0:08 जय हिंद दोस्तों, मैं नवीन शर्मा आप सभी का स्वागत करता हूं। आशा करता हूं आप सब एकदम अच्छे हैं। एकदम बेहतरीन हैं। एक बार सारे दोस्त कमेंट सेक्शन में बताएंगे कि आप सब कैसे हैं। बहुत अच्छा लगता है साथ ही जब आप अपनी संवेदनाएं या भावनाएं हम तक पहुंचाते हैं और यह लिख के पहुंचाते हैं कि हां आप एकदम अच्छे हैं। स्थितियां चाहे जो भी हो या आप अभी किसी भी तरह के माहौल में हो। चाहे आर्थिक स्थिति अभी अच्छी ना हो। लेकिन आपके अंदर एक जज्बा और जुनून साथी जरूर होगा। जो भविष्य के अपने निर्माण को लेकर के आपने योजनाएं बना रखी होंगी। उन पर आप खरे उतरते होंगे और हर रोज खरे उतरते होंगे और एक दिन वो मुस्कुराहटें साथ ही आएंगी। आप सारे साथियों का स्वागत है। विनीत चौधरी नवीन सर का बोझ कृष्णा दीक्षित और यह बोझ कब उतरेगा? अनूप वॉग, पूजा चौधरी, निकिता
0:54 सैनी जरा सा झूम लूं मैं। आशुतोष माहोर सैवलू फोगाट नीरज यादव सारे प्यारे साथियों का बहुत सारा स्वागत है और दोस्त आज हम एक नया टॉपिक शुरू कर रहे हैं जिसका नाम है 1857 की क्रांति यानी कि रिवॉल्यूशन ऑफ 1857 यहां पर दो कक्षाएं साथी हमको पढ़नी पड़ेंगी 1857 का संग्राम और इस दौर में या इससे पहले जो कृषक आंदोलन हुए जो पीजेंट्स के आपका मूवमेंट्स हुए थे किसानों ने जो विद्रोह किया उसको हम कल की कक्षा में पढ़ रहे होंगे और उसके बाद में फिर हम चलेंगे आपका जो बीच बीच में आपका गवर्नर वायसराय आए जैसे कि आपका मुख्य रूप से लिटन और रिपन को हमको पढ़ना होगा और फिर हम भारत के राष्ट्रवादी चरण की तरफ यानी कि कांग्रेस के निर्माण और स्वतंत्रता संग्राम की तरफ बढ़ेंगे और यूं कहें तो मुख्य रूप से वह इतिहास आ चुका है
1:40 जिसको आपकी समझ बहुत अच्छे से होनी चाहिए। तो एक बार थम्स अप कर देंगे। जी हां, हम पर सब पढ़ने के लिए तैयार हैं। पिछली कक्षाओं में साथी आपने देखा किस तरह से भारत को विवश किया गया और किस तरह से भारत के साथ में एक लूटिंग प्रोसेस को चलाया गया। एक लूट की प्रणाली अपनाई गई और भारत को खोखला करने का काम किया गया। और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी जिसका प्रसार अब होता जा रहा था, उसकी लालसा दिन पर दिन बढ़ती जा रही थी। अब वह और अधिक साम्राज्य विस्तार चाहते थे। अब वह और अधिक व्यापार चाहते थे या कहें तो अधिक लूट भारत के साथ में अब वो करना चाहते थे और उसी लूट का एक परिणाम है कि भारत में एक क्रांति हुई जब भारतीय नरोसों के अंदर या भारतीय राजाओं के अंदर यह भय उत्पन्न हो गया और यह डर उत्पन्न हो गया कि अब उनसे उनका समस्त
2:26 साम्राज्य या समस्त जो क्षेत्र है वह ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा छीन लिया जाएगा। तो इस संदर्भ में जितने भी भारतीय राज्य इकट्ठे हुए या ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साम्राज्यवाद जो नीति थी उसके साम्राज्यवादी नीति के खिलाफ खड़े हुए या उनकी जितनी भी नीतियां थी जो दोहन कर रही थी भारत का उस सब के खिलाफ खड़े हुए और अन्य कारण भी रहे बहुत सारे कारण रहे। उन सभी पर हम प्रकाश डालेंगे कि वो क्या-क्या कारण थे जिन्होंने 1857 की क्रांति को जन्म दिया। तो सबसे पहले हम कारणों पर चर्चा करेंगे। ठीक है? हां जी। जी एनटीपीसी एग्जाम की डेट आ चुकी है और एनटीपीसी की आपकी परीक्षा 5 जून से लेकर के 23 जून के बीच में हो। एक बार डेट लिखेंगे जिन साथियों का एनटीपीसी का एग्जाम हो 5 से 23 के बीच में आपकी परीक्षा होगी। ठीक है? ये डेट आप सब लोगों को पता होनी चाहिए। ठीक है? यह ऑफिशियल
3:14 डेट है। तो शुरू करें आज की क्लास को। को थम्स अप कर दें एक बार और नोट बना करके लिखेंगे 1857 का महासंग्राम या लिख लीजिए 1857 का रोहो या 1857 की क्रांति कहें तो ज्यादा सही शब्द हो मतलब किन-किन ने इसको क्या-क्या शब्द दिए हैं वह सब जानेंगे। किस-किस के क्या-क्या वक्तव्य थे। रिवॉल्यूशन ऑफ रिवॉल्यूशन ऑफ 1857 1857 की क्रांति अंग्रेजी शासन अपनी लूट को कर रहा था। तो इसके बारे में बहुत सारे लोगों के स्टेटमेंट है। पहले तो वो स्टेटमेंट सुनिए। जैसे इसको प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कहा है। प्रथम स्वतंत्रता
4:00 संग्राम। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम किसके द्वारा कहा गया है? आप बताइए। इसको प्रथम स्वतंत्रता संग्राम वि डी सावरकर ने कहा है। वि डी सावरकर विनायक दामोदर सावरकर ने कहा है। वि डी सावरकर ने। ठीक है? फर्स्ट फ्रीडम स्ट्रगल। पहले इन स्टेटमेंट्स को आप अपनी कॉपी में नोट करें और फिर चर्चा करें। फर्स्ट फ्रीडम स्ट्रगल। किसने कहा है? वि डी सावरकर ने कहा है। वि डी सावरकर ने कहा है। स्टेटमेंट जो इसका आता है वह है ना तो यह पहला इसको माना गया है ना पहला ना पहला ना राष्ट्रीय ना तो इसको पहला ही कहा जाएगा क्योंकि इससे पहले बहुत सारे कृषक आंदोलन
4:46 हो चुके थे। ना राष्ट्रीय और ना ही स्वतंत्रता संग्राम था यह और ना ही स्वतंत्रता संग्राम। स्वतंत्रता संग्राम यह कथन दिया है आपका किसने? यह कथन दिया है आपका आरसी मजूमदार। इसको किसने कहा है? आरसी मजूमदार ने कहा है। आरसी मजूमदार। क्या कह दिया मजूमदार साहब ने? इसको नाम दिया है ना तो यह पहला था नीदर फर्स्ट। नीदर फर्स्ट। नर नेशनल नर
5:31 नेशनल नर नेशनल नर द फ्रीडम स्ट्रगल नर द फ्रीडम फ्रीडम स्ट्रगल यह किसके द्वारा कहा गया है यह कहा गया है आपका आरसी मजूमदार के द्वारा ओके एक स्टेटमेंट और आता है आपका धर्मांधो और ईसाइयों के बीच का यह संघर्ष था धर्मांधो और ईसाइयों के बीच एक संघर्ष ईसाइयों के बीच संघर्ष बीच संघर्ष ये इस तरह का स्टेटमेंट दिया है आपका यानी कि यह हो गया आपका कॉन्फ्लिक्ट बिटवीन कॉन्फ्लिक्ट्स बिटवीन रिलीजियस
6:17 फनेटिक्स रिलीजियस फनेटिक्स दोनों लैंग्वेज में नोट्स बनाया करें आप भी रिलीजियस पेनेटिक्स एंड क्रिश्चियंस क्रिश्चियंस एक ब्रिटिश इतिहासकार हुए जिसका नाम है आली एल ई आर रीस लिख लेना आप एल आर रीस एल आर रीस ने ये कहा है एक स्टेटमेंट आता है यह सभ्यता और बर्बरता के बीच युद्ध था इन सभी स्टेटमेंट्स पर गौर देना यह सभ्यता बहुत पूछे जाते हैं परीक्षा में किसने कहा था सभ्यता ता और बर्बरता के बीच बीच एक युद्ध या संघर्ष था। यह किसने कहा है? संघर्ष था। यानी कि
7:04 इसको हम कह सकते हैं स्ट्रगल बिटवीन स्ट्रगल बिटवीन सिविलाइजेशन सिविलाइजेशन एंड बारबरिज्म एंड बारबरिज्म यह स्टेटमेंट है टीआर होम्स का टीआर होम्स का और एक स्टेटमेंट आपका आता है कि इसको एक षड्यंत्र कह दिया था 1857 57 की क्रांति क्रांति क्रांति एक षड्यंत्र थी। षड्यंत्र थी। यानी हम कह सकते हैं रिवॉल्यूशन ऑफ
7:50 1857। द रिवॉल्यूशन वाज वाज ए कास्परेसी। कॉनस्परेसी। यह स्टेटमेंट दिया है आपका आउटरम टेलर ने। आउटरर्म टेलर को आपने पढ़ा था। बताइए आउट्रम टेलर कहां पर आपने पढ़ा है? हमने आपको बताया था जब अवध पर माल एडमिनिस्ट्रेशन के एलगेशंस लगाए गए थे तभी वहां पर सिलीमैन की तबीयत खराब होने के बाद में जब उसने अपना इस्तीफा दे दिया तो उसके बाद में आउटटर्म को रिपोर्ट के लिए चयनित किया गया था। ओके तो यहां पर बताएं एक बार इन स्टेटमेंट को देखें तो वि डी सावरकर ने इसको कहा प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और वि डी सावरकर ने और भी अन्य बातों पर प्रकाश डाला जिनमें से प्रमुख थी वि डी सावरकर ने कहा है कि उस समय की जो ब्रिटिश अधिकारी थे और
8:37 जो भारतीय सेना थी अगर मैं आपको बताऊं इस समय 1857 की क्रांति के समय पर भारत की सेना कैसे थी तो भारतीय सैनिकों को यह भर्ती करते थे निचले पदों पर यस और नो तो जो इंडियन सोल्जर्स थे इंडियन इंडियन सोल्जर्स थे उनकी संख्या थी आपका 225000 वैसे तो 22000 थी लेकिन सवा5 लाख एक हम मोटे तौर पर आईडिया ले सकते हैं और जो ब्रिटिश सोल्जर्स थे ब्रिटिश सोल्जर्स थे यहां पर जो ब्रिटिश सैनिक थे उनकी संख्या थी 45000 रूल यही लोग कर रहे थे और भारतीय सैनिक इनमें ज्यादा होते थे लेकिन निम्न पदों पर होते थे निचले पदों पर होते थे तो यहां पर एक बात पर प्रकाश और डाला बी डी सावरकर उन्होंने कहा कि ब्रिटिश अधिकारी अपनी परेड के दौरान में बहुत सारी जगह पर पैगंबर और राम के खिलाफ शब्द बोलते थे और
9:24 उनको गाली सूचक शब्द दिया करते थे और साथ में सैनिकों को भी प्रेरित करते थे। इस तरह की और सैनिकों के सामने ही इस तरह के वक्तव्य उनके होते थे। ठीक है? तो प्रथम स्वतंत्रता संग्राम उन्होंने कहा। ना तो इसको पहला माना कि भाई इससे पहले बहुत सारी जगह पर संघर्ष हुए आपका किसानों के ना इसको राष्ट्रीय कहा गया और ना ही स्वतंत्रता संग्राम आरसी मजूमदार ने। यहां पर यह जो आपका एलियारीस कहता है धर्मा और ईसाइयों के बीच संघर्ष धर्मादिस ने किसको कहा धर्म का अंधा होना इस बात का क्या मतलब होता है यानी कि जब कोई एक धर्म एक धर्म का व्यक्ति दूसरे धर्म में बहुत सारी बुराइयां या उसमें सिर्फ और सिर्फ आलोचना ढूंढने लगे तो वह उसको धर्मांध कहने लग जाता है। तो यह धर्मांध किसको कह रहे थे? उस समय भारत में जो हिंदू और
