Topper’s Guide to Cracking CDS | Interview with CDS AIR Holders | Strategy, Struggles & Success🎖️🔥

CDS & AFCAT By PW www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में, सीडीएस और एएफ़सीएटी परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले दो उम्मीदवारों, अक्षित शर्मा और अभिलाषा सिंह के अनुभवों को साझा किया गया है। वीडियो में उनकी तैयारी की रणनीतियों, प्रेरणाओं और चुनौतियों पर चर्चा की गई है।

  • असफलता से निपटने के लिए दृढ़ संकल्प और सकारात्मक दृष्टिकोण रखना महत्वपूर्ण है।
  • सही मार्गदर्शन और निरंतर अभ्यास सफलता की कुंजी है।
  • अपनी ताकत पर ध्यान केंद्रित करें और कमजोरियों को दूर करने का प्रयास करें।

परिचय

इस वीडियो में सीडीएस और एएफ़सीएटी परीक्षा में सफल हुए अक्षित शर्मा और अभिलाषा सिंह नामक दो उम्मीदवारों की यात्रा को दर्शाया गया है। दोनों ने अपनी तैयारी की शुरुआत एक साथ की थी और आज वे दोनों ही चयनित हो चुके हैं। प्रत्येक छात्र की अपनी यात्रा और पढ़ने के तरीके होते हैं, लेकिन इस वीडियो में उनसे उनकी तैयारी के बारे में पूछा जाएगा ताकि दूसरों को भी मदद मिल सके।

अभिलाषा सिंह का अनुभव

अभिलाषा सिंह, जो ओटीए में चयनित हुई हैं, अपनी यात्रा के बारे में बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें डर था क्योंकि वैकेंसी कम थीं। उन्होंने एक योजना बनाई और उसे लगातार लागू किया, जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिला। मॉक टेस्ट में कम नंबर आने पर भी उन्होंने अभ्यास जारी रखा और खुद पर विश्वास रखा। एसएसबी को उन्होंने एक अप्रत्याशित प्रक्रिया बताया जिसमें स्वाभाविक रहना महत्वपूर्ण है। अभिलाषा ने बताया कि एसएसबी में उन्हें नर्वसनेस नहीं हुई क्योंकि उन्होंने अच्छी तैयारी की थी और खुद पर विश्वास था। उनका मानना है कि डिफेंस बैकग्राउंड होना जरूरी नहीं है, बल्कि अपने लक्ष्य के प्रति जुनून और गंभीरता महत्वपूर्ण है।

अक्षित शर्मा का अनुभव

अक्षित शर्मा बताते हैं कि उनका परिवार डिफेंस बैकग्राउंड से नहीं है और वे पहले ऑफिसर हैं। 12वीं कक्षा में कोरोना के कारण परीक्षा रद्द होने के बाद उनके पिता ने उन्हें डिफेंस में जाने के लिए प्रेरित किया। अक्षित ने एनडीए क्लियर किया, लेकिन अंग्रेजी में कमजोर होने के कारण उन्हें कठिनाई हुई। उन्होंने चार बार कॉन्फ्रेंस आउट होने के बाद भी हार नहीं मानी और सीडीएस में प्रयास जारी रखा। अक्षित का मानना है कि डिफेंस बैकग्राउंड इतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि आपका इरादा और लक्ष्य। उन्होंने हिंदी मीडियम से होने के बावजूद अंग्रेजी में सुधार किया और एसएसबी में सफलता प्राप्त की।

अंग्रेजी की तैयारी कैसे करें

अक्षित शर्मा बताते हैं कि उन्होंने सीडीएस की तैयारी के दौरान एचसीएल टेक में नौकरी की और मैक्सिको के क्लाइंट्स के साथ मीटिंग्स के कारण उनकी अंग्रेजी धीरे-धीरे सुधरी। उन्होंने फिजिक्स वाला से जुड़कर लगातार अंग्रेजी की कक्षाएं लीं। अक्षित ने बताया कि वे किसी भी टॉपिक को तब तक नहीं छोड़ते थे जब तक कि उनके सारे डाउट क्लियर नहीं हो जाते थे। अभिलाषा सिंह बताती हैं कि सीडीएस परीक्षा में कम समय होने के कारण अपनी ताकत पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने अंग्रेजी और विज्ञान को प्राथमिकता दी और नोट्स बनाकर बार-बार रिवाइज किया।

निराशा से कैसे निपटें

अक्षित शर्मा बताते हैं कि एक समय वे जीटीओ के पहले दिन निराश हो गए थे जब उनका पैर मुड़ गया था। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता प्राप्त की। अभिलाषा सिंह बताती हैं कि मॉक टेस्ट में कम नंबर आने और स्क्रीनिंग के दौरान उन्होंने निराशा महसूस की। लेकिन उन्होंने खुद पर विश्वास रखा और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ रहीं।

एसएसबी में हिंदी में इंटरव्यू

अक्षित शर्मा बताते हैं कि एसएसबी में हिंदी में इंटरव्यू देने से कमजोरी का पता चलता है। उन्होंने अंग्रेजी में सुधार करने के लिए न्यूज़पेपर पढ़े और लगातार बोलने का अभ्यास किया। अक्षित ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि सातवें प्रयास में सफलता मिलने पर वे भावुक हो गए थे।

जीएस की तैयारी कैसे करें

अक्षित शर्मा बताते हैं कि उन्होंने जीएस की तैयारी के लिए अपने पुराने नोट्स का इस्तेमाल किया और यूट्यूब से डाउट क्लियर किए। उन्होंने नौकरी के साथ-साथ पढ़ाई की और फिजिक्स वाला के मुफ्त कंटेंट का लाभ उठाया। अक्षित ने बताया कि एसएसबी की तैयारी के दौरान उन्होंने नाइट शिफ्ट करा ली थी और दिन में पढ़ाई करते थे।

क्या नहीं करना चाहिए

अभिलाषा सिंह बताती हैं कि तैयारी की शुरुआत गलत तरीके से नहीं करनी चाहिए। सही मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है और सीमित समय में बहुत सारी किताबें पढ़ने से बचना चाहिए। उन्होंने अपने शिक्षकों पर विश्वास रखने और नोट्स को बार-बार रिवाइज करने की सलाह दी। अक्षित शर्मा बताते हैं कि वे अपने दर्द को किसी से बता नहीं पाते थे, लेकिन वे चाहते थे कि कोई उनसे उनकी कठिनाइयों के बारे में पूछे।

शारीरिक फिटनेस

अभिलाषा सिंह बताती हैं कि वे स्पोर्ट्स में शामिल थीं, लेकिन परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने सब कुछ रोक दिया था। रिटर्न क्लियर होने के बाद उन्होंने वापस हॉर्स राइडिंग और रनिंग शुरू कर दी। अक्षित शर्मा बताते हैं कि वे स्पोर्ट्समैन नहीं थे, लेकिन उन्होंने एसएसबी के लिए खुद को तैयार किया। उन्होंने रस्सी बांधकर मंकी क्रॉलिंग और पेड़ पर चढ़ने का अभ्यास किया।

महिला उम्मीदवारों के लिए संदेश

अभिलाषा सिंह बताती हैं कि महिला डिफेंस उम्मीदवारों को भी दर्द होता है जब लोग कहते हैं कि सेना में महिलाओं को शामिल करने से सेना कमजोर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी रेकमेंडेड महिला उम्मीदवार योग्य हैं और उन्होंने बहुत मेहनत की है। अक्षित शर्मा ने कहा कि लड़कियों को लड़कों से ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है और उनकी स्क्रीनिंग प्रक्रिया भी कठिन होती है। उन्होंने रूढ़िवादी मानसिकता वाले लोगों की आलोचना की और कहा कि महिलाओं को पुरुषों से कम नहीं समझना चाहिए।

निष्कर्ष

वीडियो के अंत में, दोनों उम्मीदवारों को बधाई दी गई और सभी बच्चों को प्रेरणा लेने के लिए कहा गया। कंसिस्टेंसी और धैर्य रखने की सलाह दी गई और कहा गया कि जैसे ये सिलेक्ट हुए, वैसे ही आप भी सिलेक्ट होंगे।

