0:02 हेलो प्यारे बच्चों गुड इवनिंग। कैसे हैं आप सभी लोग? उम्मीद करते हैं आप लोग अच्छे होंगे और बहुत ही अच्छे से आपकी पढ़ाई भी चल रही होगी। प्यारे बच्चों आज की इस क्लास में हम लोग पॉलिटिकल साइंस का पहला चैप्टर शुरू करने जा रहे हैं जिसका नाम है शीत युद्ध का दौर। प्यारे बच्चों इस चैप्टर से जितने भी इंपॉर्टेंट सब्जेक्टिव क्वेश्चंस बनता है वो सारे क्वेश्चंस को हम लोग कवर करने वाले हैं। याद रखिएगा ये क्लास आपके लिए बहुत इंपॉर्टेंट होगा क्योंकि आज हम लोग बिल्कुल आसान भाषा में सारे प्रश्नों को आपको समझाएंगे। आपका सिर्फ काम है अगर आप ध्यान से सुन लिए मेरी बातों को ध्यान से वीडियो को देख लिए 100% है इस क्लास में जितने भी प्रश्न करेंगे वो सारा प्रश्न याद होगा और आने वाले एग्जाम में फोड़ेंगे। ठीक है? तो चलिए प्यारे बच्चों शुरू करते हैं। इस चैप्टर से जितने भी इंपॉर्टेंट ऑब्जेक्टिव क्वेश्चंस बनते हैं यानी एमसीक्यू बनते हैं वो भी हम आपको कवर करा चुके हैं। अगर
0:47 आप एक भी क्लास नहीं देखे हैं तो YouTube में सर्च करना है पॉलिटिकल साइंस चैप्टर वन बाय तनु क्लासेस सारा वीडियो आपको मिल जाएगा। ठीक है? चलिए शुरू करते हैं। तो प्यारे बच्चों आप सबको पता है चैप्टर का नाम है शीत युद्ध का दौर। है ना? इसमें हम लोग शीत युद्ध के बारे में पढ़ते हैं। तो पहला सवाल बनता है कि जो शीत युद्ध है ये कब शुरू हुआ था? 1945 में। और ये शीत युद्ध खत्म कब हुआ था? 1991 में। है ना? शीत युद्ध किसके बीच किसके बीच हुआ? एक तरफ प्यारे बच्चों आपका अमेरिका था। और एक तरफ आपका था सोवियत संघ जिसको हम लोग कहते हैं यूएसएसआर। है ना? तो सोवियत संघ और अमेरिका के बीच में शीत युद्ध चला। 1945 से लेके 91 के बीच। ठीक है? चलो अब प्यारे बच्चों, पहला प्रश्न आपके सामने है कि शीत युद्ध से आप क्या समझते हैं? बहुत आसान क्वेश्चन है। है ना? शीत का मतलब होता है
1:32 ठंडा। युद्ध का मतलब होता है युद्ध। यानी कोई युद्ध में जब ठंडा पड़ जाता है, इसका मतलब कोई युद्ध हुआ ही ना हो। तो शीत युद्ध का मतलब है कि ऐसा युद्ध जो नहीं हुआ हो। है ना? होने की पूरी संभावना हो। ऐसा लगे कि युद्ध होकर रहेगा। पूरी तरह से सबको लगता है कि ये दोनों आपस में लड़ेगा। लेकिन तब पर भी कोई युद्ध ना हो। तो जब युद्ध नहीं होती है इस तरह के युद्ध को हम लोग शीत युद्ध कहते हैं। तो आपके सामने सवाल पूछा गया कि शीत युद्ध से आप क्या समझते हैं? आप लिखोगे जब दो देश आपस में दुश्मन बन जाते हैं और उनके बीच बहुत तनाव हो जाता है। यानी उन दोनों के बीच बहुत टेंशन हो जाता है। ऐसा लगता है कि अब युद्ध होगा। लेकिन असली लड़ाई नहीं होती। इस तरह की स्थिति को हम लोग शीत युद्ध कहते हैं या शीत युद्ध कहा जाता है। इसमें
2:18 देश एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश तो करते हैं लेकिन सीधे युद्ध नहीं करते। यानी शीत युद्ध में क्या होता है कि एक देश दूसरे देश को नुकसान तो पहुंचाना चाहता है लेकिन आमने-सामने दोनों युद्ध नहीं करता। यानी कहने का मतलब जब दो देश आपस में दो जब दो देशों के बीच ऐसा लगे कि युद्ध होकर रहेगा लेकिन तब पर भी कोई युद्ध ना हो। युद्ध होने की पूरी संभावना है। दोनों देश एक दूसरे को मारना चाहता है, खत्म करना चाहता है। लेकिन तब पर भी कोई युद्ध ना हो। इस तरह के युद्ध को ही हम लोग शीत युद्ध कहते हैं। जैसे अमेरिका और सोवियत संघ इन दोनों के बीच में प्यारे बच्चों जो युद्ध हुई थी असल में कोई युद्ध हुई ही नहीं थी। इसीलिए कहते हैं कि अमेरिका और सोवियत संघ के बीच में शीत युद्ध चला था। है ना? तो जब दो देश आपस में दुश्मन बन जाते हैं। उनके बीच बहुत
3:03 तनाव होता है। बहुत टेंशन होता है। ऐसा लगता है कि अब युद्ध होकर रहेगा। लेकिन फिर भी कोई युद्ध नहीं होता। इस तरह की स्थिति को शीत युद्ध कहते हैं। यहां पर क्या होता है शीत युद्ध में कि एक देश दूसरे को नुकसान तो पहुंचाना चाहते हैं लेकिन कभी वो लोग सीधे युद्ध नहीं करते। वो एक दूसरे के खिलाफ हथियारों की होर जासूसी और प्रचार आदि का इस्तेमाल करते हैं। यानी वो लोग एक दूसरे के खिलाफ पूरा हथियार का इस्तेमाल करते हैं कि मेरे पास यह हथियार है। मेरे पास यह है। हम यह करेंगे। हम यह करेंगे। एक दूसरे का जासूसी करता है। एक दूसरे के बारे में प्रचार करता है। लेकिन कोई युद्ध नहीं करता। तो इस तरह के युद्ध को शीत युद्ध कहते हैं। अगला सवाल है गुटनिरपेक्ष आंदोलन से आप क्या समझते हैं जो कि बहुत इंपॉर्टेंट क्वेश्चन है प्यारे बच्चों आपको पूछा जाता है। है ना? आप सबको पता है गुटनिरपेक्ष आंदोलन के बारे में पहला सवाल कि जो
3:49 गुटनिरपेक्ष आंदोलन है इसकी शुरुआत कब हुई थी? 1961 में। कहां पर हुआ था गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत? बेलग्रेड में। जगह का नाम है बेलग्रेड। किसने किया था? तो मुख्य रूप से तीन देश ने एक है भारत से जवाहरलाल नेहरू एक देश का नाम है मिस्र मिस्र से था जमाल अब्दुल नासिर और एक था युगोस्लाविया क्या नाम है युगोस्लाविया वहां से कौन था जोसेफ ब्राज टीटो इन तीनों ने मिलके प्यारे बच्चों गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत किया था कब 1961 में और पहली बार सम्मेलन कब हुआ था गुटनिरपेक्ष आंदोलन का वो भी 1961 में हुआ था पूछा गया कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन से आप क्या समझते हैं तो हम लोग लिखेंगे गुटनिरपेक्ष आंदोलन एक ऐसा ऐसा आंदोलन था जो कि 1961 में शुरू हुआ था। वेरी गुड। इसकी शुरुआत युगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में हुई
4:36 थी। यानी गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत कहां पर हुई थी? युगोस्लाविया की राजधानी का नाम है बेलग्रेड। वहीं पर ये गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत हुई थी। इस आंदोलन के मुख्य रूप से तीन प्रमुख नेता थे। कौन-कौन? भारत के प्रधानमंत्री थे पंडित जवाहरलाल नेहरू। उसके बाद मिस्र के राष्ट्रपति थे कर्नल नासिर या जमाल अब्दुल नासिर। पूरा नाम है उनका। और युगोस्लाविया के राष्ट्रपति थे जोसेफ टीटो यानी जोसेफ ब्राज टीटो। इन तीनों ने मिलकर के मुख्य रूप से गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरुआत किया था 1961 में। आप पूछेंगे गुटनिरपेक्ष आंदोलन क्या है? तो प्यारे बच्चों जब शीत युद्ध शुरू हुआ था 1945 में तो पूरी दुनिया जो है ना दो खेमों में बंट गई थी। दो भागों में। पूरी दुनिया एक तरफ एक तरफ का देश अमेरिका के तरफ था तो एक तरफ का देश सोवियत संघ के तरफ था। पूरी दुनिया दो
