0:05 नमस्कार प्यारे साथियों को मैं गार्गी सारस्वती एक बार फिर से आप सभी का अभिनंदन करती हूं आपके अपने प्यारे परिवार टीचिंग एग्जाम टी डब्ल्यूए के प्लेटफार्म पर उम्मीद करती हूं आशा करती हूं आप सब लोग एकदम जानदार शानदार जिंदाबाद और जबरदस्त होंगे अच्छे तरीके से अपनी तैयारी कर रहे होंगे और सबसे बड़ी बात है कि आप यह निर्णय ले चुके होंगे कि जीएस वाले पोर्शन में आपको कौन से दो विषय लेने होंगे जिनकी आपको तैयारी तैयारी करनी है क्योंकि जीएस के जितने भी बच्चे होंगे उनको कोई दो सब्जेक्ट चुनने होंगे चार में से है ना तो जब उनको एसएसटी पोर्शन में कोई दो सब्जेक्ट चुनने हैं तो उनमें से आपके लिए कौन से दो सब्जेक्ट होंगे क्या उनमें से एक पिटी होगा या नहीं होगा इसका डिसीजन आप ले चुके होंगे तो चलिए बिना समय गवाए हुए आज की डेमो क्लास आपकी सेकंड डेमो क्लास
0:50 है अरस्तु अरस्तु की राज्य की अवधारणा को यहां आज हम समझेंगे बेहतरीन सा टॉपिक कल मैंने आपको कहानी बताई थी कि देखिए अरस्तु जो है एथेंस के अंदर ही है। तो सभी प्यारे बच्चे पहले तो जुड़ जाए स्वागत है। हां जी हां जी अंकिता जी विजय कुमार दिव्या पटेल तनीषा आंचल सभी का एंड सूर्याश तो एक हमने कल बात की थी कि अरस्तु जो है वो ये समझ लो जैसे आजकल का व्यक्ति है ना आप देख रहे हैं कि पूरे देश में शिक्षा से लेकर है ना एग्जामिनेशन सिस्टम तक को लेकर पूरे भारत के सभी टीचर्स रोज धरने पर बैठ रहे हैं रोज प्रदर्शन कर रहे हैं आप जानते हैं इस चीज को तो अरस्तु यही है अरस्तु की
1:36 आइडियोलॉजी यही है। अरस्तु कहता है कि पावर किसके हाथ में होनी चाहिए? जनता के हाथ में। तो आज वर्तमान में जैसे अभिनय सर हैं, नीतू मैम वगैरह हैं। ये लोग बिल्कुल ये कह रहे हैं ना कि नहीं यार पावर हमारे हाथ में होनी चाहिए। बिल्कुल बिल्कुल वही वाला मामला उन्होंने कर रखा है। हां बिल्कुल। तो अरस्तु जो है वो सिंपल सी बात करते हैं कि भैया जो भी कुछ है सीन वो यही सीन है कि भाई कुछ भी हो जाए। वो निर्णय लेने की क्षमता किसके हाथ में होनी चाहिए? जनता के हाथ में होनी चाहिए। उस निर्णय को एग्जीक्यूट करना किसी के किसी व्यक्ति के हाथ में होना चाहिए। वो कार्यकारी अधिकारियों के हाथ में होना चाहिए। प्लेटो क्यों नहीं पढ़ा आपने? क्योंकि देखिए अंतर है। प्लेटो को ले अगर प्लेटो को जो गुरु
2:23 हैं इसके अरस्तु के। तो प्लेटो है ये समझ लो वो लोग हम सब में से जो जब बीजेपी आई थी तो ये कहते थे कि बीजेपी बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया। क्योंकि प्लेटो ये कहता है आदर्श राजा वो कहता है पूरी व्यवस्था को पूरी तरीके से बदलो मत जनता इतनी समझदार नहीं है प्लेटो का कहना है जनता इतनी समझदार नहीं है कि तुम उसके हाथ में निर्णय की क्षमता दे दो तुम उसकी हाथ में निर्णय की क्षमता दे दो तो क्या करो प्लेटो कहता है आदर्श होना चाहिए राजा ऐसा हो फलाना हो ढिमकाना हो तो इसको पढ़ने से तुम अभी कोरिलेट नहीं कर पाते तो तुम किसके साथ चल रहे हो अरस्तु तो तुम वर्तमान के साथ चीजों को बहुत बढ़िया तरीके से क्या कर पा रहे हो कोरिलेट कर पा यहां जितने भी बच्चे हैं पहले तो उन्हें बता दूं कि आपके जो भी बैचेस हैं अगर आप उन्हें कल 3 अगस्त तक रात 12:00 बजे तक
3:10 अगर अपने आप को इन बैचेस में एनरोल करते हैं चाहे हिंदी वाला हो साथ में जीएस है ही उनके एसएसटी वाला हो बायोलॉजी वाला होम साइंस वाला हो है ना या जीएस का अलग से हो तो ये सभी पर एलटी20 कूपन कोड लगाने के बाद इनके प्राइसेस 20% फ्लैट ऑफ रहेंगी और ये टाइम टेबल है जिससे आप देख सकते हैं कि जिस भी आपके दोस्त आपके साथी किसी को भी अगर अह बैच में एनरोल करना है अपने आपको और वो डेमो देखना चाहते हैं तो वो देख सकते हैं। तो ये तो क्लास नहीं है। ज्योग्राफी सुबह 8:00 बजे उसका डेमो देख सकते हैं। बायोलॉजी का 11:00 बजे हिंदी का 1:00 बजे देख सकते हैं। पिटी का 3:00 बजे होता है। 3:00 बजे कुलदीप सर ने कराई है। हिस्ट्री 5:00 बजे होता है। फिर 6:00 बजे आज मेरा लास्ट डे है डेमो का। 6:00 बजे पिटी का डेमो रहा है आपका। कल और आज दोनों
3:57 दिन और दोनों टीचर्स का आपने डेमो देख लिया और 7:00 बजे होम साइंस की रेगुलर क्लासेस भी चलनी शुरू हो चुकी हैं। चलिए तो देखिए कल हम बात कर रहे थे किस पर? अरस्तु पर बात की थी। तो मैंने आपको बताया अरस्तु मकदिया का रहने वाला और मकदुनिया के अंदर स्टोरेज जगह है उसकी स्टेजीरा। स्टेजरा जगह है। वहां पे उसका जन्म होता है एक रॉयल डॉक्टर की फैमिली में। अब उसका बहुत मन है कि वो एथेंस में अपने गुरु प्लेटो के स्कूल स्कूल का नाम क्या है? प्लेटो के स्कूल का नाम है द एकेडमी कि प्लेटो के मरने के बाद मैं होनहार बच्चा हूं गुरुजी का तो ये स्कूल मेरे नाम होना चाहिए। लेकिन दिक्कत है। दिक्कत ये है कि प्लेटो का जो स्कूल है, है ना? वो केवल उसी व्यक्ति को उसमें
4:43 संचालन करने का मौका मिल सकता है कि भैया वो व्यक्ति जो कि वहां का एथेंस के अंदर जिसने जन्म लिया हो और ये तो मकदुनिया के स्टेजरा में पैदा हुआ है तो इसको मौका नहीं मिलता। इसका दिल टूटता है इस बात से कि यार मेरे पास योग्यता होते हुए भी जन्म के आधार पर जन्म स्थान के आधार पर मुझे इस चीज से रोक दिया गया। आज भी हम अपने अनुच्छेदों में पॉलिटिकल साइंस में पढ़ते हैं। है ना? पढ़ते हैं ना अनुच्छेद 16 कि भैया आपको जॉब के अंदर लोक नियोजन में अवसर की समानता मिलेगी। चाहे आप कहीं पर भी पैदा क्यों ना हुए हो। फिर उसके बाद अरस्तु दूसरी अपने गुस्से में एक नया स्कूल खोलता है लाइज जो वहां के एक लोकल मंदिर था उसके बेसिस पर था। अरस्तु जिसको
5:30 आप तुलनात्मक राजनीति का जनक मानते हो क्योंकि इन्होंने किताब लिखी द कॉन्स्टिट्यूशन कल वाला रिवाइज करा रही हूं जिसमें 158 कंट्रीज के कॉन्स्टिट्यूशन की तुलना की। अरस्तु जिन्हें आप बेसिकली राजनीति का राजनीतिक विज्ञान का क्या मानते हो? प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक मानते हो आप उन्हें। है ना? प्रथम राजनीतिक वैज्ञानिक। क्योंकि इन्होंने अपनी किताब द पॉलिटिक्स में पहली बार फिलॉसफी को यानी दर्शनशास्त्र को पॉलिटिक्स से बिल्कुल अलग कर दिया। इनकी एक किताब है पॉलिटिक्स। पॉलिटिक्स के ऊपर ही है। जिसमें ये कहते हैं कि भैया देखो निर्णय लेने की क्षमता और निर्णय लेने के सारे अधिकार किसके पास होने चाहिए? आम जनता के पास होने चाहिए। बहुत बढ़िया रिचा। बहुत बढ़िया। कि निर्णय लेने के सारे अधिकार होने चाहिए आम जनता
6:16 के पास। कैसे होने चाहिए भाई? आम जनता के पास। बिल्कुल ऐसे ही जैसे आज तमाम टीचर दिल्ली पहुंचे हुए हैं और लगातार इस बात पर डटे हुए हैं कि ये एजुकेशन पॉलिसीज जो अनपढ़ गवार मिनिस्टर्स बना देते हैं और जिस तरीके से आप लोग एग्जाम कंडक्ट करा रहे हो आप कह रहे हो देश ये हो जा रहा है वो हो जा रहा है आप हमसे पूछो एजुकेशन में हम क्या चाहते हैं एजुकेशन में हम क्या चाहते हैं तो बहुत साल पहले अरस्तु भी इसी बात को कह के गया कि निर्णय लेने का जो अधिकार होना चाहिए वो आम जनता के पास होना चाहिए और जो निर्णय ले लिया जाए तो चुने हुए लोगों का यानी ऑटोक्रेसी या एरिस्टोक्रेसी का एक ही काम है कि उनको एक ही कार्य करना है और वो कार्य क्या करना
