हीरेन जोशी, गोदी मीडिया जिसकी कठपुतलीयुवा रिपोर्टर ने खोला मोदी के सबसे क़रीबी का रहस्य| Arfa Khanum

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简要总结

本视频讲述了印度总理办公室(PMO)一位名叫希伦·乔希(Hiren Joshi)的神秘人物,他负责媒体管理和舆论引导,对印度媒体界有着巨大的影响力。记者们惧怕他,因为他能决定谁得到奖励,谁受到惩罚。最近有传言说他将离开总理办公室,但最终他仍然在职。

  • 希伦·乔希在印度媒体界拥有巨大的影响力,能够操纵新闻议程和舆论。
  • 辛杜尔行动期间,印度媒体散布有关卡拉奇袭击的假新闻,导致军方混乱,希伦·乔希未能有效控制局面。
  • 尽管有传言称他将离职,但希伦·乔希目前仍在总理办公室任职。

引言:希伦·乔希——印度总理办公室的神秘人物

本期节目由阿尔法·卡纳姆·谢尔瓦尼主持,介绍了印度总理办公室一位名叫希伦·乔希的官员,他负责媒体事务,但鲜为人知。记者斯里希蒂·贾斯瓦尔经过大量调查,撰写了一篇关于希伦·乔希的文章,揭示了他在印度媒体界的影响力。文章探讨了希伦·乔希与纳伦德拉·莫迪之间的关系,以及他未能有效控制“辛杜尔行动”期间的媒体报道,导致两人之间产生隔阂。

发现希伦·乔希:记者调查的开端

斯里希蒂·贾斯瓦尔分享了她如何首次听说希伦·乔希的名字,当时她正在调查印度人民党(BJP)的IT部门。她的消息来源告诉她,希伦·乔希负责管理夜间辩论和BJP的IT部门。贾斯瓦尔开始调查希伦·乔希,发现他是一个公开的秘密,媒体行业的大人物都知道他,但普通记者却不了解他。她还透露,在与“禁忌故事”组织合作期间,她向他们提供了有关希伦·乔希的信息,该组织负责调查“飞马”间谍软件泄露事件。

危机公关:莫迪学位事件

贾斯瓦尔讲述了2016年围绕纳伦德拉·莫迪学位的争议,以及希伦·乔希如何参与危机管理。当时,德里首席部长阿尔温德·凯杰里瓦尔根据《信息权法》要求提供莫迪在德里大学和古吉拉特大学的学位证书副本。信息委员会下令公开这些信息。古吉拉特大学的副校长透露,希伦·乔希在六个月前与他联系,并通过WhatsApp向他发送了相关信息。

辛杜尔行动:世界大师形象受损

贾斯瓦尔解释说,在“辛杜尔行动”之后,希伦·乔希未能有效管理媒体,导致莫迪的“世界大师”形象受损。特别是,唐纳德·特朗普在印度和巴基斯坦宣布停火之前就在社交媒体上发布了这一消息,这让莫迪感到非常不满。此外,新闻频道声称已经占领了卡拉奇,并接近拉合尔和伊斯兰堡,这些不实报道进一步损害了莫迪的形象。

希伦·乔希的未来:潜在的替代者和军事问题

贾斯瓦尔表示,尽管有传言称他将离职,但希伦·乔希目前仍在总理办公室任职。她还提到,普拉蒂克·多希和纳夫尼特·萨加尔是希伦·乔希的潜在替代者。此外,她透露,军方对希伦·乔希也有不满,因为在“辛杜尔行动”期间,印度媒体散布有关卡拉奇袭击的假新闻,导致军方混乱。

宣传机器:自动驾驶模式

贾斯瓦尔认为,即使希伦·乔希离职,也不会有太大改变,因为莫迪领导下的宣传机器已经进入自动驾驶模式。新闻编辑和记者们只需要一点暗示,就能按照执政者的意愿行事。她还表示,由于希伦·乔希的工作方式涉及威胁和恩惠,因此围绕他的工作存在保密。

恐惧气氛:记者保持沉默

贾斯瓦尔分享了她在调查希伦·乔希时所经历的恐惧,以及她如何采取预防措施以防“飞马”间谍软件攻击她的手机。她还透露,许多记者和编辑都不愿谈论希伦·乔希,因为他们害怕遭到报复。她赞扬了《The Wire》编辑西玛·奇什蒂鼓励她继续报道此事。

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文字稿

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0:00 एक ऐसा व्यक्ति जिसके WhatsApp मैसेज से पूरा का पूरा जो यह मीडिया का अंपायर है यह हिल जाया करता है। पत्रकार उनका नाम लेने से खौफ खाते हैं और पूरे तरीके से कहानी इस तरह की है कि अगर वो खुश होते हैं तो इनाम देते हैं और नाराज होते हैं तो सजा देते हैं। यह व्यक्ति है जो नाइट टाइम डिबेट्स की नहीं बल्कि बीजेपी आईटी सेल को भी यही मैनेज करती है। कि नरेंद्र मोदी की डिग्री पर जब फजीहत होनी शुरू हुई तो किस तरह से यह पूरा क्राइसिस मैनेजमेंट किया। तो गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जो उस समय थे उन्होंने इंफॉर्मेशन प्रोवाइड किया तो उन्होंने रिपोर्टर से बात करते हुए उस समय बोला कि उन्होंने इससे छ महीने पहले मुझे कांटेक्ट किया और मैंने उनको WhatsApp पे इंफॉर्मेशन जो है भेज दी। तो मेरे एक सोर्स ने मुझे बताया कि काफी ज्यादा मिलिट्री में भी प्रॉब्लम थी इंडियन

