संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो मनोसामाजिक सिद्धांत (Psychosocial Development Theory) पर आधारित है, जिसे एरिक एरिक्सन ने प्रतिपादित किया था। इस सिद्धांत में, एरिक्सन ने मानव विकास को आठ चरणों में विभाजित किया है, जो जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक चलते हैं। प्रत्येक चरण में एक विशेष संकट होता है जिसे व्यक्ति को हल करना होता है। यदि व्यक्ति संकट को सफलतापूर्वक हल करता है, तो वह एक विशेष गुण विकसित करता है। यदि व्यक्ति संकट को हल करने में विफल रहता है, तो वह एक नकारात्मक गुण विकसित करता है।
- एरिक एरिक्सन के मनोसामाजिक सिद्धांत की व्याख्या।
- मानव विकास के आठ चरणों का विवरण, प्रत्येक चरण के संकट और गुणों पर ध्यान केंद्रित करना।
- प्रत्येक चरण के सकारात्मक और नकारात्मक परिणामों का विश्लेषण।
यह वीडियो सीटेट (CTET) और अन्य शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टॉपिक, मनोसामाजिक सिद्धांत (Psychosocial Development Theory) पर केंद्रित है। सचिन एकेडमी के इस वीडियो में, एरिक एरिक्सन के सिद्धांत को विस्तार से समझाया गया है, जिससे न केवल परीक्षा में अंक प्राप्त करने में मदद मिलेगी, बल्कि जीवन को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद मिलेगी। चैनल पर पहले से ही नौ टॉपिक अपलोड किए जा चुके हैं, और यह दसवां टॉपिक है। चैनल को सब्सक्राइब करने की सलाह दी जाती है ताकि सीटेट का पूरा सिलेबस कवर किया जा सके।
एरिक एरिक्सन द्वारा प्रतिपादित मनोसामाजिक सिद्धांत (Psychosocial Development Theory) बच्चों में व्यक्तिगत पहचान के विकास पर केंद्रित है। एरिक्सन का जन्म जर्मनी में हुआ था, लेकिन बाद में वे अमेरिका में बस गए। उनके सिद्धांत के अनुसार, जीवन आठ चरणों से होकर गुजरता है, और प्रत्येक चरण में एक विशेष संकट होता है।
जन्म से लेकर दो साल तक की उम्र तक, बच्चे विश्वास बनाम अविश्वास (Trust vs Mistrust) के संकट का सामना करते हैं। यदि बच्चों को माता-पिता से प्यार और स्नेह मिलता है, तो उनमें विश्वास की भावना विकसित होती है। इसके विपरीत, यदि उन्हें प्यार नहीं मिलता, तो उनमें अविश्वास पैदा होता है।
दो से तीन साल की उम्र में, बच्चे स्वायत्तता बनाम शर्म (Autonomy vs Shame) के संकट का सामना करते हैं। इस अवस्था में बच्चे स्वयं काम करना शुरू कर देते हैं, जैसे कि कपड़े पहनना। यदि माता-पिता उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, तो उनमें स्वायत्तता की भावना विकसित होती है। यदि माता-पिता उन्हें डांटते हैं, तो उनमें शर्म की भावना पैदा होती है।
तीन से छह साल की उम्र में, बच्चे पहल बनाम दोष (Initiative vs Guilt) के संकट का सामना करते हैं। इस अवस्था में बच्चों में जिज्ञासा (curiosity) बढ़ जाती है और वे प्रश्न पूछना शुरू कर देते हैं। यदि माता-पिता उनके प्रश्नों का उत्तर देते हैं, तो उनमें पहल की भावना विकसित होती है। यदि माता-पिता उन्हें डांटते हैं, तो उनमें दोष की भावना पैदा होती है।
