Trump Says: “Modi का करियर नहीं ख़राब करना चाहता | A Serious Threat or Joke | Trade Deal

简要总结

本视频讨论了美国总统特朗普关于不想“摧毁”印度总理莫迪政治生涯的言论,以及这是否暗示了某种威胁或压力。专家们分析了特朗普的言论背景,包括美印贸易协议、俄罗斯石油购买以及与阿达尼集团相关的法律问题。讨论还涉及印度政府对此事的沉默,以及特朗普是否掌握了可能被用来对付莫迪的信息。此外,还探讨了反对派在应对这些问题上的作用,以及媒体在塑造公众认知中的影响。

  • 特朗普的言论是否构成对印度主权的威胁?
  • 印度政府为何对此保持沉默?
  • 特朗普是否掌握了可以用来对付莫迪的信息?
  • 反对派和媒体在应对这些问题上扮演什么角色?

引言

主持人介绍了讨论的主题,即美国总统特朗普关于不想“摧毁”印度总理莫迪政治生涯的言论。他指出,这一言论引发了人们对特朗普是否以此威胁或向莫迪施压的质疑,尤其是在贸易协议和相关法律问题的背景下。主持人还强调,印度政府对此事的沉默更加剧了人们的担忧。

特朗普的爆炸性言论

专家们讨论了特朗普言论的背景和含义。他们指出,特朗普在贸易谈判中一直对印度持强硬态度,这表明他可能掌握了某种筹码。专家们还提到,在美印贸易协议宣布前不久,美国对阿达尼集团发出了传票,这可能与特朗普的言论有关。此外,特朗普还威胁说,如果印度继续从俄罗斯购买石油,将恢复对印度的关税。

印度的沉默与主权

专家们对印度政府对特朗普言论的沉默表示担忧,认为这直接威胁到印度的主权。他们质疑莫迪政府为何对此保持沉默,并猜测特朗普是否掌握了可能损害莫迪政治生涯的信息。专家们还指出,特朗普的言论方式不同寻常,此前从未有国家元首以这种方式谈论其他国家的领导人。

战略性沉默还是压力下的沉默?

专家们探讨了印度政府保持沉默的原因。他们提出了两种可能性:一是莫迪政府可能正在采取战略性沉默,试图避免与特朗普发生冲突;二是特朗普可能掌握了某些信息,迫使莫迪政府保持沉默。专家们认为,无论哪种情况,都表明印度政府面临着巨大的压力。

特朗普的交易与印度的让步

专家们指出,特朗普似乎已经从印度那里得到了他想要的一切,这可能是因为他能够对莫迪政府施加压力。他们认为,特朗普的言论和行动表明,他愿意利用一切手段来实现自己的目标,包括威胁其他国家领导人的政治生涯。专家们还对美印贸易协议的细节表示担忧,认为印度可能做出了过多的让步。

特朗普的威胁与印度的回应

专家们对印度政府未能对特朗普的威胁做出强硬回应表示失望。他们认为,印度政府应该明确表示,特朗普无权干涉印度的内政,也无权威胁印度领导人的政治生涯。专家们还指出,特朗普的言论不仅是对莫迪的侮辱,也是对印度人民的侮辱。

埃普斯坦档案与潜在的妥协

专家们讨论了埃普斯坦档案可能与特朗普对莫迪施压有关。他们指出,如果档案中包含对莫迪不利的信息,特朗普可能会利用这些信息来勒索莫迪。专家们还提到,有报道称与印度相关的埃普斯坦档案页面突然消失,这进一步加剧了人们的担忧。

新殖民主义与印度的选择

专家们认为,特朗普的言论和行动表明,印度正在进入一个新殖民主义时代。他们指出,美国正在利用其经济和政治影响力来控制其他国家,包括印度。专家们还认为,印度需要重新评估其与美国的关系,并采取更加独立的政策。

反对派的责任与媒体的影响

专家们批评了印度反对派未能对特朗普的言论和政府的应对做出强有力的回应。他们认为,反对派需要更加积极地向公众宣传这些问题,并呼吁政府采取更加强硬的立场。专家们还讨论了媒体在塑造公众认知中的作用,指出主流媒体往往未能充分报道这些问题。

结论

主持人总结了讨论,强调了特朗普言论引发的担忧,以及印度政府需要采取更加强硬的立场来捍卫国家主权。他感谢各位专家的参与,并表示将继续关注这一问题。

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文字稿

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0:05 नमस्कार द डेली शो में आपका स्वागत है। मैं हूं मुकेश कुमार। दोस्तों एक बार फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का एक बयान चर्चा में आ गया है। बयान यह है कि वे प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक करियर तबाह करना नहीं चाहते। फाइल्स के खुलासे और ट्रेड डील के संदर्भ ने उनके इस बयान का महत्व और भी बढ़ा दिया है। सवाल किया जा रहा है कि ट्रंप ने ऐसा क्यों कहा और क्या इसमें एक तरह की धमकी नहीं छिपी है? प्रधानमंत्री मोदी को लेकर इस तरह की भाषा में बात करना कई शंकाओं को जन्म देने वाला है। खासतौर पर इसलिए कि प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने उनके इस बयान का प्रतिवाद तो दूर खंडन तक नहीं किया। सवाल यह है कि आखिर ट्रंप ने यह धमकी किस लिए

0:51 दी थी? क्या उनके पास प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े कुछ ऐसे राज है जिनसे वे उन्हें दबा सकते हैं, दबा रहे हैं? उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं? ये ब्लैकमेल कई तरह का हो सकता है। जैसे ट्रेड डील के लिए दबाव बनाना या भारत की विदेश नीति को अपने हिसाब से मोड़ देना, इस्तेमाल करना। अगर ऐसी कोई स्थिति है तो यह भारत के लिए बेहद खतरनाक बात है क्योंकि इसका इस्तेमाल भारत के भी खिलाफ किया जा सकता है। किया जा रहा होगा। क्या मोदी इसीलिए डरे हुए हैं और कुछ बोल नहीं पा रहे। वो ट्रेड डील अमेरिकी शर्तों पर करने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह तमाम सवाल है जिन पर आज हम चर्चा करने जा रहे हैं और इन पर इस हिस्सा इसमें हिस्सा लेने के लिए जो

1:38 मेहमान हमारे साथ है मैं आपका उनसे परिचय करा दूं। हमारे साथ तीन वरिष्ठ पत्रकार हैं। डॉक्टर राकेश पाठक है, पूर्णिमा त्रिपाठी है और सतीश के सिंह है। आप तीनों का कार्यक्रम में बहुत-बहुत स्वागत है। चर्चा शुरू करने के पहले हम चाहेंगे कि डोनाल्ड ट्रंप का वो विस्फोटक बयान देख ले। ही लव्स ट्रंप नाउ। आई डोंट नो दर् पिटिकल करियर। ओके। आई डोंट वांट टू डिस्ट्रॉय ह पिटिकल करियर। यह शब्द है। पूर्णिमा जी इन शब्दों को आज के संदर्भ में किस तरह से देखा जाए। हालांकि ये बयान नया नहीं है। पुराना है।

2:24 ये पिछले साल आया था। लेकिन आज इसको नए संदर्भों में देखा जा रहा है और इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है। तो इस बयान डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब 25 अक्टूबर वाला अलग था। ये दूसरा है शायद। अच्छा तो 25 अक्टूबर को पहले हां 25 अक्टूबर को पहले भी दे चुके थे। ये नया बयान 25 अक्टूबर 2025 को। जी चलिए तो मैं अपने को दुरुस्त करता हूं अपनी सूचना को। तो दोबारा ये बात कही तब तो और भी ज्यादा खतरनाक हो जाती। जी मुकेश जी जो ट्रंप का जो इस ट्रेड डील का जब से मामला शुरू हुआ जो एटीट्यूड रहा है इंडिया की तरफ स्पेशली मोदी साहब की तरफ उसको देखकर यह तो जरूर हमें समझ में आ रहा है कि कोई बहुत बड़ी ऐसी चीज है जिसके कि

3:09 प्रेशर में मोदी जी बिल्कुल चुप है। ट्रंप ने कितनी सारी बातें कही है और उसका हमारी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया जाना। उन्होंने डायरेक्टली प्राइम मिनिस्टर को एड्रेस करते हुए कई सारी ऐसी बातें कही है। उन्होंने एक बयान और भी दिया था कि प्राइम मिनिस्टर मोदी नोस आई एम नॉट हैप्पी एंड इट्स वेरीेंट फॉर हिम टू कीप मी हैप्पी। तो उसका भी हम मतलब क्या हो सकता है यह हम सिर्फ इसका हम अंदाजा ही लगा सकते हैं। और जो ट्रेड डील हुई है ट्रेड डील होने के जिस दिन हमने आननफानन में सुना कि अनाउंस हो गया उसके दो दिन पहले मुकेश जी हमने एक खबर पढ़ी थी कि जो अडानी के अगेंस्ट केस यूएस में चल रहा है उसमें समंस उनके लिए इशू हो गए थे और उनको उसको रिसीव करना पड़ा था। नहीं तो फिर वो अरेस्ट वारंट

3:56 सीधा आ जाता। तो समंस उनको रिसीव करा दिया गया था और उसके बाद दूसरे दिन ये ट्रेड डील एकदम से सडनली आउट ऑफ द ब्लू अनाउंस हो जाती है और वो भी अनाउंस ट्रंप ही करते हैं। सिर्फ ट्रेड डील ही नहीं अनाउंस करते हैं। उसके दो या तीन दिन के बाद एक प्रेसिडेंशियल ऑर्डर भी आ जाता है। जिस प्रेसिडेंशियल ऑर्डर में ये धमकी है। साफसाफ उसको हम धमकी ही कहेंगे कि अगर इंडिया ने फिर से यूएस रशिया से क्रूड खरीदना शुरू किया तो ये जो टेरिफ है फिर से वापस 50% कर दिया जाएगा और उसको निगरानी करने के लिए उन्होंने अनाउंस कर दिया कि एक कमेट रहेगी जिसमें 810 लोगों के नाम है और वो ओवरसी करेगी कि इंडिया कहीं चोरी छिपे पीछे के दरवाजे से फिर से