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Transcript

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0:10 हेलो एवरीवन वेलकम टू इंडियास मोस्ट सेंसिबल एंड डिसिप्लिन प्लेटफार्म फॉर द डिफेंस एस्पिरेंट्स दैट इज सीडीएस एंड एपकेट साथियों आज हमारे साथ है हमारे एस्पिरेंट हमारे गेस्ट अक्षित शर्मा और अभिलाषा सिंह ये दो वो बच्चे हैं जिन्होंने प्रिपरेशन अपनी जर्नी हमारे साथ-साथ शुरुआत की थी और आज दोनों ही बच्चे रिकमेंड हो चुके हैं। और ऑलदो हर एक स्टूडेंट की अपनी जर्नी होती है। अपने तरीके होते हैं पढ़ने के। बट आज हम इन बच्चों से पूछेंगे कि इन्होंने अपनी प्रिपरेशन कैसे की जिससे आपको भी उससे हेल्प मिल सके। जी सर। तो बच्चों कैसा रहा आपका सफर? सबसे पहले मैं बात करना चाहूंगा हमारे पास अक्षय शर्मा है और अभिलाषा हैं। तो मुझे लगता है मैं पहला चांस अभिलाषा को देना चाहता हूं।

0:56 ठीक है? और ओटीए में आप रेकमेंड हुई हैं। अभिलाषा मैं जानना चाहता हूं आपका एक ओवरऑल एक्सपीरियंस कैसा रहा इस पूरी जर्नी का जब आपने तैयारी करने के लिए पहली बार सोचा कि मेरे को बनना है ऑफिसर तो क्या आपके पेरेंट्स का क्या सपोर्ट रहा? आपकी क्या मेंटालिटी थी? और आपको क्यों ऐसा फील हुआ? उस जर्नी के दौरान इस सफर के दौरान बहुत सारी मुश्किलें भी आपके पास आई होंगी। बहुत बार डीमोटिवेट भी आप हुए होंगे। ना बहुत बार आपको यह भी लगा होगा पता नहीं कर पाऊंगी या नहीं कर पाऊंगी। पर सम हाउ यू हैव मेड इट टू द फाइनल्स। सो आई जस्ट वांट टू नो अ ब्रीफ यू नो अ ब्रीफिंग ऑफ़ योर जर्नी। सर स्टार्ट ऑफ द जर्नी तो फियर से हुई थी। डर था कि क्योंकि वैकेंसीज बहुत कम है। हर कोर्स में 16 17 या मैक्सिमम जैसे मेरे कोर्स में 19 वैकेंसीज थी। तो यूजुअली कम

1:43 ही वैकेंसीज आती है। तो डर था कि नहीं होगा शायद। क्योंकि कभी मैंने ऐसे किसी से मैं मिली नहीं जिसका हो रखा है। तो हम जब इंटरनेट या कहीं पर देखते हैं तो हम सोचते हैं कि उनमें और हम में क्या डिफरेंस है। पता नहीं चल पाता क्योंकि कभी मिले नहीं है। तो डर था स्टार्टिंग में पर धीरे-धीरे प्रिपरेशन करी, प्लान बनाया एक कि किस-किस तरीके से मेरे को अपनी प्रिपरेशन को फॉलो करना है। जब उस प्लान पे हम जो हमने प्लानिंग करी है, जब हम उसको एग्जीक्यूट करना स्टार्ट करते हैं और डेली बेसिस पे डिसिप्लिन के साथ एग्जीक्यूट करते हैं, तो खुद थोड़ा बहुत कॉन्फिडेंस डेवलप हो जाता है। फिर मॉक टेस्ट एंड ऑल के थ्रू जब मार्क्स आते हैं, बहुत बार मार्क्स डिप करते हैं, डाउन जाते हैं, तब लगता है कि शायद नहीं हो पाएगा। पर कंटीन्यूअस प्रैक्टिस और वह और खुद पे फेथ रखना बहुत जरूरी है। तो उसके साथ धीरे-धीरे मॉक टेस्ट ऐसे ही करते-करते रिटन क्लियर हो गया। उसके बाद

2:30 एसएसबी की जर्नी मुझे लगता है थोड़ी अलग है क्योंकि एसएसबी एक ओवरऑल बहुत अनप्रिडिक्टेबल प्रोसेस है। उसमें बेसिक हमारी खुद को ज्यादा चेंज नहीं करना है। नेचुरल जैसे हम हैं वैसे ही जाके दिखा के आ जाना है। उनको अगर जो उनको क्वालिटीज जो उनको चाहिए अगर उनको हम में दिखेगी तो हमको चूज़ कर लेंगे। तो वैसे ही मैंने जाके अपना एसएसबी भी दे दिया। वैसे मैं बहुत नर्वस रहती हूं। पर एसएसबी में मुझे बिल्कुल नर्वसनेस नहीं हुई। तो उसके बाद एसएसबी से रिकमेंडेशन हुआ। फिर मेडिकल्स भी हो गए और फाइनल मेरिट में भी आ गया। ओके। आपकी रैंक कौन सी है बेटा? सर मेरी 14थ। अरे वाह यार। क्या बात है सर बच्चे 14। अच्छा ये और मैं जानना चाह रहा था आपसे कि एक बड़ी अजीब सी बात बताई आपने कि एसएसबी में मुझे नर्वसनेस नहीं हुई। यस सर। नहीं हुई। दिस इज़ समथिंग यू नो मतलब एक्स्ट्राऑर्डिनरी। ये ये कैसे हुआ? मतलब आपको क्या लगता है? व्हाट इज द रीज़न

3:16 बिहाइंड दिस? सर प्रिपरेशन और अपने ऊपर फेथ। वो फेथ तब डेवलप होता है जब हम डिसिप्लिन और कंसिस्टेंसी से अपना जो हमने खुद को प्रॉमिस किया है कि अगर मैंने प्रॉमिस किया है कि मेरे को हर दिन पढ़ना है। मेरे को हर दिन रनिंग के लिए जाना है। जब हम वो करते हैं तो खुद ही एक थोड़ा डेवलप हो जाता है सेल्फ कॉन्फिडेंस और खुद पे यकीन आ जाता है कि मैं बाकी एस्पिरेंट्स से इसलिए अलग हूं क्योंकि मैंने ये एक्स्ट्रा एफर्ट डाला है। मैंने अपनी तरफ से कोई भी स्टोन अनटर्न नहीं छोड़ा है। तो उसके थ्रू मुझे लगता है मेरे को कॉन्फिडेंस था। इंग्लिश मीडियम स्कूल से थे आप। यस सर। एक और क्वेश्चन है बेटा मेरा आपसे कि क्या ऐसा जरूरी है क्या कि एक बच्चा तभी सिलेक्ट हो सकता है जब उसका डिफेंस बैकग्राउंड हो और अगर हां तो उससे क्या बेनिफिट मिल सकते हैं और अगर नहीं तो उसको खुद से कैसे करना चाहिए

4:02 सर डिफेंस बैकग्राउंड का तो मुझे नहीं लगता कोई रोल है किसी भी करियर को अगर हम चूज़ करते हैं तो हमारा अपना पैशन हम कितने उसके लिए सीरियस हैं और हमारे हमारे दिमाग में वो कितना चल रहा है दिन भर अगर आपके दिमाग में आर्मी चल रही तो ऑफ कोर्स आपको आर्मी जॉइन करनी चाहिए। इफ आई हैड बीन बोर्न इंटू अ सिविलियन बैकग्राउंड हाउसहोल्ड देन आल्सो आई वुड हैव ऑप्टेड फॉर आर्म्ड फोर्सर्सेस क्योंकि मेरे दिमाग में ही वही चलता रहता था। मेरे को इंटरेस्ट ही उसी में है। मेरे को बुक्स ही वही पढ़ना पसंद है जो वॉर रिलेटेड है। मिलिट्री हिस्ट्री है। मुझे पॉडकास्ट लिसन करना वही पसंद है। तो इसलिए मेरा इंक्लिनेशन उसी साइड था। ओके? और मिलिट्री बैकग्राउंड मेरा है। उसका हेल्प मिलता है कि आपको नॉलेज रहती है कि आप आगे कैसी लाइफ लीड करने वाले हो। आपको पता रहता है कि आपको आगे क्या डिफिकल्टीज फेस हो सकती है। पर उसका एक ड्रॉबैक भी है। आपको एसएसबी में वो जब आप जाएंगे तो वो बहुत एक्सपेक्ट करेंगे कि आपको नॉलेज

