Trump, Putin, and Pakistan: Is India Being Cornered?

简要总结

本视频讨论了特朗普与普京的对话,以及特朗普声称调解印巴停火的问题,并分析了这对印度外交政策的影响。其中关键点包括:

  • 特朗普似乎对印度总理莫迪抱有敌意,不断公开谈论印巴问题,对印度造成负面影响。
  • 印度政府对此保持沉默,可能损害印度的国际形象。
  • 俄罗斯在印巴冲突中保持中立,对印度来说是一个令人担忧的信号。
  • 印度外交政策正面临挑战,需要明确立场以维护国家利益。

特朗普对莫迪的敌意

特朗普似乎对印度总理莫迪怀有敌意,不断试图通过公开谈论印巴问题来破坏莫迪的稳定。特朗普一再声称自己促成了印度和巴基斯坦之间的停火协议,这似乎是一种心理战,旨在削弱莫迪的地位。印度总理对此保持沉默,这不仅损害了他个人的形象,也损害了印度的国际形象。特朗普的言论公开嘲讽印度的外交政策,而印度的沉默可能会被解读为软弱。

俄罗斯的立场

特朗普与俄罗斯总统普京讨论了印巴问题,而俄罗斯是印度的传统盟友。然而,在印巴冲突期间,俄罗斯保持了中立立场,这让印度感到担忧。如果俄罗斯不公开支持印度,这对印度来说是一个令人担忧的信号。印度需要重新评估其外交政策,并对特朗普的言论做出回应,否则印度可能会被视为一个软弱的国家。

对莫迪团队的评估

莫迪的团队未能正确评估特朗普的性格和优先事项。起初,莫迪政府对特朗普表示欢迎,甚至在美国为他拉票,营造了一种两人是“兄弟”的形象。然而,他们忘记了特朗普首先是美国总统,他的首要任务是美国的利益。莫迪的团队未能认识到特朗普的自我中心和不稳定的性格,导致了外交上的失误。特朗普与埃隆·马斯克关系的迅速破裂就是一个例子,表明特朗普的友谊是不可靠的。

外交政策的失败与对印度的影响

由于对特朗普的误判以及可能存在的顾问团队问题,莫迪政府的外交政策遭遇失败。巴基斯坦从中受益,而印度在国际舞台上受到孤立。印度未能阻止国际货币基金组织(IMF)和亚洲开发银行向巴基斯坦提供财政援助,并且没有收到七国集团(G7)峰会的邀请。特朗普不断声称印度屈服于美国的压力,进一步损害了印度的形象。

印度外交政策的现状

目前,在莫迪的领导下,印度外交政策正处于低谷。印度在国际舞台上显得孤立无援,既没有得到第三世界国家的支持,也没有得到美国、中国或欧盟的支持。甚至与俄罗斯的友谊也存在疑问,因为俄罗斯最近与巴基斯坦签署了一项价值数十亿美元的协议。特朗普似乎希望通过散布“莫迪投降”的言论来进一步削弱莫迪的地位,而如果总理“投降”,整个国家也会陷入“投降”的境地。

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文字稿

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0:00 [संगीत] ट्रंप साहब ने नरेंद्र मोदी की सुपारी ले रखी है। कहीं ना कहीं वो कोई बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक कन्व करवाना चाहते हैं। एक बार भी देश के प्रधानमंत्री उनका जवाब नहीं दे रहे हैं। रूस ने खुलकर भारत का साथ नहीं दिया तो यह भारत के लिए और चिंता का विषय है। नहीं तो पूरी दुनिया में भारत की छवि एक भी देश की बनेगी। अब तो ट्रंप और एलन मस्क के एक्ट्स हो गए हैं और उससे देश को नुकसान हो रहा है और बहुत जबरदस्त नुकसान हो रहा है। नरेंद्र मोदी इस वक्त कुछ गलत सलाहकारों से घिरे हुए हैं। नहीं तो देश को बहुत लॉन्ग टर्म दीर्घकालीन नुकसान होने वाला है। नमस्कार, मैं हूं अंकुर। आप देख रहे हैं सिद्धी का विशेष कार्यक्रम आशुतोष की पैनी नजर। कार्यक्रम में आशुतोष जी खबर की खबर