4:42 रूस से क्रूड तो नहीं खरीद रहा है। तो इस तरह की धमकी भरा अंदाज ट्रंप का और उस पर इंडिया का कुछ ना कहना यह तो हमारी सोवनिटी पे सीधे-सीधे एक अटैक है और मोदी जी का चुप रह जाना हमें ये जरूर सोचने पर मजबूर करता है कि ऐसी क्या बात है कि वो मुंह बंद करके बिल्कुल बैठे हुए हैं। हमें 40 साल के करीब मेरी पत्रकारिता का करियर रहा है और मैंने कभी भी किसी भी हेड ऑफ स्टेट को अपने देश के लिए इस तरह की भाषा तो इस्तेमाल करते नहीं सुना है। ये क्या चीज है? ये ट्रंप है। ट्रंप कुछ भी बोल सकते हैं। इस तरह का मुकेश जी ये ट्रंप का दूसरा टेन्यर है। पहले टेनियर में हमने ऐसा नहीं सुना था।

5:29 ये दूसरे ट्रेनर में ऐसा क्या हुआ है कि वो भारत को इस तरह से धमकी खुलेआम दे रहा है। मोदी जी को धमकी दे रहा है और जो हमारे इतने बड़बोले प्राइम मिनिस्टर हैं जो हर चीज का दबाव अपनी 56 इंच की छाती ठोक के देते हैं। बिल्कुल मुंह सिलेले हुए बैठे हुए हैं। तो क्या वजह है? क्या प्रेशर है? कौन सी ऐसी चीज है कि जिसके दबाव में वो बिल्कुल चुपचाप ये सारा कुछ सहन कर रहे हैं और अगर वाकई में बहुत सीरियस कुछ है ऐसा मामला तो ये हमारे देश के लिए बहुत गंभीर चिंता का विषय है। सतीश जी इसको कैसे देखते हैं आप? मतलब ये ऐसे समय में बार-बार धमकियां देना और भारत सरकार का चुप रहना, प्रधानमंत्री मोदी का चुप रहना ये दबाव में चुप है या कोई

6:17 रणनीतिक चुप्पी है कि भाई एक पागल राष्ट्रपति आ गया है। उससे उलझो मत। उसको अपना बोलने बकने दो। हम अपना काम करते हैं। क्या यह रणनीति है? या सचमुच में कुछ ऐसा है ट्रंप के पास जो मोदी के राजनीतिक करियर को चौपट कर सकता है, तबाह कर सकता है और इसी डर में मोदी जी की जुबान नहीं खुल रही। देखिए रहस्यमई चुप्पी तो जरूर है। लेकिन ये जो बयान अभी डॉक्टर साहब ने भी बताया कि शायद फिर से आया है। आया तो था पहले। अब आ गया उसके बाद यह डील हो गई और डील से

7:02 लगभग लगभग एकदम पूर्णत साफ है कि अमेरिका के जितने भी इरादे थे वो लगभग लगभग पूरे हो गए। जो जिन मुद्दों पर ट्रेड डील रुका हुआ था रशियन ऑयल पर या एग्रो प्रोडक्ट्स पर तो एग्रो प्रोडक्ट्स में भी कुछ कुछ सुना है कि खुल गया है तो आखिरकार और ये भी कि भाई एयरक्राफ्ट में और टेक्नोलॉजी में से आदि आदि में भी उनका इन्वेस्टमेंट उस ढंग से होगा और हम हम लोग उनका सामान खरीदेंगे तो ये उनकी शर्तों पे तो शर्तें तो उनकी बहुत चली है। अब जो वो बयान जो ये देते रहते हैं कोई एक बयान थोड़ी है। वो

7:49 तो दर्जनों बयान ऐसे हैं जो सीधे वो अपने आप को दादा साबित करते हैं। और हमारे तरफ से जो जवाब होना चाहिए वो अपेक्षा के हिसाब से नहीं। ये इतना जरूर कहना पड़ेगा। दूसरी बात अभी आप एक और वीडियो भी चल रहा है। अब उसकी सच्चाई कितनी है? आजकल तो बड़ा मुश्किल है कहना भी। कि पीयूष गोयल से पूछा जाता है तो कुछ जवाब देते हैं रूस के मामले में रूस के वाइल के मामले में और क्या नाम है जयशंकर साहब से पूछा जाता है तो कोई और प्रेस कॉन्फ्रेंस के वीडियो है और उसके वीडियो एनआई ने लिए हैं तो उनमें कोई शक नहीं है। दोनों अलग-अलग एक दूसरे पर डाल

8:35 रहे हैं। जी तो भाई देखिए ना ये क्या हो रहा है? मैं कह रहा हूं कि एक रहस्यमय जैसे लट्टू घूम रहा है उस तरह का है और उससे भी साफ झलकता है कि कहते हैं ना कि निगलते भी नहीं बन रहा है उगलते भी नहीं बन रहा है और उस ढंग से जवाब आ रही है और एक दूसरे पर फेंक रहे हैं। तो निश्चित सी बात है कि हमको लगता है कि देखिए मैं एक बात तो जरूर कह दूं। मैंने पहले भी कहा है कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में परिस्थितियों में और ट्रंप के रुख रवय को देखते हुए और हम अपनी ताकत का सही अंदाजा लगा के देखें तो भारत के पास कोई ऑप्शन नहीं था डील करने के अलावा रुका इतना दिन रहा तो ये लग रहा था कि कुछ

9:22 एक कंसेशन हो जाएगा ले लेंगे और उसके बाद वो हो जाएगा लेकिन वो कंसेशन तो लगता नहीं है कि हुआ है और अगर रूस से तेल वाकई उस पाइप कट जाती है तो मैं सिद्धांत के आधार पर कह रहा हूं मैं हो सकता है दाम उनको कम मिले बाहर खरीदने में लेकिन सिद्धांत के आधार पर भी अगर देखें अपने ट्रैक रिकॉर्ड के हिसाब से भी देखें तो एक बहुत बड़ा मतलब फैसला होगा कि भाई रूस जैसे मित्र देश से आप विवश हो गए नहीं लेने ये एक बात तो है ही अब ट्रंप ही पर बात करना है ना तो ट्रंप के जो जो बयान दे रहा है एकदम निश्चित रूप से प्रतिकार करने लायक है। एक

10:09 और दूसरा लेकिन अगर अब लेटेस्ट बयान जब ट्रेड डील के बाद आया तो उसके बाद तो लगता है कि ट्रंप खुश है। ट्रंप खुश है तो तो बोल रहा है ग्रेट फ्रेंड इस तरह के चीजें बोल रहा है। लेकिन कुछ बात जरूर है। अभी हम लोग कयास कैसे लगा सकते हैं कि कौन सा दबाव है? क्या है? नहीं कह सकते ना। लेकिन निश्चित रूप से वो लफज में इस ढंग की बातें वो धमकी जैसा कहता जरूर है और इस पर खड़ा होना होगा। नहीं खड़ा होते तो ऐसा लगता है कि दबाव है। जी आप ही ने कहा कि एक तरह से ट्रंप जो चाहता था भारत से वो सब हासिल कर लिया। तो

10:55 क्या ये हासिल करना उसके लिए इसलिए आसान हो गया कि वो मोदी जी पर दबाव बना सकता था। मोदी सरकार पर दबाव बना सकता था। उसके पास ऐसी चीजें हैं जो इससे जुड़ती है कि भाई मैं आपका राजनीतिक करियर भी डिस्ट्रॉय कर सकता था। देखिए यह करियर वाला मेरे ख्याल से बयान पुराना है शायद जो लोग बता रहे हैं पुराना है लेकिन वो उसी ढंग का बात अलग-अलग लफ्जों में अलग अलग समय पर कहता रहता है ये बात है और जो उसको हासिल होना था वो हो गया हमारे यहां से तर्क दिया गयाकि उन लोगों ने टेरिफ पेनाल्टी लगाया था तो उन लोग के तरफ से पहले अनाउंस होना था तो सवाल तो उस समय भी हमने भी किया सवाल कि

11:42 भाई तो हमने भी तो जीरो किया। हमने भी जीरो का एक एवरेज लगाया। तो जीरो हमने भी किया। हम लोग 60 70% तक पहले टेरिफ लगाते थे। वो जीरो पर का एवरेज पर आया तो हम लोग भी अनाउंस कर सकते थे। अब पीयूष गोयल साहब ने पूरा उसकी विस्तृत जानकारी दी है। लेकिन अभी भी जब डील के में जो साइनिंग होगी जिसको कहा जा रहा है जल्द होगा। उसको देखना पड़ेगा। उसमें कई तरह के सवाल हैं अभी भी कि वो क्या-क्या बातें हैं जो हमने माना है और क्या-क्या उनको फायदा दिया गया है और हम लोगों को क्या फायदा हो। लेकिन एक बात तो निश्चित रूप से ये आज से नहीं कि जब से यह सिंदूर के समय से ही ऑपरेशन

12:27 सिंदूर के समय से ट्रंप का जो बिगड़ा बोल है वो बिगड़ा है उसी समय से और लगातार ये कुछ ना कुछ कुछ ना कुछ कुछ ना कुछ वो करते रहते हैं कहते रहते हैं और ये तो कौन बता सकता है कि क्या बात है लेकिन बात तो जरूर लगता है कह कि ऐसी तो ऐसा लैंग्वेज तो पूरे पूरे दुनिया के लिए नहीं यूज़ करता है। सबके लिए करता रहता है तरहतरह के लैंग्वेज। लेकिन इस ढंग से इतना बयान किसी देश के बारे में नहीं दिया होगा जहां तक मेरी समझ है। तो बात ये है कि हम इसमें नहीं जाएंगे मुकेश जी कि आखिर वो दबाव कौन है? वो कुछ भी हो सकता है। वो कुछ भी हो सकता है। और ये भी मैं मैं तो अपने व्यक्तिगत रूप से मानता हूं। देखिए मैं इस

