“बड़े दिग्गजों को बर्फ में लगाकर नितिन नबीन को अध्यक्ष बनाने के मायने क्या हैं ?”的完整文字稿。点击时间戳即可从该位置打开视频。想要其他视频的字幕?试试 YouTube 字幕提取工具。
0:00 नमस्कार दोस्तों। दोस्तों बीजेपी और आरएसएस के बीच तनातनी की तमाम खबरों के बीच अब बीजेपी ने अपने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान कर दिया है। नितिन नवीन भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अब सवाल यह उठ रहा है कि इसके पहले बीजेपी के सीनियर लीडरशिप के जो नाम चर्चा में थे जैसे शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, वसुंधरा राजे, नितिन गडकरी ऐसे जो तमाम नाम थे अब क्या नितिन नवीन का प्रयोग करके इन तमाम सीनियर लीडरशिप को साइड करने का प्रयास किया गया है। और दूसरी बात कि नितिन नवीन के नाम पर पहली मोहर किसकी थी? संघ की या गुजरात लॉबी की? इस पर बात करने के लिए हमारे साथ वरिष्ठ पत्रकार केपी
0:46 मलिक सर हैं। सर आपको बहुत-बहुत स्वागत है। धन्यवाद प्रज्ञा जी। सर तमाम चर्चाओं के बाद इतनी सारी कहानियों के बाद अब अचानक से भाजपा ने अपने कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर दिया है। नितिन नवीन अब भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष है। क्या कहेंगे इस पर आप? देखिए प्रज्ञा जी बहुत सारी चीजें हैं भारतीय जनता पार्टी में कहने के लिए। कहां जो है भूपेंद्र सिंह यादव चले गए, कहां धर्मेंद्र प्रधान चले गए। कहां खट्टर साहब चले गए और कहां हमारे और आपके जो पसंदीदा थे या जिनका नाम हमने खूब चलाया था संजय जोशी चले गए हम तो सहमति कहीं ना कहीं ऐसे नाम पर बनी है कि ना आपकी ना हमारी और बीच का एक रास्ता निकाल लिया जाए।
1:32 यहां पर मुझे आरएसएस मजबूत होती नजर आ रही है और यह पसंद जो है अमित शाह की है। एक बहुत बड़ा कोई समझौता हुआ है जिसके तहत यह निर्णय लिया गया है। और यह निर्णय इसलिए लिया गया है कि आपको भी बहुत सारी चीजें पार्टी में दिखाई देंगी। जिस प्रकार से खटखट खटखट ये चीजें हो रही है। अभी बहुत सारी चीजें आपको भारतीय जनता पार्टी में बदलाव दिखाई देंगे। भारतीय जनता पार्टी अपनी अगली पंक्ति तैयार कर रही है। देखिए भारतीय जनता पार्टी का काम बिना हिंदुत्व के चलता नहीं है। आज भारतीय जनता पार्टी को हिंदुत्व का एक चेहरा चाहिए मजबूत। और धीरे-धीरे वह अगली पंक्ति तैयार करने के लिए अगली लाइन तैयार करने के लिए संघ एक नया प्रयोग कर रहा है। नई तैयारियां कर
2:19 रहा है। उसी के तहत ये सारी रणनीति चल रही है। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी को अगर उसकी रणनीति के नाम के ऐलान से मोदी के बाद शाह वाली जो थ्योरी है उस पर मोहर लगती हुई दिख रही है। देखिए इसमें सारी कवायद अगर हम देखते हैं तो कहीं ना कहीं अमित शाह अपने हाथ में तमाम कंट्रोल धीरे-धीरे लेते हुए दिखाई दे रहे हैं और वो प्रधानमंत्री मोदी को भी यह जताना चाहते हैं कि मेरे हाथ में ताकत है और इसलिए आप भी थोड़ा कंट्रोल में रहिए क्योंकि अगर आप देखते हैं प्रधानमंत्री कार्यालय में जिस प्रकार से चाहे हरेंद्र जोशी को हटाने की बात हो चाहे जो इसके प्रसार भारती के चेयरमैन थे नवनीत