0:46 मिलिट्री में। स्पेशली बिकॉज़ जब ऑपरेशन सिंदूर के टाइम पे जब इंडियन मीडिया स्पेशली टेलीविज़ मीडिया फेक न्यूज़ पे फेक न्यूज़ फैला ही जा रहा था कि कराची में हमला कर दिया गया है। यहां पे हमला कर दिया गया है। बिकॉज़ मिलिट्री को खुद नहीं पता था कि क्या चल रहा है। क्या कराची में कोई हमला हो रहा है? क्या नेवी के द्वारा कोई हमला हो रहा है? एक तरह से ना कुछ समय के लिए कुछ घंटों के लिए कुछ कुछ दिनों के लिए ऐसा माहौल बन गया जहां पे यही नहीं पता लग रहा था कि सच क्या है और झूठ क्या है। जनता को जानने का हक है आम आदमी को और आम पत्रकार को भी जानने का हक है कि आखिर क्या हो रहा है प्राइम मिनिस्टरर्स ऑफिस में। तो क्या यह पूरी डिबेट्स बदल जाएंगी? ट्रोलिंग का पूरा माहौल बदल जाएगा। प्रोपेगेंडा तो रहेगा। ये तो ये तो सुनिश्चित कर ले हम कि रहेगा। लेकिन उसकी तस्वीर बदलेगी अगर हटते हैं वो बहुत पावरफुल पर्सन है प्राइम मिनिस्टर

1:31 के साथ पिछले 10 सालों से है 10 सालों से ज्यादा से टाइम से है तो उनको इस तरह से उठाकर नहीं हटाया जा सकता प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से तो मेरे सोर्सेस ने मुझे ये बताया था कि हो सकता है कि उनको वापस गुजरात भेज दिया जाए हो सकता है कि उन्हें किसी राज्यपाल की पोजीशन दे दी जाए या फिर उनके लिए एक और पोजीशन जो है वो रखी जाएगी। इतना खतरनाक आदमी है तो आरफा और सृष्टि मिलकर द वायर पर इतने खुल्लम खुल्ला उनके बारे में बहस कर रही है तो उतने तो खतरनाक नहीं है। मैंने हर आधे घंटे में अपना फोन जो है स्विच ऑफ स्विच ऑन करा है ताकि इन केस पेगसिस का अटैक हो मेरे फोन पर तो वो अटैक जो है नलिफाई हो जाए। नमस्कार द वायर में आपका स्वागत है। मैं हूं आरफा खानम शेरवानी। अब से कुछ ही दिनों पहले की बात है। इसी महीने की एक खबर है। ब्रेकिंग न्यूज़ लेकर मैं आपके सामने आई थी और मैंने आपको बताया था कि

2:17 नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री प्राइम मिनिस्टरर्स ऑफिस में ही जॉइंट सेक्रेटरी रैंक के ओएसडी ऑफिसर हैं। ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी है वो हिरन जोशी जिनका नाम कोई नहीं लेने को तैयार है। पहली बार उनकी तस्वीर G20 में जब 2023 में यहां समिट हो रही थी भारत में तब उनकी तस्वीर बाहर आई। उसके अलावा हमारे पास कोई दूसरी तस्वीर नहीं है। एक ऐसा व्यक्ति जिसके WhatsApp मैसेज से पूरा का पूरा जो यह मीडिया का अंपायर है यह हिल जाया करता है। पत्रकार उनका नाम लेने से खौफ खाते हैं और पूरे तरीके से कहानी इस तरह की है कि अगर वह खुश होते हैं तो इनाम देते हैं और नाराज होते हैं तो सजा देते हैं। एक ऐसे व्यक्ति के प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से जाने की खबरें उस वक्त एक तरह की मैं कहूंगी कान कान में कानफुसिया की तरह एक तरह से आ रही थी

3:02 बाहर। बहुत कम पत्रकारों ने उस पर बातचीत की और खबर आई और उसी तरह से वो खबर चली गई क्योंकि कभी भी पुष्टि नहीं हो पाई। आधिकारिक रूप से इस सरकार की सबसे बड़ी समस्या ही यही है कि कभी भी पता नहीं लगता कि आखिर हो क्या रहा है। जो एक आम जनता और आम पत्रकार के जानने का हक है उससे उसको दूर रखा जाता है। लेकिन आज मैं आपके सामने दोबारा पेश हुई हूं इसी खबर को लेके क्योंकि एक यंग रिपोर्टर एक यंग जर्नलिस्ट सृष्टि जैसवाल ने ये आप खबर देखिए अपनी स्क्रीन पर। एक बहुत बड़ी कहानी लंबी चौड़ी कहानी बहुत ज्यादा रिसर्च के बाद कई दिन गुजारने के बाद दर्जनों पत्रकारों संपादकों से बात करने के बाद जिन्होंने कहा कि ऑफ रिकॉर्ड भी हम बात नहीं करेंगे तब जाके इन्होंने इन खबरों को इकट्ठा किया है और इन खबरों की जाहिर है पुष्टि तो कभी