छह से बारह साल की उम्र में, बच्चे परिश्रम बनाम हीनता (Industry vs Inferiority) के संकट का सामना करते हैं। इस अवस्था में बच्चे काम करने की कोशिश करते हैं। यदि उन्हें सफलता मिलती है, तो उनमें परिश्रम की भावना विकसित होती है। यदि वे असफल होते हैं, तो उनमें हीनता की भावना पैदा होती है। उदाहरण के लिए, सीटेट (CTET) परीक्षा में असफल होने पर यदि माता-पिता बच्चे को प्रोत्साहित करते हैं, तो उसमें मेहनत की भावना आती है, लेकिन यदि वे उसे डांटते हैं, तो उसमें हीन भावना आ जाती है।
बारह से अठारह साल की उम्र में, बच्चे पहचान बनाम भ्रम (Identity vs Confusion) के संकट का सामना करते हैं। इस अवस्था में बच्चे अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। यदि वे सफल होते हैं, तो उनमें पहचान की भावना विकसित होती है। यदि वे असफल होते हैं, तो उनमें भ्रम की स्थिति पैदा होती है और वे गलत रास्ते पर जा सकते हैं।
18 से 35 वर्ष की आयु में, व्यक्ति आत्मीयता बनाम अलगाव (Intimacy vs Isolation) के संकट का सामना करता है। इस अवस्था में व्यक्ति दूसरों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने की कोशिश करता है। यदि वह सफल होता है, तो उसमें आत्मीयता की भावना विकसित होती है। यदि वह असफल होता है, तो वह अकेला रह जाता है और उसमें अलगाव की भावना पैदा होती है।
35 से 65 वर्ष की आयु में, व्यक्ति उत्पादकता बनाम स्थिरता (Generativity vs Stagnation) के संकट का सामना करता है। इस अवस्था में व्यक्ति दूसरों की मदद करने और समाज के लिए कुछ करने की कोशिश करता है। यदि वह सफल होता है, तो उसमें उत्पादकता की भावना विकसित होती है। यदि वह असफल होता है, तो उसमें स्थिरता आ जाती है और वह अपने बारे में ही सोचता रहता है।
65 वर्ष से अधिक आयु में, व्यक्ति संपूर्णता बनाम निराशा (Integrity vs Despair) के संकट का सामना करता है। इस अवस्था में व्यक्ति अपने जीवन को देखता है और यह मूल्यांकन करता है कि उसने क्या हासिल किया है। यदि वह अपने जीवन से संतुष्ट है, तो उसमें संपूर्णता की भावना विकसित होती है। यदि वह अपने जीवन से असंतुष्ट है, तो उसमें निराशा की भावना पैदा होती है।
वीडियो में मनोसामाजिक सिद्धांत के सभी आठ चरणों को समझाया गया है, जिससे दर्शकों को इस सिद्धांत को गहराई से समझने में मदद मिलती है। चैनल को सब्सक्राइब करने की सलाह दी जाती है ताकि सीटेट (CTET) से संबंधित सभी महत्वपूर्ण विषयों को कवर किया जा सके।
Summarize any YouTube video in seconds
Get summaries like this one for any video, in your language, with the free Summ app.
Transcript
YouTube Transcript Generator
0:00 हेलो हेलो फ्रेंड्स कैसे आप सब लोग रेड्डी बात की जाए आपके टॉपिक नंबर 10 की देखिए जितने भी टॉपिक आपको अपने YouTube चैनल पर मैं करा रहा हूं शायद कोई ऐसा टॉपिक होगा जिससे पर क्वेश्चन पेपर में ना आए वरना हर टॉपिक में से आपके एक नहीं दो तीन नंबर तक के क्वेश्चन आपको एग्जाम में जरूर देखने को मिलेंगे क्योंकि जितने भी टॉपिक में नहीं है लिए यहां पर सीटेट के सिलेबस के एकॉर्डिंग लिए जो आप इसका टेस्ट के सिलेबस में कंटेंट दिया हुआ है और आपकी प्रीवियस ईयर में क्वेश्चन पूछे गए वह सभी भी टॉपिक में आपके बार-बार रिपीट होता है एग्जाम के अंदर इसलिए कुछ करो या ना करो एग्जाम से पहले इन सभी टॉपिक को कर कि आप लोग जरूर चले जाना आज टॉपिक 10 है इससे पहले नौकरी में अपने अपलोड कर चुका हूं अपने YouTube चैनल पर वहां पर जाकर देख सकते हो साथी चैनल को सब्सक्राइब कर लेना ताकि सीटेट का टेस्ट का सिलेबस है वह मैं सारा का सारा