4:48 है तो आपको बहुत इन डेप्थ नॉलेज होनी चाहिए। जैसे मेरे एसएसबी में मुझसे मेरे फादर के रेजीमेंट की बहुत डिटेल में चीजें पूछी गई थी। ये भी पूछा गया था कि उनके पास डेकोरेशंस क्या है यूनिट के पास? वॉर क्राय सब कुछ पूछा गया। मुझसे पूछा गया कि आप व्हिच रेजीमेंट यू विश टू जॉइन। तो मैंने जब बताया कि आई विश टू जॉइन द आर्टिलरी। तो उसमें बहुत डिटेल में पूछा इवन यह तक पूछा कि हु इज डीजी आर्टिलरी करली वो मुझे नहीं आता था। ओके बट बहुत डिटेल में तो वो आपसे बस एक्सपेक्ट करेंगे कि आपको नॉलेज है। मतलब आपके पिताजी आर्म्ड फोर्स में ऑलरेडी सर्व कर चुके हैं। यस सर ओके ओके और सेम क्वेश्चन अगर मैं अक्षित शर्मा से पूछूं सेम क्वेश्चन क्योंकि आप एक डिफेंस बैकग्राउंड से नहीं हो। सर कैसा रोल रहेगा? हां बिल्कुल सर लाइक मेरी फैमिली में कोई भी डिफेंस बैकग्राउंड से नहीं है। मैं पहला ऑफिसर हूं।

5:34 सर शुरू से जब लगता है मैं 10थ 12th पास किया था तो 12th में सर कोरोना कोविड आ गया था तो उस टाइम पे मेरी प्रिपरेशन बहुत तेज थी। मुझे लग रहा था कि मुझे इस बार डिस्ट्रिक्ट में अपना रैंक लाना है। अच्छा बट अनफॉर्चूनेटली पता चला कि एग्जाम नहीं होंगे पोस्टपोंड हो गए हैं। उस टाइम पे मेरे पापा आते हैं बोलते हैं यार तुमको डिफेंस जॉइन करना चाहिए। उस टाइम मेरे को इतनी नॉलेज नहीं थी। तो मैंने एनडीए का फॉर्म डाल दिया था और वहां से मैं एनडीए क्लियर कर गया था। बट ड्यू टू क्योंकि मैं यूपी बोर्ड से था। इतनी इंग्लिश अच्छी थी नहीं। गांव का रहने वाला हूं। तो वहां पे इतनी सुविधाएं नहीं मिल पाई मेरे को। फोन भी नहीं था सर 12th में मेरे पास। तो वहां से फिर मेरे को थोड़ा-थोड़ा मिला कि लेकिन मैं चार बार कॉन्फ्रेंस आउट एक बार स्क्रीन आउट तीन बार कॉन्फ्रेंस आउट होने के बाद वो जज्बा नहीं छोड़ा सर मैंने। फिर जब सीडीएस आया सीडीएस में जज्बा लगा रहा कि नहीं यार

6:19 मेरे को जाना जाना है। और उसके पीछे कई सारी प्रेरणादायक कहानियां भी हैं। कई सारे हार्ड ब्रेक्स भी हैं। तो वो चीज एक जरूरी होती है कि आपके पेरेंट्स आपको सपोर्ट करें। सही बात। हर चीज के लिए। तो वह डिफेंस बैकग्राउंड इतना मैटर नहीं करता है जैसे कि अभी बताया लेकिन आपका इंटेंट क्या है? आपका उद्देश्य क्या है? अगर इफ यू फाइंड योर लक्ष्य हम जैसे कि सर मूवी भी है करण शेर लेफ्टिनेंट करण शेखर की कि अगर आपने अपना लक्ष्य पा लिया लक्ष्य को देख लिया और आपको जाना है कि मुझे लक्ष्य ही पकड़ना है तो फिर कितनी भी बाधाएं आए जीवन में आपकी झाड़ियां आएंगी तो डिपेंड करता है अगर आप झाड़ियां काटने में रह जाते हैं या फिर लक्ष्य की तरफ बढ़ते हैं सही बात है अच्छा अक्षय एक आपने बताया यू आर फ्रॉम हिंदी मीडियम बैकग्राउंड यस सर तो यार अभी सीडीएस का पेपर आप जानते हो कितना जबरदस्त पेपर आ रहा है 120 क्वेश्चन

7:06 और रीडिंग बेस्ड पेपर है इतनी सारी वोकैबलरी तो इट इज़ ऑल टुगेदर अ पेपर ऑलमोस्ट इक्विवेलेंट टू यू नो मैट और समवेयर क्लोज टू कैट तो कैट के करीब पहुंचा दिया है लेवल यार एक हिंदी मीडियम बच्चा व्हाट वाज़ योर स्ट्रेटजी हाउ डिड यू मेक इट सर कैसे कर पाए शुरू से सर जब सीडीएस का मैंने फॉर्म भरा था तो सर मैं एचसीएल टेक में जॉब करता हूं तो मेरी मीटिंग्स रहती है मैक्सिको के लोगों से क्लाइंट से तो मेरी इंग्लिश धीरे-धीरे इंप्रूव होना शुरू हुई उसके बाद मैं जुड़ा फिजिक्स वाला से वहां पे सर कंटीन्यूअसली इंग्लिश की क्लास लेना मेरा मैन मेन फोकस था जब मैंने 12th किया था तो तब मेरा मेन फ मेन फोकस आया एनडीए में कि मुझे लोगों ने मेरे को बताया ज्योग्राफी हिस्ट्री पॉलिटिक्स ये चीजें देखनी है क्योंकि इनसे ज्यादा क्वेश्चन आते हैं जब मेरे को रियलाइज हुआ एसएसबी में देने के बाद नहीं यार अक्षित तू तो इंग्लिश में

7:51 कमजोर निकला फिर मैंने रियलाइज किया इंग्लिश में क्लासेस ली एक बार नहीं आ रहा है दोबारा ली तबारा ली जब तक मेरे को समझ नहीं आ गया मैंने उसको छोड़ा नहीं मेरा मकसद ये था कि अगर मेरे को आज नाउन खत्म करना है तो मैं तभी बेड पर जाऊंगा जब नाम नाउन खत्म हो जाएगा। जब तक उसका कोई भी डाउट रहेगा मैं सोने नहीं दूंगा। तो कैसे करते थे? जैसे नाउन खत्म करना है तो क्या पूरा कैसे करते थे नाउन खत्म? सर सबसे पहले मैं जो मेरा मान लीजिए शुरू से तो पढ़ते आया हूं बट मेरे को कोई डाउट है। पहले मैं फिजिक्स वालों खोला। आपके लेक्चर्स आपने देखे होंगे सब लगे हुए हैं एक सीरीज में कि नाउन का ये। वहां से डाउट क्लियर किया। किताब उठाई, क्वेश्चन लगाए। नहीं लग रहा है। फिर से वही लेक्चर देखा कि आखिर मैं कहां फंस रहा हूं। और उसके बाद एक टाइम ऐसा आता था कि भाई कब तक नहीं

8:37 लग जाते थे क्वेश्चन बहुत बढ़िया यही सवाल आपसे भी अभिलाषा कि आपने हाउ डिड यू प्रिपेयर योर इंग्लिश सर एक सीडीएस एग्जाम में जैसे हम बाकी कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में बोला जाता है कि अपनी वीकनेस को हम मेंड करें वी शुड मेंड आवर वीकनेसेस एंड कन्वर्ट देम इंटू स्ट्रेंथ। बट एज़ फार एज़ सीडीएस इस कंसर्नड देयर इस नॉट मच टाइम फॉर प्रिप्रेशन। इट अकर्स ट्वाइस अ ईयर। आल्सो अ मोस्ट ऑफ़ द कैंडिडेट्स आर आइदर पर्सुइंग अ डिग्री। और दे आर वर्किंग वर्किंग इन सम फर्म और समवेयर। सो अ लॉट ऑफ़ टाइम इज़ नॉट स्पर्ड फॉर प्रिपरेशन। सो इसमें आई थिंक मोस्ट ऑफ़ द फोकस ये रहना चाहिए कि आप अपनी स्ट्रेंथ को बोन स्ट्रांग कर लें कि वहां आपका कोई मार्क्स ना छूटे। तो मैंने इंग्लिश और साइंस के साथ यही फोकस किया था। मेरा मेन फर्स्टली मेरी प्रायोरिटी थी इंग्लिश और साइंस। इंग्लिश में मैंने सर जैसे हम आपके