13:14 बारे में स्पष्ट है कि अमेरिका अब तो रूस यूएसएसआर जैसा कोई हमारा मित्र है नहीं दुनिया में और इस परिस्थिति में दुनिया में हमको तो डील करना ही था। हम लोग तो शुरू से कह रहे थे डील तो होगा ही डील करना ही पड़ेगा जो किया है। तो वो हमारे पास कोई चारा नहीं था। लेकिन बात ये है कि अगर वो कोई दबाव डाल के और सब बातें अपनी मनवा लेता है तब तो एक प्रश्न तो खड़ा होता ही है। जी बिल्कुल तो डॉक्टर राकेश आप इसको किस तरह से देखते हैं अगर ये शर्तें सारी मानी जा रही है अमेरिका की डोनल्ड ट्रंप हर चीज में कामयाब हो रहे हैं मोदी सरकार से हासिल करने में तो ये जो धमकी है ये दोनों जुड़ती है आपस में।

14:01 ऐसी क्या चीजें हो सकती हैं ट्रंप के पास कि मोदी जी को सरेंडर करना पड़ता है बार-बार। देखिए मुकेश जी पहले तो इस वायरल वीडियो की बात बहुत से जानकारों का मानना यही है कि यह 25 अक्टूबर 2025 वाला ही वीडियो है और जो दोबारा वायरल हो गया है। हमारा मानना यह है अगर यह तबका ही दोबारा वायरल हुआ है तब भी 25 अक्टूबर 2025 से लेकर आज तक भारत के प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री कार्यालय विदेश मंत्रालय रक्षा मंत्रालय बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीजेपी के प्रवक्ताओं ने किसी एक ने भी इसको लेकर कोई कड़ा स्टैंड क्यों नहीं लिया क्यों नहीं आज तक किसी ने कहा

14:47 कि डोन्ड ट्रंप की हैसियत नहीं है कि हमारे प्रधानमंत्री को बर्बाद कर सकें। किसी ने एक बार भी क्यों नहीं कहा कि इस तरह के बयान स्वीकार नहीं होंगे। सतीश सर बिल्कुल ठीक कह रहे हैं कि डोन्ड ट्रंप ने दुनिया के किसी छोटे-मोटे देश के मुखिया को भी इस तरह से नहीं धमकाया है आज तक कि मैं उसका पॉलिटिकल करियर बर्बाद कर दूंगा। किसी भी सियारा लियोन जैसे टिमबक टू नाम के देश को किसी को भी ऐसी धमकी नहीं दी है। और डॉक्टर साहब हम सिर्फ यह कहकर खारिज नहीं कर सकते कि डोनाल्ड ट्रंप एक सिर फिरा आदमी है। होगा आपकी नजर में सिरफिरा हमारी नजर में सिर फिरा लेकिन है तो अमेरिका का राष्ट्रपति है तो माय डियर फ्रेंड हमारे प्रधानमंत्री

15:34 का सबसे जिगरी दोस्त उसके उन तमाम बयानों पर उस उनके उसके उन तमाम ट्वीट्स पर जो मोदी के पक्ष में होते हैं चाहे वह हैप्पी बर्थडे का ट्वीट हो या उन्हें और किसी तरह से ग्रेट बताने वाला हो तब तो पूरी पार्टी कूद पड़ती है वाहवाही होती हुआ करने लगते हैं मंत्रिमंडल के लोग। सारे लोग रीट्वीट करते हैं। खुद नरेंद्र मोदी रिसोंड करते हैं। और जब डोन्ड ट्रंप 71 बार सीज फायर का दावा करते हैं तो सरकार गुड़ खाकर बैठ जाती है। डोन्ड ट्रंप जब यह धमकी देते हैं कि नरेंद्र मोदी जानते हैं कि मैं उनसे खुश नहीं हूं। उनके लिए जरूरी है कि वे

16:21 मुझे खुश रखें, खुश करें। तो डोनाल्ड ट्रंप क्या हमारा सरपरस्त है? भारत का कोई सुपर प्राइम मिनिस्टर है कि उसे खुश करना हमारे प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है। अब इन डॉट्स को मिलाने की जरूरत है। डॉक्टर साहब जिस आपके सवाल की तरफ ले जा रहा हूं। ट्रेड डील हुआ है। अभी हफ्ता भर नहीं हुआ। ट्रेड डील का जिस तरह से ऐलान हुआ उसका जिस तरह से प्रेसिडेंशियल ऑर्डर निकला, एग्जीक्यूटिव ऑर्डर निकला। प्रधानमंत्री ने क्या किया? उसके जवाब में 10:28 का डोन्ड ट्रंप का ट्वीट है। प्रधानमंत्री 11:02 पर ट्वीट करते हैं। सिर्फ एक बात का उल्लेख करते हैं। 18% टेरिफ हो गया है। बाकी सब चीजों

17:07 को गोल कर जाते हैं। जिन बातों का उल्लेख डोनल्ड ट्रंप ने कर रखा था। तब से लेकर अब तक भी क्या हुआ है? वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, विदेश मंत्री एस जयशंकर पिंग पोंग खेल रहे हैं। शटल एक दूसरे के कोर्ट में फेंक रहे हैं। आज विक्रम मिश्री केंद्रीय विदेश मंत्री भारत के विदेश मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सवाल के जवाब में वेद पुराण पढ़ दिए। रूस से तेल खरीदने के मामले में अखंड का महाकाव्य पढ़ दिया। एक लाइन का उत्तर नहीं दिया विक्रम मिश्री ने कि भारत रूस से तेल खरीदेगा या नहीं खरीदेगा।

17:53 पूर्णिमा जी ने निगरानी का जिक्र किया था। मेरी अधिकतम जानकारी में अब से पहले भारत ने किसी देश के साथ ऐसा कोई समझौता ऐसा कोई व्यापारिक ऐसी कोई व्यापारिक डील नहीं की है जिसमें उस देश को हमारे ऊपर निगरानी करने का अधिकार दिया गया हो और वह भी किस तरह से उस आदेश में उन लोगों के नाम खोल दिए गए हैं डोन्ड ट्रंप की टीम के और वे कौन लोग हैं वे डोनाल्ड ट्रंप के खासम खास सारे फार राइटिस्ट है। वे जिस दिन चाहेंगे एक काल्पनिक रिपोर्ट बना के दे देंगे चार पेज की। डियर प्रेसिडेंट नरेंद्र मोदी तो चोरी छुपे पतली गली से तेल खरीद रहे हैं। इस रिपोर्ट पर 25 फीसदी

18:42 टेरेफ फिर लद जाएगा। मेरी जिज्ञासा है आप सब विद्वत जनों से। क्या दुनिया के किसी और देश पर किसी और देश से ट्रीटी इस तरह का डील करते समय डोनाल्ड ट्रंप ने निगरानी की शर्त रखी है? ठीक है वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उठा लाया। लेकिन क्या किसी संप्रभु राष्ट्र वो भी भारत जैसा देश उसमें भी नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री जिसके गले में 28 देशों के सर्वोच्च नागरिक सम्मान लटके हैं। सर वो तमंगे किस काम के हैं? हमारे गले में तो पट्टा बांध दिया नरेंद्र मोदी ने। वह निगरानी करेगा। वह चेक पोस्ट बिठाएगा हमारे बंदरगाहों पर। समुद्री रास्तों में जहाज में कहीं तेल तो नहीं आ रहा। रोक कर

19:28 उसमें लकड़ी डालकर नापा जाएगा कि रूस का तेल तो नहीं है। वरना हमें सजा मिलेगी। अब उस कारण की तलाश पर जाते हैं सिर्फ एक मिनट में कि क्या वजह हो सकती है कि भारत सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इतनी मनमानी बर्दाश्त कर रहे हैं। हमारे पास कोई जांच एजेंसी नहीं है। हम नहीं जानते क्या कारण हो सकते हैं। लेकिन अगर देश का नेता प्रतिपक्ष कोई दो कारण गिना रहा है। संसद परिसर में खड़े होकर राहुल गांधी अगर यह कहते हैं कि नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं, उसकी दो वजह बताते हैं। अडानी के खिलाफ मुकदमा दूसरा एब्सस्टीन फाइल्स। तो क्या हमें यह सोचने पर विवश नहीं होना

20:13 चाहिए कि इनमें से भी कोई कारण हो सकता है। ये दोनों कारण भी हो सकते हैं। कोई तीसरा कारण भी हो सकता है। वरना भारत के प्रधानमंत्री को और भारत सरकार को इतना विवश क्यों होना चाहिए? अंतिम बात अगर यह सरकार डोन्ड ट्रंप की इन मनमानियों के खिलाफ हमारे प्रधानमंत्री आपके प्रधानमंत्री इस देश के प्रधानमंत्री के पॉलिटिकल करियर को बर्बाद करने की धमकी पर मौन है तो उन्हें शर्म से डूब जाना चाहिए। हम आवाज उठा रहे हैं। डॉ. मुकेश कुमार आवाज उठा रहे हैं कि हमारे प्रधानमंत्री को ऐसे कोई धमकी नहीं दे सकता और किस तरह बर्बाद करेंगे पॉलिटिकल करियर? क्या डोनाल्ड ट्रंप महाभियोग लाएंगे हमारे प्रधानमंत्री के खिलाफ? क्या उसे बर्खास्त