0:47 लेकर असली खबर बताते हैं। अब बात खबर की कर लेते हैं। ट्रंप ने पुतिन से बात की है और इसमें भी उन्होंने भारत पाकिस्तान के बीच सीज फायर कराने का दावा कर दिया। ट्रंप इससे पहले भी लगातार ऐसे दावे कर रहे हैं जिसके बाद सवाल उठ रहा है कि मोदी के साथ वो ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्या उनकी कुछ निजी दुश्मनी है? दूसरा पाकिस्तान के पीएम शाबाज शरीफ ट्रंप की तारीफ करते हुए नहीं थक रहे हैं। उन्होंने भी कहा है कि ट्रंप के कारण ही भारत के साथ तनाव घटाने में पाकिस्तान को मदद मिली। उन्होंने ऐसी ही कोशिश फिर बात कराने के लिए भी की। बिलावल भुट्टो भी अमेरिका में तारीफ के पुल बांध रहे हैं। इसके अलावा शबाज ने भारत के साथ दोस्त पुतिन से भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर संघर्ष को सुलझाने के लिए मदद मांगी है। आखिर इस कूटनीतिक खेल में क्या चल रहा है?

1:33 क्या यह भारत के लिए एक नई चुनौती बनने जा रहा है? आइए इस मुद्दे पर गहराई से चर्चा करते हैं और जानते हैं इस कहानी के पीछे की सच्चाई क्या है? और फिर वही सवाल ट्रंप ऐसा क्यों कर रहे हैं? आशुतोष जी से जानेंगे इस खबर का क्या है पूरा असली खबर? आशुतोष सर ट्रंप लगातार एक के बाद एक एक सर नेता होता है जो कूटनीति होती है, रणनीति होती है कि दो बार बोल दिया बात खत्म हो गई। ये तो चिढ़ाने वाली बात हो गई। कुछ निजी दुश्मनी तो है। अंकुर मुझे ऐसा लगता है जैसे कि ट्रंप साहब ने नरेंद्र मोदी की सुपारी ले रखी है। और वो लगातार उनके उनको थोड़ा सा अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं और साइकोलॉजिकली उनका उनका ब्रेकडाउन करने की भी कोशिश कर रहे क्योंकि ये अब मुझे लगने लगा है कि इसके पीछे एक मनोवैज्ञानिक

2:19 युद्ध जो है वो डोनल्ड ट्रंप ने अमेरिका ने छेड़ रखा है। क्योंकि एक बार आपने बिल्कुल सही कहा। एक बार कहते दो बार कहते तो बात समझ में आती। हर जगह जिस तरीके से वो सऊदी अरेबिया जाते तो वहां भी यही कहते कि देखिए मैंने तो भारत और पाकिस्तान के बीच में समझौते करा दिए। अब वो अमेरिका जब रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ होते हैं तो वहां भी इसी तरीके की बात करते हैं। इसका तो एक ही अर्थ है और अब तक कम से कम 12 बार वो कह चुके हैं। तो इसका मतलब यह है कि कहीं ना कहीं वो कोई बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक कन्व करवाना चाहते हैं और उनको कोई कुछ संदेश वो दे रहे हैं। अब इस पीछे का संदेश क्या है? कम से कम अभी खुलकर तो सामने नहीं आया लेकिन एक बात जो मुझे पूरी तरीके से लग रही है

3:05 कि उनके मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर जो पहले दोस्ताना भाव था अब वो दोस्ताना भाव दिखाई नहीं पड़ता है। उसमें मित्रवत किसी तरीके का व्यवहार नजर नहीं आता है और वो कहीं ना कहीं किसी तरीके की कोई खुंदक निकाल के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को या तो कमजोर करना चाहते हैं या मनोवैज्ञानिक तौर पर उन पर इतना दबाव बना देना चाहते हैं कि वो कुछ मांगने की स्थिति में ना रहे और कुछ करने की स्थिति में भी ना रहे और दिक्कत ये दिखाई पड़ रही है कि एक बार भी देश के प्रधानमंत्री उनका जवाब नहीं दे रहे हैं। जबकि जो टोन ट्रंप का है वो टोन बहुत ही हमिलिएटिंग है। 140 करोड़ के देश के लोगों के लिए बहुत ही अपमानजनक है। और जिस तरीके से वो लगातार

