एक ही तीर से योगी, फड़नवीस, शिवराज सब लग गए किनारे । Navin Kumar

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简要总结

本视频分析了印度人民党(BJP)任命尼廷·纳文为执行主席的背后原因,指出这是莫迪和沙阿巩固权力的策略。主要观点包括:

  • 尼廷·纳文的任命实际上是莫迪-沙阿组合的意志体现,而非 संघ (RSS) 的选择。
  • 此举旨在消除对莫迪之后谁将领导 BJP 的疑问,并确保未来十年内 BJP 仍由莫迪时代的人物掌控。
  • 尼廷·纳文被视为沙阿的忠实追随者,能够完全执行其指令,不会对高层领导构成挑战。
  • 这一任命也反映了 BJP 在党内权力结构中对高种姓和落后种姓的平衡策略。

引言

视频开篇点明,印度人民党(BJP)在莫迪和沙阿的领导下,已经巩固了权力,并开始为未来十年甚至更长时间的政治布局。任命尼廷·纳文为执行主席,是这一战略的重要一步。

尼廷·纳文的意外上位

尼廷·纳文的当选让许多人感到意外,因为他在比哈尔邦的政治影响力有限,甚至不如其他资深领导人。然而,他在选举期间对党的忠诚和承诺引起了莫迪和沙阿的注意。

莫迪-沙阿的权力意志

尽管表面上尼廷·纳文的任命是组织内部的提议,但实际上是莫迪和沙阿意志的体现。 संघ (RSS) 在此事上并没有太多发言权,因为莫迪-沙阿组合已经牢牢掌控了 BJP 的领导权。

沙阿的战略意图

通过任命尼廷·纳文,沙阿成功地压制了党内对他的能力和地位的质疑。他还借此机会表明,他有能力决定党内任何人的职位,并巩固了自己在党内的影响力。

消除“莫迪之后”的疑问

尼廷·纳文的上位,实际上是沙阿在回应党内关于“莫迪之后谁来领导”的疑问。通过提拔一个忠于自己的人,沙阿暗示 BJP 的领导权不会轻易旁落。

安插亲信,巩固权力

除了尼廷·纳文,沙阿还在党内其他重要职位上安插了自己的亲信,例如在北方邦任命 पंकज चौधरी 为邦主席,这与首席部长 योगी आदित्यनाथ 的意愿相悖。

尼廷·纳文的特点

尼廷·纳文被视为沙阿的“傀儡”,他会毫不犹豫地执行沙阿的命令,并且非常注重保密。他与各党派关系良好,善于协调,但缺乏个人魅力和全国性的知名度。

低调务实,易于掌控

尼廷·纳文不追求个人野心,容易满足,不会对高层领导构成威胁。他为人低调,不爱出风头,更注重幕后工作。

平衡种姓,巩固基础

BJP 通过任命来自高种姓的 जेपी नड्डा 和来自落后种姓的尼廷·纳文,维持了党内种姓平衡。莫迪本人也来自落后种姓,这有助于 BJP 巩固其核心选民基础。

战略意义

尼廷·纳文是比哈尔邦第一位担任如此重要职务的 BJP 领导人,这可能与 BJP 在西孟加拉邦的选举策略有关。尼廷·纳文在城市地区拥有广泛的人脉,这有助于 BJP 在这些地区扩大影响力。

संघ 的影响

在 BJP 内部,任何重要的组织决策都离不开 संघ (RSS) 的理解和支持。尼廷·纳文的优势在于他理解 संघ 的语言,能够与基层组织进行有效沟通。

未来展望

沙阿需要像尼廷·纳文这样的人来巩固自己的权力,并为未来接替莫迪做准备。然而,尼廷·纳文能否适应德里的政治环境,以及德里 BJP 如何接纳他,还有待观察。

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文字稿

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0:07 नमस्कार आदाब सत श्री अकाल जय भीम जोहार मेरा नाम है नवीन कुमार आखिरकार आरएसएस ने मोदी शाह की जोड़ी के आगे सरेंडर कर दिया तो जो लोग सोच रहे थे कि मोदी के बाद मोदी युग खत्म हो जाएगा उनके लिए बुरी खबर है। मोदी के बाद ही नहीं शाह के बाद कौन के सवाल का जवाब भी संघ ने तलाशना शुरू कर दिया है। 45 साल के 12वीं पास नितिन नवीन को बीजेपी ने ऐसे ही अध्यक्ष नहीं बनाया है। यह अगले 30 साल की राजनीति सेट करने की तरफ पहला कदम है और इस पहले कदम पर ही तय हो चुका है कि मोदी रहे ना रहें। लेकिन कम से कम अगले एक दशक तक भाजपा में मोदी युग चलता रहेगा। कार्यकारी अध्यक्ष के तौर

