Explosive interview of Yashwant Sinha | Neelu Vyas

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简要总结

本次采访主要讨论了比哈尔邦选举结果以及反对派应如何应对当前政治局势。关键点包括:

  • 比哈尔邦选举中存在舞弊现象,但媒体对此关注不足。
  • 反对派需要采取更强硬的行动,包括街头抗议和抵制选举。
  • 选举委员会未能履行其职责,成为执政党的帮凶。
  • 呼吁反对派团结一致,捍卫民主价值观。

比哈尔邦选举结果分析

辛哈认为比哈尔邦的选举结果显示,存在一场“无声的海啸”,使得NDA联盟获得了大量席位,但这一趋势并未被媒体和记者充分察觉。他指出,尽管选举前人们普遍认为竞争激烈,但最终结果却显示NDA以较大优势获胜。研究表明,大约有600万到650万张选票被取消,而NDA候选人的获胜优势远小于这个数字,这表明选票筛选可能对NDA有利。辛哈批评媒体未能对此进行充分调查和报道,反而一味赞扬NDA的胜利。他还提到,尼蒂什·库马尔的健康状况可能影响了他的表现,但人们仍然认为他难以被挑战。

选举委员会的失职与反对派的应对

辛哈认为,选举委员会现在的主要任务是与阿米特·沙阿合作,为未来的选举制定舞弊策略。他警告西孟加拉邦的首席部长玛玛塔·班纳吉要保持警惕,因为如果出现任何疏忽,NDA可能会在西孟加拉邦取得压倒性胜利。他建议反对派考虑多种策略,包括拒绝宣誓就职、认真考虑是否继续留在议会,以及组织大规模的街头抗议活动来反对窃取选票的行为。他强调,仅仅通过发推文和在办公室里工作是不够的,反对派需要走上街头,甚至准备好入狱,才能有效地对抗这种不公正的现象。

对“智者”的批评与反对派的未来

辛哈批评了一些退休的官僚、法官和军方人士,他们发表公开信谴责拉胡尔·甘地关于选举舞弊的说法,并为选举委员会辩护。他认为这些人为了个人利益出卖了自己的良知。他强调,反对派需要认真考虑如何应对当前政治局势,包括是否应该抵制选举或集体辞职。他指出,印度有着悠久的抗议传统,人民有能力推翻独裁统治者。他呼吁反对派深入基层,向人民解释情况,并相信一场新的运动将会兴起。

选举舞弊的细节与选举委员会的责任

辛哈对现任首席选举专员感到羞耻,因为他认为该专员为了执政党的利益不择手段,甚至接受内政部长的指示。他强调,历史将会公正地评价这位专员,并将其列为最糟糕的首席选举专员之一。他反驳了那些质疑选举舞弊证据的人,并指出,即使受到网络攻击和抹黑,反对派也应该坚持自己的立场。他认为,如果执政党及其领导人认为批评他们是犯罪,那么印度的民主就面临着严重的威胁。

呼吁采取行动与对人民的信任

辛哈坚信,印度人民最终会站出来反对暴政,推翻独裁统治者。他指出,选举委员会通过各邦政府运作,而各邦政府有权不与选举委员会合作,特别是当选举委员会不道德地运作时。他提到,有报道称西孟加拉邦的基层官员因压力而自杀,并强调选举名册的修订应该增加选民人数,而不是减少。他指责选举委员会故意删除选民名单,特别是那些来自少数族裔和亚达夫社区的人。

冬季会议的策略与抵制媒体

辛哈认为,反对派不应该参加全党会议,而应该从第一天起就扰乱议会,阻止政府开展任何工作。他回忆说,人民党在2011年也曾这样做过。他建议反对派抵制与执政党串通一气的媒体,让他们自由地传播自己的宣传。他进一步建议,在即将到来的西孟加拉邦选举中,如果玛玛塔·班纳吉认为选民名单的修订存在舞弊行为,她应该考虑抵制选举。他强调,班纳吉比泰加什维·亚达夫更难被打败,除非存在大规模的舞弊行为。

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文字稿

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0:05 नमस्कार स्वागत है आपका पब्लिक इंडिया पर। मैं हूं नीलू व्यास। बिहार के चुनाव का नतीजा आया और अपोजिशन के बारे में यानी कि जो विपक्षी दल है उनके बारे में तो यही दिख रहा है रिजल्ट देखते हुए कि उनको धराशाही कर दिया गया है। क्या कांग्रेस क्या आरजेडी क्या महागठबंधन के पूरे महागठबंधन का ही अगर आप नतीजा देख ले तो विपक्ष का सफाया हो चुका है एक तरीके से। लेकिन सवाल यह उठता है कि जो वोट चोरी जिस तरीके से सबूत के साथ दिखाई जा रही है कि यह वोट चोरी हुई है लेकिन किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता ना चुनाव आयोग को फर्क पड़ रहा है ना केंद्र में बैठे सरकार को फर्क पड़ रहा है क्योंकि सब चंगा है कितनी भी गलतियां कर लो लेकिन जीतेंगे तो हम ही यही एक एटीट्यूड जो सरकार का है तो फिर

