0:00 इंडिया में सबसे बड़ी लग्जरी क्या है? ना कोई साउथ बॉम्बे का अपार्टमेंट, ना कोई जर्मन कार, ना बिज़नेस क्लास की सीट, ना ही कोई ब्लैक क्रेडिट कार्ड। इंडिया में सबसे बड़ी लग्जरी है सुकून। पीस ऑफ़ माइंड। 0.1% इंडियंस को कभी किसी लाइन में नहीं लगना पड़ता। ट्रैफिक में फंसकर यह कैलकुलेट नहीं करना पड़ता कि टाइम पर पहुंचेंगे या नहीं। किसी ऑटो वाले से झिगझिग नहीं करनी पड़ती, ना ही गवर्नमेंट ऑफिस में फाइल मूव हो। इसके लिए ना वेट करना पड़ता है ना किसी को रिश्वत देनी पड़ती। इस देश के सबसे अमीर लोग द 0.1% उन्होंने सिर्फ आपसे ज्यादा पैसे नहीं कमाए। वो उस इंडिया से बाहर निकल चुके हैं जो आप और मैं हर रोज एक्सपीरियंस करते हैं। और आज मैं आपको वही दो देश दिखाने वाला हूं। इन दोनों का दिन कैसे बीतता है यह देखकर आप समझ जाओगे कि
0:45 इनमें और हम में क्या फर्क है। चलिए शुरू करते हैं। लेट्स टॉक अबाउट द मॉर्निंग। 6:30 am अंधेरी ईस्ट। रोहित उठता है सिर्फ 5 घंटे की नींद के बाद। रात को वो 1:30 बजे तक काम कर रहा था। जमीन पर जैसे ही वो पैर रखता है, उसके डिसीजन शुरू हो जाते हैं। ब्रेकफास्ट क्या बनेगा? क्या पहनना [संगीत] है? गाड़ी में फ्यूल है या नहीं? रात को बॉस ने ईमेल भी भेजा था। उसको क्या रिप्लाई करना है? उसके दिमाग में वो भी चल रहा है। लॉट ऑफ थिंग्स। वो फोन खोल के चेक करता है कि ईएमआई ऑटो डेबिट हुआ है या नहीं। वो तो गया है। लेकिन अब महीने भर के लिए अकाउंटाइट है। स:15 तक ही इज इन हिस कार। ऑफिस के लिए निकल चुका है। ऑफिस तक पूरा 1 घंटा लगेगा। वो भी ट्रैफिक में बीतेगा। 9:20 तक ही इज एट [संगीत] हिज डेस्क। दिन उसने अभी तक शुरू भी नहीं किया है। एंड ही इज ऑलरेडी एट हाफ कैपेसिटी।
1:30 दूसरी तरफ कबीर जो ऑल्ट माउंट रोड पे रहता है। इंडिया का बिलनेस रोड। कबीर ने पूरी [संगीत] 7 घंटे की नींद ली। वो उठा उसने वर्कआउट किया। उसने ब्रेकफास्ट किया जो उसके लिए ऑलरेडी बन चुका था। कबीर ने 15-20 मिनट अपनी वाइफ के साथ स्पेंड किए एंड दे डिस्कस्ड देयर वीकेंड प्ल्स। 8:30 बजे उसने अपने दिन का पहला डिसीजन लिया। [संगीत] अपने सीए को एक कॉल किया। टैक्स रिस्ट्रक्चरिंग डिस्कस की जिसके थ्रू उसके साल में ₹1 लाख बचने वाले थे। [संगीत] 15 मिनट का फोन कॉल एंड ही हैज़ ऑलरेडी सेव्ड ₹12 लाख। 9:20 तक वो ऑफिस में है। [संगीत] कैलेंडर पर सिर्फ तीन मीटिंग्स। बस यही उसका पूरा दिन है। सेम [संगीत] तीन घंटे सुबह के। एक ने अपनी सुबह को सिर्फ सर्वाइव किया। 40 माइक्रो डिसीजंस लिए। फुल फ्रिक्शन, जीरो फॉरवर्ड मूवमेंट। दूसरे [संगीत] ने उन 3 घंटों में अपना दिन