21:01 करने की ताकत रखता है अमेरिका का राष्ट्रपति? हमारे प्रधानमंत्री को? अरे हमारा प्रधानमंत्री हमारे वोट से चुना गया है। हु आर यू? डोनाल्ड ट्रंप कौन होते यह कहने वाले कि हमारे प्रधानमंत्री का पॉलिटिकल करियर बर्बाद कर सकते हैं। हमारे देश की जनता तय करेगी जो भी कुछ करना है। जब तक उन्हें सत्ता में रखना है या ना रखना है। तो इन बयानों को और ट्रेड डील में जो मनमानी हुई है जिस तरह से भारत सरकार ने सब चीजें मंजूर कर ली है वे ज्यादा चिंताजनक है। जी डक साहब बिल्कुल हमारे साथ वरिष्ठ पत्रकार राजेश जोशी भी जुड़ गए हैं। उनका भी कार्यक्रम में स्वागत है। राजेश जी अपने आप को अन म्यूट कर लीजिए और सवाल यही है कि हमारे देश का प्रधानमंत्री इतना विवश क्यों है

21:49 कि वहां से धमकियां आती है और कोई यहां से उसका प्रत्युत्तर नहीं होता है। उसे स्वीकार कर लिया जाता है। सन्नाटा खामोशी छा जाती है। क्या सचमुच में प्रधानमंत्री कंप्रोमाइज है किसी वजह से? देखिए मुझे हम लोग सिर्फ अंदाजा ही लगा सकते हैं। हमारे पास कोई अंतर की जानकारी तो है नहीं। ना तो अमेरिका में क्या हो रहा है ना हिंदुस्तान के जो सत्ता के गलियारों में है या बीजेपी के अंदर या सत्ता के अंदर क्या हो रहा है उसकी फर्स्ट एंड इन आती नहीं है ना कोई मंत्री बोलता है ना कोई इंटरेक्शन होता है तो हम लोग जो पब्लिक डोमेन में जो सूचना है उसके आधार पर अपना अपने नतीजे निकाल सकते हैं। कई बार वो नतीजे बिल्कुल ठीक भी हो सकते हैं। कई बार वो नतीजे थोड़ा बहुत इधर-उधर भी हो सकते हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक नई तरह की भाषा गढ़ रहे हैं।

22:35 दक्षिणपंथी जो राजनीति है विचारधारा है उसकी एक नई तरह की कूटनीतिक भाषा गढ़ रहे हैं जिसमें दबंगई है जिसमें बाह मरोड़ना है ऐसा नहीं है कि पहली बार हो रहा है अमेरिका लैटिन अमेरिकन देशों की बाहें मरोड़ मरोड़ करके सब कर करवाता रहा है उसमें डेमोक्रेट्स भी शामिल है उसमें रिपब्लिक भी शामिल है। लेकिन उनकी भाषा अलग होती थी। सीआईए बहुत लंबे समय तक पैन करता था टॉपल करने के लिए सरकारों को। उसके बाद टोपल हो जाता था। जो जस्टिफाई करता था लेकिन जिस तरह से प्लेटेंटली सामने आकर के ये कहता है कि नहीं मुझे ग्रीनलैंड चाहिए। नहीं वेनेजुएला की जो ऑयल को हम तय करेंगे कि कौन खरीदेगा कौन नहीं खरीदेगा। या कनाडा के बारे में उसको हमारा 51 स्टेट बन जाएगा। ये इसने कहा था

23:21 एलॉन मस्क वगैरह ने। तो ये एक नया नई रियलिटी है और यह नई रियलिटी अब दूसरे जो ट्रंप का दूसरा प्रशासन अभी इस वक्त चल रहा है उसमें ये ज्यादा मुखर हुई है। तो मुझे ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी और उनके सलाहकारों को अब ये शायद एहसास हो रहा होगा या हो सकता है नहीं भी हो रहा हो कि जब उन्होंने पिछली बार अबकी बार ट्रंप सरकार कहा तो शायद कुछ गलती कर दी। इंटरनेशनल डिप्लोमेसी में किसी भी दूसरे मुल्क के अंदर जो राजनीति चल रही है उसमें आप एक पोजीशन नहीं लेते हैं क्योंकि दोनों ही पार्टीज या जितनी भी पार्टीज है उनके साथ मिलके आपको व्यापार करना होता है मिलिट्री अलायसेस करने होते हैं डिप्लोमेसी करनी होती है तो ये अबकी बार ट्रंप सरकार इसका मतलब जो है वो उनको लगा कि ट्रंप तो मजबूत है ही है और उत्तरोत्तर

24:08 होते जाएंगे अब ट्रंप के साथ होना जो है बहुत जरूरी है लेकिन ट्रंप को इससे क्या फर्क पड़ा उनके लिए तो ना कनाडा अपना है। यानी वेस्टर्न हेमिस्फयर भी उनका यूरोपियन जो गोरे सो कॉल्ड जो गोरे मुल्क है यूरोप उनकी भी बाह मरोड़ रहे हैं। वो हिंदुस्तान की क्या बिसात है वो अगर रूस के खिलाफ तो है ही है। खैर अमेरिका का पुराना हिंदुस्तान को वो अपनी तरफ चाइना को कंटेन करने के लिए जो है अपनी तरफ लेने के पक्ष में हमेशा अमेरिका रहा है। लेकिन अब वह जिसको पंजाबी में कहते हैं ना तकेशाही नाल धक्केशाही के जरिए यह सब कर रहा है। यह जब इन्होंने कहा के अबकी बार ट्रंप सरकार उसके बाद तमाम जगहों पर

24:54 छोटे-छोटे जो ये वीडियो वीर होते हैं ये ट्रंप की फोटो लगा के हवन करने लगे थे और ट्रंप को हिंदुस्तान का खैर खफा मानने लगे थे। वो अभी सब बिलों में छुपे हुए हैं। अपने कोई नहीं बोल रहा है। लेकिन इसको बड़े पर्सेक्टिव में भी देखना चाहिए। के यह एक जो राइट विंग पॉलिटिक्स है उसका इंटरनेशनल एक अलायंस जो है जिसमें मिलनी है इटली की है हंगरी के है तुर्की के बादशाह बादशाह ही कहना चाहिए इन लोगों को प्रेसिडेंट है और अमेरिका है हिंदुस्तान है ये सब जो राइट विंग सत्ताएं हैं ये एक वो बना रही है लेकिन इनके अपने अंदर के कंट्राडिक्शन भी है ट्रंप के लिए आईडियोलॉजी मायने नहीं रखती ट्रंप के लिए उनका कहा हुआ वो क्या

25:40 कह रहे हैं और किस तरह से कह रहे हैं वो मिडिवल टाइम में डार्क एजेस में जिस तरह के राज महाराजे करते थे उस तरह से व्यवहार कर रहे हैं। अब मुझे ये मैं फक्चुअली मैं बहुत विश्वास से नहीं कह सकता हूं कि ट्रंप ने ये धमकी दी है कि मैं नरेंद्र मोदी का करियर बिगाड़ दूंगा। जहां तक मैंने सुना है उन्होंने कहा था मोदी लव्स ट्रंप और उसके बाद उन्होंने कहा कि डोंट टेक इट डिफरेंट और शायद आगे उसमें ये कहा कि आई डोंट वांट टू र इन ह करियर अब मैं उनका करियर बर्बाद नहीं करना चाहता हूं ये एक क्लिप में था बाकी इसके अलावा कोई क्लिप आई हो तो मुझे नहीं मालूम तो ये इसका इंटरप्रिटेशन ये भी हो रहा है कि वो हो सकता है लाइटर वेन में कहा हो उन्होंने लेकिन जो नतीजे दिख रहे हैं जिस तरह से बाहें मरोड़ करके देखिए बाहें मरोड़ने का

26:27 एक इतिहास है उसको मैं अभी दो मिनट में खत्म करूंगा। मनमोहन सिंह की बाहें भी मरोड़ी गई थी। जब ये जो पूरा सोवियत ब्लॉक कोलैप्स कर गया था। उसके बाद फ्री मार्केट का एक तरह से जलवा था। उस वक्त हिंदुस्तान आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक ने हिंदुस्तान को बाकायदा एक रिपोर्ट दी थी कि आप स्ट्रक्चरल एडजस्टमेंट कीजिए। अपने यहां लेबर लॉस बदलिए। ट्रेड यूनियंस की कमर तोड़ने वाले पीवी नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह थे। मनमोहन सिंह का एक मुझे याद है आर के आर के लक्ष्मण का एक कार्टून टाइम्स इंडिया में छपा था। आईएमएफ की बिल्डिंग से निकल रहे हैं और उनकी दोनों बाहें ऐसे मरोड़ी हुई है। इस तरह के सत्ताधीश यहां के रहे हैं। ठीक है? हिंदुस्तान एक संप्रभु राष्ट्र है और संप्रभुता जनता जो

27:12 है बहुत इज्जत करती है। लड़ के इस राष्ट्र को नेहरू और गांधी और मौलाना आजाद, सरदार पटेल और तमाम लोगों ने भगत सिंह इन्होंने संप्रभु राष्ट्र बनाया है। लेकिन आज क्या है? आज इस संप्रभु राष्ट्र का जिसका डंका बजाने की बात करते हैं। फैसला अमेरिका और हिंदुस्तान के बीच में कोई अगर कोई संधि होती है या कोई एग्रीमेंट होता है उसका अनाउंसमेंट अमेरिका करता है कि वेनेजुएला का तेल अब जो है हिंदुस्तान खरीदेगा। हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री विदेश मंत्री कोई नहीं करते हैं। अब हिंदुस्तान की पार्लियामेंट चल रही है। सर्वोच्च पंचायत जो है वो चल रही है। लेकिन अनाउंसमेंट कहां से होता है? अमेरिका से होता है। तो इस बात को मान लिया जाए कि एक हम एक न्यूओ कॉलोनियल युग में जी रहे हैं। एक एक उपनिवेशवादी बहुत ही अगर नहीं समझ में आ