0:45 अपने YouTube चैनल पर आपको प्रोवाइड कर सकूं इसलिए चैनल को सब्सक्राइब कर लेना इन्हें टॉपिक के माध्यम से कर दूंगा आपको ठीक है आज का जो टॉपिक लिया है आज का टॉपिक बहुत ही महत्वपूर्ण टॉपिक है जिसका नाम है मनोसामाजिक सिद्धांत यानि साइकोसोशल डेवलपमेंट छोरी आपके एग्जाम में क्वेश्चन जरूर बनते हैं और इस टॉपिक में आपको अपने एग्जाम में नंबर तो जरूर मिलेंगे साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण बात इस टॉप इससे आपको लाइन जीने का पता भी चलेगा कि बच्चा कि जिस ट्रेन में क्या करता है हम किसी स्टेज और जब हम बूढ़े हो जाएंगे तो क्या सोचेंगे तो जो अपनी जिंदगी होती लाइफ होती है उसको जीने का पता भी चलेगा नजरिया देखना आप लोग इस टॉपिक के माध्यम से इसको इस वे में मत लेना किस हमारे नंबर आएंगे वह तो आएंगे लेकिन साथ आपकी लाइफ में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा ठीक है और अगर किसी को सारा कांटेक्ट चाहिए मेरा व्हाट्सएप नंबर दिया
1:32 है इस पर आपको सारा कंटेंट सारा कोर्स के साथ मिल जाएगा सीट का मेरा ठीक है उसको आप चाय ले सकते हो जिससे कि आपका सी टेट का एक्जाम अच्छे नंबर से पास होगा तो चलिए बात कर लेते हैं मनोसामाजिक सिद्धांत की बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्धांत देखिए इसके बारे में पढ़ते हैं पहले जो सिद्धांत है यह सिद्धांत दिया था एडिक्शन ने कि इनके द्वारा प्रतिपादित किया गया था क्वेश्चन कई बार पूछा गया है कि मनुष्य मनोसामाजिक सिद्धांत के अनुसार को सोशल डेवलपमेंट थोड़ी किसने दी थी एडिक्शन ने दी थी अधर्म का हुआ था जर्मनी में का जन्म हुआ था और बाद में अमेरिका में रहना सुनना शुरू कर दिया था उसके बाद पढ़ते इनका मुख्य उद्देश्य बच्चों में व्यक्तिगत पहचान कैसे होती है उस पर का और इनके ग्रेडिंग पूरा जीवन आर्टिस्ट इप्सों होकर गुजरता है जो आप लोगों का हुआ मेरा जीवन होता है वह आर्टिस्ट्स होकर गुजरता है तो
2:19 देखिए हमारा जून आर्टिस्ट ऐप से कैसे-कैसे होकर गुजरता है इसको देखिए इन के अकॉर्डिंग ठीक है और यही सांप का एक क्वेश्चन जरूर आता है वैसे इन आर्टिस्ट ऐप में से कोई न कोई सा एक आपसे पूछ लेता है इसलिए इसको अच्छे तरीके से देख रहा पहले देखते हैं पहले आपका विश्वास बना व विश्वास का ट्रस्ट वर्सेस लिस्ट का जन्म से लेकर दो साल तक कभी-कभी तो आप इसको यहां पर बच्चा पैदा होने के दो साल तक बच्चा होता है इसको जिन बच्चों को माता-पिता से प्यार मिलता है तो उन्हें विश्वास हो जाता है कि अगर किशोर दूसरी तरफ बच्चों को माता-पिता का प्यार नहीं मिलता तो रोना बिलखना शुरू कर देते हैं और इससे क्या
