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0:05 नमस्कार स्वागत है आपका पब्लिक इंडिया पर। मैं हूं नीलू व्यास। पता नहीं कितने लोगों ने देखा लेकिन एक एनजीओ द्वारा एक सर्वे कराया गया है और कल से वो सर्वे काफी वायरल हो रहा है और वो सर्वे है चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को बनाने के लिए कि 83% लोग चुनाव आयोग में विश्वास रखते हैं। उस एनजीओ द्वारा यह सर्वे करवाया गया है कि 44 सॉरी 84% लोग ईवीएम्स में यानी कि चुनावी मशीन में विश्वास रखते हैं और इस सर्वे को कराने वाला व्यक्ति पीएमओ का हिस्सा रह चुका है। मिस्टर बाला सुब्रमण्यम जिन्होंने मोदी जी के ऊपर एक किताब लिखी थी जिसका नाम था पावर विद इन। तब से लोग यह डिस्कस कर रहे हैं कि किसी
0:50 सर्वे हो गया। अखबार में छप गया और किसी ने यह नहीं कहा कि वह मोदी जी के करीबी ने यह सर्वे क्यों करवाया? तो सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव आयोग अपनी विश्वसनीयता बजाय अपने खुद बनाने के अब विश्वसनीयता के ऊपर सर्वे करवा रहा है। दूसरा इशू एसआईआर और वोटर डिलीशन से जुड़ा हुआ है कि किस तरीके से वोटों को काटा जा रहा है। कल आपने देखा हो जिसके ऊपर मैंने कार्यक्रम भी किया था कि एक गाजियाबाद का पुलिस का एसएचओ एक व्यक्ति के पीठ पर एक मशीन रखता है। वो मशीन नहीं बल्कि एक फोन था। उसको मूर्ख बनाने के लिए उसके पीठ पर एक फोन रखता है और कहता है कि यह मशीन आपकी नागरिकता चेक करेगी। यह अजीब सी चीजें देश में हो रही है। तो एसआईआर, वोटर डिलीशन ये तमाम मुद्दे इस समय है और यह मत भूलिए कि हमारी
1:37 इकॉनमी कहां पर है। बिल्कुल कूड़ेदान में डाल दी है मोदी सरकार ने हमारी इकॉनमी को जहां पर खुद आईएमएफ ने सी ग्रेड सी ग्रेड दिया है हमारी इकॉनमी को। तो आज इन सारे मुद्दों पर हमारे साथ बातचीत करने के लिए डॉक्टर परकला प्रभाकर है जो कि देश के जानेमाने इंडियन इकोनॉमिस्ट तो है ही लेकिन साथ में सोशल साइंटिस्ट है पिटिकल कमेंटेटर ऑथर और कॉलम थैंक यू सो मच डॉक्टर परकला फॉर जॉइनिंग ऑन पब्लिक इंडिया और मैं ऑलवेज अ प्लेजर सर टू हैव यू ऑन माय प्रोग्राम और मेरा पहला सवाल ये ग्राम एनजीओ का जो सर्वे आया है बड़ा अजीब सा है आज आज तक मैंने कम से कम अपनी जिंदगी में हो सकता है आपने और लंबी जिंदगी मेरे से देखी है। क्या आपने अभी तक चुनाव आयोग की
2:25 विश्वसनीयता पर कभी सर्वे सुना कि सर्वे करवाया जा रहा है? चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को बताने के लिए? जी चुनाव आयोग के विश्वसनीयता के बारे में चुनाव आयोग खुद एक सर्वे कमीशन करना बहुत ही अजीब बात है। देखिए कुछ महीनों पहले अ सीएसडीएस ने एक चुनाव एक चुनाव आयोग के बारे में एक सर्वे किया था लोक नीति सीएसडीएस ने उसमें यह बाहर आया कि लगभग 30% लोग सात आठ राज्यों में जो जहां सर्वे हुआ था
3:11 उन्होंने 30% लोग चुनाव आयोग के विश्व विश्वसनीयता पर बहुत ही बहुत ही गहरी शक व्यक्त किया था और अब ये आया है। अब अब ये देखिए इसका इसका इसका इसका बैकग्राउंड देखिए। ये ये किया था एक एनजीओ ने। उसका फाउंडर था। उन्होंने प्राइम मिनिस्टर ऑफिस में काम करता था। अभी शायद कर रहे हैं पता नहीं और प्रधानमंत्री के बारे में बहुत ही बहुत ही क्या बोलते हैं प्रज़ सो मच ऑफ प्रज़ के साथ
3:56 एक किताब भी लिखा था। एक दूसरा यह है कि और अह समझने की बात यह है कि डेक्कन हेरल्ड एक बेंगलुरु में पब्लिश होने वाली अंग्रेजी न्यूज़पेपर ये अभी क्यों इसको पब्लिश किया था? क्योंकि ये सर्वे नया-नया सर्वे नहीं है। ताजा सर्वे नहीं है ये। ये बहुत बहुत पहले ये अगस्त से कुछ महीनों पहले मार्च शायद मार्च महीने में इसको किया था और इसको खुद इलेक्शन कमीशन ने कमीशन किया था एक और ये
4:41 ये एसआईआर के बारे में और महादेवपुरा के बारे में और हरियाणा के बारे में और बहुत सारे ये वोट चोरी के मुद्दे यह सब उठाने से मच बिफोर बहुत ही पहले इसको किया था। अभी इसको आप अंग्रेजी में क्या हिंदी में क्या बोलते हैं आपको मेरे को मालूम नहीं है। बहुत ही डेस्परेट अटेम्प्ट है कि कुछ तो यू नो अह चुनाव आयोग का विश्वसनीयता अच्छा है। ऐसी लोगों में एक ओपिनियन फैलाने के लिए डेस्पिरेट मूव है ये। इसको ये ये सर्वे को आप और और देखिए और देखिए थोड़ा मेथोलॉजी भी मेथोलॉजी भी जानना चाहिए एक कास्टिट्यूएंसी में सिर्फ
