Yogi vs Shah: The Ultimate Checkmate Game in BJP Politics – Who Will Win? Prof. Akhil Swami

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简要总结

本视频讨论了印度政治的动态变化,包括政治人物如何崛起和衰落,以及执政党内部的权力斗争。视频重点关注以下几个关键点:

  • 政治人物的命运与自然规律相似,上升后往往面临被拉下顶峰的风险。
  • 执政党内部存在权力斗争,尤其是在领导人年事已高的情况下。
  • 北方邦的政治局势复杂,首席部长 योगी Adityanath 与 Amit Shah 之间存在矛盾。
  • 选举委员会在选民名单修订(SIR)中的角色以及各方对此的反应。

引言:政治的本质

视频一开始指出,政治人物的命运如同自然规律,当他们达到顶峰时,往往会面临被他人拉下来的风险。那些曾经围绕在你身边,对你阿谀奉承的人,可能会因为自身利益而在关键时刻背叛你。这种情况在各个时期都存在,例如,一些曾经是国大党领导人亲信的人,现在却成了最严厉的批评者。

执政党的挑战

视频分析了印度人民党(BJP)在连续执政11年后所面临的挑战。尽管 BJP 在 2014 年、2019 年和 2024 年三次赢得大选,但 2024 年的胜利是在联盟政府的支持下取得的。与此同时,Rahul Gandhi 和 Priyanka Gandhi 等反对派领导人采取了更强硬的姿态。此外,由于总理 Modi 年满 75 岁,党内开始出现权力斗争,一些领导人希望取代他。

北方邦的权力斗争: योगी Adityanath 与 Amit Shah

视频深入探讨了北方邦的政治局势,重点关注首席部长 Yogi Adityanath 与 Amit Shah 之间的矛盾。Yogi Adityanath 通过强调其印度教形象和利用 Rajput 社区的支持,巩固了自己在该邦的地位。与此同时,Amit Shah 作为 Modi 的亲密盟友,也希望在 Modi 卸任后成为总理。两人之间的竞争在 2024 年的议会选举中有所体现,当时 BJP 在北方邦的席位减少。

选民名单修订(SIR)争议

视频讨论了北方邦正在进行的选民名单修订(SIR)工作,Yogi Adityanath 声称 SIR 将导致大量 BJP 选民被排除在外。另一方面,Akhilesh Yadav 声称 SIR 正在清除 BJP 在之前选举中通过欺诈手段登记的虚假选民。选举委员会延长了 SIR 的期限,这被视为是为了帮助 BJP 重新登记选民。

政治策略与未来展望

视频分析了各方在 SIR 问题上的政治策略。Yogi Adityanath 通过批评 SIR,试图将选举失利的责任推给 Amit Shah 和选举委员会。为了对抗 Yogi Adityanath,Amit Shah 任命 Pankaj Chaudhary 为北方邦 BJP 主席,Pankaj Chaudhary 来自 Yogi Adityanath 的同一地区,并且是 Kurmi 种姓,这有助于 BJP 争取非 Yadav OBC 选民的支持。视频最后指出,北方邦的权力斗争将如何发展,以及谁将最终胜出,还有待观察。

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文字稿

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0:03 जय संविधान जय भीम महात्मा गांधी की जय कोर्ट से मुर्दाबाद देखिए जब भी कोई यह बिल्कुल प्रकृति का नियम है जब भी कोई चीज बहुत तेजी से ऊपर चढ़ती है और शीर्ष पर पहुंचती है तो शीर्ष पर पहुंचने के बाद सबसे महत्वपूर्ण काम होता है कि शीर्ष तक पहुंचना उतना मुश्किल नहीं है लेकिन शीर्ष पर बने रहना उतना मुश्किल है और यही परिस्थिति फिर ऐसी क्रिएट होती है कि बाकी लोग उसको नीचे घसीट लेते हैं और वह शीर्ष से नीचे आ जाता है। इसीलिए यह प्रकृति का नियम है। दिन होती है, रात होती है, ऊंचाई होती है, नीचाई होती है और जीवन ऐसे ही चलता रहता है और राजनीति में भी ऐसे ही होता है। देखिए राजनीति में एक जो बड़ा

