Complete Modern History in 10 Hours | सुबह 8 बजे | UPSC CSE 2023 & 2024 | Madhukar Kotawe

Brief Summary

ये लेक्चर आधुनिक भारत के इतिहास पर आधारित है, जिसमें 1757 से लेकर 1947 तक की घटनाओं को शामिल किया गया है। इसमें यूरोपियन कंपनियों का भारत में आगमन, ब्रिटिश शासन की स्थापना, स्वतंत्रता संग्राम और भारत का विभाजन जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा, अनअकैडमी के नए बैच और डिस्काउंट के बारे में भी जानकारी दी गई है।

  • यूरोपियन कंपनियों का भारत आगमन
  • 1857 का विद्रोह
  • कांग्रेस की स्थापना
  • भारत का विभाजन

परिचय

इस वीडियो में, यूपीएससी सीएसई हिंदी में आपका स्वागत है। ये मैराथन क्लास है जिसमें आधुनिक भारत का इतिहास कवर किया जाएगा। लेखक का कहना है कि इस क्लास को पूरी ईमानदारी से कवर करें क्योंकि इसमें बहुत मेहनत लगी है। लेखक अनअकैडमी के बारे में बताते हैं, जो 20% का डिस्काउंट दे रहा है एमके लाइव रेफरल कोड के साथ। 20 अप्रैल से एक नया फाउंडेशन बैच शुरू हो रहा है, जो बाइलिंगुअल होगा। 14 अप्रैल तक 20% का डिस्काउंट है। ऑफलाइन बैच भी शुरू हो रहा है करोल बाग में, जिसमें एमके लाइव रेफरल कोड का इस्तेमाल करने पर 10% का डिस्काउंट मिलेगा। सभी मैराथन क्लास के पीडीएफ क्लास के नीचे ही मिल जाएंगे।

आधुनिक भारत का इतिहास

आज हम आधुनिक भारत के इतिहास के बारे में बात करेंगे। आधुनिक भारत का इतिहास 1757 के प्लासी की लड़ाई से शुरू होता है। 1757 का युद्ध करने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी कैसे भारत आई, किन कारणों से भारत आई, और ऐसा क्या हुआ कि यह भारत में सत्ता प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर बैठी, जो कि पूरी तरह से व्यापार के माइंड सेट से आई थी। इस आधुनिक भारत के इतिहास की जड़े कहीं न कहीं मध्य काल में छिपी हुई है। 1757 को समझने के लिए 1498 को समझना होगा। पिक्चर में दो सीन रहेंगे, एक यूरोप का और दूसरा भारत का। 1757 की लड़ाई के बाद पिक्चर पूरी तरह से भारत पर फोकस्ड हो जाएगी।

सिलेबस और किताबें

यूपीएससी प्रीलिम्स में भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन शामिल हैं। मेन्स में जीएस पेपर वन में विश्व का इतिहास और भारतीय विरासत संस्कृति के रूप में है। यूनिट दो, तीन और चार इंडियन मॉडर्न हिस्ट्री को समर्पित हैं। 2017 में नौ क्वेश्चन, 2018 में छह क्वेश्चन, 2019 में 10, 2020 में सात, 2021 में पांच और 2022 में छह क्वेश्चन हैं। हिस्ट्री में एनसीईआरटी की सीरीज सबसे बढ़िया है। आधुनिक भारत में विपिन चंद्रा की किताब आती है। इसके अलावा स्पेक्ट्रम, आजादी के बाद का भारत और आधुनिक विश्व का इतिहास भी पढ़ सकते हैं।