10:11 मुसलमान थे उनको यह बोल रहे थे धर्मांध और ईसाई मैंने आपको कहा इनके ऊपर मैंने कल आपको एक थ्योरी बताई थी उस थ्योरी का क्या नाम है वाइट मैनस बर्डन सफेद व्यक्ति का बोझ ये खुद को ज्यादा सभ्य समझते थे और यह मानते थे कि यह जो हिंदू और मुसलमान इस देश में हैं यह सभ्य प्रजाति नहीं है। यह है सभ्यता और बर्बरता तो सभ्य खुद को मान रहे हैं और बर्बर किसको कह रहे हैं? जो अपने हितों के लिए आवाज उठा रहे हैं। यानी कि जिनका शोषण अब तक यह कर रहे थे। यदि उन्होंने अपने हितों के लिए आवाज उठा दी तो उनको कहा गया फिर यहां पर आपका सभी को कि वो लोग बरबर जाती हैं। 1857 की क्रांति एक षड्यंत्र थी और मुस्लिमों का एक षड्यंत्र इसको बताया गया आपका आउटर्म टेलर के द्वारा कि यहां के जो मुसलमान हैं वो एकजुट होकर के इस षड्यंत्र को बढ़ा रहे
10:57 हैं। इस तरह से इस तरह से इस तरह से यह बातें बढ़ाई गई। बात समझेंगे कोई दिक्कत? अच्छा एक बात आती है इसको सिपाही म्यूटिनी किसने कहा था? सिपाही म्यूटिनी सेन साहब एक इतिहासकार हैं। इसको उन्होंने बोला सिपाही म्यूटिनी एक सैनिक विद्रोह था। यह भी एक अच्छा कथन है। सिपाही म्यूटिनी। यह सेन थे जिन्होंने कहा था और सेन को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि 1857 का जो संग्राम है उसके ऊपर वह इतिहास को लिखें। ठीक है? इतिहास को लिखें। ठीक है? तो इस तरह से वह जानकारी उनको दी गई थी। कोई दिक्कत इतनी बात
11:43 समझे? इतनी बात समझ में आई कि उस तरह का माइंडसेट क्या था? अंग्रेजी सरकार की लूट से आप परिचित हैं। बहुत अच्छे से परिचित हैं। आगे वह घटनाक्रम हम शुरू करेंगे कि वह क्या कारण थे। तो आप लिखना रीज़ंस क्या थे 1857 की क्रांति के? कारण। कारण अर्थात उसके रीजंस रीजंस तो बहुत सारे कारण रहे उनमें से जो प्रमुख कारण है पहले सबसे पहले उन पर प्रकाश डालेंगे हम सबसे प्रमुख कारण था एक तो आपका आर्थिक कारण सबसे पहला है इकोनॉमिक रीजन आर्थिक कारण आर्थिक कारण यह परीक्षाओं में अपने शब्दों में पूछे जाते हैं। इकोनॉमिक रीजंस
12:30 इकोनॉमिक रीजंस क्या थे? इकोनॉमिक रीजंस में लिखना पहली चीज जो पहला बिंदु है पहला बिंदु लिखना कि भारत के व्यापार और उद्योग धंधे भारत के व्यापार और उद्योग धंधों को उद्योग या उद्योगों को उद्योगों को ईस्ट इंडिया कंपनी ने नष्ट कर दिया था। नष्ट कर दिया था। नष्ट कर दिया था। लिखेंगे क्या? इंडियन बिजनेस इंडियन बिजनेस एंड
13:15 इंडस्ट्रीज एंड इंडस्ट्रीज वर डिस्ट्रॉयड बाय डिस्ट्रॉयड बाय ईस्ट इंडिया कंपनी। कोई भी बच्चा अतिरिक्त बातों में लगा हुआ हो अपने मन को संयम में रखना है। हमेशा कभी भी खुद को भटकने नहीं देना है। और खुद से यह वादा करना है कि क्लास में मैं सिर्फ सुनने के अलावा और लिखने के अलावा अतिरिक्त कोई भी बात नहीं करूंगा। जब मुझसे प्रश्न पूछा जाएगा तभी मेरी जवाबदेही होगी। अन्यथा मैं खुद को बांध करके रखूंगा। एकदम से संयमित रखूं। तो भारत के व्यापार और उद्योग धंधों को ईस्ट इंडिया कंपनी ने नष्ट कर दिया। इसको आप भली-भांति जानते हैं। जैसे कि अगर मैं आपको बताऊं मैंने आपको बताया था। अब मेरा प्रश्न आपसे रहेगा कि प्राचीन समय में भारत विश्व की जीडीपी का कितने प्रतिशत
14:03 उत्पादन करता था? लगभग में आप एक संख्या बताइए। हमने आपके वर्तमान चाइना से भी तुलना करके आपको बताया था कि जब भारत में अन्य लोग नहीं आए थे तो भारत पूरे विश्व का 1/4 या हम कहें 24% टू 25% प्रोडक्शन करता था। तो भारत तो बहुत अच्छा था और उस समय अगर भारत की तुलना हम अन्य यूरोपीय देशों से करें तो कोई भी यूरोप का देश ऐसा नहीं था जिसके उद्योग धंधे भारत के मुकाबले अच्छे हो या भारत की तुलना में भारत से ज्यादा अच्छे हो। यानी भारत एक सोने की चिड़िया था। भारत में उद्योग धंधे यहां जो व्यापार था आपका वो खूब फल फूल रहा था। अरब देशों के साथ में यूरोप तक स्थल मार्ग से खूब व्यापार होता था। खूब मुनाफा भारत के लोगों को होता था। भारत के लोगों के पास में करने के लिए काम था।
14:48 रोजगार था। उन सबके पास में आपका इंडस्ट्रीज थी। ठीक है? तो अंग्रेज सरकार ने इसको कैसे फिर नष्ट कर दिया? तो अंग्रेजों ने क्या किया? आप जानते ही हैं। यहां का जो आपका रॉ मटेरियल होता था उस रॉ मटेरियल को जब यहां से लेके जाते थे तो उस पे तो टैक्स होता था नाम मात्र का। जैसे कि तीन चीजों के बारे में मैं आपको बता सकता हूं उदाहरण देकर के। जैसे एक तो इसमें क्या था? सूती वस्त्र थे जो कॉटन के थे। सूती वस्त्र थे आपका। एक इसमें जो भी रेशम के बने वस्त्र होते थे। रेशम के वस्त्र होते थे आपका। ठीक है? इल्क के जितने भी होते थे या आपका जितना भी गर्म कपड़ा होता था गर्म वस्त्र यानी कि जितने भी वूलन क्लोथ्स होते थे तो इन दोनों पर तो आपका 3.5% टैक्स होता था और गर्म वस्त्रों पर अंग्रेज सरकार कितना टैक्स
15:34 लगाती थी? 2% का टैक्स। यह क्या था? जो भारत से साथी क्या होता था? निर्यात होता था। भारत से निर्यात होता था। यानी कि अंग्रेज ही यहां से निर्यात कर रहे थे। हां या ना? यस और नो। हां जी भैया हम इस बात को समझते हैं। यानी यहां से तो सस्ते में लेकर जाते थे और जब यह सामान मैंने आपको बताया था ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा लंदन में ब्रिटेन से होकर के जब वापस भारत में आता था इंडिया वापस आता था तो इन्हीं पर टैक्स क्या हो जाता था? सूती वस्त्रों पर 10% रेशमी वस्त्रों पर आपका 20% और गर्म वस्त्रों पर आपका इंपोर्ट टैक्स लगता था 30% तो कैसे भारतीयों से एक लूट हो रही थी और कैसे भारतीयों ने अपने इन वस्त्रों के काम को करना छोड़ दिया और त्याग दिया या यूं कहें तो लाखों लोग
16:20 लाखों लोग इस देश में बेरोजगार हो गए और लाखों लोगों के बेरोजगार होने की स्थिति में अब उनके पास में एक विद्रोह जैसी भावना ही आएगी। यदि आप किसी से उसका रोजगार छीन लेंगे तो फिर वो कल को विद्रोह करेगा या उसके संसाधनों को आप छीन लेंगे तो उसके मन में आपके प्रति एक द्वेष की भावना पैदा होगी। हां या ना? हां या ना बताएंगे सारे लोग। सारे लोग जवाब देंगे। दूसरा बात। दूसरी क्या बात थी? दूसरा था इसमें लिखना प्रशासनिक कारण। प्रशासनिक कारण। सबसे प्रमुख कारणों पर बात करेंगे। छोटे-छोटे बहुत सारे कारण हैं। प्रशासनिक कारण यानी कि एडमिनिस्ट्रेटिव रीजंस क्या थे? एडमिन रीजंस या एडमिनिस्ट्रेटिव रीजंस। एडमिनिस्ट्रेटिव रीजंस क्या-क्या
17:07 थे? एडमिनिस्ट्रेटिव रीजंस जो थे उसमें प्रमुख था। आपका नंबर एक लिखना। जितने भी भारत के जागीरदार थे उनसे इन लोगों ने क्या कर लिया था? व्यवस्थाएं छीन ली थी। जागीरदारों आप जानते हैं किसानों को भूमि का मालिक बना दिया गया था। जो तालुके होते थे, गांव होते थे, उनमें जो मुखिया होते थे, ठीक है? उनके बहुत जगह अधिकार छीन लिए गए। राजवंशों में आप जानते ही हैं इन लोगों ने रेजिडेंट बिठा दिए। राजवंशों के विशेषाधिकारों को हटा देना। तो वो एक वर्ग भी क्या हो गया? इनके खिलाफ हो गया। विशेषाधिकारों को को हटा देना। यह भी एक प्रमुख कारण बना। रिमूवल ऑफ प्रिविलेजेस ऑफ जागीरदार, तालुकदार एंड डायनेस्टीज। रिमूवल
17:53 ऑफ रिमूवल ऑफ समझ रहे हैं ना दोस्त? हां भैया एक-एक वर्ग देखेंगे आप। एक तो मजदूरों का वर्ग इन्होंने खिलाफ कर दिया यहां पर और अभी जाग जागीरदारों का प्रिविलेजेस ऑफ जागीरदार जागीरदार तालुकदार तालुकदार एंड डायनेस्टीज। डायनेस्टी राजवंशों के अधिकारों को जब इन्होंने छीना। ठीक है? एक कारण तो यह हुआ प्रशासनिक कारण। दूसरा हमारे यहां के लोग फारसी भाषा को जानते थे। मैंने कहा हमारे यहां पर जो भाषा चलती थी उस समय पर जैसे आपका भारत में आपका दिल्ली सल्तनत रही मुख्य स्थानों पर आपका फिर बाद में मुगलों का एंपायर बहुत बड़ा हो गया। तो मुगलों की भाषा कौन सी थी? जरा आंसर
18:38 करें। मुगलों की भाषा कौन सी थी? तो सबका आंसर आएगा फारसी। तो उस समय पर भारत में क्या था? था जगह-जगह पर एक तो संस्कृत, अरबी और फारसी ये तीन भाषाएं ऐसी थी जो प्रचलन में थी और अंग्रेजों ने क्या बोल दिया जब मैकाले आया हमने कल आपको बताया मैकाले ने क्या कर दिया या आपका जो कोर्ट की भाषा थी उसको बदल के बेंटिक के समय पर क्या कर दिया गया आपका तो उन सबको बदल कर के आपका कर दिया गया भैया अंग्रेजी तो जो जनमानस था उसको तो वो प्रोसेस समझ में नहीं आया उसकी अंग्रेजी भाषा पर कोई ऐसी पकड़ ही नहीं थी तो इससे भी एक विद्रोह हुआ यह भी प्रशासनिक कारण माना जाता है पारसी सी भाषा के स्थान पर पारसी भाषा के स्थान पर अंग्रेजी भाषा स्थान पर अंग्रेजी
19:23 भाषा अंग्रेजी भाषा इंग्लिश लैंग्वेज इंग्लिश लैंग्वेज इंस्टीड ऑफ इंस्टीड ऑफ पर्शियन इंस्टीड ऑफ पर्शियन यानी पर्शियन भाषा की जगह इन्होंने तो एक विद्रोह पैदा होगा या नहीं होगा हां या ना? आप बताइए एक विद्रोह पैदा होगा या ना होगा? आप कहेंगे हां जी बहुत बढ़िया। बहुत अच्छा समझ रहे हैं स्टूडेंट एकदम सही जवाब आपने दिया है। जी भैया एक लैंग्वेज भी एक रीजन रहा। तीसरा तीसरा सबसे प्रमुख कारण था धार्मिक और धार्मिक और सामाजिक कारण। धार्मिक और सामाजिक कारण। 1857 की क्रांति हम पढ़ रहे हैं।
20:12 उसके धार्मिक और सामाजिक कारण क्या थे? रिलीजियस एंड सोशल रीजंस। रिलीजियस एंड सोशल सोशल रीजंस क्या थे? जैसे सबसे प्रमुख है इसमें आपका सती प्रथा का अंत। तो क्या सती प्रथा के अंत से सभी लोग खुश हुए। कल क्या समझाया था मैंने आपको? एंड ऑफ सती सिस्टम। एंड ऑफ ऑफ सती सिस्टम एंड ऑफ सती सिस्टम तो सती प्रथा खत्म हो जाने से सभी लोग खुश नहीं हुए। कुछ लोगों को लगा कि हमारे जो धर्म है हमारा जो वैदिक धर्म है