5:31 50 लोगों का ये सर्वे किया था वो 50 लोग कैसा कैसा चुन लिया वो स्टिफाइड सैंपलिंग है वो कुछ मेथडोलॉजी नहीं है ऐसी वो वो जान ये क्या बोलते हैं किसी को किसी 50 लोगों को और शायद जिन जिन लोगों ने उनका जो जो मन तय किया है ऐसी जवाब देने वालों को चुन लिया है तो इसको आप आप सीरियसली मत लीजिए ये एक पीआर एक्सरसाइज है तो ऐसी ऐसे आए आते रहेंगे छोड़ दीजिए इसको नहीं लेकिन पर सर एक चीज और भी है कि एक पीएमओ का अधिकारी अगर इस तरीके का सर्वे करवाता है जिसको डेकेन हेरल्ड जैसा
6:17 विश्वसनीय अखबार छापता है तो यह क्या कहेंगे? यह कोई स्वीट डील है क्या दोनों के बीच में? मैं मैं बहुत शॉक हो गया हूं नीष जी क्योंकि डेकन क्रॉनिकल के डेकन हेरल्ड के बारे में मेरा मेरा ओपिनियन बहुत बहुत ही हाई ओपिनियन था। बिल्कुल तो मैं क्या है ये? ये क्या हो गया? डेकन हेरल्ड को क्या हो गया? इसका मतलब डेक्कन हेरल्ड इतना दबाव में आ गया क्या? डेक्कन हेरल्ड भी इतना दबाव में आ गया क्या? इसका मतलब ये देखिए इसको आप दो तरीके से देख सकते हैं। एक डेक्कन हेरल्ड का डेक्कन हेरल्ड का ऊपर
7:05 क्या ऐसी दबाव है कि वो ऐसी चीजें पब्लिश किए थे। एक और आप सरकार से सरकार और चुनाव आयोग के दृष्टिकोण से देखिए वो इतना डिस्पेरेट हो गया क्या कि इतना दबाव डाल के एक एक ऑथेंटिक क्रेडिबल न्यूज़पेपर का क्रेडिबिलिटी में कॉम्प्रोमाइज करने के लिए भी हेजिटेट नहीं कर रहे हैं। नहीं लेकिन अजीब सी बात है। आज तक आपने खुद भी कहा कि बहुत अजीब है। आज तक कभी भी इस चुनाव आयोग को लेकर इस तरीके का सर्वे नहीं हुआ है। अब आपको क्या लगता है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो लोग सुप्रीम
7:50 कोर्ट की बात करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में लोगों की अब आस्था नहीं है। बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा अदालतों में लोगों का विश्वास नहीं है। तो अब इसी तरीके से क्या स्पों्सर्ड सर्वे सारे इंस्टिटशंस का करवाया जाएगा? क्योंकि सारे इंस्टिटशंस अपनी विश्वसनीयता खो बैठे हैं। तो क्या आने वाले दिनों में यही दिन अब बचे हैं देखने को कि हर संस्थान अपने विश्वसनीयता के लिए एक मैन्युफैक्चर सर्वे करवाएगा और कहेगा देखिए हम तो बिल्कुल ठीक है और जनता में हमारा विश्वास बना हुआ है। जी मेरे को लगता है ये शुरुआत है। इतना डिस्प्रेट हो गया है कि अह उनका क्रेडिबिलिटी अह शोर अप करने के लिए, उनका क्रेडिबिलिटी अहम लोगों के सामने पेश करने के लिए ऐसी बहुत चीजें हो रहे हैं। देखिए मेरे को याद है अह 2001 2001 में चुनाव आयोग का जब 50थ
8:40 एनिवर्सरी था। उस समय उस उस समय का राष्ट्रपति जी के आर नारायण साहब ने एक भाषण में चुनाव आयोग का अधिवेशन का एक भाषण में किया ये ये बताया था कि आज के दिन में जुडिशरी से ज्यादा विश्वसनीयता चुनाव आयोग का है 2001 में और अभी हाल में हुआ ये नी लोक रीति और सीएसडीएस का इसमें ये निकल आया कि 30% से ज्यादा लोग ऐसा मान रहा है कि चुनाव आयोग पूरा केंद्र सरकार के कब्जे में आ
9:27 गया है। उनके उनके ही एक हिस्सा बन गया। ऐसा ऐसा ओपिनियन व्यक्त किया है। बिल्कुल। एक और चीज जो बड़ी हास्यास्पद सी थी। कल हमने देखा कि गाजियाबाद का एक एसएओ है अजय शर्मा जिसका नाम था और वो स्लम ज्वेलर्स के बीच में जाते हैं और कहते हैं कि अरे ये तो मशीन है जो बता रही है कि आप बांग्लादेशी हैं और और वो बेचारा कह रहा है कि भाई मैं बिहार के अरेरिया डिस्ट्रिक्ट से हूं और उसके परिवार वाले उसको अपने डॉक्यूमेंट्स फोन पर भी दिखाते हैं। वो सारी चीज कैमरे पे है। ये पुलिस वाले और वो भी आरएफ के ऑफिशियलल्स उनके साथ दिख रहे थे। सीआरपीएफ का जो विंग है वो पूरा इन बस्तियों में इन झुग्गियों में जाके और क्या ये लोगों को डराधमका कर ये
10:14 आपने सही कहा कि ये बिल्कुल एक डेस्पिरेट बड लग रही है। लेकिन ये तो बहुत ही मुखौल उड़ाने वाली चीज है। लोग हंस रहे हैं इस पर। कैसे एक वर्दी वाला पुलिस वाला जाता है और लोगों को कहता है कि मेरे पास एक मशीन है जो आपकी नागरिकता को चेक करेगी। नीरश जी यह एक तरफ से हंसने वाली बात है लेकिन दूसरी तरफ से यह बहुत गंभीर बात है। देखिए यूनिफॉर्म सर्विसेस में जो लोग वर्दी पहनते हैं वो आर्मी का हो या पुलिस का उच्च अधिकारी हो 10 जनवरी 2026 को लखनऊ के मोती महल लॉन में हम में हम अवध कॉन्क्लेव को फिर से ले आ रहे हैं। यह हमारा एक सालाना इवेंट होता