5:22 भागों में बंट गई थी। है ना? लेकिन इसी बीच कुछ देश ऐसे थे जो चाहते थे कि ना ही हम अमेरिका की तरफ जाएंगे ना ही हम स्वेस की तरफ जाएंगे बल्कि उन दोनों से दूर रहकर के एक अलग गुट बनाएंगे। इसी गुट को गुटनिरपेक्ष कहा गया और इसका उद्देश्य यही था कि जो दोनों शीत युद्ध कर रहा है अमेरिका और स्वयं संघ इन दोनों के बीच में कोई युद्ध ना हो और सब कोई मेल-जुल करके रहे। सब आपस में मिलजुल कर के रहे। ठीक है? तो वही पूछा गया। गुटनिरपेक्ष से क्या समझते हैं? एक ऐसा आंदोलन जो कि 1961 में शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत युगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड से हुआ था। इस आंदोलन के तीन तीन नेता थे। भारत से पंडित जवाहरलाल नेहरू, मिस्र से नासिर और युगोस्लाविया से जोसेफ टीटो गुटनिरपेक्ष का मुख्य उद्देश्य था किसी भी सैनिक गुट में शामिल नहीं होना। है ना? किसी भी सैनिक गुट में शामिल
6:09 नहीं होना। ना ही नाटो में, ना ही सीटो में, ना ही सेंटो में, ना ही वर्षा संधि में। ये सभी सैनिक गुट का नाम है। तो गुटनिरपेक्ष आंदोलन का मुख्य उद्देश्य यही था कि हम लोगों को किसी भी सैनिक गुट में शामिल नहीं होना है। ना ही सोए संघ में शामिल होना है ना ही अमेरिका में शामिल होना है। और शीत युद्ध में हम लोगों को भाग नहीं लेना है। ये जो शीत युद्ध चल रहा है इसमें भी भाग नहीं लेना है। और पूरी दुनिया में शांति बहाल करना है और पूरी दुनिया में शांति बहाल करना है। यानी शांति स्थापना करना है। सब युद्ध में लगा हुआ था। सब चाहता था युद्ध हो। लेकिन गुटनिरपेक्ष आंदोलन के जितने भी सदस्य थे टोटल 25 सदस्य थे। 25 यानी 25 देश थे टोटल। तो ये 25ों देश चाहते थे कि कोई युद्ध नहीं हो। सब लोग मिलजुलकर के रहे शांति से रहे। यही उद्देश्य था गुटनिरपेक्ष आंदोलन का। ठीक है? तो गुटनिरपेक्ष आंदोलन पूछा जाए तो सिंपली
6:55 क्या कहोगे कि 1961 में युगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में गुटनिरपरक्ष आंदोलन शुरू हुआ। टोटल तीन देश थे मुख्य रूप से और आपको अगर पूछा जाए कितना देश टोटल शामिल था शुरुआत में? 25 देश शामिल था। ठीक? अगला सवाल। गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य क्या था? बताइए। तो हमने अभी हमने बताया कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन का उद्देश्य क्या था? तो गुटनिरपेक्ष आंदोलन में टोटल 25 देश शामिल थे। है ना? और 25ों देश क्या चाहते थे? वो यही चाहते थे कि भाई हम लोगों को शीत युद्ध में नहीं जाना है। हम लोगों को शीत युद्ध से दूर रहना है। युद्ध में नहीं जाना है। युद्ध से दूर रहना है। और ये जो युद्ध हो रहा है इसको खत्म करना है। सबको आपस में मिलाना है। और पूरी दुनिया में शांति स्थापित करना है। है ना? ये युद्ध वगैरह कुछ ना हो। सब खत्म करो। शांति स्थापित करना है। शीत युद्ध में शामिल नहीं होना है। और ये जो सैनिक
7:41 गुट है इससे भी हमें दूर रहना है। यही सब चीज चाहते थे ये 25ों देश। है ना? तो गुटनिरपेक्ष आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या है? लिखेंगे गुटनिरपेक्ष आंदोलन के उद्देश्य निम्नलिखित है। पहला अमेरिका और सोवियत संघ जैसे दो बड़े गुटों में से किसी में भी शामिल ना होना। यानी अमेरिका एक बहुत बड़ा शक्तिशाली देश था। सोवियत संघ भी एक बहुत बड़ा शक्तिशाली देश था। इन दोनों में किसी को भी शामिल नहीं होना था। पहला उद्देश्य गुटनिरपेक्ष आंदोलन का यही था। गुटनिरपेक्ष आंदोलन में जो ये 25 देश थे ये पहले यही चाहते थे कि ना ही हमको अमेरिका की तरफ जाना है ना ही स्वेश्चन की तरफ। दूसरा शीत युद्ध में भाग नहीं लेना है। कोई युद्ध में भाग नहीं लेना है। युद्ध से दूर रहना है और ये युद्ध जो चल रहा है शी शी शी शी शी शी शी शी शी शीत युद्ध इसको भी खत्म करना है। तीसरा और पूरी दुनिया में शांति बनाए रखना है। यही तीन रूप से मुख्य रूप से तीन उद्देश्य था
8:26 गुटनिरपेक्ष आंदोलन का। इसीलिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन को 1961 में बनाया गया था। अगला सवाल है उन तीन देशों के नाम बताइए जिन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का आरंभ किया था। उन नेताओं के नाम क्या थे? बहुत आसान क्वेश्चन है। वो तीन देश का नाम पूछ रहा है जो गुटनिरपेक्ष आंदोलन का स्थापना किया था या वो तीन नेता का नाम बताइए। तो हम सब जानते हैं एक भारत था, एक मिस्र था, एक युगोस्लाविया था। भारत से पंडित जवाहरलाल नेहरू, मिस्र से कर्नल नासिर या जमाल अब्दुल नासिर पूरा नाम है। और युगोस्लाविया से कौन था? मार्शल जोसेफ टीटो या जोसेफ ब्रास टीटो पूरा नाम है। यही मुख्य रूप से तीन देश था और यही मुख्य रूप से तीन नेता था जिन्होंने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना किया था 1961 में। है ना? तो ये तीनों नेता गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक माने जाते हैं। यानी अगर पूछा
9:13 जाए गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक कौन है? गुटनिरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक कौन है? तो आपको इन तीन नेता का नाम बताना होगा। जवाहरलाल नेहरू जो कि भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। कर्नल नासिर और जोसेफ ब्राज टीटो। ठीक है? अगला सवाल इसी दुनिया से आप क्या समझते हैं? तो प्यारे बच्चों तीन तरह के क्वेश्चन पूछे जाते हैं। पहला आपको पूछा जाएगा पहली दुनिया। पहली दुनिया से आप क्या समझते हैं? सवाल पूछे जाते हैं। पहले पहली दुनिया उसके बाद दूसरी दुनिया। ठीक है? उसके बाद तीसरी दुनिया। इन तीनों का मतलब क्या है? सिंपली समझ लीजिए। देखो पहली दुनिया। दुनिया लिख देते हैं ताकि आपको समझ में आए कि हम लोग दुनिया की बात कर रहे हैं। पहली, दूसरी कि नहीं। चलिए दुनिया यहां भी दुनिया है। देखो पहली दुनिया अमेरिका को है ना अमेरिका को और
10:02 पश्चिमी यूरोप का देश को अमेरिका को और कौन पश्चिमी यूरोप का देश को पहली दुनिया कहा गया अमेरिका और पश्चिमी यूरोप का देशों को क्या कहा गया पहली दुनिया दूसरी दुनिया किसको कहा गया सोवियत संघ को जिसको लिखते हैं यूएसएसआर यानी सोवियत संघ को और पूर्वी यूरोप के देशों को पूर्वी यूरोप के देशों को है ना याद रखिए पहली दुनिया कहा गया अमेरिका को और पश्चिमी यूरोप के देशों को और दूसरी दुनिया कहा गया सोवियत संघ को और पूरी यूरोप के देशों को। ठीक है? और तीसरी दुनिया किसको कहा गया? तीसरी दुनिया कहा गया प्यारे बच्चों विकासशील देशों को। ध्यान से देखिएगा। किस तरह के देशों को? विकासशील देशों को। ठीक है? यानी वैसे देशों को जो कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन में शामिल था। वैसे देश जो कि गरीब था। वैसे देश जो
