Hemant Atri on Trump Invites Modi for Gaza Peace Board: US Plans Are Trap for India

简要总结

本视频讨论了美国总统特朗普邀请印度总理莫迪加入在加沙建立和平的倡议,以及印度在此事中的潜在困境。主要观点包括:

  • 特朗普的邀请可能使莫迪陷入两难境地,因为加入可能导致国际尴尬,拒绝则可能面临美国的贸易报复。
  • 特朗普的倡议被认为是试图削弱联合国,并巩固美国的影响力。
  • 印度在对美国政策的回应上显得犹豫不决,这与一些小国敢于公开反对特朗普形成对比。

特朗普的邀请:莫迪面临的困境

讨论了特朗普邀请莫迪加入旨在加沙建立和平的倡议。虽然媒体将其解读为对莫迪的认可,但实际上,特朗普同时对印度实施关税,这使得情况复杂化。分析指出,特朗普的行动可能并非完全出于善意,而是可能将莫迪置于一个困难的境地。

特朗普的“和平委员会”:陷阱还是机会?

分析了特朗普邀请莫迪加入的“和平委员会”的性质。该委员会是一个私人组织,要求成员国捐款10亿美元。特朗普将担任该委员会的主席,即使卸任总统后也将继续担任。此外,该委员会的成员包括特朗普的亲信,如他的部长、商业伙伴和女婿。该倡议被视为特朗普试图建立一个与联合国平行的机构,以促进美国的利益。如果莫迪加入,可能会面临国际社会的批评,但拒绝则可能面临美国的报复。

印度的两难选择:如何回应特朗普?

讨论了印度在美国面前的弱势地位,以及印度政府未能对美国采取强硬立场。与其他国家(如格陵兰和加拿大)领导人公开反对特朗普形成对比,印度未能捍卫自己的利益。此外,讨论还提到了印度在查巴哈尔港项目上的退让,以及印度外交政策受制于国内商业利益的担忧。

特朗普的真实意图:诺贝尔和平奖的背后

揭示了特朗普写给挪威首相的信,信中暗示由于未获得诺贝尔和平奖,他不再感到有责任思考和平。这封信进一步揭示了特朗普对格陵兰的兴趣,以及他对北约的看法。挪威首相回应说,特朗普曾多次要求他提名诺贝尔和平奖。分析认为,特朗普的行为缺乏自尊和羞耻感,而印度应该像中国一样,采取强硬的回应。

印度的外交困境:无声的抗议

讨论了印度在国际事务中的沉默,以及印度未能对美国采取强硬立场。与其他国家(如格陵兰和丹麦)公开反对特朗普形成对比,印度未能捍卫自己的利益。此外,讨论还提到了印度在查巴哈尔港项目上的退让,以及印度外交政策受制于国内商业利益的担忧。

印度应该如何回应特朗普的邀请?

讨论了印度如何利用特朗普的邀请作为一个机会,公开呼吁特朗普停止在世界各地制造不稳定。分析认为,印度应该利用这个机会来捍卫自己的利益,并对美国采取强硬立场。然而,由于印度政府缺乏外交政策的理解,以及受制于国内商业利益,印度可能无法抓住这个机会。

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文字稿

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0:02 नमस्ते सॉलिड फैक्ट विद हेमंत अथ्री में आप सबका स्वागत है। जैसा आप देख रहे हैं हेमंत सर हमारे साथ मौजूद है। बहुत स्वागत सर। बड़ी खबर यह है कि मीडिया के पास कम से कम एक ऐसा टॉपिक आ गया है जब यह दिखाया जा रहा है लंबे समय पर कि भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी जी के लिए एक जबरदस्त काम ट्रंप साहब ने कर दिया है। हालांकि उसको कहा यह जा रहा है। एक चिट्ठी आई है। उस चिट्ठी को यह बताया जा रहा है कि नरेंद्र मोदी को इनवाइट किया है ट्रंप ने एक ऐसे प्रयास के लिए जो वो कर रहे हैं। यानी गाजा में शांति स्थापित करने के लिए वो एक मंच तैयार कर रहे हैं और उस मंच के लिए उस शांति बोर्ड में नरेंद्र मोदी को इनवाइट किया गया है। हालांकि जो चिट्ठी आई है वो तो यह कहती है कि भारत के

0:49 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इनवाइट किया गया है। खैर वो मामला अलग है। लेकिन नरेंद्र मोदी को इनवाइट किया गया है। मीडिया यह बताना शुरू कर चुकी है। सर समझना यह है कि एक तरफ टेरिफ का विवाद चल रहा है। ट्रंप साहब दनादन दनादन भारत के ऊपर टेरिफ झोंके पड़े हैं। दूसरी तरफ एक और खबर भी दिखाई जा रही है कि कुछ दाल वाल की खरीद भी अमेरिका से करता है भारत तो उस दाल पर 30% टेरिफ लगा करके भारत ने अमेरिका को बर्बाद कर दिया है ऑलरेडी वो अलग बात है कि बहुत जरा सा बहुत नॉमिनल सा दाल खरीदता है अमेरिका से भारत बाकी दूसरे देशों से खरीदता है वो उनकी उसमें मात्रा ज्यादा है लेकिन इन सबके बीच में इस टेरिफ विवाद जब ये चल रहा है ट्रंप साहब की एक चिट्ठी आती है और वो चिट्ठी जो है वो उस रॉकेट बना देती है पूरी भारतीय मीडिया को

1:36 और सबको दिखाने के लिए पूरी सरकार को कि ट्रंप तो बस अब सरेंडर हो ही गए। समझ लीजिए क्या वास्तव में इसको मान लिया जाए कि ट्रंप साहब ने जो किया है वो केवल मोदी जी के लिए किया है। मोदी जी इतने स्पेशल है कि ट्रंप साहब ने सब कुछ किनारे करके मोदी जी को बुला लिया है क्योंकि उनको पता है कि बिना मोदी जी के गांजा में शांति स्थापित नहीं हो सकती है। कहीं पे भी पूरा मिडिल ईस्ट जो है वो बर्बाद हो जाएगा। अगर मोदी जी इस शांति बोर्ड में शामिल नहीं होंगे। इसलिए ट्रम्प साहब ने चिट्ठी लिख दी। मान लिया जाए। राम प्रकाश जी नमस्कार आपको सारे दर्शक साथियों को भी। देखिए ट्रंप एक दो तलवार है। या तो आप उसके साथ हो या आप उसके खिलाफ हो। उसमें कहीं संतुलन नहीं है। और ये जो चिट्ठी लिख के उसने मोदी को भयंकर धर्म संकट में फंसा दिया। भयंकर धर्म संकट

