Sociological Thinker | Emile Durkheim | Lecture - 1 | Sociology New Batch Starts 28 February 2023

संक्षिप्त सारांश

यह पाठ प्रसिद्ध समाजशास्त्री इमाइल दुर्खीम के विचारों का परिचय देता है, जिसमें उनके जीवन, सामाजिक और बौद्धिक पृष्ठभूमि, और समाजशास्त्र के क्षेत्र में उनके योगदान को शामिल किया गया है। यह पाठ दुर्खीम के समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित करने, समाज में एकता की समस्या का समाधान खोजने और व्यक्ति और समाज के बीच संबंधों को समझने पर केंद्रित है।

  • दुर्खीम के विचारों का परिचय
  • सामाजिक और बौद्धिक पृष्ठभूमि
  • समाजशास्त्र में योगदान

परिचय

यह पाठ कार्ल मार्क्स, मैक्स वेबर और दुर्खीम जैसे समाजशास्त्र के क्लासिकल विचारकों पर केंद्रित है। अगस्त कॉम्टे ने 1838 में समाजशास्त्र की नींव रखी, जिसके कारण उन्हें "समाजशास्त्र का जनक" कहा जाता है। कार्ल मार्क्स ने भी समाज के बारे में लिखा, इसलिए समाजशास्त्र के क्षेत्र में उनके विचारों का अध्ययन किया जाता है। दुर्खीम, कॉम्टे और वेबर को समाजशास्त्री माना जाता है, जबकि मीड को सामाजिक मनोवैज्ञानिक माना जाता है।

क्लासिकल और आधुनिक समाजशास्त्री

अगस्त कॉम्टे, दुर्खीम और मैक्स वेबर को क्लासिकल समाजशास्त्री माना जाता है, जबकि पारसंस और मर्टन आधुनिक समाजशास्त्री हैं। समाजशास्त्र का उद्भव यूरोप में हुआ, लेकिन इसका विकास अमेरिका में हुआ। प्रारंभिक समाजशास्त्रियों के विचारों को समाज और समाजशास्त्र दोनों के संदर्भ में देखा जाता है। समाज के बारे में उनके विचार समाज क्या है, इस पर आधारित हैं, जबकि समाजशास्त्र के बारे में उनके विचार समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र और अध्ययन के तरीकों पर आधारित हैं।

समाज के बारे में विचार

विचारकों के समाज के बारे में विचार अलग-अलग हो सकते हैं। मार्क्स ने समाज के प्रमुख अंग, अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया और पूंजीवादी आर्थिक प्रणाली की आलोचना की। पारसंस ने समाज के तंत्र को समझाने का प्रयास किया, जबकि दुर्खीम ने श्रम विभाजन और धर्म जैसी घटनाओं का अध्ययन किया। वेबर ने पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली, धर्म, शक्ति और नौकरशाही पर ध्यान केंद्रित किया। समाजशास्त्रियों ने समाज के बारे में अपने विचारों को दो भागों में बांटा: समाज के बारे में और समाजशास्त्र के बारे में।

समाजशास्त्र के बारे में विचार

समाजशास्त्र के बारे में बात करते समय, तीन मुख्य पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है: समाजशास्त्र क्या है, इसकी विषय-वस्तु क्या है, और इसकी प्रकृति क्या है। विभिन्न विचारकों ने समाजशास्त्र को अलग-अलग तरीकों से परिभाषित किया है, लेकिन इन परिभाषाओं में कुछ समानताएं हैं। समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र और अध्ययन के तरीकों पर भी विद्वानों के अलग-अलग विचार हैं। दुर्खीम समाजशास्त्र को प्राकृतिक विज्ञान की तरह मानते हैं, जबकि वेबर इसे व्याख्यात्मक विज्ञान मानते हैं।

इमाइल दुर्खीम का परिचय

इमाइल दुर्खीम एक फ्रांसीसी समाजशास्त्री थे जिन्होंने समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अगस्त कॉम्टे के अधूरे काम को पूरा किया और समाजशास्त्र को अन्य विज्ञानों से अलग एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई। दुर्खीम के विचार समाजशास्त्र और समाज दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका जन्म 1858 में हुआ था और उनकी प्रमुख रचनाएँ 1912-13 तक प्रकाशित हुईं, जिनमें धर्म पर समाजशास्त्रीय विश्लेषण भी शामिल है।

दुर्खीम का समय और सामाजिक परिदृश्य

दुर्खीम का समय यूरोप में सामाजिक परिवर्तनों का दौर था। 1858 में उनका जन्म और 1917 में उनकी मृत्यु के बीच, यूरोप में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं, जिनमें वैज्ञानिक क्रांति, व्यापारिक क्रांति और औद्योगिक क्रांति शामिल हैं। मध्यकालीन समाज में धर्म का प्रभाव प्रबल था, लेकिन तर्क और बुद्धिवाद के विकास के साथ, धर्म का प्रभाव कमजोर होने लगा। औद्योगिक क्रांति के कारण शोषण, विषमता, गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हुईं।

मध्यकालीन समाज

मध्यकालीन समाज में धर्म का प्रभाव प्रबल था, और सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में धर्म का वर्चस्व था। समाज में राजा और पादरी शीर्ष पर थे, जबकि सामान्य जनता सबसे नीचे थी। व्यापारी क्रांति और औद्योगिक क्रांति के कारण पूंजीपति वर्ग का उदय हुआ, लेकिन इससे शोषण और विषमता भी बढ़ी। तर्क और बुद्धिवाद के विकास के साथ, लोगों ने धर्म द्वारा कही गई बातों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिसके कारण राजतंत्र का विरोध और लोकतंत्र का आगमन हुआ।

सामाजिक एकता की समस्या

औद्योगिक क्रांति के कारण यूरोप में सामाजिक एकता की समस्या उत्पन्न हो गई थी। समाज में मूल्यों और नियमों पर सहमति कम हो गई थी, जिसके कारण विचलन और सामाजिक विघटन बढ़ गया था। समाज में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो गई थीं, क्योंकि लोग समाज के नियमों और मूल्यों से हटकर व्यवहार करने लगे थे।

समाज का तंत्र

समाज एक मशीन की तरह है, जिसमें सभी अंग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जब मूल्यों पर मतभिन्नता होती है, तो क्रिया और अंतक्रिया में गड़बड़ी होती है, जिससे सामाजिक नियमों पर सहमति खत्म हो जाती है। इससे सामाजिक विघटन और कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं। समाजशास्त्र समाज के तंत्र को समझने का प्रयास करता है और देखता है कि कैसे विभिन्न अंग एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

वैज्ञानिक क्रांति और धर्म का प्रभाव

वैज्ञानिक क्रांति ने धर्म के प्रभाव को कमजोर किया, जिससे सामाजिक एकता की समस्या उत्पन्न हुई। औद्योगिक क्रांति के कारण भी कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हुईं, जिसके कारण यूरोप में सामाजिक विघटन की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस समय, राजतंत्र का विरोध हो रहा था, और महिलाएं लिंग समानता की मांग कर रही थीं।

बौद्धिक परिदृश्य

दुर्खीम के समय में बौद्धिक परिदृश्य आदर्शवाद और प्रत्यक्षवाद से प्रभावित था। आदर्शवादी विचारों को महत्व दे रहे थे, जबकि प्रत्यक्षवाद वैज्ञानिक पद्धति को ज्ञान प्राप्ति का श्रेष्ठ तरीका मान रहा था। अगस्त कॉम्टे ने समाजशास्त्र की नींव रखी थी, लेकिन समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय के रूप में मान्यता नहीं मिल पाई थी।

अगस्त कॉम्टे का योगदान

अगस्त कॉम्टे ने समाज के विज्ञान के रूप में समाजशास्त्र की नींव रखी। उन्होंने कहा कि समाज का भी एक प्राकृतिक विज्ञान की तरह अध्ययन होना चाहिए। कॉम्टे ने समाजशास्त्र की विषय-वस्तु, प्रकृति और अध्ययन पद्धति के बारे में बताया, लेकिन उनके विचारों में कुछ अस्पष्टता थी।

समाजशास्त्र को स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित करना

दुर्खीम ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित करने के लिए कॉम्टे के अधूरे काम को पूरा किया। उन्होंने समाजशास्त्र की विषय-वस्तु को स्पष्ट किया और इसे अन्य सामाजिक विज्ञानों से अलग किया। दुर्खीम ने समाजशास्त्र को प्राकृतिक विज्ञान की तरह बनाने पर बल दिया और प्रत्यक्षवादी पद्धति को समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए अनुकूल बनाया।

मार्क्सवाद और प्रकार्यवाद

मार्क्सवाद समाज का नकारात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कर रहा था, जबकि दुर्खीम ने समाज के प्रकार्यात्मक विश्लेषण पर जोर दिया। दुर्खीम ने हर घटना के सकारात्मक पहलुओं को दर्शाया और समाज को देखने का उनका नजरिया प्रकार्यवादी था। कार्ल मार्क्स द्वंद्वात्मक विचारक थे, जबकि दुर्खीम प्रकार्यवादी विचारक थे।

दुर्खीम के विचारों का सारांश

दुर्खीम के विचारों को दो भागों में बांटा जा सकता है: समाजशास्त्र के बारे में उनके विचार और समाज के बारे में उनके विचार। समाजशास्त्र के बारे में उनके विचारों में विषय-वस्तु, प्रकृति और अध्ययन पद्धति शामिल हैं। समाज के बारे में उनके विचारों में श्रम विभाजन, धर्म और आत्महत्या शामिल हैं। दुर्खीम ने समाज का प्रकार्यात्मक व्याख्या प्रस्तुत किया और समाज पर बल दिया।

दुर्खीम के अध्ययन का उद्देश्य

दुर्खीम के अध्ययन का उद्देश्य समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित करना, व्यक्ति और समाज के मध्य संबंधों का निर्धारण करना और विविधीकृत समाज में एकता की समस्या का समाधान प्रस्तुत करना था। उन्होंने समाज को व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण माना और हर घटना के मूल में समाज को कारण माना।

समाजशास्त्र के बारे में दुर्खीम के विचार

दुर्खीम ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित करने के लिए समाजशास्त्र की विषय-वस्तु, प्रकृति और अध्ययन पद्धति के बारे में अपने विचार दिए। उन्होंने सामाजिक तथ्य की संकल्पना को रखा और कहा कि समाजशास्त्र सामाजिक तथ्यों का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। दुर्खीम ने समाजशास्त्र को प्राकृतिक विज्ञान की तरह माना और प्रत्यक्षवादी पद्धति को समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए अनुकूल बनाया।

समाज के बारे में दुर्खीम के विचार

दुर्खीम ने समाज का प्रकार्यात्मक व्याख्या प्रस्तुत किया और कहा कि समाज कई अंगों से मिलकर बना एक व्यवस्था है। उन्होंने श्रम विभाजन, धर्म और आत्महत्या जैसी घटनाओं का विश्लेषण किया और समाज पर बल दिया। दुर्खीम ने हर घटना का कारण समाज को माना और व्यक्ति को समाज के उत्पाद के रूप में देखा।

श्रम विभाजन, धर्म और आत्महत्या का विश्लेषण

दुर्खीम ने श्रम विभाजन, धर्म और आत्महत्या का समाजशास्त्रीय विश्लेषण किया और समाज पर बल दिया। उन्होंने श्रम विभाजन, धर्म और आत्महत्या के उद्भव का कारण समाज में माना और उन्हें समाज के लिए प्रकार्यात्मक बताया। दुर्खीम ने इन घटनाओं के सामाजिक आयामों का विश्लेषण किया और प्रकार्यवादी दृष्टिकोण अपनाया।

निष्कर्ष

दुर्खीम ने समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने समाज की विषय वस्तु को स्पष्ट किया, प्रकृति को स्पष्ट किया और अध्ययन पद्धति को स्पष्ट किया। दुर्खीम ने समाज को व्यक्ति से अधिक महत्वपूर्ण माना और हर घटना के मूल में समाज को कारण माना। उनके विचारों ने समाजशास्त्र के क्षेत्र को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया।

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Transcript

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0:00 है और अ थे सोशियोलॉजिकल तीन कर दो ई विल गिव ऊ को शुरू करने जा रहा हूं है कि अभी तक हम लोगों ने काम मार्च को पढ़ा कार्ल मार्क्स कि अहमद दुर्खीम है और बैक सुपर क ए क्लासिकल थिंक कर माने जाते हैं अ झाला 1838 में आ कि सुशील जी सब विषय की नींव रखी थी अगस्त कॉन्टिनेंट कि उनको फादर ऑफ सुशील जी कहा जाता है और 1838 39 40 से कार्ल मार्क्स ने लिखना शुरू कर दिया था

0:45 है तो जब कार्ल मार्क्स ने लिखना शुरू कर दिया था तो सॉरी है जो सब्जेक्ट है क्यों नहीं आया था तो आप कहोगे कि फिर हम मार्क्स को क्यों पड़ते हैं कि तुम आंख को इसलिए पड़ते हैं क्योंकि मार्किट में भी सोसायटी के बारे में लिखा है कि चाहे उस समय शिवजी आया हो या नहीं आया हो मार्च ने भी सोसायटी के बारे में लिखा है इसलिए हम उसको पड़ते हैं है इसलिए बॉक्स का विचार हम केवल और केवल सोसायटी के बारे में बढ़ेंगे लेकिन इनमें से कुछ जो है और सोशियोलॉजिस्ट है MS Word वर्किंग अगस्त कांटेक्ट तो है कि सिलेबस में गलत काम पर नहीं है कुछ स्टेट पीसीएस के सिम्टम्स में है अगस्त को अमेज़

1:33 को शुद्ध समाजशास्त्री हैं कि यह मजदूर की समाजशास्त्री हैं को मैक्सिमम पर समाजशास्त्री हैं टॉयलेट पारसंस समाजशास्त्री हैं रोबट के मटन समाजशास्त्रीय अब आप पूछोगे कि नींद किया है तो यह हम इनको समाजशास्त्री की श्रेणी में ना रख करके इनकम सोशल साइकोलॉजिस्ट की श्रेणी में रख सकते हैं सामाजिक मनोवैज्ञानिक किचन में रख सकते हैं इन्होंने जो सिद्धम दिया है उस सोशल साइकोलॉजी में भी पढ़ाया जाता है जहां सोशल साइकोलॉजी मैं आप एटीट्यूड पढ़ते हो सोशल जी का एक ब्रांच कर सकते हो साइकोलॉजी का एक ब्रांच कर सकते हो एक वह ब्रांच या वसा का जो शिवजी और साइकोलॉजिक को जोड़ती है

