Indian Tax System Explained | All you need to know | Easiest explanation Ever | Aaditya Iyengar CFA

Brief Summary

The video provides a comprehensive overview of the Indian tax system, explaining key concepts in simple language. It covers direct and indirect taxes, differences between the old and new tax regimes, and important aspects such as GST registration and input tax credit.

  • Direct taxes are progressive and based on income.
  • Indirect taxes, like GST, apply uniformly and can be affected by the nature of goods.
  • Understanding the new and old tax regimes is essential for optimal tax planning.

Introduction to the Indian Tax System

The video introduces the Indian tax system and aims to clarify basic concepts, including the new and old tax regimes. The speaker emphasises that understanding taxes is essential for everyone, regardless of their background in finance.

Types of Taxes: Direct and Indirect

The government collects taxes in two main categories: direct and indirect taxes. Direct taxes, such as income tax, are progressive and vary with income, while indirect taxes, like GST, are uniform across all consumers regardless of their income. The speaker illustrates the unfair nature of indirect taxes by highlighting how both a wealthy individual and a lower-income individual pay the same GST on products.

Understanding Indirect Taxes and GST

Indirect taxes are primarily applied when consumers make purchases, affecting personal expenditures. Items deemed essential have lower GST rates, while luxury items incur higher rates. The government aims to impose lesser taxes on essential goods to maintain fairness. The explanation includes examples of GST rates on various items, impacting the tax burden based on consumption.

Functions of GST: Registration and Input Tax Credit

GST registration is mandatory for businesses surpassing certain income thresholds. If earnings are below these limits, registration is voluntary but may increase compliance costs. The input tax credit allows businesses to offset the GST they pay on purchases against the GST collected on sales, promoting fairness within the taxation system.

Transition to Direct Taxes

The discussion shifts to direct taxes, which are fairer than indirect taxes. They are based on income levels, with higher earners paying more tax. Around 7.4 crore individuals filed tax returns, with a significant portion paying little to no tax, while those earning more fall into the higher tax brackets. The mechanics of how direct taxes are deducted from salaried employees and businesses are explained.

Direct Taxes: The Business Perspective

Business owners can deduct expenses from their revenue before calculating taxes, distinguishing their tax treatment from salaried employees. This flexibility incentivises entrepreneurship and job creation, as businesses contribute to the economy by hiring and providing services, facilitating a broader tax base.

Advance Tax and Tax Regimes Explained

The video discusses advance tax payments, required when tax liabilities exceed specific thresholds, shifting towards a comparison of the old and new tax regimes. The new regime features lower tax slabs with fewer deductions, while the old regime allows various benefits, influencing how individuals choose between them based on their eligibility for deductions.

Conclusion: Choosing the Right Tax Regime

Choosing the right tax regime is vital based on income and available deductions. The new regime is default for salaried individuals, while business owners have limited options once a regime is chosen. The speaker proposes creating a separate video for tax planning, emphasising the importance of being informed about the tax system's workings.

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Transcript

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0:00 इंडियन टैक्स सिस्टम पर एक ऑल इन वन वीडियो जहां पर आपको हर एक चीज के बेसिक समझ जाएंगे न्यू टैक्स रेजीम क्या होती है ओल्ड टैक्स रेजीम क्या होती है ये भी आपको एकदम सिंपल लैंग्वेज में समझाऊ सारा कंफ्यूजन क्लियर कर दूंगा वीडियो एंड तक देखना इससे ज्यादा वैल्युएबल और डिटेल वीडियो आपको टैक्स सिस्टम पर कहीं नहीं मिलेगा क्योंकि ये वीडियो अपडेटेड है और इसको एक्सट्रीमली सिंपल लैंग्वेज में समझा है और आपको टैक्स के हर एक बेसिक समझ जाएंगे लेकिन एक मिनट तू तो सीए ही है तू ये सारी चीजें किस बेसिस पे बता रहा है दैट्ची ये होने की जरूरत नहीं ये चीजें इतनी बेसिक है कि हर एक इंसान को यह पता होनी चाहिए और जब मैं आपको समझाऊ तब आपको रिलाइज होगा कि भाई मुझे क्यों नहीं पता था क्योंकि ये सारी चीजें तो समझना इतनी आसान थी एंड दैट इज बिकॉज आपको ये किसी ने ढंग से समझा ही नहीं ना कि हमको ये सारी चीजें स्कूल में सिखाई जाती है इसीलिए आई