2:17 जीतने की तैयारी की। बाई द वे, कबीर की सुबह को प्रोटेक्ट करने वाली यह मशीनरी कोई बिलियनर फैंटसी नहीं है। एक कुक, एक ड्राइवर, एक मेड, एक नैनी अगर सब मिला भी लो, इनका महीने का खर्च रोहित की होम लोन के ईएमआई से कम ही आएगा। रोहित इसका एक वर्जन एक्चुअली अफोर्ड कर सकता है। वो एड्रेस नहीं, वो स्केल नहीं लेकिन इन प्रिंसिपल, ही कैन डेफिनेटली अफोर्ड दिस, राइट? आई डोंट नो इफ यू हैव हर्ड दिस। दे से, कुछ भी खरीदने से पहले अपना टाइम वापस खरीदो। बाय बैक योर टाइम। [संगीत] लेट्स सी दोनों का बाकी का दिन कैसे जाता है। चलिए दोनों के ऑफिस के अंदर चलते हैं। रोहित एक वेल फंडेड फinटेक कंपनी में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर है। सीटीसी इज अराउंड 32 एलपीए। सुनने में बहुत इंप्रेसिव लग सकता है जब तक आप यह ना देखें कि पीएफ डिडक्शंस टैक्स प्रोफेशनल
3:04 टैक्स कटने के बाद उसके अकाउंट में कितना आता है। रफ्ली अराउंड 1.95 लै पर मंथ। रोहित के हाथ में पैसा आने से पहले ही गवर्नमेंट ने अपना कट ले लिया। आज के दिन में उसकी टोटल सात मीटिंग्स हैं। एक स्टैंड अप, एक क्रॉस फंक्शनल सिंक, एक रोड मैप रिव्यु अपने मैनेजर के साथ वन ऑन वन एंड एक क्विक अलाइनमेंट कॉल जो जनरली घंटा भर तो चल ही जाता है। इन मीटिंग्स के बीच में वो एक्चुअली अपना काम करने की कोशिश भी कर रहा है। एंड ही इज़ एक्चुअली गेटिंग पेड टू डू दैट वर्क। राइट? नॉट टू डू मीटिंग्स। रोहित 7:30 बजे शाम को ऑफिस से घर के लिए निकलता है। बाय द वे रोहित के इन 32 लैक्स के बारे में सच्चाई यह है कि इस पर एक [संगीत] सीलिंग है। अगर उसका प्रमोशन भी हो जाए अगर वो किसी बड़ी कंपनी में जंप भी मार ले यहां तक कि इवन इफ ही रीचेस 60 और 80 एलपीए इट विल स्टिल बी ह
3:52 सैलरी। इस पर हाईएस्ट इनकम टैक्स लगेगा। इस इक्वेशन का ऐसा वर्जन कोई है ही नहीं जहां रोहित मेहनत करके उन 0.1% लोगों में शामिल हो जाए। कबीर की तरफ आते हैं। कबीर अपनी फैमिली के मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस का मैनेजिंग डायरेक्टर है। कंपनी से उसकी पर्सनल सैलरी है अराउंड 18 लै पर ईयर। ऑन पेपर वो रोहित से ऑलमोस्ट आधा कमाता है। लेकिन वो सैलरी एक फिक्शन है। एक डेलीबेट लीगल सीए आर्किटेक्टेड फिक्शन। उसकी एक्चुअल लाइफ उसकी कंपनी के थ्रू रन होती है। उसकी गाड़ी एक कंपनी लीस पर है। फ्यूल उसका बिजनेस एक्सपेंस है। उसका फोन, लैपटॉप, किसी भी ऐसी मीटिंग का बिल जिसे थोड़ा सा भी बिजनेस कांटेक्ट बोला जा सके सब एक्सपेंस्ड। उसके घर का मेंटेनेंस का एक बड़ा हिस्सा राइट ऑफ हो जाता है
