Nitin Nabin as BJP’s National Executive President : क्या RSS की नहीं चली? | बिहार राजनीति विश्लेषण

简要总结

该视频讨论了尼廷·纳宾被任命为印度人民党(BJP)全国执行主席一事,并探讨了这一任命背后的原因和影响。主要观点包括:

  • 尼廷·纳宾的背景和政治生涯,强调了他与纳伦德拉·莫迪的联系。
  • 印度人民党选择领导人的方式,以及人民党与印度民族志愿队(RSS)之间的关系。
  • 这一任命对印度人民党未来发展,以及对其他政治力量的影响。

尼廷·纳宾被任命为印度人民党全国执行主席

视频介绍了比哈尔邦政府部长尼廷·纳宾被任命为印度人民党全国执行主席,立即生效。这一任命令人惊讶,引发了关于印度民族志愿队(RSS)是否认可纳宾的任命,或者印度人民党是否绕过印度民族志愿队(RSS)自行做出决定的疑问。

尼廷·纳宾的背景和政治生涯

尼廷·纳宾于1980年5月23日出生,现年45岁,是已故印度人民党领导人纳温·基肖尔·普拉萨德·辛哈之子,来自卡亚斯塔社区。他的政治生涯始于印度民族志愿队(RSS)的学生组织——全印度学生联合会(ABVP)。之后,他在印度人民党青年团中建立了强大的影响力,并担任比哈尔邦分会主席。目前,他是比哈尔邦政府的道路建设部长,此前曾担任城市发展、住房和法律部长。纳宾曾在恰蒂斯加尔邦担任选举负责人,并在锡金邦担任组织职务。自2010年以来,他一直是巴特那邦基普尔选区的议员。

任命的宣布和引发的疑问

印度人民党全国秘书长阿伦·辛格发布了一封信,宣布党的议会委员会已任命尼廷·纳宾为全国执行主席。然而,这一宣布让许多人感到惊讶。印度人民党现任主席JP·纳达的任期已于大约三年前结束,之后他一直在获得延期。这是印度人民党历史上第一次出现主席任期结束后这么久仍未选出新主席的情况。因此,许多人质疑印度人民党为何未能选出自己的主席。

专家观点:年龄、资历和印度人民党与印度民族志愿队(RSS)的关系

资深记者纳奇凯塔·纳拉扬表示,印度人民党总是做出令人惊讶的决定。他认为,印度人民党可能会利用尼廷·纳宾的年龄作为优势,声称在一个年轻人的国家里,选择一位年轻的面孔是为了更好地与年轻人建立联系。纳奇凯塔·纳拉扬还认为,尼廷·纳宾被视为纳伦德拉·莫迪的亲信。他回忆起2010年纳伦德拉·莫迪访问巴特那时,比哈尔邦首席部长尼蒂什·库马尔对报纸上刊登的一则广告表示不满,该广告刊登了两名议员尼廷·纳宾和桑吉夫·乔拉斯亚的照片。尼蒂什·库马尔取消了为印度人民党领导人准备的晚宴。纳奇凯塔·纳拉扬还表示,任命尼廷·纳宾为党的执行主席表明,纳伦德拉·莫迪和阿米特·沙阿在党的事务中比印度民族志愿队(RSS)拥有更强大的影响力。

印度人民党的未来领导和对卡亚斯塔社区的影响

资深记者布里杰什·舒克拉表示,当尼廷·加德卡里被任命为印度人民党主席时,他在国家政治中并没有扮演太多的角色。现在,印度人民党正在为未来培养自己的领导人,而国大党在这方面已经远远落后。虽然尼廷·加德卡里被认为是印度民族志愿队(RSS)的亲信,但尼廷·纳宾与印度民族志愿队(RSS)的关系并不密切。布里杰什·舒克拉认为,尼廷·加德卡里时代是印度人民党中印度民族志愿队(RSS)亲信的时代,而现在一个新的时代已经到来,是纳伦德拉·莫迪和阿米特·沙阿亲信的时代。他还表示,党内还会有很多改组,因此一位卡亚斯塔人被任命为主席。卡亚斯塔人是印度人民党的坚定选民,他们经常质疑卡亚斯塔人是否只是为了投票。他认为,印度人民党目前将尼廷·纳宾作为执行主席进行考察,并在一个半月后完全确定后,宣布他为常任主席。

对尼廷·纳宾的期望和挑战

印度人民党议员兼比哈尔邦印度人民党前主席桑杰·贾斯瓦尔表示,尼廷·纳宾已经担任了五届议员,并且是恰蒂斯加尔邦的负责人,在那里印度人民党取得了巨大的胜利。桑杰进一步表示,印度人民党按照主席制度运作。所有领导人和工作人员都站在当选主席的身后。桑杰认为,尼廷·纳宾与比哈尔邦的每一位印度人民党工作人员都有直接联系,这就是为什么第一次有人从比哈尔邦被任命为党的执行主席,这对比哈尔邦印度人民党来说是一件非常自豪的事情。