0:45 एम मेकिंग दिस वीडियो फॉर योर बेनिफिट तो चलो सबसे पहले शुरू करते हैं ये जान कर के सरकार हमसे जो टैक्स लेती है वो किस प्रकार से लेती है और किस टाइप के इनकम पे लेते देखिए टैक्स के दो ब्रॉड टाइप्स होते हैं सबसे पहला होता है डायरेक्ट टैक्स और दूसरा होता है इनडायरेक्ट टैक्स अब भारत के इस में इनके एक अच्छे एग्जांपल होते हैं इनकम टैक्स और जीएसटी अब देखिए इनमें जो फर्क होता है ये समझना बहुत ही आसान है इनडायरेक्ट टैक्स जो होता है वो और ज्यादा अनफेयर होता है व्हाट दिस मींस इज इनडायरेक्ट टैक्स हर एक इंसान के लिए सेम होता है और वो मोस्ट केसेस में रेवेन्यू पे लगाया जाता है इसका क्या मतलब होता है देखिए मान लीजिए आपने अमाउंट सेम 5 पर है उन ₹5000000 पर अगर

1:32 मैं ₹ की एक चॉकलेट लेता हूं तो उस परे मैं जो जीएसटी दूंगा और मोदी जी जो जीएसटी देंगे वो एगजैक्टली सेम है हमारे दोनों के इनकम में बहुत ज्यादा फर्क हो सकता है लेकिन इसके बावजूद भी हम इस पर सेम टैक्स देते हैं और यही होता है इनडायरेक्ट टैक्स अब देके चॉकलेट लोगे कंपनी ₹1 अपने पास रखेगी और ₹ जो है वो सरकार के साथ जमा कराएगी तो समझ गए आप इनडायरेक्ट टैक्स जो होता है वो खर्चे पर लगता है कंजमेट है जब आप अपने ही पैसे खर्च करते हो कहीं जाके तब इनडायरेक्ट टैक्स आप पर लगाया जाता है अब एक और चीज यहां पर होती है वो है कि इनडायरेक्ट टैक्स को सरकार थोड़ा और फेयर

2:17 बनाने की कोशिश करती है जैसे मान लो जो सारी एसेंशियल चीजें होती है जैसे खाना हो गया आइसक्रीम रेस्टोरेंट में जाके डिनर इन सारी चीजों पे सरकार 5 पर का जीएसटी लगाती है कुछ ऐसी चीजें होती है जो बहुत ही ज्यादा एसेंशियल जिस पर सरकार जीएसटी ही नहीं लगाती जैसे फॉर एग्जांपल जो सब्जियां आप खरीदते हो जो अंडे आप खरीदते हो न्यूज़पेपर फिर क्राफ्ट्समैन के सामान इन चीजों पे जीएसटी लगता ही नहीं या फिर कुछ चीजें होती हैं जिस पे 5 पर जीएसटी लगता है अब कुछ चीजें होती है जिस पे 12 पर लगता है कुछ पर 18 पर और कुछ होती है जिस पर % लगता है इसके पीछे का लॉजिक समझिए जो सारी चीजें आप कंज्यूम करते हो अगर वो एसेंशियल है तो उस पर कम जीएसटी लगेगा और अगर इन चीजों से आपकी सेहत खराब होती है जैसे दारू या सिगरेट तो इन चीजों पर ज्यादा जीएसटी लगेगा या फिर अगर आप एक लग्जरियस लाइफ जीने की को कोशिश करते हो तो उस पर आपको ज्यादा जीएसटी देना पड़ेगा ये आईडिया होती है कि सिंपल बेसिकली जिसके