7:02 है कि उनको एग्जीक्यूट करना है ये जो निर्णय लिए गए हैं। ठीक साहब। अब ये जो व्यक्ति है अरस्तु ये बहुत कमाल का व्यक्ति है। इसकी अपनी एक आईडियोलॉजी है। आइडियोलॉजी क्या है कि ये अपने गुरु से कई मामलों में अलग है। जैसे कल मैंने आपको लॉन्ग आंसर राइटिंग की एक प्रैक्टिस कराई थी और वहां मैंने आपको एक बहुत मजेदार बात कराई थी कि बेटा आप उसका आंसर लिख के प्रिपेयर कर लेना क्योंकि जब एप्लीकेशन पे क्लासेस शुरू होंगी तो आप मेरे को उसके आंसर्स राइटिंग भेजेंगे। तो यहां पर ये जो व्यक्ति है हमारा अरस्तु ये अपने गुरु जी से कई मामलों में डिफरेंट है। जैसे प्लेटो कहता है कि टोटली परिवर्तन करो। एक आदर्शवादी राजा हो और परिवार और संपत्ति इस पर टोटली राजा का कंट्रोल हो और जिसको
7:50 जितनी जरूरत हो उतना राजा डिवाइड कर दे। लेकिन अरस्तु कहता है ना जी ना ना यह गंदी बात है। अगर मैंने संपत्ति कमाई है तो उस संपत्ति पर मेरा हक है। मेरे परिवार के प्रति कार्य करने का मेरा हक है। साथ ही साथ मुझे ये भी है कि मैं समाज के लिए क्या रहूं? भागीदारी रहूं। तो अरस्तु ने राज्यों का वर्गीकरण जो किया है। अभी जिसे हम पढेंगे। अरस्तु ने छह तरीके की सरकार बताई है। छह तरीके के संविधान बताए हैं। तो अरस्तु ने जो राज्यों का यानी स्टेट्स का जो वर्गीकरण किया है वो अपने गुरुजी से ही कहीं से प्रभावित होकर किया है। मतलब उनके गुरुजी की प्लेटो की एक किताब थी स्टेट्समैन। उसी स्टेटमेंट से उसी स्टेटमेंट से ही कुछ चीजें लेकर अरस्तु ने
8:35 क्या करा? अरस्तु ने उस चीज को मतलब राज्यों को डिवाइड किया कि भैया राज्य एक ऐसा होना चाहिए जिसके अंदर लोकतंत्र हो। लोकतंत्र शब्द इस्तेमाल नहीं करता वस्तु यह कहता है जिसके अंदर पॉलिस के हाथ में पावर हो। पॉलिस यानी आम जनता के हाथ में पावर हो। विधि का शासन, विधि का शासन और मिश्रित संविधान यानी कि मिक्स्ड कॉन्स्टिट्यूशन ये प्लेटो की कृति द लॉज़ से क्लेरिटी रखते हैं। यानी कि एक तरीके से उससे साम्यता रखते हैं। तो याद रखना जो अरस्तु ने गुरुजी के स्टेटमेंट नाम की एक किताब है। उसी के बेसिस पर अरस्तु राज्यों का वर्गीकरण कर देता है। और अरस्तु को इस चीज़ के लिए जाना जाता है कि वह विधि के शासन की बात करता है कि यार कुछ भी हो
9:22 कानून का शासन होना चाहिए। किसका शासन होना चाहिए? कानून का शासन होना चाहिए। जैसे आज वर्तमान में कानून के शासन की धज्जियां उड़ी हुई है। तो अरस्तु क्या कहता है? अरस्तु की आत्मा मर जाती। बोले मैं इतने समय पहले लिख के गया लेकिन विश्व के आज भी इतने सारे देश कानून का शासन फॉलो नहीं कर पाए। तो अरस्तु जो विधि के शासन की बात करता है और कहता है कि संविधान मिक्स्ड होना चाहिए। मिक्स्ड संविधान कैसे? मिक्स्ड संविधान का मतलब वो ये कहता है कि एक तरफ तो लोकतंत्र हो कि सारे डिसीजन कौन ले? आम जनता ले। और दूसरी तरफ कुलीन तंत्र हो। ऑटोक्रेसी हो। दूसरी तरफ क्या हो? कुलीन तंत्र यानी ऑटोक्रेसी हो। दूसरी तरफ कुलीन तंत्र हो यानी
10:08 ऑटोक्रेसी हो कि उन निर्णयों का पालन कौन कराए? उन निर्णयों का पालन कौन कराए? इन निर्णयों का पालन ये ये कराए। कौन कराएं? ये जो हमारे चुने हुए लोग हैं या जो पावरफुल लोग हैं। ये जो दोनों बातें ये अरस्तु करते हैं। ये अपने गुरुजी की एक किताब है द लॉज़ उसके बेसिस पर बात करते हैं। ठीक साहब आ जाए। प्लेटो और अरस्तु दोनों का संबंध बिल्कुल वैसा ही है जैसे बेंथम और जेएस मिल का है। दोनों ने अपने गुरुओं के सिद्धांतों के एक बड़े भाग का खंडन कर नई नीव रखी है। तो प्लेटो और अरस्तु स्टूडेंट और गुरुजी हैं। इनका रिश्ता बिल्कुल वही वाला है जो जैसा बेंथम और जेएस मिल का कि इसने अपने गुरुजी की कुछ बातों का खंडन किया और कुछ बातों को
10:54 बहुत आगे लेकर चले। प्लेटो की तरह अरस्तु भी एरिस्टोक्रेसी को आदर्श मानता है। तो वो टोटली लोकतंत्र के पक्ष में नहीं है। वो क्या कहता है? प्लेटो तो कहता ही है कि आदर्श राजा होना चाहिए। प्लेटो क्या कहता है कि राजा अच्छा होना चाहिए। यानी प्लेटो ये मानते थे कि यार कुछ भी हो राजा की प्लेट में से उसका जो हैरार्की में उत्तराधिकार में जो चला आ रहा है पावर वो हटनी नहीं चाहिए। लेकिन यहां पर अरस्तु ने ये तो कहा कि यार लोकतंत्र भी होना चाहिए। लेकिन साथ ही साथ उसने भी ये कहा कि आम जनता ने जो निर्णय लिए हैं उन निर्णयों को एग्जीक्यूट करने के लिए क्रियान्वित करने के लिए कौन होना चाहिए? पुलिंग तंत्र। तो ये प्रश्न दिमाग
11:42 में रखिएगा। मैं अभी तीनों आपसे प्रश्न पूछूंगी। इनके बीच की समानता और इनके बीच की असमानता। और हम यहां पर लॉन्ग आंसर्स में इसको समझेंगे। फस्टर कहते हैं अरस्तु जो है पूरी तरीके से फिलॉसफर है। यानी अरस्तु क्या है? फिलॉसफी की सिद्धांतकार है। एक तरीके से एक तरीके से थ्योरिस्ट है। थ्योरी देता है अपनी बातों को क्या करने के लिए? जस्टिफाई करने के लिए। तो क्या कहते हैं कि भैया अरस्तु क्या है? एक तरीके से थ्योरिस्ट है। इसने कहा अगर सारे डिसीजन एररिस्टोक्रेसी ले कुलीन तंत्र ले यानी कि राजा रजवाड़े जमींदार जैसे पावरफुल लोग ले तो ऐसे में ऐसे में आम जनता अपने आप को बहुत नीचे पाएगी। तो ये
12:29 एक प्रॉपर थ्योरी देता है कि आप मिक्स्ड कॉन्स्टिट्यूशन लेकर चलिए। इसीलिए फस्टर इसको कहता है कि अरस्तु थ्योरिस्ट है। प्लेटो ऐसा नहीं है। क्यों? क्योंकि इसने एक प्रॉपर थ्योरी दी है। मिश्रित संविधान के संदर्भ में कहा। क्योंकि जब ये संविधान को कैसा लेकर आया कि मिक्स्ड संविधान होना चाहिए। तो मिश्रित संविधान के संदर्भ में जो इसकी थ्योरी है इसको देखते हुए क्या फस्टर कहता है कि अरस्तु तो भैया टोटल थ्योरिस्ट है प्रॉपर थ्योरी देता है। अरस्तु प्लेटो के दार्शनिक शासक के विचार को अस्वीकार करता है। प्लेटो जो ये कहता है कि आदर्श राजा होना चाहिए। दार्शनिक राजा होना चाहिए। अरस्तु इस बात को अस्वीकार करता है। तो पहले तो कुछ चीजें
13:14 आपको देखनी होंगी। वो चीजें क्या देखनी होंगी कि आप जैसे लॉन्ग आंसर्स में आपके लिए क्वेश्चन आ जाए आज का पहला क्वेश्चन अरस्तु और प्लेटों में समानता और असमानता अरस्तु व प्लेटों में क्या किसकी बात होगी? अरस्तु और प्लेटों में समानता की भी बात हो रही है। और साथ ही साथ किसकी बात हो रही है? अस समानता की भी बात हो रही है। तो अरस्तु और प्लेटों में क्या समानता है और क्या असमानता है इसकी बारे में बात होगी। तो देखिए सबसे पहले हम बात करेंगे किसकी? समानता की बात करेंगे। किसकी बात करेंगे बेटा? जी हम समानता की बात करेंगे। इक्वलिटी की बात करेंगे। दोनों के बीच में
13:59 कॉमन क्या है? बेसिकली समानता में आप बात करेंगे कॉमन। कॉमन क्या है दोनों के बीच में? ऊपर मच्छर होंगे। तो कॉमन क्या है? तो पॉइंट नंबर वन कि अरस्तु की जो बुक है आप लिख लीजिएगा अरस्तु की थ्योरी और वो कहीं ना कहीं प्लेटो से इंस्पायर है। तो अरस्तु की जो थ्योरी है किसको लेकर? तो उसकी जो राज्य की राज्यों का जो प्रकार है राज्यों के प्रकार है ना तो वो कहीं ना कहीं प्लेटो से क्या समानता है उसकी तो आप कहोगे प्लेटो की आपकी स्टेटम किताब से ली गई है
