Who has forced Madhu Kishwar to descend into silence again? LIVE

简要总结

本视频讨论了记者马杜·基肖尔在社交媒体上对莫迪政府提出质疑后突然沉默的原因。分析人士认为,这可能与她未获得预期的支持有关,或者是因为她意识到继续发声可能会面临风险。此外,视频还探讨了印度社会父权制的影响,以及公众对政治人物道德问题的容忍度。

  • 马杜·基肖尔的沉默可能与未获得支持或面临风险有关。
  • 印度社会父权制影响了对政治人物道德问题的看法。
  • 公众对政治人物的道德问题容忍度高,影响了政治变革。

引言

视频主持人介绍了马杜·基肖尔在社交媒体上批评莫迪政府后突然停止发声的现象,并提出了几个问题:她为何沉默?是自愿的还是被迫的?这是否意味着她与莫迪之间的关系已经结束?主持人指出,尽管基肖尔之前曾发布批评莫迪政府的言论,但她并未对之前引发争议的推文发表任何评论。

分析:马杜·基肖尔为何沉默?

政治分析家马尼什·夏尔马认为,基肖尔可能错误地估计了形势,她原本以为会有更多人站出来反对莫迪政府,但实际上并没有。他指出,许多人仍然认为莫迪可能会再次当选,因此不愿公开反对他。夏尔马认为,基肖尔和斯瓦米可能都意识到,现在撼动莫迪政府还为时过早,因此选择了退缩。

公众的冷漠与政治的影响

萨维什·特里帕蒂认为,基肖尔的沉默可能是因为她意识到自己的言论没有产生预期的影响。他指出,印度社会对政治人物的道德问题容忍度很高,即使人们知道莫迪的负面信息,也不一定会转化为政治变革。特里帕蒂强调,公众需要认识到选票的力量,才能实现真正的改变。

父权制与社会沉默

普拉弗尔·科尔坎认为,基肖尔的沉默对印度社会来说不是好兆头。他认为,印度社会仍然是一个父权社会,这使得女性更难公开反对当权者。科尔坎指出,即使在“我也是”运动中,许多受害者也保持沉默,这表明社会对性骚扰问题的重视程度不够。他认为,基肖尔应该继续发声,并呼吁更多人站出来支持她。

政治风险与可能的结局

沙希·先生认为,基肖尔的人身安全可能受到威胁。他指出,基肖尔掌握了一些可能对莫迪政府不利的信息,因此她的沉默可能与保护自己有关。沙希还批评了一些媒体对基肖尔的攻击,并呼吁对莫迪政府的道德问题进行调查。他认为,莫迪应该像当年的阿克巴一样,因为道德问题而辞职。

沉默的背后:权力、威胁与社会现实

马尼什·夏尔马总结说,印度社会仍然受到父权制的深刻影响,这使得对政治人物的道德问题提出质疑变得更加困难。他指出,即使基肖尔提出了质疑,也没有得到广泛的支持,这使得她不得不选择沉默。夏尔马还提到了基肖尔可能面临的人身安全威胁,并呼吁社会关注这一问题。他认为,除非有更多人站出来反对当权者,否则这种沉默的局面将难以改变。

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文字稿

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0:03 [संगीत] नमस्कार स्वागत है आपका पब्लिक इंडिया पर। मैं हूं नीलू व्यास। आपने देखा कि दो-तीन दिन लगातार काफी चर्चा हुई मधु किशोर को लेकर और सब अल्टरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इसका जिक्र किया। लेकिन अगर आप मधु किशोर की titter टाइमलाइन अब उठाकर देखें तो उन्होंने कल से कल से लगभग मेरे ख्याल से उनका जो लास्ट ट्वीट था वो दो दिन पहले आया था किसी भी अगर उस पर उन्होंने लिखा हो तो सवाल ये उठता है कि जिन चीजों के बारे में मधु किशोर ने लिखा था उस पर वो चुप क्यों हो गई हैं और अगर चुप हुई है तो क्या अपने आप से चुप हुई है उनको किसने

0:49 चुप कराया है ये एक बड़ा सवाल अपने आप में गंभीर बना हुआ है कि क्या मधु किशोर और जो मोदी जी की चालीसा है उसका क्या अंत हो गया है? मधु किशोर को आखिर किसने चुप कराया है? अगर आप अभी मैं देख रही थी कि उन्होंने दो दिन पहले हां एक दिन पहले उन्होंने एक रीपोस्ट किया था अनुज अग्निहोत्री के ट्वीट को। उसके बाद उन्होंने एक दिन पहले यानी कि परसों के दिन उन्होंने लिखा है कि मी एंड डिफेंड पोर्न अनदर मॉडिफाइड ट्रोल इन कैपेबल ऑफ डूइंग एलिममेंट्री होमवर्क अबाउट अ पर्सन हु दे आर ऑर्डर्ड टू टारगेट बाय देर पोर्न पेडलर बॉस यानी कि उन्होंने अमित मालविया का इसमें जिक्र किया है। मैं देखती जा रही हूं कि उन्होंने कब कब क्या लिखा। उसके बाद एक उन्होंने कोई न्यूज़ 24

1:36 का एक क्लिप है जिसमें कि चंद्रा बोस जो बीजेपी छोड़ गए बंगाल में उन्होंने कहा कि एक हमारी गलती थी कि हमने बीजेपी छोड़ी तो उसके ऊपर मधु किशोर ने लिखा है कि मौलाना मोदी की पार्टी में अब केवल गुंडे मवाली मां बहन की गाली बकने वाले सड़क छाप लफंगे हिस्ट्री शीटर और पेड़ चाडूकार बचे हैं और या फिर अज्ञानी हाइनोस यानी मूढ़ बुद्धि वाले वाले नाम के हिंदू इस तरीके से उन्होंने लिखा है। उसके बाद अगर आप देखें तो उसी एक दिन पहले के ट्वीट को उन्होंने फिर से लिखा है कि मौलाना मोदी के राज में और हम क्या उम्मीद कर सकते हैं। उसके बाद महेश विक्रम हेगड़े के ट्विटर पर उन्होंने रिप्लाई किया। लेकिन एक भी शब्द अपने

2:22 ट्वीट का जो उनका ट्वीट था जिसमें उन्होंने स्मृति ईरानी और तमाम लोगों का जिक्र किया था। उसके ऊपर उन्होंने कुछ नहीं लिखा है। लेकिन लगातार वो मोदी सरकार के ऊपर हमलावर है या फिर ऐसे ट्वीट्स को वो रीपोस्ट करती हुई नजर आ रही है जिसमें मोदी सरकार की आलोचना होती है या मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा किया जाता है। लेकिन जो बातें मधु किशोर ने कही थी क्या उस पर उनको चुप करा दिया गया है। किसने चुप कराया है यह एक रहस्य है और या मोदी चालीसा और साथ में जो मधु किशोर की जो चालीसा है उसका क्या अंत हो गया है आज इसी पर हम चर्चा करेंगे हमारे साथ मनीष शर्मा है राजनीतिक विश्लेषक आपका स्वागत है सर्वेश त्रिपाठी समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आपका भी स्वागत है और अभी एक दो मेहमान और ज्वाइन करेंगे तो उनको मैं ऐड करती जाऊंगी मनीष से शुरू करती हूं कि

3:08 मनीष क्या लग रहा है जिस तरीके से मधु किशोर की ट्विटर टाइमलाइन अगर आप उठाकर देखें तो उनका जो ओरिजिनल मुद्दा उठाया हुआ था उस पे अब वो कुछ नहीं बोल रही है और जबकि उन्होंने यह कहा था कि आने वाले दिनों में मैं और खुलासे करूंगी तो क्या आपको ऐसा लग रहा है कि मधु किशोर को चुप करा दिया गया है? नहीं जनरली देखिए उसमें एक बात जो हमको साफ साफ लग रही है जनरली देखिए होता क्या है ना एक आकलन था सुब्रमण्यम स्वामी का भी और मधु किशोर का भी एक आकलन था कि एक ऐसे दौर में अब मोदी चले गए हैं कि अंदर से बहुत सारी विरोध के स्वर हैं माने वो ऐसे लोग अब ऐसा दौर आ गया है मोदी का कि अंदर से ढेर सारे जो दबी हुई आवाजें हैं अभी उनके बाहर आने का समय है वो खुद सामने नहीं आ रहे