10:48 गुटनिरपेक्ष आंदोलन में शामिल था। वैसे देश जो विकासशील था यानी जो विकसित नहीं था। विकासशील का मतलब क्या होता है बेसिकली? कि जो विकसित नहीं हुआ। डेवलप नहीं हुआ जो अभी विकासशील है यानी अभी विक विकास कर रहा है विकसित नहीं है पूरी तरह से है ना तो वैसे देश जो गुटनिरपेक्ष आंदोलन में शामिल था वैसे देश जो विकासशील था उन उस तरह के देशों को प्यारे बच्चों तीसरी दुनिया कहा गया है ना तो पहली दुनिया का मतलब अमेरिका पश्चिमी यूरोप दूसरी दुनिया का मतलब यूएसएसआर यानी सोवियत संघ और पूर्वी यूरोप और तीसरी दुनिया जब हम बोलेंगे तो गुटनिरपेक्ष के देशों को विकासशील देशों को वैसे देश जो आर्थिक रूप से थोड़ा कमजोर होता है इस तरह के देशों को तीस दुनिया कहा गया। ठीक है? पूछा जाता है। तो यहां पर पूछा गया तीसरी दुनिया से आप क्या समझते हैं? तो आप लिखोगे तीसरी दुनिया से मतलब उन देशों से
11:34 है जो ना तो अमेरिका वाले गुट में थे ना ही वो अमेरिका वाले गुट में थे ना ही वो सोएसंग वाले गुट में थे। क्योंकि अमेरिका वाले गुट को पहली दुनिया कहा गया। सोएसघ वाले गुट को दूसरी दुनिया कहा गया। तो तीसरी दुनिया से मतलब उन देशों से है जो ना तो अमेरिका वाले गुट में थे ना ही अमेरिका के ग्रुप में थे ना ही सोएस संघ के ग्रुप में थे। बल्कि ये देश जो है गुटनिरपेक्ष थे और ज्यादातर अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित थे। इन देशों को तीस दुनिया इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये आर्थिक रूप से कमजोर थे। यानी उन देशों को तीसरी दुनिया कहा गया जो देश थोड़ा सा कमजोर थे। उतना अमीर नहीं था। इनमें ज्यादातर देशों को आजादी हाल ही में मिली थी। यानी वैसे देश जो हाल ही में आजाद हुए थे। जैसे भारत 1947 में ही आजाद
12:20 हुआ था। जब शीत युद्ध शुरू हुआ था उसके बाद तो ज्यादातर देश उसी समय हाल ही में जो आजाद हुआ था और वो देश जो विकासशील देश था तो जो देश विकासशील था जो देश को हाल ही में आजादी मिला था जो देश आर्थिक रूप से कमजोर थे इस तरह के देशों को तीसरी दुनिया कहा गया। ठीक है? तो आप परिभाषा याद रखिएगा आपको पूछा जाएगा तीसरी दुनिया से आप क्या समझते हैं? तो आप सिंपली लिखोगे वैसे देश जो ना ही अमेरिका के गुट में शामिल था ना ही सोएस के गुट में शामिल था। बल्कि इन दोनों से अलग तीसरी दुनिया में गुटनिरपेक्ष में शामिल था और विकासशील था। उन उस तरह के देशों को हम लोग तीसरी दुनिया कहते हैं। ये देश आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं। ये देश विकासशील होते हैं और ये देश थोड़ा सा समझ सकते हैं कि हाल ही में आजाद हुआ था। इस तरह के देशों को हम लोग तीसरी दुनिया कहते हैं। अगला सवाल
13:06 नाटो से आप क्या समझते हैं? नाटो। नाटो को हम लोग इंग्लिश में लिखते हैं एन ए टी ओ है ना? सबसे पहला सवाल पूछा जाएगा कि नाटो की स्थापना कब हुई? तो डेट प्यारे बच्चों याद रखिएगा 4 अप्रैल 1949 को है ना? 4 अप्रैल 1949 को नाटो की स्थापना हुई। नाटो का फुल फॉर्म क्या है? नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। फुल फॉर्म याद रखिएगा। इसकी स्थापना कब हुआ? 4 अप्रैल 1949 को। नाटो की स्थापना किसने किया? अमेरिका ने। जब नाटो की स्थापना हुई, टोटल कितना देश इसमें शामिल था? 12। टोटल 12 देश इसमें शामिल था जब इसकी स्थापना हो रही थी। तो नाटो से क्या समझते हैं? पहले नाटो का फुल फॉर्म लिखेंगे। नाटो का पूरा नाम है नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। इसको हिंदी में कहते हैं नॉर्थ का मतलब होता है उत्तरी अटलांटिक का
13:52 मतलब अटलांटिक ट्रीटी का मतलब संधि और ऑर्गेनाइजेशन का मतलब होता है संगठन। तो नाटो का पूरा नाम क्या है? नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन यानी उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन। इसकी स्थापना यानी कि नाटो की स्थापना कब हुई थी? 4 अप्रैल 1949 में। 4 अप्रैल 1949 को अमेरिका के वाशिंगटन में इनकी स्थापना हुई ये भी याद रखिएगा नाटो की स्थापना अमेरिका का एक जगह है वाशिंगटन वहीं पे जो है नाटो की स्थापना हुआ था। ठीक है? जब इसकी स्थापना हुई थी स्थापना के वक्त में टोटल 12 देश इसमें शामिल थे। और इसका मुख्यालय कहां पर है? नाटो का मुख्यालय तो नाटो का मुख्यालय बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में है। यानी नाटो जो है उसका मुख्यालय कहां पर है? पूछा जाता है नाटो की मुख्यालय कहां पर है? तो बेल्जियम की राजधानी ब्रूसेल्स में। ब्रूसेल्स में नाटो की मुख्यालय है। ठीक
14:37 है? अगला सवाल सीटों से क्या समझते हैं? तो नाटो की स्थापना 1949 में हुई थी। सीटो की स्थापना प्यारे बच्चों 1954 में हुई थी। सितंबर महीने के 1954 में किसकी स्थापना हुई? सी2 की। सी2 का फुल फॉर्म क्या है? एस से साउथ, ई से ईस्ट, ए से एशियन, टी से ट्रीटी, ओ से ऑर्गेनाइजेशन। और इसकी स्थापना 1954 में हुआ था। और स्थापना किसने किया? तो फिर वही अमेरिका ने। ठीक है? तो देखो सीटों का पूरा नाम पहले लिखना है। साउथ को दक्षिण कहते हैं। ईस्ट मतलब पूर्व और ए से मतलब एशिया। ए का फुल फॉर्म है एशिया। है ना? और टी का मतलब ट्रीटी और ट्रीटी को कहते हैं हिंदी में संधि। और ओ का मतलब ऑर्गेनाइजेशन और ऑर्गेनाइजेशन को हिंदी में कहते हैं संगठन। ठीक है? तो सबसे पहले पूछेगा नाटो क्या? सीटो क्या है? तो लिखोगे सीटो का
15:24 पूरा नाम है दक्षिण पूर्व एशियाई संधि संगठन। इंग्लिश में साउथ ईस्ट एशिया ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। इसकी स्थापना सितंबर 1954 में की गई थी। यानी इनकी स्थापना सितंबर 1954 में हुई थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य क्या था? दक्षिण पूर्व एशिया में कम्युनिस्ट विचारधारा खासकर चीन के प्रभाव को रोकना। क्योंकि आपको पता है चीन जो है ना वो काफी तरक्की कर रहा था। है ना? दक्षिण पूर्व एशिया के तरफ ना चीन काफी तरक्की कर रहा था और बहुत तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा था। तो चीन के स्पीड को रोकना चीन जो इतना तेजी से तरक्की कर रहा था। उसके तरक्की को रोकना, उसके प्रभाव को यानी चीन के प्रभाव को कम करना क्योंकि चीन जो है ना कम्युनिस्ट विचारधारा का था तो इनकी विचारधारा को रोकना यही जो है सीटों का खास मकसद था। इसके लिए जो भी सदस्य देशों हैं इन्होंने
16:11 आपस में सैन्य सहयोग और सुरक्षा की योजना बनाई थी। ठीक है? तो अगर सीटों के बारे में पूछा जाए नॉर्मली दो नंबर में पूछा जाता है। तो पहले सीटों का फुल फॉर्म याद रखिए। साउथ ईस्ट एशियन ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। उसके बाद इसकी स्थापना सितंबर 1954 में हुई थी। और इसका मुख्य मकसद क्या था प्यारे बच्चों? चीन के जो कम्युनिस्ट विचारधारा है ये बहुत तेजी से फैल रहा था। इसी को रोकना। बस इतना याद रखना है। अगला सवाल है सेंटो से। सेंटो का क्या उद्देश्य था? या फिर पूछेगा सेंटो क्या है? तो पहले सीई एन टी ओ। सन का मतलब होता है सेंट्रल। टी का मतलब ट्रीटी। ओ का मतलब ऑर्गेनाइजेशन। ठीक है? जब आपको सेंटो बोला जाएगा तो आप सीई एन का मतलब सेंट्रल। टी का मतलब ट्रीटी, ओ का मतलब ऑर्गेनाइजेशन। सेंट्रल को हम लोग हिंदी में कहते हैं केंद्रीय और ट्रीटी मतलब संधि। ओ मतलब ऑर्गेनाइजेशन। ऑर्गेनाइजेशन