2:22 मैं इसको सोशल साइकोलॉजी मीट जो है वह कुछ तो बाकी आपके दुर्खीम कौन तो है दूं कि को मैक्सिमम पर पारसंस मटर कि चारों अगस्त कौन थे जोड़ लगे तो पांचों दो है अब इसमें से दुर्खीम और अगस्त काम्टे और मिक्सचर को हम क्लासिकल कहेंगे और पारसंस और मटन को हम आधुनिक समाज शास्त्र का उद्भव यूरोप में हुआ लेकिन इसका विकास अमेरिका में निश्चित रूप से जो आधुनिक समाज शास्त्री होंगे वहां से होंगे तो बस

3:08 अपना सकते हो कि अमेरिका से होंगे तो आपके पास और अमेरिका से और सब्सक्राइब से और न ही है जो समाजशास्त्रीय बच्चा और अभी शुरुआत वाले हैं हैं इनका विचार दोनों संदर्भों में हम देखेंगे इन्होंने समाज के बारे में भी अपने विचार दिए समाज क्या है जस्टिस ए है और दूसरा इन्होंने समाजशास्त्र के बारे में भी अपने विचार हैं है तो इनको पढ़ते समय हम इनके विचारों को दो भागों में बांटकर पढेंगे शोन जी के

3:55 बारे में उनका क्या कहना है है और सोसायटी के बारे में इनका क्या करना है 2011 थे सोसायटी के बारे में जैसे सभी बोल रहे हैं वैसे बोलेंगे सोसायटी को देखने का उनका नजरिया अलग अलग हो सकता है समाज के विश्लेषण का नजरिया चश्मा पर्सपेक्टिव अलग-अलग हो सकता है दुर्गा लग सकता है मैक्सिमम अलग हो सकता है अपने समाज के बारे में इन्होने क्या कहा समाज के किसी अन्य के बारे में इन्होंने क्या कहां है मैं इसे बॉक्स में ओवरऑल समाज के बारे में भी कहा और समाज के प्रमुख अंग इकोनॉमी के बारे में कहा उन्होंने समाज के सभी अंगों में से एक है नमी को सबसे प्रमुखता दी है

4:42 ने कहा कि समाज के सारे अंगों को इकोनॉमी ही निर्धारित करती है है और जब इकोनामी ने बदलाव आता है तो समाज के बाकी अंगों में भी बदलाव आ जाता है समाज में भी बदलाव आ जाता है इन्होंने किसी भी समाज की इकोनामिक सिस्टम पर फोकस्ड अपना ध्यान किया और इकोनामिक सिस्टम का क्रिटिकल एनालिसिस किया इकोनामिक सिस्टम में क्या-क्या खामियां है इसको दिखाने का प्रयास किया और इसी को दिखाते-दिखाते यह मुख्य रूप से अपने समय के कि पूंजीवादी ए टेरेरिस्ट इकोनामिक सिस्टम में क्या कमियां है क्या गड़बड़ियां है उसका क्रिटिकल एनालिसिस प्रस्तुत किया और जब कोई विचारक किसी भी घटना का क्रिटिकल

5:28 एनालिसिस करता है जब आप किसी की शिकायत करते हो जवाब करते हो आपकी आंखें ठीक नहीं है तो कहीं ना कहीं आप एक आदर्श मैं आपको सामने रखकर क्या करते हैं ओके भैया आखिर ठीक नहीं है बैटर आंख ऐसा हुआ चाहिए आपका चेहरा ठीक नहीं है बेहतर चेहरा ऐसा होना चाहिए तो जितने भी परिवर्तनवादी सिध्दांतकार है जिन्होंने भी या जितने भी कहो तो क्रिटिकल एनालिसिस करने वाले विचारक है वह कहीं न कहीं एक आदर्श समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करते चाहे वो गांधी का रामराज्य कि चाहे वह सीरियल का जर्मनी एग्जामिनेशन स्टेट को मार्क्स का साम्यवाद हो जो भी

6:16 समाज या कि समाज के किसी अन्य को क्रिटिसाइज करता है वह एक आदर्श समाज या आदर्श अंग की रूपरेखा प्रस्तुत करता है तुम्हारे से भी साम्यवादी उत्पादन प्रणाली की और साम्यवाद को एक आदर्श समाज के रूप में प्रस्तुत किया कि तुम आफ पावर और विचार समाज के बारे में तो अ है लेकिन जब इन विद्वानों के विचारों को हम देखेंगे तो समाज के बारे में भी उन्होंने यही कुछ कहा ओवरऑल समाज के बारे में भी कुछ कहा कि किसी ने पूरे समाज के मैकेनिज़्म को समझाने का प्रयास किया तो उनके पास को पढेंगे तो पारसंस ने सोसायटी के मैकेनिज़्म को समझाने का प्रयास किया सोसायटी के कौन कौन से अंग है इस सारे अंग कैसे मिले हैं और इस आर्यन मिल करके कैसे

7:01 समाज को बनाते हैं उनका पूरा का पूरा फोकस ओवरऑल सोसायटी था सोसायटी अजय सिस्टम पर जूही ने मैक्स वेबर ने भी सोसायटी के बारे में लिखा है कि सोसायटी के बारे में बहुत ज्यादा क्लिक करके सोसायटी के पर्टिकुलर किसी अन्य पर फोकस अध्ययन किया अमेरिकी ने श्रम विभाजन की घटना पर अध्ययन किया उसके बारे में लिखा ई-मेल तुर्की ने धर्म की घटना का ध्यान किया उसके बारे में लिखा है मंत्र क्रीम ने सुसाइड पर अध्ययन किया 126 हजार आत्महत्याओं के किसका ध्यान किया और आप हत्या पर एक सिद्धांत प्रस्तुत किया

7:46 मैक्सिमम ने भी इकोनॉमी खासकर के पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली का ध्यान रखिए उसके बारे में लिखा मैक्सिमम ने धर्म का ध्यान किया धर्म के बारे में लिखा है को मैक्सिमम में समाज की अंग पावर एंड अथॉरिटी शक्ति और सत्ता पर फोकस चयन किया उसके बारे में लिखा मैक्सिमम नौकरशाही पर अध्ययन किया उसके बारे में लिखा है इस तरह से बहुत सारे समाजशास्त्रीय ओवरऑल समाज पर फोकस्ड अध्ययन करके विस्तृत रूप से समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं जिनमें से कुछ लोग हैं जो समाज पर पूरा समाज के बारे में कम लिख करके समाज के किसी अंग पर फोकस करके अधिक करते हैं उनकी किताब का नाम है सुसाइड तब सुसाइड ओं साइट पर फोकस होंगे

8:32 लेकिन कहीं न कहीं उनके विचारों में ओवरऑल समाज के बारे में एक अप्रोच जरूर होगा एक विचार जरूर होगा हम उस विचार को पहचानने का प्रयास करेंगे देखने का प्रयास करेंगे फिर इन विचारकों ने एमिल दुर्खीम नैक से बचाती है और खासकर कि इन दोनों ने ए समाजशास्त्र के बारे में दिखाएं समाजशास्त्र क्या है अब हम समाजशास्त्र के बारे में बात करते हैं सुशील जी के बारे में बात करते हैं तो सोशल जी के बारे में हम दो तीन चीजों के बारे में ही बात कर सकते हैं सुशील जी क्या है हुआ था कि उद्भव और विकास पर बोलने की जरूरत नहीं है कोई फिकर उद्भव और विकास पर क्या बोलेगा तो हिस्टोरिकल फिल्म इन्हें सोशियोलॉजी क्या अलग विचारकों के विचार इस

9:18 पर हो सकते हैं तो शिवजी की विषय-वस्तु किया है अलग-अलग विचारकों के विचार हो सकते हैं इन लोगों ने शिवजी की परिभाषा देखी थी याद होगा आपको दो अलग-अलग लोगों में अलग-अलग रूप में इसको परिभाषित किया था निश्चित रूप से इन सभी परिभाषाओं में कुछ चीजें और मंत्री और उसी कॉमन के आधार पर हम लोगों ने जिंदल डिफिनिशन सोशल जी का लिखा था लेकिन सभी लोगों ने अलग-अलग चश्मे से सॉर्स कोड फाइल किया था चौधरी का सब्जेक्ट मैटर क्या है सोशल जी के विषय वस्तु क्या है सोशल कि किन-किन चीजों का ध्यान करता है इस पर भी विद्वानों के विचार अलग-अलग है के पक्ष अपनी कुर्सी से कोमल है सुशील जी का विशेष क्षेत्र क्या है इस पर भी विद्वानों के विचारों में भिन्नता है कुछ

10:04 चीजें कॉमन है 200 जी की प्रकृति क्या है का विज्ञान है विज्ञान है तो कैसा विज्ञान है प्राकृतिक विज्ञान की तरह विज्ञान है या व्याख्यात्मक विज्ञान है हैं तो नीचे 900 जी के बारे में भी अलग-अलग विद्वानों के विचार अलग है कि तमिल थीम इसको प्राकृतिक विज्ञान की तरह विज्ञान मानते हैं जबकि मैक्सिमम पर इसको व्याख्यात्मक विज्ञान की कैटेगरी में कि ग्रीस करते हैं वह करते हैं नेचुरल साइंस की तरह साइंस नहीं है है उसी तरह समाजशास्त्रीय अध्ययन की पद्धति आऊंगी तो इस पर भी कि इन दोनों के विचारों में मतभेद हैं दुर्खीम के अनुसार अध्ययन की पद्धति कुछ

10:50 और है मैक्सिमम के अनुसार अधीन की पद्धति कुछ और होनी चाहिए तो जो आपके शिवजी का यूनिट वन यूनिट यूनिट 3 कि उस समाजशास्त्र के बारे में समाज शास्त्र क्या है उसके विषय वस्तु क्या है दूसरा है इस मास्क की प्रकृति क्या है तीसरा है समाज के अधीन की पद्धति क्या है इन्हीं टीमों के संदर्भ में इन विद्वानों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए हैं तो हम जब इनको पढेंगे तो उनके विचारों को दो केटेगरी में कैटेगराइज करके पढेंगे समाजशास्त्र के बारे में उनके विचार और समाज के बारे में क्या विचार है कि थोड़ी बहुत बातें आपको यहां पर बता दूं आपके सामने स्क्रीन पर दूरबीन साहब की तस्वीर है यह एक फ्रांसीसी समाजशास्त्री हैं कि फ्रांस के रहने वाले थे 1858 में

11:39 इनका जन्म हुआ था हैं इनके जन्म के ठीक एक साल पहले अगस्त घंटे 1857 में उनकी मृत्यु हुई थी और अगस्त क्वांटिटी की मृत्यु के बाद तो क्रीम का उसी फ्रांस में जन्म हुआ था कहा जाता है कि अरेस्ट क्वांटिटी ही विचारों को इन्होंने आगे बाय अगस्त करंट 1838 उम्र 40 में समाज के विज्ञान के रूप में सुशील जी की न्यू लगकर के मर गए है लेकिन किसी भी यूनिवर्सिटी के लेवल पर सोशियोलॉजी एप्स सब्जेक्ट हैं ए वेकेशन नहीं मिल पाया एक अधूरे काम को तमिलनाडु की ने पूरा किया तो 1858 में एक पैदा को 1977 में यह मर गए अपने मृत्यु के

12:25 कुछ दिन पहले तक इनकी मानसिक स्थिति भी थोड़ी सी खराब रही यूनिट्स पर भी लिखा है ध्यान रहे प्रतिक पर भी लिखा है और पेपर में भी मैक्सिमम के इतिहास पर सवाल पूछा जा चुका है हालांकि हमारे स्किन कर में कहीं से भी एथिक्स उनका नहीं पढ़ना है लेकिन हम लोगों को समझ विकसित करनी होगी अगर आप उस पर का 2013 के बाद प्रश्न पेपर उठाओगे निकाल से 16 17 18 में तो मैक्सिमम का भी फिक्स पर सवाल पेपर में पूछा गया है जुखाम साहब ने भी नैतिकता पर काफी लिखा है इनको नहीं थी अधिकारी के रूप में भी नियुक्त किया गया था इस जमीन की और उनके पुत्र की मृत्यु हो गई थी शहीद हो गए थे उनके पुत्र काफी दुखी रहे

13:11 है लेकिन उनकी रचनाएं जो थी उनकी 19-12-13 तक प्रमुख रचनाएं 1962 में इन्होंने अधर्म पर लिखा धर्म का समाजशास्त्रीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है है और 1968 889 से इन्होंने लिखना शुरू किया आठ नो नो अच्छा ठीक है कि बने सबसे पहले श्रम विभाजन पर समाज में श्रम का विभाजन डिविजन आफ लेबर इन सोसायटी पर अपनी पहली पुस्तक लिखी इस पर इनकी पीएचडी भी थी है और फिर कि आगे ढूंढ बाकी सोशल साइट पर सोशियोलॉजिकल में क्लोज पर किताब लिखी आत्महत्या पर किताब लिखी धर्म पर किताब

13:57 लिखी 1962 में है तो यह थे दुर्खीम साहब जिनको हम लोग बढ़ेंगे अमरुद कि इन्होंने समाजशास्त्र को एक विज्ञान के रूप में स्थापित करने में बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन दिया है मैंने अभी-अभी का हक इन्होंने 10 क्वांटिटी कि अधूरे काम को पूरा किया है ए प्लस क्वांटिटी सुशील जी क्या है इसकी विषय वस्तु क्या है इसकी प्रकृति क्या है इसकी अध्ययन पद्धति क्या है पर सामान्य चर्चा करके भर गए थे है MS Word हमने उसको और स्पष्ट किया कि मजदूर की ने समाजशास्त्र को अन्य विज्ञानों से पृथक एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई थी