0:52 क्या चुनाव कराने का कोई मतलब है ऐसे चुनाव के क्या मायने हैं अब अभी देखिए आप अगले आगे के राज्यों में चुनाव चुनाव शुरू हो जाएंगे। पश्चिम बंगाल ऑलरेडी मोदी जी कह चुके हैं कि बिहार से होती हुई गंगा पश्चिम बंगाल को जाती है। तो तैयारी तो उन्होंने पश्चिम बंगाल की कर ली है। उसके बाद तमिलनाडु, केरला, आसाम, उत्तर प्रदेश सब राज्य एक सिलसिलेवार तरीके से चुनाव की लाइन में खड़े हैं। लेकिन विपक्ष को अब क्या करना चाहिए? क्या विपक्ष कुछ कर पाएगा? ये भी एक सवाल है। आज हमारे साथ वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जो कि फाइनेंस मिनिस्टर रह चुके हैं। एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर रह चुके हैं। यशवंत सिन्हा जी हमारे साथ हैं। यशवंत जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है। थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग। और सर पहला सवाल है कि किसी के समझ में नहीं आ रहा है कि बिहार में

1:39 हुआ क्या है? आपको क्या लगता है यह नतीजा क्या है? क्या और यह पूरी राजनीति की दिशा को क्या बदलने वाला चुनाव है? देखिए बिहार में जो नतीजे आए हैं ना वह क्या दिखाते हैं? वह दिखाते हैं कि वे भी नहीं था। एक बवंडर था, एक सुनामी था। अ जिसने यह जो एनडीए गठबंधन है उसके लिए इतनी सीटें उपलब्ध करा दी लोगों ने। अब सवाल यह है कि वह बवंडर जो था वह जो सुनामी थी वह इतनी खामोश थी कि किसी को पता ही नहीं चला।

2:24 वेव भी होता तो हम कहते कि साहब साइलेंट वेव था। लेकिन अगर मान लीजिए कि सुनामी है। आप 100 सीट लड़ते हैं। 101 सीट लड़ते हैं। उसमें आप 90 95 सीट जीतते हैं। तो यह क्या दिखाता है? यह दिखाता यही है ना कि एक देयर वाज़ एक कंप्लीट स्टम तो उस स्टम का पता क्यों नहीं चला? इतने सारे पत्रकार बिहार गए। बिहार के चुनाव की खासियत इस बार यह रही कि अकेला चुनाव बिहार में हो रहा था। पूरे देश की निगाहें बिहार पर टिकी हुई थी। पूरे देश से पत्रकार गए वहां पर जाके हर इलाके में घर-घर जाकर एक तरह से उन लोगों ने लोगों

3:09 से बातचीत की। कहीं से यह खबर मुझे नहीं याद पड़ता है कि किसी ने दी कि साहब वहां तो बहुत भयंकर तूफान है एनडीए के पक्ष में नहीं कहा जो दृश्य देखने को मिला उसमें यह देखने को मिला कि महागठबंधन के लोगों के लिए बहुत उत्साह था। तेजस्वी जाते थे तो भारी भीड़ जमा होती थी। तो आखिर क्या हो गया कि यह सब जो था जिसमें सब लोग बोल रहे थे एक्सेप्ट द एग्जिट पोल्स कि कांटे की टक्कर है, कांटे की टक्कर है तो वह कांटे की टक्कर कहां गायब हो गई? स्पष्ट है कि जैसे कि बहुत सारे लोगों ने अब रिसर्च करके यह प्रूफ करने की कोशिश की

3:58 है, प्रूव किया भी है कि जो 60 65 लाख वोट बिहार में काटे गए। उनकी तुलना में जो जीत हुई है एनडीए के उम्मीदवारों की उनकी तुलना में बहुत कम मार्जिन से हुई है। अब 15 लाख वोट काट दिए गए। 15 मान लीजिए कि 1 लाख वोट काट दिए गए किसी कास्टटुएंसी में और वहां से कोई निकलता है 15000 से कोई निकलता है 1000 से तो क्या उसका माने माने बिल्कुल स्पष्ट है कि वोट की जो छटाई हुई

4:46 उससे फायदा केवल इंडिया एनडीए गठबंधन के लोगों को हुआ और वह जीत गए अब दिक्कत हमारे साथ यह है नीलू जी कि जो रिसर्च इसमें होना चाहिए जो जानकारी लेने की कोशिश होनी चाहिए वो पत्र मीडिया के थ्रू होनी चाहिए मीडिया तो गुणगान करने में लगा है कि वाह क्या कमाल हो गया एनडीए ने क्या कमाल कर दिया नीतीश मोदी और नितीश का कमाल मोदी और नीतीश का बिल्कुल अब सारे लोग इस बात को जानते हैं और एक बार फिर वह साबित हो गया कि नीतीश कुमार की तबीयत ठीक नहीं है। पहले भी बहुत सारे इस तरह के उदाहरण आए थे। अभी जब वो

