BJP Leadership Change:क्या Modi करने वाले हैं 'Operation Clean'? BJP में अब बचेगा सिर्फ एक 'नितिन'!|

简要总结

本视频讨论了印度人民党(BJP)内部的政治动荡,以及纳伦德拉·莫迪总理可能进行的领导层调整。重点包括:

  • 莫迪可能清洗资深领导人,提拔新人以巩固权力。
  • 潜在的继任者之争,以及莫迪如何为阿米特·沙阿铺平道路。
  • 一些资深领导人,如拉杰纳特·辛格和尼廷·加德卡里,的未来不确定性。
  • 莫迪政府偏爱“轻量级”领导人,以及他对党内控制的重视。

印度人民党高层震动

目前,印度人民党内,特别是那些身居高位、掌管重要部门的领导人,都感到非常紧张。这是因为莫迪政府提拔了来自比哈尔邦的尼廷·纳文担任中央工作主席,此举被视为莫迪和阿米特·沙阿团队有意清洗资深领导人。许多资深领导人长期以来积累的权威可能会受到威胁,甚至可能被撤职。

莫迪的用人策略

自2014年莫迪成为总理以来,他一直致力于边缘化那些在人民党内有20到40年资历的老牌政治家。他设立了“指导委员会”,将穆里·马诺哈尔·乔希和拉尔·克里希纳·阿德瓦尼等资深领导人排除在外。2019年,苏什玛·斯瓦拉吉意外地被排除在内阁之外。类似地,瓦苏恩德拉·拉杰·辛迪亚被撤职,尼廷·帕特尔在古吉拉特邦被边缘化,而普什卡·辛格·达米在北阿坎德邦崛起。在中央邦,希夫拉杰·辛格·乔汉被莫汉·亚达夫取代;在恰蒂斯加尔邦,拉曼·辛格被边缘化。这些举动表明,莫迪倾向于提拔那些对他忠诚、不会提出异议的领导人。

被边缘化的资深领导人

许多曾经担任重要职务的领导人,如哈什·瓦尔丹、拉维·香卡·普拉萨德和普拉卡什·贾瓦德卡尔,现在都已从公众视野中消失。与此形成对比的是,尼廷·纳文等相对默默无闻的人物却获得了机会。尼尔马拉·西塔拉曼成为印度历史上任期最长的财政部长,她被认为是政治上的“羽量级”人物。

拉杰纳特·辛格和尼廷·加德卡里的未来

拉杰纳特·辛格可能会继续留任,因为他与莫迪之间存在特殊关系,这可能源于他担任党主席期间对莫迪的支持。然而,尼廷·加德卡里与莫迪的关系并不融洽,他未来的内阁职位并不确定。尽管加德卡里在公路建设方面表现出色,但自尼廷·纳文上任以来,党内和政府部门都感到不安。

莫迪的继任者计划

没有人能准确预测莫迪的想法和行动。他选择拉姆·纳特·科温德担任总统就是一个例子,科温德此前在政界并不显眼。目前,只有马哈拉施特拉邦首席部长德文德拉·法德纳维斯和北方邦首席部长约吉·阿迪蒂亚纳特能够坚定地站在莫迪和阿米特·沙阿面前。莫迪可能正在为他的继任者阿米特·沙阿铺平道路,清除潜在的障碍,如瓦苏恩德拉·拉杰·辛迪亚、希夫拉杰·辛格·乔汉和尼廷·帕特尔等资深领导人。

约吉·阿迪蒂亚纳特和德文德拉·法德纳维斯的挑战

莫迪政府曾试图在2022年选举前撤换约吉·阿迪蒂亚纳特,但未能成功。阿迪蒂亚纳特一直在挑战阿米特·沙阿和纳伦德拉·莫迪的政治策略,并且不愿接受他们的控制。德文德拉·法德纳维斯也与阿米特·沙阿关系紧张,他被视为未来的潜在挑战者。法德纳维斯来自马哈拉施特拉邦,与 संघ परिवार关系密切,并且拥有丰富的资源。他被认为在外交和国际事务方面比阿迪蒂亚纳特和沙阿更胜一筹。法德纳维斯曾担任马哈拉施特拉邦的党主席和首席部长,并且是一位经验丰富的政治家。

莫迪的策略和党内动荡

莫迪似乎正在采取一种策略,即复制领导人并在不同地方部署他们,就像尼廷·纳文一样。总的来说,印度人民党内部一片混乱,许多高级领导人感到惊讶和恐惧。莫迪的行动常常令人震惊,就像他任命尼廷·纳文一样。