14:42 झाल यह तो समाज शास्त्र में ML दूध हम का विचार भी हम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है और समाज के बारे में भी यह मंत्र क्रीम का विचार हम लोगों को पढ़ना है कि यह तुर्क इन तमिल दूर थीम कि हमारे दिमाग में बिल्कुल क्लियर है 1838 में शिवजी की स्थापना होती है हमारे दिए हुए थे कर में से एक थी कर आपके कार्ल मार्क्स 1818 में पैदा लेते हैं 1839 लिखना शुरू करते हैं 1883 में जाते हैं दूसरा सिंह कर 1858 में इंसुलिन पैदा लेते हैं अगस्त कांटेक्ट मृत्यु के एक साल बात है और 1917 मर जाते हैं तीसरा थिंग कर

15:28 आपके मैक्सिमम है जो 18 बॉस-8 में पैदा लेते हैं कि 1864 अंदर क्योंकि पैदा लेने की चीज साल बाद और वह 1920 में मरते हैं लेकिन की मृत्यु के तीन साल बाद तो इनका जुए पीरियड है यूरोप का वही वाला समाज का अहित है है इसके बाद आपके मटन और पारसंस एक 1940 45 50 60 के लेखक है 1950 साथ में लिखना शुरू किया 1940 में 39 में भी पार्षद ने लिखा तुम तो 1945 तो समझ सकते हो कि यह मास्क से सौ साल बाद की हैं दुखी वगैरह से भी लगभग 70 साल बाद देखिए इस दिन को

16:15 आधुनिक समाज शास्त्री चिंतक कहा जाता है तो ध्यान रहे कि पारसंस मटर मीट कुमार करो बात के लिए और पहले वालों में आपके दिमाग में क्लियर है कार्ल मार्क्स के पीछे चलो सोंग्स कॉम के कार्ल मार्क्स ML जख्म वैक्स पेपर इस आर्थिक उन लोगों को दिमाग में रखना है में राहु करती है का सिलेबस हम लोग पहले देखते हैं बच्चा हम लोगों को सिलेबस में जिम्मेदार क्रीम का चार्ट टॉपिक यूपीएससी के सिलेबस में भी दिया हुआ और यूपीएस यूपीपीसीएस के सिल्वर स्पून किया हुआ है डिवीज़न ऑफ़ पर इसको आप

17:03 कर सकते हो डिविजन आफ र सोसायटी ओं कि समाज में श्रम का विभाजन भी मानव समाज का एक प्रमुख अन्य है मानव समाज के प्रमुख घटना है तो 13 समाज के अंग या सामाजिक घटनाओं का इन्होने विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया है और सोशल साइट का जो टॉपिक है इस सुशील जी के बारे में तो 100 जी के बारे में एक टॉपिक सोशल साइट और समाज के बारे में तीन टॉपिक सिलेबस में है डिविजन आफ लेबर इन सोसायटी सुसाइड और रीलीशन ए फैमिली तुर्की ने जब हुआ था में हिंसा की घटनाओं के बारे में लिखा होगा अ कि तुम का परिवेश क्या होगा पर्सपेक्टिव क्या होगा सोशियोलॉजिकल अ

17:51 मैं हमेशा ध्यान रखो समाजशास्त्र एक विषय है जिसकी विषय-वस्तु समाज है ए समाजशास्त्र समाज का चयन करने वाला विषय इसकी प्रति कि वैज्ञानिक है मैं तुम्हारा लाइन बनेगा समाज साहित्य समाज का ध्यान करने वाला एक विज्ञान है ऑन करो का विज्ञान है तो उसकी परिणति क्या होगी वैज्ञानिक पद्धति होगी हुआ था और इसका परीक्षण किया होगा समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य होगा सोशियोलॉजिकल पर्सपेक्टिव ओं

18:37 का समाजशास्त्रीय नजरिया समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण तो हम कर सकते हैं समाजशास्त्र समाज का अध्ययन करने वाला एक विज्ञान है जो वैज्ञानिक पद्धति से और समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य से समाज और सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता है है कंप्लीट डेफिनेशन है कि हर वर्ड डेफिनेशन आध्यात्मिक टॉपिक समाजशास्त्र समाज का वैज्ञानिक पद्धति से अधीन करने वाला है या समाजशास्त्र समाज का अध्ययन करने वाला एक विज्ञान है जो वैज्ञानिक पद्धति से और समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य से समाज

19:26 का और सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करता है कि वैज्ञानिक पद्धति के कुछ छुपा है समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में बता चुका हूं समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य का मतलब होता है किसी घटना के सामाजिक नियमों का विश्लेषण करता किसी घटना के सोशल डायमेंशन को समझाने का प्रयास करना है है कि सोशल जी की विशेषता है कि यह सोशल जी का अप्रोच है और सोशल साइंस मतलब सोशियोलॉजिकल पर्सपेक्टिव मतलब घटना का समाज पर क्या प्रभाव है समझकर अपना प्रभाव सोशल यही देखता देखता है तो सोशल जी की विषय-वस्तु समग्र समाज है 840 G1 सामान्य विज्ञान है बता चुका हूं

20:13 राजनीति विज्ञान अर्थशास्त्र एक विशिष्ट विज्ञान है और आर्थिक व्यवस्था व राजनीतिक व्यवस्था धार्मिक व्यवस्था व्यवस्था परिवार व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था यह सब मानव समाज के अंग रहें हम इसी समाज में पैदा लेते हैं इन अलग-अलग अंगों से जुड़कर हम अपनी अलग-अलग आवश्यकताओं को पूरा करते हैं आर्थिक व्यवस्था से जुड़कर अपनी भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करते हैं विवाह परिवार व्यवस्था से जुड़कर हम यौन तुष्टि प्रजनन बच्चों का पालन-पोषण जैसी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं कि हम शिक्षा व्यवस्था से जोड़कर ज्ञान प्राप्ति के आवश्कताओं को पूरा करते हैं ज्ञान अर्जन की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं हम राजनीतिक व्यवस्था से जुड़कर लॉ

20:59 एंड ऑर्डर से संबंधित आवश्यकताओं को पूरा करते हैं हम मानव समाज में पैदा लेते हैं इन सभी अंगों के से जुड़कर अपनी अलग-अलग जरूरतों को पूरा करते हैं और इसी में मर जाते हैं इसी समग्र को हम समाज करते और बाकी जितने भी विषय हमने पहले पढ़ा है इस विशिष्ट विज्ञान है विशिष्ट विषय पर राजनीति शास्त्र समाज की एक अंग पॉलीटिकल सिस्टम पर फोकस वैज्ञानिक अध्ययन करता है पॉलीटिकल सिस्टम के मैकेनिज़्म को समझने का प्रयास करता है अर्थशास्त्र समाज के एक अंग इकोनामिक सिस्टम पर फोकस अध्ययन करता है और इकोनामिक सिस्टम के मैकेनिज़्म को समझने का प्रयास करता है समाजशास्त्र

21:45 कि समग्र समाज पर फोकस चयन करता है ध्यान से सुनो ए समाजशास्त्र समाज को एक इंटिग्रेटिड होल मांगता है अगली डिफीट समाजशास्त्र समाज को एक इंटिग्रेटिड भूल मांगता है एक विकृत समग्र मानता है एक ऐसा समग्र जो कई अंगों से मिलकर बना एक ऐसा समग्र जिसके सामने वन प्रॉपरली एक-दूसरे से जुड़े होते एक ऐसा समग्र है जो कई अंग उससे मिलकर मशीन की तरह तैयार है इस मशीन को हम समाज करते हैं है और समाजशास्त्र इसी झाल मशीन रूपी समाज को यहां पर केंद्रित अध्ययन करता है और समाज

22:32 के मैकेनिज़्म को समझने का प्रयास करता है इसलिए जब समाज समाज के अंगों का अध्ययन करता है समाजशास्त्री पॉलीटिकल सिस्टम का अध्ययन करता है समाजशास्त्र भी इकोनामिक सिस्टम का अध्ययन करता है समाजशास्त्री एजुकेशन सिस्टम का फैमिली सिस्टम का मेरिस्टम का क्लियरेंस सिस्टम का डिपेंड करता है है और राजनीति विज्ञान भी करता है अष्टमी करता है पर दोनों के चश्मे में अंतर है दोनों के पर्सपेक्टिव में अंतर है नजरिए में अंतर है कि जब समाजशास्त्र इकोनामिक सिस्टम का ध्यान करता है तो वह इकोनामिक सिस्टम को ए पार्ट आफ सोसायटी दिखता है समाज के अंग के रूप में जब समाजशास्त्र अ पॉलिटिकल सिस्टम का ध्यान करता है तो अ पॉलिटिकल सिस्टम को समाज के अंग के रूप में देखता है

23:19 झाल एजुकेशन सिस्टम को समाज के अंग के रूप में देखता है का रिव्यू सिस्टम फैमिली सिस्टम वैरी सिस्टम को समाज की अंग के रूप में देखता है जबकि पॉलीटिकल साइंस पॉलीटिकल सिस्टम पर फोकस करता है पॉलीटिकल सिस्टम के विभिन्न अंग और उनके मध्य संबंधों को समझने का प्रयास करता है फैमिली सब्सक्राइब टो के प्रति स्वास्थ्य तो समाज की मशीन को समझने का प्रयास करेगा इसलिए उसका तो लेना-देना इकोनामिक सिस्टम पॉलीटिकल सिस्टम फैमिली सिस्टम एजुकेशन सिस्टम सबसे है उस सब को ए पार्ट आफ सोसायटी दिखता है

24:05 और देखने का प्रयास करता है कि समाज के अंग के रूप में यह सभी पॉलीटिकल सिस्टम और मिस्टर मिस्टर मैंने से Bigg Boss सिस्टम वैल्यू सिस्टम कैसे एक दूसरे से जुड़े कैसे एक दूसरे को प्रभावित करते हैं इकोनामिक सिस्टम का फैमिली सिस्टम पर क्या प्रभाव है डिवीजन सिस्टम पर क्या प्रभाव एजुकेशन सिस्टम पर क्या प्रभाव है या रीजन सिस्टम का एजुकेशन सिस्टम पर क्या प्रभाव है फैमिली सिस्टम पर क्या प्रभाव है इकोनॉमिक्स स्तर पर क्या प्रभाव है प्वाइंट सिस्टम पर क्या प्रभाव रहा है पृथ्वी का प्रभाव सपोर्ट सिस्टम पर रखा है और राजतंत्र से डिवीजन के आधार पर बनी हुई व्यवस्था थी राजनीति देवी अधिकार का सिद्धांत कि एक लंबे समय तक पॉलीटिकल सिस्टम का निर्माण इसी धर्म के आधार पर हुआ था राजा भगवान का प्रतिनिधि है भगवान ने हमें

24:50 हमारे ऊपर शासन करने के लिए अपने प्रतिनिधि के रूप में राजा को भेजा है और हमारा धर्म है कि राजा की आज्ञा का पालन खड़ी को लंबे समय तक धर्म का प्रभाव पॉलीटिकल सिस्टम पर था एक लंबे समय तक फैमिली प्रभाव फूल धर्म का था फैमिली सिस्टम पर था पति परमेश्वर होता डिस्क स्पेस है 11 अभी समस्त धर्म का इकोनामिक सिस्टम पर प्रभाव था तो धर्म बाकी अंगों को कैसे प्रभावित करता है अब आप यह धर्म को कैसे प्रभावित करते हैं इकोनामिक सिस्टम आप हम को कैसे प्रभावित करता है या पीएम विद इकोनामिक सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं पॉलीटिकल सिस्टम बाकी अंगों को कैसे प्रभावित करता है या बाकी अंदर पॉलीटिकल सिस्टम को कैसे प्रभावित करते हैं थे यह हम देखते हैं यह सोशियोलॉजी देखता है यही है शिवजी का नजरिया और इसी नजरिए को इसी

25:38 दृष्टिकोण को हम सोशियोलॉजिकल पर्सपेक्टिव करते हैं समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य करते इसलिए सुशील जी में हमारा विषय-वस्तु साइकिल भी है कि स्कूटर भी है के कारण भी है की दवा भी है कि उत्पादन प्रणाली भी है कि अल्ट्रासाउंड मशीन भी अ है लेकिन हम कार क्या-क्या मेकेनिज्म है साइकिल का क्या मेकेनिज्म है कि क्या कोई मेडिसिन किन-किन रसायनिक तत्वों से मिलकर बनती है या अल्ट्रासाउंड

26:27 का क्या मैकेनिज्म है यह जानने का प्रयास नहीं करते हैं कि हम तो यह देखने का प्रयास करती हैं इस साइकिल का या कार का या मेडिसिन कहा या अल्ट्रासाउड मशीन का समाज पर क्या प्रभाव है कि कैसे अल्ट्रासाउंड मशीनें लिंग चैनल को संभव बनाया कैसे अल्ट्रासाउड मशीन के विकास के लिए परिणाम स्वरूप अविष्कार के परिणाम स्वरूप प्रचलन के परिणाम स्वरूप कन्या भ्रूण हत्या में वृद्धि हुई और देश का लिंगानुपात कि गिर गया हुआ है अल्ट्रासाउंड मशीन का समाज पर प्रभाव अब समझ में आ रहा तो हूं हमारे लिए हर

27:17 कि समाज में जो भी है वह समाजशास्त्र का विषय वस्तु है बट नजरिया देखने का हमारा अलग है हम किसी भी घटना के सामाजिक नियमों को देखेंगे 123 चौधरी जी है तो बहुत क्लियर है कि डिविजन आफ लेबर एक सामाजिक घटनाएं खास करके इकोनामिक सिस्टम से जुड़ी घटना है एडम स्मिथ ने इसको के आर्थिक विकास में सहायक बताया था कार्ल मार्क्स ने भी इस पर लिखा था याद करो उन्होंने लगाओ कि संदर्भ में दक्षिण श्रम विभाजन पर कलम चलाई थी दुखी ने भी इसको अपने अध्ययन का विषय वस्तु बनाया और इस पर लिखा था हुआ था कि उस इत्र आ आत्महत्या उस समय यूरोप में