14:45 स्टेट्समैन है ना बुक से प्रभावित है बुक से प्रभावित है दूसरी अगर हम बात करें दूसरी अगर हम बात करें दूसरी क्या बात आती है बेटा जी कि अरस्तु की जो दूसरी वो बात करते हैं मिश्रित संविधान की तो अरस्तु का जो मिश्रित संविधान का कांसेप्ट है मिश्रित संविधान का जो अरस्तु साहब का कांसेप्ट है और साथ ही साथ विधि का शासन का जो कांसेप्ट है विधि का शासन का जो कांसेप्ट है ये कहां से आया है? तो आप कहोगे ये प्लेटो की जो दूसरी बुक है उससे इन्होंने लिया है। ठीक है? तीसरा पॉइंट आप लिखेंगे। बताएं मुझे दूसरी बुक का नाम क्या बताया था मैंने? तीसरा कांसेप्ट है कि दोनों ही एरिस्टोक्रेसी को सपोर्ट करते हैं। एरिस्टोक्रेसी को यानी दोनों ही यह
15:32 मानते हैं कि शासन में जमींदार राजा रजवाड़े पावरफुल लोग है ना इनकी आवश्यकता है शासन के संचालन में। दोनों ही इसको सपोर्ट करते हैं। तो बताएंगे मुझे फटाफट से। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। नहीं रिपब्लिक नहीं है। वो किताब रिपब्लिक नहीं है। स्टेटम से तो ये राज्यों का वर्गीकरण करता है। स्टेटम किताब से तो ये राज्यों का वर्गीकरण करता है। ठीक है ना? क्लियर हुआ? स्टेटमैन से तो ये राज्यों का वर्गीकरण करता है। नहीं बेटा रति सिंह ये क्लास आपकी बिल्कुल लाइव है। इसमें 1% भी रिकॉर्डेड कुछ भी नहीं है क्योंकि आपके डेमो है। तो आपका टॉपिक से संबंधित कोई भी डाउट होगा उसको बिल्कुल क्लियर किया जाएगा। बाकी आपके कॉम्बिनेशन बन रहा है
16:18 नहीं बन रहा मैं क्या क्या नहीं उसके लिए हेल्पलाइन नंबर है और हेल्पलाइन नंबर है 97 11144 9696 तो आप इस हेल्पलाइन नंबर पे कॉल करेंगे क्योंकि कल मैंने सभी महत्वपूर्ण चीजों को डिस्कशन कर लिया था कि जीएस वाले बच्चों को यानी एसएसटी वाले बच्चों को दो चीजें है ना दो चीजें दो चीजें उनको द कॉन्स्टिट्यूशन किताब तो बेटा खुद इसकी है अरस्तु की है मैं पूछ रही हूं प्लेटो की कौन सी किताब से या प्लेटो के किस आईडिया से ये सपोर्ट करता है। ठीक है ना? तो ये तो बाकी मैंने तुम्हें बता ही दिया था कि एसएसटी के कौन से बच्चे इस क्लास को लेंगे। तो ये तो बताने की अब जरूरत ही नहीं है। तो आप अगर ध्यान देते रहेंगे तो आपको कहीं कोई दिक्कत ही नहीं आएगी। द लॉ। किताब का नाम प्लेटो की किताब का नाम क्या
17:05 था? द लॉ। इसीलिए कह रही हूं पूरा फोकस यहां कीजिए। किस पे फोकस कीजिए? पूरा फोकस आपका यहां होना चाहिए। अगर आपका फोकस यहां से हटा, तो फिर गड़बड़ी है। तो प्लेटो की बुक क्या है? द लॉ। द लॉ बुक से प्रभावित है। तो ये तो इनके बीच की क्या हो गई? समानता। तो जब आप पढ़ेंगे तभी तो आप समानता निकाल पाएंगे। तभी तो आप असमानता निकाल पाएंगे। तो ये एक बहुत बड़ी जरूरत है कि आप क्लास में अपनी कंसंट्रेशन बना के रखें। क्योंकि आपको अगर ये वाली चीज लगती है कि आप बहुत आसानी से इस एग्जाम को क्रैक कर सकते हैं। बैच ले लिया और हो जाएगा। बाकी बैच में हम बातें करते रहेंगे तो भी चलता रहेगा। नहीं होगा कि थोड़े दिन 10 दिन तो हम जोश में पड़ेंगे। फिर हम अपने आप को पीछे कर लेंगे। नहीं होगा क्योंकि लगातार
17:51 आपको प्रश्न भी बनाने होंगे। लगातार आपको अपनी तैयारी भी करनी होगी। ठीक साहब क्लियर हुआ? अच्छा अब इन दोनों के बीच में अंतर क्या है? तो देखिए जब आप इन दोनों के बीच में अंतर की बात करते हो अंतर तो अंतर दोनों के बीच में पहला अंतर ये दिखता है कि अरस्तु जो है वो एक अपनी बात को जो कहता है वो एक प्रॉपर थ्योरी के साथ में कहता है तो अरस्तु को फस्टर कहता है कि अरस्तु सिद्धांतवादी है सिद्धांतकार है जिसने एक सिद्धांत बनाया कि नहीं साहब विधि का शासन होना चाहिए या मिश्रित संविधान होना चाहिए और उसके पीछे का लॉजिक भी दे रहा है लेकिन प्लेटो ऐसा ऐसा नहीं करता लेकिन प्लेटो ऐसा नहीं कर पाता। अरस्तु जो है वो प्लेटो के दार्शनिक शासक
18:37 के विचार को अस्वीकार करता है। दोनों कुलीन तंत्र को तो स्वीकार करते हैं लेकिन प्लेटो कहता है कि राजा आदर्शवादी हो। दार्शनिक शासन होना चाहिए। यानी राजा के अंदर कुछ दर्शन कुछ फिलॉसफी होनी चाहिए। दर्शन या फिलॉसफी यानी एक तरीके का आइडियोलॉजी कि राजा अगर यह मानता है कि नहीं मैं ईश्वर का ही प्रतिनिधि हूं तो राजा को यह मानने दिया जाए कि वो ईश्वर का प्रतिनिधि है और किसी की 1% उसके खिलाफ जाने की हिम्मत ना हो तो ना हो। तो प्लेटो ये मानता है कि भाई साराेंस किसका है? राजा का है। तो यह एक दार्शनिक जो है राजा को या शासक को बैठाने की बात
19:22 करता है। लेकिन अरस्तु कहता है गुरुजी आप गलत हो। जरूरी नहीं है कि जो राजा हो वो आदर्शवादी हो और लंबे समय तक वो आदर्शवादी रहे। नरेंद्र मोदी जैसा नाम का एक व्यक्ति पैदा होगा बहुत सालों बाद भारत में और वो पहली साल आएगा तो जनता को लगेगा बढ़िया काम कर रहा है और फिर धीरे-धीरे वह लगातार तीन टेन्योर तक 15 साल तक गद्दी पर बैठने के बाद तानाशाह हो जाएगा। तो गुरुजी प्लेटो गुरुजी आप जो दार्शनिक शासक की बात करते हो कि आपका जो शासक है आप कहते हो जो राजा है उसकी कोई अप्रोच होनी चाहिए। उसका कोई आइडियोलॉजी होनी चाहिए। उसकी कोई फिलॉसफी होनी चाहिए कि वो आदर्शवादी हो। तो गुरुजी ऐसा नहीं होगा। तो अरस्तु पहले
20:08 ही इस बात को भाप गया है कि गुरुजी आपका जो दार्शनिक राजा वाली बात है वो चलेगी नहीं। आप सिंपली बात करो कि कानून का शासन होगा तो राजा हो, आम प्रजा हो, कोई भी हो सब उस कानून के दायरे में आएंगे। यानी अरस्तु ने अपने समय से बहुत सालों पहले आज के वर्तमान समय से कई सालों पहले इस बात को कह दिया था कि संविधान होना जरूरी है। कानून का शासन यानी संविधान होना जरूरी है। तो वो सिंपली उन्होंने इस वाली बात को कह दिया था कि गुरुजी दार्शनिक शासक होगा। ये चलेगा नहीं। तो ये पहला दूसरा अंतर हो गया। पहला तो यही कि फस्टर कहते हैं कि अरस्तु सिद्धांतकारी अपनी बात को एकदम अप्लाई करके बोलता है और प्लेटो सिद्धांतकारी नहीं है। प्लेटो
20:54 दर्शनशास्त्री है। प्लेटो की पूरी आईडियोलॉजी में लगता है कि ऐसा होना चाहिए बढ़िया राज्य। वैसा होना चाहिए बढ़िया राज्य। लेकिन अरस्तु कहता है कि बढ़िया राज्य तब होगा जब ये वाला मामला बनेगा। प्लेटो राजनीतिक दर्शन की बात करता है। प्लेटो क्योंकि दर्शन की बात ज्यादा करता है ना। प्लेटो फिलॉसफी को जोड़ता है। फिलॉसफी क्या होती है? जैसे आप जीवन कैसे जीना चाहते हो? आपकी फिलॉसफी है। जैसे आप सपोज़ कीजिए यहां पर ये पूरा यहां से लेके यहां तक आप समझ रहे हैं पीछे मेरे पूरा आपका सेटअप है। और जस्ट मेरे सामने कैमरा है। सामने डिस्प्ले है। अब यहां पे सपोज़ कीजिए कि यहां से यहां के बीच में पूरी एक खाई हो। मैं ये नहीं कह रही कि थोड़ा बहुत
21:41 पानीानी हो। खाई हो। तो शायद मैं यूं रहती। है ना? अभी क्या है? हालांकि मैं घूमती फिर भी इतने ही एरिया में हूं। लेकिन अगर मुझे पता होता इस एरिया में खाई है कई फीट गहरी तो मैं अपने आप ही यूं रहती कि मेरे को जाना ही नहीं है उधर। है ना? बिल्कुल मेरी आईडियोलॉजी होती। हर एक व्यक्ति की अपने जीवन में बिल्कुल उसी तरह फिलॉसफी होती है। आपका अपना दृष्टिकोण होता है कि आप जैसे अगर मुझे पता पड़ जाए बहुत सारे लोगों को पता पड़ जाए कि यहां खाई है तो हम अभी भी घूमते इतने ही एरिया में है। लेकिन फिर हम चिमट के इतने ही रह जाएंगे। इतने ही में रह जाएंगे। तो हर व्यक्ति की अपनी क्या है? किसी भी चीज को लेकर किस चीज को कैसे करना है? उसकी अपनी फिलॉसफी है कि उसको सिमट के रहना है। उसको फलांग मारनी है। उसको छलांग मारनी है। उसको क्या करना है?
