13.09.2025 PROF NAVEEN KANGO

MM-TTC, RDVV, Jabalpur www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो प्रोफेसर नवीन कांगो के व्याख्यान का सारांश है, जिसमें सतत विकास के विभिन्न पहलुओं और सूक्ष्मजीवों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि कैसे सूक्ष्मजीव पर्यावरण, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, और उनके महत्व को समझने की आवश्यकता पर जोर देते हैं।

  • सतत विकास की अवधारणा में विरोधाभास और संतुलन की आवश्यकता।
  • सूक्ष्मजीवों का महत्व और पृथ्वी पर उनकी व्यापक उपस्थिति।
  • रोगों के निदान में सूक्ष्मजीवों की भूमिका और नैदानिक तकनीकों का विकास।
  • विभिन्न क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों का उपयोग, जैसे कृषि, ऊर्जा और स्वास्थ्य।

प्रोफेसर नवीन कांगो का परिचय

प्रोफेसर नवीन कांगो, जो कि माइक्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद और शोधकर्ता हैं, का डॉक्टर संजीव सर द्वारा परिचय दिया गया। वह डॉक्टर हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर एमपी में प्रोफेसर हैं और सोफिस्टिकेटेड इंस्ट्रूमेंट सेंटर के समन्वयक भी हैं। प्रोफेसर कांगो को माइक्रोबियल एंजाइमों में विशेषज्ञता हासिल है और उन्हें कई पुरस्कार और फेलोशिप प्राप्त हुए हैं।

परिचयात्मक विचार और सतत विकास

प्रोफेसर कांगो रिफ्रेशर कोर्स में बोलने का अवसर मिलने पर अपनी पुरानी यादों को साझा करते हैं। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों में बात करने की अनुमति मांगते हैं और 2007 में जबलपुर में अपने रिफ्रेशर कोर्स के अनुभव को याद करते हैं। वह सतत विकास की अवधारणा पर विचार करते हैं और बताते हैं कि कैसे यह विरोधाभासी है, क्योंकि इसमें चीजों को बनाए रखने और विकसित करने दोनों की आवश्यकता होती है।

प्रकृति के साथ द्वंद्व और जीवनशैली रोग

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि कैसे मनुष्य प्रकृति के साथ लगातार द्वंद्व में है, जिसके परिणामस्वरूप जीवनशैली रोग बढ़ रहे हैं। वह एक ऋषि की कहानी का उल्लेख करते हैं जो तनाव को अस्तित्व के प्रतिरोध के रूप में परिभाषित करते हैं। प्रोफेसर कांगो कहते हैं कि हम प्रकृति का विरोध करते हैं, जिसके परिणाम अब तेजी से सामने आ रहे हैं।

वसुधैव कुटुम्बकम और सूक्ष्मजीव

प्रोफेसर कांगो "वसुधैव कुटुम्बकम" की अवधारणा पर प्रकाश डालते हैं और बताते हैं कि यह केवल मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी जीवन रूपों तक फैली हुई है, जिसमें सूक्ष्मजीव भी शामिल हैं। वह पृथ्वी को एक सुपरऑर्गेनिज्म के रूप में देखते हैं जो सूक्ष्मजीवों से आच्छादित है, और इन सूक्ष्मजीवों के महत्व पर जोर देते हैं।

सूक्ष्मजीवों की अनदेखी और महामारी

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि कैसे सूक्ष्मजीवों को अनदेखा करने या उनकी क्षमताओं को न समझने के कारण हमें महामारी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है। वह कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हैं, जिसने पूरी दुनिया को बदल दिया और लोगों को जीवन के क्षणभंगुरता और सद्भाव में रहने के महत्व का एहसास कराया।

सूक्ष्मजीवों की गहरी समझ और चुनौतियाँ

प्रोफेसर कांगो सूक्ष्मजीवों की गहरी समझ विकसित करने और जीवन के बारे में अधिक जानने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। वह बताते हैं कि सूक्ष्मजीव पृथ्वी के विकास के समय से ही मौजूद हैं और मनुष्यों से भी पुराने हैं। वह बताते हैं कि मानव शरीर में सूक्ष्मजीवों की संख्या मनुष्यों से अधिक है, और उनकी भूमिका को समझना एक जटिल कार्य है।

सूक्ष्मजीवों का पारिस्थितिकी तंत्र और महत्व

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि सूक्ष्मजीव जमीन, हवा, पानी, जानवरों और इंसानों में मौजूद हैं, और उनका अपना पारिस्थितिकी तंत्र है। वह वायरसों के बारे में बात करते हैं और बताते हैं कि उनके अस्तित्व के लिए एक कोशिका की आवश्यकता होती है, जिससे यह सवाल उठता है कि पहले कोशिका आई या वायरस।

सूक्ष्मजीवों की सफाईकर्मी भूमिका और कृषि में परिवर्तन

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि सूक्ष्मजीव प्राकृतिक सफाईकर्मी के रूप में कार्य करते हैं और बायो जियोकेमिकल साइक्लिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह कृषि में होने वाले परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हैं और बताते हैं कि कैसे जंगलों को कृषि भूमि में बदलने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है।

कृषि में कीटनाशकों का उपयोग और स्मॉग की समस्या

प्रोफेसर कांगो कृषि में कीटनाशकों के उपयोग और इसके नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करते हैं। वह दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा में सर्दियों में होने वाली स्मॉग की समस्या का उदाहरण देते हैं और बताते हैं कि कैसे फसल के ठूंठ को जलाने से ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं।

प्रस्तुति की शुरुआत और कवक

प्रोफेसर कांगो अपनी प्रस्तुति शुरू करते हैं और कवक के बारे में बताते हैं।

स्क्रीन शेयरिंग समस्या और एक्टिनोमाइसिटीज

स्क्रीन शेयरिंग में समस्या आती है, जिसे ठीक किया जाता है। प्रोफेसर कांगो एक्टिनोमाइसिटीज के बारे में बताते हैं और बताते हैं कि कैसे पहली बारिश के बाद मिट्टी से आने वाली खुशबू का स्रोत यही होते हैं।

एक्टिनोमाइसिटीज और एंटीबायोटिक्स

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि एक्टिनोमाइसिटीज कई एंटीबायोटिक्स बनाते हैं और इनका उपयोग जीवन रक्षक दवाओं के रूप में किया जाता है। वह बताते हैं कि इन सूक्ष्मजीवों को जमीन में जीवित रहने के लिए एंटीबायोटिक्स बनाने की आवश्यकता होती है।

रेस्ट्रिक्शन एंजाइम और प्रकृति से सीख

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि कैसे बैक्टीरिया रेस्ट्रिक्शन एंजाइम बनाते हैं जो डीएनए को काट देते हैं और उन्हें विदेशी डीएनए से बचाते हैं। वह बताते हैं कि प्रकृति से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है और प्रत्येक जीव के पास जीवित रहने का अपना तंत्र होता है।

लैक्टोबैसिलस और थर्मोडायनामिक्स का नियम

प्रोफेसर कांगो लैक्टोबैसिलस जैसे जीवाणुओं के बारे में बताते हैं जो दही में पाए जाते हैं और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं। वह थर्मोडायनामिक्स के नियम पर चर्चा करते हैं और बताते हैं कि कैसे सूक्ष्मजीव अपने अंदर तो व्यवस्था बनाते हैं, लेकिन बाहर अव्यवस्था पैदा करते हैं।

अव्यवस्था और सतत विकास

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि कैसे मनुष्य स्वाभाविक रूप से अव्यवस्था पैदा करते हैं और सतत विकास का लक्ष्य इस अव्यवस्था को कम करके विकास को प्राप्त करना है। वह बताते हैं कि कार में ब्रेक और एक्सीलेटर दोनों होते हैं, और दोनों का उपयोग करके ही कार ठीक से चलती है।

जीवन और मृत्यु का दर्शन

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि जीवन तत्वों में व्यवस्था है और मृत्यु इन तत्वों का परेशान होना है। वह बताते हैं कि सतत विकास का लक्ष्य विकास के साथ-साथ प्रकृति को बनाए रखना और अव्यवस्था को कम करना है।

कोई लंच मुफ्त नहीं है और सूक्ष्मजीव विज्ञान का महत्व

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि कोई भी लंच मुफ्त नहीं है और जब हम कुछ प्राप्त करते हैं तो हमें कुछ खोना भी पड़ता है। वह सूक्ष्मजीव विज्ञान के महत्व पर जोर देते हैं और बताते हैं कि जब तक माइक्रोब्स को देखा नहीं गया था, तब तक कोई भी उनके अस्तित्व को मानने को तैयार नहीं था।

लवन हूक और सूक्ष्मजीवों की खोज

प्रोफेसर कांगो लवन हूक के बारे में बताते हैं, जो एक कपड़ा व्यापारी थे और उन्होंने माइक्रोस्कोप का उपयोग करके सूक्ष्मजीवों की खोज की। उन्होंने देखा कि तालाब के पानी में सूक्ष्मजीव एक निश्चित दिशा में चलते हैं और यह जीवन की पहचान है।

लुई पाश्चर और एबायोजेनेसिस का सिद्धांत

प्रोफेसर कांगो लुई पाश्चर के बारे में बताते हैं, जिन्हें माइक्रोबायोलॉजी का जनक कहा जाता है। उन्होंने एबायोजेनेसिस के सिद्धांत को गलत साबित किया और बताया कि जीवन जीवन से ही आता है। उन्होंने एक फ्लास्क की मदद से यह साबित किया कि सूक्ष्मजीव हवा से आते हैं।

पाश्चर का योगदान और रोगों का जर्म सिद्धांत

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि पाश्चर ने फर्मेंटेशन और रोगों के जर्म सिद्धांत पर भी काम किया। उन्होंने बताया कि रोग किसी श्राप के कारण नहीं होते हैं, बल्कि सूक्ष्मजीवों के कारण होते हैं।

फ्लेमिंग और पेनिसिलिन की खोज

प्रोफेसर कांगो फ्लेमिंग के बारे में बताते हैं जिन्होंने पेनिसिलिन की खोज की और बताया कि कैसे यह एक सैनिक की जान बचाने में मदद कर सकता है। पेनिसिलिन की खोज 1928 में हुई थी, लेकिन इसके महत्व को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान समझा गया।

एडवर्ड जेनर और वैक्सीन की खोज

प्रोफेसर कांगो एडवर्ड जेनर के बारे में बताते हैं जिन्होंने वैक्सीन की खोज की। उन्होंने देखा कि दूध धोने वाली महिलाओं को स्मॉल पॉक्स नहीं होता है क्योंकि उन्हें काऊ पॉक्स हो चुका होता है। वैक्सीन शब्द का अर्थ काऊ होता है।

कोच के सिद्धांत और रोगों की पहचान

प्रोफेसर कांगो रॉबर्ट कोच के सिद्धांतों के बारे में बताते हैं जिनका उपयोग रोगों के कारक को पहचानने के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि किसी भी सूक्ष्मजीव को शुद्ध रूप में अलग करना आवश्यक है ताकि यह तय किया जा सके कि वही सूक्ष्मजीव उस रोग के लिए जिम्मेदार है।

रोग, पर्यावरण और स्वास्थ्य का संबंध

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि रोग, पर्यावरण और मनुष्य का स्वास्थ्य आपस में जुड़े हुए हैं। वह बताते हैं कि कैसे एक टॉकीज में खराब हवा की गुणवत्ता के कारण रोग फैल सकते हैं।

कोविड-19 और रियल टाइम पीसीआर

प्रोफेसर कांगो कोविड-19 का उदाहरण देते हैं और बताते हैं कि कैसे रियल टाइम पीसीआर का उपयोग करके इसकी पहचान की गई। रियल टाइम पीसीआर डीएनए का मल्टीप्लिकेशन इन विट्रो करता है और इसका उपयोग डायग्नोस्टिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

नैदानिक तकनीकों का विकास और एंजाइम का उपयोग

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि नैदानिक तकनीकें बायोलॉजी पर आधारित हैं और इनमें एंजाइम का उपयोग किया जाता है। वह ग्लूकोस ऑक्सीडेज का उपयोग करके ग्लूकोमीटर बनाने का उदाहरण देते हैं।