16:56 का मतलब संगठन। ठीक है? तो सबसे पहले सेंटो का पूरा नाम लिखना है। केंद्रीय संधि संगठन। इंग्लिश में सेंट्रल ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। पहले इसका नाम बगदाद पैक्ट था। याद रखिएगा। है ना? सेंटो का पहले नाम क्या था? बगदाद पैक्ट। क्योंकि ये समझौता पहले इराक की राजधानी बगदाद में हुआ था। तो ये सेंटो वाले समझौता पहले इराक की राजधानी कहां है? बगदाद है। तो पहले बगदाद में इराक की राजधानी बगदाद में हुआ था। इसीलिए सेंटो का पहले जो क्या कहते हैं? नाम है वो बगदाद पैक्ट था लेकिन बाद में इसको सेंटो कर दिया। इसका उद्देश्य क्या था इस संगठन का? सेंटो का उद्देश्य क्या था कि रूस यानी कि जो सोवियत संघ है इसको दक्षिण दिशा में फैलने से रोकना और उन क्षेत्रों में साम्यवाद के प्रभाव को कम करना। है ना? तो अगर पूछा जाए कि सीटो का उद्देश्य क्या था? तो भाई सीटो का
17:42 उद्देश्य था चीन की कम्युनिस्ट विचारधारा को रोकना। और सेंटो का उद्देश्य क्या था? सेंटो का उद्देश्य था रूस को रोकना। यानी सोवियत संघ के विचारधारा को रोकना। है ना? तो अमेरिका का दुश्मन चाइना भी है। अमेरिका का दुश्मन रूस भी है। तो अमेरिका दोनों को रोकना चाहता था। इसलिए चाइना को रोकने के लिए सेंट सीटो बनाया और रूस को रोकने के लिए सेंटो बनाया। ऐसे भी हम लोग याद रख सकते हैं। ठीक है? सेंटो की स्थापना 1955 में हुआ था। है ना? सेंटो की स्थापना कब हुआ था? 1955 में। ये बात याद रखिएगा 1955 में। ठीक है? चलिए। अब प्यारे बच्चों अगला सवाल है। वर्षा पैक्ट का वर्णन कीजिए। यानी वर्षा संधि। है ना? पैक्ट का मतलब होता है संधि। वारसा संधि से आप क्या समझते हैं? तो इधर जो अमेरिका है वो लेके आया था नाटो। तो इधर जो सोएसंग है वो लेके आया वारसा संधि। कहा कि तुम
18:29 नाटो लेके आए हो ना भारत देशों के साथ हम भी लेके आते हैं वर्षा संधि और इसमें उन्होंने अच्छे-अच्छे जैसे चाइना उत्तर कोरिया सारे देशों को अपने साथ मिला लिया। ठीक है? चाइना ईस्ट के अमेरिका के खिलाफ यानी कि नाटो के खिलाफ। अब देखिए वर्षा पैक्ट क्या है? तो सबसे पहले वर्षा पैक्ट का कोई फुल फॉर्म नहीं है। याद रखिएगा तो कोई फुल फॉर्म याद नहीं रखना पड़ेगा। लेकिन एक चीज याद रखना पड़ेगा कि इसकी स्थापना 1955 में हुआ था। डेट अगर पूछा जाए 14 मई। ठीक है? ये भी याद रखिएगा। 1955 में यानी 14 मई 1955 में वर्षा पैक्ट की शुरुआत हुई थी। शुरुआत सोवियत संघ ने किया था। ठीक है? वेरी गुड। वर्षा पैक्ट का वर्षा पैक्ट पूर्वी यूरोप के साम्यवादी देशों का एक सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना 14 मई 1955 को पोलैंड की राजधानी वर्षा में की गई थी। यानी पोलैंड की
19:15 राजधानी वर्षा है। वहीं पर वर्षा पैक्ट की स्थापना हो गई थी। इसलिए इसका नाम वर्षा पड़ा। ठीक? इस गठबंधन का नेतृत्व सोवियत संघ कर रहा था। यानी वर्षा पैक्ट का नेतृत्व कौन कर रहा था? अगर पूछा जाए नेतृत्व यानी कि इसका देखभाल कौन कर रहा था? सोवियत संघ कर रहा था। और इसे नाटो के जवाब में बनाया गया था। यानी नाटो के टक्कर में वारसा पैक्ट को बनाया गया था ताकि पश्चिमी देशों की ताकत का मुकाबला किया जा सके ताकि नाटो में जितने भी देश हैं उन देशों के मुकाबला किया जा सके। इसीलिए नाटो को बनाया गया था। ठीक है? इसीलिए वर्षा पैक्ट को बनाया गया था। इस समझौते के तहत कोई भी सदस्य देश दूसरे सदस्य देश में अपनी सेना सरकार की अनुमति से तैनात कर सकता था। है ना? इस वर्षा फैक्ट में क्या था बेसिकली कि इसमें जितने भी देश थे इन देशों का ये कहना था कि हम
20:01 लोग किसी भी देश में जाकर के अपनी सेना रख सकते हैं। जैसे मान लो अभी चाइना वाला है तो चाइना वाला अपनी सेना भारत में तो नहीं रख सकता है। भाई रखने ही नहीं देंगे उसको नियम ही नहीं है। लेकिन वर्षा पैक्ट में जितने भी देश थे ये सारे देश अपना सेना दूसरे देश में जाकर के रख सकते थे। ये इसमें एग्रीमेंट में था। ये पॉइंट लिखा हुआ था कि मान लो चाइना और रूस है। ये दोनों वर्षा पैक्ट में है। है ना? तो चाइना अपना सेना रूस में रख सकता है। रूस अपना सेना चाइना में रख सकता है। इस तरह का इसमें पॉइंट लिखा हुआ था। तो इस समझौते के तहत कोई भी सदस्य देश दूसरे सदस्य देश में अपनी सेना सरकार की अनुमति से तैनात कर सकता था। इसका उद्देश्य था सभी साम्यवादी देशों की सुरक्षा और एकता बनाए रखना। और ये वर्षा फैक्टर का उद्देश्य क्या था? कि जितना भी साम्यवादी देश है ये सब एक होकर के रहे और शांति बनाए रहे और
20:46 बाकी सब देशों के खिलाफ लड़े खास करके नाटो के खिलाफ। ठीक है? तो वर्षा पैक्ट के बारे में अगर पूछा जाए तो सिंपल याद रखिएगा। वर्षा पैक्ट की स्थापना 1955 में हुआ था। सोवियत संघ ने किया था। पोलैंड की राजधानी वर्षा में हुआ था इसकी स्थापना। और इसका मुख्य रूप से उद्देश्य क्या था कि जो नाटो है उसी के टक्कर में बनाया गया था नाटो के देशों को टक्कर देने के लिए। और इसमें क्या लिखा हुआ था पॉइंट? कि कोई भी देश जितने भी देश इसमें वर्षा पैक्ट में शामिल है। वर्षा संधि में जितने भी देश शामिल है ये सारे देश एक दूसरे की सेना एक दूसरे के देश में रख सकते थे। समझ गए आप? चलिए अब अगला क्वेश्चन की ओर बढ़ते हैं प्यारे बच्चों। नेक्स्ट क्वेश्चन है नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था से आप क्या समझते हैं? तो बेसिकली नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था क्या था? आपको पता है ना? जो गरीब देश थे जो कमजोर देश थे। अब जैसे
21:31 मान लो दो तरह के देश होते हैं। एक होते हैं विकसित देश जो कि बहुत अमीर देश होता है। जैसे कि अमेरिका, एक होता है विकासशील देश। विकासशील देश मतलब जो विकसित नहीं हो। जैसे भारत है, जैसे पाकिस्तान है, बांग्लादेश है। ये सभी विकसित देश है। तो विकसित देश थोड़ा सा कमजोर होता है। सॉरी ये सभी विकासशील देश है। ठीक है? देखो दो तरह के देश होते हैं। एक अमेरिका जिसको विकसित देश कहा गया। एक विकासशील देश जैसे कि भारत। ठीक है? तो अब अमेरिका देखो हर चीज में आगे है। लेकिन भारत जो है उतना नहीं है। बहुत सारी चीजों में पीछे है। ठीक है? तो यहां पर जो देश पीछे है जैसे कि उस समय बहुत सारे देश था पाकिस्तान ये सब जितना भी देश है तो जो भी देश पीछे है उन देशों वो देश भी विकसित देशों की तरह हो जाए यानी कहने का मतलब जो देश आर्थिक रूप से कमजोर है जिन देशों के पास पैसा