27:59 रहा है तो कुछ दिनों में समझ में आएगा। ये नव उपनिवेशवाद जो है इस वक्त हालांकि ये टर्मिनोलॉजी को बहुत सारे लोग नहीं समझते हैं। एक मिनट खत्म कर लूं। इस टर्मिनोलॉजी को समझना बहुत जरूरी है कि आप पहले इंटरवेंशन करते थे कैपिटल के जरिए। पूंजी लगाते थे ये सब दो देश और राजनीति को कंट्रोल करते थे। अब वो डायरेक्ट इंटरवेंशन ऑलमोस्ट हो गया है। टेरिफ एक ऐसा औजार मिल गया है उसको कि आप अपने जो आपके साथ खड़े हुए हैं दाएं बाजू में वो उनकी बाढ़ करके आप अपना काम करवा रहे हैं। तो ये कब तक झुकेगी नरेंद्र मोदी सरकार? कब तक कॉम्प्रोमाइज करेगी नरेंद्र मोदी सरकार? ये ये बहुत बड़ा सवाल है। वो इसलिए शायद मुझे लगता है उनको परवाह नहीं है ना तो संसद में जवाब देने की और ना ही पब्लिक

28:44 ओपिनियन की क्योंकि उन्हें कहीं ना कहीं विश्वास है कि चुनाव वही जीतेंगे। तो इतना तो ये कहा जा सकता है ना राजेश जोशी जी आपने इतना पूरा जो एक पूरा वो बनाया एक पृष्ठभूमि उसके आधार पर कि ये कोरी धमकी नहीं है। चाहे वो मजाक के अंदाज में कही हो। उसमें वो एक धमकी छिपी हुई है। नहीं धमकी तो धमकी कतई नहीं है। उन्होंने जब ये अनाउंसमेंट किया है पहले टेरे बढ़ाने का अनाउंसमेंट किया ट्रंप ने उन्होंने ये थोड़ी सोचा कि अबकी बार ट्रंप माय फ्रेंड डोना ट्रंप और ये कहा गया है। अबकी बार ट्रंप सरकार कहा गया है। वो अलग तरह से बोलते हैं। मोदी इस अ ग्रेट मैन मोदी इस माय फ्रेंड। एक तरफ ये कहते हैं। दूसरी तरफ जो मैं चाहूंगा वही करना पड़ेगा। आप

29:29 करेंगे चाहे आप कनाडा के हो या यूरोप के हो या हिंदुस्तान के हो चीन से थोड़ा बहुत आप देखेंगे चीन के साथ उनकी जो गलबिया है वो उनकी डिप्लोमेसी एक अलग तरह की उनकी जो क्वालिटी है वो अलग तरह की है प्रेशर तो डायरेक्ट है स्पिन डॉक्टर्स इसको कह रहे है प्रेशर नहीं हिंदुस्तान की जीत है अभी हिंदुस्तान की जनता को यहां के पत्रकारों को एनालिस्ट को समझना होगा कि ये जीत किस तरह से है आने वाले अगर ये इंक हो गया अगर ये समझौते पर दस्तखत हो गए और इसमें जिस तरह से लिखा गया उसी तरह से इम्लीमेंट हुआ तो हिमाचल का सेब काजू जितने भी किसान उगाते हैं वो तो घर बैठ जाएंगे उनके पास क्या होगा वो तो दरदर के भिखारी बनेंगे तो

30:15 12 तारीख को जो हड़ताल हो रही है मजदूरों की और किसानों की वो बहुत उसको देखने लायक है उसको कितना जनसमर्थन मिलता है और कितना स्पिन डॉक्टर्स जो है कहते हैं कि फ्लॉप हो गई ये देखना है। जी तो पूर्णिमा जी ये ये बात इस्टैब्लिश होती है कि दबाव है और उस दबाव में प्रधानमंत्री मोदी भी है। अब इस जो उनका सेंटेंस है उसको और थोड़ा सा अगर डिकोड करें कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक करियर डिस्ट्रॉय नहीं करना चाहता हूं। नहीं करना चाहता हूं तो इसका मतलब है उनके पास कुछ चीजें ऐसी है जिनसे वो यह काम कर सकते हैं। अभी बात हुई फाइल्स की या ट्रेड डील्स में जिस तरह से हुआ या ऑपरेशन

31:01 सिंदूर में जो कुछ हुआ ये कहा जा रहा है कि उसके भी टेप्स हो सकते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्या बातचीत हुई। मोदी जी ने ऐसा क्या बोल दिया जो उनके खिलाफ जा सकता है? और भी चीजें अडानी का जिक्र आपने किया ही। इसका मतलब है कि अगर ये चीजें उनके पास है तो ये ब्लैकमेलिंग ये दबाव और भी आगे हमें भारत को भुगतना पड़ेगा। मुकेश जी ये अभी जैसे डॉक्टर जोशी कह रहे थे कि वो शायद लाइट हार्टेड उसमें मैनर में कहा गया कि आई डोंट वांट टू डू इन ह करियर। लेकिन आप उसका परिणाम देखिए ना हमारे देश में क्या हो रहा है। बेशक ट्रंप ने जब कहा होगा तो वो बड़ा एक बेंटर स्टाइल में कह दिया होगा। लेकिन उसका

31:48 परिणाम देखिए रूस से हमारा क्रूड का जो इंपोर्ट है वो बहुत कम हो गया है। जबकि रूस से क्रूड ऑयल खरीदना हमारे लिए बहुत फायदेमंद हुआ करता था। रूस के साथ हम हमारी जो ट्रेड डील है उसमें हम रूपी में खरीदते थे सामान। अब हमने जबरदस्ती अमेरिका के प्रेशर में आकर वेनेजुएला से मैंने तीन चार दिन पहले कहीं न्यूज़ देखी कि एक डील ऑलरेडी हो चुकी है वेनेजुअल एंड ऑयल की और वो हम डॉलर में खरीदेंगे वो हम उस प्राइस पर खरीदेंगे जो डोनल्ड ट्रंप डिसाइड करेंगे और इनफ जो ऑयल इंडस्ट्री के स्पेशलिस्ट है वो बताते हैं कि रूस का क्रूड अच्छी क्वालिटी का था। लाइट क्रूड है वो जिसको कि रिफाइन करना उतना महंगा नहीं होता है। वेनेजुएला का क्रूड बहुत हैवी क्रूड ऑयल है जिसको कि रिफाइन करना

32:33 बहुत एक्सपेंसिव अफेयर है। तो ये ले देख के सिर्फ फ्रूट ही अगर हम देखें तो बहुत हमारे लिए घाटे का सौदा ये हो रहा है और चाहे किसी भी मूड में ट्रंप ने ये कहा हो लेकिन वो हमारी बाहें मरोड़ के हमसे वो करवा रहे हैं जो वो चाह रहे हैं। इसका क्या मतलब हम निकाले हम ऐसा कभी ये कोई इमेजिन कर सकता है कि एक सोवन कंट्री को कोई दूसरा कंट्री का सरफिरा एक प्रेसिडेंट है या प्राइम मिनिस्टर है वो डिक्टेट करे कि नहीं हम तुमसे जो कहेंगे तुम वो करोगे किसी देश को उन्होंने अभी डिक्टेट नहीं किया है तो इंडिया क्या कोई बनाना रिपब्लिक है कि जिसको वो डिक्टेट कर सकते हैं लेकिन वो कर रहे हैं और कर रहे हैं तो इसके पीछे अवश्य ही कोई बहुत बड़ी वजह

33:18 होगी राहुल गांधी ने पार्लियामेंट के बाहर फाइल्स का जिक्र किया। नरवण की बुक का भी आया है। हो सकता है ऐसी कोई डिस्कशन हुई हो जिसमें कि कुछ बहुत ही डमिंग एविडेंस हो जिसके कि रिकॉर्ड्स हो। एस्टीन फाइल में हो सकता है कुछ हो। अब उस क्या है क्या नहीं हमें तो नहीं पता। लेकिन जिस तरह से सरकार की बात करें तो कुछ चीजें ऐसी आ गई है जो सचमुच में इशारा करती है कि कोई बड़ी चीज हो सकती है जैसे अनिल अंबानी के बारे में जो चीजें निकल कर आई लड़कियों के इंतजाम वगैरह को लेकर आई उसके पहले हरदीप पुरी के मीटिंग्स को लेकर जिस तरह की चीजें हुई है। फिर दिया कुमारी जो राजस्थान की उप मुख्यमंत्री उनके बारे में नए ईमेल आ गए कि रोम में उनकी अपने बेटे की बर्थडे

34:05 पार्टी के लिए से संपर्क किया गया था। अब ये चीजें फैलती जा रही है और नईनई चीजें आ रही है। नहीं तो वही तो वजह हो सकती है। क्या पता मोदी जी के बारे में क्या है उसमें? क्योंकि एस्टीन फाइल का एक टिपिकल कैरेक्टर है और वो कैरेक्टर किस तरह का है ये हम सबको पता है। तो अगर मोदी जी से रिलेटेड वैसा कुछ फाइल्स में है एविडेंस है तो ये तो उनका करियर को तबाह करने के लिए काफी होगा ना अगर वो लीक हो जाता है और डोनल्ड ट्रंप अगर उसको पब्लिक कर देते हैं वो पब्लिक डोमेन में आ जाता है तो मुझे तो लगता है कि बहुत ही सीरियस कुछ है ऐसा ट्रंप के पास मोदी के अगेंस्ट जिसकी जिसकी वजह से वो मोदी जी से जो चाहे वो करवा सकते हैं और यह हमारे लिए बहुत ही ज्यादा चिंता का विषय है कि हमारा प्राइम मिनिस्टर कॉम्प्रोमाइज है। इंडिया जैसे

34:52 देश का प्राइम मिनिस्टर कॉम्प्रोमाइज हो गया है। यह हम सभी के लिए बहुत ही चिंता की बात है। सतीश जी आप एफस्ट फाइल्स के जो अभी तक रिवोलशंस है उनको इस पूरे कॉन्टेक्स्ट में किस तरह से देखते हैं? आज कांग्रेस ने ये भी कहा कि छह पेज जो भारत से संबंधित थे या छह फाइल्स के में जो शामिल पेज थे वो अचानक गायब हो गए। वो सवाल उठाया है। तो यह यह जो चीजें जुड़ रही हैं या गायब हो रही हैं या अब और चीजें सामने आ सकती हैं। यह क्या बड़े खतरे की तरफ इशारा करती हैं और जिसमें मोदी जी के करियर की बात भी है और सरकार की भी बात उससे जुड़ी हुई है। खतरे का