3:04 पास ज्यादा पैसा है वो ज्यादा जीएसटी देगा ये चीज आपको देखने मिलेगी होटल्स के केस में जैसे मान लो आप यो में जाकर रहते हो जहां पर रेंट है 7500 उसके नीचे तो 12 पर जीएसटी लगता है लेकिन यहीं पर अगर आप ताज होटल में जाते हो जहां पर रेंट 0000 है तो उस पर 28 पर लगेगा ये चीज सरकार गाड़ी के केस में भी करती है अगर आपके पास एक छोटी गाड़ी है तो उसपे कम जीएसटी लगता है अगर एक बहुत बड़ी गाड़ी है जैसे सेस का मतलब होता है जो टैक्स आप पे कर रहे हो इसके ऊपर एक्स्ट्रा टैक्स किसी पर्टिकुलर कॉज के लिए या फिर एज अ पेनल्टी फटर की केस देखिए हमने बात किया कि ये एक लग्जरी गुड है तो इस पर जो जीएसटी लगता है इस पर सरकार एक कंपनसेशन सेस लेती है ये कंपनसेशन सेस जो होता है वो एक्स्ट्रा टैक्स अमाउंट ये भी सारी सिन आइटम्स या लग्जरी आइटम्स पर लगता है जैसे मान लीजिए

3:49 बहुत बड़ी गाड़ी या फिर प्राइवेट यूज के लिए खरीदा हुआ एयरप्लेन या फिर कोई बड़ी मोटरसाइकिल जिसकी इंजन कैपेसिटी बहुत ज्यादा है या फिर सिगार सिगरेट दारू ऐसी सारी चीजें सरकार जो है वो सेस दो रीजन के वजह से लेती है सबसे पहला है किसी पर्टिकुलर इनिशिएटिव को फंड करने जैसे स्वच्छ भारत सेस और दूसरा ये होता है कि सेस की जो फंड्स आती हैं इस पर सरकार और ज्यादा कंट्रोल रख सकती है क्योंकि इन फंड्स को स्टेट्स के साथ शेयर करने पर कोई रूल नहीं होता अब जीएसटी की बात हो ही रही है तो दो और इंपॉर्टेंट कॉन्सेप्ट्स हाईलाइट कर देते हैं सबसे पहला कि जीएसटी की रजिस्ट्रेशन किसने करनी चाहिए और दूसरा ये जो सारे लोग जीएसटी इनपुट क्रेडिट की बात करते हैं फोन पे जीएसटी नहीं देते लैपटॉप पे जीएसटी नहीं देते ये क्या होता है देखिए डिपेंडिंग ऑन योर इंडस्ट्री अगर आप एक सर्टेन अमाउंट से ज्यादा पैसे कमाते हो एक एक साल में और आपके पास एक बिजनेस है या फिर आप एक फ्रीलांसर हो तो आपने जीएसटी कलेक्ट करना कंपलसरी होता है

4:35 अमाउंट्स मैंने आपके स्क्रीन पर डाल दिया अगर आप इन अमाउंट्स के नीचे कमा रहे हो तो भी आप जाके वॉलेटर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर सकते हो लेकिन ऑनेस्टली वो क्यों करना है क्योंकि इससे आपके कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ जाते हैं आपको अकाउंटिंग प ज्यादा स्पेंड करना होता है तो जब तक आप इस लिमिट पे नहीं आ जाते जीएसटी बनाने में कोई सेंस नहीं जैसे मान लीजिए आप एक स्मॉल बिजनेस ओनर हो या एक फ्रीलांसर हो आप साल में ₹ लाख से ज्यादा कमाते हो तो आपके लिए जीएसटी पे करना ये मैंडेटरी हो जाता है अब जीएसटी की जो अमाउंट होती है ये आप आपको अपने जेब से नहीं पे करनी जीएसटी की अमाउंट आपका कस्टमर पे करता है जैसे मान लो आपने अपने कस्टमर को ₹1 लाख का बिल दिया तो आप इस 1 लाख पर 18 पर जीएसटी लगाकर उस कस्टमर को दोगे तो कस्टमर ने आपको देने हैं 8000 और ये ₹1 ज आप सरकार के पास जमा कराते हो लेकिन एक मिनट अगर उस कस्टमर ने मुझे टाइम से पैसे नहीं दिए तो क्या तो ये आपका प्रॉब्लम है सरकार कहेगी

