Power Sharing (सत्ता की साझेदारी) Class 10th | SST (सामाजिक विज्ञान) | UP Board 2026 Hindi Medium

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "सत्ता की साझेदारी" नामक अध्याय का सारांश है, जिसमें सत्ता के अर्थ, बेल्जियम और श्रीलंका के उदाहरणों, सत्ता की साझेदारी की आवश्यकता, भारत में सत्ता की साझेदारी के विभिन्न रूपों और सामाजिक समूहों के बीच सत्ता के बंटवारे पर चर्चा की गई है।

  • सत्ता का अर्थ शक्ति या पावर है, और साझेदारी का अर्थ भागीदारी या शेयरिंग है।
  • बेल्जियम और श्रीलंका दो ऐसे देश हैं जिन्होंने सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीकों को अपनाया।
  • सत्ता की साझेदारी किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए आवश्यक है ताकि समाज में शांति और भाईचारा बना रहे।
  • भारत में सत्ता की साझेदारी चार रूपों में होती है: ऊर्ध्वाधर वितरण, क्षैतिज वितरण, सामाजिक समूहों के बीच और दबाव समूहों और विपक्ष के बीच।

परिचय

इस अध्याय में सत्ता की साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें बताया गया है कि यह शक्ति या पावर का साझाकरण है। यह अध्याय छात्रों को इस विषय की बारीकियों को समझने और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करने के लिए बनाया गया है।

क्लास नोट्स कहां मिलेंगे

छात्र कक्षा के नोट्स PW ऐप पर मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप में आरबीएसई बैच के अंदर नोट्स उपलब्ध हैं।

अध्याय में शामिल विषय

अध्याय में निम्नलिखित विषयों को शामिल किया जाएगा: सत्ता की साझेदारी का अर्थ, बेल्जियम और श्रीलंका की कहानियाँ, बेल्जियम में समझदारी, सत्ता की साझेदारी की आवश्यकता, भारत में सत्ता की साझेदारी के रूप और सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बंटवारा। इसके अतिरिक्त, कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न और पाठ्यपुस्तक के प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे।

सत्ता की साझेदारी का अर्थ

सत्ता का अर्थ शक्ति या पावर है, जबकि साझेदारी का अर्थ भागीदारी या शेयरिंग है। सत्ता की साझेदारी का मतलब है देश को चलाने की शक्ति को साझा करना और सभी को भागीदार बनाना, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति, भाषा या संस्कृति से हों। यह लोकतांत्रिक देशों में महत्वपूर्ण है, जहां नागरिकों को देश को चलाने और उसका ध्यान रखने की जिम्मेदारी दी जाती है।

बेल्जियम की कहानी

बेल्जियम यूरोप का एक छोटा सा देश है जिसकी आबादी 1 करोड़ से भी कम है। यहां की जातीय बनावट जटिल है, जिसमें फ्रेंच, डच और जर्मन भाषा बोलने वाले लोग शामिल हैं। देश में 59% लोग डच बोलते हैं, 40% फ्रेंच और 1% जर्मन। बेल्जियम का आकार हरियाणा राज्य से भी छोटा है और इसकी सीमा फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी और लक्जमबर्ग से लगती है।

बेल्जियम की जातीय बनावट

बेल्जियम में 59% लोग डच भाषा बोलते हैं और फ्लेमिश क्षेत्र में रहते हैं, जबकि 40% लोग फ्रेंच भाषा बोलते हैं और वलूना क्षेत्र में रहते हैं। राजधानी ब्रुसेल्स में 80% लोग फ्रेंच बोलते हैं और 20% डच। फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यक समृद्ध हैं, जबकि डच भाषी बहुसंख्यक गरीब हैं, जिससे दोनों समूहों के बीच तनाव है।

बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक

बहुसंख्यक वे लोग हैं जिनकी संख्या देश में अधिक है, जबकि अल्पसंख्यक वे हैं जिनकी संख्या कम है। बेल्जियम में डच भाषी लोग बहुसंख्यक हैं, जबकि फ्रेंच और जर्मन भाषी लोग अल्पसंख्यक हैं। फ्रेंच भाषी अल्पसंख्यक समृद्ध हैं, जबकि डच भाषी बहुसंख्यक गरीब हैं, जिससे दोनों समूहों के बीच तनाव है।

बेल्जियम में तनाव और समाधान

1950 से 1960 के बीच फ्रेंच और डच भाषा बोलने वाले लोगों के बीच तनाव बढ़ गया। 1970 से 1993 के बीच देश के संविधान में चार बार संशोधन किया गया ताकि सभी भाषाओं को साथ लेकर चला जा सके और किसी को भी बेगानापन महसूस न हो। बेल्जियम के नेताओं ने समझदारी दिखाई और देश के संविधान में बदलाव करके सभी संस्कृतियों को स्वीकारा।

श्रीलंका की कहानी

श्रीलंका एक द्वीपीय देश है जो भारत के दक्षिण में स्थित है। इसकी आबादी लगभग 2 करोड़ है। यह भी अंग्रेजों का गुलाम था और 1948 में आजाद हुआ। इसका पुराना नाम सिलोन था। श्रीलंका में भाषा के आधार पर दो समूह हैं: सिंहली (74%) और तमिल (18%)। सिंहली लोग बौद्ध धर्म को मानते हैं, जबकि तमिल लोग हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्मों को मानते हैं।

श्रीलंका में बहुसंख्यकवाद

1956 में श्रीलंका के नेताओं ने सिंहली भाषा को एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया और सरकारी नौकरियों में सिंहली भाषियों को प्राथमिकता दी। बौद्ध धर्म को देश का धर्म बना दिया गया। इससे तमिल लोगों में असंतोष फैल गया और उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टियाँ बनाईं।

श्रीलंका में गृहयुद्ध

तमिल लोगों ने अपनी भाषा को राजभाषा बनाने और शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर की मांग की। सिंहली लोगों ने तमिल लोगों को अधिकार नहीं दिए और उन्हें अपमानित किया। तमिल लोगों ने लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) नामक एक उग्र संगठन बनाया और गृहयुद्ध शुरू हो गया, जिसमें लाखों लोग मारे गए। तमिल लोग श्रीलंका के उत्तरी इलाके में अपने लिए एक अलग देश, तमिल ईलम, बनाना चाहते थे।

बेल्जियम की समझदारी

बेल्जियम के नेताओं ने समझदारी दिखाई और देश के संविधान में चार बार संशोधन किया ताकि सभी भाषाओं को सम्मान दिया जा सके। उन्होंने तीन प्रकार की सरकारें बनाईं: केंद्र सरकार, राज्य सरकार और सामुदायिक सरकार। केंद्र सरकार पूरे देश का विकास करेगी, राज्य सरकारें राज्यों का ध्यान रखेंगी और सामुदायिक सरकार शिक्षा और भाषा पर कानून बनाएगी।

सत्ता की साझेदारी क्यों जरूरी है

सत्ता की साझेदारी इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे समाज में सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहता है और शांति बनी रहती है। इससे सामाजिक समूहों के बीच टकराव की संभावना कम हो जाती है और अल्पसंख्यक लोगों को बहुसंख्यक लोगों द्वारा दबाए जाने का डर खत्म हो जाता है। सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र की आत्मा है।

सत्ता की साझेदारी के कारण

सत्ता की साझेदारी के दो कारण हैं: समझदारी भरी बात (युक्तिपरक कारक) और नैतिक कारण। समझदारी भरी बात यह है कि देश के शासन में सभी को शामिल किया जाए ताकि टकराव की संभावना कम हो जाए। नैतिक कारण यह है कि जो लोग देश में रहते हैं, उन्हें देश का नागरिक मानना चाहिए और उन्हें साथ लेकर चलना चाहिए।

क्या भारत में सत्ता की साझेदारी है

भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां चुनाव होते हैं और 18 साल से बड़े सभी लोग वोट देते हैं। जो व्यक्ति सबसे ज्यादा वोट हासिल करता है, उसे नेता कहा जाता है। नेता लोग अपना एक समूह बनाते हैं जिसे सरकार कहा जाता है। सरकार देश को चलाने के लिए कानून बनाती है और पुराने कानूनों में संशोधन करती है।

भारत में सत्ता की साझेदारी के रूप

भारत में सत्ता की साझेदारी चार रूपों में होती है:

  1. ऊर्ध्वाधर वितरण: केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार के बीच शक्तियों का बंटवारा।
  2. क्षैतिज वितरण: विधायिका (संसद), कार्यपालिका (सरकारी लोग) और न्यायपालिका के बीच शक्तियों का बंटवारा।
  3. सामाजिक समूह: दलितों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों को आरक्षण देकर देश के शासन में शामिल करना।
  4. दबाव समूह और विपक्ष: दबाव समूह सरकार पर अपनी मांगों को पूरा करने के लिए दबाव बनाते हैं, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों की आलोचना करता है।

सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बंटवारा

भारत में सामाजिक समूहों के बीच सत्ता का बंटवारा आरक्षण के माध्यम से किया जाता है। दलितों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण दिया जाता है ताकि वे देश के शासन में शामिल हो सकें।

दबाव समूह और विपक्ष के बीच सत्ता का बंटवारा

भारत में दबाव समूह और विपक्ष भी सत्ता की साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दबाव समूह सरकार पर अपनी मांगों को पूरा करने के लिए दबाव बनाते हैं, जबकि विपक्ष सरकार की नीतियों की आलोचना करता है और लोगों को सरकार की गलतियों के बारे में बताता है।

अध्याय के प्रश्न

अध्याय के अंत में कुछ प्रश्न पूछे गए हैं, जैसे कि सत्ता की साझेदारी का क्या मतलब है, लोकतंत्र का मूल मंत्र क्या है, भारत में चुनाव कैसे होते हैं, सरकार के क्या काम हैं, सत्ता का बंटवारा क्यों जरूरी है और सत्ता की साझेदारी के दो कारण क्या हैं।

अंतिम प्रश्न और धन्यवाद

वीडियो के अंत में कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए हैं और छात्रों को उनके उत्तर कमेंट में देने के लिए कहा गया है। छात्रों को यह भी बताने के लिए कहा गया है कि उन्हें क्लास कैसी लगी और वे अगला कौन सा अध्याय पढ़ना चाहते हैं।

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Transcript

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0:00 कि सत्ता का मतलब होता है शक्ति या फिर पावर। और साझेदारी का मतलब क्या होता है? साझेदारी का मतलब होता है भागीदारी या फिर शेयरिंग। भाषा बोली जाती है फ्रेंच। एक भाषा ये लोग बोलते हैं डच और एक भाषा ये लोग बोलते हैं जर्मन। तो और इनकी जनसंख्या देश में सबसे ज्यादा है। ये लगभग 74% के आसपास है। 74% शांति बनी रहे। तो देश के अंदर सत्ता की साझेदारी जरूरी होती है। जैसे बेल्जियम के अंदर किया गया। जैसे भारत कच्चे घरों में रहते हैं। जिनके पास शिक्षा नहीं है और इनको पहले भी शिक्षा नहीं दी गई। समाज के अंदर इनको पढ़ने नहीं दिया गया। हेलो दोस्तों, आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है हमारी आज की इस क्लास में और आप सभी के साथ दोस्तों, हम लोग क्या करेंगे? हम लोग अपने एक बहुत ही महत्वपूर्ण एक चैप्टर को आपके साथ डिस्कस करने के लिए तैयार हैं। हमारा जो पिछला चैप्टर हुआ था जिसके अंदर हमने यूरोप के राष्ट्रवाद के उदय के जो चैप्टर को अच्छे

0:45 तरीके से डिस्कस किया था इतिहास से संबंधित था और उसी चैप्टर के अंदर हम लोगों ने आप सभी से ये जानने की कोशिश करी थी कि आप लोग अगला चैप्टर कौन सा कराना चाहते हैं। अधिकतर बच्चों की यही डिमांड थी कि सर जो हमारा ये चैप्टर है ना जिसे हम लोग सत्ता की साझेदारी के नाम से जानते हैं। इस चैप्टर को हमें डिस्कस करना है। तो हम लोग क्या करने आ गए हैं दोस्तों कि आपकी डिमांड को ध्यान में रखते हुए इस चैप्टर की हर एक बारीकी को बहुत अच्छे तरीके से आपके सामने रखेंगे। अगर आप लोग हमारा यह चैप्टर कर लेते हैं तो आपके संदर्भ में इस चैप्टर के संदर्भ में आपके सामने कोई डाउट नहीं रहेगा। और आप बहुत अच्छे तरीके से पेपर में इस चैप्टर से आने वाले सारे सवालों को डिस्कस कर लेंगे और बना लेंगे। हमारे चैप्टर का नाम क्या है, दोस्तों? चैप्टर का नाम है सत्ता की साझेदारी। और इसको एक ही क्लास के अंदर हम लोग अपने इस वन शॉट सीरीज के अंदर आपके सामने पेश कर देंगे। तो भैया बिल्कुल भी समय को व्यर्थ नहीं करते और आपके साथ अपने इस प्यारे से चैप्टर को स्टार्ट करते हैं