शराब और ब्रेड बनाने में सूक्ष्मजीवों का उपयोग

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि लोग शराब और ब्रेड बनाने में सूक्ष्मजीवों का उपयोग करते थे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि सूक्ष्मजीव मौजूद हैं।

माइक्रोस्कोप और रेजोल्यूशन

प्रोफेसर कांगो माइक्रोस्कोप के बारे में बताते हैं और बताते हैं कि रेजोल्यूशन आवर्धन से भी महत्वपूर्ण है। रेजोल्यूशन दो पास में रखे हुए पॉइंट्स को विभेदित करके अलग-अलग देख सकने की क्षमता है।

लाइट माइक्रोस्कोप और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि लाइट माइक्रोस्कोप की सीमा को इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप ने पार कर लिया है। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप लाइट माइक्रोस्कोप से अधिक आवर्धन कर सकता है क्योंकि यह लाइट की वेवलेंथ की लिमिटेशन को पार कर लेता है।

ब्रेक और चर्चा

प्रोफेसर कांगो ब्रेक लेने की बात करते हैं और बताते हैं कि वह अपने आप से सवाल पूछते हैं और चाहते हैं कि लोग आपस में विमर्श करें।

सर रिचर्ड फेनमैन और आइंस्टीन के उद्धरण

प्रोफेसर कांगो सर रिचर्ड फेनमैन और आइंस्टीन के उद्धरणों का उल्लेख करते हैं और बताते हैं कि यदि आप कोई बात आसानी से समझा नहीं सकते हैं तो शायद वह आपको समझ में भी नहीं आएगी।

मानव संसाधन और यूनिकनेस

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि मानव संसाधन की सबसे महत्वपूर्ण बात है लोगों का अपने आप में यूनिक होना। वह बताते हैं कि एक विभाग में 10 टीचर हैं तो यह जरूरी नहीं कि सब एक जैसे हों।

सूक्ष्मजीवों का महत्व और उपयोग

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि सूक्ष्मजीवों को अब गंभीरता से लिया जा रहा है और वे कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

माइक्रोबली एनहांस्ड ऑयल रिकवरी और बायोफर्टिलाइजर

प्रोफेसर कांगो माइक्रोबली एनहांस्ड ऑयल रिकवरी और बायोफर्टिलाइजर के बारे में बताते हैं। माइक्रोबली एनहांस्ड ऑयल रिकवरी में सूक्ष्मजीवों का उपयोग करके पृथ्वी के अंदर से पेट्रोल निकाला जाता है। बायोफर्टिलाइजर पौधों को हेल्दी रखने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

प्रोबायोटिक और सूक्ष्मजीवों का उपयोग

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि जब डॉक्टर एंटीबायोटिक देते हैं तो साथ में प्रोबायोटिक खाने की सलाह भी देते हैं। प्रोबायोटिक वही जीवाणु हैं जो एंटीबायोटिक से मर जाते हैं और डाइजेशन को डिस्टर्ब कर देते हैं।

सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति और विविधता

प्रोफेसर कांगो बताते हैं कि सूक्ष्मजीव हर जगह मौजूद हैं, चाहे कोई देश हो, बर्फ हो, गरम हो या रेगिस्तान हो। वह बताते हैं कि सूक्ष्मजीवों की विविधता कैसी है।

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Transcript

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0:01 नंदा सर जी सर स्टार्ट कीजिए गुड मॉर्निंग ऑल ऑफ यू फर्स्ट ऑफ ऑल थैंक यू डॉक्टर संजीव सर फॉर गिविंग मी ओपोरर्चुनिटी फॉर इंट्रोड्यूसिंग डॉक्टर कांगो नवीन कांगो सर वेलकम कांगो सर ब्रीफ इंट्रोडक्शन ऑफ कांगो सर इज फॉलोइंग प्रोफेसर नवीन कांगो इज अ डिस्टिंग्विश एकडमिशियन एंड रिस्चर इन द फील्ड ऑफ माइक्रोबायोलॉजी एट द स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेस डॉक्टर हरी सिंह गौर यूनिवर्सिटी सागर एमपी ही इज सर्विंग एस ए प्रोफेसर सिंस 2014 एंड ही आल्सो होल्ड्स द एडिशनल रिस्पांसिबिलिटी ऑफ द कोऑर्डिनेटर ऑफ द सोफिस्टिकेटेड

0:47 इंस्ट्रूमेंट सेंटर ही ऑब्टेंड ह एमएससी एंड पीएचडी इन माइक्रोबायोलॉजी वि गोल्ड मेडल फॉर सिक्योरिंग फर्स्ट पोजीशन इन एमएससी अपाइड माइक्रोबायोलॉजी एंड बायोटेक्नोलॉजी इन 1995 प्रोफेसर कांगो रिसर्च एक्सपर्टाइज इन माइक्रोबियल एंजाइम्स वि स्पेशल फोकस ऑन मेननेज इननेज एल एस्पनेज एंड देर इंडस्ट्रियल एंड थिक थरेपेटिक एप्लीकेशन ही हैज़ बीन कन्फर्ड वि सेवरल प्रेस्टीजियस अवार्ड एंड फेलोशिप्स इंक्लूडिंग फॉलो ऑफ द माइकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया इन 2019 द डोल स्के स्किल पोस्ट डॉक्ट फॉलोशिप

1:35 फ्रॉम साउथ अफ्रीका इन 2004 एंड द यूजीसी सीमो फेलोशिप फ्रॉम फिनलैंड इन 20089 ही पब्लिश मोर देन 43 रिसर्च पेपर ब्रॉट थ्री बुक्स एंड 11 बुक चैप्टर्स ह स्कली कंट्रीब्यूशन स्पान हाई इंपैक्ट जनरल्स एंड रेपुटेड पब्लिशर्स ही हैज़ सक्सेसफुली कंप्लीटेड मल्टीपल फंडेड प्रोजेक्ट्स फ्रॉम द एजेंसी लाइक यूजीसी, एमपीसी, एसटी एंड एमपी बायो टेक्नोलॉजी काउंसिल एंड हैज फील्ड पेटेंट्स फॉर नोवेल माइक्रोबियल एंजाइम्स वि थरेपेटिक पोटेंशियल ह मेंटोरशिप है गाइडेड सिक्स अवार्डेड पीएचडी स्कॉलर्स एंड सेवरल गोइंग ऑन रिस्चर्स

2:23 ए रेगुलर स्पीकर एट नेशनल एंड इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंसेस प्रोफेसर कांगो हैज़ डिलीवर प्लेनरी लेक्चर्स चेयर्ड सेशंस एंड ऑर्गेनाइज मेजर एकेडमिक इवेंट्स इंक्लूडिंग वर्कशॉप्स एंड इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंसेस ही सर्व ऑन एडिटोरियल बोर्ड्स एंड ही इज ए रिव्यूअर फॉर सेवरल रेपुटेड जनरल्स थ्रू ह पाइनियरिंग रिसर्च एंड एकडमिक लीडरशिप प्रोफेसर नवीन कांगो कंटिन्यूस टूब्यूट सिग्निफिकेंटली टू माइक्रोवियल बायोटेक्नोलॉजी एंजाइम बेस ग्रीन टेक्नोलॉजीस एंड हायर एजुकेशन इन इंडिया ए वेरी वेल कंट्रीब्यूशन ऑफ डॉक्टर नवीन कांगो सर

3:10 थैंक यू सर एंड वेलकम ऑफ यू इन आवर एज टुडेेज रिसोर्स पर्सन बहुत कुछ छूट गया हो गया नवीन सर मैंने बहुत पुराना कहीं से मिला उसको ले बनाया नाइस ओवर टू सर या या थैंक यू सो मच फॉर वैरी काइंड इंट्रोडक्शन एंड वेलकम सर व्हनेवर आई गेट अ चांस टू यू नो स्पीक इन अ रिफ्रेशर कोर्स और बीपी आई एम रिमाइंडेड ऑफ यू नो सेवरल वंडरफुल थिंग्स जैसे आज पहली बात तो मैं हिंदी अंग्रेजी के दोनों में बात कर सकता हूं इसकी इजाजत मुझे होगी ऐसा मुझे लगता है

3:58 मेरी आवाज आ रही है ठीकठाक जी सर यस सर आ रही है जी सर तो जैसा कि आज जब मैं पांडे सर को देखा कंप्यूटर स्क्रीन पे और मुझे याद क्या आया ये मैं पहले आपसे शेयर करना चाहता हूं। मुझे याद आया सन 2007 जब मैं खुद एक रिफ्रेशर कोर्स करने जबलपुर के तब तब हम लोग उसको एकेडमिक स्टाफ कॉलेज कहते थे। पांडे साहब गलत तो नहीं कह रहा हूं। तो एट दैट टाइम यूज टू कॉल इट एकेडमिक स्टाफ कॉलेज एंड एस अ मैंडेटरी रिक्वायरमेंट वी वेर लाइक

4:43 वी वेर आस्क टू डू यू नो टू सच रिफ्रेशर कोर्सेस व्हिच वेर लाइक फॉर 21 डेज सो वन आई डीड एट जबलपुर इन 2007 एंड द नेक्स्ट वन आई डीड इन जम्मू जम्मू यूनिवर्सिटी सॉरी शिमला एचपी यूनिवर्सिटी शिमला राइट सो बींग इन एमपी यू नो एंड एट दैट टाइम आल्सो हमारे आदरणीय प्रोफेसर संधू साहब भी उस कोर्स के डायरेक्टर थे और बस साइंसेस में था। सो आई एंड दैट टाइम इट टू बी यू नो वी हैड टू बी सो आई वास देर इन जबलपुर 21 डेज एंड

5:30 आई मस्ट से दैट द एएससी और व्हाट वी कॉल इट नाउ एमएमटीटीसी एट जबलपुर ऑर्गेनाइज द कोर्सेस वेरी वेल एंड इट इज़ वेरी मिटिकुलसली प्लंड एंड एज़ यू कैन सी दैट आई थिंक दैट डेलीबेशंस आर क्वाइट मीनिंगफुल व्हिच लीड टू यू नो काइंड ऑफ यू नो एंगेजमेंट एंड द पपस वेरी पर्पस ऑफ सच कोर्सेस इस टू यू नो आई वोंट से इट्स अ टीचिंग और लेक्चरिंग सेशन मैं मानता हूं कि एक डिस्कशन का या विमर्श का प्लेटफार्म होता है जिस पर हम लोग क्योंकि हम सभी शिक्षक हैं तो एक अनवरत खोज

6:17 अपनी भी और की भी और तमाम जो समसामयिक मुद्दे रहते हैं। है ना? जो शीर्षक है वो है सस्टेनेबल डेवलपमेंट। है ना? और इट इज लार्जली कनेक्टेड वि एनवायरमेंट एंड द वे वी आर यू नो हैबचुएटेड वि सो मेनी यू नो थिंग्स। तो बहुत सारी जो चीजें आदतन होती है जो जो समय के साथ होती है एक तरह से ये एक रेडी रेकनर होता है एक तरह से हमारी आंखें खोलने के लिए कई बार ये काम करता है तो जब कभी मैं मुझे ये मौका मिलता है तो मैं आई बिलीव दैट जो कि मेरा बड़ा स्पष्ट रूप से

7:03 मानना है जब कभी हम विमर्श कर रहे होते हैं तो सिर्फ हम बोलते नहीं हम सुनते भी है अपनी बात को तो कहीं ना कहीं हम अपने आप को भी रीेंट कर रहे होते हैं। कहीं ना कहीं हम अपने आप को फिर से अपने लोकस को अपने फोकस को खोजने की कोशिश करते हैं। तो मैं इसको एक ओपोरर्चुनिटी मानता हूं बातचीत करने की अपने आपको सुन पाने की समझ पाने की। तो आप लोग बीच में मुझे टोक भी सकते हैं और हम लोग तमाम बातें करेंगे। मुझे काफी अरसे तक बात करनी है। एक बजे तक बोला गया है। दैट्स गोइंग टू बी लॉन्ग एंड बट यू कैन आल्सो यू नो इंटक्ट टॉक एंड व्हाटएवर यू मे फील लाइक। सो कमिंग टू दिस