3:06 सहगल उनको हटाने की बात हो चाहे चाहे पीएमओ को कमजोर करने की बात हो तो कम से कम एक झटका एक मैसेज देने का काम अमित शाह ने किया है और अमित शाह आज बहुत मजबूत स्थिति में है और कहीं ना कहीं आरएसएस भी उनको एक सपोर्ट कर रही है या आरएसएस उनके साथ थोड़ा सा तल्खी कम करती हुई दिखाई दे रही है। जिस प्रकार से हम लगातार कह रहे थे कि गुजरात लोबी में और भारतीय जनता पार्टी के और उसके संघ के बीच बहुत ज्यादा तनातनी चल रही है तो वह तनातनी नहीं है क्योंकि ऑटोमेटिकली गुजरात लोबी सरेंडर करती हुई नजर आ रही है संघ के सामने और यह संघ संघ के हाथ में चीजें आ रही है और संघ जो है तालमेल करके कहीं ना कहीं अमित शाह
3:51 से चल रहे हैं क्योंकि इसमें मोदी जी को हटाना है। मोदी जी को सेफ पैसेज देना है। अब मोदी जी कैसे हटे क्या करेंगे यह रणनीति चल रही है और इसी के मुतालिक आप बहुत सारे बदलाव देखेंगे अगर आप नितिन नवीन की बात करते हैं तो नितिन नवीन बहुत साधारण बहुत छोटे पार्टी के कार्यकर्ता है वो एकमात्र विधायक है अगर आप बिहार पिछले दिनों बिहार में जिक्र करें चुनाव के दौरान हमारी इतनी सारी डिबेट हुई है इतनी सारी चीजें हुई है कहीं आपने नितिन नवीन का नाम नहीं सुना है आज मीडिया ने बड़े-बड़े शगूफे बड़े-बड़े लेख उनके बारे में लिखे हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में प्रभारी के रूप में बहुत बड़ा काम किया। उन्होंने मणिपुर में बहुत बड़ा काम किया। अब मुझे यह समझ में नहीं आता जब उन्होंने बहुत बड़े-बड़े काम किए
4:37 थे तब क्यों नहीं उनका नाम लिखा गया। आज वो कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं भारतीय जनता पार्टी के। इसीलिए उसके उनके नाम पे भोपु मीडिया लगा हुआ है भोपू बजाने में। भारतीय जनता पार्टी के लोगों को ही उनके विषय में नहीं पता है। और दूसरी बात जो भारतीय जनता पार्टी अक्सर कहती है कि परिवारवाद परिवारवाद करती है। तो परिवारवाद का आरोप तो नितिन नवीन पे भी है। उनके फादर पांच से सात बार के विधायक रहे। उनकी उनके उनके स्वर्गवास के बाद नितिन नवीन को टिकट दिया गया। वो विधायक रहे। तो वह तो परिवारवाद से ही चल रहे हैं। उनका अपना तो कहीं हमें कुछ बिहार में दिखाई देता नहीं है। वो जिस समाज से को मिर्ची लग जाती है। इसलिए तो यह सवाल ही नहीं है। जी दूसरी बात दूसरी बात है। दूसरी बात ये
5:24 है प्रज्ञा कि जिस समाज से वो आते हैं कास समाज से आते हैं उसकी तो मात्र एक सवास की आबादी है बिहार में। तो वो कौन सा गणित वहां पर बना लेंगे? मैं ये मीडिया की बात कर रहा हूं कि भोपु मीडिया जिस तरह से लग जाता है और वो कह रहे हैं कि बहुत ज्यादा सोशल इंजीनियरिंग बिहार में हो जाएगी। बहुत बड़े क्रांतिकारी नेता है बिहार पलट जाएगा। वो क्या 1.5% से पलट लेंगे? 20% पे यादव नहीं पलट पाए। 20% पर कुर्मी नहीं पलट पा रहे हैं। ये 1% भी पलटेंगे। मलिक सर यही सवाल है कि क्या भाजपा आगड़ों की राजनीति करने के मूड में है या फिर बंगाल के बारे में सोच रही है क्योंकि बंगाल में कुछ 27 लाख लाख का समाज के लोग हैं वोटर्स हैं या फिर अब भाजपा को सिर्फ यस मैन ही
