“BJP दफ्तर में 'चीनी' मेहमान? Shaksgam Valley पर चीन का दावा और BJP का स्वागत | Ashutosh ki Baat”的完整文字稿。点击时间戳即可从该位置打开视频。想要其他视频的字幕?试试 YouTube 字幕提取工具。
0:02 नमस्कार, मैं हूं आशुतोष और आप देख रहे हैं सत्य हिंदी। सत्य हिंदी के विशेष कार्यक्रम आशुतोष की बात में आपका स्वागत है। बातचीत शुरू करने के पहले एक छोटी सी अपील सत्य हिंदी एक कोशिश है ईमानदार, निडर और निर्भीक पत्रकारिता की। हम अपने उन लाखों दर्शकों के शुक्रगुजार हैं जो लाखों की संख्या में हमारे कार्यक्रमों को देखते हैं और हमारी हौसला अफजाई करते हैं। से एक और छोटी सी गुजारिश करना चाहते हैं कि आप ना केवल हमारे कार्यक्रम देखें बल्कि संभव हो सके तो हमारे वीडियोस को बड़ी संख्या में डिस्ट्रीब्यूट करें, सर्कुलेट करें और शेयर करें ताकि ईमानदार पत्रकारिता ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और साथ ही साथ सत्य हिंदी की मेंबरशिप भी खुल गई है और हम गुजारिश करेंगे कि हमारे ज्यादा से ज्यादा देखने वाले हमारे कार्यक्रम को पसंद करने वाले सत्य हिंदी के सदस्य भी बने। हमारी मेंबरशिप से जुड़े और अब आज की बातचीत
0:49 शुरू करते हैं। आज दरअसल हम बातचीत करना चाहते हैं भारतीय जनता पार्टी के उस उस पोल की जो पूरी तरीके से खुलकर सामने आ गई है। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं क्योंकि भारतीय जनता पार्टी हर उस शख्स को हर उस पार्टी को हर इस नेता को जिसने पिछले दिनों चीन के साथ किसी तरीके से बातचीत की जिनका पहले कभी किसी भी तरीके का इतिहास रहा। कभी से किसी कभी किसी तरीके से उनके साथ कोई मुलाकात की या उनके साथ कोई डील की उसको देशद्रोही और गद्दार बताने की कोशिश की। वही झल भारतीय जनता पार्टी अपने दफ्तर में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के प्रतिनिधि मंडल का स्वागत करती हुई देखी और बड़े गर्व के साथ उनकी तस्वीरों को उनके लोगों ने सोशल मीडिया पे शेयर भी
1:36 किया। याद रखिएगा दो चीजें। यह वही चीन था जिसके बारे में भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि एक सीमा पर हम दो शत्रुओं से लड़ रहे थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह बात खुलकर सामने आई थी कि दरअसल चीन पाकिस्तान की मदद कर रहा था पूरी तरीके से और भारत सरकार ने कहा था ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और इत्तेफाक की बात देखिए कि जब भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के लोग भारत कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के प्रतिनिधि मंडल से मिल रहे थे उसी वक्त उसी समय उसी दिन
2:21 भारतीय भारत के सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी कहते हैं आप इस बात से अवगत होंगे कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है और भविष्य में किसी भी तरह के दुस्साहस का करारा जवाब दिया जाएगा। अजीब विडंबना है। एक तरफ भारतीय सेना कह रही है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। अगर ऑपरेशन सिंदूर जारी है तो फिर वह चीन और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ एक तरीके से। और चीन जो पाकिस्तान जो हमारा सबसे कट्टर दुश्मन है जिसने गलवान की घाटी में घुसकर हमारे सैनिकों पर हमला किया। हमारे सैनिक शहीद हुए। अब उन्हीं को अपने दफ्तर में बुलाकर उनकी
3:09 आओ भगत कर रही है। और यह भी इत्तेफाक की बात देखिए कि उसी दिन चीन का विदेश मंत्रालय लद्दाख के शक्सगाम घाटी पर कब्जे की बात दोहराता है और 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच में जो संधि हुई थी उसकी याद दिलाता है और उसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नाराजगी जाहिर करते हैं। कहते हैं जम्मू कश्मीर और लद्दाख का पूरा इलाका भारत का अभिन्न अंग है। चीनी और पाकिस्तानी अधिकारियों को यह बात कई बार बताई जा चुकी है। शक्सराम घाटी में जमानी पर जमीनी सच्चाई को बदलने की कोशिशों पर चीन से लगातार विरोध दर्ज
3:55 कराया गया है और अपने हितों की रक्षा के लिए हम पूरी तरीके से कटिबद्ध हैं। वहीं लद्दाख के उपराज्यपाल कहते हैं शक्सगाम में चीन की गतिविधियां गैरकानूनी और बर्दाश्त नहीं की जा सकती। तो ऐसे में बीजेपी और आरएसएस के लोग क्यों चीनी प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात कर रहे थे? मैंने फिर कहा सरकार के स्तर पर बातचीत बंद नहीं होनी चाहिए। यह डिप्लोमेसी का तकाजा है। सरकार अगर चीन से बातचीत कर रही है या चीन के राष्ट्रपति से बात कर रही है तो यह होनी चाहिए। लेकिन वह भारतीय जनता पार्टी को यह अधिकार नहीं है जो दूसरी पार्टियों को देशद्रोही गद्दार पाकिस्तान परस्त चीन परस्त न जाने
4:42 किन-किन शब्दों से सुशोभित कर रही थी। उसको अपने दफ्तर के अंदर चीनी प्रतिनिधि मंडल का स्वागत करना, मीटिंग करना, आओ भगत करना कैसे जस्टिफाइड है? और क्या वाकई में यह सही चीज है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है और हम अपने तथाकथित शत्रुओं को का स्वागत कर रहे हैं। पार्टी के स्तर पर चर्चा करेंगे इसी पर। हमारे साथ जो मेहमान मौजूद है उनका परिचय करा देते हैं। इस वक्त हमारे साथ मौजूद है बहुत ही वरिष्ठ लोगों का हमारे साथ पैनल है। डॉक्टर राकेश पाठक है। हमारे साथ संजय कपूर साहब हैं। वरिष्ठ पत्रकार सतीश के सिंह है और साथ ही साथ कर्नल दिनेश नैन है। आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है।
5:28 कर्नल दिनेश नैन साहब मैं आप से बातचीत शुरू करता हूं। जब आपने ये तस्वीर देखी तो आपको गुस्सा नहीं आया। आपको तकलीफ नहीं हुई? देखिए आशुतोष बहाल मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि एस ए सैनिक हम लोग ये डेफिनेटली देखते हैं कि जो भी सरकार आज की तारीख में पावर में है चाहे वो किसी भी पार्टी पक्ष की क्यों ना हो सेना का काम बेसिकली होता है कि उनकी इच्छा का पूर्ति करना उनके मुताबिक काम करना उनके मुताबिक चलना उनकी क्या डिप्लोमेसी है उनकी क्या डिप्लोमेटिक स्टेप वो ले रहे हैं उसप हम लोग इतना डीप एनालिसिस में नहीं जाते हैं। बट बट बट प्रॉब्लम डेफिनेटली आती है। इट हर्ट्स