7:49 परिकुलर टाइटल एंड हाउ डू आई फिट इन कि पहली बात तो मैं जब भी मुझको ये फ्रेज सुनाई देता है सस्टेनेबल डेवलपमेंट तो ये दोनों जो शब्द है आपस में बड़े विरोधाभासी है कि आप चीजों को सस्टेन भी करना चाहते हैं और आप डेवलपमेंट भी चाहते हैं। आप जंगल को भी बचाना चाहते हैं। आप रोड भी बनाना चाहते हैं। आप नदी को भी बचाना चाहते हैं। आप बांध भी बचाना चाहते हैं। आप बैलेंस बनाना चाहते हैं इको सिस्टम में। एट द सेम टाइम आप पेस्टिसाइड का भी उपयोग करना चाहते हैं और किसी हद तक ये कंपलशन भी है। इट्स नॉट

8:35 ओनली अ चॉइस की हम मतलब सिरे से डेवलपमेंट को इग्नोर कर दे और सस्टेनेंस जो है वो एक फ्यूचरिस्टिक चीज है जो कि वर्तमान में इतना महत्वपूर्ण प्रतीत नहीं होता है। कई बार कोई सोच सकता है कि इसका शायद अभी और इसी इसी चीज को सोचते सोचते हम यहां तक आ पहुंचे हैं कि अब हम कहते हैं कि बहुत गर्मी है अचानक क्लाइमेट बदल जाता है और कोई भी फल खाइए, सब्जी खाइए, सब में पेस्टिसाइड होते हैं। तो हम लोग वहां तक तो आ गए हैं। जहां तक हमको ये चीजें अब परिलक्षित होने महसूस होने लगी है। और और बहुत सारी जो कहते हैं आज जिनको हम ये कोई आवाज बीच में

9:20 आ रही है अगर प्लीज उसको कोई बंद कर सके। समस नहीं कोई कोई आवाज नहीं है। नहीं किसी का कंप्यूटर का साउंड है। नहीं इट्स लाइक सर माइक एनीवेज इट्स फाइन इट्स फाइन। अब शायद बंद हो ही गई। तो हम लोग इस तरह की बात करते हैं और अल्टीमेटली पहुंचते कहां है कि वी आर प्ले वि लाइफ स्टाइल डिजीज। आज मैं सुबह जिसको हम लोग रील कहते हैं तो आई हैड अ चांस टू गो थ्रू रील एवरीबडी गोस थ्रू यू नो सोशल मीडिया एंड ऑल एंड वी आर यू नो विटनेसिंग अ ग्रैंड यू नो काइंड ऑफ रिव्ट इन नेपाल

10:07 बिकॉज़ समबडी लाइक काइंड ऑफ़ स्टॉप्ड पीपल एक्सेसिंग सोशल मीडिया। सो एनीवेज सो द पॉइंट वास दैट की आई वास एक्सेस आई हैड टू आई सॉ वेंट थ्रू अ रील दैट सेड की एक पुराने समय में एक ऋषि होते थे तो उनसे किसी ने कहा कि स्ट्रेस बहुत स्ट्रेस होता है। तो उन्होंने कहा कि स्ट्रेस क्या होता है? तो उन्होंने कहा कि स्ट्रेस मतलब कि इमोशनल साइकोलॉजिकल या फिजिकल ये जो चैलेंजेस या परेशानियां है इनको उनका मिलाजुला कोई स्वरूप होगा। तो उन्होंने एक बड़ी अच्छी उसकी परिभाषा या उसको समझाने

10:54 की कोशिश की कि इट इज लाइक रेजिस्टेंस टू द एकिस्टेंस जो हमारा वर्तमान स्वरूप है जब हम उसमें रेजिस्ट करते हैं जब हम उसमें एक सायास परिवर्तन लाने की कोशिश करते हैं तो वो स्ट्रेस जो है पैदा होगा और उसके जाहिर है कि दुष्परिणाम होंगे और तमाम बात मैंने इस चीज को जब इसका यहां तक पहुंचा मैं एक्स्ट्राट किया सस्टेनेबल डेवलपमेंट तक तो मैंने कहा कि यही तो होता आ रहा है कि हम लोग प्रकृति से बहुत रेिस्ट करते हैं। जो नेचर का स्वभाव है तो उससे मनुष्य का एक लगातार द्वंद जो है जारी है। जिसके तहत

11:41 यू है कि धीरे-धीरे उसके परिणाम हमारे सामने बल्कि अब धीरे भी कहते हैं। तो बहुत तेजी से सामने आने लगे। आई थिंक वी आर लाइक काइंड ऑफ विटनेसिंग सो मच ऑफ थिंग्स नाउ। सो ये बड़ा ही एक पुराना विषय होते हुए भी बड़ा समसामयिक भी है। क्योंकि इसकी नईनई परिभाषाएं नएए इसके आयाम दिन ब दिन सामने आते जा रहे हैं। और जब जब कभी कोई सशन हम खोज पाते हैं। जैसे किसी ने कहा कि लेट्स गो फॉर ऑर्गेनिक फार्मिंग। तो पाया गया कि अब जिस तरह की चीजें हो चुकी है उसमें वो भी सफल नहीं है। या किसी ने कहा कि यूनिटिकली मॉडिफाइड माइक्रो माइक्रोज्म का विरोध किया जाए तो ये भी पाया गया कि

12:29 भाई जहां इनका उपयोग किया जा रहा है वो मतलब एक तरह से उसके नए अवेन्यूस है। तो यह काफी सारा जो डिबेट के इर्दगिर्द ये बात है और इसमें हम लोग जो माइक्रोबायोलॉजिस्ट है या बायोलॉजिस्ट है वो एक बड़ा मतलब बड़ा पर्सेक्टिव खड़ा करते हैं कि व्हाट बायोलॉजिस्ट कैन यू नो थिंक ऑफ और वो किस तरह से चीजों को प्रेजेंट कर सकते हैं या किस तरह से उसको समझ सकते हैं। जैसे एक बहुत कॉमनली सुना हुआ फ्रेज है संस्कृत से आता है वसुधव कुटुंबम तो एक बार मैंने ऐसे ही गौर किया अभी

13:15 हमारे यहां 33वा कन्वोकेशन था तो हमने थीम रखी थी उसकी वन अर्थ वन फैमिली सो आई वास काइंड ऑफ़ डूइंग थिंग्स फॉर दैट एंड आई वास क्वाइट इन्वॉल्व्ड विथ दैट सो वी मेड अ ब्यूटीफुल अर्थ एंड देन वी हैड दिस स्लोगन वन अर्थ वन फींग ए माइक्रोबायोलॉजिस्ट आई रियलाइज की ये जो बात हमारे शास्त्रों से आती है कि वसुधव कुटुंबकम ये सिर्फ ह्यूमन बीइंग्स तक लिमिटेड हो ऐसा जरूरी नहीं इट इस बिय्ड दैट एंड इट इट कंटिन्यूस टू गो अप गो अप टू या गो डाउन टू यू नो द स्मालेस्ट ऑफ द लाइफ फॉर्म

14:00 तो जब हम कहते हैं कि हम ये सोचे की अर्थ है सच एस अ सुपर ऑर्गेनिज्म राइट एंड इट कंटेन सो मेनी लाइफ फॉर्म्स इंक्लूडिंग प्लांट्स एनिमल्स माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स यू नो लाइफ इन सी लाइफ इन यू नो एयर लाइफ इन सोइल तो आप पाएंगे की पूरी पृथ्वी जो है वो सूक्ष्म जीवो से आच्छादित है सूक्ष्म जीव मतलब आप उसको ये समझ जो आंख से दिखाई नहीं देता लेकिन उनका रोल जो है वो भले ही आपको आंख से दिखते नहीं है लेकिन उनका जो काम है वो बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट है और डेवलपमेंट की दौड़ में हम लोग अनजाने में

14:47 ही उनको जो है हार्म पहुंचा रहे एक आस्पेक्ट तो ये है और दूसरा ये है दूसरा आस्पेक्ट ये है कि जब कभी हम उनको इग्नोर करते हैं या उनको नहीं समझ पाते जस्ट लाइक वी हैड दिस पेंडेमिक तो उनकी क्षमताओं को भी कई बार जो है या उनके उनके प्रभाव को कई बार हम जब इग्नोर करते हैं तो हमको कई बार इन चीजों से मुखातिब होना पड़ता है जैसे कि पेंडेमिक अभी हम ज्यादा अरसा नहीं हुआ है जब एक छोटे से वायरस ने पूरी दुनिया को बदल के रख दिया था और मुझे याद आता है कि उस समय लोगों के जो [संगीत] मतलब पैमाने है या जो जो विचार है वो

15:34 तात्कालिक रूप से बहुत बदल गए थे। तब लोग जो है परमार्थ की बातें करने लगे थे और जीवन के क्षणभंगुरता की बातें करने लगे थे और तमाम मतलब अच्छे अच्छे जो जिस तरह उसने कोविड ने हम लोग को प्रेरित किया कि वी शुड बी लिविंग हार्मोनी मनी इस नॉट एवरीथिंग एंड कैपिटलिज्म इस नॉट एवरीथिंग बिकॉज़ इक्वली इट अफेक्ट्स इक्वली दैट्स ट्रू सबसे बड़ा जो इसकी समझ है कि पर्यावरण का नुकसान जो है उससे कोई भी अछूत जूता नहीं रहता है। चाहे वो मतलब यहां तक भी सोचे कि नॉट ओनली अबाउट ह्यूमन बीइंग्स अ पार्ट की वी हैव अ इकोनमिक डिस्पेरिटी बट इट्स बियड दैट तो इट्स ऑल द वे और तीसरा

16:20 जो बात है कि क्या हम इन सूक्ष्म जीवो को समझते हुए हम जीवन की और गहरी समझ विकसित कर सकते हैं क्योंकि ये ये जो सूक्ष्म जीव है ये बड़े इंटरेस्टिंग और जिसको हम कहते हैं ना कि आर्किया मतलब ये प्राग ऐतिहासिक कहे या उस समय जब पृथ्वी का इवोल्यूशन हो रहा था अर्थ में लाइफ का इवोल्यूशन हो रहा था उस समय से तो हम लोगों से बड़े सीनियर है और क्लोजनेस की बात करें तो मैं आपको बताऊं कि आपके शरीर में आपसे ज्यादा इन टर्म्स ऑफ नंबर्स सूक्ष्म जीव तो अभी बहुत सारा जो बातचीत है वो ये कि

17:06 यदि हम उनके व्यवहार को समझ पाते हैं तो बहुत सारे और सबसे ज्यादा मतलब बाहर तो नहीं है स्किन में है तमाम जगहों पर आंख में है अपने ओरल कैविटी में है लेकिन सबसे ज्यादा जो उनका रहवास है जो जहां सबसे घने पाए जाते हैं वो है आपकी आंख सो जो गठ है उसमें इनकी प्रचुर मात्रा है और ये बड़ा रोल प्ले करते हैं। इसको समझना एक बड़ा जटिल कार्य वो काफी लोग मुझे मिलाकर इसको समझने का प्रयास कर रहे हैं। बहरहाल चैलेंज ये है कि इनको सभी को आप ग्रो नहीं कर सकते। सभी को आप अपने मर्जी से कल्चर नहीं कर सकते। और

17:54 उसकी अपनी एक जिसको मैं ऐसा कहता हूं कि लाइफ साइंस का सबसे बड़ा जो चैलेंज है वो इस तरह से होता है कि आप एक सेल को तोड़तोड़ के तो समझ सकते हो कि ये किस किस चीज से बना हुआ है। लेकिन उसको जब जोड़ देंगे आपको दूसरा चैलेंज दिया जाए कि अब आप इसको जोड़ के जिंदा कर दो। तो वहां आपकी जो असमर्थता है है ना? वही पर नेचर या जिसको दूसरे स्वरूप में कुदरत या कई लोग उसको ईश्वर और तमाम वाइटल फोर्स कई सारे नाम दिए गए हैं। तो वहां पर जो मनुष्य की असमर्थता है वही इस बात को बताती है कि देयर इज समथिंग बिय्ड आवर अंडरस्टैंडिंग इसको भी ठीक से समझना जरूरी