3:55 हैं तो हमको को पहल कदमी ले लेना चाहिए और उसके बाद फिर धीरे-धीरे एक एक सपोर्ट सिस्टम मेरा बनेगा। एक भाजपा के इकोसिस्टम में संघ के इकोसिस्टम में एक सपोर्ट सिस्टम मिलेगा। ये एक आकलन था। एक बड़ा हिस्सा ऐसा भी है जो ये मान के चल रहा है कि अभी मोदी रिटर्न भी कर सकते हैं। इसलिए वो पहले से ही उस बोल नहीं रहा है। वो है वास्तव में ऐसा ये आकलन गलत नहीं है। बड़ा हिस्सा दबा हुआ है। वो घायल है। थोड़ा आहत है मोदी राज से अपने लिए उसके लिए अपनी राजनीति का उसके मोदी के रहते उसका बराबर संकट बना हुआ है। और उसका ये भी आकलन एकदम है कि वो ढलान पे है मोदी। लेकिन वो एक खतरे के बतौर यह भी देख रहा है कि रिटर्न बैक भी हो सकता है मामला माने मोदी की

4:40 पुनर्वापसी भी हो सकती है। तो अभी इस सिचुएशन में वो था इसीलिए बड़ा है तो बहुत बड़ा एक हिस्सा लेकिन जो कि इस पे मोदी के खिलाफ बोलना चाहता है। मौके की तलाश कर रहा है। लेकिन अभी वो मौका उसको नहीं समझ में आ रहा। ये ये कदम जो है केवल दो लोगों ने लिया है। केवल सुब्रमण्यम स्वामी ने और दूसरा जो है ये मधु किशोर ने और इन लोगों का आकलन था कि अब अब चीजें अपने स्ट्रीम पर चली गई है। बस एक ढेला मारने की जरूरत म एक फेंकने की एक एक पत्थर फेंकने की जरूरत और फिर एक बहुत बड़ा ऐसा हिस्सा है जो हमारे साथ आ जाएगा। हमको सपोर्ट मिलेगा। खासकर उसके दिमाग में बीजेपी के अंदर ही नहीं आरएसएस को लेकर के भी इन दोनों लोगों के दिमाग में था कि वो भी अब एक रिजीम चेंज करना चाहता है बीजेपी के

5:26 अंदर आने वाले समय में वो इसको परिवर्तित करना चाहता है मोदी की जगह कुछ और देखना चाहता है आरएसएस के अंदर ये खास तौर पे एक आकलन था बहुत तरह से लोग इस बात को बोलते भी रहते हैं तो एक उम्मीद थी कि आरएसएस की तरफ से इसमें एक सपोर्ट मिलेगा आरएसएस को चलवाएगा अघोषित तरीके से और बीजेपी के अंदर ढेर सारे ऐसे लोग हैं जो इस इकोसिस्टम से थोड़ा संकट में है लेकिन कहीं से कोई बात नहीं आई नीरू जी कहीं से एक भी एक भी सिस्टम के अंदर का उनके इको सिस्टम से कहीं भी कोई सपोर्ट नहीं मिला। तो सरेंडर करने के अलावा रास्ता क्या है? अभी तक वो वो पीछे हटना था। नहीं तो फिर मान लीजिए एक पॉइंट के बाद अगर सरकार भी ये देख लेती कि कहीं से अंदर से सपोर्ट नहीं है। तो अभी तक तो चुप थी सरकार और

6:14 अभी मान लीजिए चुप इसलिए थी कि वो इसके जरिए एपिस्टी फाइल पर चर्चा ना शुरू हो जाए। मोदी जी का जो अपना जो उनका मैनेजमेंट है वो इस पर एक चुप्पी साधने का ही रास्ता लिया। कहीं इस पर हम चर्चा करेंगे तो एस्टिन फाइल ना खुल जाए। लेकिन अगर इधर से कोई मधु किशोर को कोई सपोर्ट नहीं मिलता और वो लंबा चलाती तो अलगाव में पड़ती इशू गायब हो जाता क्योंकि गोदी मीडिया इसको चलाता नहीं और सोशल मीडिया के चलाने से उनको बहुत अभी उस तरह की चिंता नहीं है तो फिर ये अलगाव में पड़ती और फिर इनके ऊपर आक्रमण भी होता है माने इसके बाद फिर सरकार कोई आक्रमण करती है थोड़ा रुक करके थोड़ा ठहर करके जब देख लेती है कोई इको सिस्टम से कोई संकट नहीं खड़ा हो रहा है तो फिर इनके ऊपर उधर से हमला शुरू होता है मधु किशोर पे और और ये बात को उन्होंने

7:00 भांप लिया शायद मेरा ये मानना है और इसीलिए वो हमको लगता है कि इस पर पीछे हट गई है और सोय स्वामी भी अभी मैं देख रहा हूं कि उनकी भी चुप्पी शुरू हो गई है। वो जो बीच में लगातार एपिस्टन फाइल का चर्चा कर रहे थे। वहां से भी मैं देख रहा हूं कि अभी उनके ट्वीट उस तरह के नहीं आ रहे। अभी उनके बयान फाइल पर बंद हो गए हैं। आप ध्यान दीजिएगा अगर तो ये दोनों लोग एक आकलन पर फिर पहुंच गए हैं कि अब अभी अभी इसको इस पेड़ को हिलाना जो है अभी मुश्किल है। अभी आसान नहीं है। तो अभी पीछे लौटो फिर किसी मौके की तलाश करो। जी बिल्कुल बिल्कुल सर्वेश तो ये कहना गलत नहीं होगा कि या तो मधु किशोर को चुप कराया गया है या फिर वो खुद से कोई चीज रियलाइज कर गई और वो चुप हो गई। उसका कारण क्या लगता है आपको? जी सतीश

7:46 देखिए दो कारण लगते हैं। एक कारण यह है कि चुप कराया गया हो तो वो भी भाजपा के इकोसिस्टम के लिए बहुत बड़ी बात नहीं है। दूसरी एक चीज और होती है कि आप सब कुछ कह के भी अगर आप यह देख रहे हो कि कोई असर ही नहीं पड़ रहा हो लोगों पे तो भी इंसान बोलते बोलते कितनी बार बोलेगा और ये जो एक मनीष भैया जो कह रहे थे वो भी एक एक बहुत वायबल रीज़न लगता है कि हो सकता है कि इट वास टू अर्ली और इल प्लंड या फिर जैसा प्लान था वैसा नहीं हुआ। वो भी हो सकता है क्योंकि आरएसएस का पिछले कुछ दिनों से देखें तो उनके वक्तव्य वैसे लग रहे हैं कि वो इस नेतृत्व से बहुत खुश नहीं है बहुत सारे लोग और जैसे आसाम में हुआ अभी उनकी घोषणा जो हुई उससे दिखता है या बहुत सारी जगहों पर दिखता है तो ये और ये पहला मामला ये भी पहली बात ऐसा भी मधुेश्वर या सुब्रमण्यम स्वामी पहले थे भी नहीं इससे

8:32 पहले भी बहुत आवाजें उठी इससे पहले भी लेटर्स लिखे हैं कि पतियों ने लेटर्स लिखे हैं बड़े-बड़े नेताओं को लिखे गए हैं जो पब्लिक फोरम पे भी जब अगर समस्या यह है कि यह मुझे इन सब ने देखिए पॉलिटिक्स में अभी कुछ दिनों से बहुत करीब से देख रहा हूं तो मुझे प्रॉब्लम अब पॉलिटिक्स से नहीं रह गई है। पॉलिटिकल सिस्टम से नहीं है। मुझे जनता जनता से थोड़ी सी जो है मैं डिसपॉइंटेड हूं कि आप कि आपका ये जो पैटर्न है कि आप बहुत सारी चीजें देख के भी अपने कन्वीनियंस के हिसाब से उसको सेलेक्ट करते हैं कि ये इनका जो है एक नैरेटिव जो गठन बनाया जाता है उसमें इतनी आसानी से आप चले जाते हैं कि आप अपनी आंखें खोलना ही नहीं चाहते। आपको जब यह कहा जाता है आप यह कहना शुरू कर देते हैं कि नहीं हां गलत तो हैं। मोदी जी भी गलत हैं, योगी जी भी गलत है।