28:04 दुखी निकाले यूरोप में बहुत तेजी से बढ़े थे सारे लोग सुसाइड कर रहे थे दुखी ने भी हाथ हत्या को अपने विषय वस्तु के रूप में लिया और उस पर कलम चलाई लिखा आ को गर्म भी उस समय की बहुत महत्वपूर्ण घटना थी अ मैं दुखी ने भी धर्म को अपने अधीन की विषय वस्तु के रूप में दिया और उस पर लिखा बट बहुत क्लियर होगा कि दुर्गम ने डिविजन आफ लेबर या सुसाइड या धर्म के सामाजिक आयामों को देखने का प्रयास किया होगा लेकिन उनका नजरिया सोशियोलॉजिकल तक आ है इसका समाज पर क्या प्रभाव है या समाज का इस प्रकार प्रभाव डिविजन आफ लेबर सुसाइड या रिलीजन समासिक कैसे जुड़ा हुआ है तो यह हम लोगों को दूर कर दो

28:58 कि हम लोग शुरू करते हैं और हम लोग उसी तरह से पढेंगे सबसे पहले उस समय दुर्खीम कारण सामाजिक परिदृश्य को देखेंगे दुर्खीम कारण बीमार बौद्धिक परिदृश्य को देखेंगे तुर्की की अध्ययन का क्या उद्देश्य था अपने पूरे विश्लेषण में हम देखेंगे और फिर इन्हीं के कंटेस्ट में दुर्खीम के जो भी विचार हैं उसका एक आउटलाइन पर ने समझेंगे जैसे हम लोगों ने मार्च का समझा था तो हम शुरू करते हैं बच्चा सबसे पहले हम आपके सामने हैं समाजशास्त्रीय चिंतक ML दूध की 1858 से 1917 फ्रांस इसको थोड़ा हम ऊपर उठा देते हैं ध्यान से लटकाया हैं और अब आपको मेरे ख्याल से दिखाई दे रहा होगा ना जी हां

29:46 कि आज का क्लास केवल रिएक्शन होता है डायग्राम आफ बना सकते हो शुरुआत की वृद्धि खास होते हैं जिसमें कि हम किसी भी तीन करके अ कि सभी पक्षों को समझते हैं मैंने पिछली क्लास में ही बताया था कि थिंक कर को बेहतर तरीके से अगर समझना है तो हम उस समय के सामाजिक परिदृश्य को देखें उस समय के बौद्धिक परिदृश्य को देखें थी करके समय क्या चल रहा था कैसा था क्योंकि कोई भी विचारक जन्म से कोई विचार लेकर नहीं आता है सामाजिक परिस्थितियां बौद्धिक परिस्थितियां ही उसकी विचारों को शेप देती है हुआ था कि उसके विचारों को स्वरूप प्रदान करती हैं तो जल्दी हम सामाजिक परिदृश्य को समझ जाते हैं बौद्धिक प्रदेश से को समझते हैं तो उसके विचारों को समझना हमारे लिए और बेहतर हो जाता है ठीक है अगर आप

30:38 अजय को ए फोटो कि अ हुआ है जो मैंने अभी अभी बताया था कि दक्षिण का जो टाइम था के रूप में फ्रांस मिलता है 118 0589 है और कि 1992 17 का जन्म उस समय तक दो तीन घटनाएं यूरोप की

31:23 महत्वपूर्ण 12 मार्च वाली सामाजिक विष्णु मीणा कि उसकी और सिक्सटी पीछे चले जाओ अगस्त क्वांटिटी वाली सामाजिक पृष्ठभूमि मतलब यूरोप में जो दो तीन चार महत्वपूर्ण घटनाएं हैं वह आपको पता है आप प्रबोधनकार और पुनर्जागरण दो महत्वपूर्ण घटना है जिसके बारे में परिचित हो तिरुपति तो दो तीन महत्वपूर्ण घटनाएं थी द की तिथि वैज्ञानिक क्रांति दूसरी थी व्यापारिक शांति पसरी थी औद्योगिक क्रांति व्यापारी क्रांति और औद्योगिक क्रांति को हम आर्थिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना मानते हैं और वैज्ञानिक क्रांति विज्ञान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है

32:10 और उसके पहले का यूरोप का चम्मच मध्यकालीन समाज उनके पीछे पड़ चुके हैं है यह उसके आधुनिक के पहले कि समाज की बात करें अगर हम मध्यकालीन समाज की बात करें धर्म की प्रधानता थी अ हुआ था उसमें बहुत ज्यादा विज्ञान और तकनीकी का विकास नहीं हुआ था उस समय लोगों की सोच बहुत ज्यादा तार्किक वैज्ञानिक नहीं हुई थी उस समय तक बुद्धिवाद बहुत प्रबल रूप में विकसित नहीं हुआ था प्रबल रूप का मतलब होता है कि तक तो मनुष्य में जन्म से होता है तो यही क्षमता मनुष्य को अपने जानवरों से अलग करती है मनुष्य विवेकशील प्राणी है तो

32:55 विज्ञान का विकास या प्रौद्योगिकी का विकास कोई नहीं घटना नहीं है जब से हम आए हैं तब से विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास होता रहा है याद का आविष्कार किया पर यह का आविष्कार किया जब हमने नमक को ऐसे करके बनाया होगा इसको टेक्नोलॉजी है की स्थिति बहुत पहले से लगा है कोई नई चीज नहीं है मैं इस पीस में क्रांतिकारी बदलाव यानि बहुत ज्यादा तेजी से इसको वैज्ञानिक क्रांति की संज्ञा दी गई उसके पहले ही समाज में अगर हम जाते हैं तो धर्म प्रधान समाज था सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में धर्म का प्रभाव प्रबलता समाज के जो मूल्य थे मान्यता थे सामाजिक नियम थे उसका निर्धारण धर्म पढ़ता था वह और पादरी करते थे धर्म ग्रंथों के माध्यम से रोकता है

33:44 में राजतंत्र था और राज्य की छवि अधिकार का सिद्धांत का प्रचलन था यानी पॉलीटिकल सिस्टम भी धर्म से प्रभावित था ही सरल कृषि अर्थव्यवस्था थी खेतों पर बड़े-बड़े भू-सामंतों का नियंत्रण होता था और कृषि मजदूर उनके खेतों में काम करते थे अ कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था थी आधुनिक शिक्षा का प्रभाव नहीं हुआ था अ कि फार्मिक शिक्षा व्यवस्था थी अगर हम सामाजिक स्तरीकरण व्यवस्था पर नजर डालें उस समय कि ऊंच-नीच तो सबसे टॉप पर राजा आप और पादरी थे धर्म के जो ऐड के सबसे कम पर धर्म प्रधान समाज तो बहु सबसे ज्यादा

34:30 उपाधि और उसके बाद राजा सामंत और कुलीन वर्ग के लोग थे और सबसे बॉटम में सामान्य इन थे कॉमनस जगह करते हैं है तो सबसे टॉप में उपाधि उसके बाद राजा सामंत खुली और सबसे बॉटम में सामान्यतः धुंध वस्त्रों में बटा हुआ था उस समय का रूप का समाचार है है और सबसे बॉटम वाला जो सामान्य जनता इसमें दो लिया था एक खेती करने वाला किसान मजदूर और दूसरा उचित थोड़ा ऊपर छोटे छोटे दुकानदार और व्यापारी वर्ग यही दुकानदार और व्यापारी बंधु था जो व्यापार करने के लिए यूरोप से बाहर की तरफ कदम रखा यही

35:18 व्यापारी वर्ग था जो धीरे-धीरे संगठित होकर के व्यापार करने लगा भारत में आया वास्को डी गामा कोलंबस अमेरिका में या व्यापार करने के लिए है और धीरे-धीरे इन देशों के साथ फिर उसका व्यापार इतनी तेजी से बढ़ा कि इसको व्यापारी क्रांति की संज्ञा दी जाती है और धीरे-धीरे यही व्यापारी में अपने व्यापार की जरूरतों के हिसाब से भारत जैसे अपनी विकसित देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है में व्यापक स्तर पर उत्पादन करने लगे बस दिनों से उत्पादन करने लगे मशीनों से large-scale प्रोडक्शन इतनी तेजी से रूप में बड़ा कि इसको औद्योगिक क्रांति की संज्ञा देते हैं औद्योगिक क्रांति की संज्ञा देते हैं यानी व्यापारी क्रांति ने

36:05 औद्योगिक क्रांति को जन्म देने में अहम भूमिका निभाई और यही व्यापारी वर्ग का जो पौधों की क्रांति के बाद उद्योगपति या पूंजीपति वर्ग के रूप में उभरकर सामने आया कि कुछ मार्क्स में हम लोगों ने बखूबी बढ़ाएं है कि नेपाली क्रांतिकथा धो कर दो है और एक साइड में अगर हम जाती हैं और इधर व्यापारी क्रांति और औद्योगिक क्रांति जब हुई तो औद्योगिक क्रांति पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के तहत निजी व्यापारियों ने उद्यमियों ने उद्योगपतियों ने पूंजीपतियों ने मशीनों से लार जिसके प्रोडक्शन को पूरा किया शुरू किया इनका उद्देश्य अधिक से अधिक लाभ कमाना इस प्रक्रिया में जमकर शोषण हुआ था विषमता

36:50 बढ़ी गरीबी बढ़ी बेरोजगारी बढ़ी स्लम्स का विकास हुआ नगरीकरण हुआ कई प्रकार के नगर यह समस्याओं का आगमन हुआ था तो यूरोप में औद्योगिक क्रांति हो चुकी थी और औद्योगिक क्रांति के दुष्परिणाम दिखाई देने लगे थे पहला पॉइंट और दूसरी तरफ यूरोप में है जो धर्म प्रधान समाज स्थल हाउ टो पादरी ए राजा साबुत खुली ओपनस का सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में धर्म का प्रभाव प्रबल तरफ उसी समय यूरोप में तर्क बुद्धि बाद का विकास होता है को पिकअप तर्कसंगत विश्लेषण तेज हो जाता है लोग हर घटना को तक के द्वारा समझने का

37:36 प्रयास करते हैं हर घटना पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं तर्क-वितर्क करते हैं है और जब तक का प्रभाव बढ़ गई काया और हिस्ट्री धर्म का प्रभाव कमजोर होगा थे फर्म द्वारा बहुत सारी कही गई बातों पर लोगों ने तर्क करना शुरू किया पर उतरा करना शुरू किया अरे भाई धर्म का संबंध विश्वास है हनुमान जी है तो है यह हमारा विश्वास है इस पर जैसे ही तक करोगे ना हनुमान जी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा धर्म का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा लेकिन लोगों ने तर्क करना शुरू किया को सबसे पहले धर्म द्वारा कही गई बातों पर तर्क करना शुरू किया को उस समय एक और चीज डालने वाली है कि

38:22 धर्म का प्रभाव इतना ज्यादा प्रबंध था कि धर्म हर चीज के बारे में ज्ञान देना शुरू कर दिया था अ एक टेक्स इंक्रोचमेंट ऑफ रिलीजन कि धर्म का इंक्रीमेंट था अ मैं फालतू अलौकिक शक्ति में विश्वास है और उससे जुड़े कर्मकांडों की एक व्यवस्था है अ कि मैं अपनी पत्नी से बहुत मोहब्बत करता हूं यह हमारा आफ इमोशनल मामला है है लेकिन हमें इस इमोशन में अंधा नहीं

39:08 होना चाहिए कि मैं कहने लगे कि हर चीज को मेरी पत्नी ने बनाया यही हुआ था ना थे फर्म प्रधान समाज में एक लोगों का धर्म से अथाह लगाव था ही इमोशन का मामला था लेकिन इस इमोशन का फायदा लोगों ने उठाया वह बाद जो भी धन प्रयोग करते हैं थे और उन्होंने हर घटना की व्यवस्था करनी शुरू करती हर घटना के बारे में धर्म ने बोलना शुरु कर दिया नीचे के बारे में धर्म ने बोलना शुरू कर दिया भूकेंद्रीय सिद्धांत पृथ्वी के चारों तरफ सारे ग्रह चक्कर लगाते हैं कि हर चीज के बारे में में ए राजा भगवान के प्रतिनिधि हमारे यहां

39:55 इंडिया में पति परमेश्वर है में ही इंक्रोचमेंट हरीश जाखड़ है लेकिन जब तक बुद्धिवाद का विकास हुआ जब विज्ञान का विकास हुआ है को सबसे पहले विज्ञान का विकास प्राकृतिक जगत के बारे में हुआ गैलीलियो ने फिर कॉपरनिकस नहीं सूरज केंद्रित सिद्धांत का प्रतिपादन किया पृथ्वी के चारों तरफ नहीं सूरज के चारों तरफ कार्यक्रम चक्कर लगाते हैं सोचो अगर यह थे फर्म द्वारा कही गई बातों को मान लेते विश्वास करने थे कि पृथ्वी के चारों तरफ सारे ग्रह चक्कर लगाता है क्योंकि ऐसा कृषि नीति में लिखा है वह गेंद सिद्धांत को स्वीकार कर लेते तो शायद यह सोच गंदी सिद्धांत का प्रतिपादन नहीं कर पाते

40:42 इन्होंने सबसे पहले इस भूकेंद्रीय सिद्धांत को स्वीकार किया आउट किया है हां तभी तो जाकर तर्कसंगत तरीके से फिर इस कि को खोजने का प्रयास किया कि फिर आखिर किसके चारों तरफ सारे ग्रह चक्कर लगाते हैं और खोज निकाला अगर विश्वास कर लेते तो फिर उनकी को आगे नहीं बढ़ पाती हैं थे फर्म द्वारा दिए गए ज्ञान जिसका स्रोत या जिसका आधार स्वास्थ्य कि इस धर्म द्वारा दिए गए ज्ञान पर इन्होंने अब विश्वास किया डाउट किया और फिर वैज्ञानिक तरीके से कि कुछ एक नए ज्ञान की खोज रखी इसी को विज्ञान कहा जाता है विज्ञान वह ज्ञान है जिसको

