्रसाद भी कायस्त हैं। तो अक्सर वहां बंद कमरों में बातचीत होती थी कि कई लोग कहते थे कि आप सबसे बड़े नेता है कायस्तों के संजय मयू को तो वो धीरे से कहते थे नहीं

6:54 धीरे बोलो। रविशंकर जी बुरा मान जाएंगे। लेकिन कई ऐसी घटनाएं हैं जो जो नितिन नवीन जी हैं ये बड़े हंबल आदमी हैं। हम अक्सर जब ये बीजेपी के ऑफिस में होते थे तो हमेशा इनको कहते थे संजय अयूब साहब कि थोड़ा सा वेट कर लीजिए। बोले जी भैया ठीक है। और मैंने उस वीडियो में देखा कि जब वो गुलदस्ते रिसीव कर रहे हैं। वो पीछे ऐसे पकड़ा रहे हैं तो संजय मयूर साहब भी पकड़ रहे थे। यह होता है राजनीति भाग्य कब किसकी कुंडली पलट जाए कोई नहीं जानता। लेकिन एक चीज है आदेश जी राजनीति में कुंडलियां ऐसे ही नहीं पलटती। कोई ना कोई एक्सटर्नल फोर्स होता है जो कुंडलियों को पलट देता है। शक्तिमान एक सीरियल आया करता था हमारे बचपन में तो कुंडलियां जागृत करने के लिए बड़ा तप किया जाता था। आजकल ऐसा लगता है कि बहुत ज्यादा

7:40 तप की जरूरत नहीं है। शायद किसी तरह की वफादारी की जरूरत है। लगता है आपको कुंडली बदली की भी और थोड़ा सा यह भी कि जो लोग ज्यादा सिस्टम में है या जो ज्यादा पॉपुलर हैं उनको नहीं। अब जैसे आपको उदाहरण देता हूं 2014 में जब हरियाणा में सरकार बनी बीजेपी की तो पहली बार के विधायक मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बना दिया गया। राजस्थान में 2023 में पहली बार के विधायक बंजलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया गया। बेसिक मैं ये बात कई बार बोल चुका हूं। दोबारा रिपीट कर देता हूं। ये इंदिरा गांधी मॉडल है हम जो मोदी जी इंप्लीमेंट कर रहे हैं। ऐसा ही अब आप देखो नाम किस-किस के नाम चल रहे थे जो पिछले लगभग डेढ़ साल से चर्चा हो रही थी वो थी धर्मेंद्र प्रधान की, भूपेंद्र

8:27 यादव की, शिवराज सिंह चौहान की, खट्टर साहब की। ठीक है? लेकिन इनमें से और ये भी कहा गया कि खट्टर साहब का इस्तीफा इसलिए कराया गया मुख्यमंत्री से अध्यक्ष ताकि वो अध्यक्ष बन सके और वो सिर्फ मोदी जी के आदमी है। वो अमित शाह के आदमी नहीं है। जी। ठीक है। ऐसा भी कहा जाता था ताकि लेकिन मैं यह मानता हूं कि जब 240 सीट आई बीजेपी के लोकसभा चुनाव में हम उसके बाद संघ का प्रेशर बढ़ गया था बीजेपी के ऊपर। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति या दो व्यक्ति पार्टी चला रहे हैं। बहुत सारी स्टेटमेंट्स आई और तब से ये झगड़ा थोड़ा सा बाहर चल रहा था। हम लेकिन बीजेपी ने खासतौर पर नंबर वन और नंबर टू ने इस पिछले 18 महीनों में उसको कवर अप किया। अलग-अलग स्टेट्स अलग-अलग स्टेट्स जीत के। बिहार जीता, दिल्ली जीती, हरियाणा, महाराष्ट्र। तो

9:13 उन्होंने जो यह परफॉर्म किया हम उसके बाद उन्होंने ये तय किया कि नहीं अब जो है अध्यक्ष हम अपना बनाएंगे। तो वी डू नॉट नीड आरएसएस। हम जो जो नड्डा साहब ने कही थी ड्यूरिंग लोकसभा चुनाव। जी कि हमें संघ की जरूरत नहीं है। बीजेपी सक्षम है अपने फैसले करने में। तो जब मैं उनको जोड़ के देखता हूं तो मुझे उसमें कुछ दिखता है कि इसमें समन्वय है। हम तो बीजेपी की लीडरशिप ने खासतौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने और अमित शाह जी ने उसको कवर अप किया और फाइनली 45 साल के तीसरी पीढ़ी के नेता को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। मैं तीसरी पीढ़ी क्यों कह रहा हूं वो अभी वो भी बताऊंगा। नहीं नहीं नहीं बीजेपी की तीसरी पीढ़ी हम ठीक है उस परिवार की नहीं

9:59 आयु वर्ग के हिसाब से आयु पूरे लीडरशिप मोदी जी की आयु वो उनकी वो उनकी फर्स्ट पीढ़ी है सेकंड है अमित शाह अमित शाह वाली और तीसरी है नितिन नवीन की यानी अब ये इस बात का संकेत है कि जो राष्ट्रीय कार्यकारिणी है जो पार्लियामेंट्री बोर्ड है बीजेपी का जो चुनाव समिति है अब वो आपको 50 और 45 के आसपास ही रखनी पड़ेगी हम तो क्या मार्गदर्शक मंडल 2.0 बनने का समय आ गया और वह सारे लोग जो अध्यक्ष पद की रेस में थे क्या वो सब मार्गदर्शक मंडल में जा सकते हैं वो वो सब लोग मंत्री हैं हम ठीक है अगर कैबिनेट रिशफल होता है जो कि होना चाहिए 29 से पहले जी तो इनमें से भी वो लोगों को छुट्टी हो जाएगी हम लेकिन पार्टी के भीतर का जो संगठन है

10:46 हम उसमें भी संकेत मिल रहे हैं कि जैसे ये एक नई कार्यकारिणी की तरफ इशारा कर रहा है हम और इसमें इसमें एक मैसेज और है जी यूपी से लेके और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तक पंकज चौधरी से लेके नितिन नवीन तक कि अमित शाह जो है ना वो अपनी भविष्य की राजनीति की सारी चाल चल रहे हैं। मैं इस पे आने ही वाला था क्योंकि आपका एक ट्वीट भी था उसी सिलसिले में कि अपॉइंटमेंट तो पंकज चौधरी की भी हुई है जो उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष बनाए गए हैं। अह जिस कम्युनिटी से वो आते हैं यानी कि ओबीसी कम्युनिटी। उसी कम्युनिटी से योगी भी चाहते थे कि बने स्वतंत्र देव सिंह उनकी पसंद लेकिन बनते हैं पंकज चौधरी। आपने लिखा भी है कि अमित शाह अपने लिए बिसाद जो है वो बिछाई जा रही है। तो किसी भी तरीके का कॉन्फ्लिक्ट अमित शाह और योगी

