Arrival of Aryans and Rigvedic Era | UPSC CSE/IAS 2020/21 Hindi | Chanchal Sharma

Brief Summary

In this video, the discussion revolves around the Aryans and the Rig Vedic period in ancient Indian history. Key points include:

  • Aryans’ arrival in India and their cultural influence.
  • The socio-political structure and lifestyle of the Aryans.
  • The significance of Rigveda in understanding Aryan culture.

Introduction to Aryans and Rig Vedic Period

The video welcomes students and introduces the topic, highlighting the focus on the Aryans and the Rig Vedic culture after discussing the Harappan civilization. The presenter emphasizes the importance of Vedic literature, especially the Rigveda, as a primary source of information about this period.

Aryan Arrival and Culture

The video explains the concept of Aryans, who are believed to have originated from the Eurasian region near the Alps and arrived in India around 1500 BCE. Aryans, meaning "noble" or "superior," brought substantial cultural and social changes, establishing a tribal and pastoral community centered around animal husbandry, rather than agriculture initially.

Rig Veda as a Key Source

Rigveda is described as the oldest Veda, providing significant insights into Aryan life, beliefs, and society. The text mentions how the term "Arya" is used extensively in the Rigveda and its relevance to understanding the societal structure of that era.

Social Structure and Aryan Society

The video details the societal organization of the Aryans, highlighting their tribal nature and pastoral lifestyle. It discusses their conflict with the indigenous populations upon their arrival in India and how local tribes called "Dasyus" were often at odds with the Aryans, leading to significant struggles for territory and dominance.

Aryan Political and Administrative Institutions

Aryan society is depicted as being organized into clans, with a chief referred to as "Rajya." The political structure was somewhat democratic, with assemblies (sabhas) that participated in the selection of leaders. The social fabric also intersected with their religious practices, which were closely tied to their agricultural and pastoral lifestyle.

Religious Beliefs and Practices

The discussion on religion highlights how Aryans worshipped deities associated with natural elements, such as Indra, Agni, and Varuna. Indra is presented as a significant figure in Vedic texts, symbolizing strength and authority, while various hymns were composed to appease these gods for prosperity and protection.

Development of a Complex Society

The video concludes by outlining the transformation of Aryan society as they adapted to local circumstances in India. The emergence of a more structured social hierarchy and the eventual establishment of local governance that included the participation of women in rituals and community decision-making is discussed, showcasing the complexity of their early civilization.

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Transcript

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0:00 ब्लुटूथ हुआ था को खोलें लुट झाला हेलो हेलो वेलकम टो ने कैट मींस लूट

0:48 स्क्रब यूपीएससी हिंदी कैसे हैं आप लोग टाइम यह फ्रंट चंचल कुमार शर्मा प्राचीन भारत के इतिहास की इस सीरीज में आप सभी का स्वागत है और अगला स्टेशन में हम लोग हड़प्पा सभ्यता हड़प्पा संस्कृति के बारे में बात कर रहे थे और आपके सेशन में हम बात करेंगे आर्यों के बारे में और रिग वैदिक काल के बारे में ठीक है जैसा कि आपको पता है कि उसके बाद आर्यों का आगमन हुआ हमारे यहां और आर्य-संस्कृति रिग वैदिक कालीन संस्कृति का उद्भव हुआ थक चुकी इस संस्कृति के बारे में इस काल के बारे में हमें वैदिक साहित्य से विशेषकर

1:34 ऋग्वेद के द्वारा जानकारी प्राप्त होती है इसलिए हम इसको रिग वैदिक काल वैदिक काल भी कहते हैं तो हम बात करेंगे कि आर्य ए तुम्हारे भारत आए तो किस प्रकार की संस्कृति यहां पर लेकर आए किस प्रकार का उनका पूरा सामाजिक ताना-बाना था कैसा उनका समाज था कैसे उनकी मान्यता थी कि किस प्रकार के राजनीतिक-प्रशासनिक संस्थाएं थी उनके पास तो हम पूरा कर पूरा आर्य और रिग वैदिक काल के बारे में डिस्कस करने वाले हैं चलिए स्टार्ट करते हैं कल आप में से कई सारे स्टूडेंट्स जिन्होंने अगर वह आर्ट एंड कल्चर वाला जो नितिन सिंघानिया सर की पुस्तक से हमने स्टार्ट किया था कल 3 घंटे का मैराथन से क्षमता जिसमें हम लोगों ने बात की थी वास्तुकला स्थापत्य कला के बारे

2:21 में उसमें हमने मंदिर निर्माण शैली आदि मतलब आपकी नागर शैली द्रविड़ शैली बेसर शैली इसके अलावा हमने बात की थी जो हमारे प्राचीन काल में स्तंभय ऋतु फल है गुफा है इनके बारे में हमने बात की थी ठीक है तो जितना भी गांधार कला मथुरा कला अमरावती कला तो जिन-जिन लोगों ने वह सेशन अटेंड किया हो तो अभी भी वहां पर अवेलेबल है YouTube पर आप देख सकते हो 3 घंटे का फैशन है और बहुत काम आएगा आपके क्योंकि आर्ट एंड कल्चर के प्रिंस में भी दस-पंद्रह-बीस बच्चे हो इस नंबर तक क्वेश्चन आते हैं जबकि अगर आप मेंस में देखेंगे तो मेल्स में भी 2540 नंबर तक का टेंशन जो है यहां से आप को कवर करवाएगा यह ठीक है तो हम लोग

3:09 आज का जो हमारा से शनि व होगा आ आ रहे हों और वैदिक काल के बारे में वैदिक काल के बारे में काफी हम लोग उत्तर वैदिक काल के बारे में बात करेंगे उससे पहले आप सभी जानते हैं कि हिंदी मीडियम के बहुत सारे स्टूडेंट है जो कि इस बात को लेकर परेशान है कि हिंदी माध्यम में यूपीएससी की तैयारी के लिए अच्छा कांटेक्ट मिलना मुश्किल होता है ठीक है सही गाइडेंस बहुत सारी चीजों को जो है वह फील करते हैं तो इसी चीज के लिए आप लोगों को हम ऐड मी के थ्रू वह बढ़िया कांटेक्ट वह पूरे की पूरी सहायता देने की कोशिश कर रहे हैं और आप जो कोई भी ठीक है अपनी तैयारी यूपीएससी की कंप्लीट प्रिपरेशन घर बैठे क्वालिटी एजूकेशन के साथ करना चाहता है तो वह अनअकैडमी जॉइंट कर सकता है उसमें मैं और

3:54 मेरे साथ जितने टॉप एडवोकेट डर से वह आपको आपके एग्जाम को आपके लक्ष्य को लेकर प्राप्त करने में आपकी सहायता करते हैं तो आप लोग चाहे तो हमें Redmi को ज्वाइन कर सकते हैं क्योंकि हमारा लक्ष्य यह हिंदी माध्यम से फर्स्ट रैंक लाने का तो इस मिशन में आप हमारे साथ आ सकते हैं एक साल का सब्सक्रिप्शन आप लोग लेंगे तो 40 का है और 2 साल का 6400 का इसमें भी अगर आप रेफरल कोड यूज करते हैं तो एक साल का सबसे 1039 रोका और 2 साल का 57600 रुपए में अवेलेबल होगा अब इसमें देखो इसमें आपको पूरा प्रीलिम्स में इंटरव्यू तक की तैयारी इसमें आपका ऑप्शनल जो आप लोगों का एक ऑप्शन होता यूपीएससी में वह इसमें पूरा लीजिए श्याम ऑप्शनल करंट अफेयर्स एसे

4:43 राइटिंग हिंदी इंग्लिश रिकॉर्डिंग पेपर जैसा कि आप YouTube पर देख पा रहे होंगे तो इतने समय से अगर आप Redmi से जुड़े हैं अभी भी आप जोड़ के जो यह देखना चाहते सेशंस तो आप पहले देखिए अच्छे से आप पहले सेटिस्फाई हुई है फिर आप उसको सब्सक्राइब कर लीजिए क्योंकि इस सब्सक्रिप्शन में आपको वह सब कुछ मिल जाएगा एक ही प्लेटफार्म पर की जो आप लोगों को एग्जाम के क्रैक करने में जरूरी इसमें यह माई का भी ऑप्शन होगा अगर आप एक साथ पर नहीं कर सकते तो मंथली इंस्टॉलमेंट में भी कर सकते हैं तो अगर आपका 2000 20 21 22 23 कोई सा भी अक्षय और विशेषकर के हिंदी मीडियम के स्टूडेंट्स के लिए यह बहुत बढ़िया अपॉर्चुनिटी है क्योंकि अब उन्हें भी इंग्लिश मीडियम के जो स्टूडेंट से उनके लेवल का कांटेक्ट मटीरियल गाइडेंस सब कुछ

5:30 अवेलेबल है तो यह लोग कर सकते हैं और इसमें आप सीधे लाइव रेफरल कोड यूज करेंगे तो उसके कुछ ऐसा बेनिफिट्स तैयारी के दौरान कई प्रकार की हमारी समस्याएं ठीक है जैसे कौन सी एनसीआरटी पढ़ना है कौन सी बुक पढ़ना है कोई कैसे नो पुराना है आंसर कैसे लिखना है प्रिंस की तैयारी कैसे करें मेंस कि कैसे करना है ठीक है ऑप्शनल कौन सा सेलेक्ट करें बहुत सारे क्वेश्चंस छोटे तैयारी के दौरान जिसमें हम एक्सपर्ट गाइडेंस की जरूरत होती है तो इस रैफरल कोर्ट को यूज करने के बाद आपके वह सारे क्वेश्चंस जिन्हें आप मेरे साथ सॉल्व कर सकते आपके वह सारे डाउट ठीक है आपको मैं वह सारे के सारे जितने भी समस्या है क्योंकि एक पर सुसाइड इन सबको अवेलेबल होगा तो इस रेमिडी को यूज करने से आपको मेरे साथ आंसर राइटिंग प्रैक्टिस से

6:16 लेकर नोट से लेकर सिलेक्शन तक गाइडेंस सब कुछ अवेलेबल ओं का यूज रेफरल कोड और एक टेक्निक सब्सक्रिप्शन भी अगर आप और बेहतर तरीके से किसी भी यहां से जुड़ना चाहते तो आइकोनिक्स सब्सक्रिप्शन ले सकते हैं ठीक है तो आप सभी लोगों को हम लोग बात कर रहे थे आर्यों के बारे में आर्यों का आगमन और रिग वैदिक काल क्योंकि मैंने अभी आपसे कहा कि ऋग्वेद ठीक है जो कि सबसे प्राचीनतम वेद है तो ऋग्वेद इस है इस समय का इस काल के जानकारी देने का हमारे पास एक महत्वपूर्ण स्त्रोत फिक्र इसीलिए हम लोग इसे रिग वैदिक काल भी कहते हैं आर्यों के बारे में आप सभी जानते कि आर्य कहां के मूल निवासी हैं तो वह कि रूप

7:01 से यह आल्प्स पर्वत जो है यूरोप में आज के आसपास के यह निवासी खासकर पूर्व से और यह लगभग 1520 अपूर्व के आसपास भारत आए ऐसा माना जाता है ठीक है और कई सारे साथ चीज के बारे में तो सबसे पहले तो हम देखेंगे इनका मूल निवास यह है कहा कि आर्य का मतलब क्या होता है आर्य आर्य का मतलब होता है कृष्ण आर्य का मतलब क्या होता है श्रेष्ठ तो यह हमारे यूरेशिया के मूल निवासी हैं आज के पूर्वी भाग में ठीक है इनका मूल निवास आज पर्वत के बारे में सुना होगा आपने यूरोप में जो है यह फोल्ड माउंटेंस मोड़दार पर्वत कि इसके पूर्वी क्षेत्र में जो यूरेशिया

7:47 कहलाता है वहां इनका मूल निवास माना जाता है हिंद-आर्य जो है यह मध्य एशिया से भारत की ओर आए और यह बात अनुवांशिक साक्ष्य के आधार पर कही जा सकती है तो यह तो क्या हो गया यह तो कहीं न कहीं अ अच्छा ठीक है कहीं न कहीं हमें यह बताता है कि एक कहा कि मूल निवासी व और कब यह आता है तो मैंने आपको बताया लगभग 1500 ईसा पूर्व में यह भारत आए ऐसा माना जाता है ठीक है तो 1520 पूर्व से कुछ पहले लगभग यह भारत आए और हम लोग देखते हैं कि हमारे यहां कई सारे टीके जो जानवरों के नाम है वृक्षों के नाम है जैसे कुत्ता घोड़ा और दूसरे अन्य पशुओं के साथ देवदारु मैं

