0:03 रेलवे [संगीत] रफ्तार रीजनिंग जो ऐसी हिम्मत पैदा करेगा कि एग्जामिनर से बोलोगे कि नंबर काट के दिखाओ मतलब कि अब रेलवे का कोई भी एग्जाम हो रीजनिंग में मिलेंगे पूरे नंबर मैं अतुल अवस्थी आपको बनाऊंगा का राजा साथियों आप बनेंगे अतुल अवस्थी के सिग्नेचर यानी जहां कहीं भी 10 सेकंड में उत्तर देने की बात होगी जहां विकल्प से आंसर देने की बात होगी वहां सबसे पहले नाम होगा आपका तो दोस्तों रेलवे रफ्तार रीजनिंग को जवाइन करने के लिए अभी सब्सक्राइब करो रेलवे अड्डा 247 रोज सुबह
0:50 11 बजे तहलका क्लास धमाकेदार क्लास और लाजवाब क्लास के साथ रोज सुबह 11 बजे आपका इंतजार करूंगा रेल [संगीत] नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सभी का एसएससी अड्डा 247 youtube3 क्लास लगातार कुछ दिन थरी क्लास ताकि आप भी रहे तैयार आपके दिल में यह शिकायत ना रह जाए कि आज तो सर आप थरी नहीं पढ़ाते यार क्योंकि हमने पहले ही कहा हम थरी जब अड्डा जवाइन किए थे तब लगभग सारी पढ़ा दिए थे तो स्टूडेंट जब कम होने लगे
1:35 कि अरे सर थरी में क्या होता है ना कि जो लोग शुरू से ज्वाइन करते हैं उनका तो मन लगता है जो लोग शुरू से जवाइन नहीं करते वो बीच-बीच में से आते हैं तो फिर उनको समझ में नहीं आता तो व हट जाते हैं लेकिन आज हम लोग वैदिक युग का लेक्चर लेंगे लेकिन वैदिक युग में भी मैं आर्यों से आज लेक्चर को नहीं शुरू करूंगा आर्यों से नहीं शुरू करूंगा मैं शाम वेद अथर्ववेद ऋगवेद यजुर्वेद मैं आप सबसे एक रिक्वेस्ट करूंगा जब आज मैं क्लास लेकर के हटूंगा तो कमेंट बॉक्स में यह जरूर बताना कि तुम्हें कंटेंट कैसा लगा तुम्हें समझ में कितना आया और तुम्हें थेरी पढ़-पढ़ के मजा आ रहा है कि नहीं क्योंकि आज तो मात्र दूसरी अभी पॉलिटी जियोग्राफी मैं सबकी थोड़ी-थोड़ी
2:21 थरी क्लास जरूर लूंगा ठीक है ना तो यह बात याद रखना और हां मैं वादा के साथ कहता हूं कि मेरे जो पेड क्लास के स्टूडेंट होंगे वो अक्षरस जानते होंगे कि मैं youtube2 में कोई अंतर नहीं करता हूं अगर मैं थिरी पढ़ाने पे आ जाऊं तो मैं थरी की बात कर रहा हूं इसलिए मैं जल्दी थरी पे youtube2 के अलावा कुछ लेक्चर सारे नहीं कुछ लेक्चर जरूर मैं थिरी की लूंगा आपके आज वैदिक जज में वैदिक एज में मैं आर्यों के बारे में बात नहीं करूंगा इन चारों वेद के बारे में बात करूंगा आप जानते हैं कि
3:07 जो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट है वो आपके ऋगवेद यजुर्वेद श्यामवेद और अथर्ववेद से रिलेटेड है हम लोग बारी-बारी से थोड़ी-थोड़ी देर हर एक चैप्टर पे देंगे ठीक है ना ऋगवेद से क्वेश्चंस थोड़े ज्यादा आते हैं तो हम लोग उसी हिसाब से पढ़ेंगे तो पहला उठा ले ऋगवेद सब लोग रेडी हो ऋगवेद के लिए आइए तो मैं इसलिए थोड़ा सा टाइम ले रहा हूं कि ताकि सब लोग जुड़ जाएं कि फिर मजा आ जाए ऋगवेद ऋगवेद अथर्ववेद श्यामवेद और यजुर्वेद आज का टॉपिक है और इस टॉपिक में हम लोग पहला लेक्चर लेने जाएंगे ऋगवेद के ऊपर पहला ऋगवेद के ऊपर अब जरा समझना मेरी राइटिंग गंदी है इसलिए आप लोग को सपोर्ट करना पड़ेगा कि राइटिंग छोड़िए गुरुदेव आप तो
3:53 बस समझाइए अगर हम लोग बात करें ऋगु वेद की यह कॉर्नर में लिखा हुआ है इसलिए मैं हेडिंग नहीं डालूंगा और सिर्फ ऋगवेद पढ़ाऊंगा ठीक है ना ऋगवेद जैसे आप कोई किताब मान लीजिए आपने यह कोई एक किताब खरीदी यह आपने कोई एक किताब खरीदी आप किताब खरीदेंगे तो आपके किताब पहले तो ऋगवेद समझने से पहले हमें यह समझना पड़ेगा वेद क्या है वेद वेदों को हिंदू मेथड में वेदों का लिटरल मीनिंग होता है ज्ञान वेदों को ज्ञान के रूप में में परिभाषित किया गया है या नॉलेज के रूप में परिभाषित किया गया है मैं सबसे पहले आपको इसी मुद्दे पर बात करूंगा कि वेदों को ज्ञान के रूप में प्रभावित परिभाषित किया गया या नॉलेज
4:41 वेदों को हम लोग अपौरुषेय भी कहते हैं अ पौरुष अपौरुषेय मतलब क्या होता है अ मतलब होता है मेरे लल्ला नहीं पौरुष मतलब होता है पुरुष तो ऋगु वेद किसी पुरुष के द्वारा या वेद किसी पुरुष द्वारा नहीं लिखा गया है ठीक है ना वेदों को हम लोग संहिता के नाम से भी जानते हैं ठीक है ना और वेदों को हम लोग श्रुति संहिता के नाम से भी जानते हैं श्रुति संहिता इतने नाम से हम लोग वेदों को जानते हैं क्यों अच्छा सर हम लोग तो बचपन से पढ़े आए कि वेदों को वेदव्यास जी ने लिखा है नहीं ध्यान से सुनना वेदों को माना जाता है हिंदू धर्म में कि ये अलग-अलग लोगों के पास फैले हुए
5:29 ज्ञान थे ये अलग-अलग लोगों के पास फैले हुए ज्ञान थे इन ज्ञान को एक व्यक्ति जिसका नाम था आपके कौन सा वेदव्यास वेदव्यास ने इस जो देवताओं के द्वारा प्रदत ज्ञान था वह फैला हुआ था उस ज्ञान को वेदव्यास जी ने एक जगह संकलित किया कंपाइल किया उसे कहा गया वेद तो वेद आर नॉट रिटेन वेदों को किसी ने लिखा नहीं है किसी पुरुष ने नहीं लिखा है बल्कि वेदाज आर कंपाइल्ड वेदों को संकलित किया गया है संकलित की इंग्लिश होती है मेरे भाई कंपाइलेशन ठीक है ना वेदव्यास ने संकलित किया है कंपाइलेशन कंपाइल्ड बाय
6:15 वेदव्यास वेद आर कंपाइल्ड ठीक है ना ये कंपाइल्ड है ना कि इनको किसी ने लिखा है दूसरी बात अब यह तो वेदों को कहा गया मतलब कि वेदों को संहिता कहा गया श्रुति संहिता कहा गया अपुष कहा गया ज्ञान कहा गया वेद हिंदू धर्म में चार है ठीक है जिनको आप ऋगवेद यजुर्वेद श्यामवेद और अथर्ववेद के रूप में पढ़ते हो उनमें से जो हम लोगों का सबसे पहला जिसको हम लोग शुरू करेंगे अब उसमें भी आप ये जो तीन वेद हैं ऋगवेद यजुर्वेद श्यामवेद इनको आप त्रय वेद भी कहते हो ट्राय वेदाज या वेद त्रय भी आप कहते हो इनको आप क्या कहते हैं वे त्रई इनको आप वेद त्रई के नाम से भी जानते
7:03 हो अथर्व वेद को बस अलग कर दो अथर्ववेद को अलग कर दो इसको अलग कर लो तो ऋगवेद यजुर्वेद और आपके श्यामवेद इनको आप वेद त्रय भी कहते हो अभी मैंने बस नाम बताया अब आओ तो वेद मतलब क्लियर हुआ वेद का मतलब होता है ज्ञान जो कि देवताओं ने दिया है इसे वेदव्यास ने संकलित किया है वेदव्यास का ओरिजिनल नाम जरूर याद रखना वेदव्यास का वास्तविक नाम था महर्षि कृष्ण द्वैपायन यह भी आपके पेपर में कई बार पूछता है महर्षि कृष्ण द्वैपायन आई होप यहां तक सभी को क्लियर होगा अब अगले पॉइंट पर आते हैं अब बात करते हैं ऋगवेद की जैसे मान लो यह किताब ऋगवेद है एक मिनट के लिए मान लेते हैं यह ऋगवेद है जब आप कोई किताब खरीदते हैं तो