1:30 और जल्दी से इस चैप्टर की सारी कहानी को डिस्कस करते हैं। अच्छा हम लोग आप सभी के साथ जो अपने इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को रख रहे हैं उससे पहले एक बात सवाल आपके दिमाग में आ सकती है कि सर हमारी ये क्लास के जो हमारे नोट्स होते हैं हम कहां पर हासिल कर सकते हैं? क्लास के समापन के बाद आप क्या करेंगे दोस्तों? अह आप देखते हैं कि जो हमारी यह क्लास आपको YouTube पर होती हुई दिख रही है। अपनी क्लास के समापन के बाद आप हमारी PW ऐप को डाउनलोड करेंगे। जिन बच्चों के पास पहले से ही डाउनलोडेड है। वहां पर जाकर आप लोग क्या कर सकते हैं दोस्तों कि अपने इस बेहतरीन से बैच के अंदर जो हमारा ये आरबीएससी वाला बैच है। है ना? यहां पे जाके आप लोग क्या कर सकते हैं दोस्तों कि अपने इस प्यारे से बैच को हासिल कर सकते हैं। और इस बैच के अंदर मौजूद जो अपने नोट्स हैं उनको भी अच्छे तरीके से आप मुफ्त में बिल्कुल निशुल्क आप क्या कर सकते हैं दोस्तों कि इनको हासिल कर सकते हैं। ठीक है? तो चलिए स्टार्ट

2:17 करते हैं अपने आज के इस प्यारे से चैप्टर को और बहुत अच्छे तरीके से इस पूरे चैप्टर की पूरी कहानी को हम लोग पढ़ लेते हैं। हमारे आज के इस चैप्टर के अंदर आखिर हमें क्या-क्या चीजें देखने को मिलेंगी? हम लोग किन-किन टॉपिक्स को पढ़ेंगे एक बार अच्छे तरीके से उसे देख लेते हैं। पढ़ेंगे तो पूरा ही चैप्टर। हम लोग सबसे पहले ना आप सभी के साथ डिस्कशन करेंगे। सत्ता की साझेदारी इस शब्द का मतलब क्या होता है? इसे हम लोग समझेंगे। फिर हम लोग आप सभी के साथ दो देशों के एग्जांपल्स को समझने की कोशिश करेंगे। हम एक देश के बारे में डिस्कशन करेंगे जिसे हम लोग बेल्जियम कहते हैं और बेल्जियम की जो कहानी है उसको हम लोग समझेंगे। फिर हम लोग एक और देश के बारे में पढ़ेंगे जिसको हम लोग श्रीलंका के नाम से जानते हैं और श्रीलंका की जो क्या पूरी की पूरी स्थिति रही है उसको हम लोग जानेंगे। फिर हम लोग बात करेंगे कि बेल्जियम देश के अंदर हमें क्या देखने को मिलता है कि यहां के जो लोग थे और यहां की

3:03 जो सरकार थी वो समझदारी दिखाती है और वो अपने देश को बहुत अच्छे तरीके से आगे निकाल लेती है। क्या है वो कहानी उसको डिस्कस करेंगे। फिर हम लोग एक बात समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर हमें सत्ता की साझेदारी की जरूरत ही क्यों है? क्या किसी भी देश के अंदर बिना सत्ता की साझेदारी के देश को नहीं चलाया जा सकता? इस बिंदु को समझेंगे। फिर हम लोग आपके साथ डिस्कस करेंगे कि क्या हमारे प्यारे भारत के अंदर सत्ता की साझेदारी होती है और अगर होती है तो उसके अलग-अलग रूप हमें यहां पर देखने को मिलेंगे। है ना? हमारे देश के अंदर सत्ता की साझेदारी अगर हो रही है, तो उसके चार प्रतिरूप या फिर चार रूप हमें देखने को मिलते हैं। और इन चारों रूपों को हम लोग एक-एक कर कर अपनी आज की इस क्लास में आपके सामने रखने लगेंगे। और फिर हम लोग यहां पर एक बहुत ही महत्वपूर्ण बिंदु है जिसे बोला जाता है सामाजिक समूहों के बीच

3:49 सत्ता का बंटवारा। तो भारत के अंदर बड़े तौर पर जो हमारे अलग-अलग सामाजिक समूह हमें देखने को मिलते हैं। जैसे हमारे दलित भाई हुए, जैसे हमारे अल्पसंख्यक भाई हुए। इन सभी के साथ भी देश को चलाने की जो शक्ति है या फिर जिसे सत्ता कहा जाता है उसे शेयर किया जाता है। क्यों करते हैं? कैसे करते हैं? डिटेल से पढ़ेंगे। इसी के साथ कुछ एमसीक्यू के हमारे क्वेश्चंस होंगे और कुछ आपके पाठ्यपुस्तक के भी सवाल होंगे जिनको हम लोग आपके सामने यहां पर रखेंगे। तो भैया ये तो हुई हमारी पूरे चैप्टर की कहानी। अगर आप लोग हमारे इस चैप्टर को कर लेते हैं तो आपके दिमाग में इस चैप्टर से संबंधित कोई भी डाउट कभी भी नहीं रहने वाला। आप कक्षा 10वीं के अंदर इस चैप्टर से आने वाले जितने भी सवाल होंगे उनको बहुत ही अच्छे तरीके से बना लेंगे। बस दो चीजें आपको करनी है। क्या आपको इस क्लास को शुरुआत से लेकर आखिर तक देखना है। दूसरी चीज जो आपको ध्यान देनी

4:35 है कि जब आप लोग अपनी इस क्लास को देख रहे हों तो आपके पास कॉपी पेन पेंसिल जरूर होनी चाहिए। सर किस लिए? है ना? आपके पास ये जो आपकी कॉपी पेन पेंसिल होनी चाहिए। इसलिए ताकि आप अपने सारे नोट्स जो मैं साथ-साथ बताता रहूं साथ-साथ लिखते रहें। ठीक है भैया? तो यहां पर हमने सबसे पहले आप सभी के साथ डिस्कशन किया। चैप्टर का नाम है सत्ता की साझेदारी। और इस प्यारे से चैप्टर के प्यारे से बिंदु को हम लोग एक-एक कर कर आपके सामने यहां पर रखना शुरू करेंगे। तो बिना किसी समय को व्यर्थ करे हुए हम लोग अपनी आज की इस क्लास को आपके सामने स्टार्ट कर रहे हैं। चैप्टर का नाम है सत्ता की साझेदारी। सबसे पहले हमारे सामने जो शब्द आया है जिसे हम लोग सत्ता के नाम से जान रहे हैं। क्यों ना हम लोग इसी शब्द के अर्थ को समझने की कोशिश करें कि आखिर ये सत्ता और उसी के साथ-साथ इसकी साझेदारी इसका मतलब क्या होता है? हमारे से सत्ता का तात्पर्य क्या है? है।

5:20 साझेदारी का क्या मायने है? इन दोनों को हम लोग समझने की कोशिश कर लेते हैं। है ना? चलिए इनको समझते हैं बहुत अच्छे तरीके से और आपके सामने किसी भी प्रकार का कोई डाउट और कंफ्यूजन बिल्कुल भी नहीं रहने देंगे। हमने यहां पर सबसे पहले चैप्टर के जो हमारा नाम है। है ना? हमारे जो चैप्टर का नाम हमें देखने को मिला। उसी को यहां पर हमने आपके सामने बहुत अच्छे तरीके से पेश किया जिसे हम लोग कह रहे हैं सत्ता की साझेदारी। अगर हम लोग सत्ता शब्द को समझें। तो सत्ता को समझने के लिए हम लोग एक और शब्द को यूज करते हैं जिसे बोला जाता है शक्ति। या फिर इसके लिए हम लोग एक और शब्द का यूज करते हैं अंग्रेजी के अंदर जिसे हम लोग कहते हैं पावर। ठीक है? साझेदारी का मतलब क्या होता है सर? साझेदारी का मतलब होता है भागीदारी। अब आप पूछेंगे सर भागीदारी का मतलब क्या होता है? भाई भागीदारी का मतलब होता है शेयरिंग। है ना? शेयरिंग समझते हो

6:08 ना? शेयर करना। है ना? तो यहां पर हमने आपके साथ इन दोनों शब्दों के अर्थ को समझने की कोशिश की। सबसे पहले हमने आप सभी के साथ डिस्कस किया कि सत्ता का मतलब होता है शक्ति या फिर पावर। और साझेदारी का मतलब क्या होता है? साझेदारी का मतलब होता है भागीदारी या फिर शेयरिंग। जब हम लोग ये कहते हैं कि सत्ता या फिर शक्ति की बात हो रही है या फिर पावर की बात हो रही है तो किस तरीके की शक्ति? भाई यहां पर हम लोग बात कर रहे हैं। यहां पर हम लोग बात कर रहे हैं देश को चलाने की शक्ति। है ना? यहां पर हम लोग किस चीज के बारे में बात कर रहे हैं? यहां पर हम लोग बात कर रहे हैं देश को चलाने की शक्ति। कि देश को चलाने की जो शक्ति है, देश को चलाने की जो पावर है, देश को चलाने की जो सत्ता है, उसको साझा करना चाहिए। उसके अंदर सबको भागीदार बनाना चाहिए। उसको सबके साथ शेयर

6:53 करना चाहिए। है ना? तो यहां पर हमने सबसे सिंपल तरीके से सत्ता का मतलब क्या होता है? वो देखा और उसी के साथ-साथ साझेदारी का मतलब क्या होता है? शेयरिंग वो देखा। सत्ता का मतलब है देश को चलाने की जो पावर है उसे सत्ता कहा गया। और वहीं पर साझेदारी का मतलब है शेयर करना। है ना? यानी के बांटना। अब यहां पर हम लोग ध्यान से देखें कि सत्ता की जो हमारी ये साझेदारी है, ये हमें दुनिया भर के बहुत सारे देशों में देखने को मिलती है। मगर सत्ता की साझेदारी का जो असली रूप है वो हमें लोकतंत्र के अंदर ही देखने को मिलता है। जैसे अगर हम लोग भारत की बात करें। भारत एक लोकतांत्रिक देश हमें देखने को मिलता है। भारत के अंदर हमारे पास अलग-अलग जाति, धर्म, भाषा और समुदाय के लोग हैं। है ना? अगर आप भारत के अंदर देखें हमारे पास अलग-अलग धर्म, अलग-अलग जाति, उसी के

7:39 साथ-साथ हमारे यहां पर अलग-अलग भाषा, उसी के साथ-साथ हमारे यहां पर अलग-अलग संस्कृति के लोग रहते हैं। रहते हैं कि नहीं रहते? जी हां, रहते हैं। अब मैं अगर आपसे पूछूं कि क्या जब भारत देश को चलाना होता है तो क्या सिर्फ एक धर्म के लोगों को ये जिम्मेदारी दी जाती है? जब भारत देश को संभालना होता है तो क्या सिर्फ एक भाषा वाले लोगों को जिम्मेदारी दी जाती है? नहीं। जब हम बात करते हैं कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है तो इसका मतलब हुआ कि भारत देश को चलाने की जो जिम्मेदारी है भारत देश को चलाने की जो पावर या फिर सत्ता है वो सबके साथ शेयर होती है। चाहे आप किसी भी धर्म से हो, जाति से हो, भाषा से हो या फिर संस्कृति से हो और इसी को हमने सत्ता की साझेदारी कहा कि किसी भी देश के अंदर जो रहने वाले लोग हैं, चाहे वो किसी भी समुदाय से आए। चाहे वो किसी भी समुदाय से आए। यानी कि वो किसी भी धर्म, जाति, भाषा या फिर संस्कृति से हो। उन

8:26 सबको देश के शासन में शामिल करना ही क्या कहलाता है? सत्ता की साझेदारी कहलाता है। और ये जो सत्ता की साझेदारी है ना ये हमें लोकतांत्रिक देशों में ही देखने को मिलती है। लोकतांत्रिक देश का मतलब कि जहां पर चुनाव होते हैं, जहां पर लोकतंत्र होता है वहीं पर देश को चलाने की पावर को शेयर किया जाता है। अब जहां राजा है जैसे एग्जांपल के तौर पर सऊदी अरेबिया को देखा जाए। सऊदी अरब कर कर एक देश है। वहां पर राजा है। क्या उस देश के अंदर देश को चलाने की पावर देश के लोगों में बंटी है? नहीं। सारी की सारी पावर एक राजा के पास हमें देखने को मिलती है। तो सत्ता की साझेदारी हमें लोकतांत्रिक देशों में ही देखने को मिलती है। और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था क्या है दोस्तों? कि लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था में जो नागरिक होते हैं यानी कि ऐसे देश जहां पर लोकतंत्र होता है वहां पर नागरिकों को साथ-साथ चलाने की और उनका पूरा-पूरा ध्यान रखने की जिम्मेदारी

9:11 होती है और उनको भागीदार बनाया जाता है। उनको जिम्मेदार बनाया जाता है कि ये देश तुम्हारा है। इस देश को चलाने की जिम्मेदारी आपको उठानी होगी। इस देश को चलाने की हिस्सेदारी तुम्हें दी जाती है। तो यहां पर हमने सत्ता की साझेदारी का जो एक बहुत ही शाब्दिक अर्थ था वो आपके सामने पेश किया। अब हम लोग ना सत्ता की साझेदारी के इन दोनों बिंदुओं को बहुत अच्छे तरीके से डिस्कस करेंगे। आपकी पाठ्य पुस्तक के अंदर दो देशों के बारे में बताया गया है। एक को बोलते हैं श्रीलंका और दूसरे को बोलते हैं बेल्जियम। सबसे पहले हमारी कहानी स्टार्ट होती है बेल्जियम देश के साथ। चलो बेल्जियम की जो हमारी केस स्टडी है, इसको हम लोग अच्छे तरीके से डिस्कस करते हैं। ध्यान से देखें। सबसे पहले यहां पर एक सवाल आ जाता है कि भैया ये बेल्जियम देश पड़ता कहां पर है? तो यूरोप एक बहुत बड़ा महाद्वीप है और यूरोप देश के अंदर एक नन्हा सा मुन्ना सा छोटा सा इतु सा एक देश