6:09 चाहिए क्योंकि नितिन नवीन बहुत लो प्रोफाइल के नेता है सिर्फ बिहार के विधायक हैं सह प्रभारी वो सब तो अलग कहानियां है लेकिन वो उस कद में नहीं है कि वो मोदी शाह की मर्जी के बिना कोई फैसला ले पाए वो बॉस के यस मैन ही बनकर रहेंगे ऐसा ऐसा लग रहा है तो आपको क्या लग रहा है ये सिर्फ यस मैन जैसा एक राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहते थे बीजेपी के लोग गुजरात लॉबी खासतौर पर या फिर इसके पीछे कोई और रणनीति है जो दिख ही नहीं रही है समझ में ही नहीं आ रही नहीं नहीं ऐसा नहीं है कि देखिए मैं जैसा कि मैंने कहा कि आज बहुत स्ट्रांग अमित शाह दिखाई देते हैं और उन्हीं की पसंद ये है और इसका मतलब यह है कि पसंद कोई ऐसा नहीं है कि यह बहुत बड़े रणनीतिकार हैं और पार्टी को बहुत आगे ले गए हैं और भारतीय जनता पार्टी में लगातार इनके नाम की चर्चा होती रहती देती है। ऐसा कुछ नहीं है। अब
6:55 आप देखिए क्या जैसे राजस्थान में सीएम बनाए गए थे। बहुत बड़े रणनीतिकार थे क्या वो शर्मा जी तो उनको सीएम बना दिया गया। तो इसका सीधा सीधा मतलब है कि इनको बनाने का मतलब है कि कंट्रोल अपने हाथ में रहे और यह सिर्फ रबल स्टैंप के तौर पर काम कर सके और सिर्फ नाम के अध्यक्ष हो। बाकी काम तो हमें सब करना है और उसके लिए भी इनको कठिन परीक्षा से गुजरना होगा। इनको कम से कम एक साल तक कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में काम करना होगा और जब यह अपनी आस्था जता देंगे और बिल्कुल यह हो जाएगा कि यह बिल्कुल हमारे रबर स्टैंप है और इनमें कोई भी इधर-उधर की कोई बात नहीं है तब इनको अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। उससे पहले जरूरी नहीं है कि कह दिया या बना दिया गया है और अब ये राष्ट्रीय अध्यक्ष हो ही गए हैं। आप नड्डा की बात अगर करेंगे नड्डा को
7:43 भी लगभग एक साल तक कार्यकारी अध्यक्ष रखा गया था और जब पूरी आस्था नड्डा जी ने वहां पर जता दी थी और बिल्कुल रबर स्टैंप से भी पढ़ के वो बड़े वाली रबर स्टैंप बन गए थे तब उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। तो इसी तरह की परीक्षा इनको देनी होगी और जब यह परीक्षा में पास होंगे तब इनको राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा। ये मैं निश्चित तौर पर कह सकता हूं। तो सर इसका देखिए टॉप लीडरशिप में बहुत सीनियर लीडर्स थे। मनोहर लाल खट्टर, वसुंधरा राजे, संजय जोशी इन सबका नाम अचानक से चर्चा से गायब हो गया और क्या अब ये समझा जाए कि जो टॉप लीडरशिप है अब उसको साइड किया जा रहा है। नहीं प्रज्ञा जी अब आप ये कह सकते हैं निश्चित तौर पे के जो मार्गदर्शक मंडल है