7:51 किताब के अंदर क्या होता है चैप्टर अध्याय पाठ यही कुछ होता है ना इंडेक्स वगैरह इसी तरीके से ऋगवेद के अंदर अगर इसको एक बार हम ऋगवेद मान ले तो ऋगवेद के अंदर मेरे लल्ला 10 मंडल दिए हैं जिनको आप आधुनिक शब्दों में चैप्टर अध्याय ऐसा मान लीजिए ठीक है ना 10 मंडल दिए हैं ऋगवेद को अगर आप ओपन करेंगे तो इसमें करीब करब 1028 सूक्त है 1028 सक्त है कहीं कहीं आपको यह ऐसे भी लिखा हुआ मिलेगा 107 प् 11 107 यह माना जाता है कि यह देवताओं के द्वारा दिए गया ज्ञान थे और ऋगु वेद में मनुष्यों द्वारा जो लिखे गए मंत्र हैं
8:38 मनुष्यों द्वारा हस्त लिखित ठीक है ना जो हस्त लिखित मंत्र है उनकी संख्या 11 है मनुष्यों के जो हाथों से लिखा गया उसको कहा जाता है लल्ला बाल खिल तो अगर आपसे कभी पेपर में पूछे कि ऋगु वेद में बाल्य खिल मंत्रों की संख्या कितनी है तो बता देना 11 टोटल सूक्तो की संख्या 1028 जिसमें 107 देवताओं के द्वारा प्रदत और 11 बाल खिल हैं जो मनुष्यों के हाथों से लिख दिए गए वो है साथ ही साथ अगर रि चाओ की बात की जाए तो ओल्ड एनसीआरटी किताब के हिसाब से 10580 रि चाए है रि चाए हालांकि 10400 समथिंग भी कुछ कुछ किताबों में दिया रहता
9:25 है लेकिन ओल्ड एनसीआरटी के हिसाब से 10580 है तो याद रखिएगा कि ऋगवेद में 10 मंडल है 1028 सूक्त है जो इस दो भाग में बटे हैं बालि खिल कहा जाता है जो मनुष्यों के हाथों के द्वारा लिखे गए 10500 आपके 80 रचाए हैं ठीक है रिचा है उसके बाद अगर अब जैसे ऋगवेद ऋगवेद वेदव्यास ने संकलित कर दिया ठीक है सर ऋगवेद को इस ऋगवेद को वेदव्यास ने संकलित किया अब मान लो यह ऋगवेद है ऋगवेद को वेदव्यास जी ने संकलित किया या इसको किसी राइटर ने लिखा लेकिन इस किताब का जानकार व्यक्ति मैं भी तो हूं मैं भी तो आपको
10:11 सुना रहा हूं गा रहा हूं बता रहा हूं इस किताब की जानकारी दे रहा हूं हिस्ट्री पॉलिटी जियोग्राफी मैथ रीजनिंग की इसका मतलब है कि ऋगु वेद का संकलन किया वेदव्यास ने लेकिन उस वैदिक युग में ऋगवेद को जिस व्यक्ति ने आम जनता को गाया सुनाया या बता बताया वो होत्र नाम का एक ऋषि था होत्र नाम का इस होत्र नाम के ऋषि ने व्यक्ति ने उस समय के लोगों को उस समय के लोगों को ऋगु वेद को गाया सुनाया और बताया तो स्थिति क्या फसी अब कोई जरूरी तो नहीं है कि सबको सब बात समझ में आ जाए तो ऋगवेद भी कई लोगों को समझ में नहीं आई जब ऋगवेद कई लोगों को बातें समझ में नहीं आई तब ऋ
10:59 वेद को समझाने के लिए कुछ गाइड की कुछ ग्रंथों की रचना की गई उन ग्रंथों को कहा गया ब्राह्मण ग्रंथ याद रखना कि वैदिक जज में ब्राह्मण कोई जाति नहीं थी वेदों को समझने के लिए एक तरीके की गाइड की जो रचना की जैसे दसवी 12वीं का किताब होता है तुमको नहीं समझ में आता है तो तुम एग्जाम के टाइम पर गाइड खरीद लेते हो कि यार इसमें से हमको समझ में आ जाएगा तो यह जो आपका है यह आप कि क्या हुआ ब्राह्मण ग्रंथ इसके दो ब्राह्मण ग्रंथ हैं ऋगु वेद को समझने के लिए दो ब्राह्मण ग्रंथ हैं एक ब्राह्मण ग्रंथ का नाम है ऐतरेय ब्राह्मण ठीक है ना ऐतरेय ब्राह्मण आपसे पेपर में पूछता है ऐतरेय
11:44 ब्राह्मण का जिक्र किस वेद में है ऋगवेद में एक ब्राह्मण ग्रंथ का नाम है कौस्त कीय ब्राह्मण कौस त कीय ब्राह्मण ठीक है ना कौस्त कीय ब्राह्मण ये कौस्त कीय ब्राह्मण और ऐतरेय ब्राह्मण आपकी जानकारी के लिए एक मजेदार बात बताऊं ऐतरेय ब्राह्मण में उस समय पुत्री को डॉटर को पुत्री को किस नाम से बुलाते थे कृपण नाम से अगर कभी आपसे पूछे किस ब्राह्मण ग्रंथ में पुत्री को कृपण नाम से बुलाते थे तो त्रे ब्राह्मण में और बुरा मत मानिए यह तो किताबों में त्रे ब्राह्मण में पुत्री को दुखों का स्रोत बताया गया है ठीक है ना पुत्री को दुखों का स्रोत बताया गया है और पुत्र को परिवार का रक्षक बताया गया है तो
12:32 ऋगु वेद को समझने के लिए ब्राह्मण ग्रंथ का दो ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई इसी ऋगवेद की पहले मैं आपको मंडलों के बारे में समझाऊ ऋगवेद में सबसे पवित्र नदी कहा गया कि जो सबसे पवित्र नदी है वह है सरस्वती जिसे नदीत मा माते दमा इन सब की संज्ञा दी गई है ऋगवेद में एक चैप्टर है जिसका नाम है नदी संहिता नदी संहिता में वैसे तो कुल 39 नदिया थी लेकिन 21 नदियों का कई बार उल्लेख है ऋगु वेद में आपसे पूछता है यमुना नदी का जिग्रस बार मिलता है गंगा नदी का जिगर कितनी बार मिलता है याद रखना गंगा नदी का जिगर एक बार यमुना नदी का जिगर तीन बार मिलता है ठीक है ना यमुना नदी का जीग्र हमें कितनी बार मिलता
13:17 है तीन बार मिलता है ऋगवेद में होत्र नामक ऋषि ने गाया था यहां तक बातें क्लियर हुई ऋगवेद के बारे में सरस्वती नदी को ऋगु वेद में माते दमा नदीत मा सबसे पवित्र पॉस नदी का संज्ञा दिया गया है ऋगवेद में अब ऋगवेद के अंदर हम तो ये जनरल बातें अभी बता रहे हैं उसके अलावा आपको बतावे कि ऋगु वेद में अगर हम बात करें तो ये जो 10 मंडल है इनके अंदर से खूब प्रश्न आता है जैसे इस 10 मंडल में से पूछता है थर्ड मंडल से क्वेश्चन सेवेंथ मंडल से क्वेश्चन नाइंथ मंडल से क्वेश्चन और 10थ मंडल से क्वेश्चन यह वो वो मंडल हैं जिनसे क्वेश्चन आते हैं आपके पेपर में ऋगवेद के
14:04 10 आपसे ऐसे पूछेगा ऋगवेद के किस मंडल में गायत्री मंत्र का जिग्री मंत्र का जिग्री वेद के थर्ड मंडल में मिलता है और इसी गायत्री मंत्र को लिखा किसने है तो वह आपको आंसर करना होगा विश्वामित्र जी ठीक है ना विश्वामित्र जी नाम के ऋषि हुआ करते थे वह गायत्री मंत्र लिखे हैं डेडिकेटेड समर्पित किसे है ऋगु वेद का गायत्री मंत्र तो विश्वामित्र जी द्वारा लिखित यह समर्पित है सवित नामक देवता को यह सवित ही आधुनिक समय में सन है या सूर्य देव है तो अब अगर आपसे पूछे कि गायत्री मंत्र किस वेद में है ऋगवेद में है किस मंडल में है थर्ड मंडल में है लिखा किसने है