22:28 तो प्लेटो जो है वो राजनीति में फिलॉसफी को घुसेड़ते हैं। तो वो राजनीतिक फिलॉसफी की बात करते हैं। लेकिन अरस्तु कहते हैं कि नहीं साहब आप सिद्धांतों के बेसिस पर बात कीजिए। आप लॉजिक के बेसिस पर बात कीजिए। फिलॉसफी को दर्शन को अलग रखिए और पॉलिटिक्स जिससे माध्यम से पूरे देश का भला होना है उसको बिल्कुल अलग रखिए। तो अरस्तु सिंपली बहुत सिंपल सरल शब्दों में क्या है? राजनीतिक वैज्ञानिक। पहले राजनीतिक वैज्ञानिक इसीलिए कहे जाते हैं और जो प्लेटो हैं वो राजनीति को दर्शन से जोड़ते हैं। ये तीसरा अंतर है। चौथा अंतर है प्लेटो जो है वो राजनीतिक आदर्शवादी हैं। कहते हैं राजा आदर्शवादी होना चाहिए। ऐसा होना चाहिए फलाना होना चाहिए ढिकाना होना चाहिए। अरस्तु कहते हैं भैया यथार्थवादी रियलिस्टिक बात करूं। क्या राजा ऐसा हो सकता है? अगर ऐसा हुआ कि राजा
23:15 नरेंद्र मोदी जैसा हो गया, तानाशाह हो गया। वर्तमान में इस पूरे देश को चार गुजराती चला रहे हैं। एक नरेंद्र मोदी, दूसरा अमित शाह, तीसरा अंबानी और चौथा अडानी यही खानदान चला रहे हैं। आप और हम सब कुछ है ही नहीं। नेता लोग बाकी भी कुछ नहीं है। सारे के सारे इन्हीं चारों गुजरातियों के अंडर चल रहे हैं। तो पूरा देश जो है इन्हीं के माध्यम से तो अरस्तु यही कहता है कि अगर जैसे भारत का एग्जांपल ले लो कि अगर ऐसे ही चार गुजराती आके पूरा देश चलाने लगे जो देश का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। तो गुरु जी आपके आदर्शवाद का तो बाबा जी का ठुल्लू हो जाएगा। तो प्लेटो जो कि राजनीतिक आदर्शवाद की बात करता है। प्लेटो जो राजनीतिक आदर्शवाद की बात करता है। उसकी धज्जियां उड़ा देता है अरस्तु और वो कहता है कि नहीं राजनीतिक यथार्थवाद की
24:02 बात करो। गुरुजी रियलिटी की बात करो कि कानून का शासन होगा तभी मामला बनेगा। ठीक साहब। तो अब आप मुझे अंतर बताएंगे। अब आपका आंसर में आंसर राइटिंग में अब आप अंतर बताएंगे। कितने कैसे लिखोगे आप अंतर? इसको मुझे बताइए। तो आप दोनों का अंतर लिखने के लिए सिंपल सरल शब्दों में लिखोगे कि भैया किस तरीके से तो एक तरफ आप लिखेंगे प्लेटो एक तरफ आप लिखेंगे अरस्तु है ना और फिर लिखेंगे भैया अरस्तु जो है वो यथार्थवादी है ना यथार्थवादी है प्लेटो क्या है आदर्शवादी है आदर्शवादी है प्लेटो आदर्शवादी है ठीक है ना प्लेटो राजनीतिक दर्शन की बात करता है राजनीतिक दर्शन की बात करता है और अरस्तु किसकी बात करता है अरस्तु बात करता है सिंपल सरल शब्दों में कि गुरुजी राजनीतिक दर्शन-वर्शन कुछ नहीं
24:49 होता। राजनीतिक विज्ञान की बात करो आप कि आप किस तरीके से सिद्धांतों के तौर पर राजनीति को आगे बढ़ा सकते हो। है ना? तो सिंपल सरल शब्दों में ये एक अंतर है। ठीक है ना? तो इस तरीके से बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। इस तरीके से हां इस तरीके से आप तीन से चार अंतर निकालेंगे। इस तरीके से आप तीन से चार समानताएं निकालेंगे। और ये आपका राइट आंसर लॉन्ग आंसर हो गया। क्लियर? अब देखो एक प्रश्न है प्रिंसेस नायक का कि मैम अगर आप पीपीटी से पढ़ाएंगे तो हम नोट्स कैसे बनाएंगे? आप नोट्स ऐसे ही बनाएंगे जैसे मैंने आपको यहां पर दे रखे हैं। बिल्कुल इसी तरीके से आप नोट्स बनाएंगे और फिर आपको क्वेश्चन मिलेगा तो आप क्वेश्चन लिखकर तैयारी करेंगे। बिल्कुल ऐसे ही। ठीक है ना? हां। ठीक है ना?