3:52 कह रहे हैं वो भारत की विदेश नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। और अब एक बात तो बिल्कुल साफ हो गई है कि अमेरिका ये कह रहा है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच में मीडिएशन करके सीज फायर कराया। पाकिस्तान उनकी हां में हां मिला रहा है और भारत इस बारे में कुछ भी स्पष्ट तौर पर कहने को तैयार नहीं है। सिर्फ इतना कह रहा है कि जो बातचीत हुई हमारे और पाकिस्तान के बीच में हुई है। लेकिन वो ये भी मानते हैं कि अमेरिका के जो उपराष्ट्रपति है उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की थी। तो ये अगर अमेरिका ये कह रहा है पाकिस्तान उसको एंडोर्स कर रहा है। इसका मतलब ये कि दाल तो काली है इसमें। अब या तो प्रधानमंत्री जी खुलकर सामने आ जाए और कह दे अपने मित्र डोनाल्ड ट्रंप से

4:40 कि भाई आपने बहुत कुछ बोल दिया है। आप कृपया करके शांति बनाए रखें क्योंकि इससे भारत और अमेरिका के रिश्तों पर नुकसान हो रहा है। लेकिन वो बोल नहीं रहे हैं। और बोल नहीं रहे हैं तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ना केवल उनकी छवि खराब हो रही है बल्कि भारत की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है। अब इसका जो दूसरा एंगल है वो यह कि ट्रंप यह बात अमेरिका की जो बात है वह रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से कर रहे हैं। और रूस वो देश है जो भारत का बहुत अभिन्न अंग अभिन्न मित्र रहा है। लेकिन इधर जब भारत और पाकिस्तान के बीच में जब ऑपरेशन सिंदूर के तहत लड़ाई चल रही थी तब रूस ने पूरी तरीके से न्यूट्रल स्ट्स रखा।

5:26 रूस ने खुलकर भारत का साथ नहीं दिया और अगर रूस ने खुलकर भारत का साथ नहीं दिया तो यह भारत के लिए और चिंता का विषय है। इसलिए मुझे लगता है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए और उनकी सरकार के लिए बहुत ही ऐसा वक्त है, बहुत ही नाजुक वक्त है जब उनको भारत की विदेश नीति को एसर्ट करना चाहिए और ट्रंप साहब को खुलकर जवाब देना चाहिए। नहीं तो पूरी दुनिया में भारत की छवि एक भीरू देश की बनेगी कि इनके ऊपर लगातार अमेरिका हमला भी करता जा रहा है। अमेरिका के दबाव में ये फैसले भी कर रहे हैं और अमेरिका के राष्ट्रपति इनको लगातार अपमानित करने का काम भी कर रहे हैं। लेकिन ये बोल नहीं रहे हैं। इसका मतलब ये है कि भारत जो अपनी छवि

6:14 पेश कर रहा था कि वो विश्व गुरु है। वो दुनिया की राजनीति उसके इर्दगिर्द चलती है। तमाम दुनिया के जो बड़े-बड़े नेता है उनसे वो गले मिलते हैं और वो उनकी बातों को सुनते हैं। यह सब एक आभासी चित्र था और इसमें कहीं कोई तत्व नहीं था, कोई सब्सटेंस नहीं था। इसलिए मेरा कहना है कि प्रधानमंत्री जी को फौरन इसका जवाब देना चाहिए अन्यथा भारत को बहुत ज्यादा नुकसान होगा। आपने कहा कि कोई निजी दुश्मनी है। आपने पिछले कार्यक्रम में भी एक में जिक्र किया था कि क्या निजी दुश्मनी है। श में यहां पर भी बताएं और साथ में यह भी है कि ट्रंप की ऐसी दुश्मनी है कि वो चाहते हैं जैसे कि जो विपक्ष कह रहा है बाकी भारत में भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि नरेंद्र सरेंडर वो भी चाहते हैं कि ये बात फैले कि ये मेरे सामने सरेंडर है। नीचा दिखाने की