11:33 के बीच में आप देख रहे हैं नियर फ्यूचर में नहीं देख क्या रहे हो? वो साफ-साफ देख रहे हैं। हम वो तो जग जा ही रहा है। वो किस छिपा किस तरफ ऊंट बैठेगा? देखिए पार्टी का जो संगठन सबसे महत्वपूर्ण संगठन होता है। हम संगठन जिस व्यक्ति के पास है वह सबसे पावरफुल व्यक्ति होता है। यहां तो संगठन प्लस संसाधन हम दोनों ही अमित शाह जी के पास हैं। ठीक है? ये मैं क्यों कह रहा हूं बताता हूं आपको। वो पार्टी के प्रेसिडेंट रहे। दो टर्म फिर गृह मंत्री हैं। नड्डा साहब अध्यक्ष थे लेकिन पार्टी के तमाम फैसले अमित शाह जी करते जी अब नितिन नवीन जी को लेके आए हैं और उस पे भी जो मोहर है वह अमित शाह जी की है हम अब आप उत्तर प्रदेश चलो पंकज चौधरी योगी जी चाहते थे कि कुर्मी बने हम तो कुर्मी में उनके कैंडिडेट थे स्वतंत्र

12:19 देव सिंह जो पहले भी रह चुके हैं जो पहले भी रह चुके हैं और पंकज चौधरी जो उनके दुर्धी हैं हम उनको अमित शाह जी ने चूज़ करके वहां का अध्यक्ष बना दिया हम क्या हुआ बीच में योगी जी नहीं माने हम तो दिल्ली से बीएल संतोष को भेजा गया। मनाइए मनाइए और वो मना के आए और फाइनली नॉमिनेशन पंकज चौधरी का ही हुआ। आपको पता है पंकज चौधरी कभी यूथ कांग्रेस में होते थे हम यूथ कांग्रेस के से स्टार्ट किया उन्होंने अपने अपने करियर को। प्रोडक्ट वही यूथ कांग्रेस थू कांग्रेस के प्रोडक्ट है। हम लेकिन वो सवाल नहीं है। सवाल ये है कि योगी जी जो चाहते हैं वो नहीं हो। हमेशा वो नहीं हो पाता है। उसका उसका उल्टा ही होता है। छोड़ के एक मुख्यमंत्री की कुर्सी को बाकी सब दिल्ली जो चाहती है वो होता है। और

13:04 दिल्ली में कौन अमित शाह जी हम तो एक नेचुरल सवाल इसमें ये उठता है लोगों के मन में भी जरूर उठ रहा होगा कि भाई विरासत जो संभालनी है वो तो नरेंद्र मोदी की है। अभी या जिस कुर्सी पे बातचीत हो रही है वो योगी को मिल पाएगी या नहीं। या अमित शाह के लिए भी साथ जो बिछ रही है। तो आपने एक चीज और दिलचस्प जो बोली कि मनोहर लाल खट्टर जैसे उनका नाम चल रहा था वो केवल नरेंद्र मोदी की पसंद बताए जाते हैं। अमित शाह की पसंद नहीं थे। इन दोनों अपॉइंटमेंट्स में जो छाप है वो अमित शाह की दिखती है। तो बीजेपी में बड़ा कौन? अमित शाह या नरेंद्र मोदी। नहीं ये ये उस तरफ इशारा कर रहा है कि जो नेचुरल सक्सेसर होगा मोदी जी का वो अमित शाह जी होंगे। इसको अगर मैं राजनीतिक रूप से रिकॉर्ड करूं जो मैं हमेशा करता हूं आपके शो में

13:50 तो यह जो तमाम अपॉइंटमेंट्स हैं ये तमाम जो संगठन के पे पूरा कंट्रोल करके अमित शाह जी ने रखा है पार्टी को अपने पास समेट के तो ये उस तरफ इशारा कर रहा है कि जो लोग ये कहते हैं कि मोदी जी के बाद योगी हम योगी जी के पास संगठन नहीं है। वो सिर्फ मुख्यमंत्री हैं। पार्टी का जो संगठन है वो अमित शाह जी के पास है। हम और पूरा कंट्रोल है उनका। सिर्फ है नहीं और ये दो अपॉइंटमेंट्स जो रिसेंटली हुए हैं ये उसका उदाहरण है हम और तीसरी पीढ़ी का लेके आए हैं युवा लेके आए हैं तो ये सब इस तरफ इशारा करता है कि जो नेचुरल सक्सेसर हैं मोदी जी के वो अमित शाह जी बनने जा रहे हैं। डिकोड करते हुए ये बात समझ में भी आती है। भाई ये तो बड़ा क्लियर है कि पार्टी अमित शाह ही चला रहे हैं। बेशक जेपी नड्डा

14:35 अध्यक्ष रहे हो या फिर नरेंद्र मोदी सबसे बड़े नेता हो लेकिन पार्टी चलाने का श्रेय जो है वो अमित शाह के पास जाता है। लेकिन एक चीज तो ये भी है ना आदेश जी कि लोगों के मन में जो एक भावना होती है वो योगी आदित्यनाथ के प्रति हिंदुत्व ब्रांड ऑफ पॉलिटिक्स जो है वो ज्यादा अलाइन करते हैं योगी के तरफ अमित शाह के प्रति लोगों का अलाइनमेंट ऐसा नहीं है। संगठन का तो हो सकता है। तो आपको नहीं लगता कि चुनावी एरिया में जब उतरते हैं तो इसका नुकसान हो सकता है? देखिए पहली बात तो मैं इसको ऐसे देखता हूं कि जिस दिन मोदी जी इस पद से हटेंगे प्रधानमंत्री के पद से उस दिन आज जो भी ब्रांड वैल्यू बीजेपी की है ना वो दैट बिकॉज़ ऑफ मोदी। राइट? मोदी सबसे बड़ा ब्रांड है। और मैं तो ये भी कहता हूं कि मोदी ही बीजेपी और बीजेपी ही