9:22 लेक्चर्स थे। सारे रिकॉर्डेड लेक्चर्स मैं 2X पे सारे देखती थी। नोट्स बनाती थी प्रॉपर। भले ही मुझे वो चीज़ पता है फिर भी मैं नोट्स बनाती थी। और उस नोट्स को रिवाइज करने के बाद जो डीपीपी दी गई है उनको बार-बार रिपेटेटिव सॉल्व करना है और एक जो हमारे एग्जाम्स होते थे संडे को वो क्वेश्चंस को बार-बार सॉल्व करना है। प्रॉपर शेड्यूल फॉलो करते हैं। यस सर। सही है। मतलब नोट्स बनाना सर बहुत हेल्पफुल होता है। मैं बच्चों को मना ही कर देता हूं क्लास में कि मैं जो दे रहा हूं दैट इज इनफ। आपको नोट्स नहीं बनाने पर फिर भी शी वेंट एक्स्ट्रा माइल एंड शी ओके नोट्स। सो मतलब ताकि और थोड़ा सिस्टमैटिक हो जाए जो मैं समझ पा रहा हूं। हम और बाकी जब आप प्रिपरेशन कर रहे थे दोनों से ही क्वेश्चन है मेरा ये तो आपको कभी ऐसा लगा डीमोटिवेटेड कि यार गलत चूज़ कर लिया या फिर चूज़ तो सही कर लिया पर हो

10:08 नहीं पाएगा ऐसा कभी दोनों को अपनी जर्नी के दरमियान फील हुआ सर ऐसा तो कभी फील नहीं हुआ कि गलत चूज़ कर लिया लेकिन हां एक टाइम पे आके मैं डीमोटिवेट इतना हो गया था कि अब मेरे से नहीं होगा एंड वो टाइम था मेरा GTO का पहला दिन ओके जब मैं इंटरव्यू में था तो हमारा सर सर जीटीओ का पहला दिन जीडी हुई हां जीपीयू हुई उसके बाद एचजीटी होने पीजीटी होने के बाद हम गए जीओ आर के पास तो सर हम सात लोग थे हमारी तो मैं उस टाइम छापा मूवी देख के गया था तो हमारा वॉर ड्राई था हर हर महादेव तो रखा तो सर वो जो जोश था मैं कि हम जीत के रहेंगे वो कुछ ज्यादा ही था तो जिओ आर के पहले ही जो स्लैब होता है उसमें इतनी तेज से मैं कूदा कि मैं अपने डेजिग्नेटेड प्लेस से आगे गिरा और वहां पे रेत के कट्टे भरे हुए रखे थे उसमें मेरा पैर जो एंकल था वो मुड़ गया था।

10:56 ठीक है? और दूसरा पैर मेरा पत्थर पे लगा था वहां। तो यहां से ये पैर छिल गया था। अभी भी निशान है। खून निकल रहा था इससे और ये पैर मुड़ गया था। GTO वाज़ लुकिंग ऑल द थिंग्स। मैंने पैर सीधा किया। मुझे पता था दर्द हो रहा है। बट एट दैट टाइम मसल्स गर्म थी तो इतना दर्द नहीं हुआ। उसके बाद भी दीवाल कूदना, चढ़ना। मैंने एक पैर से किया। आफ्टर दैट वी वॉन द रेस। उसके बाद जीटीओ सर बोले मेरे को कि जाओ अपना पट्टी-वट्टी कराओ। उस टाइम तो इतना नहीं लगा। फिर हमारा कमांड टास्क हुआ। ठीक है? एच सॉरी एचजीटी हुआ था। बढ़िया हुआ था सब। फिर वो मेरे से बोलते हैं कि इफ यू आर फीलिंग सिक और तुमको दिक्कत हो रही है तो डू यू वांट टू गो टू मेडिकल? हम मेडिकल हॉस्पिटल मैंने कहा लेकिन तुम्हारी कंडीडेंसी खत्म हो जाएगी। हम तो सर मेरा बोर था। मैं उनसे बोला था सर मैं 27 कि.मी. कंटिडेंसी खत्म करवाने तो

11:42 नहीं आया हूं। हम ठीक है। उन्होंने कहा ओके। तो फिर मैं गया रेस्ट किया। रेस्ट करने के बाद जब मेरा पैर सूझा था, जब स्वेलिंग हुई, तब इतना दर्द हुआ कि मैं उठ के खड़ा नहीं हो पा रहा था। बट थैंक यू टू मेरे रूममेट्स के लिए। उन्होंने गर्म पानी लाया, आइसिंग किया, सब किया। तो फिर मैंने फोन किया अपने पापा को। एंड दैट वाज़ द डे कि मेरे घर पे सब लोग थे क्योंकि उस दिन मेरी बहन की शगाई हो रही थी। मैं इंटरव्यू में था। तो मैंने पापा को कि पापा अब नहीं होगा। बिकॉज़ आई एम नॉट एबल टू स्टैंड प्रॉपर्ली। तो मैं मेरा अगले दिन आईओ है। मैं कैसे करूंगा? तो बोले ठीक है बेटा मत कर कोई दिक्कत नहीं है बाद में इंजरी वंजरी हो जाए उससे क्या फायदा बट एट द टाइम मेरे चाचा जी मैं नाइन 10th उनसे ही ट्यूशन पढ़ा था राजेश अंक नाम है तो वो मेरे से यह बोलते हैं कि तुम यह बताओ तुमको क्या लग रहा है कर लोगे या नहीं यस

12:28 और नो मैंने कहा सर कर लूंगा सर ही बोलता हूं मेरे मुंह से अब भी सर निकलता है क्योंकि ट्यूशन पढ़ा था तो बोलते हैं ठीक है यार फिर कर पैर टूट ही तो जाएगा एट द लास्ट मिल्खा सिंह के पैर में स्ट्रेचेस थे वो तब भागे थे सो दैट वास द मोटिवेशन लाइन फ्रॉम हिम मैंने कहा अब तो करना पड़ेगा। मैंने रात भर इसको बॉल नहीं लगा के तैयार किया। एंड इन दैट एसएसबी आई ओ आई डीड 30 ऑब्सकल 13 ऑब्सकल। गजब गजब। और मेरे ग्रुप के आठ या नौ कर पाए थे। वाह यार मतलब जो तुम्हारे साथ समस्या थी एक वो कहावत होती ना कि इन बेड़ियों को तोड़ के बना ले इनको शस्त्र तू। जो खुद से लिपटी बेड़ियां मतलब जो तुम ही जिन चीजों से परेशान थे तुमने उन्हीं को शस्त्र बना लिया। लिटरली बहुत बढ़िया बेटा। एंड सेम गोज विथ यू। अभिलाषा कि जब आप डीमोटिवेटेड

13:16 कभी फील हुआ हुआ कि नहीं हुआ? यस सर हुआ। होता ही है। एक नेचुरल है ये चीजें। तो उस समय आपने कैसे उसको ओवरकम किया था? सर डीमोटिवेटेड मुझे ज्यादा तो नहीं पर दो-तीन बार फील हुआ। जब जैसे यूजुअली हम मॉक टेस्ट देते हैं। सीडीएस का सिलेबस ही बहुत द एंटायर सिलेबस गाइडलाइन इज़ नॉट वेरी वेल डिफाइंड। एंड आल्सो द पेपर पैटर्न इज़ वेरी डायनेमिक। इट इज़ ऑलमोस्ट चेंजिंग एव्री अदर अटेम्प्ट। तो तब लगता था और मेरे पास टाइम बहुत कम था एग्जाम आने में टू थ्री मंथ्स बाकी थे। तो लग जब मॉक टेस्ट देती थी मार्क्स नहीं आते थे तब लगता था कि कैसे होगा? रिटन में बहुत हाई मार्क्स चाहिए। एसएसबी में भी हाई चाहिए तब जाके आप मेरिट में फाइनल मेरिट में ना होगे। तो जब मार्क्स नहीं आते थे तब डर लगता था। और जब मेरे को सेकंड टाइम डीमोटिवेटेड फील हुआ वो तब था जब मैंने हमारे बैच में