14:51 विश्वामित्र जी ने डेडिकेटेड टू हमम समर्पित किसे है सवित को थर्ड मंडल क्लियर हुआ सभी को अब आ जाओ सातव मंडल पर आते हैं ठीक है ना अब आ जाते हैं सातव मंडल पे कि सर सातव मंडल में क्या दिया है ऋगवेद के सातव मंडल में एक राजा थे सुदास ठीक है ना ऋगु वेद के सातव मंडल का मैं अब आपको जिक्र करता हूं ऋगवेद का सातवा मंडल ठीक है ना ऋगवेद का सातवा मंडल एक्चुअली एक राजा थे जिनका नाम था सुदास राजा सुदास जो थे ये भरत वंश के हुआ करते थे भरत वंश के ठीक है भरत वंश के इनके गुरुदेव हुआ करते थे जो राजगुरु वो विश्वामित्र जी हुआ करते थे ठीक है ना
15:39 विश्वामित्र जी विश्वामित्र जी बहुत जल्द क्रोधित हो जाते थे एक दिन राजा सुदास ने विश्वामित्र जी के पास यह सूचना भेजवाई कि आज से आप हमारे राजगुरु नहीं है इनको अपनी नौकरी जाते हुए दिखी अरे हम कैसे हम हमारी नौकरी किसे बनाओगे अपना राजगुरु राजा सुदास ने कहा हमारे पास एक ऋषि है जिनका नाम है वशिष्ठ जी हम वशिष्ठ जी को अपना राजगुरु बनाने जा रहे हैं विश्वामित्र भड़क गए उस समय आर्य लोग कबीले में रहते थे ट्राइब्स में विश्वामित्र जी दौड़े दौड़े 10 कबीले वालों के पास पहुंच गए ठीक है ना 10 कबीले वालों और इन 10 कबीलों को लेकर के 10 राग्य नाम से ग्रुप बना लिए यह 10 राजा और इनको लीड किया विश्वामित्र जी ने लेकर के हमला कर दिए
16:26 राजा सुदास पर राजा सुदास और विश्वामित्र जी के बीच में युद्ध हुआ इस युद्ध को हम लोग दस राग युद्ध के नाम से जानते हैं और इसी का वर्णन ऋगवेद के सातवें मंडल में मिलता है यह जो युद्ध था मेरे लल्ला यह लड़ा गया था परणी नदी के किनारे और यह जो परणी नदी है यह आधुनिक समय में रावी नदी के नाम से जानी जाती है और इसी का वर्णन है सातवें मंडल में ठीक है ना रावी नदी के नाम से जानी जाती है ठीक है ना अच्छा कुछ ऐसे स्टूडेंट हैं वो आके पूछेंगे सर यह क्लास रेलवे के लिए है यह क्लास एसएससी के लिए है अगर इतिहास में वैदिक एज का चैप्टर रेलवे पूछता होगा एसएससी पूछता होगा तो है
17:11 नहीं पहली फुर्सत में तुम जाके आराम करो जिसको अपना सिलेबस तक ना पता हो उसे पढ़ाने की कोई जरूरत है सही सही बताओ पूरी एनर्जी लगा कर के पढ़ाओ और एक लो सर ये एसएससी में नहीं पूछेगा भो यहां से नालायक कहीं के एक है उसी में मैं देख लेता हूं ना तो मेरा खून खोल जाता है क्या पागल टा ऐसे ही लड़के अलग-अलग कोर्स खरीदते हैं मैं सच बता रहा हूं एसएससी के नाम पर अलग सीपीओ के नाम पर अलग सिलेक्शन पोस्ट के नाम पर अलग जबकि इतिहास कभी बदलता नहीं है दुकान चलती रहनी चाहिए चल रही है 36 तो कोचिंग करेंगे नाला कहीं के खैर तो सातवें मंडल में ऋगु वेद दश राग युद्ध ठीक है ना दश राग युद्ध सातवें मंडल के बाद जो अगला आपसे पूछेगा नाइंथ मंडल ऋगवेद का नाइंथ
17:57 मंडल नाथ मंडल में सोम का वर्णन है और सोम रस का वर्णन है सोम ही आधुनिक शिव जी है आधुनिक आद्य शिव है पशुओं के देवता और सोमरस एक प्रकार का नशीला द्रव्य वनस्पतियों से प्राप्त होने वाला एक नशा युक्त द्रव्य है नवा मंडल में नौवा मंडल के बाद जो दसवा मंडल है वह बड़ा मजेदार है हालांकि मैं इसमें भी बहुत कुछ समझाऊं लेकिन चकि एग्जाम पॉइंट ऑफ व्यू से पढ़ाना है इसलिए सोम सोम ही आधुनिक समय में शिव जी हैं आधुनिक समय के शिव जी यही हैं और सोमरस एक इंटॉक्सिकेटेड लिक्विड है नसीला द्रव्य है जो प्राप्त होता है अब देखो नौवे मंडल के बाद आ जाते हैं दसवें मंडल
18:43 पे ठीक है ना ऋगवेद का थ मंडल मोस्ट इंपॉर्टेंट है ऋगवेद का दसवा मंडल ऋगवेद के दसवें मंडल में वर्ण व्यवस्था का जीग्र है वर्ण व अवस्था वर्ण व्यवस्था हालांकि वर्ण व्यवस्था का सबसे पहला जिग्रा उपनिषद में मिलता है अगर कभी पूछे कि वर्ण व्यवस्था का जिग्रा मिलता है तो जवाल उपनिषद में ठीक है ना जवाल उपनिषद में वर्ण व्यवस्था का पहला जिक्र मिलता है ऋगवेद में वर्ण व्यवस्था वर्ण व्यवस्था मतलब यह माना जाता है कि जो आपके अ मतलब ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र ठीक है ना कर्म के आधार पे वैदिक युग में कर्म के आधार पर
19:31 जाति था लेकिन आजकल के लोगों ने क्या किया कर्म के आधार पर जाति क्योंकि समाज में ऐसी कमियां कुरीतियां फैली हुई हैं अपने चीज को दूसरे के ऊपर डालना है समझना इसी दसवें मंडल में गोत्र का वर्णन भी है गोत्र का वर्णन अब जरा समझना यहां पर बहुत काम की चीज आपके लिए बोलूंगा हमारे पूर्वजों ने यह जो वेद लिखे होंगे ना ये कोई ब्राह्मण पंडित जी लोग जाति के नहीं थे ये हम लोग के पूर्वज थे वैदिक युग में ब्राह्मण कोई जाति नहीं थी पहली बात यह याद रखना ब्राह्मण किताबों के नाम थे तो हमारे पूर्वजों ने यहां पे बहुत ध्यान से समझना दो मिनट के लिए समझोगे जीवन भर का अपना कंफ्यूजन दूर कर दोगे कि कैसे आज जाति के नाम पर हम लोगों
20:17 को लड़ाया जाता है ब्राह्मण को आप दोषी ठहरा सकते हैं किसी को लेकिन वास्तव में वो थे नहीं वो हमारे आपके पूर्वज लोग थे जिनकी कोई जाति ही नहीं थी वो सिर्फ आर्य कहलाते थे और आज हम आप आ रहे हैं यह बात भी लगभग प्रूव्ड है जरा देखिएगा कर्म के आधार पर जाति अगर कर्म के मतलब उस समय यह लोग कबीलों के में रहते थे कबीले में यह जनरली क्या होता था सुबह खाए सोए उठे गाय भैस गोबर किए सो जाते थे लगभग यही दिनचर्या इनके समय तो एसएससी रेलवे आई यूपीएससी नहीं था ना कि एक लक्ष्य है कि यह चीज हमें हासिल करना है बहुत ज्यादा से ज्यादा था एक कबीला दूसरे कबीले पर आक्रमण करके गाय जीतने की कोशिश करता था मैक्सिमम काम इतना ही था इनके पास अगर एक तरीके से
21:02 देखो तो एसएससी यूपीएससी रेलवे तो नहीं था ना इनके पास आपकी तरह चुनाव तो नहीं लड़ना था ना हॉस्पिटल और थाने और जो न्यायालय तो नहीं जाना था ना तो इनके जो समझदार व्यक्ति थे उन्होंने कहा कि यार हम ना कर्म के आधार पे ग्रुप बांट देते हैं और उस ग्रुप को जाति का नाम देते हैं लोगों ने कहा ठीक बोले आज से जब भी मान लो कोई कबीला ए है कबीला बी पर हमला करेगा तो कबीले के कुछ लोग भी जाकर के उसकी रक्षा करेंगे अपने कबीले के ऐसे लोग जो कबीलों की रक्षा करेंगे हम उन्हें कहेंगे क्षत्रिय हैं ये ये क्षत्रिय हैं और यह शासन करेंगे इन कबीलों में हमारे बच्चों को कोई तो पढ़ाए लिखाए मंदिर में जाएगा आचार विचार ये इस समय कोई मुस्लिम धर्म तो