15:21 मोदी है। हम और ये लोग तलाश रहे हैं कि मोदी जी के बाद कौन? राइट? ठीक है? और मैं इसको ऐसे देखता हूं कि भाई आप लोग तो ये संघर्ष कर रहे हो आपस में कि भाई मोदी जी के बाद योगी जी आएंगे या अमित शाह जी आएंगे। हम लेकिन ये बात सही है आपकी कि जो उत्तर भारत में खासतौर पर जो पॉपुलर ब्रांड है वो योगी जी हैं और हिंदुत्व की जो राजनीति होती है उसमें वो ज्यादा एक्सेप्टेबल है। राइट जनता के बीच में लेकिन मैंने क्या कहा आपको? आपको पार्टी नेता बनाती है। हम पार्टी का संगठन आपको नेता बनाता है। जब मोदी जी को चुना गया 2014 से पहले कि यह हमारे प्रधानमंत्री के फेस होंगे उसके बाद ही उनको लोगों ने एक्सेप्ट किया हम हालांकि 2007 से इसकी शुरुआत हो चुकी थी

16:09 वाइब्रेंट गुजरात से। जी कि मोदी कितने बड़े विकास पुरुष हैं जो इस देश के जो तमाम इंडस्ट्रियल हाउसेस थे वो वहां जाके जाते थे उस समिट में और वहां से इनकी एक इमेज बिल्डिंग शुरू की गई थी। जी जिसको होते-होते पांच छ साल लगे। तब जाके मोदी एक 2002 से जी के आरोपों से और 2007 से शुरू होकर और 12 तक आके मोदी एक विकास पुरुष की छवि विकास उन्मुख नेते के तौर पे एक उनकी छवि क्रिएट की गई जनता के बीच में और उसको लोगों ने एक्सेप्ट भी किया और फिर पार्टी ने उन्हें बनाया कि नहीं इट वास सोल्ड वेल हां तमाम लोगों तमाम बड़े नेताओं के विरोध के बावजूद जब पार्टी ने उन्हें अपना फेस बनाया तब नरेंद्र मोदी प्रधान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने।

16:54 जी तो पार्टी और संगठन इसलिए महत्वपूर्ण है इसलिए योगी जी कमजोर हैं। जनता के बीच पॉपुलर कोई बात नहीं। लेकिन मैं एक बात और सोचता हूं कि जो ब्रांड वैल्यू आज बीजेपी की है हम जब हम बात कर रहे हैं। क्या मोदी जी के हटने के बाद रहेगी? हम बड़ा सवाल है ये। ये एक सवाल है जिसका जवाब नहीं मिल पाता। बहुत सारे कॉन्फ्लिक्ट्स की हम बात कर तो इसका मतलब तो यह हुआ ना कि जो हिंदुत्व की जो हिंदुत्व कार्ड है यह हम यह सिर्फ मोदी के चेहरे पे है। हम मैं ये सवाल पूछ रहा हूं आपसे। लगता है कि क्योंकि मेरे पास इसका जवाब नहीं है अभी। हम और हिंदुत्व के कार्ड से ही ये पावर में आई है पार्टी। हां और तो है जी। और तो कुछ है ही नहीं है। अगर ये हिंदू इस देश में मुसलमान नहीं होते बीजेपी कभी आ

17:40 ही नहीं सकती अगर मैं इसे ऐसे समझने की कोशिश करूं कि हिंदुत्व के कार्ड पे बीजेपी पावर में आई है और बीजेपी के सबसे बड़े ब्रांड जो फिलहाल हैं वो नरेंद्र मोदी हैं। संगठन जो बिसात बिछ रही है वो अमित शाह के लिए बिछ रही है। नंबर टू अगर हम माने हिंदुत्व के कार्ड के हिसाब से या लोगों के अलाइनमेंट के हिसाब से तो वो योगी दिखते हैं। तो ये तो बहुत जबरदस्त कंट्राडिक्शन है। इस कंट्राडिक्शन में तो नुकसान पार्टी का ही होता दिखेगा। तो सत्ता में ही कंट्राडिक्शन होते हैं। सत्ता में ये नुकसान होते हैं। ठीक बात है। विपक्ष में नुकसान कहां होता? होने के लिए सत्ता के पास ही होता है। इसमें तो कोई ज्यादा चिंता करने का विषय नहीं है। बेशक नितिन लेकिन लेकिन मैं इतनी बात कहता हूं कि मुझे ये आप ठीक है आप लोग अब तय कर लीजिए संगठन किसके पास रहेगा? पार्टी किसके पास रहेगी? मोदी जी के बाद कौन रहेगा? लेकिन मोदी जी के बाद बीजेपी कितनी

18:26 पावरफुल रहेगी वो एक महत्वपूर्ण सवाल है। ठीक। तो बेशक नवीन जी थोड़ी गहरा मंथन हो गया। हां ये गहरा मंथन। मजाकज़ाक में और है यह कि वक्त ही बताएगा कि कितना क्या हो पाता है कितना क्या नहीं अच्छा एक सवाल वैसे मैं पूछ लेता हूं इस चर्चा से जुड़ा हुआ है ये कि कार्यकारी पूर्णकालिक शत प्रतिशत आपको लगता है कि कार्यकारी ही पूर्णकालिक होंगे कोई कोई दो राय नहीं किसी तरह का संदेह नहीं है जिस हिसाब से प्रोजेक्ट किया गया है उनको जिस हिसाब से प्रधानमंत्री जी ने ट्वीट किया है हम जिस हिसाब से उनको कुर्सी बैठाने के लिए खुद अमित शाह चल के आए हैं और मैसेज दिया है जी तमाम केंद्रीय मंत्री गए हैं बुके लेके रिसीव किया है एयरपोर्ट पर रिसीव किया है। मुख्यमंत्री को भेजा है। फिर पार्टी ऑफिस में एक भव्य आयोजन किया गया है। सब कुछ

19:11 कैमरों के सामने हुआ है। इतना व्यापक हम कार्यक्रम बीजेपी तभी करती है जब उनको ये पता होता है कि हमारी क्या दिशा हम लेने वाले हैं। अब आप एक बात और सोचो। ऐसे ही 2019 में नड्डा साहब को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। हम फिर 2020 के शुरुआत में ही इनको पूर्णकालिक अध्यक्ष बना दिया गया। जी। ऐसे ही अभी यह कार्यकारी बने और मुझे लगता है कि अगले साल की शुरुआत में थोड़ा सा बजट सत्र के आसपास इनको भी पूर्णकालिक बना पूर्णकालिक बना देंगे। उसमें कोई शंका नहीं है मुझे। सो नितिन नवीन 20% भी शंका नहीं है कि अगले बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी हैं। पूर्णकालिक तो नितिन राष्ट्रीय अध्यक्ष जी तो वो पूर्णकालिक पूर्णकालिक। ठीक बात है। तो नितिन नवीन जी तो अध्यक्ष पद पा चुके हैं। अब बीजेपी क्या खो सकती