2:21 में शब्द प्रयोग कर रहा हूं पूरी जिम्मेदारी के साथ। निमंत्रण के अंदर क्या लिखा हुआ है? ट्रंप के निमंत्रण के अंदर और उनके जो राजदूत है नए नवेले भारत में उन्होंने उसको बाकायदा ट्वीट किया है। ट्रंप साहब की चिट्ठी में कहा है कि बोर्ड ऑफ पीस के मेंबर बनो। गजा के अंदर जो बोर्ड ऑफ पीस बना रहे हैं वो प्राइवेट लिमिटेड जैसे मोदी जी का पीएम केयर्स है ना उसी टाइप का ये है। तो उसमें कह रहे हैं कि बोर्ड ऑफ पीस के मेंबर बनो और एक बिलियन डॉलर भी दो। एक अरब डॉलर भारत दे उसकी सदस्यता के लिए। ट्रंप जैसा आप जानते हैं इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे खुद का ही बना रखा है। कहीं यूएन वन की सक्शन नहीं है। कहीं कोई इंटरनेशनल बॉडी कहीं कुछ नहीं। ट्रंप एंड फ्रेंड्स प्राइवेट लिमिटेड ट्रंप इस बोर्ड के अध्यक्ष होंगे और राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी बने रहेंगे। सोचिए ऐसा कोई देखा है आपने? मतलब लाइफ लॉन्ग का भाई ने बना लिया उसमें।

3:08 इसमें कौन-कौन है जरा वो जरा समझिएगा। फिर भक्तों की आंखें अपने आप खुलंगी। इसमें ट्रंप ने अपने मंत्रियों, व्यापारी मित्रों और अपने दामाद को बना रखा है ऑलरेडी अपने साथ। इसमें जो न्योता है आपने कहा अकेले मोदी को भेजा है क्या? नहीं राम प्रकाश जी 60 देशों को न्योता भेजा है उन्होंने ये और मजे की बात ये है कि रूस और चीन को न्योता नहीं दिया गया है और पाकिस्तान को भी न्योता दिया है। तो ट्रंप बेसिकली क्या है? ट्रंप का खेल यह है कि वो यहां पर पूरे गजा की जो जमीन है उसको कब्जा करके खास अंदाज में और वहां पर रियल स्टेट का धंधा करना चाहते हैं। लगातार उन्होंने पहले इस तरह की चर्चा जब इजराइल गए थे तब भी उन्होंने इस तरह की बातें की थी। बेसिकली ट्रंप कर क्या रहे हैं? ट्रंप संयुक्त राष्ट्र के समानांतर इस निजी क्लब को खड़ा कर रहे हैं। मकसद क्या है? संयुक्त राष्ट्र संघ को हमेशा के लिए

3:54 निपटा देना और अमेरिका की जो हजमनी है, अमेरिका का जो वर्चस्व है उसको कायम कर देना। समस्या मोदी जी के ले आएगी। अगर वह डर कर शामिल हो जाए तो क्या मुंह दिखाएंगे? एक अरब डॉलर जमा क्यों कराएं? वो उनके घर का पैसा तो है नहीं। वो तो देश का पैसा है। सवाल उठेंगे यहां पर भी पूरी दुनिया में और अगर नहीं उसको नकारेंगे तो आपको पता ही है फिर ट्रंप का क्या होता है। पता नहीं किस बात का टेरिफ कहां पर लगा दे जाकर के। किस चीज पे क्या रोक लगा दे। वो तो बिल्कुल सनकी आदमी है एक तरीके से। तो बेसिकली क्या है कि ये गजा के नाम पर संयुक्त राष्ट्र को खत्म करने की एक भूमिका तैयार कर रहे हैं ट्रंप। और अगर भारत इसमें शामिल होता है तो भारत के लिए बड़ी मेजर इंटरनेशनल ए्बरेसमेंट होगी और एक कलंक की तरह होगी ये भारत के माथे पर। तो अब समस्या है कि मोदी करे तो करे क्या?

4:41 पाकिस्तान से आप क्या ही तुलना करेंगे? पाकिस्तान तो पहले गोदी में बैठा हुआ है। अमेरिका की गोदी में है। चीन उनको समय-समय पर सारी चीजें करता रहता है। थपकी देता रहता है। तो उनका तो कोई आत्मसम्मान है नहीं। भारत जैसा बड़ा देश कोई जो कभी गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पूरी दुनिया का एक सिरमोर रहा है उसको इस तरह के धर्म संकट में फंसा करके बेसिकली इनकी जो फाल्ट लाइंस है मोदी की और जो जिन डरों के कारण मोदी हर बार झुक जाते हैं मोदी के ट्रंप के सामने झुकने का एक उदाहरण नहीं है। आप अगर उंगलियों पर गिरने लगेंगे तो शाम हो जाएगी। बिना किसी मतलब के बिना कोई उसके वो एक बार इशारा करते हैं ये खुद ही झुक जाते हैं। ठीक? और जयशंकर कहते फिरते हैं कि भारत के खिलाफ एक तरफ इस तरह की कारया करना ठीक नहीं है। आप उसका प्रतिवाद क्यों नहीं करते? आप वहां पर जो आपकी एंबेसी है