3:06 होता है बच्चों में अविश्वास उत्पन्न हो जाता है अगर उदयभद्र मां बाप का प्यार मिला तो में विश्वास उत्पन्न हो जाएगा कलेक्ट हो जाएगा और अगर उन्हें प्यार नहीं मिला कुनिस क्या हो जाएगा उनमें विश्वास हो जाएगा यानी मिस्ट्रस्ट हो जाएगा यार यह दो साल तक के बच्चे को कुएं का पहला स्टेप उसके बाद बच्चा बड़ा हो गया 2 साल से ज्यादा बढ़ाओ गया अब यह जो आपके दूसरी स्टेज है दूसरी स्टेज आफ की स्वायत्तता ब्रह्म शर्म की है जिसको लव यू बोल देते होटलों व चीन ग्राम से यदि आपकी दो वर्ष लेकर तीन वर्ष तक यह सीड से लेकर तीन वर्ष तक कि अब तक इतने साल दो साल से 3 साल का बच्चा बच्चा क्या काम करता है वह स्वयं अर्थ से शुरू कर देता है कपड़े पहनना शुरू
3:51 कर देता है यह सबसे ज्यादा पसंद करता है वह दूसरे करता रहता था से व्यक्त किए अलार्म करवाना चाहते अपने आप को ठीक है कि देखो यह अपने आप खुद ही सारा काम कर रहा है अपने आप कमीज पहन है बटन लगा रहा है खाना खा रहा है ठीक है तो यह स्टेज कौन ज्योति आप की स्वायत्तता जो कि 2 साल से लेकर तीन साल तक का बच्चा करता है लेकिन दूसरी तरफ मगर बहुत ही सख्त माता-पिता जब काम करने पर डांटते हैं कि तुम अपने ऑफिस कभी को क्यों पहने हो मैं पहचान गया मैं पैदा हुआ तो क्या होता है उससे तो बच्चा अपने अंदर ही सकता अनुभव करता है कि मैं कल नहीं सकता है इस काम को तो उसमें बच्चे के अंदर की आ जाती है उसमें शर्म आ जाती है लग जाए जाती है ठीक है अगर बच्चे उसे डांटना वह मां-बाप डॉक्टर शुरू करते हैं बच्चों को कि मैं खुद करूंगा इस काम को तो यह आपकी दूसरी
4:37 टीम और उसके बाद बच्चा और बढ़ाओ गया अब बच्चा किसी स्टेज में पहुंच गया अब बच्चा हो गया 3 साल से लेकर छह साल तक कि स्टेज के बीच में हो गया जिसको जाना जाता है पहल बनाम दोस्त से इनिशिएटिव वर्सेस gills के नाम से जाना जाता है यह और अच्छे तरीके से पूछा कि कितने से कितने तक इस तरीके से कोट इनको देख लेना अब बच्चे 3 साल से लेकर छह साल के बीच में अब इसमें क्या होता है जब बच्चे में समझने की क्षमता थोड़ा सा विकास हो जाता है तो उसमें जिज्ञासा यह सिक्योरिटी बढ़ जाती है मैं 3 साल से 6 साल तक बीच में जब हम आप लोग भी होंगे आपके घर में भी बच्चों के तो देखना क्वेश्चन बहुत ज्यादा पूछते हैं मम्मी पापा यह यह यह यह तो ऐसा क्यों हर चीज को
5:24 तो क्या होता है वह बहुत ज्यादा हो जाता है और होने की वजह से वह करना शुरू करता है घृत देता है दूसरी तरफ मां-बाप उसकी उत्सुकता होती है उसको ठीक है कि दिमाग को इस तरीके से होता है तो दोष हो जाता है बच्चे बच्चे की जो भी क्वेश्चन पूछे वैसे तो उसकी आपको हमेशा चाहिए और प्रॉपर और ठीक है योग्य बच्चे हो गई की तीसरी टीम अब चलते 34 टेस्ट में अभी तक कितने साल से कितने साल तक है अब देखिए इसमें बच्चा आपका छह साल से लेकर 12 वर्ष