यूरोपियन कंपनियों का भारत आगमन

यूरोपियन कंपनियों का भारत आगमन, 18वीं सदी के मध्य का भारत, बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना, ब्रिटिश साम्राज्यवाद, सामाजिक और धार्मिक सुधार, 1857 की क्रांति, 1857 के विद्रोह के परिणाम, 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी, इंडियन कांग्रेस की स्थापना, भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन, महात्मा गांधी का आगमन, गैर कांग्रेसी संगठन, स्वदेशी आंदोलन, मुस्लिम लीग, साइमन कमीशन, गोलमेज सम्मेलन, कम्यून अवार्ड, पुना पैक्ट, आजाद हिंद फौज, वेवेल योजना, इटली योजना, कैबिनेट मिशन योजना, माउंट बेटन योजना और भारत का विभाजन। कंपनी के शासन के दौरान कुछ कानून पारित हुए, ब्रिटिश क्राउन काल के दौरान अधिनियम हुए, कंपनी शासन काल के प्रमुख गवर्नर जनरल, ब्रिटिश क्राउन काल के प्रमुख गवर्नर जनरल, ब्रिटिश शासन का भारत का इकोनॉमिकल, सोशल और पॉलिटिकल इंपैक्ट, ब्रिटिश शासन के रिलीजन और कल्चर पर क्या इंपैक्ट पड़े, एजुकेशन सिस्टम, प्रेस की स्वतंत्रता, आजादी के बाद देशी रियासतों का एकीकरण, रियासतों के एकीकरण की नीति और सिद्धांत, एकीकरण के बड़े चैलेंज और सरदार पटेल जी की भूमिका पर चर्चा की जाएगी।

यूरोप में 15वीं सदी

15वीं सदी में यूरोप में वैज्ञानिकों का जन्म हुआ, जिन्होंने चर्च के प्रभुत्व को चैलेंज किया। 12वीं-13वीं सदी से ही यूरोप में धार्मिक आंदोलनों का उदय हो चुका था। 15वीं सदी तक यूरोप आधुनिकता के दौर में कदम रख चुका था। राजा-महाराजा लोगों को नई जमीन खोजने के लिए मोटिवेट कर रहे थे। यूरोप के लोग समुद्री मार्ग के नए विकल्पों की खोज कर रहे थे। 15वीं सदी में दिल्ली सल्तनत काल चल रहा था। 1526 में मुगल सत्ता का आगमन हुआ। भारत में युद्ध चल रहे थे, और विज्ञान जैसे विषय के लिए फुर्सत नहीं थी। भारत एक बहुत बड़ा देश था, इसलिए लोग अपनी ही जमीन को यूटिलाइज नहीं कर पा रहे थे।

भारत की ओर

यूरोपियन लोग भारत की ओर इसलिए आना चाहते थे क्योंकि भारतीय कपड़े और मसाले पूरी दुनिया में फेमस थे। यूरोप में आठ महीने बर्फबारी होती है, इसलिए खेती के लिए बहुत कम समय मिलता है। अधिकतर लोग नॉन वेजिटेरियन हैं, और मांस को टेस्टी बनाने के लिए भारतीय मसालों का इस्तेमाल करते हैं। यूरोप का हर देश मसाले और कपड़ों के व्यापार पर मोनोपोली चाहता है। जमीनी मार्ग तुर्की के रास्ते इस्तांबुल से होते हुए भारत तक पहुंच रहा था। 1453 में अरब वासी पूरा रास्ता ब्लॉक कर देते हैं। भारतीय मसाले और कपड़ों की आपूर्ति यूरोप में कम हो गई, और कीमतें आसमान छूने लगी। नई-नई कंपनियां भारतीय मसाले तक पहुंचना चाहती हैं।

वास्कोडिगामा

वास्कोडिगामा 1498 में पुर्तगाली राजा की मदद से भारत की खोज करता है। वास्कोडिगामा भारत से मसाले और कपड़े भरा हुआ जहाज ले जाता है, तो 60 गुना मुनाफा कमाता है। बाकी कंपनियों में एक आनंद की लहर उठती है। सभी लोग वास्कोडिगामा और पुर्तगीज के जहाजों से संपर्क करते हैं और पूछते हैं कि हमें रास्ता बताओ। हर कोई अपने-अपने जहाज लेकर भारत की ओर अग्रसर हो रहा है। ये लोग भारत पर शासन करने के दिमाग से नहीं आ रहे हैं, इनका दिमाग तो केवल भारत के मसाले और भारत के कपड़े किस तरीके से प्राप्त करें ताकि अपने देश में मुनाफा ज्यादा से ज्यादा कम सके। ये लोग अपने जहाजों में सोना चांदी ऐसे कई सारे सिक्के लेकर आ रहे भारत की ओर। हमें सिक्के दे रहे और हमसे मसाले और कपड़े लेकर जा रहे हैं। लगातार भारत की ओर धातु का आगमन हो रहा है, और भारत लगातार अमीर पर अमीर होता जा रहा है।