3:48 नहीं हो पाएगी लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि सृष्टि ने ये पता लगाने की जरूर कोशिश की है कि आखिर क्यों नरेंद्र मोदी और उनके ये जो मीडिया सलाहकार इन्हें हम कहें जॉइंट सेक्रेटरी कहें कहें, ओएसडी कहें इनके बीच क्यों दूरी आई है? तो उनका यह कहना है कि खासकर यह कई कई दिनों से कई सालों से यह बात बिल्ड हो रही थी। लेकिन आखिरी बात जब आई जब सिंदूर ऑपरेशन के वक्त जिस तरह से नरेंद्र मोदी की छवि को एक विश्व गुरु की छवि को एक मजबूत नेता की छवि को जो नुकसान पहुंचा और उसकी भरपाई नहीं कर पाए। हिरन जोशी तब से जो है इन दोनों के बीच एक दूरी बननी शुरू हुई है। सृष्टि की ये रिपोर्ट कहती है कि किस तरह से जब डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया कि उन्होंने यह सीज फायर कराया है। एक तो उसके बाद हम पूरे तरीके से जो

4:34 प्रधानमंत्री थे या भारत की जो एक इमेज थी उसको उसकी भरपाई नहीं कर पाए। उसको डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाई। दूसरी तरफ जो न्यूज़ चैनल्स थे जब वो कह रहे थे कि कराची को कब्जे में ले लिया है और लाहौर तक पहुंच गए हैं। इस्लामाबाद तो कब का अपना हो चुका। इस तरह की बहुत ही हास्यास्पद चीजें हास्यास्पद खबरें जब आगे ला रहे थे उसको भी हिरन जोशी कंट्रोल नहीं कर पाए। इसके अलावा कई ऐसी महत्वपूर्ण चीजें हैं जिसको आप इस रिपोर्ट में देखेंगे और खासकर यह वजह बताई जा रही है कि इन दोनों के बीच दूरी आई है। सृष्टि की ये खास रिपोर्ट यह भी बताती है कि ऐसे भी लोग तैयार हैं अभी जिनको कि हिरण जोशी का एक तरह से अल्टरनेटिव माना जा सकता है कि उनकी जगह वो ले सकते हैं। बहुत सारी इस पे डिटेल्स है। खबर जरूर आप पढ़ने की कोशिश कीजिए इस आर्टिकल को। लेकिन इस आर्टिकल की पूरी

5:20 प्रक्रिया क्या थी? हिरण जोशी के बारे में कैसे उन्होंने पता लगाया? इतनी हिम्मत और हौसला उनके अंदर कहां से आया? इन तमाम चीजों को जानने के लिए मैं खुद सृष्टि से बातचीत करती हूं। और इस कहानी की कहानीकार सृष्टि जैसवाल इस वक्त मेरे साथ मौजूद है। सृष्टि सबसे पहले तो मैं यह हैरान हूं कि यह एक लेख है या पूरी किताब है। एक ऐसा व्यक्ति जिसकी तस्वीर कोई नहीं जानता। उस व्यक्ति के नाम को भी बहुत छिपके खामोशी से सरगोशी के साथ लिया जाता है। उसके बारे में इतनी जानकारी आपने कैसे और क्यों इकट्ठी की? जी आरफ़ा, आई थिंक जब मैंने पहली बार हिरेन जोशी का नाम सुना था, तो मैं भी उन्हें नहीं जानती थी। जबकि मुझे जर्नलिज्म में काफी समय हो चुका था और मेरे लिए काफी सरप्राइजिंग एलिमेंट था कि प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में इतनी सीनियर पोजीशन पे

6:06 एक ऑफिसर है और उसका नाम पब्लिकली किसी को नहीं पता। ये आज से तीन से चार साल पहले की बात है। तो मैं अपने एक सोर्स से मिलने के लिए गई थी। बिकॉज़ मैं बीजेपी आईटी सेल को इन्वेस्टिगेट कर रही थी उस दौरान। तो मेरे एक सोर्स ने मुझे कहा कि आप क्या ये अमित मालवीय के बारे में बात कर रहे हैं जो कि बीजेपी आईटी सेल के हेड है या फिर जो बड़े इनफ्लुएंसर्स हैं बीजेपी आईटी सेल के जो आमतौर पे ट्रोलिंग ऑर्केस्टेट करते हैं या फिर लोगों को टारगेट करते हैं या फिर एक प्रोपगेंडा मैसेज फैलाते हैं। उन्होंने मेरे सोर्स ने मुझे बताया कि ये तो बहुत छोटी-छोटी चीजें हैं। आप हिरेन जोशी के बारे में बात क्यों नहीं करते हैं? तो मैंने बोला मुझे तो पता ही नहीं है हिरन जोशी कौन है? हिरन जोशी का नाम मैंने आज से पहले कभी सुना ही नहीं। तो जैसे ही मैंने बोला कि मुझे नहीं पता मेरे

6:53 हिरेन जोशी कौन है तो वो थोड़े डर गए तो उन्हें लगा कि मैंने कुछ गलत चीज तो नहीं मेंशन कर दी। वे थोड़े से एक हल्का सा सन्नाटा सा छा गया उस मीटिंग में क्योंकि वो समझ रहे थे कि शायद से मुझे पता होगा हिरन जोशी कौन है। जबकि मुझे कोई आईडिया नहीं था। तो उसके बाद फिर उन्होंने मीटिंग फटाफट से क्लोज की और वो वहां से चले गए। जैसे ही वो चले गए तो मैंने हिरन जोशी इंटरनेट पे सर्च किया और इंटरनेट पे कुछ भी नहीं एक्सेप्ट फॉर प्राइम मिनिस्टर ऑफिस। प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में बस हिरन जोशी एस ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी जॉइंट सेक्रेटरी लेवल के वो मेंशंड है। दैट वास द फर्स्ट टाइम जब मैंने हिरन जोशी के बारे में सुना और हिरन जोशी के बारे में मुझे पता चला और जैसेजैसे मैं हिरन जोशी के बारे में डग करना स्टार्ट किया तो मुझे पता लगा कि ये एक अपने आप में ही एक बहुत