8:35 प्लेन जैसे जो वृक्ष शहद इनके नाम हिंदू यूरोपीय भाषाओं भी समान रूप से तो जो हिंदू यूरोपीय भाषा है जिससे कि इस एरिया की अधिकांश भाषाओं का जन्म हुआ है तो यह जो शब्द है यह आपको लगभग उसमें भी वैसे के वैसे समान रूप से मिलते हैं तो इससे अंदाज़ा लगाते हैं कि इन लोगों का जो क्षेत्र है वह इस पूरे एरिया में विस्तृत होगा मतलब यूरेशिया से लेकर तो भारत तक ठीक है इसमें इरान को भी आप लोग काम कर सकते हैं अफगानिस्तान वगैरह कि यह का पूरा एरिया का यह लोग जो है नदियों और वनों से टीके नदियों और वनों से परिचित थे इनका मुख्यालय अब सबसे बड़ी बात क्या है सबसे बड़ी बात यह कि आर्यों का मुख्य व्यवसाय कृषि नहीं था

9:22 तू मेरी बात समझ नहीं आपको आर्यों का मुख्य व्यवसाय कृषि नहीं का इनका मुख्य व्यवसाय तथा पशु चारा और अगर आपको एक लाइन में कोई पूछे कि आर्य क्या है यही कि समाज की प्रकृति कैसी है कैसे चाहिए लोग तो हम क्या लिखेंगे यह एक जनजातीय जनजातीय कि पशु चारण के कबीलाई समाज था अ यह बात समझ में आई कि क्या थे आर्य लीजिए इसको नोट कर लीजिए आर्य सैद थे जन जातीय पशुचारण कबीलाई समाज

10:10 तो यह जनजाति यह स्वरूप तथा आदिवासियों की तरफ ठीक है जाती है स्वरूप तथा पशु चारे का मुख्य रूप से यह पशुओं पर ही निर्भर थे कि पशुओं को नए-नए चारा ग्रहों की खोज करना चारागाहों पर जाना ठीक है वहां पर पशुचारण करना यह इनका मेन काम मुख्य व्यवसाय था तो जनजातीय पशुचारण और कभी लाइक कबीलों में रहते थे बहुत सारे कबीले थे कि अलग-अलग कभी लोगों के बारे में आपने पढ़ा होगा तो आर्यों के बारे में हम एक लाइन में सारी बात क्लियर कर सकते हैं जनजातीय पशुचारण कबीलाई समाज प्लेयर हेलो हाय समझ में आ का जन्म जाती है पशु चारे कबीलाई समाज तो

10:58 पशुचारण मतलब पशुओं को चराने के लिए और मुख्य लड़ाई पशुओं को लेकर जानवरों को लेकर हुई थी ठीक है अपने जानवरों की सुरक्षा करना एक बहुत बड़ा टास्क तथा दूसरों से यहां पर जानवर चुरा चुरा के मवेशियों को छुड़ाकर ले जाया जाता तो इनका पशुओं पर बहुत कुछ निर्भर था थी पशुओं का बहुत कुछ इसमें रोल था भूमिका थी तो यह जनजाति पशुचारण कबीलाई समाज बन गए कोई बहुत सभी नहीं थे अब इसमें आगे अगर हम देखें कि जब यह पहले शुरुआत में जब आए थे तो यह नए-नए चारागाहों आदि की खोज में थे फिर धीरे-धीरे यह कृषि को मुख्य व्यवसाय बनाएं बाद में कृषि अच्छी खासी होने लगी धीरे-धीरे स्थाई रूप से बसने लगे अच्छा ठीक है तो यह तो इनकी प्रकृति हो गई अब देखो एक और चीज आपको समझना है कि आर्य

11:47 जब भारत आए तो जब इन का आगमन हुआ तो डेफिनेटली को यहां पर पहले से होगा मतलब आर्यों के पूर्व में जो लोग भारत में निवास कर रहे थे जिन्हें आम तौर पर दास और 10 क्यों कहा जाता है तो आदमियों का इन दासों और दस्युओं से संघर्ष हुआ प्रिया समझ में तो जब यह आए थे यह सब जब यह आए तो क्या हुआ इनका संघर्ष हुआ यहां रहने वाले स्थानीय प्रजातियों से जातियों से क्या हुआ इनका संघर्ष हुआ था कि के और बाद में टिकट बाद में क्या हुआ बाद में आप देखोगे कि उस संघर्ष में यह विजई हुए बाद में इनकी आपस में भी जड़े हुए मतलब पहले तो यह जो यहां पहले पुराने समय से जो लोग रहा करते थे स्थानीय

12:33 प्रजाति उससे लड़े और बाद में आपस में भी अ अच्छा ठीक है आपस में भी इनमें विवाह हुआ लड़ाइयां हुई तो आपसी संघर्ष भी आपको आर यू में दिखाई देगा और इसी चीज को हम लोग देखेंगे अभी तो यह लोग कैसे परिचित थे नदियों और वनों से हमने देखा इससे बड़ी बात यह कि इनके जीवन में घोड़े का अश्व कि अश्व का जो है सबसे अधिक महत्वपूर्ण था जब हम सिंधु घाटी की बात करते हैं तो मैंने आपको बताया था कि सिंधु घाटी सभ्यता अश्व केंद्रित नहीं थी मतलब सिंधु घाटी सभ्यता में हमें घोड़े नहीं दिखाई देते लेकिन हां आर्यों का पूरा जीवन इस पर केंद्रित था घोड़ों का बहुत महत्व तक पहली बात तो यह कि घोड़े बहुत ज्यादा

13:19 इंपोर्टेंट है निकली और इन घोड़ों के सारे इतने लंबी-लंबी यात्राएं इन्होंने कि पहाड़ चढ़ना भी उनके लिए संभव हुआ था तो घोड़ों पर ठीक है इसका बहुत महत्व था और पहली बार पालतू घोड़ा यह सब पूर्वक छठी सहस्राब्दी में काला सागर तथा यूराल पर्वत के क्षेत्र में ठीक है प्रयोग में लाए गए थे यह इफेक्टिव जीव वैज्ञानिकों ने मद्धेशिया के छोर से दूसरे छोर तक फैले तेल पी लोगों में प्रकार के अनुवांशिक लक्षणों की पहचान की जो कि एंड सेवेंटी कर जाते हैं यह लक्षण 8000 ईसा पूर्व के आसपास प्रकट हुए लेकिन भाषा भी तथा पूरा विद इसे 2000 इच्छापूर्वक के पास रखते हैं तो यह कहीं न कहीं इस बात को साबित करने की कोशिश की जा रही है कि हमारे यहां पर आर्यों का जो आगमन हुआ था

14:06 आनुवांशिक लक्षणों के आधार पर हम इस बात को सिद्ध करने की कोशिश करते हैं यह मैंने किया है अनुवांशिक संकेत मद्धेशिया के 40% लोगों में मिलते देखिए अभी आपसे कहा कि यह यूरेशिया से होते हुए के मध्य से होते हुए भारत आए थे तो वहीं पूरे के पूरे जो संकेत है वह लगभग 40% मध्य एशिया के लोगों ने हिंदी भाषी लोगों में 35 प्रतीत हमारे यहां तो हिंदी बोलने वाले लोगे उन्हें 35 प्रतिशत में यही संकेत आपको मिल रहे और द्वारा द्रविड़ भाषा में मात्र दस प्रतिशत तो निचले भारत में दक्षिण भारत में अगर हम देखें तो बहुत कब दक्षिण भारत में आ रहे ज्यादा नहीं गए मुख्य रूप से उत्तर भारत तक यह सीमित रह ठीक है क्योंकि दक्षिण

14:53 भारत में आर्यों के बारे में ज्यादा अनुवांशिक अंकित नहीं मिलना जेनेटिक जिसको आप कहते हैं वह हमें जेनेटिकल साइन है वह में सिर्फ और सिर्फ उत्तर भारत में ज्यादा मिल रहा है मध्य एशिया उत्तर भारत हिंदी भाषी पट्टी यहां पर इससे कहा जा सकता है समझा जा सकता है कि आर्यों का मूल स्थान और मूल निवास हमारा उत्तर भारत था ठीक है दक्षिण भारत इससे ज्यादा जुड़ा हुआ नहीं था भारत में अगर आर्यों की जानकारी तो ऋग्वेद से मिलती आपको पता है कि ऋग्वेद सबसे प्राचीन वेद लें और इसी से हमें पता चलता है आर्यों के बारे में बहुत कुछ जिसे उनकी संस्कृति टिके उनके राजनीतिक व्यवस्था में उनके सोच भी कब्ज और उनके कर्मकांड उनके दैनिक प्रकृति की जुड़े कार्यों के बारे

15:39 में हम लोग ऋग्वेद पर अच्छा ठीक है ऋग्वेद पर हम लोग क्या करते हैं उसके लिए निर्भय है हैं तो ऋग्वेद सबसे प्राचीन वृद्धि जो मैं आर्यों के बारे में जानकारी देता है इसीलिए इस काल को रिग वैदिक काल भी कहते हैं अब अगर ऋग्वेद में हम देखें तो आप यह शब्द इसका उल्लेख आपको 36 बार मिलेगा 36,000 मिलने का मतलब है कि इतनी बार उसमें आर्य शब्द आया है इसमें 10 मंडल है आपको पता है कि ऋग्वेद के बारे में कुछ चीजें आपको पता होगी कि हमारे यहां सबसे प्राचीन चार वेद है चारों वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन माना जाता है उसके अलावा तीन और वैध है सामवेद अथर्ववेद और या निर्मित तो यह जो चारों वेद है उनमें

16:25 ऋग्वेद सबसे प्राचीन है और इसमें आर्य शब्द का उल्लेख हुआ है और 36 बार हुआ है मतलब कहीं न कहीं बार-बार बार-बार आर्य शब्द पाया है इस विवाद के बारे में कहा जाता है कि इसका दूसरे से लेकर सातवें तक का जो मंडल है टोटल आपको पता है कि ऋग्वेद में 10 मंडल है ठीक है ऋग्वेद में 10 मन मैं और इस 10 मंडलों में क्रिकेटर्स मंडलों में दूर से लेकर सात तक दो से लेकर सात तक के जो मंडल है वह प्राचीन माने गए हैं और पहला और 10वां सबसे बाद में जोड़ा गया है ऐसा माना जाता है तो इसके बारे में आप लोग ऋग्वेद में देख सकते हैं ऋग्वेद आपको बताएगा कि दो से सात तक जो है वह

17:11 प्राचीन है और एक और 10 जो है वह बाद में जोड़ा गया ऐसा माना जाता है तो कुल 10 मंडल यह भाग हो गए मंडल मतलब भाग ठीक है इसमें दो से सातवां प्राचीन है और पहला 10वां सबसे बाद में जोड़ा गया है और इसकी सबसे ज्यादा बातें जो ना इसकी बहुत सारी बातें अव्यवस्था ग्रंथ से मुझे अवस्था आपको बता दें कि रानी भाषा का प्राचीनतम ग्रंथ एंड विस्ता तो अवेस्ता ग्रंथ से काफी कुछ इसमें मिलता-जुलता है काफी सारी चीजें इसमें मिल जाएंगे आपको एक दूसरे से मिलन तो हिंदू यूरोपीय भाषा जो भाषा आर्य बोलते थे तो आर्यों की भाषा जरिए हमें ऐसे साक्ष्य मिले हैं कि आर्यों की भाषा इंद्र यूरोपीय भाषा है

17:57 अच्छा ठीक है कि कुछ सॉरी सबसे जो है हम लोग पहली बात यह कि चीन की भाषा हिंदी यूरोपीय भाषा है और इसका सबसे पुराना नमूना इराक में 22 तो ईसा पूर्व के एक अभिलेख मिलता है मतलब यही हुआ था जो आ रहे बोलते थे यह आपको लगभग 220 ईसा पूर्व में इराक में भी मिलेगी तो वह तो साबित हो चुका है कि आर्यों का जो पूरा के पूरा एरिया है वह बहुत विस्तृत था मद्धेशिया से लेकर इरान इराक भारत यह सब कुछ आर्यों की जद में थे आर्यों की पहुंच में थे ठीक है तो यह सबसे पुराना नमूना है जो वहां से मिलाएं बाद में तुर्की से भी उन्नीसवें और सफरी सदी ईसापूर्व के कुछ अभिलेख हिंदू यूरोपीय भाषा में मिले हैं