18:40 है। बल कमिंग टू दिस वी हैव लॉट ऑफ माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स ऑल अराउंड वो जमीन में है, हवा में है, पानी में है, जानवरों में है, इंसानों में है और तमाम जगहों पर वो है और उनका एक अपना डायनामिक्स है, उनका एक अपना इको सिस्टम है। मजे की बात ये है कि जब हम इनके सबसे बड़े रोल की बात करते हैं। जैसे यह एक बहुत बड़ा एनग्मा या पैराडॉक्स है कि हम लोग जब कहते हैं कि वायरसेस क्या है? तो कोई कहता है वायरस कुछ नहीं होता है। प्रोटीन होता है उसके अंदर न्यूक्लिक एसिड होता है। तो किसी ने कहा कि ये बड़ा प्रिमिटिव है। तो जैसे कि मान लीजिए कि

19:26 कोरोना बड़ा कोरोना वायरस प्रिमिटिव प्रिमिटिव चीज है। बहुत आसान सी है। एक बूंद इथेनॉल से ये घुल जाएगा। खत्म हो जाएगा। लेकिन फिर दिक्कत यह है कि इसके एकिस्टेंस के लिए इसके होने के लिए आवश्यक है कि एक सेल हो। अब सेल नहीं होगा पहले तो वायरस नहीं होगा। तो इसका मतलब ये हुआ कि पहले सेल रहा होगा तब तो वायरस बना होगा। क्योंकि हम लोग जब पढ़ाते हैं तो हम कहते हैं कि वायरसेस आर ऑब्लिगेट इंट्रासेल्यूलर पैरासाइट्स। मतलब यदि सेल नहीं होगा तो वायरसेस का मल्टीप्लिकेशन संभव नहीं। तो यह बहस फिर वैसी ही हो जाती है कि पहले मुर्गी आई कि अंडा आया और इस पर अगर आप गौर करें तो ये

20:15 समझना जरूरी हो जाता है कि संभवत वायरसेस एडवांस होंगे तब तो हमारे सिस्टम को हाईजैक करके और हमको बीमार कर सकते हैं। क्योंकि यदि कोई चीज हमको बीमार कर सकती है तो जाहिर सी बात है कि वो हो सकता है कि हमसे उसके पास हमसे ज्यादा स्मार्ट मैकेनिज्म्स हो। कि वो हमारे अंदर रह के पपुलेट करता है और अगर कंट्रोल ना किया जाए तो तमाम मुश्किलें है। खैर तो इस तरह की बातें हैं कि वी आर येट टू अंडरस्टैंड यू नो माइक्रोब्स। तो मैं इस बारे में अपने प्रेजेंटेशन में भी बात करूंगा ही। बहरहाल इसमें एनवायरमेंट में देख तो सूक्ष्म जीव जो है वो उसको ऐसे समझा जाए कि पत्ती पेड़

21:04 से गिरती है या कोई जानवर मर जाता है तो आखिरकार वो कहां विलीन हो जाते हैं? कहां वो खत्म होते हैं? कैसे वो गायब हो जाते हैं? तो उसका जवाब है कि माइक्रोब्स आर एसेंशियली इसके अवेंजर्स। वो जो बायोजियोकेमिकल साइकिंग है उसके उसका जो मतलब टॉप मोस्ट लेवल है जहां की मिनरलाइजेशन होना वहां पर माइक्रोब्स अपना काम करते हैं और इनकी जो मतलब उस उस दृष्टि से देख क्लासिफिकेशन तो हम बहुत सारे उसमें जीवाणु यानी कि बैक्टीरिया बहुत सारी कवक यानी कि फंजाई

21:52 ऑफ कोर्स वायरस है और बहुत सारे हैं जो जैसे जिनके जिनके स्वरूप छोटे हैं यूकैरियोट्स है लेकिन फिर भी स्वरूप उनका छोटा है एनीवेज सो दे आर दे आर यू नो स्कवेंजर्स नेचुरल स्कवेंजर्स जिसको हम कहते है ना कि नेचुरल सफाई कर्मी तो वो अपना काम बखूबी कर रहे होते हैं जब तक कि हम उनको अपने पेस्टिसाइड से या इंसेक्टिसाइड से या तापमान में परिवर्तन से या वातावरण में परिवर्तन से जब तक उनको डिस्टर्ब नहीं करते हैं। तो बहुत सारा एक जैसे आप समझे कि खेती ने

22:37 किस तरह के चेंजेस लाए होंगे। एक अच्छा एक उदाहरण है इसका कि पहले जंगल थे। जंगल में लीटर होता था। लीटर में तमाम सूख चीजों का एक सक्सेशन होता था। वो मिनरलाइज होके फिर उसे वापस जाता। अब हमने क्या किया कि हम उसको एग्रीकल्चरल लैंड बना दिए। एग्रीकल्चरल लैंड बना दिए तो उसमें हमने उसकी जितनी भी प्रैक्टिससेस होती है कोई भी एग्रीकल्चर वाला सभी हम लोग समझते हैं कि पहले हम उस जमीन को खेती के लायक बनाते हैं। फिर उसमें मतलब हल चलाना उसमें मिट्टी को ठीक करना फिर एक तरह के पौधे को लगाना। अब उस एक तरह के पौधे को लगाने से जो नेचुरल उसका अबंडेंस था वो अलग हो जाता है क्योंकि अब ये मोनोकल्चर हो गया तो वो एक अपनी एक अलग

23:25 कहानी लिखेगा फिर यहां तक भी नहीं रुकते हम लोग अब हमें फसल भी मतलब ज्यादा चाहिए हमको उसको कीड़ों से बचाना है तो हम उसप फिर कीटनाशक डालेंगे हमको उसको रोगों से बचाना है तो हम उस पर फजीसाइड बैक्टसाइड सब सारी चीजें उसमें डाली होते ये होगा कि हमारी सारी शर्तें तो मंजूर हो जाएगी और यू मे गेट अ बंपर पैदावार जिसको कहते है एंड ऑल दैट बट इवेंचुअली हम बहुत ज्यादा नुकसान कर चुके होंगे अब होते फिर ये हो जाता है कि वापस आने की वापस आने का रास्ता नहीं बचता है। इसी खेती के एग्जांपल को देते हुए मुझे याद आता है कि

24:10 एक जो हम दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा में बड़ी प्रॉब्लम होती है विंटर्स में जिसको हम कहते हैं स्मोग। वो कैसे होती है कि जो ठूठ बच जाता है फसल के बाद उसको जला देते हैं। जलाना भी प्रयास उसी का है मिनरलाइजेशन का। लेकिन वो एक ड्रास्टिक एफर्ट है जिसमें की आप क्या करते हैं कि उसको उसका कंबशन करते हैं। कंबशन होने से जो गैसेस है वो नेचुरली ग्रीन हाउस गैसेस है वो इमर्ज होंगी और वातावरण में आप जानते ही है वहां सांस लेना मुश्किल है। तो इसका भी इलाज मुझे ये उदाहरण याद ही इस तरह से आता

24:57 है कि इसका भी इलाज कई लोगों ने ये पाया है कि यदि हम वो जो बचा हुआ रह जाता है फसल का उसको हम किसी माइक्रोब से डिग्रेड करवा दे इफेक्टिवली तो ये जो मिनरलाइजेशन का इस तरह का हमको प्रयास करना पड़ता है उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी उसको जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी तो ये सारी बातें है जो मेरे दिमाग में आती है और बहुत सारा है कि किस तरह से हम एनवायरमेंट को जो है प्रभावित करते हैं और बहुत ज्यादा जरूरी है कि उसमें हमको को अवेयरनेस ये ये प्रयास यही है सारे। सो कमिंग टू व्हाट आई एम गोइंग टू टॉक टुडे लेट मी अलव प्लीज अलाउ मी टू शेयर माय पीपीटी।

25:48 ओ हेलो आप कह सकते हैं। कोह होस्ट बनाया है। इज इट वििबल नाउ? यस कोस्ट यस सर। दिस बीन दिस हैज़ बीन लाइक माय ब्रेड एंड बटर फॉर लॉन्ग। सो आई हैव बीन वर्किंग वि माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स एंड आई डू वर्क वि सर शेयरिंग स्क्रीन नहीं दिखाई दे रही।

27:48 सर स्क्रीन भी नहीं दिख रही है और आवाज भी नहीं आ रही सर। माइक ऑफ है शायद इसलिए नहीं आ रहा है अजय जी का हां सर माइक माइक ऑन कर लीजिए चेंज हुआ तो ग डिनेक्टेड बहुत बहुत से बंद था अच्छा इज इट अरे आपने बताया अच्छा जब आप स्क्रीन स्क्रीन शेयर कर रहे थे ना तब तब से था उसके पहले से तो आई विल शेयर माय स्क्रीन प्लीज मुझे तुरंत बता दे यदि ऐसा होता है तो जरूर जरूर तो लेट मी शेयर माय स्क्रीन हाउ डू आई शेयर

28:33 राइट सो द स्क्रीन इज वििबल अगली यस सर अब सही है यस सर अब वििबल है वििबल है तो तो ये जो स्लाइड है इसमें आप देख सकते हैं कि कवक है ये दोनों फंजाई है और ये बैक्टीरिया है ये एक्टिनोसिटीज है। ये मुझे बड़ा रुचिकर लगता है अपने साथियों को बताने में की बहुत सारा डायवर्सिटी है जिससे हम लोग रोज यू नो बातचीत करते हैं। उसको समझने की कोशिश करते हैं। हम पर उनके मैनरिज्म्स बड़े ऑस्क्योर है। दे आर लाइक क्वाइट शाय आई एम सो ऑन सो गुड। सो बट लाइक द फर्स्ट से डाइजेस्टिव एंजाइम वास प्रोड्यूस फ्रॉम

29:19 दिस फंगस कॉल्ड एस अबाइज राइट और पहली पहली जो एंटीबायोटिक है प्रतिजैविक है वो इससे बनाई गई थी उसका भी नाम पेनिसिलियन ठीक है और बहुत सारे प्रतिजैविक जो एंटीबायोटिक्स जो हम लोग यूज़ करते हैं वो इस पर्टिकुलर माइक्रोब के भाई बंधु बनाते जिसका की नाम है एक्टिनोमाइसिटीज। सो आई ऑलवेज आस्क माय स्टूडेंट्स एक पहला पहली जो प्रतिजैविक थी वो अभी और भी इस बारे में बात करेंगे। दैट वास डिस्कवर्ड बाय एलेक्जेंडर फ्लेमिंग एंड फॉललोड बाय वक्समैन। सो वक्समैन इन्वेस्टेड ऑल ह लाइफ इन यू नो फाइंडिंग एंटीबायोटिक

30:04 प्रोड्यूसेस फ्रॉम सोइल एंड ही कुड फाइंड 25 सच एंटीबायोटिक्स। बहुत सारे नाम है जितने सीन लगे रहते है ना पीछे ग्रिसन और एंड सो ऑन सो फॉर तो ये जो है एक्टिडोमाज है और इससे हम और आप कैसे मैं ये पूछ रहा था कितने लोग बायोलॉजी से हैं यस सर अच्छा कुछ लोग तो है सर बॉटनी तो दैट्स गुड बॉटनी से जी जी देती। सो एक्चुमाइिटीज का जो परिचय है जो मैं देना चाहता हूं वो ये है कि हमारे बहुत सारे जो कवि शायर हैं तो जब पहली बारिश गिरती है तो कहते हैं कि

30:50 मिट्टी से बड़ी सोने की खुशबू आ रही है और उसको तमाम चीजों से रिलेट किया जाता है कि पहली बारिश और ये वो हमारे गांव की खुशबू एंड ऑल दैट। लेकिन उसका जो सोर्स है वो ये लोग है और ये एक ऐसा वलेटाइल सब्सटेंस बनाते हैं जिसका कि नाम है जियोस्मिन तो जब भी पानी गिरता है शुरुआत में तो ये जियोस्मिन हवा में आता है और फिर हम महसूस करते हैं कि कुछ नई चीज कुछ जैसे किसी पौधे की खुशबू होती है उसी तरह से इनकी भी खुशबू होती है एनीवे तो ये तो इनकी एक बात थी और दूसरी बात ये कि बहुत सारे प्रतिजैविक यानी कि एंटीबायोटिक्स या दूसरे शब्दों में कहे तो लाइफ सेविंग ड्रग्स ये बनाते हैं।