0:50 अनोखा संयोग होता है कि जिन्हें आप समझते हैं कि आपके सबसे नजदीक हैं और जो आपको चारों तरफ से घेर लेते हैं और आपकी चाटुकारिता करते हैं और आपकी बढ़ाई करते हैं क्योंकि उस समय आपके सितारे बुलंद होते हैं लेकिन धीरे-धीरे उनका मकसद सामने आने लगता है। उनका मकसद आपका भविष्य नहीं बल्कि अपना भविष्य होता है। और जब उन्हें मौका मिलता है तो वह वार करते हैं तो ज्यादातर चढ़ते हुए सूरज वाले लोगों के साथ यह होते हुए देखा गया है कि उन्हें अगर घात मिला है अगर इन्हें धोखा मिला है तो अपने ही लोगों से मिला है और अपने लोगों में वह पहचान कर नहीं पाता और असली और नकली की पहचान करना बहुत मुश्किल होता है जो आप

1:36 देख रहे हैं हर काल में हुआ है और कांग्रेस पिछले 11 साल से सत्ता में नहीं है तो आपने यह भी देखा कि कांग्रेस से बड़े सारे सारे लोग जो कि राहुल गांधी के और सोनिया के और प्रियंका गांधी के बड़े नजदीकी हुआ करते थे। आज के तारीख में सबसे ज्यादा निंदा वही करते हैं। जैसे प्रमोद कृष्णन अपने को कहते हैं जो प्रमोद त्यागी हैं। उनकी अगर आप टिप्पणी सोशल मीडिया पे देखेंगे कि आपको लगेगा सबसे बड़े कटु आलोचक आज के तारीख में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के वही हैं। जबकि वह प्रियंका गांधी के एडवाइजर थे। यह दूसरी बात है कि अमरिंदर सिंह जैसे लोग जो भारतीय जनता पार्टी में चले गए थे, किस वजह से चले गए थे? लेकिन आज के तारीख में वह बिल्कुल नेगलेक्टेड फील करते हैं और उनको वहीं यह महसूस हो रहा है कि इससे ज्यादा लोकतांत्रिक तो कांग्रेस पार्टी

2:21 थी। प्रवक्ता भी बहुत सारे गए थे कांग्रेस के जो मुख्य फेस थे कांग्रेस के और आज के तारीख में भारतीय जनता पार्टी में बिल्कुल किनारे पड़े हुए हैं। तो लोग जो यह सोच के जाते हैं कि दूसरी साइड में जाएंगे तो ग्रास विल बी ग्रीनर ऑन द अदर साइड। वो होता नहीं है। तो यही होता है। तो राजनीति में आज के तारीख में जो 11 साल से भारतीय जनता पार्टी के साथ हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी को सफलता मिल रही है। तीन बार उनकी सरकारें बन चुकी हैं। 2014 में, 2019 में, 2024 में 204 की जो सरकार बनी चलिए वो बैसाखी की सरकार है। लेकिन सरकार तो है और मोदी जी प्रधानमंत्री तो बन गए। यह बात दूसरी है कि उन्होंने बीजेपी की जो मेंबर्स की कमेटी थी, उसकी पार्लियामेंट्री बोर्ड का कोई सेशन नहीं

3:07 बुलाया। सारे मेंबर ऑफ पार्लियामेंट्स की मीटिंग नहीं बुलाई और उन्होंने एनडीए की मीटिंग बुला के अपने को प्राइम मिनिस्टर घोषित करवा दिया। वो एक अलग मुद्दा है। लेकिन प्राइम मिनिस्टर तो वह आखिर बन गए। चाहे वह चंद्रबाबू नायडू की वजह से बने या नीतीश कुमार की वजह से या बने या एकनाथ शिंद की वजह से बने। और यह सब लोग ऐसे हैं जो एक समय उनके बड़े कट्टर विरोधी थे। लेकिन आज के तारीख में उनके बल पे वह हैं। लेकिन जो भारतीय जनता पार्टी को एक चैलेंज आज की तारीख में महसूस हो रहा है। एक तो राहुल गांधी जिस प्रकार से आक्रामक तेवर उन्होंने अपना रखा है। प्रियंका गांधी भी उसी प्रकार से खड़गे साहब भी उसी प्रकार से ममता बनर्जी बंगाल में उद्धव ठाकरे से यह एक्सपेक्ट कर रहे थे कि उद्धव ठाकरे शायद वापस आ जाएंगे। उद्धव ठाकरे ने भी बड़ा पैनी