21:48 था नहीं ईसाई पारसी तो भारत में थे नहीं तो सिर्फ पूजा और भगवान की ही बात का एग्जांपल मुझे लेना पड़ेगा और वही मैं ले रहा हूं तो जो भी हमारे बच्चों को पढ़ाए जो भी ये नहीं था कि खाली यही जो भी व्यक्ति इस कबीले में से हमारे व्यक्तियों को बच्चों को पढ़ाए लिखाए का समझाएगा मंदिर पूजा पाठ करेगा उसको हम कहेंगे ब्राह्मण लोगों ने कहा ठीक है जो भी व्यक्ति कृषि में लगेगा और सब्जी फल उत्पादन करेगा बेचेगा तेल आटा यह सब गेहूं बृही मतलब चावल गेहूं मतलब गोधूम जौ मतलब यौ ये सब जो करेगा जो बिजनेस टाइप का कार्य करे हमारे कबीलों में उसको हम कहेंगे वैश्य और जो भी व्यक्ति साफ सफाई
22:33 का काम करेगा लोगों की सेवा का काम करेगा ऐसे लोग भी समाज में है उन्हें हम कहेंगे शूद्र ये मात्र एक शब्द थे आज यही शब्द राजनैतिक हो गए हैं तो यह कर्म के आधार पर जाति था जब राजाओं का समय आया जब आगे चलकर नेताओं का समय आया तब उन्होंने डिसाइड कर दिया कि ब्राह्मण का लड़का ब्राह्मण कहलाएगा क्षत्री का क्षत्र नहीं तो याद रखना वेदों ने कभी कुछ गलत नहीं बताया है वेद में साफ-साफ लिखा है कर्म के आधार पर जाति आज के लोग आज से 500 1000 पीछे जाकर वर्ष देखो जो राजा लोग थे और जो क्या कहते हैं आधुनिक समय में नेता लोग हमारे आपके जो थोड़े बहुत दो 400 साल पुराने पूर्वज उन्होंने कर दिया जाति के आधार पर कर्म कि
23:21 यादव है तो दूध का काम करेगा ब्राह्मण है तो पूजा पाठ का काम करेगा क्षत्रिय है तो शासन का काम करेगा जबकि ना वेदों ने गलत लिखा ना उस समय के पूर्वजों ने गलत लिखा है वो साफ-साफ लिखा हुआ है कर्म के आधार पर जाति ये है हमारे वेद और इन वेदों को उठा के कोई नहीं पढ़ता खाली माइक पे आ जाएगा बड़े-बड़े न्यूज़ चैनल पे और न्यूज़ चैनल पे आके हां यह जाति सिस्टम है एक कप कॉफी पी के एसी में बैठ कर के नेतागिरी बतिया ज्यादा आसान होता है अगर एक बार उठा के अपना वेद पढ़ लो ना तो तुम कहोगे हां यार सही तो था जैसा और मैं तुमको और बता दूं यह भी था मान लो इस ब्राह्मण को कोई लड़का पैदा हुआ वैदिक युग में और यह लड़का काम करने लगा सफाई का ये लड़का काम करने लगा सफाई का तो सफाई का जो काम किया अब
24:08 इसको ब्राह्मण का लड़का ब्राह्मण नहीं कहा जाता था अब इसको शूद्र कहा जाने लगा मान लो अब इसको कोई लड़का पैदा हुआ ये कबीलों की रक्षा करने लगा तो इसे क्षत्रिय कहा गया ये किए थे हमारे पूर्वज ये किए थे वैदिक लोग ना कि आज की तरह और आज के लोग पूरा दोष किसको दे देंगे वैदिक युग को ब्राह्मणों को ऐसे पकड़ के पूछ दो ना ब्राह्मण थे कौन जरा ये बताओ तो ब्राह्मण तो कोई जाति ही नहीं थी इस समय कोई जाति नहीं थी ब्राह्मण किताबों के नाम थे बैठा कर के जो लोग चैनल पर 10 टो बात करते हैं ना कुछ य तथाकथित लोगों को छोड़ दो जो अपने आप को दलितों के नेता ब्राह्मणों के नेता क्षत्रियों के नेता वर्ग विशेष के नेता बनते हैं उनसे खाली पूछ दो ऋगवेद को किस ब्राह्मण ने गाया है ऋगवेद को समझने
24:54 के लिए किन ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की है हवा ना निकल जाए तो तुम नाम बदल दे ना मेरा समझ रहे हो यह स्थिति है हम लोग को लड़ाया जाता है तो वेद में है कर्म के आधार पर जाति जाति के आधार पर कर्म यह हम लोगों ने किया है हमारे पूर्वजों ने नहीं किया है हमारे आपके समझ रहे हो ना जाति के आधार पर कर्म और दूसरी बात बताएं दसवें मंडल में गोत्र का वर्णन है ना सर गोत्र सिस्टम सही है कि गलत है बता जानते हो गोत्र सिस्टम लाया क्यों गया इसके पीछे का कांसेप्ट क्या था आज तुम्हें वो भी बता देता हूं कि दसवें मंडल में ऋगवेद के गोत्र सिस्टम है जरा समझना अब तुम कहोगे सर गोत्र गोत्र ये गोत्र गोत्र का मतलब समझते हो क्या होता है गो गो से यहां
25:39 तात्पर्य है गाय से गौ कहा जाता है ना अत्र मतलब होता है स्थान ठीक है ना गायों का स्थान सेम गायों का स्थान एक्चुअली उस ध्यान से समझना तुम्हें बात समझ में आ जाएगी उस समय कई ऋषि हुए जैसे मान लो विश्वामित्र हुए एक आपके विश्वामित्र ठीक है ना स्वा चलो हिंदी में ही लिख देते हैं तो ज्यादा अच्छे से तुम लोग को मान लो चार ऋषि हुए ए बी सी डी ये लोग जंगलों में रहा करते थे इनके जो आश्रम हुआ करते थे इनके जो आश्रम थे वहां पे पुरुष जाकर के सेवा करते थे पुरुष और स्त्री जाकर के आश्रम में गायों की सेवा करते थे ऐसे ही इनके यहां भी मेल फीमेल जाकर सेवा कर रहे हैं
26:26 इनके यहां भी मेल फीमेल सेवा कर रहे हैं के यहां भी मेल फीमेल नेचुरल सी बात थी अपोजिट सेक्स में अट्रैक्शन होता है कहीं ना कहीं मेल फीमेल में अट्रैक्शन होने लगा उससे जो ऋषि आश्रम की परंपरा थी जो गुरुकुल परंपरा हुआ करती थी वह प्रभावित होने लगी आपस में ऋषि महात्मा आर्य लोग बैठे कि यार यह तो गड़बड़ हो रहा है आए दिन पता चल रहा है कि उसके उस लड़की के साथ बदतमीजी हो गई या वो प्रेग्नेंट हो गई या वो दो आपस में लड़ गए कि वो वाली लड़की मेरी है या वो वाली महिला मेरी है कुछ ऐसा होता तो रहा होगा इससे इंकार तो नहीं करोगे कुछ लोग तो हर सदी में नालायक हुए हैं तो ऋषियों ने आपस में निर्णय लिया होगा या लिया कि चलो ये
27:11 कहे एक ही जगह की गायों की सेवा करने वाले को हम सेम गोत्र का कहेंगे जैसे अगर आप वशिष्ठ ऋषि के आश्रम में हैं तो आप वशिष्ठ गोत्र के हुए अगर आप भार्गव ऋषि के आश्रम के हैं तो यहां के सारे मेल फीमेल भार्गव आश्रम के हुए अगर आप मान लीजिए भारद्वाज ऋषि के आश्रम में बैठे हैं तो यह मेल फीमेल भारद्वाज गोत्र के हुए एक ही जगह की गायों की सेवा करने वाले और सेम गोत्र के लोग आपस में भाई बहन रहेंगे तो अगर यह भाई बहन रहेंगे तो अब आपस में अपोजिट सेक्स के प्रति अट्रैक्शन वाली बात खत्म होगी अगर यह भावना डेवलप हो जाए कि यह जो मेरे बगल में है यह मेरा भाई
27:58 है यह मेरी बहन है तो इनका गोत्र हो गया वशिष्ठ इ इन लड़के भार्गव और कहा गया सेम गोत्र वाले आपस में शादी नहीं कर सकते तो अगर इनमें इनमें शादी नहीं होगी ये प्यार को भी नहीं सोचेंगे जनरली थोड़ी सी सोच तो स्टैंडर्ड हो जाएगा कि अरे यार मेरी बहन है मेरा भाई है इसलिए गोत्र सिस्टम लाया गया और सेम गोत्र में शादी नहीं ताकि भाई बहन वाली फीलिंग रहे दूसरी चीज मान लो वशिष्ठ ऋषि सिखाते हैं ए बी सी डी एक मिनट के लिए भार्गव ऋषि सिखाते हैं आपके क ख ग घ तो अगर दो अलग-अलग गोत्र वालों की शादी की जाएगी तो इनका ज्ञान इन्हें इनका ज्ञान इन्हें मिलेगा और जो तीसरी पीढ़ी इनका पुत्र या पुत्री पैदा होगी उसे क का भी
