Modi के बाद Yogi या Shah? क्या UP जीतते ही तय हो जाएगा PM का उत्तराधिकारी? | Khari Khari

简要总结

本视频讨论了印度政治中正在发生的权力斗争,尤其是在纳伦德拉·莫迪之后的潜在继任者之争。主要讨论了以下几个关键点:

  • 莫迪之后的权力继承之争:分析了阿米特·沙阿、约吉·阿迪蒂亚纳特和德文德拉·法德纳维斯之间的竞争。
  • 约吉与商羯罗acharya的争议:探讨了这一事件如何被利用为削弱约吉政治地位的催化剂。
  • 约吉的崛起对国家的影响:评估了约吉的崛起对印度教民族主义、社群和谐以及与邻国关系的影响。

介绍

节目介绍,讨论印度政坛在纳伦德拉·莫迪之后的权力继承问题,指出这种斗争在任何政治组织中都很常见,但常常被掩盖。目前,阿米特·沙阿、约吉·阿迪蒂亚纳特和德文德拉·法德纳维斯被认为是潜在的竞争者。

商羯罗acharya争议与约吉的处境

讨论了商羯罗acharya与约吉之间的争议,以及这一事件如何被视为中央政府或莫迪周边人士削弱约吉影响力的机会。 केशव·普拉萨德·毛里亚的言论被解读为中央政府对约吉不满的信号。这场争议被视为是权力斗争中的一个催化剂,类似于发酵过程中的“酵母”。

潜在的领导人公投

设想了一种假设情境,如果需要在2029年选出莫迪的继任者,约吉·阿迪蒂亚纳特作为一个印度教面孔,与一个更倾向于行政管理或莫迪偏好的人选之间进行选择,民众会支持谁。讨论还提到,2027年北方邦的选举可能被视为对约吉领导能力的一次考验。

媒体的角色与公众认知

分析了媒体对约吉的两种不同态度:主流媒体普遍对约吉持批评态度,而一些YouTube频道则在讨论莫迪是否希望通过削弱约吉来巩固自己的权力,或者约吉是否因为其强大的印度教背景而受到威胁。商羯罗acharya的事件被视为一个机会,可以质疑约吉的印度教领导地位。

约吉的崛起对国家的影响

探讨了约吉变得更加强大的潜在影响,包括国家是否会接受他,以及他所代表的政府模式是否会扩展到全国。讨论还关注了约吉的崛起对社群和谐、少数族裔以及印度在国际上的形象可能产生的影响。

约吉与莫迪的比较

将约吉与莫迪在印度教民族主义和少数族裔边缘化方面的表现进行了比较,认为约吉在这方面超越了莫迪在古吉拉特邦的时期。尽管约吉在印度教领导人中拥有较高的接受度,但在人民中并不一定如此,因为他缺乏像莫迪那样在发展方面的突出成就。

北方邦的犯罪数据

引用了北方邦政府的数据,显示在过去六年中有超过10,000起警察遭遇事件,以及国家犯罪记录局2023年的报告,该报告显示北方邦在谋杀和绑架案件中位居全国前列,这与古吉拉特邦的情况形成对比。

对莫迪和中央政府的建议

提出,如果莫迪希望阻止约吉进一步崛起,因为他代表了一种新的、更严厉的印度教民族主义,那么莫迪或中央政府应该支持削弱约吉的努力。还讨论了约吉是否应该为了国家利益而辞职,或者他是否应该意识到自己在印度教方面的局限性。

约吉的挑战与穆斯林人口

指出,即使约吉下台,莫迪面临的挑战也不会结束。讨论了北方邦穆斯林人口的舒适度问题,以及他们对选举结果的影响。

约吉对尼泊尔和国际关系的影响

分析了约吉的崛起可能对尼泊尔产生的不稳定影响,因为尼泊尔曾经是一个印度教王国,并且与约吉的Gorakhnath मठ有联系。此外,还讨论了约吉对周边穆斯林国家以及穆斯林民族主义崛起可能产生的影响。