18:44 इस काल का तिथि निर्धारण जितना विवादास्पद रहा है उतना ही इस काल के लोगों के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करना तो हमें एक तो सबसे पहले यह भी पता है कि यह जो काल है यह जो समय है आर्यों का इस के बारे में एकदम सटीक निर्धारण करना कि कब रहा है यह बहुत मुश्किल है क्योंकि कोई बहुत ज्यादा हमारे पास संसाधन उपलब्ध नहीं है कि मेरे पास समय ही जानने के लिए आर्यों के बारे में हमारे पास बहुत ज्यादा ऑप्शन नहीं है तो हमें इसका पूरा समय इसका पूरा काल निर्धारण करने में बहुत मुश्किल रह जाती है इसलिए विवादास्पद लेख और इसके भी ज्यादा इससे भी ज्यादा इस काल की सटीक जानकारी प्राप्त करना भी मुश्किल ऋग्वेद

19:31 संहिता की रचना इस काल में होती अतः इस साल की जानकारी का एक मात्र साहित्य स्त्रोत ऋग्वेद लें और ऋग्वेद के अलावा टिकट ऋग्वेद के अलावा और कोई हमें ऐसा कोई साहित्यिक स्त्रोत नहीं दिखाई दे रहा है जो कि हमें बताता है इस काल के बारे में या आर्यों के बारे में रिजेक्ट क्लियर तो ऋग्वेद एक ही ऑप्शन बचता है इसलिए रिग वैदिक काल हम इसको कहते थे अगर आप सिंधु सभ्यता से देखो इसको तुलना करें तो सिंधु सभ्यता के विपरीत यह जो काल था यह जो समय था और यह व्यवस्था थी यह ग्रामीण थी अगर आपको पता हो तो मैंने बताया था कि सिंधु सभ्यता काफी उन्नत व्यवस्था थी और इसको नगरी माना जाता मतलब यहां लोग नगरों

20:17 में रहने लगे थे ठीक है नगर नियोजन दिखाई देता है तो सिंधु सभ्यता के बारे में आपको पता है कि नगरीय सभ्यता थी व्यापार केंद्रित थी सिंधु सभ्यता में व्यापार बहुत उन्नत अवस्था में था लेकिन हमारे रिग वैदिक काल में आप देखोगे कि यह ग्रामीण अर्थ व्यवस्था थी और इसीलिए मैंने आपसे कहा कि यह एक कबीलाई समाज था ठीक है तो यह ग्रामीण आर्यों का आरंभिक जीवन पशुचारण पर आधारित ताकि पशुओं को चराने पर और पशुओं से प्राप्त होने वाली चीजों पर निर्भर तहत कृषि उनके लिए गौड़ कार्य था खेती-किसानी में ज्यादा उनका कोई रूचि नहीं थी मीणा और ज्यादा उनको कुछ उसमें फायदा भी निशु कृषि

21:02 में कोई ज्यादा काम दिमाग लगाया नहीं उन्होंने पशुचारण प्रमुख अर्थव्यवस्था का साधन बन गया अब आइए ऋग्वेद चुकी ही बता सारी की सारी चीजें हम कुछ बारे में तो ऋग्वेद में कहा गया कि भरत वंश के राजा दिवोदास ने शंभर को युद्ध में हराया ठीक है अब मैंने आपको बताया कि जब यहां आर्य आए तो आर्यों के आने के बाद यहां रहने वाले पहले कोई तो रही रहा होगा तो जो प्राचीन समय में उनसे पहले आर्यों के पूर्व जो यहां पर लोग रहा करते थे जो जाति जनजाति या रहती थी उनसे इन की भिड़ंत हुई थी कि उनसे इनका युद्ध हुआ था स्वाभाविक सी बातें तो भरत वंश के राजा दिवोदास ने ठीक है यहां पर युद्ध में हराया ऋग्वेद में जो दस्यु गए दश लुट संभवता इस देश के

21:50 मूलनिवासी पर यहां पर कौन रहता था यह माना जाता है कि यहां पर 10 क्यों रहा करते थे और यह जो दस्यु है दासों और दस्युओं रहते थे तो यह जो 10 यही सामान्यतः शायद बाद में शूद्र बने ऐसा भी अनुमान लगाया जाता है क्योंकि आर्य अपने आपको श्रेष्ठ मानते अरे का मतलब होता है है और तू यहां रह रहा था वह की नजर में श्रेष्ठ नहीं तो ऐसा माना जाता है कि यहां जो लोग रहते बोलो दस्यु के नाम से जाने जाते थे उन्हें दस्यु कहां गया यही दस्यु बाद में सूत्र के रूप में देखे दिखाई देते हैं ठीक है इन्हें निम्न कोटि का चिकन निम्न वर्ग का माना गया और अपने आप को उन्होंने श्रेष्ठिवर्ग का पता होता कई बार कि हम लोग ब्लडी प्योरिटी बोलते हैं इसको ठीक है शुद्ध रक्त के सिद्धांत से कहीं न

22:39 कहीं प्रभावित तो अपने नस्लों को श्रेष्ठ मानते थे तो यह लोग जहां रहते थे वह दस्यु गए और यही इस देश के संभवता मूल निवासी थे तो फिर आ चुके आर्य के जिस राजा ने को पराजित किया वह त्रिदश क्यों कहना है फिक्स सदस्यों कहलाया और राजा दासों के प्रति कोमल और दस्युओं का परम शत्रु तो दांत के प्रति इतना ज्यादा कोई मन में उनके वह था नहीं बैर भाव या शत्रुता लेकिन दस्युओं के प्रति उनके मन में बहुत ज्यादा कि हम कहें कि विद्वेष या घृणा के भाव थे तो दस्युओं को अपना शत्रु माना जो यहां पर पहले से रह थे लेकिन दायित्वों के प्रति दायित्वों के प्रति कोई बहुत ज्यादा उनके मन में ऐसा कुछ कटुता नहीं थी ऋग्वेद में

23:25 दस्यु हत्या शब्द का उल्लेख हमें बार-बार मिलता है यह बात सही है कि अगर आप ऋग्वेद को देखेंगे तो आपको दांपत्य नहीं मिलेगा ऋग्वेद में दास हत्या के बारे में नहीं लिखा गया है तो इससे यही सिद्ध होता है कि दास को लेकर थोड़ा सॉफ्ट थे लेकिन दस्युओं को लेकर ठीक है बहुत ज्यादा कटुता थी तो दस्यु हत्या का बार-बार उल्लेख आया दस्युओं को मारने के बारे में बार-बार ऋग्वेद में बात की गई है चर्चा की गई है बार-बार उल्लेख हुआ है दस्यु लोग शायद लिंग पूजा कठिन और दूध के लिए पशु पालन नहीं किया करते थे यहां के मूल निवासी थे इसके बाद में जनजाति संघर्ष हुआ मैंने आपको बताया कि जब आर्य आए तो पहले तो अपने मूल निवासियों से लड़े और मूल निवासी

24:12 अवश्य निवासियों से लड़ने के बाद जब यहां स्थापित हो गए तो आपस में लड़ ठीक है जनजाति संघर्ष दिखाई देता है ऋग्वेद में इंद्र को पुरंदर कहा गया है पुरंदर का मतलब होता है दुर्ग को तोड़ने वाला दुर्ग मतलब किला पुरंदर का मतलब होता है कि लोगों को तोड़ने वाला दुर्ग को तोड़ने वाला और आपको पता है कि इंद्र जो है वह ऋग्वेद में एक बहुत प्रमुख देवता के रूप में है ऋग्वेद में इंद्र की पुरंदर की स्तुति के बहुत सारे लोग हैं मंत्र है और इन्हें माना गया है कि यह असुरों से लड़ते थे ठीक है असुरों से लड़ते थे और यह मानवता की भलाई के लिए कार्य करते थे ऐसा

24:59 माना गया है तो इंद्र बहुत प्रमुख देवता है यह पुरंदर ऋग्वेद में कहा गया और पुरंदर का मतलब होता है कि लोगों को दुर्ग को तोड़ने वाला ठीक है और फिर उसके बाद के कार्यों की जीत का कारण अश्वों चालित रक्त होना था तो अ शौचालय मतलब घोड़ों के द्वारा चलाए जाने वाले रथ ऐसा माना जाता है कि इनकी जीत में इनका बड़ा योगदान था आप सभी लोगों ने वहां भारत देखी होगी रामायण देखी होगी तो रामायण और महाभारत में टिके आपने देखा होगा कि युद्ध होते थे तो वह लोग अपने रथ पर जाते थे उन रथों को घोड़े खींचते हैं कि आपने यह बीआर चोपड़ा चोपड़ा की रामायण में भी देखा होगा ठीक है रामानंद सरस्वती महाभारत में और रामायण सागर की रामायण में आपने देखा होगा कि वह

25:47 अश्व चालित रख सकते थे तो वह आर्य जो है इनका प्रयोग किया करते थे और इसी कारण ऐसा माना जाता है कि उन्होंने इतने बड़े पैमाने पर जी दर्ज की है कि मैं ठीक है क्योंकि इसका फायदा उनको युद्ध में मिलता था अश्व चालित प्रश्नों का फायदा उनको मिलता था ठीक है उस जमाने में आज की तरह युद्ध के हथियार नहीं थे टैंक वगैरह गाड़ियां वगैरह यह सब नहीं हुआ करते थे ना तो आप चालित रथ का होना अपने आप में एक एडवांटेज था तो इनके पास में घोड़े थे और उन गुणों से यह व्रत खिंचवाते थे ठीक है इनके पास यॉर्क कवच और अन्य वस्त्र हुआ करते थे हमने बहुत सारे महाभारत और इसमें इनके बारे में सुना है जैसे इंद्र ने दिया था का जो एक कवच और कुंडल जो ले लिया था कर्ण से आपने सुना

26:33 होगा करने के पास एक कवच और कुंडल हुआ करता था और भी जितने भी महारथी महाभारत और रामायण में दिखाई देते हैं वह युद्ध आदि से पहले ठीक है आप देखिए कि कवच धारण करते थे ठीक है तो कवच और ऐसे कुछ अस्तर इनके पास से इसके भी प्रमाण मिले आए में ठीक है आर्यों में आंतरिक और बाह्य अंतरिक्ष और कि दोनों प्रकार के संघर्षों यह तो मैं आपको पहले बता दिया परंपरा के अनुसार आर्यों के पांच कभी ले अर्थात् जन्मे हैं जो समुदाय में पंचजन कहलाते थे तो ऐसा माना जाता है कि आर्यों के टोटल पांच कबीले थे जिन्हें पंचम कहते हैं अच्छा ठीक है यह पूरे पांच जनों में या 5

27:20 किलो में बैठे हुए थे जिन्हें हम पंचम कहते हैं तो भारत और तृत्सु यह आर्यों के शासक वंश मे हैं और इनके पुरोहित वशिष्ठ जो है वह दोनों ही वंशों से कई ने पुरोहित थे तो भारत और तृत्सु के नाम मिलेंगे आपको झाड़ियों के साथ सकते और वशिष्ठ का नाम सुना होगा आपने वशिष्ट गुरु इनके पुरोहित हुआ करते थे जो इनको सलाह आदि देते थे इनके लिए यज्ञादि कर्म किया करते थे तो भरत वंश का दस राज्यों के साथ में विरोध हुआ था और उसमें पांच आ रहे प्रधान थे और पांच धैर्य आ रहे थे आपने सुना होगा दसराज्ञ युद्ध के बारे में में मैं इसे दसराज्ञ युद्ध कहते हैं क्योंकि एक तरफ भरत वंश का राजा था और दूसरी तरफ 10 राज्यों के साथ उसका एक युद्ध हुआ था

28:06 पर उसने यार रावी नदी के तट पर ठीक है रावी नदी के तट पर भरत का जो आर्य वंश का राजा था भरत का युद्ध हुआ था 10 राज्यों के साथ जिसको कहा जाता है दसराज्ञ युद्ध ठीक है इस युद्ध में आपको पता है कि यह जो दसराज्ञ युद्ध था यह दशराज युद्ध भी कहते हैं इस युद्ध में राजा सुदास की जीत हुई थी ठीक है भरत वंश के राजा सुदास की जीत हुई और भत्तों की फिक्र प्रभु सकता भारत में स्थापित हुई है हैं तो यह बहुत बड़ा युद्ध था जो कि इस युद्ध के बाद में स्थापित बहुत बढ़िया तरीके से आर्य भारत में हुए और एक साथ 10 जनों को हराया था इसमें हालांकि पांच आर