5:33 ओथ ले रहे थे, शपथ ग्रहण कर रहे थे। पता नहीं कितनी बार उन्होंने केंद्र में और बिहार में शपथ ग्रहण किया है। तो वो क्यों लड़खड़ा रहे थे? उनकी जुबान लड़खड़ा रही थी ना। तो इसके बावजूद भी उनका करिश्मा ऐसा था कि लोगों ने कहा कि साहब नीतीश को कैसे कोई चैलेंज कर सकता है। मोदी को कोई कैसे चैलेंज कर सकता है। एनडीए को कोई कैसे चैलेंज कर सकता है। हम लोग भारी संख्या में घरों से निकल कर और यह साबित करेंगे कि बिहार की जनता नीतीश और मोदी के साथ है। इसलिए बहुत ज्यादा संख्या में लोग निकले। और जो नतीजा है वह हम सबके सामने है।

6:20 इसमें मेरे मन में कोई शक नहीं है कि भारी गड़बड़ी हुई है और अब इलेक्शन कमीशन का यही काम बचा है कि वो अमित शाह से मिलके अमित शाह से आदेश लेकर आने वाले चुनाव में हर कॉन्स्टिट्यूएंसी और हर बूथ में क्या गड़बड़ी की जा सकती है? चुनाव के दरमियान यह वह काम करना शुरू करें। अब यही एक काम इलेक्शन कमीशन का बचा है कि चुनाव में कैसे धांधली करके और एनडीए को जिता सकते हो। और इसलिए आपके माध्यम से आपके कार्यक्रम के माध्यम से मैं कहना चाहूंगा कि ममता बनर्जी को बंगाल में बहुत सावधान

7:05 रहने की जरूरत है। क्योंकि अगर जरा सी भी चूक हुई तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं होगा। अगर बंगाल में भी यह लोग भयंकर जीत दर्ज कर लेते हैं और उसके बाद सारी दुनिया जस्टिफाई करने में लग जाती है कि कैसे सब कुछ गड़बड़ था। आपने कहा यशवंत जी कि ममता बनर्जी को बहुत संभल कर रहने की जरूरत है। बिहार में भी तो अपोजिशन पूरा चौकन्ना था। वोट चोरी की तो लगातार बात हो रही थी। एसआईआर पर भी काफी अह ठीक-ठाक मुहिम छिड़ी। लोग वहां पर मुस्तैदी से खड़े हुए थे कि किनके वोट कट रहे हैं, नहीं कट रहे। लेकिन हां उतना टाइम शायद अपोजिशन को नहीं मिल पाया। लेकिन ममता बनर्जी भी क्या कर लेंगी? अगर चोरी का यही मॉडल है जो आप कह रहे हैं कि भाई अब यही बचा रह गया है कि चुनाव आयुक्त

7:50 जाएं और अमित शाह से एक-एक बूथ का डिटेल ले और बताएं कि इस बूथ पर हमें कैसे धांधली करनी है। अगर ये है मॉडल और यही होना है जो कि दिख रहा है साफ-साफ तो फिर तो ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में भी बीजेपी की सुनामी रहेगी। उसमें तो कोई शक है नहीं। यह बिल्कुल एक रेल्म ऑफ पॉसिबिलिटी जिसको कहते हैं इसकी भरपूर संभावना है कि बंगाल ही नहीं वो तमिलनाडु के चुनाव में भी ऐसा कर सकते हैं और सब लोग यह सोचते हैं कि नहीं बंगाल में बीजेपी कैसे जीतेगी? तमिलनाडु में बीजेपी, केरल में बीजेपी कैसे जीतेगी? हम अश्वमेध यज्ञ करने निकले हैं। मोदी जी अश्वमेध यज्ञ करने निकले हैं और इन सबको फतेह करना

8:38 इन सब राज्यों पर कब्जा करना उनका एकमात्र उद्देश्य बचा है और इसमें इलेक्शन कमीशन उनका सहयोगी बना है। तो अब विपक्ष को क्या करना चाहिए? विपक्ष के सामने कई विकल्प हैं। जैसे मेरा एक सुझाव था कि जो 2530 सीट विपक्ष के लोग जीते हैं ना बिहार में उनको शपथ नहीं लेनी चाहिए। उनको नहीं ज्वॉइ करना चाहिए विधानसभा और कह देना चाहिए एनडीए गठबंधन को कि अब तुम लोग चलाओ जैसे चलाना चाहते हो। नंबर एक यह हुआ। नंबर दो पार्लियामेंट में