8:28 वहां पे कुछ सीटें बढ़ाई जा रही है। जैसे लोकसभा में सीटें बढ़ाई गई थी। बड़ी लोकसभा बनाई गई थी जो मार्गदर्शक मंडल का ऑफिस है मार्गदर्शक मंडल की जगह उसकी सीटें बढ़ाई जा रही है क्योंकि वहां पर बड़ी संख्या होने वाली है वहां पर संख्या बढ़ने वाली है तो कई लोग वहां पे जाने वाले हैं भारतीय जनता पार्टी इतने बड़े-बड़े नेता अगर मार्गदर्शक मंडल में चले जाएंगे तो फिर बीजेपी के खाटी नेता कहां रहेंगे खाटी जो संघ के चले इनका क्या होगा इनका तो राजनीतिक पतन हो जाएगा ऐसे प्रज्ञा जी भारतीय जनता पार्टी में कोई खाटी नेता है ही दो खांटी नेता है जिनमें एक का नाम नरेंद्र मोदी और दूसरे का नाम अमित शाह है। इसके बाद कोई खाटी नहीं है। सब फांटी नेता है। तो वो जो फांटी नेता है वो कभी भी मार्गदर्शक मंडल में जा सकते हैं। कभी
9:14 भी उनको धकेला जा सकता है। वो चू तक नहीं कर पाएंगे। तो मुझे कोई भारतीय जनता पार्टी में उस तरह का कोई खाटी नेता नहीं दिखाई देता कि अगर आप उसको मार्गदर्शक मंडल में भेजेंगे और वह बहुत ज्यादा विरोध करेगा या कुछ मामला कर देगा। मुझे ऐसा कोई नेता भारतीय जनता पार्टी में दिखाई नहीं देता। ऐसा लगता है कि सब जैसे इनके रहमोकरम पे हैं। तो आपको यह देखना होगा कि अगले एक से डेढ़ महीने दो महीने के अंदर मार्गदर्शक मंडल में कौन-कौन से नेता जाते हैं। तो उसकी तैयारी है। इसलिए नई एक पंक्ति संघ तैयार कर रहा है। नई एक लाइन तैयार संघ कर रहा है। उसमें भारतीय जनता पार्टी के कुछ नए लोग लाए जाएंगे। कुछ नए लोगों को आगे बढ़ाया जाएगा। कुछ प्रदेश से सेंट्रल में भेजे जाएंगे और कुछ लोगों को
10:00 सेंट्रल से प्रदेशों में बुलाया जाएगा। यह बदलाव अगले एक से डेढ़ महीने के अंदर आप दिल्ली में देखेंगे और भारतीय जनता पार्टी में तमाम तरफ से बहुत ज्यादा उठापटक चल रही है। मोदी जी के ऊपर कई तरह के अलग-अलग दबाव है। चाहे वो विदेशों के दबाव हो, चाहे वो देश के दबाव हो, चाहे वो जो अपने सियासी दल है एनडीए में उनके दबाव हो, बहुत सारी चीजों के बीच मोदी जी घिरे हुए हैं। गुना भाग चल रहा है। अब ये तस्वीर कहां पे जाके नहीं बनेगी? क्या-क्या इसमें होगा? पुरानी तस्वीर में जो लोग हैं वो कौन-कौन हटे जाएंगे, कौन-कौन बदले जाएंगे, बहुत सारी चीजें होंगी। क्योंकि आने वाले समय में आप यह भी देख सकते हैं कि जो दो क्रांतिकारी मंत्री हैं भारतीय जनता पार्टी में उनका क्या होगा? चाहे वो हरदीप
10:45 पुरी हो, चाहे वो विदेश मंत्री हो इस पर क्या निर्णय भारतीय जनता पार्टी लेने जा रही है। क्या उन पर भी बदलाव होगा? बहुत सारी चीजें आपको आने वाले समय में देखने को मिलेंग क्योंकि संघ को मैंने पहले भी आपके चैनल पर कहा है कि संघ भी नया घोड़ा तैयार करता है। नया सेनापति तैयार करता है कि अगर युद्ध में जो आज की डेट में सेनापति है, जो आज की डेट में घोड़ा है, उसको अगर कोई नुकसान होता है, घोड़ा घायल होता है, सेनापति दागी होता है, तो उस दागी को हटा के एक नए घोड़े को और नए सेनापति को लाया जाए। उसकी तैयारी संघ पहले ही करके रखता है और उसके तमाम उदाहरण संघ में आपको देखने को मिल जाएंगे। अगर आप तीसरी पीढ़ी से बात करेंगे आडवाणी जी को किस प्रकार से हटाया गया। आडवाणी जी ने किसको हटाया था ये भी आपको याद होगा।