28:52 यहीं से और पांच अनार्य थे तो धैर्य भी थे और आर्य बीते कुल मिलाकर 10 राजाओं को एक साथ भरत वंश के राजा ने सुभाष ने हराया था और भक्तों की प्रभुसत्ता का हुए लेकिन बाद में भारत और हारने वाले जितने राजा हारे थे ना उनमें जो पांच आर्य थे उनमें सबसे बड़ा था पूर्व मेरी बात समझ में आपको तो एक तो भारत जो विजेता हुआ था भरत वंश और दूसरा हारने वालों में एक वर्ष पूर्व जो अपने तारे का तो भरत और पुरुषों ने मिलकर एक नए वस्त्र साम्राज्य की स्थापना की जिसको कुरूवंश कहते हैं अब यहां से आपको समझ में आएगा समझ में आया तो सुभाष के साथ में जब 10 राजा लड़े तो वह हार गए जीता

29:39 कौन सूरदास जीत गया सूरदास के जीतने के बाद जो हारे हुए थे उनमें से एक सबसे बड़ा वंश यथापूर्व तो उस पूर्व और भारत के बीच में मित्रता हो गई ठीक है यह एक हो गए और इन्होंने एक नया वंश या एक नया साम्राज्य कुरु ही स्थापना की फिर इन कुरु और पांचाल और ने मिलकर एक और नए साम्राज्य की स्थापना की ठीक है आपको पता है कि कुरु वंश के ही जो आने वाले उत्तराधिकारी है वह कौरव कहलाए अब आपको पता है कि कौरव और पांडवों के बीच में महाभारत का युद्ध हुआ था है तो कुरू डायनेस्टी या कुरु वंश की उत्पत्ति कैसे हुई समझ में आ गया आपको कि

30:26 जब युद्ध हो गया और युद्ध के बाद में भरत वंश के राजा और पुरुषों के बीच में जी के भारत और पुरुष के बीच में मैत्री हुई और दोनों ने मिलकर एक नया वंश एक नया कुल बना लिया कुरु और यही गुरु आने वाले समय में कौरव कहलाए जिनके लुट शायद आप सभी परिचित होंगे कौरव-पांडवों के बीच में हुए युद्ध महाभारत से सभी हमारे यहां पर जानते हैं भी लॉक डाउन में आपने देखा भी होगा तो यह ही कौरव हो गए ठीक है उनकी अधिकांश लड़ाई या गाय को लेकर उक्त तिथि आर्यों की सबसे बड़ी बात यह किन के अधिकांश लड़ाई या गाय को लेकर हुई तांबे या कहां से के अर्थ में यहां पर अयस शब्द का प्रयोग व मतलब ऋग्वेद

31:12 में जहां पर एक धातु का नाम आया है आईएस अयस्क या है हम ऐसा अनुमान लगाते हैं कि यह जो अयस्क मेह यह अयस दरअसल क्या है यह एक धातु है जो या तो तांबा होगी या का सा होगी मतलब हम एकजुट क्लियर नहीं है बिल्कुल हमें अभी यह क्लियरिटी नहीं है कि वह तांबा खाया कसा था पर था इन दोनों में से एक हालांकि ताम्र पाषाण काल में हम लोग तांबे की भी बात कर चुके हैं सिंधु घाटी सभ्यता में हम हंसी की बात कर चुके हैं लेकिन अच्छा ठीक है लेकिन हम लोग इसको अभी समझ नहीं पाए हैं कि ऋग्वेद में जो अयस्क शब्द आया है यह क्या था यह तांबा है कि का

31:58 हिस्सा है इसका हम लोग नहीं समझ पाए आर्यों के चिकने शासक वंश के और पुरोहित वशिष्ठ दोनों पक्षों के समर्थक थे टिकट और इसके बाद आपको बाद में चलकर इसी दे हमारे देश का नाम इसी भारत कुल के आधार पर भारतवर्ष पड़ा तो यह जो भरतवंश से जिसके बारे में शुरू से हम लोग बात कर रहे हैं इसी के आधार पर आपको पता है कि दुष्यंत और शकुंतला दुष्यंत और शकुंतला का जो पुत्र हैड भारत उसी के नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा यह भी आपको पता होगा ना अच्छा ठीक है भारत के वंश के आधार पर ठीक है जो दुष्यंत और शकुंतला का पुत्र था भरत उसी के नाम पर क्योंकि ऐसा आपने देखा होगा कि वह बचपन में शेर के दांत भी गिन लिया करता था इतना बहुत दूर था इतना वीर्थ तो

32:46 उसी भरत के नाम पर हमारा इस देश का नाम भारत पड़ा ए आर्य लोग हर जगह जीते गए क्योंकि उनके पास में शौचालय रद्द हुआ करती है मैंने आपको बता दिया तो इस प्रकार से एक बड़ा साम्राज्य अच्छा ठीक है एक बड़ा साम्राज्य आर्यों ने स्थापित किया और इसमें हम लोगों ने देखा कि किस प्रकार से अश्व चालित रथों में अपना योगदान दिया तो कुरूवंश और बाद में पांचालों के साथ मिलकर उन्होंने एक और बड़े साम्राज्य की स्थापना पूरे उत्तर भारत में की बाद में इनमें और ज्यादा संघर्ष में इसलिए महाभारत का युद्ध हुआ क्योंकि अब साम्राज्यों को लेकर लड़ाई होने लगे तीन के बीच में अच्छा ठीक है तो आप यह बहुत एक भौतिक जीवन कैसा था इनका रवैया सबसे पहले कॉकेशस

33:34 यूरोप में एक ऑप्शन क्वेश्चसं क्षेत्र में 232 ईसा पूर्व प्रयोग में लाया गया था आर्यों को ठीक है आर्यों को बुवाई-कटाई और दावनी का ज्ञान था साथ ही वह ऋतु के बारे में भी जानकारी रखते थे विभिन्न प्रकार के वृक्षों के बारे में ठीक है ऋग्वेद में गाय और सांड की इतनी चर्चा है कि आर्य को मुख्य रूप से पशु चारक कहा जा सकता है तो बहुत ज्यादा पशुओं के ऊपर निर्भर थे पशुओं के बारे में ठीक है बहुत ज्यादा आपको यहां पर चर्चा मिलेगी इसलिए हम लोग कहते कि पशुचारण थे ऋग्वेद में जितने भी लड़ाइयों के बारे में बात की गई है माना जाता है कि वह गायों को लेकर हुई ठीक है गाय ही जो यह सबसे बड़ी जैन के बीच में युद्ध का कारण था गायों को लेकर अधिकांश लड़ाई हुई और

34:21 भूमि पर कोई निजी अधिकार या संपत्ति नहीं हुआ करती थी बेसिकली यह लोग भूमि हल्दी के लिए नहीं थे यह लड़ते थे जानवरों के लिए चरागाह के लिए अ अच्छा ठीक है तो यह तो गया कि ऋग्वेद में गायों को लेकर क्या है इसमें आप देखिए कि अर्थव्यवस्था में कुछ बड़ा ही रस शिकार बुनकर चर्मकार कुमार आदि शिल्पियों का उल्लेख है ठीक है तो बड़े भी हैरत कार भी जो रथ वगैराह बनाते थे भूनकर कपड़े वगैरह बीनने का काम करने वाले चर्मकार जो चमड़े का काम करते हैं कुमार बर्तन आदि बनाने के लिए तो इनके बारे में इनके बारे में चर्चा की गई है ऋग्वेद में मतलब कि हम ऐसा लग रहा है कि उस काल में इतने प्रकार के शिल्पी मौजूद हुआ करते थे यह सब कार्य हुआ

35:07 करते थे तांबे और कांसे के बर्तन में मैंने अभी बोला कि अ यह शब्द का प्रयोग होता है जिससे यह प्रकट होता है कि वह धातु कर्म की जानकारी रखते थे मतलब यह तो सच है कि अ यस चाहे वह तांबा हो या कहां सा उससे फर्क नहीं पड़ता एक बात तो क्लियर है और वह क्या कि इन्हें इस बात का ज्ञान था कि धातु क्या होती है धातुओं से बने चीजों को बनाने के बारे में यह जानकारी रखे थे कि ऋग्वेद में उल्लिखित समुद्र शब्द मुख्य जल राशि का वाचक है पहाड़ों में स्थित गुफाओं से भी अर्जन परिचित थे तो समुद्र के बारे में जानते थे और समुद्र से हम लोग अनुमान लगाते हैं एक विशाल जलराशि के बारे में बताया जा रहा होगा यह गुफाओं से भी परिचित थे ठीक है और जिस इलाके में यह थे

35:53 उसको कहते सब ट्वीट सिंधु सप्तसैंधव अ अच्छा ठीक है तब तो फ्रेंड तो आपको पता होगा कि प्रमुख नदी इनकी सिंदूर थी है सिंधु नदी आर्यों की प्रमुख नदी थी दूसरी प्रमुख नदी सरस्वती जिसे नदी तमाम कहा गया है ठीक है तो सरस्वती का भी उल्लेख बार-बार आपको मिलेगा जो आजकल शायद हमारी घग्गर नदी आप देखते हैं कि हरियाणा और राजस्थान में कि नदी है जिसे हम घर के नाम से जानते हैं तो ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि वह सरस्वती जिसके बारे में नदी धमाका गया बार-बार उसकी चर्चा हुई ऋग्वेद में वह नदी सरस्वती हमारी कौन सी नदी है वह घग्गर नदी तो सरस्वती के बारे में चर्चा की गई है ठीक है हरियाणा के

36:39 भगवानपुर और पंजाब के तीन स्थलों की खुदाई से प्राप्त उत्तरकालीन हड़प्पा मृदभांडों के साथ चित्रित धूसर मृदभांड पीडब्ल्यूडी ने कई बार आपको इनके बारे में बताया है कि अगर आपको इस प्रकार के नाम दिखाई दे इतिहास में तो यह सीधी बात यह बर्तनों के बारे में बता रहे हैं बात समझ में आ रही है आपको यह चर्चा किसकी हो रही है यह चर्चा और यह बर्तनों के बारे में मृदभांड मतलब मिट्टी के बर्तन आपमें से कई लोग जब यह पड़ते हैं तो इस बात को लेकर एक कंफ्यूजन उनके दिमाग में आता है कि यह मृदभांड क्या होता है तो मृद भांड मतलब कि मिट्टी के बर्तन जो कि मिट्टी से बने होते थे क्योंकि उस समय यही एक ऑप्शन था इसके साथ हम देखते हैं कि इन पर कुछ चित्रकारी कर

37:24 देते हैं कुछ पेंटिंग्स वगैरह कर दें तो वह चित्रित कहलाते थे फिक्र चित्रित और दूसरे का मतलब है कि वह ग्रे कलर के थे ठीक है ग्रे कलर के चित्रित धूसर मृदभांड यह पीडब्ल्यू ठीक है यह मिले इनका समय सोलह सौ से 1060 पूर्व का है तो रिग वैदिक काल में किस प्रकार के बर्तनों का प्रयोग प्रमुख रूप से किया जाता है ठीक है तो प्रमुख रूप से रिग वैदिक काल में किस प्रकार के बर्तनों का प्रयोग किया जा रहा है रिग वैदिक काल में प्रमुख रूप से चित्रित पेंट किए हुए चिकने ग्रे कलर के मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग और है जो मोटे तौर पर रिक्वेस्ट अच्छा समय भी रहा था आगे समझ में आ

38:09 अच्छा ठीक है क्लियर तो यह हो गया हमारा मृदभांड वगैरह आप आ जाओ जनजाति किस प्रकार क्योंकि जनजाति यह कबीलाई समाज जन जाति व्यवस्था थी जन जाति व्यवस्था थी तो इसमें कुछ चीजें कि ऋग्वेद काल में आर्यों का मीटिंग है आर्य का प्रशासन तंत्र कभी लेकर प्रधान के तक कबीला होता था इसलिए हम लोग क्या बोलते हैं कबीलाई समाज में के कबीलाई समाज था तो कबीलाई समाज था कबीले का एक प्रमुख होता था जिसको ग्रामीण कहते थे मुखिया होता था वह चिकें तो वैदिक काल में प्रतीत होता है कि राजा का पद अनुवांशिक हो चुका था ठीक है वैदिक काल में राजा राजन कहलाता था तो आपको पता होगा