9:24 जो हमारे सदस्य हैं लोकसभा राज्यसभा में उनको गंभीरता से इस पर विचार करना चाहिए। इस सेशन के बाद या इस सेशन के दरमियान कि पार्लियामेंट में बने रहने का कोई मतलब है या नहीं है। तीसरा कि भारी संख्या में लोगों को वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर उतरने की आवश्यकता है। अब केवल ट्वीट करके और दफ्तरों में बैठकर यह काम नहीं होगा। अगर विपक्ष सचमुच में गंभीर है इस मसले को लेकर तो विपक्ष को सड़कों पर उतरना पड़ेगा। राहुल गांधी को

10:12 जेल जाना पड़ेगा। विपक्ष के नेताओं को जेल जाना पड़ेगा। यह नहीं है कि भाई हम हमने एक डेमोंस्ट्रेशन कर दिया, एक प्रदर्शन कर दिया। पुलिस ने रोक दिया तो हम कुछ देर तक खू हल्ला करते रहे। उसके बाद वापस आ गए घर। ऐसा करने से काम नहीं चलेगा। आप ऐसा कीजिए कि आप पुलिस को मजबूर होकर आपको गिरफ्तार करना पड़े और वो गिरफ्तारी ऐसी नहीं हो कि शाम को कभी दिन को गिरफ्तार किया और शाम को छोड़ दिया। अगर शाम को वो छोड़ते हैं नेताओं को तो नेताओं को फिर वापस जाना चाहिए उसी स्थल पर और वो डेमोंस्ट्रेशन करते रहना चाहिए जब तक पुलिस सचमुच में चालान करके उनको जेल ना

10:59 भेज दे। जब तक विपक्ष मजबूती के साथ आंदोलन का रास्ता नहीं पकड़ेगा तब तक अब आने वाले दिनों में इस देश में चुनाव का कोई मतलब ही नहीं रहेगा। लेकिन सर अब विपक्ष कितना पुरजोर तरीके से करेगा? अभी मलिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल और इन सब की रिव्यु मीटिंग हुई जिसमें उन्होंने ऐलान किया कि दिसंबर के पहले हफ्ते में हम रामलीला मैदान में रैली करेंगे। ठीक है? उन्होंने अनाउंसमेंट कर दिया। अब वो रैली के बाद ठीक है एक दिन की रैली होगी उसके बाद क्या होगा? तो आप जो ये कह रहे हैं कि एक सस्टेंड आंदोलन की जरूरत है। लगातार उस आंदोलन को करने की जरूरत है और पुलिस को इतना मजबूर कर दो कि राहुल गांधी को गिरफ्तार करना ही पड़े। क्या वो स्थिति बन पाएगी इसको लेकर बहुत

11:46 संशय है। लेकिन अब जो बातें इंटेलेक्चुअल्स द्वारा जो मोदी भक्त है जो 272 मोदी भक्तों की जो अभी एक लिस्ट निकली थी जिसमें उन्होंने कहा कि राहुल गांधी गुमराह कर रहे हैं। वोट चोरी केवल एक दावा है। बेकार का दावा है जिसमें कि जो कॉन्स्टिट्यूशनल इंस्टीटश है उनकी छवि को खराब करने की लोग कोशिश कर रहे हैं। उसमें 16 जजेस हैं सर। उसमें 100 करीब 33 ब्यूरोक्रेट्स हैं और 133 आर्म्ड फर्सेस के लोग हैं। क्या कहा जाए इस पर? देखिए कुछ लोग जो हैं वो क्रांतिकारी बन जाते हैं रिटायरमेंट के बाद। और उस उस श्रेणी में उस जो आपने कहा

12:31 ब्यूरोक्रेट्स हैं, जजेस हैं, आर्मी के लोग हैं। यह सब रिटायर्ड लोग हैं ना और यह सब रिटायर्ड लोगों ने इतना यह विभत्स काम किया है। यह स्टेटमेंट यह चिट्ठी लिखकर राहुल गांधी के नाम से कि मैं कल्पना भी नहीं कर सकता हूं कि ऐसे लोग अब उनको एक-एक करके लोग पहचान रहे हैं। इसमें जितने लोग हैं वो अब एक-एक करके पहचाने जा रहे हैं कि इनकी पृष्ठभूमि क्या रही है और सबकी पृष्ठभूमि संदिग्ध है। और उन्होंने यह चिट्ठी लिखकर चुनाव आयोग के पक्ष में और राहुल गांधी के खिलाफ उन्होंने यह साबित कर दिया कि इस देश में बिके हुए लोगों की कोई कमी नहीं है। अपनी जमीर को अपने आत्मा को बेचने में भारतीय