31:35 तो मैं अपने स्टूडेंट से अक्सर पूछता हूं कि इनको क्या जरूरत पड़ गई कि ये लाइफ सेविंग ड्रग बनाते हैं। हम तो इनकी जरूरत ये है कि इनको जमीन में बहुत सारे माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स के साथ सर्वाइव करना। एंड दिस टेक्स अस टू द स्ट्रगल फॉर एक्सिस्टेंस। तो वो जो एक प्रभावत वो बात होती है जिसको कहते हैं कि वो आप आपस में जो उनका अंतर अंतर व्यवहार है या इंटरेक्शन है उसके तहत ये चीजें जो है ओवर द टाइम ओवर लॉन्ग लोंग यू नो नॉट ओनली डिकेड्स बट सेंचुरी या मे बी या ये

32:22 डेवलप हुई है क्षमताएं इनमें और जब मैं एक बात कहता हूं तो बड़ी इंटरेस्टिंग बात ये है कि जितनी भी इस तरह की क्षमताएं है माइक्रोब्स की जैसे कि हम लोग रेस्ट्रिक्शन एंजाइम आप लोग जानते होंगे जो कि डीएनए को काट देता है और वहां काटता है जहां हम चाहते हैं। तो ये भी एक रेजिस्टेंस का मैकेनिज्म था कि हमारे अंदर आके कोई हमें बदल ना दे। इसको लेकर बैक्टीरिया ने एक मैकेनिज्म बनाया कि कोई अगर फॉरेन डीएनए आएगा जिसको हम ट्रांसफॉर्मेशन कहते हैं जो कि ग्रिफथ ने खोजा था कि सपोज अ फॉरेन डीएनए कम्स इनसाइड अ बैक्टीरियम एंड हाईजेक्ट्स इट्स मैकेनिज्म और उसको बदल देता है उसको चेंज कर देता है या उसको खत्म ही कर देता है

33:08 जैसे वायरसेस करते तो ये उनके बीच का एक वो था इंटरेक्शन कि हम रेस्ट्रिक्शन एंजाइम भेजेंगे अभी आपने जब ऑपरेशन सिंदूर हो रहा था तो आपने आपने देखा होगा कि बाहर ड्रोन आता है और इधर से ये लोग उसको इंटरवीन कर देते थे। इंडिया डड इट वेरी सक्सेसफुली। सो ऑल द ड्रोन अटैक्स व नलिफाइड थैंक्स टू द मिसाइल्स व्हिच कुड इंटरसेप्ट इट इन एयर इटसेल्फ। वो नीचे गिर ही नहीं पाते। तो ये मैकेनिज्म सोचिए कि जीवाणुओं में और तमाम माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स में है कि एंटीबायोटिक्स बना पाना, रेस्ट्रिक्शन एंजाइम्स बना पाना और उनको पहले ही खत्म कर देना। तो नेचर से हमको बहुत सारी चीजें सीखने को मिलती है और ये तो आप लोगों ने सुना ही होगा कि

33:53 एवरी ऑर्गेनिज्म ऑर्गेनिज्म हैस इट्स ओन मैकेनिज्म मैकेनिज्म टू सर्वाइव तो उनहीं में एक इस प्रकार का एक मैकेनिज्म है और ये जो जीवाणु है ये आपका दोस्त है जब आप दही खाते हैं तो आपके पेट में यही जाता है इसका नाम है लैक्टोबसिलस और इसके अलावा कुछ बुरे भी है उस बारे में हम हम लोग सारी बातें करेंगे। तो बहरहाल आगे चलते हैं। राइट? तो मैं इसको जानबूझ के इस मोड में रख रहा हूं क्योंकि अगर फुल स्क्रीन करता हूं तो फिर मैं नहीं दिखता हूं। आप लोग नहीं दिखते हैं। हम तो ये एक बात जो पर्यावरण से जुड़ी हुई है और काफी

34:40 इंटरेस्टिंग है सीखने की है कि द स्मालेस्ट ऑफ द सेल इज वेरी स्मार्ट एंड वो करता क्या है कि अपने अंदर तो ऑर्डर बनाता है अपने अंदर व्यवस्था बनाता है लेकिन इर्दगिर्द अपने एक डिसऑर्डर बनाता है और ये थर्मोडायनेमिक्स का नियम है कि समय के चलते जो डिसऑर्डर है वह बढ़ता ही जाना है। उसका कोई उपाय नहीं है। यह तो नियम है। मतलब आप जिस तरह से आप डिफ्यूजन को समझे या एक कमरे में आप अगर अगरबत्ती जला देते हैं तो आपको कुछ करना नहीं पड़ता है। वो स्पॉनटेनियसली स्वतः स्फूर्त ढंग से पूरे कमरे में उसकी खुशबू फैल जाती है। उसके मॉलिक्यूल्स फैल जाते हैं। एंट्रॉपी भी

35:27 इसी तरह की है कि डिसऑर्डर तो नियति है। उस तो होना ही है। लेकिन उस बीच जीवन क्या करता है कि अपने अंदर तो आर्डर बनाता है लेकिन बाहर डिसऑर्डर क्रिएट करता है। तो ये हमारी एक तरह की नैसर्गिक सी एक लायबिलिटी है कि हम ये करते ही मसलन कि इसका एक दूसरा एक सिंपल उदाहरण ले तो हम लोग अपने घर में क्या करते हैं? हम अंदर तो सफाई करते हैं लेकिन बाहर बाहर हम लोग बहुत सारा जिस वेस्ट कहते हैं या कचरा कहते हैं या रिफ्यूज कहते हैं और तमाम चीजें रहती है और उसको हम डिस्कार कर देते हैं तो वो कहां जाएगा वो पर्यावरण में जाएगा और उसको उसको वो जब

36:13 वो डिसऑर्डर बढ़ता जाएगा तो एक दिन वो आपको जैसे जब मैं नेचर की बात करता हूं तो खिर लुधियानी एक बड़ा अच्छा शेर है कि दुनिया ने तजुर्बातो हवास की शक्ल में दुनिया ने तजुर्बातो हवास की शक्ल में मुझको दिया है जो वही लौटा रहा हूं मैं तो जो हम उसको देंगे एक ना एक दिन वो वापस जरूर मिलेगा तो ये जो हम डिसऑर्डर एक बड़े स्वाभाविक रूप से क्रिएट करते हैं उसको मिनिमाइज करके उसको कंटेन करके क्या हम डेवलपमेंट को अचीव कर सकते हैं? आई थिंक यही सस्टेनेबल डेवलपमेंट बड़ा चैलेंज है। इट्स लाइक हैविंग ब्रेक एस वेल एज

37:00 एक्सलरेटर गोइंग टगेदर। लेकिन ये भी बात सही है कि कार में दोनों होते हैं। तभी कार ठीक से चलती है। कहीं हम ब्रेक भी लगाते हैं, कभी एक्सलरेटर भी लगाते हैं। सो इसी के आगे अगर एक शेर ये भी एक बड़ा अच्छा शेर लगता है मुझको की जिंदगी क्या है? अनासिर में जरे तरतीब तो थोड़ा सा इसमें उर्दू ज्यादा है फिर मतलब आसान है कि व्हाट इज लाइफ लाइफ इस लाइक ऑर्डर इन डिसऑर्डर एंड व्हाट इज डेथ मौत क्या है इनहीं अजा का परेशान होना जब ये सारी चीजें गड़बड़ हो जाएंगी तो देयर विल बी डेथ देयर विल बी यू नो केस देयर विल बी डिसऑर्डर एंड सो ऑन सो फॉर तो सारा जो चैलेंज है वो यही समझ जी

37:47 ने कहा है कि हाउ टू यू नो गो अहेड वि द डेवलपमेंट बट आल्सो सस्टेन यू नो नेचर एंड ट्राई टू एटलीस्ट इफ नॉट अवॉयड एटलीस्ट प्रोलोंग यू नो द केस राइट सो वी शुड अंडरस्टैंड बीइंग अ ह्यूमन बीइंग दैट नो लंच इज फ्री एंड व्हनेवर वी आर जैसे हम लोग सब शिकायत करते हैं कि बहुत गर्मी है और इस शिकायत को हल कैसे करते हैं? एसी चला के वो एसी क्या करता है? कमरा तो ठंडा करता है लेकिन बाहर उतनी ही मात्रा में गर्मी पैदा कर देता।

38:35 तो यदि हम कहीं कुछ मतलब ये एक कपल है। जैसे रेडॉक्स रिएक्शन हम लोग पढ़ते हैं केमिस्ट्री में। यदि रिडक्शन हो रहा है तो ऑक्सीडेशन जरूर हो रहा होगा। कपलिंग इट। यदि हम कहीं पर एंट्रोपी को कम करने की कोशिश करते हैं तो डेफिनेटली वह कहीं ना कहीं उसको दूसरे पाम में तरीके से बढ़ा देता है। तो ठीक है आप बहुत अच्छे एक ड्राइंग रूम में या होटल के कमरे में बड़े ठंडे में बैठे हैं। लेकिन यही गर्मी आपको बाहर निकल के मिलने वाली है। ठीक। सो कमिंग टू मोर ऑफ माइक्रोबायोलॉजी अ सूक्ष्म जीव विज्ञान जो है यह इस तरह से है कि इसका सारा जो मसला था जब तक देखे नहीं गए

39:24 थे माइक्रोब्स तो कोई मानने को तैयार नहीं था कि ये एक्सिस्ट भी करते हैं जिसको हम कहते है ना कि सींग बिलीविंग डोंट सी देम ही डोंट बिलीव तो लव हुक एक कपड़ा व्यापारी थे वो वैज्ञानिक नहीं थे लेकिन ये बात अच्छी है इसलिए कि पढ़ाई लिखाई कोई पेशेवर चीज ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। अमूमन हम लोग पढ़ाई लिखाई में आते इसलिए है क्योंकि हमें कहते हैं हमारे बायोलॉजी में बड़ा जब हम लोग डिसाइड कर रहे होते हैं दसवीं 12वीं में बायोलॉजी में हमारा बड़ा इंटरेस्ट हो या मैथ्स में हमारा बड़ा

40:11 इंटरेस्ट हो तो वो जो इंटरेस्ट है वो बचा रहे वो जो ऑब्जरवेशन है वो समय के साथ बचा रहे और हम लोग उसको वैसे ही देख पाए जैसा कि एक एक सही वैज्ञानिक देखता है तो ये बड़ी बात होगी। बहरहाल युवन हुक कपड़ा व्यापारी थे। उनका काम था कि कपड़े की डिजाइन को देखना। तो वो लेंस वगैरह ठीक करते रहते थे। इसी के चलते उन्होंने एक दिन अपने नाखून के मैल में या दांत में नाके उसमें खराब में कहे तालाब के पानी में देखा कि कुछ ऐसी चीज है जो कि नियत दिशा में चलती है। जीवन की पहचान एक कि वो

40:58 यू ही नहीं चलेगी। मतलब आपने जब आप हम लोग छोटे रहते हैं तो हम देखते हैं कि जब धूप में या किसी रोशन दान से हम देखते हैं कि पार्टिकल्स मूव कर रहे हैं तो मेरे को याद आता है कि मैं पहले समझता था कि ये कुछ अजीब सी बात है और ये भी शायद कुछ चीज हो जो जीवित हो। लेकिन नहीं वो एक रैंडम मोशन है। तो लवक ने देखा कि ये जो माइक्रोब्स है तालाब के पानी में ये एक निश्चित दिशा में चलते हैं। और यहां से उन्होंने ये समझने की कोशिश की कि शायद ये जीवन है ये जिंदा है और इतना ही नहीं इनको अंग्रेजी बिल्कुल नहीं आती थी लेकिन इनको लगा कि इनकी जो इनका जो ऑब्जरवेशन है वो इतना महत्वपूर्ण है। तो

41:44 इसको उन्होंने डॉक्यूमेंट किया लिख दिया डच भाषा में और रॉयल सोसाइटी को भेजा लंदन की। वहां पर यह पब्लिश हुए अंग्रेजी में और फिर पूरी दुनिया को पता चला कि यह तो कमाल है कि देर आर ऑर्गेनिज्म्स व्हिच एक्सिस्ट एंड यू कैन नोट सीन देम बिकॉज़ दे आर सो स्मॉल। तो हमारी आंख की जो क्षमता है उसके क्योंकि उसकी सीमा के परे है ये तो इसलिए हमको दिखाई नहीं देते। लेकिन अगर हम माइक्रोस्कोप वगैरह का इस्तेमाल करें तो लिवन हुक वास नॉट द फर्स्ट पर्सन टू इन्वेंट अ माइक्रोस्कोप बट ही वास द फर्स्ट पर्सन टू रिपोर्ट वेरी कैंडेडली दैट लिविंग ऑर्गेनिज्म्स स्मॉलर देन व्हाट