5:29 उसकी बजाय आप वहां पर जो लॉबिंग फर्म्स है उनकी मदद से तो आप अमेरिका के अंदर अपने वो करवाते हैं। तो ये भारत की डिप्लोमेसी खड़ी कहां कर दी है लाके राम प्रकाश जी? सवाल तो इसका रहेगा ना। एक एक सर वैसे तो मेरे मेरी नसों में जो है खून दौड़ता है और हर परिस्थिति में खून ही दौड़ता है। पर जब धंधे धंधा शब्द जब सुनाई देता है तो थोड़ा वो सर्कुलेशन बढ़ जाता है। आपने धंधे का जिक्र किया मोदी जी के लिए आप कह रहे हैं कि भयंकर मुश्किल खड़ी कर दी। मुझे तो अब अपॉर्चुनिटी दिखने लगी कि अगर वहां पर रियलस्टेट का व्यापार होगा तो बात तो जमीन की ही होगी और हमारे अडानी साहब कहां पीछे रहेंगे? मोदी जी वहां जाके कुछ थोड़ा बहुत जुगाड़ नहीं कर देंगे अडानी साहब के लिए। वहां हिस्सेदारी मांग लेंगे ट्रंप से कि अरे भाई कहीं कोने अतड़े में दे दो हमारे भी राष्ट्र सेठ हैं यहां कुछ चमकाएंगे कुछ लगाएंगे कुछ

6:15 बनाएंगे हमें भी मौका दे दो एक तो तो ये तो हमें तो अपॉर्चुनिटी के तौर पर दिख रहा है आप कह रहे हैं भयंकर मुश्किल बढ़ा दी अरे राम प्रकाश जी राष्ट्र सेठ के कारण ही तो ये सारा देश भुगत रहा है राष्ट्र सेठ का ही तो छापा है सारे का सारा राष्ट्र सेठ कभी भी जमीन को लेकर के उस पर फदर कुछ नहीं बनाता वो तो बनी बनाई में खेल करने का आदि है हिंदुस्तान के अंदर तमाम एयरपोर्ट से ले पोर्ट से लेकर के दुनिया भर का इंफ्रास्ट्रक्चर सारी चीजें आप देख तो रहे हैं और आज अमेरिका जो हमारी आर्म ट्विस्टिंग कर रहा है उसका सबसे बड़ा कारण क्या मानते हैं आप वो राष्ट्र सेठ का मुकदमा ही तो है वहां पर और भी चीजें होंगी ऐसा मैं नहीं कहता लेकिन यशवंत सिन्हा और सुब्रमण्यम स्वामी जैसे तमाम लोग वो सरेआम राष्ट्र सेठ का नाम लेते हैं तो हमारे राष्ट्र सेठ को वहां कौन घुसने देगा वहां तो एक से एक बड़े इतने ट्रंप के जो जितने यार दोस्त हैं आपको पता है कितने

7:00 खरबति अरबपति किस तरीके के लोग हैं किस इन्फ्लुएंस के लोग हैं वो और भारत के लिए तो गजा में जाकर करके इस तरह के धंधे की बात भी सोचना। लॉन्ग टर्म की डिप्लोमेसी का डिजास्टर हो जाएगा। क्योंकि आपने देखा इजराइल और गजा के दौरान हमारी किस तरह की चुप्पी थी। तो वो सारी इंटरनेशनल डिप्लोमेसी का तो सत्यानाश हम ऑलरेडी मोदी जी के सौजन्य से कर चुके हैं। अगर इसमें शामिल हो गए तो यह ना कटाने वाला काम एक और हो जाएगा कि संयुक्त राष्ट्र को निपटाया जा रहा था और भारत उसके अंदर हिस्सेदार था और पैसे देकर के था। एक अरब डॉलर कोई छोटी अमाउंट नहीं होती। वो भाई तो कोई वो क्लब बना रहा है बाकायदा एक तरीके का। सदस्यता किस चीज की होती है? क्लब की होती है। तो इस तरह की चीजें ट्रंप कर सकता है और यहां पर कोई बोलने वाला ही नहीं है। और भारत के ऊपर तो आप सोचिए ना दुनिया का हाईएस्ट टेरिफ इस समय चल रहा है। भाई रशिया से तो बहुत लोग तेल

7:47 खरीद रहे थे। केवल हम पर ही टेरिफ क्यों लगा? चाइना पे लगा के देख लेते ना एक बार कि पहले ईरान से हमारा तेल बंद करवाया। दुनिया का सबसे सस्ता तेल था। फिर रशिया ने हमें थोड़ा सा सस्ता देने की कोशिश की। वहां से बंद करा दिया। तो ये स्थिति हम मान जाते हैं यार एक बात को। अब जो है चबार वाले पोर्ट को लेकर के वहां से इशारा आया नहीं 25% टेरिफ का आराम छोड़ के भाग खड़े हुए। क्या ही मतलब है ₹186 करोड़ देश का निवेश हो रखा है वहां पे। लॉन्ग टर्म की हमारी जितनी स्ट्रेटेजिक चीजें थी वो सारी धराशाई होगी। कोई बोलने वाला नहीं है। किसी के पल्ले ही कुछ नहीं है। आपका डंका बज रहा है। तो ये जो चीज है बेसिकली ट्रंप ने अब हमारी फाल्ट लाइन पकड़ ली है। ऐसा तो नहीं कि वो राष्ट्र सेठ के नाम पर ही हाथ मरोड़ रहा हो। इसीलिए आप नहीं बोल पा रहे हो। वरना तो देखिए ना ग्रीनलैंड की सारी जनता 56000 का देश है। ग्रीनलैंड का

8:32 प्रधानमंत्री रोज लाल आंख दिखाता है ट्रंप को। पूरा यूरोप लाल आंख के रोज दिखा रहे हैं। कल पूरी जनता सड़कों पे थी। इतने सर हम ग्रीनलैंड पे आ रहे हैं। उसके पहले जरा ये अगर मगर वाली बात नहीं एक चीज एक्सजेक्टली बताइए कि क्या आज हम इस स्थिति में खड़े हैं? जब आपने चाबहार का जिक्र कर दिया। टेरिफ पर हम देख ही रहे हैं। क्या वास्तव में हम इस स्थिति में खड़े हैं कि ट्रंप की चिट्ठी के बाद इंकार कर सके कि हम इस बोर्ड का हिस्सा नहीं बनेंगे या फिर यह चिट्ठी नहीं है। सीधा-सीधा आदेश माना जाए कि हां भाई आ जाओ। नहीं राम प्रकाश जी अब तक का तो इतिहास पिछले चारप महीने का तो यही कहता है कि वहां से जो भी फोन पे भी कोई मैसेज आता है और यह कार्यक्रम कहां से शुरू हुआ था? ऑपरेशन सिंदूर से शुरू हुआ था। अगर आपको याद हो तो ऑपरेशन सिंदूर में लड़ रहे थे भारत और पाकिस्तान और युद्ध विराम की