यूरोपियन कंपनियों का आगमन

15वीं सदी के अंत तथा 16वीं सदी के प्रारंभ में यूरोपियन कंपनियों का भारत में प्रवेश प्रारंभ हुआ। इस समय भारत में दिल्ली सल्तनत काल था। उत्तर वर्ती दिल्ली सल्तनत और पूर्ववर्ती मुगल काल में केंद्रीय सत्ता के मजबूत होने के कारण यूरोपियन कंपनी ने केवल अपने व्यापारिक हितों को महत्व दिया। पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल 1526 में हुआ। इब्राहिम लोदी पराजय होता है, और दिल्ली सल्तनत के स्थान पर मुगल सत्ता कायम होती है। पुर्तगाल, डच, डेनिश की कंपनियां भी अपने व्यापारिक हितों को विकसित करने के लिए क्षेत्रीय संघर्ष में संलग्न हैं। वे कंपनियां यह सोचती थी कि अगर हम सब मिलकर काम करेंगे तो निपट जाएंगे। वही सक्सेसफुल होगा जो केवल एक आखिरी कंपनी के रूप में शेष बचेगा।

15वीं और 16वीं सदी

15वीं और 16वीं सदी में भारत अपने मध्यकाल में है, जबकि यूरोप अपने आधुनिक काल में है। यूरोपियों द्वारा नवीन भौगोलिक खोजें की जाने लगी ताकि अपने व्यापार को वैश्विक स्तर पर प्रसारित कर सके। यूरोपियन देशों द्वारा भारत के जलीय मार्ग के माध्यम से खोज के प्रयास प्रारंभ हुए। 14वीं और 15वीं सदी में स्थलीय व्यापारिक मार्गों में बाधाएं उत्पन्न होने लगी, जिसके कारण यूरोपियन द्वारा भारत और पूर्वी देशों के साथ अपने व्यापार को बेहतर करने के लिए नवीन जल मार्गों की खोज करने लगे। यूरोपियन देशों द्वारा नवीन जलीय मार्गों की खोज क्यों कहानी का वह तीसरा भाग जगह का नाम है कुस्तुनतुनिया अरबों का अधिकार होता है। यूरोपियन द्वारा नई भौगोलिक खोजे क्योंकि यूरोप के कई सारे वैज्ञानिक कई सारे राजा वैज्ञानिक खोजों की ओर आकर्षित हुए और उन्होंने दिशा सूचक यंत्र बनाने शुरू किए जो उन्हें समुद्र में बेहतर दिशा बताने में मदद कर सके।

वास्कोडिगामा का रास्ता

वास्कोडिगामा भारत पहुंचेगा इस रास्ते से। नो डाउट यह रास्ता ज्यादा छोटा है और यह रास्ता बहुत ही बड़ा है। लेकिन शॉर्टकट मिल जाता है जो जमीन से भी छोटा और जमीन पर चलने में रफ्तार कम होती है, पानी पर चलने में रफ्तार ज्यादा तो जमीन से भी बहुत छोटा रास्ता और बहुत ही कम समय में वह भारत पहुंचने की संभावनाओं में जुड़ जाते हैं। 1869 में स्वेज नहर को खुलवा दिया। कुस्तु दुनिया पर अरबों का अधिकार पहले कुस्तु दुनिया जिसे आधुनिक स्थान बुल यूरोप के पूर्वी भाग में तुर्की के अंतर्गत था किंतु 1453 में मध्य एशिया के अरबों ने कुस्तु दुनिया पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया। इसी कारण पूर्वी एशिया और यूरोपियन देशों के बीच व्यापार का जो स्थलीय मार्ग था व रुक गया था।

