What Forced Hiren Joshi Out of PMO? Hidden Truth Exposed!

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简要总结

本视频主要讲述了印度总理办公室(PMO)发生的一起“政变”,核心人物是负责沟通和IT的前负责人希伦·乔希医生。乔希医生被指控长期控制媒体,并涉及多项腐败指控,最终被解职。

  • 希伦·乔希医生自2008年起就与莫迪总理密切合作,是莫迪的左膀右臂,负责管理社交媒体和控制媒体宣传。
  • 乔希医生被指控利用职权进行腐败活动,包括参与博彩应用股份、为获得议会席位收受贿赂,以及通过家人获取不正当利益。
  • 乔希医生还被指控滥用国际关系,通过不当渠道与外国势力建立联系,损害国家利益。

介绍

视频介绍了印度总理办公室(PMO)发生的一起重大事件,即负责沟通和IT的负责人希伦·乔希医生被突然解职。乔希医生在PMO拥有极高的权力,被指控长期控制媒体,影响新闻头条、议题讨论和文章发表,对媒体进行审查。他被认为是莫迪总理的左膀右臂,自2008年起就与莫迪密切合作,在莫迪担任古吉拉特邦首席部长时就负责管理数字媒体。

希伦·乔希的背景与职责

希伦·乔希医生自2008年起就与莫迪总理密切合作,担任其数字媒体的管理者。2014年莫迪成为总理后,乔希医生被任命为PMO的OST,负责沟通和IT部门。他的职责包括管理莫迪的社交媒体账号,如Twitter和Facebook,以及指导国内主要媒体机构、电视台、报纸和主持人。乔希医生通过WhatsApp群组发布指令,控制新闻报道的方向,压制反对派的声音,塑造莫迪总理的形象。他被媒体界称为“媒体独裁者”,是“奴才媒体”的幕后推手。

解职原因:内部矛盾与腐败指控

乔希医生被解职的原因有多种说法。一种说法是内部矛盾,乔希医生试图干预喜马偕尔邦的政治,为昌迪加尔大学的副校长希马尼·苏德争取 विधानसभा门票和首席部长职位,甚至为此会见了人民党主席JP·纳达。另一种说法是腐败指控,乔希医生被指控参与博彩应用股份,通过拉维·蒂哈拉瓦拉进行操作。此外,他还被指控为旁遮普邦的实业家萨特南·辛格·桑杜争取议会席位,并收取3亿卢比的贿赂。乔希医生的儿子也被指控利用其父的影响力,从Reliance Industries LED获得高薪。

媒体控制与国际关系

乔希医生被指控长期控制媒体,压制国大党的新闻报道,抬高人民党的形象。他还被指控通过WhatsApp消息威胁媒体,阻止他们报道某些新闻。此外,乔希医生还被指控滥用国际关系,通过希马尼·苏德与外国势力建立联系,损害国家利益。视频提到了埃普斯坦案件,暗示乔希医生可能与涉及性侵和人口贩卖的案件有关联。乔希医生还为苏德建立了一个组织,其中包括伊斯兰国家的大使、基督教、锡克教、佛教、帕西教和穆斯林领袖,并安排他们与莫迪总理会面。

后续影响与未来走向

乔希医生被解职后,引发了关于总理是否会对此事保持沉默的疑问。国大党警告说,如果不对乔希医生的行为进行全面调查,他们将自行揭露真相。目前尚不清楚谁将接替乔希医生在PMO的位置,有传言称可能是IT部门负责人阿米特·马尔维亚。视频指出,乔希医生掌握着关于PMO和莫迪总理的许多秘密,这些秘密可能对总理的政治生涯产生重大影响。乔希医生的离职不仅揭示了PMO的运作方式,也暴露了一个人如何控制媒体、实施审查和滥用权力。视频最后强调,乔希医生事件可能会进一步损害莫迪总理的形象。

