OCD Urge Aaya? Compulsion Mat Karo | ERP Steps (Hindi)

Brief Summary

This video discusses Obsessive-Compulsive Disorder (OCD), particularly focusing on urgency-related OCD. Key points covered include:

  • Urgency within OCD can manifest through unwanted thoughts, images, and urges.
  • Several effective techniques are provided to manage and reduce these compulsions, including urgency surfing, labelling the urges, living with anxiety, and a paradoxical technique to agree with OCD.

Understanding Urgency-Related OCD

The video introduces urgency-related OCD, clarifying that it is not limited to obsessions and compulsions. The presenter highlights common misconceptions and outlines various subtypes of OCD, particularly emphasising the unique aspects of urgency within this disorder, such as intrusive images and strong urges to perform harmful actions.

Techniques for Managing OCD

Five techniques are discussed for managing urgency-associated compulsions. The first technique, urgency surfing, involves allowing the urge to peak and then gradually subside without acting on it. The presenter explains that this process can take 15 to 20 minutes. The goal is to relax and breathe through the discomfort, ultimately allowing the urgency to diminish over time.

Labelling the Urges

The second technique involves labelling the urges as false signals from OCD. By identifying the compulsion as a false urge, individuals can better detach from it and prevent themselves from acting on it. The presenter suggests using humorous labels to create distance from the OCD's voice, making it easier to resist compulsions.

Living with Anxiety

The third technique encourages individuals to coexist with anxiety instead of attempting to eliminate it. The presenter explains that anxiety is a normal emotion and signifies that something is different but not necessarily dangerous. By learning to tolerate anxiety, a person can develop resilience and reduce their overall sensitivity to distress, thus effectively counteracting compulsions.

Agreeing with OCD

The fourth technique focuses on a paradoxical approach: agreeing with OCD's fears without acting on them. The presenter shares that by acknowledging OCD’s demands—such as the risk of harm and the desire to perform compulsions—individuals can essentially take away its power. This acceptance weakens the compulsive cycle because there is no longer a fight against the disorder.

Daily Discomfort Training

The final technique involves training oneself to withstand discomfort, dubbed daily discomfort training. By engaging in challenging activities that induce discomfort, individuals can build their tolerance and prepare their brains to handle the distress associated with OCD urgencies, improving their overall resilience against compulsions.

Conclusion and Encouragement

The video ends with encouragement to incorporate these techniques into daily life, affirming that overcoming OCD is possible through adherence to structured methods. The presenter invites viewers to provide feedback and reach out for further support in managing their OCD symptoms.

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Transcript

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0:00 हेलो दोस्तों नमस्कार आदाब एंड वेलकम टू साइकोलॉजी डेली। आज के इस वीडियो में मैं आपसे बात करने जा रहा हूं अबाउट अर्ज रिलेटेड ओसीडी। ओसीडी यानी कि ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के अंदर सिर्फ थॉट्स नहीं होते हैं। और जैसा कि आमतौर पे मिथ चलती है। सिर्फ कंटैमिनेशन या साफ सफाई की बीमारी को ही ओसीडी नहीं कहते हैं। कई तरीके की प्रॉब्लम्स होती हैं ओसीडी के अंदर। कंटैमिनेशन यानी कि साफ सफाई उसमें से एक है रिचेकिंग, रिअशोरेंस, सेक्सुअल थॉट्स, गॉड रिलेटेड बैड थॉट्स एंड हार्मिंग ओसीडी। ये कई सारे अलग-अलग टाइप्स हैं और इसके अलग-अलग सबटाइ्स भी होते हैं। जैसे कि रिलेशनशिप ओसीडी, एकिस्टेंशियल ओसीडी वगैरह-वगैरह। लेकिन आज मैं बात करने जा रहा हूं अर्ज रिलेटेड ओसीडी की। क्योंकि यहां थॉट्स के साथ-साथ दो चीजें और होती हैं ओसीडी के अंदर जो अक्सर न्यू थेरेपिस्ट या जिनको ज्यादा