42:30 वी कैन सी यूजिंग थ्रू अ नेकेड आई एकिस्ट एंड दिस इज अ वेरीेंट थिंग दैट काइंड ऑफ़ यू नो चेंज द कोर्स ऑफ़ यू नो लाइफ साइंसेस एस सच देन वी हड बहुत सारे साल बीत जाते हैं। ये पढ़ाई लिखाई का एक बड़ा वो है कि थिंग्स टेक टाइम टू मैच्योर। जैसे कहते है ना कि नोबेल पुरस्कार सालों बाद मिलता है नोबेल पुरस्कार क्योंकि बाय द टाइम पीपल रियलाइज कि इसकाेंस ये है 10 20 साल बीत जाना बड़ी आसान बात है बहरहाल लुइस पाश्चर जिनको फादर ऑफ़ माइक्रोबायोलॉजी कहते हैं। अब आप ये सोच सकते हैं कि ये तो बड़े ही माइक्रोबायोलॉजी की तरह की बात है। ये तो

43:15 हम लोग तो बॉटनी वाले हैं। हमको इनसे क्या मतलब या दूसरे लोग लेकिन एक बात है कि जो विज्ञान की यूनिवर्सलिटी है जो सार्वभौमिकता है वही उसका महत्व है। जैसे एडिसन यदि बल्ब इन्वेंट करते हैं तो उससे सिर्फ उनके शहर को फर्क नहीं पड़ता है। एक और वो कालजई भी होती है। इट इज बिय्ड टाइम आल्सो। आज भी हम बल्ब जलाते हैं। तो यह जो उसकी यूनिवर्सिटी है अह ऑफ डूइंग गुड साइंस या गिविंग अ गुड कासेप्ट। इस इस इस जरिए से आप देख तो ये जो बात है बड़ी महत्वपूर्ण लगेगी आपको कि लुईस पाश्चर जो थे ये एक फ्रेंच वैज्ञानिक थे और इन्होंने

44:01 एक ये आज के समय में भी इसकी कीमत 1001 ₹150 होगी ए फ्लास्क की मदद से ही एक्चुअली अ डिफेंडेड द कांसेप्ट दैट लाइफ कम्स फ्रॉम लाइफ ही डिस्रूव द थ्योरी ऑफ एबायोजेनेसिस पहले ये मानते थे कि ये मतलब मैं इसलिए भी चर्चा करता हूं ये सब कि ये जीव विज्ञान के एक बड़े कहना चाहिए आधारभूत चैलेंजेस थे। फंडामेंटल चैलेंजेस थे कि लाइफ कहां से आती है? तो कोई कहता था कि भाई अगर कोई चीज सड़ रही हो तो उसमें मक्खी अपने आप पैदा हो जाएगी या आप अगर दाल का पानी रख दे तो उसमें

44:48 कीटाणु अपने आप आ जाएंगे। तो क्या ये बात सही है? ये बात पूरी तरह से गलत है। तो सवाल ये है कि कीटाणु आते कहां से हैं? और ये तमाम डिस्कशन में था। किताबों में लिखा है कि मछली ऐसे बनती है और फलाना यहां से बना है वहां से बना है। तो ये जो मतलब इनका जो साइंस अक्सर जो है इस तरह के विवाद में पड़ता है कि स्क्रिप्चर में ये लिखा है लेकिन हम पृथ्वी सूरज के चारों ओर घूमती है। ये हम कह रहे हैं और लिखा ये है कि सूरज पृथ्वी के चारों ओर घूमता है। सो सच चैलेंजेस ये बड़े आधारभूत चैलेंजेस थे। लुइस पास्टर जी ने एक बहुत ही सस्ते से

45:33 फ्लास्क एक बहुत ही बड़े चैलेंज को खत्म किया कि यदि हम उस फ्लास्क की गर्दन को घुमा देते हैं और फिर उसमें कुछ चीज उबाल के रखते हैं तो जब तक हम उस गर्दन को नहीं तोड़ेंगे उसमें कोई ग्रोथ नहीं आने वाली है। इसका मतलब है कि वो जो माइक्रोब्स है वो हवा से इसके अंदर आ रहे हैं। मतलब माइक्रोब्स प्री एकिस्ट करते हैं। लाइफ पहले से एकिस्ट करती है और इस तरह से वो मतलब एक तरह से एक एक जगह से दूसरी जगह आती जाती है। यू नहीं है कि अचानक कहीं से प्रकट हो जाती है। ये जो चैलेंज था अब हम सब ने ही पढ़ा है बायोलॉजी में थ्योरी ऑफ़

46:18 एबायोजेनेसिस। अब आज के समय में इसका रेलेवेंस यह है कि यही गर्दन का टेढ़ा करना प्लास्ट का आपके ऑपरेशन थिएटर में इस कांसेप्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यदि एक दरवाजा ऐसा है तो दूसरा दरवाजा ऐसा होगा ताकि हवा यदि आए ऑपरेशन थिएटर में जहां आंख का या गिल का कहीं किसी बड़ी चीज का ऑपरेशन हो रहा हो तो कंटमिनेंट्स को अवॉइड करने के लिए वी हैव दिस द मूवमेंट ऑफ एयर इन जिगजैग फॉर्म। सो इसके यह तो ठीक है कि थ्योरी ऑफ एजेनेसिस जिससे प्रूव हुआ इसके जो उपयोग

47:03 है इस इस कांसेप्ट के वो भी आज तक मतलब मौजूद आज तक हमारे इसमें मतलब वर्तमान समय में भी वो उपयोग किए जा रहे हैं। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि जब कोई बड़ी खोज होती है या बड़ी बात बताई जाती है तो उसकी सार्वभौमिकता या उसकी उसके समय के साथ फेड ना होने की क्षमता बड़ी बात होती है। तो पाश्चर ने ऐसे कई काम किए और फर्मेंटेशन पे बहुत सारा काम किया। फिर जर्म थ्योरी ऑफ़ डिजीज पे काम किया। रोग कैसे होते हैं? क्योंकि पहले सारी जो लड़ाई थी माइक्रो ऑर्गनिज्म्स की वो मतलब माइक्रो ऑर्ग्स की वो ये बुरे होते हैं। पहले तो ये लोग मानते थे कि जो रोग होते हैं वो किसी श्राप के कारण या कभी उसके कारण होते हैं।

47:52 श्राप पाप इत्यादि जो भी मतलब या बुरी नजर मैल एरिया हवा का खराब हो जाना है। लेकिन फिर ये पाया गया कि भाई ऐसा नहीं है। इसका एक पूरा साइंस है। टीबी एक जीवाणु से होता है। कोड एक जीवाणु से होता है। कोरोना एक वायरस से होता है। तो इस तरह की बातें फिर तो रोगों का एक बड़ा रोल रहा। खैर उसके बाद फिर पाश्चर ने इतने सारे काम किए कि इट फॉल लाइक इट फॉलो इट वास फॉल बाय द गोल्डन एज ऑफ़ माइक्रोबायोलॉजी। बहुत सारे आविष्कार बहुत सारे खोजे इसमें हुई और फिर ये जो मैंने आपको एक उदाहरण दिया कि सूक्ष्म जीवो के जो फायदे हैं कैसे आने शुरू हुए

48:38 हालांकि अनजाने में हम लोग उनसे फायदा कमा रहे थे जैसे कि दही बनाना या शराब बनाना या ब्रेड बनाना लेकिन जानते बूझते फिर कि कैसे हम उनका उपयोग कर सकते हैं। यह बात शुरू होती है मतलब खास करके एरोबिक माइक्रोब्स के साथ फ्लेमिंग के साथ जब उसने यह बताया कि एक फंगस है जिससे बनाया हुआ जो पेनिसिलिन है वो किसी सोल्जर की जान बचा तो यहां से जब इसकी बात आती है कि जो पेनिसिलिन की खोज है वो 1928 में की इन्होंने लेकिन उसके महत्व को सही में पर्सव किया गया द्वितीय विश्व

49:24 युद्ध के समय 1940 के बाद चेन एंड फ्लोरे ने बताया कि भाई इसको बनाओ इसको आप बनाओगे तो आपके सोल्जर्स की जान बचेगी क्योंकि ये एंटीबायोटिक है इससे जो जख्म है उसमें बैक्टीरिया नहीं पनपेगा एंड सो ऑन सो फोर्थ राइट खैर तो आगे चलते हुए यही सब कुछ उदाहरण है क्योंकि हम लोग विज्ञान से जुड़े हुए हैं बहुत सारे लोग तो एक बड़ा रुडीमेंट्री सा यंत्र जो लुक बनाते हैं उससे बड़ी क्रांति होती है और एक छोटा सा ऑब्जरवेशन जो एडवर्ड जेनर का था कि सबको स्मॉल पॉक्स होता है लेकिन ऐसी मेड्स ऐसी

50:10 दूध धोने वाली लेडी उनको स्माल पॉक्स नहीं होता। अभी ये देखिए कितना रोचक ऑब्जरवेशन है वो कैसे उन्होंने किया हुआ है स्टिल वंडर कि भाई पूरे शहर में स्माल पॉक्स फैल रहा है लेकिन जो दूध डोने वाली औरतें जिनको मिल्क मेड्स कहती है उनको स्मॉल पॉक्स नहीं होता है तो उन्होंने उनसे बात की इसी से जुड़ा हुआ मैं इसको लिख देता हूं भूल जाऊंगा नहीं तो एक सिफालोस्पोरेन नाम की एंटीबायोटिक है उसको भी अधिक तो उन्होंने उनसे पूछ पूछताछ की भाई क्यों तुमको तुमको क्या हुआ था? तो उन्होंने बताया कि सर हमको पहले थोड़ा बहुत बुखार आया था लेकिन हमको चेचक नहीं हुआ।

50:57 तो उन्होंने देखा कि जो औरतें गायों के पास जाती है मतलब काउस के पास जाती है उनको काऊ पॉक्स हो चुका होता है। ठीक है? अब काऊ पॉक्स हो गया तो उसने अपने ही सजातीय या जान पहचान के जो दूसरा वायरस है स्मॉल पॉक्स वायरस को फिर से नहीं आने दिया जिसको कहते हैं सेकेंडरी इम्यून रिस्पस तो देयर फॉर वो लोग अनजाने में ही वैक्सनेट हुए ठीक है यहां से जो शब्द आया वैक्सीन तो वो वैक्सीन कहां से आया है? वे का मतलब

51:43 होता है कााऊ। वेका मीन्स का वहां से वो जो शब्द है वो प्रचलित हुआ और आज तक वो कायम है। जब कभी कोई इशू आता है तो उनको वो कहते हैं कि इसको वैक्सीनेट छोटे बच्चों को कराते हैं तमाम चीजों से। मेरी आवाज आप तक आ रही है? यस सर मैं सर आ रही है सरप टॉकिंग स्क्रीन सर आ रही है सर थैंक यू थैंक यू तो ये एक चित्र है जिसमें दिखाया जा रहा है कि जो एडवर्ड जेनर साहब थे तो इन्होंने क्या किया कि ये समझ के जो

52:28 चेचक के वो काऊ पॉक्स के पुस्त होते थे उसको दूसरे इसके उसमें रब करके इंजेक्ट कर गया तो वो भी उसको बुखार आया लेकिन फिर उसको स्माल पॉक्स तो ये काफी रोचक बातें हैं जो हमको इतिहास में देखने को मिलती है कि किस तरह से छोटे छोटे जो ऑब्जरवेशन है वो छोटे नहीं होते उनको कहा जाता है कि वो देर आर स्माल ऑब्जरवेशन बट साइंस यू नो हैस दिस की अगर आप किसी चीज को गंभीरता से समझते हैं उसके तहत जाते हैं तो हो सकता है उसका आने वाले समय में बड़ा प्रभाव हो। पाश्चर के बारे में मैं बात कर कर ही चुका हूं कि ये

53:15 सारा काम उन्होंने किया। राइट? ये वही बात है कि किस तरह से एक साधारण प्लास्ट की गर्दन को मोड़ के आप एक बड़ा कासेप्ट जो थ्योरी ऑफ बायोजेनेसिस है उसको आप डिस कर सकते हैं। ओके। अब एक चैलेंज यह हुआ कि भाई किसी रोग का कारक कौन है? तो इसको कैसे तय किया जाएगा? तो इन्होंने रॉबर्ट कोच ने कुछ सिद्धांत दिए। इसमें भी कुछ बातें बड़ी मजेदार है और यहां से यह तय हुआ कि यू हैव टू