5:21 कि देखो तुमने अगर हमसे कहा है कि 20 तारीख को तुम पैसे जमा कराओ ग तो तुमने जमा कराने हैं तुम्हें पैसे आए नहीं आए वो बाद की बात है दैट इज वन मोर रीजन कि आप ने वॉलंटरी जीएसटी कराने में कोई सेंस नहीं बनता क्योंकि आपके कैश फ्लो पर और ज्यादा स्ट्रेन आता है एनीवे नाउ कमिंग टू इनपुट टैक्स क्रेडिट ये क्या चीज होती है देखिए सरकार ये कहती है कि हमने जीएसटी है ना गुड्स एंड सर्विसेस से लेना है और ये चीज हमने लेनी है फाइनल गुड्स एंड सर्विसेस से मतलब जो सारी चीजें कंज्यूम की जाती है इसके बेसिस पर हम जीएसटी कलेक्ट करेंगे एक एग्जांपल देता हूं mcdonald's है ये आपको बर्गर बेचता है इस बर्गर पर mcdonald's लेता है 5 पर जीएसटी mcdonald's जो है वो आपसे जीएसटी लेता है और इसकी पेमेंट सरकार के पास जमा कराता है लेकिन जब आप mcdonald's में जाते हो ऑर्डर प्लेस करने के लिए तब एक कंप्यूटर पे आपका ऑर्डर लिया जाता है पीछे बहुत सारी मशीनस होती हैं जिससे खाना बनाया जाता है बहुत सारी इक्विपमेंट्स होती है जो mcdonald's

6:07 को खरीदनी पड़ती है और इन इक्विपमेंट्स को खरीदते समय इन इक्विपमेंट्स पर भी जीएसटी देना पड़ता है लेकिन भैया mcdonald's तो एक बिजनेस है और फाइनल प्रोडक्ट जो बर्गर है या आपको बेचा जा रहा है और इस बर्गर पर mcdonald's जीएसटी भी ले रहा है तो इस बर्गर को बनाने जो सारी चीजें mcdonald's को खरीदनी पड़ी थी इन चीजों पर वो जीएसटी क्यों दे इन सारे रॉ मटेरियल पर इन सारे इनपुट्स पर जो जीएसटी mcdonald's देता है वो सरकार माफ कर देती है यही एगजैक्टली होता है इनपुट टैक्स क्रेडिट आपको एक खुद की एग्जांपल देता हूं ताकि आपको और बेहतर समझ आए अब मान लीजिए मैं एक क्रिएटर हूं मैं ब्रांड्स के साथ काम करता हूं मैं ब्रांड्स को इनवॉइस रेज करता हूं और उसपे जीएसटी लेता हूं लेकिन मान लो इन वीडियोस को बनाने में एक कैमरा खरीद लेता हूं जिस पर मैंने ऑलरेडी जीएसटी दे दिया है तो इस केस में जो फाइनल प्रोडक्ट था दैट इज ब्रांड्स को वीडियोस बना के देना इन वीडियोस पर जो जीएसटी बनता है जैसे मान लो

6:52 एक पूरे महीने का 0000 और मैंने जो कैमरा खरीदा इन्हीं वीडियोस को बनाने जिस पर मैं जीएसटी लेता हूं उस कैमरा पर मुझे जीएसटी दे ना पड़ा ₹1000000 तो सरकार इन दोनों को नेट आउट करती है और बोलती है कि देखो तुमने जीएसटी कलेक्ट किया है अपने कस्टमर से ₹5000000 का और तुमने कैमरा खरीदा जिस पर तुमने पे किया जीएसटी ₹1000000 का तो तुम हमें पेमेंट करना ₹ 440000 की पॉइंट ये है कि ये जो इनपुट टैक्स क्रेडिट होता है जो आपको सारे इन्फ्लुएंस बताते हैं ऑनलाइन आप देखते हो ये कोई भी डिस्काउंट नहीं होता ये एक्चुअली आपके बिजनेस के लिए होता है और अगर आप इसका मिसयूज करते हो तो सरकार को वो चीज भी समझ आती है अब देखिए हमने इनडायरेक्ट टैक्स तो डिस्कस कर लिया अब आते हैं डायरेक्ट टैक्स की की तरफ ये होता है वो टैक्स जो और ज्यादा फेयर होता है और ज्यादा प्रोग्रेसिव होता है व्हाट दैट मींस इज अगर आप साल के ₹ लाख कमाते हो सैलरी में तो आपको टैक्स देना पड़ता है 0