38:56 कि कुछ समिति हैं जैसे सभा समिति कि विगत है और गण ऐसा सुना होगा आपने तो इसमें यह जो समिति हैं ठीक है सभा और समिति व शक्तिशाली हुआ करती थी यह जो समिति है पहले यह राजा का चुनाव करती थी राजा का चुनाव कैसे हुआ करता था समिति के द्वारा और इसीलिए हम लोग कहते हैं कि यह लोकतांत्रिक वाला मामला दिखाई देता जैसे हमने करते लोकतंत्र में अपना स्वयं जो हमारा सरकार होगी जो भी हमारा शासक होगा उसको चुमते तो यह लोकतांत्रिक समाज की तरह दिखाई देता है क्योंकि यहां पर राजा को समिति के द्वारा चुना जाता था जब बार-बार हम यह बात करते हैं कि अंग्रेजों ने हमें

39:44 यह बताने की दर्शाने की कोशिश की कि हम में लोकतंत्र की समझ नहीं है हम लोकतंत्र के बारे में कुछ भी नहीं जानते कि हमारे यहां तो राजा-महाराजाओं का शासन राय और अंग्रेज हमें लोकतंत्र सिखा रहे हैं डेमोक्रेसी सिखा रहे हैं तब हम लोग बताते हैं कि हमारे यहां पर हजारों साल पहले भी एक डेमोक्रेटिक प्रॉब्लम था बात समझ में यह आपको यह मानना कि तुमने हमें सिखाया है डेमोक्रेसी क्या होता है लोकतंत्र क्या होता है यह पूरे तरीके से कोरी बात है यह गलत बात है क्योंकि भारत में वैदिक काल में भी हम देखते हैं कि समिति जो है वह राजा को चुनती थी और समिति जो है वह एक प्रकार से हम लोगों से बनती थी तो यह हो गया ना लोकतांत्रिक समाज एक प्रकार का है

40:31 अच्छा ठीक है तो यह आपको क्लियर होगा कि राजा का पद पहले तो चुना जाता था बाद में वह अनुवांशिक हो गया ठीक है और राजन कहना था कि कभी लिखिए आम सभा समिति ठीक है यह समिति जो यह बहुत महत्वपूर्ण थी और यही राजा का निर्वाचन ऋग्वेद में करती थी इसके अलावा और भी बहुत सारी संगठन ने जैसे सभा समिति विधिवत और गण यह कुछ प्रमुख समितियां हुआ करती थी जो अलग-अलग फैसलों के लिए निर्णयों के लिए उत्तरदाई हुआ करती थी मैं अलग अलग प्रकार के मामलों पर विचार-विमर्श किया जाता था और सुना होगा आपने सभा समिति इनके बारे में तो यह प्रजापति की पुत्री अभिमानी गई है यह वह संस्थाएं थी जो कहीं न कहीं तय करती थी सारी चीजें समाज में क्या होगा

41:19 क्या नहीं होगा किस प्रकार के आने वाले समय में हम लोग करने वाले चीजों को यह सब कुछ निर्णय लिया जाता था इन्हीं समितियों के माध्यम से अलग-अलग समितियों के माध्यम से तो इनके बारे में आपको ऋग्वेद में मिलेगा और इनमें महिलाओं को भी भाग लेने की अनुमति थी बड़ी बात यह कि शुरुआत में स्त्रियों को अच्छा खासा अधिकार था वैदिक काल में स्त्रियों को सभा और विगत में भाग लेने की अनुमति थी मतलब कि इनको काटा-छांटा नहीं गया महिलाओं के अधिकार बराबर थे और इनको भी अच्छा ठीक है इनको भी उसमें भाग लेने का अधिकार का मतलब महिलाओं को समान अधिकार दिए गए थे तो वह भाग ले सकती थी इसके

42:05 अलावा दो प्रमुख नाम है पुरोहित के रूप में एक वशिष्ठ और विश्वामित्र तो वशिष्ठ और विश्वामित्र यह दो महान पूर्व वित्त हुए थे इसमें वशिष्ठ को देखे कि वह छोटे रुढ़िवादी है और विश्वामित्र है वह थोड़े उदारवादी हैं तो दो बड़े पुरोहितों का नाम आपको मिलेगा ऋग्वेद में वशिष्ठ और विश्वामित्र एक व्यक्ति लुट लुट मैंने आपको बताया ना सभा और समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहां गया है और यह एक प्रकार की संस्थाएं थी और यह संस्थाएं बहुत सारे मामलों में निर्णय लेना राजा को परामर्श देना राजा का

42:52 निर्वाचन करना यह सब कुछ तय किया करती थी मतलब जैसे हमारे यहां कैबिनेट की मीटिंग होती कि नहीं होती है यहां पर बहुत महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं मंत्रिमंडल की बैठकों में वैसे ही इन की बैठक के हुआ करती थी उसमें तय किया जाता था सब कुछ इसमें कोई कंफ्यूजन की बात नहीं कोई कंफ्यूज होने वाला मामला नहीं है तो सभा समिति हमने में देखा फिर अपडेट को विश्वामित्र जो किया एक बड़े पुरोहित दें इन्होंने गायत्री मंत्र की रचना की थी के लोगों को आर्य बनाने के लिए फिक्र शुद्ध करने के लिए गायत्री मंत्र की रचना की आपने सुना होगा गायत्री मंत्र कि गायत्री मंत्र आप सबने पढ़ा होगा सुना होगा ओम भूर्भुव स्व तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात्

43:38 यह जो गायत्री मंत्र हिंदू धर्म में इसका एक प्रमुख स्थल जो है यहां पर पूजा-पाठ में आराधना में बहुत ज्यादा प्रयोग इसका किया जाता है ठीक है तो गायत्री मंत्र की रचना करने वाले थे विश्वामित्र और यह कहां है यह ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है यह तो फेक्चुअल सी बात कई जगह पूछा जाता है गायत्री मंत्र जो है वह कहां पर है या गायत्री मंत्र ऋग्वेद के किस मंडल में कि ऋग्वेद के तीसरे मंडल में है गायत्री मंत्र की रचना किसने की विश्वामित्र ने की समझ में आ गया आपको यह कुछ एक ऐसी चीज है जो सीधे-सीधे क्वेश्चन यहां से आपको मिलेंगे तो यह हो गया सेनानी भला कुठार

44:24 तलवार अस्त्र शस्त्र चलाना जानते थे तो सीधी बातें कि यह लोग बहुत युद्ध लड़े ठीक है इन्होंने अपना एक राज्य स्थापित किया इनके पास जब रक्त हुआ करते थे तो कवच हुआ करते थे और रात हुआ करते थे तो बहुत सारे शस्त्र भी हुआ करते थे भाला आदि सभी कुछ तो यह सब भी आपको मिलेगा चरागाह या बड़े जन्मों का प्रधान बिराजै पति कहना था यह शब्द पूछा जाता राष्ट्रपति कौन था तो जो चरागाह थे ठीक है जहां पर जानवर औषधि को चढ़ाया जाता था क्योंकि यह पशु चारण समाज था तो अपने आप में चरागाह का स्थान बड़ा महत्वपूर्ण था उसका जो है वहां पर तथा प्रधान का मतलब होता है तो उसका प्रधान यह ऐड और आज पति कहलाता था परिवारजनों प्रधान को कुल पा कहा जाता था यह सब है

45:12 जिससे लेकर क्वेश्चन बनते हैं ठीक है यह किसके लिए प्रयोग किया गया है यह किसके लिए प्रयोग किया गया है दो ठीक है राष्ट्रपति किसके लिए प्रयोग किया गया तारा गांव के प्रधान के लिए कुलपति से कहा जाता है ठीक है तो परिवारजनों के प्रधान पुष्पा कहा जाता था लड़ाकू दलों का प्रधान ग्रामीण कहा जाता था तो शुरुआत में ग्रामीण बहुत शक्तिशाली नहीं था शुरुआत में ग्रामीण सिर्फ लड़ाकू दलों का प्रधान था और आगे चलकर पूरे गांव का मुखिया व्यक्ति जो एक ब्राह्मण कहलाने लगा तो शुरुआत में ग्रामीण की शक्तियां सीमित थी सिर्फ लड़ाकू दलों का प्रधान था लेकिन बाद में में के बाद में यही ग्रामीण पूरे परिवार के साथ गांव का मुखिया हो गया और बाद में राष्ट्रपति की शक्तियां इसके पास चली गई

45:59 मेरी बात समझ में तो पहले युवराज पति एक अलग पद तथा ग्रामीण एक अलग पत्थर लेकिन बाद में कालांतर में यह जो ग्रामीण है यही ज्यादा शक्तिशाली हो गया और इसी के पास पूरे गांव की टिकटें समस्त शक्तियां चली गई और यह व्रत जगपति के बराबर हो गया है कि यहां तक समझ में आ तो यह सब काम के आपके सब पूछा जाता है अब देखो इसमें एक और चीज राजा नियमित सेना ने रखता था जैसे आज काम देखता है कि वेतन भोगी सेना जिसमें हम लोग सेना रखते हैं उनको वेतन वगैरह देते सैलरी वगैरा देते हैं तो ऐसी नियमित सेना राजा ने ही रखा करता था और इसकी जगह फिक्स है वह अपने ही कबीलाइयों को मिलाकर अपने

46:45 ही बंधु बांधवों को मिलाकर टोलियां बनाकर युद्ध लड़ता था तथा अपने ही लोगों को मिलाकर और हैं सेना तत्काल बना ली जाती थी ऐसी कुछ न हुआ नहीं करती थी फिकर के रूप में आपको तुम्हें पता होगा कि राजा कोई नियमित टैक्स भी नहीं लेता था कि बलि शब्द सुना होगा आपने बली लुट बली एक प्रकार का का अर्थ मतलब राजा ऐसे कोई टैक्स रेगुलर नहीं लेता था कि इतना आपको देना है जैसे बाद में हम देखते हैं उपज का एक तिहाई ऊपर का एक चौथाई इतना प्रतिशत भाग टेक्स्ट में लिया गया तो इसमें टैक्स नियमित नहीं था जिसको देना हो वह दे सकता स्वेच्छा से यह नजराना हुआ करता था इस प्रकार का टिकेट तो बलिया टैक्स यह नहीं था तो अब देखो जब राजा

47:31 टैक्स नहीं लेगा जब राजा के पास आय के साधन नहीं होंगे तो हम कहें कि उसको सेना रखने और इसे ना कैसे रखेगा सेना का खर्च कैसे उठाएगा अगर आप एक नियमित सेना रखोगे तो उस नियमित सेना को वेतन भी तो देना पड़ता है तो वेतन देने का पैसा कहां से आएगा आपके पास तो टेक्स्ट तो है यह तो जो Aa Gaya Hero आ गया लेकिन जब बाद में नियमित सेना रखी जाने लगी तो फिर टैक्स भी रेगुलर हो गया यह हुआ कुछ समझ में मेरी बात समझ में आई इसमें आपको यह समझना है है कि अगर राजा नियमित सेना नहीं रखना है तो टैक्स की जरूरत भी नहीं यह भी हम बोल सकते क्योंकि पैसा कोई खर्च नहीं हो रहा तो अब यह बल यह टेक्स ठीक है कभी लिया

48:19 कबायली टो युद्ध के समय लड़ाइयां करती थी सेना नहीं हुआ करती थी अब यह कब मिला और परिवार कैसा था रिग वैदिक काल का यात्रियों का शुरुआत में तो सामाजिक संगठन गोत्र एवं जन्म मुल्क संबंध पर आधारित रहा था ठीक है राजाओं के नामों का उल्लेख नहीं मिलता लोगों की सबसे अधिक आस्था कबीले के प्रति थी जिसे जन कहा जाता था और अभी मैंने बताया पंडितजन पांच प्रमुख सभी लोगों पंचजन कहते हैं तो कभी लोगों का प्रमुख चिकित्सक अभी लोग भोजन कहा जाता था एक रिचा में दो जनों की संयुक्त युद्ध शक्ति किस बताई गई है इससे स्पष्ट होता है कि जन्म के सदस्यों की संख्या 100 से अधिक नहीं रही होगी मतलब एक जन्म में शो लोग आपको तो पंचजन में पांच सदस्य होंगे 500 संख्या हो गई है अनुमान लगा सकते हैं वैश्य वैश्य नामक

49:08 व्यक्ति नामक बहुसंख्यक वर्ग का उदय है इसी कभी लेकर जनसमूह से हुआ था ऐसा भी माना जाता है कि वे यहीं से आया जो बाद में व्यापार आदि के लिए ठीक है मत जाना जाता है ऋग्वेद में परिवार वाचक उन्हें शब्द का प्रयोग विरल है इसमें केवल माता पिता पुत्र दास ही नहीं आते बल्कि और भी लोग आते तो जहां हम बात करते कुल कुल तो कुल में आप देखोगे कि बहुत सारे लोगों को शामिल किया जाता है आपने सुना होगा कुल आज भी हम लोग एक शब्द को यूज करते हैं लुट अच्छा ठीक है आज भी हम लोग यूज करते कुल शब्द हमारा कुल उस वन स्कूल लिया वंश तो कुल में परिवार में माता-पिता और पुत्र के