19:57 है यह वक्त बताने वाला है। एक एक बात रह गई जी। हां कि नितिन नवीन का अपॉइंटमेंट और हरियाणा की राजनीति में हलचल जी नहीं ये बात इसप मैं आ रहा हूं दो क्योंकि दो कंफेशंस छूटे हुए हैं। एक कंफ्रंटेशन तो ये है कि हमने अमित शाह और योगी के कंफ्रेशन की बात की या अमित शाह और नरेंद्र मोदी के बीच के जो रिश्ते हो सकते हैं उस पे बात की है। भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस क्योंकि जब अध्यक्ष पद की चर्चा हो रही थी तो कहा जा रहा था बहुत सारा स्टेक जो है वो आरएसएस के पास भी रहेगा। उनका से भी रहेगा और सबसे ज्यादा जो नाम चल रहा था आरएसएस की तरफ वो संजय जोशी का था। देवेंद्र फडनवीस भी उस रेस में दिख रहे थे। लेकिन अभी ऐसा दिख रहा है कि आरएसएस कहीं नहीं कुछ भी नहीं। कोई खास सिग्निफिकेंट बयान भी नहीं आया है। हाउ डू यू सी? आरएसएस को ये पता था कि अगर हम संजय जोशी

20:42 का नाम लेंगे तब उनकी बारगेन पावर अच्छी रहेगी। संजय जोशी को किसी भी कीमत पर प्रधानमंत्री मोदी एक्सेप्ट नहीं कर सकते थे। हम और ये ये चर्चाएं ये चर्चाएं मीडिया की हैं। बेसिकली अंदर उन बैठकों में क्या बात हुई प्रधानमंत्री मोदी की और मोहन भागवत जी की वो तो हमें नहीं पता ना लेकिन वो जो नाम बार-बार लिया जाता था वो सबको पता था कि वो नाम एक्सेप्टेबल नहीं है। वो कुछ पुरानी आपस के रिश्तों की दिक्कत है दोनों के बीच में प्रधानमंत्री मोदी और संजय जोशी के बीच में दूसरा आरएसएस तब हावी रहता कि जब इन इन चार राज्यों में बीजेपी जीत नहीं पाती। अगर एक दो राज्य भी हार जाती आप परफॉर्म नहीं कर पाते तो एक दो राज्य भी आप हार जाते तो संघ का आपके ऊपर प्रेशर आता। अब क्योंकि आप हुनर दिखा के काम मांग रहे हो। आपने हुनर दिखाया कि ठीक है हम हारे। हारे नहीं हम

21:29 हमारा बहुमत नहीं आया। उसके बाद हमने चार राज्य जीते और ऐसे बहुमत से जीते कि आप सोच भी नहीं सकते। ठीक है? तो वो बारगेन पावर के लिए संघ संजय जोशी को लेके आया था। हम लेकिन उन चार राज्यों की जीत ने संघ को और कमजोर कर दिया और बीजेपी मतलब अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी ने यह संदेश दे दिया कि ठीक है भैया अब हम परफॉर्म कर रहे हैं पार्टी हम ही चलाएंगे अपने हिसाब से एक और और ये फैसले ये फैसले हम ही करेंगे। एक और कंट्राडिक्शन जिसकी बात नहीं हुई थी या कंफ्टेशन की बात नहीं हुई थी आपके राज्य से आती है तो माया मिली ना राम मनोहर लाल खट्टर के लिए सही साबित होता हुआ दिख रहा है क्योंकि दो टर्म तक मुख्यमंत्री रहे तीसरे टर्म में कहा गया दो टर्म पूरा नहीं हुआ था दो टर्म पूरा नहीं हो गया था बीच में उनको हटा दिया गया था छ महीने पहले हटाया गया और नायब सिंह सैनी को बनाया गया इससे पहले

22:15 भी हमारी चर्चाओं में आपने कहा था कि सुपर सीएम के तौर पे मनोहर लाल खट्टर ही काम कर रहे थे और नायब सिंह सैनी ने कहा भी था मैं तो अपॉइंटमेंट भी नहीं कर सकता हूं लेकिन जैसे ही अध्यक्ष अध्यक्ष बनाया जाता है नितिन नवीन को। आपके राज्य में एक हलचल होती है। डीजीपी पद से शत्रुजीत कपूर को हटाया जाता है जो काफी करीबी माने जाते हैं खट्टर साहब के। तो क्या अब नायब सिंह सैनी सीएम बन पाए हैं? नहीं नायब सिंह सैनी ने यह पहला चक्र भी तोड़ा है। हम अभी हैं। नहीं नहीं जैसे ही चक्र भी तो बहुत सारे हैं। जैसे ही दिल्ली में इस नाम की घोषणा हुई क्योंकि क्या था ना जब से खट्टर साहब हटे थे तब से चर्चा चल रही थी कि खट्टर साहब भी राष्ट्रीय अध्यक्ष हो सकते हैं। इस बात से सैनी साहब घबरा रहे थे हम कि जिसके मैं पैर छू रहा हूं। ठीक है? अगर वो राष्ट्रीय अध्यक्ष हो गए तो मेरे लिए दिक्कत हो जाएगी। ठीक बात है।

23:00 तो जैसे ही ये घोषणा हुई कि नितिन नवीन जी राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष होंगे। जी उन्होंने तुरंत जिन जिन डीजीपी साहब को छुट्टी भेजा हुआ था उनको डीजीपी पद से मुक्त कर दिया और ये अब अब इसमें एक इंटरेस्टिंग बात और है जो डीजीपी नया बनेगा जी वो देखना उसमें क्या होगा जो अध्यक्ष बनेगा हरियाणा बीजेपी का उसमें देखना क्या होगा अभी अभी टूटा है पहला चक्कर व्यू अभी दो और टूटने हैं तो क्या-क्या होने वाला है कुछ कुछ हिंट दीजिए मुझे लगता है कि जो इनके नजदीकी नहीं है लोग हम उन लोगों को इन दोनों पदों पर लाया जाए खट्टर के जो नजदीकी नहीं है जो उनके खिलाफ रहे हैं लंबे समय तक डीजीपी भी उसी उसी पद पे वही आएंगे और जो