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文字稿

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0:03 नमस्कार देश काल में आपका स्वागत है। मैं हूं मुकेश कुमार। दोस्तों, एक बड़ी घटना हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय में पीएमओ में एक किस्म का तख्ता पलट हो गया है। यह तख्तापलट जुड़ा है डॉ. हिरन जोशी से। डॉक्टर हिरन जोशी पीएमओ में कम्युनिकेशन और आईटी के प्रमुख अधिकारी थे और उनकी सत्ता इतनी मजबूत थी, इतनी ताकतवर थी कि वो पूरे मीडिया जगत को कंट्रोल कर रहे थे। हिरन जोशी का नाम आप पूरे मीडिया सर्कल में अगर पूछ लें तो आपको समझ में आ जाएगा कि उनकी भूमिका क्या थी। पीएमओ में रहते हुए वो एक तरह से पूरा

0:50 मीडिया कंट्रोल कर रहे थे। एक-एक चैनल को, एक-एक अखबार को वो तय करते थे कि आपकी हेडलाइन कौन सी होगी। आप किन मुद्दों पर बहस करवाएंगे। किन मुद्दों पर आर्टिकल छापेंगे। कौन सी खबरें आपको नहीं छापनी है। कौन सी छ खबरें आपको अगर आपने छाप दी है या दिखा रहे हैं तो हटा देनी है। तो पूरी तरह से एक सेंसरशिप जो पीएमओ के के मातत चल रही थी जिसके जरिए लागू की जा रही थी उसके सर्वे सर्वा थे डॉक्टर हिरेन जोशी और डॉक्टर हिरेन जोशी को अचानक विदा कर दिया गया है। अचानक उन्हें हटा दिया गया है। यह बहुत बड़ी घटना इसलिए भी है कि डॉक्टर हिरेन जोशी प्रधानमंत्री नरेंद्र

1:38 मोदी के बाएं हाथ माने जाते थे और वो 2008 से उनके साथ थे। यानी जब वो नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे गुजरात के तब से वो उनके करीबी सहयोगी थे और उनके नाक कान आंख सब कुछ थे। उन्हीं की हिरन जोशी की आंखों से ही प्रधानमंत्री देखते थे, सुनते थे उनके कानों से और हिरन जोशी नरेंद्र मोदी के मुंह भी थे। वो जो बोलना चाहते थे वो उनके हवाले से पूरा मीडिया बोलता था। तो हिरन जोशी आप समझ सकते हैं कि उनकी भूमिका क्या थी। अभी मैं और उसके विस्तार में जाऊंगा और यह भी बताऊंगा कि उन्हें हटाया क्यों गया? क्या

2:24 कारण बताए जा रहे हैं? कौन से आरोप लगाए जा रहे हैं? बहुत ही गंभीर किस्म के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसलिए यह बड़ी खबर बन गई है। तो सबसे पहले उनकी पृष्ठभूमि जैसा कि मैंने बताया कि 2008 से वो मोदी जी के सहयोगी रहे हैं। जब मोदी गुजरात में मुख्यमंत्री थे तो उनकी डिजिटल मीडिया का प्रबंधन करते थे। और फिर जब 2014 में प्रधानमंत्री बनकर मोदी दिल्ली आ गए। तो उन्होंने उनको अपना ओएसटी बना लिया। और जो कम्युनिकेशन और आईटी विभाग के प्रमुख थे पीएमओ में। अब उनकी जिम्मेदारियां क्या थी? पीएम मोदी के सोशल मीडिया जो Twitter, Facebook ब्लॉग आदि है उस सब का मैनेजमेंट वो खुद देखते थे। यानी प्रधानमंत्री के