11:32 थोड़ी पुरानी बात है। तब हम और आप जर्नलिस्ट भी नहीं होंगे तब की बात है। कई सारे ऐसे तमाम नेता हुआ करते थे। दीनदयाल उपाध्याय जिनकी ये बात करते हैं। कैसे उनको किनारे किया गया था। उसके अलावा और दो तीन नाम है जो मुझे ध्यान में नहीं आ रहे। उनको किस प्रकार किनारे करके सत्ता की कमान और पार्टी की कमान आडवाणी जी और वाजपेयी जी को दी गई थी। फिर वाजपेय जी की तो स्वास्थ्य खराब हो गया है। उनकी डेथ हो गई। आडवाणी जी और मुरली मनोहर जोशी तो आज तक भी जिंदा है। तो लेकिन उनको किस तरह से किनारे करके मोदी जी को आगे लाया गया। तो अब मोदी जी को किनारे करके किसको आगे लाया जाएगा? वो तैयारी चल रही है। अब उसमें कौन-कौन लोग होंगे? कैसे कैसे नई लाइन बनेगी? उसकी रणनीति तय अभी संघ कर रहा है और उसी की सब ये तैयारियां है। अभी हम
12:18 थोड़ा अर्ली स्टेज में है। अभी बहुत सारी चीजें आनी बाकी है तो और जो बहुत जल्द आएंगी उसमें कोई बहुत देर नहीं है। जी अच्छा नितिन नबीन को ही अगर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना था तो इतना टाइम क्यों लग रहा था? नितिन नबीन कायस्त समाज से आते हैं या तो फिर कोई एक बहुत बड़ी रणनीति इसके पीछे हो। मामला फंसा हुआ था संघ और बीजेपी के बीच में। लेकिन अब नितिन नवीन का नाम जब सामने आया तो ऐसा लग रहा है कि वो सारे खांचों में बिल्कुल फिट बैठ रहे हैं। इतना टाइम क्यों लगा फिर क्या लगता है? देखिए प्रज्ञा जी बात यह है कि जैसा कि मैंने पहले कहा आपको कि आरएसएस चाहता था संजय जोशी को और गुजरात लोग भी चाहती थी जो तमाम इनके चार पांच लोग थे जिनके नाम मैंने अभी गिनाए थे उसमें वो खट्टर
13:04 साहब का नाम भी लेते थे भूपेंद्र यादव का नाम भी लेते थे धर्मेंद्र प्रधान का नाम भी था और कई लोगों का नाम था लेकिन वो संघ की पसंद के लोग नहीं थे संघ उनको नहीं चाहता था तो इसलिए फिर बीच का एक ऐसा रास्ता निकाला गया और परिस्थितियां भी बद बदली है। परिस्थितियां एकाएक जो बदली है पिछले एक महीने में उसके उसका भी बड़ा एक योगदान है नए राष्ट्रीय अध्यक्ष में ऐसा नहीं है। और इसमें एक छोटा सा मैं एग्जांपल देता हूं। मुझे नहीं पता यहां कितना फिट बैठेगा वो क्योंकि लगातार कवायद चल रही थी जब ये नया प्रधानमंत्री चुनना था और ये तमाम जो है विपक्ष के नेता कांग्रेस के खिलाफ सरकार बनाना चाह रहे थे। उसमें आंध्र भवन में एक मीटिंग हुई थी। हम लोग भी ऊपर उसमें बालकोनी में बैठे हुए नीचे मीटिंग चल रही थी। काफी देर तक
13:49 मीटिंग चल रही थी और उसमें लगभग लगभग मुलायम सिंह का नाम फाइनल हो गया था प्रधानमंत्री के लिए। लेकिन पता नहीं लालू यादव के दिमाग में आया या किसी ने उनके कान में कहा कि अगर यादव मुलायम सिंह यादव बन गए तो आपकी राजनीति बहुत कमजोर हो जाएगी लालू जी और आपका नंबर कभी प्रधानमंत्री में नहीं आएगा। तो इसलिए लालू यादव खड़े और उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि गधा घोड़ा कोई बन जाए मुलायम सिंह यादव पीएम नहीं बनेंगे और इसमें कहते हैं कि वहां पर वो देवगोड़ा जी खड़े हो गए और उन्होंने कहा थैंक यू थैंक यू और देवगोड़ा जी के नाम का जो है अनाउंस हो गया तो लालू जी पे भी विरोध हो गया और मुलायम सिंह पे भी विरोध हो गया और वहां पर लॉटरी खुल गई देवगोड़ा जी की तो ये इसको आप इस तरह से कह सकते हैं कि