9:18 घोषणा ट्रंप कर रहे थे। आप तो आधे घंटे बाद आपके विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आए दो लाइन बोल के चले गए। उससे पहले तो पाकिस्तान के डीजीएमओ ने ही बोल दिया था। तो वो चीजें वहां से शुरू होती है और उसके बाद एक तरीके से भारत की सारी की सारी विदेश नीति भारत की अर्थनीति एक तरीके से अप्रत्यक्ष तौर पर सीधी ट्रंप के वहां से डिक्टेट होने लगी। चाहे वो युद्ध विराम का मामला हो। नंबर एक नंबर दो ईरान का मामला हो। नंबर दो रशियन तेल का मामला हो, चबाहार का मामला हो, जितने भी इश्यूज है और जो भी आपकी जो ट्रेड डील का जिसका आपने शुरू में जिक्र किया ट्रेड डील को लेकर भी जितनी भी खबरें आई वो ट्रंप के मुंह से आई कि होने वाली है, ये होने वाला है, वो होने वाला है और रही कसर अब लुटनिक ने उतार दी कि ट्रेन निकल गई है और उसके बाद अब भारत वो करना चाह रहा है। तो वो बेसिकली डे इन एंड डे आउट आपको ए्बरेस कर रहे हैं और आप ए्बरेस हो रहे हो विदाउट

10:04 गिविंग ए प्र आंसर और डिफिटिंग आंसर। इसलिए मैंने जिक्र किया कि छोटे-छोटे देश 56,000 की आबादी वाला देश ट्रंप को ला ला के दिखाकर कहता है कि हम बिकाऊ नहीं। कनाडा के प्रधानमंत्री ने जो ट्रूडो थे उन्होंने ट्रंप के मुंह पे कहा कि हमारा देश बिकाऊ नहीं। लेकिन हमारे वाले तो दूर बैठ के भी नहीं कह पा रहे। ट्रेजडी तो ये है ना राम प्रकाश जी कि आप 24 घंटे डंके की बात करते हो। विश्व गुरु होने की बात करते हो। आप एक शब्द तो नहीं बोल पा रहे। किस तरीके से वो आदमी हमें डिक्टेट कर रहा है टर्म्स को और पूरी दुनिया देख रही है। पूरी दुनिया देख रही है। अब आपकी क्या सा रह जाएगी? रशिया आपको किस रूप में देखेगा? पुतिन यहां आए थे। आपने कौन से समझौते कर लिए उनसे? बताइए कौन से समझौता कर लिया? इतनी बड़ी राष्ट्रीय अध्यक्ष की वो आ रही है। आपका टाइम टेस्टेड फ्रेंड है दशकों का। क्या हुआ उसका आउटकम? उसका एक आउटकम

10:50 था कि वो मोदी की गाड़ी में बैठे एयरपोर्ट से। मोदी के साथ बैठ के आए। जैसे ब्रिक्स का था कि मोदी उनकी गाड़ी में बैठ के गए। इसके अलावा तो आपकी कोई विदेश नीति बची नहीं। अभी जर्मन चांसलर आए थे उनको बिल्डिंग इशारा कर के फोटो खिंचवा रहे थे। देखिए ऊपर देखिए तो यह तो आपकी विदेश नीति रह गई है। पूरी दुनिया को पता लग गया है कि अमेरिका के हम दबाव में है और दुनिया के बाकी देशों को ये भी पता है कि भारत इस समय सबसे ज्यादा वनरेबल है। बिकॉज़ ऑफ़ अमेरिका जिस तरीके से वो ट्रंप्स डिक्ट दुनिया के किसी देश ने उस तरीके से घुटने टेक अब तक जैसे ट्रंप ने टेक दिए। तो अपने कहने में मोदी ने टेक दिए। किसी भी मसले पर ग्रीनलैंड 56,000 की आबादी का देश है। उनका प्रधानमंत्री ला के दिखा के बात करता है। कल सारी जनता सड़कों पर थी। अमेरिका अपने क्या नाम है? डेनमार्क छोटा सा देश है। इस तरीके से ट्रंप को कहा कि इतना

11:35 आसान नहीं है आपके लिए। पूरे का पूरा यूरोप सामने खड़ा हुआ है। हमारे मोदी जी के मुंह से एक शब्द नहीं निकलता। वो घूम रहे हैं। बंगाल के अंदर महाजंगल राज कायम। ममता बनर्जी ने ये कर दिया, वो कर दिया। 24 घंटे का यही काम रह गया। कहीं पर डमरू बजा रहे हैं। कहीं पर शोभा यात्रा निकाल रहे हैं अपनी। दुनिया में क्या हो रहा है उनको कोई मनक ही नहीं है या उसको अवॉयड नहीं कर क्योंकि असली मुद्दों पर तो वो कभी बात करते नहीं सवाल जवाब के वाद ही नहीं विदेश मंत्री बाहर जाके कह रहे हैं कि भारत पे एक तरफ कारवाई ठीक नहीं है तो भैया बोलिए ना आपके पास तमाम प्लेटफार्म से प्रेस कॉन्फ्रेंस कीजिए सवाल जवाब कीजिए पूरी दुनिया के लोग करते हैं आपको क्या हो गया आप केवल फर्जी 56 इंची वो 56 इंची अब दिख रहा है सब जगह सर एक तरफ ग्रीनलैंड पे कब्जे की बात हो रही है लगातार और दूसरी तरफ जो है वो तो