22:18 नहीं है जिन देशों के पास हथियार नहीं है जो देश कमजोर है वह देश के पास भी पैसा हो वह देश भी काफी मजबूत हो वह देश भी काफी तरक्की करें तो इसके लिए प्यारे बच्चों नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था लाई गई थी आप समझ गए यानी विकासशील देशों के लिए। तो पूछा गया कि नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था से क्या समझते हैं? तो लिखेंगे दुनिया में दो प्रकार के देश हैं। एक है विकासशील देश, एक है विकसित देश। ठीक? विकासशील देशों की जो स्थिति है वो बहुत ही खराब होती है। जो विकासशील देश होता है उन देशों की स्थिति बहुत खराब होती है। लेकिन जो विकसित देश होता है यानी जो अमीर देश होता है उनकी स्थिति तो बहुत ही उत्तम होती है यानी अच्छी होती है। ठीक? विकासशील देश में बहुत ज्यादा भुखमरी होता है। विकासशील देश में यानी जो देश विकासशील है वो देश क्या है? उनकी स्थिति
23:04 बहुत खराब होती है। उन देशों में भुखमरी बहुत ज्यादा होता है। विकासशील देशों में गरीबी बहुत ज्यादा होता है। विकासशील देश में बेरोजगारी बहुत ज्यादा होता है। आप देखो बहुत ज्यादा गरीबी भुखमरी बेरोजगारी मिलेगा आपको विकासशील देशों में। ठीक है? और नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत विकासशील देशों की सभी समस्या को दूर किया जाता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि नई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था यानी कहने का मतलब सिंपली यही है कि नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था जो लाया गया इसमें यही कहा गया कि जो विकासशील देश है जो आर्थिक रूप से कमजोर है जहां भुखमरी बहुत ज्यादा है, बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। तो इस तरह की चीजें ना हो। यानी ये देश भी विकसित देशों की तरह हो। इसीलिए नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था लाया गया। है ना? और नई अंतर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में क्या कहा गया? इसमें कहा गया कि जितने भी विकासशील देश है वो भी अपना व्यापार कर
23:49 सकता है। ऐसा परमिशन देना चाहिए। विकासशील देश भी अपना जहां चाहे वहां व्यापार कर सकता है। हर तरह का संसाधन जिन जो विकासशील देशों का संसाधन है उस पर सिर्फ विकासशील देश ही कब्जा कर सकते हैं। जैसे मान लो भारत में कोई पेट्रोल मिला। जमीन के नीचे से पेट्रोल मिला। तो होता क्या था पहले? जो अमीर सब देश है ना? वह सब आता था। और वह पेट्रोल को निकालकर के अपने फायदे के लिए लेके जाता था। कुछ पेट्रोल यहां दे देता था। तो यहां पर नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में कहा गया कि मान लो भारत का कोई संसाधन है, पेट्रोल है, कोयला है तो भारत ही इस्तेमाल करेगा। कोई अमीर देश आकर क्यों लेके जाएगा? ठीक है? तो नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में यही सारी बातें लिखी गई। ठीक है? अगला प्यारे बच्चों है शीत युद्ध के कारणों की विवेचना करें। आपको क्वेश्चन पूछा जाता है कि शीत युद्ध के क्या-क्या कारण है? यानी कहने का मतलब अमेरिका और स्वेसंग के बीच में शीत युद्ध
24:35 क्यों हुआ? तो हम तो आपको बहुत अच्छे से रीजन बताए थे। सबसे पहला सवाल याद रखिएगा। क्वेश्चन पूछा जाता है कि शीत युद्ध क्यों हुआ? इसके कारण बताइए। तो सबसे पहले आंसर देना मतलब हम लोगों को पूरा पेज फुल करना है। है ना? तो हम लोग लिखेंगे कि भाई जो शीत युद्ध है ना इसकी शुरुआत 1945 में हुई थी। और ये शीत युद्ध खत्म कब हुआ? 1991 में। और ये शीत युद्ध किसके-किस के बीच हुआ था? तो एक तरफ आपका अमेरिका था जो कि हम लोग जानते हैं। एक तरफ आपका अमेरिका था और एक तरफ आपका था सोवियत संघ। इन दोनों के बीच में क्या हुआ? शीत युद्ध हुआ। इतना तो आप लोगों को अच्छे से लिख लेंगे। अच्छे से लिख लेंगे भाई क्योंकि कॉपी फुल करना है। ठीक? शीत युद्ध 1945 में शुरू हुआ। 1991 में खत्म हुआ। अमेरिका और स्वेस के बीच में शीत युद्ध चला। यहां तक क्लियर? अब क्यों हुआ? कारण बताइए। तो कारण हम लोग
25:21 बताएंगे क्योंकि अमेरिका चाहता था कि पूरी दुनिया में पूंजीवादी व्यवस्था लागू हो। यानी अमेरिका क्या चाहता था कि हर देश पूंजीवादी विचारधारा को अपनाए। इधर जो सोवेसन है यह चाहता था कि समाजवादी विचारधारा को या कहें समाजवादी या साम्यवादी विचारधारा को अपनाए। यानी सोवियस चाहता था समाजवादी विचारधारा सारी दुनिया में सारे देश अपनाए और अमेरिका चाहता था पूंजीवादी अपनाए। इधर अमेरिका चाहता था कि हमारा ही दबदबा हो पूरी दुनिया में सब देश हम ही को कहे जी हुजूर जी हुजूर है ना तो अमेरिका जो है एक तरह से चाहता था पूरी दुनिया में दबदबा बनाना। इधर सोएस भी चाहता था दबदबा बनाना। यह भी चाहता था वही है ना अमेरिका चाहता था कि हर जगह हमारा ही बोलबाला हो उधर स्वयंघ भी चाहता था बोलबाला हो बस ये दोनों एक दूसरे
26:08 को दिखाने के चक्कर में इन दिनों के बीच में शीत युद्ध की शुरुआत हो गई 1945 में यही मुख्य रूप से दो कारण है अब वही चीज यहां पर लिखे हैं थोड़ा लॉन्ग में कि शीत युद्ध के कारणों की विवेचना करिए तो शीत युद्ध के कारण लिखित है सबसे पहला दोनों के विचारों में मतभेद था विचार मतलब क्या अमेरिका पूंजीवादी चाहता था स्वेसंग समाजवादी यानी साम्यवादी चाहता था तो दोनों के विचार अलग थे। महाशक्तिशाली बनने के लिए दोनों महाशक्तिशाली बनना चाहता था। अमेरिका भी चाहता था हम बने। इधर स्वेस भी चाहता था हम बने। देख लो यहां पर पॉइंट को। दीर्घ में अगर पूछे तो इस तरह से लिखना है। पहला पॉइंट है विचारों में मतभेद। पूरी दुनिया में दो किस्म की विचारधारा थी। एक है पूंजीवादी विचारधारा एक है समाजवादी विचारधारा। पूंजी पूंजीवादी विचारधारा अमेरिका का था। जबकि समाजवादी विचारधारा स्वेस का था। अमेरिका चाहता था कि पूरी दुनिया में पूंजीवादी
26:53 विचारधारा लागू हो। जबकि रूस चाहता था कि पूरी दुनिया में समाजवादी को अपनाने वाले देश हो यानी समाजवादी विचारधारा लागू हो। दोनों की विचारधारा से ऐसा लगता था दोनों आपस में कभी भी एक दूसरे को एक दूसरे पर आक्रमण कर सकते थे। दोनों एक दूसरे पर कभी भी हमला कर सकते हैं ऐसा लगता था और यही सीधे होने का प्रमुख कारण है विचारों में मतभेद। दूसरा है महाशक्तिशाली बनने के लिए। इधर अमेरिका चाहता था कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश हम बनाएंगे। अमेरिका चाहता था कि पूरी दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका होगा। वहीं पे स्वेसंग चाहता था कि पूर्व दुनिया में सबसे शक्तिशाली देश हम बनाएंगे। जिस कारण लगने लगा कि कभी भी दोनों के बीच युद्ध हो जाएगा। और ये दो कारण है मुख्य रूप से अमेरिका और स्वेसंग के बीच में शीत युद्ध का लिख लेंगे आप लोग। अगला सवाल है प्यारे बच्चों क्यूबा के मिसाइल संकट क्या है?