54:01 आइसोलेट एनी माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स एस माइक्रो ऑर्गेनिज्म एस प्योर तब आप यह तय कर पाएंगे कि वही सूक्ष्म जीव उस रोग के लिए जिम्मेदार है। पहली बात। दूसरी बात कि उस उस रोगाणु के द्वारा दूसरे अगर हॉस्ट अवेलेबल है तो उसमें भी वही सारे सिम्टम आने चाहिए। तब हम मानेंगे कि ये साइकिल ये कंफर्म हो गया। तो जैसे कि ट्यूबरक्लोसिस का है या निमोनिया का है या कोई केस लें। तो पहले तो आप उस पेशेंट से आइसोलेट करें और फिर दोबारा एक सेकेंडरी हॉस्ट में उसको इनफेक्ट कराएं और यदि सेकेंडरी हॉस्ट में

54:48 वो सिम्टम आ गए और फिर आपने उसको आइसोलेट कर लिया वहां है तो जो रोगों का मामला है रोग और पर्यावरण और मनुष्य की जो हेल्थ है ये बड़ी गहरी जुड़ी हुई चीज है। जैसे कि जब कभी हम लोग एयर क्वालिटी की बात करते हैं तो आप सोच कर देखिए कि एक टॉकीज में जो कि बंद है वहां पर किस तरह का माइक्रोफ्लोरा या माइक्रो एरो फ्लोरा मौजूद होगा। खास करके जब वहां सैकड़ों लोग खास रहे हो, छींक रहे हो, बात कर रहे हो

55:37 और यदि वहां पर कोई इनफेक्टेड व्यक्ति है तो सर्दियां सर्दी तो ऐसे ही फैलती है जिसको हम सर्दी कहते हैं या फ्लू कहते हैं इनफ्लुएंजा कहते हैं। अक्सर तो आप देखेंगे कि स्कूल में जब बच्चे जाते हैं तो एक बच्चे को सर्दी होती है। सारे बच्चों को सर्दी हो जाती है। उसके कारण फिर घर में हो जाती है। बड़े भाई को माता पिता को हो जाती है। तो फिर लोग कहते हैं कि अभी वायरल फैला हुआ है। तो अगर वायरल फैला हुआ है तो पहली जिम्मेदारी किसकी होती है? जिसको हुआ है वो किसी से ना मिले और वही सब उसको जाके बताता है कि भाई मुझे वायरल हो गया है। तो दूसरे दिन जिससे मिलता है वो भी यही कहता

56:24 है कि भाई मुझे भी वायरल हो गया। तो ये जो इसका डायनामिक्स है बड़ा मजेदार है। ठीक है। अभी तक ये वायरल वायरल तो ठीक हो जाता है। लेकिन जब कोरोना था तो सब लोग दौड़ लगा देते थे। तब तो कहते थे कि भाई आपको हुआ है फोन पर बात करिए वीडियो कॉल कर लीजिए लेकिन मिलिए विलिए नहीं और तमाम मास्क और ये हाथ दोनों और सब चीजें आई और अब वो फिर विलीन भी हो गई तो गायब भी हो गई तो इस तरह तो खैर रोग की जो महत्व मतलब रोग को जो समझने की जो मूल है वो ये है कि रोगाणु कौन है और उस रोगाणु की पहचान द यू नो कन्फर्मेशन ऑफ़ अह द पैथोजन।

57:11 फॉर एग्जांपल अगेन आई विल गो बैक टू अ वेरी रेवेंट एक्स रिगार्डिंग दिस कोविड। सो एवरीबडी नोस दैट कोविड वास कॉज बाय अ वायरस व्हिच हैप्स टू बी अ वेरी कॉमन वायरस बट देन ओवर द टाइम देयर वर सम म्यूटेशन सम चेंजेस। सो इट बिकम लाइक यू नो एक्सेप्शनली बैड एंड जो मैंने शुरू में सुना था वो शब्द मुझे याद आया इट इनफेस्ट द लंग्स एंड कॉजेस ग्राउंड ग्लास ओपेसिटीज। ठीक है? तो जब शुरू में कोविड आया था तो उसकी पहचान होती थी कि एक्सरे करो और यदि फेफड़े में वो तो सब है ही कि इनको सर्दी

57:58 है बुखार है लेकिन अगर फेफड़े में बहुत ज्यादा मतलब घना एक निशान आता है जिसको हमने कहा ग्राउंड ग्लास ओपेसिटी मतलब उससे एक्सरे नहीं जा पा रही है ठीक से तो ये पता चलने के आसपास है कि उसको कोविड हो इसके बाद फिर ये हुआ कि भाई ये तो एक बड़ी सामान्य सी एक्सरे है। तो कुछ वो नहीं है। तो फिर पिक्चर में कौन आया? रियल टाइम पीसीआर। रियल टाइम पीसीआर क्या है? सब लोग ने उस समय इसका नाम सुना था कि रियल टाइम पीसीआर से जांच हो गई है और कोविड कंफर्म हो गया है। ज्यादा है, कम है। ऐसा।

58:44 सो रियल टाइम पीसीआर अगेन थैंक्स टू कैरी मिलिस हु इन्वेंटेड इन 1985 अब ये बड़ा इंटरेस्टिंग है कि कैसे कोई चीज बनती है और कैसे उसके बहुत सारे उपयोग अलग-अलग डायमेंशन में खोजे जाते हैं। मसलन की एक बड़ा इसका जो दैनिक जीवन से उदाहरण आता है वो ये है कि फोन का आविष्कार बात करने के लिए हुआ था। है ना? तो आज अगर जो जिन्होंने आविष्कार किया था मान लीजिए हम उनको फोन दिखाएं कि यह हमारा आईफोन है या यह हमारा ये है एंड्राइड फोन है तो वो कहेंगे ये तो आपने कमाल कर दिया है इसमें तो आप मतलब सब कुछ कर सकते हैं यू कैन ट्रांसफर मनी देयर इज नो नीड ऑफ़ यू नो बैंकर नाउ देयर इज नो नीड ऑफ़ डाकिया

59:32 नाउ देयर इवन यू नो यू कैन डू लाइक आई रिकॉर्ड सो मेनी सॉन्ग्स आल्सो सो द पॉइंट इज दैट कि एक इन्वेंशन जो है वो कई सारे उसके रिपरकशन होते हैं। कई सारे उसके डायमेंशंस खोल जाते हैं। कैरी मुस ने जब पीसीआर को इन्वेंट किया तो उसका एक ही काम था कि डीएनए का मल्टीप्लिकेशन इन विट्रो। हाउ वी कैन मल्टीप्लाई द डीएनए इन विट्रो। सो पॉसिबली आई डोंट नो वेदर ही कुड इमेजिन इन 2020 देयर विल बी अ रियल टाइम पीसीआर व्हिच विल बी यूज्ड फॉर द डायग्नोस्टिक पर्पस एंड पीपल एव्री कंट्री एव्री टाउन

1:00:19 इन द वर्ल्ड विल बी डायग्नोसिंग वेदर द पर्सन इज हैविंग कोविड ऑ नॉट एंड द फुल प्रूफ डायग्नोसिस ऑफ कोविड वाज़ रियल टाइम पीसीआर नॉट एक्स सो व्हाई आई एम टॉकिंग अबाउट रॉबर्ट कोच एंड आई गो अप टू यू नो रियल टाइम पीसीआर बिकॉज़ डायग्नोस्टिक्स इस अ वेरी बिग डील इवन टुडे अभी भी बहुत से लोगों को टीबी होता है उनकी पहचान नहीं हो पाती कि उनको टीबी है क्योंकि यही इनका स्वभाव है सूक्ष्म योग का कि वो छुपे हुए और उनको उनके लक्षणों को पहचानना ऐसा नहीं है एक एक जमाना था। लोग कहते थे कि नाड़ी देख के

1:01:06 वैद बता देते हैं इसको ये है वो है। पता नहीं अब तो मेरे ख्याल से गाड़ी देखने का काम खत्म है। ओके सो थैंक्स फॉर द इंटरेक्शन। सो आगे चलते हैं। ये जो है डायग्नोस्टिक्स आज के समय में एक बहुत बड़ी कहना चाहिए बहुत बड़ा आयाम है लाइफ साइंसेस का। इसमें हम नित नवीन जो है

1:01:52 इन्वेंशन कर रहे हैं और खोजे की जा रही है और तमाम जो बायोलॉजिकल मॉलिक्यूल्स उनका उपयोग करते हुए बहुत सारा हमारे दैनिक जीवन में आ चुका है। जैसे आज आज किसी को यदि ये कन्फर्म करना हो कि प्रेगनेंसी है कि नहीं तो वो ओवर द काउंटर एक वो खरीद सकता है। क्या कहते हैं उसको? कई उसके नाम है प्रगानस ये वो और वो एक इम्यूनोलॉजिकल डिटेक्शन है। तो उसमें उसमें बड़ा ले मैन के टर्म्स में समझाया जाता है कि यदि दो दो लाइन आ जाती है तो ये कंफर्म हो जाता है। इसी तरह से दूसरा एक दैनिक जीवन में बड़ा उपयोग है। जिसमें मैं अपने एंजाइम के लिए भी कहता

1:02:39 हूं। ग्लूकोस ऑक्सीडेज का उपयोग करते हुए क्या बनाया गया है? आपका ग्लूकोमीटर तो जिनके घर में भी डायबिटिक डायबिटीज के पेशेंट्स होते हैं वो ब्लड निकालते हैं एक कागज की पट्टी पर उसको लगाते हैं। उस पट्टी को फिर जो है उस मशीन में रखा जाता है और वो बताता है कि शुगर 80 है कि 120 है कि 240 है और वो ये तय करता है कि गुलाब जामुन खाया जाए कि ना खाया जाए। तो इस तरह से जो है जो डायग्नोस्टिक्स है वो पूरा बायोलॉजी के रिवॉल्व करता है और उसमें बहुत सारा एंजाइम का जैसे पीसीआर भी पूरी की पूरी तरह से एंजाइम पर आधारित है। एंजाइम का नाम है

1:03:26 टैक डीएनए पॉलीमरेज। जैसे कि ग्लूकोस का नापने का जो एंजाइम है जो इस्तेमाल किया जाता है उसका नाम है ग्लूकोस ऑक्सीज। खैर तो कोच की बात कहां से कहां पहुंची और ये है कि वी हैव बीन यूजिंग माइक्रोब्स सिंस टाइम मेमोरियल ये सब पुराने चित्र है जो कि बताते हैं कि लोग बाग मतलब शराब बनाने में या ब्रेड बनाने में इनका इस्तेमाल करते थे और उनको देख कर ही आप मान पाएंगे कि माइक्रोब्स एक्सिस्ट करते हैं जिसका कि काम लवक ने किया सो दिस इज अगेन सम मोर हिस्ट्री ऑफ यू नो माइक्रो माइक्रोस्कोप बल देयर आर सम वेरी

1:04:12 इंटरेस्टिंग कांसेप्ट्स एसोसिएटेड वि माइक्रोस्कोप एंड वन ऑफ़ देम मैग्नीिफिकेशन सब जानते हैं कि आवर्धन बड़ा करना लेकिन उससे भी इंपॉर्टेंट एक का्सप्ट है दैट इस कॉल्ड एज रेोल्यूशन रेोल्यूशन होता है कि किन्ही दो पास में रखे हुए पॉइंट्स को विभेदित करके अलग-अलग देख सकने की क्षमता राइट और माइक्रो माइक्रोस्कोप अच्छा तभी माना जाता है जब उसका रिजोल्विंग पावर बेहतर हो और वो बहुत पास में रखे हुए पॉइंट्स को विभेदित कर सके कि ये दो