0:47 एक्सपीरियंस नहीं है वो मिस कर देते हैं और इस वजह से कंफ्यूजन भी काफी होती है और वो है थॉट के अलावा इमेजेस और अर्जज़ यानी कि कई लोगों को ख्याल आते हैं, कई लोगों को तस्वीरें दिखती हैं गलत-गलत और कई लोगों को अर्जज़ आती हैं कि मैं कुछ कर ना दूं। मुझे कुछ करने की अर्ज आ रही है। अब ये कुछ भी हो सकता है। अर्ज किसी भी तरीके की हो सकती है। ज्यादातर ये हार्म ओसीडी में दिखता है कि मैं किसी का हार्म ना कर दूं। स्पेशली यंग मदर्स को आती है जब उनके न्यूबर्न बेबीज होते हैं कि मैं हार्म ना कर दूं किसी तरीके से। रिचेकिंग ओसीडी भी होता है कि कहीं मेरी वजह से कुछ हार्म ना हो जाए, आग ना लग जाए या कुछ पाप ना चढ़ जाए। ऐसा कुछ भी। ठीक है? तो अर्ज ओसीडी में एक और चीज होती है कि मैं अपने आप को सेल्फ हार्म ना कर दूं। अपने आप को अपना सर दीवार में ना मार लूं या किसी को शार्प ऑब्जेक्ट से हिट ना कर दूं, किसी को ब्लेड

1:33 से ना काट दूं। कुछ भी ऐसी अर्ज आ सकती है। और इसी वजह से बहुत ज्यादा डर, घबराहट और चिंता इंसान को होने लगती है। अगर आपको भी ऐसी कुछ इशू है या ओसीडी रिलेटेड कोई भी समस्या है या एंजायटी और डिप्रेशन जैसी तो आप इस चैनल को बिल्कुल सब्सक्राइब कर सकते हैं। बिकॉज़ मैं और मेरी टीम साइकोलॉजी दिल्ली में आपके लिए निरंतर ऐसे वीडियोस, टेक्निक्स और टिप्स आपके लिए लाते रहते हैं जिससे हम हजारों लोगों को ऑलरेडी ठीक कर चुके। और आप भी हमारे इन वीडियोस से घर बैठे अपने आप को रिलीफ कर सकते हैं। तो आगे बढ़ते हैं। अभी इस वीडियो को पूरा देखना और समझना बाकी है। तो अर्ज ओसीडी में ऐसे-ऐसे थॉट्स आते हैं हार्मिंग के। ठीक है? अब इसमें एक अर्ज ये भी होती है। कई लोगों को डेफिकेशन या यूरिनेशन की अर्जज़ भी आती हैं। तो मैं आपको एक मोटा-मोटे तौर पे बता रहा हूं कि किस तरीके के अर्जज़ की यहां बात हो रही

2:19 है। अब अर्ज ओसीडी में मैक्सिमम प्रॉब्लम क्या होती है? है वो एक ही लाइन की प्रॉब्लम है कि मुझे कुछ ऐसी अर्ज ना आ जाए। मेरे अंदर कोई ऐसी उत्तेजना ना हो जाए कि मैं किसी को हार्म कर दूं किसी भी प्रकार का। इसमें गाली देना, सेक्सुअल टच कुछ भी आ सकता है। ये अर्जस आपको लगता है कि आपके मन में आ जाएंगी और आप अनकंट्रोलेबल होकर इस पे एक्ट कर देंगे। राइट? ये चीजें आपके अंदर आती हैं। अच्छा कई लोग अर्ज ओसीडी के अंदर या अर्ज के बारे में यह भी जानना चाहते हैं कि अर्ज टू डू कंपल्शन। कई सारे कमेंट्स आए थे मुझे तो मैं वो भी एड्रेस कर देता हूं कि अर्ज टू डू कंपल्शन कंपल्शन करने की अर्ज आ रही है। बहुत तीव्र इच्छा हो रही है कि मैं कुछ कर लूं कंपल्शनंस और अपने इस रिलीफ कर लूं अपने इस ओसीडी के प्रेशर को। ठीक है? जैसे कि एग्जांपल लेके चलते हैं