20:58 या हमारे जो वेद कहते हैं उसके अनुसार जो बातें सही हैं उन सब के खिलाफ ही प्रश्न चिन्ह उठा रहे हैं। जबकि मैंने कल आपको बता दिया कि किस तरह वेदों की भाषा को भी समय के रहते-रहते बदला गया था। बात समझ गए? तो इससे एक वर्ग समझा कि हमारी अपनी जो कस्टम्स रीति रिवाज उनको खत्म कर रहे हैं। एक साथी इसमें विधवा पुनर्विवाह किसके समय पर आपका ड्राफ्ट किया गया था? विधवा पुनर्विवाह अधिनियम डलहौजी के टाइम पर आया। सती प्रथा का अंत किसके समय पर हुआ था? अधिनियम का अधिनियम का लागू होना। यह साथी आपका लागू हो गया था। कैनिंग के समय पर ड्राफ्ट बना था डलहौजी के समय पर। तो जो विडो रिमैरिज एक्ट था यानी कि महिलाएं
21:44 आगे जीवन में बढ़े और फिर से वह शादी कर सकती हैं। उनको अपवित्र ना माना जाए। तो इससे भी भारतीयों के अंदर एक रोष पैदा हुआ कि भाई हमारे रीति-रिवाजों को ये लोग आपका काउंटर कर रहे हैं। तीसरा रीजन क्या था? तीसरा रीजन था 1845 का 1845 का जेल अधिनियम। जेल अधिनियम। 1845 का जेल अधिनियम जेल एक्ट 1845 एक एक्ट आया था। यह भी एक रीजन था। देखो विडो एमरेज एक्ट कब आया है? 1856 में। ये बड़ा है। लागू भी 1856 में हुआ। सती प्रथा का अंत हुआ 1829 में। तभी से जो जन आक्रोश है वो बढ़ता जा रहा था। 1845 का
22:30 जेल अधिनियम क्या था? देखो इसमें यह होता था कि आपका जो खाना बनता था जेल में तो अब तक तो वह खाना जो है आपका भाई कैदी तो आप समझते हैं ना व्यक्ति किसी अपराध के लिए जेल में ठूस दिया जाता था अंग्रेजों के समय अपराध करें ना भी करे तो ये तो किसी को भी अंग्रेज मारपीट कर देते थे किसी को भी यह जेल में बंद कर देते थे और जो जज होते थे उस समय यूरोपियन जज होते थे वह भी अंग्रेजों की तरफदारी करते थे लेकिन जेल में जाने के बाद में जो खाना था वह मुख्यत उस समय पर ब्राह्मण आदि जो कैदी होता था उससे बनवाया जाता था लेकिन एक 1845 में एक आपका लॉ आया। उसके अनुसार क्या हुआ कि भाई जो खाना है ना खाना अब जो है एक समूह के द्वारा और जिसमें सभी व्यक्ति होंगे उनके द्वारा बनाया जाएगा। अब आप सोचिए प्राचीन भारत में क्या रहा होगा? प्राचीन भारत में तो
23:16 यह रहा कि अगर किसी और के यहां का खाना आपने खा लिया तो आपकी जाति जो है वह भ्रष्ट हो जाएगी। या किसी निम्न वर्ग के व्यक्ति के द्वारा बना खाना आपने खा लिया तो आपकी जाति भ्रष्ट हो जाएगी। इस तरह की जो मानसिकता लोगों के अंदर खूब मतलब बलबती थी। बहुत जोर शोरों से उनके अंदर निवास करती थी। तो अब क्या होगा? जब ये नियम आया कि भ खाना अब सब बनाएंगे तो 1845 में यह हुआ कि कोई व्यक्ति जेल से छूट कर के आता था। अगर वो अगर एक गरीब व्यक्ति हुआ करता था तो उसका सामाजिक बहिष्कार हो जाता था। उसको उसकी जाति से बहिष्कृत मान लिया जाता था कि इसने जो अंदर खाना खाया है वो अन्य व्यक्तियों के द्वारा बना हुआ खाना खाया है। इस सब का कारण कौन है? ये सब का कारण हम थे या ईस्ट इंडिया कंपनी थी? आप मुझे बताएं एक बार तो आप कहेंगे कि भैया इस तरह
24:01 की चीजें चल रही थी। 1835 45 का जेल अधिनियम हो गया। एक कारण था एक प्राचीन समय में मैं आपको ले जाना चाहूंगा। मैं आपसे पूछूंगा भारत में ईसाई पादरियों को आने की छूट किस एक्ट से मिली थी? जो ईसाई मिशनरी यानी ईसाई धर्म प्रचारक भारत में आ सकते थे। तो उसकी छूट जो मिली थी तो आपको याद होगा 1813 का एक्ट 1813 के एक्ट में क्या कहा गया था ईसाई मिशनरी अब भारत आ सकते हैं अपने धर्म प्रचार के लिए और सारा जो गुड गोबर किया भारत की सभ्यता का वो किया इन ईसाई मिशनरियों ने ईसाई मिशनरी का भारत आगमन भारत आगमन अब इन्होंने बहुत सारे बहाने ढूंढे अब इनका मुख्य उद्देश्य क्या
24:47 था कि भाई कैसे भी करके कैसे भी करके के यहां पर जो हिंदू और मुसलमान है इन सभी को ईसाइयत में बदलना है। इनका मुख्य टारगेट था कि कैसे भी करके भारत को जो है एक ईसाई देश बनाना है और ईस्ट इंडिया कंपनी इसके लिए आतुर थी। तो यहां पर जितने भी ईसाई मिशनरी आए उन्होंने खुले तौर पर आपका हिंदू मुस्लिम आलोचना शुरू हिंदू धर्म के ऊपर उन्होंने सवाल खड़े करने शुरू किए। यहां के अंधविश्वासों के ऊपर उन्होंने सवाल खड़े करने शुरू किए। यहां के आपका और सही भी था। कुछ अंधविश्वास थे और आप किसी व्यक्ति को तार्किक रूप से उस अंधविश्वास के बारे में बताएंगे तो आप समझेंगे या सभी लोग समझेंगे कि हां यह तो अंधविश्वास है। जो भोला वाला व्यक्ति है वह आकर्षित हो जाता है दूसरी तरफ। ऐसे ही मुस्लिम धर्म
25:32 में जो भी आपका चीजें थी उन सबके ऊपर इन्होंने काउंटर किया और कहने का मतलब है हिंदू मुस्लिम दोनों धर्मों की आलोचना इन्होंने बड़े स्तर पर शुरू कर दी खुले मंचों से। जैसे कि मैं आपसे बताऊं जैसे हम अभी अंधविश्वास के ऊपर बात कर रहे थे तो अंधविश्वास तो आप समझते होंगे। यानी कि एक ऐसा विश्वास जिसका कोई तर्क ना हो उसी को हम अंधविश्वास कहते हैं। जैसे मैं एक रिपोर्ट पढ़ रहा था। मैं आपको बताऊं तो उस रिपोर्ट में मैंने पढ़ा कि जो भारत में या डब्ल्यूho के अनुसार पहले रिपोर्ट पर हमने डाटा पढ़ा तो डब्ल्यूho के अनुसार यह था कि पूरी दुनिया में लगभग सवा लाख के करीब लोग ऐसे हैं जो सांप के काटने से जिनकी मौत हुई पिछले वर्षों में और अगर पिछले वर्ष की हम बात करें तो पिछले वर्ष जो मौत हुई सांप के काटने की वजह से उन मौत का जो
26:18 आंकड़ा है डेथ का आंकड़ा है ऑल ओवर द वर्ल्ड वो है 81000 और उसमें भारत में जो मौत मौत हुई हैं आपका उसमें से 80% लगभग नहीं पिछले वर्ष 81000 उससे पिछले वर्ष था। पिछले वर्ष की अगर हम बात करें तो उसमें डाटा था वो आपका लगभग 63000 ऑल ओवर वर्ल्ड लेकिन उसमें से 80% यानी 500 के आसपास मौत भारत में पिछले वर्षों में। अब भारत में जो सांप के काटने की वजह से मौत होती है, उसका सबसे बड़ा रीजन आप क्या समझते हैं? तो आप समझेंगे कि सबसे बड़ा रीजन है उसमें कि लोग आज भी इस मानसिकता के शिकार हैं कि जिसको सांप ने काट लिया है उसको किसी सपेरे के पास ले जाओ। अभी तो हालांकि लोग थोड़े से अवेयर हुए हैं। बहुत जगह मेडिकल फैसिलिटीज हैं तो लोग अस्पताल ले जाते हैं। नहीं तो कहां ले जाते हैं?
27:04 किसी बाबा के पास ले जाते हैं। किसी सपेरे के पास ले जाते हैं कि वह इसको दूर कर देंगे। इवन ऐसा भी कई जगह देखा गया कि कई जगह तो मंदिर प्रचलित है। जैसे कि एक महिला को एक सांप ने काटा तो यह है कि इस मंदिर की परिक्रमा आप कर लेंगे और तो इस मंदिर की परिक्रमा के अंदर कोई सांप भी नहीं आता और इसका अगर परिक्रमा आप कर लेंगे तो वह महिला को जब सांप ने काट लिया वो उस मंदिर पहुंच गई तो वहां जाकर के उसकी डेथ हो गई। तो बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा कि ऐसा क्यों हुआ? जैसे आपने देखा होगा कई जगह यह कहते हैं कि इस जगह पर जो है सांप का काटा हुआ व्यक्ति नहीं मरता है। यह सुनी होंगी आपने इस तरह की कहानियां नहीं सुनी है। इस जो सीमा है इसके अंदर सांप नहीं काटता है या इस यहां पर सांप काट ले तो मरता भी नहीं है। क्योंकि दुनिया में जितनी भी सांप की प्रजातियां हैं जैसे कि
27:50 दुनिया में आपका तो यह कहा जाता है कि उनमें से सिर्फ 25% ही जहरीली हैं। 75% जहरीले सांप होते ही नहीं है। हो सकता है उस देश के या उस जगह की उस स्थान की भौगोलिक व्यवस्थाएं ऐसी हो कि वहां के सांपों में जहर ही ना हो। पॉसिबल है ना कि वहां पर सांप काट भी ले तो कोई दिक्कत नहीं। अब इसका मतलब यह थोड़ी है कि हम यह विश्वास पैदा कर लें कि इस इलाके में सांप के काटने से मौत नहीं होती तो जहरीला सांप भी काट लेगा तो मौत नहीं होगी। तो ऐसे जहां पर मान्यताएं थी वहां पर जब सांपों ने काटा तो लोगों की डेथ हो गई। अब लोगों की डेथ हो गई तो लोगों ने सोचा कि यार यह तो ईश्वर की कृपा में कमी हो गई। यहां तो डेथ नहीं होती थी। तो इसके लिए बहुत सारे प्रयोग हुए पर्पद समिति वगैरह इन सब के द्वारा तो उन्होंने लोगों को समझाया जाकर के गांव-गांव में कि आप इसके लिए प्राथमिक उपचार करें। आप अंधविश्वास का शिकार ना
28:36 हो। तो उन्होंने कहा नहीं जी हमारे यहां पर तो इस मंदिर की परिसीमा में सांप ही नहीं आता। तो वो सांप उन्होंने ले जाकर के प्रयोग करके लोगों को दिखाए कि ये देखिए। आप कोई चूना मिट्टी वहां पर वो डालते थे कि इसमें सांप नहीं जाएगा। उन्होंने उस चूना मिट्टी को डाला और सांप सारे एंटर कर गए आसानी से। लोगों के भ्रम ऐसे ऐसे दूर करने पड़ते हैं प्रयोग के द्वारा तर्क के द्वारा। बहुत सारे लोग प्रयोग करते भी हैं जो लोगों के अंधविश्वास को खत्म करने का काम करते हैं। लेकिन फिर भी जब व्यक्ति अशिक्षित होता है तो वह चीजों को बहुत आसानी से एक्सेप्ट नहीं करता है। जो उसके मस्तिष्क में वर्षों तक शताब्दियों तक उसके मस्तिष्क में जो चीज पहुंचाई गई हो वो यूं ही नहीं त्याग कर सकता है। तो यही अंधविश्वास होता है। ईसाई मिशनरी भारत में आए और खूब इन्होंने आलोचना की। भारत में जो अंधविश्वास चल रहे थे, धर्मों में फैले
29:22 अंधविश्वास थे, उनके खिलाफ। इसी में इन्होंने एक आड़ बनाया स्त्री शिक्षा को। इन्होंने कहा कि भाई अब हम भारतीय जिम्मेदार थे। हम महिलाओं को जो है आपका जो निचले वर्ग में या कहें तो हम निम्न वर्ग की महिलाओं को तो पढ़ने का बिल्कुल अधिकार नहीं था। हम आपको आधुनिक भारत में बताएंगे। सावित्रीबाई फुले जी ने क्या योगदान दिया है इस देश को। कैसे उन्होंने इस देश को दिशा दी या महिलाओं को दिशा दी। तो यहां पर उन्होंने क्या किया? स्त्री शिक्षा के नाम पर स्कूल खोले और वहां पर जब यह बुलाते थे तो वहां की प्रार्थनाओं में कहा जाता था प्रार्थनाओं में कहा जाता था तुम्हारा ईश्वर कौन है और बच्चों से बुलवाया जाता था बदले में ईसा मसीह तो उन बच्चों के ही माइंडसेट को अंग्रेज सरकार क्या है थोपने लग गई थी उन बच्चों को जबरन सिखाया जाता कि तुम्हारा ईश्वर कौन है तो ईसा मसीह तुम्हारा ईश्वर है। यह सब कह