पुनर्जागरण काल

व्यापार के स्थलीय मार्ग में अवरोध आने से तथा पुनर्जागरण काल के कारण यूरोपियन देश विशेषकर पुर्तगाल और स्पेन के द्वारा नई भौगोलिक खोजें की जाने लगी ताकि व्यापार को पुनः रंभ किया जा सके। भाग्य वश इस समय पुर्तगाल का शासन हेनरी था और हेनरी एक खोजी प्रवृत्ति का शासक था। केंद्री द्वारा समुद्री व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए दिशा सूचक यंत्र के निर्माण को प्रोत्साहन देने के साथ नक्षत्रों की गणना करना नक्षत्र मतलब तारों को देखना उनकी लोकेशन आइडेंटिफिकेशन भी कहा जाता इन दिशा सूचक यंत्रों की सहायता से यूरोपियन व्यापारी समुद्री मार्ग के माध्यम से विदेशी व्यापार के लिए प्रेरित हुए साथ ही हेंद्री ने विदेशी व्यापार के लिए व्यापारी कंपनियों को आर्थिक सहायता भी दी पैसे भी दिए कि तुम जाओ खोजो मेरा पूरा समर्थन है।

जहाज रानी और नव परिवहन

जहाज रानी और नव परिवहन का उच्च स्तर पर विकास यूरोप में 15वीं शताब्दी में हुआ। पुर्तगाल जैसे देश द्वारा निजी व्यापारियों को भी समुद्री जहाजों के निर्माण के लिए मोटिवेट किया गया। इस प्रकार नौ परिवहन के विकास ने भी पूर्वी देशों के साथ यूरोपियन देशों के समुद्री संपर्क को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया। पुर्तगाल के वास्कोडिगामा 1498 में भारत की जमीन पर कदम रखते हैं और भारत की खोज करते हैं। स्पेन का कोलंबस खोज करने निकला था भारत की पर बिचारा पहुंच गया अमेरिका। ब्रिटेन का कैप्टन कुक भी निकला था खोज कर करने और वह पहुंच गया ऑस्ट्रेलिया। हॉलैंड का तस्मान वन डी मंस लैंड या तस्मानिया या न्यूजीलैंड की खोज की थी हॉलैंड के तस्मान ने।

यूरोपियन के भारत आगमन का उद्देश्य

यूरोपियन के भारत आगमन का उद्देश्य मसाले, कपड़े और चाइना का रेशम प्राप्त करना था। थोड़ा बहुत मकसद अपने धर्म का प्रचार करना रहेगा, लेकिन वह प्रारंभिक मकसद नहीं है। यूरोपियन कंपनियों के भारत आगमन का मुख्य उद्देश मसालों का व्यापार था। भारत में आकर यूरोपियन कंपनियों ने विभिन्न स्थानों पर अपनी व्यापारिक बस्तियां स्थापित की। हालांकि य बस्तियां अथवा फैक्ट्री उत्पादन के केंद्र नहीं थे। वस्तु और मसालों आदि का संग्रह कर उन्हें यूरोप भेजा जाता था। यह बस्तियां किले बंद क्षेत्र की तरह होती थी जिनमें वस्तुओं के भंडारण के अलावा कार्यालय और व्यापार के व्यापारियों के आवास ग्रह भी होते थे। भारत में बस्तियों के निर्माण की यह कला पुर्तगालियों द्वारा मूलत इटली के व्यापारियों से प्राप्त की गई।

यूरोपियन कंपनी

भारत में जो यूरोपियन कंपनी आई, उसका सीक्वेंस क्या है? पुर्तगीज, डच, अंग्रेजी, डेनिश और फ्रांसीसी। पुर्तगीज की कंपनी 1498 में बनी थी, और इसने अपनी पहली कोठी 1503 में कोचीन में खोली। डच ईस्ट इंडिया कंपनी 1602 में बनी थी, लेकिन भारत में 1605 में मछली पटनम में खोली। अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 में बनी थी, लेकिन पहली औपचारिक शुरुआत फैक्ट्री की हुई सूरत में 1613 में। डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी 1616 में बनी थी, और वह ट्रंक बेर में अपनी पहली शाखा खोलते हैं। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी सबसे अंत में आती है।