35:37 जहां तक ताल्लुक है। तो शायद आए लेकिन हमको नहीं लगता कि अब आएगा अब नहीं आएगा और जहां तक ये देखिए ये जिस तरह की चर्चा चल रही है एस्टिन फाइल्स में तो हमको लगता है कौन नहीं है ये है बात और तो वो हमको नहीं लगता और कोई वजह हो सकती है सिर्फ हम उसी के ऊपर कंसंट्रेट ना करें आप में से या हमारी भारत की मीडिया में एक और चीज की चर्चा ही नहीं मैंने सुनी। ना उसका बढ़िया से जिक्र हुआ ना बढ़िया से उसका विश्लेषण हुआ। जिस दिन ये ट्रेड डील

36:23 अनाउंस हुई डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उसके बाद में भारत के प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी ने जो अपना जवाबी एक बात कही उसमें उन्होंने ट्रंप के पीस एफर्ट की सराहना भी की। यह बात पूरी तरह से अनसूनी टाइप की रह गई। मतलब वो जिक्र में आया नहीं। मैं मैंने उसका भी अर्थ सोचने की कोशिश की। वो क्या कह रहे हैं? या तो जो उसके बहुत और भी अर्थ हो सकते हैं। बड़ा दिक्कत होती है बोलने में कि कैसे बोले? कौन से पीस एफर्ट की बात कर रहे हैं। सवाल ही कर सकते हैं ना जो दुनिया भर में वो कर रहे हैं या और कुछ ये बड़ा महत्वपूर्ण था। दूसरी बात

37:10 मुकेश जी कि जो ट्रंप का बयान पहले का था यह बहुत महत्वपूर्ण है मेरे समझ से अचानक से ये फिर सुर्खियां क्यों बटोर रहे ये बहुत मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हर चीज में हम लोग जानते हैं कि टाइमिंग होता है ये अचानक से फिर क्यों सर्कुलेट होने लगी सर्कुलेट ऐसे नहीं होती मुकेश जी जहां तक मेरी जानकारी जैसा ऐसा मैंने देखा है, समझा जो मेरा अनुभव कहता है। एक पुरानी चीज को निकाल के अचानक से यह पूरा सर्कुलेशन में घूम रहा हो या घुमा दिया जा रहा हो कुछ ना बात होगी। कोई ना कुछ पीछे होगा। कोई बात है। कोई ना कोई बात है। दूसरा अभी

37:58 हमने सुना अभी कोई बता रहे थे कि वो नरवाने वाली जो किताब जो घुमाई जा रही है उसको लेकर कोई एफआईआर हुआ है। मैं तो अभी बाहर हूं तो मुझे पता नहीं लेकिन सुना है। तो लग रहा है कि कुछ कुछ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की। हां हां तो अभी तो वही नहीं पता है। अब शायद पता चले कि भाई वो किताब है नहीं है। कहां से आया, किसने दिया, कैसे वो सर्कुलेट हो रहा है, कैसे किताबें दिखाई जा रही है। बात तो सही है। यह भी एक विषय है। तो उसी प्रकार से मुझे यह भी क्यों ना क्यों लगता है कि जो ट्रंप का पुराना बयान है वो अचानक से सुर्खियों में क्या आया? क्यों आया है? और कई चीजें लगता है कि

38:44 बड़ी उलझी हुई है और अभी तो ट्रेड डील की पूरी बातें तो आनी अभी तो आई नहीं है। जब साइन होगा तब आएगा तो भाई अमेरिका वाले बड़े बदमाश होते हैं। वो तरहतरह से आपको तंग करके अपनी सारी चीजें करवाते हैं। ये भी उतना ही सच है। तो हम लोग इंतजार करें और देखते रहे वो ट्रैक करते रहे कि क्या आ रहा है क्या नहीं आ रहा है कौन सर्कुलेट हो रहा है क्या-क्या लाया जा रहा है कौन नया बयान आ रहा है जी डॉक्टर पाठक ये कह रहे हैं कि जो ट्रंप को हासिल करना था हासिल कर लिया और बात खत्म हो गई ये हासिल अभी कहां खत्म हुआ है अभी तो सिलसिला शुरू हुआ है कल को वो कह सकता है भारत में अड्डे बनाएंगे

39:31 हमको भारत का ये हिस्सा चाहिए भारत का वो वहां कश्मीर में हम यह करेंगे जो गधा पट्टी में करना चाहते थे। इस तरह का कुछ कुछ भी ट्रंप का रवैया हो सकता है। बांग्लादेश में वो अपने पैर जमाने की कोशिश कर ही रहे हैं। ये खबरें आ चुकी है। पाकिस्तान में उनके पैर जमे ही हुए हैं। तो अगर वो चाइना को काउंटर करने के लिए भी हमारा इस्तेमाल करना चाहे और दोस्ती के नाते नहीं दबाव के जरिए तो यह भी तो उसका एजेंडा अगला हो सकता है। बिल्कुल हो सकता है सर। कभी तो डोन्ड ट्रंप के पूरे इरादे सामने आए नहीं है और दोस्ती तो बराबरी की होती है। हम सब लोग

40:18 लगातार तब से बातचीत कर रहे हैं कि भारत के वाणिज्य व्यापार के फैसले, रक्षा संबंधी फैसले, विदेश नीति संबंधी फैसले वाशिंगटन में वाइट हाउस के ओवल दफ्तर से सुनाए जा रहे हैं दुनिया को। राजेश जी ने नव उपनिवेशवाद की बात कही है। तो क्या हम धीरे-धीरे अमेरिका का उपनिवेश जैसा नहीं बनते जा रहे? यह ट्रेड डील अब तक हुई नहीं है। बिल्कुल सही कहा सतीश जी ने। अभी तो दस्तखत नहीं हुए उस पर। देश के दो-दो मंत्री डील के बारे में कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। संसद का सत्र चल रहा है। हमारे जैसे देश के ढांचे में मान्य परंपरा है। कि कोई भी बड़ा

41:03 फैसला अगर ऐसे में है तो प्रधानमंत्री बाहर आम सभा में भी नहीं उसकी जानकारी दे सकता। उसको पहले सदन में जानकारी देना पड़ेगी। विदेश यात्रा से अगर प्रधानमंत्री लौटते हैं और उस वक्त सत्र चल रहा हो तब भी विदेश में क्या हासिल करके आए उसकी जानकारी सदन को देना होती है। पीयूष गोयल बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। एस जयशंकर अमेरिका में जवाब दे रहे हैं और जवाब दोनों के पास नहीं है। एस्टीन फाइल्स की बात चल रही है। आपने उसको थोड़ा सा जिक्र किया उसका। 6 फरवरी से पहले तक डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की वेबसाइट पर जब आप इंडिया नाम से सर्च करते थे तो 400

41:48 84 फाइलें इंडिया नाम की दिखाई देती थी। 484 पेजेस थे। हर पेज में 10-10 दस्तावेज थे। अचानक आज सुबह मालूम हुआ कि वह पृष्ठ संख्या अब रह गई है। 478 यह छह पेज किसने हटवाए हैं? हमारे और आपके हमारी सरकार के किसी व्यक्ति की हैसियत नहीं है कि अमेरिका के न्याय विभाग वहां के अटर्नी जनरल द्वारा ऑनलाइन डाले गए पेजों में आप उन्हें हटा सकें। आप हैकिंग करके भी नहीं हटा सकते। जब तक कि वाइट हाउस की तरफ से कोई इशारा ना हो। बहुत सारी चीजें वहां भी हटाई गई हैं। डोन्ड ट्रंप और उनके संघी साथियों, उनके लघुओं भगुओं की को बचाने के लिए बहुत सारी

42:35 चीजें उसमें नहीं आई हैं। जिन्होंने वो कानून बनाया है। थॉमस मेसी वे तो जा रहे हैं। अब उसके दफ्तर में बैठकर डीओजी के दफ्तर में डीओजे के दफ्तर में बैठकर देखने वाले हैं कि कौन-कौन सी चीजें छुपाई गई हैं। उन्होंने कहा है कि मैं उन्हें भी सार्वजनिक करूंगा जिन्हें ट्रंप सरकार ने छुपाया है। तो यह जो छह पेज अचानक गायब हो गए इनमें क्या था? राजकुमारी दिया कुमारी का नाम आ गया। उनके सुपुत्र का नाम आ गया है। वो नाम कौन सा है जिसे छुपा दिया गया। जिसने जेफरी अपस्टीन को अपस्टीन को लिखा कि मैं ग्रैंड गाला बर्थडे पार्टी महाराजा ऑफ जयपुर की मनाने जा रहा हूं और ये अमेजिंग होगी

43:21 यादगार होगी उसने पैसे क्यों खर्च किए और इन सारे इन सारे नामों में दस्तावेजों में सिर्फ बीजेपी के लोगों के नाम आ रहे हैं सामने दुनिया में इस्तीफे शुरू हो गए। ब्रिटेन का प्रधानमंत्री माफी मांग रहा है अपने देश से। हमारे यहां कोई चर्चा करने को तैयार नहीं। हम बहुत साफ कह रहे हैं। हम ऐसा मानना चाहते हैं कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री, हमारे मंत्री अनिल अंबानी यद्यपि अनिल अंबानी का तो बहुत आपत्तिजनक मेल आ ही गया है। लेकिन प्रधानमंत्री और मंत्री की कोई ऐसी आपत्तिजनक तस्वीर उसमें नहीं है। लेकिन इसके बावजूद जो व्यक्ति 2008 और नौ में घोषित रूप से यौन अपराधी था उसके साथ 2017 तक हरदीप पुरी क्यों पत्रव्यवहार किए