25:36 हां। प्लेटो यही कहता है। प्लेटो। प्लेटो कहता है कि नहीं साहब राजनीति क्या है? दार्शनिक राजा क्या है? दार्शनिक। और अरस्तु कहता है ना गुरुजी आदर्श और दर्शन इनको साइड में करो। प्रैक्टिकल बातें करो गुरु जी। प्रैक्टिकल बात। ठीक साहब आगे बढ़ते हैं। तो क्लियर हुआ? आ जाते हैं। प्लेटो जो है प्लेटो एक और अंतर है। प्लेटो जो है वो डिडक्टिव मेथड से जुड़ा है। निगमनात्मक विधि से और अरस्तु आगमनात्मक विधि से जुड़े हैं। अब इसका मतलब क्या है? अरस्तु कहता है कि गुरुजी सिंपल सी बात है कि आप जिस भी मुद्दे को अगर किसी बच्चे को समझा रहे हो तो गुरुजी अगर आप आगमन विधि का प्रयोग करोगे तो बच्चा ज्यादा समझ पाएगा। लेकिन प्लेटो कहता है कि नहीं साहब अगर आप डिडक्टिव
26:24 मेथड निगमन विधि का प्रयोग करोगे तो बच्चा ज्यादा समझ पाएगा। अब दोनों विधियां क्या होती है? आगमन विधि कहती है कि जैसे सपोज़ करो आपको बच्चों को टॉपिक पढ़ाना है संज्ञा। तो अरस्तु कहता है कि पहले आप संज्ञा के उदाहरण दो और फिर स्वयं से बच्चे को नियम पर पहुंचने दो कि वो खुद से नियम बनाए कि पहले आप किसी भी चीज के स्पेशल विशेष उदाहरण दो ताकि फिर बाद में बच्चा क्या कर सके सामान्य नियम बना सके कि इस पूरे मुद्दे पे ये बात है। तो अरस्तु यह कहते हैं अगर किसी को संज्ञा पढ़ानी है तो वह यह ना कहे कि संज्ञा इज द या नाउन इज द नेम ऑफ अ पर्सन प्लेस और अ थिंग या संज्ञा किसी व्यक्ति वस्तु या स्थान के नाम को कहा जाता है। अरस्पू कहते
27:09 हैं कि गुरुजी उदाहरण देने चाहिए टीचर को बच्चे को कई सारे उदाहरण देने चाहिए बच्चे को कई सारे हां बिल्कुल सही बात है प्रस नायक कि हम जनरली आगमन और निगमन दोनों अरस्तु से ही रिलेट करते हुए मानते हैं और हर किताब में सीडीपीके में आप इसको देखेंगे लेकिन आपको बता दूं कि इसको एक्चुअली लाने वाले प्लेटो थे निगमन विधि को बाद में इसे अरस्तु ने अपने तरीके से डिफाइन किया है और यह कहा है कि जब भी एजुकेशन दी जाती है क्योंकि प्लेटो और अरस्तु दोनों एजुकेशन के बारे में भी बात करते हैं तो आगमन और निगमन दोनों का कॉम्बिनेशन होना चाहिए। तो ये वाली बात है। तो प्लेटो जो है वो ये कहते हैं कि नहीं नहीं आप सीधे बच्चे को बताओ कि बेटा
27:54 संज्ञा किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम को कहते हैं। आप सीधे उसको नियम बता दो और फिर बच्चे से पूछो। तो बेटा अब तुम बताओ कि अगर किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान के नाम को संज्ञा कहते हैं तो अब तुम इस कमरे में से संज्ञा ढूंढ के बता दो। और फिर बच्चा क्या करेगा? डिडक्टिव मेथड का प्रयोग करके खुद से उदाहरण दे देगा। लेकिन अरस्तु कहते हैं कि नहीं गुरुजी आपको बच्चे को ज्यादा से ज्यादा क्या करना है? उसके दिमाग को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना है। उसको इंटेलिजेंट बनाना है। तो आप पहले क्या कीजिए? उदाहरण दीजिए कि राम। ठीक है? गार्गी। फिर नाम दीजिए सोनू गौतम, फिर नाम दीजिए डिजिटल बोर्ड। और फिर बच्चे से पूछे सामान्यकरण करके कि ये सब क्या है? अगर इनको एक नाम दिया जाए तो क्या है? तो फिर
28:39 बच्चा दिमाग लगाएगा, खोजेगा, कोशिश करेगा और फिर बताएगा कि भैया क्या है? ये सब क्या है? ये सब संज्ञा है। ठीक है ना? क्लियर हुआ? क्लियर होगा? तो सिंपली अरस्तु और प्लेटो दोनों ने क्योंकि शिक्षा के बारे में बात की है तो शिक्षा से संबंधित कौन सी विधियां दी? प्लेटो ने दी निगमनात्मक और अरस्तु ने दी आगमनात्मक। ठीक है साहब? क्लियर हुआ? चलिए यहां तक आपको एक अंतर और ये समझ में आया? यह बहुत बड़ा प्रश्न है और एक बहुत आपके प्रतिष्ठित एग्जाम में पूछा भी हुआ है। आप उठा के प्रीवियस ईयर के अगर उठा के देखते हो कभी तो आप उठा के देखिएगा कि अरस्तु और प्लेटो के ये क्योंकि दोनों ही शिष्य और गुरु की बात है ना तो आप वहां एक कोट करना भी बहुत
29:27 अच्छा लगेगा आपको कि फॉस्टर क्या कहते हैं और ये तो उससे आपके नंबर बहुत बेहतर बनते हैं। ये बहुत क्लियर हो जाना चाहिए। तो ये आंसर राइटिंग है। अब सबसे बड़ी बात कि आप पीडीएफ से पढ़ाओगे हम नोट्स कैसे बनाएंगे। आप मेरे साथ के साथ पॉइंट्स उतारेंगे। आप मेरे साथ के साथ समझ के अपनी तरीके से जो भी आपको शॉर्ट लिखना है या जैसे भी लिखना है आप उसको लिखेंगे। शॉर्ट में ही लिखेंगे। ठीक है? अच्छा। दूसरा। दूसरी सबसे बड़ी बात क्या करेंगे आप कि जो भी मैं आपको आंसर राइटिंग के लिए दूंगी उसकी आप रेगुलर प्रैक्टिस करेंगे। ठीक साहब। अब बात आती है कि एसएसटी के चार सब्जेक्ट्स होते हैं। चार उसमें से आपको कोई से भी दो लेने हैं। कोई से भी कोई से भी दो आप ले सकते हो। कोई से भी दो आप ले सकते हो। कोई से भी दो आप ले सकते हो। तो जब आप कोई से
30:12 भी दो ले सकते हो तो जिसको पिटी में इंटरेस्ट होगा या जिसको लगता होगा कि मेरे को पिटी भी लेना है वो पिटी लेगा। अब रिचा कह रही है मैम पिटी में इसको कैसे जोड़ेंगे? मैंने अभी वापस कहा कि शिक्षा किसी भी देश के लिए जरूरी है। अरस्तु और प्लेटो दोनों शिक्षा के बारे में बात करते हैं। जैसे इस समय वर्तमान में सारे टीचर इस बात पे बात कर रहे हैं कि केवल ये कह देने से कि जीडीपी बढ़ रही है, जीडीपी बढ़ रही है काम नहीं चलेगा। शिक्षा हर देश के लिए जरूरी है। तो ऐसे ही अरस्तु और प्लेटो भी शिक्षा कोेंस देते हैं। और क्योंकि ये राजनीतिक विचारक हैं कि देश कैसा होना चाहिए उसके ऊपर बात करते हैं। तो देश कैसा होना चाहिए? उसमें अनपढ़ लोग हो इसकी बात तो नहीं करते। तो यही इस बारे में भी बात करते हैं कि शिक्षा कैसे होनी चाहिए और उसमें अरस्तु कहते हैं आगमन विधि और प्लेटो कहते हैं निगमन विधि से। क्लियर
30:59 हुआ? आगे आ जाओ। अरस्तु की क्या तरीका है पढ़ने का? तो आप अगर अरस्तु ने जो जो अध्ययन विधियां निकाली उनके बारे में हम बात करें क्योंकि अरस्तु और प्लेटो दोनों एजुकेशन के बारे में भी बात करते हैं। ठीक है ना? तो अरस्तु की जो अध्ययन पद्धतियां हैं उसमें एक पद्धति क्या है? आगमनात्मक। आगमनात्मक क्या है? कि पहले आपने विशेष उदाहरण दिए। फिर बच्चा उससे किस पे चला? सामान्य पे चला। कि आपने तमाम एग्जांपल दिए और बच्चे से कहा इन सबके बीच में कॉमन क्या है? तो वो समझ पाया। तुलनात्मक राजनीति की बात करते हैं। तुलनात्मक राजनीति की बात करते हैं। है ना? तो आपने देखा कि इन्होंने 158 देशों के कॉन्स्टिट्यूशन के बीच में तुलना की। तो अरस्तु की कौन सी विधि और है? तुलनात्मक कि कभी भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचो तो
31:45 तुलना करके पहुंचो। तो एजुकेशन में शिक्षा के क्षेत्र में अरस्तु का क्या रोल है? शिक्षा के क्षेत्र में अरस्तु का क्या रोल है? बेटा मैं घर से क्लास लेती हूं। मेरा या तो ऑफिस जाना होगा या अंकित का या रोहित भैया का किसी का भी यहां आना होगा। तभी टीशर्ट मेरे पास आएगी। ये सिंपल सी बात है। ठीक है ना? क्लियर हुआ? कोई दिक्कत? कोई परेशानी इस बात को समझने में? दो सब्जेक्ट के दो-दो क्लास चल रहे हैं। वो भी इतना लंबा लंबा टाइम नहीं मिल रहा प्रैक्टिस का। ऐसे चलता रहा तो प्रैक्टिस कैसे होगा? सूर्यांश जैसे मैं आपको बताऊं ये आपकी पिटी का टाइम क्या दिख रहा है टाइम टेबल में? 3:00 बजे। तो इसका मतलब डेमो में अभी आपको दिखाने के लिए कि आप