पुर्तगीज का आगमन

पहला पुर्तगीज जो भारत आया वास्कोडिगामा, कालीकट केरल में। अरबों के व्यापारिक प्रभाव को समाप्त करना, मसालों के व्यापार पर मोनोपोली चाहते यही है। भारत में ईसाई धर्म का प्रसार, लेकिन वैसे मैं कहूंगा कि ईसाई धर्म भारत में ऑलरेडी था, लेकिन प्रसार के रूप में नहीं। पुर्तगीज का मेन मकसद धर्म का प्रसार नहीं है, पर ये क्यों धर्म के प्रसार की आड़ लेते थे क्योंकि पुर्तगीज में राजाओं का भले ही प्रभुत्व रहा, लेकिन धर्म का प्रभुत्व उतना तेजी से खत्म नहीं हुआ, तब कई बार चर्च के लोग विरोध करते थे कि आप ऐसी यात्राएं ना करें, तो वह चर्च को क्या बोलकर मनाते थे कि हम आपके धर्म का प्रसार करने जा रहे हैं।

वास्कोडिगामा का रास्ता

वास्कोडिगामा का रास्ता पुर्तगाल से शुरू हुआ, और वह केप वर्डे और कैप ऑफ गुड होप होते हुए कालीकट तट पर स्थित कडा बू नामक स्थान पर पहुंचता है। 1500 ईसवी में पेड्रो अल्वारेज कैब्राल भारत आने वाला दूसरा पुर्तगीज था। 1502 में वास्कोडिगामा पुनः भारत आया था। वास्कोडिगामा जब पुर्तगाल वापस लौटा तो उसने भारत से लेकर गए मसालों को 60 गुना अधिक मूल्य पर बेचा। इससे अन्य पुर्तगाली व्यापारी भी भारत के आगमन के लिए आक हुए। उल्लेखनीय कि कैप ऑफ गुड होप की खोज पुर्तगाली नाविक बार्थो लोमू द्वारा की गई थी। कालीकट का जो राजा था उस समय में जमोरिन था वास्कोडिगामा का स्वागत किया। हालांकि भारत में पहले से विद्यमान अरब व्यापारी थोड़ा सा जमोरिन के इस कदम का विरोध करेंगे।

पुर्तगालियों के भारत में

1503 में पुर्तगालियों ने कोचीन में अपनी पहली व्यापारी कोठी की स्थापना की। पुर्तगालियों के भारत में प्रथम दुर्ग का निर्माण 1503 में अल्बूकर्क ने किया। पुर्तगालियों के द्वारा जो पहला गवर्नर नियुक्त किया था उसका नाम था फ्रांसिस्को डी अलमेडा। 1509 में फ्रांसिस्को डी अलमेडा ने दीव पर अधिकार कर लिया। साथ ही अलमेड़ा ने हिंद महासागर के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित किया। नियंत्रण स्थापित करके ब्लू वाटर पॉलिसी या शांत जल की नीति को अपनाया। वस्तुत अलमेड़ा का दूर दृष्टि का परिणाम था कि उसने उस समय भारतीय शासकों के विपरीत समुद्री व्यापार के महत्व को समझ लिया। इस समय पुर्तगालियों का प्रमुख उद्देश्य शांतिपूर्वक व्यापार करना और भारत में मसालों के व्यापार पर मोनोपोली करना परंतु ब्लू वाटर पॉलिसी ने समुद्री क्षेत्र में पुर्तगालियों की व्यापारिक महत्वाकांक्षा को बढ़ा दिया।