23:46 अध्यक्ष होंगे हरियाणा के वो भी वही आएंगे जी चर्चा चक्रवीर तीन टूटेंगे इस बार और नयब सिंह सैनी एहसास करेंगे कि मैं मैं इस प्रदेश का मुख्यमंत्री हूं। अच्छा चलिए एहसास तो एहसाससे बहुत ही ये जरूरी है उनके लिए। बहरहाल चर्चा की शुरुआत आपने एक स्टेटमेंट से की थी कि राजनीति में जो लोग होते हैं उनकी कुंडलियां मजबूत होती हैं। लेकिन राजनीति में होने वालों की ही कुंडलियां कमजोर भी हो जाती हैं। मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान उसी के एग्जांपल हैं। अ देखिए जहां वो बैठे हुए हैं वो भी कोई कमजोर पद नहीं है। हम जहां वो जाना चाहते थे वो एक बड़ा पद था। अपेक्षाकृत तो है ही ना। नहीं हर आदमी को हर आदमी तो अपेक्षाकृत है ना। आप भी हैं, मैं भी हूं। मनोहर लाल जी भी हैं, धर्मेंद्र प्रधान जी भी हैं, भूपेंद्र यादव जी भी हैं। सब हैं। देखिए

24:34 हम इंसान को उम्मीद जिंदा रखती है। सही बात है। उस उम्मीद के सहारे उसका जीवन कट जाता है कि मैं एक दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष बनूंगा। हम अभी मैं कैबिनेट मंत्री हूं। एक दिन मुख्यमंत्री बनूंगा। यह जो बनूंगा वाली उम्मीद है ना यह आपको जिंदा रखती है। हम तो वो कोई अब जैसे कट्टर साहब हैं एग्जांपल ले रहा हूं मैं और लगभग 9 साल वो हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे। जी पहली बार का विधायक कांग्रेस पार्टी में पहली बार दूसरी बार तीसरी बार का विधायक तो सोच भी नहीं सकता। कहते हैं कि ये तो फर्स्ट टाइम है। इसको हम कैसे बनाएं? मंत्री मैं मुख्यमंत्री की बात नहीं कर रहा हूं। किसी से नहीं बन पाता। मतलब मिनिमम एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया महीने है ही नहीं और यहां

25:19 क्या हो रहा है भजन लाल जी टिकट मांगते हुए घूम रहे थे वसुंधरा के पास जी जहां से मांग रहे थे वहां से नहीं दिया उसको हम और जब पर्ची खुली तो मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आपको पता है सबसे ज्यादा भगवान को मानने वाला मुख्यमंत्री कौन है हिंदुस्तान में नो आईडिया बजलाल शर्मा अच्छा वो जहां बैठते हैं वहीं एक तस्वीर लगी होती है लेफ्ट में या राइट में ठाकुर जी की उनको कहेंगे कि साहब वो बाय इलेक्शन है कोई बात नहीं ठाकुर जी कर लेंगे अपने आप तो ठाकुर जी की कृपा उन पर बरस क्योंकि क्योंकि वो जो आदमी पहली बार का विधायक है जी और वो मुख्यमंत्री हो जाए राजस्थान जैसे प्रदेश का तो उसको तो पता है ना मुझे ठाकुर जी ने बनाया है

26:05 ठीक बात है भाई एक मोदी जी हम लेकिन मोदी जी को किसने कहा ठाकुर जी ने सो अब ठाकुर जी कौन है ये भी आप लोग डिकोड करिए इतना ब्लैक एंड वाइट डिस्कशन नहीं होगा हां तो एकमात्र ऐसा मुख्यमंत्री है जी जो कर्म पे बहुत कम और ठाकुर ठाकुर जी पे ज्यादा विश्वास करते हैं। ठीक ये बात मैंने कभी बोली नहीं थी पहली बार बोली है और बढ़िया बात थी और डिकोड करने लायक बात है। कुंडलियों की जब बात हो ही रही है और कुंडलियां पलटने की बात हो ही रही है आदेश जी तो मुझे लगता है कि जिस पार्टी को आपने लंबे समय तक कवर किया है और अब भी कर रहे हैं उस पार्टी की कुंडलियों पे भी बात की जाए। सोनिया गांधी राहुल गांधी मनी लॉन्ड्रिंग 2000 करोड़ का मेरे हिसाब से आरोप था और जो यह चार्जशीट थी इसका संज्ञान लेने से राउज़ मनी कोर्ट ने मना

26:52 कर दिया कि भाई गड़बड़ मामला है हम नहीं लेते हैं संज्ञान क्या लगता है इनकी कुंडलियां नेशनल हेराल्ड केस में बदलेंगी नेशनल हेराल्ड केस एक पॉलिटिकल केस है अब मैं इसकी शुरुआत ना कल से करता हूं ये दो केस है बेसिकली एक केस है जिसमें ईडी जो है वो श्वेता जांच कर रही है और दूसरा केस है जिसमें उसमें सुब्रमण्यम स्वामी साहब जो है वो शिकायत करता है। जी ठीक है। वो मामला हाई कोर्ट में लंबित है और ये ईडी को जो कल फटकार लगी है कोर्ट की उसमें उन्होंने ये कहा है कि आपने जो पीएमएलए की मूल भावना है उसके विरुद्ध काम किए कि आपने पहले जांच की मनी लॉन्ड्रिंग की और बाद में की एफआईआर। इसलिए उन्होंने कोर्ट ने उनको कहा कि हम इसको एक्सेप्ट नहीं करेंगे। हम यहां से ये बात शुरू होती है। अब मैं आपको ले चलता हूं। इसके लिए मुझे

27:38 नोट्स पढ़ने पड़ेंगे मुझे। जी। नेशनल हेरल्ड एक बड़ा केस है। इसकी शुरुआत अह 1937 से होती है। जब 37 में कांग्रेस पार्टी एजीएल के नाम से एसोसिएट जनरल लिमिटेड नाम से एक बड़ी कंपनी का गठन करती है। जिसमें तीन अखबार निकाले जाते हैं। नेशनल हेरल्ड, कौमी आवाज और नवजीवन। ये तीनों अखबारों का एक उद्देश्य था वो ये था कि इन्हें आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देना था। इस कंपनी के शेयर होल्डर जो थे वो जिलों के बड़े कांग्रेस के नेता थे। जिलों के हेल्ड के हेरल्ड के जो शेयर होल्डर्स थे 47 में आजादी के बाद अखबार चलता रहा उस समय सेट जनरल लिमिटेड जो भी जो भी देनदारियां थी वो कांग्रेस पार्टी चुकाती रही जी धीरे-धीरे