3:05 कि अगर मुझे भगवान के प्रति कोई नेगेटिव थॉट्स आ गया तो मुझे बहुत अर्ज हो रही है माफी मांगने की या मंदिर जाने की। तो अब मैं इसको कैसे झेलूं? ओसीडी अर्ज बना रहा है कि चले जाओ मंदिर और मैं नहीं जाता तो एंजायटी होती है। इस तरीके की आपको प्रॉब्लम्स अर्ज ओसीडी में देखने को मिलती। आज मैं अर्ज के रिलेटेड पांच ऐसे टेक्निक्स बताऊंगा जो साइकोलॉजिकली दुनिया के सबसे बेहतरीन टेक्निक्स हैं अर्ज को समाप्त करने के लिए। तो पहली टेक्निक की बात करते हैं वो है अर्थ सर्फिंग जिसको हम एक्सपोज़र थेरेपी में भी यूज़ करते हैं। अर्थ सर्फिंग का मतलब है कि अर्थ ब्रेन के जिस हिस्से से आती है उस हिस्से में जैसे कि बेसल गेंग्लिया नाम का एक पार्ट मान लेते हैं ब्रेन में जो आपको शायद नहीं पता होगा। होगा लेकिन बेसल गैंगिया से अगर अर्ज आ रही है एक एक्शन करने की आपको तीव्र इच्छा हो रही है तो वो इच्छा आपके

3:50 अंदर प्रेशर बनाएगी एंजाइटटी बनाएगी ठीक है अब ये एंजाइटटी गुड एंड बैड नहीं है बट एंजाइटटी बनेगी एंग्जायटी यानी कि आपको घबराहट बेचैनी डिस्ट्रेस अनइजी रोना आना चिटचिड़ापन कुछ भी लग सकता है ये सारे एंग्जायटी के टाइप्स हैं। जब आपको ये इच्छा होगी अर्ज करने की तो आपकी इच्छा को आप ऐसे समझ लीजिए एक मैप है जीरो से 100 और 100 से ज़ीरो एक पहाड़ की तरह या एक वेव की तरह समझ सकते हैं इसको इसको हम कहते हैं अर्ज जो है हमारी उसकी वेव है ये ठीक है अब इस वेव के ऊपर सर्फ करना है सर्फिंग अर्ज सर्फिंग ठीक है कैसे करना है देखो 15 से 20 मिनट की ये वेव होती है अगर इस 15 से 20 मिनट की वेव में आप जीरो से 100 जाने देते हो उस अर्च को और वहां पे आप कोई एक्शन नहीं लेते हो ठीक है आप पहले ही प्रिपेयर रहते हो कि हां बहुत दिक्कत होगी पर मैं बैठा रहूंगा बैठा रहूंगा बैठा

4:35 रहूंगा 15 मिनट बाद वो अर्ज आपकी डाउन आ जाएगी 15 मिनट के अंदर-अंदर ये मैक्सिमम टाइम बता रहा हूं मैं आपको कई लोगों का 5 मिनट या 2 मिनट में भी अर्ज डाउन हो जाता है लेकिन अब कई लोग कहते हैं सर मेरा तो नहीं होता है क्योंकि भाई आप उस अर्ज से लड़ते रहते हो या तो आप उस थॉट से उलझे रहते हो उसको आंसर देते रहते हो आर्गुमेंट करते रहते हो या आप उस अर्ज को सेटिस्फाई करने की कोशिश करते हो या अंदर से रोकने की आपको फ्री फ्लो में उस अर्ज को बहने देना है पानी की तरह और वो अर्ज का जो सर्फिंग है ना बना ही पानी की लहर के उससे कि कितनी भी बड़ी लहर हो सुनामी ही क्यों ना हो। आप सुनामी को दीवार से रोक सकते हो क्या? दीवार तो तोड़ देगी वो प्रेशर बनेगा बहुत ज्यादा। लेकिन अगर आप उसको धीरे धीरे धीरे-धीरे बहने दो तो पानी निकल जाएगा। कितनी भी बड़ी वेव हो आखिरकार समाप्त हो ही जाती है। इसको कहते हैं अर्ज सर्फिंग। 15 से 20 मिनट का टाइमर लगाओ। बैठ जाओ एक

5:21 जगह पे। हिलना मत। बॉडी रिलैक्स एंड ज्यादा से ज्यादा ब्रीथिंग कर सकते हो और अफोर्मेशन कर सकते हो कि दिस विल पास। दिस विल पास, दिस विल पास या रिलैक्स, रिलैक्स, रिलैक्स या ऑल इज़ वेल, ऑल इज़ वेल, ऑल इज़ वेल। ये सारी चीजें करने से आपको अर्थ सर्फिंग में आपको बहुत अच्छा मतलब आप इज़ली कर पाओगे इसको। दूसरी बात ये भी है कि अर्ज सर्फिंग में ये नहीं कि आपको हर दिन 15 मिनट झेलना है। वो धीरे-धीरे 15 से पांच, 5 से 2, 3 1 हो जाएगा। और धीरे-धीरे अगले 3 से 4 दिन के अंदर आपकी वो जो पहली बार अर्ज बनी थी ना, वह उतनी ज्यादा नहीं बनेगी। आप इसको मेजर भी कर सकते हो ज़ीरो से 10 के स्केल के ऊपर। कि पहले दिन जब मैंने अर्थ को कंपल्शन में नहीं बदला अर्थ को झेला टोलरेट किया तो ज़ीरो से 10 में कितनी ज्यादा दिक्कत थी मेरे को तो मान लीजिए पहले दिन आपको 10 में से नौ दिक्कत होगी फिर आपको पांच होगी फिर चार होगी तीन दो एक करके आपकी वो अर्थ खत्म हो जाएगी ये