अल्बूकर्क

1509 में अल्बूकर्क भारत में पुर्तगाली गवर्नर बनकर आया। अल्बूकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। अल्बूकर्क ने भारतीयों को भी पुर्तगाली सेना में छोटे पदों पर भर्ती किया। निम्न वर्गीय पुर्तगालियों को भारतीय स्त्रियों से विवाह करने हेतु प्रेरित किया ताकि भारत में पुर्तगाली बस्तियां बसाई जा सके और सुगमता पूर्वक व्यापार किया जा सके। अल्बूकर्क ने कोचन के क्षेत्र में सती प्रथा पर रोक लगा दी। 1510 में अल्बूकर्क ने बीजापुर के शासक आदिल शाह यूसुफ से सैन्य अभियान के माध्यम से गोवा जीत लिया। इसके अलावा अल्बूकर्क ने 1511 में दक्षिण पूर्व एशिया के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र मलक्का और 1515 में फारस की खाड़ी तट पर स्थित हरमुज समुद्री क्षेत्र पर भी कब्जा कर लिया। भारत में आने वाले सबसे पहले लोग पुर्तगाली और सबसे आखिरी में जाने वाले भी पुर्तगाली।

नीनू डी कुन्हा

1529 में नीनू डी कुन्हा भारत में गवर्नर बनकर आया। कुन्ने भारत में पुर्तगाली राजधानी कोचीन की जगह गोवा को बनाया। कुन्हा द्वारा स्थापित पुर्तगाली बस्तियां मद्रास में सिथो, बंगाल में हुगली और काठिया वार्ड में दीव। भारत में पुर्तगालियों के फैक्ट्री सबसे पहले आई कोचीन, कन्नूर, गोवा, चटगांव, सतगांव, दीव और दमन। यूरोपियन शक्तियों में सर्वप्रथम पुर्तगाली व्यापारियों ने भारत में समुद्रिक व्यापार केंद्र स्थापित किए। 1632 में मुगल सम्राट शाहजा ने हुगली में पुर्तगाली बस्तियों को पूर्णतः नष्ट करने का आदेश दिया क्योंकि पुर्तगालियों द्वारा हुगली को बंगाल की खाड़ी में समुद्री लूटपू के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा था। पुदुचेरी पर कब्जा करने वाली पहली यूरोपियन शक्ति पुर्तगाली थी।

पुर्तगाली, डच और फ्रांसीसी

पुदुचेरी में सर्वप्रथम पुर्तगालियों ने अपना उपनिवेश स्थापित किया। इसके बाद डचों ने पुदुचेरी में अपनी व्यापारिक कोठियां खोली थी। 1673 में फ्रांसी सियों ने पदुचे में अपनी पहली व्यापारिक कोठी खोली। अंततः 1793 में अंग्रेजों ने पुदुचेरी को पूर्णत अपने नियंत्रण में ले लिया और 1763 में पेरिस की संधि के तहत पदुचे पुनः किसके हाथ में आ गई फ्रांसीसी हो के। तो एक बार सीक्वेंस पहले आए पुर्तगीज फिर डच अंग्रेज और फिर फ्रांस। फाइनली आजादी के समय उन पर फ्रांसी सियों का कब्जा रहा।

कार्टस आरमेडा काफिला पद्धति

पुर्तगालियों ने जब भारत के तटवर्ती क्षेत्रों सहित हिंद महासागर में स्थित मजबूत स्थिति मजबूत कर ली तो कार्टस आरमेडा काफिला पद्धति का अनुसरण किया। इस पद्धति के तहत पुर्तगालियों ने भारतीय और अरब व्यापारी के समुद्री जहाजों को बिना परमिट के अरब सागर में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया। यहां तक कि उन्होंने यह भी बता दिया कि जो काली मिर्च होगी वह भी आप इस समुद्र मार्ग से लेकर नहीं जा सकते। यह परमिट प्रणाली इतनी मजबूत थी कि स्वयं मुगल सम्राट अकबर के जहाजों को भी अरब सागर में प्रवेश करने के लिए परमिट की जरूरत होती थी।