结论

总结指出,如果53岁的约吉成为 बीजेपी的领导人并接替莫迪,将对 बीजेपी和整个国家构成长期挑战。建议在评估约吉的影响时,应排除同情因素,而应从逻辑角度考虑其对国家和社群和谐的潜在影响。

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文字稿

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0:10 नमस्कार मैं हूं आशुतोष और आप देख रहे हैं सत्य हिंदी। सत्य हिंदी के विशेष कार्यक्रम श्रवण गर्ग की खरीखरी में आपका स्वागत है। यह हमारा वो कार्यक्रम है जिसमें देश के जानेमाने पत्रकार संपादक श्रवण गर्ग जी अपनी तीखी टिप्पणी करते हैं मौजूदा राजनीतिक माहौल पर और उनकी तीखी टिप्पणियों से ना तो सत्ता पक्ष बचता है ना विपक्ष और दोनों ही तिलमिला के रह जाते हैं। आज फिर होंगे उनसे मुखातिब। लेकिन उसके पहले एक छोटी सी अपील सत्य हिंदी ईमानदार पत्रकारिता की एक ईमानदार कोशिश है। हमें किसी से कोई स्पोंसरशिप नहीं मिलती है। वरना हम लेना ही चाहते हैं। इसलिए हमारा भरोसा हमारे दर्शकों पर है। हम आपसे गुजारिश करना चाहते हैं कि आप सत्य हिंदी के सदस्यता अभियान के सदस्य बने। यानी ज्यादा से ज्यादा संख्या में सत्य हिंदी के सदस्य बने और हमारी मदद करें जिससे ईमानदार पत्रकारिता मजबूत हो

0:57 और ज्यादा लोगों तक पहुंचे। और अब बात करते हैं हम श्रवण जी से। दरअसल इस वक्त एक लड़ाई जो पर्दे के पीछे बहुत तेजी के साथ लड़ी जा रही है वो है नरेंद्र मोदी के बाद के उत्तराधिकार की लड़ाई। हर राजनीति में ऐसा होता है। हर संगठन में ऐसा होता है। हर पार्टी में ऐसा होता है और हर सरकार में ऐसा। इसलिए इसमें कुछ भी नया नहीं है। लेकिन नया ये है कि इसको बार-बार छुपाने की कोशिश की जाती है। इसको बार-बार दबाने की कोशिश की जाती है। और इस वक्त जो चर्चा पर्दे के पीछे बहुत गम है राजनीति के गलियारों में शायद आप हर किसी से सुनेंगे वो चर्चा इसी बात को लेकर ये है कि उत्तराधिकार की इस लड़ाई में कौन आगे? अमित शाह, योगी आदित्यनाथ या फिर देवेंद्र फडनवीस

1:43 जो योगी आदित्यनाथ के समर्थक है वो उनके दावे को मजबूत मानते हैं। जो अमित शाह के समर्थक है वो उनके दावे को मजबूत मानते हैं और देवेंद्र फडनवीस अभी इस लड़ाई में जुड़े हैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री होने के बाद। ऐसे प्रश्न उठता है कि अमित शाह या फिर योगी आदित्यनाथ किसकी जीत को कैसे लिया जाएगा और कौन वाकई में जीतेगा? जानेंगे जी से नहीं मैं तो कोई बता नहीं सकता कौन जीतेगा मैं कोई भविष्यवक्ता भी नहीं हूं शंकराचार्य अभी इस समय पूरे एपिसोड को लेकर योगी जी को लेकर

2:30 दो चीजें चल रही है। एक तो शंकराचार्य जी के अपमान का मामला तूल पकड़ रहा है। पकड़ चुका है या किसी लॉजिकल कंक्लूजन पर पहुंचने की तैयारी में है और वो यह है कि या तो माफी मांगे या फिर हटे अपने पद से तो योगी जी माफी तो मांगेंगे नहीं वो किसी चीज के लिए माफी नहीं मांगते हैं। मोदी जी भी नहीं मांगते हैं, योगी जी भी नहीं मानते हैं। अब वो हटेंगे कि नहीं? मतलब शंकराचार्य जी का आंदोलन क्या इतना ताकतवर हो सकता है क्या कि वो हटा दे। इसका दूसरा पक्ष यह है पूरे एपिसोड का कि यह जो लग रहा है कि केंद्र या दिल्ली या