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0:01 अगर आप भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता से बात करें तो खासतौर पर वो जो बड़े पदों पर हैं, मंत्रालयों में है, जो बड़े-बड़े मंत्रालय संभाल रहे हैं तो उनकी धुकधुगी इस वक्त लगी हुई है। जिनकी एक एक धाप लंबे समय से जमा हुई थी। उनके ऊपर तलवार गिरने वाली है। इनमें से कईयों के सर कलम होने वाले हैं। आज वो टीम या तो हाशिए पर है या उनको कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जा रही ताकि ये कभी गैंग अप होके आगे उनके खिलाफ कोई बात ना कर पाए। तो ये ये राजनाथ सिंह सर्वाइव कर रहे हैं क्योंकि राजनाथ सिंह को लेकर एक अजब तरीके का रिश्ता नरेंद्र मोदी के बीच में नितिन गडकरी से बिल्कुल नरेंद्र मोदी की नहीं पड़ती है और मुझे इस बात पे हैरानी नहीं हो कि अगर नितिन गडकरी को भी कैबिनेट में आगे जगह ना मिले जब से नितिन नवीन आए हैं

0:48 तब से संगठन के अंदर और मंत्रालय के अंदर दोनों जगह पे जबरदस्त तरीके से हड़कंप मचा हुआ है। अगर किसी टीम का कप्तान बदल जाए तो क्या पूरी टीम बदल जाती है? और अगर यह बदलाव मोदी जैसे नेता करें तो सवाल सिर्फ बदलाव का नहीं सफाई का हो जाता है। आज हम बात करेंगे उस सियासी हलचल की जिसने बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं की नींद उड़ा रखी है। बीजेपी अध्यक्ष बदले गए। अब चर्चा है कि टीम भी बदली जाएगी। क्या मोदी अगले 6 महीनों में बीजेपी का पूरा घर बदलने वाले हैं? क्या पार्टी सरकार और संगठन तीनों में एक नई जबान और पूरी तरह कंट्रोल में रहने वाली टीम लाई जाएगी? और सबसे बड़ा

1:33 सवाल क्या बीजेपी में सिर्फ एक ही नितिन रहेंगे? पुराने नितिन को क्या नमस्ते कहा जा रहा है? आखिर क्या है मोदी की पूरी सोच? कौन है निशाने पर? हाल में हुए बदलाव ने कौन सी बदलाव की हवा चला दी है और कौन बड़े-बड़े नेता डर में हैं? इन्हीं सवालों को आज खंगा लेंगे। नमस्कार, मैं हूं अंकुर। आप देख रहे हैं सत्यंदी का खास शो। आशुतोष की पैनी नजर जहां आशुतोष जी खबर की खबर लेकर असली खबर बताते हैं। आशुतोष सर चर्चा चल रही है कि कप्तान बदला गया है तो कुछ दिनों बाद पूरी टीम बदली जा सकती है। अंकुर इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस वक्त अगर आप भारतीय जनता पार्टी के किसी भी नेता से बात करें तो खासतौर पर वो जो बड़े पदों पर हैं, मंत्रालयों में है जो बड़े-बड़े मंत्रालय संभाल रहे हैं तो उनकी

2:19 धुकधुकी इस वक्त लगी हुई है। क्योंकि इन सबको यह लगता है कि जिस तरीके से एक बेहद अननोन अज्ञात नितिन नवीन को अचानक बिहार से उठाकर केंद्र के अंदर वर्किंग प्रेसिडेंट बना दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की टीम ने ये तय कर लिया है कि जो जमे जमाए नेता थे जो वरिष्ठ नेता थे जिनकी एक एक धाक लंबे समय से जमा हुई थी। उनके ऊपर तलवार गिरने वाली है। इनमें से कईयों के सर कलम होने वाले हैं। और यह कोई अनावश्यक बात नहीं है। अगर आपको देखिए 2014 में जब नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने थे तो बहुत सारे वो लोग थे जो बीजेपी में 20 साल से 30 साल से 40 साल से पॉलिटिक्स कर रहे थे। उन सब लोगों को यह उम्मीद थी कि अब बहुमत की