41:29 तर्कसंगत और व्यवस्थित तरीके से प्राप्त किया जाता है विज्ञान वह ज्ञान है जो तथ्यों पर आधारित होता है और तत्व होते हैं जिसको चाहे तब देखा जा सके भैया आधार चुनें सही है या गलत है हुआ था इस तरह से तक बुद्धिवाद के विकास में विज्ञान के विकास को संभव बनाया वैज्ञानिक क्रांति में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में उभरकर सामने आई है झाल पर एक प्राकृतिक जगत के बारे में ढेर सारी धर्म द्वारा कही गई बातों को इस वैज्ञानिक क्रांति ने झूठा साबित कर दिया और समझ सकते हो टीचर कि प्राकृतिक जगत के बारे में धर्म द्वारा कही गई बातें झूठी साबित हुई तो धर्म की

42:16 प्रतिष्ठा गिरी ई एम के रूप में धर्म की प्रतिष्ठा गिरी के लोगों को धर्म द्वारा कही गई बातों पर डोंट होने लगा अ है इधर में जो ज्ञान देता था बस दीदी तथा सिद्ध नहीं करता था कि आस्था और विश्वास पर आधारित का वैज्ञानिकों ने जो ज्ञान दिया उस ज्ञान को मुनि सिद्ध किया का परिणाम हुआ था वैज्ञानिकों द्वारा दिया गया ज्ञान उक्त लोगों को अपील करने लगा है को शुरू में विज्ञान के इस विकास को धर्म ने विरोध किया क्योंकि ज्ञान के इस विकास से धर्म का प्रभाव कमजोर हो रहा था धर्म झूठा साबित हो रहा था गैलीलियो को फांसी

43:02 दे दी गई कॉपरनिकस को अपना स्टेटमेंट छह साल तक वापस लेने के लिए कहा गया छह साल तक कॉपरनिकस ने स्टेटमेंट को डर से दबा दिया है है अथवा जारी कर देंगे मार देंगे और आ गिरे धर्म के अंदर भी बहुत सारे तर्कसंगत विश्लेषण शुरू हुआ था जिसने प्रोटेस्ट इन थे वॉटर को जन्म दिया का प्रबंध का प्रभाव ट्रेवल हो गया था विज्ञान का विकास शुरू हो गया था और विज्ञान के विकास के साथ यूरोप में धर्म के प्रभाव में कमी आने लगी है सोनू निगम का जूस हर क्षेत्र में ज्ञान था

43:47 अब उस ज्ञान पर लोगों को डोंट होने लगा अ हुआ था अप्रेल कहा भाइयो बहनो यह राजा जी इनको भगवान ने हमारे ऊपर शासन करने के लिए भेजा है भगवान के प्रतिनिधि है पीछे से आवाज आई बेवकूफ मत बनाइए हो साहब आप कि भगवान के प्रतिनिधि कैसे हो सकते हैं कि मैं हिसामपुर दे रहा हूं कुछ इस तरह की चीजें हैं हुआ था सकती हो मैं तुम्हारा पति हूं मैं परमेश्वर पत्नी बोलने लगे कि बहुत हो गया अब बस कर दो कि परमेश्वर है तो इसको सोना बना दे ओ हुआ था हेलो कनिका मतलब है इस तरह की मालिकों का

44:33 है का सामाजिक जीवन के क्षेत्र में भी जो इस तरह की मान्यता थी कि सामाजिक नियमों का स्रोत धर्म तथा सामाजिक मूल्यों का स्रोत धर्म था तो समाज की जो कि मूल्य थे नियम थे अपने समाज के बारे में जो धर्म द्वारा दिया गया ज्ञान था उस ज्ञान से भी लोग प्रश्न उठाना शुरू कर दिया परिणाम राजतंत्र का विरोध और लोकतंत्र का आगमन हो कि इंग्लैंड में एक 1688 में प्रोड्यूस रिवॉल्यूशन हुआ है में राजतंत्र को लोगों ने अस्वीकार किया कि अगर धर्म प्रधान समाज होता तो शायद भगवान के प्रतिनिधि के रूप में राजा के

45:19 सत्ता को लोग स्वीकार करते कभी भी राजतंत्र का विरोध नहीं होता लेकिन लोगों की सोच तार्किक और वैज्ञानिक हो रही थी कि हो रही थी दूसरी तरफ बुद्धिवाद और विज्ञान का प्रभाव था तब विवाद और विज्ञान के विकास ने लोगों की सोच को प्रभावित किया है कि प्राकृतिक जगत के बारे में वैज्ञानिकों ने जो धर्म द्वारा कही गई बातों को झूठा साबित किया सामाजिक जीवन के बारे में भी धर्म द्वारा कही गई बातों पर प्रश्न उठाया जाने लगा है कि राजनीतिक व्यवस्था के मारेंगे धर्म द्वारा कही गई बातों का विरोध हुआ और लोकतंत्र का आगमन हुआ है [संगीत] लुट सामाजिक जीवन आर्थिक जीवन पारिवारिक जीवन हर क्षेत्र में

46:12 हैं अब यहां पर दुर्घटनाओं की सत्ता हमने एक घटना विज्ञान के विकास के साथ यूरोप में धर्म का प्रभाव कमजोर हो रहा था अ है और दूसरी घटना औद्योगिक क्रांति के दुष्परिणाम दिखाई दे रखे हैं कि अब भक्त इन दोनों ही घटनाओं से उस समय की सामाजिक पृष्ठभूमि थे दोनों ही घटनाओं को हम यह देखिए चलिए रूप में सामाजिक समस्याओं का उद्भव चुका था लुट में सामाजिक एकता की समस्या उत्पन्न हो चुके थे कि थोड़ा सा दिमाग लगा हुआ है

46:59 कि हम 13 हजार लोगों का समाज है पुष्कर को यह समाज है इसलिए हजार लोग है और 1000 लोगों ने कोई नियम बनाया है का कोई तरीका काम करने का इस तरीके पर जब 1000 लोग सहमत हुए हैं तो सामाजिक नियम काला या राइट 1000 लोग किसी भी व्यवहार के तरीके पर इसलिए सहमत हुए होंगे क्योंकि उस तरीके से काम करने से एक हजार लोगों की सब की आवश्यकताएं पूरी होती होंगी कि हम कोई काम करते हैं हम कोई किया करते हैं तो क्यों करते हैं मनुष्य धरती पर आया उसकी आवश्यकता थी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए उसमें कुछ किया

47:45 कि हमने आपने सब हम अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कुछ करते हैं ध्यान रखो लेकिन हम्म जब अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशेष तरीके से कुछ किया और उससे दूसरे की आवश्यकताएं बाधित होगी तो शायद उस पर एग्री नहीं होगा का या कि उसका विरोध करेगा हैं या फिर हमारी किया का जवाब नहीं देगा अंतक्रिया में ही होगा संबंध नहीं बनेगा समाज नहीं बनेगा लो है लेकिन अगर खुद तरीका उससे भी पसंद आया उस तरीके से अगर हम व्यवहार करते हैं क्रिया करते हैं तो उसकी भी जरूरतें पूरी होती है इसलिए तीसरा भी चौथा भी पांचवा भी सब उस तरीके पर सहमत हुए क्योंकि वह ऐसा बेहतर तरीका था जिससे केवल मेरी ही नहीं

48:32 बल्कि सब की आदर्श तरीके से आवश्यकता पूरी होती थी आदर्श रूप से गुप्ता पुनीत उस तरीके को हम सबने मान्यता दे दी समाज में मान्यता दे दी समाज द्वारा मान्यताप्राप्त व्यवहार के तरीके को हम सामाजिक नियम करते हैं कि उस समय का समाधान प्रधान समाज का मध्यकाल का शुक्र है कि हम सब को गर्म कोशिश करते हैं इस व्यवहार का क्या तरीका हो कि वह डिसाइड धर्म करता था को नर्म के प्रमुख पादरी करते थे और भगवान के नाम पर करते थे वह कहते थे भगवान नहीं ऐसा कहां है है क्योंकि सब भगवान में असीम आस्था रखते

49:19 थे सबका धर्म पर विश्वास था धर्म प्रधान समाप्त इसके धर्म द्वारा बनाए हुए नियमों को सभी स्वीकार करते थे 1000 लोग है एक हजारों स्वीकार करते थे और जब 1000 लोग उन सामाजिक नियमों पर समझते हैं मूल्यों पर सहमत है ऐसी स्थिति को अमुल्य एक मध्य कहते हैं ध्यान देना बहुत बार यह सब आएगा वह यू कैन सेंस करते हैं सामाजिक मूल्यों और यह हम दूसरी ओर निगम को साथ यूज करेंगे यह ध्यान चाहिए हालांकि टेक्निकली अलग-अलग हम साथ यूज करेंगे तो सामाजिक होली और सामाजिक नियमों पर एक सहमति थी ए कंसेंसस ठाट ड्यू टो रिलीजड ओं कि न्यूट्रीशन क्योंकि रीलीतजन

50:05 यहां पर हम एक हजार लोग मानते थे हम हजारों लोग धर्म को स्वीकार करते थे ईश्वर को स्वीकार करते धर्म ग्रंथों को स्वीकार करते थे तो धर्म द्वारा कही गई बातों को स्वीकार करेंगे धर्म द्वारा बनाए हुए नियमों को स्वीकार करेंगे उन लोगों को स्वीकार करेंगे उल्लेख स्थिति स्थिति थी अ कि मुझे कटा की स्थिति थी यज्ञ ने पिट बुल एक व्यक्ति स्थिति थी और अब हम लोग सब इन सामाजिक नियमों और ऊपर लुंगी करें हुआ था अब जब हम सब उन्हीं नियमों के अनुसार व्यवहार करेंगे तो हमारी व्यवहारों में एकरूपता का या आप जैसा हम से व्यवहार की अपेक्षा रखते हैं वैसा ही करेंगे हम जैसा आपसे व्यवहार के पिता रखे हैं आप

50:52 वैसा ही करेंगे क्योंकि व्यवहार करने का एक ही तरीका फिक्स है इसको समाज ने निर्धारित किया धर्म निर्धारित किया हैं तो जहां समाज में मूल्यों पर नियमों पर एक मतदाता होती है कि यादव और सबका व्यवहार नियमों के अनुरूप होता है अ हुआ था वह सब का व्यवहार नियमों के अनुरूप उतारे यानि उनके व्यवहार में अनुरूपता पाई जाती है में उल्लेख मतदाता अनुरूपता को संभव बनाती है है और जहां व्यक्तिमत्व पार नहीं होती है हम लोग एक हजार लोग हैं उसमें से पांच सोनू कहते हैं कि व्यवहार का यह तरीका सही है और 500 लोग करते हैं कि यह तरीका ठीक नहीं है व्यवहार का यह तरीका सही है उसमें

51:40 से दो-तीन सुनोगे तीसरा तरीका बताते हैं एक दो तीन सौ लोग उसमें से चौथा तरीका बताते हैं 1000 लोग 2301 पाने वाले तरीके से दो तीन सौ एक नया तरीका खोज यह तो 30 तरीका खोज लिए 230 तरीका यह स्थिति मूल्य में स्थिरता की स्थिति नहीं कही जाएगी यह समाज के लिए और नियमों पर सहमति नहीं है है ऐसे में 30 अलग तरीके से व्यवहार करेंगे 300 अलग-अलग तरीके से व्यवहार करेंगे पिन ढाई सौ अलग-अलग तरीके से व्यवहार करेंगे है अब जो हमारा तरीका व्यवहार का होगा वह बाकी लोगों को स्वीकार नहीं होगा तो यह क्या कह लाएगा अनुरूपता या विचलन तो समाज से यानी सौंठ लोगों के तरीकों से हटकर

52:27 किया गया व्यवहार बिछड़न बिछड़न बिछड़न बिछड़न बिछड़न हर आदमी एक दूसरे के व्यवहार के तरीके की निंदा करेगा हर आदमी एक दूसरे के व्यवहार का तरीके की अनुशंसा करेगा स्वीकार नहीं करेगा क्रिया का जवाब नहीं देगा इंट्रैक्शन में समस्याएं आएंगी कई तरह की समस्याएं उभर कर सामने आएगी तो इस तरह समाज के सारे लोग हैं के नियमों और उल्लू पर शक मत होती है लुट जहां समाज में उन्हें गांव की स्थिति होती है कि वह सब की व्यवहारों में अनुरूपता पाई जाती हैं है और यही स्थिति एकता की स्थिति है

53:12 में चंदू इसी कम समाज की एकता कहीं न है तथा समाज के नियम और बिल्लियों की अनुसार व्यवहार कर रहे हैं झाल की स्थिति सामाजिक संगठन की स्थिति कर चुके हैं झाल है लेकिन जहां लोग मुन्नी और नियमों से हटकर व्यवहार करने लगे जहां समाज में अनुरूप पिता की जगह बीच न आ जाए देविएशंस नियमों से उंगलियों से देविएट करके मेवाड़ करना देवी अंधेर बीच न नियमों और मूल्यों के अनुरूप व्यवहार करना अनुरूपता विचलन अनुरूपता विचरण जहां विश्व भर जाए तो ए होते यहां तक कि अधिक प्रभावित होगी सामाजिक संगठन कमजोर हो जाएगा सामाजिक

53:59 विघटन की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी अ है और ऐसे ही समाज के ढेर सारी समस्याओं का प्रादुर्भाव समस्याओं का समस्याओं का समस्याओं का पति इज द मीनिंग ऑफ समस्या कि अरिहंत समस्या जो समाज की सोच से हटकर वह समस्याए कल तक सती प्रथा समस्या नहीं थी क्योंकि समाज इसको स्वीकार करता था आज के चश्मे से सती प्रथा एक समस्याएं हैं कि कल तक दहेज प्रथा समस्या नहीं थी क्योंकि समाज इसको स्वीकार करता था आज के डेट में समस्या है यह तो कि समाज को सही नहीं मानता है कि कल तक विधवा विवाह निषेध समाज के

54:47 द्वारा मान्यता प्राप्त एक व्यवहार का तरीका होता था आज विधवा विवाह निषेध एक समस्याएं कल तक बाल विवाह एक समाज का नियम था आज बाल विवाह एक समस्या है वो समस्या होता है तो समाज के अनुरूप नहीं होता समाज की गांव के अनुरूप नहीं होता कि हम लोग और जब समाज में समाज की एक चाय ही भिन्न भिन्न हो गई जब समाज ने मुझे एक सत्य का ही नहीं रही तो ऐसे समाज में समस्याओं का अंबार लग जाएगा और लुटेरा समझकर मशीन को आप समझो समाज के मैकेनिज़्म को आप समझो कहीं कुछ नहीं करना है में भर्ती