11:02 है जिसमें हम देश के चुनिंदा लोगों को देश की महत्वपूर्ण समस्याओं पर बातचीत करने के लिए बुलाते हैं। ऑडियंस इंटरेक्शन होता है। सीरियस बातें होती है। क्या हुआ उस पर बातचीत होती है। क्या होगा उस पर होती है और क्या होना चाहिए इस पर एक गंभीर विचार विमर्श होता है। इस आयोजन को 10 जनवरी को हम कर रहे हैं। आपसे आग्रह है कि आपके जो दोस्त मित्र लखनऊ में हो उनसे कहिए और साथ में आपसे एक विनम्र निवेदन और भी है कि हमें आर्थिक सहयोग करिए। इस आयोजन को करने में बहुत से रिसोर्सेज की जरूरत होती है। उसमें आर्थिक पक्ष भी एक इंपॉर्टेंट रिसोर्स है और आपके आर्थिक सहयोग की हमें आवश्यकता है। बहुत-बहुत धन्यवाद। वी वर टॉकिंग अबाउट वो जो एसएओ था गाजियाबाद का
11:47 जो कि लोगों एक तरफ से नीरज जी आपने जैसे बोला कि ये एक एक हंसने की बात है एक तरफ से लेकिन दूसरी तरफ से आप देखिए ये बहुत गंभीर गंभीर मामला है। देखिए यूनिफॉर्म सर्विसेस ये जो वर्दी पहनते हैं आर्मी हो या आर्म फर्सेस हो या पैरामिलिट्री फर्सेस हो सीआरपीएफ वगैरह और पुलिस फर्सेस उच्च अधिकारी हो या वो ये कास्टेबल या एक छोटा ऑफिसर हो ये लोग आजकल बहुत ऐसे दिख रहे हैं कि जो काम वर्दी पहन के नहीं करना चाहिए वो काम कर रहे हैं। तो इसलिए मैं ये इसको मैं
12:34 हंसने की बात नहीं मानता हूं। सिर्फ ऐसे आ रहे हैं। लेकिन ये इतना गंभीर हो गया है कि ये ये पूरा ये सर्विसेस भी कम्युनल हो गया क्या? ये पुलिस फोर्स जिसने निष्पक्ष रहना चाहिए। वो सरकार के और सरकार में सत्तारूढ़ दल की जो जो विचारधारा है उसको इंप्लीमेंट कर रहे हैं क्या? तो यह बहुत ही बहुत ही गंभीर मामला है कि देखिए यह नेशन का हमारे देश का और स्टेट का राज्य का और यू नो समाज का जो जो रिश्ता
13:22 होना चाहिए हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में जो लिखा गया है कि स्टेट मशीनरी ये अब कौन सी जाति का है कौन सी धर्म का है कौन सी रंग का है कौन सी प्रांत का है कौन सी भाष है ये ये ये सब नहीं देखना चाहिए तो ये हमारा स्टेट पॉलिसी होना चाहिए हमारे कॉन्स्टिट्यूशन के मुताबिक लेकिन ये ये पूरा छोड़ दिया है अभी छोड़ के आप ये जाति का है ये देश का है ये रंग का है ये भाष है आप अब आप अब देखिए अब आप अब डेराडोर में क्या हुआ कि हमारे हमारे लोगों को कुछ लोग बोल रहे हैं
14:09 कि आप चीन का है। तो आप यह मत भूलिए कि कुछ महीने पहले हमारे खुद हमारे प्रधानमंत्री जी ने वो वो आंख के बारे में भी जिक्र किया था। तो यह पूरा कम्युनलिज्म फैलाने के लिए कम्युनिज्म फैला के ये पूरा देश को नागरिकों को और वर्दी पहनने वाले अधिकारियों को भी बहुत कमल बनाया है इसको। ये बहुत गंभीर गंभीर मामला है नीलेश जी। लेकिन सर एक कहीं ना कहीं पुशबैक भी दिख रहा है बीजेपी के इको सिस्टम के अंदर। अभी अगर आपने हाल में देखा हो तो अर्नभ
14:55 गोस्वामी जैसे एंकर्स रूबिका लियाकत अभी कल एक पडकास्ट क्लिप वायरल हुई जिसमें कि आनंद रंगनाथन जो कि राइट विंग ऑथर है और बीजेपी को जमकर डिफेंड करते थे। अब इन लोगों ने बीजेपी के खिलाफ बोलना शुरू किया है। ये आपको कौन सा सोशल फिनोमिना लग रहा है? क्या ये रियलाइजेशन इन सबको हो रहा है कि देखिए अब अपनी क्रेडिबिलिटी बनानी जरूरी है वरना जनता हमको बाहर फेंक देगी निकाल कर। क्या यह रियलाइजेशन हो गया है? इस वजह से ये लोग बदले हैं या फिर वाकई में कुछ अंदर ऐसा हो रहा है पीएमओ के अंदर अ जिसकी वजह से ये सारी चीजें वििबल दिख रही हैं। नीरज जी मैं इसको इतना इतना सीरियस नहीं मानता हूं।
15:40 नहीं ये भी हो सकता है कि कुछ लोग देखिए वो तो ये लोग भी ह्यूमन है ना उनको भी शायद लग रहा होगा ये ये ठीक नहीं चल रहे लेकिन लेकिन अ फाइनल एनालिसिस में ये लोग क्या करेंगे ये कम्युनिज्म को डिफेंड करेंगे ये हिंदू राष्ट्र को डिफेंड ही करेंगे इससे हटेंगे नहीं नहीं तो आप कह रहे हैं आप इंपॉर्टेंट पॉइंट कह रहे हैं। आप ये कह रहे हैं कि अर्नभ गोस्वामी जैसे लोग जिनका रंग बदला हुआ है। ये हमेशा कम्युनलिज्म को डिफेंड करेंगे। जी अल्टीमेट एनालिसिस ये उस मिशन से हटेंगे नहीं। थोड़ा इधर-उधर बोल सकते हैं।
16:26 लेकिन अब वो ये ये कुछ लोग ऐसी बोल रहे हैं तो उसका उसका एनलाइटनमेंट हो गया। वो रियलाइजेशन आ गया। कुछ गड़बड़ चल रहा है। मैं इतना दूर नहीं जाऊंगा एनालिसिस में। और यह भी है देखिए मेरे को एक एक थोड़ी सी क्या बोलते हैं? एक घटना आपको मैं याद दिलाता हूं। एक डिक्टेटरशिप के अंदर एक सर्वे हुआ था एक बार। सारे लोग उनका जूता साइज है ना। सात है तो छह खरीद रहे हैं। आठ है तो सात खरीद रहे हैं। नौ है तो आठ खरीद रहे हैं। तो टाइट जूता पहन के चल रहे