3:54 आक्रमण बिल्कुल रखा हुआ है। अफवाहें उड़ाते रहे कि प्रियंका चतुर्वेदी बीजेपी में लेकिन वो भी लगी हुई हैं। शशि थरूर साहब का भी एक थोथा प्रयास था तो केरला के अंदर उनके प्रयासों के बावजूद उन्हें कांग्रेस को धोखा देने के बावजूद वहां कांग्रेस बहुत अच्छी तरह से जीती और जो मेंबर ऑफ पार्लियामेंट की सीट बीजेपी जीती थी वहां भी भारतीय जनता पार्टी हार गई। शशि थरू की केवल कास्टिट्यूएंसी में जो वहां का नगर निगम है वहां पे भारतीय जनता पार्टी को सफलता मिली तो शशि थरूर भी एक दगे हुए कारतूस दिखाई पड़े। लेकिन जो भारतीय जनता पार्टी को आज की तारीख में सबसे बड़ा सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है वो यह कि मोदी जी तो 75 साल के हो गए। अच्छा यह दूसरी बात है कि उन्होंने अपने संविधान को बदल दिया। जहां उन्होंने कहा था कि 75 साल

4:40 के बाद नेता को मार्गदर्शन मंडल में डाला जाएगा। उन्होंने मुरली मनोज जोशी को एल के आडवाणी साहब को सबको डाल दिया था। लेकिन मोदी जी को एक अपवाद बताते हुए उस नियम का उन्होंने बिल्कुल उल्लंघन किया और आज के तारीख में मोदी जी भी और मोहन भागवत जी भी आरएसएस प्रमुख बने हुए हैं और 75 साल के बाद भी सत्ता संभाले हुए हैं। लेकिन जो असली मुश्किल शुरू हो रही है वो भारतीय जनता पार्टी को अंतर विरोधों की और आपस में जोत्वाकांक्षाएं हैं अलग-अलग नेताओं के उनके संघर्ष की है। और इसकी सबसे ज्यादा शुरुआत अब बाकी तो आपने महाराष्ट्र में देख ही लिया एकनाथ शिंद का क्या हाल है? जीत पवार का क्या हाल है? कैसे तलवारें खींची हुई हैं। वहां पे भी खड़गे साहब खड़से जो हैं उनके नेता और देवेंद्र फडनवीस के अंदर चल रहा है। कर्नाटका के अंदर आपने देखा कैसे जो वहां पे गुटबाजी

5:29 चल रही है। जो पहले गुटबाजी कांग्रेस के अंदर होती थी आजकल भारतीय जनता पार्टी के अंदर होने लगी है। तभी इसलिए है जो एकतांत्रिक डिक्टेटोरियल लीडरशिप होती है उसके अंदर लोग तब तक सहमे रहते हैं जब तक कि लीडर मजबूत होता है और जैसे ही लीडर कमजोर होता है फिर वो गुटबाजी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन लीडर के मजबूत होने के बावजूद आज के तारीख में जो भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है वो उत्तर प्रदेश के अंदर मिल रही है। अब उत्तर प्रदेश के अंदर समस्या क्या क्रिएट हो गई कि जब विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश का हुआ 2022 को हुआ या 2017 को हुआ 2017 के चुनाव में जो हमारे योगी आदित्यनाथ हैं वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़े और विधानसभा का