3:05 सरकार आई हुई है। इसलिए उनको बड़े-बड़े कैबिनेट और मंत्रालय मिल सकते हैं। लेकिन जो पहला काम नरेंद्र मोदी ने किया था वो यही किया था। उन्होंने पारदर्शक मंडल बनाया था। जिसे मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं को एक तरीके से किनारे लगा दिया था। यशवंत सिन्हा, अरुण शरी जैसे लोगों को पार्टी में किसी तरीके की कोई इज्जत नहीं मिली। उनको कोई जिम्मेदारी भी नहीं दी गई। वहां से इसकी बात की शुरुआत होती है। 2019 में जब वो जब वो दोबारा चुनाव जीत कर आए तो सुषमा स्वराज को बहुत ही आश्चर्यजनक रूप से उन्होंने कैबिनेट से बाहर कर दिया था और उनको स्वेरिंग सेरेमनी में जब वो पहुंची तब लोग हक्के बक्के रह गए क्योंकि उनका नाम उस स्वेरिंग सेरेमनी में नहीं था। तो जो अटल आडवाणी के जमाने की जो पूरी टीम थी आज वो टीम या तो हाशिए पर है या

3:53 उनको कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जा रही है। वसुंधरा राजे सिंधिया को हटाया गया। भजलाल शर्मा की जगह एक नॉन एनटीटी इसी तरीके से नितिन पटेल जैसे बड़े नेता को गुजरात के अंदर किनारे लगा दिया गया। उनकी जगह भूपेंद्र पटेल जैसे जिनको कोई नहीं जानता था। उत्तराखंड के अंदर पुष्कर सिंह धामी आए और अचानक अगर आपने देखा होगा तो जब योगी आदित्यनाथ भी जब उत्तर प्रदेश में आए थे तब कोई नहीं मान रहा था कि दरअसल वो देश के वो उत्तर प्रदेश के वो मुख्यमंत्री भी हो सकते हैं। इसके साथसाथ अगर आप देखिए तो मध्य प्रदेश के अंदर शिवराज सिंह चौहान को हटाया गया। उनकी जगह मोहन यादव आए हैं। छत्तीसगढ़ में विष्णु देसाय आए हैं। रमन सिंह को किनारे लगा दिया गया है। उड़ीसा के अंदर जो है वो मांझी वहां पे है और जो दूसरे धर्म प्रधान

4:39 जैसे लोग उनको किनारे लगा दिया गया। हिमाचल प्रदेश के अंदर जहां एक जमाने में शांता कुमार और प्रेम कुमार धूमल की तूती बोला करती थी उनको किनारे लगा दिया गया। वहां बिल्कुल नॉन एंटिटी लोगों को बढ़ाया गया। बिहार के अंदर सुशील मोदी को हटाया गया और उनको उनकी जगह एक बहुत ही नए लोगों को रखा गया। तो ये जो पूरी कोशिश है ये पूरी कोशिश है कि अटल आडवाणी के जमाने के जो बड़े नेता हैं उनको किनारे लगाया जाए ताकि ये कभी गैंग अप होके आगे उनके खिलाफ कोई बात ना कर पाए और नरेंद्र मोदी की अपनी खासियत यही है कि वो अपनी टीम बनाते हैं। ऐसे लोगों को रखते हैं जो दरअसल उनके कहने पर उठे और उनके कहने पर बैठे और उनके सामने वो किसी तरीके से कोई बात ना कहे। आपको ध्यान है हर्षवर्धन जी कहां है जो एक जमाने में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के

5:25 दावेदार उम्मीदवार हुआ करते थे। हर्षवर्धन पूरी तरीके से गायब है। रविशंकर प्रसाद को अचानक कैबिनेट से बाहर कर दिया गया और वो कभी-कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जरूर दिखाई पड़ते। लेकिन आज की तारीख में उनके रहते हुए नितिन नवीन जैसे लोगों को मौका मिल रहा। प्रकाश जावड़ेकर एक जमाने में वो एचआरडी जैसी जैसे मंत्रालय देखा करते थे। ईरानी अगर आप देख जो क्या नाम उनका नाम देखिए पहला नाम मैं बोल रहा ईरानी स्मृति ईरानी जो एचआरडी जैसा इतना बड़ा मंत्रालय देखा करते निशंक ये सब बड़े-बड़े लोग थे बड़े-बड़े मंत्री थे मुख्यमंत्री के पदों पर आरूढ़ थे वो इन सब लोगों को अचानक गायब कर दिया गया और और प्रकाश जावड़ेकर और रविशंकर प्रसाद के बारे में तो किसी को अंदाजा ही नहीं लगा। प्रकाश जावड़ेकर तो पूरी तरीके से गायब हो गए। वो कहां है किसी को नहीं मालूम।