30:08 करके उनको बढ़ाया जा रहा था। ठीक है? और ईसाई मिशनरी भारत में आए तो क्या खोले इन्होंने? भारत में आकर के बहुत सारे स्कूल्स खोले। स्कूल्स खोले और उन स्कूल्स में इन्होंने क्या कर दिया? बाइबल का अध्ययन अनिवार्य कर दिया। बाइबल का अध्ययन बाइबल का जो अध्ययन था यानी सबको बाइबल पढ़ना पड़ेगा। तो बाइबल का अध्ययन होने लगा। बाइबल को ये लोग पढ़ाने लगे। कहने का मतलब है कि मस्तिष्क यानी मानसिक रूप से उनको ईसाई बनाने की प्रक्रिया चल गई। तो इस देश में जो लोग इंटेलेक्चुअल वर्ग था यानी कि इस देश में जो शिक्षित वर्ग था, वह भी इसका विरोधी बना। और उसने देखा ना किस तरह से यह सरकारें प्रयोग कर रही हैं अपने। दूसरा कारण क्या था शिक्षित वर्ग के विरोध का? आपको मैंने बताया था कि कॉर्नवालिस तो भारतीयों से एकदम नफरत करता था। वह तो भारतीयों को अयोग्य समझता था।
30:56 लेकिन बेंटिक ने 18 बेंटिक के समय पर 1833 के एक्ट में क्या कहा गया था? 1833 के एक्ट में यह कहा गया था कि योग्यता ही सेवा का आधार होगा। बोलो हां या ना? यह हमने बताया था आपको पिछली क्लास में। योग्यता ही सेवा का अधिक सेवा का सेवा का आधार होना चाहिए। एलिजिबिलिटी इज द ओनली ओनली बेसिस ऑफ ऑफ सर्विस। यही आपका आधार होना चाहिए। यह बात कर दी थी। लेकिन क्या ब्रिटिश सरकार ने इसको अपनाया था? आप कहेंगे नहीं। ब्रिटिश सरकार ने सिर्फ कागजी तौर पर इसको कहा और भारत में जितने भी शिक्षित लोग थे उन सबको अनुम जो नौकरियां उनको मिलनी चाहिए थी या उनकी योग्यता के अनुसार जो उनको मिलना चाहिए था वह उनको नहीं मिल रहा था। एक शिक्षित वर्ग
31:42 इस बात को लेकर के भी विरोध में था कि भाई आपने जब 1833 के एक्ट में कह दिया कोई भी आपका धर्म, कोई जाति, कोई लिंग या फिर आपका कोई रूप या फिर रंग इसके आड़े नहीं आएगा। योग्यता के आड़े नहीं आएगा। फिर हम शिक्षित भारतीयों को क्यों अच्छे पदों पर नहीं पहुंचा जाने जा रहा? अब इसके बहुत सारे कारण थे। खुद ब्रिटिश सरकार तो चाहती ही नहीं थी और ब्रिटिश सरकार की जो मीडिया थी वो भी नहीं चाहती थी। जैसे राजा राममोहन राय के बेटे थे तो उनको बंगाल सिविल सर्विज में एक पद दे दिया गया। एक उच्च पद दे दिया गया। तो उस समय के ब्रिटिश अखबारों ने खूब आलोचना की कि इस तरह तो और भारतीयों के अंदर भी डिमांड बढ़ेंगी और भारतीय कल को मांग करने लगेंगे उच्च पदों की। तो फिर ईस्ट इंडिया कंपनी के उच्च अधिकारियों का जो सम्मान है वह घटता चला जाएगा। ठीक है? आप समझ पा रहे
32:30 हैं सारी चीजों को। पांचवा कारण क्या था? अंग्रेजों के प्रति सम्मान। अंग्रेजों के प्रति सम्मान। अब अंग्रेजों के प्रति सम्मान। आप जानते हैं अंग्रेजों ने जहां कहीं भी अपने रेस्टोरेंट्स बनाए वहां पर भारतीय नहीं जाते थे। आपने खूब देखा होगा डॉग्स एंड इंडियंस आर नॉट अलाउड। यानी कि कुत्तों और भारतीयों का प्रवेश जो है वर्जित है। अब इस तरह की मानसिकता थी अंग्रेजों की कि अपने जो क्लब्स थे उनके रेस्टोरेंट्स थे वहां पर भारतीय नहीं जाते थे। और अगर कोई अंग्रेज अधिकारी होता था सैनिक हो चाहे असैनिक अधिकारी हो यानी कोई गोरा हो तो उस गोरे व्यक्ति को सम्मान देना जरूरी था। आप चाहे अपनी गाड़ी में जा रहे हों, चाहे आप अपनी बाइक पे साइकिल पर जा रहे हों या बैलगाड़ी में जा रहे हों। अंग्रेज अधिकारी
33:15 यदि आपके सामने आ गया तो आपको उतर के उसको झुक के सम्मान देना होता था और अगर आप सम्मान नहीं देते थे तो अंग्रेज अधिकारी खूब मारपीट करते थे और कई बार तो ऐसे उदाहरण देखे गए कि हमारे देश के नागरिकों को पीट-पीट करके मार दिया गया और बाद में जब उन्होंने न्याय की गुहार लगाई तो उस न्याय की गुहार में उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। यह हाल हमारा रहा। तो ये धार्मिक और सामाजिक कारण रहे। ठीक है? समझ पाए? थम्स अप करके मुझे बताएं। अब हालात समझना इन अंग्रेजों ने भारतीयों के अंदर जो बीज बोया है या बोले जिस तरह से उन्होंने प्रयास किए हैं तो किस तरह से वह भारत को खोखला कर रहे थे वर्षों वर्षों तक आप साथी अगर मैं बात करूं तो साधारणत आप इन चीजों को नहीं पढ़ते होंगे लेकिन यह हम लोगों के पढ़ने के लिए बहुत जरूरी है ताकि
34:02 हम समझ पाएं। हमको सिर्फ नहीं समझना है कि उनके शासनकाल में क्या-क्या प्रयोग हुए। राजनीतिक कारण पॉलिटिकल रीजंस क्या थे? राजनीतिक कारण राजनीतिक कारण और आपकी आत्मा छुब्ध हो उठेगी। अगर आप एक सच्चे भारतीय हैं तो आप उस दर्द को समझ रहे होंगे। पॉलिटिकल पॉलिटिकल रीजंस पॉलिटिकल रीजंस क्या थे? एक तो आप जानते ही हैं वेलेजली की सहायक संधि। मैंने कहा था इसने भारत में अंग्रेजी राज्य को अंग्रेजों के भारतीय राज्य में बदल दिया। इसकी थी सहायक संधि जो सब्सिडरी पॉलिसी थी। मेरा आपसे प्रश्न यह रहेगा सब्सिडरी पॉलिसी के अधीन सबसे पहले किसको हड़पा गया था? तो ये बहुत सारे फैक्टर्स
34:49 हैं। दूसरा एक आपका डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स। डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स किसने अपनाया था? सबसे ज्यादा तो बेड़ा गर्क इसी ने किया कि भारतीयों को बच्चा गोद तक नहीं लेने दे रहा था। डलहौजी। ठीक है? सहायक संधि किसकी थी? वालेजली। वेलेजली तो जब भारतीयों के आपका यह सेना एंटर करा देते थे। मैंने बताया सब्सिडरी पॉलिसी से एक अंग्रेज रेजिडेंट रखते थे। सेना देते थे। सेना को बढ़ाते चले जाते थे। अंग्रेज जब उस अंग्रेजी सरकार का अंग्रेजी सेना का जब व्यय वो राजा नहीं कर पाता था तो उसके क्षेत्र को ले लेते थे। डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स डलहौजी का है। इसकी पिछली ही क्लास में हमने सारा विवरण आपको दिया कि किस तरह अंग्रेजों ने अपनी मंशा को पूरा करने के लिए अपने ही नियमों को जो
35:35 गोद लेने की स्वीकार्यता उन्होंने दी थी उसको कैंसिल कर दिया। बखूबी आप जानते हैं बहुत अच्छे से। हां जी। तो डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स यह भी एक राजनीतिक कारण बना। क्योंकि आपको पता ही है डलहौजी का कार्यकाल मुझे बताएं। 1848 से 56 इसके जाने के 1 वर्ष बाद ही तो 1857 की क्रांति हो गई थी। ठीक है? डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स हो गया। एक कारण यहां पर आप बात बोले तो जितने भी सम्मानित व्यक्ति थे उनका अपमान यह करते थे। सम्मानित व्यक्तियों का अपमान। सम्मानित व्यक्तियों का अपमान। सम्मानित व्यक्तियों का अपमान। इस रेस्पेक्ट ऑफ इस रेस्पेक्ट ऑफ रेस्पेक्ट ऑफ ओनरीज
36:24 ऑनरेरी पीपल जो सम्मान के लायक व्यक्ति थे। सम्मान के लायक व्यक्ति से क्या समझेंगे? जैसे कि मैंने आपको कहा जागीरदार, तालुकदार इन सबको तो खत्म उन्होंने कर ही दिया। तो अब यहां पर एक प्रश्न आता है। जैसे कि मुगल सम्राट था। मैंने आपको बताया था अंतिम मुगल सम्राट का नाम आप मुझे बताइए। अंतिम मुगल सम्राट जिसने 1837 से 1857 तक शासन किया था। उसका नाम है बहादुर शाह जफर। अब बहादुर शाह जफर या बोले तो जो मुगल शासक थे वह सब आपका रहते थे लाल किले में और तो लाल किले में आपका जब कैनिंग आया कैनिंग कैनिंग डलहौजी के बाद में आएगा हम आपको पढ़ाएंगे कैनिंग 1856 से लेकर के डलहौजी के जाने के बाद में कैनिंग आया था 1856 से 62 यानी कि जब आपका 1857 का संग्राम हुआ तो कैनिंग भारत
37:11 में वायसराय था। ये दोनों के वर्ष आप याद रख लेना। इस समय बहुत महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं। तो कैनिंग ने यह कह दिया था कि भ जो लाल किला है आपको खाली करना होगा और इसके बाद में कोई भी आपका मुगल सम्राट नहीं होगा। यानी बहादुर शाह जफर जो है वह अंतिम मुगल सम्राट हैं और बहुत जल्दी अब उनको उनसे शासन छीन लिया जाएगा। अब देखिए भारत में जो भावना थी क्योंकि जब भारत में आए सब लोग मुगल शासक आए तो मुगल शासक क्या यहां के पैसे को करके कहीं बाहर देश में भेज रहे थे? हां या ना आप सब ने समझा है मुगलों को उन्होंने क्या किया यहां पर आकर के उन्होंने बेशक बहुत जगह बहुत सारे शासकों ने अत्याचार किए अपने साम्राज्य विस्तार के लिए जो उस समय की नीतियां होती थी अधिकतर राजा उसी को करते थे युद्ध होते
37:59 थे और युद्ध में हानियां होती थी लेकिन कोई पैसा उन्होंने भारत से बाहर नहीं भेजा यानी भारत को खोखला करने का काम नहीं किया तो वो जब यहां पर बस गए तो भारत के लोगों के अंदर यह भावना थी कि जो मुगल शासक हैं वो यह आकर के यहां बस गए हैं। ऐसा नहीं है कि उनके लिए कोई आपका जो मुख्य केंद्र है वह बाहर है और यहां से वह पैसा वहां भेजते हो जैसा कि ईस्ट इंडिया कंपनी करती थी। लेकिन अंग्रेजों को वो क्या मानते थे? विदेशी मानते थे लोग क्योंकि अंग्रेजों को विदेशी मानना एकदम से सही है क्योंकि वह यहां पर बसने वाले नहीं थे। उनके तो अधिकारी आते थे और ट्रांसफर लग के कभी किसी देश में कभी कहीं कभी कहीं भेज दिए जाते थे। इसलिए भारतीयों के अंदर उनके लिए एक विदेशियों की भावना और हमारे राजाओं का जो आपका सम्मान नहीं उन्होंने किया वह भी एक कारण बना। ठीक है? क्या बोलेंगे? एक