12:22 अब ये शांति स्थापना की बात भी होना शुरू हो गई। तो इसमें क्या ग्रीनलैंड पर जो कब्जे की बात हो रही है उसको धमकी मान लिया जाए? कोरी धमकी या फिर यह जो शांति स्थापना की बात हो रही है इसको कोरा जो है शुद्ध ढकोसला दिखावा माना जाए। असल में यह शांतिवंत स्थापित करना कहीं कोई मकसद ही नहीं है। पूरा खेल बिजनेस है। पूरा खेल धंधा है। पूरा खेल जमीन पर संसाधनों पर कब्जे का है। एग्जैक्टली वही चीज है। बेसिकली एक नई मतलब शर्मनिरपेक्षता की एक और सीधी लागते वाला है कि ट्रंप का कोई लेवल नहीं है। उससे भी आगे जाते उसने एक नया कारनामा कर दिया। दर्शकों के लिए बता दूं। ट्रंप ने नॉर्वे के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है। आपको पता है नॉर्वे से ही नोबेल प्राइज होता है। नोबेल से मिलता है। मैंने फोटो भी भेजा है। दिखाइएगा उनकी मुलाकात

13:08 का। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोस गोहरको स्टोर को एक चिट्ठी लिखी है उन्होंने और उन्होंने जो लिखा है मैं आपको कोर्ट अनकोट कहके बताता हूं। अब सिर्फ शांति के बारे में सोचने की कोई जिम्मेदारी महसूस नहीं होती क्योंकि मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। कोर्ट। अब मैं चिट्ठी पढ़ रहा हूं उनकी। प्रिय जोस यह देखते हुए कि आपने आपके देश ने आठ से ज्यादा युद्ध रोकने के बावजूद मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया। अब मुझे सिर्फ शांति के बारे में सोचने की कोई जिम्मेदारी महसूस नहीं होती। सोचिएगा। हालांकि यह हमेशा जरूरी रहेगा। लेकिन अब मैं सोचता हूं कि यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका के लिए क्या अच्छा है और क्या सही है। डेनमार्क उस जमीन को रूस या चीन से नहीं बचा सकता। और वैसे भी उनके पास मालिकाना हक क्यों है? कोई लिखित दस्तावेज

13:55 नहीं है। बस सैकड़ों साल पहले एक नाव यहां उतरी थी। लेकिन हमारे नार्वे भी नार्व में भी वहां उतरी थी। मैंने नाटो के गठन के बाद से किसी भी दूसरे व्यक्ति से ज्यादा नाटो के लिए काम किया है। और अब नाटो को यूनाइटेड स्टेट्स के लिए कुछ करना चाहिए। जब तक ग्रीनलैंड पर हमारा पूरा और फुल कंट्रोल नहीं होगा। दुनिया सुरक्षित नहीं है। धन्यवाद डोनाल्ड जूनियर ट्रंप। नॉर्वे के प्रधानमंत्री का कहना है कि ऑल रिकॉर्ड कहा उन्होंने वो मोदी की तरह नहीं है। सूत्रों से नहीं बता रहे। नॉर्वे के प्रधानमंत्री ने चिट्ठी आते ही कहा ट्रंप ने बारंबार नोबेल पुरस्कार के लिए मुझसे याचना की थी। मैंने उनको बताया था कि नोबेल पुरस्कार का फैसला एक स्वतंत्र कमेटी कैद करती है और उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। ये नॉर्वे का

14:43 प्रधानमंत्री भी जवाब देने में सक्षम है। ट्रंप की चिट्ठी का। आपके 56 इंची नहीं देंगे। आपका वो लेजर आइज नहीं देगा। आप सोचिए कैसा राष्ट्रपति है ये अमेरिका का। इसका कोई आत्मसम्मान ही नहीं है। इसको कोई शर्म ही नहीं है। इसकी यही कूटनीति मतलब आप नोबल पीस प्राइज भी गन पॉइंट पे ले लेंगे क्या? क्या कह रहे हैं नॉर्वे के प्राइम मिनिस्टर कि बार मेरे से कई बार मिले और बारंबार मुझसे नोबेल पीस प्राइज की मांग कर रहे थे। याचना कर रहे याचना इस द वर्ड। तो ऐसे व्यक्ति को ऐसे मर्यूरियल व्यक्ति को आप कैसे वो करोगे? उसका एक ही तरीका है जो चाइना ने अपनाया। वो एक लाइन बोलता है। चाइना दो लाइन में ठोक के जवाब देता है। उसके बाद उसकी सिटी पिट्टी हो जाती है। आप क्या करते हो? हमने दालों के ऊपर यह कर दिया। अरे भले आदमी हो। तुम्हारे पास कोई ऐसी चीज है जिससे

15:29 अमेरिका घुटनों पे आ जाए। चाइना के पास तो रेयर मटेरियल से लेकर के तमाम ऐसी चीजें हैं जो उन्होंने उसका बना दिया जो कुछ भी ट्रंप का बनाना था। आप तो 24 घंटे रहेंगे। इनके अलावा कोई काम ही नहीं कर और ये आईटी सेल और भक्त मंडली के थ्रू पूरे देश में प्रोपगेंडा फैला रहे हो। आज राम प्रकाश जी दुनिया जिस मोड़ पर खड़ी हुई है जिस तरह की परिस्थितियां इस व्यक्ति ने क्रिएट कर दी आपने देखा कल जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर दोबारा धमकी दी फ्रांस के राष्ट्रपति ने अलग से ट्वीट किया ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर ने अलग से ट्वीट किया सब वहां पर पांच छह देशों के दोद तीन-तीन सैनिक सिंबॉलिकली भेजे गए किसी का एक सैनिक किसी का दो ग्रीनलैंड के अंदर पांच सैनिक सात सैनिक अमेरिका के सामने क्या कर लेंगे आपको पता है ग्रीनलैंड के अंदर अमेरिका का बहुत बड़ा अड्डा भी है सैनिक अड्डा उसके बावजूद भी सारा यूरोप खड़ा है ना एक इटली

16:15 की प्राइम मिनिस्टर को छोड़ दीजिए वो भी वैसे ही है वो अभी भी बीच बचाव करने की कोशिश कर रही है अदरवाइज तो पूरे का पूरा यूरोप खड़ा हुआ है और मुझे हैरानी नहीं होगी जो अगर जो थोड़े दिन पहले आपको याद होगा यूरोप के साथ जो उनकी ट्रेड डील हुई थी अगर ट्रंप इसी रास्ते पे चले तो यूरोप जो है यूरोपियन यूनियन उस ट्रेड डील को भी खारिज कर सकता है अपनी तरफ से एक तरफा रद्द कर सकता है लेकिन यहां सवाल ये है कि एक तरफ यूरोप के देश जो छोटे-छोटे होते हुए भी बहुत सीमित उनके कारण यूरोपियन यूनियन के कारण उनका दबदबा है ना अकेले अकेले में तो देश कुछ भी नहीं है। वो सारे आंख दिखा सकते हैं ट्रंप को और आपके मुंह से आवाज नहीं निकल रही। वो चिट्ठी कल आई थी जो आपने चिट्ठी दिखाई ट्रंप की अपने प्रधानमंत्री के नाम जो उनके राजदूत ने यहां पर वो ट्वीट की उस पर अब तक कोई जवाब आया है आउटराइटली रिजेक्ट होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए वो भाई संयुक्त राष्ट्र