6:14 यू व्हेन क्योंकि बहुत शहादत दी है इस सेना ने 1962 से लेकर के अब तक और अगर उन शहादतों को जो हम लोग देते हैं और देश के लिए करते हैं उनको अगर सीरियसली देशवासी ही नहीं लेंगे तो डेफिनेटली कहीं ना कहीं वो हर्ट तो जरूर करेगा। जिस प्रकार से ये चीन का जो मामला है पहला तो मुझे समझ में नहीं आता कि चाहे वो जवाहरलाल नेहरू जी थे या फिर जैसे आज आप बोल रहे हो कि बीजेपी जो भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के अंदर इस तरह का कोई जो प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया गया है। सभी लोगों ने धोखा खाया है क्योंकि चीन कभी भी एक हाथ जो मिलाता है तो दूसरे हाथ में खंजर जरूर रखता है।
7:00 हम सर काम का जहां तक किस्सा है जैसा हम सभी जानते हैं कि जब हम लोग आजाद हुए आशुतोष तो उस टाइम पर आजादी के टाइम पर भारत का रूस के साथ में काफी अच्छे संबंध थे और उसके कारण ही एक चीन के साथ में एक पारंपरिक संबंध बनने बनता चला गया लेकिन 56 और 57 के आसपास चीजें कुछ बदली चीजें इस रूप से कि उससे पहले ये सब देख रहे थे कि पाकिस्तान जो है वो एक तरीके से एक कॉलोनी बना हुआ था अमेरिका की हमारे बिल्कुल बगल में बैठ के और भारत हिंदू चीनी भाई भाई के नारे हम लोग लगा रहे थे आपस में हम लोग चल रहे थे जवाहर विजिट भी कर रहे थे लेकिन 1962 जब हुआ तो उसके बाद अचानक से पाकिस्तान चौका औरकि
7:49 1948 के अंदर हम लोग जो लाइन ऑफ कंट्रोल पे हम बैठे और हमारा जो जम्मू कश्मीर का हिस्सा हिस्सा गिलगिट बल्तिस्तान का हिस्सा जो कि हमारा लेजिटिमेट हमारा हिस्सा है और हम कहते हैं कि भारत का अभिन्न अंग है। वो उसका कुछ पोर्शन एलओसी के ब के लाइन खींचने के बाद में पाकिस्तान की तरफ रह गया और आज भी हम कहते हैं कि पीओके हमारा है और डेफिनेटली हमारा हम ले रहे लेकिन पाकिस्तान ने बड़ी चालाकी के साथ में क्योंकि उसकी जमीन तो थी नहीं और दूसरा चीन को खुश करने के लिए इस सगाम वैली के जो इलाका है उसको चीन को इसलिए दे दिया ताकि चीन जो है उनके क्षेत्र के अंदर अपनी मैकमोहन लाइन को इंटरनेशनल बाउंड्री में कन्वर्ट कर और ये हमारा शीशा चीन लेके बैठ गया। लेकिन
8:37 ये हिस्सा पाकिस्तान का नहीं था या उनके पास राइट नहीं था इसका। ये भारत का हिस्सा था। यही कारण है कि 2015 के अंदर जब सीपेक के बारे में इन लोगों ने बातचीत करना शुरू किया पाकिस्तान ने और चाइना ने तो भारत ने ऑब्जेक्शन किया। सॉरी ये हमारा हिस्सा है। आप इसमें नहीं कर सकते। उसके बाद अभी भी गलवान हो चाहे आपका डोकलाम का किस्सा हो हमारा जो आमनासामना हुआ भारत सेना का और चाइना का या फिर आप कह लीजिएगा कि तवांग के अंदर जो अरुणाचल के अंदर लेटेस्ट में इनको मारपीट के हम लोगों ने भगाया इन सब वारदातों के बावजूद भी अगर एक सेटेलाइट पिक्चर ऐसी आ रही है जो कि कहती है कि पगंगसो ले के उसी क्षेत्र के अंदर जहां पर हम लोग कह रहे हैं कि हमें 19 सॉरी 2020 से पहले वाला
9:24 अप्रैल 2020 से पहले वाली हमें सिचुएशन चाहिए और चीन वहां पर भी एक इंफ्रास्ट्रक्चर बना के बैठ गया हो तो ये बात डेफिनेटली जाहिर करती है कि हमारी जो पिटिकल विंग है या हमारी जो सरकारी है वो एक तरीके से अब पहले 1900 2020 से पहले वाली बात पे के बारे में जोर नहीं दे रही है पर जोर इस बात पे दे रही है कि क्या इंटरनेशनल बॉर्डर के ऊपर पीस और काम है शांति और स्थिता है वो इसके ऊपर की बात कर रही है इसके ऊपर की बात नहीं कर रही लिहाजा ये तो मैं सब दर्शकों पे सोच छोड़ता हूं या फिर आपके पैनलिस्ट पे छोड़ता हूं ये बात सोचना कि क्या ये सही बात है कि गलत है कि 2020 से पहले की सिचुएशन क्या हम लोग कह सकते हैं अगर चीन ने वहां पर एक इंफ्रास्ट्रक्चर बना लिया हो मैं मानता हूं कि चाहे सिचुएशन हमारी
10:12 कुछ भी क्यों ना हो आशुतोष लेकिन अगर ऐसी स्थिति चीन पैदा कर रहा है तो मेरा निजी मानना ये है कि फिर भारतीय सेना को खुला हाथ दे देना चाहिए बिलकुल खुला हाथ देने की बात बिलकुल आप आप जेन्युइन कर रहे हैं। लेकिन जो भारतीय जनता पार्टी का जो रुख है वह कहीं ना कहीं तकलीफ देने वाला है और कहीं ना कहीं इस बात को दर्शाता है कि उनका जो राष्ट्रवाद है क्या राकेश डॉक्टर राकेश पाठक क्या मैं कहूं कि क्या वो अवसरवादी नहीं है? हमने टीवी चैनल्स में डिबेट्स में प्रवक्ताओं के के की प्रेस कॉन्फ्रेंसेस में सैकड़ों बार सुना है। राहुल गांधी को इसी बात के लिए लानत वनत देना, कांग्रेस पार्टी को लानत बना देना, भारतीय जनता पार्टी से अलग जो दूसरी राजनीतिक दल है चाहे वो सीपीएम हो, सीपीआई हो या लेफ्ट की दूसरी पार्टीज हो जबजब अतीत में उन्होंने कभी चीन के साथ
10:59 या चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कोई रिश्ता रखने की कोशिश की। सामने बात आई तो उस पर उनको गद्दार देशद्रोही घोषित करने की कोशिश कर दी। अभी तो ऑपरेशन सिंदूर जारी है। तो क्या भारतीय जनता पार्टी पहलगाम भूल गई? इतनी जल्दी वह उनसे हाथ मिला रही है। अपने दफ्तर उनका स्वागत कर रही है। आशतोष जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी की जो कथनी करनी है उसे अब देश को समझ लेना चाहिए। वे जो कहते हैं वह करते नहीं है और जो करते हैं वह कहते नहीं हैं। उनकी सियासत के बारे में इतना कहा जा सकता है कि समझने ही नहीं देती सियासत हमको सच्चाई समझने ही नहीं देती सियासत हमको सच्चाई
11:44 कभी चेहरा नहीं मिलता कभी दर्पण नहीं मिलता। हम तो बीजेपी और उसके पितृ संगठन की जो सियासत है उसमें चेहरे और दर्पण में कोई समानता नहीं है। बिल्कुल साफ कहने की जरूरत है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस वक्त जो कुछ किया है चीन के मामले में वो अखंड पाखंड है। राष्ट्रवाद के नाम का ढोल पीटने वाली पार्टी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को चाऊमीन और मोमोज खिला रही है। और आज आशतोष जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हेड क्वार्टर में भी चीन के इन अधिकारियों की बैठक हो गई है। एहतियात बस इतनी बरती गई है कि उसकी फोटो साझा नहीं की गई। हम