4:37 क्योंकि एक फ्लोर कंपनी के नाम पर रजिस्टर्ड है। जब वह फ्लाई करता है तो वह एक बिजनेस ट्रिप होती है। किसी होटल में रुकता है तो वह बिजनेस स्टे होता है। उसके लाइफस्टाइल का खर्चा महीने के 5 से 6 लाख [संगीत] है और उसमें से ऑलमोस्ट एक पैसा भी उस ₹1 लाख की सैलरी से नहीं आता। वहीं दूसरी तरफ एक्चुअल पैसा बिल्कुल अलग चैनल्स के थ्रू फ्लो होता है। फैमिली होल्डिंग कंपनी से आने वाले डिविडेंड्स जो टैक्स एफिशिएंसी के लिए स्ट्रक्चरर्ड है। फैमिली की कमर्शियल प्रॉपर्टीज से आने वाली रेंटल इनकम जो इंडिविजुअल्स के अकाउंट में नहीं एंटटीज में फ्लो करती है। नाशिक के पास फैमिली फार्म से आने वाली एग्रीकल्चरल इनकम कंप्लीटली टैक्स फ्री। रोहित का अपने 32 लैक्स पर इफेक्टिव टैक्स रेट है रफ्ली अराउंड 25 टू 28% सब कुछ मिलाकर। कबीर की उसकी सारी एक्चुअल इनकम
5:23 पर इफेक्टिव टैक्स रेट होगा से अराउंड 10 टू 12% और वह भी लीगली विदाउट डूइंग एनीथिंग रोंग। एक ऐसे सीए के द्वारा साइन ऑफ जो इस फैमिली के साथ पिछले 22 साल से जुड़ा हुआ है और उस सीए का पूरा जॉब बस यही एश्योर करना है कि फैमिली [संगीत] ₹1 भी ज्यादा टैक्स पे ना करे। यह है असली इनकम गैप। और इसका इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि कौन कितनी मेहनत करता है। रोहित कबीर से ज्यादा हार्ड वर्क करता है। ऑब्जेक्टिवली ज्यादा घंटे, ज्यादा स्ट्रेस, ज्यादा डेली आउटपुट लेकिन रोहित की इनकम पर उसका नाम लिखा हुआ है। वो डायरेक्टली उसके बैंक अकाउंट को हिट करती है। वही सैलरी एट सोर्स टैक्स हो जाती है। कबीर की इनकम उन स्ट्रक्चर्स, एंटिटीज और कैटेगरीज में डिस्ट्रीब्यूटेड है जो स्पेशली डिज़ किए गए हैं बाय लॉ ताकि
6:11 उन्हें डिफरेंटली ट्रीट किया जा सके। सिस्टम टूटा हुआ नहीं है। वह बिल्कुल वैसे ही काम कर रहा है जिसके लिए उसको डिजाइन किया गया था। वो बस रोहित के लिए आपके लिए मेरे लिए नहीं डिजाइन किया गया है। लेट्स लुक एट द इवनिंग। रोहित का वर्क डे 7:30 बजे खत्म होता है। डिनर के टाइम पर भी वो अपना फोन चेक कर रहा है। अपनी वाइफ और बच्चों के साथ बस हाफ प्रेजेंट [संगीत] है। दिमाग अभी भी उस मीटिंग में अटका पड़ा है जहां पर उसके बॉस ने उसको क्रिटिसाइज किया था। वेल ही इज़ आल्सो वांटिंग टू लुक फॉर अ बेटर जॉब। ही आल्सो वांटिंग टू नेटवर्क ऑन Lindin वो वही सब कर रहा है जो इंटरनेट ने उसे बताया था। नेटवर्किंग जिन लोगों से की जानी चाहिए जहां पर की जानी चाहिए उन जगहों का उन लोगों का हमारे पास एक्सेस ही नहीं है। कबीर के बारे में बात करते हैं। कबीर की इवनिंग बिल्कुल अलग है।