49:55 अलावा और भी कई सारे लोगों को हमारे रिश्तेदारों आदि को शामिल कर लेते हम लोग उसको मृतक कुल तो हमारे जितने भी भाई बंधू सगे संबंधी यह उनको मिलाकर हमें कुल बनाते हैं तो वह कुल शब्द आपको मिलेगा ऋग्वेद में प्रतीत होता है कि आरंभिक वैदिक अवस्था में परिवार के लिए गृह शब्द का प्रचलन था तो परिवार मतलब क्या ग्रह है आजकल घर के लिए करते हैं पोते ना थी भांजे भतीजे के लिए केवल एक ही शब्द के प्रयोग से प्रतीत होता है कि प्रथक कुटुंब की स्थापना की दिशा में पारिवारिक संबंधों का भी जिक्र अधिक नहीं था तो कोई बहुत सारे शब्द अलग-अलग रिश्तेदारों के लिए आपको नहीं मिलेंगे तब तक के लिए हमें लगभग-लगभग एक ही शब्द मिले का या ऋग्वेद में बेटी की

50:43 कहीं भी कामना व्यक्त नहीं की गई ठीक है तो कि आपको यह भी शब्द मिलेगा कि ऋग्वेद में बेटी के लिए कोई कामना नहीं है मतलब ऐसी मांग नहीं की गई ऐसी इच्छा जाहिर नहीं की गई पुत्री के लिए ठीक है प्रजा संतान और पशुओं की कामना सूक्तों में बार-बार आइए प्रजा को संतान की तरह माना गया राजा की संतान की तरह बोला गया स्त्रियां सभा में भाग ले सकती थी पति के साथ यज्ञ में आहूति दे सकती थी अब यह आपको पता होगा कि रिग वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल में एक Difference हो गया कि हर रिग वैदिक काल में स्त्रियों की दशा अच्छी खासी थी वह प्रमुख स्वभाव में समितियों में में भाग भी लेती थी पति के साथ ठीक है आप देखो यज्ञ आदि में भी भाग लेती थी ठीक है अ उपनयन आदि का भी अधिकार था यज्ञोपवीत आदि

51:29 का लेकिन धीरे-धीरे जो उत्तर वैदिक काल है तो उत्तर वैदिक काल में जैसे समाज में परिवर्तन हुए तो महिलाओं की स्थिति में गिरावट हुई महिलाओं के साथ-साथ समाज में वर्ण व्यवस्था भी आ चुकी थी तो कुछ लोगों का पतन हुआ वर्ण व्यवस्था के कारण यात्रियों की दशा में बहुत गिरावट हुई हम महिलाओं को कोई विशेष अधिकार नहीं रहे थे ठीक है यह भी हम लोग जानते हैं कि उत्तर वैदिक काल में स्त्रियों की गिरावट हुई थी दिशा में तो पहले तो वह सभा में भाग भी लेती थी पतियों के साथ यज्ञ में आहुति भी दिया करती थी के बीच स्त्रियों का उल्लेख ऋग्वेद के ग्रंथों में मिलता है और बहुपति प्रथा के भी संकेत है मतलब एक स्त्री के एक से ज्यादा पति बहुपति प्रथा देखे ऊपर

52:15 बहुपत्नी प्रथा आप जब एक व्यक्ति के एक पुरुष एक से ज्यादा पत्नियां रखता है तो उसे बहुपति प्रथा कहते हैं जब एक स्त्री के एक से ज्यादा पति होते तो उसे बहुपति प्रथा करते हैं महाभारत में आपने सुना होगा पांचाली के बारे में चिकें पंचाली द्रौपदी उसके पांच पति माने गए हैं पांच पांडव अच्छा ठीक है पांच पांडव आपको मिलेंगे उनके पांच पति थे ठीक है दुर्योधन अ सॉरी अर्जुन ने युधिष्ठिर ठीक है अर्जुन युधिष्ठिर नकुल सहदेव और एक और थे भी यह पांच पति फिक्र माने गए थे आपको पता है तो

53:01 यह बहुपत्नी प्रथा कि हमको कहीं न कहीं मिलते हैं साक्षय ऋग्वेद में नियोग प्रथा और विधवा-विवाह के प्रचलन का भी आभास होता है बाल विवाह का कोई उदाहरण नहीं मिलता मतलब ऋग्वेद में भी अगर हम देखें ना तो चाइल्ड मैरिज के बारे में बात बाल विवाह नहीं बाल विवाह नहीं है ठीक है और दूसरा की विधवा विवाह की प्रथा अनुमति थी जब दयानंद सरस्वती ने मैंने आपसे पहले भी कहा कि जब दयानंद सरस्वती ने कहा वेदों की ओर लौटो तो वेदों की ओर लौटो के पीछे यही कारण था उनके बोलने का कि वह बताना चाहते थे कि वर्तमान समाज में इस प्रकार की सत्य है कि विधवाओं को शादी की अनुमति ने लेकिन ऋग्वेद में शादी के अनुमति थी विधवाओं को भी ठीक है जिस प्रकार से बाल

53:49 विवाह समाज में लेकिन ऋग्वेद में बाल विवाह के बारे में नहीं दिखाई दे तब सोचने वाली बात है है कि हम धर्म शास्त्रों के आधार पर धर्म ग्रंथों के आधार पर बहुत सारी चीजें करते हैं लेकिन हमें उनके बारे में वास्तविकता का पता नहीं होता है अच्छा ठीक है तो ऋग्वेद में जिस प्रकार की चीजें हुई दिखाई देती है जिस प्रकार का पूरा के पूरा समाज था कहीं न कहीं अ को टिकेट कहीं ना कहीं आप देखिए कि भारत में व विधवा विवाह का प्रचलन तो ऋग्वेद काल में भी था लेकिन बाद में विधवाओं की स्थिति बड़ी खराब कर दी गई विधवाओं को शादी करने का अधिकार नहीं था पूरा जीवन नर्क के जैसे उन्हें बिताना होता था और

54:35 कहीं ना कहीं एक बोझ बन जाता था जीवन उनके ऊपर ठीक है और बाद में आपने देखा कि ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने विधवा विवाह के लिए बहुत प्रयास कि कानून पास करवाया उन्होंने टिकट तो नियोग प्रथा विधवा विवाह इन का भी प्रचलन का एहसास होता है ठीक है तो यहां पर आप इसके साथ-साथ देखोगे सामाजिक वर्गीकरण ऋग्वेद समाज पितृसत्तात्मक था इस बात पर कोई संरक्षण ठीक है ऋग्वेद समाज किस प्रकार का समास था यह हमारे एक तरीके से पित्र male-dominated सोसायटी यहां पर भी जिसे हम सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में क्या बात करते हैं सिंधु घाटी सभ्यता मातृ सत्तात्मक है हमें ऐसा लगता है मातृ

55:22 सत्तात्मक क्योंकि हमें कई प्रकार के साथ शामिल है जिससे हमें लग रहा है कि कहीं ना कहीं वह मातृ सत्तात्मक होगी लेकिन ऋग्वेद ठीक है लेकिन अब आप लोग इतना ज्यादा इंटरेस्ट मत लीजिए बहुपति प्रथा बहुपत्नी प्रथा थी यह सब में ज्यादा दिमाग लगाएंगे तो शादी भी नहीं होगी पढ़ लीजिए थोड़ा सा नहीं तो एक भी नहीं मिलेगा आपको ठीक है आप समझिए इस बात को कि हम जब बात कर रहे थे सिंधु घाटी सभ्यता में ठीक है सिंधु घाटी सभ्यता में हमें मातृ सत्तात्मक समाज बिखरा था लेकिन ऋग्वेद काल में हालांकि स्त्रियों की स्थिति हालांकि स्त्रियों की स्थिति महिलाओं की स्थिति अच्छी थी अच्छा ठीक है लेकिन आपको यह भी बताया कि समाज में पुरुष में तक कि अभी मैंने बताया

56:08 कि कहीं भी लड़कियों के बारे में कोई इच्छा नहीं की गई है लुट ठीक है लड़की या पुत्री की कामना नहीं हुई मतलब पुत्र चाहिए जो वंश को आगे बढ़ाएगा ठीक है जो उनके बाद में उनका पूरा कारोबार समय संभाले का यह आपको मिले तो यह समाज पितृसत्तात्मक तथा सामाजिक संगठन का आधार गोत्र या जन्म मुल्क तथा समाज की सबसे छोटी और आधारभूत इकाई परिवार या कुल थी तो समाज के लिए हमेशा से हमारे यह सबसे छोटी इकाई परिवार है कि मैंने आपको पहले भी बोला परिवार यहां कुल है अच्छा ठीक है परिवार या कुल जो है वह सबसे छोटी इकाई और इसका मुख्य कुल पाया कुलक

56:54 कहा जाता था कि मैंने आपको बताया पितृसत्तात्मक समाज के होते हुए भी महिलाओं को यथोचित सम्मान प्राप्त था हमारे यहां पर ऐतिहासिक काल से भले पितृ सत्तात्मक समाज राघव लेकिन महिलाओं को आदर और सम्मान दिया जाता रहा है हमारे ग्रंथों में तो है यह अलग बात है कि हमने उसको फॉलो नहीं किया ऐसा बोलते यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता जहां नारी की पूजा की जाती है वहां पर देवता निवास करते इससे मतलब क्या है कि पूजा करने का मतलब यह नहीं कि आप उसको खड़ा करके और और वहां पर आप उसको आरती उतारो दिल्ली पूर्व चढ़ा उसको प्रसाद चढ़ाव ठीक है पूजा मतलब था कि आदर-सम्मान रेस्पेक्ट जहां महिलाओं को घर में सम्मान दिया जाता है आदर किया जाता है

57:39 उनका उनको रिस्पेक्ट दी जाती है ठीक है परिवार में बराबरी का दर्जा दिया जाता है उस अ जगह पर देवता रहते हो अपने का मतलब यह था कि आपको अपने घर में महिलाओं को भी पर्याप्त अधिकार देने चाहिए उनका सम्मान उनका आदर करना चाहिए यह अलग बात है कि हमने सिर्फ अच्छी सी साड़ी अच्छी बातें ठीक है हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारी सारी अच्छी-अच्छी बातें सिर्फ किताबों तक और दीवारों पर लिखने तक सीमित हम उसको फॉलो नहीं करते अगर ऐसा किया जाता तो आपको वूमंस एंपावरमेंट नामक यह शब्द सुनने कोई नहीं मिलता आज का जो महिला सशक्तिकरण में यह शब्द शायद आपको सुनने को नहीं मिलता अगर

58:25 हमने उस चीज को फॉलो किया होता है यहां पर हमारे यहां पर चुकी महिलाओं को वह दर्जा दिया ही नहीं वह हक व अधिकार हुआ आदर व सम्मान हमने दिया ही नहीं हम यही माना कि घर में काम करती है तो क्या करती कौन सा बड़ा कुछ नहीं कर घर में काम करने वाली महिलाओं को कुछ करती है यह माना जाता है जो पुरुष जो बाहर जाकर काम करता है वह तीन घंटे या चार घंटे काम करें बारह घंटे घर में काम करने वाली महिला से ज्यादा दर्जा ज्यादा रिस्पेक्ट ज्यादा आदर वह प्राप्त करता है इसीलिए तो फिर विमेन एंपावरमेंट की बात होती है और महिलाओं को सशक्त करने की बात की जाती है तो शुरुआत में तो उनको दर्जा अच्छा था शिक्षा का अधिकार था यज्ञोपवित का भी अधिकार था यज्ञ करने का भी अधिकार था समाज के बड़े बड़े

59:10 संगठनों में भाग लेने का उनको अधिकार था बाद में स्त्रियों के दिशाओं में गिरावट आई थी जैसे हम लोग बात करते हैं न कि हमारे यहां पर किस प्रकार का समाज समय के साथ परिवर्तित होता रहा तो आप देखोगे कि हर समाज में कुछ-कुछ परिवार कि समय के साथ होते रहे हैं तू मेरी बात समझ में आया आपको कि रिग वैदिक काल में संयुक्त परिवार की प्रथा थी जॉइंट फैमिली संयुक्त परिवार जहां पर पूरा कुल एक साथ रहता था ठीक है मेरी बात समझ में आपको यहां पर पूरा कुल जहां पर सभी लोग एक साथ रहते थे उसका हम क्या बोलते उसको हम कहते संयुक्त परिवार