38:44 आपका पेंशन पर रोक। बहुत सारे जो सम्मानित शासक थे पेंशन पर रोक। जैसे नाना साहब की पेंशन जो कि आपका मराठाओं के आपका वंशज थे, दत्तक पुत्र थे। क्या बोलेंगे? इसको हम बोल सकते हैं बैन ऑन पेंशन। बैन ऑन पेंशन। तो पूछ लिया जाता निम्नलिखित में से कौन सा कारण नहीं था? आज ही में हम क्वेश्चन आपको दिखाएंगे। इस तरह के बहुत सारे आपका रीजन थे। जैसे कि एक ब्रिटिश अधिकारी था। उसका नाम है चार्ल्स नेपियर। तो चार्ल्स नेपियर ने तो यह तक कह दिया था कि यदि मुझे 12 साल के लिए भारत की सत्ता सौंप दी जाए तो भारत में एक भी नरेश नहीं रहेगा। भारत में कोई भी निजाम का नाम नहीं सुनेगा और नेपाल हमारा होगा। इस तरह के स्टेटमेंट्स जब उस समय पर आ रहे थे तो
39:30 भारतीय नरेशों को यह लगता था कि हम अब सब कुछ है हमारा छीनने की बारी आ चुकी है। अब पीक टाइम आ चुका है। ठीक है? एक सैनिक कारण क्या थे? सैनिक कारण यह भी लिखना। मिलिट्री रीजंस क्या थे? सैनिक कारण मिलिट्री रीजंस क्या थे? मिलिट्री रीजंस। सैनिक कारण क्या थे? यह हमने यहां पर राजनीतिक कारणों की बात की है। तो सैनिक कारणों में एक आता है आपका पोस्टल सेवाओं पर टैक्स। पोस्टल सेवाओं पर टैक्स। टैक्स ऑन पोस्टल सर्विसेज। अब मुझे बताएं जो पोस्ट ऑफिस एक्ट आया था डलहौजी के टाइम
40:18 पर वो किस ईयर में आया था? आप कहेंगे भैया 1854 में एक पोस्ट ऑफिस एक्ट आया था। अब से पहले क्या था कि उस पोस्टल में आपका यह होता था कि भाई 2 पैसे का खर्चा लिया जाता था यूं तो लेकिन सैनिकों के लिए सैनिकों के लिए क्या था यह पोस्टल सर्विज एकदम से फ्री थी। यानी सैनिकों को अपने किसी भी पोस्ट पर कोई खर्चा नहीं देना होता था। लेकिन 1854 में जब आपका पोस्ट ऑफिस एक्ट आया तो भारतीयों को इसको पेड कर दिया गया भारतीय सैनिकों के लिए। अंग्रेज सैनिकों के लिए नहीं सिर्फ भारतीय सैनिकों के लिए। उनके अंदर एक विद्रोह पैदा हुआ। लिख लेना टैक्स ऑन पोस्टल सर्विज। एक एक यहां पर बात की गई समुद्र पार जाने की बात समुद्र पार जाने की बात जाने की बात सैनिकों से की गई टू क्रॉस द ओसियन इसमें क्या दिक्कत है टू
41:06 क्रॉस द ओसियन ये क्या विद्रोह की बात हो गई तो यह दरअसल में एक सामान्य सेना भर्ती अधिनियम आया था 1856 में कौन सा अधिनियम था सामान्य सेना भर्ती अधिनियम यानी कि आपका आर्मी रिक्रूटमेंट एक्ट एक आया 1856 में। तो चिंता की बात यह हुई थी कि उसमें पुराने सैनिकों के लिए नहीं था वो। वो था जितने भी नए सैनिक भर्ती होंगे उन नए सैनिकों को युद्ध के लिए कहीं भी भेजा जा सकता है। अब भारत में परंपरा यह थी कि कोई भी व्यक्ति यदि समुद्र पार यानी कि कहीं विदेश में कभी चला गया तो उसको उसकी जाति से बहिष्कृत कर दिया जाता था। उसको उसकी जाति से बहिष्कार कर दिया जाता था। यानी कि उसको यह माना जाता था कि हमारी जाति का व्यक्ति अब नहीं रहेगा। यह भी एक
41:52 अंधविश्वास है। आज देखिए आज तो किसी को जाति से बहिष्कृत नहीं किया जाता। इवन विदेश घूमने जाना तो एक लग्जरी का प्रमाण आज माना जाता है कि कोई व्यक्ति अगर जाकर के पेरिस से अपनी फोटो अगर पोस्ट कर दे तो यह माना जाएगा कि यह तो भैया बढ़िया एक अच्छा इसकी आमदनी हो रही होगी। एक धनी व्यक्ति है जो विदेश में जाकर के भी घूम पा रहा है। तभी तो घूमेगा व्यक्ति। तो पहले इस तरह के अंधविश्वास थे और जब वह अगर कभी चला भी जाता था सैनिक तो उसको उसकी जाति से बहिष्कृत माना जाएगा। इनको दिक्कत क्या थी? जितने भी पुराने सैनिक थे वे क्यों विद्रोह करेंगे अगर नियम नए सैनिकों के लिए था और पुराने सैनिक विद्रोह इसलिए कर रहे थे क्योंकि सेना में जो भर्ती होती थी वो पैतृक आधार पर होती थी। यानी जो सेना में है कल को उनका बच्चा होगा। उन्होंने देखा कि भ हमारा बच्चा कल को सेना में भर्ती होगा। कल को उसको यह
42:38 विदेश भेजेंगे। विदेश से आएगा तो हमारे बच्चे का जो है सामाजिक बहिष्कार हो जाएगा। इसीलिए वह सब क्या बोलेंगे? आपका उसका विरोध करने लग गए। तो समुद्र पार जाने की बात यह भी एक कारण बन गया। याद रखना कि हमारे बच्चों की जाति कहीं ना खो जाए। अच्छा तीसरा कारण क्या था? अपने आप ही इमेजिन कर लिया वो में प्रमुख। इसको अलग से भी लिख सकते हैं। एक अफवाह थी। अफवाह समझते हैं। अफवाह किसी भी बात की फैल सकती है। रमर्स आर यू एम ओ आर एस रमर्स। अफवाह अफवाह फैलती है इस बात की कि प्लासी के युद्ध में प्लासी का युद्ध किस वर्ष में हुआ था? प्लासी के युद्ध के यह बस 100 सालों के लिए आए हैं। प्लासी के युद्ध के 100 वर्ष बाद 100 वर्ष बाद यह लौट जाएंगे।
43:26 दे विल रिटर्न आफ्टर 100 इयर्स। ऐसी एक धारणा विकसित लोगों ने अपने आप कर ली। वह युद्ध कब हुआ था प्लासी का युद्ध? बताइए। किस-किस के बीच में हुआ था? आप अब एक-ए बिंदु को जानते हैं क्योंकि आप क्रमवार अध्ययन कर रहे हैं और आपकी पकड़ होगी इस पर। आप जानते हैं सिराजुद्दौला और क्लाइव के बीच में युद्ध हुआ था जिसमें ईस्ट इंडिया कंपनीवाद का कारण माना जाता। तो अपने आप ही इमेजिन कर लिया कि 100 वर्षों के बाद में ये लोग यहां से चले जाएंगे। ठीक है? यानी जाने की बारी कब आएगी? 1857 में। यह सब कारण थे। तो समझ में आया कितने सारे कारण हो गए। लेकिन तभी इमीडिएट कॉज क्या हुआ? तात्कालिक कारण क्या हुआ? कि भैया यह तो लंबे समय से सारी चीजें आ रही हैं। तात्कालिक कारण एक इमीडिएट कोज क्या
44:13 हुआ? ऐसी कौन सी घटना घट गई कि ये सारी चीजें जो ये तो मैंने आपको बताया देखो किस-किस वर्षों में किसी घटना ने जन्म लिया है आपका 1813 से शुरुआत हुई। कोई घटना 1829 की है। तो ये तो प्राचीन समय की घटनाएं हुई। अभी 1857 में एकदम से इंटेंस क्या हो गया? तो एक तो 1757 के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं और एक तात्कालिक कारण था तात्कालिक कारण जो सबसे प्रमुख माना जाता है जो कारतूस थे कारतूस अगर हम आपको अभी बताएंगे कारतूस भी छोड़िए कहानी बताता हूं मैं आपको जो आर्मी का इनका हेड क्वार्टर हुआ करता था वो कुछ ही जगह थे इनके जैसे एक जगह दमदम भी थी दम जिसको कहा जाता है तो वहां पे आधुनिक इनका शस्त्रागार था जहां पर यह अपने मतलब तोप वगैरह इन सब की सर्विस करते थे अपनी गन
44:59 वगैरह इन सब को रखते थे तो वहां पर एक बड़ी घटना घटी। इनके पास में जो राइफल होती थी उस राइफल का नाम था ब्राउन बेस। क्या नाम था? तात्कालिक कारण था कि एक राइफल जो अब तक ब्रिटिश सेना प्रयोग कर रही थी उसका नाम था ब्राउन बेस। ब्राउन बेस राइफल के नाम जानते हो? किसी एक राइफल का नाम आप भी लिखिए। जैसे जो लोग यूपी पुलिस में हमारे साथी होंगे वह जानते होंगे। यूपी पुलिस में रहती है इंसास राइफल 5.56 एमm AK-47 आपने देखी होगी। AK-47 जो 7.62 एमm होती है। PUBG वाले भी जानते होंगे जो लोग PUBG खेलते होंगे। हरी गोली जो होती है वह 556 की होती है। जो रेड आपका बुलेट होता है वो 7.62 होता है। ठीक है? जो aकेएम में लगता है AK-47 में वही 7.62 एमm यहां पर था। और
45:45 इस ब्राउन बेस राइफल की जगह वो प्रयोग करें यहां पर इनफील्ड राइफल। क्या इनफील्ड राइफल? इनफील्ड राइफल। इनफील्ड राइफल और यह इसकी जगह आपका 1856 की बात है। एक राइफल आई नई और इसको लाया गया सबसे पहले कहां पर डमडम कंटोनमेंट में डमडम छावनी डमडम छावनी और डमडम छावनी में क्या था आप समझिए उस समय की घटना तो एक आपका वहां पर एक सैनिक था यह कहा जाता है कि उच्च जाति का एक सैनिक था वह अपने लोटे में पानी लेकर के जा रहा था तथाकथित उच्च जाति उच्च और नीच कुछ नहीं होता है उच्च और निम्न कुछ नहीं होता अगर व्यक्ति के मन में कोई बात घर कर गई है और उसने अपने मन में यह है कि नहीं मैं तो इस व्यवस्था को मानूंगा ही तो उसके लिए सब कुछ है और अगर कोई
46:30 मनुष्यत्व यानी कि मानवता के भाव अपने अंदर रखता होगा तो उसके लिए कोई चीज एक्सिस्ट नहीं करती तो कहते उच्च जाति का कोई सैनिक था उसके हाथ में पानी का एक लोटा था और वहीं पर एक खलासी का काम करता था इस डमडम छावनी में उससे पीने को पानी मांगा उसने उसने कहा पीने के लिए पानी मुझे दे दो उन्होंने कहा उसको धमकाया कि तेरी जाति जो है वह निम्न है और तू इस पानी को पीने का अधिकारी नहीं है। ने कहा अच्छा बेटे पता चल जाएगा तुमको अभी जो नई राइफल आई है ना उसमें जो कार्टेज है जो कारतूस है जो गोली है उसमें एक खोल है उस खोल को मुंह से खोलना पड़ता था और जो तुम खोल खोलोगे ना वो उसमें गाय और सूअर की चर्बी लगी हुई है तो तब कल पता चलेगा तुम्हारी जाति का तुम्हारे धर्म का तो इस तरह से उसने जाकर के अपने सैनिकों की बताई यह है बात जाकर के कि भाई इस तरह से बात
47:17 चल रही है और जाकर के इन्होंने क्या कर लिया है तात्कालिक कारण यही बन गया घटना क्या था जो कारतूस थे जो कार्टिज थे कारतूस में क्या भैया यह सच में था या सिर्फ अफवाह थी कारतूस में और यह सच में है इसकी पुष्टि की गई थी बाद में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल इसने जोर दे दिया इस घटना को चर्बी का इस्तेमाल चर्बी का इस्तेमाल क्या बोलेंगे इसको बोल सकते हैं मिक्सिंग ऑफ काऊ मिक्सिंग ऑफ काऊ एंड एंड पिग फैट इन पिग फैट इन
48:05 कार्ट्रेज कार्ट्रेज कार्टेज का मतलब कार्टेज में तो इस तरह से ये घटना घटी आपका और जब यह घटना घटी तो इसका जो है सबसे पहले जो विद्रोह किया वह विद्रोह किया गया उस समय जो घटना मैं बता रहा हूं डमडम छावनी इस घटना का विद्रोह हुआ तो इसका विद्रोह कहां से होता है आपका तो इसका विद्रोह किया 19वीं रेजीमेंट ने। किसने? इसका विद्रोह किया 19वीं रेजीमेंट थी एक सिपाहियों की। रेजीमेंट रेजीमेंट तो 19वीं रेजीमेंट के सिपाहियों ने पूछा। इसके बारे में सवाल किए। लेकिन ब्रिटिश सरकार ने यहां भी ये विचार नहीं किया कि भ ठीक है इसके बारे में कुछ विचार करके इसको बदल देंगे या कुछ आश्वासन दे दें। वो अपनी बात पर अड़ी रही कि नहीं ऐसा कुछ नहीं है और तुमको इसका प्रयोग करना ही पड़ेगा। ठीक है? तो क्या बोलेंगे? 19वीं रेजीमेंट। तो 19वीं रेजीमेंट को इन लोगों