14:02 स्क्रीनिंग के लिए जो रिपोर्टिंग थी वो 300 प्लस थी। और स्क्रीनिंग मोस्टली 40 मैक्सिमम 40 ऐसे होते थे। तो तब मेरे को लगा कि स्क्रीनिंग स्क्रीनिंग के टाइम पे कैसे हम ऐसा क्या करें कि हम स्क्रीन इन हो जाए तब लगता था डर क्योंकि मैंने अपने साथ वाले बहुत डिर्विंग कैंडिडेट्स को स्क्रीन आउट होते हुए देखा इसीलिए तब डीमोटिवेटेड फील होता था पर अगेन आपको खुद पे जब आपने चूज़ कर लिया है कि मेरे को यही करना है तो अब करना है कैसे भी करना है सही बात है सब रिसोर्सेज लगा के करना है मतलब डीमोटिवेटेड होना बेटा एक बहुत नेचुरल चीज होती है बहुत कॉमन होता है हर स्टूडेंट्स इवन आज आपके आपके सामने टॉपर्स बैठे हुए हैं, रेंकर्स बैठे हैं। ये खुद डीमोटिवेटेड फील करते हैं। बट हमेशा यह है कि अपना याद रखना है कि हमें करना है या

14:49 नहीं करना। नहीं करोगे तो कोई डीमोटिवेशन नहीं होगा। उसी दिन खेल खत्म। बट अगर करना है तो हार्ड वर्क करना पड़ेगा। साथ ही साथ हर एक चीज का तोड़ है मेहनत। अगर मेहनत करोगे मॉक टेस्ट में मार्क्स कम आते हैं। डीमोटिवेशन होता है। बट मेहनत करोगे तो मार्क्स अच्छे आ जाएंगे। वो डीमोटिवेशन मोटिवेशन में कन्वर्ट हो जाएगा। याद रखिएगा किसी और के द्वारा अगर आप मोटिवेट होते हो ना तो जिस तरह से मोटिवेट होते हो ना कोई तीसरा वैसे डीमोटिवेट भी कर देगा। बट जब खुद से कर्म करके खुद से मेहनत करके मोटिवेट होते हो तो उस समय डीमोटिवेट होना इतना आसान नहीं होता। सर सर अच्छा एक और मेरे दिमाग में ये सवाल आ रहा है जब से आपने बताया ना हिंदी मीडियम सर। एक तो तुम्हारी जो एनर्जी है वो मुझे बहुत जबरदस्त लगी। जब तुम एक्सप्लेन कर रहे थे ना सारी चीजें तो वो इतना रियलिस्टिक लग

15:36 रहा था। आई वास ऑलमोस्ट यू नो गेटिंग अ पिक्चर बिल्ड इन माय माइंड के हाउ इट हैपेंड हाउ यू लीव्ड सो फार दैट यू नो क्रॉस 13 मोर देन 13 ऑब्सकल एंड यू गॉट योर एंकल ब्रोकन एंड एवरीथिंग स्टिल यू केप्ट वर्किंग सो दिस इज़ ब्यूटीफुल यार बहुत मतलब मेरे को उस टाइम बूस बम्स आ रहे थे ठीक है और मेरा मन कर रहा था यार एक बार मेरे को भी दे जाओ एसएसबी ठीक है तो दिस इज़ वै नाइस लेकिन एक सवाल तभी भी मेरे मन में आ रहा था ये सब तो हो गया अब इंग्लिश मीडियम से नहीं हो तुम तो तुमने वो तो रिटन तो चलो हो गई प्रिपेयर प्रिपरेशन एसएसबी में बच्चे मेरे से पूछते हैं सर क्या हिंदी में एसएसबी दे सकते हैं हम तो क्या तुमने हिंदी में एसएसबी दी थी नहीं सर एक्चुअली ये हुआ था जब हम जीपी कर रहे थे ना तो एक बच्चे ने मतलब जीटीओ सर ने पूछा था

16:23 कि ओके यू कैन आस्क एनी क्वेश्चन तो एक ने पूछा था सर अगर हम हिंदी में करें डिस्कशन या हिंदी में एसएसबी दें तो उन्होंने डायरेक्टली एक बात बोली थी तो हम उसको टाटा बाय-ब बोल देते हैं तो इट्स मीन लाइक यू कैन यूज़ वन और टू वर्ड्स बट लेकिन एसएसबी हिंदी में देना। वहां पे आप अपनी मतलब एक कमजोरी बता रहे हो कि यस आई एम नॉट कैपेबल टू लर्न इंग्लिश। हाउ डू प्रिपेयर इट? बिकॉज़ मोस्ट ऑफ़ द स्टूडेंट्स से सर आई एम फ्रॉम हिंदी मीडियम स्कूल। आई कैन नॉट स्पीक इन इंग्लिश। हाउ वुड आई डू इन एसएसबी। सो हाउ कैन वी डू दैट? न्यूज़पेपर। न्यूज़पेपर मेरा रीडिंग सर इसमें मेरा एक और कांसेप्ट है। मैं क्या करता था? ट्यूशन पढ़ने में साइकिल से जाता था। तो मैं जब आता था ना तो फोन थे नहीं हमारे पास जो गाने सुनते हुए आए। तो मैं बोलते हुए आता था कुछ ना। ओके यू कैन डू इट। दिस दिस दिस दिस मतलब घर तक तो हां इंग्लिश में स्पीक तो वहां से लोग मुझसे कहते थे

17:08 यार पागल हो गया है क्या अकेले बतलाते जा रहा है क्या चक्कर है कुछ ने तो मेरे को ये भी बोला था लगता है इसके ऊपर भूत कसाया है तो मतलब वो चीज थी बट वहां से मेरे को लगा यार मैं बोल सकता हूं फिर मैंने अपना एक प्रॉपर इंट्रोडक्शन बनाया मैं उसको रटा एक तरीके से लेकिन जब रटा फिर मैं उसमें नए वर्ड मतलब जोड़ने यूज़ कर दिए कि अगर ऐसा करूं तो ये हो जाएगा वहां से मेरा कॉन्फिडेंस बोल्ड हुआ और फिर सर इस एसएसबी के लिए तो सर एक महीने महीने से पहले से मैं तैयार था कि हां हो जाएगा। यह वो मतलब पहले से ही शॉपिंग करके कि इस बार तो करके आऊंगा। तो मैं जब गया था तो मैं बोर घूमने निकल गया था। तो मेरी बहन वगैरह सब फोन कर रहे थे कि कहां बाद में घूम लेना पहले एसएसबी दे। मैंने कि इस बार होके रहेगा। एंड द डे व्हेन आई गॉट रिकमेंडेड आई वाज लिटरली क्राइंग कि फिर मैंने पापा को किया हां पापा अपकमिंग

17:54 लेफ्टिनेंट अक्षय शर्मा रिपोर्टिंग सर। सो दैट वाज़ द टाइम कि भाई वो एक इमोशनल मोमेंट था। वाकई में बट तुम्हारी आंखों में दिख रहा है। सात सात लाइक दिस वाज़ माय सेवंथ अटेम्प्ट। लेकिन मैं कर गया। कितना पेशेंस कितना सही रखना पड़ता है? सही बात है। सेवंथ अटेम्प्ट पेशेंस फॉर कंसिस्टेंसी दोनों को दोनों ही। हेड्स ऑफ। वाह यार बहुत बढ़िया। अब जैसे कि सेकंड पेपर जो हमारा जीएटी यानी जीएस उसकी प्रिपरेशन फिर कैसे करी आप लोगों ने? सर जीएटी की लाइक आप ज्योग्राफी पढ़ाते थे? मैं ज्योग्राफी पढ़ाता हूं। जी। अरे सर। ये वाला मैं बता रहा हूं। हां हां कोई दिक्कत नहीं। चलने दो कोई बुरा। उसमें क्या हुआ था सर? लाइक मैंने एनडीए