6:56 आज रात कबीर एक प्रीमियम स्पोर्ट्स और सोशल क्लब में गया है। वो बहुत पहले से मेंबर है क्योंकि 14 साल की उम्र में उसके फादर ने उसका नाम वेट लिस्ट पर डाल दिया था। क्लब की जो एनुअल फी है वह बहुत ज्यादा है। वेट [संगीत] लिस्ट ऑलमोस्ट 5 से आठ साल लंबी है और इनमें से उसके लिए कुछ भी मैटर नहीं करता। मैटर क्या करता है? क्लब के अंदर कौन बैठा है? [संगीत] वो फिलहाल तीन लोगों के साथ बैठकर ड्रिंक ले रहा है। एक बंदा एनबीएफसी चलाता [संगीत] है। दूसरा एक ऐसी फैमिली से आता है जो पोर्ट लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस कंट्रोल करती है। और तीसरा उसका दोस्त है जो उसके साथ बोर्डिंग स्कूल में था। एंड उस दोस्त का ब्रदर इन लॉ लकीली एक सिंग कैबिनेट मिनिस्टर के काफी क्लोज है। ये कोई मीटिंग नहीं है। दिस इज यू नो जस्ट अ कैच अप एंड दिस डजंट हैव एनी एजेंडा। कोई किसी को कोई
7:41 पिच नहीं कर रहा है। वो बस कल के क्रिकेट मैच के बारे में बात कर रहे हैं। दे आर टॉकिंग अबाउट सम हॉलिडे इन श्रीलंका दे आर प्लानिंग टू टेक। नाउ ड्यूरिंग द कन्वर्सेशन वो एनबीएफसी वाला जो बंदा है वो एक डिस्रेस्ड एसेट का जिक्र करता है। एक मिड साइज्ड ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर जो करंटली ओवर लेवरेज है और अपना एक डिवीजन सेल करने को देख रहा है। कबीर के यह सुनकर कान खड़े हो जाते हैं। यह उसके खुद के बिजनेस से थोड़ा एडजसेंट है। बस वो दो-तीन सवाल पूछता है। एनबीएफसी [संगीत] वाला कहता है कि वो डिटेल भेज देगा। कल सुबह तक कबीर का सीए और लॉयर उन नंबर्स को रिव्यू कर रहे होंगे। अगले हफ्ते तक यह कन्वर्सेशन आगे चला गया होगा और अगले महीने तक शायद एक डील भी हो जाए। नेटवर्किंग ऐसे काम करता है। Lindin के थ्रू नहीं, कोल्ड ईमेल्स [संगीत] के थ्रू
8:28 नहीं, पुटिंग योरसेल्फ आउटडेयर वाले ज्ञान से यह चीज नहीं हो सकती। वो डील कभी मार्केट में थी ही नहीं। [संगीत] वो एक इंसाइडर के मुंह से निकली और दूसरे इंसाइडर के कान तक पहुंची और जब तक बाकी दुनिया को इसके बारे में पता चलेगा अगर कभी पता चला तो तब तक यह डील क्लोज हो चुकी होगी और यह नेटवर्क सिर्फ डील फ्लो के लिए काम नहीं करता यह हर चीज के लिए काम करता है। कबीर की बेटी को किसी स्पेसिफिक स्कूल में एडमिशन चाहिए। तो वो एप्लीकेशन फॉर्म भर के भगवान भरोसे नहीं बैठा रहेगा। उसकी वाइफ स्कूल बोर्ड पर बैठे किसी को कॉल लगाती है। एक ऐसी लेडी [संगीत] जिसे वो अपनी ही फैमिली के दूसरे सोशल सर्कल से जानती है और एप्लीकेशन सबमिट होने से पहले ही [संगीत] एडमिशन की बात हो चुकी है। ह डॉटर हैज़ बीन इनवाइटेड टू द स्कूल। कबीर की फैक्ट्री की