7:39 पर लेकिन जो जैसे fy2 की डाटा देखिए जो फाइनेंस मिनिस्टर ने लोकसभा में रिवील की भारत में 7.4 करोड़ लोग थे जिन्होंने टैक्स फाइल किया अब इसमें 5.16 करोड़ लोगों ने निल रिटर्न फाइल किया यानी उन्होंने बताया कि मेरी कोई टैक्सेबल इनकम नहीं थी तो ये जो 2 करोड़ लोग हैं जो एक्चुअली टैक्स पे करते हैं इनमें भी 40 पर लोग हैं जो मैक्सिमम टैक्स ब्रैकेट प अपना टैक्स पे करते हैं यानी इन 2 करोड़ लोगों से भी जो टैक्स की अमाउंट आती है वो ज्यादातर वही लोग भरते हैं जो 30 पर के स्लैब में कमा

8:25 रहे हैं व्हिच मींस लेस दन 1 पर ऑफ इंडियाज पॉपुलेशन लेकिन अब ये डायरेक्ट टैक्स किस चीज पर लगता है कैसे लगाया जाता है वो सारी चीजें और उनके छोटे-छोटे मैकेनिक्स डिस्कस करेंगे डायरेक्ट टैक्स सबसे ज्यादा चुपता है जो इंसान सैलरीड है उसके लिए क्योंकि इसका जो डायरेक्ट टैक्स होता है वो कंपनी बाय डिफॉल्ट काटने के बाद ही उसे सैलरी देती है अगर आप एक सैलरी कमाते हो 10 करोड़ की सैलरी भी कमाओगे कंपनी आपको बोलेगी कि देखो तुम्हारी सैलरी 10 करोड़ की है टैक्स काटने के बाद इन हैंड इतना मिलेगा ये हम आपको देंगे एक सैलरीड इंसान पहले टैक्स पे करेगा उसके बाद खर्च करेगा लेकिन बिजनेस के मैकेनिक्स अलग होते हैं अगर आप बिजनेस ओन करते हो 10 करोड़ कमाते हो 8 करोड़ के खर्चे दिखाते हो तो टैक्स सिर्फ 2 करोड़ पे दोगे अब कई लोगों को लगेगा कि ये फेवरेबल ट्रीटमेंट है लेकिन इसके पीछे काफी सीरियस लॉजिक है अगर आपके रेवेन्यू पर ही 30 पर टैक्स लग रहा है और आप प्रॉफिटेबल हो ही नहीं पा रहे हो तो आप बिजनेस क्यों करोगे और दूसरी

9:11 चीज जब आप बिजनेस करते हो तो आप बिजनेस अपने आप के लिए नहीं बल्कि पूरी सोसाइटी के लिए करते हो बाकी सारे जो लोग होते हैं उनको जॉब्स मिलती है तो इनको जब जॉब्स मिलती है उनके जॉब की सैलरी से भी सरकार टैक्स लेती है तो इस अच्छे काम के लिए आपको प्रेफरेंस क्यों ना दे इसीलिए कोई भी बिजनेस जो होता है उसे मिलती है बिजनेस एक्सपेंसेस लेने की अपॉर्चुनिटी अलोंग विद डेप्रिसिएशन बिजनेस एक्सपेंस माने कोई भी एक्सपेंस जो आपको अपने बिजनेस को आगे बढ़ाने में हेल्प करती है ये कोई भी वाहियात एक्सपेंस नहीं हो सकती इट हैज टू बी अ रियल एक्सपेंस दैट एड्स योर बिजनेस फॉर एग्जांपल अगर आपके पास एक कंपनी है और आप कंपनी के नाम पे एक ferrari's नॉट द पॉइंट अगर आपके पास एक बिजनेस है और आप रेवेन्यू कमा रहे हो और