7:39 बड़ा ओपन सीक्रेट है। ये एक ऐसा सीक्रेट है जो इंडस्ट्री के बड़े-बड़े लोगों को पता है। पब्लिशर्स को पता है, एडिटर्स को पता है। आमतौर पे मेरे जैसे छोटे रिपोर्टर्स को नहीं पता बिकॉज़ हम तक वो बात पहुंच कर नहीं आती है। हम लोग मैं मेरे जैसे छोटे रिपोर्टर्स को आमतौर पे माइक्रोब्स की तरह मानती हूं जो एक स्कैवेंजर की तरह है और जो छोटी-छोटी चीजों को स्कैवेंज करके निकालते हैं। बट ये जो बात थी ये बड़े लोगों की बात थी जो मीडिया में काफी टाइम से हैं। तो मैंने काफी टाइम से फिर हिरन जोशी को ऑब्जर्व करना स्टार्ट कर दिया। उनकी छोटी-छोटी चीजें ऑब्जर्व करनी स्टार्ट कर दी। और उसके बाद उसी दौरान मैं पेरिस में फॉरबिडन स्टोरीज के साथ काम कर रही थी। फॉरबिडन स्टोरीज वह न्यूज़ ऑर्गेनाइजेशन है जिसको पेगसिस का लीक मिला और उन्होंने वर्ल्ड

8:26 वाइड इन्वेस्टिगेशन की थी अबाउट पेगसिस एंड तो मैंने उनको ये बताया कि हिरन जोशी नामक एक व्यक्ति है प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में ही रहते हैं और मेरे सोर्सेस ने मुझे बताया है कि यह व्यक्ति है जो नाइट टाइम डिबेट्स ही नहीं बल्कि बीजेपी आईटी सेल को भी यही मैनेज करते हैं। तो जब मैं ऑफ द रिकॉर्ड काफी सारे लोगों से बात करने लगी तो मुझे काफी कुछ पता लगा। अ काफी कुछ तो मुझे इस तरह से पता लगा कि मैंने हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस दैनिक जागरण और काफी सारे अखबारों की बहुत पुरानी क्लिपिंग्स पढ़ी। जब गुजरात के समय की जब नरेंद्र मोदी जो प्राइम मिनिस्टर नहीं थे जब वो चीफ मिनिस्टर थे तब की क्लिपिंग्स पढ़ी। तो वहां पर हिरन जोशी का मेंशन मुझे काफी जगह मिला। जैसे मुझे एक जगह मेंशन मिला कि

9:11 किस तरीके से हिरन जोशी ने सिर्फ मोदी की वेबसाइट के ऊपर ध्यान नहीं दिया था बल्कि आनंदीबेन पटेल जो मोदी के सक्सेसर रहे थे उनका भी वेबसाइट के ऊपर ध्यान जो है वो हिरन जोशी ने ही दिया था। मतलब मैं मैं सिलसिलेवार तरीके से मैं दर्शक जब पत्रकार नहीं जानते एक ऐसे व्यक्ति के सामने के बारे में जिसको आप ओपन सीक्रेट कह रही हैं यानी कि एक खुला हुआ राज एक ओपन सीक्रेट तो मैं सिलसिलेवार तरीके से समझने की कोशिश करती हूं और दर्शकों की भी जानकारी के लिए ताकि उन्हें बेहतर तरीके से अंदाजा हो। सबसे पहले मुझे बताइए आप जब कहानी की शुरुआत कर रही हैं वायर के इस आर्टिकल में बेहतरीन आपने ये आर्टिकल लिखा है और मैं चाहती हूं आप इसी तरह गिद्ध की निगाहें लगाकर दूर से देखें क्योंकि दूर से जिन चीजों को आप देखते हैं उसमें ज्यादा बेहतरीन तरीके से देख पाते हैं और इस तरह के हमें जिसे आप छोटा रिपोर्टर कह रही हैं बड़ी कहानियां करने वाले बड़ी

9:58 खबरें करने वाले छोटे बहुत सारे रिपोर्टर्स हमें चाहिए। मुझे बताइए कि आपने ये कहा कि नरेंद्र मोदी की डिग्री का आपने इसमें उदाहरण दिया है कि नरेंद्र मोदी की डिग्री पर जब फजीहत होनी शुरू हुई तो किस तरह से हिरन जोशी ने यह पूरा क्राइसिस मैनेजमेंट किया और कैसे उन्होंने गुजरात में जो वाइस चांसलर हैं जहां से ये पूरी डिग्री का मतलब उत्पादन होने की बात हो रही थी कि वहां से ओरिजिन हो रहा है उसको उन्होंने मैनेज किया कैसे किया बताइए हमारे दर्शकों के लिए जी तो ये 2016 की बात है तो उस समय डिग्री के बारे में नई-नई बातचीत शुरू हुई थी। अरविंद केजरीवाल ने जो उस समय दिल्ली के चीफ मिनिस्टर थे उन्होंने आरटीआई डाला था कि मोदी की जो उन्होंने अपने एफिडेविट इलेक्शन एफिडेविट में लिखा है कि मेरा