9:14 एनवायरमेंटल क्लीयरेंस स्टेट लेवल पर अटकी हुई है। तो वह किसी कंसलटेंट को हायर करके 6 महीने का वेट नहीं करता है। वो अपने गवर्नमेंट रिलेशंस एडवाइजर को कॉल करता है। एक रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर जो उसकी कंपनी के बोर्ड पर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर बन के बैठा है। अब इस इंसान का काम क्या है? यह आपको एक्सप्लेन करने की तो जरूरत है नहीं। यू ऑलरेडी नो दिस। राइट? वो एक कॉल लगाता है। कोई धमकी नहीं, कोई जी हजूरी नहीं। सिर्फ दो लोग क्योंकि बीच में एक सिंपल कन्वर्सेशन होता है और फाइल अगले दिन मूव हो जाती है। देयर इज़ अनदर थिंग दैट कबीर इस वांटिंग टू टैकल। कबीर को चाहिए कि एक पुलिस मैटर आगे ना बढ़े। फैक्ट्री में एक वर्कर का झगड़ा [संगीत] हो गया है और लोकल पुलिस थाना थोड़ा शोर मचा रहा है। वो किसी लॉयर को कॉल नहीं लगाता। वह कॉल करता है शर्मा अंकल को जो एक 60 प्लस साल के इंसान हैं। कबीर के फादर के
10:00 टाइम से फैमिली के फिक्सर हैं। शर्मा अंकल का उस लोकल स्टेशन के साथ एक अच्छा रिलेशनशिप है जो डेकेड से मेंटेन किया जा रहा है। स्टेशन के वेलफेयर फंड में मंथली कंट्रीब्यूशन जाती हैं। दिवाली के [संगीत] गिफ्ट जाते हैं। एसएओ की बेटी की शादी में भी ऑफ कोर्स एक छोटा सा गिफ्ट किया था शर्मा जी की तरफ से। नथिंग ड्रामेटिक बस एक क्वाइट ऑनगोइंग [संगीत] ट्रांजैक्शनल रिलेशनशिप जहां दोनों साइड्स अपनी टर्म्स समझती है। शर्मा अंकल थाने जाते हैं चाय पीते हैं मैटर डिॉल्व हो जाता है। नो एफआईआर नो चोर शराबा कोई रिकॉर्ड नहीं। यह वह इंफ्रास्ट्रक्चर है जिसके बारे में रोहित को पता ही नहीं होगा कि यह ऐसा [संगीत] कुछ एक्सिस्ट करता है। रोहित सिस्टम से लड़ता है। कबीर के पास ऐसे लोग हैं जो उसके बिहाफ पर सिस्टम को चलाते हैं और वो लोग यह इतने लंबे टाइम से
10:46 कर रहे हैं कि अब उसमें कोई एफर्ट भी नहीं लगता। चलिए अब दोनों के लाइफ पार्टनर्स पर भी बात कर लेते हैं। कबीर के लेवल पर मैरिज सिर्फ दो लोगों के एक दूसरे को पसंद करने के बारे में नहीं होती। हां मतलब पसंद कर ले तो बहुत अच्छा है। लेकिन एक्चुअली यह एक स्ट्रेटेजिक [संगीत] मर्जर है। कभी-कभी जो वाइफ है नताशा एक ऐसे फैमिली से आती है जो वेस्टर्न इंडिया में हॉस्पिटल्स की एक चैन चलाती है। जब उनकी शादी हुई तो [संगीत] यह एक सिर्फ वेडिंग नहीं थी। यह दो फैमिलीज का मर्जर था। कबीर के मैन्युफैक्चरिंग बेस को नताशा की फैमिली के गुजरात वाले पॉलिटिकल कनेक्शंस का एक्सेस मिल गया। नताशा की फैमिली को कबीर के फैमिली के मुंबई फाइनेंसियल नेटवर्क्स का एक्सेस मिल [संगीत] गया। शादी का खर्चा आया सिर्फ ₹10 करोड़। लेकिन इस अलायंस की वर्थ पूरी लाइफ टाइम में उससे 100 गुना ज्यादा है और उस शादी में