印度人民党选择领导人的程序和未来展望

根据印度人民党的章程,只有至少担任党成员15年的人才能成为党的全国主席。从这个意义上说,任命尼廷·纳宾为执行主席是完全正确的,没有任何问题。印度人民党从未对主席职位进行投票。党总是努力让印度人民党和印度民族志愿队(RSS)的人坐下来讨论,并根据党的需要选择主席。近年来,印度人民党赋予了许多通常不被讨论的面孔以重要的责任。中央邦、恰蒂斯加尔邦、奥里萨邦、拉贾斯坦邦和德里的首席部长就是这样的例子。因此,对于印度人民党来说,新主席的职位非常重要,特别是考虑到明年西孟加拉邦的选举以及2027年北方邦的议会选举,这一责任变得更加重大,对纳宾来说也是一个挑战。总而言之,知情人士认为,在赋予纳宾如此重要的职位方面,最大的作用是莫迪和沙阿,因为纳宾符合党的资格,但在印度民族志愿队(RSS)的标准中并不像印度民族志愿队(RSS)希望的那样精确。

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文字稿

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0:01 नमस्कार आप देख रहे हैं सत्य हिंदी और मैं हूं आपके साथ कृति सिंह। बिहार सरकार के मंत्री नितिन नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है। उनकी नियुक्ति तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएगी। इस नियुक्ति ने सभी को चौंका दिया है और लोगों के मन में एक सवाल बार-बार आ रहा है कि क्या आरएसएस भी नवीन के नाम को लेकर मंजूर हुई थी या बीजेपी ने खुद ही नबीन के नाम पर मोहर लगा दी और आरएसएस को दरकिनार कर दिया। चलिए इस सवाल का जवाब ढूंढते हैं मौजूदा समीकरण से। लेकिन पहले नितिन नबीन के बारे में जान लीजिए। नितिन नबीन का जन्म 23 मई 1980 को हुआ था। यानी अभी उनकी उम्र सिर्फ 45 साल है। नितिन नबीन दिवंगत भाजपा नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं और वे कायस्थ समुदाय से आते हैं। उनकी राजनीतिक शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक

0:47 संघ की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी कि एबीवीपी से हुई। बाद में उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा में मजबूत पकड़ बनाई और बिहार इकाई के अध्यक्ष भी रहे। वर्तमान में वे बिहार सरकार में सड़क निर्माण मंत्री हैं। इसके पहले वे शहरी विकास और आवास तथा विधि मंत्री भी रह चुके हैं। नवीन ने छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी निभाई जहां 2023 में भाजपा को बड़ी जीत मिली। इसके अलावा उन्होंने सिक्किम में भी संगठनात्मक भूमिका संभाली। चुनावी रिकॉर्ड की बात करें तो नवीन पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से 2010 से लगातार विधायक हैं। 2006 में पिता की मौत के बाद हुए उपचुनाव में पटना पश्चिम से जीत हासिल की थी। नितिन नबीन साल 2008 में भारतीय जनता युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्य सममिति के सदस्य भी रह चुके हैं। हालिया बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने

1:34 आरजेडी की रेखा कुमारी को हराया और 2020 में कांग्रेस के लव सिन्हा को मात दी थी। अब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक पत्र जारी कर बताया कि पार्टी के संसदीय बोर्ड ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है। हालांकि नितिन नबीन के नाम की घोषणा ने भी कई लोगों को हैरान कर दिया है। दरअसल बीजेपी के वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल करीब 3 साल पहले खत्म होने के बाद उन्हें लगातार एक्सटेंशन दिया गया है। बीजेपी के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी अध्यक्ष का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी इतने लंबे समय तक नया अध्यक्ष नहीं चुना गया। इसी वजह से कई लोगों ने पार्टी पर सवाल भी उठाए कि देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी अपने अध्यक्ष तक को क्यों नहीं चुन पा रही है? उस पर अब जब नबीन के नाम पर

2:19 मुर लगी है तो सवाल यह है कि क्या इस फैसले से आरएसएस में आरएसएस की कितनी भूमिका थी और नवीन की कम उम्र भी इस चर्चा का विषय बन रही है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता नारायण कहते हैं कि बीजेपी ने हमेशा ऐसे फैसले किए हैं जो लोगों को हैरान कर दें। जब जेपी नड्डा को अध्यक्ष बनाया गया था तब भी लोग उनकी वरिष्ठता पर चर्चा कर रहे थे। नचिकेता के मुताबिक बीजेपी नितिन नवीन की उम्र को ही ताकत बनाकर दिखा सकती है। पार्टी कह सकती है कि युवाओं के देश में युवाओं से बेहतर तालमेल के लिए एक युवा चेहरा चुना गया है। हालांकि वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता नारायण यह मानते हैं कि नितिन नवीन को नरेंद्र मोदी के करीबी के तौर पर देखा जा रहा है। वह एक घटना याद करते हैं। साल 2010 की बात है जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में