12:30 जब लगा कि आज पूरे दिन देश भर में इतनी सारी लानत मलामत हुई है तो फोटो बाहर नहीं आने दी। कर्नल दिनेश ने बहुत अच्छी बात कही है। उस पर हम बाद में आएंगे। लेकिन इस वक्त किन परिस्थितियों में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी बीजेपी के आरएसएस के दफ्तर में पहुंची है। उन परिस्थितियों का एक बार फिर से पूर्वावलोकन कर लेना जरूरी है। जून 2020 गलवान घाटी की घटना कर्नल साहब का दुख अपनी जगह वाजिब है। हम सबका दुख है कि 20 हमारे जांबाज जहां जवान शहीद हुए। उनकी शहादत को इतनी जल्दी भुला दिया गया। नंबर एक नंबर दो अरुणाचल प्रदेश में चीन ने बस्तियां बसा ली हैं। गांव के नाम बदल
13:17 दिए हैं। इलाकों के नाम बदल दिए। जिसकी बात अभी आप कर रहे थे शक्षगाम घाटी की उसका कितना सामरिक महत्व है इसको समझने के लिए थोड़ा सा उसकी भौगोलिक की स्थिति को भी जान लेना जरूरी है। भारत के हिस्से में वो सियाचिन ग्लेशियर के पास काराकोरम पर्वत श्रंखला जो है उस इलाके में यह आती है। दूसरी तरफ चीन का एक प्रांत है शिजियांग और तीसरी तरफ बालस्तान गिलगित है ही। तो ऐसे सामरिक ठिकाने को हम जानते हैं हमारे पास बहुत दिनों से नहीं है वो लेकिन चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के नाम पर वहां जो भारी निर्माण कार्य चल रहा है उसको लेकर बार-बार
14:02 चीन और चीन का विदेश मंत्रालय वहां की सरकार अपना दावा दोहरा रही है। नंबर पांच हमारे अरुणाचल प्रदेश की एक युवती को भारतीय पासपोर्ट होने के कारण शघाई हवाई अड्डे पर 18 घंटे हिरासत में रखा गया। उससे कहा गया कि इंडियन पासपोर्ट नहीं चलेगा। अरुणाचल प्रदेश तो हमारा हिस्सा है। तुम चीन के पासपोर्ट के लिए आवेदन कर दो। उसके बाद एक घटना और हो चुकी है एक युवक के साथ इंडियन पासपोर्ट के मामले में। तो जिस चीन की कारगुजारियों की इतनी लंबी फहरिस्त है। उसकी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए लाल कालीन बिछाना कहीं से भी तर्कसंगत दिखाई नहीं देता। लेकिन जिस देश का प्रधानमंत्री गलवान घाटी की घटना के
14:49 बाद बा आवाज बुलंद यह कह चुका हो कि ना कोई घुसा है ना घुस आया है ना हमारी किसी चौकी पर किसी का कब्जा है उस पार्टी के लोग अगर कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से मिल रहे हैं तो इसमें कोई बहुत हैरत की बात नहीं है। थोड़ा सा दो मिनट और चाहूंगा लेकिन ये आज की बात नहीं है आशतोष जी हम भारतीय जनता पार्टी का बहुत याराना लगता है कम्युनिस्ट पार्टी से शिवराज सिंह चौहान डॉ राम माधव नितिन गडकरी सब चीन जाकर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ पीगें बढ़ाते रहे हैं। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के कामकाज को समझने के लिए जाते रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान ने तो लौटकर
15:35 यह कहा था कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और हमारी पार्टी की विचारधारा में बहुत समानता है। कौन सी समानता ढूंढ रहे हैं उस पार्टी में? वन पार्टी रूल वाले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से कहीं भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस भारत में वन पार्टी सिस्टम के तौर तरीके तो नहीं सीख रहे। वो कौन सी बातें हैं? कौन से समझौते हैं? कौन सी अंदर खाने ऐसी बातें हैं जिनके लिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी बीजेपी और संघ मुख्यालय में जाकर बैठ रही है और देश को आप यह भी नहीं बता रहे हैं कि आखिर क्या बात हुई और अंतिम बात यही है कि अगर सचमुच में इन तस्वीरों में राहुल गांधी जयराम
16:20 रमेश मल्लिकार्जुन खड़गे सोनिया गांधी एक्स वाई जेड कांग्रेस के नेताओं के चेहरे होते तो इस वक्त भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के लोग सड़कों पर तांडव कर रहे होते। क्षमा कीजिए। नंगा नाच रहे होते इस वक्त। हम लेकिन अब सब तरफ सन्नाटा है। कोई एक शब्द बताने को तैयार नहीं है कि आखिर क्या वजह है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को इस तरह से चाऊमीन खिलाई जा रही है। जी आशुतोष और और भारतीय मीडिया में भी काफी हद तक सन्नाटा है। इस पे कोई चर्चा मैंने तो आप मुझे करेक्ट कर सकते हैं। बट संजय जी मेरा सवाल आपसे है। आप बहुत वरिष्ठ पत्रकार हैं। देश नीति भी बहुत बेहतर तरीके से आप समझते हैं कि एक तरफ जब अमेरिका भारत के साथ इस तरीके से बर्ताव
17:05 कर रहा हो तो भारत के पास भारत सरकार के पास क्या विकल्प रहता है और अगर देश की रूलिंग पार्टी अगर चीन की रूलिंग पार्टी के साथ अगर किसी तरीके का संपर्क रखना चाहती है तो क्या उसको गलत करार देना चाहिए? मैं आपकी बात से सहमत हूं क्योंकि इस समय हम विडंब कई तरीके की विडंबनाओं से घिरे हुए हैं। अभी जिस तरीके से प्रहार ट्रंप और ट्रंप की सरकार हमारे ऊपर कर रही है। टारफ के ऊपर टेररिफ लगा रही है। ईरान के साथ अगर हमने संबंध बनाया तो उसके ऊपर 25% और 50 के ऊपर 75 हो गया। तो इस माहौल में अगर लोगबा सवाल पूछते हैं कि आप क्या करें? क्या रणनीति है आप अख्तियार करें? तो रणनीति तो यही है कि आप चीन के साथ दोस्ती करें। आप भूल जाए कि आपने जो जरूर बातें करी मुझे याद है जिस तरीके से
17:51 कांग्रेस के ऊपर तरह-तरह के आरोप लगाए इन्होंने राहुल गांधी पर लगाए कांग्रेस के अध्यक्ष पे लगाए उस समय शायद श्री श्रीमती सोनिया गांधी थी कि ना आपने उनके साथ कोई समझौता करा है इस तरीके की बात करी हर तरीके की उटपटांग बात करी इनके आईटी सेल ने बात करी परंतु अब ये मौका आ गया है कि चीन के सामने झुकना पड़ रहा है चीन इस ऐसी स्थिति में है कि बिना चीन के सहारे के आप आज की तारीख में कुछ कर नहीं सकते आपका ट्रेड, आपकी इकॉनमी पूरी तरीके से चीन की तरफ मुखातिब है। मुझे याद है पिछले साल की जब इन्होंने इकोनमिक सर्वे निकाला था तो उसके अंदर जो मुख्य चैप्टर था उसके अंदर इन्होंने अर्ज किया कि हिंदुस्तान को कोशिश करनी चाहिए कि चीन से फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट आए। इन्वेस्टमेंट