9:58 है जिसे हम लोग बेल्जियम कहते हैं। बहुत ही छोटा सा देश है भैया। और अगर हम बेल्जियम की आबादी की बात करें यानी कि इसकी जनसंख्या की बात करें तो 1 करोड़ से भी कम है। ये यहां पर आप देख सकते हैं ये विश्व का मानचित्र है और इस विश्व के मानचित्र में इतना नन्हा सा मुन्ना सा एक बिंदु के बराबर सा जो आपको देश दिखता है इसे यूरोप का बेल्जियम देश कहा जा रहा है। आबादी के हिसाब से भी इनकी जनसंख्या बहुत कम है। लगभग 1 करोड़ के आसपास इसकी जनसंख्या हमने देखी। अच्छा इस देश के अंदर अगर आप लोग देखें ना तो यहां पर हमें जातीय बनावट बहुत ही जटिल दिखती है। जटिल का मतलब क्या होता है कि यहां पर हमें जो समाज है वो बहुत ही अलग तरीके से देखने को मिलता है। जैसे अगर आप लोग बात करते हैं अरब देशों की तो वहां पर एक ही धर्म के लोग रहते हैं। एक ही भाषा बोलते हैं अरब भाषा। जैसे आप बात करते हैं कहां की? अमेरिका की तो वहां पर एक ही संस्कृति के

10:45 और एक ही भाषा के लोग रहते हैं जो इंग्लिश भाषा बोलते हैं विशेषकर। लेकिन यूरोप का जो ये बेल्जियम देश है ना यहां की जातीय बनावट या फिर यहां की भाषाई बनावट बहुत अजीब है। यहां पर तीन मुख्य भाषाएं बोली जाती हैं। कौन-कौन सी? यहां पर एक भाषा बोली जाती है फ्रेंच। एक भाषा ये लोग बोलते हैं डच और एक भाषा ये लोग बोलते हैं जर्मन। तो जैसे भारत देश के अंदर आपको बहुत सारी भाषाएं देखने को मिलती हैं। कुछ ऐसी ही कहानी इस बेल्जियम देश की भी है। यहां पर तीन मुख्य भाषाओं को बोला जाता है। और इन तीन मुख्य भाषाओं के नाम क्या है? फ्रेंच, डच और जर्मन। अगर हम लोग इसकी तुलना करें कि जो यह बेल्जियम देश है, भारत के किस राज्य के साथ हम लोग इसको तुलना कर सकते हैं, तो ये हरियाणा राज्य से भी छोटा है। आकार में हरियाणा से भी छोटा है। हमारा अकेला हरियाणा राज्य और आप

11:31 देखते हैं कि बेल्जियम इतना नन्हा सा देश। अच्छा इस देश की सीमा फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी और लक्ष्यबर्ग इन चार देशों से हमें मिलती हुई दिखती है। तो ये चारों तरफ से आप देखते हैं दोस्तों कि क्या है? चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ देश हमें देखने को मिलता है। जिसने हमने जिसे हमने बेल्जियम के नाम से जाना। अच्छा। अगर हम लोग यहां पर ध्यान से देखें कि यहां की जो 59% के करीब आबादी है, उसे हम लोग क्या कहते हैं? उसे हम लोग एक तरीके से देखते हैं कि ये लोग डच भाषा बोलते हैं। तो इस देश के अंदर 59 59% के करीब जो हमें लोग रहते हुए देखने को मिलते हैं वो कौन सी भाषा बोल रहे हैं? वो भाषा बोल रहे हैं डच। और ये सारे के सारे लोग कहां रहते हैं बच्चे? ये सारे के सारे जो लोग हैं वो हमें फ्लेमिश एरिया के अंदर रहते हुए दिखते हैं। है ना? तो अगर आप ध्यान से देखें कि ये वाला जो हमारा पूरा का पूरा एरिया है। है ना? ये क्या है? ये डच भाषा

12:18 बोलने वाले लोग हैं। बेल्जियम का ये मानचित्र है। और इसके अंदर हमें क्या देखने को मिलता है बेटा? इसके अंदर अगर हम लोग ध्यान से देखें, तो यहां पर हम लोग 59% तो इस देश के अंदर सबसे ज्यादा जो भाषा बोली जाती है वो 59% जो लोग हैं वो डच भाषा बोल रहे हैं और वो फ्लेमिश एरिया में रहते हैं। फिर देश के अंदर लगभग 40% के करीब जो जनसंख्या है वो वलीना एरिया में रहती है। ये हमारा पूरा का पूरा वलीना एरिया है। ये पूरा वलीनानिया एरिया है। और इस वलीना एरिया के अंदर अगर आप देखें तो यहां पर फ्रेंच भाषा बोली जा रही है। तो अब तक हमने दो बातें यहां पर देखी। सबसे पहले हमने देखा कि इस देश के अंदर 59% जो लोग भाषा बोलते हैं वो कौन सी भाषा है बच्चे? उसको डच भाषा कहा गया। फिर हमने देखा कि इस देश के अंदर जो 40% लोग रहते हैं वो कौन सी भाषा बोलते हैं और वो फ्रेंच भाषा बोलते हैं। फ्रेंच भाषा बोलने

13:03 वाले लोग कहां रहते हैं बेटा? वो वलीना नामक एरिया में रहते हैं। ये वुलीना एरिया है। और जो हमारे डच भाषा बोलने वाले लोग हैं वो कहां रहते हैं? वो हमारे फ्लेमिश रीजन में रहते हैं। ये पूरा का पूरा हमारा फ्लेमिश इलाका हमने देखा। ठीक? यहां तक की बात हमने देखी। जैसे हर एक देश की एक राजधानी होती है। जैसे हर एक राज्य की एक राजधानी होती है। वैसे ही इस बेल्जियम देश की भी हमें एक राजधानी देखने को मिलती है। क्या है? इसको ध्यान से देखें। अगर हम बात करते हैं बेल्जियम की तो हमें क्या देखने को मिला कि बेल्जियम देश के ना यहां की जो राजधानी है उसे ब्रूसेल्स कहा गया। जैसे भारत देश की राजधानी दिल्ली या फिर नई दिल्ली है। जैसे हम देखते हैं दोस्तों कि अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी है। जैसे हम लोग देखते हैं दोस्तों कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद है। तौबा तौबा तौबा तौबा किस कंट्री का नाम तुम लोगों ने मेरे से निकलवा दिया। हम्म सारा मूड खराब हो गया। चलो बात करते हैं। हम

13:49 यहां पर बात कर रहे हैं बेल्जियम के बारे में। और हमने यहां पर देखा दोस्तों कि जो हमारा ये बेल्जियम देश है इसकी राजधानी को ब्रूसेल्स कहा जाता है। और ये ब्रूसेल्स कहां है? यह जो हल्का सा आपको इलाका दिख रहा है ना बेटा यहां पर आप देखें जो हमारा ये पर्पल सा एरिया है इसे ही ब्रूसेल्स कहा गया। ये देश की राजधानी है। अच्छा अब देश की राजधानी में कहानी उल्टी हो जाती है। क्या? ब्रूसेल्स के अंदर जो 80% लोग रहते हैं वो फ्रेंच भाषा बोल रहे हैं और जो यहां पर 20% लोग रहते हैं वो डच भाषा बोल रहे हैं। देखो बच्चे इसके अंदर कंफ्यूज हो जाते हैं और आपका कंफ्यूज होना बहुत ज्यादा स्वाभाविक भी है। तो कंफ्यूज मत होइएगा। क्या बात है? हमने यहां पर सबसे पहले देखा कि इस पूरे देश के अंदर पूरे देश में अगर हम देखें बेल्जियम में सबसे ज्यादा जो भाषा बोली जा रही है वो डच भाषा है जो 59% है और 40% के लोग यहां पर फ्रेंच भाषा बोलते हैं और 1% के करीब जो

14:36 लोग हैं ध्यान से सुनिएगा 1% के करीब जो हमारे लोग हैं वो कौन सी भाषा बोलते हैं? वो जर्मन भाषा बोलते हैं। तो ये तो पूरे देश की कहानी है। पूरे देश में 59% डच भाषा उसी के साथ-साथ 40% फ्रेंच भाषा और 1% जर्मन भाषा बोलने वाले लोग दिखे। फिर हमने देखा कि देश की जो राजधानी ब्रूसेल्स है ना यहां पर कहानी उल्टी हो गई। भाई कैसे? इस देश की राजधानी में ब्रूसेल्स में फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। तो ब्रूसेल्स ये जो देश की राजधानी है यहां पर आपको दिखा कि फ्रेंच भाषा जो है यहां पर फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। वो देश में 80% है और यहां पर डच भाषा बोलने वाले लोग हमें सिर्फ 20% के आसपास रहे। इस बात को भी आपको याद रखना है। अच्छा हम देखते हैं यहां पर हमारे सामने एक शब्द आया जिसे हम लोग अल्पसंख्यक कह रहे हैं और इस अल्पसंख्यक वर्ड को समझने से पहले ना हम लोग इन दोनों शब्दों को समझने की कोशिश

15:22 करें जिसको हम लोग यहां पर देख रहे हैं। एक शब्द मैंने आपके सामने रखा जिसे हम लोग कह रहे हैं बहुसंख्यक। और दूसरा शब्द हमने आपके सामने यहां पर रखा जिसे हम लोग कह रहे हैं अल्पसंख्यक। तो कंफ्यूज मत होइएगा। बहुत अच्छे तरीके से हम लोग अपने दोनों शब्दों को समझ रहे हैं। बहुसंख्यक हैक है और अल्पसंख्यक है। चलो सबसे पहले हम लोग इसी शब्द को समझने की कोशिश करें जिसे हम लोग किस नाम से जान रहे हैं जिसे हम लोग बहुसंख्यक कह रहे हैं। यहां पर हमारे सामने शब्द है बहू और यहां पर हमारे सामने शब्द है संख्यक। सर क्या शब्द लिख दिया आपने ये? सर मम्मी ने कहा है कि अभी बहू मत लाना। जब मैं 21 साल का हो जाऊंगा ना तब बहू लेके आऊंगा। अरे मेरे नॉटी नॉटी बॉय ये वो बहू नहीं है। है ना? यूपी बिहार के अंदर जो बीवी होती है, धर्मपत्नी होती है उनको बहू भी बोला जाता है। है ना? तो

16:07 ये वो बात नहीं है भाई। तो मुस्कुरा काहे रहे हो? हैं? नॉट बॉय ध्यान से देखो। बहुसंख्यक का मतलब है कि ऐसे हमारे लोग जिनकी संख्या देश में ज्यादा होती है। है ना? वो लोग जिनकी संख्या देश में ज्यादा होती है। जिनकी संख्या देश में ज्यादा होती है उन्हें बहुसंख्यक कहा जाता है। अल्पसंख्यक का मतलब क्या है? अल्प का मतलब होता है कि जिनकी संख्या देश में कम होती है। ठीक है? तो यहां पर हमने दो शब्दों को अच्छे तरीके से समझा। हमने बहुसंख्यक को देखा और उसी के साथ-साथ हमने अल्पसंख्यक इन दोनों शब्दों को देखा। बहुसंख्यक का मतलब होता है कि जिनकी संख्या ज्यादा है। अल्पसंख्यक का मतलब है कि जिनकी संख्या कम है। अब सवाल आएगा। सवाल ये है कि इस पूरे बेल्जियम देश के अंदर कौन लोग बहुसंख्यक हैं? आप सभी को पता है सर हमें पता है कि सर यहां पर ना जो डच भाषा बोलने वाले लोग

16:54 हैं ना यह सबसे ज्यादा हैं। तो यह यहां पर क्या हुए? बहुसंख्यक हुए। बिल्कुल सही बोला आपने। अब मैं अगर आपसे पूछ लूं कि सर यहां पर अल्पसंख्यक लोग कौन है? तो आप बता देंगे कि सर यहां पर ना जो फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग हैं वो अल्पसंख्यक हैं क्योंकि वो मात्र 40% है। बिल्कुल सही बोला। आप बोल देंगे कि सर जो जर्मन भाषा बोलने वाले लोग हैं जो जर्मन है ये तो और भी ज्यादा अल्पसंख्यक हैं। सिर्फ 1% है। बिल्कुल सही। तो बेल्जियम देश के अंदर हमने यहां पर तीन मुख्य भाषाओं को देखा। डच, फ्रेंच और जर्मन। यहां पर डच भाषा वाले लोग बहुसंख्यक हैं। फ्रेंच भाषा वाले लोग और जर्मन भाषा वाले लोग हमारे अल्पसंख्यक हैं। अब यहां पर कहानी इंटरेस्टिंग होगी ये देखते हैं कैसे। हमें देखने को मिला दोस्तों कि जो ये अल्पसंख्यक लोग हैं जो फ्रेंच भाषा बोलते हैं। हमें पता है ना ये जो हमारे अल्पसंख्यक लोग हैं ये फ्रेंच भाषा बोलते हैं। इनकी संख्या कम है। फ्रेंच भाषा वाले

17:39 जो लोग हैं इनकी संख्या कम है। मगर तुलनात्मक रूप से हमें देखने को मिलता है कि ये लोग समृद्ध हैं। यानी कि ये लोग अमीर हैं। बड़ी अजीब बात है भाई। कैसे अजीब बात है कि जो फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग हैं जो देश में सिर्फ 40% थे। इन लोगों के पास पैसा अच्छा खासा था। इनके पास संसाधन अच्छे खासे थे। देश के अंदर ज्यादातर जो अमीर लोग थे वो फ्रेंच भाषा बोलते थे। और वहीं पर आप देखें दोस्तों कि जो ये बहुसंख्यक लोग थे जो डच भाषा बोलते थे इन डच भाषा बोलने वाले लोगों को लगा कि भाई देश के अंदर हम लोग तो ज्यादा हैं लेकिन ज्यादा हो के भी हम लोग गरीब ही हैं। और वहीं पर जो फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग थे उनकी संख्या कम थी। मगर ये लोग अमीर थे। तो इस देश के अंदर अमीर गरीब के बीच में हमें क्या देखने को मिलता है दोस्तों कि यहां पर हमें देखने को मिलता है कि एक तरीके से ना यहां पर हमें देखने को मिलता है दोस्तों कि इन दोनों भाषा