6:11 तक का जिसको बोल देते आपकी परिश्रम हीनता यह आपके सीट में कई बार हुई है परिश्रम की जगह उधम दे देता हिंदी में आप यह इंडस्ट्री वर्षीय इंफिनिटी स्टेज ठीक है यह की चौथी डिटेल जिसमें आपका बच्चा छह साल से लेकर 12 वर्ष तक है अब इसमें देखते इसमें क्या होता है इस आयु में बच्चा मां-बाप का हर काम करने की कोशिश करता है कि लाल मिर्च हमको मैं कर दूंगा पापा मैं कर दूं इसका आपको अतः इसे परिश्रम कहते हैं ठीक है इंडस्ट्री बोलते हैं दूसरी तरफ अगर बच्चे को कोई काम दिया और उस बच्चे की कार्य करने की क्षमता कम है ठीक है उसके उल्टी से ज्यादा बड़ा काम दे दिया तो उस काम को कर नहीं पायेगा इसलिए उसमें क्या आने शुरू हो जाएगी हीनता वाहन शुरू हो जाएगी हीन भावना आनी शुरू हो जाएगी इसको आप एक अपने एग्जांपल से समझना अभी आप लोग मान लीजिए सी टेट एक्जाम की तैयारी कर रहे हो तो सीधे एग्जाम यह तो है नहीं सब लोग
6:58 पास हो जाएगी कुछ लोग फेल भी हो कि जो मेहनत करेगा पास होगा जो मेहनत नहीं करेगा ओपन हो जाएगा अब मान लीजिए फेल हो गए कोई बच्चा अब कोई बच्चा फेल हो गया तो उसमें पेरेंट्स दो टाइप के पेरेंट्स होंगे पहले क्या होंगे पहले उसको कह गए कोई भी बेटा मेहनत कर और सीटेट का आइटम अगली बार दे दूं अगर यह बिल पास हो जाएगा एक बार में तो हर किसी के एकदम पास में होता तो मेहनत कर तो तेरा भी एकदम जरूर पास होगा इस तरीके से बात करेंगे एक मावा पहले हो जाएंगे ठीक है इससे क्या जाएगी बच्चे अंदर इंडस्ट्री अपनी मेहनत की भावना जाएगी दूसरी तरफ दूसरे पेरेंट्स हो गए ठीक है शायद आपको रहमान वाले वह क्या कहें काम करेंगे कि तेरे बस की कुछ नहीं एग्जाम एकदम पढ़ाई-लिखाई तेरे पास कोई काम नहीं है जाकर अपना काम-धंधा समान ठीक है या तेरी शादी वादी कर देंगे क्योंकि यह काम पढ़े-लिखे बच्चों के काम नहीं है इस तरीके से अगर ट्रीट करेंगे जो बच्चा फेल हो
7:43 जाएगा तो उसमें क्या जाएगी उसके अंदर हीन भावना आनी शुरू हो जाएगी फिर मैं तो कुछ कर नहीं सकता और मान लीजिए अगर ऐसी टीचर आपने 6 साल से लेकर 12 वर्ष तक के बच्चों को यह चीज बोल देना इस तरीके से भैया तो यह हीन भावना उसकी पूरी जिंदगी भर चलेगी किमाम लिए छह साल की बच्ची छह साग में का यहां पर यानी जो आपकी स्कूल जाती है न यदि बच्चे स्कूल - शुरू कर दिया यह वह बच्चा है आपका अगर स्टार्टिंग में भी आपने चीज बोल दें तो बच्चे में हीन भावना आनी शुरू हो जाएगी इसलिए कभी भी बच्चों को ऐसी भावना से बचाना उसको एप्रीसिएट करना है ठीक है अब चलते नेक्स्ट स्टेप में अब बच्चा कितने साल का हो गया अब बच्चा हो गया आपका भाई 12 साल से लेकर 18 साल तक हो गया इसका नाम आपकी पहचान भ्रम भ्रांति आइडेंटी वर्सेस कंफ्यूजन के नाम से समझ में आ रहा है इस आयु में बच्चे में अपनी
8:29 पहचान बनाने की बहुत ज्यादा उत्सुकता होती है कि मुझको क्लास में फर्स्ट खाना है या फिर मुझको ऐसा काम करना है कि जिससे मैं आगे जाकर जो अपने सकूं आईएएस आईपीएस बनना है अलग हटकर कुछ करना है घर वालों के काम से अलग हटकर मुझे अपना खुद ही आइडेंटी बनानी है वह किस मूर्तियां की इस अवस्था में दूसरी तरफ जब बच्चे उद्देश्य पूर्ण काम नहीं करते ठीक है जो चीजों सोच रहे उसको नहीं कर पाते तो उनके पास बहुत सारे रास्ते खुल जाते हैं कि ठीक है भाई यह तो आइए आप इसको हम लोग बनी पहले जो प्लेन पर चलो तो चोरी करना शुरू कर देते हैं ठीक है गलत ट्रैक पर चले जा ने अनैतिक कामों में पड़ जाते हो जाते हैं पांचवीं स्टेज चलिए अब चलते हैं नेक्स्ट पर को देख लीजिए आप लोग उतरे हुए हमारे बच्चे और आगे भी को कि आप 18 साल से 35