6:16 चुनाव नहीं लड़े तो मानी बात है कि उनके चीफ मिनिस्टर बनने की कोई संभावना नहीं थी। तो मनोज सिन्हा साहब जो उसी आईटी बीएचयू के इंजीनियर हैं जहां से मैंने इंजीनियरिंग पास की है। उनका नाम बहुत ज्यादा आगे बढ़ने लगा और वो वहां पे विश्वनाथ टेंपल में गए। उन्होंने दर्शन किया और ये सोच रहे थे कि अब वो शपथ ग्रहण करने जाएंगे। लेकिन अचानक खबर मिली कि योगी आदिनाथ को मुख्यमंत्री बना दिया गया। अच्छा योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का कारण क्या था? वो यह था कि वो भगवाधारी हैं। मनोज सिन्हा तो भगवाधारी है नहीं। केशव प्रसाद मौर्या तो भगवाधारी है नहीं। भगवाधारी योगी आदित्यनाथ है और योगी आदिनाथ को एक हिंदुत्व का चेहरा बनाकर उन्होंने पेश कर दिया। अब योगी आदित्यनाथ ने भी उसका फायदा उठाया। योगी आदिनाथ ने अपने जो भगवा वस्त्र थे और वो गोरख गोरखपीठ के क्योंकि महंत हैं और वहां पे

7:03 उनकी बहुत बड़ी अपनी क्लाउड है तो उन्होंने उसको प्रोजेक्ट करके आज के तारीख में हिंदूवादी नेताओं में विनय कटिहार वगैरह को सबको पीछे करके वो सबसे आगे फ्रंट फुट पे जाकर खड़े हो गए। उमा भारती भी पीछे हो गई। विनय कटिहारे पीछे हो गए और योगी आदित्यनाथ सामने खड़े हो गए। अच्छा योगी आदिनाथ ने अपना एक क्लाउड भी बना लिया जो राजपूतों का क्लाउड है। आज के तारीख में राजपूतों की तूती बोलती है उत्तर प्रदेश के अंदर और यह मानी बात है कि यह जो वर्ग समूह है यह 4 5% का इसका वोट बैंक हो लेकिन यह एक ऐसा समूह है जो सशक्त समूह जिसके पास पैसा भी है जिसके पास लाठी भी है जिसके पास ताकत भी है और यह इलेक्शन में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण रोल अदा करता है तो योगी आदिनाथ ने अपने को प्रोजेक्ट कर लिया और ऐसा प्रोजेक्ट कर लिया कि उनको हटाना भी अब जैसे निगलना भी मुश्किल और उगलना भी मुश्किल वो वाली स्थिति हो गई तो योगी आदिनाथ को हटा भी

7:49 नहीं सकते और रख भी नहीं सकते। अच्छा तो एक तरफ तो यह प्रोजेक्ट हो गए योगी आदित्यनाथ। दूसरी तरफ प्रोजेक्ट हो गए अमित शाह। क्योंकि अमित शाह मानी बात है आज की तारीख में अगर मोदी जी के सबसे विश्वस सहयोगी कोई है तो वो अमित शाह हैं जो पहले भी उनके साथ गुजरात के अंदर उनके मंत्रिमंडल में थे और सारे जो जितने भी राजनीतिक और कूटनैतिक और जितने भी षड्यंत्र सारे मूवमेंट्स होते हैं वो अमित शाह साहब करते हैं तो अमित शाह साहब मानी बात है कि एक नेचुरल उनके अंदर चिंतन होगा कि वो भी देश के अगले प्रधानमंत्री बने जब भी मोदी जी हटे और अमित शाह साहब का जो गुजरात लॉबी और जिस प्रकार से अमित शाह गृहमंत्री रहते हुए और सत्ता के शीर्ष पर रह के उन्होंने अपना क्लाउड बनाया है। तो ये बहुत बड़ा क्लाउड है। पूरे हिंदुस्तान के अंदर उनका क्लाउड है। लेकिन योगी आदिनाथ का उत्तर