पुर्तगालियों की सफलता और असफलता

पुर्तगालियों की भारत में सफलता के कारण पुर्तगाली शासन के द्वारा उन्हें सहयोग मिला, नौसेना की क्षमता अच्छी थी, काफी अच्छे गवर्नर आए, तटवर्ती क्षेत्रों पर नियंत्रण को प्राथमिकता दी, ब्लू वाटर पॉलिसी और भारतीय शासकों की अयोग्यता और दूरदर्शिता। पुर्तगीज भारत में असफल भी हुए, भारतीय जनता के प्रति असहिष्णुता, ईसाई धर्म का थोड़ा प्रसार और भारत में ऑलरेडी मुस्लिम और हिंदू धर्म प्रचलित थे, पुर्तगालियों द्वारा नए उपनिवेश किसकी खोज कर ली देखो भारत से बड़ा संसाधन हाथ में लग गया था इनके ब्राजील और पूरे ब्राजील पर इनका ही शासन रहा आज भी ब्राजील की भाषा पुर्तगीज है। अन्य यूरोपियन कंपनी से कंपटीशन मिलने लगा और भारत से प्राप्त लाभ को इन्होंने इन्वेस्ट बल्कि भारत के लाभ को वही पर पुर्तगाल में ही छोड़ देते थे। पुर्तगालियों की भारत को क्या देन रही पुर्तगालियों ने भारत में गन्ना, अनानास, पपीता, आलू और मक्का लाया। भारत के तटवर्ती क्षेत्रों में कैथोलिक ईसाई धर्म का प्रचार किया। 1556 में गोवा में भारत की पहली प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना करने का श्रेय भी पुर्तगीज को जाता है। समुद्री व्यापारिक महत्व का परिचय, समुद्री जहाज निर्माण का परिचय और भारत में गोथिक विक्टोरियन स्थापत्य कला। पुर्तगाल सबसे पहले भारत आए और सबसे अंत में भारत से गए। औपचारिक रूप से गोवा दमन 1961 तक पुर्तगाली सरकार के अधीन रहा।

डचों का आगमन

डचों का आगमन मतलब नीदरलैंड और हॉलैंड के निवासी। पुर्तगालियों के बाद भारत में व्यापारिक उद्देश्यों के लिए आने के क्रम में दूसरे नंबर पर। भारत में वस्त्रों के निर्यात सर्वप्रथम डचों को ही जाता है। पुर्तगालियों के आगमन के लगभग 100 वर्ष बाद डच पहली बार भारत आए। 1595 में डचो का भारत में प्रथम दल कार्नेलियस हाउट मेन के नेतृत्व में भारत आया था। डचों ने इंडोनेशिया के बाट विया को अपना मुख्यालय बनाया। 1605 में डचो ने आंध्र प्रदेश के मछली पटनम में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की। डचों की बंगाल में पहली कंपनी बनी पीपली में 1627 में। इसके कुछ ही दिनों बाद डच पीपली से बालासोर चले गए। बंगाल में डचों ने 1635 से लेकर 1656 तक कई हुगली में कारखाने बना दिए। 1653 में स्थापित फैक्ट्री डचो का व्यापारिक मुख्य केंद्र बनी। 17वीं सदी की समाप्ति तक डच कंपनियां कासिम बाजार, पटना, ढाका, मालदा, बालासोर, बंगोर, जुगिया, फतवा इत्यादि स्थानों पर स्थापित हो चुके थे।

अंग्रेजों का आगमन

अंग्रेज 1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना ब्रिटेन में करेंगे। कंपनी का औपचारिक नाम था द गवर्नर एंड कंपनी ऑफ मर्चेंट ऑफ ट्रेडिंग इनटू द ईस्ट इंडीज। कंपनी का गठन मूलत पूर्वी देशों के साथ व्यापार के संदर्भ में। कंपनी का मुख्य उद्देश्य पूर्व के साथ मसाले और काली मिर्च। महारानी एलिजाबेथ ने 15 वर्षीय व्यापारिक एकाधिकार की अनुमति दी। 1608 में कैप्टन हॉकिंस के नेतृत्व में एक दल सूरत पहुंचा। 1613 में जहांगीर के द्वारा कंपनी को सूरत में व्यापारिक कोठी स्थापित करने की अनुमति मिली। भारत से मसालों के साथ ही सूत, सूती कपड़ा, नील, पोटेशियम नाइट्रेट और चाय का निर्यात करने लगी। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1623 तक सूरत, मछली पट्टनम, भड़क, अहमदाबाद और आगरा में भी कोठी खोली। अंग्रेजों की बढ़ती व्यापारी गतिविधियों के कारण पुर्तगालियों के साथ उनके संघर्ष प्रारंभ हुए। 1620 में नौसेना युद्ध में अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को पराजित कर दिया। 1698 में बंगाल के सूबेदार अजीमो शान ने अंग्रेजों को सूता नाती, गोविंदपुर, कालीकट की जमींदारी प्रदान की। इन्हीं स्थानों को मिलाकर जॉब चरनॉक ने कलकत्ता में फोर्ट विलियम की स्थापना की जिसका प्रथम अध्यक्ष चार्ल्स आयर था।