48:51 ने क्या कर दिया? यहां पर भंग कर दिया। 19वीं रेजीमेंट को भंग कर दिया गया। ठीक है? और 19वीं रेजीमेंट जैसे ही भंग हुई इसके बाद में 34वीं रेजीमेंट 34 रेजीमेंट उसने इसके लिए आवाज उठाई और 34वीं रेजीमेंट जो कहां पर थी? आपका बंगाल की रेजीमेंट है ये सब। यह थी बंगाल में। रेजीमेंट यानी कि इसको 34वीं इनफेंट्री भी कहा जाता था। इनफेंट्री का मतलब होता है पैदल सेना। इनफेंट्री का मतलब क्या होता है? पैदल सेना। और 34वीं इनफेंट्री जो बंगाल में थी इसको हम बैरकपुर छावनी के नाम से या बैरकपुर कैंटोनमेंट के नाम से भी जानते हैं। बैरकपुर कैंट लिख लीजिए या बैरकपुर छावनी। छावनी का अर्थ है आपका कैंट। तो यहां पर कौन सैनिक है आपका? मंगल पांडे। तो मंगल
49:37 पांडे जी यहां पर थे और मंगल पांडे जी ने क्या किया? इसका विद्रोह किया खुले रूप पर और अपने सैनिकों को इसके लिए बोला कि भाई अब हमको अपने धर्म बचाने के लिए लड़ना होगा। तो यह जो घटना घटी आपका उन्होंने क्या किया? मंगल पांडे ने यहां पर एक रिवोल्ट कर दिया, एक विद्रोह कर दिया और वह विद्रोह उन्होंने किया था आपका 29 मार्च को। 29 मार्च 29 मार्च 1857 को तो ब्रिटिश सरकार के अंदर एक सनसनी फैली कि भ तुम ऐसा विद्रोह क्यों कर रहे हो? अंग्रेज अधिकारी पहुंचे जिसमें कि आपका सार्जेंट आग था। उन्होंने कहा हां भाई क्या कह रहे हो तुम? तुम इसका प्रयोग नहीं करोगे। उन्होंने कहा नहीं करेंगे। बोला कभी तुम कर लो प्रयोग। उन्होंने उसके माथे पर गोली मार दी। और जैसे ही आपका यहां पर हत्या हुई तो मंगल पांडे को यहां पर गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि भाई नहीं हम नहीं चलाएंगे इसको। हमने अपने धर्म का जो
50:24 पतित हो रहा है हमारा धर्म या उसका पतन नहीं होने देंगे। तो यहां पर मंगल पांडे जी को यहां पर कहा जाता है कि जिन्होंने इस क्रांति की पहली गोली चलाई। किस डेट को चलाई गोली? पहली 29 मार्च 1857 को। के बदले में क्या मिला इनको? इसके बदले में इनको फांसी मिली। फांसी दी गई इनको। और यह फांसी जो हुई थी इनका वह बहुत जल्दी दी गई इनको 8 अप्रैल को। कब? 8 अप्रैल 1857 को 57 को इनको फांसी दे दी गई। यह बड़ी महत्वपूर्ण घटना है। ठीक है? इसको बात याद रखें। अच्छा। इसके बाद में सभी छावनियों में खबर पहुंचने लग गई कि भैया उस कैंट में यह हुआ है। बहुत सारे कैंट में क्या है? विद्रोह होने लग गया। और बहुत सारी छावनियों ने इसका विद्रोह किया। जैसे 24 अप्रैल को यह खबर पहुंची आपका 24 अप्रैल
51:12 1857 24 अप्रैल 1857 24 अप्रैल 1857 को यह खबर पहुंचती है आपका मेरठ कैंट में मेरठ छावनी सारे साथी बताएं मेरठ किस प्रदेश में स्थित है? बाहर वाले बच्चों को पता होना चाहिए कि अतिरिक्त हैं कि मेरठ आपका हमारे उत्तर प्रदेश में स्थित है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख जिला है। पहले शिक्षा की दृष्टि में आपका या बलिदान की दृष्टि में मैंने आपको बताया भी था जब आपका तैमूर लंग आया तो तैमूर लंग को भी अपनी सेनाएं यहां से मोड़नी पड़ी थी। तो 24 अप्रैल 1857 को यहां पर क्या हुआ? यहां पर भी एक कैवलरी थी। घुड़सवार सेना थी जिसमें 90 सैनिक थे। 90 सैनिकों में से 85 सैनिकों ने 90 में से जो 85 सोल्जर्स थे
51:58 उन्होंने इसका बंदूक का प्रयोग करने से मना कर दिया। और इन सबका इन लोगों ने क्या बोला? इन 85 सैनिकों का हुआ कोर्ट मार्शल। कोर्ट मार्शल का मतलब इनके शरीर से वर्दी उतारी गई। इन सभी को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई। 10 वर्ष की सजा और कहां बंद कर दिया गया इन सबको? मेरठ जेल में। 10 वर्ष की सजा सुना। इन सभी सैनिकों को नंगा किया गया। उनके वस्त्र उतारे गए और अंग्रेज अधिकारियों ने वहां खड़े होकर के उनकी खूब खिल्ली उड़ाई। खूब खूब उनके साथ हंसी मजाक किया। उनके नग्न हालात को देख के। अपराध क्या है? अपराध है कि अपने धर्म के लिए वो सिर्फ इतना कह रहे थे कि भाई हम इसका प्रयोग नहीं करेंगे। सैन्य सेवाएं तो वह ईस्ट इंडिया कंपनी को दे ही रहे थे। तो यहां पर सैनिकों के अंदर एक विचार पैदा
52:44 हुआ कि हम जिन अंग्रेजों के लिए लड़े हैं, जिन अंग्रेजों के लिए हमने अपने भारतीय राजाओं को हराया। आखिर में हमें मिला क्या? यानी कि जब आप गलत पक्ष के लिए सरेंडर कर देते हैं, चाहे आप रोटी के लिए कर दें। एक समय पर तो इन्होंने अपने भोजन आदि की व्यवस्था के लिए ही तो ईस्ट इंडिया कंपनी का साथ दिया। गरीब लोग थे और उस समय जब उनके रोजगार अंग्रेज सरकार ने छीन लिए तो उनके पास विकल्प नहीं होते थे रोजगार के बहुत ज्यादा तो बहुत सारे लोग ठीक है। सेवाएं दे देते थे अपनी सैनिक सेवाएं। लेकिन उनको पता नहीं था कि एक दिन इन सेवाओं के बदले में ब्रिटिश सरकार हमारे साथ में यह करेगी। ठीक है? तो यहां पर यह घटनाएं घटने लग गई और यह घटनाएं घटते घटते फिर आपका यह जो आपका मैंने कहा ना 24 अप्रैल को मेरठ छावनी में और इनका कोर्ट मार्शल हुआ जो कोर्ट मार्शल हुआ था इनका यह हुआ था 9 मई को 9 मई को 9
53:30 मई 1857 को और 9 मई 1857 को जब यह कोर्ट मार्शल हुआ तो यहां पर फिर अगले दिन पूरे मेरठ में ये खबर फैल गई और 10 मई 1857 की डेट आ गई। इस दिन इसको 10 मई 1857 को कहा जाता है 1857 का संग्राम शुरू हुआ। 1857 की क्रांति प्रारंभिक तिथि इसको माना जाता है क्योंकि अब तक कहां हो रहा था? सिर्फ कैंट्स में हो रहा था। सिर्फ छावनियों में हो रहा था। क्रांति की शुरुआत इसको कहा जाता है। क्रांति की शुरू और 1857 की इस क्रांति का यानी कि स्टार्टिंग ऑफ स्टार्टिंग ऑफ 1857 रिवोल्यूशन रिवॉल्यूशन 1857 की क्रांति क्यों इसको
54:16 क्यों कह रहे हैं भैया फिर हम उसको क्यों नहीं बोल रहे हैं आपका जो आपका मंगल पांडे ने कहा किया है तो मंगल पांडे से पहले भी हुआ आपका तो वो दरअसल में छावनियों के विद्रोह अब तक जनता विद्रोह नहीं कर रही है और क्रांति तब होगी क्रांति कहा जाता है जब बहुत बड़े समूह उसमें शामिल हो जाए। ठीक है? तब उसको क्रांति कहेंगे। जैसे कि हमारे देश में आप जानते हैं जेपी थे। इंदिरा गांधी जी ने खूब तानाशाही की। इस देश में खूब तानाशाही की तो सब लोगों को जेल में ठूस दिया। तो भारतीय राजनीति से एक व्यक्ति ऐसे थे जो सन्यास ले चुके थे। जेपी सक्रिय राजनीति। तो जब पटना में छात्रों ने सभा की तो उन्होंने कहा कि आपको आना होगा और हमारा नेतृत्व करना होगा। तो जब एक व्यापक समूह हो जाए जिसमें बहुत अधिक वर्ग तक वो बात पहुंच जाए और
55:01 सभी वर्गों की भागीदारी उसमें हो जाए और वो लोग जुड़कर के किसी परिवर्तन के लिए आगे बढ़ना चाहे या परिवर्तन के लिए लड़ना चाहे तब उसको क्रांति कहा जाता है। तो जेपी ने किया। ऐसे ही यहां पर क्या हुआ कि 1857 में जब सब जगह मेरठ में बात पहुंची तो यहां पर जो मेरठ के नगर कोतवाल हुआ करते थे यह समझिए मुख्य आपका जो पुलिस मुख्य पुलिस जो व्यक्ति थे यहां पर मुख्य पुलिस का पद जिनके पास में था चीफ पुलिस वो थे नगर कोतवाल नगर कोतवाल यहां पर थे नगर कोतवाल यहां पर थे धन सिंह धन सिंह गुर्जर कौन थे बाबा धन सिंह गुर्जर यहां पर थे जो कौन थे नगर कोतवाल अब इन्होंने देखा ब्रिटिश सरकार क्या हमारे यहां पर अत्याचार कर रही है। अत्याचार कर रही है तो इन्होंने क्या
55:48 किया? जिन कैदियों को बंद किया गया था यहां जेल में जिनको सजा सुनाई गई थी इन्होंने कैदियों के फाटक खोल दिए कि तुमको क्रांति करनी हो और साथ में एक स्ट्रेटजी बना करके जो टेलीग्राफ सर्विस थी वहां की उस टेलीग्राफ सर्विस को इन्होंने डिस्कनेक्ट कर दिया ताकि यह प्रचार प्रसार बहुत ज्यादा ना हो पाए और अंग्रेज कोई संदेश ही ना भेज पाए। तो इस तरह के वहां का जो आपका टेलीकम्युनिकेशन का जो भी आपका यूनिट था उसको डिस्ट्रॉय कर दिया गया और साथ में यहां पर एक व्यक्ति थे और उनका नाम है कदम सिंह गुर्जर। कदम सिंह गुर्जर आप जानते होंगे दोनों व्यक्तियों के नाम आपने सुने होंगे और अगर नहीं सुने हैं तो मैं बता दूं कि आज भी जो हमारा गुर्जर समाज है वहां पर यह आपका एक बलिदान और सम्मान का प्रतीक हैं। जैसे यह मेरठ के रहने वाले थे और मेरठ में
56:33 इनका गांव भी है पांचली गांव। अगर आप जो लोग मेरठ के आसपास के हो जानते हो और समझते हो तो इन्होंने क्या बोला इनको बोला कि भाई यहां से तुम जो है ना अब हम सबको एक नेतृत्व की जरूरत होगी भाई जगह-जगह अगर भीड़ बगैर नेतृत्व के लड़ेगी तो क्या फायदा है अच्छा नेतृत्व कौन करे ये बड़ी बात थी तो यहां से जो भीड़ चली 10 मई से मेरठ से चलकर के भाई तुम दिल्ली पहुंचो और अभी जिस मुगल शासक को ये हटाना चाह रहे हैं वो भावना थी क्योंकि अंग्रेज विदेशी हैं और मुगल कम से कम देसी हैं हमारे देश में रह रहे हैं तो क्यों ना अब तक जो मुगलों के वंशज हैं आपका जिनका नाम है बहादुर शाह जफर। बहादुर शाह जफर जो अंतिम मुगल सम्राट थे क्यों ना उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाए। तो यह भीड़ ने कहां पर टारगेट बना लिया आपका? तो इस भीड़ ने टारगेट किया कि भाई हम पहुंचेंगे अब आपका