32:34 टीचर से सेटिस्फाई है या नहीं। बाद में बच्चा कह दे। है ना? बाद में बच्चा ये कह दे कि नहीं साहब मैं तो नहीं समझ पाऊंगा। मेरे को इनका समझ में आया, इनका नहीं समझ में आया। मैं तो बुरा फंस गया। तो जो भी दो टीचर पढ़ा रहे हैं, दोनों को देख लो आप। ठीक है ना? इसीलिए तो आपको क्या लगता है आज के बाद मेरी क्लास चलेगी? नहीं। एप्लीकेशन पर पहले सर की क्लास कंप्लीट होगी। पहले सर की क्लास कंप्लीट होगी। और जब सर आपको तकरीबन तकरीबन एक महीने तक आपका आधे से ज्यादा सिलेबस कंप्लीट करा चुके होंगे तब फिर मैं एंट्री करूंगी। तब मैं अपने हिस्से की एंट्री करूंगी। कोई भी बच्चा हो उसके लिए अपने विषय की सब्जेक्ट की क्लासेस सबसे इंपॉर्टेंट है। उसको सारी क्लासेस तो लेनी नहीं है। उसने अपना सिलेबस देखा होगा। ऐसा मैं मान के चलती
33:20 हूं। तो उसको पता होगा कि मेंस में मेरे खुद के मेन सब्जेक्ट के 200 नंबर हैं और प्री में भी प्री में भी जीएस तो मात्र 30 नंबर की आनी है। 120 नंबर मेरे अपने सब्जेक्ट के हैं। तो अगर उसके अपने सब्जेक्ट में उसने जैसे कोई बायोलॉजी वाला है तो उसने बायोलॉजी ले रखा है। बॉटनी बॉटनी जो भी है तो अगर उसको पूरे दिन भर में चार क्लास भी लगानी पड़ गई तो सिलेबस तो उसी का समय से पूरा हो रहा है ना। ये दुनिया का कौन सा लॉजिक लग सकता है कि सिलेबस भी समय पर पूरा हो जाए। पढ़ाने के लिए कम क्लासेस लेनी पड़े कि चार भी ना हो। हम तो दो ही क्लास लेंगे। जिसमें कि एग्जाम एक हायर लेवल का एग्जाम है जिसके
34:08 अंदर एग्जाम का नेचर ऐसा है कि भैया मेंस में आपका खुद का मुख्य सब्जेक्ट 200 नंबर का होगा तो ये कैसे संभव हो सकता है ये आप मुझे बताइए। अगर आपको लगता हो आपके पास कोई बेहतर विचार हो तो आप मुझे बताइए कि कम समय हो और पीडीएफ भी टाइप ना हो टीचर लिखाने पर ज्यादा ध्यान लगाए समझाने से ज्यादा और उसके बाद उसके बाद वो आपका सिलेबस भी कंप्लीट करा दे जिसमें कि सिलेबस बहुत डेप्थ में है। अब बताएं बताएं मुझे बताएं बताएं आपके पास कोई है तरीका नहीं है ना
34:56 तो इसको एकदम शांति से इन क्लासेस को देखते हुए और इनको समझते हुए चलें क्योंकि आप शायद डेप्थ नहीं समझ पा रहे इस एग्जाम की अगर आप आज सीरियस नहीं हुए तो आपके लिए दिक्कत हो जाएगी क्योंकि बहुत रैंडम आता है इस तरीके के एग्जाम आपका सबसे पहली प्रायोरिटी होनी चाहिए कि आप चीजों को समझते हुए आंसर राइट राइटिंग की प्रैक्टिस करते हुए बेहतर तरीके से करें और जब आप है ना जब आप इस बात को समझ पाएंगे तो बेहतर हो पाएगा। जीएस देखो जिसके पास एसएसटी है वो कितनी बचकानी बात कर रहा है कि वो जीएस की क्लास पे ध्यान दे रहा है। तुम्हारा हिस्ट्री आ गया। तुम्हारा पॉलिटी आ गया। तुम जीएस की क्लासेस बाद में भी देख लोगे तो कोई दिक्कत नहीं है। तुम जीएस की क्लासेस बाद में देख लेना। 30 नंबर है
35:41 जीएस। कितने नंबर है? केवल 30 नंबर का है जीएस तुम्हारा मेन सब्जेक्ट इंपॉर्टेंट है जो तुम चुन रहे हो उसको छोड़ के तुम अकड़म बकड़म फड़ाना ढिकाना सब पे ध्यान देना चाहते हो तुम अगर एसएसटी के स्टूडेंट हो तो कोई से दो सब्जेक्ट तो तुम वैसे ही पढ़ रहे हो ना तो जीएस में वो दो सब्जेक्ट तो तुम्हारे वैसे ही कम हो गए मैथ्स क्या आएगा एक आधा क्वेश्चन आएगा एक आधा क्वेश्चन के लिए क्या पूरी क्लास लोगे मैथ्स की जीएस की स्मार्ट वर्क करा करो ना स्मार्ट वर्क से सिलेक्शन छोटा स्मार्ट वर्क आपका अपने मेन सब्जेक्ट पर फोकस पहले दिन से होना चाहिए। 120 नंबर 200 नंबर इस पर फोकस होना चाहिए। ठीक है ना?
36:29 टाइम भी मैनेज हो जाएगा। सूर्यांश कल मेरी क्लास नहीं है। आगे मेरी क्लास नहीं होगी। पिटी में अभी पहले सर चलाएंगे कम से कम एक डेढ़ महीना। फिर उसके बाद जब सर एक निश्चित लिमिट तक पहुंच चुके होंगे कि मैम मैंने इतना करा दिया। सर आपने राइटिंग प्रैक्टिस करा दी। हां मैम मैंने प्री की भी और मेंस की भी दोनों के हिसाब से बच्चों को प्रैक्टिस पेपर भी दे रहा हूं। क्वेश्चन पेपर भी दे रहा हूं। शीट भी दे रहा हूं। उनके आंसर्स भी आते हैं। उनको चेक भी कर रहा हूं। ठीक है ना? उन पे रिमार्क भी कर रहा हूं कि क्या बेहतर हो सकता है, क्या नहीं हो सकता। ठीक है सर। अब है ना थोड़े दिन के लिए मैं चला लेती हूं। तो दो अलग-अलग बना लो। है ना? क्योंकि ये मेरा वाला जो पूरा पोर्शन है वो इंडियन फिलॉसफर वो आपका वेस्टर्न फिलॉसफर है ना सिद्धांत क्या है क्या वाद
37:15 है उनसे रिलेटेड है ना तो ये बिल्कुल अलग मैं जैसे देना चाहूंगी मैं दे दूंगी आप क्यों इतनी बुद्धि लगा रहे हो अभी से आपकी बुद्धि कहां लगनी चाहिए आपकी बुद्धि लगनी चाहिए यहां इसको छोड़कर दुनिया भर की बातों पर क्यों दिमाग लगा रहे हो आपका ध्यान किस चीज पर होना चाहिए इस पे होना चाहिए लेकिन आपका आपका ध्यान इतने तमाम उन चीजों पर है कि भाई एकदम ही दिमाग आपका मतलब फिर पढ़ने पे कैसे लग पाएगा आप मुझे बताओ अगर आपका ध्यान ही नहीं रह पाएगा आपके दिमाग में तमाम कंफ्यूजन रहेंगे इसीलिए मैंने कल भी आपके डाउट क्लियर किए थे भाई बच्चे का डाउट नहीं रहना चाहिए अब लेकिन क्या है अभी फिर से आपके डाउट है इतना सेल्फ डाउट नहीं करना खुद पे खत्म करो अपने आप पे सेल्फ डाउट करना आओ तो आगमनात्मक विधि इन्होंने ली इन्होंने कहा
38:02 कि भैया अरस्तु ने कहा जो भी जो भी चीज़ आप चाहे पॉलिटिक्स की बात करो है ना कि कौन सी सरकार बेहतर है कौन सा संविधान बेहतर है तो बोले तुलनात्मक विधि किसी भी डिसीजन पर पहुंचना है तो तुलनात्मक विधि इन्होंने एक और विधि दी विश्लेषण और अवलोकनात्मक विधि अब सीडीपी वाले कहेंगे दीदी अरे अवलोकनात्मक की बात तो अल्बर्ट बंडूरा करते हैं बेटा जी विश्लेषण और अवलोकनात्मक विधि अरस्तु करते हैं बहुत साल पहले उन्होंने कहा आप किसी चीज का निर्णय ले रहे हो तो सबसे पहले क्या जरूरी जरूरी है। आप किसी भी चीज़ का निर्णय ले रहे हो तो सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है कि आप एनालाइज़ करो कि आप जो डिसीजन लेने की सोच रहे हो वो पूरी परिस्थिति क्या है? आप उस पे क्या डिसीजन ले सकते हो? क्या स्टैंड ले सकते
38:47 हो? कि आप पहले क्या करो? एनालाइज करो। तो अरस्तु कहते हैं कि आप प्रैक्टिकल इसीलिए तो ये सिद्धांतकार कहे जाते हैं। इसीलिए तो ये रियलिस्टिक कहे जाते हैं। ये कहते हैं ऐसे ही आदर्शवाद का ढिंढोरा मत पीटो कि ये वाली चीज बहुत अच्छी है। ये वाली चीज बहुत अच्छी है। आप पहले पूरी परिस्थिति का विश्लेषण करो। आप पहले पूरी परिस्थिति का क्या करो? एनालाइज करो। उसको बारीकियों को समझो। उसका अवलोकन करो और फिर किसी निर्णय पर आप पहुंच जाओ। इनकी एक और अध्ययन की पद्धति है ऐतिहासिक। ये कहा किसी भी देश को पढ़ना है या किसी भी देश को कहां आगे पहुंचाना है। इसके लिए जरूरी है कि वो देश पहले अपना इतिहास जाने। वो देश पहले अपना इतिहास जाने। तो इन्होंने स्टडी के कुछ पैटर्न बताए हैं। उसमें एक