27:38 बहुत आसान क्वेश्चन है अगर आप समझ गए तो। ठीक है? अब ये नक्शा देखिए। ये पूरा प्यारे बच्चों अमेरिका है। है ना? आप अगर देख रहे हो ना ये पूरा क्या है? अमेरिका यानी यूएसए है। यह पूरा क्या है? यूएसए। ठीक? और जो क्यूबा है ना क्यूबा ये छोटा सा जगह है क्यूबा देखिए क्यूबा ये क्यूबा किसके बगल में है अमेरिका के बगल में ठीक अब यहां पर आपको समझाते हैं कि क्यूबा का मिसाइल संकट क्या है और क्यों क्यूबा का मिसाइल संकट को शीत युद्ध का चरम बिंदु कहा जाता है जैसे मैंने कहा ये पूरा क्या है मान लीजिए मान लीजिए क्या ये पूरा अमेरिका है ठीक है ये पूरा क्या है अमेरिका है वेरी गुड अब ये क्यू ये छोटा सा जो जगह है ये क्या है इसी को हम लोग क्यूबा कहते हैं क्यूबा ठीक है क्यूबा कैसा कैसा देश है? एक द्वीप है। द्वीप द्वीपीय देश है ये। कैसा देश है? यह
28:25 द्वीपीय देश है। यानी छोटा सा देश है। एक द्वीप है छोटा सा। ठीक है? और ये अमेरिका यानी यूएसए है। यूएसए। ठीक? और इस तरफ क्या है प्यारे बच्चों? इस तरफ आपका है मान लो मान लो कि इधर क्या है आपका? यूएसएसआर जिसको हम लोग लिखते हैं सोवियत संघ। सोवियत संघ। अब देखो क्यूबा का मिसाइल संकट क्या है? इसको समझते हैं। ठीक है? देखो यह जो क्यूबा है ना यह बगल में है अमेरिका का लेकिन क्यूबा का जो संबंध है वह सोवियत संघ से था यानी बगल में किसका है अमेरिका का है लेकिन इनको जो प्यार था ना वो किससे था क्यूबा को प्यार था सोवियत संघ से समझ रहे हो यानी ये बगल में है अमेरिका का लेकिन इसको प्यार किससे था सोवियत संघ से अब क्यूबा में सोवियत संघ क्या किया सोवियत संघ क्यूबा को पैसा देता
29:11 था हथियार देता था और अपनी सेना यहां पर रखता था क्यों रखता था अपनी सेना यहां पर ताकि अमेरिका पर निगरानी बना सके। अमेरिका पर हमेशा नजर रखे रख सके। नजर रखने के लिए अपने दुश्मन पर हमेशा नजर रख सके। तो सोवियत संघ के जो राष्ट्रपति थे निकतन खुश वहां के निकतन खुश प्रधानमंत्री थे। तो उन्होंने क्या किया? क्यूबा में आया और यहां पर उन्होंने सेना रखा, अपना हथियार रखा और क्यूबा को पैसा वगैरह भी दिया और अपनी सेना हथियार रख के अमेरिका की तरफ नजर बना के रखा कि अमेरिका जब भी चाहे तो हमला कर सकते हैं। ठीक है? और तो क्यूबा बगल में था अमेरिका का लेकिन क्यूबा का संबंध है सोवियत संघ से। ठीक? तीन हफ्ते के बाद क्या हुआ कि ये सोवियत संघ के जो नेता है निकेतन खुशब इनको ऐसा लगा कि शायद जो अमेरिका है ना वो क्यूबा पर हमला करने वाला है। ऐसा किसको लगा? सोवियत संघ के
29:58 नेता को लगा जिसका नाम था निकेतन खुशचेब। इनको ऐसा लगा निकतन को लगा कि शायद अमेरिका क्यूबा पर हमला करने वाला है। जैसे इनको ऐसा लगा तो इन्होंने क्या किया? यह महाशय ने क्या किया? यहां पर मिसाइल एक्टिव कर दिया। यहां पर जो हथियार रखा था उसको एकदम तैनात कर दिया। कहा कि एकदम एक्टिव कर दिया। कहा कि अब हमला कभी भी कर देंगे। बस एक बटन दबाएंगे सीधा हमला। तो इस तरह से उन्होंने यहां पर मिसाइल जितना भी रखा था जितना भी बम वगैरह रखा था सब कुछ यहां पर एक्टिव कर दिया। ठीक है? अब अमेरिका को कुछ पता भी नहीं है कि क्या हो रहा है। अमेरिका को इसका खबर तीन हफ्ते के बाद पता चला। कितना हफ्ता? तीन हफ्ता। यानी अमेरिका को पहले कुछ नहीं पता था। तीन हफ्ते के बाद अमेरिका को पता चला कि जो सोवियत संघ है वह हथियार वगैरह यहां पर रखा है और यहां हमला करने वाला है। फिर
30:43 अमेरिका ने क्या किया? अपना पांडुबी निकाला सब कुछ निकाला और जितना भी हथियार सोए संघ से क्यूबा में आ रहा था ये सब हथियार को रोकने का कोशिश किया है ना और फिर बहुत ज्यादा सब कुछ करके फिर सोएस और अमेरिका के बीच में किसी तरह से कोई युद्ध नहीं हुआ। इन दोनों के बीच में बातचीत हो गई। है ना? तो यहीं पर ऐसा लग रहा था कि कभी भी अमेरिका पर हमला हो सकता है क्योंकि सोवियत संघ पूरी तरह से हथियार वगैरह सब कुछ एकदम तैनात करके रखा था। नजर बनाए रखा था। तो फिर भी यहां पर कोई युद्ध नहीं हुआ। तो इसी को क्यूबा का मिसाइल संकट कहते हैं। क्योंकि क्यूबा में जो मिसाइल रखा था, जो बम रखा था वो सब यहां फेंकने वाला था। लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। इसलिए इसको क्यूबा का मिसाइल संकट कहते हैं। और ये क्यूबा का मिसाइल संकट कब हुआ? पहला सवाल 1962 में। क्यूबा क्या है? एक द्वीपीय देश है। क्यूबा का मिसाइल संकट कब
31:29 हुआ? 1962 में हुआ था और यहां पर जो है सोवियत क्या कहते हैं? इसी को क्यूबा का मिसाइल संकट को ही शीत युद्ध का चरम बिंदु कहा जाता है। ठीक है? चलिए अब यहां पर देख लीजिए वही जवाब लिखा गया है। क्यूबा का मिसाइल संकट क्या है? तो क्यूबा अमेरिका के तट से यानी अमेरिका का तट। तत का मतलब होता है किनारा। तो अमेरिका के कि क्यूबा जो है अमेरिका के किनारा से लगा हुआ एक छोटा सा द्वीपीय देश है। एक छोटा सा देश है। यह नजदीक तो अमेरिका का है लेकिन क्यूबा का जो जुड़ाव है वो सोवियत संघ से था और सोवियत संघ उसे आर्थिक तथा वित्तीय सहायता देता था। यानी सोवियत संघ क्या करता था? इनको पैसा देता था। सब तरह से मदद करता था। 1961 के अप्रैल महीने में सोवियत संघ के जो नेता थे उनको ऐसा लगा चिंता होने लगा कि शायद अमेरिका जो है वो क्यूआ पर हमला कर देगा। ये सोए संघ को लगा