18:24 समूह में कौन कौन से भाषा समूह जो डच भाषा बोलने वाले लोग थे वो फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोगों से एक तरीके से क्या करने लगे ईर्ष्या करने लगे या फिर नफरत करने लगे| डच भाषा बोलने वाले लोगों ने बोला कि भाई हम 59% हैं मगर फिर भी हम गरीब है। फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोगों ने क्या करा कि दोस्तों हम 40% है लेकिन हम मेहनत कर कर एक तरीके से अमीर हुए हैं। ये बात हमने देखी। तो ये बेल्जियम का एक मानचित्र है। ये हमारे डच भाषा वाला इलाका है। ये हमारा फ्रेंच भाषा वाला इलाका है। और ये वाला जो हमारा इलाका है 1% जर्मन भाषा बोलने वाले लोगों का इलाका है। अब हुआ क्या? हमें यहां पर आता हुआ देखने को मिलता है दोस्तों कि जो शिक्षा का लाभ था वो भी हमें कहां पर देखने को मिलता है दोस्तों कि जो शिक्षा का लाभ था वो भी डच भाषा के लोगों को नहीं मिला। जिन जिनकी संख्या देश में ज्यादा है वो शिक्षा भी ज्यादा हासिल नहीं कर पाए। फ्रेंच वाले लोगों ने शिक्षा को अच्छे तरीके से हासिल कर लिया और अपने

19:09 आप को कहीं ना कहीं आगे बढ़ा लिया। अच्छा साल 1950 से साल 1960 के बीच में इन दोनों भाषा फ्रेंच और डच भाषा बोलने वाले लोगों के बीच में देश के अंदर तनाव हो गया। तनाव का मतलब कि टेंशन बढ़ गई। डच भाषा वाले लोग फ्रेंच भाषा के ऊपर हमला कर रहे हैं और जो फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग हैं वो डच भाषा बोलने वाले लोगों पर हमला कर रहे हैं। एक दूसरे के ऊपर हमले होने शुरू हो गए इस देश के अंदर। फिर हमने ये देखा दोस्तों कि जो डच भाषी लोग थे ये देश में बहुमत में थे और राजधानी के अंदर ही अल्पमत में ये बात तो आपको पता है कि पूरे देश के अंदर सबसे ज्यादा जो लोग हैं वो फ्रेंच भाषा बोलने वाले सबसे ज्यादा जो लोग हैं पूरे देश के अंदर वो हमारे डच भाषा बोलने वाले लोग हैं। है ना? इस पूरे देश के अंदर बेल्जियम में सबसे ज्यादा जो 59% भाषा बोली जाती है वो है डच भाषा। वो पूरे देश में सबसे ज्यादा है। मगर राजधानी में इनकी संख्या कम थी। आपको पता है ना कि

19:55 राजधानी के अंदर ये सिर्फ और सिर्फ 20% लोग ही रहा करते थे। ये बात हमने यहां पर आपके सामने बहुत अच्छे तरीके से रखी। अब भैया देखो इस देश के अंदर हमें परेशानी दिखी और यहां पर एक दूसरे के खिलाफ नफरत भर गई थी। डच फ्रेंच को पसंद नहीं कर रहे थे। फ्रेंच डच को पसंद नहीं कर रहे थे और इन दोनों भाषा समूहों में एक तरीके से झगड़ा दिख रहा था और जर्मन लोग चुपचाप खड़े हुए थे क्योंकि उनकी संख्या तो कम ही है। अब हमने क्या देखा? यहां पर हमें देखने को मिला कि साल 1970 से साल 1993 के बीच में। देश के संविधान में हमें दिखता है दोस्तों कि चार बार संशोधन कर दिया गया। संशोधन का मतलब क्या है? कि देश के संविधान को ही बदलाव में कर दिया। देश के संविधान में ही हम लोग बदलाव या फिर परिवर्तन होते हुए देखते हैं। यहां पर देखा गया कि जब डच लोगों ने कहा कि हमारे हिसाब से देश के संविधान में कुछ बातों को

20:41 रखो तो उनकी बात का सम्मान किया गया और उनकी बात को देश के संविधान में रखा गया। कभी फ्रेंच भाषा के लोगों ने कहा कि भाई भाई हमारी बात को देश के संविधान में रखो तो उनकी बात को भी सम्मान दिया गया और उनकी बात को भी देश के संविधान में शामिल किया गया। फिर जर्मन लोगों ने कहा कि ओ भाई हम भी तो देश में रहते हैं और हमारी बात को भी शामिल किया जाए। तो देश के अंदर ना सारी ये जो तीनों भाषाएं हमने देखी इन तीनों भाषाओं को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई और किसी को भी बेगानापन ना लगे। बेगानापन का मतलब क्या है? बेगानापन का मतलब आप लोग अच्छे तरीके से समझते हैं। जब वो आपके फोन का जवाब नहीं देती हैं। जब वो आपका रिप्लाई नहीं करती हैं। जब वो आपका मैसेज देखने के बाद जवाब नहीं देती हैं तो आपको बेगानापन लगता है। आपको बहुत लोनली लोनली लगता है। आपको बहुत अकेला लगता है कि अब मैं इस दुनिया में क्या करूंगा? मेरी जिंदगी में अब आगे क्या होगा? है ना?

21:27 इसी को हम लोग लोनली कहते हैं। तो बेंजम के अंदर इस बात का ध्यान रखा गया कि भाई किसी को भी अकेलापन ना लगे। किसी को भी बेगानापन ना लगे। किसी को भी ऐसा ना लगे किसी भी भाषा के लोगों को कि उनको देश के शासन में शामिल नहीं किया जा रहा। तीनों भाषाओं को साथ लेकर चलने की कोशिश की गई और तीनों भाषाओं को मिलजुलकर साथ-साथ लेकर चलने की कोशिश की गई। अच्छा, बेल्जियम के जो नेता लोग थे, उन्होंने समझदारी दिखाई। क्या समझदारी दिखाई? कि देश के संविधान में चार बार संशोधन कर दिया। देश के संविधान में चार बार बदलाव कर दिया और अपनी जो संस्कृति थी यानी कि जो अलग-अलग भाषाएं बोली जा रही थी इन सभी को स्वीकारा। उन्होंने बोला कि हां भाई हमारा ये देश है। हमारे देश में चार भाषा हमारे देश में ये तीन भाषाएं हैं। हम तीनों भाषाओं को सम्मान देते हैं। हम तीनों भाषाओं को समान मानते हैं और सबके साथ चलने की उन्होंने बात की। अब यहीं पर हम

22:12 लोग श्रीलंका के संदर्भ में आप सभी के साथ डिस्कशन करेंगे। एक और देश अभी हमने बेल्जियम की कहानी को आपके सामने रखा। बेल्जियम कहां पर था? कैसा था? इस देश की बनावट किस तरीके से उसको हमने समझा। अब हम लोग यहां पर आप सभी को लेके चल रहे हैं किस तरफ? हम लोग आप सभी को लेके चल रहे हैं श्रीलंका की तरफ। श्रीलंका क्या है भैया? श्रीलंका एक द्वीपीय देश है। द्वीपीय देश का मतलब क्या है? कि ये चारों तरफ से पानी से घिरा हुआ है। है ना? और श्रीलंका कहां से आता है? श्रीलंका आता है एक ऐसे इलाके से। है ना? जहां पर आप देखते हैं दोस्तों कि इस देश से हमें एक बहुत ही प्रसिद्ध व्यक्ति आता हुआ दिखता है। हम बात कर रहे हैं रावण के बारे में भैया। तो श्रीलंका जो है, है ना? ना वो प्रसिद्ध है रावण की वजह से और रावण यहां से हमें आता हुआ देखने को मिलता है। तो श्रीलंका जो है एक द्वीपीय देश है। द्वीपीय देश का मतलब कि ये चारों तरफ से हमें पानी से घिरा हुआ देखने को मिलता है। चारों तरफ से इस देश

22:59 के अंदर हमें पानी-पानी देखने को मिलता है और भारत से दक्षिण दिशा में है। जैसे अगर आप भारत के मानचित्र को देखें तो यहां पर हमें ये देश देखने को मिलता है। दक्षिण की तरफ देखने को मिलता है और कुछ ही किलोमीटर का डिस्टेंस कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर हम लोग भारत और श्रीलंका को देख लेते हैं। है ना? हिंद महासागर के अंदर ये देश उपस्थित है श्रीलंका। इसकी आबादी मात्र 2 करोड़ के आसपास है। अच्छा अगर आप ध्यान से देखें जैसे भारत अंग्रेजों का गुलाम था। कुछ वैसे ही श्रीलंका भी क्या था बेटा? कुछ वैसे ही श्रीलंका भी अंग्रेजों का ही गुलाम रहा था। है ना? एक-एक कर हम लोग इसको आप सभी के सामने यहां पर बहुत अच्छे तरीके से डिस्कस करना शुरू करते हैं। चलो श्रीलंका की जो पूरी कहानी है, इसको हम लोग बहुत अच्छे तरीके से यहां पर आपके सामने रख देते हैं। भैया जिस देश के बारे में डिस्कशन कर रहे हैं उसे बोला जा रहा है श्रीलंका। श्रीलंका की कहानी अगर हमने

23:45 देखी तो बेटा ये क्या है कि ये भारत से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और ये कैसा देश है? ये एक द्वीपीय देश है। द्वीपीय देश का मतलब क्या है बच्चे? एक तरीके से हम लोग देख पा रहे हैं कि ये चारों तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है। फिर हमने यहां पर आपके सामने देखा। क्या देखा? हमने देखा कि जो श्रीलंका था ना ये भी भारत की तरह अंग्रेजों का गुलाम रहा था। जैसे भारत को आजादी मिली। कब मिली? हमारे प्यारे भारत को आजादी मिली 15 अगस्त 1947 को। ऐसे ही हमें देखने को मिलता है दोस्तों कि जो ये श्रीलंका है, श्रीलंका को आजादी मिलती है 1948 को। साल 1948 में श्रीलंका को आजादी मिली। भारत के एक साल के बाद श्रीलंका आजाद हुआ। अच्छा श्रीलंका का एक पुराना नाम भी है जिसको हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? जिसको हम लोग बोलते हैं सिलोन। ठीक है? इसका पुराना नाम क्या था?

24:31 सिलोन। बाद में जब ये आजाद हुए तो इन्होंने अपना नाम श्रीलंका के नाम से ऑफिशियली रख लिया। आधिकारिक तौर पर रख लिया। तो श्रीलंका है। भारत के पास है। अंग्रेजों का यहां पर कब्जा रहा। भारत को आजादी मिली 15 अगस्त 1947 को। श्रीलंका को आजादी मिली साल 1948 में 1 साल के बाद भारत की आजादी के और इसका पुराना नाम सिलोन था। जब श्रीलंका आजाद हुआ तो श्रीलंका के अंदर क्या देखने को मिला दोस्तों कि यहां पर हमें लगभग 2 करोड़ के आसपास की इसकी जनसंख्या देखने को मिली। तो हमने क्या पाया कि लगभग इनकी जो जनसंख्या है वो 2 करोड़ के आसपास हमें देखने को मिली। श्रीलंका के अंदर अगर हम लोग देखें ना तो यहां पर हमें क्या देखने को मिलता है कि यहां पर भी हमें भाषा के आधार पर एक तरीके से अंतर देखने को मिलता है। किस तरीके से अंतर देखने को मिलता है? कि यहां पर भी भाषा के आधार पर हमें एक तरीके से

25:16 दो भाषा समूह देखने को मिल जाते हैं। जैसे इस देश के अंदर यहां पर एक भाषा बोली जाती है जिसको हम लोग बोलते हैं सिंगली भाषा। एक भाषा है जिसका नाम है सिंगली। और दूसरी भाषा यहां पर बोली जाती है जिसको हम लोग बोलते हैं तमिल भाषा। लो भाई तमिल भाषा आ गई। सिंगली भाषा जो बोलने वाले लोग हैं वो देश के अंदर 74% हैं। 74% के करीब जो लोग हैं वो उस देश के अंदर सिंगली भाषा बोलते हैं। और जो ये सिंगली भाषा बोलने वाले लोग हैं ना ये यहां के कैसे हैं बेटा? ये यहां के मूल निवासी हैं। मूल निवासी का मतलब कि ये लोग यहां पर हमेशा हमेशा से रहते आ रहे हैं। ये जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग हैं इनका एक अपना धर्म है। जिसे ये लोग किस नाम से जानते हैं? जिसे ये लोग बोलते हैं बौद्ध धर्म यानी कि ये भगवान बौद्ध के उपासक हैं। ये भगवान बुद्ध की पूजा करते हैं। ठीक है? सिंघली लोग श्रीलंका के मूल