17:14 हैं। तो जो सर्वे किया है वो लोग पूछ रहे हैं क्यों ऐसा कर रहे हैं? तो उनका जवाब यह है कि देखिए साहब हम बहुत ही बहुत ही कष्ट से गुजर रहे हैं। तो दिन में हम पूरा घूमघूम के शाम को घर आएंगे। तो हम जूता खोलेंगे ना तो बहुत अच्छा लगता है हमको। तो दिन में एक बार हमको अच्छा लगने के लिए एक साइज कम जूता हम खरीद रहे हैं। तो आप जीएस जीएसटी आपको बहुत बढ़ाकर थोड़ा घट घटा दीजिए और आप सेलिब्रेट करेंगे अच्छा है अच्छा है अच्छा है। तो दो चार आदमी ऐसे बोलेंगे टेलीविज़ में हां राइट विंग है वह तो रियलाइज़ हो गया हम हम अच्छा
18:01 है हमको अच्छा अच्छा लगा ऐसे ऐसी ऐसी छोटी-छोटी में आप मत पढ़िए हम भी मत पड़ेंगे आप ये बहुत ही गंभीर मामला है आप देखिए नीलू जी ऐसी बातचीत आने वाले महीनों में हम कर सकते या नहीं कर सकते मैं नहीं बोल सकता हूं मामला अभी इतना गंभीर हो है कि हम लोग हम जैसे लोग थोड़ा उम्मीद करते थे कि अभी पूरा बहुमत नहीं है। दो नेता एक चंद्रबाबू नायडू और एक नीतीश कुमार के ऊपर आधार है। ये ये थोड़ा संभाल के चलेंगे। नहीं वो दोनों को पूरा न्यूट्रलाइज कर दिया। अभी वो कुछ नहीं बोल रहे हैं। तो
18:48 उसको पूरा फुल ब्लडेड कम्युनिज्म चल कम्युनलिज्म चल रहे हैं। आप क्या-क्या बातें कर रहे हैं? क्या-क्या बातें आ रहे हैं? बहुत सारी जगह से। तो इसको इसको मत ज्यादा सीरियसली मत लीजिए। ज्यादा भाव मत दीजिएगा। नहीं। लेकिन आपको क्या लग रहा है? क्या कोई सक्सेशन वॉर प्ले आउट कर रही है क्या पीएमओ में? कई लोग इसके बारे में भी बोल रहे हैं कि देखिए यह सब सक्सेशन वॉर का नतीजा है। एंड बोथ मोदी जी एंड अमित शाह आर प्लेइंग अ वन अप गेम अगेंस्ट ईच अदर। क्या आपको भी ऐसा नजर आ रहा है कि ये वन अप गेम की वजह से है कि अर्नभ गोस्वामी या आनंद रंगनाथन जैसे लोग अपना अपनी खाल को बदलता हुआ देख रहे हैं? देखिए अ मैं इंडिविजुअल्स के बारे में
19:36 ज्यादा जानता नहीं। बोलता हूं भी नहीं। कुछ गेम चल रहा है या नहीं चल रहा है और ये लोग ऐसे बोल रहे हैं इसका वजह क्या है ये ये अभी जो सक्सेशन वॉर या वन ऑफ मनशिप आपने जो बोला है इसके वजह से हो रहा है मेरे को मालूम नहीं लेकिन मैं ये बोल सकता हूं कि अ कि देखिए जो भी हो ये एजेंडा उन लोगों ने तय किया है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है बस। तो अगर एक आदमी जाएंगे दूसरा आएंगे या दोनों नहीं है और तीसरा आएंगे मेरे को मालूम नहीं है। अगर ऐसा कुछ हो रहा है या नहीं हो रहा है
20:21 हमको मालूम नहीं है। हाल में आप देखें तो आरएसएस के सरस संचालक भी ये बहुत खुल के बताया कि ये हिंदू राष्ट्र ही है। ये हिंदू राष्ट्र इसके इसका कोई सेंशन कॉन्स्टिट्यूशन में उसमें इसमें लॉ में पार्लियामेंट में होने की जरूरत भी नहीं है। कैसे बोल चुके हैं? तो यह बदलेगा क्या? मैं मेरा मेरा मेरा दृष्टि वहां है। यह यह लोग आएंगे जाएंगे। इसमें क्या है? नहीं लेकिन आपको लग रहा है आप क्या कॉन्फिडेंट है कि मोदी जी और आरएसएस मिलकर भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने में सफल हो जाएंगे। अभी तो जिस तरीके से ब्रेजिलनेस दिख रही है हर चीज में तो ऐसे ही लगता है कि हिंदू राष्ट्र बन ही जाएगा। देखिए नीलू जी ये मेरी मेरी
21:09 हिसाब से यह प्रश्न ही गलत प्रश्न है। हो जाएगा क्या? हो सकता है क्या? ऐसा नहीं है। होने देंगे क्या? होना देना चाहिए क्या? यह प्रश्न है। हम तो अगर हमारे हमारे ताकत इसको काफी है या नहीं मेरे को मालूम नहीं है। लेकिन हमारे जैसे लोग बहुत है देश में उसको होने नहीं देंगे। यह बिल्कुल कॉन्सिट्यूशन का वैल्यूस है प्लुरलिज्म और सेकुलरिज्म जस्टिस इक्वलिटी फ्रेटरनिटी इसको हम कायम रखेंगे ही रखेंगे
21:56 ये प्रश्न है हम होने देंगे क्या नहीं होने देंगे लेकिन जो ब्रेनेस दिख रही है परकला सर आप अब आप मिसाल के तौर पर देखिए क्रिसमस वाले दिन क्या हुआ मोदी जी मॉर्निंग में चर्च जाते हैं और चर्च के साइड में एक तरफ वो चर्च का इवेंट अटेंड करते हैं सारे प्रीस्ट के साथ और दूसरी तरफ किस तरीके का तांडव सड़कों पर नजर आता है। वहां पर सा क्लॉस के मूर्तियों को तोड़ा जाता है। एक शब्द भी उनसे उनके मुंह से या कोई वरिष्ठ नेता या संघ का हो या पार्टी का हो सरकार का हो एक बात भी उसको खंडन करके आया नहीं ना। इसको क्या मतलब? कोई भी नहीं।