18:36 अगर नहीं आया चीन से तो हालत और बद से बदतर होगी। तो तब से वो करने की कोशिश करी जा रही है। इसमें कोशिश करी जा रही है कि जो पुराने झगड़े हैं उनको दूर करा जाए। जो जमीनी मतभेद हैं उनको दूर करा जाए और जितना भी झगड़ा है उसको ऐसा ना उसको एक्सक्लेम ना करें। तो अब आप देख रहे हैं उसका नतीजा। आप सोचते हैं कि बीजेपी के दफ्तर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का जो डेलीगेशन अपने आप आया होगा वो नहीं आया। उन्होंने मेरे ख्याल से विनती करी होगी कि आप आइए यहां पर उनके न्योते पे आया है और चीन काफी समय से काफी हार्ड टू गेट था हिंदुस्तान की तरह है ना बात भी नहीं कर रहे थे और जो इन्होंने करा होगा तो काफी उन्होंने यह भी अर्ज करा होगा कि हमारी
19:23 फोटो छपनी चाहिए उसका पूरा जिक्र होना चाहिए उन्होंने पूरे कोरियोग्राफ करा होगा कि चीन किस तरीके से दिखाएगा तो अब स्थिति बदल गई है उन हिंदुस्तान के पास इस समय कोई भी चारा नहीं है सिवाय यह कि अगर अमेरिका से किसी तरीके से ऑक्सीजन चाहिए तो आपको उससे चीन से मिलनी पड़ेगी। आपके पास संजय जी एक सवाल एक सवाल मैं आप माफ़ करें बीच में आपको टोक रहा हूं। सवाल यह है कि अगर गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट अगर रिलेशनशिप बन रही है तो उसमें कुछ भी दिक्कत नहीं है। डिप्लोमेसी में होता है। दो जो देश एक दूसरे से लड़ते हैं वो भी एक दूसरे से बात करते हैं। बट प्रिंस जब रूलिंग पार्टी जो दूसरों को इस तरीके से गालियां देती रही है वो अगर आओ भागत करे तो क्या इसकी आलोचना नहीं होनी चाहिए? क्या इस क्या इसको लोगों के सामने नहीं रखना चाहिए? नहीं हर हालत में इसको पूरी आलोचना उनको बताना चाहिए कि आपने जब मौका था बात करने
20:10 का तो आपने बात नहीं करी। आपने इस तरीके के तरह तरह के इल्जाम लगाए और किसके प्रोत्साहन पर लगाए आपने यह भी बात कही जिसको जो आप आज की तारीख में आप जिनके खिलाफ बात कर रहे हैं जिनको जो आप जिससे उम्मीद कर रहे थे कि आपकी मदद करेंगे उनके प्रोत्साहन पे आपने तरह की गाली बकी चीन को और आज की तारीख में जब वो मुंह फेर लिया जिन्होंने तरह के टेरेफ लगाना चालू करे तो आप सोच रहे हैं कि चीन की तरफ से पर मैं आपको यह बता दूं चीन जैसा भी कर रहा है वो आप उनसे ज्यादा उम्मीद मत करिए क्योंकि उनको इस बात का एहसास हो गया कि हिंदुस्तान पर भरोसा नहीं कर सकते। और हिंदुस्तान यह वाला हिंदुस्तान नहीं जिसकी हम बात कर रहे हैं। यह बीजेपी रूल्स हिंदुस्तान है। इसमें तरह-तरह की चीजें बदलती रहती हैं। और चीन को इस बात का एहसास हुआ है कि यहां पर तरह-तरह के
20:58 हथकंडे अपनाते हैं। जैसे अगर आपको याद हो तो उनके कई सारे नागरिकों को जेल में बंद कर दिया गया था। Xiaomi और वो टैक की कंपनियों के लोगों को पकड़ा गया। उनको जेल में तो यह बात चीन भूला नहीं है। चीन जो दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है तो उसकी दोस्ती के हाथ के बारे में आपको सोचना चाहिए कि वो क्या करेगा आगे जाकर। तो ये गंभीर मुद्दा है। इसको इतनी आसानी से नहीं लेना चाहिए। हिंदुस्तान की बहुत बड़ी बेवकूफी होगी कि वो अमेरिका से लड़ के चीन की तरफ चला गया। पर चीन की सोच अपनी जगह पे है और वो इतनी जल्दी उनकी बातें मानने वाला नहीं है। बिल्कुल सतीश जी सॉरी मैं आपके पास सबसे अंत में आया हूं। ऑपरेशन सिंदूर जब हम सोचते हैं तो हमें पहलगाम याद आता है और उसके बाद वो उस सैनिक अधिकारी का वो बयान
21:45 याद आता है जहां कहता है एक सीमा पर हम दो युद्ध लड़ रहे थे दो शत्रुओं से लड़ रहे थे और ये दुनिया को पूरी तरीके से मालूम है इसमें किसी को एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं है कि दरअसल पाकिस्तान के पीछे चीन खड़ा हुआ था और अभी ऑपरेशन सिंदूर जारी है और यह भी उस दिन इत्तेफाक की बात देखिए कि सेना प्रमुख खुद कह रहे हैं कि ऑपरेशन से सिंदूर जारी है। हम कड़ाना जवाब देंगे अगर कोई दुस्साहस करेगा तो आप चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लोगों से मिल रहे हैं। देखिए आशोष जी बहुत आश्चर्यजनक है कि जिस दिन सख्स काम पे धावा म दावा किया जा रहा हो और उसी दिन ये मुलाकात की बातें आ रही है आरएसएस के साथ। यह बड़ा ही आश्चर्यजनक है और विरोधाभासी भी है। अब क्यों आरएसएस
22:33 ने अपने किया है या सरकार के कहने पर भाजपा से तारतम्यता में किया गया है यह पता नहीं है। हम कयास ही लगाएंगे लेकिन आश्चर्यजनक जरूर है। नंबर एक। नंबर दो जो आपने बात कही ये तो सबको मालूम है कि ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान का असली सरगना तो चीन था। एक तरह से चीन ही परोक्ष युद्ध लड़ रहा था और जो उसकी हरकतें उसके बाद कई दफा रही है वो युद्ध जैसी ही रही। युद्ध जैसी ही रही है। कई है उसको जुड़ाने की जरूरत नहीं है। सबको पता है अरुणाचल का फलाना ठिकाना ब्रह्मपुत्र पे बांध और ये वो सब कई तरह की बातें रही। वो देखिए सतीश जी एक बात फिर इसमें एक चीज जोड़ना जरूरी है जो अभी अरुणाचल वगैरह की
23:18 बात की उसमें ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो रेयर अर्थ मेटल मिल रहा था उसको बेचने में आनाानी की। एक्सपोर्ट पर रेस्ट लगाया। जो फर्टिलाइजर था उसको रेस्टन लगाया। काम करने वाले 300 इंजीनियर्स को वापस बुलाया। ये वो स्थितियां थी। ये वो कदम थे जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचता। जी। देखिए अभी क्या है कि हम दो सार्क के बीच में फंस गए हैं। अमेरिका और चीन और दोनों अपनेपने ढंग से अपने हितों के लिए हमारी बलि देने में लगे। बलि लेने में लगे तो हम एक तरफ झुकते हैं फिर उधर जाते हैं फिर उधर से इधर झुकते हैं दरअसल जो चीन के साथ जो हमारा एक गलमैया जैसा चीज दिख रहा है भले ही काउंटर वेट के रूप में आप देख रहे