3:19 मोदी जी के आसपास के लोगों ने भी अपना जो वजन है वो जो अभी शंकराचार्य जी की मांग है या उनका अपमान है उसके साथ जोड़ दिया है। जैसे केशव प्रसाद मौर्य ने जो कहा शंकराचार्य जी से प्रार्थना की कि अपमान छोड़कर अपमान की बात छोड़कर स्नान कर ले। इसका मतलब यह कि केंद्र में भी एक लॉबी योगी को इस मामले में डाउन करना चाहती है। हम इस पूरे एपिसोड को या पूरी बातचीत को उत्तराधिकार की लड़ाई के साथ जोड़कर देखना चाहते हैं। जो आपने कहा भूमिका में हम इसको

4:04 शंकराचार्य जी को एक निमित्त मानते हैं अब कि वो ये जो उत्तराधिकार की लड़ाई को सेटल करने में शंकराचार्य जी के एपिसोड की की एक भूमिका हो गई कैटलिस्ट जिसको कहते हैं वो हो गया जामन की भूमिका हो गई कि एक आ गया एक हाथ में एपिसोड योगी विरोधियों के हाथ में अब हम हम इसमें यह देखना चाहते हैं कि अगर कोई रेफरेंडम हो कोई ऐसा जनमत संग्रह हो चाहे यूपी में हो और देश में हो चाहे कि अगर मोदी जी का कोई उत्तराधिकारी चुना जाना हो बीजेपी में से अगर विपक्ष इतना

4:52 सक्षम अभी नहीं हो पाए 2029 तक कि मोदी जी को रिप्लेस कर दे या मोदी जी की जगह 2029 में कॉन्टेस्ट करने के लिए बीजेपी के फेस के तौर पर मान ले कि किसको होना चाहिए आगे या किसकी स्वीकारिता आगे होनी चाहिए। तो उसमें मान लीजिए कि दो चेहरे हैं। एक तो हिंदुत्व के चेहरे के तौर पर योगी जी हैं और एक एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर या मोदी जी की पसंद के तौर पर या उत्तराधिकारी के तौर पर या पिछले 30 35 40 सालों से जो आदमी मोदी जी के साथ लगा हुआ है वो अगर वो हो सकता है क्या जिसको जो पहली पसंद होंगे तो लोग किसके नाम पर

5:41 उंगली रखेंगे या रखना चाहिए तो हम जैसे उत्तर प्रदेश की जो पूरी जनता की नजरें हो सकता है एक हाइपोथेटिकल है कि इस बात पर हो कि 2027 का जो चुनाव है उत्तर प्रदेश में वो किसके नेतृत्व में लड़ा जाएगा बीजेपी की ओर से या इसको यू कहे कि शंकराचार्य जी की लड़ाई का क्या परिणाम निकलेगा क्योंकि हम यह मान के चल रहे हैं कि यह जो शंकराचार्य जी का मोर्चा है और दिल्ली का जो पिटिकल मोर्चा है यह दोनों जो है यह योगी के खिलाफ योगी जी को हटाने की मुहिम

6:26 में तब्दील हो चुके हैं और हम जैसा मैंने कहा कि मौर्य के का जो प्रवेश है वो एक इंडिकेटर है कि केंद्र का भी इस चीज को समर्थन है कि अब लोहा गर्म है और ऐसे में इस पूरे मामले को बढ़ाया जा सकता है कि आपके कारण हम बीजेपी का समर्थन खत्म हो रहा है। कम हो रहा है। हम हार सकते हैं। मीडिया में दो वर्ग है आशुतोष जी। एक वर्ग तो ये है जो मेन स्ट्रीम का मीडिया या गोदी मीडिया जो आप देख रहे हैं कि पूरी तरह योगी जी के खिलाफ चल रहा है। जो इस तरह की चीजें ढूंढढूंढ कर ला रहा है।