6:08 साइंटिफिक फैक्ट है ये कोई मेरे दिलासा देने वाली बात नहीं है बस आपने आज तक ट्राई नहीं करा सेकंड आता है लेबल द अर्ज ये लेबलिंग बहुत ही इंपॉर्टेंट टेक्निक है साइकोलॉजी के जितने भी अध्ययन हुए हैं रिसर्चेस हुए हैं उसमें हर बार ये लेबलिंग टेक्निक बहुत ज्यादा यूज़ होती है और यह सिर्फ आपके लिए नहीं दुनिया में बहुत हजारों करोड़ों लोगों ने यूज़ करी है। एशिया से लेके अमेरिका से लेके यूएस हर जगह लोगों ने इसको यूज़ करा है और अफ्रीका तक सब जगह कंसिस्टेंट और बिल्कुल अच्छे से इंपेरिकल इसका एविडेंस आया। यानी कि बहुत ठोस है ये टेक्निक। लेकिन सिंपल है तो लोग इसको अंडरएस्टीमेट कर देते हैं। मैं जब अपने पेशेंट्स को सिखाता हूं हिट ओसीडी प्रोटोकॉल के अंदर इट वर्क्स लाइक अ मैजिक विथ देम। तो लेबलिंग क्या होता है कि आपको ना अपनी अर्ज को पहचानना पड़ेगा कि जैसे ही अर्ज आ रही है आपको उसको लेबल करना

6:55 होगा। ऐसे नहीं बोलना कि मेरा मन कर रहा है ये करने का या अर्ज में मैं कुछ ना कर दूं। आपको बोलना है ओसीडी की फॉल्स अर्ज आ रही है। ओसीडी का फॉल्स सिग्नल आ रहा है। आपको ओसीडी या चिंटू वर्ड यूज़ करना है। लेबल करना है। मैं तो फनी लेबल करवाता हूं। मेरा फेवरेट है चिंटू। जब से मैं ओसीडी में हूं तब से मैं चिंटू बुलाता हूं। तो चिंटू मुझे यह करने को कह रहा है। चिंटू मुझे इच्छा दे रहा है या चिंटू को इच्छा हो रही है कि मैं यह कर लूं। मैं तो इसमें अपने आप को डिटच ही कर लेता हूं कि इट्स नॉट मी इट्स ओसीडी। तो अपने आप को हटा देना है। लेबल कर लेना है। अब लेबल करने के बाद आपको समझना है दो तरीके हैं। दो चीजें करवाना चाहता है ओसीडी। एक होता है कंटेंट कि वो आपको क्या करने को कह रहा है अर्ज में। और एक होता है पैटर्न कि आप रोज क्या करते आए हो। ठीक है? उसके कहने पर। अब जो पैटर्न में आप चलते आए हो,

7:41 दोबारा चलोगे तो वो तो फीड ही हो रहा है ना ओसीडी को। जब आप लेबल कर देते हो कि ये मैं नहीं हूं। ये मेरी इच्छा नहीं है। ये चिंटू की इच्छा है। तो आप लेबल करके उसके कंटेंट पे वर्क करते हो कि जो वो कह रहा है वो मेरा कमांड नहीं है मेरे ऊपर। वो मेरा कोई ऑर्डर नहीं है कि मुझे मिला हो। ये सिर्फ एक फॉल्स निर्देश इंस्ट्रक्शन है और मेरी चॉइस है कि आई एम नॉट गोइंग टू डू दिस। लेबल करने से आप अपने आप से सेपरेट कर लेते हो। ये लेबल की टेक्निक को इज़ली समझना सबसे इजी है कि स्पैम कॉल। जब आपके पास कोई इंसान बार-बार बार-बार रॉन्ग नंबर से कॉल कर रहा हो और आपने 10 बार उठा लिया, आप परेशान हो गए हो। अल्टीमेटली आप लिख देते हो उस नंबर को सेव कर लेते हो रॉन्ग नंबर। अब जब भी कर रहे हैं आप देख रहे हो हां रॉन्ग नंबर है। ठीक है? नहीं उठाना। नहीं उठाओगे, नहीं उठाओगे, नहीं उठाओगे। अल्टीमेटली वो कट जाएगा कॉल। तो आप अपने आप को इससे सेपरेट कर लो लेबल