3:05 शामिल होने पटना आए थे। उस समय बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अखबारों में छपे एक विज्ञापन पर नाराजगी जताई थी। उस विज्ञापन में दो विधायकों नितिन नवीन और संजीव चौरसिया की तस्वीर छपवाई गई थी। नचिकेता कहते हैं कि विज्ञापन की तस्वीर के विरोध में नीतीश कुमार ने बीजेपी नेताओं के लिए रखा गया डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया था। यानी जब नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा तक नहीं थी, तब से ही वह नितिन नवीन मोदी के झुकाव वाले माने जाते थे। नचिकेता नारायण का यह भी कहना है कि नितिन नवीन को पार्टी का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने साफ दिखा दिया है कि पार्टी के मामले में वो आरएसएस के मुकाबले मजबूत पकड़ रखते हैं। क्योंकि संघ की ओर से तो लगातार यह कोशिश की जा रही थी कि किसी भी ऐसे नेता को यह पद मिले जो वैचारिक रूप से प्रतिबद्ध हो। वहीं वरिष्ठ पत्रकार बृजेश

3:52 शुक्ला कहते हैं कि जब नितिन गडकरी को बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया था तो उनकी राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा भूमिका नहीं थी। अब बीजेपी भविष्य के लिए अपना नेतृत्व तैयार कर रही है। जबकि कांग्रेस इससे काफी पीछे है। हालांकि नितिन गडकरी को आरएसएस का करीबी माना जाता था। जबकि नितिन नवीन की संघ से दूरी नहीं है। लेकिन उन्हें इतना करीबी भी नहीं माना जाता। बृजेश शुक्ला कहते हैं कि नितिन गडकरी का दौर बीजेपी में आरएसएस के करीबियों का दौर था और अब एक नया युग आ गया है। अब नरेंद्र मोदी और अमित शाह की करीबियों का दौर चल रहा है। बृजेश शुक्ला आगे कहते हैं कि पार्टी में अभी बहुत सारे फेरबदल होंगे। इसलिए एक कायस्त को अध्यक्ष बनाया गया है। यह लोग बीजेपी के पक्के वोटर हैं और अक्सर सवाल उठाते रहे हैं कि क्या कायस्त सिर्फ वोट देने के लिए हैं? उनका मानना है कि बीजेपी फिलहाल नितिन नबीन को वर्किंग प्रेसिडेंट के तौर पर परखेगी और डेढ़

4:39 महीने के बाद पूरी तरह पुख्ता होने पर उन्हें स्थाई अध्यक्ष घोषित कर देगी। यह सभी सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि एक युवा नेता के तौर पर नितिन नवीन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपनी भूमिका निभाएंगे कैसे? इस पर बीजेपी सांसद और बिहार बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष संजय जायसवाल ने बीबीसी से कहा कि आप उम्र की बात कर रहे हैं लेकिन नितिन नवीन पांच बार के विधायक हैं। वह छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी रह चुके हैं। जहां बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की थी। संजय ने आगे कहा कि बीजेपी अध्यक्षीय सिस्टम पर चलती है। जो अध्यक्ष बनता है उसके पीछे सारे नेता और कार्यकर्ता खड़े होते हैं। संजय का मानना है कि नितिन नवीन का बिहार के हर बीजेपी कार्यकर्ता से सीधा संपर्क है और यही वजह है कि पहली बार बिहार से किसी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है और यह बिहार बीजेपी के लिए बड़ी ही गर्व की बात है। दरअसल बीजेपी के संविधान के मुताबिक

5:26 पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष वही बन सकता है जो कम से कम 15 साल तक पार्टी का सदस्य रहा हो। इस लिहाज से नितिन नवीन को वर्किंग प्रेसिडेंट बनाना बिल्कुल सही है और इसमें कोई दिक्कत नहीं है। आपको बता दें कि बीजेपी में कभी अध्यक्ष पद के लिए वोटिंग नहीं होती। पार्टी की यह कोशिश रहती है कि बीजेपी और संघ के लोग आपस में बैठकर विचार विमर्श करें और पार्टी की जरूरत के हिसाब से अध्यक्ष का चयन करें। हाल के समय में बीजेपी ने कई ऐसे चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी दी है जिनकी चर्चा आमतौर पर नहीं रही। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्री ऐसा उदाहरण है। ऐसे में बीजेपी के लिए नए अध्यक्ष का पद बहुत अहम माना जा रहा है। खासकर अगले साल पश्चिम बंगाल और उसके बाद 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह जिम्मेदारी और भी बड़ी हो जाती है और नवीन के लिए एक चुनौती भी बन जाती है। कुल

6:11 मिलाकर जानकारों का मानना है कि नवीन को इतने बड़े पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने में सबसे बड़ी भूमिका मोदी और शाह की ही रही होगी क्योंकि नवीन पार्टी की योग्यताओं को तो पूरा करते हैं लेकिन आरएसएस के मापदंड में उतने सटीक नहीं बैठते जितना आरएसएस चाहती थी। नितिन नवीन पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके बताइए। साथ ही वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें और हां चैनल को सब्सक्राइब भी। फिलहाल के लिए इतना ही नमस्कार। अंडर सेक्शन कॉपीराइट 1976 क्रिटिस्म रिपोर्टिंग स्कॉलरशिप एंड रिसर्च यूज़ यूज़ परमिट बाय कॉपीराइट अदरवाइज बीन

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