3:11 ट्वीट में क्या जाएगा? Twitter हैंडल पर क्या नहीं जाएगा? सोशल मीडिया पर क्या जाएगा? कौन से वीडियो जाएंगे, कौन सी तस्वीरें जाएगी? ये सारा कुछ हिरन जोशी कर रहे थे। हिरन जोशी उसके मास्टर माइंड थे। फिर मीडिया कंट्रोल जैसा मैंने बताया देश के प्रमुख मीडिया हाउसों टीवी चैनल अखबार एंकरों को वो डायरेक्शन देते थे। उनको निर्देश देते थे। एक WhatsApp ग्रुप पर रोजाना वो आदेश जारी करते थे कि कौन सी खबर चलानी है, कौन सी दबानी है और विपक्ष के बयानों को कैसे तोड़ना मरोड़ना है या बढ़ा चढ़ाकर पेश करना है ये सब काम वो करते थे और जो मीडिया के अंदर उन्हें

3:56 मीडिया तानाशाह मीडिया डिक्टेटर कहा जाता था जो 11 सालों से गोदी मीडिया का रीड बना हुआ था। उसी के हिसाब से पूरा मीडिया चल रहा था। इसके अलावा हिरन जोशी का काम था पीएम की इमेज बिल्डिंग का। पीएम की मजबूत, विनम्र और प्रगतशील इमेज बनाने में उनकी भूमिका थी। विदेश यात्राओं में मीडिया कवरेज का प्रबंधन भी वही देखते थे और पीएमओ की आईटी रणनीति थी, जो वो भी उनके साथ ही चलती थी। यानी वो पीएमओ के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाते थे। तो यह था डॉक्टर हीरो हिरन जोशी का जलवा। आप समझ सकते हैं कि जो पूरा मीडिया कंट्रोल कर

4:42 रहा हो प्रधानमंत्री के दफ्तर में बैठकर कर रहा हो उसकी ताकत क्या होगी? जिसका रोष दैनंदिन रूप से प्रधानमंत्री से मिलनाजुलना उनसे ब्रीफ लेना उनको ब्रीफ करना और फिर उनके डायरेक्शंस पे काम करना और अपने विवेक से अपनी जानकारी से अपनी समझ से पूरे मीडिया को देश भर में भारत के इतने बड़े मीडिया को कंट्रोल करना ये एक बहुत बहुत मतलब आप समझिए हिटलर का जो गोयबल्स था जो पूरा उनका मीडिया कंट्रोल करता था प्रचार प्रचारक था, प्रचार मंत्री था। ठीक उसी तरह से हिरन जोशी भी प्रधानमंत्री मोदी के गोएबल्स थे। उनके लिए वही काम कर रहे थे और इस वजह से वो अब

5:30 चर्चाओं में है, विवादों में है कि आखिरकार इतने पावरफुल व्यक्ति को हटाया क्यों गया? तो हटाने के भी कई कारण बता रहे हैं। कुछ कारण बताए जा रहे हैं कि आंतरिक कलह थी। इनको आप इनफॉर्मल रीज़ंस कह सकते हैं। एक तो यह था कि हिमाचल प्रदेश में की भाजपा की राजनीति से जुड़ा हुआ है। जोशी ने वहां के जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर और केंद्रीय मंत्री हरी हरदीप सिंह पुरी की करीबी थी हिमानी सूद उनको हरियाणा माफ़ कीजिए हिमाचल प्रदेश से विधानसभा टिकट दिलाने और मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की कोशिश की थी। यानी वो हिरन जोशी जो भूमिका उनको दी गई थी उससे हटकर वो सीधे राजनीति में दखल दे रहे

6:17 थे और ये कोशिशें उन्होंने की थी भाज इसके लिए वे भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिले थे। फिर जेपी नड्डा ने अमित शाह को ये चीज बताई और अमित शाह से जब पीएम अमित शाह ने जब पीएम मोदी को बताया तो फिर जोशी का पत्ता कट गया। यह एक बड़ी बात मानी जाती है। जोशी बहुत महत्वाकांक्षी व्यक्ति थे। यह माना जाता है कि वह खुद को पीएम की आंख और कान मानते थे और हाल के महीनों में वो कुछ ज्यादा हस्तक्षेप करने लगे थे। जिसकी वजह से सरकार में भी नाराजगी थी और धीरे-धीरे उनका घड़ा भर गया। अब दूसरे कारणों पर आते हैं कि किस तरह से उन पर करप्शन के आरोप