22:42 मतलब क्या है इसका? मतलब यह है कि हम ऐसी औपचारिक तरह तरह पर तरीके से कुछ करेंगे। लेकिन आपका काम आप कर लीजिए। यही है ना? मैसेज यही है। संदेश यही है। इसका मतलब यह है कि मोदी जी के लिए सेकुलरिज्म केवल एक औपचारिकता है। हो सकता है वो मौलानाओं से भी मिले। वो हो सकता है कि क्रिश्चियन प्रीस्ट से भी मिले। लेकिन जो मोदी जी पोप से मिले पोप से मिले ऑफकोर्स पोप से भी मिले लेकिन दूसरी तरफ जो उनकी सेना है वो सड़कों पर इसी तरीके का तांडव करती रहेगी तो फिर ये जो दोगुलापन है परकला सर ये जो दोगुलापन है मोदी जी का या बीजेपी का ये क्या जनता नहीं देख पा रही है इसको जनता तो अभी भी बीजेपी को ही भर भरपेट वोट कर
23:28 रही है देखिए आप आप आप ऐसे मत बोलिएगा क्योंकि भरपेट कहां वोट कर रहे हैं नीलू जी ये तो पूरा मैन्युफैक्चरिंग मैंडेट हमको हमारे सामने लाके आपको भरपेट बोल रहे हैं। अगर देखिए उसका इतना अब हम हम बहुत बार बात चुके हैं कर चुके हैं इसके बारे में कि देखिए 2024 24 चुनाव में 5 करोड़ वोट ज्यादा उन लोगों ने मैन्युफैक्चर किया था। तो अगर यह आप नहीं रोकेंगे मैं यह लगातार यह बोलते आ रहा हूं कि आप ये ये प्रक्रिया आप नहीं रोकेंगे इसको नहीं एक्सपोज करेंगे नहीं
24:14 इसको इसको अरेस्ट नहीं करेंगे तो अगले चुनाव में 10 करोड़ उसके बाद 20 करोड़ ऐसे जाएंगे एक दूसरा अगर अब देखिए अभी ये ये गेम तो पूरा बाहर आ गया है वोटर लिस्ट में क्या-क्या गलतियां है वोटर लिस्ट में क्या कर रहे हैं? वोटिंग पैटर्न में क्या हुआ है? ये सब बाहर आ गए। तो ये अभी दूसरा तरीका चुन लिया है कि वो एसआईआर है। तो एसआईआर होने के बाद नीलू जी आपको जनता क्या कुछ भी करने दीजिए। जनता को जनता कुछ भी आप देखिए बहुत लोग जाके आपको वोट नहीं
25:00 दिया। लेकिन फिर भी आप जीत गए वो पहले का अभी क्या हो रहा है आपको आपको लोकतंत्र में क्या होता है लोकतंत्र में आमतौर पर लोकतंत्र में जनता तय करेगी सरकार में कौन रहना चाहिए अभी एसआईआर के वजह से हमारे लोकतंत्र ऐसी स्थिति में आ गया कि अब सरकार तय कर रही है कौन-कौन वोटर रहेंगे वोटर सरकार को नहीं तय कर रहे हैं। सरकार वोटर को तय कर रहे हैं। तो सरकार वोटर को तय करने के बाद कोई और जीत सकते हैं क्या? तो सरकार वही लोगों को चुनेंगे वोटर लिस्ट में रहने के
25:48 लिए एसआईआर के जरिए कि यह लोग आमतौर पर हमको वोट देंगे ही देंगे। ऐसे लोगों को वोटर लिस्ट में रखा जाएगा। वही वही चल रहे हैं अभी। तो उनके पास बहुमत आप देने के लिए जरूरत नहीं है। वही पाएंगे बहुमत। बस इसका तो मतलब यह है कि जितने भी लोग मोदी सरकार के खिलाफ है उनका चुन चुन कर उनका नाम डिलीट कर दिया जाएगा और जितने उनके समर्थक हैं वही बचे रहेंगे वही वोट डालेंगे। वही वही चल रहे है ना वही जारी है अभी आर के जरिए वही जारी है नहीं तो इसका मतलब ये अगर सोशल फिनोमना के टर्म्स में देखें आप तो क्या ऐसा किसी भी देश में होता है जो डिक्टेटर डिक्टेटर
26:36 वाली जो रिजीम्स हैं डिक्टेटोरियल रिजीम्स हैं क्या वहां पर यही चीज होती है जो अब मोदी और शाह साहब ने यहां लागू कर दी है देखिए नीलू जी आप थोड़ा ये ये ये जो अभी हो रहे हैं सर के काम पर इसको थोड़ा मैं आपसे यह अनुरोध करता हूं कि आप थोड़ा गहराई से देखिए इसको। देखिए पहले से ही 15 सेंचुरी 16 सेंचुरी 17 सेंचुरी 1648 उसके बाद ही ये नेशन स्टेट का जो डेफिनेशन है ना नेशन स्टेट का जो डेफिनेशन है हमारे नेशन में कौन रहना चाहिए कौन नहीं रहना चाहिए यही रहा यही रहा पहले से यूरोप में अमेरिका में अफ्रीका में साउथ ईस्ट एशिया में कहीं
27:23 भी हमारे राज्य में सदस्य कौन है? हमारे सियासत में सदस्य कौन है? यही था। तो इसका इसका जवाब हमारी सभ्यता, हमारी धर्म, हमारी भाषा, हमारी रंग ऐसी कुछ क्राइटेरिया बनाया था। लेकिन भारत ने ऐसी क्राइटेरिया कभी बनाया नहीं। जो लोग इस देश में है, जो लोग इस देशवासी है, यह सब लोग हमारे नागरिक हैं। ये सब लोग को पूरा से पूरा
28:08 नागरिकों का और पिटिकल राइट्स होंगे। इंक्लूडिंग फ्रेंचाइज। इसको भारत ने कभी देखा नहीं। आप पढ़े हैं। आप पढ़े हैं या अनपढ़ हैं। आप दौलत वाले हैं या गरीब हैं। आप हमारे भाषी है या ना नहीं है। हमारे धर्म का है या नहीं है? ये कभी देखा नहीं। अब अब यह हो रहा है। इसका मतलब यह है कि आपको जो लगेगा यह हमारा है। धर्म का धर्म के नाते या भाषा के नाते या रंग के नाते या जाति के नाते एसेट्रा उन लोगों को रखेंगे। पहले क्या होता था जैसा हमारे जैसा नहीं है वो लोगों को बाहर
28:55 करता था यूरोप में अमेरिका में अफ्रीका में सब जगह और अगर वो नहीं संभव है तो उसको मारता था ठीक है ना मारता था मतलब उसको उसको खत्म करता था अब क्या हो रहा है अभी बाहर बाहर बाहर करने का पॉसिबिलिटी नहीं है तो मारने का भी पॉसिबिलिटी नहीं है तो क्या करेंगे विदाउट किलिंग ब्लडलेस पिटिकल जेनोसाइड मैं पहले जेनोसाइड होता था अभी जेनोसाइड हो रहा है लेकिन आप देखिए अगर आप मतलब एक ऐसा नरसंहार आप आप कह रहे हैं कि