24:04 दे रहे हो ये बेहद खतरनाक हम चीन से दुश्मनी बोल ले सकते हैं जिसको हम एनिमी नंबर वन बताते रहे चीन हमारे साथ कई करतबे कर चुका है जिसको लेकर बहुत तरह की बातें हैं। अभी तक नेहरू जी को माफ नहीं किया गया। लेकिन अमेरिका से अभी वर्तमान परिदृश्य में आप पंगा लेंगे तो यह बहुत बहुत मुश्किल है। आप ज्यादा से ज्यादा बैलेंस कर सकते हैं। एसओ में गए थे ना। आप काहे ऑपरेशन सिंदूर की आज बात कर रहे हैं? वो जो ऑपरेशन सिंदूर उस समय टटका था, ताजा था। उसी दौरान प्रधानमंत्री जी गए थे तानिंग में कौन सी जगह। ये समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर हो क्या रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं है कि आरएसएस अपने आप को बॉस दिखाना चाहती हो, आइडियोलॉजिकल गुरु
24:50 दिखाना चाहती हो। सरकार की मंशा क्या है? मुझे नहीं मालूम। सरकार को निर्देश देना चाहती हो या फिर एक बड़ी तैयारी है। एक बड़ी तैयारी का आगाज है कि कोई एक समझौता हो दूरदराज में हो जाए और चाइना चाइनीस मॉडल ऑफ पॉलिटिक्स और चाइनीस मॉडल ऑफ गवर्नेंस वो इस देश में लाया जाए। यह एक बात हो सकती है। दरअसल आरएसएस क्या है? कहती तो है कि वो एक वो है राजनीति से कोई लेना देना नहीं। लेकिन जी कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन है। लेकिन वो तो एकदम बॉस के जैसा काम कर रही है ना। अब वो एक प्रकार से देखिए तो सीपीसी ही है। एक प्रकार से देखिए सीपीसी है। उसका एक जो
25:37 सरकार है उसके जिनपिंग होते हैं। यहां हो सकता है सरकार के मोदी जी हो। तो लेकिन बॉस सीपीसी है। ये बात बॉस जो है आरएसएस है। ये भी जताने की बात है। आप एक और बात सुन लीजिए। हम अभी आज चर्चा इस बात की हो रही है। आप इस बात की चर्चा नहीं कर रहे हैं आशुतोष जी कि भारतीय जनता पार्टी का जो विलंबित ताल में रुका हुआ एक राष्ट्रीय अध्यक्ष था वो तीन साल ढाई साल बाद घोषित हुआ वर्किंग प्रेसिडेंट के रूप में उसके उनका अनुमोदन होना है कल से परसों दो-तीन दिन के भीतर ये उनकी राष्ट्रीय मीटिंग होने वाली है और उसकी चर्चा नहीं हम करके आज हम क्या चर्चा कर रहे हैं इस चीज को देखिए यह मुझे नहीं पता मैं अभी सोच समझ
26:22 नहीं पाया हूं लेकिन बड़ा ही आश्चर्यजनक और यह सहयोग है। हम बट कर्नल साहब यह बताइए कि क्या इस तरीके की जो घटनाएं होती हैं क्या हमारे सेना का मोरल डाउन नहीं करती है और हमने देखा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जिस तरीके से अचानक सीज फायर हुआ उससे एक नाराजगी थी देश के अंदर कि कोई कारण पता नहीं चला। भारतीय सेना इस स्थिति में थी कि पाकिस्तान को बहुत तगड़े सबक दे सकती थी और पाकिस्तान से सीज फायर के एवज बहुत कुछ ले सकती थी जो नेहरू में बार-बार कहा जाता है या इंदिरा गांधी कहा जाता है 1971 आपने पीओके क्यों नहीं ले लिया उस तरीके की बातें की जाती क्या ऐसी घटनाओं से भारतीय सेना का बरा डाउन नहीं होता जवान का बराल डाउन नहीं होता नहीं देखिए आशुतोष कुछ चीजें होती हैं जब
27:08 आप ग्राउंड के ऊपर यानी रियल ऑपरेशंस में होते हैं और उसके बाद भी अगर आप रियल ऑफिशंस के अंदर आपका जो सिनेरियो है टैक्टिकल या स्ट्रेटेजिक सिनेरियो दुश्मन के साथ में कुछ है और वो बर खिलाफ उसके कुछ चीजें आपके नजरों के सामने हो रही है तो लाजिम सी बात है कुछ अटपटा तो जरूर लगेगा और महसूस होगा अभी लेकिन मैं एक बात आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं आशुतोष कि भारतीय सेना का जो जो ढांचा है ना और जो ट्रेनिंग स्ट्रक्चर है वो इतना मजबूत है कि इस तरह की बातचीत अगर हो कर भी रहे हो लोग तो भारतीय सेना अपनी जगह पे अिग रहती है और अ रहेगी। ये मेरा पूरा ये मेरा पूरा भरोसा है मुझे इस बात का। जितना भी मैं इस सेना के अंदर रहा हूं या सेना को जानता
27:53 हूं। बहाल अगर देखा जाए चीन की तरफ तो भारतीय सेना चीन पर भरोसा नहीं करती है। मैं आपको बिल्कुल खुल के बोल नहीं करती। और हम तो बल्कि मौका ढूंढते हैं कि हमें कब मौका मिले जब हम 1962 वाली बात को इनके इनके मुंह तोड़ करके इनको वापस से दे दे। क्योंकि उस टाइम पे हम तैयार नहीं थे। अब शायद हम अलग पोजीशन में है। मैं ये नहीं कहना चाहूंगा कि हम चाइना से बहुत ज्यादा आगे स्ट्रांग है और इस तरह की बातचीत करना बेबाकी मतलब बेवकूफी वाली बात होगी। हां जहां तक जज्बे का सवाल है और जहां तक आप कह सकते हैं मनोबल का सवाल है अगर वो चीन के खिलाफ हो या पाकिस्तान के खिलाफ हो ये मैं आपको आश्वासन देना चाहूंगा कि सेना का बहुत मजबूत है। अब रही बात चीन की देखिए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब 7 मई को ऑपरेशन
28:41 चालू हुआ तो उसके तुरंत बाद एक के बाद एक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स या तो रावलपिंडी में उतर रहे थे या फिर इस्लामाबाद में उतर रहे थे और उनसे चाइना बराबर इन पाकिस्तान को मिलिट्री आर्मामेंट दे रहा था उधर से हमने देखा था कि तुर्की भी लगा हुआ था पीएल15 जो एयर टू एयर मिसाइल्स है जिसका क्लेम करते हैं कि 200 किलोमीटर की रेंज है हवा से मार के दूसरे एयरक्राफ्ट को उड़ा सकते है तो उस तरह की मिसाइलें भी सारी पाकिस्तान को चीन ने दी 80% आर्मामेंट चीन का पाकिस्तान सॉरी पाकिस्तान का चीन दे रहा है और अभी आपने सुना भी है कि चाहे वो जे7 हो या फिर जेसी हो एयरक्राफ्ट हो उसकी डील की और भी डील हो रही है और यहां तक की जे 35 जो की
29:28 अमेरिका के एफ35 के नकल माना जाता है उसका भी जो लेनदेन चीन की तरफ से पाकिस्तान को करने की बात यानी अभी डिलीवरी देने की बात हो रही हो ये बिल्कुल दर्शाता है कि चीन कोई भारत के साथ में दोस्ती तो नहीं कर रहा दोस्ती वाले तो ये कोई भी स्टेप नहीं है। नंबर दूसरा इसके अलावा देखिए गलवान के अंदर जो भी हुआ था या फिर ऑपरेशन सिंदूर के बाद जो जिस प्रकार की बातें अब सामने आ रही है कि चीन और तुर्की मिलकर के पाकिस्तान के साथ में एक हाई एल्टीट्यूड के ड्रोन सिस्टम्स बना रहे हैं ताकि वो हमारे आकाश तीर यानी आकाश सिस्टम को भेज सके और जो नहीं कर पाए थे उस टाइम पर। इसके अलावा भी जो जैसे बताया गया अभी वन ऑफ द पैनलिस्ट के पूरे अरुणाचल के साथ साथ गांव बसा दिए गांव के नाम बदल दिए हैं और