14:36 संजय जोशी जी भी जाते रहे और भूपेंद्र यादव और बाकी लोग भी जाते रहे और लॉटरी खुल गई नितिन नवीन की। तो यह उस तरह से हुआ है। नितिन नवीन को तो खुद नहीं पता था कि वो बेचारे राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे और वो बिहार छोड़कर दिल्ली जाना होगा उनको। वो कोई इस स्तर के राष्ट्रीय स्तर के नेता नहीं है वो। और वो इस चीज को एक्सेप्ट भी करते हैं तो उनको भी पता है कि वो सिर्फ रबर स्टैंप है और कितने दिन के लिए है क्या है उनको भी नहीं पता इस बात का आप क्या निश्चित तौर पे आप क्या आप क्या निश्चित तौर पे कह सकते हैं कि राजस्थान के मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री या हरियाणा के मुख्यमंत्री ये तय कर रहे हैं और यह निश्चित तौर पे मान
15:21 के चल रहे हैं कि हमारा कार्यकाल पूरे 5 साल का होगा। उनको पता है कि कभी भी आपको दिल्ली से फोन आ जाएगा कि जो इस्तीफा लिख के हमने भेज रहे हैं वो इस्तीफा अपने पास पहले ही रख लेते हैं। वो भेज रहे हैं। यह व्यक्ति आएंगे आपसे मिलेंगे जाके इसको गवर्नर को दे आओ। तो ये उनको भी पता है। तो इसलिए जब तक बने हैं अपने बने हुए हैं। हमारा काम कुछ है नहीं। पीछे से चिट्ठी आती है उसको हमें आगे बढ़ा देना। इससे ज्यादा हमारा काम कुछ है नहीं। तो हमें सिर्फ रबर स्टैंप का काम करना है। उसी के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लाया गया है। इससे ज्यादा मुझे कुछ और इसमें रणनीति दिखाई नहीं देती। अच्छा एक थ्योरी और भी है सर कि बगल में बिहार के बगल में ही बंगाल भी है और कहीं ना कहीं बंगाल को साधने के लिए भी नितिन नवीन को बनाया जा सकता है। कहीं उसके पीछे बंगाल तो नहीं है। आपको क्या लगता है?
16:08 नहीं ऐसा कुछ नहीं है प्रज्ञा जी। देखिए वो जमाना चला गया है कि ये बहुत बड़े काय समाज से आते हैं और वो काय समाज वहां पे ये कर देगा। काय समाज खुद ही वोटिंग में बहुत ज्यादा दिलचस्पी नहीं लेता और का आप जितना भी मानेंगे काय समाज या तो बिजनेस में है या फिर नौकरी पेशे का काम करता है। जी और बाकी जो बाकी जो वर्ग है चाहे वो दलित वर्ग हो, पिछड़ा वर्ग हो, चाहे वो कमेरा वर्ग हो, किसान वर्ग हो सब लोग इनसे चिढ़ते हैं। वो कहते हैं कि यह दूसरों का हक खा रहे हैं। यह धनपति हैं। ये दूसरों के साथ सहयोग नहीं करते हैं। तो इस प्रकार का यह राजनीतिक तालमेल कर पाएंगे। मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता। दूसरी बात ये है कि ये बहुत प्रभावी है वहां पे बंगाल में और बहुत ज्यादा प्रभाव डाल देंगे। मैं उस