29:41 एक ऐसा नरसंहार है जहां पर अह खून नहीं दिख रहा है लेकिन पूरी तरीके से नरसंहार कर रहे हैं। जी खून नहीं दिख रहा है। बाहर बाहर भी नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर आपको आपका आपको नागरिकता से सदस्य सदस्य सदस्य साथ सदस्यता क्या बोलते हैं? मेंबरशिप से हां सदस्यता सदस्यता की आप बात कर रहे हैं। सदस्यता से आपको बाहर करना है तो क्या करेंगे? आपका वोट अधिकार छीन लेंगे। तो आप रहेंगे लेकिन आपको कुछ नहीं है। तो इसका मतलब यह होगा आप अगर हमारे जैसे आदमी है तो मेरे को वोट हक रही है। तो मेरे पास
30:28 कोई आके प्रणाम करेंगे क्या? मेरा मेरा गली में कुछ गली में कुछ नाला की जरूरत है या रोड का जरूरत है या बिजली का जरूरत है। कोई देखेंगे क्या? नहीं देखेंगे। तो हम रहेंगे लेकिन नागरिक नहीं रहेंगे। हमको हक बिल्कुल नहीं होंगे तो आप रह सकते हैं लेकिन सेकंड क्लास सिटीजन के नाते आप रह सकते हैं। यही यही अ विचार से यह पूरा एसआईआर आज देश में लागू है और जारी है। बस लेकिन इसको रोकने का तरीका क्या है सर? इन लोगों ने तो शुरू कर दिया और हर राज्य में शुरू हो रहा है। अभी अब इस साल में जो चुनाव है केरला, तमिलनाडु, वेस्ट बंगाल
31:17 देखिए क्या करना चाहिए? क्या करना चाहिए? इसको रोकना चाहिए बस। क्योंकि नहीं रोकेंगे कैसे सर? इसको कैसे रोक सकते हैं? देखिए नील जी अभी अभी यूपी में तकरीबन 3 करोड़ लोग डिलीट होने की संभावना है। तमिलनाडु में 93 लैक्स केरला में 21 लैक्स और बाकी आप सब मालूम है। इतने लोगों को निकालने के बाद अगर चुनाव करेंगे तो क्या होगा? नतीजा आपको तो अब अब देखिए मैं पहले से यही बोल रहा हूं कि आप
32:04 आपके सामने कुछ विकल्प नहीं है कि सारे लोग सारे दल जिन्होंने इसके खिलाफ है वह एक इकट्ठा होके इसको सड़क पर उतर के सत्याग्रह से इसको रोकना चाहिए बस। देयर इज नो विकल्प नहीं है इसके। नहीं सर। लेकिन इस काम को कौन करेगा? अपोजिशन पार्टीज के पास तो एक मुद्दा नहीं है। अब आप कांग्रेस का ही आपको एग्जांपल देते हैं। अब उन्होंने वोट चोरी पर मुद्दा उठाया लेकिन वोट चोरी का मुद्दा फिर से उनके लिए ठंडा पड़ गया। अब वो मनरेगा की बात कर रहे हैं। उन्होंने मनरेगा उठा लिया। अब आज ही देखिए केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई।
32:49 उन्होंने कहा हम मनरेगा अभियान चलाएंगे। अब उनके लिए मनरेगा बड़ा इशू हो गया है। वो अपोजिशन पार्टीज ये समझ ही नहीं पा रही है कि जब तक फ्री एंड फेयर चुनाव नहीं होगा तो वो एक्सिस्ट कहां से करेंगी? वो मोर चोरी के मुद्दे पर कोई सस्टेन ही नहीं कर पा रहा अपने आप को। एंड लुक एट द रीजनल पार्टीज उनका तो खैर पूछिए ही मत कि वो क्या कर रही है। उनका तो कुछ अता पता ही नहीं है इस समय। तो अपोजिशन इसको उठाएगा कैसे? आप आप सही बोला है कि उन लोगों को इसका गंभीरता अभी अभी अभी तक तो शायद समझ में आया नहीं या आया लेकिन ये ये कदम उठाने के लिए तैयार नहीं है। आप वो छोड़ दीजिए। लेकिन मैं ये बोल रहा हूं कि आप हम जैसे लोग ये सारे काम लोकतंत्र को बचाने का काम आप कृपया
33:39 अपोजिशन को या ये पॉलिटिकल पार्टीज को आप आउटसोर्स मत कीजिएगा। वो वो समय हो गया है। हम बहुत उम्मीद किए थे ये लोग करेंगे। आप ये कह रहे हैं। आप एक बड़ी बात कह रहे हैं। आप ये कह रहे हैं कि अब अपोजिशन से कोई उम्मीद नहीं बची है। अब ये सिटीजंस के हाथ में है। नागरिकों के हाथ में है। अगर वो आए तो साथ में ले जाइए। अगर ना आए तो भी जाइए। अगर वो लोग भी आपको खिलाफ करेंगे फिर भी जाइए। लेकिन यह अभी सिविल सोसाइटी की काम बन गया है। सचमुच में 100% सचमुच में। और एक बार और एक बात और बोलता हूं मैं अगर यह वोट चोरी के बारे में या
34:25 एसआईआर के बारे में कुछ अभी एस्टैब्लिश जो पिटिकल पार्टीज ये सामने आके कुछ करेंगे हम हम पहले उम्मीद करता था कि ये लोग थोड़ा मोबिलाइज करेंगे। ये लोग उसके पास ताकत है। लोगों को इकट्ठा कर सकते हैं। ये सब उम्मीद करते थे। लेकिन अगर वो नहीं कर रहे हैं। एक अगर वो किए तो भी लोग ऐसे समझेंगे कि ये ये लोग चुनाव हारे हैं इसलिए वो ये बात कर रहे हैं। तो ऐसे साबित भी हो गया ना चुनाव हारेंगे तो ये थोड़ी देर 10 दिन या पांच दिन ये बात करेंगे और फिर खामोश हो जाएंगे। फिर और दूसरा चैनल दूसरा दूसरा प्रेस कॉन्फ्रेंस और दूसरा इसमें चले