7:13 सल को भी ले आया और तमाम चीजें ले आया। ढूंढ ढूंढ कर ला रहा है। निश्चित रूप से यह मान सकते हैं कि उसको ऊपर का इशारा है या बीजेपी के मीडिया से द्वारा संचालित है। पर जो YouTube चैनल्स है जो वैकल्पिक मीडिया है उसमें बहस यह है कि मोदी जी अपने उत्तराधिकार की लड़ाई में योगी के चैलेंज को खत्म करना चाहते हैं या योगी हिंदुत्व के पैरोकार के रूप में इतने ताकतवर हो गए हैं हो रहे हैं कि उनको को

7:59 हटा वो हटा रहे हैं तो और वो चाहते हैं या दिल्ली चाहता है कि इससे अमित शाह की दावेदारी कमजोर होती है और शंकराचार्य जी का मामला जो है इस बीच में एक जैसे कह सकते हैं ना कि एक बहुत ही अवसर की तरह आ गया है हाथ में कि अरे बस अब तो एक बहाना मिल गया है। एक एक्सक्यूज की तरह आ गया है कि देखिए हिंदुत्व का जो प्रतीक है शंकराचार्य जो प्रतीक है वो आपके खिलाफ हो गए और आप हिंदुत्व की लड़ाई लड़ रहे हैं वो कमजोर है कमजोर है। हम इस चीज को उठाना चाहते हैं कि

8:50 योगी के पावरफुल होने से देश को क्या देश में स्वीकृति बनेगी कि नहीं? क्या देश को यह डर हो सकता है कि अभी जो यूपी है वो फिर देश हो जाएगा। मतलब जिस तरह का यूपी में एडमिनिस्ट्रेशन का या प्रशासन का या हिंदुत्व का या अल्पसंख्यक विरोधी आतंक है वो अगर मल्टीप्लाई होता है और मोदी योगी ताकतवर होते हैं। सशक्त उत्तराधिकार के रूप में बीजेपी में उभरते हैं और अपनी दावेदारी पेश करने में सफल हो जाते हैं। तो क्या देश उसको स्वीकार करेगा

9:38 क्या देश के लिए वो देश की स्वीकृति को प्राप्त कर सकेंगे क्या और क्या देश में कम्युनल हार्मोनी या सांप्रदायिक सौहार्द के लिए योगी की ताकत या योगी का मजबूत होना मोदी की तुलना में ज्यादा खतरनाक तो नहीं होगा या उसको मोदी के कारण जो एक जो कम्युनल पोलराइजेशन हुआ है देश में या हिंदू सांप्रदायिकता को जो बल मिला है वो कमजोर होगी कि मजबूत होगी

10:24 जो मुझे लग रहा है जो देख रहे हैं कि जो योगी जी ने शुरुआत की अगर जिन लोगों जो लोग गुजरात से मोदी जी को फॉलो फॉलो कर रहे हैं या देख रहे हैं। हमको यह लगता है कि योगी जी ने अपने छ साल के सात साल के या 17 से लगा ले तो आठ नौ साल के कार्यकाल में हिंदू सांप्रदायिकता के मामले में या हिंदू पोलराइजेशन के मामले में या माइनॉरिटी एलिमिनेशन के मामले में मोदी जी को पीछे छोड़ दिया है गुजरात के मैं जो चीज थी तो उस हिसाब से देख तो वह