11:31 आई हर [संगीत] फैमिली दूसरी फैमिली को इवैल्यूएट कर रही थी। किसी बुरी नियत से नहीं बल्कि आदत से क्योंकि इस लेवल पर हर रिलेशनशिप एक पोटेंशियल ट्रांजैक्शन [संगीत] होता है। हर डिनर एक ड्यू डलिजेंस होता है। हर दोस्ती एक स्ट्रेटेजिक पोजीशन होती है। ऑन द अदर हैंड रोहित भाई साहब ने लव मैरिज किया और वो जेनुइनली ब्यूटीफुल मैरिज में है। लेकिन उसकी लाइफ में किसी ने भी मैरिज को एक इकोनॉमिक आर्किटेक्चर की तरह फ्रेम नहीं किया। लेट्स सी हाउ देयर लेट नाइट गोज़। दोनों अपने-अपने घर पर हैं। चलिए मैं आपको बताता हूं कि आधी रात में कौन सी चीजें इन दोनों को सोने नहीं दे रही हैं। रोहित के जो सारे फिय्स हैं वो बस एक ही चीज के इर्द-गिर्द घूमते हैं। क्या होगा अगर कुछ गलत हो जाए? उसकी कंपनी ने पिछले क्वार्टर में ही एक राउंड के कट्स किए थे। उसकी टीम बच गई लेकिन अगला
12:17 राउंड शायद इतना काइंड ना हो। क्या होगा [संगीत] अगर पुणे में उसकी जो मदर है उनको अगर कोई मेडिकल इमरजेंसी फेस करना पड़े? एक लंबा हॉस्पिटलाइजेशन और उसकी सारी सेविंग्स हवा [संगीत] हो सकती है। क्या होगा अगर ईएमआई पेमेंट्स स्टक अप होने लगे? व्हाट इफ व्हाट इफ व्हाट इफ? रोहित के पास कोई सेफ्टी नेट नहीं है। उसके पास सिर्फ एक सैलरी है। ऑफ कोर्स थोड़ी बहुत सेविंग्स हैं। बट अगेन ही इज़ वरिड अबाउट दैट टू। अगर सैलरी रुकती है तो सब कुछ रुक जाता है। और अगर रोहित सच में फेल हो जाता है, [संगीत] अगर वह किसी भी लोन पर डिफॉल्ट कर जाता है, उसकी एक भी ईएमआई बाउंस हो जाती है, अगर कोई क्रेडिट कार्ड अनपेड रह जाता है, तो यह सिस्टम पूरी प्रसीजन के साथ उसका शिकार करेगा। सिविल स्कोर डिस्ट्रॉयड, बैंक नोटिसेस, कलेक्शन
13:04 एजेंट्स की कॉल्स, लीगल थ्रेट्स, उसकी फाइनेंसियल आइडेंटिटी, मॉडर्न इंडिया में इकलौती आइडेंटिटी जो सच में मैटर करती है, हमेशा के लिए मार्क हो जाएगी। वहां से रिकवर होने में सालों लग जाएंगे। रोहित के लेवल पर बैठे एक आदमी के लिए इस सिस्टम के पास जीरो फॉरगिवनेस है। अब देखते हैं कबीर को। टेंशन तो कबीर को भी आता है। लेकिन अलग चीजों के बारे में। रेगुलेटरी चेंजेस, फैमिली सक्सेशन के प्रॉब्लम्स। उसका छोटा भाई बिजनेस में बड़ा रोल मांग रहा है। अपनी रेपुटेशन मैनेजमेंट की भी उसे चिंता है। यह रियल कंसर्न्स है ऑफ कोर्स। लेकिन कबीर एक चीज की टेंशन कभी नहीं लेता। कॉन्सिक्वेंसेस अंजाम। अगर कबीर का बिजनेस डूबता है और इस स्केल का बिजनेस इंडिया में रिपीटेडली डूबे हैं पहले भी तो क्या होगा? बैंक एक मीटिंग बुलाएगी। कोई