44:08 हुए थे? वे जिस संस्था में काम कर रहे थे आईपीआई में इंटरनेशनल पीस इंस्टट्यूट में उसका मुखिया भारत के लोगों की तुलना सांप से भी बदतर रूप में करता है। तो ऐसे लोगों के साथ टेररजे रड लार्सन उसका नाम है। उसकी संस्था में हरदीप पुरी उपाध्यक्ष थे, सलाहकार थे और वह एफस्टीन को लिख रहा था अगर सांप और भारतीय एक साथ दिख जाए तो पहले इंडियन को मारना चाहिए। 2017 तक एस्टीन के साथ मेलामाली चल रही थी हरदीप पुरी की तो इस पर सवाल क्यों नहीं होंगे देश में सरकार देश को बताएगी नहीं

44:54 और हरदीप पुरी सिर्फ दोस्ताना बातचीत नहीं कर रहे थे वे डिजिटल इंडिया के काम में एपस्टीन और उसके एक और दोस्त lindin के सहस संस्थापक को हिंदुस्तान में कारोबार बढ़ाने में मदद करने को तैयार थे। तो बहुत सारे ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिलते हैं। हमारा देश इस रहस्य एक तरह के रहस्य लोक में पहुंच गया है। पहेलियां ऐसी बनकर रह जाती हैं। सरकार कोई जवाब नहीं देती। चाहे ट्रेड डील हो। आज भी डॉक्टर साहब इतने दिन हो गए ट्रेड डील के बारे में। प्रधानमंत्री ने कोई बयान क्यों नहीं दिया अब तक? प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का साहस तो उनमें नहीं है। लेकिन संसद में ही पटल पर रख दें जानकारी।

45:39 रूस से तेल खरीदना है या नहीं खरीदना है इसका भी कोई जवाब नहीं दे रहा अभी तक। तो बहुत सारे सवाल हैं जिनके जवाब की दरकार है। पर अब इस अमृतकाल में इस तरह के सवालों के जवाब हमें मिलेंगे इसकी उम्मीद बहुत कम है। जी राजेश जी देखिए आपने जो कहा कि ट्रंप जिस तरह की राजनीति कर रहे हैं दक्षिणपंथी राजनीति नव उपनिवेशवाद वो सब वो सारे दबाव पैदा हो रहे हैं अमेरिका से विभिन्न तरीकों से लेकिन ये एक व्यक्ति की भी बात हो रही है प्रधानमंत्री की एक व्यक्ति के तौर पर बात कर रहे हैं ट्रंप और उस व्यक्ति ने कुछ अतीत में ऐसा कर

46:26 डाला है या उसके मित्रों ने ऐसा कर डाला है अगर उसकी वजह से दबाव डाला जा रहा तो ये एक दूसरी परिस्थिति है। इन दो परिस्थितियों को अलग करके भी देखा जाना चाहिए क्या? देखिए मैं जहां तक समझता हूं इसमें बहुत कयास आराइयां या स्पेकुलेशन की गुंजाइश नहीं है। इसलिए नहीं है के नरेंद्र मोदी की कल्पेबिलिटी क्या है? या हिंदुस्तान के किसी दूसरे पॉलिटिशियन की कल्पेबिलिटी क्या है? ये हमारे पास नहीं है इसकी जानकारी। तो उसके बारे में हमें स्पेकुलेट नहीं करना चाहिए। हमें जो चीजें सामने पब्लिक डोमेन में आ गई है उनके आधार पर कुछ नतीजे निकालने की कोशिश करनी चाहिए। आप 2022-23 का के अखबार इकोनमिक टाइम्स वगैरह उठा के देख लीजिए। एस जयशंकर ने जिस

47:14 तरह से वेस्टर्न कंट्रीज को यूरोप को तब लताड़ पिलाई थी। रूस से ऑयल इंपोर्ट करने के मामले में ही कहा था कि हमें कोई प्रीच ना करें क्योंकि आप खुद ही जो है वहां से रूस से ऑयल खरीद रहे हैं। हमें ना बताएं तो उस वक्त ये पूरा जो स्पिन डॉक्टर्स जिनकी मैं बार-बार बात करता हूं। उन्होंने पूरे में छा गए थे मीडिया में कि हिंदुस्तान ने अपने आप अलग इंडिपेंडेंट लाइन ले ली है। अब हिंदुस्तान वेस्ट की तरफ वैसे नहीं देखता है जैसे इंदिरा गांधी के और उसके जमाने में देखता था। अब तो भारत की पूरी जो है विदेश नीति डंका बज रहा है। तो डंका बजाने वाली जो है वो उस पर काफी इंपेटस मिला था जब एस जयशंकर ने इस तरह की बात कही थी और लगा था कि वाकई मतलब अगर हिंदुस्तान रूस से खरीदना चाह रहा है तो खरीदे क्यों नहीं खरीदेगा और ये नरेंद्र मोदी की लीडरशिप को इस्टैब्लिश

48:01 करने के के रास्ते में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित हुआ। अब लेकिन जो आते हैं 2026 में 25 के एंड और 26 में तो वो पूरा लगता है कि वो तो सिर्फ एक भरभरा करके गिर रहा है सब कुछ बना एडिफस बना रखा था और उसमें कहीं से पलीता लगा दिया ट्रंप ने और वो सब भरभरा के गिर रहा है। यह देखिए इस बात को भी समझने इस ये जो सिर्फ ट्रंप ने कहा है मोदी के बारे में इसको आइसोलेशन में नहीं मैं इस तरह से समझता हूं कि आपके देश में एक सेल्फ अपॉइंटेड सेल्फ अपॉइंटेड नहीं कहना चाहिए सेल्फ स्टाइल्ड नेशनलिस्ट गवर्नमेंट है हिंदू नेशनलिस्ट गवर्नमेंट है वो कहते हैं कि हम हमारे राष्ट्र सर्वोपरि है और राष्ट्र के बगैर कुछ नहीं होगा राष्ट्रवादी तो आरएसएस का और बीजेपी का सबसे बड़ा बुनियाद है जो दावा करते हैं

48:48 और उसी सरकार में बाह मरोड़ के अगर अमेरिका ये करवा ले जाता है जो करवाने जा रहा है तो यहां का कृषि सेक्टर को लेकर के जो ओपनिंग अप हो रही है अमेरिका का माल यहां जब आने वाला है या आएगा तो ये राष्ट्रवाद वाला जो है उसको अपोजिशन क्यों नहीं उठा रहा है मैं अपोजिशन पे सवाल करता हूं ये हम लोग बात कर लेंगे संसद में बात हो रही है लेकिन सड़कों पर कहीं कोई बात नहीं हो रही ऑर्गेनाइजेशन मास ऑर्गेनाइजेशन कर रहे किसान और मजदूरों के संगठन कर रहे हैं। लेकिन जो मेन अपोजिशन पार्टीज है समाजवादी पार्टी है। कांग्रेस सिर्फ कांग्रेस पार्टी की बात नहीं करता हूं मैं। समाजवादी कांग्रेस स्टालिन ये सब लोग मिलकर के या अलग-अलग

49:34 क्यों नहीं अपोजिशन का रोल निभा रहे हैं। अगर भारतीय जनता पार्टी अपोजिशन में होती क्रेडिट मस्ट गो टू देम। अगर वो अपोजिशन पार्टी में होते और इस तरह का हो रहा होता वो दांत खट्टे कर देते सत्तारूढ़ पार्टी के। उनका जो तमाम ऑर्गेनाइजेशन है वो एक सुर में बोलते हैं। यहां आप देखिए कोई कांग्रेस का नेता जो जो वजनदार है राहुल गांधी के अलावा कौन बोल रहा है? या तो कांग्रेस का स्ट्रक्चर ऐसा है कि राहुल गांधी के अलावा किसी को बोलने की इजाजत नहीं है। और एनएसयूआई का कौन नेता बोल रहा है? क्या कांग्रेस सेवा दल का कौन बोल रहा है? कहीं देखा आपने कुछ? थोड़ी सी असहमति है। थोड़ी सी असहमति है राजेश जी। आप ठीक कह रहे हैं कि कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां उस तरह से एक्टिव नहीं है। लेकिन वो जमाना दूसरा था जब मीडिया विपक्ष के साथ होता था। आज अगर

50:22 वैसा ही मीडिया होता तो ये अपोजिशन कुछ नहीं कर पाती। जब अंग्रेज यहां पर थे तब तो ना तो मीडिया था। गांधी के पास क्या था? कुछ मीडिया नहीं था। वो प्रभात फेरिया निकालते थे। आरएसएस वाले क्या करते हैं? सुबह 5:00 बजे 6:00 बजे शाखा लगाते हैं। सिर्फ मीडिया पर ये है कि मीडिया पर कब्जा कर लिया। ये बात ठीक है। बहुत इंपॉर्टेंट है। लेकिन उससे आप जब सड़क पर नहीं उतरेंगे, आपके पास कार्डर नहीं होगा। आपके पास संगठन नहीं होगा तो आप अपना मैसेज कैसे पहुंचाएंगे? गांव आरएसएस वाले क्या करते हैं? घरघर तक पहुंचते हैं। बंधु और भगिनी माताजी कैसी है? सिर दर्द हुआ है। मैं दवा ले आऊं। वो कहां है आपके पास? जबकि कांग्रेस का वो कांग्रेस के का यूएसपी था। प्रभात फेरिया निकाल करके तमाम जगह अपने मैसेज कन्व करते थे। सिंबॉलिज्म में गांधी से बड़ा कोई

51:08 सिंबलिज्म का मास्टर था। आज वो पूरा सिंबलिज्म आरएसएस और हिंदुत्ववादी ताकतों ने ले लिया है। भगवा पटका पहन करके किसी मुसलमान का बोर्ड तोड़ना वो मर्डर थोड़ी कर रहे हैं। हालांकि कत्ल भी होते हैं। लेकिन वो सिंबोलिज्म है। अपनी राजनीति को आप कैसे ले जाएंगे? सिर्फ टेलीविजन के जरिए ले जाएंगे। सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए ले जाएंगे। तो मेरी आपसे मेरी असहमति है। आपकी मुझसे असहमति है। लेकिन ये मैं बहुत संतुष्ट नहीं हो पाता हूं। विपक्ष संतुष्ट तो कोई भी नहीं है लेकिन यह कुछ सीमाएं जो नई बनी है इनको भी ध्यान में रखना चाहिए क्योंकि देखिए एक उदाहरण देता हूं मैं यूजीसी का जो मामला गया कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ने उसे रोक दिया अब जगहजगह प्रदर्शन कर रहे हैं जो दलित हैं आदिवासी