9:18 लेकिन क्या करें? अगर सरकार बदल गई तो मुसलमानों का राज आ जाएगा। मुगल वापस आ जाएंगे, अफगानी वापस आ जाएंगे। इस टाइप की बातें जो जब दिमाग में और ये ऐसा नहीं है कि मैं अनपढ़ों की बात कर रहा हूं। ये बहुत जहीन लोगों की जो बहुत बहुत इंटेलेक्चुअल वर्ग है वो ऐसी बातें करता है। तो आपको लगता है कि अब इसका क्या अब इस इसका क्या तोड़ है? ये बहुत सालों से भाजपा का जो इकोसिस्टम है उसने मेहनत की है इस पे कि इस तरह का दिमागों दिमाग में जहर डाला जाए। और ये इसी जनरेशन में नहीं अगले जनरेशन में भी जा रहा है। लोगों के दिमाग में 2014 से पहले शायद इतना सरनेम मैटर नहीं करता था जितना अब करने लगा है लोगों के दिमाग में। बच्चों के दिमाग में छोटे-छोटे बच्चों को जब मैं बोलते सुनता हूं तो ये बड़ा कष्टप्रद होता है कि ये आप अपनी राजनीति किस-किस जो है कॉस्ट पे कर

10:03 रहे हैं। तो ये इतनी सारी बातें एस्टिन फाइल ऐसा नहीं था कि हवा में आई। बाकी देशों में आपने देखा बहुत कुछ हुआ। यहां किसने आवाज उठाई उस पे? लोगों लोगों तक पता चला। लोग चर्चा भी कर रहे हैं। लोग जानते हैं उसके बारे में बहुत अच्छे से जानते हैं। लेकिन उसके बाद भी ऐसा नहीं है कि वो जो सब जान चुके हैं चाल चरित्र चेहरा उनसे जरूरी नहीं है कि वो वोट में कन्वर्ट हो जाए या अलग हो जाए। तो ये ये जब तक ऐसा नहीं होगा कि लोग इसको केवल कौतूहल का विषय ना मान के वो समझेंगे कि उनका एक वोट वो राइट है जिससे वो सरकारें बदल सकते हैं। तब तक देश में असली बदलाव नहीं आएगा। और यह बहुत बड़ा मुद्दा है कि मोदी जी के बारे में यह पहली बार नहीं कहा गया। मोदी जी के बारे में सब जानते हैं। जैसे हमारे यहां मुख्य मुख्यमंत्री हैं। उनके बारे में सब जानते हैं कि वह कहां कितने बड़े संत रहे हैं। उनका क्या पैटर्न रहा है। वो कैसे उनकी राजनीति कहां से उदय

10:50 हुई? क्या रीजन था? कौन से यूपीएससी का एग्जाम देके आए थे जिसके नाते वो मंट मठाधीश बने थे और क्या उनकी योग्यता थी। लेकिन वो सब जानने के बाद भी जब हम ऐसे ही चयनित करते हैं लोगों को। तो उसके बाद हम कहते हैं क्रिमिनलाइजेशन इन पॉलिटिक्स है और ऐसा है वैसा है। तो ये आपको समझना पड़ेगा कि पहले जनता को समझना पड़ेगा इस पे ये आवाजें दबा दी जाएंगी आवाज ये जो था ना रेजोनेंस बनने की जो उम्मीद थी चाहे वो मधु किशोर जी को रही हो या जो सुब्रमण्यम स्वामी जी है यही 2013 में जब ये बोलते थे तो उनकी बातें बहुत ध्यान से सुनी जाती थी। अब इन सुब्रमण्यम स्वामी इंसैनिटी का क्लॉज डाल दिया गया है कि अभी ये जो बोल रहे हैं ऐसे ही बोल रहे हैं। ट्रंप जब हमारा दोस्त होता था तो बहुत समझदार आदमी था। बहुत ताकतवर था। अब जब वो हमारे अगेंस्ट बोलता है तो पगला हो गया। तो ये

11:36 ये वाला जो सिस्टम है ना जो हम अपने कन्वीनियंस के हिसाब से पिक एंड चूज कर रहे हैं यह खराब है। देश के भविष्य के लिए खराब है। अब मैं प्रफुल कोलखन जी के पास आती हूं कि प्रफुल जी आज हम लोग यही डिस्कस कर रहे हैं कि क्या मधु किशोर को चुप करा दिया गया है या फिर वो खुद से खामोश हो गई है क्योंकि उनका आप twिरटर लाइन देखिए तो उन्होंने जबकि कहा था कि मैं कोई और खुलासे भी करूंगी और जिस जिस तीव्रता से उन्होंने सारी चीजों को लिखा था ऐसा लग रहा था कि अब एक के बाद एक जैसे स्ट्रीम फाइल्स में चीजें सामने आ रही थी कुछ उस तरीके का खुलासा होगा लेकिन पिछले अगर आप 24 या थोड़ा सा कुछ घंटे और ज्यादा अगर आप देख लें तो वो केवल रीपस्ट करती हुई नजर आ आ रही है। कुछ-कुछ चीजें मोदी सरकार के खिलाफ बोलती हुई नजर आ रही है। लेकिन जिस सीक्वेंस ऑफ ट्वीट को उन्होंने लिखा था वो उससे बिल्कुल डिस्कनेक्ट हो गई है। तो

12:23 क्या आपको भी ऐसा लग रहा है जो मुझे उनका Twitter लाइन देख के लगा कि अब मोदी किशोर चुप हो गई है या फिर उनको किसी ने बोला है कि चुप हो जाओ। देखिए वो तो चुप ही थी। अचानक उन्होंने बोला है। चुप रहना उनका अस्थाई भाव है। बोलना अभी हुआ था। हम लोग उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने ही कहा कि वो कुछ और बोलेंग देखिए चुप करा दिया गया या चुप हो गई या जो भी हुआ भारत के लिए कोई बहुत अच्छा नहीं हुआ है। इसलिए कि यहां सरकार की तरफ से सर्वेश्वर जी जिस ढंग से सर्वेश जी जिस ढंग से बोल रहे थे कि जनता से उनको निराशा हो रही है। जनता क्या करेगी? मैंने पहले भी कहा था कि यह लड़ाई असल में

13:10 राजनीतिक तो है। दिख रहा है अभी मोदी जी का नाम आ रहा है वो है। लेकिन ये असल में पुरुष सत्तात्मक समाज की लड़ाई है। ये उसके अपने अंतर् विरोध है। इस बात को हमें निश्चित रूप से समझना होगा और हम उसको उस ढंग से एड्रेस नहीं कर पा रहे हैं। अब लोग चुपचाप अकेले मी टू में कितना झमेला हुआ है। कितना हम बातें निकली थी आगे वो पहली बार तो नहीं हुआ था। एमजे अकबर जैसे पत्रकार को मीठी मूवमेंट ने खो खा लिया कह लीजिए तो मंत्री थे वो निर्दोष थे दोषी थे वो बाद की चीज है लेकिन यह बात तो सही है कि मीटू को तवज्जो देकर के उनकी राजनीति भी खत्म हो गई और उनकी पत्रकारिता भी कोई खास नहीं बची मुझे कहीं दिखते तो है नहीं

13:57 जबकि एमजे अकबर एक बहुत प्रभावशाली पत्रकार थे भारत के हिंदी अंग्रेजी में लिखते थे और मैं जानता हूं हूंक का आभार था। लेकिन बहरहाल मैं यह कहता हूं कि यह सब हमारे समाज में होता है और आज भी जब होता है तो इसको लेकर के इसको उनको मुंह खोल के बोलना चाहिए था। 10 लोगों को उसके साथ खड़ा होना चाहिए था और आप जानते हैं कि सुब्रमण्यम स्वामी जी के बारे में थोड़ी सी बात अगर आप इजाजत दे तो कहूं कि वो तो खुद बहुत बड़े बुद्धिजीवी रहे हैं और अध्यापक थे और वहां से उनको इसलिए भी अमर्यादित विषयों को उठाने के लिए सेक्सुअल नहीं लेकिन धार्मिक अमर्यादित विषयों को उठाने के लिए उनको वहां विदा