10:43 दिल्ली यूनिवर्सिटी से डिग्री है और गुजरात यूनिवर्सिटी से मास्टर्स डिग्री है। तो उसकी कॉपी जो है उसे फर्निश किया जाए। अकॉर्डिंग टू राइट टू इनफेशन एक्ट बिकॉज़ वो एक पब्लिक इंडिविजुअल है। एक प्राइम मिनिस्टर की पोस्ट रखते हैं। तो दे सेड कि मुझे ये डिग्री जो है वो दिखानी चाहिए। तो उस समय जो है सीआईसी में यानी कि इंफॉर्मेशन कमीशन की जो हेड ऑफिस है वहां पर ये बात चली और इंफॉर्मेशन कमीशन ने बोला कि डिग्री के बारे में इंफॉर्मेशन जो है वो पब्लिक की जानी चाहिए। तो जो इंफॉर्मेशन है वो सिर्फ दिल्ली से नहीं मांगी गई थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी से नहीं मांगी गई गुजरात यूनिवर्सिटी से भी मांगी गई थी। यही कह के कि दिल्ली यूनिवर्सिटी की डिग्री जो है वो गुजरात यूनिवर्सिटी में भी सबमिट की गई होगी जब एडमिशन लिया गया होगा उस समय। बिकॉज़ गुजरात यूनिवर्सिटी में हायर एजुकेशन किया है

11:31 उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से। तो इसीलिए गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर को भी इनफेशन गया कि आप ये इनेशन आप प्रोवाइड कीजिए पब्लिकली। तो उसमें ऑर्डर में ये चीज क्लियरली नहीं लिखी गई थी कि डिग्री प्रोवाइड करनी है। ये लिखा गया था कि इन प्रोवाइड करना चाहिए। तो गुजरात यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर जो उस समय थे उन्होंने इंफॉर्मेशन प्रोवाइड किया कि इतना इतना मार्क्स जो है प्राइम मिनिस्टर मोदी को मिस्टर मोदी को मिला है। पर उन्होंने रिपोर्टर से बात करते हुए उस समय बोला कि एक हिरण जोशी नाम के व्यक्ति है। उन्होंने इससे छ महीने पहले मुझे कांटेक्ट किया और मैंने उनको WhatsApp पे इंफॉर्मेशन जो है भेज दी। वाइस चांसलर ने ये भी बोला कि मैंने डिग्री उनको भी नहीं भेजी बिकॉज़ मुझे डायरेक्शन अभी तक नहीं आई है कि डिग्री की कॉपी भेजनी है। मुझे बस डायरेक्शन ये आई थी कि इंफॉर्मेशन भेजनी है। अगर मुझे

12:17 प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से ये डायरेक्शन आती है या फिर सीआईसी से ये इन आती है कि मैं ये डिग्री साझा करूं डिग्री पब्लिक करूं तो मैं कर दूंगा। अगर मुझे पीएमओ से ये इनफेशन नहीं आती है तो मैं ये डिग्री साझा नहीं करूंगा। तो आई थिंक उस समय भी जो वाइस चांसलर होंगे शायद से उनको नहीं पता था कि हिरन जोशी क्या है कौन है उन्हें बस ये पता था कि प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से हरेंद्र जोशी का मैसेज आया है और जाहिर है उस आदेश का पालन करना बहुत जरूरी है तो इस संकट का आप उदाहरण देके बताती हैं कहानी में कि कैसे यह नरेंद्र मोदी के मैन फ्राइडे यानी कि वो व्यक्ति एक तरह का संकट मोचक कह सकते हैं अगर हिंदी में हम कहने की कोशिश करें लेकिन मुझे बताइए इससे पहले कि मैं अगले मुद्दों पे आऊं और दर्शक यह भी जानना चाहते हैं कि यह हमारे स्टूडियो स्टूडियो से जो दिनरा जहर निकल रहा है पिछले 10 11 सालों में

13:03 इसके अलावा जैसे रिपोर्टर्स को परेशान किया जाता है ट्रोलिंग की जाती है मेरे जैसे लोगों की इस सब का आदेश कौन देता है और किस तरह की ऑर्गेनाइज्ड इंडस्ट्री है मैं जरूर आऊंगी इस पे लेकिन मुझे बताइए फिलहाल कि कहानी तो ये खत्म हो गई कि भ हिरन जोशी को बताया गया था कि प्राइम मिनिस्टरर्स ऑफिस से वो रुखसत हो गए हैं लेकिन वो तो वापस आ गए हैं अभी लेटेस्ट खबर क्या है वो हैं या वो नहीं है या वो चले गए हैं या वो वापस आ गए हैं क्या हम बोलेंगे अभी जी अलफा अभी जैसा कि मेरे सोर्सेस ने मुझे बताया था कि एट दिस प्रेजेंट मोमेंट हिरन जोशी जो है और ये प्राइम मिनिस्टर ऑफिस की वेबसाइट पे भी क्लियर है वो अभी पोस्टेड है प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में करेंटली ही स्टिल देयर अ परंतु जो बात है जिस बारे में ये बात चल रही थी कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्योंकि उस समय जो मीडिया मैनेजमेंट

13:50 था अकॉर्डिंग टू माय सोर्सेस वह मोदी जी के इफेक्टिवनेस के हिसाब से नहीं था। स्पेशली जब ट्रंप ने ट्वीट कर दिया कि इंडिया और पाकिस्तान का सीज फायर है वो भी बिफोर इंडिया और पाकिस्तान अनाउंस कर पाए। उससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पे डाल दिया। इससे बहुत भारी ठेस पहुंची विश्व गुरु इमेज को जो प्राइम मिनिस्टर मोदी ने बहुत ही केयरफुली क्यूरेट की थी ओवर अ डेकेड। उनको पूरा 10 साल लग गए थे। कितना ही ज्यादा इमेजेस उन्होंने क्राफ्ट किया था। कितना ही ज्यादा ट्वीट्स किस तरह से उन्होंने प्राइम मिनिस्टर मतलब एक ऑफिस से एक बहुत ही डियर इमेज थी उनके लिए कि एक परसेप्शन था कि हमारे देश के प्राइम मिनिस्टर जो है वो सिर्फ देश के विश्व देश के गुरु नहीं है वो विश्व के गुरु हैं। तो उस समय जब इस तरह से एक सेगमेंट जो है एक