59:56 जॉइंट फैमिली आज कलम न्यूक्लियर फैमिली के कंसेप्ट पर चल रहे पति पत्नी और बच्चे तो वह एक जॉइंट फैमिली वाला मामला दिखाई देगा दादा नाती-पोते तब जो यह होते थे और इनके लिए ही शब्द नवरात्रि का प्रयोग होता था रिग वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था यह सबसे बड़ी बात हमारे यहां पर जो वर्ण व्यवस्था है और उसके बाद में निकली हुई जाति-व्यवस्था इसको समझाएं अ अच्छा ठीक है हैं तो इस स्त्रियों की दशा के बारे में बात कर लिया वर्ण व्यवस्था पर आते हैं वर्ण व्यवस्था में आपको पता है कि हमारे चार वर्ण है ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र कहां से निकलें यह ऋग्वेद से निकले

1:00:43 ऐसा माना जाता है ऋग्वेद में 110 वां मंडल सबसे पहले मैं आपको बता दूं ऋग्वेद के दसवें मंडल को पुरुष सूक्त कहते हैं पुरुष सूक्त पुरूष सूक्त मतलब यह जो परमपिता परमेश्वर है इन्हें पुरुष ग्रह माना गया परमपुरुष माना गया और इनकी स्तुति है इन को प्रसन्न करने के लिए कुछ रिचा आए हैं कुछ मस्त रहें जिन्हें हम शुरुआत कहते हैं सूक्त का मतलब कुछ रिचा लें या मंत्र जो आज भी आप लोग पूजा-पाठ में प्रयोग करते होंगे तो यह जो पुरुष सूक्त है इसमें एक मंत्र है इसमें एक मंत्र है मतलब के रिचा है और उस ऋचा से ही माना जाता है कि हमारे चार वर्ण आए हैं कि चार वर्ण का सबसे पहला उल्लेख आपको

1:01:30 ऋग्वेद के दसवें मंडल के इसी पुरुष सूक्त में मिलेगा इस पूरे रिचा रिचा आपने कभी सुनी नहीं होंगी आपने सिर्फ अर्थ सुना होगा उसका संस्कृत में टीके एक जो मतलब पूरा का पूरा कभी आपने सुना है तो ब्राह्मणों से मां मुख्य माशीद जो बाहु राजन यह कृपया गुरु यहां तक यस्वेश अध्ययन शुद्र जायत ऐसा है इसका मतलब है कि ब्राह्मण उस परमपिता मुख के टिकट के मुख से निकले तो ब्राह्मणों के मुख से निकले तो मुख से निकली इसलिए वेदों का उच्चारण करना वेदों को पढ़ना पढ़ाना ठीक है ज्ञान देना यह सब कुछ ब्राह्मणों को दे दिया गया है कुछ समझ में आपको तो ब्राह्मण उस परमपिता

1:02:16 परमेश्वर के मुख से निकले इसलिए श्रेष्ठ माने जाने माने जाने माने गए फिर जो क्षत्रिय है वह इसके यह जो हमारे हाथ होते बाबू यहां से ठीक है क्षत्रिय जो है वह उनके बालों से निकले हाथों से भुजाओं से निकले ऐसा माना गया और जो व ठीक है ब्राह्मण मुख से क्षत्रिय भुजाओं से वैश्विक रुझानों से जो था कि ज्योति हमारे थैंक यू अच्छा ठीक है था इससे निकले हैं यह जो क्षत्रिय हैं तो इसीलिए इनको देख लें आपको पता है कि क्षत्रिय जो है वह बहुत जोरों से निकलेंगे रक्षा करने का दिया गया जिम्मा सौंपा गया ठीक है राज करना रक्षा करना सुरक्षा करना यह क्षत्रिय निकले हैं भुजाओं से इसलिए उनको मिलाएं फिर विषैले

1:03:01 जो था इससे जंगलों से निकलें और उसके बाद में जो सुविधाएं व उनके चरणों से या पैरों से निकले हैं कि आगे समझ में आपको यह है यह था उसका जहां से पूरा वर्ण-व्यवस्था निकली अब देखो एक निकला ए मुख से एक निकला है भुजाओं से क्षत्रिय वैश्य निकलें जांघों से था इसे और शूद्र जो है वह पैरों से निकले हुए अब इस से क्या हो गया इससे यह वर्गीकरण आने वाले समय में कर दिया गया कि जो जिस ढंग से निकला है उस प्रकार का उसका क्या हो गया उस प्रकार का उसका अहमियत हो गया क्योंकि शूद्र पैरों से निकले ऐसा माना गया तो इसी लिए वह थोड़े से अधम हो गए ठीक है उन्हें निम्न वर्ग का निम्न केटेगिरी का लोहा केटेगिरी का माना जाने लगा कि

1:03:48 ब्राह्मण मुख से निकले थे इसलिए वह श्रेष्ठ माने जाने लगे तो बाद में समाज ने इसी को फॉलो किया और यह जो वर्ण व्यवस्था है यह ही हो गई धीरे-धीरे जाकर फिर जन्म के आधार पर हो गई जन्म के आधार पर मतलब कि ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण बन गया है एक परिवार सोच में आपको ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण बन गया ठीक है क्षत्रिय का बेटा क्षत्रिय बन गया वैश्य का बेटा वृष आज भी यही होता है मारे ठीक है कि अगर आपके पिता ब्राह्मण तो आप भ्रमण माने जाते हैं तो उस वर्ण व्यवस्था से जाति-व्यवस्था आई समाज में विभिन्न प्रकार की जातियां बन गई और यह जातियां इन्हीं चारों वर्णों में थी कि अगर कोई निम्न जाति का है तो सुधर हैड मेरी बात समझ में ही आपको फिर धीरे-धीरे

1:04:35 है अच्छा ठीक है धीरे-धीरे क्या किया गया यह तो सब ऋग्वेद में लिखा है यह सच है ऐसा होगा कैसे होगा इसमें दिमाग मत लगाइए ठीक है आप में से कई लोगों को लग रहा है कि सब चीजों से कैसे निकल सकता है तो यह लिखा हुआ है वह हमें नहीं पूछना कि कैसे वह तो एक म कल्पनाएं माना गया है सा के ऐसा हुआ होगा उन्होंने क्योंकि आपको पता है कि हमारे देवताओं को लेकर बहुत प्रकार की मान्यता है तो यह मान्यताएं ठीक है यह माना गया है सा तो हमें सिर्फ पढ़ना है कि लिखा क्या है अच्छा ठीक है उसमें लिखा क्या है यह समझिए उससे ज्यादा आपको नहीं दिमाग लगाना हमें क्योंकि स्टडी हमारी जो या उससे ज्यादा डिस्ट्रेक्ट नहीं होना है तो क्योंकि यह वर्णव्यवस्था आई और इस वर्ण व्यवस्था से

1:05:23 मैं आपको इसमें इतना डिटेल में बता रहा हूं क्योंकि हमेशा यह काम आएगा जब भी आप समाज में वर्ग विभाजन के बारे में लिखते हो जब भी आप समाज में जाति प्रथा के बारे में लिखते हो ठीक है जब भी आप समाज में वर्ण व्यवस्था के बारे में लिखते हो तो यहां से उसके बीज निकले हैं यह आपको पता होना चाहिए ठीक है क्लियर कुछ देर हो गया तो यह हालांकि सब बराबर होते हैं प्रत्येक मानव बराबर है ऐसा कुछ भी नहीं होता यह ऊंच-नीच तो यह सब हमने समय के साथ कर दिया लेकिन सबसे बड़ा होता है मानवता धर्म ठीक है जिसमें हर मानव बराबर का होता है और इसी को मानववाद कहा जाता है जहां पर केंद्र में मानव होता है ठीक है चली तो हम लोग आगे चलते हैं वे

1:06:11 किसी चीज को कंटिन्यू करते फिर इस काल में स्त्रियां अपने पति के साथ यज्ञ कर्म में भागीरथी बाल विवाह सती प्रथा पर्दा प्रथा का प्रचलन नहीं था पुत्रियों का उपनयन संस्कार किया जाता था और विधवा-विवाह के प्रश्न यह सारा मैंने बता दिया आपको ठीक है यह मैंने आपको पूरा बता दिया कि इस काल में स्त्रियों की दशा अच्छी थी क्योंकि वह यज्ञ कर में भाग लेती थी ठीक है सती प्रथा और पर्दा प्रथा का प्रचलन अब देखो इसके लिए बार-बार बोला गया कि राममोहन राय जब राजा राममोहन राय लोगों को यह समझा रहे थे कि सती प्रथा बिल्कुल भी सही नहीं है लुट सती प्रथा अच्छी नहीं है जब राजा राममोहन राय लोगों को यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि इसका वेदों में उल्लेख है तूने सहारा लिया इसका वेदों का किरदार को वैध में सती प्रथा का कोई उल्लेख नहीं तो

1:06:57 सती प्रथा में क्यों सती प्रथा बंद करते नीचे क्यों फॉलो करते हैं सती प्रथा को यह अमानवीय प्रथा है तू मेरी बात समझ में आया आपको मैं आपको यह समझना है कि सती प्रथा का उल्लेख ऋग्वेद में नहीं पर्दा प्रथा कभी नहीं है ऋग्वेद में ऐसा कहीं नहीं मिलता कि महिलाएं पर्दा किया करती थी घुंघट जिसको आप कहते घूंघट या पर्दा यह भी ऋग्वेद में नहीं है सती प्रथा भी नहीं है घूंघट भी नहीं है अगर समझ में और इसमें विधवाओं को विवाह की अनुमति भी मीण तो यह हो गया पूरा सामान्यता एकपत्नीत्व विवाहित प्रचलित अप मतलब सामान्य पुरुष एक पत्नी रखता था एक ही पत्नी सीधा करता था विवाह

1:07:43 में दहेज जैसी कुप्रथा का प्रचलन नहीं था सोचिए दहेज वाले भी प्रथा उसमें ऐसी कोई नहीं थी ठीक है परंतु वह तू शब्द कन्या को दिए जाने वाले उपहार का ज्ञान तथा मतलब माता-पिता पर अपनी बेटी को खुशी-खुशी जो पहाड़ देते थे शादी के समय उसको आप वह तू कह सकते हैं लेकिन कि दहेज का टिकट गौरी का कोई प्रचलन नहीं था शिक्षा के द्वार स्त्रियों के लिए खुले थे महिलाओं को पढ़ने की आजादी थी ऋग्वेद में लोपामुद्रा घोषा अपाला सीखता विश्ववारा जैसी विदुषी स्त्रियों का वर्णन है तो ऋग्वेद में बहुत सारी से विस्तृत हैं जिन्हें पढ़ने का टीके अधिकार था और उन्होंने पढ़कर बड़ा नाम भी कमाया विदुषी

1:08:29 स्त्रियों के रूप में वह जानी जाती है तो यह भी आपको मिलेगा तो आजीवन अविवाहित रहने वाली कन्या हम आजू कहलाती थी तो ऐसे मई कन्या जो शादी नहीं करती थी ठीक है वह माजू कहलाती थी अविवाहित रहने वाली पुत्र प्राप्ति के लिए नियोग की प्रथा स्वीकार की गई थी इसके अंतर्गत महिला को अपने देवर से साहचर्य स्थापित करना पड़ता था तो यदि पति से ठीक है पुत्र प्राप्त नहीं हो रहा तो देवर के साथ में ठीक है सहआचार्य के द्वारा पुत्र को प्राप्त करने की प्रथा भी थी नियोग प्रथा रिग वैदिक काल में दास प्रथा का प्रचलन था कि तो यह प्राचीनतम यूनान और रोम के जैसा बिल्कुल भी नहीं था दासप्रथा ति आर्य मांसाहारी और शाकाहार दोनों प्रकार का भोजन करते थे कि दोनों प्रकार के भोजन

1:09:15 हेलो किया करते थे तो और सूरा का प्रचलन था सोम के लेकर आपको बताया कि इस हम समझते हैं कि मदिरा हमेशा सोचते कि शो मतलब शराब या मदिरा कुछ ऐसा तो आर यू प्राय प्रिय यह पे था जिसको भी हुआ करते थे सोमरस का पान आपने सुना होगा आर्यों क्या पहनते सूत्र स्पून और चरम के फिक्र सूद के उनके और चरम के बने वस्त्रों को धारण करते थे समाज में जी के विवाह एक पवित्र संस्कार था और दो प्रकार के विवाह है अनुलोम विवाह और प्रतिलोम विवाह देखो उच्च वर्ण का पुरुष है के निम्न वर्ण की महिला अ लुट उच्च वर्ण पुरुष या निम्नवर्ण की