26:02 निवासी हैं। यहीं पर हमेशा से रहते आ रहे हैं और इनकी जनसंख्या देश में सबसे ज्यादा है। ये लगभग 74% के आसपास है। 74% है। बात करते हैं तमिल लोगों के बारे में। तमिल ये जो हमारे लोग हैं यह भारत से ही यहां पर गए हैं। भारत का जो हमारा तमिलनाडु वाला इलाका है, भारत का जो हमारा तमिलनाडु वाला इलाका है, भारत के तमिलनाडु से अंग्रेजों ने कुछ भारत के तमिल भाषी लोगों को यहां पर बसा दिया और फिर ये यहीं पर रहना शुरू कर देते हैं। तो तमिल भाषा बोलने वाले जो लोग हैं ये भारत से भारत के तमिलनाडु से श्रीलंका में गए हैं। इनकी जनसंख्या कितनी है बेटा? इनकी जनसंख्या पूरे देश के अंदर लगभग 18% के आसपास है। और जो तमिल भाषा बोलने वाले हमारे ये लोग हमें देखने को मिलते हैं। इसके अंदर हमारे हिंदू भाई भी हैं जो हिंदू भाषा बोलते हैं। हिंदू धर्म को मानते हैं। इसके अंदर हमारे मुस्लिम

26:47 लोग भी हमें देखने को मिल जाते हैं। और इसके अंदर हमें ईसाई धर्म की भी उपस्थिति देखने को मिल जाती है। ठीक है? अच्छा। इसके अलावा श्रीलंका में जो दूसरा ग्रुप है जैसे 74% तो सिंघली लोग हुए। 18% तमिल लोग हुए। बाकी जो लोग दिखते हैं वो वहां की जनजातियां हैं। वो वहां की हमारे आदिवासी लोग हमें देखने को मिल जाते हैं। ठीक है? तो यहां तक की जो हमारी कहानी रही वो हमने अच्छे तरीके से देख ली। श्रीलंका भारत से ही भारत के बाद आजाद हुआ और भाषा के आधार पर यहां पर हमने दो भाषा समूहों को देखा। अब श्रीलंका जब आजाद हुआ तो श्रीलंका के नेताओं ने बोला कि भैया हम श्रीलंका को क्या करेंगे? श्रीलंका के नेताओं ने बोला कि हम श्रीलंका को बनाएंगे एक लोकतांत्रिक देश। लोकतांत्रिक देश का मतलब क्या है? इन्होंने बोला कि हम श्रीलंका के अंदर ना क्या रखेंगे? लोकतंत्र रखेंगे। यानी कि श्रीलंका के अंदर चुनाव होंगे और चुनाव के बाद क्या होगा कि यहां पर एक तरीके से देश में सबको

27:34 शासन में रखा जाएगा। देश को सब लोग मिलकर चलाएंगे। ये बात इन्होंने बोली लेकिन करी नहीं। श्रीलंका के अंदर श्रीलंका के नेताओं ने बोला कि हम अपने देश के अंदर लोकतंत्र लाएंगे। जैसे भारत में है, जैसे अमेरिका में है। है ना? इसकी बात इन्होंने करी। श्रीलंका आजाद हुआ और श्रीलंका में आजादी के कुछ टाइम के बाद ही टाइम आता है साल 1956 का। कब का टाइम आता है बेटा? साल 1956 का। 1956 का। सर 1956 में ये जो श्रीलंका के अंदर सिंगली भाषी लोग थे। श्रीलंका के अंदर ये जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग थे जो श्रीलंका के अंदर कैसे हैं बेटा? जो श्रीलंका के अंदर कहलाते हैं बहुसंख्यक। क्यों कहते हैं इनको बहुसंख्यक? क्योंकि इनकी संख्या ज्यादा है। तो श्रीलंका के अंदर ये जो बहुसंख्यक लोग थे जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग थे जिनकी संख्या 74% के आसपास थी। यह लोग

28:20 क्या करते हैं बेटा कि साल 1956 में ना देश के अंदर एक कानून बना रहे हैं। क्या होता है इस कानून के अंदर चलिए देखते हैं। तो सिंगली भाषा के अंदर ये जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग हैं साल 1956 में देश के अंदर एक कानून बना रहे हैं। और इस कानून के अंदर क्या करते हैं? ये लोग देश के अंदर ना ये बोलते हैं कि सिर्फ एक ही भाषा होगी। जिसे सिंगली भाषा बोला जाएगा। और सिंगली भाषा को क्या बना दिया जाता है? सिंगली भाषा को एक तरीके से राष्ट्रभाषा। राष्ट्रभाषा का मतलब क्या है? कि देश की भाषा कि इस देश के अंदर सिर्फ सिंगली भाषा के लोग ही रहते हैं एक तरीके से और सिंगली भाषा के लोगों को ही यहां पर आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। ये बात इन्होंने की। इसी के साथ-साथ साल 1956 के इस कानून में एक और चीज की गई ये बोल दिया गया कि देश के अंदर अब जितनी भी सरकारी नौकरियां निकलेंगी भाई जितनी भी सरकारी नौकरियां निकलेंगी वहां पर सिर्फ सिंगली भाषी जो लोग होंगे उन्हीं

29:06 को नौकरियां मिलेंगी। तमिल लोगों को नौकरियां नहीं मिलेंगी। कितनी गलत बात की। इसी के साथ-साथ इसी साल 1956 के कानून में इन्होंने ये बोल दिया कि अब देश के अंदर क्या होगा कि देश का एक धर्म होगा जिसे बौद्ध धर्म बोला जाएगा और देश की जो सरकार होगी वो क्या करेगी? बौद्ध धर्म को आगे बढ़ाएगी। बाकी जो धर्म है उन पे ध्यान नहीं दिया जाएगा। सिर्फ सिंगली भाषा के जो लोग हैं उन्हीं का विकास हो रहा है। उन्हीं को आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। बाकी के जो हमारे तमिल भाषी लोग हैं उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा। तो श्रीलंका के अंदर हमने साल 1956 में ये सारी चीजें होती हुई देखी। अब ये सब चीजें तो हो गई। अब हमारे जो श्रीलंका के अंदर आप देखते हैं दोस्तों कि हमने यहां पर देखा कि साल 1956 में एक कानून बना दिया गया और उस कानून के तहत जो सिंगली भाषा थी इसको देश की राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया गया कि भैया यही देश के अंदर रहेगी। सरकारी नौकरियों

29:52 में भी बोल दिया गया कि जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग होंगे उनको प्राथमिकता देंगे। यानी कि उन्हीं को नौकरियां मिलेंगी सरकारी। और देश के अंदर जो बौद्ध धर्म था उसको देश का धर्म बना दिया गया। अब ये सब चीजें जो देश के अंदर हो रही हैं क्या यहां पर सत्ता की साझेदारी हो रही है? नहीं। देश का शासन सिर्फ सिंगली लोग रख रख रहे हैं। देश की पावर को बांटा नहीं जा रहा। देश के अंदर जो पावर है उसे बांटा नहीं जा रहा। सारी शक्तियां सिर्फ सिंगली लोग ही अपने पास कर रहे हैं। तमिल लोगों ने ये देखा तो उनको ये बात बिल्कुल पसंद नहीं आई कि भाई ये क्या चल रहा है? मजाक चल रहा है क्या? ये देश तो हमारा भी है। और तमिल लोगों ने क्या किया दोस्तों कि इस इसके खिलाफ बात करनी शुरू करी। जो हमारे श्रीलंका के अंदर तमिल लोग थे उन्होंने बोला कि ये जो कानून बनाया जा रहा है ये बिल्कुल गलत है। और श्रीलंका के अंदर जो रहने वाले तमिल थे उन्होंने क्या किया कि अपनी कुछ राजनीतिक पार्टियां बनाई। कुछ अपने दल बनाए और चुनाव में भाग लेना शुरू

30:37 किया। अच्छा श्रीलंका के अंदर ये जो तमिल भाषा बोलने वाले लोग थे इन्होंने अपनी पार्टी जो बनाई उसके अंदर इन्होंने बोला कि हमारी जो भाषा है उसको देश की भाषा बनाओ। लो भाई मसला खड़ा हो गया। यहां पर झगड़ा एक तरीके से बढ़ना शुरू हो गया। सिंगली लोग बोल रहे हैं हमारी भाषा देश की भाषा होगी। सिंगली भाषा। तमिल लोगों ने बोलना शुरू कर दिया कि नहीं नहीं हमारी जो भाषा है तमिल भाषा उसको देश की भाषा बनाओ। और इसके जरिए अब यहां पर इस देश के अंदर हमें फूट पड़ती हुई दिखेगी। देश के अंदर यहां पर हमें झगड़ा आता हुआ देखने को मिलेगा। फिर क्या हुआ? ये जो तमिल भाषा बोलने वाले लोग थे इन्होंने बोला कि भैया हमारी भाषा को देश की भाषा बनाओ। मगर अगर नौकरी देने की बात होगी या फिर शिक्षा देने की बात होगी तो उसमें सबको समान तरीके से रखा जाए। ये एक अच्छी बात तमिल लोगों ने करी। तमिल लोगों ने बोला कि नहीं नहीं हमारी भाषा को देश की भाषा तो बनाना पड़ेगा। मगर शिक्षा और नौकरियां सबको दी

31:23 जाए। ये बात तमिल लोगों ने रखी। तो क्या सिंगली लोग इस बात को मानते हैं? ऐसा बिल्कुल होता हुआ नहीं दिखता। ये जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग हैं ये देश के अंदर बहुत ज्यादा है और ये जो सिंगली भाषा बोलने वाले लोग हैं जिनकी संख्या लगभग 74% के आसपास हमें दिख रही है ये लोग क्या करते हैं दोस्तों कि ये लोग तमिल लोगों को बिल्कुल भी क्या नहीं देते हैं तमिल लोगों को बिल्कुल भी अधिकार नहीं देते हैं और तमिल लोगों को बहुत परेशान किया जाता है। तमिल लोगों को बहुत अपमानित किया जाता है। तमिल लोगों की भाषा का बहुत मजाक उड़ाया जाता है। तमिल लोगों की एक तरीके से नौकरियां उनसे छीन ली जाती हैं। तमिल लोगों को श्रीलंका के अंदर किसी तरीके से भी इंसान नहीं माना जाता है। तमिल लोग इसी दौरान क्या करते हैं बेटा जो तमिल लोग थे इसी दौरान एक संगठन बना लेते हैं जिसे बोला जाता है उग्र संगठन उग्र संगठन का मतलब कि भैया अगर आप किसी को दबाते हैं अगर आप किसी को दबा रहे हैं दबा रहे हैं

32:09 दबा रहे हैं तो एक ना एक दिन वो आदमी आपको जरूर जवाब देता है और श्रीलंका के अंदर भी हम लोग यही होते हुए देखते हैं कि जब सिंगली लोगों ने तमिल लोगों को दबाना शुरू किया दबाना शुरू किया दबाना शुरू किया तो तमिल लोगों ने जवाब दिया बाउंस बैक किया और तमिल लोगों ने जब ये जवाब दिया तो उन्होंने उठा उठा लिए हथियार तमिल लोगों ने क्या किया कि एक तरीके से हथियार उठा लिए उग्र संगठन ठन का मतलब कि हथियार उठा लिए और इन्होंने बनाया एक संगठन जिसे बोला जाता है लिबरेशन टाइगर ऑफ़ तमिल इलम। ये रहा वो संगठन का एक तरीके से इनका लोगो जिसको हिंदी के अंदर हम लोग शॉर्ट फॉर्म में लिट्टे कहते हैं। इंग्लिश में एलटीटीई बोला जाता है लिबरेशन टाइगर ऑफ़ तमिल इलम। तो श्रीलंका के अंदर तमिल भाषा वाले लोगों ने हथियार उठा लिए और बोला कि भैया अब लड़ाई होगी। अब आर और पार की लड़ाई है। और ये दोनों समूह जो थे एक ही देश के जो ये लोग हैं सिंगली लोग और तमिल लोग एक दूसरे के खिलाफ लड़ते रहे और ये देश गृह युद्ध

32:56 में चला गया। गृह युद्ध का मतलब क्या है? कि एक ही देश के लोग आपस में लड़ रहे हैं। बाहर से हमला नहीं हुआ। सिंगली और तमिल लोगों ने ही देश के अंदर मारकाट मचाई जिसमें लाखों तमिल लोग मरे। लाखों सिंघली लोग मरे और ये देश बहुत बुरे तरीके से परेशान में रहा और इस देश के अंदर हमें गृह युद्ध होता हुआ देखने को मिला। अच्छा जो श्रीलंका के अंदर हमारे ये तमिल लोग थे ना इन्होंने एक और डिमांड करी थी क्या? इन लोगों ने बोला था कि श्रीलंका के अंदर ये जो नॉर्दन इलाका है, श्रीलंका के अंदर ये जो उत्तर पूर्व का इलाका है, ये अपने लिए एक अलग देश बनाने की बात कर रहे थे जिसे ये बोलते थे तमिल इल्म। तमिल इलम का मतलब क्या है? कि तमिलों के लिए एक अलग देश बन जाए। है ना? तो यहां पर हमने एक चीज देखी और बहुत इंटरेस्टिंग चीज देखी। क्या? हमने दो देशों के बारे में एग्जांपल्स को देखा और हमने देखा कि बेल्जियम देश के अंदर भी परेशानी थी। मगर बेल्जियम के जो नेता लोग

33:41 थे उन्होंने क्या किया बेटा कि जो बेल्जियम के नेता लोग थे उन्होंने एक तरीके से क्या दिखाई? समझदारी दिखाई। सर कैसे समझदारी दिखाई? बेल्जियम के नेता लोगों ने यह देखा कि भैया हमारे यहां पर अलग-अलग संस्कृति के लोग रहते हैं। हमारे यहां पर अलग-अलग भाषाएं बोली जा रही है। बेल्जियम के अंदर नेताओं ने देखा डच भी है, फ्रेंच भी है और जर्मन भी है। और इसीलिए इन्होंने क्या किया दोस्तों कि देश के अंदर सारी भाषाओं को सम्मान दिया और देश के अंदर सारी भाषाओं को समान माना। यहां पर क्या किया गया कि बेल्जियम के अंदर एक तरीके से बहुत इंटरेस्टिंग बात की गई। क्या बात की गई? इसको हम लोग यहां पर अच्छे तरीके से देखें कि बेल्जियम के अंदर हमें झगड़ा होता हुआ नहीं दिखा। देखो झगड़े तो दोनों देशों में थे। श्रीलंका के अंदर भी लड़ाई हो रही थी तमिल और सिंगली के बीच में और बेल्जियम के अंदर भी फ्रेंच और डच वाले लोगों में झगड़ा था। लेकिन बेल्जियम के अंदर हमें देखने को मिलता है