14:38 इमेज जो है वो प्राइम मिनिस्टर मोदी की विश्व गुरु इमेज उसको जो ठेस पहुंचा उसको लेकर आई थिंक काफी प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में हलचल पहुंची और सिर्फ यही नहीं आई थिंक जब नहीं तो आप सृष्टि मैं अगर सही समझ रही हूं आपको तो आप ये कह रही है कि इस इमेज जो खराब हो रही थी उसको हिरन जोशी मैनेज नहीं कर पाए। इस बात की सजा के तौर पर उनको हटाया गया प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से या खबर आई या अफवाह आई कि उनको हटाया जाएगा। जी वो जो है ना एक फाइनल नेल इन द कॉफिन था जैसे कहते हैं कि एकदम फाइनल नेल कि अब तो मतलब वीरेंद्र जोशी अपना काम अच्छे से नहीं कर पाए। तो इस वजह से प्राइम मिनिस्टर मोदी जो है वो धीरे धीरे धीरे उनसे खफा होते गए और थोड़ा-थोड़ा दूर होते गए। और साथ में ही यह एक वैक्यूम क्रिएट

15:23 हो गया वहां पर। ये वैक्यूम जो है वो बाकी लोगों ने बहुत इजीली और बहुत जल्दी जो है ऑक्यूुपाई कर दिया। जैसे मिस्टर प्रतीक दो जोशी है मेरे सोर्सेस के द्वारा ये कहा गया है कि उनको मीडिया पोर्टफोलियो जो है प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में एडिशनली दे दिया गया। साथ में यह भी कहा जा रहा है काफी इस चीज की चर्चा काफी है और काफी लोगों ने मुझे ऑफ द रिकॉर्ड इस बारे में बताया है कि मिस्टर नवनीत सहगल जो फॉर्मर आईएएस ऑफिसर है वह भी रेस में है कि हिरन जोशी की जो पोजीशन है मीडिया मैनेजमेंट की वो चाहते हैं कि उनको उस तरफ डायरेक्शन मिले या फिर उसी के लेवल में प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में ये डायरेक्शन मिले। लेकिन सही वक्त का इंतजार हो रहा है। आप ये कह रही है कि सही वक्त बिकॉज़ ये पार्लियामेंट इसमें एक चीज और भी देखनी है कि हिरन जोशी जो है वो बहुत पावरफुल पर्सन है। प्राइम मिनिस्टर के साथ

16:09 पिछले 10 सालों से हैं। 10 सालों से ज्यादा से टाइम से हैं। तो उनको इस तरह से उठाकर नहीं हटाया जा सकता प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से। देयर नीड टू बी सम सॉर्ट ऑफ़ सेरेमोनियल एग्जिट फॉर हिम। तो मेरे सोर्सेस ने मुझे ये बताया था कि हो सकता है कि उनको वापस गुजरात भेज दिया जाए। हो सकता है कि उन्हें किसी राज्यपाल की पोजीशन दे दी जाए या फिर उनके लिए एक और पोजीशन जो है वो रखी जाएगी ताकि नए लोग आके इस मीडिया पोर्टफोलियो को कर सके और हिरन जोशी को कहीं और पे अकोमोडेट किया जा सके। एक और चीज जो मुझे अभी स्टोरी आने के बाद ही साझा हुई। मेरे साथ एक सोर्स जो मिले बिकॉज़ स्टोरी को काफी रीड किया जा रहा है वाइडली। तो मेरे एक सोर्स ने मुझे बताया कि काफी ज्यादा हिरन जोशी के अगेंस्ट मिलिट्री में भी प्रॉब्लम थी इंडियन मिलिट्री में स्पेशली बिकॉज़ जब

16:55 ऑपरेशन सिंदूर के टाइम पे जब इंडियन मीडिया स्पेशली टेलीविज़ मीडिया फेक न्यूज़ पे फेक न्यूज़ फैला ही जा रहा था कि कराची में हमला कर दिया गया है। यहां पे हमला कर दिया गया है। तो यह जो चीज थी यह मिलिट्री के लिए बहुत ही मुश्किल हो गया। बिकॉज़ मिलिट्री को खुद नहीं पता था कि क्या चल रहा है। क्या कराची में कोई हमला हो रहा है? क्या नेवी के द्वारा कोई हमला हो रहा है? एक तरह से ना कुछ समय के लिए, कुछ घंटों के लिए, कुछ कुछ दिनों के लिए ऐसा माहौल बन गया जहां पे यही नहीं पता लग रहा था कि सच क्या है और झूठ क्या है। तो उस चीज का भी रिस्पांसिबिलिटी हरन जोशी के ऊपर ही आई है क्योंकि मीडिया मैनेजमेंट हिरन जोशी का ही रिसोंसिबल था। तो मिलिट्री की तरफ से भी काफी काफी आई है और आप ये कह रही है कि इस पूरा सिंदूर के पूरा ऑपरेशन चाहे वो डॉन्ड ट्रंप के उस ट्वीट के बाद नरेंद्र मोदी की