7:04 लग रहे हैं कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए अपने हित साधने की कोशिश की और किस-किस तरह के तथाकथित भ्रष्टाचार के आरोपों से वो जुड़े रहे हैं। पहला तो आरोप जो उन पर लग रहा है वो है वेटिंग ऐप में उनकी हिस्सेदारी को लेकर। एक दुबई बेस्ड बैटिंग ऐप नाम अभी साफ नहीं लेकिन उनके उस बैटिंग ऐप के मालिक जो है रवि तिहारवाला का जिक्र बार-बार किया जाता है। इसमें बैटिंग ऐप में जोशी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी थी। तो ये पीएमओ में बैठकर अगर वो यह काम कर रहे किसी वेटिंग ऐप में अपनी

7:49 पार्टनरशिप चला रहे थे। तो जाहिर है कि वह एक बिज़नेस कर रहे थे और यह सवाल पूछा जा रहा है कि पीएमओ में बैठकर कौन सा बिजनेस कर रहे थे वो और उनके बिजनेस पार्टनर कौन हैं? तो एक तो ये मुद्दा बहुत गर्म हो रहा है। दूसरा है राज्यसभा सीट के लिए रिश्वत का मामला है। सतनाम सिंह संधू ये पंजाब के एक उद्योगपति हैं को राज्यसभा सीट दिलाने के एवज में आरोप है कि उन्होंने ₹30 करोड़ लिए। ये कथित तौर पर 2022-23 के आसपास का मामला है। जब जोशी भाजपा की आंतरिक राजनीति में सक्रिय थे। इसके अलावा उनके परिवार ने भी उनकी उनके उनके इस स्थिति का

8:36 लाभ उठाया। जोशी के बेटे ने Reliance Industries LED से सालाना ₹ करोड़ की सैलरी ली जो जाहिर है कि पिता के प्रभाव से मिली होगी। हिरन जोशी के ताकत से मिली होगी और यह एक तरह का परिवारवाद बताता है और पीएमओ का दुरुपयोग भी इससे जुड़ जाता है। तो यह जोशी की ओवर रीच की बात मैंने जो की वो है। फिर दूसरे आरोप जो मीडिया पर नियंत्रण और धमकियों के लगातार मैंने जिनका जिक्र किया है वो हैं। 11 सालों से उन्होंने मीडिया को गुलाम बना रखा था। कांग्रेस की खबरों को दबाया। ये कांग्रेस का आरोप है। खबरें दबाई गई। भाजपा की बढ़ा चढ़ा कर दिखाई दी गई। अह कुछ उदाहरण

9:23 कांग्रेस के प्रवक्ता ने दिए हैं। जैसे एबीवीपी न्यूज़ पर जोशी का नाम लिया था उन्होंने। 2022 में अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जोशी चैनलों को आपको कवरेज ना देने के लिए गालियां और धमकियां भी भेजते हैं। यह हिरन जोशी जो WhatsApp पे मैसेज देते थे, उनसे कुछ लीकेज हुआ था और वो बाहर आया था। उसके बेसिस पे ये सब कहा जा रहा था। एक तीसरा जो मसला है वो है उनके जो इंटरनेशनल कनेक्शन थे उनसे जुड़ा हुआ था। जो हिमानी सूद का जिक्र किया मैंने जो कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की प्रो वाइस चांसलर थी और हरी हरदीप सिंह पुरी की करीबी भी