17:01 की कोई सेंशन नहीं है उसके ऊपर कोई इंटरनेशनल कम्युनिटी कोई बैठ के बातचीत नहीं हुई ट्रंप को एक सपना आया उसने एक क्लब बना दिया और आपको निमंत्रण दे दिया जो एक अरब डॉलर वो भाई मांग रहा है वो कहां से लाओगे आपके घर का है क्या इस देश का पैसा है वो हां या ना तो बोलिए कम से कम आपके आपके विदेश मंत्रालय से प्रवक्ता से भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछा गया परसों। क्या पूछा गया कि जो ब्रिक्स की एक्सरसाइज हो रही है उसमें भारत क्यों नहीं गया? आपको पता है क्या जवाब दिया उसने? उसने कहा इस बारे में मुझे अभी जानकारी नहीं है। मैं पता करके बताऊंगा आपको। ये विदेश मंत्रालय का प्रवक्ता है। सोचिएगा कभी कि ब्रिक्स का भारत प्रेसिडेंट है इस टाइम। चेयर चेयर हमारे पास है ब्रिक्स के। उसकी एक एक्सरसाइज हो रही है और भारत के विदेशी मंत्रालय का प्रवक्ता कह रहा है। मैं पूछ के बताऊंगा आपको। आपकी विदेश नीति है यह जिसका डंका

17:48 बज रहा है पूरी दुनिया में और आप किसका मुकाबला करेंगे क्या मुकाबला करेंगे सोचिए ये ये सर एक चीज और जरा बहुत संक्षेप में यूएनएससी का जिक्र किया है ट्रंप ने बकायदा और उसमें प्रस्ताव का जिक्र कर रहे हैं वो कि प्रस्ताव पारित हुआ है और ये सारी चीजें एक वो तमाम संस्थाओं से तमाम संगठनों से खुद को बाहर करते चले जा रहे हैं और भारत को वो अपने एक संगठन में आने की वो लेना चाहते हैं तो यह क्या दिखाता है कितना कितना जरूरी है यह पत्र? कितना जरूरी है ये जो इन सारे विवादों के बीच में इस तरीके का एक समर्थन मांगना ट्रंप का भारत से और भारत के लिहाज से चुप रहना या उसका आंसर करना उसमें शामिल होना। नहीं राम प्रकाश जी आप उसकी मंशा समझिए।

18:35 वो व्यक्ति जिस तरीके का व्यक्ति है वो अपने साथ एक पिछलगुओं का एक ग्रुप बनाना चाह रहा है दुनिया को कुछ दिखाने के लिए कि मेरे साथ इतने देश खड़े हैं। तो क्या हम किसी के पिचलगु है? हम तो जब आजादी के बाद से लेकर के लेट 80 90 तक लगातार जो है गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व करते रहे इतने बड़े पैमाने पर दुनिया में और आज अमेरिका हमें हल्का सा इशारा करता है और हम वी फॉल इन लाइन ये तो कभी हुआ ही नहीं। वो तो यशवंत सिन्हा ने जो बात कही उसने कहा कि 1947 से लेकर के इस देश में बहुत थोड़ी टर्म के प्रधानमंत्री भी रहे और बहुत मजबूत प्रधानमंत्री भी रहे। बहुमत वाले भी प्रधानमंत्री रहे, अल्पमत वाले भी प्रधानमंत्री रहे। तमाम तरह की सरकार इस देश में आई। लेकिन इस तरीके से अमेरिका के सामने या किसी भी देश के सामने कभी इस देश के किसी प्राइम मिनिस्टर ने वो सरेंडर

19:20 नहीं किया जो मोदी लगातार करते जा रहे हैं। ये मैं नहीं कह रहा। यशवंत सिन्हा कहते हैं। ये उसके बाद अपने सुब्रमण्यम स्वामी को तो चलो हम सीरियसली ना भी ले। यशवंत सिन्हा तो विदेश मंत्री थे भाई जिस तरीके से हमारा जो फॉरेन के अंदर एयर बेस था वो बंद हो गया 2021 के अंदर उसका एग्रीमेंट रिन्यू नहीं हुआ चार साल तक देश को पता नहीं लगने दिया गया ईरान की जवाहर पो जो है 50 साल की तपस्या थी भारत की 1086 करोड़ लगा हुआ था चुपके से निकल के निकल चल दिए वहां पर और अब कह रहे हैं बाद में कि नहीं नहीं डिप्लोमेटिक एफर्ट्स आर ऑल वेबसाइट से भी हटा दोगे आप अमेरिका कोई थानेदार है क्या अमेरिका हमारा माई बाप है वो हमें कैसे हाक सकते हैं? राम प्रकाश जी हमारी विदेश नीति को वो कैसे तय कर सकते हैं? उसको यह पता है कि भारत की उसको

20:06 फाल्ट लाइन पता लग गई। आप सोचिए वहां का एक उसका सलाहकार बैठ के ये कह रहा है कि चेक जीपीटी के अंदर हैवी इन्वेस्टमेंट करते हैं हम। बिजली की सब्सिडी देते हैं हम और भारत जैसे देश उसका यूज़ करते हैं। तो भारत तो उनका शत्रु राष्ट्र हो गया ना एक तरीके से। वो व्यक्ति जो 24 सुबह से शाम तक मेक अमेरिका ग्रेट अगेन जो उनको सिखाता है ट्रंप को पढ़ाता है। वो वहां बैठ के कह रहा है कि बिजली और जितने भी डाटा सेंटर्स है उसका तो सब सब्सिडाइज करें हम और उसका प्रयोग करें भारत। आज की तारीख में 50% टेरिफ आपके ऊपर ऑलरेडी है जो चाइना के ऊपर भी नहीं है। चाइना उनका मेन कंपटीिट है। उनसे उनका शत्रु भाव है। हमारे साथ तो नहीं है। हम तो उनके स्ट्रेटेजिक पार्टनर की श्रेणी में है। सो कॉल्ड और हमारे ऊपर 50% टेरिफ ना हमें ईरान से तेल खरीदने देगा ना हमें रूस से