13:19 किसी से पीछे नहीं है और पढ़े लिखे समझदार लोग इस तरह का काम कर सकते हैं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इसका कोई असर नहीं पड़ा है। जनमानस पर ये 272 272 ही क्यों 272 इसलिए है कि वो लोकसभा में मेजॉरिटी मार्क है। हम 300 लोगों ने क्यों नहीं किया? 250 लोगों ने क्यों नहीं किया? 272 ही क्यों? तो आप सोचिए कि ये सारी बातें जो है वो जुगाड़ की हुई है और जुमलेबाजी के अलावा कुछ नहीं। लेकिन सर अब रास्ता क्या है? यह जो राजनीति जो आप आप बिल्कुल आपने सही फ्रेज इस्तेमाल किया कि अब तो ऐसा लग रहा है कि मोदी जी अश्वमेध यज्ञ करने निकले हैं।

14:04 सारे राज्यों को फतह कर लेंगे। तो क्या अपोजिशन के पास सिवाय इसके कि आंदोलन और चुनाव का बहिष्कार करें। अब आपने कहा कि संसद में रहने का भी कोई मतलब नहीं है। तो क्या करें वो एमपीज? क्या अपना इस्तीफा दे दे? क्या करें? सारे एमपी और मैं तो यह कह कहूंगा कि गंभीरता से इन सब मुद्दों पर विचार करने की जरूरत है। मुझे लगता है कि इंडियन इंडिया गठबंधन के लोगों को बैठना चाहिए। गंभीरता से हर मुद्दे पर विचार करना चाहिए। और देखिए यह देश जो है हमारा यह आंदोलन से वाकिफ है। हमारे देश में कम से कम दो बहुत महत्वपूर्ण आंदोलन हुए। एक आंदोलन हुआ आजादी की लड़ाई में।

14:52 बहुत बड़ा आंदोलन हुआ। लोगों के बल पर ही हुआ ना। लोगों ने उसमें भागीदारी निभाई। तभी तो इतना बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ आजादी की लड़ाई में। और दूसरा जब जेपी ने आह्वान किया और इमरजेंसी के खिलाफ लोग खड़े हुए तो उस समय भी तो दमन हुआ था ना। लेकिन फिर क्या हुआ? फिर इंदिरा गांधी को भी तो अपनी सीट खोनी पड़ी थी। तो इसलिए हम लोग जो जनशक्ति है जो लोक शक्ति है उसको कम करके नहीं आके हमारे देश के लोगों ने यह साबित किया है कि अगर कोई भी आपत्ति आती है, कोई विपदा आती है तो वह

15:38 लोग खड़े हो जाएंगे सही लोगों के साथ। अब उनको जाकर उनके बीच में समझाने की जरूरत है। हर जिले में, हर सब डिवीजन में, हर पंचायत में जाकर लोगों को समझाने की जरूरत है। तो एक आंदोलन खड़ा होगा। मुझे पूरा विश्वास है कि आंदोलन खड़ा होगा क्योंकि मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह जो बिहार के नतीजे आए हैं, उसमें बीजेपी वाले भी बोल रहे हैं कि भाई कुछ ज्यादा ही हो गया। इस बार यह सुना होगा आपने। कि बीजेपी के लोग ही बोल रहे हैं कि कुछ ज्यादा हो गया। 140 सीट आ जाती 150 सीट आ जाती। यह 200 से ऊपर जाने की क्या जरूरत थी? लेकिन अब है

16:24 एक परिस्थिति बनी है और आने वाले दिनों में इसी फार्मूला पर काम होना है तो इसको रोकना है ना। तो आंदोलन से ही रोकेगा। लेकिन अब ज्ञानेश कुमार का क्या होगा? ज्ञानेश कुमार का क्या किया जाए? उनके खिलाफ इंपीचमेंट मोशन हो या फिर वो आंदोलन के एक ऐसा आंदोलन हो जो वो हटेंगे जैसे कि बांग्लादेश के जो इलेक्टोरल ऑफिसर थे उनको तो बिल्कुल हथकड़ी पहना के निकाला गया। ज्ञानेश कुमार का भविष्य आप क्या देख रहे हैं और या तो फिर होगा कि ज्ञानेश कुमार हट भी जाएंगे तो दूसरा ज्ञानेश कुमार आ जाएगा। देखिए ज्ञानेश कुमार मैं खुद एक आईएएस ऑफिसर था। आप जानती हैं जी और मुझे राजनीति में आने के बाद और मंत्री

17:10 बनने के बाद और सब कुछ के बाद भी इस बात को लेकर फक्र था कि मैं एक आईएएस ऑफिसर रहा हूं। आज सचमुच मैं नीलू जी मैं आपसे कह रहा हूं कि अमेश कुमार को देखकर मुझे शर्म आती है कहते हुए लोगों से कि मैं भी कभी आईएएस में था। क्योंकि एक आईएएस ऑफिसर इतना नीचे गिर सकता है। यह मैंने कभी कल्पना नहीं थी। आईएएस ऑफिसर करप्ट हो गया। आईएएस ऑफिसर घुस लेता है। आईएएस ऑफिसर किसी राजनी राजनेता के साथ जुड़ गया है। इतनी सब बातें चलती थी। लेकिन एक आईएएस ऑफिसर इतना नीचे गिर के और जो रूलिंग पार्टी है उसकी सेवा में लगा रहेगा और देश के होम मिनिस्टर से वो आदेश