34:27 कि वहां पर गृह युद्ध नहीं हुआ। वहां पर देश के लोगों ने आपस में एक दूसरे को नहीं मारा काटा। मगर श्रीलंका के अंदर ऐसा हुआ। क्यों हुआ? बेल्जियम के अंदर लड़ाई क्यों नहीं हुई? अगर हम लोग ध्यान से देखें कि बेल्जियम के अंदर जो हमें लड़ाई होती हुई नहीं दिखती। उसका सिंपल कारण है कि बेल्जियम के अंदर एक चीज हुई है जिसे बोला जाता है सत्ता की साझेदारी। कि बेल्जियम के नेताओं ने इस बात को समझा कि भाई हमारा जो देश है वो सारी संस्कृतियों को रख रहा है और हमें सबको साथ लेकर चलना होगा। क्या किया गया बेल्जियम के अंदर इसको हम लोग देख लेते हैं। बेल्जियम के अंदर वहां के नेताओं ने बहुत बड़ी समझदारी दिखाई और इस समझदारी को हम लोग किस तरीके से देखते हैं वहां पर ना एक तरीके से क्या किया गया कि देश के अंदर तीन तरीके की सरकारें बनाई गई। एक को बोला गया केंद्र सरकार। बेल्जियम के अंदर तीन तरीके की सरकार बनाई। एक को बोला गया केंद्र सरकार और ये

35:14 केंद्र सरकार क्या करेगी? ये केंद्र सरकार पूरे देश का क्या करेगी बेटा? विकास करेगी। पूरे देश का ध्यान रखेगी। इसके लिए केंद्र सरकार को बनाया गया। और इस केंद्र सरकार के अंदर सर इन्होंने डच भाषा वाले लोगों को रखा। जी हां। इन्होंने बच्चे आप देखते हैं दोस्तों कि इसी के साथ-साथ फ्रेंच भाषा वाले लोगों को रखा और उसी के साथ-साथ इन्होंने जर्मन भाषा तीनों भाषा के लोगों को इसके अंदर शामिल किया। किसी एक को साथ लेकर नहीं चले। सबको साथ जोड़ा। सबका साथ सबका विकास किया। सत्ता की साझेदारी की। उसी के साथ-साथ बेल्जियम के अंदर इन्होंने क्या किया कि अपने यहां पर राज्यों को लेकर भी सरकार बनाई। क्या किया बेटा? कि यहां पर इन्होंने हर राज्य के लिए अपनी एक राज्य सरकार बनाई और इस राज्य सरकारों के अंदर भी हमें डच लोग दिखे। डच भाषा बोलने वाले लोग। इसके अंदर हमें फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग दिखे। और इसी के साथ-साथ इसके अंदर हमें जर्मन भाषा

35:59 बोलने वाले लोग दिखे। भैया सबको साथ ले ये चल रहे हैं। किसी को अकेला नहीं छोड़ रहे हैं। किसी को लोनली फील नहीं होने दे रहे हैं। सबको साथ ले चल रहे हैं। और वहीं पर एक और बड़ी समझदारी इन्होंने दिखाई कि अपने देश में इन्होंने तीसरी सरकार बना दी जिसको ये लोग किस नाम से जानते हैं बेटा? जिसको ये लोग बोल रहे हैं सामुदायिक सरकार। और सामुदायिक सरकार का मतलब क्या है बच्चे? सामुदायिक सरकार का मतलब है कि यहां पर ये बोल दिया गया कि देश में अगर शिक्षा संबंधी कोई कानून बनाना होगा। देश में अगर कोई भाषा संबंधी कानून बनाना होगा तो वो सामुदायिक सरकार बनाएगी और इस सामुदायिक सरकार के अंदर भी डच के लोग शामिल हैं भाषा बोलने वाले फ्रेंच भाषा बोलने वाले लोग इसके अंदर शामिल हैं और उसी के साथ-साथ इसके अंदर हमें जर्मन भाषा बोलने वाले लोग भी देखने को मिल रहे हैं तो सबको साथ लेकर बेल्जियम चला और तीन

36:44 तरीके की सरकार बना डाली केंद्र सरकार राज्य सरकारें और तीसरी हमारी सामुदायिक सरकार जो शिक्षा और भाषा पर कानून बना रही है। जब श्रीलंका के अंदर जब हमने बेल्जियम के अंदर यह देखा दोस्तों कि ये सारी चीजें की गई कि वहां पर एक तरीके से केंद्र सरकार जो पूरे देश को संभालेगी। राज्य सरकारें जो वहां पर क्या करेंगी? राज्यों को संभालेंगी और वहीं पर हमने देखा कि तीसरी हमारी सामुदायिक सरकार रखी जो वहां पर क्या करेगी? भाषा संबंधी और शिक्षा संबंधी नियम बनाएगी। और यहां पर क्या किया गया कि एक तरीके से हमने श्रीलंका हमने बेल्जियम के अंदर क्या देखा? हमने बेल्जियम के अंदर सत्ता की साझेदारी होती हुई देखी। देश को चलाने की जो पावर थी वो सिर्फ एक समूह के पास नहीं रही। उसको सबके साथ हम लोग बढ़ते हुए देखते हैं। अच्छा क्या सत्ता की साझेदारी जरूरी है? अब ये सवाल हमारे दिमाग में आता है। हमारी पाठ्यपुस्तक हमसे ये सवाल पूछती है। हमने यहां पर दो देशों के एग्जांपल्स को तो

37:29 देखा और हमें ये बात कहीं ना कहीं समझ में आई कि भाई सत्ता की साझेदारी करनी तो जरूर चाहिए। सर क्यों करनी चाहिए? भाई अगर नहीं करोगे तो श्रीलंका जैसा हाल होगा। अगर नहीं करोगे तो देश के अंदर मारकाट मच जाएगी। देश के अंदर गृह युद्ध हो जाएगा। देश का विकास पूरे तौर पर खत्म हो जाएगा। वहीं अगर सत्ता की साझेदारी की गई, देश के शासन में सबको शामिल किया गया तो वो देश आगे बढ़ता है। उस देश के अंदर लड़ाईयां नहीं होती हैं और वो देश बेल्जियम की तरीके से आगे बढ़ जाता है। तो सत्ता के बंटवारे के पक्ष में हमें दो बातें दिखती हैं कि हमें सत्ता की साझेदारी क्यों करनी चाहिए? कि किसी भी देश के अंदर हमें देश को चलाने की पावर क्यों बांटनी चाहिए? इसके लिए हमारे पास दो बातें आई। पहला तर्क यानी कि पहली बात जो हमें आती हुई दिखती है कि अगर कोई भी देश है वहां पर आप देखते हैं दोस्तों कि अगर वहां पर जो लोग रहेंगे उनके बीच में झगड़े होते ही हैं।

38:15 जैसे आप अपने घर में ही देखें आपके भाई बहन होंगे उनके बीच में झगड़े हो ही जाते हैं। आपके माता-पिता होंगे उनके भाई बहन होंगे उनके बीच में भी झगड़े हो ही जाते हैं। है ना? झगड़ा होना सामान्य बात है। टकराव होना सामान्य बात है। लड़ाई होना सामान्य बात है। मगर उस लड़ाई को बैठकर सॉल्व करना भी एक बहुत ही अच्छी बात है कि लड़ाई हो गई। कोई बात नहीं हो जाती है लड़ाई। चलो आओ बैठते हैं। इस समस्या का समाधान निकालते हैं। यहां पर यही बात की जा रही है कि हां किसी भी देश के अंदर टकराव होना बहुत ही सामान्य बात है। लेकिन जब आप देश के शासन में सबको शामिल करते हैं तो सबको लगता है कि भाई ये तो मेरा ही देश है और हमें ही इस देश को संभालना है तो सत्ता की साझेदारी क्या करती है दोस्तों कि जो टकराव है जो झगड़ा है उसकी आशंका को उसकी संभावना को कम कर देती है। और उसी के साथ-साथ दोस्तों कि जहां-जहां पर हमें सत्ता की साझेदारी होती हुई दिखती है, वहां पर हमें लोकतंत्र होता हुआ दिखता

39:02 है कि लोकतांत्रिक देशों में ही सब लोग क्या करते हैं दोस्तों कि साथ ही हाथ बढ़ाना एक दूसरे की मदद करते हैं और देश को सब लोग मिलकर चलाते हैं। और सत्ता की साझेदारी क्या कहलाती है? लोकतंत्र की आत्मा कहलाती है कि जहां-जहां पर हमें लोकतंत्र देखने को मिलेगा। जहां-जहां पर हमें क्या देखने को मिलेगा? जहां-जहां पर हम लोग देखते हैं दोस्तों कि हमें एक तरीके से लोकतंत्र देखने को मिलता है। वहीं पर सत्ता की साझेदारी की भी हमें उपस्थिति देखने को मिल जाती है। बढ़ते हैं आगे। अब यहां पर हमारे सामने सवाल आ रहा है कि सत्ता की साझेदारी की जरूरत क्यों है? है ना? आवश्यकता क्यों है? इसको और अच्छे तरीके से देखें कि अगर आप चाहते हैं कि समाज में सौहार्दपूर्ण माहौल रहे। सौहार्दपूर्ण मतलब भाईचारा बना रहे। अगर आप चाहते हैं कि समाज के अंदर शांति बनी रहे। सर शांति कौन हमारी क्लास में बढ़ती है रोल नंबर 16। अरे नहीं भाई शांति का मतलब है कि लोग प्रेम पूर्वक तरीके से रहे कि समाज के अंदर भाईचारा बना रहे। समाज के

39:48 अंदर शांति बनी रहे। तो देश के अंदर सत्ता की साझेदारी जरूरी होती है। जैसे बेल्जियम के अंदर किया गया। जैसे भारत के अंदर हम लोग देखते हैं। इससे जो आपके सामाजिक समूह हैं उनके बीच में जो टकराव हैव है कि लोगों में झगड़ा तो होगा लेकिन देश के शासन में अगर आप सबको शामिल करते हैं तो इससे जो झगड़े हैं उनकी संभावना हमें कम होती हुई दिखती है। और किसी भी समाज में हम देखें दोस्तों कि किसी भी समाज में जो बहुसंख्यक लोग होते हैं जिनकी संख्या ज्यादा होती है वो कहीं ना कहीं अल्पसंख्यक लोगों को दबाने की कोशिश करते हैं। जैसे श्रीलंका के अंदर हमने देखा बहुसंख्यक लोग हैं सिंघली लोग और श्रीलंका के तमिल लोगों को दबा रहे हैं। लेकिन जब सत्ता की साझेदारी होगी ना तो हम लोग क्या कर सकते हैं दोस्तों? तो हम लोग जो अल्पसंख्यक लोगों को डर होता है कि भाई हमारी संख्या कम है। अल्पसंख्यक लोगों के ऊपर जो आतंक बना रहता है, डर बना रहता है कि बहुसंख्यक लोग उनको दबाएंगे तो ये खत्म हो जाता है। तो सत्ता की साझेदारी करना

40:35 बहुत जरूरी है। क्यों? क्योंकि इससे देश के अंदर प्रेम रहता है। इससे देश के अंदर शांति रहती है। इससे देश के अंदर भाईचारा मजबूत होता है। और जो बहुसंख्यक लोग डर बनाकर रखते हैं। अगर देश के शासन में सबको शामिल किया जाए तो जो डर है ये खत्म होता है और देश के अंदर कहीं ना कहीं सब लोग एक तरीके से आगे बढ़ते हैं। और लोगों की जो आवाज है दोस्तों वो हमें लोकतांत्रिक तौर पर कि जहां-जहां पर हमें लोकतंत्र देखने को मिलता है वहां पर हम लोग सत्ता की साझेदारी देखते हैं। और इसीलिए सत्ता की साझेदारी को लोकतंत्र का एक तरीके से क्या कहा जाता है? आत्मा भी कंसीडर किया जाता है। अब पेपर में यहां से एक सवाल बनता है। उसे अच्छे तरीके से देखते हैं और बच्चे इसको लेके कंफ्यूज भी हो जाते हैं। सवाल क्या है? सवाल है कि सत्ता की साझेदारी की हमें आवश्यकता के संदर्भ में हम लोग देखें कि हमें ना सत्ता की साझेदारी आखिर करनी क्यों चाहिए? कि क्या इसके दो कारण हैं? इसकी दो वजह बताओ कि सत्ता की साझेदारी

41:22 हमारे लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। पहला कारण कहलाता है समझदारी भरी बात। जिसे हम लोग एक और नाम से भी जानते हैं जिसे हम लोग किस नाम से जानते हैं बेटा? जिसे हम लोग कहते हैं युक्ति परक कारक। है ना? युक्ति परक कारक। आप इसे युक्ति परक कारक बोल दो, युक्ति परक कारक बोल लो। बात एक ही है। यह समझदारी भरी बात है। भाई बेल्जियम के अंदर रहने वाले लोगों ने समझदारी दिखाई कि नहीं दिखाई? जी जी सर बिल्कुल दिखाई। उनको पता था कि हमारे यहां पर अटेंशन बन चुकी है। हमारे यहां पर झगड़े होने लग जाएंगे। अगर हमने सबको शामिल नहीं किया। तो सत्ता की साझेदारी करना तो एक समझदारी भरी बात है। एक युक्ति परक वाली बात है। युक्ति परक मतलब कि समझदारी वाली बात है कि आप देश के शासन में सबको शामिल करते हैं। और उसी के साथ-साथ सत्ता की साझेदारी हमें क्यों करनी चाहिए? क्योंकि ये एक नैतिक कारण है। नैतिक कारण का मतलब क्या है? कि ये एक मानवतावादी कारण है। ये मानवीय कारण है।

42:08 मानवीय कारण का मतलब क्या है बेटा? कि जैसे अगर हम लोग श्रीलंका के अंदर देखें जो लोग श्रीलंका के अंदर तमिल लोग थे। अरे भाई वो भारत से वहां गए थे। लेकिन उसके बाद तो वो वहीं रह रहे थे। श्रीलंका को आगे बढ़ाने में योगदान दे रहे थे। वो मानव थे। वो मनुष्य थे। इंसानियत के नाते आपको आपके देश के अंदर जो रहने वाले लोग हैं उनको देश के शासन में शामिल करना चाहिए। तो सत्ता की साझेदारी करने के हमारे दो कारण हमने देखे। पहला कारण हमने देखा दोस्तों जिसे हमने कहा युक्ति परक कारक यानी कि समझदारी वाली बात यही है कि सबको साथ ले चलें और सबको साथ ले चलेंगे तो बेल्जियम की तरह आगे बढ़ेंगे और दूसरी बात है कि भाई हमारा नैतिक कारण भी है। नैतिक कारण का मतलब कि ये नैतिकता है। ये मानवता है कि जो लोग आपके देश में रहते हैं वो आपके देश के ही हैं। और उनको आपको अपने देश का नागरिक मानना होगा और उनको साथ लेके चलना होगा। ये बात हमने देखी। है ना?