8:27 करके। ये बहुत ही प्यारी स्ट्रेटजी है। पर इसमें टाइम लगता है लर्निंग में। बार-बार लर्न करना पड़ेगा कि इच्छा आई तो मैं रुक जाऊं। पॉज, ब्रीथ, आइडेंटिफाई। पॉज, ब्रीथ, आइडेंटिफाई, लेबल। ये करने आप धीरे-धीरे इसको सीख जाओगे ठीक करना। एंड याद रखना स्ट्रांग माइंड्स डोंट आर्ग्यू विद ओसीडी। दे नोटिस इट, आइडेंटिफाई इट एंड लेबल इट। थर्ड टेक्निक आती है लिव विद एंजाइटटी। ट्रेन योर माइंड टू लिव विद एंजायटी। यहां पे मैं आपको बताना चाहूंगा कि आपके ब्रेन ने जब से फियर, ओसीडी, ए्जायटी, ओवरथिंकिंग को डेवलप किया है, उसको लगता है ए्जायटी इक्वल्स टू कंप्लीट गॉन। ठीक है? कंप्लीट फेलियर। एंजायटी मतलब समथिंग बैड। एंजायटी मतलब कैटस्ट्रोफी। एंजाइटटी मतलब जिंदगी खत्म हो गई। एंग्जायटी का मतलब यह नहीं होता है। आज यहां पे समझ लो। एंग्जायटी इज नॉट

9:14 योर एनिमी। मैंने जो अपनी किताब लिखी है ओसीडी के ऊपर उसके अंदर ये लिखा हुआ है कि ए्जायटी इज माय बेस्ट फ्रेंड नाउ। बिकॉज़ एंग्जायटी को ना मैं गलत समझता था। और मैक्सिमम लोग गलत ही समझते हैं कि ए्जायटी आ रही है। मतलब कुछ गड़बड़ हो गई है। एंग्जायटी का मतलब गड़बड़ नहीं। एंजायटी का मतलब है दैट समथिंग इज़ डिफरेंट। डिफरेंट। ठीक है? गलत नहीं। डिफरेंट। डिफरेंट सही भी हो सकता है। ठीक है? अब एंग्जायटी को टोलरेट करने की क्षमता आपने बनाई ही नहीं। आप एंजायटी आती है उसको हटाने में लग जाते हो, न्यूट्रलाइज करते हो, आर्ग्यू करते हो, कंपल्शन करते हो, सेफ्टी बिहेवियर करते हो, अवॉइड करते हो, पीछे हट जाते हो एंजाइटी आते ही। एंग्जायटी से पीछे नहीं हटना है। एंग्जायटी को अपना दोस्त बनाना है। इसके साथ ही आगे जाना है। एंग्जायटी हटाकर आगे नहीं जाओगे आप। एंजायटी के साथ ही सारे काम होते हैं। दुनिया का हर एक काम सक्सेसफुल काम एंग्जायटी के साथ ही होता है। गाड़ी चलाना सीखते हो, एग्जाम

10:00 देते हो, इंटरव्यूज देते हो। सब कुछ एंग्जायटी के साथ ही तो हुआ है आज तक। कौन सा काम बिना एंजायटी के हुआ है? एंग्जायटी को दोस्त बनाओ। फील द फियर एंड डू इट एनीवे। ये मेरा भी मंत्र था जब मैं ओसीडी से लड़ रहा था। फील द फियर डू इट एनीवे। डर का सामना करना है। डर के साथ डर को हटा के नहीं। अच्छा धीरे धीरे-धीरे करना है। एक बार में नहीं करना है। एक-एस एक-एक करना है। आप अपने ब्रेन को क्या ट्रेन कर रहे हो कि एंग्जायटी डेंजरस नहीं है। एंग्जायटी अनकंफर्टेबल है। पर जहां पीड़ा वहीं ट्रीटमेंट। यह मैं अपने पेशेंट्स को भी सिखाता हूं। जहां पीड़ा हो रही है, ऑप्शन देता है ना उसीलिए आपको ए करो या बी या तो कंपल्शन करो या मत करो। आप बोलो कहां पे मुझे पीड़ा होगी? कंपल्शन कर लूंगा तो फिर रिलीफ हो जाएगा। रिलीफ नहीं चाहिए मेरे को। पीड़ा जहां होगी वहीं मेरा ट्रीटमेंट होगा। वहीं नर्वस सिस्टम स्ट्रांग बनेगा। ऐसा करने से आपके ब्रेन