6:10 रविशंकर प्रसाद भी पूरी तरीके से गायब हो गए। कोई मंत्रालय उनके पास नहीं है। तो ऐसे बहुत सारे लोगों का सफाया उन्होंने किया और उनकी जगह बिल्कुल नए लोगों को मौका दिया। निर्मला सीतारमण को देखिए वो इस वक्त हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाली वित्त मंत्री हो गई है और निर्मला सीतारमण एक तरीके से लाइट वेट भी नहीं फेदर वेट हम उनको कहते हैं पॉलिटिक्स के अंदर वो फदर वेट है सर वैष्णव चर्चा तो इसमें शामिल लोग हैं जी राजनाथ सिंह को एडजस्ट ही किया जाएगा बस और बाकी जयशंकर को हो सकता है बचाया जाए बाकी ज्यादातर को हटाया जाएगा अब बाकी आपके तो ये ये राजनाथ सिंह सर्वाइव कर रहे हैं क्योंकि राजनाथ सिंह को लेकर एक अजब तरीके का रिश्ता नरेंद्र मोदी के बीच में शायद

6:56 वो उस उस उपकार को चुका रहे हैं कि जब पार्टी के अध्यक्ष होते हुए राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की जो भूमिका थी उस एक महती भूमिका निभाई थी और उनके नाम को प्रपोज किया था। जब पार्टी के कई बड़े नेता उसका विरोध कर रहे थे। लाल आडवाणी उनका विरोध कर रहे थे। दूसरे बड़े नेता भी उनके नाम का विरोध कर रहे थे तब राजनाथ सिंह उनके साथ खड़े हो गए थे। नितिन गडकरी से बिल्कुल नरेंद्र मोदी की नहीं पड़ती है और मुझे इस बात पे हैरानी नहीं हो कि अगर नितिन गडकरी को भी कैबिनेट में आगे जगह ना मिले। हालांकि वो बहुत परफॉर्मिंग मिनिस्टर है और जिस तरीके से हाईवे का पूरा विस्तार किया गया सड़के जिस तरीके के जाल बिछाया गया उसमें उनकी बहुत बड़ी भूमिका है। लेकिन आज की तारीख में जब से नितिन नवीन आए हैं तब से संगठन के अंदर और मंत्रालय के अंदर दोनों जगह पे जबरदस्त

7:42 तरीके से हड़कंप मचा हुआ है और लोगों को बिल्कुल समझ में नहीं आ रहा कि इसका पत्ता कटेगा। इसका पत्ता नहीं कटेगा। हम आशुतोष सर वैसे राजनाथ सिंह 75 साल के भी होने वाले हैं कुछ महीनों बाद और ये भी अब चर्चा में तो दोनों अब चर्चाएं चर्चाएं हैं कि मार्गदर्शक मंडल में भी कुछ नेता जाएंगे और यह भी है कि अब दो नितिन नहीं रहेंगे। एक ही नितिन रहेगा पुराने नितिन को हो सकता है नमस्कार कह दिया जाए और यह भी कहा जा रहा है कि बीएएमसी के बाद अभी जो चल रहा है कोई जनवरी में एंड होगा उसके बाद तो क्या लगता है कि मार्गदर्शन मंडल में भी राजनाथ सिंह जा सकते हैं क्योंकि मोदी का कुछ वो नहीं है कि उनका फैसला आप कोई प्रेडिक्ट कर पाए। देखिए कोई मोदी क्या सोचते हैं, क्या करते हैं किसी को नहीं मालूम। आपको याद होगा जब राष्ट्रपति के नाम का चुनाव हो रहा था पहली बार तो किसी को नहीं मालूम था रामनाथ

8:27 कोविंद इस देश के राष्ट्रपति बन। यहां तक कि कोविंद साहब को भी नहीं पता रहा होगा। क्योंकि कोविंद साहब बहुत लाइट वेट थे। यहां तक कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उनका उनका दखल बहुत कम था। तो आज की तारीख में सिर्फ दो चीफ मिनिस्टर है। दो बड़े नेता है जो दरअसल मोदी और अमित शाह के सामने मजबूती के साथ खड़े हुए हैं। एक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस दूसरा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। तीसरा कोई ऐसा नेता नहीं जो उनके सामने खड़ा हो सके या उनके सामने कुछ कह सके। तो मैं कोई प्रेडिक्शन नहीं कर रहा हूं। अगर राजनाथ जी का नाम अचानक गायब हो जाए तो मुझे हैरानी नहीं होगी। लेकिन मुझे लगता है कि राजनाथ सिंह का नाम नहीं हटेगा। उनको पिछले दिनों अगर आप ध्यान से देख 2024 के बाद से सरकार की तरफ से बड़ी जिम्मेदारियां दी जा रही है। खासतौर पर विपक्ष के साथ कोऑर्डिनेट करने की जितनी