0:55 पर नितिन नवीन का नाम सामने आने के बाद बहुत सारे लोग चौंके थे क्योंकि खुद बिहार की राजनीति में भी नितिन नवीन को कम ही लोग जानते थे। सम्राट चौधरी, दिलीप जायसवाल और विजय कुमार सिन्हा जैसे नेताओं के सामने नितिन नवीन को कभी सपने में खुद भी नहीं लगा होगा कि वह पार्टी की सर्वोच्च कुर्सी के लिए उपयुक्तों की सूची में उनका नाम भी आ सकता है। देखिए बिहार चुनाव परिणाम के बाद ही नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की तैयारी शुरू हो गई। 202 सीटों के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी अब यहीं से बड़ा चेहरा ढूंढने लगी थी। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी को लेकर नितिन नवीन की प्रतिबद्धताओं ने टॉप लीडरशिप का

1:40 अपनी तरफ ध्यान खींचा। टॉप लीडरशिप का मतलब यहां जेपी नड्डा हरगिज़ नहीं है। नरेंद्र मोदी और अमित शाह हैं। और बिहार चुनाव के बाद से ही संघ मोदी के सामने घुटनों के बल बैठा हुआ है। लिहाजा जब टॉप लीडरशिप ने नितिन नवीन का नाम आगे बढ़ाया तो संघ मना नहीं कर पाया। असल में उसके पास इससे इंकार करने का कोई विकल्प था ही नहीं। नितिन नवीन ही नहीं मोदी शाह ने उनकी जगह किसी को भी खड़ा कर दिया होता तो भागवत के पास उनका नाम भजने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। कहने को संगठन की तरफ से प्रस्ताव में नितिन नवीन की कार्यकुशलता पब्लिक कनेक्ट संगठन की अच्छी समझ का उदाहरण दिया गया था। साथ ही बिहार की जीत छत्तीसगढ़ का प्रबंधन का भी जिक्र था। कहा तो जा रहा है कि नितिन नवीन को अध्यक्ष की

2:25 कुर्सी तक पहुंचाने में आरएसएस के दो टॉप लीडर और क्षेत्र प्रभारी की भी भूमिका है। लेकिन सबको पता है कि उनकी इकलौती योग्यता क्या है? अमित शाह का भरोसेमंद होना। नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनवाकर अमित शाह ने एक तीर से कई शिकार कर डाले। सबसे पहला तो यही कि भाजपा ने उनकी क्षमताओं और हैसियत पर उठने वाले तमाम सवालों को कई साल तक खामोश कर दिया है। उन्होंने जताया है कि वह पार्टी में जिसे जहां चाहे वहां बैठा सकते हैं और इस बात का कोई मतलब नहीं है कि कौन उनके फैसले के साथ है और कौन खिलाफ आपको समर्थन करना ही होगा और नहीं करेंगे तो आपको हाशिए पर फेंक दिया जाएगा। दूसरा इस फैसले के जरिए

3:11 मोदी के बाद कौन का सवाल उन्होंने खत्म करने की कोशिश की है। समय-समय पर योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान, देवेंद्र फडनवीस और यहां तक कि नितिन गडकरी का नाम भी उछलता रहता है। लेकिन नितिन नवीन को टॉप लीडरशिप में लाकर अमित शाह ने बिना कुछ कहे इस सवाल का जवाब दे दिया है कि मोदी के बाद की कुर्सी खाली नहीं है। तीसरी बात इसी इरादे से संगठन की हर ऊंची कुर्सी पर उन्होंने अपने लोगों को बैठाना शुरू कर दिया है। कार्यकारी अध्यक्ष की कुर्सी पर नितिन नवीन को ले आए तो उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की मर्जी के सरासर खिलाफ जाकर पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया। दरअसल नितिन नवीन में अमित शाह एक ऐसा नेता देखते हैं जो उनकी कठपुतली की तरह काम कर सकता है। बिना कोई

3:58 सवाल उठाए उनके फैसलों पर मोहर लगा सकता है और पूरी गोपनीयता के साथ उनके निर्देशों को निभा सकता है। नितिन नवीन निर्देशों को बिना किंतु परंतु के लागू करने वाले नेता हैं। बिहार सरकार में भी वे ताल बनाकर चलते रहे हैं ताकि कोई नाराज ना हो। एक और खास बात उनके संबंध सभी पार्टियों में हैं। जोड़तोड़ के समय उनकी यह काबिलियत बहुत ही काम की हो सकती है। एक और बात नितिन नवीन ज्यादातर बिहार में ही रहे। इस कारण उनकी पहचान देश भर में है ही नहीं। वो राष्ट्रीय नेता हैं ही नहीं। नितिन नवीन का कद वैसा नहीं है कि वह मोदी शाह की बिना मर्जी के कोई फैसला ले सके। वह जो भी फैसला लेंगे उनके हिसाब से ही लेंगे। कहने का मतलब यह कि वह हमेशा मोदी