10:46 में इमोशनल स्टैमिना बनता है। यानी कि इमोशंस को, एंग्जायटी को, अनइज़ीनेस को झेलने की क्षमता बढ़ जाती है। और वो ब्रेन जो है वो फ्रजाइल नहीं रहता। वो इतना हल्का-फुल्का नाजुक नहीं रहता कि एंग्जायटी आई और मैं पीछे हट गया। अगर एंग्जायटी को आप नहीं झेल पाते ना तो आप शुरू से ही जिंदगी सर्वाइव भी नहीं कर पाते। एक छोटा बच्चा पैदा होने से लेकर मरते दम तक एंग्जायटी को झेलेगा और सभी झेलेंगे और सब झेलते भी हैं और आपने भी अपनी जिंदगी में हर एक काम एंजायटी के साथ ही करा है। एंजाइटटी को हटाकर नहीं इस बात को याद कर लेना। अपने आपको याद दिला देना। चौथी टेक्निक आती है मेरी फेवरेट एग्री विद ओसीडी। बट डोंट एक्ट। पैराडॉक्सिकल टेक्निक है ये। मैंने अभी-अभी पिछले हफ्ते ही एक फीमेल को सिखाया। इट वर्क्ड मिरेकुलस और कई बार अपने और भी पेशेंट्स को सिखाया। तो क्या होता है कि ओसीडी का

11:32 फूड क्या होता है? ओसीडी का फूड होता है कि आप उसको रेजिस्ट करो। आप उसको कन्विंस करने में लग जाओ। आप आर्गुमेंट में लग जाओ। आप सशन निकालने लग जाओ। रीअशोरेंस रिचेकिंग करो। इसका उल्टा करना है आपको। क्योंकि ये ना ये सब करना आर्गुमेंट वगैरह। ये पुश एंड पुल जनरेट कर देता है। ओसीडी कहता है गलत होगा गलत होगा। आप कहते हो नहीं नहीं नहीं। गलत होगा गलत होगा। नहीं नहीं नहीं। आपको उस ओसीडी को कहना है। अच्छा गलत होगा ना? एंजायटी हो रही है ना मुझे? अर्ज हो रही है ना कुछ करने की इस अर्ज पे काम नहीं करूंगा तो कुछ गलत हो जाएगा ना होने दे ना सरकास्टिक ना कुछ ह्यूमर यूज़ कर सकते हो ह्यूमर अच्छा वर्क करता है लेकिन कॉन्फिडेंटली कामली और इनडिफरेंट होगे हां होने दे अरे सब मर जाएंगे हां कोई बात नहीं देखेंगे अरे वो हो जाएगा भगवान पाप दे दे हां कोई बात नहीं तू मार मत देना तू उसको हार्म कर देगा हां ठीक है ठीक है कोई करने दे हार्म तो आपने उसके वर्स्ट के

12:18 सिनेरियो के साथ अग्री कर लिया आपने करा कुछ नहीं आपने कहा जो होगा ना आई एम ओके विद मैं ओके हूं, होने दे। आप जब उसके साथ एग्री कर लेते हो, तो आपका जो ब्रेन है, वह आपके ऊपर से यानी कि ओसीडी ब्रेन जो है ना वो आपके ऊपर से ग्रिप लूज़ कर देता है। अब वो क्या बोलेगा? क्योंकि जो वो धमकी दे रहा है वह कभी होने वाली तो है नहीं। दुनिया में करोड़ों ओसीडी वॉरियर्स हैं जिनका सबसे बड़ा मजाक ही यही है दुनिया का कि ओसीडी के गलत थॉट्स और वर्स्ट फियर्स कभी ट्रू होते ही नहीं है। दैट्स द बिगेस्ट थिंग इन द वर्ल्ड जो आपको समझनी होगी। और यह एज अ साइकोलॉजिस्ट भी बता रहा हूं जो कि ओसीडी में स्पेशलाइज्ड है और एज एन एक्स ओसीडी वॉरियर भी बता रहा हूं कि वो कभी भी जिंदगी में नहीं होगा। वो आपके ऊपर है। आप कितना सालों तक ऐसे बैठे रहते हो। बहुत तड़पाता है लेकिन इसमें ना वही है हाथी और कील वाली बात। हाथी को कील से