11:11 हिंदुत्व के बड़े नेता के रूप में उनकी स्वीकारिता होनी चाहिए बीजेपी में और आरएसएस में वो नहीं है। इसका कारण ये है कि मोदी जी ने पोस्ट गोदरा जो वहां हुआ गुजरात में उसके अलावा जो एक काम किया या हो गया या वहां के पूंजीपतियों ने जिस तरह से उनको सपोर्ट किया कि डेवलपमेंट के एक रोल मॉडल के तौर पर भी पैरेलली मोदी जी को प्रोजेक्ट किया तो उनका जो कम्युनल चेहरा था वो पीछे हट गया और रोल मॉडल सामने आ गया। योगी जी के मामले में इस तरह की कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है कि योगी जी के जमाने में यूपी एक विकास के या

11:58 ग्रोथ के रोल मॉडल के तौर पर देश में पेश हुआ हो। जैसे योगी सरकार का दावा है कि उनके साम्राज उनके शासनकाल में पिछले छ सालों में मतलब छ सालों में शुरू के छ सालों में 10,000 से ज्यादा एनकाउंटर्स हुए हैं। ये हाईएस्ट है। देश में इतने एनकाउंटर्स मतलब आजादी के बाद कहीं किसी राज्य में नहीं हुए। तो वो उसको एक अचीवमेंट के तौर पर पेश किया जाता है। जिसमें पुलिस और अपराधियों के बीच में पिछले छ सालों में 10,000 एनकाउंटर्स। अब आप सोचिए

12:44 कि 10,000 एनकाउंटर्स किसको कहते हैं? हालांकि उसमें मरने वालों की संख्या 63 है पर एनकाउंटर्स की संख्या 10,000 है। दूसरी चीज यह कि नेशनल क्राइम ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट कह रहा हूं मैं 23 की तीन साल पहले की हत्याओं के मामले में और अपहरण के मामले में यूपी देश में सबसे आगे है। और अगर आप आंकड़े देख कि हत्याओं के मामले में 3206 हत्याएं हुई है और अपहरण के भी मामलों में सबसे आगे है और उसके बाद जो नंबर आता है वो बिहार का आता है देश में।

13:30 अब इसमें गुजरात नहीं है। मतलब हम जिस चीज को हाईलाइट करना चाहते हैं या बीजेपी का और कोई राज्य नहीं है। नजदीक भी नहीं है। मतलब जैसे बलात्कार वगैरह के मामलों में और बच्चों के साथ उसमें मान लीजिए मध्य प्रदेश काफी तरक्की की है तो मुद्दा यह है कि अगर मोदी जी योगी को डिस्टेबलाइज करना हो कि योगी को और आगे नहीं बढ़ने देना चाहिए। इसलिए कि उनका उदय भारत की राष्ट्रीय राजनीति में एक नए किस्म के

14:19 पोलराइजेशन को या हिंदुत्व को या क्रूर हिंदुत्व को या क्रूर हिंदुत्व को बढ़ावा देगा। तो क्या इस में मोदी के या केंद्र के या शंकराचार्यों के एफर्ट्स को सपोर्ट नहीं किया जाना चाहिए कि योगी का जो काम है या योगी का जो योगदान है योगी प्रशासन का अब वो खत्म हो गया। अब उनको हटा दिया जाना चाहिए। व्यापक राष्ट्रीय हित में या योगी जी खुद यह मान ले कि वह अब हिंदुत्व के फ्रंट पर भी उनकी अस्वीकारिता सामने आई है। इसलिए उनको हट जाना चाहिए। दूसरा यह

15:05 कि योगी के हट जाने से मोदी को चुनौती खत्म हो जाएगी। ऐसा भी नहीं मान लेना चाहिए। एक जो अजमशन है कि योगी इस द स्ट्रांगेस्ट कंटेंडर टू द पोस्ट ऑफ प्राइम मिनिस्टर चैलेंज टू मोदी तो ये जो डर है ये भी निकल जाना चाहिए ये ये एक आर्टिफिशियल है जिसको ये मान के चलना है कि अरे उनके अलावा तो कोई है ही नहीं ऐसा नहीं है दूसरा ये है कि जो मुस्लिम्स है वो उनको वो किससे ज्यादा राहत वो महसूस करेंगे एक यूपी के जो एक बड़ी संख्या में