17:40 छवि को दोबारा खड़ा ना कर पाने की कोशिश जो सबसे बड़ा झटका लगा है विश्व गुरु की इमेज को आप बिल्कुल ठीक कह रही हैं। और दूसरी वही बड़ी बात कि उस मीडिया को जिसके जरिए पूरा प्रोपेगेंडा होता है। उस पूरे प्रोपेगेंडा मीडिया को एक एक तरह के चुटकुले में तब्दील हो गया। पूरी दुनिया में बदनामी हुई। पूरी दुनिया की मीडिया ने कवर किया कि कितना हिलरियस कितना मजाक बना के रख दिया एक पूरी जंग का जो दो देशों के बीच चल रही थी। अब मुझे यह बताइए फिलहाल कि अगर हिरन जोशी हटते हैं फिर भी वही अगर तब तक लगाना पड़ेगा जब तक कि वाकई हमें ऑफिशियल खबर नहीं मिलती है और यह भी हैरानी की बात है कि ये पब्लिक ऑफिस है। जनता के पैसे से चलने वाला ऑफिस। लेकिन इसके इर्द-गिर्द जिस तरह का एक सस्पेंस बना रखा है। जनता को जानने का हक है। आम आदमी को और आम पत्रकार को भी जानने का हक है कि आखिर क्या हो रहा है प्राइम

18:26 मिनिस्टरर्स ऑफिस में? तो क्या यह पूरी डिबेट्स बदल जाएंगी? ट्रोलिंग का पूरा माहौल बदल जाएगा। प्रोपेगेंडा तो रहेगा। यह तो ये तो सुनिश्चित कर ले हम कि रहेगा। लेकिन उसकी तस्वीर बदलेगी अगर हटते हैं हिरन। देखिए पहली बात तो हमें ऑफिशियली तो बिल्कुल नहीं पता लगेगा कि वो हटते हैं कि नहीं हटते। आई डोंट थिंक सो उनके अपॉइंटमेंट पे तो वैसे ऑफिशियल ऑर्डर आया था बट उनके हटने पे या तो यदि वो किसी और व्यक्ति को मीडिया पोर्टफोलियो दे दे और वही सेम पोर्टफोलियो दे दे तो तब शायद से वो नोटिफिकेशन निकालेगा प्राइम मिनिस्टर ऑफिस कि ये फलाना व्यक्ति जो है उस पोजीशन पे आ गया है। तो तब शायद से हमें ऑफिशियली पता लग सकता है। बट अदरवाइज आई थिंक एट दिस पॉइंट ऑफ़ टाइम आल्फा जो प्रोपोगेंडा मशीनरी है प्राइम मिनिस्टर मोदी के अंडर वो अब एक ऑटो पायलट मोड पे चली गई है। तो

19:12 आई थिंक दैट इज व्हाई हिरन जोशी इज आल्सो डिस्पेंसिबल फॉर प्राइम मिनिस्टर मोदी। बिकॉज़ अब जो न्यूज़ एडिटर्स हैं या फिर जो जर्नलिस्ट है जो टॉप के जर्नलिस्ट है जो डिसाइड करते हैं कि आज न्यूज़ बुलेटिन क्या रहेगी? एजेंडा क्या रहेगा? उनको बस अब किसी तरह की डायरेक्शन की जरूरत नहीं। उनको हल्का सा इशारे की जरूरत है। और वो इशारा कोई भी कर सकता है। एज लॉन्ग एज़ इट कम्स फ्रॉम द रूलिंग रिजीम। सो आई डोंट थिंक सो दैट यू नो वी कैन एक्सपेक्ट अ लॉट ऑफ चेंज एट दिस पॉइंट ऑफ टाइम। अभी मुझे नहीं लगता कि इतना कोई चेंज आएगा क्योंकि अब जो ये मॉन्सर है वो एक अपने आप में सेल्फ रिप्रोड्यूसिंग मॉन्सर बन चुका है। टूथपेस्ट जो है वो बॉटल से बाहर निकल चुका है। टूथपेस्ट को आप वापस अंदर नहीं डाल सकते। अब आप ये कह रही है कि सबको अपना काम पता है क्या करना है। शुरू में एक इसको स्ट्रक्चर

19:58 बनाया गया इस पूरे प्रोपेगेंडा का जिसके लिए जिम्मेदार थे हिरण जोशी। अब यह स्ट्रक्चर तैयार हो चुका है और यह शैतान अपना काम कर रहा है। यह आप कह रही हैं कि मॉन्सर अपना काम कर रहा है। अब बिल्कुल आखिरी सवाल आपसे मैं जानने की कोशिश करूंगी कि अब तो सवाल यह भी पूछा जाएगा कि भ इतना खतरनाक आदमी है तो आरफा और सृष्टि मिलकर द वायर पर इतने खुल्लम खुल्ला उनके बारे में बहस कर रही है तो उतने तो खतरनाक नहीं है। नहीं आरफा आप जानते नहीं है। मतलब जो वायर के एडिटर है सीमा उनसे आप पूछ सकते हैं। मुझे बहुत डर लग रहा था। मैंने हर आधे घंटे में अपना फोन जो है स्विच ऑफ स्विच ऑन करा है ताकि इन केस पेगसिस का अटैक हो मेरे फोन पर तो वो अटैक जो है नलिफाई हो जाए क्योंकि अगर आप फोन स्विच ऑफ करते हैं और स्विच ऑन करते हैं तो उनको रीस्टब्लिश करना पड़ता है इनफेक्शन। मैंने अपने आसपास