14:44 विश्वविद्यालय से फॉरेन विश्वविद्यालय से बहुत प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से उनको विदा कर दिया गया उनका फेयरवेल हो गया वहां से क्योंकि वे ऐसे सांप्रदायिक बातों को वहां पर रख रहे थे जो मानवता के अनुकूल वहां पर नहीं पाया गया था और देखिए उनके अपने जीवन की त्रासदी है सुहासनी हैदर को सभी जानते हैं जो उनकी पुत्री और बहुत अच्छी पत्रकार है। ये जिस चीज के खिलाफ बोलते रहते हैं तो भारतीय जनता पार्टी के मूर्मतियों के बीच में सुब्रमण्यम स्वामी की स्थिति बहुत खराब हो गई क्योंकि सुब्रमण्यम स्वामी बोल के किसी की बात सुनकर के चुप रहने वाले आदमी नहीं है। सुब्रमण्यम स्वामी बहुत पुराने समय के नेता है और वो उनकी जो गति थी वो बलराज मधोक भी उनको नहीं बनाया जा सका। बलराज मधोक बनने के लिए तैयार नहीं है। वे

15:31 लगातार लड़ाई कर रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के मामले में भी उन्होंने केस दायर कर रखा था। प्रबल प्रताप शाह जी को मालूम है सारी कहानी और संजोग से यहां पर है वो सब बता देंगे कि कैसे मुगलसराय में क्या हुआ था। लेकिन जो विषय है यहां पर वो विषय यही है कि इस समाज में यह बातें हैं सब कुछ सामने आना चाहिए। कोई महिला आयोग के लोग सामने नहीं आए। कम से कम उनकी बातें सुनती। ठीक है? आयोग को तो यह मानवाधिकार को तो सजा सुनाने का अधिकार नहीं है। लेकिन वे मामले को उठाते कहते हैं कि इसमें क्या हुआ है और क्या यह झूठ है कि सीढ़ी बना के उस दिन हम लोग जब बात कर रहे थे तो मैंने बहुत पीड़ा से साथ कहा था कि वेपनाइजेशन ऑफ इंटिमेसी या फ्रेंडशिप या अंतरंगता का

16:17 आयुकरण करके इस तरह की बातें की जाती है तो अंत में फिर वो सब मिल जाते हैं। हमारे समाज में विरोध का एक लक्षण यह भी है। मैं आपको बताऊं व्यक्तिगत अनुभव भी कि आप जिसका विरोध करेंगे ना जिस चीज का विरोध करेंगे जिसके पक्ष में खड़ा होंगे थोड़ी ही देर के बाद पता चलेगा कि वह उसके साथ मिल गया। वह उसके साथ मिल गया। मैं बड़े नाम बता रहा हूं। मकबूल फिदा हुसैन पर जब यहां के लोग आक्रमणकारी हुए हम लोगों ने काफी विरोध किया। उनके खिलाफ इस तरह का जो भारतीय जनता पार्टी के लोग बात कर रहे थे। अंत में क्या हुआ? मकबूल फिदा हुसैन खुद यहां से चले गए। ऐसे और कई केस है। वाटर सिनेमा की शूटिंग हो रही थी। उसको लेकर के कितना कुछ विरोध वगैरह हुआ। लेकिन फिर उन लोगों में समझौता हो गया और हमारा बेकार

17:04 हो गए। अभी मदश जी की अगर कोई पीड़ा है, कोई कष्ट है, अगर कोई जेन्युइन कष्ट है, हरासमेंट उन्होंने उस उठाई है और हम और आप उनके इन कष्टों के समर्थन में खड़े हैं और कहते हैं कि उनको न्याय मिलना चाहिए। कल को आप देखेंगे आप आज खामोश है। पता चला वो मिल गई हम। उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा था कि सुब्रमण्यम स्वामी जी से उन्होंने बात की है। अपॉइंटमेंट लिया है। उनसे कुछ इंटरव्यू करना चाहते हैं। ये उन्होंने अपने इसमें जिस इंटरव्यू की बात हम लोग करते हैं जो वायरल हुआ था उस इंटरव्यू में आवेश तिवारी के साथ इंटरव्यू में किस आशय की बात कही थी। लेकिन सुब्रमण्यम स्वामी भी खामोश है। तो उनसे इंटरव्यू हुआ नहीं हुआ या दोनों ने आपस में बात करके यह तय कर लिया कि इस मामले को अभी तल देना। बहुत ठीक नहीं है क्योंकि

17:51 यहां से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया आ नहीं रही है। रही बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इतने नैतिक मानदंडों की चिंता कब से करने लगा जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हम उम्मीद करते हैं कि वह कोई इनसे सवाल करेगा। वो बिल्कुल नहीं करेगा। यह तो मान लीजिए कि कांग्रेस में भी गांधी जी के कारण यह नैतिक तत्व कहीं से आया और गांधी इस मामले में गांधी की नैतिकता बहु परीक्षणी है। यह नहीं भूलना चाहिए कि वो सत्य के साथ प्रयोग कर चुके थे और उन्होंने इस मामले में कैसे-कैसे प्रयोग कर रखे हैं। तो मैं यह कह रहा हूं कि जो नए युग में नवतिकता के मानदंडों को निर्धारित करना चाहिए और जो जेंडर बायसनेस है इसको दूर करने के लिए क्या किया जा सकता है? ये किया जाना

18:37 चाहिए। दूसरी बात जो इस तरह के अप्रोच होते हैं बहुत सारे केस इन पर लगे हुए हैं जिसमें मुख्यमंत्री थे उस समय से लेकर के लेकिन किसी केस का कुछ हुआ नहीं। तो किसको कहेंगे जब मुजिस भी यही है वही है और कोई सामने ठीक से खड़ा होकर लड़ता नहीं है। तो आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं कि उनको खामोश करा दिया गया है या खामोश हो गई है। खामोश जो खामोश नहीं होता है गौरी लंकेश हो जाता है। ऐसे नहीं किसी और मामले में जी हां हो गए आप म्यूट हो गए सर आप म्यूट हो गए अन म्यूट कर लीजिए हां मैं मैं ये सिर्फ ये कह रहा था कि गौरी लंकेश के मामले में दूसरे मामले में सत्ता से असहमत थी इसमें ऐसे मामले में नहीं उनके साथ क्या हुआ तो

19:23 सत्ता से जो असहमत होगा या सत्ताधारी लोगों के खिलाफ उनके चरित्र पर जो बात करेगा उसको दुर्गति झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए हमारे बहुत सारे साथी अभी भी जेल में है पांच पांच साल से उनको बेल नहीं मिलता है उस कोर्ट में बेल नहीं मिलता है जो कोर्ट ये कहती है कि नहीं बेल इज ए रूल एंड जेल इज एक्सेप्शन तो ऐसी व्यवस्था में हम जी रहे हैं और ऐसे मजबूर हो के खामोश हो गई खामोश कर दी गई या खामोशी का रास्ता अपना लिया सुब्रमण्यम स्वामी और वे दोनों मिलकर के जो भी किया हो हमसे हमें इन तमाम तरह की बातों से जब उन्होंने खुलासा किया तब भी और जब वो खामोश हो गए तब भी दोनों ही स्थितियों में भारत के लोगों को हम जैसे लोगों को आप जैसे लोगों को निराशा ही हाथ लगी है या इसका दुखद प्रश्न है?