9:58 इस रेवेन्यू को कमाना आपने लोग हायर किए जिन्हें आप एक सैलरी पे करते हो तो आप इसको एज अ बिजनेस एक्सपेंस क्लेम कर सकते हो आप जो रॉ मटेरियल लेते हो इसको आप एज अ बिजनेस एक्सपेंस क्लेम कर सकते हो बेसिकली वो रेवेन्यू कमाने जो भी खर्चे आपको करने पड़े इस पर आप एक बिजनेस एक्सपेंस ले सकते हो मान लीजिए आपने आपके बिजनेस के लिए एक व्हीकल खरीदा हुआ है तो इस व्हीकल पर आपको डिप्र एशन तक मिलेगा इसका मतलब काफी सिंपल है मान लीजिए आपने आज गाड़ी खरीदी ₹10 लाख की एक साल बाद इसको 10 लाख में बेच पाओगे ओबवियसली नॉट क्योंकि इस गाड़ी में वेयर एंड टेयर होगा यूज करोगे आप उस गाड़ी को तो ये वेयर एंड टेयर जो है वो आपका नुकसान है ना वो आप आपके लिए एक लॉस है तो सरकार आपको ये भी एज अ बिजनेस एक्सपेंस क्लेम करने देती है जैसे मान लीजिए आपके पहले साल के बाद आपको ₹ लाख का डेप्रिसिएशन बेयर करना पड़ा तो सरकार आपको कहेगी कि आपका जो रेवेन्यू है इसमें से आप ₹1 लाख भी हटा सकते हैं तो यही होता है बेसिकली

10:43 डायरेक्ट टैक्स आपकी इनकम पे आपकी सैलरी पे जो टैक्स लगता है आपके बिजनेस के प्रॉफिट पे जो टैक्स लगता है अगर आप एक कॉर्पोरेशन चलाते हैं तो कॉर्पोरेट प्रॉफिट्स पर जो टैक्स लगता है ये एक डायरेक्ट टैक्स होता है जितना ज्यादा इनकम उतना ज्यादा टैक्स एंड दिस ब्रिंग्स अस टू द लास्ट टू एंड मोस्ट इंपोर्टेंट टॉपिक ऑफ दिस वीडियो सबसे पहला है एडवांस टैक्स और दूसरा है न्यू एंड ओल्ड टैक्स रेजीम अगर आपकी टोटल टैक्स लायबिलिटी एक सेट अमाउंट के ऊपर जाती है तो सरकार आपसे कहती है कि आप टैक्स साल में एक बार नहीं बल्कि चार बार दोगे इंस्टॉलमेंट में ये होता है एडवांस टैक्स नाउ लेट्स कम टू द फाइनल एंड मोस्ट इंपोर्टेंट टॉपिक कि ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रेजीम क्या है सिंपल वर्ड्स में समझाऊं क्या होता है एक फ्री टूल भी दूंगा ये समझने कि जब भी आप जॉब स्टार्ट करते हो या फिर ऑलरेडी कर रहे हो तो आपके लिए ऑप्टिमल क्या होगा देखिए किसी भी देश में टैक्स देने के लिए स्लैब्स होते हैं ये जो स्लैब्स होते हैं ये मार्जिनल होते हैं देखिए एग्जांपल के तौर पे मान लीजिए आप जीरो से ₹ लाख तक कमा है तो आपको कोई

11:29 टैक्स नहीं देना 2 लाख से 5 लाख तक कमा रहे है तो 5 पर टैक्स देना है 5 लाख से 75 लाख कमा रहे है तो 10 पर टैक्स देना है अगर आप ₹ लाख कमाते हो तो डज दैट मीन आप 7 लाख का 10 पर यानी 70000 टैक्स दोगे नहीं आप इस 7 लाख की इनकम पर जो 0 टू 2.5 लाख है उस हिसाब से 0 पर दोगे फिर 2.5 टू 5 लाख के लिए 5 पर दोगे और ऐसे ही 5 लाख से 7 लाख के लिए 10 पर दोगे तो इस हिसाब से आप मार्जिनली ब्रैकेट के हिसाब से टैक्स पे करते हो तो ये जो सारे स्लैब्स हमने डिस्कस किए ओल्ड और न्यू रेजीम बस ये अलग-अलग बताते हैं जैसे ओल्ड रेजीम में कुछ स्लैब्स है और न्यू रेजीम में कुछ स्लैब्स है और रूल्स में थोड़े बहुत चेंजेज है ज्यादा कन्फ्यूजिंग नहीं है ओल्ड रेजीम में आपके स्लैब बड़े हैं और न्यू रेजीम में ये छोटे हैं लेकिन ओल्ड रेजीम में आपको कुछ बेनिफिट्स और डिडक्शंस दिए जाते हैं इतने सारे बेनिफिट्स और डिडक्शंस आपको न्यू रेजीम में नहीं दिए जाते तो अब आप कौन सा रेजीम चूज करोगे