18:40 किया था पहले प्रिपरेशन की थी। उसके मेरे नोट्स बने हुए थे। प्लस जो मेरे को डाउट होता था वो YouTube से करता था। मेरी नाइट शिफ्ट मोस्टली होती थी। तो नाइट शिफ्ट में मैं साइड में फिजिक्स वाला की साइट खोल के रखता था। वहां से मेरा जो भी है प्लस द मोस्टेंट थिंग कि फिजिक्स वाला ने हमको फ्री में बेच दिया होता। ओके। तो वहां से अगर हम ऑफिस कर रहे हैं ना तो साइड में ऑफिस चल रहा है। जो पढ़ना है वो पढ़ लो। यार सर कितनी बड़ी बात है। एक बच्चा काम कर रहा है और काम करने के साथ-साथ प्रिपरेशन कर रहा है और प्रिपरेशन करने के बाद आज रैंक हायर करके यहां बच्चा बैठा है। मतलब समझने की बात है। कई सारे बच्चे आप ही लोगों को बोल रहा हूं गधो जब आप बोलते हो ना कि सर 12वीं के साथ कैसे मैनेज करें? सर ग्रेजुएशन के साथ कैसे मैनेज करें? सर कॉलेज के साथ कैसे मैनेज करें? ऐसे मैनेज करें।

19:25 और नहीं कर पाओगे तो वो यहां नहीं बैठे होगे। लिटरली एक्सक्यूज अगर दोगे तो फिर यहां हम दोनों के साथ नहीं बैठे रहोगे और आज बच्चे ने किया तो बता रहे वेरी गुड यार बेटा हां कंटिन्यू करो सर उसमें रहता है जैसे फिर जब मेरे को पता चला कि एसएसबी आने वाली है तो मैंने नाइट शिफ्ट करा ली थी वर्क फ्रॉम होम प्रॉपर्ली तो मेरी नाईट शिफ्ट रहती थी 10:30 से सुबह 6:30 तक और मुझे रात भर जाग काम करना होता था सुबह में मैं क्या करता था 2 घंटे सोता था उठ के 9:30 से लग जाता था मैं 6:30 तक मान लो कि मैं ऑफिस ही कर रहा हूं लेकिन वहां मैं पढ़ता था हम तो दिन में मेरी पढ़ाई रात में काम करता था। उसके बीच चार या 3 घंटे सोने को मिलता था। हम तो वह रहा था सर। वह मतलब टाइम तक एक महीने एक महीने तक ये चला था। और उस महीने में फिर मेरे को डेंगू भी हो गया एट द लास्ट कि मेरे को डेंगू हो गया।

20:11 फिर घर वालों ने कहा कि ठीक है अभी छोड़ दे। तब तक मेरे अंदर कॉन्फिडेंस बोल्ड हो चुका था कि अब तो मैं करके रहूंगा। कुछ भी हो जाए। देखिए अक्षय की कहानी से मैं भी कुछ सीख के जा रहा हूं। और वो सीख के ये जा रहा हूं कि अपने आप को पूरी तरीके से झोंक दीजिए। जो मैं समझ पा रहा हूं अक्षय ने अपने आप को पूरी तरीके से झोंक दिया और यकीन जानिए जब आप अपने आप को झोंक देंगे और झोंक के बाहर निकलेंगे ना तो कुंदन नहीं बने होंगे आप खत्म नहीं होंगे इतनी आसानी से आप खत्म नहीं होते सही बात है तो अक्षय बहुत मजा आया यार तुम्हारे इंटरव्यू में मुझे बहुत अच्छा फील हो रहा है अच्छा अभिलाषा एक सवाल मेरा आपसे भी है एक बात ये बताओ अभी तक बहुत सारे लोगों ने पूछा होगा कैसा लग रहा है क्या है एक सवाल ये भी रह जाता है मन में कि यार कोई मेरे से ये सवाल पूछता कभी होता है हमारा कोई अचीवमेंट होता है कोई हमसे चाहता है कि दिस इज़ वन क्वेश्चन आई रियली वांटेड टू बी आस्क्ड कि मुझसे पूछा जाए। पर अभी तक नहीं

20:59 पूछा गया है। ऐसा कोई सवाल है? सर ऐसा क्वेश्चन ये हो सकता है कि प्रिपरेशन जर्नी में ऐसा क्या है जो नहीं करना है। हां यूजुअली जिस जिसकी वजह से हम कोई चीज अचीव करने वाले होते हैं पर पीछे रह जाते हैं। तो मेनली तो मुझे लगता है बहुत सारे कैंडिडेट्स अपनी प्रिपरेशन ही स्टार्ट एक गलत पेज से करते हैं। सबसे पहले जैसे मैंने अपने फोर्थ सेमेस्टर के बाद अपना प्रिपरेशन स्टार्ट किया था मई में और हमारा फर्स्ट सितंबर को एग्जाम था। तो उसके पहले मैंने जैसे सर को पहले बताया कि उसके पहले मुझे यह भी नहीं पता था कि नर्मदा कहां से बहती है। फिर वो बात आ गई। फिर खड़े हो जाओ। कोई बात नहीं। तो सबसे पहले तो हमें गाइडेंस चाहिए। फोकस हम कर लेंगे। मेहनत हम कर लेंगे। पर सबसेेंट है इंपॉर्टेंट है गाइडेंस। प्रॉपर गाइडेंस। तो इतनी सारी बुक्स हैं मार्केट

21:45 में। कितना पढ़ लेंगे? टू थ्री मंथ्स में। पढ़ते रह जाएंगे तो फिर पढ़ते ही रह जाएंगे। फिर क्वेश्चन प्रैक्टिस कब होगी? और इसीलिए मैंने सोचा कि बैच ले लेते हैं और देखा ही था सारे टीचर्स को फैकल्टी मेंबर्स को YouTube पे कितना अच्छा पढ़ाते थे। तो फिर सबसे पहले तो जितने आपके वह थे लेक्चर्स वही उनके साथ लेक्चर्स देखते थे। फिर साथ में नोट्स बनते थे। उन्हीं नोट्स को बार-बार रिवाइज करना है। नई कोई चीज नहीं उठानी है। यूपीएससी का सिलेबस ही ऐसा है। आपको हर क्वेश्चन पेपर में कुछ ना कुछ मिलेगा जो होगा कि अरे ये कहां से आ गया। हम जब एस्पिरेंट होते हैं हम चाहते हैं कि जो हम क्वेश्चन पेपर अटेम्प्ट करें वो सारे मुझसे हो जाए। तब हमें लगता है कि हम लायक हैं सिलेक्शन के। बट ऐसा नहीं है। एंड एग्जाम में भी कोई यहां पे 100% स्कोर करने वाला आता नहीं है और ना ही करने की जरूरत है। तो सबसे पहले तो अपने टीचर्स पे फेथ रखें जिनको आप फॉलो कर रहे हैं। जो वो

22:31 पढ़ा रहे हैं उनको रिपीटेटिव उन्हीं नोट्स को वापस वापस पढ़ें। उन्हीं क्वेश्चंस को बार-बार प्रैक्टिस करें। रट जाएं फिर भी करें प्रैक्टिस। उसी से कॉन्फिडेंस बिल्ड अप होता है और सारा सर सब कुछ नोट्स के अंदर से आता है सब कुछ। ओके। ओके। आप क्या कहते हैं अक्षय इस चीज पे? बिल्कुल सर। कहीं ना कहीं मेरे अंदर एक सवाल रहा था कि कोई मुझसे पूछे हम कि कितने दर्द झेले हैं इस राह में तुमने? एक्चुअली सर हम लड़के लोग बता नहीं पाते किसी को ना ही हम पापा को बता पाते हैं ना ही मम्मी को ना ही घर पे। तो मेरा एक मन किया था कि कोई आए मुझसे पूछे रिकमेंडेशन के बाद सब तो सब लोग बधाइयां दे रहे हैं। कोई आके बैठ के पूछे कितने दर्द झेले हैं तुमने इस राह में। सो जब वो दर्द सुनेगा अगर वो उससे मोटिवेट दो दो चीज हो सकती