17:55 लेगा। यह हमारी कल्पना के परे था। ज्ञानेश कुमार इतिहास उनके साथ न्याय करेगा और देश के सबसे गए गुजरे चीफ इलेक्शन कमिश्नर्स में ज्ञानेश कुमार के का नाम आएगा। लेकिन जैसे ही सर यह बात आएगी तो लोग कहेंगे कि अरे सबूत क्या है कि ज्ञानेश कुमार अमित शाह से निर्देश लेते हैं या मोदी जी से निर्देश लेते हैं। आप लोग तो बेबुनियाद बातें करते रहते हैं। देखिए हमारा कितना बड़ा मैंडेट आया और इस इस पूरे जो जैसे हम और आप बात कर रहे हैं तो हमारी ही ट्रोलिंग शुरू हो जाएगी कि अरे ये तो एजेंडा वाले लोग हैं। इनको जॉर्ज सोरोस फंडिंग कर रहा है इस तरीके की बातें करने के लिए। मोदी जी को बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी बातें शुरू हो जाती

18:40 है फिर। तो होने दीजिए ना। मैं तो यह कह रहा हूं कि मोदी जी को बेदखल करने का काम जो है गुनाह है क्या हमारे प्रजातंत्र में हम प्रजातंत्र में जनता के बीच में जा रहे हैं उसको अपनी बात समझाने का प्रयास कर रहे हैं तो यह कोई अपराध हो गया अगर यह सोच है रूलिंग पार्टी की और उसके नेताओं की तब तो और भी खतरा पैदा हो गया हमारे प्रजातंत्र के लिए तब तो फिर सब कुछ छोड़छड़ विपक्ष को घर बैठ जाना चाहिए और कहना चाहिए कि भाई मोदी जी जब तक चाहे वो और वह प्रधानमंत्री क्यों बन रहे हैं? प्रधानमंत्री बनने की भी जरूरत नहीं। उनको तो कुछ क्या उसमें कहा जाए कि प्रधान

19:29 गॉड बन जाए। कुछ बन जाए। इस तरह का जिसको कभी कोई हटा ही नहीं सकता है। बहुत से लोग आज इस देश में प्रचार के माध्यम से विश्वास करते हैं। अजर अमर प्रधानमंत्री अजर अमर जब तक चाहे वो रहेंगे तो हो जाए ये यही हो जाए। प्रजातंत्र की जो बात हम लोग करते हैं वो बेईमानी है और काफी कुछ साबित हो रहा है कि बेईमानी है। हो गया है हमारे देश में आज के दिन। लेकिन मैं आपसे एक बार फिर जोर देकर कहूंगा अनिल जी कि मुझे आज भी इस देश की जनता में विश्वास है और जब अति हो जाता है तो जनता सड़कों पर उतरती है और बड़े से

20:16 बड़े तानाशाह को भी धराशाही कर देती है। लेकिन आपको लगता है कि जो बिहार का चुनाव था इतने 11 साल से तो हम देख ही रहे हैं कि मोदी जी और अमित शाह का जो अत्याचार चल रहा है और किस तरीके से इंस्टीटश को खत्म किया जा रहा है। लेकिन क्या बिहार चुनाव में वाकई में मोदी और शाह ने ऐसी अति की है कि अब इनकी दुर्गति यहां से तय है। बिल्कुल मैं मानता हूं कि दुर्गति तय है। और देखिए इलेक्शन कमीशन एक बात और मैं आपसे कह दूं इलेक्शन कमीशन जो है वो किसके माध्यम से काम करता है? राज्य सरकारों के माध्यम से कौन लोग इलेक्शन कमीशन के बिहाफ पर काम करते हैं? जो राज्यों में पदस्थापित पदाधिकारी हैं वही तो काम करते

21:01 हैं ना। अब मान लीजिए एक मिनट के लिए बंगाल का चुनाव होना है। इलेक्शन कमीशन मनमानी कर रही है। ममता बनर्जी ये निर्णय ले कि हम इलेक्शन कमीशन के साथ कोऑपरेट नहीं करेंगे। वो कोऑपरेशन जो है इलेक्शन कमीशन का स्टेट मशीनरी के साथ उसका मौलिक जो सिद्धांत है वो क्या है कि इलेक्शन कमीशन ना केवल एक संवैधानिक संस्था है बल्कि एक नैतिकता का धरोहर भी है। वो जो है वो नैतिकता के आधार पर काम करता है। जैसे बहुत सारे लोगों ने किया था सेशन भी उसमें सबसे नामी थे। तो नैतिकता के आधार पर काम करता है। अगर इलेक्शन कमीशन अब नैतिकता के आधार पर काम नहीं