8:36 प्रदेश के अंदर अपना बड़ा स्ट्रांग क्लाउड है। वो क्लाउड है और जो कि हिंदुत्ववादी है और जो राजपूत है माने राजपूत होने के अलावा जो बाकी जाति समूह है उसके अंदर भी योगी आदिनाथ ने एक बहुत बड़ा क्लाउड बना लिया। तो आज के तारीख में अगर ब्रांड है कोई तो एक तो मोदी जी का ब्रांड है भारतीय जनता पार्टी के लिए एक योगी आदित्यनाथ का ब्रांड है और यह ब्रांड ऐसा है जो बहुत ज्यादा मुखर है और बहुत ज्यादा एक्सेप्टेबल है उत्तर प्रदेश के उस वर्ग के लिए जो इसको पसंद करता है जिसे बुलडोजर राज कहिए या बुलडोजर न्याय कहिए या जो कुछ भी कहिए या अल्पसंख्यकों के खिलाफ जो कारवाही है उसको कहिए तो अमित शाह और योगी आदिनाथ एक दूसरे के सामने खड़े हो गए। अच्छा इसका रूप भी आपको 204 में दिखाई पड़ा होगा। पार्लियामेंट इलेक्शन में 204 में ये सोचा था जो पता चला बाद में दिखा कि महाराष्ट्र के अंदर जहां पे

9:22 पार्लियामेंट के अंदर आशा ही नहीं की जा सकती थी कि एनसीपी और कांग्रेस और शिवसेना इतना अच्छा परफॉर्म करेगी वहां उन्होंने बहुत अच्छा परफॉर्म किया। राजस्थान में कांग्रेस ने बहुत अच्छा परफॉर्म किया। हरियाणा में कांग्रेस ने बहुत अच्छा परफॉर्म किया। लेकिन उत्तर प्रदेश में नहीं किया। अब ये उत्तर प्रदेश में यह कारण तो हो सकता है कि जो पीडीए की राजनीति अखिलेश यादव ने की और यादवों के अलावा जो उन्होंने बाकी पीडीए के जाति समूहों को टिकट दिए उसका फायदा तो उनको हुआ ही हुआ। लेकिन वहां पे एक फायदा योगी जो हुआ अखिलेश यादव को यह भी था कि अमित शाह और योगी आदित्यनाथ में आपस में भिड़ी हुई थी। दोनों एक दूसरे को नीचा दिखाने के चक्कर में थे कि धनंजय सिंह योगी आदित्यनाथ के आदमी हैं तो उनको वहां जाके अमित शाह ने लैंड करा दिया अपना प्लेन। तो इस प्रकार

10:10 की राजनीति भी वहां बहुत ज्यादा हुई। अब जो ये अमित शाह और योगी अच्छा अमित शाह की आज आप बस चले तो वो योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश से हटा दें मुख्यमंत्री पद से। लेकिन हटाना इसलिए बहुत ज्यादा मुश्किल है कि वो क्लाउड वो राजपूतों का क्लाउड और योगी आदित्यनाथ का जो क्लाउड है उस क्लाउड ने जो 2024 के चुनाव में लोकसभा के अंदर मोदी जी को सीटें कम दिलवाने में अपना योगदान दिया और जिसकी वजह से आज मोदी जी बैसाखी की सरकार पे चल रहे हैं। अब योगी आदिनाथ को हटाना भी चाहते हैं अमित शाह और हटाना मुश्किल भी हो रहा है। तो इसलिए यह हुआ कि एक ऐसा प्रदेश का अध्यक्ष बनाया जाए जो योगी आदित्यनाथ का विरोधी हो और जिसकी अपना एक क्लाउड भी हो और एक ऐसा क्लाउड हो जिसके पास एक जाति वर्ग हो। तो

10:56 उन्होंने जैसे आपने देखा कि पंकज चौधरी को अभी दो दिन पहले उन्होंने प्रदेश का भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाया। पंकज चौधरी जो हैं उसी इलाके से आते हैं जिस इलाके से योगी आदित्यनाथ आते हैं। वह गोरखपुर से आते हैं। वह महाराजगंज से आते हैं। लेकिन महाराजगंज का वो रहने वाले गोरखपुर के ही हैं। तो एक ही क्षेत्र के जबकि नॉर्मली देखिए उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां पे क्षेत्रवाद बहुत बड़ी चीज है। जो पश्चिम भारत है उसका कल्चर बिल्कुल अलग है। अवध क्षेत्र का बिल्कुल अलग है। ईस्टर्न यूपी का बिल्कुल अलग है। तो और यह सारे अलग-अलग एक कॉन्टिनेंट्स हैं। लेकिन उसके बावजूद इतने बड़े क्षेत्र में अगर वहीं का मुख्यमंत्री और वहीं का प्रदेश अध्यक्ष है तो अमित शाह साहब की चाल वो ये