20:09 नहीं लेकिन एक चीज और भी है मैं शाही साहब के पास आऊंगी कि शाही साहब आपको क्या लग रहा है कि मधु किशोर की जान भी तो खतरे में है। अगर उनको उनके पास ऐसे बहुत सारे राज हैं जिसको लेकर अब वो चुप हो गई है। पहले तो उन्होंने कुछ चीजें लिखी और लिखकर चुप होना भी अब उनके लिए कितना बड़ा खतरा है। जी जी नमस्कार नमस्कार। आपके तमाम दर्शकों को भी नमस्कार। पैनलिस्टों को नमस्कार। मधुकेश्वर के विचारधारा से असहमत होते थे। जो उनकी विचारधारा है जो उनका हिंदुत्व आइडियोलॉजी है जिस तरीके से डेमोक्रेसी के खिलाफ हुआ है। लेकिन जो उन्होंने बयान दिया जो उन्होंने आरोप लगाए ट्वीट के माध्यम से नरेंद्र मोदी के ऊपर लगाए अपने उनके ही

20:54 प्रधानमंत्री जिनके नाम पर उन्होंने मोदीनामा नाम की किताब लिखी उनकी प्रशंसा की। लेकिन मैं एक ट्रेंड देख रहा था। 7 महीने पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने जिक्र किया था जो बाद में वायरल हुआ वह भी आवेश तिवारी के साथ था कोई प्लेटफार्म पर और सात महीने बाद उन्होंने सोन स्वामी ने जब आरोप लगाया चार महिला एमपी का और एक एक जो है केंद्रीय मंत्री का तो उनको कॉम्प्रोमाइज करना पड़ा अपने आप को और मोदी के साथ और तब वो मंत्री बनी और सांसद बनी यह बात सुन स्वामी ने प्लेटफार्म पे कहा एक चैनल के प्लेटफार्म पर उसको कोट करते उन्होंने ट्वीट किया 7 महीने बाद फिर से उन्होंने ट्वीट किया। फिर उन्होंने कहा समय आने पर मैं और भी दूंगी जो भी मुझे मेरे पास एविडेंस है मैं प्रस्तुत करूंगी। तो अभी हो सकता है इंतजार करिए इतनी जल्दी

21:40 निष्कर्ष पर क्यों निकल रहे हैं? और पहली चीज ये है सो स्वामी हो या मधुकेश्वर हो। उसके पहले एक नेता थे। एक मफत लाल पटेल जी थे। उन्होंने कोई चिट्ठी लिखी थी आडवाणी जी को। उस पर भी सवाल उठे हैं कि उन्होंने कहा हमारी पत्नी को बचाओ जो भी है जैसे पत्नी वापस कराओ किसी के ऊपर आरोप है वो अभी भी सबसे बड़े पद पर है तो वह वो भी एक मुद्दा है मानसी सोनी का मामले में आपको पता ही है कि उनके ही पार्टी में वर्तमान समय में मंत्री है कपिल मिश्रा उसने ही बयान दिया था जब वह आम आदमी पार्टी का मंत्री होता था विधायक होता था उसने दिल्ली के विधानसभा में पूरे बड़े पैमाने पर उसने वीडियो चलवाया और बोला

22:26 मानसी सोनी के बारे में बारी-बारी बातें बताई कि किस तरीके से नरेंद्र मोदी उसकी स्नो गेटिंग यानी उसकी जासूसी करवाते थे। कैसे ये सब चीजें अभी आपको दो-तीन दिन पहले अलका लांबा जो हमारी महिला कांग्रेस की अध्यक्षा है राष्ट्रीय अध्यक्षा उन्होंने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके उन्होंने पूरा विजुअलाइज किया पूरा दिया। वर्तमान समय में तो इस समय पर एक ही चीज होनी चाहिए। वह कि प्रधानमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति के नैतिक नैतिकता के आधार पर उसका इस्तीफा होना चाहिए। पहली चीज क्योंकि उस पर आरोप लगा है। चारित्रिक आरोप लगा है। महिलाओं का शोषण का आरोप लगा है। यह हमने नहीं लगा। सिर्फ पार्टी के इंटरनल लोगों ने लगाया। एक उसके ही पार्टी के अंतर्गत रहने वाला कपिल मिश्रा जो मंत्री है वह है। दूसरा लगाया शुभमन

23:12 स्वामी ने जो उसके पूर्व पूर्व मंत्री भी रहे हैं। पूर्व पूर्व राज्यसभा सांसद रहे और मधुकेश्वर जो उसकी बहुत बड़ी समर्थक रही हैं और मोदीनामा नाम की किताब लिखी है और बहुत बड़ी सिविल सोसाइटीज को ऑर्गेनाइज करने में उनका काम था। 2014 के इलेक्शन के पहले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में महत्व भूमिका है। तो इस कंडीशन में अगर नीलू जी अगर एमजे अकबर के ऊपर मंत्री रहते हुए आरोप एक महिला ने लगाया एक पत्रकार महिला साथी ने लगाया तो मी टू के कैंपेन के अंतर्गत एमजी अकबर का इस्तीफा हुआ तो नरेंद्र मोदी का इस्तीफा क्यों नहीं हो रहा है? और नरेंद्र मोदी का इस्तीफा इसलिए भी नहीं होना चाहिए कि वर्तमान समय देश के अंदर आरोप लग रहा है। देश के बाहर भी आरोप एप्स फाइल में नरेंद्र मोदी का जिक्र है। तो नरेंद्र मोदी का जिक्र है। फाइल में

23:59 उनका कई बार जिक्र है। और यही सुमन स्वामी ने कहा है कि हरबीपुरी कुछ विशेष सुविधाएं देते हैं। उनको जयशंकर उनको विशेष सुविधाएं देते हैं और क्या विशेष सुविधाएं हैं? इसके बारे में मधुकेश्वर और सुमन स्वामी ने लगातार बोला है। तो यह जब आरोप आया है तो इसमें इसका अर्थ है कि हमारा जो प्रधानमंत्री है वो कहीं ना कहीं ब्लैकमेल हो रहा है। प्रधानमंत्री पद पर बैठा व्यक्ति ब्लैकमेल हो रहा है और यह व्यक्ति प्रधानमंत्री पद के लायक नहीं है। क्योंकि हमारी देश की संप्रभुता का सवाल है। हमारी देश की सुरक्षा का सवाल है। और आज देखिए दो चीज हुई। यूएस ट्रेड डील हो गई। जिसके खिलाफ हम लोग किसान आंदोलन किसान लोग कर रहे हैं। यूएस ट्रेड डील नरेंद्र मोदी ने आननफानन में जाकर यूएस ट्रेड डील कर दिया। हाथ मोड़ा और फाइल बताई। ट्रंप ने नरेंद्र मोदी ने तुरंत यूएस ट्रेड डील साइन कर

24:46 दिया जिसमें हमारी पूरी खेती किसानी बर्बाद हो जाएगी। हमारी मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री बर्बाद हो जाएगी। हमारी छोटे व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे। हमारे सारे गमेंट एक्सपोर्टर्स बर्बाद हो जाएंगे। सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। हमारी देश की संप्रभुता भी कॉम्प्रोमाइज हो गई। यानी उसमें हो गई। अब नरेंद्र मोदी ने देश को अमेरिका का गुलाम बना दिया। जब अमेरिका कहता है कि ईरान से तेल मत लो तो नरेंद्र मोदी ईरान से तेल नहीं लेते। जब नरेंद्र मोदी को कहता है कि जो है रशिया से तेल मत लो तो नरेंद्र मोदी तेल बंद कर देते हैं। रशिया जब हमें सस्ते रेट पे तेल दे रहा था। ईरान सस्ते रेट पे रेट पे तेल दे रहा था। हमने तेल लेना बंद कर दिया। अब नरेंद्र मोदी को कहता है कि तुम रशिया से तेल ले लो तो वो तेल ले लेते हैं। तो भारत अब आजाद है कि गुलाम हो गया। अब तो यही है ना कि हमको हमारे देश का प्रधानमंत्री राष्ट्रपति कौन है? नरेंद्र मोदी तो अब

25:32 रहे नहीं ना मुरमूर जी रह गई। अब तो नरेंद्र मोदी एक मनसबदार की तरह एक जमींदार की तरह एक मनसबदार की तरह नरेंद्र मोदी के कॉलोनी ट्रंप के कॉलोनी के में काम करने वाले वायसराय हो गए। इस तरीके से माना जाए कि जो ट्रंप ट्रंप कहेंगे वो करेंगे। इजराइल ने बुला लिया। नेतन्याऊ ने कहा तुम चले आओ। युद्ध के बादल मंडरा रहे ईरान ईरान और इजराइल को के साथ और एक महीने पहले ही इसी सरकार ने अपने ही देश के नागरिकों को एक एडवाइजरी जारी की कि ईरान छोड़ दीजिए। उसके बावजूद हमारे देश का प्रधानमंत्री वहां जाता है जब युद्ध उसके 36 घंटे बाद आता है ईरान पर हमला हो जाता है। छ दिन लग जाते हैं हमारे देश के विदेश मंत्रालय को कंडेम करने में। खमेनी