39:32 क्या कहा? ऐतिहासिक कहा। इन्होंने कहा भैया उस देश के अंदर उस देश के सिलेबस में उस देश में जो भी क्रांतियां हुई है उनका वर्णन होना चाहिए। किस तरीके से उस देश का संविधान बना है। कितने सुधार हुए उसका वर्णन होना चाहिए और इतिहास के आधार पर आप उस देश के भविष्य को क्या करिए? उस देश के भविष्य को डिफाइन करने की कोशिश कीजिए। तो आप इस बात को समझिए ना बिल्कुल सूर्यांश कि तुलना करी उन्होंने एनालाइज किया। उसके बाद उन्होंने खुद एथेंस के इतिहास को समझा कि गुरुजी कहते हैं आदर्शवाद। गुरुजी कहते हैं एकदम क्या कहना चाहिए कि राजा में आदर्श होने चाहिए। गुरु जी कहते हैं राजनीतिक दर्शनवाद की बात बोले नहीं गुरुजी ऐसे काम नहीं बनेगा तो आप इतिहास
40:17 को समझो उस देश के को और तब फिर आप किसी कंक्लूजन पर पहुंचो जैसे जब अभिनय सर को ये कहा गया आप सब जान रहे होंगे शिक्षक बनना चाहते हैं क्या इस समय तमाम टीचर्स जो हैं देश के वो डिबेट पे हैं एक तरीके से सरकार के खिलाफ अपनी बातों को रख रहे हैं बहुत जेन्युइन बातों को रख रहे हैं आपके भले के लिए तो जब उनसे कहा गया कि मर्द होते तो आप वर्दी वर्दी पहनते वो बंदा मुस्कुरा के रह गया। एनालाइज एनालाइज कि परिस्थिति वो नहीं है कि मैं इस व्यक्ति को जवाब दे पाऊं। मुझे नॉर्मल वे में ही बात करनी होगी। मेरे साथ तमाम टीचर्स हैं। फीमेल टीचर भी है। मेरे साथ तमाम स्टूडेंट्स भी हैं। पुलिस को कितना वक्त लगेगा हाथ छोड़ने में? पुलिस को कितना वक्त लगेगा हाथ छोड़ने में? तो कितना बड़ा अपमान व्यक्ति सहते हुए एकदम
41:03 आगे बढ़ जाता है। तो एनालाइज अवलोकन तो यही यही यही यही अरस्तु कहते हैं कि आप चाहे किसी देश की पॉलिटिक्स को पढ़ रहे हो आप किसी देश के एजुकेशन सिस्टम की बात कर रहे हो अध्ययन की जो पद्धतियां अरस्तु ने दी शिक्षा से संबंधित वो ये दी है। आगमन, तुलनात्मक, विश्लेषण, अवलोकनात्मक और ऐतिहासिक। ठीक है? और टेलियोलॉजिक, उद्देश्यात्मक। उद्देश्यात्मक समझ में तो आ रहा है ना? पहले तो मुझे ये बताओ। समझ में तो आ रहा है ना? अब तुम मुझे ये बताओ अगर मैं अगर मैं इसको अपने नोट्स के देखो वन वन लाइन में है तो जाहिर सी बात है कि ये खुद से लिखे गए नोट्स हैं। खुद से बनाए गए नोट्स हैं। अब अगर मैं इसे इस तरीके से वन वन पॉइंट में ना लेकर आऊं। और मैं
41:48 तुम्हारे लिए इसे खुद क्वेश्चन की फॉर्म में ले आऊं तो फिर तुम जीवन में कभी क्वेश्चन राइटिंग की खुद से प्रैक्टिस नहीं करोगे। है ना? कि मैं खुद ही यहां लिखाते चलूं तुम्हें। तो तुम पता है क्या करोगे? तुम उस चीज को प्रिपेयर करोगे कि गार्गी दीदी ने हमें कितने क्वेश्चंस रटा दिए और फिर उससे अलग कुछ भी पूछा जाएगा तो तुम मारे जाओगे। और लगातार तुम्हारा एक ही प्रश्न बना रहेगा कि वन लाइनर कैसे करने हैं? फिर वन लाइन कैसे करने हैं? है ना? क्लियर हुआ? हां। तो बाकी क्या कहा अध्ययन की एक और पद्धति क्या है? स्व उद्देश्यात्मक। कि भैया स्व उद्देश्यात्मक का मतलब क्या है? कि उद्देश्य को समझना है आपको। किसको समझना है? उद्देश्य को। तो इन्होंने कहा मानव जो है वो दो चीज़ों से बना है। एक तो मैटर और एक फॉर्म। मैटर का मतलब हमारा जो द्रव्य लिक्विड क्या है? शरीर। ये मैटर है। फॉर्म यानि हमारा
42:36 स्वरूप यानी आत्मा। तो, इन्होंने कहा मानव का जो शरीर है, मानव जो है, वो दो चीज़ों से बना है, एक तो मैटर। मैटर का मतलब आपका द्रव्य यानी कि शरीर और दूसरा है आपका जिसे उन्होंने कहा फॉर्म यानी स्वरूप यानी आत्मा। तो शरीर के लिए इन्होंने कहा कि आपका जो शरीर है वो आपके मूवमेंट और आपका क्या रिजल्ट निकलेगा किसी भी चीज को करने का उसके परिणाम की बात करता है और आत्मा के लिए प्लेटो जो है वो आइडिया प्रत्यय कंसेप्ट शब्द इस्तेमाल करते हैं जबकि अरस्तु आत्मा को फॉर्म कहता है तो अब आप ये भी बता पाए होंगे अंतर की जब बात होती है तो आप बता पाएंगे कि प्लेटो और अरस्तु समानता में दोनों ही आत्मा की बात करते हैं दोनों ही कहते हैं कि आत्मा का अध्ययन
43:21 जरूरी है। जैसे मैंने आपको बताया था कि अरस्तु की तो खुद की अपनी एक किताब है मैकडेनियन एथिक्स जिसमें वो आत्मा का अध्ययन करते हैं। लेकिन अरस्तु आत्मा को आत्मा शब्द नहीं कहते। वो आत्मा को क्या शब्द से बुलाते हैं? वो आत्मा को स्वरूप कहते हैं। और प्लेटो आत्मा को प्रत्यय शब्द कहते हैं। तो अब आप एक और अंतर भी समझ पाए और एक और समानता भी समझ पाए। समझे ना मेरी बात को? कारण समझ रहे हो ना? मैं तुम्हें तुम्हें तुम्हारे पैरों पर खड़े रहना चाहती देना चाहती हूं। मैं यह नहीं चाहती कि मैं तुम्हारा मुह खुलवाऊं और यह कहूं बेटा मैं जो दे रही हूं बस उसे रट लो। मैं ये चाह रही हूं कि तुम मेरे साथ क्लास में डिस्कशन करो। नोट करने या रटने पर तुम्हारा ध्यान ना हो। तुम्हारा ध्यान समझने पर हो। उस पूरे को समझने के बाद उस
44:08 दिन के बाद मैं तुम्हें दो तीन इंपॉर्टेंट क्वेश्चन दूं। तुम उसको पूरे टॉपिक को क्लास को समझने के बाद उस पीडीएफ को दोबारा देखो और उसके बाद तुम उन आंसर्स को खुद से लिखो तो तुम्हारी एक अंडरस्टैंडिंग भी बन जाएगी ये तो तुम फिर अपने आप ही रटा हुआ मान ही लोगे अपने आप को समझ गए ना इस बात को क्लियर हुआ हां क्लियर हुआ आ जाओ बेटा जी ठीक है साहब अच्छा तो इन्होंने कहा जो आपका जो इन्होंने कहा ना कि दो अंग है आपके भैया एक तो मैटर है यानी शरीर शरीर तो जो गति और परिणाम का आधार है तो इन्होंने कहा जो आपका मैटर है मैटर मैटर जो आपका शरीर है उसके चार कारण है क्या है चार कारण एक कारण क्या बताया भौतिक कारण
44:55 एक कारण क्या बताया बेटा एप्पे डलने चाहिए पर अभी नहीं डले कोई दिक्कत नहीं है डल जाएंगे कोई दिक्कत नहीं है डल जाएंगे बेटा जी डल जाएंगे मेरी तो बिल्कुल कुलदीप भैया से बिल्कुल अलग बना के रखना मेरा जो रजिस्टर बनाओगे वो कुलदीप भैया से बिल्कुल अलग बनाओगे। पहली बात तो क्यों बनाओगे? क्योंकि उसके अंदर ही मैं क्वेश्चन जो भी टॉपिक रहा करेगा जो भी हम पढ़ा करेंगे उसके साथ लॉन्ग आंसर्स और उस हिसाब से राइटिंग भी करने के लिए तुम्हें दिया करूंगी। तो तुम वो साथ के साथ अपने उसी रजिस्टर में मेंटेन करके चलोगे। मेरी बात समझ गए ना? तो बस इसीलिए तुम्हें बनाना है। कोई दिक्कत तो नहीं है ना? पहले बता दूं कि नहीं दीदी हमें अभी भी इस बात को लेकर डाउट है। हमें अभी भी इस चीज को लेकर समझ नहीं बनी है। वो आप पहले मुझे बता दीजिए। बन गई है।
45:41 कल का नोट्स पढ़ा है। बहुत अच्छी बात है। अलग-अलग ही बना है ना? बहुत बढ़िया। चलिए तो यहां पर मैटर जो है शरीर जो है उसके चार कारण है। पहला उपादान या भौतिक कारण यानी मटेरियल कॉज। हमारा शरीर जिस पदार्थ से बना है वो कारण। जैसे संगमरमर की मूर्ति जो है वो संगमरमर से बनी है। और मानव जो है मानव का शरीर जो है वो किससे बना है? किस भौतिक कारण किस मटेरियल से बना है? तो मां के रज से बना है। मां के खून से हमारा शरीर बना है। ठीक साहब। दूसरा है एफिशिएंट कॉज निमित्त कारण। तो कहा कि भैया निर्माता गति और परिणाम का कारण या गति कैसे उत्पन्न होती है आपके शरीर में? निमित्त क्या है? एफिशिएंस क्या है? किस वजह से आपके शरीर में गति है? तो जैसे संगमरमर की मूर्ति में जो गति है