7:00 कोशिश कर रहे हैं। तभी पुतिन के सामने भी बोले और ट्रंप का यही उनका सोच समझ है। अभी देखिए ये एक चीज तो बिल्कुल स्पष्ट दर्शाता है कि जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम है वो डोन्ड ट्रंप को आंकने में पूरी तरीके से नाकाम रही है। अन्यथा कोई कारण नहीं था कि पहले बार जब प्रधान राष्ट्रपति बने थे तब आप उनका फूल माला से स्वागत कर रहे थे। आप उनके लिए अमेरिका में जाकर वोट मांग रहे थे। आप अहमदाबाद में हाउडी मोदी कर रहे थे। यह सारी चीजें आप कर रहे थे और आप यह दुनिया के सामने तस्वीर पेश कर रहे थे, चित्र पेश कर रहे थे कि ट्रंप और मोदी के बीच में दो जुड़वा भाइयों जैसी जैसा रिश्ता है। इस

7:46 तस्वीर को पेश करते समय शायद वो इस बात को भूल गए कि ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति है और उनकी प्रायोरिटी उनकी प्राथमिकता अमेरिका है। वह कभी भी भारत के हित में बात नहीं करेंगे अगर अमेरिका और भारत के हितों में टकराव होगा और साथ ही साथ इस बात का भी प्रमाण है कि उनकी जो पूरी टीम को जो होमवर्क ट्रंप के बारे में करना चाहिए कि वो कितने एकनिष्ठ व्यक्ति हैं और आत्मनिष्ठ व्यक्ति हैं वो सिर्फ अपने बारे में जानना चाहते हैं। अपने बारे में सुनना चाहते हैं और उनकी पूरी राजनीति के केंद्र में वो है और वो बहुत ही वोलेटाइल कररेक्टर है जो कभी कुछ भी कह सकते हैं कभी किसी के बारे में कुछ भी बोल सकते हैं। अब देखिए कुछ दिनों पहले तक जो एलॉन मस्क है टेस्ला के जो सीईओ दुनिया के सबसे

8:34 अमीर आदमी उनसे ट्रंप की दोस्ती एक लंगोटिया यार जैसी दोस्ती हो गई थी कि वाइट हाउस में मस्क अपने बच्चों के साथ घूम रहे हैं और वो सबसे पावरफुल आदमी माने जाने लगे थे। यहां तक कि लोग कहते थे ट्रंप से भी ज्यादा पावरफुल हो गए। अब देखिए उनके बीच में किस तरीके का झगड़ा हो गया। एक दूसरे को गाली गलौज कर रहे हैं दोनों लोग। और अब तो ट्रंप के अब तो ट्रंप और एलन मस्क के एक्स हो गए हैं। बिल्कुल ये एक्स हो गए। तो मस्क जो है वो अब ये कह रहे हैं कि ट्रंप को इंपीच कर देना चाहिए। कि यह आकलन जो हमारी विदेश नीति को चलाने वाले लोग हैं उन्होंने आकलन क्यों नहीं किया और क्यों नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को को बताया और क्यों नहीं जब वो वोट मांग रहे थे जब हाउडी मोदी कर रहे थे तो उनको पहले से आगाह क्यों नहीं किया हम तो

9:21 ये फेलियर ये बहुत बड़ी फेलियर है क्योंकि आप अमेरिका के राष्ट्रपति का सही आकलन ना कर पाए तो फिर आप अपनी विदेश नीति भी को भी आगे नहीं बढ़ा पाएंगे और उससे देश को नुकसान हो रहा है और बहुत जबरदस्त नुकसान हो रहा है बिलकुल तो यह मोदी की मोदी की व्यक्तिगत फेलियर भी है और उनकी विदेश नीति की टीम की भी पूरी तरीके से फेलियर है। अब प्रश्न यहां पे उठता है कि क्यों ऐसा हो रहा है? इसलिए हो रहा है मुझे लगता है क्योंकि एक तो जो ट्रंप की अपनी व्यक्तिगत कमजोरिया है अपनी व्यक्तिगत पर्सनालिटी उनकी अपनी निजी जो उनकी उनकी उनकी उनका व्यक्तित्व है इसके अलावा जब वो चुनाव लड़ रहे थे तब शायद प्रधानमंत्री जी को इस बात पर उम्मीद नहीं थी कि डोनल्ड ट्रंप दोबारा चुनाव जीत सकते हैं और उस वक्त वो अमेरिका की यात्रा पे थे और ट्रंप ने तब ये कहा था माय फ्रेंड माय ग्रेट फ्रेंड मोदी इस हियर एंड आई एम गोइंग टू मीट हिम और उस वक्त मोदी ने उनसे मिलना