30:15 हर जगह पे ये लोग ये बदमाशिया करते घूम रहे हैं। गलवान के अंदर भी पगसू लेक के अक्रॉस हम कहते हैं जो फिंगर फोर से ले फिंगर एट का इलाका है। यस आज की तारीख में हम लोग वहां पर पेट्रोलिंग नहीं कर पा रहे हैं। ये बात बिल्कुल सच है। नहीं जा पा रहे पेट्रोलिंग के अंदर। और ये उस क्षेत्र के अंदर अगर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर बना देते हैं तो लाजिम सी बात है सेना का तो खून खोलेगा ही खोलेगा क्योंकि देन आपके हाथ खोलने की बात मैंने इस बात के लिए इस बाबत कही थी कि फिर सेना को खुली चूट देनी चाहिए बिकॉज़ हमें अगर अपना कुछ कर गुजरना है तो हमें कर गुजरने दे अगर आप ये इस तरीके से कंफ्यूज करके रखेंगे तो डेफिनेटली मोहर पे थोड़ा फर्क तो बहुत फर्क तो आएगा ही आएगा क्या चीन का मैं इतना बताऊ आपको आशुतोष के चीन कहता कुछ है करता कुछ है इस्लाम स्लाइसिंग
31:00 पॉलिसी है इसकी हर जगह हर देश के जिस भी टुकड़े को इसने हड़पना है चाहे शमशा अभी हमारे जो ये क्या नाम वैली वैली की बात हो रही है इस तरह के कितने इलाके ले लो आप चाहे गलवान का इलाका ले लो चाहे आप दल कलाम का ले लो चाहे आप तवांग का इलाका ले लो चाहे अरुणाचल की बात ले लो पहले ये अपनी इस्लामी स्लाइसिंग पॉलिसी के तहत उस इलाके के बारे में अनापशनाप तरीके से बातचीत करना शुरू करता है पूरी दुनिया को दिखाता है ये तो मेरा इला इलाका है मेरा इलाका है उसको डिस्प्यूट बनाने की कोशिश करता है और जब वो डिस्प्यूट बन जाता है तो उसको या तो पॉलिटेक्निकली या मिलिट्रीली दोनों में किसी ना किसी रूप से उसको हासिल करने की कोशिश करता है और हासिल करता है। अब ऐसे में अगर इसने शमशाक वैली में नाम स्लिप हो
31:46 रहा है सगाम वैलीगाम सक्सगाम वैली जो है जो 1963 में पाकिस्तान ने हैंड ओवर की थी अगर उसके ऊपर क्लेम बना रहा है तो सच मानिए ये वैसा ही क्लेम है जैसा ये पगसो के ऊपर अपना गलवान के अंदर बनाने की कोशिश कर रहा था और कोशिश कर रहा था कि भारतीय सेना चुपचाप शायद इतना रिएक्शन करे लेकिन इसके रिएक्शन कुछ अलग आए हा कुछ स्तर के ऊपर हमारे कुछ स्टेप गलत हुए डेफिनेट ली जो कैलाश रेंज हम लोगों ने पकड़ लिया था ना आशुतोष मेरा व्यक्तिगत मानना ये है किसी भी हालत में उस कैलाश रेंज से हमें वापस नीचे नहीं उतरना चाहिए था बिकॉज़ वहां पर बैठ के हम चीन के एक एक साइकिल तक को गिन रहे थे कि वो कहां से कहां मूव कर रही है और इनका हम धुआ निकाल देते हैं वहां बैठे बैठे तो हम लोग कहीं
32:32 पर जाके अपनी किसी पॉलिसी के कारण मैं उसके डिटेल में नहीं जा सकता नेशनल टेलीविजन पे लेकिन मैं समझता हूं कि वो गलत गलत स्टेप हमारा हुआ हमें नहीं करना चाहिए था मेरा व्यक्तिगत मानना ऐसा है और रही बात फ्यूचर की देखिए चीन के साथ में 100 कितना 130 बिलियन डॉलर और 2030 तक कह रहे 200 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएंगे हम लोग सिर्फ 15 से 20 बिलियन डॉलर का सामान देते हैं उनको हम हम बाकी सारा तो वो हमारे ऊपर कचरा फेंक रहे हैं। हम डेप्ट में हैं। हम एक तरीके से उनका उनका सामान ले ले के बैठ जा बैठे जा रहे हैं। हमारा ट्रेड ट्रेड इक्वेशन नहीं है। इसके बावजूद भी इसके बावजूद भी अगर चीन हमारे ऊपर इस बात को लेके जैसे बताया सतीश
33:18 साहब ने कि ये अमेरिका के कारण हम लोग कह रहे हैं कि हमारे पे टेरिफ लगा दिए ये कर दिया। ये टेंपरेरी फेस मान के चलना चाहिए हमारे को। ये मेरा मैं इतनी राजनीति की नॉलेज तो नहीं रखता हूं आशुतोष। लेकिन मैं समझता हूं कि ये समय भी गुजर जाएगा। थोड़ा बहुत हमें तकलीफ में से भी गुजरना पड़े तो क्या बात है। लेकिन जिस प्रकार से हम एक पोचरिंग कर रहे थे। एक एक मैसेजिंग करने की कोशिश कर रहे हैं। चाहे वो एसओ समिट के अंदर हमने करने की कोशिश की हो या फिर जो अब हम अब कर रहे हैं जैसा आप बता रहे थे। मुझे थोड़ी देर पहले मुख्यालय के अंदर कम्युनिस्ट पार्टी का आना तो मैं समझता हूं कि इसके अंदर डेफिनेटली मेरा निजी मानना ये है। मैं इसको गलत मान रहा हूं। बिल्कुल। बट संजय जी ये बताइए कि क्या हम जिसे कहते हैं ना कि क्रिकेट में बोलते
34:05 हैं ना हाफ कॉक खेलने की कोशिश कर रहे हैं। मतलब ना तो आगे बढ़ के मार पा रहे हैं ना पीछे बढ़ के मार पा रहे हैं। सब कुछ टेंपरेरी है। हमने अपने सारे अंडे अमेरिका में डाल दिए एक साल पहले बल्कि डेढ़ साल पहले और में तो गलती हो गई। तब हम चीन के खिलाफ लगातार माहौल बनाने की कोशिश कर रहे थे। देश का मीडिया भी उसमें लगा हुआ था। ये पार्टियां भी उसमें लगी हुई थी। अब हम उनके साथ जाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या यह हमारी डिप्लोमेसी विदेश नीति में कुछ फंडामेंटल फ्लॉ है जिसकी वजह से हम इस तरीके से दाएं बाएं हो रहे हैं? देखिए जैसे ट्रंप साहब कहते हैं ना वी डोंट हैव अ कार्ड। सब परेशानी की बात ये है कि ना हम एआई में प्रशस्ति है ना तेल है ना गैस है। हमारी ताकत बहुत कमजोर हो चुकी है। और हम जिसे कहते हैं कि फॉलिंग बिटवीन टू स्टूल्स।
34:50 हमें यह नहीं पता कि अमेरिका किसान जी चीन के साथ जाए और और जो हमारे जो आर्मी के मित्र बैठे हुए हैं यहां पर उन्होंने काफी यह कहा कि इनको फ्री हैंड दे देना चाहिए आर्मी को मेरे ख्याल से कि जो पिटिकल गवर्नमेंट है हमारी उसको ज्यादा इस बात का एहसास है कि हम कितनी ताकत है हमारे में लड़ने की क्षमता है कि नहीं है जो चार दिन का युद्ध हुआ ची पाकिस्तान के साथ उसके अंदर पहले दिन ही हमारा काफी नुकसान हो गया था और वो तभी संभव हुआ क्योंकि चीन का जो सामान था वो कहीं बेहतर साब ित हुआ जो वनस्पत हमने जो फ्रांस और और मुल्कों से लिया था तो कहने का मतलब कि एक हमको ढंग से सोचना चाहिए कि किस तरीके से हमारा इंटर सर्व होगा और उस इंटरेस्ट सर्व करने में हम लोग कोई ऐसी गलती गलती ना करें