26:18 जी जो उसके सुप्रीम लीडर है ईरान के उनकी हत्या जो हो गई उनको मार दिया गया। उसके उसका विरोध और उसका कंडोलेंस करने में अशांति की बात और आज ये स्थिति ये हो गई है कि जो जो पाकिस्तान मनमोहन सिंह जी की गवर्नमेंट ने 261 की घटना के बाद पाकिस्तान को विश्व स्तर पर आइसोलेट कर दिया था यानी अलग-अलग कर दिया था। विश्व पटल पर पाकिस्तान को एक आतंकी देश मान लिया गया था। आज वो सेंटर स्टेज में नरेंद्र मोदी गलती से आ गया। आज नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को इतनी प्रेफरेंस दे दी है। ऑप्शन सिंदूर में जो गलतियां की है कि आज पाकिस्तान की डिप्लोमेसी सबसे ज्यादा वो हो गई है। प्रमुख हो गई है। आज वह जो है ईरान और अमेरिका के बीच में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अभी टर्की

27:03 इजिप्ट और सऊदी अरेबिया के विदेश मंत्री पाकिस्तान में इस्लामाबाद में हो सकता है बस जेडी बस जो उपराष्ट्रपति है अमेरिका के शहर वो भी पहुंच गए हैं। वो भी बातचीत करने जा रहे हैं। तो नरेंद्र मोदी ने दिया क्या इस देश को? नरेंद्र मोदी ने देश को अमेरिका का गुलाम बना दिया और वर्तमान समय में जब हमारे देश का गरीब व्यक्ति भीम फाइल के बारे में जानकारी रख रहा और मुझे मैंने पहली बार भी आपको बताया है और हमारे देश का किसान जो है मैं गांव में गया गांव के किसान ने कहा कि यह तो बड़े क्योंकि हमारे यहां पश्चिम उत्तर प्रदेश में और हरियाणा में और और राजस्थान में पत्नी को लुगाई कहते हैं। यह ग शब्द शब्द मैं बता दे रहा हूं और अपनी पत्नी को छोड़कर यानी लुगाई को छोड़कर अगर तीसरी दूसरी लुगाई के विषय में कोई बात तो उसको

27:49 लुगाईबाज कहते हैं। ये गांव के किसान ही बता रहा था। तो जब हमारे गांव का किसान ही अपने प्रधानमंत्री के विषय में यह बात कह रहा है तो उसमें उस समय पर ऐसे देश पर प्रधानमंत्री पद पर नरेंद्र मोदी को नहीं रहना चाहिए। उनको इस्तीफा होना चाहिए। और मैं लगातार मांग कर रहा हूं कि नरेंद्र मोदी का इस्तीफा होना चाहिए। और अगर आप यूएस ट्रेड डील का विरोध कर रहे हैं, बीवी ग्राम जी योजना का विरोध कर रहे हैं तो आपको जो है तमाम तरह के पुलिस पूछेगी क्यों कर रहे हैं? कैसे कर रहे हैं? और आप जो है ट्रेड डील कैसे कर लिए? नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए। क्या आपने देश के सारे लोगों से बात की? क्या सारे उन लोगों से बात की जो लोग उसके शेयर [गला साफ़ करने की आवाज़] होल्डर हैं। नहीं किया। जो लोग शेयर होल्डर हैं जो जिसके मतलब शेयर होल्डर का अर्थ यह नहीं

28:36 है कि कंपनी में शेयर होल्डर हैं यानी जिनके स्टेक लगे हुए हैं चाहे किसान है चाहे मजदूर है चाहे वो व्यापारी है चाहे वो एमएस एमएसएमई वाला है वह सारे लोग अब आज देखिए ईरान हमारा बासमती चावल लेता है युद्ध में इस बासमती चावल फंसा पड़ा है। अंडा हमारा ₹80 लाख प्रति 80 लाख प्रतिदिन जाता है। जी जी जी सुन लीजिए जी जी आप कुछ कह रही है बताइए मैं उसी सब्जेक्ट पे बात कर रही हूं उसी पे एक जवाब मैं मैं मधुश्वर की यहां पर बात कर रही हूं क्योंकि और चीजों में चले जाएंगे वो बहुत वाइड डिस्कशन हो जाएगा आज सवाल सिर्फ इतना है कि क्या मधु किशोर खुद चुप हुई है या उनको खामोश कराया गया है इस पर एक जवाब दीजिए उसके बाद फिर मैं अंतिम कमेंट लूंगी कोलखन साहब से और मनीष जी से जी

29:22 देखिए इसका जवाब तो दो लोग दे सकते हैं। एक जिसका आपने इंटरव्यू लिया था स्वर्ण गोस्वामी दूसरा मधुकेश्वर खुद कि उनको चुप कराया गया है वो चुप हो गई है। दूसरी चीज 7 महीने पहले उन्होंने इंटरव्यू दिया। सात महीने बाद उन्होंने ट्वीट किया। तो सात महीने का स्पैन ऑफ पीरियड है। पूरा पीरियड है। जो डिफरेंस है सात महीने का है। तो 7 महीने तक उन्होंने बयान दिया। उसके बाद देखती रही फिर उन्होंने ट्वीट किया। चवस्वामी ने दिया। फिर उसके सपोर्टिंग उन्होंने ट्वीट किया। तो हो सकता है दो-ती महीने बाद और ट्वीट आए या क्या है वो तो वो लोग जानेंगे। लेकिन जब यह मुद्दा आ गया है वर्तमान समय में जब प्रधानमंत्री के ऊपर या नैतिकता का आरोप लग गया, महिला शोषण का आरोप लग गया है। जिसमें पहले मुख्यमंत्री रहते हुए मानसी सोनी नाम की लड़की का आरोप लग गया। उसके बाद चार महिला सांसदों के बारे में और एक पूर्व कोई

30:07 मंत्री हैं उनके केंद्रीय मंत्री उनके बारे में अगर बात हो रही है। उनका नाम भी उजागर हो रहा है। कोई मधुकेशवा कहते हुए मिल रही है कि वह पूर्व केंद्रीय मंत्री फट जाएंगी जिस दिन बोलेंगी तो भूचाल आ जाएगा। तो अगर इस तरह के आरोप लग रहे हैं तो उस कंडीशन में इस पद पर नरेंद्र मोदी का रहना इस देश के लिए बहुत खतरनाक है क्योंकि इसका ही फायदा उठाकर ट्रंप और नेतन याू ऐप फाइल फाइल का फायदा उठाकर भारत को हमेशा ब्लैकमेल कर रहे हैं। नरेंद्र मोदी को ब्लैकमेल कर रहे हैं। जिस कागज पर चाहे वो उस पर साइन करार ले रहे हैं। अब तो मुझे डर है कि अभी एनआईए ने जो यूएस नेशनल को गिरफ्तार किया है जो सीआईए ऑपरेटिव कहला रहा है और आठ उसके साथ यूक्रेन के नागरिक गिरफ्तार हुए हैं जो ड्रोन परीक्षण कर रहे हैं वो कैसे

30:54 दिल्ली से चले गए आपके बर्मा बॉर्डर बर्मा में चले गए और वापस भी चले आए आप अगर और हम चले जाए तो हमको इनर लाइन परमिट ले जाना पड़ेगा बिना परमिट के हम घुस नहीं सकते मणिपुर की तरफ मिजोरम की तरफ तो कैसे वो चले गए बर्मा किसने भेजा? किसके कहने पे गए? क्या साजिश है? देश से क्या साजिश हो रही है? शाही साहब टॉपिक पे टॉपिक पे आप आप बहुत जल्दी भटक जाते हैं और फिर आप पूरा आप भटका देते हैं डिबेट को। मैं इसीलिए इस पॉइंट पे ही रहना चाहती हूं। मैं कोलक साहब जी के पास आऊंगी कि सर अब क्या लगता है कि मधु किशोर अब एक लंबे पीरियड के लिए अब साइलेंस रहेंग। आपको लग रहा है कि अगर कुछ और उनको मिला तो वो ट्वीट करेंगे अपने आप में। नहीं मुझे लगता है कि वो ट्वीट करेंग क्योंकि उनको जिस चीज के बारे में