28:24 इसका जो कर्ज था वो ₹90 करोड़ हो गया हम क्योंकि उसकी कोई इनकम नहीं थी इन तीनों अखबारों की 2010 में कांग्रेस पार्टी ने एक यंग इंडिया नाम से कंपनी का गठन किया ठीक है जी ये सब चीजें जुड़ी है आपस में इसलिए मैं आपको बता रहा हूं जी जी और इस कम इस कंपनी का जो गठन हुआ वह कंपनी एक्ट सेक्शन 25 के तहत हुआ। इसमें इसमें क्या होता है? भारत सरकार के अधीन ये कंपनी होती है। इसमें कोई मुनाफा नहीं कमा सकता। ठीक है? ना किसी को सैलरी जाएगी। ठीक है? कोई वित्तीय लाभ का हकदार इसमें नहीं होता इस सेक्शन के अंदर। एसेट जनरल लिमिटेड का लोन जो बकाया था वो नई कंपनी को ट्रांसफर कर दिया गया। यानी एजीएल का लोन ट्रांसफर कर दिया गया। यंग इंडिया को। यंग इंडिया ने कांग्रेस को ₹ लाख देके 90

29:11 करोड़ का कर्ज अपने नाम ट्रांसफर करवा लिया। इसके बाद एसेट एजीएल ने 90% शेयरिंग भी यंग इंडिया के नाम ट्रांसफर कर दी। लेकिन एसोसिएट जनरल से जुड़ी सारी प्रॉपर्टी एसोसिएट जनरल लिमिटेड के पास ही रही। जी यानी एक लोन है और एक एक एजेल की प्रॉपर्टीज है जो पूरे देश में बड़ी-बड़ी प्रॉपर्टीज मुंबई में लखनऊ में चंडीगढ़ पंचकूला में दिल्ली में आईटीओ के पास इस बीच स्वामी साहब ने कांग्रेस पार्टी पे एक केस किया दायर किया उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राहुल गांधी ऑस्कर फर्नांडिस बोरान जिस पे इन सब लोगों को जमानत मिली मोतीलाल बोरा वगैरह सब स्वामी जी ने क्या कहा स्वामी जी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं का पैसा मिसयूज किया जिससे उन्होंने यंग इंडिया को बेल आउट

29:56 किया। जी। यानी जबकि वो फैसला कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हुआ था जो उनकी हाईएस्ट बॉडी है। स्वामी जी को बड़ी चिंता हुई कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की कि उनका पैसा जो वो पार्टी में फंड देते हैं उस वो जो पैसा था उसे आपने बेल आउट कर दिया यंग इंडिया को कर्ज से। अब ये साथ-साथ ये भी कह रहे थे कि इन्होंने प्रॉपर्टी ट्रांसफर भी कर दी है। जबकि वैसा नहीं हुआ। प्रॉपर्टी ट्रांसफर हुई नहीं थी। अब स्वामी जी का आरोप था तो 50 लाख में आपने 90 करोड़ का जो कर्ज था वो माफ कर दिया। हम अब इस बीच में जीडी गोयंका ने यंग इंडिया को चेक से एक कर्ज दिया। कांग्रेस ने कुछ पार्टी कुछ समय के बाद उसको वापस चेक से ही वापस कर दिया। ऐसे ही दो-तीन कंपनियों ने और छोटे-छोटे लोन दिए। अब जो सारे सवाल और आरोप हैं वह इस बात को लेके थे कि यंग इंडिया कंपनी एसोसिएट जनरल

30:44 लिमिटेड की प्रॉपर्टी को हड़पना चाहती है। हम ठीक है। स्वामी जी का केस हाई कोर्ट में लंबित है। ईडी की पूछताछ यंग इंडिया में पैसे के लेनदेन को लेकर भी की जा रही है। जी यानी इनमें कहीं भी मनी लॉन्ड्रिंग का जो एंगल था वो इस्टैब्लिश नहीं हुआ। और आपने पीएमएलए की मूल भावना को उल्टा कर दिया। अब कल जो हुआ है कल कल कल क्या हुआ है कि राज रेवेन्यू कोर्ट ने कहा है कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर ईडी की चार्जशीट कानून के खिलाफ है। इसको हम मंजूरी नहीं देते क्योंकि पीएमएलए में पहले एफआईआर की जाती है। उसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग की जांच होती है। लेकिन ईडी ने उल्टा किया। पहले मनी लॉन्ड्रिंग की जांच की और फिर एफआईआर की। हम बेसिकली मैं आपको ये कहना चाहता हूं उस पूरे मामले में कि ये मामला पॉलिटिकल था। जब तक स्वामी जी को

31:32 ईडी की चार्जशीट का मतलब यह है कि उन्होंने गांधीज को फ्रेम किया कि यह लोग करप्ट है। ठीक बात है। ठीक है? और उसको मीडिया के माध्यम से पूरे देश को बताया कि देखो गांधी परिवार ने किस तरीके से प्रॉपर्टी हड़पने के लिए और कर्ज माफ करने के लिए या नई कंपनी बनाई जिसके खुद शेयर होल्डिंग अपने पास रखी। हम ये तो था ईडी का मकसद। स्वामी जी का मकसद दूसरा था। वो मोदी जी के सामने अपनी यूटिलिटी क्रिएट करना चाहते थे। हम कि देखो मैंने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पे केस कर दिया। अब आप मुझे इस देश का वित्त मंत्री बनाओ। जब उनकी वो उम्मीद टूट गई तो स्वामी जी ने धीरे-धीरे उस केस को भी उसमें ढीला छोड़ दिया। ढीला छोड़ दिया। जाना कम कर दिया। बहाने बनाने शुरू कर दिए। मैं बीमार हूं। मैं आ नहीं सकता। डॉक्टर ने एडवाइस किया है। मैं पेश नहीं हो सकता। ऐसे कर करके वो मामला

32:19 आज भी लंबित है। हम ये दो अलग-अलग केस हैं। तो इन दोनों के मकसद थे। एक मकसद था गांधी परिवार को फ्रेम करना कि यह लोग करप्ट हैं और पूरे देश को बताया मीडिया ने। लेकिन कल जब हम कोर्ट ने ईडी की बात को खारिज कर दिया। मीडिया ने नहीं बताया देश को कि खारिज हो गया। कि खारिज हो गया। ये लोग बेकसूर हैं। नहीं बताया। और स्वामी जी चुप क्यों हैं? क्योंकि मोदी जी उनको मंत्री नहीं बना रहे हैं। हम तो दोनों ही मामले मैटर एक है। केस दो हैं। दोनों का मकसद राजनीतिक है। और एंबिशियस मकसद है। हां दोनों के मकसद एंबिशियस है। तो भाई आप कैसे आप कैसे बताओगे? अब आप कैसे अपनी पार्टी उस जो आपकी विपक्षी पार्टी है उसके खिलाफ कैसे लड़ोगे आप? हम ऐसे ही ना। ठीक बात है। तो दोनों का मकसद राजनीति था। एक में