32:16 कि जो अमेरिका है वो युवा पर हमला कर देगा। ये किसको लगा? सोए संघ को। तो उनको ये लगा। इसलिए उन्होंने क्या किया? सोएस संघ ने क्या किया? 1962 में सोएस संघ के जो नेता थे निकेतन खुशचेब उन्होंने क्या किया? क्यूबा में अमेरिका के खिलाफ परमाणु बम जो है वो तैनात कर दिया। उन्होंने क्यूबा में अमेरिका के खिलाफ परमाणु बम तैनात कर दिया। इसका पता अमेरिका को तीन हफ्ते के बाद लगा। अमेरिका को इसका खबर कब लगा? तीन हफ्ते के बाद उनको पता चला था कि क्यूबा में ऐसा हो रहा है। अमेरिका के जो राष्ट्रपति थे उस वक्त में कौन थे? जो एफ केनेडी याद रखिएगा क्या कहते हैं? सोवियत संघ के नेता का नाम क्या है? निकतन खुशफ और अमेरिका के राष्ट्रपति का नाम क्या था? जो एफ केनेडी तो अमेरिका को तीन हफ्ते के बाद इसका पता लगा कि ऐसा कुछ होने वाला है। है ना? युद्ध वगैरह करने वाला है स्वयसंग। तो अमेरिका के जो राष्ट्रपति थे जो एफ केनेडी
33:03 इनको युद्ध छिड़ने से हिचकिचा रहे थे। इनको डर लगने लगा कि भाई क्या होगा? तो अमेरिका ने अपने जंगी बेरों को आगे कर दिया। यानी जो पांडुब्बी वगैरह है उनको आगे कर दिया समुद्र के रास्ते से ताकि क्यूबा की तरफ जो भी सोवियत संघ का जहाज आ रहा है उसको रोका जाए। है ना? क्योंकि सोविए संघ से बहुत सारी जहाज वगैरह यहां पर आ रहा था युद्ध करने के लिए। तो जो अमेरिका है उन्होंने अपना जंगी बेरा को यानी पांडुब्बी वगैरह को यहां पर भेजा ताकि जो भी यहां से यहां आ रहा है इसको रोका जाए। ठीक है? और जहाजों को रोका जाए। इन दोनों महाशक्तियों के बीच ऐसी स्थिति बन गई जिससे लगा कि युद्ध होकर रहेगा लेकिन युद्ध नहीं हुआ और दुनिया तीसरा युद्ध से बच गया। तीसरा विश्व युद्ध से बच गया। इसी घटना को क्यूबा का मिसाइल संकट के नाम से जाना जाता है और क्यूबा मिसाइल संकट को शीत युद्ध का चरम बिंदु कहा जाता है। है ना? क्यूबा मिसाइल संकट को क्या
33:48 कहा जाता है? शीत युद्ध का चरम बिंदु। ठीक है? चलिए, अब ये लास्ट क्वेश्चन है और ये क्वेश्चन है इसके बाद। क्वेश्चन क्या है? कि महाशक्तियां छोटे देशों के साथ सैन्य गठबंधन क्यों रखती थी? तीन कारण बताइए। आखिर जो महाशक्ति है जैसे सोवियत संघ जैसे अमेरिका ये सभी बड़े महाशक्तिशाली देश थे। तो आखिर ये देश छोटे-छोटे देशों के साथ क्यों अपना संबंध बना के रखता था? क्या ऐसा कारण था? ठीक है? तो हम लोगों को जवाब में लिखना है कि जो छोटे-छोटे देश है ना वो बड़े-बड़े देशों के बड़ा काम आते थे। जैसे बड़े-बड़े देश जैसे अमेरिका है उसको अपना सेना रखना है। तो सेना कहां रखेगा? जैसे सोवियत संघ ने क्यूबा में अपना सेना रख दिया अमेरिका पर नजर बनाने के लिए। क्योंकि देखो आपका जो भी दुश्मन होगा ना तो दुश्मन पर नजर रखना पड़ता है कि वह
34:33 क्या कर रहा है। उसका सारा कारनामा पर नजर रखना पड़ता है कि भाई वो कब कहां जा रहा है, किससे मिल रहा है, क्या कर रहा है? जासूसी करना पड़ता है। तो इधर जो बड़े-बड़े देश हैं वो छोटे-छोटे देश को इसीलिए छोटे-छोटे देश उनके लिए काफी महत्वपूर्ण था। क्योंकि जो अमेरिका है, सोएसघ है ये सब क्या करता था? छोटे-छोटे देश को अपने तरफ लाता था और छोटे-छोटे देशों में जाकर के अपना सेना रखता था। जैसे चाइना वो अभी यही दिमाग लगा रहा है। है ना? आप देखोगे भारत के चारों तरफ वो अभी कब्जा कर रहा है। जैसे मान लो ये भारत है। है ना? इधर नेपाल है तो नेपाल में भी चाइना अपना सेना रखने का कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश से भी अपना अच्छा संबंध बना रहा है। श्रीलंका से भी अपना अच्छा संबंध बनाया। पाकिस्तान से भी उनका अच्छा संबंध है। तो ये क्या करेगा? जो चाइना है वो चारों तरफ से भारत को घेरने का सोच रहा है। नेपाल से, इधर से, श्रीलंका से,
35:18 बांग्लादेश से, पाकिस्तान से, चारों तरफ से ताकि जब कुछ हो तो डायरेक्ट वो अपना काम कर सके। इसी तरह बड़ा-बड़ा देश सोचता है। यहां पर भारत को भी अच्छा सोचना चाहिए। ठीक है? तो उसी तरह उस समय जो सोवे संघ थे, जो अमेरिका थे, ये भी छोटे-छोटे देशों पर इसीलिए कब्जा करते थे ताकि अपना हथियार रख सके। वहां पर अपनी सेना रख सके ताकि कल युद्ध हो तो सीधा बगल रहेगा। तुरंत हमला कर देंगे। समझ गए आप चीजों को? बस यही होता है। और छोटे-छोटे देशों में तेल वगैरह मिल जाता है। अब देखो कोई गरीब देश है। अब वहां तेल मिल गया। अब वो गरीब देश तो जमीन के नीचे से तेल निकाल नहीं पाएगा। ये बड़ा-बड़ा देश क्या करता था? जाता था। तेल वगैरह सब निकाल लेता था। कुछ तेल उनको दे देता था। बड़ा-बड़ा संसाधन मिल गया। मान लो जमीन के नीचे सोना मिल गया। मान लो जमीन के नीचे कोई कोयला मिल गया। तो ये सब छोटा देश निकाल नहीं पाता
36:04 था। अमेरिका सोए संघ ये सब जाता था। सब निकाल लेता था। क्योंकि इनके पास बहुत सारा मशीन था, टेक्नोलॉजी था। यही सब है। है ना? तो महाशक्तियां छोटे देशों के साथ सैन्य गठबंधन क्यों रखती थी? छोटे देशों के साथ अपना संबंध क्यों बनाती थी? तो महाशक्तियां द्वारा छोटे देशों के साथ सैन्य गठबंधन रखने के निम्नलिखित तीन कारण थे। पहला छोटे देश से महाशक्तियां अपने हथियार और सेना का संचालन करना चाहती थी। यानी जो छोटा देश है वहां पर वो अपना हथियार रखता था। अपनी सेना रखता था। महाशक्तियां छोटे देशों में सैनिक ठिकाने स्थापित करना चाहती थी जिसमें वो एक दूसरे की जासूसी कर सके और छोटे-छोटे देशों में वो अपना सैनिक ठिकाना बनाता था ताकि दूसरे देशों का जासूसी कर सके। जैसे सोएस क्यूबा पर कब्जा किया। अमेरिका के बगल में था। क्यों कब्जा किया क्यूबा पर? क्यूबा पर। क्यों अपना संबंध बनाया क्यूबा के साथ? ताकि अमेरिका की निगरानी किया जा सके। देखरेख किया जा सके कि अमेरिका क्या-क्या
36:50 कर रहा है। छोटे-छोटे देश सैन्य खर्च वहन करने में मददगार हो सकते थे। और सेनाओं के खर्च में भी छोटे-छोटे देश काफी मददगार होते थे। तो ये कई सारे कारण हैं जिसकी वजह से महाशक्तियां छोटे छोटे देशों के साथ गठबंधन करता है। ठीक है? अगला सवाल। परमाणु अपसार संधि क्या है? एनपीटी ये सवाल पूछा जाता है। परमाणु अप्रसार संधि से आप क्या समझते हैं? यानी एनपीटी क्या है? ठीक है? तो बेसिकली बहुत सिंपल सा जवाब आप देख लीजिए इसका क्या है? देखो परमाणु अपसार संधि प्यारे बच्चों क्या है बेसिकली कि 1967 से पहले ध्यान दीजिए 1967 से पहले जो भी देश परमाणु बम बनाया था यानी परमाणु हथियार बनाया था। कब? 1967 से पहले जो भी देश परमाणु हथियार बनाया था