57:19 कहां पर? यह भीड़ आपका कहां पर चल दी? सारी की सारी जो विद्रोह करने वाली जनता थी। 11 मई को 11 मई 1857 को यह सब लोग पहुंचे। कहां पर? दिल्ली। दिल्ली पहुंचे। कहां पहुंच गए? यह दिल्ली पहुंचे। 18 मई 11 मई 1857 को लोग दिल्ली पहुंचे। अब ऐसा नहीं था कि बहुत और जगह पर नहीं बात पहुंची क्या ये वाली? तो धीरे-धीरे जन भावना लोगों तक बढ़ने लगी। जैसे कि बागपत क्षेत्र में मैं आपको बताऊं जो छपरौल गांव पड़ता है वहां पे जन्म हुआ था बाबा सहामल। चौधरी साहब थे वहां के बहुत चर्चित। उनका जो जाट समुदाय था उसमें बहुत पकड़ थी। उन्होंने 84 गांवों की पंचायत की और 84 गांवों के मुखियाओं से एक आपका उन्होंने
58:04 संवाद किया। ठीक है? तो वहां से उन्होंने भी आपका लिखना है इनको भी बाबा शाहमल की दौरान ये उन व्यक्ति उन दो व्यक्तियों में से नाम धन सिंह कोतवाल गुर्जर थे और आपका बाबा शाहमल बाबा शाहमल जाट इनका नाम आता है। इन्होंने 84 गांवों की एक पंचायत करके उस भीड़ को भी कहां पर भेजा। ये कहां से थे? बड़ौद से। बड़ौत बड़ौद से। ठीक है? बात याद रख लें। तो कहने का मतलब है भीड़ चलने लग गई आपका दिल्ली की तरफ और दिल्ली में उद्देश्य क्या है भीड़ के पहुंचने का क्योंकि उनको एक नेतृत्व की आवश्यकता है और नेतृत्व के रूप में उनका साथ कौन देंगे तो वह साथ देने के लिए हैं वहां पर आपका कौन बहादुर शाह जफर तो जो भीड़ 11 मई 1857 को दिल्ली पहुंची उसने क्या किया आपका 11 मई 11 मई
58:51 को पहुंच गई तो इन्होंने 12 मई 12 मई 1857 को 57 को मुगल सम्राट मुगल सम्राट मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर बहादुर शाह जफर क्योंकि बाकी सबको तो अंग्रेजों ने कमजोर कर दिया था। यह भी पेंशनर थे। लेकिन फिर भी सबसे बड़ा नाम इन्हीं का लोगों को लगा और मेरठ के नजदीकी भी थी। बहादुर शाह जफर को नेता घोषित। यह तो बुजुर्ग हो चुके थे। नेता घोषित किया कि भाई तुम हमारी क्रांति के नेता हो। घोषित किया
59:36 अनाउंस्ड अनाउंस्ड बहादुर शाह जफर बहादुर शाह जफर बहादुर शाह जफर एज हिज लीडर एज हिज लीडर ऑन 12th ऑफ मई 12th ऑफ मई ठीक है अब तो सब लोगों तक यह मैसेज पहुंचा अब बहादुर शाह जफर को तो थोड़ी दिक्कत यह भी थी कि भ ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ना है तो लड़ा भी जाए या ना लड़ा जाए तो उन्होंने उसके लिए पत्राचार किया और उस समय पर जितने भी स्थानीय शासक थे उन सबको चिट्ठियां लिख दी कि हम सबको एक अब विद्रोह करना है और हम सबको उसके लिए एकजुट होना पड़ेगा। वो चिट्ठियां सबके पास में पहुंची और भीड़ का समर्थन मिला। जब जैसे-जैसे लोगों को जब-जब जहां-जहां पता चला तो लोग विद्रोह करने
1:00:22 लगे। इस विद्रोह के बाद में अंग्रेजी सरकार ने उसको दमन करने के लिए अपने आसपास जितना भी उनका जो भारत के आसपास में जहां कहीं भी उनकी सेनाएं थी। ठीक है? उन सबको बुला लिया कि भाई आकर के भारत में क्रांति हो चुकी है। और एक ऐसा समय है जैसे कैनिंग ने खुद कहा है। कैनिंग ने कहा था आपका उनके लिए जिन्होंने 1857 की क्रांति में भारतीयों का योगदान नहीं किया। अभी हम बताएंगे कौन-कौन राजवंश थे वो। 1857 की क्रांति में कैनिंग ने स्वयं कहा था कि अगर सिंधिया इस 1857 की क्रांति में शामिल हो जाते तो मुझे यहां से भागना पड़ता। तो अब बहुत सारे राजवंश हुए जिन्होंने साथ नहीं दिया। लेकिन जब लोगों तक पहुंची तो स्थानीय लोग कौन थे इस क्रांति को शुरू करने वाले? तो जैसे मैंने अभी नाम बताया आपका बाबा शाहमल जाट। इनको अंग्रेज सरकार ने क्या किया? इनके कई शरीर के टुकड़े किए
1:01:08 और 21 जुलाई 1857 को कहते इनके सिर को उन्होंने लटकवा दिया ताकि लोगों के अंदर डर पैदा हो। तो इनको यहां पर शहादत है इनकी। यह फांसी से याद रख लेना। ठीक है? और एक व्यक्ति और थे यहां पर जैसे दिल्ली का क्षेत्र है ये। दिल्ली के आसपास में पड़ता है आपका जैसे दिल्ली कितने लोगों ने देखा है? पहले बताओ। दिल्ली कितने लोगों ने देखा है? तो आप कहेंगे भैया उत्तर भारत में यहां पर दिल्ली है। और दिल्ली के आसपास में आज दिल्ली से एक क्षेत्र लगता है नोएडा। नोएडा की सीमा लगती है। तो यह जो नोएडा होता था पहले यह आज गौतम बुद्ध नगर एक जिला है। लेकिन प्राचीन समय पर बुलंदशहर जिला हुआ करता था और बुलंदशहर जिले में यह कमान संभाली। यहां पर किसानों के एक नेता बने थे राव उमराव सिंह गुर्जर जो कि यहां एक दादरी जगह पड़ती है। दादरी
1:01:54 में आपका दादरी कस्बे के पास में एक गांव है कठियाड़ा वहां के निवासी हैं। तो राव उमराव सिंह गुर्जर ने यहां पर क्या किया? किसानों का नेतृत्व किया और सारे किसानों को इकट्ठा किया। सूरजपुर, सिकंदराबाद। ठीक है? यहां के आसपास के सब किसानों का नेतृत्व उन्होंने किया कि हम भीड़ को जो है इकट्ठा होना होगा और जितने भी अंग्रेजों के कारखाने हैं उन सबको आपका हमको हमले से हराना होगा। जैसे कि मैंने बताया कि आपको क्या नाम बताया मैंने राव उमराव सिंह गुर्जर राव उमराव सिंह गुर्जर इन्होंने भी नेतृत्व किया। यह नेता हैं 1857 की क्रांति के सब लोग। ठीक है? फिर इनको भी सार्वजनिक फांसी दी गई 17 सितंबर को। अंग्रेज सरकार अपना जुल्म ढा रही थी 17 सितंबर और यह बात है 1857 की इनको भी फांसी दे दी गई क्योंकि इन्होंने सिकंदराबाद में जो अंग्रेजों का अंग्रेजों
1:02:41 का आपका हेड क्वार्टर होता था उस पर इन्होंने हेड क्वार्टर का मतलब एक आपका क्या बोलेंगे उसको अगर हम कहें तो मतलब केंद्र हुआ करता था अंग्रेजी सेना का एक छोटी सी जेल भी हुआ करती थी सिकंदराबाद में और यह बातें मैं आपको बता रहा हूं इसलिए क्योंकि हमारी अपनी जो सिटी लगती है मेरी जो पढ़ाई हुई है या मैं कहूं कि मेरी छठी क्लास से लेकर के 12वीं तक की जो पढ़ाई हुई है वह सिकंदराबाद कस्बे में हुए हैं। और अगर मैं कहूं कि मैं मुझसे कोई पूछे कि आप इस पूरे भारत में किस शहर को सबसे अच्छा जानते हो तो हो सकता है आप सब उसका नाम ना जानते हो। लेकिन जिस शहर की गली-गली जिस शहर की नाली नाली को जिस शहर की ठेली ठेली को या जिस शहर के व्यक्तियों को या उसके आसपास के गांवों को अगर मैं बात करूं कि मैं समझता हूं तो वह
1:03:27 सिकंदराबाद है। जहां पर मैं सात साल पढ़ा हूं। ठीक है? ठीक है। निरंतर मैं मतलब एक साल तो अपने भैया के साथ में गया साइकिल बैठ के क्योंकि छठी क्लास में मुझे साइकिल चलानी नहीं आती थी। सातवीं में साइकिल मुझे मिली क्योंकि भैया के ट्यूशन रहते थे तो वो अपना मुझे लेकर के अपने ट्यूशन में उनके साथ-साथ मैं घूमता था। तो सातवीं में मुझ पर साइकिल चलानी आई। हालांकि बहुत छोटा बच्चा सीख लेता है। तो फिर सातवीं से लेकर के 12वीं तक साइकिल से सिकंदराबाद जाना पढ़ना और आज तक भी मतलब उस शहर से अपना मतलब दिली जुड़ाव है। अपने लोग हैं जहां पर आप जानते ही हो जहां पर हमारी पढ़ाई लिखाई होती है। जहां पर हमारे अपने लोग होते हैं दोस्त होते हैं। तो वहां पर आपका मतलब एक अलग लगाव होता है। जहां पर आप चीजों को समझते हो, लोगों को जानते हो। तो क्या बोलेंगे जी? ये सारी बातें मैं
1:04:13 आपको बता रहा हूं। तो यहां पर क्या हुआ आपका? का सिकंदराबाद में इन्होंने हमला किया तो इसके बाद में इनको भी एक फांसी दी। तो कहने का मतलब है क्रांति जो है वह चल चुकी थी और इसी के बाद में जो गुर्जर जाति है उसके लिए स्टेटमेंट आया अंग्रेजों का और उन्होंने उनको कहा कि यह गुर्जर जाति जो है अपने लेखों में उन्होंने कहा कि गुर्जर जाति आपका एक विद्रोही एक विद्रोही और खतरनाक जाति है। ऐसा कह करके उन्होंने संबोधित कहने का मतलब है क्रांति की शुरुआत हो चुकी थी और किसको लीडर अपना अपॉइंट कर लिया गया था? लीडर अपॉइंट कर लिया गया था बहादुर शाह जफर को। लेकिन जो वास्तविक कमान थी वास्तविक वास्तविक जो कमान थी वास्तविक कमान क्योंकि ये तो बूढ़े हो चुके थे। वास्तविक कमान थी इनके कमांडर इनके कमांडर का नाम था बख्त खान। क्या नाम
1:04:59 है कमांडर का नाम? बख्त खान। तो बख्त खान के हाथों में वो कमान थी। और बख्त खान ने इसको संभाला क्योंकि ईस्ट इंडिया कंपनी में काम भी कर चुका था। बख्त खान पहले। कहने का मतलब है अंग्रेजों को यह बात पता चली तो अंग्रेजों ने अपनी सेना भेजी और सेना भेजी तो यहां पर जो अंग्रेज अधिकारी आए वह कौन-कौन आए ये लिखना फोर्स ऑपरेशन दमन के लिए अंग्रेज अधिकारी दमन के लिए अंग्रेज अधिकारी इसकी विफलता के कारण भी हम पे बात करेंगे बाद में पहले इसको समझ दमन के लिए अंग्रेज अधिकारी अंग्रेज अधिकारी दमन के लिए अंग्रेज अधिकारी अंग्रेज अधिकारी कौन-कौन से थे? एक तो निकोलसन था जो मारा गया। निकोलसन और हडसन। ये बहुत पूछे जाते हैं भैया। एक तो
1:05:46 नेतृत्व किसने किया और दमन के लिए जो अधिकारी थे हडसन। निकोलसन और हडसन। इसमें क्या हो गया था? निकोलसन मारा गया। हिड के द्वारा निकोलसन को मारा गया। ठीक है? और सप्रेशन और या लिख लीजिए रेबेलियंस आर क्योंकि यह दमन हो ही गया था लिखना रेबेलियंस विद्रोही रेबेलियंस वर सप्रेस्ड बाय वर सप्रेस्ड बाय सप्रेस्ड बाय निकोलसन एंड निकोलसन एंड एडसन कौन मारा गया? निकोलसन मारा गया। निकोलसन