10:12 थी। उनके जरिए उन्होंने विदेशों में अपने संपर्क बनाए जो कि राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताए जा रहे हैं। ध्यान रखिए एस्टीन फाइल का नाम बहुत चल रहा है इस समय। एस्टीन जो अमेरिका में यौन शोषण का आरोपी है। ह्यूमन ट्रैफिकिंग का आरोपी है। था जेल में गया। 2019 में जेल में जाते ही उसकी मृत्यु हो गई। उसके संबंध दुनिया भर के ताकतवर लोगों से था और हाल में जो रहस्य उद्घाटन हुआ उसमें हरदीप सिंह पुरी का भी नाम है। अनिल अंबानी का भी नाम है और मोदी का भी जिक्र है। तो ये नेशनल इंटरेस्ट के खिलाफ अचानक अगर हिरन जोशी को हटाया गया है तो क्या ऐसा कुछ

11:00 सामने आ रहा था हिरन जोशी के बारे में? फिर कुछ और चीजें हैं। जोशी ने सूत के लिए एक संगठन बनवाया। ह्यूमैनी सूद के लिए एक संगठन बनवाया जिसमें इस्लामिक देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई के राजदूत, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी, मुस्लिम गुरु, धर्मुरु शामिल हुए। 5 फरवरी 2024 को सूद ने इन्हें प्रधानमंत्री मोदी से भी मिलवाया। तो आप देखिए हिरन जोशी के कनेक्शन हिमानी सूद से हिमानी सूद कैसे प्रधानमंत्री तक पहुंच जाती हैं। इन सबको प्रतिनिधि मंडल को लेकर। फिर वेटकन सिटी की यात्रा की। सूद ने पोपलियो से मिलवाया जहां पीएम मोदी की फोटो देकर 2024 लोकसभा चुनाव में जीत का

11:47 आशीर्वाद लिया। ये क्या था? हिमानी सूद इतनी बड़ी रेकेटियर हो गई। इतनी बड़ी लॉविस्ट हो गई। इतनी बड़ी नेटवर्किंग करने वाली हो गई और जिनका इस्तेमाल हिरन जोशी कर रहे थे। पीएम के साथ हिरन जोशी ने अमेरिका, यूरोप आदि की बहुत सारी यात्राएं की और कई यात्राओं में उस सूद को भी ले साथ ले गए जहां बड़े लोगों से मिलवाया। 25 सितंबर 2025 को सूद ने मैं हूं भारत अभियान लांच किया जो पीएम की 75वीं वर्षगांठ पर जयंती पर आधारित था। इफ्तार पार्टी भी वह करते थे और हिमाचल कनेक्शन जो था जिसका जिक्र मैंने किया मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने की कोशिश की और फिर उनको हटाने की बात हुई। तो ये

12:35 सारे खुलासे हुए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि अगर पीएमओ के अंदर रहते हुए कोई व्यक्ति इतना ताकतवर है और इस तरह से अपनी पोजीशन का दुरुपयोग कर रहा है तो ये बहुत गंभीर बात है। प्रधानमंत्री मोदी की नाक के नीचे ये सब हो रहा है। हुआ है होता रहा। उन्हें पता भी नहीं चला और अब उन्हें हटाया गया है। तो ये एक इस इसको लेकर उन्होंने सवाल उठाए हैं और चेतावनी दी है कि अगर पूरी जांच ना हुई सारी चीजें सामने ना आई तो फिर वो खुद खुलासा करेंगे। तो यह एक बड़ी घटना बन गई है कि हिरन जोशी पीएमओ

13:20 में प्रधानमंत्री के बाएं हाथ इतने ताकतवर आदमी इतने सारे आरोपों से घिरे हुए हैं और उन्हें हटाया गया है। अब सवाल उठ रहा है कि प्रिय पीएम मोदी क्या चुप रहेंगे? कुछ बोलेंगे इस बारे में पीएमओ की तरफ से कोई सफाई आएगी या इसे चुपचाप दबाने की कोशिश होगी और क्या विपक्ष इसे चुपचाप दब जाने देगा? एक सवाल। दूसरा सवाल है कि हिरन जोशी की जगह अब कौन लेगा पीएमओ में? क्या आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय वहां जाएंगे? कहा तो यह जा रहा है कि प्रधानमंत्री गुजरातियों के अलावा किसी और पर ज्यादा विश्वास नहीं करते। हिरन जोशी गुजरात के थे और अब फिर उन्हें गुजरात का