1:04:58 अलग-अलग पॉइंट्स हैं। अब ये इसकी जो माइक्रोस्कोप की कहानी है। उसमें सबसे इंटरेस्टिंग है जो मैं समझता हूं कि कैसे लाइट माइक्रोस्कोप बदलते चले गए और एक पॉइंट पर आके फिर इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप का आविष्कार किया गया। तो एक जरा सा इसको मैं आपको आई वुड लाइक टू टेक यू थ्रू दिस कि एक सामान्य कंपाउंड माइक्रोस्कोप है। ये ब्राइट फील्ड माइक्रोस्कोप है जो कि सीधेसीधे मतलब माइक्रो ऑर्गेनिज्म को देख सकते हैं हम लोग। फिर यदि हम इसमें एक बीच में कुछ लगा दे जिसको हम ओपेक डिस्क कहते हैं। तो यही माइक्रोस्कोप

1:05:45 जो सूक्ष्म जीव है वो इसको इस तरह से दिखाएगा। तो यह जो डार्क फील्ड माइक्रोस्कोप है यह उसी तरह का सवाल सामने लाता है कि दिन में तारे क्यों नहीं दिखाई देते? तो कई कई बार हम लोग उसको जोकिंग के लिए बच्चों से पूछते थे कि दिन में तारे क्यों नहीं दिखाई देते? क्या वो कहीं चले जाते हैं? तो आंसर है कि नहीं वो कहीं जाते नहीं है लेकिन वो सूरज की रोशनी में उसके ग्लेयर में वििबल नहीं रह जाते। तो इसी कांसेप्ट को जबकि रात में वही दिखने लगते हैं जब सूरज की लाइट नहीं रहती है। तो बेहतर देखने के प्रयास में आप देखेंगे कि कई सारे माइक्रोस्कोप इन्वेंट किए गए। है सारे लाइट

1:06:31 तो ये फेस कंट्रास्ट है और फिर और भी बेहतर देख पाने के लिए और उसमें कई तकनीकों का भी इस्तेमाल किया गया है जैसे कि यदि हम उसको फ्लोरस करा सके यदि जो हमारा स्पेसमेन है वो यूवी लाइट डालने पर चमकने लगे फ्लोरसेंट अगर हो जाए तो हम कुछ विशेष चीजों को देख सकते हैं जैसे कि आप इसमें स्पिंडलपरेटस देख पा रहे हो खैर लास्ट लास्टली देयर वास व्हाट वी हैव टुडे नाउ व्हाट वी हैव टुडे इज इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप सो व्हाट ट्रांजेंड्स यू नो द लिमिटेशन ऑफ अलाइड माइक्रोस्कोप इज इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप यहां पर आप लाइट माइक्रोस्कोप की क्षमता है 2000 तक

1:07:18 का आवर्धन कर पाएगा 2000 गुना जबकि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप दो लाख गुना आवर्धन कर सकता है तो ऐसा क्या होता है कि ये ऐसा कर पाता है तो इसका जवाब है कि इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप लाइट माइक्रोस्कोप की लिमिटेशन है लाइट की वेवलेंथ। और जब हम इलेक्ट्रॉन बीम को इस्तेमाल करते हैं इन प्लेस ऑफ लाइट तो यह जो वेवलेंथ की लिमिटेशन है ये हम ट्रांसेंड कर पाते हैं। जिससे हम जीत पाते हैं और हम इस्तेमाल करते हैं इलेक्ट्रॉन बीम की जिसका की फाइव नैनो मीटर मतलब इसको सामान्य उसमें ये समझिए कि जितनी बारीक आपकी सुई होगी उतना

1:08:04 अच्छा आप सिल पाएंगे उतना कम मतलब उसमें डैमेज करते हुए कपड़े को आप सिल पाएंगे तो जितनी छोटी वेवलेंथ होगी उतना बेहतर आप देख पाएंगे है तो ये सारी बातें थी अभी अभी बज गए हैं 11:40 व्हेन डू वी हैव टू स्टॉप फॉर द फर्स्ट फर्स्ट वन आप कंटिन्यू रख ले चाहे सर कोई दिक्कत नहीं है नहीं मैं खुद भी थोड़ा सा ब्रेक चाहूंगा बीच में हां सर ठीक है सर ब्रेक जल्दी बड़ा इंटरेस्टिंग है सर बहुत इंटरेस्टिंग है हमारे लिए तो आई होप सो आई कैन ओनली होप एंड नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं सर इट्स इट्स

1:08:50 लाइक वेरी मच इनाइटफुल लाइक इंक्वायरी प्रमोटिंग द थिंग्स दैट्स व्हाट आई डू एक्चुअली मैं खुद भी अपने आप से पूछता हूं चीजें और वही मैं चाहता हूं कि हम लोग आपस में विमर्श करें आई कोट हियर सर फॉर रिचर्ड फमन दैट थिंग शुड बी एक्सप्लेन इन अ वेरी सिंपलर वे्स द मेन थिंग सर और उसका एक बहुत अच्छी याद दिलाई आपने मुझे आइंस्टीन कहते थे कि यदि आप कोई बात आसानी से समझा नहीं सकते हैं तो शायद वो आपको समझ में भी नहीं आएगी। [संगीत] ये मुझे नहीं पता कि हमारी कितनी लिमिटेशन है लेकिन कोशिश की जा सकती है। पर पर सर एक अलग पर्सेक्टिव से देखना इसीलिए

1:09:37 अलग-अलग ओपिनियन को सुनने में मदद मिलती है। हमारा देखने का नजरिया खुलता है सर। एक्सक्टली एक्सक्टली क्या है कि मैं अभी जो देख पा रहा हूं कि ह्यूमन रिसोर्स की जो सबसे इंपॉर्टेंट बात है जो मैं अभी तक समझ पाता हूं वो है हम लोगों की अपने आप में यूनिक होना हमारी आवाज हमारा विचार हमारा नजरिया है ना तो यदि एक विभाग में 10 टीचर है तो ये बिल्कुल जरूरी नहीं कि सब एक हो सब एक जैसे हो सबका सबका तरीका एक हो और सारे तरीके इक्वली्ट भी हो सकते मतलब उसमें कोई झगड़ा नहीं है कि इनका बेहतर ये जो बेहतरी की इशू है ना ये बड़ी गड़बड़ है

1:10:22 जिसको जिसको कहते हैं कि जैसे जब कभी आपसे कहे कि भाई गाना सुनाइए। बोले तो मैं तो बड़ा खराब गाता हूं। तो फिर ये हुआ कि भाई क्या जंगल में सिर्फ कोयल ही बोलेगी। मान लीजिए कि हम कोई दूसरे जानवर है तो क्या हम बोलेंगे नहीं हमारा भी अधिकार है हमारा भी तमाम आवाज है गला है भगवान ने दिया है तो जो यूनिकनेस है वो कहीं ना कहीं मेरिटोक्रेसी में या जो एक स्तर में खो जाती है वो हमारे मैं उसको बड़ा लेकिन हम आपको एक गाना सुनेंगे आखरी में नहीं तो गजेंद्र बोल रहा हूं गजेंद्र रामदेव नहीं मैं गा भी दूंगा वो बात नहीं है मैं अक्सर गाता ही रहता हूं मेरा बाजा भी बदल गया लेकिन मैं ये जो बात आपने कही बड़ी है

1:11:13 जो हमारे एजुकेशन सिस्टम में एक मतलब जो विमर्श का जो बात जैसे हम लोग कॉन्फ्रेंसेस में भी जाते हैं मैं अक्सर सोचता हूं कि मुझे वहां जाके क्या गेन हुआ तो अक्सर कम ही रहता है मतलब इजाफा जो है ज्ञान में उतना नहीं हो पाता है या ज्ञान में ना कहे तो थिंकिंग में या थॉट प्रोसेस में कोई बेहतरी हो तो फिर आदमी कहीं जाए। नहीं तो फिर यू ही आना जाना है तो फिर बात दूसरी है। खैर अभी मैं ये थोड़ा सा बता के रुकता हूं। फिर हम लोग यहां से फिर मे बी आफ्टर 10 मिनट्स विल कंटिन्यू। ओके। ओके सर। थैंक यू। सर। सो कंटिन्यूइंग विद दिस माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स अभी जो है काफी गंभीरता से लिए जा रहे हैं

1:11:59 और चाहे एग्रीकल्चर हो, चाहे हेल्थ हो, चाहे आपका एनर्जी हो राइट एनवायरमेंट हो दे आर प्लेइंग हज रोल्स जैसे कल ही मैं एनर्जी के तौर पर बता रहा था कि अपने स्टूडेंट से चर्चा कर रहा था कि एक टर्म होती है माइक्रोबली एनहांस ऑयल रिकवरी तो हम लोगों की इच्छा है कि जो पृथ्वी के अंदर पेट्रोल है उसका आखरी कण भी हमें मिल जाए ताकि हम उसको सस्ता कर सके। तो पहले तो वो खुद आता है प्रेशर। उसके बाद हम पानी से उसको पुश करते हैं। तीसरे स्टेप में हम और तरीके हैं जिसमें की एक माइक्रोब को नीचे भेजना भी है।

1:12:46 तो जो चट्टाने हैं उनकी दरारों में जो पेट्रोल बह जाता है या छुप जाता है उसको रोकने के लिए हम ऐसे माइक्रोब्स नीचे भेजते हैं जो कि बहुत सारा एक्स्ट्रा सेलुलर पॉलीक्राइड यानी कि ईपीएस बना। तो वो वहां जाके उनको बंद कर देंगे उन छिद्रों को तो जो पेट्रोल है उसका रास्ता फिर ऊपर की तरफ बेहतर हो जाएगा। तो ये सारी जो क्षमताएं हैं सुफियों की आज ये सब तो बहुत आपके जबलपुर में बड़ा सारा एग्रीकल्चर कॉलेज है। मुझे पता है अभी मैं आया भी था तो मेरी उनसे चर्चा हो रही थी साहू साहब से कि दे आर प्रोड्यूसिंग बायोफर्टिलाइज़र्स। तो बायोफर्टिलाइजर्स उसी तरह से है जैसे

1:13:34 हम लोग मल्टीविटामिन खाते हैं या इस तरह की दवाएं खाते हैं अपने आप को हेल्दी रखने के लिए तो आप पौधे को यदि बायोफर्टिलाइजर दे देंगे तो वो भी उसको उसकी जो आवश्यकता खास करके नाइट्रोजन की वो पूरी हो जाएगी तो अब हम चीजों को ऐसे कनेक्ट कर पा रहे हैं और बहुत सारा हमारी मेडिसिन में जैसे कि एक बड़ा कॉमन कॉमन एक्स है आज की डेट में कि जब कभी भी डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक देता है आज का नहीं अब तो पुराना हो गया तो साथ में कहता है कि ये डरोलक भी खाइए साथ में कहता है कि ये प्रोबायोटिक खाइए तो प्रोबायोटिक वही जीवाणु है कि जिनको आपने पहले एंटीबायोटिक से मार दिया तो आपका

1:14:19 डाइजेशन जो है डिस्टर्ब हो गया तो डॉक्टर आपको एक तरह से एक्सट्रेनियस उसकी सप्लाई प्रदान करता है कि भाई ये गोली आप खाइए उसमें स्पोर रहता है। वो स्पोर जब आप जब खाएंगे तो वो धीरेधीरे आपके सिस्टम को बैलेंस करने में मदद करता है। तो एक तो ये है कि हम उनकी क्षमताओं को अभी भी पहचानने की कोशिश कर काफी उपयोग कॉमन हो चुका है। कई बार हम उसको अनजाने में उपयोग कर लेते हैं। लेकिन वो उनका उपयोग है। दूसरी बात ये है कि ये जो है ना बड़े मतलब क्या कहना चाहिए? अ जिसको कहते हैं कि बराबरी में विश्वास रखते हैं। तो ये हर जगह है। चाहे कोई देश हो बर्फ हो, गरम हो,

1:15:07 रेगिस्तान हो। सो माइक्रो ऑर्गेनिज्म्स आर प्रेजेंट एंड इसी से संबंधित फिर इनकी एक एक और डायमेंशन खुलता है जिसको हम कहते हैं इनकी डायवर्सिटी कैसी है। तो मैं अभी यहां पे पांच मिनट के लिए रुकता हूं। देन आई थिंक 5 मिनट्स और 10 मिनट्स विल बी फाइन। एंड देन वी कैन स्टार्ट। ओके। सर 12 ओ क्लॉक ओके सर ओके सर ओके सर चलिए 12 बजे मिलते है 12 ओके सर थैंक यू तो मैं लॉग आउट नहीं करता हूं मैं इसको सिर्फ बंद कर देता हूं जी सर को

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