35:36 जिससे कि ये जो रहा स रहा हमारा हिसाब किताब है वो गड़बड़ हमको शांति मिली है कुछ हद तक लोकतांत्रिक व्यवस्था चाहे खड़ी हुई है चाहे उसमें काफी गड़बड़ियां है काफी समय से हमारा जुडिशरी परंतु स्थिति तब भी नियंत्रण में है। परंतु अगर आपने देखा कि ज्यादा आपने हाथ पांव मारने की कोशिश करी तो संभव है कि सब चीज बिगड़ जाएगी। क्योंकि इस समय अमेरिका ऐसी स्थिति में पहुंचा हुआ है। तरह-तरह की टेरिफ लगा रहा है। तरह-तरह का वेट हमारे ऊपर लाने की कोशिश कर रहा है और हमको कई सारे बंधनों में कर रहा है। और हमारे पास चारा कोई नहीं है। सिवाय यह कि ब्रिक्स के जितने भी साथी संघी हैं उनके साथ करें। हम कोशिश ये भी कर रहे हैं कि अमेरिका किस से हमारी नाराजगी ना हो। अभी वहां पर साउथ अफ्रीका के पास एक वो हुई मिलिट्री एक्सरसाइज हुई
36:22 नेवल एक्सरसाइज हुई तो उस टाइम हां तो वहां पर है ना उन्होंने साउथ अफ्रीका के पास हुई तो वहां पे उन्होंने हिंदुस्तान में पार्टिसिपेट नहीं करा सिर्फ इसलिए कि वो पहली बात तो ये कि ब्रिक्स का कोई और मकसद से देखते हैं। दूसरी बात ये कि वो अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहते थे। जगह-जगह ये जगह यही हो रहा है। अब उसके पास हमारे पास शब्दावली थोड़ी कम पड़ रही है कि हम यह किस तरीके से एक्सप्लेन करें कि पाकिस्तान और अमेरिका मिलिट्री एक्सरसाइज कर रहे हैं यहां पर हिंदुस्तान के बॉर्डर पे। अभी तक हमारी तरफ से कोई रिमार्क नहीं आया है। कोई किसी भी तरीके का कोई कमेंट नहीं आया है फॉरेन ऑफिस से। तो उस माहौल के अंदर आपको सोचना चाहिए कि हमारी समस्याएं बहुत जटिल है। चीन से हम लड़ने की स्थिति में नहीं है।
37:08 अमेरिका से लड़ने की स्थिति में नहीं है। और हमारे जितने भी हमारी जो आंतरिक नीतियां है उसकी वजह से हमारे जितने पड़ोसी देश हैं वो हमारे खिलाफ जा रहे हैं। चाहे आपको बांग्लादेश का देखिए चाहे आप पाकिस्तान तो है ही काफी समय से अफगानिस्तान में भी मालदीव भी नाराज है और भी छोटे और भी कई देश नाराज हैं आसपास के। तो इस सुरते हाल में हम क्या करेंगे? हमको मेरे ख्याल से एक आत्म चिंतन करना चाहिए और देखना चाहिए कि कहां पे जा रहा है सब कुछ। डॉक्टर राकेश ये बताइए विपक्ष को क्या करना चाहिए इस पे? मैंने कहा आपने तो बताया कि अगर बीजेपी के पास अगर मौका होता तो तांडव कर रही होती उस वक्त सड़क के ऊपर। देखिए आशुतोष जी इस वक्त भारत की राजनीति
37:56 ऐसे एकतरफ़ा रुझान के साथ चल रही है कि विपक्ष सच्चे और वास्तविक मुद्दों पर भी अगर कुछ कहना चाहे तो उसे दो बार सोचना पड़ता है। लेकिन वह परिस्थितियां धीरे-धीरे बदल रही हैं। राहुल गांधी, कांग्रेस या विपक्ष के दूसरे नेता अब खुलकर खेल रहे हैं। अब वो यह संकोच नहीं कर रहे कि उन्हें कोई देशद्रोही कहेगा। कोई राहुल गांधी, सोनिया गांधी की चीन के नेताओं के साथ तस्वीर दिखाकर याद दिलाएगा कि इन्होंने कोई समझौता कर लिया था सीपीसी से। यही वजह है कि आज पवन खेड़ा ने बहुत कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में। मक्कार कहा, गिरगिट कहा वगैरह-वगैरह। अब मुझे लगता भी नहीं कि हिंदी शब्दकोश में बीजेपी और आरएसएस के इस कथनी करनी के
38:43 फर्क के लिए और कोई शब्द बचे हैं। थोड़ी सी एक बात और जरूरी इसमें देखने की है। प्लीज आशतोष जी। यह वह पार्टी कर रही है जिसके मुखिया नॉन बायोलॉजिकल अवतार नरेंद्र मोदी अभी-अभी 26 मई 2025 को गांधीनगर में भाषण देते हुए कह रहे थे कि हमें छोटी आंखों वाले गणेश जी नहीं खरीदना चाहिए। चीन से आने वाले व्यापार का बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया था कि अगले 30 दिन के अंदर देश के सारे दुकानदार अपनी दुकानों पर एक साइन बोर्ड लगा लें कि यहां स्वदेशी सामान मिलता है। पाखंड की पराकाष्ठा यह है कि गलवान घाटी
39:29 की घटना के बाद अब तक भारत और चीन के बीच व्यापार शुक्ल पक्ष के चंद्रमा की तरह लगातार बढ़ रहा है। कर्नल दिनेश साहब 100 बिलियन डॉलर का घाटा पिछले वित्तीय वर्ष में हो चुका है हमको। हम हम कुछ नहीं भेज रहे वहां सब कुछ मंगा ही रहे हैं। आयात निर्यात के बीच जो फर्क है वह साल दर साल बढ़ता जा रहा है। यह तब है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारतीय जनता पार्टी डॉ. मोहन भागवत नरेंद्र मोदी उनका पूरा पूरा WhatsApp विश्वविद्यालय चीन के बहिष्कार का अभियान चलाता है। अभी दिवाली पर अगले साल फिर आपको बॉयकॉट चीन की झालर वाला अभियान देखने को मिलेगा और उससे पहले
40:15 होली आने वाली है। चीन की बनी पिचकारी इस्तेमाल मत करो और उसी चीन के लिए पलक पांव बिछाए जा रहे हैं। एक और गंभीर विषय गलवान के बाद भारत सरकार ने चीन की बड़ी कंपनियों को देश में बड़े सरकारी ठेके लेने से रोक दिया था। पाबंदी लगा दी थी। रर्स ने अभी खबर दी तीन दिन पहले हम सब ने उस पर वीडियो बनाए चर्चा की है। अब यही नरेंद्र मोदी की सरकार उनके लिए दरवाजे खोल रही है। लाल कालीन बिछा रही है। बहुत जल्दी चीन की बड़ी कंपनियां सरकारी ठेके लेंगी भारत आकर। हम तो अब विपक्ष को क्या करना चाहिए? आपके इस सवाल का जवाब यह है कि विपक्ष को जिस तरह जिन शब्दों में बीजेपी, नरेंद्र मोदी और
41:03 आरएसएस को बेनकाब कर किया था आज वैसे ही हर दिन करना चाहिए। हर दिन दोहराना चाहिए कि नरेंद्र मोदी चीन के सबसे ज्यादा हिजगरे हैं। आजाद भारत के इतिहास हिजगरे हमारे देहात का शब्द है। यानी बहुत दिल के करीब रहने वाला। हम नरेंद्र मोदी आजाद भारत के वे नेता हैं जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री गुजरात बतौर प्रधानमंत्री भारत चीन की सबसे ज्यादा यात्राएं की हैं। कर्नल साहब आपने शुरू में एक बात कही थी। मैं उसकी तस्दीक करना चाहता हूं। पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ धोखा हुआ। यह सब मानते हैं। पंडित नेहरू की सरकार ने कुछ भी नहीं छुपाया था। उन्होंने कभी नहीं कहा कि ना कोई घुसाया