14:06 ही कोई आदमी इसके लिए चाहिए या उन्होंने शायद तय कर लिया है। हालांकि अभी अश्विनी वैष्णव को ये जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन जाहिर है कि अश्विनी अश्विनी वैष्णव मंत्री हैं। उनके पास ना इतना वक्त होगा और ना ही प्रधानमंत्री उन पर इतना भरोसा कर सकते हैं। इसलिए वह कोई अपना खासम खास गुजरात से ही लाएंगे या अमित मालवीय पर अगर उनका भरोसा बन गया होगा तो फिर उनका क्योंकि हिरन जोशी के पास बहुत सारे और रहस्य हो सकते हैं पीएमओ से संबंधित प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित और ये रहस्य बेशकीमती होंगे। वो प्रधानमंत्री को बना और बिगाड़ सकते हैं। अगर वह रहस्य खुल जाए

14:52 कि पीएमओ में क्या-क्या होता रहा है। प्रधानमंत्री क्या-क्या करते रहे हैं? किनसे मिलते रहते हैं। किस तरह की डील वो करते रहे हैं। ये तमाम चीजें जो प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठ के मीडिया हैंडल करता है। उसको पता होती है। तो हिरन जोशी इस मायने में बहुत अभी भी बहुत ही कहना चाहिए कि संवेदनशील व्यक्ति हैं और प्रधानमंत्री मोदी उनको पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ही रखेंगे। उनको आजादी तो नहीं मिलेगी कि वो मीडिया में जाए और कुछ कहे। अब ये और बात है कि विपक्षी दल कुछ खोद कर लाए, कुछ खोज कर लाए। उन आरोपों को इस्टेब्लिश करें जिन जो लग रहे हैं और इससे प्रधानमंत्री कार्यालय फंसता हुआ नजर आए

15:40 तब कुछ रिएक्शन मिल सकते हैं। लेकिन यह जो हिरन जोशी की विदाई है यह अपने आप में ना केवल प्रधानमंत्री कार्यालय बल्कि पूरी सरकार के चलने-चलाने चलन के तौर तरीकों पर रोशनी डालती है कि किस तरह से एक व्यक्ति पूरे मीडिया कंट्रोल कर रहा था। मीडिया को हाक रहा था। सेंसरशिप चला रहा था। दादागिरी के बल पर WhatsApp के जरिए खुल्लम खुल्ला ये काम हो रहा था। और पूरा गोदी मीडिया उसके सामने नतमस्तक था। पूरे चाहे मालिक हो, संपादक हो, पत्रकार हो, एंकर हो सब उनके निर्देशों को मानने के लिए मजबूर थे। उन्हें मानना ही था। उनके पास

16:27 कोई चारा नहीं था। तो अब हिरन जोशी के बाद जो दूसरा शख्स आएगा वो उतना ही ताकतवर होगा या उससे ज्यादा ताकतवर होगा। उससे ज्यादा मीडिया कंट्रोल करेगा। प्रधानमंत्री इससे क्या अपेक्षा रखते हैं यह देखना है। लेकिन इतना जरूर है कि हिरन जोशी के बारे में यह जो खुलासा हुआ है, यह प्रधानमंत्री की छवि को और भी नुकसान पहुंचाने वाला है। और भी उसको ध्वस्त करने वाला है। क्योंकि अगर पीएम मोदी के खासम खास अपने इनर सर्कल में अपने किचन कैबिनेट में ही इस तरह के लोग हो सकते हैं तो आज सोचिए कि और क्या-क्या खतरे पीएमओ में नहीं होंगे और क्या-क्या चीजें असुरक्षा देश की सुरक्षा से जुड़ी वहां पर घपले

17:14 घोटाले धांधलियां से सबोटाज क्यों नहीं हो रहा होगा बहुत-बहुत शुक्रिया आपका धन्यवाद नमस्कार

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