46:29 यानी संगमरमर की मूर्ति को जब तराशा जा रहा है तो वो किस ढाल में जल रही है? यह मूर्तिकार के कारण है। ऐसे ही हमारे शरीर का इस मैटर के बनने के पीछे अगर कोई एफिशिएंट कॉज है, निमित्त कारक है जिसकी वजह से हमारे शरीर को गति प्राप्त होती है तो वो पिता का वीर्य यानी कि पिता का सीमन है। औपचारिक क्या है? फॉर्मल कॉज क्या है? ओवरऑल हम इस दुनिया में जो हमारा आने का क्या स्वरूप है? क्या हमारा ओवरऑल अंडरस्टैंडिंग क्या है? हम क्या है? तो बोले जैसे संगमरमर की मूर्ति जो है वो मूर्तिकार के दिमाग में जो भी चल रहा होता है वो ही उस संगमरमर की मूर्ति का स्वरूप होता है। ऐसे ही मानव का स्वरूप जैसा वो है वो वाला स्वरूप होता है। प्राणी वाला
47:15 स्वरूप होता है जो हर मानव का है। अंतिम लक्ष्य या कारण क्या है हमारे इस शरीर का? क्या उद्देश्य है? तो हमारे जन्म का क्या लक्ष्य है? क्या उद्देश्य है? इसकी बात करता है। ये समझने में थोड़ा कम आया होगा। ये बड़ी गहरी बात है। इसको एक कहानी जो अरस्तु कहते हैं उसके माध्यम से समझा जा सकता है। फिर मैं आगे की बात नेक्स्ट क्लास में करूंगी। तो यहां तक ध्यान से समझने के लिए पहले बात को ध्यान से समझिएगा। अरस्तु कहते हैं कि गुरुजी जब आप दुनिया में आते हो आप दुनिया में तो इन्होंने एक किताब लिखी थी। किताब का नाम था मैकडेनियन एथिक्स। इस किताब में अरस्तु ने कहा कि आत्मा की भी स्टडी होनी चाहिए। तो इन्होंने सिंपली मानव को दो भागों में बांटा। एक इन्होंने कहा फॉर्म यानी स्वरूप
48:02 यानी आत्मा जिसकी वजह से हम चलते हैं फिरते हैं जो हमारा बेस है और एक इन्होंने कहा पदार्थ या मैटर यानी हमारा शरीर जो हमारी गति करने में मदद करता है ये ये शरीर ये जो दिखाई दे रहा है और जिसका जिसका कोई एक निश्चित लक्ष्य है लक्ष्य की प्राप्ति में ये काम करता है हमें अंत तक पहुंचाने में काम करता है उसके बारे में उन्होंने बात की तो अब इसे कहानी के माध्यम से समझना होता क्या है बहुत शॉर्ट में समझाती हूं। कहानी है। बड़ी प्यारी कहानी है। अरस्तु क्या है? ऐसे ही उनके चेले चंपाटे बैठे हुए हैं एथियंस के अंदर और लाइजियम स्कूल विद्यालय खुल चुका है अरस्तु का। अब लाइजियम विद्यालय खुल चुका है रस्तुका और चिले चंपाटी जो है वो ये कहते हैं गुरुजी जो ये आपने मैकडेनियम एथिक्स लिखी है इसमें आप
48:49 आत्मा की बात करते हो और आपके गुरुजी इसको कहते थे कि ये तो प्रत्यय है कंसेप्ट है कि हमारे शरीर के अंदर कोई एक ऐसी चीज है जो कंसेप्ट है जो मूल है आप उसको आत्मा आप उसको स्वरूप कहते हो कि वही मुख्य है लेकिन उसका नाम आप स्वरूप कहते हो तो इन्होंने कहा कि हां बिल्कुल आत्मा जो है वो स्वरूप है तो लोगों ने कहा क्या आत्मा आत्मा शिष्यों ने कहा गुरु जी क्या आत्मा ही की वजह से हम सारा मूवमेंट करते हैं? बोले नहीं हमारा जो जो भी कुछ दिखाई दे रहा है जो भी हम कर रहे हैं जो उधर भी हम जा रहे हैं जो भी हम खा रहे हैं जो भी हम पी रहे हैं इसके पीछे का कारण देखो ये एक आशिक में बर्बाद कह रहा रिचा जी आप कहां से हो तेरी पहुंच से बहुत दूर से है ठीक है ना तेरी पहुंच से बहुत दूर से है और तेरी पहुंच से बहुत दूर ही रहेगी ठीक है
49:36 समझ गया समझ गया तू वहां है तो ये वहां है ठीक राजी हो गया और या फिर गुड़िया ही बता ये मेरे बताने से राजी हो गया। हो गया। ठीक है। शांति से बैठा रही हूं। तो इन्होंने कहा कि देखो भैया हमारा जो शरीर है उसके ना बनने के चार कारण है। तो लोगों ने कहा मतलब शिष्यों ने कहा गुरु जी मतलब कैसे? बोले देखो हमारा जो शरीर है किस मैटर का बना है? तो उसका उपादान कारक क्या है? कौन सा मटेरियल कौन सा भौतिक कारक क्या है? जिससे हमारा शरीर बना है? तो बोले क्या कारक है? गुरुजी बताओ। किसी ने कहा हाड़, किसी ने कहा मांस। बोले नहीं हम मां के खून से मां की रज से बने हैं। बोले जैसे संगमरमर की मूर्ति संगमरमर के पत्थर की बनी है। ये उसका मटेरियल है। ऐसे ही
50:22 हमारे शरीर का मटेरियल मां का खून है। तो सारे स्टूडेंट ने कहा ठीक है गुरुजी आप बात सही कह रहे हो। पर गुरुजी फिर ये जो मां का खून है इसमें पिता का क्या योगदान है? तो बोले जो हमारा निमित्त कारण है मतलब जो हमारा मूल कारण है एफिशिएंट जो हमें प्रभावशाली बनाता है वो उसके पीछे पिता का वीर्य है कि माता की रज में माता के ब्लड में जब पिता का वीर्य मिला तब हमारी उत्पत्ति हुई तो पिता का वीर्य पिता का सीमन क्या है वो निमित्त कारक है और माता का जो रज यानी माता का जो खून है वो जो मेंसुरेशन समय का वो जो ओवम है वो मटेरियल है जिसके हम बने हुए ठीक है साहब जिससे हमें गति मिलती है। तो बोले कि जैसे जब बहुत साल पहले इस बात को कह चुके हैं ये कि जब एग जो ओवम है मां का
51:10 उससे जब पिताजी का वीर्य यानी सीमन शुक्राणु स्पर्म जब फर्टिलाइज करते हैं उसको तो वो सीमन जो होता है यानी वो जो वीर्य है वो उसके अंदर जो स्पर्म शुक्राणु है ना वो एकदम मूवमेंट करते हैं। क्या है? वो एकदम मूवमेंट करते हैं। तो बोले उनके मूवमेंट की वजह से हमारे शरीर में गति आती है। तो स्टूडेंट्स ने कहा ठीक है गुरु जी ये तो आपने बात सही करी। तो कहा गुरुजी हमारा लक्ष्य क्या है? बोले जो भी मानव का लक्ष्य है जो भी कोई चोरी करने आया तो वो चोरी करेगा। वो समाज सुधारने आया तो वो समाज सुधारेगा। कोई शिक्षा देने आया तो वो शिक्षक बनेगा। तो हमारा जो भी लक्ष्य है निमित्त है वही हमारा लक्ष्य कारक के तौर पर रखा जाएगा। और हमारा औपचारिक स्वरूप क्या है? फॉर्मल स्वरूप क्या है? बोले हम
51:57 जानवर नहीं है। हम मानव बनकर मानव का स्वरूप लेकर आए हैं। तो हमारा जो रूप रंग है, औपचारिक स्वरूप है वो क्या है? वो मानव वाला स्वरूप है। समझे अब इस बात को? तो बस कुछ नहीं बस आत्मा के अध्ययन और शरीर की स्टडी पे उन्होंने अपने बच्चों को एक कहानी सुनाई थी जो मैंने आपको सुना दी। अब हम मिलेंगे कब मिलेंगे? जब आप एप्लीकेशन पर एनरोल कर चुके होंगे। आप सभी को बता दूं कि आप सभी के लिए अभी भी अगर आप कोई भी बैच लेते हैं तो कल रात 12:00 बजे तक आपके लिए सभी बैचेस चाहे वो होम साइंस हो चाहे वो जीएस हो चाहे वो आपका बायोलॉजी हो चाहे एसएसटी हो चाहे हिंदी हो सभी बैचेस जो हैं वो अभी 799 में आपके लिए हैं। ठीक है? और मेरे हिसाब से आप दुनिया के किसी भी टीचर से पढ़िएगा। मैं ये नहीं
52:44 कहती कि मैं बहुत टॉप टीचर हूं। लेकिन हां मुझे ये पता है कि किसी चीज को कैसे आसान बनाकर आपको समझो सब चीजों को समझाना है। ठीक है ना? और इस चीज पर मेरी बहुत अच्छी पकड़ है। ये मेरा प्रिय विषय रहा है और ग्रेजुएशन से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक में सबसे ज्यादा और मैंने आपको शायद बताया भी है कि आई वाज़ वर्किंग इन एपीएस एस अ पीजीटी पॉलिटिकल साइंस। तो अब आप इस बात को समझ सकते हैं कि ये वाला मामला मेरा है। तो अब हम जब भी मिलेंगे आपको इन्फॉर्म कर दिया जाएगा। है ना? बहुत-बहुत धन्यवाद। अपना ध्यान रखेंगे। मेरी नेक्स्ट क्लास शुरू होने वाली है।