41:49 है ना कोई घुसकर बैठ गया है। उन्होंने संसद का विशेष सत्र बुलवाया और उस सत्र में कांग्रेस के सांसदों ने पंडित नेहरू की सरकार की आलोचना की। उस वक्त जनसंघ ने संसद के बाहर धरना प्रदर्शन किया। काले झंडे दिखाए गए थे। हम उस वक्त किसी ने यह नहीं कहा था कि ना कोई घुसा है ना घुसाया है। उस धोखे के बाद उस महान विश्वासघात के बाद नरेंद्र मोदी झूला झुला रहे थे शी जिनपिंग को चाय पिला रहे थे महाबलीपुरम के मंदिरों में दक्षिण भारतीय वस्त्र पहनाकर सैर करा रहे थे और तब गलवान घाटी हुआ और गलवान के बाद अब जब पाकिस्तान का साथ दे रहा था चीन ऑपरेशन
42:35 सिंदूर में उसके बाद आप अपने दफ्तर में बुला रहे हैं और आशतोष जी वो सूचना कोई किसी WhatsApp विश्वविद्यालय की नहीं है कि चीन ने भारत की थल सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह उन्होंने भरी सभा में कहा था कि हम सिर्फ पाकिस्तान नहीं चीन से भी लड़ रहे थे। हम तब आप अगर यह सब करेंगे तो हम बा आवाज बुलंद कहेंगे कि नरेंद्र मोदी उनकी सरकार उनकी पार्टी उनका पितृ संगठन इस देश के सबसे ज्यादा विचारहीन लोग हैं। विचार शून्य लोग हैं। कोई उसूल नहीं है। कोई सिद्धांत नहीं है। कोई जमीर नहीं है। जी
43:21 सतीश जी क्या बीजेपी की तरफ से बड़ी गलती हो गई जिसको सुधारने की कोशिश आरएसएस ने की ताकि तस्वीर सामने ना आए। क्यों हुई ज्यादा मेरे लिए प्रश्न यह है ये ये चीजें अचानक से क्यों हो रही ये ज्यादा महत्वपूर्ण है गलती तो अब कुछ भी वो करते हैं तो सब छुपा लेते हैं और गलती पर उनको कोई पछतावा भी नहीं होता है यू टर्न भी ले लेते हैं 180 से लेके 1800 डिग्री तक उनको कोई उसका कोई मलाल या पछतावा कुछ नहीं है दरअसल दिक्कत जो आ रही है भारी दिक्कत है भारी चुनौती है बहुत बहुत ही चिंता की बात ये है कि हमारे हुकूमत का जो अंदरूनी चश्मा है उसी से वो
44:07 देखते हैं तो उनको अंदरूनी तो हर कोई साफ दिखता है। बढ़िया से दबदबा बना के रखते हैं। लेकिन उस अंदरूनी चश्मे से जब विदेश को देखने लगते हैं तो वहां उनको कुछ नहीं सुखता है। ये मेन बात आज मैं बार-बार यही बोल तो रहा हूं। कुआ खाई की बात कर रहा हूं। अभी संजय जी कपूर साहब है ना उन्होंने बहुत अच्छी-अच्छी बात की। हां तो कपूर साहब ने बहुत अच्छी-अच्छी बात की कि भाई ताकत अगर रहती है असली ताकत जिसकी जरूरत है और हमको लगता भी है टू बी फेयर। मोदी जी सपना वाले आदमी सपना बेचते हैं। उसमें सपना उनको लगता है कि भारत एकदम हो लेकिन है क्या मतलब रियलिटी क्या है कि वाकई में जो ताकतवर रहते हैं बहुत ताकतवर
44:54 टेक्नोलॉजी से चीजों से वो चाइना पर काहे नहीं तेल का टेरिफ लग गया अमेरिका का तेल तो बदस्तूर ले रहा है ये तो भारत से ज्यादा ले रहा है भारत से ज्यादा और वो छाती पर चढ़ के ले रहा है धमकी भी देता है उल्टा भी करता है। मोटी बात यही है कि आप अंदरूनी चश्मे से ढुलमूल नहीं चलेगा। पेंडुलम डिप्लोमेसी नहीं चलेगा। ये बात समझ लीजिए। आपको थोड़ा भमकी देना है दीजिए। लेकिन तरीके से देना होगा। हमको तो मैं मैं इस बारे में आप कहिएगा कि मैं अमेरिका प्रस्थ हूं। जिस देश का जो पूरा व्यापार विदेशी व्यापार अमेरिका के एकाधिकार मैं कहता हूं कि उसके ऊपर निर्भर
45:40 है उससे आप कितना पंगा मोल ले लोगे भाई उससे तो आप पंगा मोल भी ले सकते हो पंगा मोल भी ले सकते हो लेकिन ये चीन वालों से क्या करोगे वो तो सलामी सलामी स्लाइसिंग बोलते हैं ना आप ऐसी स्थिति हो रही है कि आप वहां पर जितने आप थोड़ा पैर बढ़ाओगे उतना आपको झुका पाएगा। वो सलामी लेने के चक्कर में रहता है। आप देखिए सलामी स्लाइसिंग तो छोटी चीज है। अब हमको लगता है हमको ऐसा कोई सतीश जी सतीश जी एक छोटा सा सवाल एक सेकंड सॉरी मैं आपको बीच आई एम सॉरी एक्सक्यूज मी सॉरी। इसी तरीके की एक घटना आपने देखी थी। जब पठानकोट में अटैक हुआ था तो जो आईएसआई का एक अधिकारी आके उसकी जांच कर रहा था। उसके
46:26 बाद यह क्या बीजेपी बिल्कुल सोचती नहीं? सरकार बिल्कुल सोचती नहीं या उसको लगता है हम कुछ भी करके निकल सकते हैं? नहीं एक ये एक आइडियलिस्टिक प्रयास करते हैं। उनको ये लग रहा है कि चीन से कुछ कुछ अगर इनिशिएटिव लेंगे तो बात कुछ हो सकती है। कल को लॉन्ग टर्म हो जाए। हमारा एक कल्चरल पूरा पूरा इतिहास रहा है। यह एक सोच है। उसी प्रकार से जो पठानकोट वाला कह रहे थे उस समय आपको याद होगा 2014 में मैं भी गया था। 2014 के शपथ में मोदी जी ने सारे नवाज शरीफ भी आए थे। है ना? वहां तो बड़ा लगा कि सब बड़ा खुशनुमा माहौल में सब कुछ हो रहा है। उसके बाद ऐसी ऐसी चीजें हुई तो पठानकोट में जो आईएसआई वाला जांच करने पहुंचा था। ये मतलब ऐसा लगा इन्होंने
47:13 कि एक आउट ऑफ बॉक्स एक इनिशिएटिव लिया कि वो आए जांच करें शायद इससे पता चले कुछ आगे बात बन पाए ये गलती उनको चीन के साथ नहीं करनी चाहिए ये तो एकदम पक्की बात है वो चीन वाले मानने वाले हैं क्या वो तवांग से ले गलवान से लेमन तो उनके पास ही है एक तरह से और ये देखिए अरुणाचल का कोई नहीं छोड़ेंगे और देख रहे होंगे कि अमेरिका से अगर इनका रिश्ता थोड़ा इधर उधर बिगड़ा हुआ है इसके में और मौका का फायदा फायदा उठा लो। ये भी है वो लोग। अरे छोटी आंख वालों को बड़ी दिखती है भाई। ये बात ध्यान लेती है। हम लोगों को खाली चश्मा टाइट करना है भाई। चश्मा जिसे दिखे सब कुछ। चलिए अंदर भी बाहर भी। महत्वपूर्ण सवाल इसी बात को लेकर है कि आप
47:59 जिस वजह से जिन कारणों से आप पूरे विपक्षी पार्टियों को देश के हर उस व्यक्ति को जो समझदारी से कदम उठाने की बात कर रहा था उसको जब आप गालियां दे रहे थे। तो जब यही चीज आप खुद करते हुए दिखाई पड़ते तो सही कैसे हो सकता है और खासकर ऐसे मौके पर जब पहलगाम जैसा इतना बड़ा हादसा हुआ हो। आप सोचिए उन मां बहनों के बहनों के बारे में जिनका सुहाग उस दिन उजड़ा होगा। आज इन तस्वीरों को देखने के बाद उनके मन पर क्या गुजरी होगी। बहुत-बहुत शुक्रिया। धन्यवाद। नमस्कार।