16:54 बात से भी इत्तेफाक नहीं रखता। ये तो एक डमी है। देख रहे हैं आप जब छत्तीसगढ़ में प्रभाव डाल दिया, जब बिहार में डाल दिया, जब सिक्किम में डाल दिया तो बंगाल में नहीं डालेंगे प्रभाव। आप इतना उनको छोटा नेता समझ रहे हैं क्या? हां मान छोटा तो छत्तीसगढ़ जिताया, बिहार जिताया, बंगाल में जिताएंगे। नहीं नहीं वह तो प्रज्ञा जी मैंने पहले ही आपको कहा था कि नड्डा जी ने तो विश्व रिकॉर्ड बनाया है। उनका तो गिनीज बुक में नाम आ गया है कि अब नड्डा जी ने किस प्रकार से आप सोचिए कि बिहार को भी जीिता दिया। नड्डा जी ने जो कभी दिल्ली में सरकार बना नहीं बना पाए थे वहां भी बनवा दी। हरियाणा जैसे स्टेट में सरकार बनवा दी भारतीय जनता पार्टी की। तो नड्डा जी से बड़ा कौन है? अगर नड्डा जी इतना बड़ा कमाल कर सकते हैं
17:39 तो यह तो उनसे भी आगे जाकर कमाल कर सकते हैं। तो कमाल क्या यही कर रहे हैं? कमाल क्या नड्डा जी ने किया है या किसी और चीज ने कमाल किया है? फिर तो अगर इनहीं को कमाल करना है तो काहे को चुनाव आयोग को लाना? काहे को बाकी मशीनरी का प्रयोग करना? काहे को श्याम दाम दंड भेद करना? काहे को तोते मैना और उनको ईगल को वहां भेजना उनको हटाइए सबको अगर इनहीं को करना है यह सिर्फ डमी है डमी दिखाने के लिए होती है असली खेल कहीं और से होगा ये सब दिखाने के लिए खानापूर्ति करनी थी पद भर गया है अब आप देखिए ना कि कितना मंथन भारतीय जनता पार्टी में हुआ इनके नाम पे कितने इलेक्शन हुए कितने वोट डाले गए कितने लोगों का राय मशवरा हुआ प्रधानमंत्री जी ने संसद दल की मीटिंग दिल्ली में बुलाई सब सब जो है सांसदों को
18:26 डिनर कराया। सबकी राय मशवरा ली। तभी तो इनका नाम निकला है। एक एक सांसद से इनके नाम पर चर्चा हुई है। तभी तो इतने कद्दावर नेता इतने हीरे को निकाल के लाए हैं। ये तो ये भारतीय जनता पार्टी की कार्यप्रणाली है। कहने के लिए तो अब हमें दोष ही देना होगा कि भाई जिस प्रकार से परिवारवाद का ठप्पा लगा हुआ है कांग्रेस पे। कांग्रेस जितनी गिरी हुई पार्टी है और जवाहरलाल नेहरू आज तक पीछा नहीं छोड़ रहे हैं। अब तो हमें सवाल जवाहरलाल नेहरू से पूछना होगा कि उन्होंने क्यों इंदिरा गांधी को बनाया और क्यों बाकी लोग बने क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में तो परिवारवाद है नहीं। भारतीय जनता पार्टी में तो राष्ट्रीय अध्यक्ष देखिए कितने अच्छे से चुना गया। कितने काबिल व्यक्ति को चुना गया। इनकी एजुकेशन देखिए। इनका राजनीतिक तजुर्बा देखिए। इनकी रणनीति देखिए। तभी तो लाया गया इनको। ऐसा हवा में थोड़ी ले आए
19:12 इनको। तो यह चीजें यह चीजें भारतीय जनता पार्टी पर लागू होती है। कांग्रेस पर कुछ नहीं होती। कांग्रेस तो परिवारवाद पार्टी है। अच्छा एक चीज और सर चलिए नितिन नवीन पर तो हम चर्चा कर ही रहे हैं और कई सारे जो राज है वो खुल के सामने आ गए। थैंक्स टू यू। आप एक बात और बताइए कि पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। उनके नाम पर भी चर्चा बड़ी लंबी चली। बहुत सारे नाम थे चर्चाओं में। बहुत सारे नामों को किनारे करके पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया है। पंकज चौधरी एक वो नेता हैं जो योगी आदित्यनाथ की अदावत करते हुए कई बार दिखे हैं। गोरखपुर में भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कई बार बयान दे चुके हैं। तो उनके नाम के ऐलान के पीछे आपको क्या लग रहा है कि सबसे बड़ी क्या चीज थी?