10:09 गवारा नहीं समझा वो अपने आप तो फिर एक तरीके का उनकी जो टीम थी उनकी जो थिंक टैंक था उसने फिर उनको मोदी जी को डुबोया क्योंकि फिर उनका आकलन गलत था अगर वो उनका इसका मतलब वो नहीं मिले क्योंकि उनका आकलन ये था कि ट्रंप शायद चुनाव नहीं जीत पाएंगे तो अगर वो चुनाव नहीं जीत पाएंगे चुनाव के दौरान अगर वो ट्रंप से मुलाकात करेंगे और मान लीजिए गलती से अगर डेमोक्रेट्स जीत जाते हैं तो डेमोक्रेट्स का जो राष्ट्रपति होगा वो इस बात को भूलेगा नहीं तो ये दूसरी बड़ी गलती थी उनकी टीम की तरफ से तो मेरा कहना इसी बात को लेकर ये है कि नरेंद्र नरेंद्र मोदी इस वक्त कुछ गलत सलाहकारों से घिरे हुए हैं जो या तो उनका मुंह देखकर उनको ब्रीफ करते हैं या फिर पूरी टीम ऐसी है जो पूरी तरीके से इनकंपटेंट है और

10:55 वो भारत की विदेश नीति ऐसे लोगों के हाथ में हो गई है जो जानते ही नहीं कि अमेरिका के राष्ट्रपति किस तरीके के व्यक्ति हैं और किस तरीके का बर्ताव वो करते हैं। तो यह बहुत ही अजीबोगरीब स्थिति है और बहुत ही खतरनाक स्थिति है और मुझे लगता है कि बहुत जल्द ट्रंप को करारा जवाब सरकार की तरफ से दिया जाना चाहिए नहीं तो देश को बहुत लॉन्ग टर्म दीर्घकालीन नुकसान होने वाला है। बिल्कुल देश को लॉन्ग टर्म नुकसान होने जा रहा है। जो मोदी का आपने फेलियर बताया विदेश नीति पर उसका साफ-साफ फायदा पाकिस्तान को तो मिल रहा है। इस पर आप अपना विचार बताएं और आखिरी सवाल इसी में जुड़ा हुआ ये है कि अगर ट्रंप की यही हरकत दिनों तक रही मोदी के खिलाफ नाराजगी रही और उसका नुकसान भारत को होगा तो फिर भारत की स्थिति कैसी हो जाएगी कितना

11:43 मुश्किल हो जा रहा है भारत के लिए भारत की छवि को बहुत जबरदस्त आघात लगा है और पूरे इस घटनाक्रम के दौरान अगर आप ध्यान से देखें तो पाकिस्तान को ही फायदा हुआ। भारत को कोई फायदा हुआ नहीं। पाकिस्तान देखिए अजीबोगरीब विडंबना की स्थिति है कि पाकिस्तान ने भारत पर हमले किए। पाकिस्तान ने भारत को गहरी चोट पहुंचाई। धर्म पहुंचकर उन्होंने हिंदू लोगों को को मौत के घाट उतारा और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर हुआ। लेकिन फायदा भारत को होता हुआ दिखाई नहीं पड़ रहा क्योंकि आपने अचानक सीज फायर कर दिया। हम हम और और सीज फायर करने के बाद देश के अंदर जिस तरीके का जोश उत्साह होना चाहिए था वो नहीं दिखाई पड़ा। हम उल्टे पाकिस्तान जश्न मनाता हुआ दिखाई पड़ा। पाकिस्तान ने अपने सेना प्रमुख को