51:56 हैं पिछड़े हैं और उनके साथ समर्थक है प्रदर्शन लेकिन एक रिपोर्ट आपको कहीं नहीं दिख रही गायब है तो बहुत सारी चीजें ऐसी होती है जो आपको हमको नजर भी नहीं आती और हो रही होती है। इसलिए मैंने इस पॉइंट को रखा। ठीक बात है कि अपोजिशन को इस समय सड़कों पर होना चाहिए। सड़कों पर कितने कितनी पार्टियां है ये तो है। लेकिन एक एक चार सेकंड में अपनी बात खत्म करना चाहता हूं। मुद्दे उठाते हैं। बहुत गंभीर मुद्दे उठाते हैं। लेकिन उसको कैरी करने वाला आपके पास इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। आप ये बताइए जो हाइड्रोजन बम था राहुल गांधी का वो आज कितने लोगों को याद है मुझे यह बता दीजिए उसका कहीं कोई जिक्र होता है कांग्रेस ही जिक्र करती है उसका जो मनरेगा खत्म किया मनरेगा के वो हल लेकर

52:45 के फोटो देखा आपने उसका आज कहीं कोई जिक्र होता है एक के बाद एक दूसरा तीसरा मुद्दा आ जाता है आप कंसिस्टेंटली 10 मुद्दे कांग्रेस के जैसे बीजेपी के था बाबरी मस्जिद ये अपना विश्वनाथ मंदिर कृष्ण जन्मभूमि वगैरह वगैरह ये मतलब कहने का है कि हिंदुत्ववादी संगठनों का था। सिर्फ भारतीय जनता पार्टी ने बाद में आप अपने मुद्दे उठा के प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं भूल जाते हैं। ऐसे ऐसे तो राजनीति विपक्ष की नहीं होती है। कम से कम मैं मुझे नहीं समझ में आ रही है ये बात। जी पूर्णिमा जी मुकेश जी मैं इसमें यही ऐड करना चाह रही हूं। राजेश जी ने जो बात कही कि कहां पर विपक्ष दिखाई दे रहा है इन मुद्दों को लेकर जनता के पास वो कहां जाता दिख रहा है। मैं बिल्कुल सहमत हूं इनकी इस बात से। हमने देखा सिर्फ राहुल गांधी उठा रहे हैं

53:32 मजबूती से इस बात को लेकिन बाकी जो विपक्ष के नेता हैं जो अपनेपने स्टेट की पॉलिटिक्स में इतना उलझे हुए हैं कि ममता जी एसआईआर के लिए अपना काला कोट पहनकर सुप्रीम कोर्ट में बिजी है। उधर अहिल्याबाई होलकर की तख्ती ले अखिलेश यादव की पार्टी वहां पे अपने यूपी में बिजी है। इधर स्टालिन अपने स्टेट में अपने आने वाले चुनाव को ले परेशान है। एक साथ एक आवाज में इन नेताओं ने कब जनता तक ये बात अपनी पहुंचाने की कोशिश की कि ये जो अमेरिका की दादागिरी है वो ये ये इसकी वजह हो सकती है और आप लोगों को सावधान होना होगा ये हमें नहीं दिखाई दिया चाहे कितना भी बीजेपी अभी मजबूत है कितनी भी बड़ी मास बेस पार्टी है लेकिन अगर सारे अपोजिशन लीडर्स एक साथ

54:19 सड़क पर आके जनता से कन्वर्सेशन करें बताएं एक मुद्दा लेकर खड़े हो जाएं तो क्या कोई मीडिया उसको इग्नोर कर सकता है। सारी बातें मीडिया के ऊपर ब्लेम डाल देना मुझे नहीं लगता है सही है। मीडिया बेशक नहीं है साथ में। यह बात सही है। लेकिन अगर सारे नेता बेशक आरजेडी हार गई है बिहार में उसकी सरकार नहीं है। बेशक अखिलेश यादव वहां बिजी है। लेकिन अगर यह सब एक साथ खड़े हो जाएंगे तख्तियां हाथ में लेके और प्रोटेस्ट करते हुए और जनता से अपनी बात कहते हुए तो इनको इग्नोर करना मुश्किल होगा और मुझे लग रहा है कि इसमें इनकी कमी रह रही है। नहीं तो आज जितनी बुरी तरह से ये सरकार दबाव में काम कर रही है। यह ना सिर्फ देश के लिए घातक है। हमारे डेमोक्रेसी के लिए बहुत डैमेजिंग

55:06 होगा लॉन्ग रन में अगर इसको चेक नहीं किया गया और चेक करने का मैकेनिज्म सिर्फ अपोजिशन पार्टीज और जनता के हाथ में ही है। उसके अलावा तीसरा कोई रास्ता नहीं है। डॉक्टर पाठक देखिए मुझे बहुत संक्षेप में आखिर में सिर्फ इतना कहना है कि राजेश जी ने बहुत अच्छी बातें कही। उनकी चिंताएं वाजिब भी हैं। हम सब लोग उस बात को महसूस करते हैं। लेकिन 2014 के बाद से देश बदल चुका है। जो देश एलपीजी की कीमतों पर ₹2 की वृद्धि पर या पेट्रोल की कीमतें बढ़ने पर सड़कों पर उतर आता था। उस देश में लोग ₹500 लीटर पेट्रोल भराने को तैयार हैं।

55:53 और मीडिया की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। एक तरफ पूरा मुख्यधारा का सो कॉल्ड मीडिया है जो दिन रात तबाही को भी उपलब्धि बताने को तैयार रहता है जो 25सदी टेरेफ बढ़े तो उसको भी मास्टर स्ट्रोक बताता है भारत के फायदे की चीज बताता है और जिस दिन 18 फीसदी हो जाए नरेंद्र मोदी ट्वीट कर दें उस दिन भी प्राइम टाइम में बहन जी उस पर ज्ञान बांटती हैं और तीसरी तरफ है हमारा प्रधानमंत्री उसके नैरेटिव रचने की पराकाष्ठा यह है कि यूजीसी के मुद्दे पर कब्र खोदने के नारे उनके ही अंधभक्तों ने लगाए थे। एक भी कांग्रेसी नहीं था पूरे देश में। भगवा

56:40 पट्टे वाले थे। गोंडा का उस जुलूस जिसमें मोदी तेरी कब्र खुदेगी यूजीसी की छाती पर। शत प्रतिशत बीजेपी और मोदी के समर्थक थे। नरेंद्र मोदी ने क्या किया? नरेंद्र मोदी ने सदन में कह दिया कि कांग्रेसी लोग मेरी कब्र खोदने के नारे लगाते हैं। अभी बात चल रही थी पुराने वीडियो के वायरल होने की। सतीश जी कह रहे थे कि हो सकता है ऊपर आना हो। टाइमिंग अभी कैसे? जिस देश में सत्ता पक्ष 1000 साल पहले महमूद गजनवी के मंदिर तोड़ने का राग अलापता हो। जिस देश का प्रधानमंत्री पिछले 12 सालों से 61 साल पहले देवलोक गमन कर चुके प्रधानमंत्री को गाली देने से बाज ना आता हो वहां अगर

57:28 अभी 25 दिसंबर का कोई वीडियो वायरल हो गया डोनाल्ड ट्रंप का तो यह कोई बहुत पुरानी बात तो नहीं है। तो ऐसे में यह लड़ाई बहुत कठिन है। बेशक विपक्ष को इससे ज्यादा तीखे तेवरों के साथ लड़ाई लड़नी चाहिए। लोग कहते हैं विपक्ष सड़कों पर नहीं है। लेकिन जब विपक्ष सड़कों पर होता है तो कितने लोग उसे दिखाते हो? कितने चैनल्स ने राहुल गांधी की दो-दो भारत जोड़ो यात्राओं को कवर किया था? कितने लोग प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाते हैं? कितने चैनलों पर कल या आज गौरव गोगोई की प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाई गई। बाकायदा असम के मुख्यमंत्री कार्यालय से असम के मीडिया कर्मियों को आदेश हुआ था कि

58:14 गौरव गोगोई की प्रेस कॉन्फ्रेंस ना दिखाई जाए। यही हाल प्रधानमंत्री को लेकर है। यही हाल एस्टीन फाइल्स को लेकर है। हर मुद्दे पर वो कोई हीरे जैसी चमक वाले जोशी हैं। हीरेन जोशी उनका WhatsApp पर मैसेज आ जाता है। क्या कीजिएगा आप? कैसे जनता को मालूम पड़ेगा कि राहुल गांधी लड़ाई लड़ रहे हैं देश की और जनता की। सत्य हिंदी जैसे कितनी आवाजें इस देश में? यद्यपि हम बहुत भरोसे के साथ यह कहना चाहते हैं कि उनसे ज्यादा मुख्यधारा के मीडिया से ज्यादा भरोसा आज की तारीख में लोगों को सत्य हिंदी पर है। डॉ. मुकेश कुमार पर है। लोग सुन रहे हैं और समझ रहे हैं। समय लगेगा थोड़ा सा। हर चीज का एक समय होता है। तो समय अभी चल रहा है। जी मुकेश जी।

59:00 जी। मेरे ख्याल से इस विषय में चर्चा और लंबी हो सकती है लेकिन समय की सीमा है और इस पर चर्चा करते रहेंगे हम लोग लेकिन कुछ बहुत ही वाजिब सवाल उठे हैं इस चर्चा से आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया धन्यवाद नमस्कार

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