31:39 उन्होंने मुद्दा उठाया था तो काफी संघर्ष महिला रही है वो ट्वीट करेंग लेकिन हमको इंतजार करना होगा शाही साहब ने बिल्कुल ठीक कहा कि असल बात तो दोनों में से कोई भी बता सकता है या कोई जासूस जो उनके पीछे लगा हो बता सकता है हम लोग तो सिर्फ अनुमान लगा सकते हैं और उसका स्पकुलेशन कर सकते हैं। परिस्थितियों का विश्लेषण कर सकते हैं कि इस परिस्थिति में ऐसा हुआ है। इस शासन काल में लोगों को बोलने की जो शक्ति है साहस का हरण किया है। लोकतांत्रिक साहस जो एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के नागरिक में हुआ करता है। उस साहस का हरण हुआ है। क्षरण हुआ है। तो वही पर तो हमारे डेमोक्रेसी कॉम्प्रोमाइज है और प्राइम मिनिस्टर अगर यह बात सच है परिस्थिति बस कि किस आधार पर किन महिलाओं

32:26 को मंत्री बनाया गया तो ठीक ही कहा कि हमारा तो इससे हमारी संपता और हमारी राष्ट्रीय नीति और उसका असर हुआ है। आपकी बात बिल्कुल सही है। ये नैतिक के साथ साथ राजनैतिक प्रश्न भी है और इसके साथ ही साथ देश के भविष्य का प्रश्न भी है। एक अच्छे स्तर पर इसका विचार होना चाहिए। कोई व्यक्तिगत मामला नहीं है। मी टू में जो हुआ था मी टू का जो मैंने उदाहरण दिया तो कई कई विरोधी स्वर सामने आ गए और उन्होंने कहा मेरे साथ भी मेरे साथ भी मेरे साथ भी मेरा भी अनुभव मेरा भी अनुभव लेकिन इस मामले में उन्होंने जिन लोगों का नाम लेकर के उल्लेख किया था उनमें से कोई सामने नहीं आया। किसी ने उनको कंफर्म नहीं किया तो वो इस तरह से वो अकेली पर गई तो जाहिर है उस अकेलेपन में कुछ दिन खामोश रहेंग और उसके बाद अगर फिर भी लगेगा उनको तो हो

33:13 सकता है कि वो फिर से कुछ कहे लेकिन ये उनके विवेकाधिकार का मामला है हमारे जो केंद्रीय सरकार अभी है या जो कभी आएगी भारत सरकार वो इस मामले में हमारे जो अधिकारी है वो इस मामले में दखल देंगे पता करेंगे कि क्या हुआ है क्योंकि देश का हित कहां-कहां कंप्रोमाइज हुआ है यह भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है इसमें और देश में भी है बाहर भी है। तो ये स्थिति है। राहुल गांधी तो कह चुके हैं कि प्राइम मिनिस्टर कंप्रोमाइज है। तो कंप्रोमाइज होने के एक लक्षण ये भी है। जी हां ठीक है। मैं मनीष जी के पास आती हूं कि मनीष जी अल्टरनेट मीडिया ने भी इसको खूब दो-तीन दिन चलाया जब उसका ट्वीट उनका आया। उसके बाद अब अल्टरनेट मीडिया भी नहीं इसको डिस्कस करेगा। मैंने जब आज उनकी Twitter लाइन देखी तो मुझे लगा कि अरे ये तो अब बिल्कुल खामोशी वाला मामला है और

33:59 इसीलिए मुझे आईडिया आया। हमने कहा कि चलो अब इस पर डिस्कशन करते हैं। अब आपको क्या लग रहा है कि अल्टरनेट मीडिया भी इस पर चर्चा नहीं करेगा तो एक तरीके से अब चर्चा खत्म हो गई। अब जब तक वो कुछ नया नहीं लिखेंगी तो लोग क्यों उठाएंगे मधु किशोर का जो ट्वीट था या फिर जो बातें उन्होंने कही थी ना स्मृति ईरानी ने कोई कंप्लेंट की है ना जिसके जिसके बारे में उन्होंने नाम लिया उनके तरफ से भी कुछ नहीं आया क्योंकि सब कह रहे होंगे कि भाई ये बीजेपी की इनाइडर है और जो बातें उन्होंने लिखी है वो बहुत एम्बरेस करेंगी तो मोदी मीडिया इसको उठाएगा नहीं तो एक तरीके से अब हम अंत माने इसका और फिर अब हम लंबे समय के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ेगा कि अब कुछ मधु किशोर लिखेंग या नहीं लिखेंग नहीं देखिए एक बात हम लोग को समझना चाहिए कि भारतीय समाज पे पित सत्ता का बहुत गहरा वर्चस्व है कह लीजिए अभी भी आप उसका जो

34:47 इको सिस्टम है भारतीय समाज का और बीजेपी तो उसके सेंटर में है बीजेपी तो उसका कह लीजिए कि इस इस विचार को आगे बढ़ाने और ज्यादा स्थापित करने और ज्यादा इसको इसको जीने का माने उस दिशा में ले जाने का बीजेपी आरएसएस तो इसका सेंटर पॉइंट है पितृ सत्ता को और ज्यादा उसमें ले जाने की तो वहां उसके उसके इकोसिस्टम में तो बिल्कुल ही ये इशू नहीं बनता है। जनरली भी ये इशू उस तरह से नहीं बन पाता है। जैसे वो उठा भी रही थी तो बहुत आप देखे होंगे कि उस पे कोई बहुत ऐसा तो नहीं हुआ ना कि विपक्ष की तरफ से ही बहुत इस पर मुद्दा बना दिया गया। ऐसा भी नहीं हुआ। आपने ध्यान दिया होगा कि वो ये सब से कोई बहुत निकलने वाला नहीं है। उनके दिमाग में भी होता है और जैसे जब गुजरात में

35:33 मुख्यमंत्री थे और आनंदीबेन को मंत्री बनाया गया मोदी के काल में तो उस समय भी आनंदीबेन के जो पति है उनसे अलग रहते हैं। उन्होंने पूरा एक हेट कैंपेन चलाया था आनंदीबेन के लिए कि म उन उनके मंत्री बनाए जाने पर उनका उनको जोड़ा था मोदी से उस दौर में भी और कम से कम हमको लगता है कि दर्जनों उन्होंने साक्षात्कार दिए उस समय मैं बता रहा हूं मोफत लाल उनके हस्बैंड है जो अलग रहते हैं साथ में नहीं रहते हैं उस समय भी वो उस तरह का वो बिल्कुल नहीं बना या मुख्यमंत्री रहते हुए एक महिला का पीछा करने और जासूसी करने का उसका बहुत सारा बाद में भी एक अधिकारी है जो उन्होंने उस सवाल को तथ्यों के साथ पेश करने की बात कर रहे थे उस पर भी बहुत बात नहीं बनी जनरली या अभीस्टीन का जितना बड़ा

36:21 मसला आया है जिस लेवल का मसला है वो भारतीय समाज में उस तरह से आप देखिए कि या बीजेपी के इकोसिस्टम में आरएसएस के इको सिस्टम में थोड़ा निश्चिंत रहते हैं इन सब मसलों पे आम तौर पर निश्चिंत रहते हैं ये मुद्दा बहुत हमारे लिए वो मीटू का भी देखिए वो तब बना जब एक जनरली बहुत बड़े दायरे ने अपना स्वीकारना शुरू कर दिया कि मेरे साथ भी हुआ मेरे साथ भी हुआ मेरे साथ भी हुआ वो एक बड़ा दायरा जो बना तो जनरली इस बात को भी हम लोगों को ध्यान रखना है कि इसीलिए पीछे हटना लाजमी है या तो बहुत बड़ा दायरा उस पर खड़ा हो जाए बहुत बड़ा दायरे में उस चर्चा होने लगे पक्ष विपक्ष हर जगह चर्चा होने लगे उस पे और उस पर जवाब मांगने लगे पूरा विपक्ष मांगने लगे सामाजिक नागरिक समाज की तरफ से मुद्दा बनने लगे। बीजेपी के अंदर वो मुद्दा बनने