19:59 क्या कारण था? प्रज्ञा जी उनके नाम के पीछे यह था कि बाबा चाहते थे कोई कुर्मी नेता बने और कुर्मी नेता उनकी उसमें कैबिनेट में मिनिस्टर भी है। पहले भी शायद वो अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके नाम पर चाहते थे तो फिर जो है अमित शाह जी ने उनको कहा कि आपको अगर कुर्मी ही चाहिए तो हम बड़े वाला कुर्मी भेज देते हैं दिल्ली से क्योंकि ये तो दिल्ली से एक्सपोर्ट करते हैं ना लखनऊ के लिए। तो उन्होंने दिल्ली से उनको जो है एक्सपोर्ट कर दिया और वहां बाबा के वो इंपोर्ट होकर आ गए और उनको जो है अध्यक्ष बना दिया गया। उनप भी उनप भी गंभीर चर्चा हुई। छ महीने से भारतीय जनता पार्टी मंथन कर रही थी उनप भी। वह भी वह भी लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के व्यक्ति हैं। करीबी अमित शाह के वो भी हैं। तो यह क्या हो रहा है कि दो धड़ों की
20:47 लड़ाई में दो उनकी लड़ाई में एक बीच तीसरे आदमी को बनाया जाता है। लेकिन उससे रबर स्टैंप की गारंटी पहले ले ली जाती है। अब आप जितना भी मर्जी देखिएगा जितना भी मर्जी आप समझिएगा। पंकज चौधरी भी रबर स्टैंप का ही काम करेंगे। देखिए आज उनकी कोई इतनी बड़ी तादाद नहीं है उत्तर प्रदेश में कि वो बदल के रख देंगे। बहुत बड़ा कोई कास्ट कॉम्बिनेशन नहीं है। कोई बहुत बड़े वो भी रणनीतिकार नहीं है। वह अपनी लोकसभा क्षेत्र में ठीक है। काम करते हैं। लोकप्रिय है। जीत के आते हैं। कास्ट कॉम्बिनेशन उनका ठीक है। लेकिन वो पूर्वांचल के बाद कहीं मध्य उत्तर प्रदेश में या पश्चिम उत्तर प्रदेश में या दूसरे किसी क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा कोई इस तरह का दबदबा कोई जलवा है। मुझे तो नहीं लगता। मैं तो उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं। तो बहुत बड़ा काया पलट वो उत्तर
21:34 प्रदेश का कर देंगे। ऐसा कुछ नहीं है। लेकिन एक्चुअली इसका पीडीए चल रहा है थोड़ा सा कास्ट कॉम्बिनेशन को साधने के लिए और अपना जो है थोड़ा सा दबाव बनाने के लिए। ये ये अगर आप एक सेंटेंस में पूछते हैं तो मुझे लगता है कि योगी के ऊपर दबाव बनाने के लिए दिल्ली से इनको भेजा गया है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। क्योंकि आज पूरे भारत में भारतीय जनता पार्टी में सिर्फ एक नेता है जो गुजरात लोबी के कंट्रोल में नहीं आ रहा है। उसका नाम है योगी। तो योगी को कैसे कंट्रोल किया जाए, कैसे दबाव बनाया जाए, उसके सब हथकंडे दिल्ली अपना रहा है। लेकिन आरएसएस का उनके ऊपर जो है छत्रछाया है और आरएसएस उनको ज्यादा कुछ नुकसान होने नहीं दे रहा है। इसलिए एक यह
22:20 है कि चलो जितना किया जा सकता है उतना कर दे। वो प्रदेश अध्यक्ष उनकी पसंद का ना हो। अब प्रदेश अध्यक्ष उनकी पसंद का नहीं होगा। क्या कर लेगा? क्या करेगा? क्या नया कर देगा? वो तो आने वाले समय में आपको पता लग जाएगा। बहुत ज्यादा कुछ काया पलट उत्तर प्रदेश की ये कर देंगे। मुझे इन पर भी थोड़ा संशय है। जी बिल्कुल। चलिए बहुत-बहुत शुक्रिया केपी मलिक सर आपने समय दिया। तो कुल मिलाकर चाहे प्रदेश अध्यक्ष की बात करें और चाहे राष्ट्रीय अध्यक्ष की बात करें। बॉस की हां में हां मिलाने वाले नेता तो हमें दिख रहे हैं। लेकिन अपनी विचारधारा से और अपने विचार से कायाकल्प करने वाले अलटपलट करने वाले नेता फिलहाल ना प्रदेश अध्यक्ष दिखे और ना ही राष्ट्रीय अध्यक्ष दिखे। कुल मिलाकर दोस्तों चर्चा यही करनी थी कि आखिर नितिन नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों बनाया गया और उसके पीछे क्या कारण
23:06 थे विस्तार से हमने समझने की कोशिश करी हम फिर मिलेंगे अगली चर्चा में अभी के लिए इतना ही अगर आपने अभी तक चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब जरूर कर लीजिए क्योंकि ये आपकी बड़ी जिम्मेदारी है आप ही हमारी ताकत है और आपके एक एक अ सब्सक्राइब करने से आप एक-एक सब्सक्राइबर से हम और मजबूत होते हैं हमारा परिवार और भी बढ़ता है तो चैनल को सब्सक्राइब करके ही जाइएगा वीडियो को शेयर कीजिएगा अपनी महत्वपूर्ण राय कमेंट में बताइएगा नमस्कार दोस्तों दोस्तों, जय हिंद।