क्या आपके साथ भी ऐसा हो रहा है [Internet addiction: When life is only online]

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो इंटरनेट की लत के बारे में है, जो एक बढ़ती हुई समस्या है और लोगों के जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इजाबेले नाम की एक महिला की कहानी के माध्यम से, वीडियो बताता है कि कैसे इंटरनेट की लत रिश्तों को खत्म कर सकती है, काम और परिवार को प्रभावित कर सकती है, और अवसाद और चिंता जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है। वीडियो में डिजिटल एडिक्शन के तंत्र, इसके लक्षणों और उपचार के बारे में भी बताया गया है।

  • इंटरनेट की लत एक गंभीर समस्या है जो दुनिया भर में बढ़ रही है।
  • लत के लक्षणों में नियंत्रण खोना, अत्यधिक उपभोग, और नकारात्मक परिणामों के बावजूद खुद को रोकने में असमर्थता शामिल है।
  • डिजिटल एडिक्शन के कारण रिश्तों में समस्या, काम में परेशानी, और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • थेरेपी और रणनीतियों के माध्यम से इंटरनेट की लत से उबरना संभव है।

इजाबेले की कहानी: इंटरनेट की लत से मुक्ति

इजाबेले ने इंटरनेट की लत से छुटकारा पाकर खुशी और आत्मविश्वास वापस पा लिया है। कई सालों तक, उन्होंने अपना अधिकांश समय ऑनलाइन बिताया, जिससे उन्हें लत लग गई थी। वह खुद को ऑनलाइन जाने से रोकने का वादा करती थीं, लेकिन कभी भी ऐसा नहीं कर पाती थीं, जिसके कारण उन्हें नींद की कमी और थकान होती थी।

इंटरनेट की लत: एक बढ़ती हुई समस्या

हांस युर्गेन रुंफ, जो 12 सालों से डिजिटल एडिक्शन पर रिसर्च कर रहे हैं, बताते हैं कि इंटरनेट की लत एक बढ़ती हुई समस्या है जिसे कम करके आंका जा रहा है। लत गेमिंग, पोर्नोग्राफी, सोशल मीडिया, सट्टेबाजी, अत्यधिक खरीदारी या ज्यादा फिल्में देखने जैसी विभिन्न चीजों के लिए हो सकती है। नियंत्रण खोना लत का एक बड़ा संकेत है। थेरेपिस्ट क्लाउस वोल्फलिंग के अनुसार, इंटरनेट की लत एक गंभीर समस्या है जो पीड़ा और सामाजिक अलगाव को जन्म देती है, रिश्तों को खत्म कर सकती है और काम व परिवार को प्रभावित कर सकती है।

डिजिटल एडिक्शन के परिणाम और कारण

डिजिटल एडिक्शन के कारण कई बीमारियां हो सकती हैं, जिनमें अवसाद और चिंता शामिल हैं। बहुत से लोग यह नहीं समझ पाते कि वे अपने स्मार्टफोन पर कितने निर्भर हो चुके हैं। इजाबेले 15 सालों तक इस लत में फंसी रहीं, जहाँ वीडियो देखना, ब्राउजिंग और सोशल नेटवर्क उनकी समस्या बन गए थे। उन्हें लग रहा था कि वह अपनी जिंदगी नहीं जी रही हैं, बल्कि दूसरों की जिंदगी देख रही हैं। सोशल मीडिया या गेमिंग जैसी गतिविधियां स्क्रीन पर लौटने की वजह बनती हैं, क्योंकि दिमाग में डोपामिन के जरिए एक उम्मीद विकसित हो जाती है, जिससे अच्छा महसूस होता है।

इलाज और नियंत्रण की रणनीति

इजाबेले ने अपनी जिंदगी में बदलाव लाने का फैसला किया और क्रिश्टियाने विट की थेरेपी में इंटरनेट एडिक्शन के तंत्र को समझा। उन्होंने मिलकर एक ट्रैफिक लाइट जैसी रणनीति विकसित की, जिसमें लाल का मतलब रुकना (जैसे अकेले फिल्म देखना), पीला का मतलब सीमा के भीतर रहना (सोशल मीडिया और ब्राउजिंग के लिए), और हरा का मतलब अनुमति (ईमेल चेक करने या संगीत के लिए) था। आमतौर पर इलाज नौ महीने से एक साल तक चलता है।

नई जिंदगी की शुरुआत

इजाबेले ने अपनी ऑनलाइन आदतों को नियंत्रित करना सीख लिया है। अब वह कंप्यूटर के सामने अधूरा महसूस नहीं करतीं, बल्कि संपूर्ण महसूस करती हैं। उन्होंने फिर से घूमना शुरू कर दिया है और ऑनलाइन दुनिया में बहुत कम जाती हैं, क्योंकि वह असल दुनिया में रहना पसंद करती हैं।

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Transcript

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0:02 इजाबेले के लिए दुनिया में खुशी और भरोसा लौट आया है. इंटरनेट की लत का एक काला अध्याय उनकी जिंदगी से अब निकल गया है. कई सालों तक उनका लगभग सारा समय ऑनलाइन ही गुजरता था. मुझे लत थी. मै खुद से कहती रहती थीः मै ऑनलाइन जाना बंद कर दूंगी, या कल खत्म हो जाएगा. या फिर ठीक है, केवल 10 बजे रात तक. उसके बाद मै उसे बंद कर दूंगी और सोने जाऊंगी. यही योजना थी. लेकिन मैं कभी इसे पूरा नहीं कर सकी. उन दिनों में अकसर इजाबेले को रात को नींद नहीं आती थी और अगला दिन थकावट में गुजरता था. वह खुद से जल्दी सोने का वादा करती रहतीं लेकिन कभी सो नहीं पाती थीं.