55:33 है हल्दी जानवर मनुष्य मनुष्य की आवश्यकताएं हैं और आवष्यकताओं को पूरा करने के लिए हम एक दूसरे से क्रियान्वित किया है के प्रवक्ता मुद्रा की हम दिमाग वाले थे हमने सोचा मिलकर समय ने कि कौन सा तरीका हो जिसे हम सबकी बेहतर तरीके से आवश्यकताएं पूरी हो हैं उस तरीके पर हम सब ने मुहर लगा दी थी ए सोशली रिकॉग्नाइज बिहैवियर है है उसी को सामाजिक नियम कहा गया उसी को सामाजिक मूल्य कहा गया अब सब उसी समाज के नियमों के अनुसार व्यवहार कर रहे हैं यह तो समाज में अनुरूपता बनी हुई है एक संगठन बना हुआ है एकता बनी हुई है और

56:20 सब की आवश्यकता प्रॉपर पूरी लेकिन जैसे तरीकों पर मतभिन्नता आए हैं है वैसे ही क्रिया अंतक्रिया में डिस्टरबेंस होगा हम चाहेंगे कि आप ऐसे करोगे लेकिन आप दूसरे तरीके से करोगे क्योंकि आप उसी को सही मानते हो आई एक मैरिज हक मैंने यह क्या बकवास है विवाह करो गले में एक पति को लगा दो एक पतली को लटका नॉनसेंस बीजेपी है कि सेक्स नेचुरल फिल्मों में आए हम किसी से करें मेरी मर्जी फ्रीडम होना चाहिए हम किसी के साथ रहे यह विवाह और मैरिज और गले में सूत्र बांधना यह बकवास है इस सोच ने इस हॉट ने लिव इन रिलेशनशिप को जन्म दिया और लिव इन रिलेशनशिप के फिल्मों में आने

57:05 हमारे मैरिज जो कि हमारे समाज में सेक्स करने का समाज द्वारा मान्यताप्राप्त तरीका था कि प्रजनन करने का समाज द्वारा मान्यताप्राप्त तरीका था विवाह समाज द्वारा बनाए हुए नियमों का एक बूंद शहद वैवाहिक संस्था है नियमों का 101 जिसके द्वारा एक कपल सेक्स करने के लिए प्रजनन करने के लिए साथ रहने के लिए समाज से परमिशन लेता है इस समय से मान्यता प्राप्त करता है है लेकिन जब समाज में मतभिन्नता गई जब तक इस तरीके पर समाज में व्यक्ति मतदाता की सहमति थी तब तक सारे लोग विवाह के बाद भी सेक्स करते थे साथ रहते थे प्रेजेंट करते

57:51 थे अगर कोई गलती से ऐसा किया समाज उसकी निंदा करता था अवैध संबंध निकाला तथा अवैध संतान कहलाता था लोग साथ नहीं रह सकते थे आज भी हमारे ब्राह्मण समाज में इसे भून ले और नियमों पर सहमति है आप अपने गांव में जाकर लिव इन रिलेशनशिप में रह कर दिखाओ आप अपने गांव में जाकर बिना विवाह के किसी लड़की के साथ रहकर दिखाओ बच्चा पैदा करके दिखाओ अभी भी समाज में विवाह पर मूल्य इकट्ठा बनी हुई है लेकिन यह उसके समाज में है कि एक नया हॉट कि युवाओं में उभरकर सामने आया था और इसमें रिलेशन से कुछ नहीं दिया अब विवाह से छुपकर नहीं सरयाम वह इसको अप्लाई करते हैं वो एक अलग सामाजिक नियम को बनाते इससे

58:38 क्या हुआ सामाजिक नियमों पर सहमति खत्म हुई मुझे एक मतदाता खत्म हुई और डिफरेंट टाइप का दोहन शुरू हुआ अब एक के लिए एक समस्या एक के लिए एक खड़ा नए के लिए विवाह खराब और जो विवाह वाले सोच वाले लोग हैं वह कहेंगे कि यह सब लायक हो गए हुआ था कि इस चरित्र हीन हो गए इस लड़की बिना विवाह के लड़के के साथ रह रही यह चीज उनकी सोचने लगे हैं वो तो हमेशा ध्यान रखो कि समाज का जो मैकेनिज़्म है समाज का जो मशीन है समाज का जो कार्य प्रणाली है एक बड़ा सिस्टम ठीक है मैं कैसे तुम्हारी मशीन में जैसे तुम्हारे लैपटॉप के हल कलपुर्जे एक जगह से एक जगह

59:23 फिट है किसी तारक को किसी से हटाकर किसी दूसरे में जोड़ो गे तो कहीं न कहीं तुम्हारा लैपटॉप नहीं चलेगा आ है इसके साथ कॉल कैसे जुड़ा हुआ है उस तरह से समाज भी बड़ा व्यवस्थित तरीके से बना हुआ है में असमर्थ कि जैसे ही मूल्य मतलब हम होती है कई तरह की समस्याएं उभर कर सामने आती है समाधि एक तार की समस्या उभर कर सामने आती है समाज में विघटन की स्थिति उत्पन्न हो जाती है समाज में कई तरह की समस्याओं का उद्धार होता है के रूप में यह एवं हो चुका था यूरोप में वैज्ञानिक क्रांति ने हुआ था

1:00:09 है आधा धर्म के प्रभाव को कमजोर किया था कि चुकी पहली धर्म प्रधान समाज में धर्म मुस्लिमों का शौक था इसलिए समाज में मूल्य एक मृत्यु का बनी हुई थी और सब मूल्यों और नियमों के अनुरूप व्यवहार करते थे अनांइट मध्यकालीन समाज में धर्म प्रधान समाज में धर्म मुलायम और नियमों का सुथल हुआ था सभी धार्मिक थे और सभी इन मूल्यों और नियमों पर सहमत थे उन्हें अनुमति देता है कि कल तक सब इन उल्यू नियमों के अनुरूप व्यवहार करते थे समाज में एकता समाज में संगठन बना हुआ था

1:00:55 है लेकिन के रूप में तर्क बुद्धि बात और विज्ञान के विकास में थे फर्म के प्रभाव को कम किया है के मुख्य वक्ता को कर्व दिया उनका प्रभाव कमजोर होगा तो मुझे एक मतदाता को कमज़ोर गया कि पॉल बीच मन को जन्म दिया में सफलता सामाजिक एकता कमजोर हुई सामाजिक संगठन कमजोर हुआ सामाजिक एकता कमजोर हुई सामाजिक संगठन कमजोर हुआ था और समाज में ढेर सारी समस्याओं का प्रभाव है सर्च का राजतंत्र का विरोध हो रहा है

1:01:42 पुरूष डा विंसी का विरोध हो रहा है महिलाएं लिंग समानता की मांग कर रही है इस समय हमारा मेरी बात है उधर राजनीतिक समानता की बात की जा रही है स्वतंत्रता चाहिए अभिव्यक्ति की आजादी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कि तमाम तरह की चीजें कुछ दैनिक पूरा का पूरा को Facebook पासवर्ड डिस्टेंस के दौर से गुजर रहा था तो एक तरफ विज्ञान के विकास ने धर्म के प्रभाव को कमजोर करके सामाजिक एकता की समस्याओं को उत्पन्न किया था मुलाकात की समस्या को पंख किया था कमजोर किया था तो दूसरी तरफ व औद्योगिक क्रांति के भी दुष्परिणाम सामने आने लगे थे और इससे भी ढेर सारी समस्याएं उभर कर सामने

1:02:28 आने लगी थी कुल मिलाकर यूरोप में सामाजिक एकता समाजिक संगठन कमजोर हुआ था और सामाजिक विघटन की स्थिति उत्पन्न हुई थी तो यह था उस समय की सामाजिक पृष्ठभूमि आपके सामने स्क्रीन पर है जिसको कि मैंने तीन किया अभी आपको समझाया सामाजिक पृष्ठभूमि है कि विज्ञान का विकास थे फर्म के प्रभाव का है रात अभी बीती जाना धर्म के प्रभाव के हालात से भून ले कटा कमज़ूर ठीक है दुश्मन का व्यवहार में वृद्धि और सामाजिक एकता की समस्या है की तीसरी घटना है

1:03:14 कि पौधों की क्रांति के दुष्प्रभाव है इसमें भी कई तरह की समस्याओं को जन्म दिया था और यह ऊपर से जुड़ी हुई है यह सबसे कर दो कि सामाजिक एकता की समस्या है झालय टकडक सामाजिक एकता की समस्या है हां जी दुर्खीम कॉलिंग यूरोप की प्रमुख हैं कि मैं है तो आप इमेजिन कर सकते हो कि उस समय कि सामाजिक परिस्थितियां कैसी थी 1800 है अब चलिए हम लोग थोड़ा उस समय के

1:04:02 कि बौद्धिक परिदृश्य पर नजर डालते हैं कि उस समय का बहुत अधिक प्रदूषित किया था कि एक बौद्धिक प्रदेश आदर्श बात शो मोर और आदर्शवाद यादों का बहुत ही क्वाथ आदर्शवाद आदर्शवादी व्यक्ति यूनिवर्सिटी में ऑप्शन हम चलते हैं यूनिवर्सिटी में चलते हैं जौनपुर के सब लोग है बुद्धिजीवी लोग है यूनिवर्सिटी भी कई अलग-अलग गुटों में बंटा हुआ था कि दोनों का गुड बहुत ही को का गुड अलग-अलग था कुछ विद्वान आदर्शवादी विचारधारा के समर्थक थे अ

1:04:50 कि समाज को देखने का जगत को देखने का उनका नजरिया बिल्कुल अलग था वो जगत के मूल में id आपको विचारों को महत्व दे रहे थे तो हुआ था लुट जगत को विचारों की अभिव्यक्ति के रूप में स्वीकार कर रहे थे तो झाल समाज पर एक व्यक्ति की सोच को व्यक्ति के विचारों को महत्व रहे थे समाज के निर्माण में है हुआ था कि यह ज्यादा नहीं जाएंगे बस इतना ही है

1:05:35 है उधर कि प्रत्यक्षवाद का विकास हो चुका था तो क्या अगर हम कहें तो अगस्त घंटे 100 जी की नींव रख चुके थे कि समाज कई तरह की समस्याओं से जूझ रहा था समाज में विघटन की स्थिति उत्पन्न हो गई थी कि हम लोगों ने सामाजिक परिदृश्य में देखा है उधर वैज्ञानिक प्रतिष्ठा प्राप्त कर चुके थे शुरू में तो वैज्ञानिकों का विरोध हुआ लेकिन उन लोगों को लगने लगा कि नहीं भाई वैज्ञानिक जो करती हूं एल्बम सिद्ध कर देते हैं यही तो सत्य घटना को बताते हैं

1:06:24 कि धर्म वाले वह उपाधि तो छुट्टी है यह देखिए एक लंबे समय तक प्राकृतिक जगत के बारे में कितनी छोटी छोटी बातें इन्होंने बता रखी थी अ है कि वैज्ञानिकों ने कृत्रिम सही कहा और सिद्ध कर दिया तो फिर देर समाज में विज्ञानों की प्रतिष्ठा बढ़ रही थी 9th धार्मिक पद्धति को ज्ञान प्राप्ति के श्रेष्ठतम तरीके के रूप में स्वीकार किया जा रहा था वैज्ञानिक पद्धति को ज्ञान प्राप्ति के सिस्टम तरीके के रूप में स्वीकार किया जा रहा था को सत्य ज्ञान को कैसे प्राप्त किया जाए तो वैज्ञानिक पद्धति से प्राप्त किया जाए अनुभवी पद्धति से प्राप्त किया है लुट

1:07:09 अब आधे इस प्रकार किया जाता है मैं अब दूसरी तरफ वो और विज्ञान के विकास का जो धर्म के ऊपर प्रभाव पड़ा धर्म का प्रभाव कमजोर हुआ ब्लैक मतदाता कमजोर कोई समाज डिस्टर्ब हुआ है तो कुत्तों की क्रांति ने भी समाज को डिस्टर्ब किया था पूंजीवाद के विकास ने है है उसी रूप में अ है उसी फ्रांस में अगस्त क्वांटिटी नाम की एक विचारक का जन्म हुआ था को अंजाम देना कोई पर औद्योगिक क्रांति फ्रांसीसी क्रांति संभव चुकी थी पूरा प्रांगण में डिस्टर्ब चल रहा था मोटू पतलू करें कि समाज का मशीन खराब कर दो

1:07:55 थे उसी समय अगस्त कौन के नाम का विशाल काया फ्रांस में है तो उसने कहा कि भाइयों बहनों को कि आज समाज का मशीन खराब हो गया है झाल कि समाज में ढेर सारी समस्याओं का प्रादुर्भाव हुआ है है और आज हम इस समाज की समस्याओं को दूर नहीं कर पा रहे हैं कि हम इसलिए समाज की समस्याओं को दूर नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि हम समाज के कार्यप्रणाली को नहीं समझ पाए हैं कि समाज के मशीन को हम नहीं समझ पाए समाज

1:08:42 के मैकेनिज़्म को नहीं समझ पाए हैं झाल है और इसलिए नहीं समझ पाए थे तो कि समाज के बारे में जो हमारा ज्ञान है खूब मिथ्या ज्ञान है फॉल्स नॉलेज है गलत या नहीं मैं अभी तक जो हमारे पास ज्ञान है वह गलत ज्ञान है कि अगर समाज के बारे में आप हमें सही सही ज्ञान की प्राप्ति हो है तब जाकर हम समाज के एक मशीन को समाज के मैकेनिज़्म को समाज की कार्यप्रणाली को समझें और जब हम समाज के कार्यप्रणाली को समझ लेंगे तो हम इन समाज की समस्याओं को भी दूर कर पाएंगे