42:54 सत्ता की साझेदारी क्या करती है दोस्तों? कि समाज में जो बहुसंख्यक लोग हैं जो एक तरीके से अपना डर बनाए हुए हैं उनके डर को भी कम करने के लिए हमारी सत्ता की साझेदारी एक बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान देती है और ये बहुत जरूरी है किसी भी देश को अच्छे तरीके से आगे बढ़ाने के लिए और उस देश को अच्छे तरीके से मजबूती की ओर ले जाने के लिए। अब हम लोग यहां पर देखते हैं कि क्या भारत के अंदर हमें सत्ता की साझेदारी दिखती है। अगर है तो किस तरीके से ये हम लोग देखें। देखो भारत की अगर हम लोग बात करें अपने प्यारे भारत देश की अगर हम लोग बात करें तो हमें क्या देखने को मिलता है दोस्तों? हमारे सामने सबसे पहले यहां पर एक बिंदु आ जाता है भारत। भारत अगर हम लोग देखें दोस्तों दुनिया का सबसे महान देश अपना प्यारा भारत। भारत एक कैसा देश है? भारत एक लोकतांत्रिक देश है। लोकतांत्रिक देश का मतलब क्या है? कि भारत को हम लोग एक डेमोक्रेटिक कंट्री कहते

43:40 हैं। सर लोकतांत्रिक देश का मतलब क्या हुआ? लोकतांत्रिक देश का मतलब हुआ कि भारत के अंदर होते हैं चुनाव। और भारत देश के अंदर हमें क्या दिखता है बेटा कि हर 18 साल से जो बड़े लोग होते हैं वो क्या करते हैं दोस्तों कि वो अपना वोट देते हैं। वो अपना क्या करते हैं दोस्तों कि वो अपना वोट देते हैं। और देश के अंदर हमें क्या दिखता है दोस्तों कि देश के अंदर हमें देखने को मिलता है कि देश के अंदर जो व्यक्ति सबसे ज्यादा वोट हासिल कर लेता है उसे नेता बोला जाता है। ऐसा ही तो होता है। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। क्यों? क्यों? क्योंकि भारत में चुनाव होते हैं। भारत में 18 साल से बड़े जो लोग हैं सभी लोग वो देश में अंदर वोट देते हैं और जो आदमी सबसे ज्यादा वोट हासिल कर लेता है जिसे सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं उसे नेता कहा जाता है। अब एक अकेला नेता तो पूरे देश को नहीं संभाल सकता। इसीलिए नेता लोग क्या करते हैं दोस्तों? कि नेता लोग अपना

44:25 एक समूह बनाते हैं। और इसी समूह को हम लोग क्या कहते हैं बेटा? इसी समूह को हम लोग सरकार कहते हैं या फिर इसी समूह को हम लोग गवर्नमेंट कहते हैं। और ये गवर्नमेंट क्या है कि जो हमारे नेता लोग हैं अकेला नेता तो पूरे देश को या फिर पूरे राज्य को या फिर पूरे शहर को नहीं संभाल सकता। तो जितने भी हमारे जीते हुए नेता लोग होते हैं ये अपना एक समूह बनाते हैं, अपना एक ग्रुप बनाते हैं और इसी समूह को हम लोग सरकार कहते हैं या फिर एक तरीके से गवर्नमेंट कहते हैं। और ये गवर्नमेंट क्या करती है बेटा? यह गवर्नमेंट ही देश को संभालती है। ये जो हमारे जीते हुए नेता लोग होते हैं, इन्हीं के समूह को सरकार कहा गया और यही सरकार देश को चलाती है। ये दो काम करती है। ये देश को चलाने के लिए कानून बनाती है। है ना? क्या करती है बेटा? ये नए कानूनों को बनाती है। और जो पुराने कानून बने हुए हैं उनमें क्या करती है बेटा? उनमें एक तरीके से संशोधन करती है या फिर बदलाव करती है। यही बात हमने

45:13 यहां पर आपके सामने देखी कि अगर अब भारत को देखें तो भारत एक लोकतांत्रिक देश हमें देखने को मिला। और भारत के लोकतांत्रिक स्वरूप को अगर हम लोग समझे तो हमारे यहां पर चुनाव होते हैं और हमारे यहां पर जो चुनाव होते हैं तो इसमें हमें क्या देखने को मिलता है कि हमारे चुनाव में जो व्यक्ति जीत जाते हैं जिनको लोग वोट देते हैं वोट को मताधिकार बोला जाता है। है ना? और हमारे नेता लोग जीत जाते हैं। अब ये जो जीते हुए नेता लोग हैं ये क्या करते हैं दोस्तों कि अपना एक ग्रुप बनाते हैं जिसे सरकार कहा जाता है। अब सरकार पूरे देश को पूरे राज्य को पूरे शहर को चलाती है। सरकार दो काम करती है। जो पुराने कानून है उनके अंदर बदलाव करती है और जो नए कानून है उनको कहीं ना कहीं क्या करती है दोस्तों कि हम लोग निर्मित करते हुए देखते हैं। अच्छा अगर हम लोग देखें दोस्तों कि भारत देश के अंदर जो सत्ता की साझेदारी है कि क्या भारत के अंदर देश को चलाने की पावर सिर्फ एक धर्म के पास है? क्या भारत

46:00 के अंदर देश को चलाने की पावर सिर्फ एक भाषा वाले लोगों के पास है? क्या भारत के अंदर देश को चलाने की जो जिम्मेदारी है एक संस्कृति वालों के पास है? ऐसा हमें होता हुआ नहीं दिखता। भारत देश की हर जनता, भारत के जो हर एक नागरिक है, भारत के अंदर हम देखते हैं दोस्तों कि जो हमारी जनता है ना इसी के पास पूरी-पूरी शक्ति हमें देखने को मिलती है और भारत के अंदर हमें पूर्णतः एक एक संतुलित लोकतंत्र देखने को मिलता है। भारत के अंदर चाहे आप किसी भी धर्म से हो, किसी भी जाति से हो, किसी भी भाषा से हो। आप देश के अंदर नेता बन सकते हैं। आप देश के अंदर किसी भी सरकारी नौकरी में आ सकते हैं। आप देश के अंदर किसी भी समूह के अंदर क्या है दोस्तों कि आप किसी भी जाति से आए, किसी भी भाषा से आए। आप ऊंचे से ऊंचे पद पर आ सकते हैं। देश के अंदर कोई भी कार्य कर सकते हैं। सबको साथ लेकर चलता है हमारा प्यारा भारत। है ना? और भारत के अंदर सभी को वोट देने का अधिकार दिया गया है। है ना? और भारत क्या करता है दोस्तों

46:46 कि भारत के अंदर जो हमारा भारत है वह सब की बातों को सुनता है और सब की बातों को ध्यान में रखकर ही क्या करता है दोस्तों? आगे चलने की कोशिश करता है। अब यहां से हम लोग क्या करेंगे? यहां से हम लोग देखेंगे और बहुत इंटरेस्टिंग पॉइंट हमारे सामने आएगा कि भारत के अंदर सत्ता की साझेदारी होती है। ये बात तो हमने देखी कि देश के शासन में सब लोग हैं। हमारे देश के अंदर एक जाति के नेता नहीं है। हमारे देश के अंदर एक भाषा बोलने वाले नेता नहीं है। हमारे देश के अंदर एक धर्म वाले नेता नहीं है। सारी जातियां, सारी भाषाएं, सारे अलग-अलग समूह, सारी अलग-अलग संस्कृति के लोग दिखते हैं। और देश को ये सभी लोग मिलकर चला रहे हैं। तो भारत में सत्ता की साझेदारी तो होती है। ये बात तो हमें पता है। लेकिन कितने तरीके से होती है और कैसे-कैसे होती है? चलिए इसको हम लोग यहां पर समझने की कोशिश करें। सबसे पहला बिंदु आया क्या? कि अगर आप ध्यान से देखें हमारे

47:32 प्यारे भारत देश की अगर हम लोग बात करते हैं बेटा, तो हमें देखने को मिलता है कि भारत में सत्ता की साझेदारी के हमें क्या देखने को मिलते हैं? चार रूप देखने को मिलते हैं। यानी कि भारत के अंदर सत्ता की साझेदारी चार तरीके से होती हुई देखने को मिल जाती है। इसमें से जो सबसे पहला तरीका है, इसे हम लोग क्या बोलते हैं? इसे बोलते हैं सत्ता की साझेदारी का उद्वादर वितरण। है ना? तो देश के अंदर हमारे यहां पर सत्ता की साझेदारी चार तरीके से होती है। इसमें ये सबसे पहला तरीका है जिसे बोल रहे हैं सत्ता की साझेदारी का उत्पादन वितरण। इसमें क्या होता है? इसमें हम लोग देखते हैं दोस्तों कि हमारे देश को चलाने के लिए जो हमारी सरकारें हैं, है ना? जो हमारे देश की सरकारें हैं उनके बीच में शक्तियों को बांटा जाता है। उत्पादक वितरण को हम लोग इंग्लिश में बोलते हैं वर्टिकल डिस्ट्रीब्यूशन। इसका मतलब क्या है? कि हमारे देश के अंदर भारत देश में तीन तरीके की सरकारें हैं। हमारे देश के अंदर जो

48:17 केंद्र सरकार है जो पूरे देश को संभालती है उसे सबसे ऊपर रखा जाता है। जो राज्य सरकारें हैं ये उससे थोड़ी कम शक्तिशाली होती है वो उसके नीचे आती है और स्थानीय सरकार सबसे कम शक्तिशाली होती है तो सबसे नीचे आती है। तो देश के अंदर हमारे यहां पर जो एक तरीके से सरकारों के बीच में जो शक्तियां है देश के अंदर जो देश को चलाने की शक्ति है वो सरकारों में बंटी हुई है। सबसे पहले तरीके से अगर हम देखें और यहां पर जो सबसे शक्तिशाली सरकार होती है उसको सबसे ऊपर रखा जाता है जो केंद्र सरकार है। दूसरी हमारी राज्य सरकारें होती हैं और तीसरी हमारी क्या होती है? स्थानीय सरकार। तो भारत देश के अंदर हां सत्ता की साझेदारी होती है। इसमें सबसे पहला तरीका हमने देखा कि हम लोग अपनी सरकारों में ही शक्तियों को बांटते हैं। जो सबसे शक्तिशाली है वो सबसे ऊपर है जो केंद्र सरकार है। जो उसके नीचे है वो राज्य सरकार है। और जो सबसे नीचे सबसे कम शक्तिशाली है

49:03 वो हमारी स्थानीय सरकार कहलाती है। और सत्ता की साझेदारी का जो ये बंटवारा है ये उध्वादर वितरण कहलाता है। याद रखिएगा यानी उद्वादर उध्वादर वितरण का मतलब कि टॉप टू बॉटम सबसे ऊपर से फिर स सबसे ऊपर सबसे शक्तिशाली फिर उससे कम शक्तिशाली और फिर सबसे कम शक्तिशाली इस बिंदु को हमने देखा हमारे भारत देश के अंदर ना सत्ता की साझेदारी का ये हमारे पास दूसरा प्रतिबिंब देखने को मिलता है जिसे हम लोग क्या बोलते हैं बेटा जिसे हम लोग बोलते हैं क्षैतिज वितरण अब क्षैतिज वितरण का मतलब क्या है अगर हम लोग ध्यान से देखें तो हमारे भारत देश के अंदर ना हमें क्या देखने को मिलता है हमें देखने को मिलता है कि हमारे भारत देश के अंदर हमारे तीन बड़े ऑफिसिसेस हमारे देश को चलाने के लिए हमारे पास हमारे तीन बड़े ऑफिस हैं। या फिर हम लोग इनको एक और नाम से भी जानते हैं कि हमारे भारत देश के अंदर ये हमारे तीन बड़े संस्थान हैं। कौन-कौन से संस्थान हैं?