4:45 शाह की आज्ञाकारी नेता की तरह ही रहेंगे। एक और बात नितिन नवीनकांक्षी नहीं है। उन्हें जितना मिल जाए उसी में संतोष करने वाले नेता हैं। ऐसे में टॉप लीडरशिप के लिए वो चुनौती नहीं बन सकते। कम से कम मोदी शाह के लिए तो बिल्कुल नहीं। पूरा बिहार जानता है कि नितिन नवीन का राजनीति में कोई दुश्मन है ही नहीं। हालांकि इसके पीछे वजह यह है कि उनका अपना कोई जनाधार नहीं है। इसीलिए उनकी राजनीति में आक्रामकता कम, संयम, संवाद और संगठन ज्यादा नजर आता है। लो प्रोफाइल रहते हैं और चुपचाप अपना काम करना पसंद करते हैं। वो ना तो सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा सक्रिय हैं और ना ही बड़े राजनीतिक विवादों में पड़ते हैं। पांच बार के विधायक और तीन बार के मंत्री होने के बाद भी नवीन काफी लो प्रोफाइल नेता हैं। उनसे

5:33 मिलना कार्यकर्ताओं से लेकर नेताओं तक के लिए बेहद आसान है। कोई भी आदमी रात हो या दिन कभी भी उनसे मिल सकता है। यह कहते हैं पटना में सब लोग। यही व्यवहार नितिन को लगातार अमित शाह के करीब लाता चला गया। कहा जा रहा है कि नितिन नवीन का नाम बिहार चुनाव के बाद लगभग तय हो गया था। लेकिन इसके पहले उत्तर प्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष का फैसला होना था और इस वजह से देरी हुई। जैसे ही इसका फैसला हुआ उनके नाम का भी ऐलान हो गया। एक और बात भाजपा ने पार्टी और सत्ता में ओबीसी फॉरवर्ड कॉम्बिनेशन को रिपीट किया है। जेपी नड्डा ब्राह्मण समाज से आते हैं। अगड़े समुदाय से। उनकी जगह पार्टी ने कायस्त समाज से आने वाले नितिन नवीन को दे दी है। अगड़ा पिछड़ा समीकरण मजबूत किया। नरेंद्र मोदी खुद ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में पार्टी की कमान फॉरवर्ड समाज को दी गई।

6:21 मोदी जानते हैं कि अपने कोर वोटर को कैसे सहेजना है। भाजपा जब जीरो पर हुआ करती थी तब उसकी ताकत यही अगड़े होते थे। फॉरवर्ड और जब वह अपने शीर्ष पर है तो उन्हें छोड़ना नहीं चाह रही। एक और बात नवीन बिहार के पहले नेता हैं जिन्हें भाजपा ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है। यह बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। खासकर बंगाल चुनाव को देखते हुए बिहार में अभी भी आरएसएस की पकड़ शहरी इलाकों तक ही सीमित है। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर जैसे शहरों में संघ की शाखाएं लंबे समय से लग रही हैं। नितिन नवीन की राजनीतिक पहचान भी इन्हीं शहरी क्षेत्रों से बनी है। पटना जैसे शहर में जहां मिडिल क्लास व्यापारी और प्रोफेशनल वोट निर्णायक हैं। संघ की वैचारिक मौजूदगी भाजपा के लिए बड़ा आधार बनती रही है। नितिन नवीन की पहचान एक ऐसे

7:08 नेता की है जो कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करता है। सार्वजनिक मंचों पर संतुलित भाषा में बात करता है और सत्ता में रहते हुए भी खुद को जनता से अलग-थलग नहीं रखता है। यह शैली भाजपा के भीतर संघ समर्थित नेताओं में बहुत आम मानी जाती है। इसका फायदा यह होता है कि नेता विरोध से ज्यादा स्वीकार्यता हासिल करते हैं। भाजपा में संगठनात्मक प्रकरण बिना संघ की समझ के मुश्किल मानी जाती है। नितिन नवीन की ताकत ही यही रही है कि वह संगठन की भाषा समझते हैं। बूथ, मंडल, वार्ड और जिला स्तर तक। अमित शाह को नरेंद्र मोदी की जगह लेने के लिए ऐसे नेताओं की सख्त जरूरत है। देखना होगा कि पहली बार बिहार से बाहर निकल रहे नितिन नवीन को दिल्ली भाजपा कैसे स्वीकार

7:53 करती है और दिल्ली को नितिन नवीन कैसे आत्मसात करते हैं। वैसे कहने वाले कहते हैं कि उन्हें कुछ करना ही नहीं है। करेंगे सब अमित शाह। उन्हें बस एक कुशल भरोसेमंद धैर्यवान आदेशपाल की तरह बिना दिमाग लगाए उसकी निगरानी करनी है। इस वीडियो में इतना ही। लेकिन अगर आपने आर्टिकल 19 इंडिया को अब तक सब्सक्राइब नहीं किया तो फौरन कर दीजिए। बेल आइकॉन दबाइए। घंटी जैसी आकृति लाइक कीजिए और कमेंट करके बताइए हमारा वीडियो आपको कैसा लगा। हमारा Twitter हैंडल है आर्टिकल 19 अंडरs इंडिया और मेरा Twitter हैंडल है नवीन जर्नलिस्ट। नमस्कार।

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