33:06 बदनाम करो गांधी परिवार को और दूसरे में आप अपने तरीके से अपना फायदा लो कि आप अपने दिखाओ कि मोदी जी देखो मैंने कितना बड़ा काम कर दिया और ये लोग जो है मेरे कारण जमानत पे घूम रहे हैं। तो पहला जो मकसद था कि पॉलिटिकली इनको बदनाम किया जाए। छवि का मान मर्दन किया जाए। उसमें मीडिया की भूमिका बड़ी सकारात्मक रही। मतलब मीडिया ने उस एंबिशन को पूरा करने में मदद निभाई और अब जब कोर्ट का यह फैसला आता है तो एकदम से आप मैसेज तो कम से कम दे सकते हैं। न्यूज़ तो दे सकते हैं। वैसा हुआ न्यूज़ गई लेकिन जो जिस हिसाब से जमानत ली करप्शन किया वो न्यूज़ थी कि 247 एक ही खबर चल रही थी इंपैक्ट क्रिएट करना 247 नेशनल से लेके रीजनल चैनल्स तक एक ही खबर चल रही थी उसी डिग्री से

33:52 यानी उतने ही प्रभावशाली तरीके से आपने ये नहीं बताया इस देश के लोगों को कि कोर्ट ने ईडी को क्या कहा है। कोर्ट ने कहा है कि हम इसको एक्सेप्ट ही नहीं कर सकते। हम् और कहीं भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस नहीं बनता। यह इस्टैब्लिश ही नहीं हो रहा है। स्टैब्लिश ही नहीं होता। दो यह पूरा मैटर जो है नेशनल हेरल्ड का ये ये जो मैंने नोट्स बना के रखे हुए हैं ना मेरे फोन में ये ये आज से नहीं है मेरे पास। ये जब शुरू हुआ था ना ये केस तब से मैंने इसको समझने के लिए कि ये मैटर है क्या? देखिए ये मामला राजनीतिक नहीं है क्योंकि इसमें फैक्ट्स है 1937 से शुरू होता है। इसमें इसमें कंपनी एक्ट है। कंपनी लॉ है। कंपनी लॉ है। तो ये मेरा सब्जेक्ट नहीं है। जी इसलिए मैंने वो पढ़ा है। कहीं कोई चूक ना हो जाए। हम हम हम लोग राजनीतिक बात तो कर सकते हैं बिना पढ़े। ठीक बात है।

34:38 लेकिन ये जो टेक्निकल इश्यूज होते हैं इसमें थोड़ा सा सतर्क रहना चाहिए कि भैया कोई चूक ना हो जाए। ठीक बात है। 24 घंटे दिमाग की मशीनरी जो है राजनीतिक रूप से काम करती है। सोचती है तो उस मामले में किसी पर्चे नोट्स की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जहां पर जरूरत पड़ती है वहां पर हम बस ऐसे अग्रवादी नहीं हो सकते हैं। मेन स्ट्रीम मीडिया की तरह हमारी तरफ से कोई भी बात जी फक्चुअली रोंग ना जाए। हम ये हमारा मकसद है बस यही बात है और उसी चीज की कोशिश हम लोग करते हैं। फक्चुअली रोंग हो ना हो मोरली बहुत सारी चीजें रोंग हो जाती है। आदेश जी राम जी की हालांकि शब्द बड़ा अच्छा है। आपके हरियाणा में तो खासतौर पे जब मैं आया तो जय राम जी की सुन रहा था। राम जी की राम राम जी राम राम जी लेकिन अब एक सरकारी योजना जो है वो जी राम जी की बन गई है इससे पहले वो

35:25 पूज्य बापू करके भी कुछ बन रही थी लेकिन वो बन नहीं पाई और तत्वगत्वा जी राम जी की बनी और आपने इसको पॉलिटिकली डिकोड करके Twitter पे लिखा भी है कि मनरेगा में से महात्मा गांधी को हटा के राम जी को लाने का प्रयोजन क्या हो सकता है थोड़ा बहुत समझाइए जी राम जी का जरूरत क्या थी अभी रशिया के प्रेसिडेंट पुतिन साहब आए थे जी वो राजघाट गए गांधी जी की महात्मा गांधी की समाधि पे हम और फूल चढ़ा के आए, श्रद्धांजलि देके आए। जी। उस बात से भी सरकार यह नहीं सीखी कि पूरा विश्व जो है इस पूरी दुनिया के लोग गांधी को कैसे पूजते हैं, कैसे मानते हैं, कैसे उनको नमन करते हैं। और हमारी जो अपनी सरकार है वो गांधी की विरासत को उखाड़ के फेंकना चाहती है। और उनका मकसद क्या है पता है? उनका मकसद ये नहीं है। उनका मकसद ये है कि

36:12 लोग महात्मा गांधी को गांधी परिवार से जोड़ के देखते हैं। जी। जबकि वो उनके परिवार के नहीं है। कल प्रियंका गांधी ने भी पार्लियामेंट में ये बात कही। ठीक है? वो अलग बात है कि पंडित नेहरू के और गांधी जी के क्या रिश्ते थे। वो उस पे हम जाना नहीं चाहते। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि आप इतिहास को बदल नहीं सकते। उसको आप तोड़ मरोड़ सकते हो। उसको उसको आप डिफरेंट तरीके से पेश कर सकते हो। तो फिर तो बात सही हुई कि आप गोडसे को मानते हो। आप गांधी को नहीं मानते। एक्सेप्ट कर लो। जब आप विदेश जाते हो तो जहां-जहां आपको गांधी जी की मूर्ति दिखाई देती है आप वहीं नमन करते हो। आप वहीं पुष्प अर्पित करते हो। आपको दिखाना पड़ता है कि नहीं हम गांधी के देश से आते हैं। जी और आपको ये कहना भी पड़ता है कि मैं गांधी के देश से हूं। जी।

36:57 है ना? लेकिन जब देश की बात होती है तो आप गांधी की विरासत को धुंधली नहीं कर रहे हो। आप उसको उखाड़ के फेंकना चाहते हो। मेरा ऐसा मानना है कि जो इतिहास लिखा गया वह लिखा गया है। अब आप जब से सत्ता में हो आप कुछ अपना लिखो ताकि लोग आपको भी ऐसे याद करें। किसी लकीर से अगर आप कुंठित हैं। आपको लग रहा है कि यार ये लकीर हमको डिस्टर्ब कर रही है। आप बड़ी लकीर खींचो। आप लकीर बड़ी खींचो और मैं ये चाहता हूं कि कम से कम ये जो 15 साल तो आज की डेट में है ही है। भगवान करे और बढ़ जाए। मुझे कोई तकलीफ नहीं है। अच्छा। तो कम से कम लोग यह याद करें 50 साल बाद कि भाई 15 साल के लिए नरेंद्र मोदी इस देश के प्रधानमंत्री बने थे और उन्होंने अपने कार्यकाल में यह यह काम किए हैं ताकि आपकी भी चर्चा आपके जाने के बाद