1:10:03 महिला से शादी करता था तो इसको कहते अनुलोम विवाह तोप उच्च जाति का या महिला निम्न और प्रतिलोम विवाह जब उच्च वर्ण की स्त्री महिला उच्च वर्ण की है और पुरुष निम्न वर्ण का नीचे वरना का है उसको प्रतिलोम विवाह कहते हैं ठीक है यह दो प्रमुख विवाह है अनुलोम प्रतिरोध अनुलोम मतलब कि उच्च वर्ग का पुरुष निम्न वर्ण की स्त्री और प्रतिलोम मतलब उच्च वर्ण की स्त्री और निम्न वर्ग का पुरुष यह हो गया विवाह अब देवता ऋग्वेद अनेक देवताओं का अस्तित्व मानता है परंतु इसमें देवियों के अस्तित्व का भाव मिलता है तो बहुत सारे देवता ऋग्वेद में हमें दिखाई देते हैं ठीक

1:10:48 है कौन-कौन से कौन-कौन से आपको पता है कि ऋग्वेद में देवता है तो सबसे ज्यादा आपको पता है कि इंद्र के बारे में बात हुई सभी देवता प्राकृतिक शक्तियों के प्रति कि प्रकृति के प्रतिनिधि के रूप में इनकी तीन श्रेणियां की आकाश के देवता एक होते आकाश के देवता सूर्य देव स्वरूप मित्र पोषण विष्णु स्मिता आदित्य ऊषा आश्विन या आकाश के देवता है ठीक है अंतरिक्ष के देवता इंद्र रुद्र मरुधर वायु पर्जन्य एवं प्रजापति अंतरिक्ष के देवता माने गए और तीसरे पृथ्वी के अग्नि सोमवार पृथ्वी बृह्स्पति सरस्वती यह सब पृथ्वी के तो तीन

1:11:36 प्रकार की श्रेणियां हमें देवताओं की दिखाई देती है हुआ था कि आगे समय में तीन प्रकार की कौन सी तीन प्रकार की कैटेगिरी में आकाश के देवता है जिनमें कुछ नाम है सूर्य ठीक है वरुण मित्र पोषण विष्णु यह सब पता है आपको सूर्य तो है इसे ही ठीक है दिन और रात के लिए इसके अलावा वरुण जो कि हमारे यहां पर वर्षा आदि के लिए जाने जाते हैं ठीक है कुशल विष्णु जल के देवता वरुण फिर इसके अलावा अंतरिक्ष के देवता इंद्र जी ने पुरंदर कहां गया रुद्र जो शहर के देवता भी माने जाते हैं ठीक है बहुत वायु यह सारे पृथ्वी के देवता अग्नि सॉन्ग पृथ्वी को इसका लॉजिक कह इसका लॉजिक हम लोग देख लें दरअसल आर्य जब उन्होंने देखा कि दिन होता

1:12:24 है रात होती है लोग पैदा होते हैं मर जाते हैं वर्षा होती है अनाज पैदा होता है तो उन्होंने जब यह सब देखा तो उनकी समझ में नहीं आया कि यह क्यों होता है मतलब कभी रात को जाती है फिर भी हो जाता है लोग पैदा भी हो जाते हैं मर भी जाते हैं पता ही अपने आप मर भी जाते हैं तो उन्हें यह समझ में नहीं आया तो यह सारी चीजें उनके समझ के बाहर थी तो उन्होंने क्या किया इसमें किसी अदृश्य शक्ति का हाथ मान क्या माना उन्होंने उन्होंने माना कि कोई शक्ति है कोई पावर इनविजिबल पावर जो ऐसा करती है अच्छा ठीक है और उन्होंने क्या कर दिया उन्होंने इन सभी के लिए कोई न कोई देवता बना दिया कि पानी आ रहा है तो कोई देवता होगा इसके पीछे जो यह पानी गिर रहा है ठीक है फसल हो रही है तो कोई देवता ऐसा कर रहा

1:13:10 होगा कोई व्यक्ति पैदा हुआ तो कोई देवता कर रहा होगा कोई मर गया तो कोई देवता ऐसा कर रहा होगा तो उन्होंने क्या किया उन्होंने अपने जितने भी यह जो पहली बार थी या हम कहें कि उनके जो प्रश्न थे जो सुलझ नहीं पा रहे थे उनको उन्होंने कई ने कई देवताओं के तौर पर स्वीकार कर लिया उस अदृश्य शक्ति को को एक ठीक है यह उन्होंने स्वीकार कर लिया उन्होंने में पुष्य और प्रकृति का आरोपण किया उन्होंने कही ने कई ने पुरुष और प्रकृति से जोड़ दिया तो यह सभी देवता ठीक है उनके लिए कुछ न कुछ करते थे तो वह कोशिश करते थे कि देवता खुश हो यह देवता खुश होंगे तो उनको ध्यान देंगे ध्यान यह

1:13:57 देंगे उनको जो है खुश रखेंगे उनके बच्चों को खुश रखेंगे स्वस्थ रखेंगे पानी गिरा आएंगे तो कहीं न कहीं इन देवताओं की स्तुति में इन देवताओं की प्रशंसा में उन्होंने बहुत सारे मंत्रों का रिक्शाओं का लेखन किया जिसको हम लोग ऋग्वेद के तौर पर जानते हैं कि आगे समझ में यहां से युक्त पत्ती सारी चीजों की हुई ऋग्वेद में सबसे ज्यादा चर्चा इंद्र क्यों है जिसे पुरंदर कहां गया है इसके ड्राई स्तुत इंद्र को समर्पित सबसे ज्यादा पूरे ऋग्वेद में इंद्र के प्रशंसा में इंद्र को खुश करने के लिए चीजें लिखी गई ठीक है है तो पुरंदर और इंद्र सबसे ज्यादा है इन्हें आर्यों का युद्ध नेता मतलब आर्य की

1:14:44 तरफ से युद्ध लड़ते थे देव असुर के बीच में युद्ध करते थे कि असुरों के हाथे यह वर्षा आंधी तूफान का देवता माना गया है ठीक है यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण देवता बन गए आर्यों के दूसरे अग्नि अग्नि के लिए 270 सबसे ज्यादा ड्राई सूखे हैं इंद्र के दूसरे हैं दोस्तों अग्नि के लिए मतलब अग्नि की प्रशंसा में अग्नि को खुश करने के लिए ठीक है अग्नि की अग्नि को खुश करने के लिए भी कोई प्रयत्न किए हैं को समझने वाली बात यह है कि अग्नि को क्या समझा गया जैसे हम मान लीजिए देवताओं से कुछ कहना चाहते हैं हम देवताओं कुछ अर्पण करना था कुछ देना चाहते हैं तो वह माध्यम वह अग्नि को मना लिया क्या अग्नि में कुछ

1:15:29 डालिए और वह ऐसे धुआं बनकर ऊपर जाएगा और वह आपके आराध्य को मिल जाएगा मेरी बात समझ में ही आप आप क्या करेंगे आप चाहती देंगे और उस चाहती को जवाब अग्नि में देंगे तो वह अग्नि में जल के धुआं बनकर ऊपर जाएगा और वह देवताओं तक पहुंच जाएगा तो यह अपने देवताओं तक ठीक है इसलिए मुख कह रहे अग्नि को देवताओं का मुख्य कहा जाता है वह माउथ क्योंकि अग्नि एवं मध्य में जिनके माध्यम से आप अपनी जो यह चीजों को रात अर्पित करना चाहते हो देवताओं को वह पहुंचा सकते हो अपने देवताओं तक तो यह सबसे दूसरे महत्वपूर्ण देवता हो गए थे

1:16:15 यह मनुष्य और देवताओं के बीच मध्यस्थता तो मनुष्य और देवताओं के बीच मध्यस्थता स्थापित करने का काम करते थे तीसरे प्रमुख देवता है वरुण यह जल और पानी के देवता से इनके लिए तीनसुकतत्व ड्राइव टो इंद्र के लिए 200 व अग्नि के लिए और 30 सूक्त अच्छा ठीक है अत इस उक्त है वरुण के लिए जो जल के देवता है इन्हें रितेश भोपा का हाल क्या कहा गया रिच से गोपा कहा जाता है गायत्री मंत्र कविता पवित्र देवता को समर्पित है इसका उल्लेख ऋग्वेद के तीसरे मंडल में भी बताया विश्वामित्र इसके रचना की थी मीणा सॉन्ग को पदार्थ सॉन्ग को पेय पदार्थ स्थिति के देवता का माना गया है व्यक्ति के देवता का पेय पदार्थ माना गया

1:17:02 है तो उनको जिसका उल्लेख ऋग्वेद के नवे मंडल में ऐसा माना जाता है कि इंदौर बाकी देवता सोमरस का पान करते हैं सोमवार जो है वह रस पीते अच्छा ठीक है यह हो गया क्लियर सरस्वती ऋग्वेद में सबसे ज्यादा चर्चा सिंधु नदी की हुई है ठीक है यह भी आपको पता हो दूसरी बड़ी नदी थी सरस्वती इसको नदी कहां है मां सरस्वती काफी हम गए कि उनके लिए पवित्र जो आज हमारे लिए गंगा का स्थान है ना गंगा जैसे गंगा हमारे लिए पवित्र नदी है वैसे सरस्वती ऋग्वेद में आर्यों की पवित्र नदी लिए रिग वैदिक काल में मूर्तिपूजा का उल्लेख नहीं मिलता है ठीक

1:17:49 है यह बड़ी बात है कि उस समय में ऋग्वेद में मूर्तियों की पूजा नहीं होती थी के पोषण रिग वैदिक काल में पशुओं के देवता थे जो बाद में शूद्रों के देवता तो पोषण के बारे में पूछा जाता है पोषण कौन है पोषण रिग वैदिक काल के पशुओं के देवता है जानवरों के बाद में आपको पता है कि वह उत्तर वैदिक काल में शूद्रों के देवता बन गए तो इस प्रकार से हमने देखा कि इस प्रकार से हमने देखा कि यह जो ठीक है यह जो रिग वैदिक काल है रिग वैदिक काल में हमने बहुत सारे देवताओं अर्थव्यवस्था समाज आदि के बारे में बात अच्छा ठीक है कि जी की कि चलेंगे अब हम लोग इसके बाद हमारा दलबदल परिवर्तन का अच्छा सबसे ज्यादा चर्चाओं

1:18:36 में और विवाद में कानून रहता है आपने सुना होगा आ आ झाल में दलबदल कानून बदल परिवर्तन कानून को कि अभी कुछ देर बाद ठीक 10 मिनट बाद 01:30 पीएम पर अब तो शायद कम टाइम बचा है मेरे पास अभी हम लोग आर्ट मिनट बाद 8 मिनट के बाद फिर से मिलेंगे 01:30 पीएम पर दल परिवर्तन कानून के बारे में बहुत इंपोर्टेंट समझ लेना इसको अच्छे से बहुत ज्यादा चर्चा में रहता है अभी भी चर्चा में था करंट के हिसाब से इंपोर्टेंट चाहिए एक डिसीजन आ या सुप्रीम कोर्ट का वह भी मैं आपको बताऊंगा तो आप लोगों को फिर मिलेंगे स्टेशन अच्छा लगे तो लाइक करिए और यह रेफरल कोड यूज कीजिए आधा Redmi को जब

1:19:25 भी ज्वाइन करें सी के लाइव रेफरल कोड को यूज करने से मैं व्यक्तिगत रूप से पर्सनली आप लोगों को लाइक करता हूं इसलिए आप मेरे साथ अपनी छोटी-छोटी चीजों को भी सॉल्व कर सकते हैं क्या पढ़े क्या ना पड़े कैसे तैयारी करें क्या स्ट्रैटेजी बनाएं ठीक है कौन सी जगह किताब पढ़ना है कौन सी नहीं पढ़ना है नोट्स कैसे बनाना है वह सब कुछ हम डिटेल में कर सकते हैं यूज करें इस रैफरल कोड को और 1 साल या दो साल का टेक्निक सब्सक्रिप्शन लोगे तो इस तरीके से होगा ठीक है फिर मिलेंगे गुड बाय टेक केयर लेट्स रैकेट अ

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