35:10 जाएंगे। तो अगर अगर हम जैसे लोग सीरियस है लोकतंत्र को इस देश में बचा के रहना रखना है तो ये हमारी काम हो गया है तो वो लोग साथ में आएंगे तो ले जाइए साथ में नहीं आए तो भी उम्मीद मत कीजिएगा आप चिलते रहिएगा बस लेकिन सर जो मोदी जी का होल्ड है वो आपको क्या लगता रहा है कि पहले से कमजोर हुआ है या मोदी जी ने और ज्यादा चीजों को कंट्रोल में अपने कर लिया है और और भी ज्यादा कंट्रोल में है इस समय चीज नीर जी देखिए अगर कोई
35:56 पूरा कंट्रोल में है वो कॉन्फिडेंट रहेगा अगर कंट्रोल में है तो कॉन्फिडेंस रहेगा अब अभी अभी तक हम बात किए थे देखिए इलेक्शन इलेक्शन कमीशन ने एक डाउटफुल ऑर्गेनाइजेशन कमीशन करके एक सर्वे निकलाया निकलवाया तो इसका क्या मतलब है कॉन्फिडेंस का कॉन्फिडेंस का प्रतीक है क्या ये नहीं और एसआईआर लागू किया है ये कॉन्फिडेंस का प्रतीक है क्या ये नहीं पूरा हिल रहा है अंदर से बाहर से यह पूरा हिल रहा है। यह
36:42 लोग ऐसी डिसीजन पे इसी कंक्लूजन में पहुंचा है। मैं मेरा हिसाब से कि यह पूरा वोटर लिस्ट गड़बड़ करके ही पहले जितना वोट किए हैं उससे ज्यादा गिन लेंगे। ऐसी ऐसी मेथडोलॉजी अपनाया। अभी वोटर लिस्ट को भी पूरा चेंज कर लेंगे। ये ये कॉन्फिडेंस का प्रतीक नहीं है। ये कॉन्फिडेंस का सिग्नल नहीं है। ये ये बहुत ही कमजोरी का सिग्नल है। बस नहीं तो आप अभी आज 2026 जनवरी में आज 3 जनवरी है जब मैं आपसे आज बात कर रही हूं और जब से 2024 की मोदी जी की सरकार तीसरी बार बनी है। आपको क्या लग रहा है कि जो
37:27 मोदी जी का और शाह साहब का जो कॉन्फिडेंस लेवल है वो क्या है? इस समय कहां पर आप उनके कॉन्फिडेंस लेवल को आंकेंगे? हाउ विल यू मेजर द कॉन्फिडेंस एट व्हाट? एंड इफ आई वर टू आस्क यू टू रेट आउट ऑफ 10 इस समय आप उनके कॉन्फिडेंस को कितना देंगे? कितना मार्क्स देंगे? दो टू ऑन 10 ओके बिल्कुल दो इससे कम भी हो सकता है। लेकिन दो मैं दो दोने के लिए तैयार हूं। क्योंकि मेरे को मेरे को ये ये सब सिग्नल्स ऐसी सिग्नल्स हमको मिल रहा है कि वोटर लिस्ट को ये करना है ये ऐसी ऐसी क्या बोलते हैं फेक सर्विस लेके बाहर आना है और आपका जीडीपी ग्रोथ एक तरफ से आईएमएफ बोल रहा है
38:15 आपका आपका आंकड़ों का विश्वसनीयता बिल्कुल नहीं है हमारा ये विश्वसनीयता का आप डी लास्ट अभी दिया है सी ग्रेड दिया है तो आप जितना भी बोलेंगे 8 8% बोलेंगे 8 8.2% बोलेंगे क्या भी बोलेंगे कोई आपके बात पर विश्वास करने के लिए कोई तैयार नहीं है आपने बोला कि लोग अभी अभी चीन बोल रहे हैं इससे पहले ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन बोला है इसके बाद ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन में एक अह नेशनल सिक्योरिटी का मेडल दिया क्यों क्यों दिया है? क्यों दिया है कि और भारत और पाकिस्तान के बीच में कुछ समझौता करवाया। तो हम एक तरफ से हमारे सरकार बोल रहे हैं
39:02 कि कोई कोई इंटरफेरेंस नहीं है। हम ही किया है। बस मैं मानने के लिए तैयार था। लेकिन आप एक आदमी अगर हमारा फॉरेन मिनिस्टर हो या पीएमओ हो या कोई भी एक नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर है। बहुत तगड़ा आदमी है। तो वो खड़ा होके ऐसा कुछ नहीं हुआ। खंडन क्यों अभी तक आया नहीं? तो यह यह सब आप देखेंगे तो इसका मेरे को लगता है यह बहुत कमजोर है और कमजोर समझने लगे हैं बस। तो मैं मैं दो पॉइंट से ज्यादा नहीं दूंगा। जी। तो आपने कहा कि दो में 10 में से दो आप देते हैं मोदी जी के कॉन्फिडेंस लेवल को। मैं चलते-चलते बस आखरी में आपसे पूछूंगी जो आपने शूज की कहानी सुनाई थी।
39:47 जूतों वाली कहानी कि जब डेटोरियल रिजीम में जब एक बार सर्वे हुआ उसको मोदी जी और शाह साहब के संदर्भ में आप कैसे देखते हैं? व्यूअर्स को थोड़ा वो कहानी एक बार चलते-चलते फिर से बता दीजिए। देखिए ऐसा है कि आप आप इतना दबाव रखेंगे लोगों के ऊपर तो थोड़ा सा छूट देंगे तो लोग लोग समझने लगेंगे हां कुछ मिला है हमको और आप भी बोलना शुरू करेंगे कि आप मेरा हमने आपको जीएसटी में इतना रिलीफ दिया है छूट दिया है तो ऐसी मार्केटिंग करेंगे। तो मैं अगर दोहराना दोहराना अगर मैं दोहराना है तो देखिए एक
40:33 डिक्टोरियल ऋषि में एक सर्वे हुआ था कि इस सर्वे में ये सर्वे ये कब की आप बात कर रहे हैं परकला सर नहीं नहीं अभी नहीं एक एक एगोट है ये हां हां ओके ओके अच्छा देश में हुआ था ये देश में मैं देश का नाम भी नहीं बोलना चाहता हूं एक देश में हुआ था हमारे आप जानते हैं बहुत बहुत बड़ा देश है। एक बहुत बहुत सारे दशकों तक ये डिक्टेटोरियल रिजीम में रहा था। अभी नहीं है। अभी भी दूसरी तरफ से एक डिक्टोरियल में है। लेकिन देखिए ये हुआ था कि ये सर्वे में ये निकला कि सब लोग एक साइज कम जूता खरीद रहे हैं, पहन रहे हैं।