12:17 देखिए ओल्ड एंड न्यू रेजीम के कंपैरिजन पे टैक्स प्लानिंग कैसे करनी है इस पर मैं एक पूरा सेपरेट वीडियो बनाऊंगा अगर आप वो देखना चाहते हैं तो मुझे कमेंट्स में बताइए लेकिन आज आपको शॉर्ट में एक एक्सट्रीमली सिंपल टेक्निक बता सकता हूं कि आपके लिए कौन सा रेजीम बेट ये जो चार्ट मैंने आपके स्क्रीन पर डाला है ये आपको दो चीजें बताता है आप एक सेट लेवल ऑफ इनकम कमाते हो और आप एक साल में इन डिडक्शंस के लिए एलिजिबल हो तो इस हिसाब से आपके लिए कौन सा रेजीम सही होगा जैसे अगर आपकी सैलरी ₹10 लाख है और आप ₹ लाख के डिडक्शंस क्लेम कर सकते हो तो इस हिसाब से आपका टैक्स रेजीम ये होगा या फिर अगर आप 8 लाख कमाते हो लेकिन आपको डिडक्शंस मिल रहे हैं 1 लाख के तो उस हिसाब से आपने ये टैक्स रेजीम चूज करना चाहिए बेसिकली देखिए प्रॉब्लम ऐसा है ओल्ड टैक्स रेजीम जो है वहां पे आपको एटीसी के बेनिफिट्स मिलते हैं जैसे अगर आप ईएलएसएस में इन्वेस्ट करते हो पीपीएफ में इन्वेस्ट करते हो तो सरकार आपको अपना टैक्सेबल इनकम कम करने

13:03 अलाव करती है सिंपल वर्ड्स में बोलूं तो आपका कुछ टैक्स माफ करती है लेकिन यही बेनिफिट्स आपको न्यू रेजीम में नहीं मिलते तो बेसिकली आप कितना इनकम कमाते हैं और आप किन डिडक्शंस के लिए एलिजिबल है इसके बेसिस पे डिसाइड किया जाता है कि आप ओल्ड रेजीम चूज करोगे या न्यू और अब प्रॉब्लम ऐसी है कि न्यू रेजीम जो है वो डिफॉल्ट होता है जैसे अगर आप अपने कंपनी को बताते नहीं कि मैं कौन सा रेजीम चूज करूंगा तो कंपनी बाय डिफॉल्ट न्यू के हिसाब से आपका टैक्स काटे गी लेकिन चिंता करने की जरूरत नहीं अगर आप एक सैलरीड एंप्लॉई हो तो आप स्विच कर सकते हो आप जब टैक्स पे करते हो उस टाइम पे अपने चॉइस के हिसाब से रेजीम सेलेक्ट कर सकते हो लेकिन अगर आप एक बिजनेस ओनर है और आपने एक बार न्यू रेजीम चूज कर दिया तो आप फिर एक बार ओल्ड पर नहीं जा सकते ये स्विच का जो ऑप्शन होता है वो आपको सिर्फ एक बार ऑफर किया जाता है अब टैक्स प्लानिंग पर तो मैं एक सेपरेट वीडियो बनाऊंगा इस वीडियो का पूरा पॉइंट यही था कि आपको बताना टैक्स सिस्टम जो है

13:49 वो कैसे काम करती है बेसिक टर्मिनोलॉजी सॉर्ट करनी थी अगर आपको ये वीडियो वैल्युएबल लगा तो चैनल को सब्सक्राइब कीजिए आल सीयू इन द नेक्स्ट वन

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