12:31 फील्ड मार्शल का दर्जा दे दिया। चीन, तुर्किए, अज़रबजान जैसे देश उनके साथ खड़े रहे और भारत के साथ एक भी नहीं खड़ा रहा। आईएमएफ से उनको लोन बेल आउट पैकेज मिलता है। एशियन डेवलपमेंट बैंक से उनको उनको उनको पैकेज मिलता है। उनको आर्थिक मदद मिलती है। बिल्कुल और भारत की स्थिति ये हो गई है कि जी7 की बैठक में भी भारत को नहीं बुलाया जा रही। हमारे पास इमिटेशन नहीं आ रहा। तो कोई आपके साथ खड़ा नहीं है। आप पाकिस्तान को आईएमएफ और एशियन डेवलपमेंट बैंक से जो फाइनेंसियल पैकेज है वो दिलाने में ना में जो है आप नाकाम रहते हैं। आप उसको रोकने में नाकाम रहते हैं और जी7 की बैठक से आपको मुलाकात आपका इनविटेशन नहीं आता है और अमेरिका के राष्ट्रपति बार-बार ये बताने की कोशिश कर

13:17 रहे हैं कि भारत दबाव में झुक गया है और हमारी वजह से हमने सिर्फ सीज फायर करा दिया है। अगर इन चारों चीजों को अगर आप जोड़ के देखेंगे तो बिल्कुल स्पष्ट हो जाएगा कि इस वक्त नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते भारत की विदेश नीति पूरी तरीके से रसातल में है और वह दुनिया के नक्शे पर अलक थलक पड़ा हुआ दिखाई पड़ता है। अब इससे ज्यादा नुकसान तो भारत की विदेश नीति का हो ही नहीं सकता क्योंकि एक जमाने में भारत भले ही दुनिया की चौथी या पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं था लेकिन उसके वक्तव्य का उसके कहने का एक अर्थ होता था और दुनिया के 100 से ज्यादा देश उसके साथ खड़े रहते थे क्योंकि वो थर्ड वर्ल्ड मूवमेंट का नेता था। हम आज की तारीख में ना आप थर्ड वर्ल्ड आपके साथ है ना आपके साथ अमेरिका है ना आपके साथ चीन

14:03 है ना आपके साथ यूरोपियन यूनियन है और रूस की दोस्ती पर भी पूरी तरीके से संदेह इस वक्त है क्योंकि रूस ने पिछले दिनों 2.4 बिलियन डॉलर का जो धन का दो बिलियन से ज्यादा का जो कॉन्ट्रैक्ट डील की है वो उन्होंने पाकिस्तान से साइन की है। तो इसलिए बहुत ही अजीबोगरीब स्थिति में इस वक्त देश की विदेश नीति है। बिल्कुल विदेश नीति जैसा कि कहा कि रसातल में जा चुकी है और ट्रंप लगातार नरेंद्र को सरेंडर कराने की कोशिश में लगे हुए हैं। वह चाहते हैं कि यह शब्द और ज्यादा वायरल हो जाए और नरेंद्र जब सरेंडर होते हैं तो भारत भी विदेश नीति भी सरेंडर हो जाती है। एक प्रधानमंत्री जब सरेंडर करता है तो उसके नागरिक उसका देश भी सरेंडर की सिचुएशन में आ जाता है। बात ये है कि मोदी जी इस पर बोल क्यों नहीं रहे हैं? कब तक नहीं बोलेंगे? और क्या निजी दुश्मनी ऐसी

14:49 है कि विश्व गुरु जो कि खुद को बोलते थे लोगों उनके लिए बोलते थे वो विश्व गुरु हल्की सी अगर हिम्मत दिखाएंगे तो भारत की विदेश नीति भी सुधरेगी और नागरिक भी उत्साह में रहेंगे [संगीत] नमस्कार कॉपीराइट 1976 रिपोर्टिंग स्कॉलरशिप एंड रिसर्च कॉपीराइट अदरवाइज

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