21:48 करेगा तो नैतिकता का झंडा कौन बुलंद करेगा? राज्य सरकारों को, विपक्षी दलों को बुलंद करना पड़ेगा और उनको कहना पड़ेगा शायद कि हम आपके साथ कोऑपरेट नहीं करेंगे। बिकॉज़ आप सही काम नहीं कर रहे हैं। सही ढंग से। मैं देख रहा था खबरों में कि बंगाल में पता नहीं कितने बीएलओ ने खुदकुशी कर ली। सर में राजस्थान में, केरला में, मध्य प्रदेश में ये सारे जगह से और कल भी एक उत्तर प्रदेश के सम बस्ती जिले का एक वीडियो आया जिसमें कि जो एसडीएम है वो वो धमकी दे रहा है बीएलओ को कि तुमने काम अपना पूरा किया क्यों नहीं? हम एफआईआर करा

22:34 देंगे तुम्हारे खिलाफ और हम तुमको जेल भेज देंगे। वो वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस तरीके का प्रेशर है बीएलओस का। हां। तो बताइए अब बीएलओ जो है वह एक लोली प्लेस्ड पदाधिकारी है। वो बहुत डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर नहीं ना है। लेकिन अब बीएलओ के ऊपर इतना दबाव पड़ रहा है। इतना दबाव पड़ रहा है कि लोग खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं। तो ये किस तरह का ये चल रहा है? और जब इलेक्ट्रोरल रोल का रिवीजन होता है तो मरे लोगों को छांट दीजिए। कोई उस पर क्या ऐतराज करेगा? लेकिन आप इतने लोगों को छांट रहे हैं। उसमें लोगों को जोड़ना चाहिए ना। 18 साल वाले जो हो गए उनको जोड़ना चाहिए। संख्या जो है वो घटने

23:22 के बजाय बढ़नी चाहिए। लेकिन यह जानबूझ के हर कास्टिटुएंसी में संख्या घटा रहे हैं और खास करके उन लोगों की अल्पसंख्यक है जैसे। अब हर अल्पसंख्यक के नाम से पहचाना जा सकता है। अगर आप उसको उसके पोशाक से जैसा मोदी जी ने कहा था नहीं भी पहचाने तो नाम से तो पहचान सकते हैं उनका नाम काट दो बिहार में यादव जो है वो नाम से पहचाना जा सकता है उसका नाम काट दो आप जानते हैं कौन से लोग हैं जो हमको वोट देने वाले नहीं है उन सबका नाम काटो और किसी कास्टटसी में 15 15000 नाम कट गए और 300 से कोई जीत गया कोई बताइए मजाक हो रहा है ना चुनाव के नाम

24:08 पर और पूरी तरह से ज्ञानेश कुमार और बाकी जो दो चुनाव आयुक्त है उनकी मिलीभगत से यह हो रहा है। ये शर्म की बात है। बिल्कुल सर विंटर सेशन शुरू हो रहा है। शीतकालीन सत्र संसद का शुरू हो जाएगा पहली दिसंबर से। आपको क्या लगता है कि विपक्ष का पहले दिन से ही क्या रवैया होना चाहिए? और यह जो फालतू की जो यह ऑल पार्टी मीटिंग मीटिंग मोदी जी बुलाते हैं जिसका कोई मतलब नहीं है। हर सत्र के एक दिन पहले स्पीकर बुला लेता है ऑल पार्टी मीटिंग। क्या मतलब है ऐसी मीटिंग्स का? और अब विपक्ष को क्या करना चाहिए? अगर एक्शन मोड में वाकई में विपक्ष को आना है तो कोई मतलब नहीं है। इसमें कोई मतलब नहीं है। मैं आपको याद दिलाऊं कि यही भारतीय

24:55 जनता पार्टी है। मैं भी उस समय इसका सदस्य था और लोकसभा में था। हम लोगों ने शायद 2011 में पूरा जो विंटर सेशन था उसको नहीं चलने दिया था। रोज बाधित करते थे। पूरा वाश आउट हो गया था। होल सेशन बिल्कुल बिल्कुल रोज बाधित करते थे कि नहीं चलने देंगे। तो ये बीजेपी का रिकॉर्ड है। प्रेसिडेंट है। आप क्यों चलने देंगे पार्लियामेंट का सेशन? कि वो लोग धांधली पार्लियामेंट में भी करें। और यह मैं इसके पक्ष में नहीं हूं कि आप वॉक आउट कर जाइए। आपको वहां पर प्रोसीडिंग्स को डिस्टर्ब करना पड़ेगा इस तरह कि कोई सरकारी कामकाज नहीं।