11:41 चाहते थे कि जो अगर काउंटर किया जा सकता है योगी आदित्यनाथ को तो एक तो एक निशाने से एक तीर से दो निशाने होते हैं कि एक तो जो पीडीए का कार्ड खेल रहे हैं अखिलेश यादव जिसमें उन्होंने पीडीए को आगे बढ़ाया है और क्योंकि पंकज चौधरी भी कुर्मी जात से आते हैं और पीडीए से आते हैं इसलिए एक तो अखिलेश यादव को काउंटर कर पाएंगे और उनको प्रोजेक्ट करेंगे और अगर योगी आदित्यनाथ उसमें बहुत ज्यादा परेशानी क्रिएट करेंगे तो एक पीडीए के मामले में कि भाई क्योंकि योगी आदित्यनाथ सवर्ण है राजपूत हैं और वह पीडीए हैं और कुर्मी जात भी एक बहुत बड़ी डोमिनेटिंग कास्ट है उत्तर प्रदेश के अंदर। यादवों के बाद अगर ओबीसी में सबसे बड़ी कोई कास्ट है तो कुर्मी कास्ट है। इसलिए उन्होंने उनको प्रोजेक्ट किया और पंकज चौधरी बिल्कुल योगी आदित्यनाथ के धुर विरोधी हैं। आज तक छह सात इलेक्शन वो पार्लियामेंट के जीत

12:26 चुके हैं महाराजगंज से। लेकिन आज तक के किसी भी इलेक्शन में उन्हें योगी आदित्यनाथ के पोस्टर अपनी सभाओं में नहीं लगाए हैं। तो बिल्कुल एक विरोधी हैं। तो अंबानी बात है कि एक अमित शाह ने दांव चल दिया था जिसमें योगी आदित्यनाथ पे दबाव पड़ा। तो योगी आदित्यनाथ ने भी एक दांव चल दिया। अभी देखा तीन दिन पहले एक मीटिंग के अंदर उन्होंने घोषणा की यह उत्तर प्रदेश के अंदर जो एसआईआर हो रही है इस एसआईआर में करीब 34 करोड़ वोट एसआईआर में कट रहे हैं और ये कट जो वोट रहे हैं इसके 75% वोट जो है वो भारतीय जनता पार्टी के वोटर्स हैं। अब इसके भाई दो निष्कर्ष हो सकते हैं इस चीज के उनके कि भाई 3 4 करोड़ वोट कर यही बात अखिलेश यादव भी कर रहे हैं। लेकिन अखिलेश यादव यह कह रहे हैं कि जो तीन तीन

13:12 चार करोड़ वोट कट रहे हैं यह भारतीय जनता पार्टी के कट रहे हैं। अच्छा यह सच भी हो सकती है, बात झूठ भी हो सकती है। लेकिन योगी आदित्यनाथ कह रहे हैं 3 4 करोड़ जो कट रहे हैं उसमें हमारे वोट कट रहे हैं। तो एक कारण तो यह हो सकता है कि पिछले इलेक्शंस में भारतीय जनता पार्टी ने जो फर्जीगिरी की थी और इतने सारे फर्जी वोट बनाए थे एसआईआर में क्योंकि फॉर्म भरने और एस जो बीएलओस हैं उनके ऊपर यह प्रेशर है कि बाद में पकड़े गए तो जेल जाना पड़ेगा। वो शायद उत्तर प्रदेश में सही काम करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसकी वजह से योगी आदित्यनाथ को यह लग रहा है कि हमारा तो सारे पुराने मेहनत पर पानी फिर गया और इसलिए उन्होंने एसआईआर का विरोध करना शुरू कर दिया और सारा का सारा ठीकरा उन्होंने पंकज चौधरी पे डाल दिया कि भैया अच्छा चुनाव आयोग ने भी सहयोग किया कि चुनाव आयोग तो हर वो काम करने की कोशिश करता है जिससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा हो। जब