20:52 तेल खरीदने देगा। और आपका प्रधानमंत्री एक शब्द नहीं बोल रहा। तो बाहर छोड़ के भाग जा रहा है। जो मर्जी आए उस तरीके से कर रहे हैं और उसके बाद भी कहते हैं हमारा डंका बज रहा है। तो यह जो चीज है यह तो कहीं ना कहीं रोकना तो पड़ेगा ना। एक बार तो अमेरिका को इफेक्टिव स्नब करना पड़ेगा ना। है किसी में दम? जब चाइना की बात आएगी तो क्या बोले जयशंकर? कि हमसे छह बड़ी अर्थ गुना बड़ी अर्थव्यवस्था है। आप चाहते हैं कि मैं उससे झगड़ा मोल ले लूं। तो अमेरिका तो उससे भी बड़ी अर्थव्यवस्था है। भाई साहब फिर तो इसलिए सरेंडर है क्या? सोचने की बात नहीं जयशंकर के शब्द मेरे आप के तो है नहीं तो जिस सरकार की विदेश नीति ये हो कि अपनी से बड़ी अर्थव्यवस्था से पंगा नहीं लेना तो फिर तो इस देश का भगवान ही मालिक है ना ये तो जयशंकर के शब्द है मेरे आपके नहीं है और अमेरिका तो फॉर दैट मैटर चाइना

21:39 तो जो भी है या नहीं वो एक अलग पक्ष है लेकिन अमेरिका तो वर्ल्ड पावर तो है ही ना इसमें तो कोई शक नहीं और 90 के बाद हमारे लगातार उनसे संबंध सुधरते रहे मोदी जी उनके लिए नारे लगाते रहे अबकी बार ट्रंप सरकार नमस्ते ट्रंप आवडी मोदी उन्होंने ही किया था। इनहीं भक्तों ने उनके लिए हवन किए थे। तपस्या की थी। तमाम चीजें की थी। अब कोई क्यों नहीं बोल रहा? ईरान से ईरान में दुनिया का सबसे सस्ता तेल हमारी टर्म्स के ऊपर हमें मिलता था। क्यों बंद किया आपने अमेरिका के? चाइना ने तो नहीं किया। चाइना तो आज भी रशिया से ले रहा है। आप क्यों छोड़ के भाग गए? और आप कह रहे हो हमारी स्वतंत्र विदेश नीति है। हमारा दुनिया में डंका बज रहा है। कौन सा डंका है? दिखाइए तो सही। 56 इंची है हमारा। बताओ को 56 इंची है। इसीलिए ट्रंप उन फॉल्ट लाइंस का फायदा उठा। उनको पता है याद ही बोलेगा ही नहीं।

22:25 चाइना क्या करता है? चाइना ने इंडिया के अंदर जो हमारी टेरिटरी का जो किया उनको पता था ये स्वीकार ही नहीं करेगा और वही काम किया। जैसे ही फर्स्ट अवेलेबल अपोरर्चुनिटी आई ना कोई आया है ना कोई घुसा है। फिर ठीक। तो यह जो चीज है इसी का वर्ल्ड रीडर्स को पता लग गया कि इसने तो फोटो अपॉर्चुनिटी करनी है। पतंग उड़ाने हैं। कार में बैठना है। किसी को कार में बिठाना है। अगले की डिप्लोमेसी यहीं तक है। प्लस जो आपने राष्ट्रीय सेठ का जिक्र किया उसकी जो फाल्ट लाइंस है वो इस देश के लिए लायबिलिटी बनती जा रही है। ये हकीकत है। सर एक और चीज है जिस जो हिसाब किताब है जो हम देख रहे हैं जिस तरीके से इस समय ये सारी चीजें चल रही हैं। क्या भारत के लिए यह चिट्ठी एक ऐसी अपॉर्चुनिटी नहीं बन सकती है कि आज हम सबसे पहले ट्रंप को जब

23:10 खुद ट्रंप की तरफ से चिट्ठी आई है तो ट्रंप को पहले यह कहे साफ तौर पे सार्वजनिक तौर पे कि पहले तो यह जो आपके इशारे पर पूरी अशांति दुनिया के कई अलग-अलग जगहों में फैल रही है। आप इस पर इमीडिएट रोक लगाइए। तब आप शांति की बात करिए। फिर हम शांति पर आपके साथ चलेंगे कि नहीं चलेंगे यह सोचेंगे। उस पे हम खड़े होंगे। क्योंकि फिलिस्तीन की बात जब होती है तो आज भारत मौन है। लेकिन इसके पहले तो हमेशा भारत जो है उसको रिकॉग्नाइज करता रहा है। परिस्थितियां हमने देखी है। उनके साथ खड़ा रहा है। तो क्या ये चिट्ठी खुद एक सामने से आए हुए अवसर के तौर पर नहीं दिखाई दे रही है। अब भारत सरकार क्या उसको गैब करती है कि नहीं करती वो एक अलग बात है। पर अवसर के तौर पे दिख तो रही है। राम प्रकाश जी अवसर उनके पास होता है जिनको विदेश नीति की समझ होती है। चवाह