37:35 सिर्फ वही देश परमाणु रख सकता है। यानी वही देश परमाणु हथियार रख सकता है और परमाणु बम बना सकता है। बाकी जो देश 1967 से पहले परमाणु हथियार नहीं बनाया था वो परमाणु हथियार नहीं रख सकता। यानी कहने का मतलब कौन-कौन सा देश है जो 1967 से पहले परमाणु हथियार बनाया था? तो उन देशों में सबसे पहला देश का नाम है अमेरिका। दूसरा देश का नाम है ब्रिटेन। बिरीन यानी कि जिसको हम लोग इंग्लैंड कहते हैं। तीसरा देश का नाम है चाइना। चौथा देश का नाम है प्यारे बच्चों फ्रांस। ठीक है? और पांचवा देश का नाम क्या है? रशिया। यानी ये पांच देश है जिनके पास क्या था? परमाणु हथियार था। परमाणु बम था जो कि 1967 से पहले बनाया था। तो ये जो परमाणु अप्रसार संधि आया यानी कि एनपीटी आया। इसमें क्या लिखा गया कि जो देश 1967
38:23 से पहले परमाणु बम बनाया है या परमाणु बम का परीक्षण किया है वही सिर्फ परमाणु हथियार रख सकता है वही बना सकता है बाकी और कोई देश नहीं बना सकता ये इसमें लिखा गया था भारत कहा कि ऐसा क्यों आज मेरे पास टेक्नोलॉजी नहीं है पैसा नहीं है तो ऐसा थोड़ी कि हम परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे हम कल बनाएंगे परसों बनाएंगे ठीक है तो कौन-कौन से देश ए से अमेरिका बी से ब्रिटेन सी से चाइना यानी कि ए बी सी और एफ आर ए बी सी एफ आर है ना अमेरिका अमेरिका ब्रिटेन चाइना फ्रांस रशिया ये पांच देश ही परमाणु हथियार रख सकता था। बाकी नहीं। यही चीज इस परमाणु अप्रसार संधि में लिखा गया। ठीक है? तो वही है। देखो यह संधि 1968 में वाशिंगटन, लंदन और मास्को में हस्ताक्षरित हुई थी। यानी पूछा जाएगा कि परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर। सिग्नेचर कब हुआ था? 1968 में।
39:09 कहां पर हस्ताक्षर हुआ? सिग्नेचर कहां पर हुआ था? वाशिंगटन में। लंदन में और मास्को में। तीन जगह पे। वाशिंगटन जो कि अमेरिका में पड़ता है, लंदन जो कि इंग्लैंड में पड़ता है, मास्को जो कि रूस में पड़ता है। इन तीनों देशों में 1968 में इस एग्रीमेंट पर इस एनपीटी संधि पर हस्ताक्षर हुआ और 1970 से प्रभावी हुआ। यानी पूछा जाएगा कि परमाणु प्रसार संधि लागू कब से हुआ? 1970 से। हस्ताक्षर कब हुआ? 2 साल पहले 1968 में। ठीक? इसमें क्या लिखा गया? इसका उद्देश्य था जो परमाणु हथियारों का फैलाव को रोकना। यानी परमाणु हथियार जो बन रहा है इसको रोकना। इस संधि के तहत क्या लिखा हुआ था कि केवल पांच देश अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन ये 1967 से पहले परमाणु विस्फोट कर चुका है। यानी ये 1967 से पहले परमाणु बम बनाया बनाया जा बना बनाया है। इसलिए यही सिर्फ परमाणु हथियार रख सकते हैं। बाकी जो देश है वो हथियार
39:57 नहीं बना सकते। यानी वो नहीं रोक मतलब कि परमाणु हथियार नहीं बना जा बना सकते बाकी सब देश। ठीक है? और 1995 में इस संधि को अनियत काल के लिए बढ़ा दिया गया। और 1995 में यह एनपीटी को हमेशा के लिए बढ़ा दिया गया। ठीक है? ठीक है? तो ये था आपका परमाणु प्रसार संधि। उम्मीद करते हैं प्यारे बच्चों आपको ये क्लास बहुत अच्छी लगी होगी। अगर सच में अच्छी लगी है तो आप लोग कमेंट में लिखिए। कमेंट में लिखिए कि आपको आज की जो क्लास है कैसी लगी। है ना? और हमें भी बहुत अच्छा लगा। आप सभी लोगों को बहुत अच्छे से समझा करके। है ना? और प्यारे बच्चों ऐसे ही आप लोग प्यार करते रहिए, हंसते रहिए, मुस्कुराते रहिए। चैनल को सब्सक्राइब कर दीजिए। जो भी बच्चे अभी पढ़ना चाहते हैं हम लोगों से, है ना? आपको पता ही है कि हम लोग कहां पर पढ़ाते हैं। हम लोग प्यारे बच्चों तनु क्लासेस ऐप में
40:42 पढ़ाते हैं। वहां पर एक बैच है सफलता बैच। ठीक है? आप क्या करो? प्ले स्टोर से पहले तो तनु क्लासेस ऐप डाउनलोड कर लो क्योंकि यह पीडीएफ वगैरह सब कुछ आपको वही मिलेगा। है ना? तो तनु क्लासेस एक ऐप है। इसको प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लेना। इसी ऐप में एक सफलता बैच मिलेगा। इसी में हम लोग पढ़ाते हैं। पूरी तैयारी करवाते हैं। और अगर आप ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो यह नंबर आप नोट कर लीजिए। इसी नंबर पर आप कांटेक्ट करिएगा। 870 9610975 ठीक है? यह नंबर है। इसी नंबर पे आपको कॉल वगैरह करना है कुछ भी पूछने के लिए। ठीक है? तो कैसा लगा क्लास? जरूर लास्ट में जाते-जाते बताना। इस चैप्टर से जितना भी इंपॉर्टेंट क्वेश्चंस हैं, हमने लगभग सारे क्वेश्चन को कवर किया। थैंक यू सो मच सर। अच्छा लगा सर लेकिन देखे नहीं। जॉइ है सर। हां। जया दास सर मेरा नाम मंज
41:31 है। 2025 में एग्जाम दिया हूं जिसमें मेरा 396 आया है। पॉलिटिकल में 81, हिस्ट्री में 84, जग्राफी में 89 अरे वाह हिंदी में 86, इंग्लिश में 59, इंग्लिश में मात्र 59 नहीं कोर्स आपको ज्वाइन करना पड़ेगा तभी पीडीएफ आपको मिलेगा। थैंक यू सो मच अंजुम वेरी मोस्ट वेलकम रहमतुल्लाह बरखा वसिर खान स्टूडेंट सर आपका क्लास चलो वेरी नाइस क्लास सर अच्छे से समझ में आया ना? हर एक चीज अच्छे से समझ में आया। कोई दिक्कत नहीं हुई। मजा आया क्लास करने में? जल्दी से बताओ आप सभी लोग। और कैसा लगा आज की क्लास? यह भी जरूर बताना। फिर मिलेंगे हम लोग प्यारे बच्चों अगली क्लास में। ऐसे ही आप लोग हंसते रहें, मुस्कुराते रहें। पढ़ाई करते रहें।
42:17 ऑल द वेरी बेस्ट। थैंक यू सो मच। बाय-ब। हम्म।