37:44 इतिहासकार करें। इस देश के छात्र उसको किताबों में पढ़ें। हम हम जैसे लोग या हमारी बिरादरी के लोग जो आने वाली पीढ़ी है वो उसकी चर्चा करें। जैसे आज हम गांधी जी की चर्चा कर रहे हैं। हम तो आप अपनी लाइन लंबी नहीं खींच रहे हो। आप गांधी की लाइन को छोटा करने की कोशिश कर रहे हो और इनको पता ही नहीं है। गांधी की लाइन बहुत बड़ी है। पूरे सिर्फ हिंदुस्तान तक नहीं है। वो पूरे विश्व में फैली हुई है। मतलब ये मूर्खता ये है कि गांधी को अगर आप गांधी परिवार से जोड़ के देखते हैं क्योंकि गांधी ह्यूमैनिटी से जुड़ा हुआ व्यक्ति है। गांधी पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ व्यक्ति है। मैं मैं नीरज वही बोल रहा हूं कि आप गांधी के कंट्रीब्यूशन को आप गांधी की विचारधारा को छोटा नहीं कर सकते।

38:30 हम आप जितनी योजनाएं हैं आप सब चेंज कर दो। आप गांधी का नाम हटा दो। कुछ नहीं होता उससे। जो चीज है ना वो है। एक चीज आपने लिखी है। एक चीज आपने लिखी थी जो मैं चाहता हूं थोड़ा सा आप एलबोरेट करें और उसी क्रम में हम इस एपिसोड को अंत करने की कोशिश करें कि आपने कहा कि राम जी अगर इसका विरोध होता है जी राम जी इस नाम का तो विपक्ष को राजनीतिक रूप से नुकसान होगा। भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक रूप से फायदा होगा। राम के नाम से। अगर गांधी जी इस नाम के हटने का विरोध नहीं कर पाती है तो मुद्दा जो है बिल्कुल कमजोर पड़ जाएगा। तो क्या लगता है आपको क्या एक्शन होना चाहिए विपक्ष का? सरकार सरकार ये भूल जाती है कि जब गांधी जी को गोडसे ने गोली मारी थी उनके मुंह से आखिरी शब्द निकला था हे राम हे राम

39:15 और आज आप उसी राम के बहाने से गांधी की विरासत को मिटाना चाहते हो अब मैंने इसलिए लिखा था ये इसका कारण बताता हूं आपको जी ये लोग भी जो इनके रणनीतिकार हैं सरकार के वो बहुत शातिर हैं समझदार हैं जानते हैं कि उनको क्या करना है लेकिन ये लोग ये नहीं सोच रहे हैं कि जब आपने 2024 की शुरुआत में राम मंदिर का शिलान्यास और जब आपने उसके नाम के वोट मांगे तो लोगों ने आपको उसके नाम के वोट नहीं दिए। हम इसलिए आप 240 पे आ गए। नहीं तो आपकी 400 सीट आती। पहली बात। दूसरी बात इनको यह लगा कि अगर विपक्ष जो है वो गांधी की बात का विरोध करेगा कि गांधी का नाम क्यों हटाया जा रहा है तो हमने तो राम डाल दिया है। राम के आप राम के विरोधी हो। अनुराग ठाकुर ने बयान भी दिया सेम

40:00 जो मैंने पहले अस्यूम करके लिखा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को राम से क्या दिक्कत है? हम ठीक है तो पॉलिटिकली हमने ठीक ही लिखा था वो करेक्ट थे हम उसमें ये डिकोडेशन जो था वो बिल्कुल करेक्ट सेम स्टेटमेंट आया अनुरा ठाकुर का मैं उनका ट्वीट पढ़ रहा था उसमें उन्होंने डाला हुआ था तो मैं ये कहना चाहता हूं कि राम के नाम का जो सबसे बड़ा राजनीतिक कदम आपने उठाया था वो था राम मंदिर जी उसका आपने शिलान्यास भी किया सब कुछ हुआ उसके बावजूद लोगों ने आपको उस मुद्दे पर वोट नहीं दी हम पहली बात विपक्ष को अब इस बात से डरना नहीं चाहिए कि हमें ये राम विरोधी साबित कर देंगे। अब तो जो आपको साबित करना था वो कर चुके हैं। वो अपने थर्ड टर्म में है। जी। आप लोगों के पास खोने के लिए कुछ नहीं है

40:46 जो कुछ है पाने के लिए है। ठीक बात है। तो जो भी मुद्दा उठाएं ना चाहे वो पंडित नेहरू का हो, चाहे वो महात्मा गांधी का हो, चाहे वो बाबा साहब अंबेडकर का हो, ठीक है? चाहे वो बेरोजगारी का हो, चाहे वो पेपर लीक का हो। जोर शोर से उठाओ। और वैसे छोड़ दो कि तुम्हारा क्या होने वाला है। तुम सब कुछ खो चुके हो। अगर आप जो है पाने के लिए अगर आप किसी मुद्दे में कन्विंस्ड है। कन्विक है तो उसको उठाइए। हां उठाइए। क्योंकि गांधी के पक्ष में बोलना राम के पक्ष में ही बोलना है। गांधी का जीवन तो यही बताता है क्योंकि रघुपति राघव राजा राम इसको जिसने अमर किया वो गांधी ही थे। तो इन प्रार्थनाओं को कितना सुनेगी विपक्ष ये देखने वाली चीज है। मुझे ये उम्मीद है कि आपने ये चर्चा पूरी सुनी होगी और सुनी होगी तो कुछ राय बनी होगी। कुछ सवाल पैदा हुए होंगे तो जो राय आपकी बनी हो जो सवाल

41:32 पैदा हुए हो वो इस चर्चा में देखते हुए जो कमेंट सेक्शन है उसमें लिख दीजिए ताकि हम आपकी राय जान सके आपके सवाल जान सके और उस पर हमको चर्चा करने की एक जरूरत महसूस हो हम उस पर चर्चा भी करें। बहुत-बहुत शुक्रिया इस एपिसोड को सुनने के लिए और आदेश जी बहुत-बहुत शुक्रिया इस चर्चा में शामिल होने के लिए। बने रहेंगे, करते रहेंगे चर्चा और देखी जाएगी कि देखी जाएगी कितनी देखी जाती है। बहुत-बहुत आभार। बहुत-बहुत शुक्रिया।

42:28 [संगीत]

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