9:14 ऑल पार्टी मीटिंग्स होती है उन ऑल पार्टी मीटिंग की जो जो अध्यक्षता है वो राजनाथ सिंह कर रहे हैं और वो एक बड़ी बड़ी बड़े बड़ी कड़ी के तौर पर है जो विपक्ष के साथ भी कोऑर्डिनेशन कर सकते हैं। लेकिन नितिन गडकरी भी बहुत काबिल मिनिस्टर है। अगर उनको हटाया जाएगा तो बहुत सारी जो योजनाएं है जो हाईवेज है उसमें दिक्कतें आएंगी अड़ंगा आएगा और मोदी सरकार नहीं चाहेगी कि उसमें किसी तरीके की दिक्कतें पैदा हो क्योंकि उससे उनको बदनामी होगी लेकिन अगर ये फैसले हो जाए तो मुझे कोई हैरानी नहीं होगी क्योंकि कोई नहीं जानता किसी को नहीं मालूम नितिन नवीन का नाम आपने सुना था कभी मैंने तो नहीं सुना था अचानक उठा के अगर आप किसी को वर्किंग प्रेसिडेंट बना देंगे तो आप क्या कहा जाए तो कोई भी आदमी सुरक्षित नहीं है और कोई भी आदमी जो है वो ये नहीं कह सकता कि मैं

10:00 बना ही रहूंगा इसलिए ये जो चर्चा है ये चर्चा अपने आप में बड़ी इंपॉर्टेंट चर्चा है। लेकिन मोदी शाह के रहते हुए और दूसरी बात और भी है वो ये कि अब कहीं ना कहीं नरेंद्र मोदी जी को ये लग गया है कि उनके उनके अपने उत्तराधिकारी के चयन का वक्त धीरे-धीरे नजदीक आता जा रहा है। तो अपने उत्तराधिकारी के रास्ते के लिए वह रास्ता स्मूथ करने की भी कोशिश कर रहे हैं कि ऐसा कोई बड़ा नेता ना सामने आ जाए जो दरअसल उनके उत्तराधिकारी यानी अमित शाह के रास्ते में एक तरीके से अवरोध उत्पन्न करे दिक्कत पैदा करे तकलीफ पैदा करे तो उस वजह से भी तमाम अटल आडवाणी युग के जो बड़े नेता है उनका रास्ता साफ किया जा रहा है क्योंकि उनमें से अधिकांश के सामने अमित शाह जो है वो वो वो उम्र में

10:47 भी कम दिखाई पड़ते हैं और उनके सामने जूनियर भी मालूम पड़ते हैं तो यह संभावना हो सकती है कि कल अगर अमित शाह जी का नाम आए तो वसुंधरा राजे सिंधिया खड़े हो जाए या शिवराज सिंह चौहान खड़े हो जाए या नितिन पटेल खड़े हो जाए या रमन सिंह खड़े हो जाए प्रेम कुमार धूमल खड़े हो जाए तमाम बड़े नेता खड़े हो जाए योगी आदित्यनाथ और देवेंद्र फडनवीस तो सबको मालूम है कि इनकी नहीं पटती इन लोगों से कम से कम अमित शाह को नहीं पटती चैलेंजर की भूमिका में है लेकिन जितना कम से कम किया जा सके वो संभावना पूरी तरीके से बनी हुई है इनको जो आपने पिछले एक शो में कहा था कि ये दो रोडे हैं हमेशा के रास्ते के योगी आदित्यनाथ और फनस तो यह रोडों को भी सफाया करने की पूरी कोशिश की जाएगी। देखिए अगर आपको ध्यान होगा कि 2022 के चुनाव के पहले किस तरीके से योगी आदित्यनाथ को हटाने की कोशिश की गई थी वो