25:40 नहीं हो जब प्रजातंत्र का यही हाल है और हमारे देश में प्रजातंत्र का कोई मतलब ही नहीं रह गया तो फिर पार्लियामेंट चले ना चले इसका क्या मतलब? नहीं तो जैसे ही विपक्ष ये करेगा गोदी मीडिया चलाने लगेगा कि यह देखिए अराजकता के तत्व है। संसद को चलने नहीं देते। संसद की गरिमा ध्वस्त करने में लगे हुए हैं। यही सब गोदी मीडिया चलाएगा। फिर गोदी मीडिया चलाएगा तो गोदी मीडिया और कहना पड़ेगा जो प्रवक्ता इनके जाएंगे कि हम लोगों ने बीजेपी ने एक पूरा सेशन जो था विंटर सेशन उसको वाश आउट करा दिया था। वही बीजेपी है। दूसरी बात कि गोदी मीडिया जो है उसको क्यों नहीं काहे के लिए गोदी मीडिया के पास जाते हैं ये लोग? उनको भी खुला छोड़ दीजिए। वो अपना पैरेलल संसद चलाएं। गोदी प्रवक्ताओं को बुलाएं और जो

26:30 कहना है करें कोई मतलब नहीं है गोदी मीडिया को समर्थन देने का। और मैं समझता हूं कि बीजेपी को एक तरफ जहां बीजेपी एनडीए को डिसिप्लिन करना है वहीं एक बड़ी चुनौती है कि हम लोगों को गोदी मीडिया को भी डिसिप्लिन करना है। बिल्कुल। लेकिन आपने जो कहा कि आपने एक ट्वीट भी लिखा था बिहार के चुनाव के बाद कि अब चुनाव का बहिष्कार करना चाहिए तो बहिष्कार करें विपक्ष या फिर ऑन मास रेिग्नेशन दे वो भी कई बार इस चीज का डिस्कशन आता है। आपके हिसाब से बेहतर क्या है? मुझे मुझे यह लगता है कि अब जैसे कि बंगाल का चुनाव आ रहा है। अब बंगाल में

27:16 कुछ व्यक्तिगत रूप से भी मैं जानकारी रखता हूं कि ममता बनर्जी को हराना बहुत मुश्किल है। और जब तक भारी धांधली नहीं की जाएगी तब तक ममता बनर्जी को बंगाल में आप नहीं हरा सकते हैं। ममता बनर्जी इज नॉट ए तेजस्वी यादव कि आपने उनको हरा दिया और लोगों ने कहा कि भाई कांटे का टक्कर था। लोगों ने एनडीए को प्रेफर किया। तो यह जो है वहां पर सारे लोगों को और खास करके टीएमसी को बहुत चौकन्ना रहने की जरूरत है अभी से कि जो वोटर लिस्ट का एसआईआर हो रहा है उसमें धांधली नहीं हो और

28:05 अगर उसमें मनमानी होती है तो फिर ममता बनर्जी को भी सोचना पड़ेगा कि इस चुनाव को लड़ने में कोई फायदा है या नहीं वो स्टेज अभी नहीं आया है। ये है यशवंत जी मजे की बात यह है कि पश्चिम बंगाल में भी शुभेंदु अधिकारी ने आई थिंक एक या दो हफ्ते पहले की बात है कि उन्होंने तो वहां पर एक बंडल उन्होंने दिखाया और कहा कि ये देखिए किस तरीके से वहां पर बीजेपी के वोटर्स को के नाम काटे जा रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी वहां पर खड़े हो गए थे कि ये देखिए फेक वोटर्स को लाया जा रहा है। ममता बनर्जी फेक वोटर्स को ला रही हैं। फिर क्या करेंगी? नहीं नहीं करने दीजिए ना। सुंदर तो एक से एक गैर जिम्मेदाराना बयान देते रहते हैं। उसको इतने गंभीरता से लेने की कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी को सावधान रहना है

28:50 जब एसआईआर बंगाल में चल रहा है और अगर उनको लगता है कि एसआईआर बिल्कुल गलत ढंग से हुआ है जैसे बिहार में हुआ था और इस पर कोई इस पर जो चुनाव होगा वो फर्जी चुनाव होगा तो फिर उनको फैसला करना चाहिए कि चुनाव लड़ने में कोई मतलब है चुनाव लड़ने का या नहीं है। बिल्कुल बिल्कुल। चलिए तो देखते हैं विपक्ष क्या करता है और संसद का सत्र जो शीतकालीन सत्र है वो तो 1 दिसंबर से शुरू होने वाला है और जो आपके सजेशंस है मैं उम्मीद करती हूं कि विपक्ष उसको सीरियसली ले उस पर गंभीरता से सोचे। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया जी। थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग। मैं एक बात और आपसे कह देना चाहता हूं। ये है कि ये जो संसद का सत्र हो रहा है ये मात्र 15 दिन इसका वर्किंग डे है। 15 दिन

29:38 तो संसद की गरिमा को गिराने का काम कौन कर रहा है? सरकार कर रही है ना? बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल नहीं सही कहा आपने। अब देखते हैं कि विंटर सेशन में क्या कुछ विपक्ष कर पाता है। आपका बहुत-बहुत शुक्रिया यश जी। थैंक यू सो मच फॉर जॉइनिंग। थैंक यू।

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