1:09:32 में चमक इन समस्याओं को दूर कर पाएंगे तो मैं इसी आवश्यकता को केंद्र में रखकर अगस्त पोंटिंग ने कहा कि फ्रांस के रहने वाले थे एक साइंस के विद्यार्थी थे एक इंजीनियर थे है कि उन्होंने कहा कि समाज अभिज्ञान होना चाहिए कि समाज का भी एक ज्ञान होना चाहिए हुआ था कि समाज का भी एक प्राकृतिक विज्ञान की तरह वैज्ञानिकों से है है जो समाज का ठीक उसी तरह अध्ययन करेगा जिस तरह प्राकृतिक वैज्ञानिक प्राकृतिक

1:10:18 घटनाओं का करते हैं कि समाज का भी विकास होगा चाहिए जो समाज का वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन करेगा और समाज के बारे में सही-सही सही-सही ज्ञान प्राप्त करेगा जिस तरह से प्राकृतिक विज्ञान में वैज्ञानिक पद्धति से भयंकर के प्राकृतिक घटनाओं के बारे में बिल्कुल सही सही ज्ञान प्राप्त किया जा रहा उस समय ऐसा हो रहा था समाज का भी सही-सही ज्ञान प्राप्त किया जाएगा और समाज के बारे में जब हमारे पास सही यान होगा तो हम समाज के इस मेकेनिज्म को समझ पाएंगे समाज की कार्यप्रणाली को समझ पाएंगे मैं इस मशीन रूपी समाज के मैंने कौन-कौन सी अंग है कैसे काम करते

1:11:03 हैं कैसे एक दूसरे से जुड़े हैं एक कलपुर्जे कि इन सबको समझ पाएंगे और जब हम इन सबको समझ पाएंगे तभी जाकर हम इन समस्याओं का समाधान कर पाएंगे है इसलिए अगर समाज को विकास के पथ पर अग्रसर करना है अगर समाज को प्रगति की ओर चित्तौड़ की ओर बढ़ाना है कि समाज की समस्याओं को दूर करना है यह तो समाज के बारे में समाज के मैकेनिज़्म के बारे में हमारे पास सही जानकारी होनी चाहिए सही समझ होनी चाहिए और यह तभी संभव है जब समाज के बारे में सही ज्ञान मिले और समाज के बारे में सही ज्ञान वस्तुनिष्ठ ज्ञान सत्य ज्ञान तभी प्राप्त हम कर पाएंगे जब हम समाज का वैज्ञानिक

1:11:49 पद्धति चयन करें हम समाज का भी वैज्ञानिक पद्धति से धान खरीदी को प्राकृतिक विज्ञान आज चुका है प्राकृतिक घटनाओं का वैज्ञानिक पद्धति चयन करके प्राकृतिक घटनाओं के बारे में सही-सही ज्ञान वहां दिया जा रहा है हम समाज के बारे में भी का सही-सही ज्ञान प्राप्त कर पाएंगे है इसलिए समाज का एक विज्ञान को का रिश्ता सेटिंगस कैंटीन है कि समाज के विज्ञान के रूप में एक विषय की नींव रखी इसका नाम दिया उन्होंने सोशल फिजिक्स नाम से भी समझ सकते हो कि चौधरी का निरीक्षण किया है सोशल फिजिक्स जो बाद में सुशील जी कर दिया उन्होंने

1:12:39 हुआ था कि सोशल फिजिक्स सुच ए है और यहीं पर अगस्त घंटे ने दो-तीन बातें बताइए सबसे पहले होने का विशाल जी 11 साइंस है है तो शिवजी एक नेचुरल साइंस की तरफ - है हुआ था है जो नेचुरल साइंस की पद्धति से समाज का अध्ययन करेगा कि अ समाज के बारे में सही ज्ञान को प्राप्त करेगा हुआ था कि समाजशास्त्र की विषय-वस्तु समझें विषय वस्तु के बारे में प्रकृति के बारे में और अध्ययन पद्धति के बारे में अगस्त पोंटिंग

1:13:26 ने क्या कहा समझ लो विषय वस्तु के बारे में प्रकृति के बारे में और अध्ययन पद्धति के बारे में विषय वस्तु के बारे में प्रकृति के बारे में अध्ययन पद्धति के बारे में अगस्त कुंठा कहा और उसी को मॉडिफाई किया है मजबूर करने ध्यान रखने वाली बातें तमिल फिल्म के सारे के सारे विचार अगस्त पोंटी के विचारों का नोटिफिकेशन आ है उसी से जुड़ा हुआ है झाल अगस्त को मेंटेन कहा समाजशास्त्र की विषय-वस्तु समाज है हुआ है मैं बोला इसके बारे में और बातें अब हम नहीं चर्चा करेंगे लेकिन मोटा-मोटी समाजिक समाजिक घटनाएं हैं

1:14:14 हैं परंतु विषय-वस्तु का बिल्कुल स्पष्टीकरणों ने किया बिल्कुल प्लेयर कट डिविजन नहीं किया है है जिसकी आधार पर समाज शास्त्र को अन्य विषयों से अलग किया जा सके समाजशास्त्र को राजनीति विज्ञान से अलग किया जा सके समाजशास्त्र व को अर्थशास्त्र से अलग किया जा सके समाजशास्त्र को मनोविज्ञान से अलग किया जा सके हैं कि फिल्म की विषय-वस्तु कुछ और है और चोली की विषय-वस्तु कुछ और हैं विषय वस्तु के बारे में इतना स्पष्ट विभाजन इन्होंने नहीं किया फ्री होने सीधे समाजशास्त्र को समाज का अध्ययन करने वाले विज्ञान बताया पहला पॉइंट विषय-वस्तु का स्पष्टीकरण तमिल

1:15:00 जरूरत के हिसाब से का विषय वस्तु के बारे में जो और स्वच्छता बनी हुई थी इसी अस्पष्टता के कारण सुशील जी को एक अलग स्वतंत्र विषय के रूप में रिकॉग्निशन नहीं मिल रहा था इसी और स्पष्टता के कारण तो चलो जी को एक अलग विषय के रूप में रिकॉग्निशन नहीं मिल रहा था खाओ फिर टीम ने सुशील जी के विषय वस्तु को बिल्कुल नियर किया 200 जी के विषय वस्तु को अन्य सामाजिक विज्ञानों से बिल्कुल पृथक किया और शक्ति को एक स्वतंत्र विषय के रूप में रिकॉग्नाइज करवाया मान्यता दिलवाया और विश्वविद्यालयों में एक स्वतंत्र विषय के रूप में पाठ्यक्रम शुरू करें दुर्गंध है

1:15:49 और क्या किया उपाधि में हम पढेंगे टॉपिक में आ कि प्रकृति के बारे में हुआ था एक अगस्त को मेंटेन कहा कि समाजशास्त्र प्राकृतिक विज्ञान केंद्र विद्यालय है झाला ऑन करो एक नेचुरल साइंस की तरह साइज है कि जैसे ही उन्होंने यह कहा आदर्शवादियों ने इसका विरोध करना शुरू किया और कहा कि समाज का कोई नेचुरल साइंस की तरह साइंस नहीं हो सकता है समाज का विज्ञान संभव ही नहीं है

1:16:36 हुआ था मैं दुखी ने इस बात को सिद्ध किया है कि थोड़ी बहुत कमी आती उसको व्यवस्थित किया और समा स्वास्थ्य को प्राकृतिक विज्ञान की तरह विज्ञान बनाने पर बल दिया चित्तौड़ कैमरे अगस्त क्वांटिटी की ही तरह कि समाजशास्त्र की प्रकृति को निर्धारित किया और कहा कि समाजशास्त्र प्राकृतिक विज्ञान की तरफ किया है कौन से थोड़ा बहुत अंतर किया है है तीसरा समाजशास्त्रीय अध्ययन पद्धति का समाजशास्त्रीय अध्ययन पद्धति है हुआ था तुर्की ने कहा प्रत्यक्षवादी

1:17:22 पद्धति पॉजिटिविज्म के जनक माने जाते हैं कि अ झाल और सुनाओ हुआ था वह कहते हैं समाजशास्त्र कि प्राकृतिक विज्ञान की अध्ययन पद्धति का प्रयोग करेगा सभी घटनाओं करते हैं कि क्या पद्धति है भाई प्रत्यक्ष निरीक्षण परीक्षण की पद्धति है है समाजशास्त्री सामाजिक घटनाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण परीक्षण करेगा इन टेक्निकल निकट अनुभव एक पद्धति है कि कुछ समाजशास्त्री सामाजिक घटनाओं को जाएगा देखिएगा का यह के विश्वास पर आधारित नहीं होगा कि अब इसलिए सोचने वाली बात है कि उस समय जो धर्म द्वारा दिया गया ज्ञान तथा समाज

1:18:07 के बारे में खूब विश्वास पर आधारित अगर कंपनी ने कहा कि नहीं भाई हम कुछ भी नहीं मानेंगे हम उसी को सत्य मान लेंगे जिसको हम अपने ज्ञान इंद्रियों के द्वारा निरीक्षण करेंगे देखेंगे आज हम सीख सकते होंगे कि प्रतिपक्ष निरीक्षण परीक्षण के द्वारा समाजशास्त्री करेगा तो आज तक होंगे इसको जब चाहे तब जाकर जा सकता है तो कुल मिलाकर उन्होंने यह स्थापित किया था है कि स्वास्थ्य की अध्ययन पद्धति प्रत्यक्षवादी पद्धति होगी जरा समाजशास्त्री प्रत्यक्ष निरीक्षण परीक्षण के द्वारा सामाजिक घटनाओं के बारे में ज्ञान प्राप्त करेगा का या और उसी योनि को सही माना जाएगा अब

1:18:52 हैं जूही निरीक्षण यह नहीं है हनुमान जी यह निर्णय नहीं है इसको ओपन किचन नहीं किया जा सकता है उसको सूजी के इसे वस्तुएं शामिल नहीं किया जाएगा तो चलिए तो समाज के उन घटनाओं के बारे में इस किताब में विश्लेषण होगा और है समाजशास्त्री प्रत्यक्षवादी पद्धति से प्रत्यक्ष निरीक्षण परीक्षण से जो भी प्राप्त करने का ज्ञान उसी युवक उसमें लिखा है का स्तर से इस कॉन्टिनेंट ने कहा कि सहवास की विषय-वस्तु समाज है ए समाजशास्त्र प्राकृतिक विज्ञान की तरफ ज्ञान है और समाजशास्त्र प्रत्यक्षवादी पद्धति से सामाजिक घटनाओं का अध्ययन करेगा का या और सामाजिक घटनाओं के बारे में

1:19:38 हो सत्या उनको सही ज्ञान को प्राप्त करेगा कि यह अगस्त खूंटे की कहानी थी कि ऑन करो कर दो का अध्ययन पद्धति के बारे में भी अगस्त कंपनी जो प्रत्यक्षवादी पद्धति को प्रस्तावित किया तो वहां पर भी थोड़ी-बहुत अस्पताल की स्थिति थी इसको और व्यवस्थित करने की जरूरत थी कि तमिल तुर्की ने कि अगस्त क्वांटिटी की का विषय वस्तु के बारे में विचारों को और व्यवस्थित किया कि तमिल दुर्खीम ने ए समाजशास्त्र की प्रकृति क्या होगी इसके बारे में अगस्त काम्टे के विचारों को और

1:20:25 व्यवस्थित किया है कि तमिल दुर्खीम ने का समाजशास्त्रीय अध्ययन पद्धति प्रत्यक्षवादी पद्धति को जी के बारे में अगस्त को मिट्टी के विचारों को और व्यवस्थित किया है और सोशल जी को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में स्थापित किया हुआ था अब यहां पर थोड़ा सा गैप है जो मैं क्लियर कर दूं एक अगस्त को मीठे एक कहकर मर गए कि समझते ज्ञान होना चाहिए मामला फंसा कहां था लेकिन अगस्त को मेह कि प्रत्यक्षवादी पद्धति को भी प्रस्तावित करके चले गए थे है लेकिन समाज के बारे में अध्ययन करने के

1:21:12 लिए और सारे विषय टो थे इनर मनोविज्ञान तथा अर्थशास्त्र तथा राजनीति शास्त्र था इसमें समाज के अलग-अलग पक्षों का ध्यान किया जाता था दोस्तों ने क्या किया इन विशेषज्ञों ने क्या किया कि इन विशेषज्ञों ने अगस्त कांटेक्ट के प्रत्यक्षवादी पद्धति को अपनाया वैज्ञानिक पद्धति को अपना लिया और वैज्ञानिक पद्धति से अपने-अपने विषय वस्तु का अध्यन करना शुरू किया राजनीति शास्त्र में राजनीतिक घटनाओं का अत्यंत वैज्ञानिक पद्धति से किया जाने लगा अर्थशास्त्र में आर्थिक घटनाओं का ध्यान वैज्ञानिक पद्धति से किया जाने लगा मूल मुख्य रूप से मनोविज्ञान में मनोवैज्ञानिक घटनाओं का ध्यान वैज्ञानिक पद्धति से किया जाने लगा है कि इन विशेषज्ञों ने भी अपनी को सामाजिक

1:21:58 विज्ञान के रूप में रिकॉग्नाइज करना शुरू किया अगस्त क्वांटिटी की असली बात यह थी कि भैया समाज के बारे में गलत ज्ञान है समाज के बारे में सही ज्ञान प्राप्त करो और सही ज्ञान वैज्ञानिक तरीके से अधीन करने से आएगा समाज का ज्ञान होना चाहिए जो वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन करेगा प्रतिपादित पद्धति सैफरन का या श्रीवास्तवअगस्त घंटे की गई थी और अगस्त कांटेक्ट कि इन बातों को अन्य सामाजिक विज्ञानों में अपना लिया अब चौधरी की जरूरत ही महसूस नहीं हो रही थी जब समाज का ज्ञान होना चाहिए जो प्रत्यक्षवादी पद्धति से अध्ययन करेगा फिर वह सोशियोलॉजी फिर एक नया भी से बनाने की क्या जरूरत है एक नया विषय बनाया जाए यूनिवर्सिटी में एक नया विषय शुरू किया जाए एक नया विभाग बनाया

1:22:43 जाए विभागाध्यक्ष बनाया जाए सारा प्रोफेसर और लेक्चरर को बहाल किया जाए इस विषय को पढ़ाया जाए इस विषय में क्या पढ़ाया जाएगा एक अलग विषय की क्यों जरूरत है कि यह अधूरा काम रह गया था अगर कम से कम इस अधूरे काम को हम देखेंगे पूरा किया इस अधूरे काम को पूरा किया है कि इस अधूरे काम को ML दूध चीनी पूरा किया था में समाज शास्त्र विषय वस्तु को स्पष्ट किया 144 खान ने स्पष्ट किया कि समाजशास्त्र