28:46 ज्ञान होगा और ए का भी ज्ञान होगा होगा कि नहीं क्योंकि माता और पिता दोनों से अलग-अलग ज्ञान उस बच्चे को दिए जाएंगे इसलिए लाया गया था गोत्र सिस्टम हां आधुनिक समय में इसको इतना गंदा बना के रिप्रेजेंट किया जाता है जिसकी कोई हद नहीं है तुम विश्वास कर लेना जो लोग गोत्र के ऊपर जाति के ऊपर वक्तव्य देते हैं भाषण देते हैं एक दिन ऋगवेद खोल के नहीं पढ़े होंगे जिनको भगत सिंह जी के बचपन का नाम नहीं याद होता है वोह भगत सिंह टीशर्ट पर लिखवा कर के महान देशभक्त बनते हैं समझ ऐसा होता है मैं इसीलिए हिस्ट्री की थरी क्लास नहीं लेना चाहता हूं क्योंकि मुझे पता है कि अगर मैं हिस्ट्री की थरी क्लास लूंगा तो बड़ा दिक्कत होता है मैं ना मैं और हम लोग कम जज के हैं तो हम लोग बोल
29:32 नहीं सकते जो 5060 साल वाले हैं या जो किसी पार्टी कहीं के उनको बड़ा महत्व रहेगा मैं तो मनाता हूं मैं जल्दी से बुड्ढा हो जाऊं अभी जितना हुआ हूं और दो चार 10 साल हो जाऊं फिर मैं बैठ के नेशनल चैनल पर पूछूंगा बताओ कौन सा ऋषि कौन सा गोत्र कौन सा वर्ण व्यवस्था मैं लंका ने लगा दिया बैठ कर के ना तो तुम लोग देखना एक दिन तुम लोग याद करोगे कोई आशुतोष तुम्हारा टीचर था अपने बच्चों को तुम लोग याद दिखाओगे यार ये एक समय हिस्ट्री हम लोग को पढ़ाते थे खैर तो जो गोत्र सिस्टम आया बेटा व इस तरीके से मेरे भाई मेरे दोस्त आया तो गोत्र सिस्टम भी गलत नहीं था वर्ण व्यवस्था गलत किया हम 500 1000 वर्ष वालों ने जैसे मान लो मैं क्षत्रिय हो गया अब मैं राजा बन गया अब तो मैं यही चाहूंगा ना कि मेरा लड़का या लड़की अगला राजा बने तो मैंने क्या किया वंशानुगत कर दिया पदों को
30:21 जाति के आधार पर कर दिया कर्म के आधार पर जाति को पलट दिया मैंने जाति के आधार पर कर्म कर दिया कि क्षत्रीय का लड़का क्षत्रिय ब्राह्मण का लड़का ब्राह्मण ठाकुर का लड़का ठाकुर खान का खान पठान का पठान सिंह का सिंह दुबे का दुबे यादव का यादव श्रीवास्तव का अरे काहे के लिए यादव का यादव काहे के लिए ब्राह्मण का ब्राह्मण जैसा कर्म करता है उस कर्म में उस उस उस जाति में उसको डाल दीजिए और यही हमारे वेद कहते हैं और नहीं तो वेदों को पूर्वजों को ब्राह्मणों को गलत ठहराना बंद कर दीजिए क्योंकि ब्राह्मण कोई किताब थी कोई व्यक्ति नहीं था सच कह रहे हैं कि नहीं खैर तो ये सब चीजें अ चलती है खैर ये गोत्र सिस्टम के बारे में मैंने आपको बताया ऋगु वेद के ही दसवें मंडल की अगर मैं बात करूं तो वर्णाश्रम का भी जिग्रा
31:08 श्रम वर्णाश्रम में जैसे मैंने बताया वर्ण व्यवस्था का जिग्रस का जिग्री तरीके से वर्णाश्रम पहले के लोग मानते थे जीरो से लेकर 100 वर्ष आयु ठीक है ना जनरली जो आयु होती थी जीरो से 100 वर्ष अब जीरो से 100 वर्ष में जीरो से लेकर 25 वर्ष की आयु जो होती थी वो होती थी कि भैया ब्रह्मचर्य पढ़ाई लिखाई करो रील मत देखो ठीक है ना ब्रह्मचर्य होता था कि पढ़ाई लिखाई करो लड़की लड़का चक्कर मत चलाओ अच्छे से पढ़ो मां-बाप का नाम रोशन करो विद्या अर्जन करो यह था हमें उम्मीद है तुम लोग 20 से 25 जीरो से 25 के बीच में होगे और तुम लोग का कोई गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड नहीं होगा आत्मा पे हाथ रख के कह लो या किसी के बारे में सोचते भी नहीं होगे 100% यहां बैठे हो ना
31:54 उसमें से हमको भरोसा 80 90 पर लेक्चर के तुरंत बातें हेलो खाना खाली क्या नहीं ई हम भी नहीं खाएंगे मत खाना ठीक है ना 25 से 50 ये थे गृहस्थ वाले मतलब हमारे वेदों ने कहा कि अब आप ब्रह्मचर्य जी लिए अब आप शादी विवाह करिए बच्ची बच्चा द चा ठो जो पैदा करना हो कर लीजिए अड़ोस पड़ोसी मामा मौसी नाना सब बन लीजिए ठीक है फिर बोला गया 50 से लेकर 75 वर्ष की आयु ये था वानप्रस्थ आश्रम वानप्रस्थ क्या होता था कि पिछले 50 साल में आपने जितना ज्ञान अर्जन किया है वह ज्ञान आप समाज को दीजिए क्या सही है क्या गलत है सच क्या है एक आपको 50 साल का अनुभव हो गया ना वो बताइए
32:40 यह वानप्रस्थ आश्रम है हम लोग के पापा देखो इसी एज में है ना पापा मम्मी लगभग 50 से 75 में आपके हमारे पाता तो वो लोग यही कहते हैं ना पढ़ लो नहीं बर्बाद हो जाओगे बेटा यह गलत है बेटा तुम ठीक से नहीं पढ़ रही हो बिटिया तुम कहां जा रही हो क्योंकि उन्हें एक अनुभव हो चुका है इन 50 वर्षों का और 75 से लेकर के 100 वर्ष की आयु को सन्यास कहा जाता है सन्यास आश्रम भैया आप राम राम कहो अल्लाह अल्लाह कहो खुदा खुदा कहो वाहेगुरु वाहेगुरु कहो और अब स्वर्ग सिधार लो तो इस वर्णाश्रम का भी हमारे दसवें मंडल में ऋगवेद के जिक्र मिलता है ठीक है ना ऋगवेद के दसवें मंडल में हमें इसका जिक्र मिलता है ठीक है ये भी हर वेद का जैसे ब्राह्मण ग्रंथ है उसी तरीके
33:26 से वो कौन है यजुर्वेद को ठीक है ना यजुर्वेद कह रहा हूं यार वहां पे आयुर्वेद आयुर्वेद को हम लोग क्या कहते हैं वो आपके प्रजापति ने उसे लिखा था उसको इसका उपवेद भी कहा जाता है ऋगु वेद का उपवेद आयुर्वेद वो प्रजापति ने लिखा है और एक चीज आपको इसमें कई लोग कंफ्यूज भी हो जाएंगे मैं ये भी बता देता हूं लेकिन जब किताब खोलेंगे तो पाएंगे ये सही है उसके अलावा जो ये ऋगु वेद के मंडल है जैसे दूसरा से लेकर के सातवा मंडल दूसरे से लेकर सातवा मंडल को यह सबसे ओल्ड मंडल है प्राचीन मंडल है इन प्राचीन मंडल को या हम लोग वंश मंडल के नाम से भी जानते हैं प्राचीन मंडल या वंश मंडल फर्स्ट एंड
34:12 10थ फर्स्ट और जो 10थ मंडल है फर्स्ट एंड 10थ मंडल ये सबसे न्यू मंडल है सबसे आखिरी में लिखे गए थे ऋषियों के द्वारा ठीक है ना और जो आपके आठवा एथ एंड नाइंथ मंडल है नाइंथ मंडल मंडल यह जो मंडल है यह मिक्सड एज मंडल है मिश्रित मंडल है मतलब उस समय के ऋषि परिवारों के बारे में उनके बारे में यह लिखा हुआ है यह बात ध्यान रखना ठीक है ना यह बात याद रखना जब पूरा लिख लिए थे ना तब जाकर के कहीं ऋषि लोग इसका हेडिंग डाल पाए थे और उसका फाइनल कंक्लूजन लिखे थे इसलिए पहला और दसवा सबसे नया मंडल है इन 10 मंडलों में ठीक है ना उसके अलावा कि ये सारी चीजें हैं ऋगवेद के बारे में ऋगवेद में