1:06:33 मारा गया। अच्छा अब यहां पर क्या हुआ कि जैसे ही पता चला कि भाई अंग्रेज सरकारों की जो घेराबंदी है वो शुरू हो गई। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना घेरा डाल दिया। तो जो बहादुर शाह जफर था तो बहादुर शाह जफर यहां पर क्या करता है? बहादुर शाह जफर को समझ में आ गया कि यार यह तो गड़बड़ हो गई। क्रांति क्या ये तो हम मारे गए। बहादुर शाह जफर यहां से भाग गया। बहादुर शाह जफर ने क्या सोचा कि भाई यहां से निकल के लाल किले से लाल किले में रहता था। तो कहां चला गया? बहादुर शाह जफर रेडफोर्ट से लाल किले से हुमायूं के मकबरे में जो कि दिल्ली में ही था। चुपचाप जामा मस्जिद से होकर के यही कहा जाता है कि पहले जामा मस्जिद गया और इसके पास में जो सबसे कीमती चीज बताते हैं उस समय पे बहादुर शाह जफर के पास में हुआ करती थी। वो कहते हैं कि एक सीसी में जो इसकी नियामत थी वो इसने जामा मस्जिद में दे दी और कहते हैं उसमें
1:07:19 पैगंबर मोहम्मद का कोई बाल रखा हुआ था। उसमें उनका बाल था। इसकी प्रिय चीज उसको माना जाता है। वहां से होते हुए यह गया आपका कहां पर? हुमायूं का मकबरा। हुमायूं का मकबरा और बख्त खान ने इससे कहा था कि तुमको जाना होगा अभी दोआब में। दोआब का मतलब गंगा जमुना के बीच में जो भूमि है वहां पर अभी लोग जो हैं वो इकट्ठे होंगे वो कल को तुम्हें संरक्षित करेंगे तो यहां से निकल के वहां जाओ। लेकिन इसके कुछ लोगों ने इससे कहा कि नहीं तुमको यहीं बने रहना है और यहीं पर तुम्हारी स्थिति जो है वह सुरक्षित है। और उन्हीं लोगों ने इसकी सूचना दे दी ईस्ट इंडिया कंपनी। अंग्रेज अधिकारी यहां पर आए और कहते हैं कि इतनी हालात खराब किया उन्होंने। बहादुर शाह जफर को उन्होंने पीटा मारा। इवन ये कहते हैं एक सैनिक अधिकारी ने तो उनकी दाढ़ी पकड़ करके बुड्ढे तक उनसे कहा और उसको खींच लिया गया। ठीक है? और खींच करके ले जाया गया उस मुगल बादशाह को और साथ में यहां पर
1:08:06 फिर मुगल बादशाह कहते और भी बहुत सारे लोग थे। बेगमें थी आपका बच्चे थे उसके साथ में। तो यहां पर मुगल बादशाह से उन्होंने कहा कि भाई तुमको हमारे साथ चलना होगा। तो मुगल बादशाह ने इनके बदले में उनसे लाइफ गारंटी मांग। लाइफ गारंटी मतलब मुझे जीवन दान दे दो। ठीक है? मुझसे यह भूल हुई है कि मैंने लोगों का नेतृत्व करने के लिए ठान लिया। लेकिन तुम मुझे जीवन दान दे दो। इवन जीना चाहता हूं। तो अंग्रेज सरकार ने उनको लाइफ गारंटी दी थी। साथ में उसने लाइफ गारंटी अपने बच्चों की भी मांगी थी। लेकिन उसके दो लड़के और एक पोते को वहीं चांदनी चौक में गोली मार करके लटका दिया गया अंग्रेज सरकार के द्वारा। और साथ में इसको भेजा गया कहां पर? आपका पकड़ कर के रंगून। और ऐसी जगह रखा गया कि रंगून के लोगों तक को भी नहीं पता था कि यहां पर मुगल सम्राट को बंदी बनाया गया है। बस इसकी बेगम जो थी जमानी बेगम उसको उसके साथ में भेजा गया था। जिसको भारत आने की भी
1:08:52 आजादी थी। तो हुमायूं के मकबरे में भाग गया। तो क्या बोलेंगे? इसको यहां से पकड़ कर पकड़ कर पकड़ कर क्या बोल दिया गया? पकड़ कर रंगून। रंगून कहां पर पड़ता है? बर्मा। बर्मा को आज किस नाम से जानते हैं आप? म्यामियार। रंगून भेज दिया। और यह फिर वहीं रहा और वहीं पर बहादुर शाह जफर की मौत। 1862 में। 1862 में इसकी मौत हुई। मौत हुई। ठीक है? और बाद में तो मुगल शहजादों की यह स्थिति हुई आप सब कभी स्टडी करेंगे इस बात पे। इसके बाद में तो मुगल शहजादों को भीख मांग के अपना जीवन चलाना पड़ा था। अंग्रेज सरकार ने। ऐसी हालत उनकी। 1862 में मौत हुई तो आप जानते हैं बहादुर शाह जफर। जफर नाम से क्या लिखता था? अपनी कविताएं और रचना लिखता था जफर।
1:09:38 बहुत महत्वपूर्ण है। ठीक है? तो उसने लिखा था कितना बदनसीब है जफर। अपने अंतिम दिनों में कितना बदनसीब है जफर कि दो गज जमीन भी ना मिली दफन होने के लिए कुएं यार में। मतलब बाद में दो गज जमीन के लिए वह तरस गया जो कभी भारत का मुगल सम्राट था ईस्ट इंडिया कंपनी ने यह हालत कर दी बात समझेंगे बात समझ गए यहां से सारी कहानी समझ में आई तो कहेंगे भैया दिल्ली में जो आपका विद्रोह था उसका दमन कर दिया गया और इसके बाद में क्या हुआ कि जो जगह-जगह जगह-जगह मैसेज गया वहां वहां पर विद्रोह होने उसी क्रम में हम जानेंगे लखनऊ में विद्रोह लखनऊ में लखनऊ यानी कि जो आपका अवध क्षेत्र था लखनऊ लखनऊ में कौन थे आपके? वाजिद अली शाह की डेथ हो चुकी थी और
1:10:25 उसकी बेगम थी बेगम हजरत महल। बेगम हजरत महल और छोटा सा बच्चा था चार वर्ष का जिसका नाम है बेगम हजरत महल और बेगम हजरत महल के पुत्र का नाम था बिरजिस कादिर। अवध की बरादी आप जानते ही हैं। ब्रजिस कादिर। अवध की बर्बादी को आप सब जानते हैं। भाई 1801 में तो वेलेजली ने वहां पर सहायक संधि। उसके बाद में मुझे बताओ आपका जो हड़प नीति के तहत कुशासन का आरोप लगाकर डलहौजी ने उसको कब हड़पा था? तो आप कहेंगे भैया हमको पता है कि उसको डलहौजी ने 1856 में हड़प लिया था और 1856 में जब हड़प लिया उसको तो आपका पगड़ी रख दी वाजिद अली शाह ने वाजिद अली शाह की इसके बाद में डेथ हो जाती है तो बेगम आ जाती हैं तो जब उनको पता चला क्रांति हो रही है और क्रांति के
1:11:11 द्वारा हम अपना राज्य वापस पा सकते हैं तो बहुत सारे स्थानीय राजा जिनसे अंग्रेजों ने उनके क्षेत्रों को छीन लिया था उठ खड़े हुए जिनमें से एक नाम बेगज बेगम हजरत महल ये डेट कब की थी बड़ी पूछी जाती है भीड़ पहुंच गई यहां 4 जून 1857 को कब की डेट है? अभी हमने आपको एमसीक्यू में एक सही मिलान भी कराया था। आपको याद होगा। कानपुर में 5 जून, इलाहाबाद में 6 जून यूपीसीएस में पूछा गया ये डेट बड़ा अच्छा। 4 जून 1857 को। ठीक है? और बेगम हजरत महल इसका जो उपनाम था इसको महक परी भी महक परी भी कहते थे। फिर यहां पर विद्रोह किया लोगों ने। बहुत सारी जनता यहां पर पहुंच गई। लाखों लोग। अब दिक्कत यह थी कि बहुत सारे लाखों लोगों के पास में किसी के पास लाठी था। किसी के पास डंडा था और उधर ब्रिटिश
1:11:56 सरकार के पास में जो थी वह आपका बंदूके थी और जब बंदूकों से फायर होते थे तो बहुत भगदड़ मचती थी और उस भगदड़ में भी बहुत सारे लोग मारे जाते एक कारण रहा कि हमारे पास क्योंकि इसको संगठित तो किया नहीं गया था कोई मैसेज तो दिया नहीं गया था तो यहां पर याद रख लेना क्या बोलेंगे यहां पर जो आपका दमन के लिए अधिकारी था उसका नाम है कैंपबेल क्या बोलोगे कैमपबेल कैंपबेल दमन जो किया वह कैंपबेल ने किया और गोर्खा रेजीमेंट की मदद से किया क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा थी। अब मैंने कहा था अंग्रेज सरकार भविष्य में गोर्खा रेजीमेंट का फायदा उठा पाई गोखा रेजीमेंट की हेल्प से। आपको याद है मैंने कहा था कि उन्हें नेपाल में आपका युद्ध करने का कोई फायदा नहीं हुआ सिवाय
1:12:44 इसके कि भविष्य में उनको गोर्खा सैनिक मिल गए जो बहादुर थे। तो यहां पर क्योंकि पहले गया था सेंट लॉरेंस। तो लॉरेंस गया अवध में तो लॉरेंस तो रेजिडेंट भी था अवध में उसको अच्छी पकड़ थी लेकिन भीड़ ने जब लॉरेंस को ही मार दिया तो लॉरेंस के बाद में फिर जिम्मेदारी आई कैंपेल के तो वो गोर्खा सैनिकों को लेकर गया था ओके इसके बाद में फिर आपका क्या बोलेंगे इसके बाद में एक आपका झांसी का जिक्र आएगा झांसी झांसी झांसी में कौन थी बताएं झांसी में थी रानी लक्ष्मीबाई हम सब ने पढ़ा है रानी लक्ष्मीबाई बचपन से वीरांगना ना लानी लक्ष्मी कुंदोलो हरबोलो के मुंह हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी
1:13:29 वाली रानी ये पंक्तियां किसकी हैं? यह पंक्तियां हैं सुभद्रा कुमारी चौहान की। अब हम उन दोनों पक्षों पर बात करेंगे कि जो सिंधिया फैमिली पर आपका दाग लगाए जाते हैं। उन सबके क्या कारण थे? क्या कहानी है? सच्चाई क्या है? तो जो रानी लक्ष्मीबाई थी इनके पति का क्या नाम था? बताएंगे। इनके पति थे आपका इनकी डेथ हो गई थी और अपनी डेथ से पहले वह क्या कह रहे थे ब्रिटिश सरकार से कि हमारे एक दत्तक पुत्र को स्वीकार कर लो गंगाधर राव क्या अंग्रेजी सरकार ने उसको आपका स्वीकार कर लिया था बताएं हां या ना आप कहेंगे भैया पत्र पहुंचने से पहले ही उनकी डेथ हो गई और अंग्रेजी सरकार ने अस्वीकार कर दिया था दामोदर राव यह आपका दत्तक पुत्र थे उनके दत्तक ठीक है याद रख लेना इनका जो जन्म हुआ आपका जन्म स्थान कभी भी पूछे जन्म हुआ
1:14:16 वाराणसी में दो डेट कही जाती है 1828 और 1835 वाराणसी में और जो इनकी मृत्यु हुई मृत्यु हुई वह मृत्यु इनकी हुई ग्वालियर में कहां पर हुई ग्वालियर में बहुत पूछी जाती है और ग्वालियर में ही क्या है इनका समाधि है ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई जी की समाधि सिमेट्री कहां पर है वो आपका ग्वालियर में है ये बात हमको पता होनी चाहिए ठीक है अच्छा हम आपसे आपको पीछे ले चलेंगे डलहौजी के टाइम पे थोड़ा सा तो मैंने कहा था डलहौजी की तो डॉक्ट्रिन लैब पॉलिसी थी तो उसके तहत झांसी को किस वर्ष में उसने अपने कंट्रोल में कर लिया था? 1853 लास्ट में मैसेज दिया और 1854 बाद में उन्होंने क्या किया? झांसी को इन कर लिया था। यहां से आप कहानी समझे सारी 1854 1854 में क्या कर लिया था? उन्होंने
1:15:03 झांसी का विलय कर लिया। झांसी का विलय बहुत जगह जो वर्ष है 1853 मिलता है लेकिन एनसीआरटी के अकॉर्डिंग और एक बार एसएससी जीडी में पूछ लिया 1853 और 54 दोनों वर्ष दे दिए और 1854 को सही माना गया एनसीआरटी के आधार पर। ओके? ये जो बात है आपका इसके बाद में झांसी का जब इन्होंने विलय किया तो आपका रानी लक्ष्मीबाई कहां गई? तो रानी लक्ष्मीबाई क्योंकि उनके पति खत्म हो चुके थे। ठीक है? अब इनके पास में जो विश्वसनीय
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