13:59 उन्हें लगा कि भाई एसआईआर के मुद्दे में तो अमित शाह और योगी आदित्यनाथ एक दूसरे के सामने खड़े हो गए हैं। उन्होंने दो हफ्ते का टाइम बढ़ा दिया एसआईआर के अंदर कि भाई जिससे कि मौका मिले कि जो इधर-उधर के वोटर्स हैं उनके नाम जुड़वाए जा सके। अच्छा अखिलेश यादव इसलिए मस्त हैं। उन्होंने कहा कि भाई जो एएलओस हमारे एलओस थे उन्होंने तो अपने लोगों के नाम जुड़वा दिए। लेकिन जो यह फर्जी वोटर डलवाए थे भारतीय जनता पार्टी ने वो बाहर चले गए हैं। तो हर कांस्टीट्यूएंसी के अंदर 70 75,000 वोट ऐसे हैं जो भारतीय जनता पार्टी ने डलवाए थे। जैसे बताते हैं कि ग्रेटर नोएडा के अंदर एक मैनेजमेंट इंस्टट्यूट के हजारों स्टूडेंट्स को वोटर बना दिया गया था और उन्होंने वोट भी डाल दिए थे। लेकिन इस बार क्योंकि पास आउट हो के वो चले गए और एसआईआर में जब फॉर्म दिए गए तो वो थे नहीं। माननी बात है नए छात्र आ गए तो उनके वोट बने नहीं। यही बात आपने महाराष्ट्र के

14:45 अंदर सुनी थी। तो पिछली 204 के चुनाव में अमित शाह ने सोचा यह था कि उत्तर प्रदेश के अंदर अगर भारतीय जनता पार्टी की कम सीटें आ जाए। लेकिन उन्हें यह आशा नहीं थी कि महाराष्ट्र के अंदर इतनी खराब स्थिति हो जाएगी, राजस्थान में इतनी खराब स्थिति हो जाएगी, हरियाणा में इतनी खराब स्थिति हो जाएगी, बंगाल में इतनी खराब स्थिति हो जाएगी। वरना वरना अगर इन चार पांच स्टेट में इतनी बुरी स्थिति ना होती तो उत्तर प्रदेश में सीटें कम होने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी को एब्सोल्यूट मेजॉरिटी मिल जाती और उत्तर प्रदेश से भी योगी आदिनाथ को हटाने का यह मौका मिल जाता कि साहब देखिए बाकी जगह तो हमारी परफॉर्मेंस अच्छी रही लेकिन आपने उत्तर प्रदेश में कबाड़ा कर दिया। इसलिए हम आपको रिप्लेस कर रहे हैं एक पीडीए के आदमी से। लेकिन योगी आदिनाथ में यह कार्ड खेल दिया है उन्होंने। उन्होंने जब एसआईआर में एक चुनौती दे दी है तो उन्होंने कह दिया है

15:32 कि अगर 2027 में किसी वजह से एसआईआर की वजह से या तुम्हारे षड्यंत्र की वजह से हम चुनाव हारे तो उसका हारने का कारण तुम्हारा एसआईआर होगा जो अमित शाह ने करवाया है जो मोदी जी ने करवाया और मेरा इसमें कोई योगदान नहीं था। और अगर इन वोटों को 34 करोड़ वोटों को ऐड कराने में पंकज चौधरी जो आज बीजेपी के अध्यक्ष हैं योगदान नहीं करते हैं तो हार का ठीकरा पंकज चौधरी पर होगा, अमित शाह पर होगा, मोदी जी पर होगा। तो उत्तर प्रदेश जो देश का सबसे बड़ा राज्य है, वहां पे जो तलवारे खींची हुई हैं और एक दूसरे के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं। यह देखना इंटरेस्टिंग होगा कि अंत में मोदी जी जाएंगे नहीं जाएंगे। एस्टीन फाइल में क्या होगा, क्या नहीं होगा, किसकी फोटो आएगी, किसकी नहीं आएगी, एक अलग मुद्दा है। लेकिन

16:17 जो यह उत्तर प्रदेश के अंदर योगी आदित्यनाथ में और अमित शाह में युद्ध छिड़ा हुआ है, इसका परिणाम क्या होगा? यह भी देखना बहुत इंटरेस्टिंग होगा। नमस्कार। धन्यवाद। अपनम।

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