13:05 बांध दो। उसको लग रहा है मैं बंधा हुआ हूं। अरे हाथी हो आप। एक झटका लगाओगे ना तो कील क्या पूरी दीवार ही उखड़ जाएगी। ओसीडी कुछ नहीं बिगाड़ सकता आपका। थोड़ा सा मन में हिम्मत मेरा भरोसा सहारा। साइंस साइकोलॉजी ले चलोगे ना दुनिया में कुछ भी इंपॉसिबल नहीं है। ठीक है? सो लेट्स गो फॉरवर्ड नाउ। अच्छा ये करने से ना अर्थ धीरे-धीरे बिल्कुल खत्म हो जाएगी आपकी। क्योंकि अर्थ का जो पैटर्न था ना वो तोड़ दिया आपने। आपने अर्थ का पैटर्न जो था अर्थ का पैटर्न क्या था? अर्ज आती आप पीछे हट जाते। आप कुछ रेजिस्ट करते आप कुछ। आपने वो पैटर्न ही तोड़ दिया। धीरे-धीरे अच्छा ब्रेन ना पूरा पैटर्न पे चलता है। अर्थ के बाद क्या होता है? अगर आपने वो हटा दिया तो अर्थ भी धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। आई होप यू आर गेटिंग इट। एंड पांचवी टेक्निक है डेली डिसकंफर्ट ट्रेनिंग। ठीक है? डीडीटी डेली डिसकंफर्ट ट्रेनिंग। इसमें क्या होता है? आप सिर्फ

13:50 अपनी उस ओसीडी अर्थ से एंजाइटटी वाली अर्थ से मत लड़ो। अपने ब्रेन को ही ट्रेन करो कि मैं डिसकंफर्ट को झेलने लायक हूं। कैसे? आपने आजकल Instagram वगैरह पे देखा होगा। बहुत सारे लोग कोल्ड डिप्स करते हैं कि बर्फ भर दी बकेट के अंदर उसमें बैठ गए। आइस बकेट चैलेंज करते हैं या यू नो कोल्ड शावर्स लेते हैं। ऐसे एक्सट्रीम बिहेवियर जो कि बहुत डेंजरस भी नहीं है। अगर आप इनको अपने ब्रेन को ट्रेनिंग करवाते हो तो आपका ब्रेन किसी भी तरीके के डिसकंफर्ट को झेलने के लिए तैयार हो जाएगा। आप एक आइस क्यूब खोल लो। दोनों हाथों में आइस क्यूब रख लो। बहुत पेन होगा। ठंड लगेगी, ठंड लगेगी, ठंड लगी? लेट इट मेल्ट। पकड़े रहो, पकड़े रहो, पकड़े रहो जब तक कर सकते हो। डिसकंफर्ट के लिए ट्रेन हो गया ब्रेन। रोज़ करवा रहा हूं। डिसकंफर्ट के लिए ट्रेन हो गया। लेफ्ट हैंड से ब्रश कर रहे हो। डिसकंफर्ट हो रहा है। ट्रेन हो रहा है ब्रेन। लेफ्ट हैंड से चार लाइनें लिख रहे हो जो आपका नॉन डोमिनेंट हैंड है। आपका ब्रेन ट्रेन हो रहा है। आप 1 कि.मी. भागने