34:58 अगर हम लोग बात करें ऋगवेद के बाद आ जाओ अब आ जाते हैं अगले वेद पे ऋगवेद क्लियर हुआ सभी को ऋगवेद क्लियर हो गया सभी के लिए ठीक है ना ऋगु वेद जो है ना इसी में अस्तो मा सद्गमय भी है अगर कभी पूछे ना कि अस्तो मा सद्गमय यह किस वेद में लिखा हुआ है तो अस्तो मा सद्गमय का जो कांसेप्ट है ऋगु वेद में लिया गया है एक आपके अवेस्ता ईरानी लोगों की एक ग्रंथ है अवेस्ता जेंद अवेस्ता का नाम सुनते होंगे ना अवेस्ता से ऋगु वेद की बहुत सारी बातें मैच करती हैं अगर कभी पूछे जैसे पूछ दे कि कौन सा वेद ऋगु वेद पर आधारित है तो सामवेद सामवेद के जितने संगीत युक्त मंत्र है ना ऋगु वेद के मंत्रों का बस वो क्या है
35:44 संकलन है म्यूजिकल फॉर्म में उनको कर दिया गया और विदेश के किस वेद या किस ग्रंथ की तुलना ऋगु वेद से की जाती है तो ईरान के अवेस्ता की तुलना ऋगवेद से क्योंकि अवेस्ता से बहुत ज्यादा बातें मिलती जुलती ऋगवेद में दी हुई हैं यह बात आप याद रखिएगा ठीक है तो ऋगवेद की बात हुई ऋगवेद के बाद आ जाओ यहां यजुर्वेद ठीक है ना ऋगु वेद के बाद अब हम लोग आएंगे यजुर्वेद के ऊपर यजुर्वेद टाइम कितना हुआ भैया अच्छा अभी टाइम है अभी यजुर्वेद कर लिया जाएगा ठीक है ना अभी यजुर्वेद किया जाएगा अब सुनो जरा यजुर्वेद को हम लोग कर्म कांडीय वेद भी कहते हैं कर्म कांडीय वेद क्यों कहते हैं सर क्योंकि मेरे लल्ला इस में बलिदान सैक्रिफाइस से रिलेटेड बलिदान
36:31 युक्त मंत्र दिए हुए हैं ठीक है ना ऋ यजुर्वेद में बलिदान युक्त मंत्रों का जीग्र है इसीलिए हम इसे कर्म कांडीय वेद भी कहते हैं यजुर्वेद में हाथियों को पालने का वर्णन मिलता है एक बार एसएससी सीजीएल ने पूछा था हाथी पालन का वर्णन हमें किस वेद में मिलता है तो हाथी पालन का वर्णन भी हमें यजुर्वेद में मिलता है यजुर्वेद या कर्मकांडी वेद एक मात्र ऐसा वेद है जो आपको गद्य और पद्य मतलब प्रोज और पोएट्री दोनों में मिलता है गद्य और पद्य ये आपके प्रोज पोएट्री मतलब ये कहानी के फॉर्म में भी मिलता है और स्टोरी के फॉर्म में भी मिलता है गद्य और पद्य प्रोस पोएट्री दोनों के फॉर्म में मिलता है जनरली हम लोग
37:19 यजुर्वेद को अब जैसे यजुर्वेद अब मान लो जैसे हमने आपको ऋगवेद में बताया था कि ऋगवेद को जिस ऋषि ने गाया सुनाया या बताया है उसको हम लोग क्या ऋषि का नाम दिए थे होत्र मतलब था दिए क्या थे उसी तरीके से यजुर्वेद की अगर हम लोग बात कर ले यजुर्वेद को जिस ऋषि ने आम जनता को गाया सुनाया या बताया है उसका नाम है अध्वर्यु अध्वर्यु जब अध्वर्यु ने लोगों को यजुर्वेद के बारे में बताया सुनाया तो इसने बताया कि यजुर्वेद फिर जब लोगों को नहीं समझ में आया कि अरे यार समझ में नहीं आ रहा यजुर्वेद है क्या तो यजुर्वेद को समझाने के
38:04 लिए यजुर्वेद को बेसिकली दो भाग में बांटा गया ठीक है ना मतलब यजुर्वेद दो भाग में है एक को आप कहते हो कृष्ण यजुर्वेद ठीक है ना कृष्ण यजुर्वेद ठीक है सर और एक को आप कहते हो शुक्ल यजुर्वेद शुक्ल यजुर्वेद ठीक है ना कृष्ण यजुर्वेद शुक्ल यजुर्वेद वेद लोगों को जब इसके दोनों भाग नहीं समझ में आए तो इनको समझाने के लिए भी ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई जैसे कि अच्छा ये जो आपके शुक्ल यजुर्वेद है शुक्ल यजुर्वेद को हम लोग जब शुक्ल यजुर्वेद लोगों को नहीं समझ में आया तो इसको समझाने के लिए अच्छा शुक्ल यजुर्वेद को हम लोग वाज सनेई
38:51 संहिता भी कहते हैं वाज स ने ई ठीक है ना वा सनेई संहिता भी इसको कहा जाता है जब लोगों को शुक्ल यजुर्वेद नहीं समझ में आया तो इसको समझाने के लिए जिस ब्राह्मण ग्रंथ की रचना की गई उसका नाम था सतपथ्य ये किताब है ग्रंथ है सतपथ्य वर्ड जोडू शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ और जब लोगों को कृष्ण यजुर्वेद नहीं समझ में आया तो इसको समझाने के लिए जिस ब्राह्मण ग्रंथ की रचना की गई उस ब्राह्मण ग्रंथ को क्या कहा गया तै तरी ब्राह्मण ठीक है ना ततर ीय ब्राह्मण ग्रंथ तै तरी ब्राह्मण ग्रंथ कहा गया लेकिन लोग तो लोग थे ना कृष्ण यजुर्वेद
39:37 समझ में आ रहा है ना शुक्ल यजुर्वेद इसी शुक्ल यजुर्वेद में जो आपके अ शतपथ ब्राह्मण है ये सबसे ज्यादा मोस्ट वॉलमिन किताब है ठीक है ना वॉलमिन मतलब सब अगर आपसे पूछे कि कौन सा ब्राह्मण ग्रंथ सबसे ज्यादा संख्या में था शतपथ ब्राह्मण नोट में यही एक बात लिख लो नोट में अगर आपसे पूछ दे नोट में कि सबसे पुराना सबसे पुराना ब्राह्मण ग्रंथ कौन सा है सबसे पुराना तो उसका नाम था तांडे ब्राह्मण और सबसे ज्यादा संख्या में कौन था तो उसका नाम है शतपथ ब्राह्मण यह भी पूछता है आपसे खैर तो शुक्ल यजुर्वेद को समझाने के लिए शतपथ ब्राह्मण और कृष्ण यजुर्वेद को
40:23 समझाने के लिए तैत्र तैत्र ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई यजुर्वेद का जो उपवेद है ठीक है ना यजुर्वेद का उपवेद इसका जो का उपवेद यजुर्वेद का उपवेद कौन सा है बताइए याद रखिएगा यजुर्वेद का उपवेद है धनुर्वेद धनुर्वेद और धनुर्वेद को जिसने लिखा या जो इसके मेन माने जाते हैं वो है विश्वामित्र धनुर्वेद को विश्वामित्र जैसे ऋगु वेद का उपवेद आयुर्वेद उसको लिखा प्रजापति मतलब माना जाता है उसके जो मेन है वो प्रजापति हैं उसी तरह यजुर्वेद का जो उपवेद है वो धनुर्वेद है ठीक है ना धनुर्वेद और धनुर्वेद का जो मेन माना जाता है वो विश्वामित्र को माना जाता है आपको यह भी
41:10 मैं बता दूं कि ये जो एक बार प्रश्न पूछ दिया था यजुर्वेद का आखिरी चैप्टर क्या है या आखिरी चैप्टर का नाम क्या है यजुर्वेद के आखिरी चैप्टर का नाम है ईसा वास्य ठीक है ना ईसा वास्य यह है लास्ट यजुर्वेद का जो आखिरी अध्याय ईसा वास या ो उपनिषद इसको कहा जाता है ठीक है ना या इसको आप ो उपनिषद के नाम से भी जानते हैं यह था आपका क्या यजुर्वेद अब चकि समय कम है इसलिए मैं आज चकि चारों वेद पढ़ा देना चाहता हूं यजुर्वेद के य सारे की पॉइंट मैंने बता दिया अब आ जाओ जरा सामवेद प मैं चाहता हूं कि मैं चारों खत्म ही कर दूं लला इसलिए थोड़ा सा तेज मैं करूंगा ठीक है श्यामवेद श्यामवेद में
42:09 18753 5 रचाए दी हुई है सामवेद में श्यामवेद जो है ऋगवेद पर आधारित है अगर कभी आपसे पूछे कि श्यामवेद किस वेद पर आधारित है तो ऋगवेद पर आधारित है मतलब सर एक्चुअली श्यामवेद को आप जानते हो भारतीय शास्त्रीय संगीत इंडियन क्लासिकल म्यूजिक का जनक वेद कहा जाता है तो जो ऋगु वेद के देवताओं के प्रसन्न करने वाले मंत्र हैं उन्हीं मंत्रों को इसमें म्यूजिक बद्ध कर दिया गया है क्लियर हुआ उसके अलावा इस वेद को गाने वाले व्यक्ति का नाम है उदगात्री वेद को किसने गाया था होत्र ने यजुर्वेद को किसने गाया सुनाया या बताया अध्वर्यु ने तो सामवेद को किसने गाया