1:23:32 और मनोविज्ञान नहीं है कि अर्थशास्त्र नहीं है राजनीति विज्ञान नहीं है इसकी विषय वस्तु इन सब के विषय वस्तु से अलग है वो सॉरी सोशलॉजी है है कि सभी विषय समाज की एक अंग का विशिष्ट अध्ययन करते हैं फोकस चयन करते हैं सुशील जी एक सामान्य विज्ञान है समन्वयात्मक विज्ञान इसकी विषय वस्तु समग्र समाज है कि इस समाज के मैकेनिज़्म को समझने वाला विषय है बाकी तो समझ के अंगों को फोकस करके अध्ययन करते हैं हुआ था बाकी चाहे कितना भी प्रत्यक्षवादी पद्धति का प्रयोग करें वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करें अपने को सोशल साइंस कहीं बाकी

1:24:19 विषयों के माध्यम से समाज के मैकेनिज़्म को नहीं समझा जा सकता है समाज का मेकेनिज्म समझने वाला ही भी शहद सुशील जी सॉरी सोच एकांत लुटा किया था ए विक्टिम ने तमाम स्टार्स की प्रकृति को पस्त किया है कि कैसे समास प्राकृतिक विज्ञान के संघर्ष विज्ञान है अ की पुष्टि की आभूषणों का भी उत्तर देखकर के बैंस करने का प्रयास किया और तुर्की ने एक समाजशास्त्रीय अध्ययन पद्धति के रूप में प्रत्यक्षवाद को सुख-शांति के अनुकूल बनाया इसलिए दुर्खीम के प्रत्यक्षवाद को समाजशास्त्रीय प्रत्यक्षवाद कहा जाता है दुर्खीम के प्रत्यक्षवाद को सोशियोलॉजिकल पॉजिटिविज्म की संज्ञा दी थी इससे लॉजिकल

1:25:07 पॉजिटिव अ में ही टैक्स दुर्खीम का कंडीशन सुख-शांति अतुल सिंह का कंट्रीब्यूशन स्वच्छ पिक्चर ऐसा क्या किया हमने एक एक करके करेंगे अब आउटलाइन बना रहे हैं है उधर हैं तो यह एक बहुत अधिक पृष्ठभूमि थी आदर्शवाद विचारों को महत्व दे रहे थे तो कि अगर स्पर्म के सुशील जी की स्थापना कर चुके थे लेकिन 100g एक स्वतंत्र विषय के रूप में रिकगनाइस नहीं हो पाया था अगस्त घंटे के प्रत्यक्षवादी पंक्ति को अन्य विज्ञानों में अपना लेने से

1:25:53 कि शिवजी को मनोविज्ञान से पृथक करना विशेष रूप से कठिन हो गया था कि आखिर में सोशियोलॉजी अगस्त काम्टे की अधूरे काम को पूरा किया मनोविज्ञान से प्रथक सुशील जी को एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में विषय के रूप में स्थापित करवाया यूनिवर्सिटी लेवल पर इसको रिकॉग्नाइज्ड करवाया पहला हेड ऑफ डिपार्टमेंट बना अमरुद थीम शो और बौद्धिक प्रदेश में हम अगर कुछ और देखें तो दूसरा था बहुत अधिक प्रदेश व मार्क्सवाद समाजवादी हमारा स्वास्थ्य कि खास करके मार्क्सवाद की बात है गर्म करें और कुछ दिनों बाद कि अगर हम बात करें तो

1:26:41 कि तुम आज स्वाद समाज का नाकारात्मक विश्लेषण प्रस्तुत कर रहा था क्रिटिकल एनालिसिस प्रस्तुत करता है कि तुर्की ने समाज के नकारात्मक विश्लेषण की जगह प्रकार्यात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया कि प्रकार्यात्मक विश्लेषण क्या है आगे हम समझेंगे समाज का निगेटिव की जगह पॉजिटिव विश्लेषण प्रस्तुत किया मैं दुखी वृक्ष हर घटना के मार्क्स में हर घटना के निगेटिव चीजों को दर्शाया दुखी में हर घटना के पॉजिटिव चीजों को दर्शाया तो हम कह सकते हैं कि दूं कि उनका समाज को देखने का जो नजरिया उठा का समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य दूरियों का भी काम मार्ग करता लेकिन मार्क्स करने के लिए आप द्वंद्ववादी नजरिया आता दुर्गों का नजरिया प्रकार्यवाद ही नजरिया था दादी और

1:27:28 प्रकार्यवाद दी को बाध्य स्पष्ट धीरे-धीरे होगा अगर हम कहें तो भारत का नजरिया नकारात्मक दृष्टिकोण तथा नकारात्मक नजरिया था वह हर घटना के हाथों की चर्चा करता था यह यह निके निके निके दुकान हर घटना के सकारात्मक चीजों को अपने विश्लेषण में स्थान दिया यह पॉजिटिव-पॉजिटिव है किसी भी चीज पर लिखा दारू पर लिखा तो धर्म की यह लाभ यह लाभ यह लाभ ही लाभ मार्श ने भी धर्म पर देखा उसने धर्म के पूरे शॉक पेज में धर्म पर लिखा तो मार्श ने सौंपी जिसमें केवल धर्म की ढाणियों की चर्चा करी और दूं कि मुझे शॉपिंग धर्म पर लिखा तो धर्म के लाभों की चकरी अप्रूव झाल कि मार्क्स ने भी श्रम विभाजन पर लिखा श्रम विभाजन को अलगाव का कारण मानव श्रम विभाजन के हाथों की चर्चा करीब डेढ़ किमी

1:28:13 श्रम विभाजन पर लिखा दुर्ग मिश्रण विभाजन के लाभों की चर्चा करें तो कुछ समझ नहीं आ रहा होगा मैं दुखी नहीं तो आत्महत्या तक के लाभों की चर्चा करेंगे कि न तो अपराध जैसी घटनाओं के इलाकों की चर्चा करें जूस में प्रकार्यवाद तथा धार्मिक प्रकार्यवाद ही विचार रखता है जो अलार्म किस आधार पर अपने फिंगर को कटिंग राइस करते हैं तो ध्यान रखना कार्ल मार्क्स एक दूंगी विचारक तथा अमरुद फीट प्रकार्यवाद विचारक था पारसंस एक प्रकार्यवाद विचारक था मॉडर्न एक प्रकार वाली भी तरह था और मैक्सिमम एक संवाद विचारक बीच तथा व्यक्ति और दो और हरबर्ट मिड मनोवैज्ञानिक अब स्कूल तो

1:29:02 हम एक हल्थी करके अप्रोच को समझना होगा अर्थिंग को किस कैटेगरी में कटिंग राइस करते थे झाल हरिशंकर की अप्रोच को समझना होगा हर फ़िक्र को हम किस कैटेगरी में कि डिवाइस करते हैं तो दूर क्रीम एक प्रकार निवासी भी अच्छा रहता है हुआ था कि प्रत्यक्षवादी विचार रखता है कि प्रत्यक्षवादी प्रकार्यवाद यह दो चीज ड्राफ्टिंग के साथ जुड़ा हुआ है अगर हम दुर्ग सिंह के बारे में कहेंगे उसका सकते हैं है अत इस अवधि और हम यह कर सकते हैं

1:29:52 प्रकार यदि और दुखी भी एक प्रकार यह आदमी अचानक था कि हर चीज के पॉजिटिव-पॉजिटिव दुखी में प्रत्यक्षवाद तथा स्वास्थ्य के बारे में लिखने का विचार तो प्रत्यक्षवाद विचारक और समाज के बारे में जख्म का विचार तो फिर कार्यवाही की चाहत हुआ था ए क्लियर है बच्चा है हैं तो क्योंकि समय का और बौद्धिक प्रिय आपके स्क्रीन पर है एक नजर डालिए

1:30:37 कि बौद्धिक परिदृश्य आपकी स्क्रीन पर है एक नजर डालिए हुआ है और आदर्शवाद कि हमने कि दुर्गम आदर्शवादी नहीं था जो कि अगर स्वाद का विरोध किया था कि तुम क्या का जोखिम विचारों को नहीं विक्टिम प्रत्यक्ष निरीक्षण परीक्षण पर बल दे रहा था इसलिए उद्दीन एक प्रत्यक्षवादी भी अच्छा रहता है एक प्रत्यक्षदर्शी ने समर्थन दिया है झाला हैं और इधर मार्क्सवाद को भी दुखी में खर्च किया और मार्क्सवाद की तरह जगह पर

1:31:23 में प्रकार्यवाद को समर्थन दिया तो आखिर एक प्रकार्यवाद विचारक था कि प्रत्यक्षवादी पिछड़ता ध्यान रहेगा कि विद्यार्थियों का परीक्षा हुआ समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य प्रकार्यवाद तर्क है कि है और फिर इसी प्रत्यक्षवादी पद्धति से से कि तिवारी में दुर्खीम ने इसी का स्पष्ट करने के लिए समाजशास्त्र की प्रकृति समाजशास्त्र की विषय-वस्तु अध्ययन पद्धति के संदर्भ में उन्होंने सामाजिक तबके की संकल्पना को रखा पहला टॉपिक है आप का सिलेबस में और समाज के बारे में उन्होंने प्रकार्यवाद घी इस परीक्षण से विश्लेषण करके तीन घटनाओं पर अपनी किताबे लिखी जो सिलेबस में है

1:32:09 समाज में श्रम का विभाजन दूसरा टॉपिक है आपका समाज में संभाग सहित समाज ने श्रम विभाजन पर उनके अध्ययन पद्धति कौन सी होगी प्रत्यक्षवादी पद्धति से श्रम विभाजन की घटना का दुर्ग में अध्ययन किया कि श्रम विभाजन के अध्ययन में उसका परिवेश क्या होगा समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य होगा मतलब श्रम विभाजन के सामाजिक आयामों का उसने विश्लेषण किया विश्लेषण करते समय उसका दृष्टिकोण क्या होगा तो प्रकार ये वादी दृष्टिकोण होगा तनु श्रम विभाजन के सकारात्मक पक्षों पर उसने फोकस किया है ए प्लेयर है तीसरा टॉपिक है धर्म और समाज में है उधर मौसम आज का

1:32:57 थे फर्म का दुर्ग ईंधन किस पद्धति से किया होगा प्रत्यक्षवादी पद्धति से प्रत्येक निरीक्षण-परीक्षण की पद्धति एक दम जैसी घटना का विश्लेषण किया है सोनू निगम के अधीन ध्यान का परीक्षण किया होगा समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य होगा और अंडरस्टुड यह बच्चा है ए सुपर मेक तुम अप्रोच जान चुके हो तुम्हारे लिए बड़ा आसान है इस बात को बताना है है समाजशास्त्री प्रोफेसर धर्म का चयन किया होगा यानी धर्म के सामाजिक आयामों का विश्लेषण किया होगा धर्म क्या है धर्म का पूजा-पाठ में कौन-कौन कर्मकांड होता है कौन मंत्र होता यह सब नहीं समाज पर धर्म

1:33:44 का क्या प्रभाव है या समाज का धर्म पर क्या प्रभाव है धर्म के विश्लेषण का दृष्टिकोण बुजुर्गों का क्या होगा तो प्रकार्यवाद ऋषि को होगा मतलब कुछ नुस्खे धर्म के लाभकारी पहलुओं की चर्चा की होगी दुखी में धर्म के सकारात्मक पक्षों की चर्चा की होगी तो कि आपका सिल्वरस्मिथ चौथा टॉपिक है तो आत्महत्य कि आत्महत्या जैसी घटना एक प्रमुख समाजी घटना है दुबई में इसका जयंती इस पद्धति से किया होगा बच्चा प्रतिपादित पाला दूसरा इस प्रश्न का परिपथ क्या होगा समाजशास्त्री परीक्षाओं का तनी आत्महत्या

1:34:31 के सामाजिक आयामों को दूं कि ने को व्याख्यायित किया होगा होगा क्योंकि आप जानते हुए भी यही हुआ आत्महत्या के विश्लेषण का दृष्टिकोण दुकान का क्या होगा प्रकार अवधि पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है आज तक है अब इसी को इस तरह से अगले साइड में देखते हैं बच्चा थोड़ा सा रफ जय हिंद मेरे को यहां दुर्ग सिंह के विचारों को हमने दो भागों में बांट दिया है ए समाजशास्त्र की बारी मिथुन का विचार समाजशास्त्र के बारे में उनके विचार और दूसरा है समाज के बारे में रूचि का विचार

1:35:16 है तुम ही हो गया है और यह हो गया अपने समाज के बारे में चिंता विचार अ कि हम पीछे में को फिर से आ जाते हैं बच्चा थोड़ा सा ध्यान दो सामाजिक पृष्ठ विज्ञान का विकास धर्म के प्रभाव का ह्रास औद्योगिक क्रांति के दुष्परिणाम सामने आने लगे थे और कुल मिलाकर सामाजिकता की समस्या उत्पन्न हो गई थी इधर दूसरी तरफ आदर्शवादी विचारों पर बल देकर हर चीज की व्याख्या कर रहे थे उधर अगस्त काम्टे इन सामाजिक समस्याओं को दूर करने के लिए एक समाज के विज्ञान बनाने पर बल दे दिए थे समाजशास्त्र को स्थापित कर चुके थे समाजशास्त्र की अध्ययन पद्धति के

1:36:02 रूप में प्रत्यक्ष संवाद स्थापित कर चुके थे लेकिन इनकी अध्ययन पद्धति का प्रयोग अन्य सामाजिक विज्ञानों में किया जा रहा था और समाजशास्त्र का विकास अधूरा लटका हुआ था उधर मार्क्सवाद सामाजिक घटनाओं का निगेटिव रजिस्ट्रेशन कर रहे थे तो कि तुर्की ने इन सभी के संदर्भ में आदर्शवाद का विरोध किया प्रत्यक्षवाद का समर्थन किया और अगस्त कौन के अधूरे काम को

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