0:50 लत में आमतौर पर यही होता है. हांस युर्गेन रुंफ 12 साल से डिजिटल एडिक्शन के बारे में रिसर्च कर रहे हैं. वो कहते है कि अब इंटरनेट की लत बढ़ गई है. हम समस्या को कम समझने की मुश्किल से जूझ रहे हैं, क्योंकि बहुत से लोगों को लगता है कि वे ऐसा कर लेंगे. हालांकि आबादी के एक बड़े हिस्से की समस्या गंभीर है और उन्हें सचमुच इसकी परेशानी झेलनी पड़ रही है. एडिक्शन अलग अलग चीजों के लिए हो सकता है, मसलन गेमिंग, पोर्नोग्राफी, सोशल मीडिया, और सट्टेबाजी. इतना ही नहीं अत्यधिक खरीदारी या ज्यादा फिल्में देखना भी. अंतहीन उपभोग, चाह कर भी खुद को नहीं रोक पाना. लत की एक बड़ी निशानी है नियंत्रण खोना.

1:35 कई दशकों तक मरीजों के साथ काम करने के बाद थेरेपिस्ट और रिसर्चर क्लाउस वोल्फलिंग ने लत के कई चेहरे देखे हैं. इनमें डिजिटल एडिक्शन भी शामिल है. इंटरनेट की लत निश्चित रूप से एक गंभीर समस्या है. यह तीव्र पीड़ा और बहुत ज्यादा सामाजिक अलगाव को जन्म देती है. इसके नतीजे गंभीर हो सकते हैं. यह रिश्तों को खत्म कर सकता है. काम, परिवार और दोस्त परेशान हो सकते हैं. नाकामियां हावी हो सकती हैं. डिजिटल एडिक्शन के शिकार लोग इसके बाद भी अकसर खुद को नहीं रोक पाते, नतीजे सामने देख कर भी. इसकी वजह से कई बीमारियां हो सकती है. मैं कहूंगा, एक बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जो दर्ज नहीं होते, क्योंकि बहुत से लोग यह समझ भी नहीं

2:25 पाते कि वे अपने स्मार्टफोन पर कितने निर्भर हो चुके हैं. इसकी वजह से अवसाद और चिंता की समस्याएं होती हैं. पिछले 10 सालों में इस तरह की घटनाएं दोगुनी हो चुकी हैं. इजाबेले के लिए भी यही सच था. 15 सालों तक वह लत में गहराई तक धंसती चली गईं. गेमिंग, सट्टेबाजी, पोर्नोग्राफी या खरीदारी उनकी समस्या नहीं थी. उनके लिए वीडियो देखना, ब्राउजिंग और सोशल नेटवर्क समस्या बने. मैं अपनी जिंदगी नहीं जी रही थी. मैं दूसरे लोगों की जिंदगी देख रही थी. मैं एकदम अलग हो गई थी, बस देखती रहती थी, मैदान में खुद कदम रखने की हिम्मत किए बगैर. मुझे यह नहीं समझ आ रहा था कि मैं अपने लिए कितनी मुश्किलें पैदा कर रही हूं.

3:11 अपने रवैये से खुद को नुकसान पहुंचा रही थी. सोशल मीडिया या गेमिंग जैसी गतिविधियां स्क्रीन पर हमारे लौटने की वजह बनती हैं, क्योंकि हमारे दिमाग में एक उम्मीद विकसित हो जाती है, जिसे न्यूरोट्रांसमीटर, डोपामिन के जरिए संकेत मिलते हैं. इसे एक रिवॉर्ड सिस्टम को भेजा जाता है. इसके बाद एक प्रवाह शुरू हो जाता है. इसमें दिमाग के भीतर अफीम या मॉर्फिन जैसे पदार्थ निकलते हैं, जो अच्छा महसूस कराते हैं. आखिरकार इजाबेले ने अनुभव किया कि उनकी जिंदगी में बदलाव बेहद जरूरी है. मैं किसी और के जरिए अब नियंत्रित नहीं होना चाहती थी. मै तय करना चाहती थी कि मेरी जिंदगी कैसी होगी, और उस पर अपना नियंत्रण चाहती थी. मैंने उन बेवकूफाना सीरीज और फिल्मों को यह तय करने से रोक दिया कि मुझे क्या करना है.

4:01 क्रिश्टियाने विट की थेरेपी में इजाबेले ने इंटरनेट एडिक्शन के तंत्र को समझना शुरू किया. साथ मिल कर उन्होंने एक ट्रैफिक लाइट जैसी रणनीति विकसित की. लाल का मतलब रुकना है जैसे कि अकेले फिल्म देखना. यह ठीक नहीं है. पीले का मतलब सीमा के भीतर रहना. यह सोशल मीडिया और ब्राउजिंग के लिए था. ईमेल चेक करने या संगीत के लिए हरा, जिसकी अनुमति थी. हमने कुछ मामलों में अच्छी सफलता देखी. आमतौर पर इलाज नौ महीने से एक साल तक चलता है. सुधार मुश्किल है, आज की दुनिया में रोजमर्रा की जिंदगी बगैर इंटरनेट के बिताना संभव नहीं है.

4:48 हालांकि इजाबेले ने अपनी ऑनलाइन आदतों को नियंत्रित करना सीख लिया. कंप्युटर के सामने, मैं खुद को हमेशा अधूरा महसूस करती थी. ऐसा लगता था कि कुछ कमी है. अब मैं संपूर्ण हूं. अब इजाबेले ने फिर से घूमना शुरू कर दिया है. वह ऑनलाइन दुनिया में अब बहुत कम ही जाती हैं. इसकी बजाय वह असल दुनिया में रहना पसंद करती हैं.

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