37:07 लगे। आरएसएस के अंदर मुद्दा बनने लगे। तो कहीं भी कुछ बनता हुआ नहीं दिखा आपको ना। आपको कहीं भी आप देखेंगे कहीं भी ये मुद्दा बनता हुआ नहीं दिखा। किसी भी कोने से कोई ऐसी आवाज आपको आती हुई नहीं देखी। सोशल मीडिया पर भी जो चर्चा थोड़ी दिन चला वो भी एक कह लीजिए एक दूसरे तरह का मसला है। वो भी एक कह लीजिए कि थोड़ा चटकारे लेने वाला ज्यादा मसला है। मतलब उसको उसको एक तरह से एक व्यंगात्मक और एक कह लीजिए कि एक एक खास तरह का उसका एक एंजॉय करने वाला मुद्रा वो ज्यादा है। वो गंभीरता उस पूरे मामले में जनरली आप देखेंगे कि वो उस तरह का नहीं दिखा। तो मेरा ये कहना है कि ये दबना ही था। अभी वो फिर भी ले आएंगे ना मेरा ये कहना है कि अगर वो फिर भी आएंगे तो हालांकि वो इंतजार तो करेंगे अभी उनके

37:53 ऊपर आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि वो इस बार 12व साल वो कई रिपोर्ट मैं देख रहा था उनके ऊपर एक आरोप लगाया जा रहा है कि वो जो है 12वा साल था 37 राज्यसभा की सीट अभी जो भरे गए हैं 37 राज्यसभा की सीट थी उसमें वो उम्मीद कर रही थी मधु किश्वर कि उनको कम से कम इस बार राज्यसभा में जो है भेजा जाएगा और और ये नहीं हुआ इस तिलमिलाहट में उनके बारे में एक बात हो रही है और सुब्रमण्यम स्वामी के बारे में भी ये मुद्दा उठा दिया गया है। एक मैं रिपोर्ट पढ़ रहा था किकिकि उनको सुब्रमण्यम स्वामी एक अपने को बड़े महान अर्थशास्त्री मानते हैं रहे हैं और वित्त मंत्री का वो हमेशा कोशिश करते हैं कि उनको वित्त मंत्री बनाया जाए। अटल बिहारी के दौर में भी कोशिश किया उनसे

38:38 अनबन हो गई। वो नहीं बन पाए और 14 में मोदी सरकार लाने में वो मानते हैं कि उनका योगदान है क्योंकि उन्होंने एक कांग्रेस के खिलाफ एक हेड कैंपेन बहुत चलाया था। उस समय करप्शन वाले पे भी कांग्रेस के बहुत हेड कैंपेन चलाया था। तो वो मानते हैं कि हमारा योगदान है। हमको उसका मूल्य मिलना चाहिए। अब ये सब मुद्दा भी आप समझिए मधु किशोर को लेकर के को लेकर के। अब एक एक पैरेलल यह भी सवाल उठा दिया गया है कि वो इससे एक एक खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाला मामला। तो अब धीरे-धीरे एक एक इको सिस्टम में इस सब चर्चा भी देखिएगा। वो शुरू हो सकता है और तीसरा एक खतरा इसमें एक बड़ा जो जज लोया के साथ हुआ जो दाबोलकर के साथ हुआ या गौरी लंकेश के साथ हुआ तीसरा चौथा खतरा ये भी है इस बात को भी हम

39:25 लोगों को ये बहुत असंभव बात नहीं है इस दौर में ये मोदी काल में और मोदी काल को मत सोचिए पासिस्ट रिजीम में ये बहुत संभव है कि आप अचानक आप आप नहीं पाए जाए अचानक कोई इस तरह का आपके ऊपर इस तरह की चीजें हो सकती है आपके तो ये भी एक संभावना इसमें आप समझ लीजिए कि जो ही चीजें एकदम शांत होंगी तब तक तब तक कोई घटना हो जाएगी कोई ऐसी चीज हो जाएगी यह भी एक खतरा है इस बात को भी हम लोगों को समझना चाहिए जी ठीक है चलिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया मनीष जी शाही साहब शाही साहब कुछ कहना चाह रहे हैं जी शाही साहब बोलिए बहुत संक्षेप में लेकिन भटक मत जाइएगा टॉपिक से हां बोलिए बोलिए बोलिए मैम भटक तो नहीं रहा मैं तो संदर्भ संदर्भ समझाता हूं भटकने का काम तो आपके अल्टरनेट मीडिया में भी एक एक टीम है लगी हुई है

40:13 जिन्होंने अन्ना आंदोलन में साथ दिया था बहुत बड़े वो बने थे और मैंने देखा मधुकेश्वर के आरोप पर सबसे पहले मधुकेश्वर पर सवाल उठाने वाला वही टीम था उसमें आप भी एक समय थी तो ऐसे लोग भी पड़े हुए हैं जो मोदी भक्ति करते रहते हैं वो केजरीवाल गैंग के लोग हैं। वो कहां है आज केजरीवाल गैंग का वो नरेंद्र मोदी गैंग का वो अमिताभ बच्चन आज पेट्रोल का दाम कहां बढ़ गया? कहां है वो? रोज हंगामा करता नहीं सुन तो नहीं सुनिए ये नहीं सुनिए ना ये रोज रोज रोज ट्वीट करने वाले रोज नेहरू जी को गाली देने वाले रोज गांधी जी को गाली देने वाले उनके चारित्रिक हनन करने वाले रोज इंदिरा जी को गाली रोज सोनिया जी को गाली देने वाले ये कहां है अमिताभ बच्चन कहां है अनुपम खेल मर गए क्या सब ये कहां है प्रियंका चोपड़ा

41:00 हैं? ये सब मर गए आज दफन हो गए कहीं किस कमरे में चले गए किस शमशान में गए मतलब पूरे देश की ऐसी की तैसी हो रही है लोग लाइन पे लगे हुए हैं और ये अंधभक्त सुनिए ये अंधभक्त जो है जो ये ड्रोन जा रहे हैं ना आजकल जाके फट जा रहे हैं चाहे वो ईरान भेज रहा है चाहे वो इजराइल भेज रहा है वैसे ये ड्रोन हो गए अंधभक्त और ये जब तक गिरेंगे नहीं फटेंगे भाई साहब आप मधु किशोर से रिलेटेड क्या पॉइंट बोलने वाले थे आपने उंगली उठाई मैं आपके पास आई मैंने मैं आपको मैं आपको एक ही चीज बता दे रहा हूं। मधुकेश्वर और सुब्रमण स्वामी यह लोग बिना बैकिंग के भाजपा और आरएसएस जो इनकी इंटरनल मामला है उसके बिना

41:47 मदद के यह लोग नहीं हो रहा है और इसमें यह एक बहुत बड़ा आपस में इन लोगों में रिफ्ट है भारतीय जनता पार्टी में और आरएसएस में जो नरेंद्र मोदी के वो चाहता है कि नरेंद्र मोदी 75 वर्ष की आयु हो गई है और वह हटे और वहां पर एक कैंपेन इंटरनल चल रहा है कि नरेंद्र मोदी का इस्तीफा हो। वह लोग कैंपेन कर रहे हैं। ये कमी है एक अल्टरनेट मीडिया की और मीडिया भी और एक दो अल्टरनेट मीडिया वाले भी शामिल हो गए जो जिन्होंने सवाल उठाया उस पर ही सवाल उठा रहे हैं। अरे तुम क्यों सवाल उठा रहे हो भाई? ठीक है। तुम क्यों सवाल उठा रहे हो? ठीक है। ठीक है। मुझे समझ में नहीं आ रहा। तुम क्यों सवाल उठा रहे हो? हम भाई गांधी जी पर रोज सवाल उठाते हो और

42:32 नेहरू जी पर रोज सवाल उठता है तब क्यों नहीं एक कार्यक्रम करते हो कि नेहरू जी को ये गाली दे रहे हैं आरएसएस वाले भाजपा वाले ये इंटरनल एक रिफ्ट है एक इंटरनल रिफ्ट हो चुकी है भाजपा के अंदर भाजपा टूटने वाली है जल्दी ही टूट जाएगी जो स्थिति है वहां पर ठीक है चलिए इस चर्चा को खत्म करते हैं। आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया शाही साहब मनीष जी प्रफुल जी थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग

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