9:19 साल तक 1835 में आम आदमी के साथ संबंध होने की वजह से दूसरे के साथ मिल-जूल घृत के साथ संबंध बनाता है कि शुरू में तो किसी में करता है इसी लिए दूसरों के साथ दूसरी तरफ अगर दूसरी तरफ आदमी दूसरों के साथ संबंध झाल तो एक काम करता है वह सबसे अलग रहता है जिसे अलगाव बोलते आइसोलेशन बोल देते
10:05 हैं ठीक है जैसे कि आप नीचे वह सबसे अलग अलग रहता है अब चलते साथ-साथ स्टेज की तरफ स्थिरता कितने से कितने तक की तिथि से 65 साल तक हम दूसरे लोगों के बारे में दूसरों का भला करने और दूसरी तरफ लोगों में इसका विकास नहीं होता तो स्थिति में अमरीश पुरी और अनिल कपूर अनिल कपूर को मिल जाता है कि मुझे जॉब ले मेरी रानी मुखर्जी से लाभ ले
10:57 और हमारी जिंदगी ऐसे जियो स्थिरता आएगी अनिल कपूर केंद्र की बस और कुछ नहीं करना हमें बस अब यह छोटी सी लाइफ ऐसे गुजारनी है तो उसमें स्थिरता आएगी लेकर उसके बाद क्या काम करता है जो परेश रावल होता है वह अनिल कपूर को करंट देता है ठीक है कि अगर तुम यह काम नहीं करोगे तो और काम कुन करेगा देश को कौन सुधारेगा तो क्या काम करता है अनिल कपूर फिर वह दूसरे लोगों के बारे में ज्यादा सोचता है और दूसरों को भला करने की ज्यादा सोचता है कि रानी मुखर्जी को तो बाद में देख लेंगे अगर बात भी देखेंगे पहले अपने देश के बारे में सोचते हैं तो यह इसी स्टेज में होता है 35 साल चले गए पैसठ साल तक ही टेस्टी होती है जो दूसरों के बारे में ज्यादा सोचते है तो आपका यह और जख्म दिए बारे में सोचता है तो वह जाती है उसके अंदर इस पीड़िता जाती है चलिए अब देखते अगली स्टेज अगली स्टेट और आखिरी के इसमें क्या होता
11:42 है यह उसकी संपूर्णता और आप इसे के नाम से अब स्कूल ऊपर वालों के लिए और इसी स्टेज की इच्छा पूर्ण हो कि वे अपने भविष्य की वजह अपने बीते हुए दिनों को याद करता है उसे ट्विटर से मतलब नहीं है कि मुझे कुछ विचार करना है आपको बीती हुई चीज याद करता है कि बताओ हमें ऐसे करते थे वह करते थे और याद करता है कि उसकी कितनी सफलता है हुई है और कितनी सफलता हुई है अब देखिए यहां से समझा यदि उसकी सफलता ज्यादा मिल्क उसे तो जाए संपूर्णता कि मैंने अपनी जिंदगी में यह चीज है जो भी लिए समाज के लिए यह काम की है और इसको सफलता ज्यादा मिलती है तो सोचता है कि मेरा जीवन तो धन्य हो गया
12:28 संपूर्ण हो गया लेकिन अगर किसी ने ज्यादा सफलता हासिल की तो उसमें के आ जाती है उसमें जाती है निराशा जाती है ठीक है तो युवतियां की आठवीं स्टीम 65 साल से ऊपर तक कि तो फ्रेंड्स इसकी जितनी भी टेस्टी आज की वीडियो में मैं आपको बता दिए आप लोगों को इंट्रस्ट भी आएगा ठीक है क्योंकि आपका नंबर तो बन गई लेकिन आपने बहुत सी चीनी भी होगी अपने लाइफ से संबंधित तो इसी तरीका है जितना भी आपका कंटेंट है वह मैं सारा का सारा * के माध्यम से आपको कराऊं जो आपको पेपर महंगे इसलिए चैनल को सब्सक्राइब कर लेना था कि सारा का सारा आपको मेरे YouTube चैनल पर आपको मिल जाए क्वेश्चन तेरी प्रैक्टिस कर्मियों कांटेक्ट साथ चित्तौड़ नंबर दिया है इस पर आप ले सकते हो मेरे सीड नोट्स तो फ्रेंड्स आइए आपको वीडियो पसंद आई होगी जल्दी मिलेंगे नेक्स्ट टोपी के साथ थैंक यू