20:43 मतलब अपने घर पे ताला लगाना शुरू कर दिया और अपनी नेबर्स को बता दिया कि इन केस कुछ होता है तो आई माइट नीड द हेल्प। एंड सीमा को भी मैंने बताया। बट सीमा ने मुझे बहुत ही ज्यादा हिम्मत दी। उन्होंने बोला कि ये एक पब्लिक ऑफिस है। ये एक ऐसी चीज है जो हमारे एस यू राइटली सेड कि टैक्स पेयर मनी से चल रहा है। हमारा हक बनता है जानने का। इससे पहले किसी भी प्राइम मिनिस्टर ने इसको हाइड नहीं करा है। चाहे वो मिस्टर मनमोहन सिंह हो जिनके टाइम पे मिस्टर संजय बारू थे या फिर उनसे पहले जितने भी प्राइम मिनिस्टर रहे हर प्राइम मिनिस्टर का एक मीडिया मैनेजर रहा है और वो मीडिया को मैनेज करते हैं। इतनी सीक्रेसी शायद से इसलिए है इसके अकॉर्डिंग बिकॉज़ ये जो काम है ये धमकियों और यू नो फेवर और पनिशमेंट्स के थ्रू चल रहा

21:29 है। इट्स नॉट लाइक कि प्राइम मिनिस्टर ऑफिस से एक प्रेस रिलीज आ रही है। एंड इट्स अप टू अ जर्नलिस्ट कि वो कैरी करना चाहते हैं कि नहीं। अगर वो नहीं कैरी करते तो बहुत सारे ऐसे पत्रकार हैं जिन्होंने मुझे कंफर्म किया कि उनकी नौकरी चली गई। तो एक डर का माहौल तो है। बहुत सारे डर का माहौल है और किसको इनाम मिलेगा, किसको सजा मिलेगी यह व्यक्ति तय करता है इस बुनियाद पर ये काम कितना तथाकथित रूप से अच्छा हुआ या नहीं। बिल्कुल आखिरी बात कितने पत्रकार आप कह रही हैं आपने बहुत से पत्रकारों से और संपादकों तक से आपने संपर्क स्थापित किया। जो लोग मिल चुके हैं हिरन जोशी से लेकिन उसके बावजूद भी वो अपना मुंह खोलने को तैयार नहीं है। बल्कि कुछ एक लोग तो ऐसे थे जिन्होंने पब्लिकली हिरन जोशी के बारे में पास्ट में बात की है। वह तब डर रहे थे स्टोरी के बारे में बात करने के लिए। तो वही मुझे भी

22:15 और डर आ रहा था क्योंकि कोई भी तैयार नहीं था बात करने के लिए। तो मुझे लगा कि मैं ऑलरेडी एक छोटी जर्नलिस्ट हूं और मेरे पास इतने रिसोर्सेज नहीं है। तो ना जाने क्या होगा। मुझे अभी भी डर है क्योंकि आई डोंट नो कि अभी तो राइट नाउ तो कोई रिपकशन नहीं हुआ। हो सकता है फ्यूचर में जब उनको मौका मिले तो तब हो। तो मतलब एक डर तो रहता है और वही डर मुझे लगता है कि बाकी एडिटर्स को और बाकी लोगों को भी डराता होगा। और मैंने इंडस्ट्री में बहुत बड़े-बड़े लोगों से बात की, एडिटर्स से बात की, काफी फेमस जर्नलिस्ट से बात की। सबका एक यही जवाब था कि हमने हिरन जोशी के बारे में सुना ही नहीं है। हम हिरन जोशी के बारे में बात नहीं करना चाहते। हम हिरन जोशी का नाम तक नहीं लेना चाहते। एक पत्रकार थे जो काफी उन्होंने बस दो शब्द दो शब्द बोले मुझसे

23:00 कि हां मैं उनसे मिला हूं और उनसे काफी बार बात की है। बट प्लीज मेरा नाम मत लीजिएगा आप इसमें। तो एक भय तो आई थिंक यू नो बिकॉज़ कोई नाम नहीं लेता उनका। कोई मीडिया हाउस में कोई मतलब ओनली इंडिपेंडेंट मीडिया हाउस। आई थिंक न्यूज़ ल्ड्री ने एक स्टोरी किया है हिरन जोशी के ऊपर और नेशनल हराल ने एक स्टोरी किया है हिरन जोशी के ऊपर उसके अलावा वायर है जिन्होंने एक स्टोरी किया है उसके अलावा कोई भी मीडिया हाउस नहीं है जो कर रहे है इनफ बहुत सारे मीडिया पर्संस है जो मैं जानती हूं जिनको हिरन जोशी काफी हरास कर रहे हैं जिनको यू नो टैक्स रेट से लेकर काफी ज्यादा प्रॉब्लम आ रही है। इवन दे आर अफ्रेड टू टॉक अबाउट हिम। मैं आपकी हिम्मत की दाद देती हूं सृष्टि। अपनी कहानी पर आप बने रहिए और जो खबरें आगे होंगी वो आप तक लेते रहेंगे और आपको हौसला और हिम्मत

23:46 हारने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। आपने बेहतरीन यह कहानी पूरी लिखी है। इतनी मेहनत करके लिखी है। इतना दिन लगा के लिखी है। आपने जब यह खबर ब्रेक हो रही थी तब ऐसी कोई त्वरित जो है टिप्पणी नहीं थी कि आपने कोई नीर का आप पर रिएक्शन था और आपने ऐसा कर दिया। बहुत-बहुत शुक्रिया। द वायर के और वीडियोस देखने के लिए सब्सक्राइब करें और बेल आइकन पर क्लिक करें। स्वतंत्र पत्रकारिता की आर्थिक मदद करने के लिए डिस्क्रिप्शन में दिए गए लिंक पर जाएं और अपनी राशि चुें।

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