23:17 हैं या तो डीमोटिवेट हो जाएगा कि यार मैं नहीं कर पाऊंगा या फिर मोटिवेट हो जाएगा कि अगर ये हिंदी मीडियम का बच्चा कर सकता है तो मैं क्यों नहीं कर सकता मैंने तो शुरुआत इंग्लिश मीडियम से करी है मेरी परसेंटेज कम थी उसकी ज्यादा है तो मैं क्यों नहीं कर सकता तो वो अगर मोटिवेशन बच्चे के अंदर आ जाए फिर से बात आती है लक्ष्य की अगर उसने लक्ष्य बना लिया तो बिल्कुल पा जाएगा सर तो वो मेरे अंदर एक सवाल था कि कोई आके पूछे लेकिन अभी तक तो कोई आया नहीं नहीं नहीं बताओ क्या अपने दर्द है बताओ बताओ बताओ अरे सर दर्द बस दर्द को कहां दर्द होता है? दुनिया ऐसे ही सोचती है इसलिए कोई तुम्हारे दर्द नहीं जानना चाहता। पर यहां तुम बिल्कुल बताओ खुल के बताओ। सर दर्द बस ज्यादा कोई दर्द नहीं था। ये था मैं अपने घर में अकेला हूं। तो लोग मेरे से कहते थे कि तू अकेला है क्या ही कर लेगा? मैं किसी को कुछ समझाता हूं। मतलब किसी से कुछ होता है तो वो कहते थे मेरे पांच

24:03 लड़के हैं। तू अकेला है तू क्या कर लेगा? हम्म। सो लाइक दैट दिस इज द बेस्ट रिप्लाई टू ऑल ऑफ़ देम। कि भाई मैं कर गया। ग्रोथ कैन हील एवरीथिंग। यस सर। कि मैं कर गया। और ये मोटिवेशन भी हो सकता है। यस सर उसके बाद मैं मेरे सिलेक्शन के बाद मेरे गांव में जितने भी बच्चे जो घूम रहे थे वो सब मेहनत पे लग गए। लाइब्रेरी जाना स्टार्ट कर दिया और बिल्कुल। मैं तो उनसे ये भी कहता हूं इफ यू हैव एनी डाउट कम टू मी। मेरे नोट्स रखे हैं। जबकि मैं अभी आईएमए की प्रिपरेशन कर रहा हूं। मेरे नोट्स रखे हैं वो लेके जाओ। तो वो जो चीज है ना सपोर्ट वाली वो मैं कभी नहीं छोडूंगा। अगर मेरे को कहीं से सपोर्ट मिला है तो मैं भी सपोर्ट देने के लिए तैयार हूं। बहुत बढ़िया। बहुत बढ़िया। वाह यार लिटरली। तो बेटा आज आप सभी लोगों

24:48 को अभिलाषा और अक्षित की जर्नी से बहुत सारा कुछ सीखने को मिला होगा। आपका भी तरीका अपना होगा। कुछ दोनों से आपने जाना होगा। ये ऐसे ही स्टूडेंट्स थे जो हमसे क्लास में पढ़ते थे। जैसे आज आप पढ़ते हो और आज यहां पर है कुछ मेहनत, कुछ लक्ष्य, कुछ कंसिस्टेंसी, कुछ पेशेंस इन सारी चीजों को इन्होंने अपनाया और आज ये हमारे साथ में हैं। अच्छा एक चीज और है। एक मेरा सवाल है कि आपका अब देखो जब हम सीडीएस के लिए तैयारी करते हैं, तो फिजिकली भी फिट होना बहुत जरूरी होता है। तो जहां आप अपनी पढ़ाई के लिए टाइम निकालते हैं, प्रैक्टिस के लिए टाइम निकालते हैं, वहां कुछ एक फिजिकल एक्सरसाइजज़ का भी आपने रूटीन बनाया होगा। तो मैं आप दोनों से पूछना चाहता हूं अभिलाषा कि क्या करते थे तुम फिजिकली फिट रहने के लिए आई जस्ट वांट टू नो

25:34 सर यूजुअली मैं स्पोर्ट्स में इन्वॉल्व थी पर जैसा मैंने बताया टू थ्री मंथ्स मैंने पूरा कितने स्पोर्ट्स खेलते थे आप सर लॉन टेनिस बैडमिंटन स्विमिंग हॉर्स राइडिंग ओह माय गॉडनेस रनिंग आई आल्सो डू रनिंग तो सर पहले थी पर मैंने टू थ्री मंथ्स सब पॉज कर दिया था मैंने बोला था रिटन ही क्लियर नहीं होगा तो कोई फायदा नहीं है तो मैंने जैसा तीन-4 घंटे सोके पूरा अपना सिलेबस कंप्लीट किया वही प्रैक्टिस तो टू थ्री मंथ्स के लिए सब पॉज था। उसके बाद जैसे ही मेरा रिटर्न क्लियर हुआ, मैंने वापस अपनी हॉर्स राइडिंग एंड अपनी रनिंग स्टार्ट कर दी थी। जिम मैंने स्टार्ट नहीं किया था क्योंकि मुझे लगा था जिम वेट कर सकता है। उस उससे उससे ज्यादाेंट बाकी चीजें डेवलप करना है जैसे आपकी जीके एंड करंट अफेयर्स और बहुत सारे एस्पेक्ट्स होते हैं। तो रनिंग पर मैंने कंटिन्यू रखी थी। रनिंग ने मुझे हेल्प भी किया। मैंने अपने इंडिविजुअल ऑब्सकल्स में एट किए थे जो यूजुअली गर्ल्स में काफी हाई नंबर होता

26:19 है। तो वही उसके बस मैं रनिंग ही करी। मैंने ज्यादा कुछ और नहीं किया। मुझसे इंटरव्यू इंटरव्यूइंग ऑफिसर ने भी क्वेश्चन पूछा था कि यू डोंट गो टू द जिम? तो मैंने बोला सर आई डोंट। ओके। यस सर। ओके। सर कहीं ना कहीं रहा था मेरे साथ तो मैं किसी स्पोर्ट्समैन नहीं था शुरू से। अच्छा। तो बस वो गांव में क्रिकेट खेल लेते थे। लेकिन जब मुझे पता चला कि एसएसबी में ये ये ऑब्सकल होते हैं। मैं पहले से एनडीए में दे के आया था। तो पता था। तो सर फिर मैंने उनको खुद से करने का आईडिया बनाया। लाइक रस्सी बांध दी मंकी क्रॉलिंग कर रहा हूं उस पे। ठीक है। पेड़ पे चढ़ने की। गांव से रहता हूं तो पेड़ पे चढ़ने की बहुत आदत है। ठीक है? एंड आई नो दैट द स्ट्रेंथ ऑफ़ माय शोल्डर एंड हैंड। तो उसके बेस पे रस्सी चढ़ने की बात सर मैं बताऊं। तो जब मैं पहली बार चढ़ा था मेरी ग्रिप नहीं बनी थी। तो मैं रोप क्लाइंबिंग स्ट्रेट रोप क्लाइंबिंग। तो तो जब मैं फिसल के आया था तो मेरे ये

27:06 सब हाथ खून से मतलब हो गए थे रस्सी भी। तब मेरे को ये नहीं पता था कि मेरे को ऐसे पकड़ के आना है। और वो मैं एक साथ आ गया था। तो वहां से कहीं ना कहीं मैंने स्ट्रगल किया था अपने खुद से। एंड उसके बाद फिर मैं फिजिकल में बहुत अच्छा हो गया था। अभी मैं लाइक जब मेरिट आ गई उसके बाद तो फिर कंटीन्यूअसली रनिंग कर ही रहा हूं। बट लाइक जब मैं यहां पे आता था एचसीएल में जॉब करने तो हमारे एचसीएल में जिम भी है तो मैं सर रनिंग करने के लिए जाता था उस पे। सर एक पॉइंट मैं बोलना चाहूंगी। सर जैसे अक्षत ने बताया कि यूजुअली मेल्स अपना एक्सप्रेस नहीं कर पाते उनको जो दर्द होता है। एक दर्द फीमेल डिफेंस एस्पिरेंट्स को भी होता है। जब न्यूज़ आई थी कि आईएमए फीमेल्स के लिए खुलने वाला है। तब ऐसे बहुत सारी न्यूज़ आती थी कि कहीं कमांड के लिए खोल दे कहीं। तो हम मैं यूजुअली जाकर देखती थी उस कमेंट सेक्शन में क्या लिखा