42:56 सुनाया या बताया है उदगात्री अब आप कहोगे सर श्यामवेद का उपवेद कौन सा है अब मैं थोड़ा सा जल्दी कर दे रहा हूं अब यही मेरी पेड क्लास होती ना youtube0 ना होता ना मैं और रगड़ करके पढ़ाता और मैं पढ़ाता हूं जब मैं मूड में रह लेता हूं और मूड में मैं अपने पेड बैच में रहता हूं बेचारे बच्चे पैसा देके आते हैं मैं कहता हूं y12 कूपन कोड लगाइए ऐसे ही नहीं कहता हूं मेहनत करूंगा तब सैलरी पाऊंगा तो कमाऊ खाऊंगा तो ईमानदारी का धन लगता है बेईमानी तो बेईमानी में ही निकल जाती है इसका जो सामवेद का उपवेद है लल्ला सामवेद का उपवेद है आपके गंधर्व वेद ठीक है ना याद रखना गंधर्व वेद अब गंधर्व वेद का भी तो कोई मेन होगा गंधर्व वेद तो गंधर्व वेद
43:41 के मेन कोई और नहीं नारद जी हैं नारायण नारायण बड़ा देखे होगे श्री कृष्णा में जय हनुमान में तो ये अच्छा सर जब लोगों को सामवेद नहीं समझ में आया होगा तो क्या इसके लिए भी ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई हां की गई जैसे आप हर तैत्र और आपके त्रे और कस्की ऋगवेद का है तथी और शतपथ आपके यजुर्वेद का है सामवेद जब लोगों को नहीं समझ में आया तो कई ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई सड विस पंच विष ठीक है ना पंच विष और आपके क्या कहा जाता है सड विस पंच विष छंद ज्ञ छंद ज्ञ और जमनी आपसे डायरेक्ट पेपर
44:27 में पूछता है जमनी ब्राह्मण का जिग्रस वेद में मिलता है पंच विज सड विज छंद ज्ञ ये सारे के सारे मेरे लल्ला किसमें है आपके अच्छा इसी जो आपके सड पंच विष है इसी पंच विष को तांडव ब्राह्मण कहा जाता है ठीक है ना या तांडव ब्राह्मण ग्रंथ ये जो तांडव ब्राह्मण ग्रंथ है यही सबसे प्राचीन है ठीक है ना इनको सबसे प्राचीन माना जाता है तांडव ब्राह्मण ग्रंथ को और आपको सामवेद सामवेद भी एक्चुअली दो भाग में है जो मैं पूरे उम्मीद तुमम लोग में से कोई बता दे जितने लोग मुझे देख रहे हो और जितने लोग मुझे बाद में देखोगे बताओ सामवेद के भी दो भाग हैं दोनों भाग का नाम खाली लिख दो कमेंट बॉक्स में दोनों भाग का नाम लिख दो बताओ दोनों भाग का यजुर्वेद का तो सबको
45:16 याद रहता है शुक्ल यजुर्वेद कृष्ण यजुर्वेद रटे पड़े हैं अरे यार कभी डिटेल क्लास हिस्ट्री की लेने लगोगे ना मजा आ जाएगा तुम्हें सामवेद में नहीं पहले तुम ही बता दो एक का नाम है पूर्वाचल दो भाग माने जाते हैं नहीं अब सोचो मान लो यही क्वेश्चन एग्जाम में आ जाता तो आप तो बस यह जानते हो ना यजुर्वेद के दो भाग है शुक्ल और कृष्ण यजुर्वेद शुक्ल यजुर्वेद को वासन संहिता कहते हैं
46:02 पता नहीं कितने लोगों को पता है कि नहीं पता है पूर्वाचल के बाद अगले पे आते हैं मैं अब श्यामवेद को यहां मतलब कि थोड़ा शॉर्टकट में किया अब मैं आ जाता हूं शॉर्टकट क्या है यार तुम उठा लेना सामवेद में इससे ज्यादा पॉइंट भी नहीं मिलेंगे अब आ जाते हैं हम लोग अथर्ववेद पे ठीक है ना थोड़ा अथर्ववेद भी चारों वेद आज हो जाने चाहिए अथर्ववेद अगर मैं मन से पढ़ा रहा हूं आपको समझ में आ रहा हो तो एक बार लाइक और सब्सक्राइब चैनल जरूर करिएगा लल्ला क्योंकि आपका जो कमेंट किया हुआ कमेंट होता है वो मुझे उत्साह देता है कि अगले दिन भी थरी क्लास पढ़ाओ और मैं बहुत सारी अभी पॉलिटी की भी लूंगा जियोग्राफी की भी लूंगा दो चार दिन इधर हिस्ट्री फिर पॉलिटी जियोग्राफी मजा आ जाएगा तुम्हें तुम देख लेना कई टॉपिक ऐसे ही तैयार करवा दूंगा
46:50 ठीक है ना अच्छा अब हम लोग आते हैं अथर्ववेद अथर्ववेद को एक्चुअली एक अथर्व नाम के ऋषि ने या फिर कुछ लोग कहते हैं अंगरी नाम के ऋषि के द्वारा रचना किया गया इसीलिए इसे अथर्ववेद कहा गया अथर्ववेद को जिसने गाया सुनाया या बताया है वह गोपथ है जैसे ऋगु वेद को होत्र ने यजुर्वेद को अध्वर्यु ने सामवेद को उदगात्री गोपथ नाम के ही ब्राह्मण ग्रंथ की रचना हुई ठीक है ना इसमें गोपथ का नाम दो बार आया है गोपथ नाम के ही ब्राह्मण ग्रंथ की रचना हुई कुछ किताबों में यह
47:37 ब्रह्मा नाम से भी मिलता है कि ब्रह्मा नाम के ब्राह्मण ग्रंथ की रचना हुई अथर्ववेद को हम लोग कई नामों से जानते हैं अथर्ववेद को श्रेष्ठ वेद भी कहा जाता है अथर्ववेद को ब्रह्म वेद भी कहा जाता है अथर्ववेद को ब्लैक वेदास काला वेद भी कहा जाता काले जादू टोना का वेद भी कहा जाता है इसी अथर्ववेद में सबसे पहले हमें आयुर्वेद का जिक्र मिलता है आयुर्वेद का जिगर हमें अथर्ववेद में मिलता है ये कई बार का इसी अथर्ववेद में यह कहा गया है कि सभा और समिति सभा और समिति यह दोनों जो हैं यह दोनों प्रजापति की दो कन्या है प्रजापति की दो कन्या आपको यह तो पता हो
48:24 रहा होगा कि इन्हें प्रजापति की दो न कहा जाता है लेकिन किस वेद में कहा गया है यह शायद आज पता चला होगा यह आज पता चला होगा किस वेद में इनको प्रजापति की दो कन्या कहा जाता है मैं जब पढ़ा के जाऊंगा ना इस लेक्चर को बाद में ना इसका नोट्स बना लेना तुमको इससे ज्यादा पॉइंट पता चलेंगे अथर्ववेद का जो उपवेद है ठीक है ना अथर्ववेद का उपवेद बताओ कौन है अथर्ववेद का उपवेद याद रखना अथर्ववेद का उपवेद है शिल्प वेद और शिल्प वेद के जो मेन है वो है विश्वामित्र जी आजकल हमारे प्रधानमंत्री आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी विश्वकर्मा योजना भी चलाए हैं तो ये इसका उपवेद है अथर्ववेद में 731 731 सक्त है अथर्ववेद में 20 अध्याय
49:14 है ठीक है ना अथर वेद के अंदर 20 अध्याय 731 शक और करीब करब 6000 मंत्र है ठीक है ना 6000 मंत्र है अथर्ववेद के अंदर यही नहीं इसी वेद में मुड को उपनिषद के अंदर आपको सत्यमेव जैते का जिक्र मिलता है जो मुड को उपनिषद का सत्यमेव जैते है ना एक्चुअली इट इज अ पार्ट ऑफ अथर्ववेद सतमे जैते काग जैसे अस्तो मा सद गम है ऋगवेद में है सत्यमेव जैते अथर्ववेद में है क दो यह पेपर में नहीं पूछता है पूछता है ना आता है ना यह तो बस यही बात है तो यह सारी चीजें अगर आपको याद रहेंगी इसी अथर्ववेद में राजा परीक्षित एक तुम लोग बड़ा ऐतिहासिक नाम सुनते होगे परीक्षित नाम के एक राजा थे परीक्षित राजा को मृत्युलोक का