14:37 या 2 कि.मी. भागने जा रहे हो। डिसकंफर्ट में झेल रहे हो ना। वहां भी तो थकता है इंसान। बहुत दिक्कत होती है। अगर आप 500 मीटर भी नहीं चलते तो 1 कि.मी. जाके भागो। तो इससे सिर्फ फिजिकल के लिए नहीं बोल रहा। आपका ब्रेन डिसकंफर्ट को झेलने के लिए तैयार हो जाता है। ठीक है? आप उठक-बैठक नहीं कर सकते। सीट अप्स नहीं कर सकते। आप 10 सीट अप्स करो। डिसकंफर्ट को झेलने की क्षमता अगर आप बाकी एरियाज में बढ़ाओगे तो वो ओसीडी के डिसकंफर्ट और अर्जिस को भी झेलने की क्षमता आपकी बढ़ जाएगी। तो ये सारी चीजें कुल मिलाकर आपको कंपल्शन से बाहर निकालती हैं। और लास्ट में बोनस टिप देना चाहूंगा मैं आपको कि जैसे मैंने आपको बीच में भी बताया था कि ओसीडी का दिया हुआ वर्स्ट फियर कभी ट्रू नहीं होगा। मैं क्या करता था जब मैं ओसीडी से बाहर निकल गया तो अगले मतलब निकलने के एकद महीने बाद तक मैं खुद से ही ओसीडी को बोलता था। हां भाई चिंटू बुरा नहीं करेगा आज कर दे यार। और मैं उसके साथ मजेदार मजे

15:24 लेने लगा। ठीक है? इसको मजे लेना कहते हैं लेग पुलिंग। सरकास्टिकली। हां भाई चिंटू क्या हुआ? आज नहीं बोलेगा कि हाथ धो ले नहीं तो मर जाएगा बीमार हो जाएगा। आज नहीं बोलेगा कि चेहरे पे हाथ मत लगा नहीं तो तेरे चेहरे पे बहुत सारे कीटाणु आ जाएंगे। आज ये सब नहीं बोलेगा। चल ठीक है यार कर दियो अगर करना हो मन हो तो कर देना। खुद से उस चिंटू को छेड़ना शुरू करो और तब भी जिंदगी जीने की ज़िद पकड़ लो। इफ यू डू दैट यह सब कुछ मिलाजुलाकर साइंटिफिक वे में अगर आप वर्क करोगे ना ओसीडी को बीट करना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। बस आपको स्टेप बाय स्टेप प्रोटोकॉल आना चाहिए। वो आ गया तो ओसीडी आपके सामने गायब कुछ भी नहीं खड़ा भी नहीं हो सकता क्योंकि वो सिर्फ एक इल्लुजन की प्रॉब्लम है यानी कि एक इमेजिनेशन की प्रॉब्लम है। दर्द आपको रियलिटी में देता है। जिंदगी बर्बाद तो बहुत करता है। करियर रिश्ते सब खराब हो

16:10 जाता है। लेकिन है काल्पनिक इस बात की गारंटी है दुनिया के अंदर। लास्ट में सत्य तो यह है कि ओसीडी तब नहीं खत्म होता। हरि चीज तब नहीं खत्म होती जब आप उसको फाइट करते हो। फाइट नहीं करना। उसको ओबे करना छोड़ देना कि भाई मैं तो तेरी बात नहीं मान रहा। ना फाइट करूंगा ना घुटने टेकूंगा जो करना है कर ले एंड दैट्स द लास्ट डे ऑफ़ ओसीडी अगर आप भी चाहते हो आपके सवालों का आंसर मिले अगर आप भी चाहते हो कि आप मेरे साथ थेरेपी ट्रीटमेंट लो तो दैट इज योर कॉल यू नो वेयर टू कनेक्ट टू मी मिलता हूं अगली बार ध्यान रखना योर फीडबैक रियली मैटर्स टू मी वीडियो यहां तक देखी है ना तो प्लीज नीचे कमेंट सेक्शन में मेरे को फीडबैक देना कि कैसा लग रहा है चैनल का कंटेंट कोई नया कंटेंट चाहते हो तो वो भी बताना ये वीडियो भी कई सारी रिक्वेस्ट के बाद मैं आप लोगों के लिए बना रहा हूं और आपके कमेंट्स का रिप्लाई मैं शॉर्ट वीडियोस के द्वारा करता ही रहता हूं। तो

16:56 नोटिफिकेशन बेल भी दबा के रखना। बहुत जरूरी है यह चैनल आपके लिए। मैं दिल से कह रहा हूं इफ यू रियली वांट टू गेट ओवर योर ओसीडी एंड नॉट जस्ट ओसीडी एंजायटी, डिप्रेशन, रिलेशनशिप, योर माइंड विल बिकम योर ओन लिविंग हेवन। इफ यू लर्न द साइकोलॉजी। मिलता हूं। टेक केयर एंड कीप बीटिंग योर फियर्स लाइक अ प्रो।

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