27:52 रहता है। तो यूजुअली लिखा रहता था। अरे हमारी आर्मी वीक हो जाएगी। ये हो मतलब हमारी आर्मी उतनी कैपेबल नहीं रहेगी फीमेल ऑफिसर्स को कमांड रोल देने से या उनको ज्यादा रिक्रूट करने से फीमेल्स को अदर रैंक्स में रिक्रूट करने से ऐसा ऐसा परसेप्शन पता नहीं क्यों है शायद वो लोग खुद ही कैपेबल नहीं है इसलिए वो शायद ऐसे स्टेटमेंट्स बनाते हैं पर यूजुअली वो उन स्ट उन उन जो वो कमेंट्स होते हैं उनका इफेक्ट बहुत होता है किसी भी फीमेल एस्पिरेंट को ही वो अगर वो प्रिपेयर कर रही है उसे लगेगा कि क्या मैं सही फील्ड में जा रही हूं क्या पता मेरे को वहां जाके ऐसे ही ट्रीटमेंट मिले क्या अब मैं सच में कैपेबल हूं या मुझे ऐसे ही नारी शक्ति का वो सिंबल पहना के इसलिए मुझे रिक्रूट करा जा रहा है। पर जितनी भी रेकमेंडेड गर्ल फीमेल कैंडिडेट्स हैं वो सारी डिर्विंग है। बहुत ज्यादा डिर्विंग है और उन्होंने बहुत मेहनत करी

28:40 है। वो शायद रनिंग में अच्छा नहीं भाग पाती पर उन्होंने बहुत मेहनत करी है। उन्होंने जिम में मेहनत करी है और वो अब कैपेबल है और सबसे ज्यादा भरोसा आपको अपनी आर्मी पे होना चाहिए। अपने देश पे होना चाहिए। वो किसी भी ऐसे इंसान को ऑफिसर बनने ही नहीं देगी जो लायक नहीं होगा। तो सर मैं इनका रिप्लाई देना चाहूंगा। इन्होंने जैसा कहा यह है कि हमसे ज्यादा स्ट्रगल लड़कियों को है। हमारी स्क्रीनिंग इन का जो मतलब रिपोर्टिंग होती है 60 70 80 100 इनकी 300 400 तक जाती है। तो कहने का मतलब है कि जैसे हमारी कॉन्फ्रेंस है वैसे तो इनकी स्क्रीनिंग टेस्ट है कि वहां से केवल वो क्रीम निकालते हैं। अब आपके पे जो वीडियो पे जो कमेंट आते हैं किसी के भी तो वो वो लोग कमेंट करते हैं जिनकी मेंटालिटी ही छोटी है। ओपन कहना चाहूंगा। जिनकी मेंटालिटी छोटी है वही कमेंट करेंगे। या

29:25 तो आप लगना नहीं चाहते या आप देश की सेवा कर नहीं सकते या फिर आपने कल्पना चावला का नाम नहीं सुना है या फिर आपने किरण बेदी मुंबई की किरण बेदी का नाम नहीं सुना है। सही बात है। एक्चुअली ये हमारी जो इकॉनमी है जो हमारी पॉपुलेशन है वो बहुत ज्यादा डवर्सिफाई है। और अभी भी हमें बहुत काम करना है रूढ़िवाद पे। आप उसकी शक्ति देख ही नहीं पाओगे और जब हम उसे पर देते हैं तो वो अपनी शक्ति दिखाती है जैसे अभिनाश ने हॉर्स राइडिंग करके दिखाई रनिंग करके दिखाई सब करके दिखाया तो उसमें कहीं ना कहीं अगर औरत नहीं कर पा रही है तो उसके लिए भी मर्द इससे जिम्मेदार है यार अगर आपने किसी औरत को चांस दिया तो आप वो आपसे भी आके निकल जाएगी आपको ये डर है इसलिए आप नहीं देना चाहते उसका चांस

30:12 बिल्कुल ये है कहीं ना कहीं कि हम किसी को फॉलो तो करना किसी को मानते तो हैं बट उसकी बात को फॉलो नहीं करते ठीक है लोग किसी भी साधु संत उसको मानेंगे तो बट वो जो कह रहा है कि आप सत्य का मार्ग अपनाओ वो नहीं अपनाएंगे। अब मैं ऐसे कहना चाहूंगा अगर हम हिंदू धर्म को ही देखें तो उसमें नारी को भगवान से आगे रखा गया है। आप कोई सा भी देख लीजिए राधा कृष्ण सीताराम लक्ष्मीारायण गौरी गौरी शंकर तो जो लेडीज है उसकी वैल्यू सनातन धर्म में पहले ही है। उनको आगे रखा गया है कि वो हम जानते हैं कि उनकी क्या कैपेबिलिटी है। बहुत सारे ऐसे सीरियल्स बने हुए हैं रामायण के ऊपर कि मां काली ने शिव शंकर के ऊपर पैर रख दिया था। तो वो आधी शक्ति है। अगर उसकी शक्ति को नहीं पहचान पा रहे तो फिर ये गलत है। ये फिर ये रूढ़ी बातता बहुत बेकार हो जाएगी।

30:58 सही बात है। और दोनों का सिलेक्शन क्राइटेरिया सेम है। रिटन एग्जाम एक तरीके से देते हैं। एसएसबी इवन ज्यादा रिग्रेस उनका होता है। उसके बाद भी अगर कोई कमेंट कर रहा है ना बेटा तो वो कमेंट वो इंसान कर रहा है जो रिटन भी नहीं निकाल पा रहा। या फिर जो फॉर्म तक भरने में जिसके हाथ कांपते हैं वो लोग हैं तो उनसे कभी ऐसा वो नहीं होना डीमोटिवेट और ना ही हमारे देश की वो बेटियां डीमोटिवेट होती जो आज तुम्हारी तरह सर्व कर रही है। कहने वाले करते रहेंगे बाकी तो हमारा जीवन आगे ऐसे ही बढ़ता रहेगा। यस। ठीक है? सो रेव अप करें। बहुत बढ़िया लगा आप लोगों से बात करके और ये एक जबरदस्त एक्सपीरियंस था कि मैं मतलब अक्षय से मिला और अक्षय इस हाइली मोटिवेटेड। इतना मोटिवेटेड बच्चा है ये कि इसने मेरे को मोटिवेट कर दिया यार। कितनी बार ऐसा होता

31:44 है क्लास लेने का मन नहीं होता है या हम भी थोड़े हल्के बीमार होते हैं आज नहीं लेना। लेकिन अब लग रहा है यार ये बच्चे अगर ऐसे बच्चे को हम पढ़ा रहे हैं तो फिर हमें जाना चाहिए वाकई में। और अभिलाषा से भी बहुत अभिलाषा की जो मुझे बहुत बढ़िया बात लगी। अभिलाषा इस वैरी टाइट। इतनी सारी चीजें करती है कि वो हॉर्स राइडिंग कर रही है। स्विमिंग भी कर रही है, रनिंग भी कर रही है। जिम उसका मन नहीं है जाने का। ठीक है? नहीं तो वो जिम भी जा सकते हैं। और 14थ रैंक यहां पे लेकर आई है सीडीएस में। तो मतलब दीज़ गाइस आर रियली एक्स्ट्राऑर्डिनरी जो हम लोग बोलते हैं ना कि लाखों में एक तो लाखों बच्चे फॉर्म भरते हैं। उसमें से बहुत थोड़े से होते हैं जो रिटन क्वालीफाई कर पाते हैं और उसमें से भी बहुत ही थोड़े से होते हैं जो एसएससी क्वालीफाई कर पाते हैं और उनमें से भी थोड़े से जो यहां बैठ पाते हैं। तो हट्स ऑफ टू ऑल ऑफ यू। टू बोथ ऑफ यू।

32:31 ठीक है? तो मैं तो बस इतना ही कहना चाहूंगा। एंड मेनी कांग्रेचुलेशन टू बोथ ऑफ यू। और सारे बच्चों को भी उन्होंने अपनी जर्नी बताई। अब इनसे आप क्या इंस्पिरेशन ले सकते हैं? ये आपके हाथ में बेटा। बट हां फिर भी एज अ टीचर एज अ लीडर्स हम सभी लोग आपको यही बात कहना चाहेंगे। कंसिस्टेंसी रखिए, पेशेंस रखिए। जैसे यह सिलेक्ट हुए, वैसे ही आप सिलेक्ट होंगे। जय हिंद। जय हिंद। जय हिंद।

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