50:01 देवता कहा जाता था एक बार पेपर में पूछ दिया था किस वेद में राजा परीक्षित को ठीक है ना राजा परीक्षित को मृत्युलोक का देवता कहा गया अथर्ववेद में ही मृत्युलोक का देवता कहा गया है मृत्यु लोक का देवता किस व्यक्ति को राजा परीक्षित को मृत्यु लोक का देवता कहा गया है ठीक है ना यह सारी चीजें अब अथर वेद और अब अगर मेरे ऊपर भरोसा जम रहा हो तो मेरी दो मिनट और बात सुन लेना नहीं आई बात गई बात इससे भी ज्यादा डिटेल मैं अपने पेड बैच में रहता हूं जो मेरे पेड बैच के लड़के जानते होंगे आजकल जो मैं पेड बैच ले रहा हूं मैं उसमें जम करके पढ़ा रहा हूं ठीक है ना सर मैं क्लास में हूं फिर आपसे बात करता हूं सर सेकंड बोलिए चार पाच मिनट ओके सर न्यूक में ठीक
50:50 है तो याद रखिएगा ये है आपका थोड़ा फोन आ गया था मैं आपसे एक बात बता दूं मैं अपने पेड क्लास में कोई एमसीक्यू नहीं पढ़ाता हूं मैं सिर्फ और सिर्फ थरी पढ़ाता हूं फिर बाद में एमसीक्यू प्रैक्टिस करवा देता हूं अगर आज मेरी बात मान लो तो जितने लोग रेलवे और एसएससी एमटीएस की तैयारी करने वालो खास करके मेरे लल्ला जो लोग एमटीएस अड्डा स्टोर पे जाना अगर मेरी बात उचित लगे तो ऑल कोर्सेस में जाना एसएससी में जाना एसएससी एमटीएस में आज चले जाना एसएससी एमटीएस में ऐसे ही रेलवे में भी आज मैं तुम्हें बताऊं यहां एसएससी एमटीएस में तुम चले गए ये एमटीएस हवलदार का महा पैक है पिछले कई दिनों से कल से अड्डा ने प्राइज को एकदम गिरा दिया है इसलिए कि आप
51:37 आप मेरा विश्वास करिए एसएससी एमटीएस हवलदार का महा पैक ले लीजिए आपको 7 मई को इसका फॉर्म आने वाला है आपको भी पता है इसमें जीएस और इंग्लिश का ही बहुत ज्यादा वैल्यू है रीजनिंग मैथ आप करेंगे लेकिन जीएस और इंग्लिश इसमें सिलेक्शन दिलाता है एमटीएस 7 मई को आएगा मैं इसका पेड बैच एक शुरू हो चुका है सारे टेस्ट सीरीज सारे वीडियो कोर्स सारे हमारे पेड क्लास इवन जो मेरा आने वाला वरदान बैच है वो भी आपको इसी में मिल जाएगा अगर आप मे कूपन कोड उपयोग करते हैं कौन सा y12 कूपन कोड y12 लल्ला भरोसा रखना चाहे आप आज ये ले ले चाहे आरपीएफ एसआई का ले ले महा पैक मेरा अगर कूपन कोड लगाओगे मैं भरोसे के साथ
52:24 कहता हूं एक एक रुपए की कीमत अदा करूंगा इसी बार एमटीएस में तुम्हारा सिलेक्शन है और देख लेना जब 7 मई को एमटीएस का फॉर्म आ जाएगा ना तब फिर इसका रेट बढ़ जाएगा बहुत ज्यादा मेरी बात अभी तुम देख लो एक चीज देखो यह देखो ऑल कोर्सेस एसएससी एसएससी एमटीएस यहां पे आ जाते हैं ऑल कोर्सेस एसएससी एसएससी एमटीएस ये देखो इसका जो बैच है वो 9999 में एक बैच मात्र एक बैच ना इसमें कोई टेस्ट सीरीज है ना कुछ है ये बैच 600 आपको लेना हो ये भी मिल जाएगा लेकिन इसका महा पैक मतलब कि 99 ₹1 ज्यादा में जितने भी किसी भी फैकल्टी का किताबा जैसे देखो इसके अंतर्गत तुम्हें 313 ईबुक 5303 ई वीडियो कोर्स मेरी क्लास
53:11 इसके अंदर आपको मिलेगी जीएस की पूरी टीम की क्लास किसी का भी कोई क्रैश कोर्स एसएससी एमटीएस का लॉन्च होगा आपको मिलेगा मैं कह रहा हूं लल्ला आज यह भी नहीं देना है इससे भी बहुत कम रेट पे आपको क्या मिल जाएगा सिलेक्शन मैं दिलवा दूंगा y12 कोशिश करिए अगर आपको भरोसा हो इस कूपन कोड को लगा कर के आज जुड़ जाना हां यही कूपन कोड है तो मेरे टच में हो और जो मेरा वरदान बैच आएगा जैसे जब एग्जाम नजदीक आता है ना तो मैं करंट अफेयर का और आपके क्या कहा जाता है जीएस वगैरह का अक्सर वरदान बैच लच करता हूं जो भी यह कूपन कोड लगा रहा है मैं उसको इसमें फ्री दे दूंगा कि ये लो पढ़ो और यह 760 70 के आसपास पड़ेगा यार ठीक ठीक है ना 760 70 के आसपास और इसका
54:00 रेट 12:00 बजे रात के बाद बढ़ जाएगा और यही कूपन कोड एक मात्र मेरा गारंटी पत्र है गलत कूपन कोड उपयोग किए तो मेरी जिम्मेवारी नहीं होती है सही सही लगाना y1 a2 अब वा की जगह जड लगा दो प लगा दो q लगा दो वो आपकी गलती होगी सिर्फ यही एक मात्र कूपन कोड भरोसा रखना इस बार जब एमटीएस का 7 मई को फॉर्म आएगा 7 मई फॉर्म आएगा आपका सिलेक्शन आपसे पहले-पहले चलेगा दो सब्जेक्ट जो स्टूडेंट रट मारने की क्षमता रखता हो पढ़ लेने की समझ लेने की वह यह फॉर्म भर देना जीएस और इंग्लिश मैथ से इसमें थोड़ा आपको रिलैक्स रहेगा ठीक है ना और सेम आपके लिए है रेलवे रेलवे का भी इसी
54:46 तरह है ऑल कोर्सेस रेलवे पे जाओ आरपीएफ पे जाओ आज जो रेलवे कॉन रेलवे का महा पैक है वह भी अपने सबसे लोएस्ट प्राइस पर है इसको भी तुम क्या कर सकते हो y12 कूपन कोड लगा कर के अगर रेलवे के बैच में मुझसे पढ़ना चाहते हो y12 कूपन कोड लगा कर के ये रेट भी नहीं देना होगा तुम आज इसके भी लोएस्ट रेट पे जवाइन कर सकते हो कूपन कोड रेलवे के लिए ठीक है ना तो थैंक यू सो मच कैसा लगा ये आज कमेंट बॉक्स में आपको मुझसे पेड क्लास हिस्ट्री पढ़ कर के कैसा महसूस होता है कितना समझ में आया प्लीज बताइएगा मैं एक-एक कमेंट पढ़ता हूं ये मत सोचना तुम कमेंट करके छोड़ दोगे और मैं नहीं देख गा मैं एक एक कमेंट पढ़ता हूं ठीक है ना और मैं पढ़ूंगा आपके कमेंट मुझे अच्छा लगता
55:32 है जब आप कमेंट करते हो उत्साहवर्धन करते हो और जो भी मुझसे और अच्छा हो सकेगा मैं आपके लिए करूंगा तब तक के लिए जय हिंद जय भारत y12 कपन को ठीक है ना नहीं नहीं रेलवे और एमटीएस दोनों के लिए यार एक भोजपुरी लवर नाम के दोस्त बोल रहे हैं रेलवे और एमटीएस दोनों के लिए उसके लिए तुम एसएससी महा पैक में देखो यह है कि रेलवे प्लस ए का वो जो है आपके एक ऐसा आता है एसएससी में चले जाओगे एसएससी महा पैक में तो इसमें एक रहता है ना रेलवे प्लस एसएससी का महा पैक ठीक है वो तुम ले लेना वह ज्यादा अच्छा रहेगा अब वो अभी मैं ध्यान नहीं दे पा रहा हूं लेकिन वो अगर आप चले जाओगे ना तो उसमें आपको रेलवे प्लस एसएससी दोनों का महा पैक देखो ये एसएससी
56:19 प्लस रेलवे यह दोनों के महा पय इसमें है कि एसएससी का कोई भी एग्जाम रेलवे का कोई ये भी 3499 नहीं y12 कोपिन कोड लगा लेना मिल जाएगा जितने हम लोग के बैच आएंगे और टेस्ट सीरीज वीडियो कोर्स ईबुक सब इसमें मिल जाएंगे चाहे अब एसएससी एमटीएस की बात करो आरपीएफ की एसआई की जीडी की ग्रुप डी की एनटीपीसी की एएलपी की टेक्नीशियन की सीपीय की सिलेक्शन पोस्ट की सब इसमें तुमको मिल जाएगा ठीक है थैंक यू सो मच जय हिंद जय भारत