49:48 हमारे यहां पर विधायिका है जिसको हम लोग संसद कहते हैं। ऐसे ही हमारे पास क्या है बेटा? कार्यपालिका जितने भी हमारे सरकारी लोग आते हैं और एक है हमारी न्यायपालिका। देखिए हमारे देश के अंदर जो सत्ता की साझेदारी का उद्वादर वितरण हुआ था उसमें सबसे शक्तिशाली जो सरकार थी वह सबसे ऊपर रखी जाती है। उसके बाद उससे कम शक्तिशाली और फिर सबसे कम शक्तिशाली हमारी स्थानीय सरकार होती है। लेकिन जब हम बात करते हैं सत्ता की साझेदारी के क्षेत्रज वितरण का तो इसके अंदर हमें देखने को मिलता है कि हमारे यहां पर देश के अंदर तीन संस्थान हैं। हमारे देश को संभालने के लिए हमारे ये तीन ऑफिसिसेस हैं। एक को हमने बोला विधायिका, एक को हमने बोला कार्यपालिका और एक को हमने बोला न्यायपालिका। और इन तीनों को समान शक्तियां दी गई हैं। ये तीनों समान है। इनमें कोई ऊपर नीचे नहीं है। तीनों को बिल्कुल इक्वल रखा गया है। जब देश के देश को चलाने की जो हमारे ये तीन

50:35 बड़े-बड़े ऑफिस हैं, तीन बड़े-बड़े संस्थान हैं और इन तीनों को समान शक्तियां दी जाती हैं। समान शक्तियां इनके बीच में बंटी होती हैं। इसे ही क्षैतिज वितरण कहा जाता है। हमारी जो ये विधायिका है या फिर ये जो संसद है ये देश को चलाने के लिए क्या करती है बेटा? यह देश को चलाने के लिए कानून का निर्माण करती है। हमारी जो ये कार्यपालिका है जो कानून बने हैं उनको क्या करती है बेटा कि लागू करती है। और जो हमारी न्यायपालिका क्या करती है कि जो कानून को नहीं मानते उनको दंड देती है। और अगर किसी के साथ कोई अन्याय हो गया है तो उसे न्याय देने की भी जिम्मेदारी हमारी न्यायपालिका की होती है। हमारे देश के अंदर क्या है दोस्तों कि ये सत्ता की साझेदारी का एक दूसरा तरीका है कि जहां पर तीन ऑफिस हैं देश को चलाने के लिए और इन तीनों के बीच में इक्वल तरीके से हमारी जो पूरी की पूरी पावर है वो डिस्ट्रीब्यूट होती है। हमारे देश के अंदर देश की पावर को चलाने का ये तीसरा तरीका कहलाता है

51:21 जिसे हम लोग बोलते हैं सामाजिक समूह। कि हमारे यहां पर ना हमें अलग-अलग समूह देखने को मिलते हैं। जैसे अगर आप भारत को देखें हमारे प्यारे भारत में अलग-अलग भाषाएं हैं। अलग-अलग जातियां हैं। और उसी के साथ-साथ आप देखें दोस्तों कि हमारे देश के अंदर हम लोग सभी भाषाओं को सभी जातियों को साथ लेकर चलने की बात करते हैं। हमारे देश के अंदर ना कुछ ऐसे लोग हैं जो हम सभी से बहुत पीछे रह गए। भारत के अंदर ना जातीय तौर पर हमें बहुत ज्यादा विभाजन देखने को मिला। आजादी से पहले भारत के अंदर हमारे यहां पर जाति बनावट बहुत ज्यादा खतरनाक थी। हमारे यहां पर जाति के आधार पर बहुत मतभेद किया जाता था और आज भी ग्रामीण इलाकों में ऐसा होता हुआ देखने को मिलता है। हमारे देश में हमारे कुछ लोग हैं जिन्हें हम लोग पिछड़े वर्ग के नाम से जानते हैं। जिन्हें हम लोग बोलते हैं ओबीसी अदर बैकवर्ड क्लासेस इन्हें बोला जाता है। इनको भारत के अंदर क्या दिया

52:07 जाता है? आरक्षण दिया जाता है। ताकि देश के शासन में ये लोग शामिल हो सके। क्योंकि हम सब तो बहुत आगे निकल गए। मगर ये जो हमारे लोग हैं ना ये बहुत ज्यादा पीछे रह गए। ऐसे ही भारत के अंदर हमें देखने को मिलता है दोस्तों कि जो हमारा अल्पसंख्यक समुदाय है जिनकी संख्या हमें कम देखने को मिलती है या फिर भारत के अंदर हमारे ओबीसी अन्य पिछड़ा वर्ग मतलब हमारी ओबीसी जो लोग हैं अनुसूचित जाति का मतलब हमारे जो एससी कम्युनिटी के भाई हैं हमारे दलित भाई हैं। ऐसे ही हमारे अनुसूचित जनजाति के जो हमारे आदिवासी भाई हैं ये सभी लोग बहुत पीछे रह गए हैं। हम सभी लोग बहुत आगे रह गए हैं। तो सबको साथ में लाने के लिए क्या किया जाता है? हम लोग भारत के अंदर आरक्षण देते हैं। कैसे देते हैं आरक्षण? इसको हम लोग यहां पर समझेंगे। जैसे हम सभी लोग आगे निकल गए बहुत ज्यादा। हमने शिक्षा हासिल कर ली। हमने अच्छी-अच्छी नौकरियां हासिल कर ली। हम लोग शहरों में रहे और हमने अच्छे तरीके से अपनी जिंदगी

52:54 को अच्छा कर लिया। हमारे देश के अंदर बहुत सारे लोग हैं जो अभी भी बहुत पीछे हैं। जो कच्चे घरों में रहते हैं जिनके पास शिक्षा नहीं है। और इनको पहले भी शिक्षा नहीं दी गई। समाज के अंदर इनको पढ़ने नहीं दिया गया। इनको अधिकार नहीं दिया गया। इनको इंसान ही नहीं माना गया। अब भारत जब आजाद हुआ तो भारत के अंदर क्योंकि हमें तो सबको साथ ले चलना है। हम लोग तो बहुत आगे निकल गए। ये लोग तो बहुत पीछे रह गए। अब हमें इनको अपने साथ लेकर आना है। और इसीलिए क्या किया जाता है दोस्तों कि इसीलिए इनको दिया जाता है आरक्षण। आरक्षण का मतलब क्या है कि इनको दी जाती है छूट। भारत के अंदर हमारे कुछ समूह है जिनको छूट दी जाती है। कहां पर छूट दी जाती है? जैसे सरकारी नौकरियों के अंदर छूट दी जाती है। या फिर आप देखते हैं दोस्तों कि जो हमारे शिक्षण संस्थान होते हैं। शिक्षण संस्थान का मतलब कि जब कॉलेज में एडमिशन होता है तो इनका कम नंबरों पर एडमिशन कर लिया जाता है। क्योंकि इनको इतने ज्यादा अवसर शिक्षा के

53:40 हासिल करने के नहीं मिले थे। हमारे दलित भाई हुए है ना हमारे एससी का मतलब क्या हुआ? हमारे दलित भाई आदिवासी हमारे आदिवासी भाई ओबीसी हमारे अन्य पिछड़ा वर्ग तो भारत के अंदर वो लोग जो विकास में बहुत पीछे रह गए। बाकी हम सब लोग आगे चले गए। सबको साथ जोड़ने के लिए ताकि सबको साथ लेके चलें। किसी को पीछा ना छोड़ दें। कोई श्रीलंका की तरह तमिलों की तरह फील ना करें। है ना? कि हमें दबाया जा रहा है। सबको साथ लेने के लिए भारत में हम अपने हर एक सामाजिक समूह के साथ क्या करते हैं दोस्तों कि सत्ता का बंटवारा करते हैं। और हम अपने देश के अंदर क्या करते हैं? हर एक तरीके से चीजों को लेकर चलने की कोशिश करते हैं। अब भारत के अंदर हमें एक और तरीके से बिंदु देखने को मिलता है। वो क्या है कि हमारे भारत देश के अंदर ना हम लोग दबाव समूह और उसी के साथ-साथ हमें क्या दिखता है दोस्तों कि हमें विपक्ष के बीच में भी सत्ता का बंटवारा होता हुआ देखने को मिलता है। इस बिंदु को हम लोग

54:26 यहां पर समझेंगे। तो भारत में चौथे तरीके से भी सत्ता की साझेदारी होती है और ये क्या कहलाती है? दबाव समूह के नाम से या फिर विपक्ष के नाम से। इसे हम लोग समझेंगे बहुत अच्छे तरीके से। कैसे इसे हम लोग समझते हैं? देखो। भारत के अंदर साल 2024 का हमने चुनाव होते हुए देखा। भारत के अंदर हमारा साल 2024 का लोकसभा चुनाव हुआ। और लोकसभा की जब हम लोग बात करते हैं तो बेटा हमें पता है कि भारत के अंदर हमारे लोकसभा में टोटल 543 सदस्य चुने जाते हैं। है ना? हमारे प्यारे भारत देश में हम क्या देखते हैं कि हमारे प्यारे भारत देश में टोटल 543 सदस्यों को क्या किया जाता है? चुना जाता है। यानी कि पूरे भारत देश से 543 सदस्य चुने जाते हैं। हमारे देश के अंदर जब भी लोकसभा के चुनाव होते हैं तो हर राजनीतिक दल क्या करता है और हमारे देश

55:11 के संविधान में बताया गया है कि टोटल 543 सदस्य देश हैं। हर राजनीतिक दल ये कोशिश करता है कि उनके ज्यादा से ज्यादा साथी जीतें। कितने साथी जीतें? हर राजनीतिक दल चाहता है कि उनके 272 साथी जीत जाएं। 272 को हिंदी में क्या कहा जाता है? इसको हम लोग बोलते हैं बहुमत। हर राजनीतिक दल चाहता है कि अकेले उनके 272 साथी जीत जाए। जैसे आपने सुना होगा बेटा कि बीजेपी ने अभी जो 204 का चुनाव हुआ तो उसमें बोला इस बार 400 पार। वो क्यों बोल रहे थे 400 पार? क्योंकि उनको पता है कि अगर उनके ज्यादा साथी जीतेंगे तो वो देश को अपनी मर्जी से 5 साल तक संभाल सकते हैं। अपनी विचारधारा के हिसाब से चला सकते हैं। तो साल 2024 का हमारा लोकसभा का चुनाव हुआ। 543 सदस्य हमारे लोकसभा के अंदर है और 272 पे बहुमत होता है। बहुमत का मतलब कि 5 साल आप देश को चलाएंगे। अब देश के अंदर हमारे चुनाव होते हैं। जैसे देश के अंदर हमारी भारतीय जनता पार्टी है। ऐसी ही हमारे यहां

55:57 पर कांग्रेस पार्टी है। ऐसी ही हमारे यहां पर समाजवादी पार्टी है। ऐसी हमारे यहां पर आम आदमी पार्टी है। ऐसी हमारे यहां पर बहुजन समाज पार्टी है। ऐसी हमारे यहां पर शिवसेना है। तो भारत में बहुत सारी राजनीतिक दल हमें देखने को मिले। हर राजनीतिक दल ये चाहता है कि उनके ज्यादा से ज्यादा साथी जीतें। कितने साथी जीते? उनके 272 साथी जीत जाए। यानी कि उनको बहुमत मिल जाए और 5 साल वो देश को चलाएं अपने हिसाब से। है ना? तो इसीलिए हर राजनीतिक दल बोलता है कि भैया उनके ज्यादा से ज्यादा साथी जीतें। 272 साथी जीत जाएं। अभी साल 2024 का हमारा चुनाव हमने होता हुआ देखा। और साल 2024 का जो हमारा ये चुनाव हुआ इसके अंदर जो देश की सबसे बड़ी राजनीतिक दल बनकर आया वो बनकर आया बीजेपी या फिर जिसे हम लोग भारतीय जनता पार्टी कहते हैं। बीजेपी के पास आप देखते हैं दोस्तों कि कितने 240 साथी थे। इनके 240

56:43 साथी जीते बीजेपी के। लेकिन सर देश पर सरकार बनाने के लिए तो 272 साथी चाहिए। तो बीजेपी ने क्या किया? अपने कुछ साथी पार्टियों को बुलाया। जैसे बीजेपी ने क्या किया? टी डीपी इस ग्रुप को बुलाया। ऐसे ही लोक जनशक्ति पार्टी चिराग पासवान वाली इसको बुलाया। ऐसे ही हम लोग देखते हैं दोस्तों कि ऐसे ही हमें दिखता है कि जेडीयू नीतीश पास नीतीश कुमार वाली इसको बुलाया और टोटल इनके कितने हो गए? 293 के करीब हो गए। जो 272 से बहुत ज्यादा है। तो हमने देखा कि भारत में 2024 का जो लोकसभा चुनाव हुआ, उसके अंदर 543 सदस्य रहे। इसमें से 272 पर आप सरकार बना सकते हैं। बीजेपी की 240 सदस्य थे। है ना? लेकिन वह 272 तक नहीं पहुंच पाए। तो इन्होंने और राजनीतिक दलों को अपने साथ जोड़ लिया। बीजेपी ने और क्या किया? अपनी एक सरकार बनाई और इस तरीके की जो बनी सरकार होती है

57:29 उसे हम लोग क्या बोलते हैं बेटा? इसे हम लोग गठबंधन के नाम से जानते हैं। क्या बोला जाता है? इसे हम लोग गठबंधन सरकार कहते हैं। गठबंधन सरकार का मतलब कि अकेले बीजेपी ने नहीं बनाई। अकेले एक अकेले दल ने नहीं बनाई। देश के अंदर सरकार अलग-अलग

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