15:53 यूपी में मुस्लिम पापुलेशन है जो डिसाइसिव रहती है और इस चुनाव में बहुत डिसाइसिव रहने वाली है तो उनका उसका कंफर्ट लेवल क्या योगी से बनेगा क्या या इस समय इस बार जो पोलराइजेशन होगा वो बीजेपी को कितना कितना फायदा करेगा या कितना नुकसान करेगा। दूसरा ये कि योगी का पावरफुल होना जो एक और एंगल है वो राष्ट्रीय स्तर पर पावरफुल होना हमारे पड़ोसी देश नेपाल को डीस्टेबलाइज करता है। जहां 80% जो है आबादी जो है हिस्टोरिकली मतलब जिसको मानते

16:40 हैं ऐतिहासिक रूप से दुनिया का एक हिंदू राष्ट्र या हिंदू किंगडम जिसको मानते रहे हैं। 2015 में हालांकि नेपाल ने अपने आप को एक सेुलर कॉन्स्टिट्यूशनली सेुलर स्टेट घोषित कर दिया और उसका जो भूमिका 2008 में बन चुकी थी। पर हाल में जो बन रहा है वहां कि जो मोनार्की है वह वापस आने की कोशिश में है और उसका जो अलाइनमेंट है या उनकी जो प्रतिबद्धता है गोरखपुर की गोरक्षपीठ से है और आपने देखा कि वहां जो प्रदर्शन हुए उसमें योगी के पोस्टर लगाए गए। तो एक जो फैक्टर है कि

17:29 नेपाल को डीस्टेबलाइज कर सकता है। योगी का होना पड़ोस को डीस्टेबलाइज कर सकता है। पड़ोस के मुस्लिम राष्ट्रों को और ज्यादा होस्टाइल बना सकता है हमारे आसपास के रीजन में। और जो मैं एक चीज जो मुझे लगा कि जो मुस्लिम राष्ट्रवाद का उदय है जो हम हाल के दिनों में देख रहे हैं वो गुजरात के बाद उतना नहीं हुआ जितना यूपी के बाद हुआ। मतलब जो पोलराइजेशन हम अभी हिंदू पोलराइजेशन की बात कर रहे। मैं मुस्लिम पोलराइजेशन की मुस्लिम राष्ट्रवाद की बात कर रहा हूं। मुस्लिमों में जो रेडिकलिज्म आया है उसका जो एक बुनियादी

18:15 कारण मैं मानता हूं उसको उत्तर प्रदेश का मानता हूं। दूसरा एक और आखरी मतल्यकि टाइम कम है इसलिए मैं अपनी बात को खत्म करता हूं कि 53 साल के योगी अगर बीजेपी के नेता के रूप में उभरते हैं और मोदी के सक्सेसर के रूप में आते हैं तो एक आगे के लिए बहुत लंबा चैलेंज बीजेपी में भी पैदा हो जाएगा और देश में भी पैदा हो जाएगा। तो हम अपनी बात को कंक्लूड करते हैं। टाइम होता तो और बात करते हैं। पर कि हम एक जो मुद्दा है कि योगी

19:03 को लेकर जो शंकराचार्य वाला फैक्टर है उससे अलग जो उत्तराधिकार वाला फैक्टर है उसमें जो सिंपथी कुछ योगी के साथ जुड़ रही है कि मोदी जी खत्म करना चाहते हैं। उसको हमको थोड़ा सा माइनस कर देना चाहिए और हमको यह देखना चाहिए लॉजिकली कि योगी का ताकतवर होना देश के लिए या उत्तर प्रदेश के लिए कितना फायदे का होगा या कितना लाभप्रद होगा या कम्युनल हार्मोनी के लिहाज से या पोलराइजेशन के लिहाज से तो मैं इस पूरे एपिसोड को मैं एक नए एंगल से मैंने पेश करने की कोशिश की। सब्जेक्ट बहुत बड़ा है इस पर फिर और कभी बात करेंगे। धन्यवाद सर। थैंक यू।

19:49 थैंक यू। [संगीत]

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