41:21 तो बिल्कुल समझ में आया नहीं? क्योंकि एक एक आधा साइज भी थोड़ा सा आधा इंच भी कम है तो बहुत मुश्किल हो जाएगा चलने में। लेकिन तब पूछे वो लोग बोले थे हम हम देखिए साहब हम हर रोज पूरा दिन इतना कष्ट में है कि हमको कुछ राहत नहीं मिलते। तो इसलिए हम घर आके यह जूते खोलेंगे। जूते खोलेंगे तो हमको बहुत अच्छा लगता है। तो एक बार एक बार सिर्फ एक बार दिन में अच्छा लगने के लिए हम एक साइज जूता कम खरीद रहे हैं। एक साइज कम जूता खरीद रहे
42:08 हैं। क्योंकि कम से कम एक वो 1015 मिनट के लिए शाम को घर आने के बाद थोड़ा हमको अच्छा लगना चाहिए। बस क्योंकि ये इसका मतलब ये है कि इसके सिवा उन लोगों के पास कुछ भी नहीं है अच्छा फील करने के लिए महसूस करने के लिए। तो ये जो हां जो ये आपने कहानी सुनाई है जूता और डिक्टेटोरियल रिजीम की बस एक क्लास में बस चलते चलते एक सवाल यही है कि ये जो एक रिलीफ सी महसूस हो रही कि देखिए अर्नव गोस्वामी भी सवाल करने लगे तो कुछ जीएसटी का जीएसटी नहीं तो इसका मतलब ये है कि ये पूरे सिस्टम का एक प्लानिंग है। क्या ये
42:53 एक प्लानिंग के तहत हो रहा है कि भाई लोग बहुत ज्यादा त्रस्त हो चुके हैं। अब उनको थोड़ी सी सांस लेने दो ताकि वह महसूस करें कि देखो सब कुछ ठीक है मोदी सरकार में क्या यह उस प्लानिंग का हिस्सा है और ये लोग वो भी बोलेंगे देखिए नीलू व्यास ऐसे इंटरव्यू कर रहे हैं फिर भी उसको कुछ नहीं हुआ इसका मतलब हम डेमोक्रेटिक है पर ऐसे कुछ नहीं हुआ वो डेमोक्रेटिक है ये भी ये भी ऐसे थोड़ा-थोड़ा दिखाने के लिए बस इससे ज्यादा कुछ भी नहीं है इसका इसका जो इसका एस एसेंशियल जो फीचर है ये ये हमारे भारत को पूरे पूरा तरह से
43:38 हिंदू राष्ट्र हिंदू राज्य बनाने के लिए है। बस इसमें कुछ शूट नहीं है। ये बात तो खैर बिल्कुल क्लियरली अब दिख रही है कि हिंदू राष्ट्र बनाने का जो कार्यक्रम है वो बहुत अग्रेसिवली इस समय चल रहा है। लेकिन बस बार-बार एक सवाल मेरे जेहन में आ जाता है कि आपको याद होगा जब 204 में मोदी जी की तीसरी बार सरकार बनी और तब मैंने जब आपका इंटरव्यू किया था तो हम दोनों ने यह बात की थी कि शायद यह सरकार 5 साल नहीं चल पाएगी। अब तो दो साल होने को आ रहा है इस सरकार को। आपको लगता है कि मोदी जी अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे। गिवन द फैक्ट कि मिस्टर नायडू, मिस्टर नीतीश कुमार सब बहुत ज्यादा कंफर्टेबल है मोदी जी के साथ। कोई भी सरकार को गिराने के कहीं से इंडिकेशन दिख नहीं रहे। तो ऐसे में क्या मोदी जी अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे या मतलब कॉन्फिडेंट है कि वो कर लेंगे? नीलू जी राजनीति के मामलों में आप ऐसा ऐसा
44:28 मत बोलिएगा कि अभी तक तो कुछ नहीं हुआ। आगे भी कुछ होंगे नहीं। देखिए ऐसा है कि आप हम रोज देखते हैं कि अगर 6:30 बजे सूर्योदय है तो सवा5 बजे भी अंधेरा दिखता है आपको दो 5 मिनट्स पहले भी 6:30 बजे को सनराइज होना है तो 6:25 को भी अंधेरा दिखता है बस लेकिन एक बार रोशनी आ गया तो बिल्कुल पूरा आ जाएगा तो आप अब ये अभी ये सरकार पूरा नहीं करेगा मैं अभी भी मैं ये यही मानता
45:15 हूं यह पूरा 5 साल नहीं रखेंगे टिकेंगे क्योंकि आपको ये लगता है कि पांच साल नहीं चलेगी ये सरकार नहीं क्योंकि अब देखिए अभी अब देखिए ये ये एसआईआर एक है एसआईआर और इसके बाद आएंगे सेंसेस और साथ-साथ में आएंगे डीलिमिटेशन। अब ये तीनों देखिए तीनों आप एक इफ यू इफ यू लुक एट इट एट एस अ होल दिस थ्री थिंग्स एस अ पैकेज तब आपको पता चलेगा कि ये पूरा देश का
46:01 नक्शा बदलने जा रहा है। तो मैं मैं यह समझता हूं कि दक्षिण भारत से खासतौर पर यह लीडर्स जो हैं ये उसको सहेंगे नहीं। अभी तो थोड़ा दबाव दबाव में हो सकता है। लेकिन ज्यादा लोग इसको सहेंगे नहीं। लीडर्स भी सहेंगे नहीं। तो अगर अगर एसी चलेगा तो इसको रिएक्शन तो भोगना पड़ता है बस। बिल्कुल। चलिए देखेंगे बहुत कुछ इस समय देश में हो रहा है और बहुत अच्छी आपने कुछ आज बातें लोगों के बीच में बताई है। मुझे उम्मीद है कि इस इंटरव्यू को बहुत सारे लोग देखेंगे।
46:46 आपका बहुत-बहुत शुक्रिया परला सर। थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग। थैंक यू। थैंक यू जी। थैंक यू। थैंक यू।