23:58 पोर्ट जो थी वह तो ऐसी चीज थी जो इंडिया और अमेरिका दोनों के लिए विनिंग सिचुएशन थी और आपको ध्यान होगा छ महीने पहले तो उन्होंने हमें बेवर दिया था चवा में क्यों क्योंकि पाकिस्तान और चाइना को इफेक्टिव उस पे चेक करने के लिए एक बहुत बढ़िया सीपेक का काउंटर था वो कि हम बिना पाकिस्तान को छुए सीधे सेंट्रल एशिया में वहां अफगानिस्तान जा सकते थे चाइना शुरू में अमेरिका ने दिया वेवर इस बार उन्होंने 25% का वो लगाया आप चबाहार भी छोड़ के भाग खड़े हुए वेबसाइट तक से हटा दिया तो आप क्या ही मौके का फायदा उठाओगे चबा तो केवल इंडिया का नहीं उसमें तो अमेरिका का भी फायदा था जो साउथ एशिया में जो रीजनल बैलेंस करने की बात है उसमें तो उनका विन विन सिचुएशन थी उसके बाद भी उस नकारा आदमी को ये नकारा सरकार कुछ नहीं समझा पाई बोल ही नहीं पाई अभी तक ऑफिशियल एक वर्ड है क्या इसमें चहर वाले मामले पे आप कह रहे

24:44 हो कि फिलिन की बात करेंगे अरे अपना घर तो संभाल लो पहले ईरान से तेल बंद कराया एक शब्द निकला मुंह से वहां रशिया से बंद कराया क्या कह रहा है उनका ट्रंप का जो सांसद है एयरफोर्स वन के अंदर खड़ा हो के कि मैं गया था राजदूत के घर पे इंडियन राजदूत के घर पे उसने कहा कि राष्ट्रपति जी को बताओ आप कि हमने तेल कम कर दिया और आप हमारी वो कम कर दीजिए टेरिफ तो जिस आदमी की हैसियत ये बच गई हो कि आंख में आंख डालने की बजाय सांसदों के जरिए लॉबिंग फर्म्स के जरिए आप अमेरिका से कूटनीति निभा रहे हो आपको क्या लगता है वो कोई मुद्दे की बात कर पाएगा वो फिलिस्तीन की बात कर पाएगा फिलिस्तीन पे अकेले भारत का नहीं भारतीय जनता पार्टी की जो अटल बिहारी की वाजपेयी की सरकार थी वो भी एक कंटिन्यूटी में थी हमारी पॉलिसी ये नरेंद्र मोदी की जो धर्म के आधार पर

25:30 कूटनीति तय करने वाली चीज है उसने सत्यानाश किया है जो एक शब्द नहीं बोल पाते ये वहां पर इजराइल के कौन सा प्रेम है आपको भी पता है पेगासस कहां से आया था क्या था क्यों नहीं आया उसका जवाब सुप्रीम कोर्ट में क्यों नहीं दिया वो आज भी एक पहल ही उसकी एक जांच हुई थी सुप्रीम कोर्ट ने कराई थी वो कहां है जांच रिपोर्ट वो किसी को नहीं पता तो जो यह अमेरिका और सारा धंधा चल रहा है इसमें राम प्रकाश जी देयर आर मेनी थिंग्स जितना हम सोचते हैं उससे कहीं ज्यादा की चीजें इसीलिए यह आवाज नहीं निकल रही है और आज की तारीख में कोई स्वीकार करे या ना करे यह सरकार बीजेप जो मोदी की सरकार है और पर्टिकुलरली प्रधानमंत्री ट्रंप की फायरिंग लाइन में बिना कारण के नहीं देयर मस्ट बी सर्टेन वेरी सॉलिड रीज़ंस नहीं तो कोई प्रधानमंत्री ऐसे निशब्द नहीं होता

26:15 निशब्द कह रहा हूं शब्द में एक शब्द नहीं बोल पाते आप वरना क्या कारण है कि ग्रीनलैंड जैसे देश डेनमार्क जैसे देश छोटे-छोटे देश सारे के सारे धमाकेदार जवाब जवाब दे रहे हैं और आपके मुंह से एक शब्द नहीं निकलता। अमेरिका नहीं निकलता आपके मुंह से। पहले आपके मुंह से चीन नहीं निकलता था। शी जिनपिंग नहीं निकलता था। तिब्बत नहीं निकलता था। अब आपके मुंह से अमेरिका नहीं निकलता। अब आपके मुंह से ट्रंप नहीं निकलता। तो बिना कारण थोड़ी है ये। इसके सॉलिड रीज़ंस है। देयर आर सर्टेन फाल्ट लाइंस। इस देश को जानने का हक है। तो आप कह रहे हो कि गजा की बात करेंगे। अपनी तो कर लो पहले। भाई चवा जवाहर पोस्ट जो थी चाइना के सीपक का सीधासीधा जवाब था सेंट्रल एशिया तक जाने का पूरा एक वो क्या किया उन्होंने फिर लगा दिया और उन्होंने कहा नहीं चहर का

27:02 उससे पहले ही छोड़ गए भाग गया अब कह रहे हैं कि नहीं फला डेट तक हमारा वो है सशन अवेवर है उसके अंदर फिर भागे क्यों थे किसी चीज का कोई जवाब तो है ही नहीं ना ये हालत है देश की और ये हालत तब है जब इस देश का एक कैरियर डिप्लोमेट विदेश मंत्री कोई एनआईडी हो ना तो भी समझ में आता कैरियर डिप्लोमेट जयशंकर सर यह हालात ही शायद इसीलिए है कि कैरियर डिप्लोमेट जो है वह विदेश मंत्री है। मुझे लगता है कि शायद अगर कोई राजनीतिज्ञ राजनीतिक व्यक्ति विदेश मंत्री होता तो यह हालात नहीं फेस करने पड़ते हमें। यह हालात ही उस व्यक्ति की वजह से है क्योंकि वो व्यक्ति इतना डिप्लोमेटिक है कि उसका अपने अपने परिवार की हिस्ट्री देख लीजिए तो समझ में आ जाता है कि डिप्लोमेसी का ये स्तर जो है वो कैसे उठा पाएंगे बेचारे क्योंकि

27:47 वो तो खुद बोझ में दबे हैं। जिनके जिन वो जब चाहे तब गन पॉइंट पर उनकी फैमिली आ जाएगी। इसके लिए वह क्या-क्या प्रयास करते दिखते हैं हम सबको पता है। तो उस स्तर पर वह कौन सी विदेश नीति बनाएंगे और कौन सी विदेश नीति चलाएंगे वो सब वही है चंद्रचूर साहब वाले भगवान भरोसे चल रहा है मामला। बहुत शुक्रिया सर हमसे बात करने के लिए। थैंक यू सो मच।

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