13:49 कलेक्शन कॉल नहीं एक मीटिंग। दैट्स इट। वो कबीर के लॉयर्स और फाइनेंसियल एडवाइर्स की टीम के आमने-सामने टेबल पर बैठकर नेगोशिएट करेंगे। एक डेप्ट रिस्ट्रक्चरिंग होगी। एक ओटीएस [संगीत] वन टाइम सेटलमेंट होगा। जहां बैंक शायद हर रुपए के बदले 30 या 40 पैसे में मान जाएगा। बाकी का लॉस बैंक राइट ऑफ कर देता है। कबीर के पर्सनल एसेट्स, उसका घर, उसकी वाइफ का पोर्टफोलियो, उसके बच्चों की ट्रस्ट होल्डिंग्स किसी चीज को कोई हाथ नहीं लगाता। क्योंकि उन्हें डिजाइन ही अनटचेबल रहने के लिए किया गया है। उसके सीए ने बरसों पहले यह स्ट्रक्चर सेट कर दिया था। फैमिली ऑफिस ने यह एनश्योर किया कि पर्सनल और बिजनेस लीगली बिल्कुल अलग दुनिया बन जाए। बैंक लॉस ले लेता है। लेकिन बैंक वो लॉस अब्सॉर्ब कहां से करता है? हैव यू एवर
14:36 थॉट ऑफ इट? सेविंग्स अकाउंट पर इंटरेस्ट रेट्स कम करके, मेरे और आप जैसे रिटेल कस्टमर्स पर चार्जेस बढ़ाकर, मिडिल क्लास के मार्जिनस को स्क्वीज़ करके, रोहित जैसे लोगों से जिनकी फिक्स्ड डिपॉजिट्स उन्हें 7% कमा कर देती है। जबकि इनफ्लेशन ही 6% पर है। यह है इंडिया का आर्किटेक्चर ऑफ रिस्क। बॉटम पर रिस्क पर्सनल होता है। आप फेल होते हैं, आप गिरते हैं। आपको कोई पकड़ने के लिए नहीं आएगा। और यह सिस्टम इंश्योर करता है कि आप उस हर हार को जिंदगी भर याद रखेंगे। टॉप पर रिस्क इंस्टीट्यूशनल हो जाती है। आप फेल होते हैं। इंस्टीट्यूशन उसे अब्सॉर्ब कर लेता है। आप वहां से निकल जाते हैं और फिर से शुरू करते हैं। कभी अपनी वाइफ के नाम पर, कभी नई एंटिटी के नाम पर और कभी-कभी तो उन्हीं बैंक्स के साथ जिन्होंने जस्ट आपका
15:23 पिछला लोन राइट ऑफ कर दिया। देखिए ऐसा नहीं है कि अमीर लोग फेल नहीं होते। वो होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि टॉप पर फेलियर एक इवेंट होता है। बॉटम पर फेलियर एक आइडेंटिटी बन जाती है। यह वीडियो देखकर डोंट गेट एंग्री ऑन समवन हु इज लाइक अ कबीर। राइट? कबीर ने ये सिस्टम डिजाइन नहीं किया है। वो इस सिस्टम में पैदा हुआ है और वो बस इसका यूज कर रहा है। बिल्कुल वैसे ही जैसे अगर आप उसकी पोजीशन में होते तो आप भी करते। बी ऑनेस्ट अबाउट दैट। यह वीडियो इसीलिए बनाया गया है ताकि आपको यह पर्सपेक्टिव मिले। मेरा नाम अनिरुद्ध है। एंड अगर आपका कोई भी फीडबैक है अच्छा बुरा जो भी है प्लीज शेयर दैट इन द कमेंट्स। थैंक यू फॉर वाचिंग।