11:32 उसमें कामयाब नहीं हो रहे हैं और योगी आदित्यनाथ लगातार जो अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जो पॉलिटिक्स है उसको वो चैलेंज करते जा रहे हैं और उनकी बातों को वो नहीं मानते। वो डिफाइंड है पूरी तरीके से। ये बात सबको मालूम है। ये बात दिल्ली में भी सबको मालूम है। ये बात लखनऊ में भी सबको मालूम है। सब इस बात को जानते हैं और सब जानते हैं कि ये जो लड़ाई है वो लड़ाई बहुत दूर की लड़ाई है। योगी आदित्यनाथ उनके कब्जे में आने से पूरी तरीके से अपने आप इंकार कर रहे हैं। यही चीज देवेंद्र फडनवीस के साथ भी है। देवेंद्र फडनवीस महाराष्ट्र के साथ आते हैं। वो नागपुर नागपुर से हैं। संघ परिवार के प्रिय माने जाते हैं और उनके पास रिसोर्सेज की कमी भी नहीं है। मैं मेरा ये कहना ये है कि हर आदमी मानता है कि देवेंद्र फडनवीस जो है उनसे उतनी पटती नहीं है। वो अपने आप में

12:18 एक भविष्य के चैलेंजर के तौर पर देखे जाते हैं और उनकी उम्र भी कम है। वो महाराष्ट्र से आते हैं। महाराष्ट्र के वो मुख्यमंत्री है। तो एक जो कमर्शियल कैपिटल होने का जो फायदा होता है रिसोर्सेज का वो उनके साथ है। दूसरा वो बहुत ही सुब माने जाते हैं। इसलिए उनसे उम्मीद की जाती है कि जो डिप्लोमेसी के मामले में विदेश के मामले में वो बेहतर साबित होंगे। कम से कम योगी आदित्यनाथ और अमित शाह की तुलना में और वो और वो उनके पास वो पूरा राजनीतिक अनुभव भी है। वो पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र के अंदर वो एक बार के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। अब दूसरी बार मुख्यमंत्री है डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। आपको याद होगा कि जब एकनाथ श को मुख्यमंत्री बनाया गया था तो उनको मार्जिनलाइज करने के लिए डिप्टी सीएम बनाया गया था और तब उन्होंने वो पद लेने से इंकार कर दिया था। बाद में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरव्यू किया था तब वो डिप्टी सीएम बने थे। तो जो

13:04 आदमी मुख्यमंत्री रह चुका हो उसको अचानक आपने डिप्टी सीएम बनाएगा। तो ये सब और इस बार भी जब सरकार बनी तो बड़े लंबे अंतराल के बाद मुख्यमंत्री के चेहरे की घोषणा की गई। तो वो सब कुछ कोशिश राजनीति के अंदर इसलिए होती है कि आप दूसरे को या तो नीचा दिखा सके या फिर उनको कमजोर कर सके और वो इसलिए क्योंकि देवेंद्र फडनवीस लोंग टर्म में जो है वो एक बड़े चैलेंजर है और वो डार्क हॉर्स है जब अमित शाह को चैलेंजर के तौर पर साथ ही साथ मोदी के बाद की जो का युग होगा उसमें एक बड़े नेता के तौर पर निभ सकते हैं। बिल्कुल। तो मोदी जी अब वह एक ही नीति पर काम कर रहे हैं। फोटो कॉपी एक नेता को उठाया उसी जैसे नेता की फोटो कॉपी करके कहीं और चिपका दिया और जैसे नितिन नवीन और जैसे नेता ही अब उनको चाहिए। अभी चर्चा तो

13:49 यही है और बातचीत भी यही चल रही है। कुल मिलाकर बीजेपी में हड़कंप तो मचा हुआ है। बड़े-बड़े नेता आश्चर्य में हैं, डरे हुए भी हैं। अब देखते हैं उनके साथ क्या होता है। लेकिन अब देखते हैं कि बीजेपी के अंदर कितना बड़ा हड़कंप होता है। मोदी जी क्या एक्शन लेते हैं और मोदी जो फैसले लेते हैं मोदी जी वो आश्चर्य तो करते हैं और आपको शॉक भी करते हैं कि यह कैसे कर दिया। नितिन नवीन का एक उदाहरण है पुराने भी। तो अब देखते हैं कि कितने लोग शॉक्ड होंगे और कितने लोग को उसमें चिंगारी नजर आएगी। जो भी होगा हम आपके सामने लेके आते रहेंगे। तब तक के लिए नमस्कार। कॉपीराइट 1976 रिपोर्टिंग स्कॉलरशिप एंड रिसर्च। यू

14:34 परमिटेड कॉपीराइट स्टैट वाइज बीन फ्रेंड्स

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