फरूक सियर

1717 में मुगल सम्राट फरूक सियर के द्वारा दस्तक नामक एक शाही फरमान जारी किया जिसके तहत ब्रिटिश कंपनी को पूरे बंगाल में बिना कोई शुल्क दिए व्यापार करने की अनुमति मिल गई। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में पहली अनौपचारिक कोठी की स्थापना मछली पट्टनम में लेकिन औपचारिक कोठी सूरत में। फ्रांसी सियों द्वारा भी भारत में अपने सबसे पहला कारखाना सूरत में ही लाया गया। लिवें कंपनी 1593 में स्थल मार्ग से भारत में व्यापार करने का अधिकार पत्र प्राप्त हुआ। 1599 में लंदन के कुछ व्यापारियों ने लॉर्ड मेयर की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में पूर्वी द्वीप समूह के साथ व्यापार करने की नई योजना तैयार हुई। इन व्यापारियों ने पूर्वी के देशों के साथ व्यापार करने के आशय से 1599 में कंपनी का गठन किया और फिर जाकर इस कंपनी का ही नाम रखा गया था ईस्ट इंडिया कंपनी। 17वी शताब्दी के पहले चतुर्थांश में ईस्ट इंडिया कंपनी का कारखाना स्थित था बड़ो में।

डेनिश और फ्रांसीसी

161 में डेनिश व्यापारिक कंपनी का भारत आगमन। 1620 में त्रावणकोर तंजोर में पहली व्यापारी कोठी। इसके लंबे समय के बाद 1676 में बंगाल के सेरामपुर में दूसरी कोठी। डेनिश कंपनी ने भारत में व्यापारिक उद्देश्यों को अधिक प्राथमिकता नहीं दी। अतः 1745 में अपनी सभी भारतीय व्यापारिक कोठियों को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बेचकर भाग गए। 1664 में फ्रांस के तत्कालीन सम्राट लुई 14 के वित्त मंत्री कोलबर्ट ने फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की। फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनी के भारत में देरी से आने का एक लाभ यह हुआ कि कंपनी को भारत में अपनी व्यापारिक कोटि स्थापित करने के लिए ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। फ्रांसीसी कंपनी ने 1668 में अपनी पहली व्यापारी कोठी सूरत में खोली। 1669 में अगली व्यापारी कोठी मछली पटनम। शीघ्र ही फ्रांसिस और ब्रिटिश व्यापारी कंपनियों में प्रतिस्पर्धा और परस्पर संघर्ष का प्रारंभ हो गया।

कर्नाटक के युद्ध

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और फ्रांसीसी कंपनी के बीच कर्नाटक के तीन युद्ध होते हैं, जिसमें अंतिम रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की निर्णायक जीत होती है। कर्नाटक के युद्ध भारत में अंग्रेज और फ्रांसी सियों के बीच लड़े गए युद्धों को कर्नाटक युद्धों के नाम से जाना जाता है। कर्नाटक का प्रथम युद्ध 1746 से 1748, कर्नाटक का द्वितीय युद्ध 1750 से 1752 और कर्नाटक का तृतीय युद्ध 1758 से 1763। प्रथम कर्नाटक युद्ध एक्सला चेप की संधि से अंत, द्वितीय कर्नाटक युद्ध अनिर्व कर्नाटक युद्ध पेरिस की संधि से अंत। प्रथम कर्नाटक युद्ध ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकारी के युद्ध के साथ प्रारंभ। 1746 में भारत में भी युद्ध शुरू हुआ। यूरोप में ऑस्ट्रिया के उत्तराधिकारी युद्ध की समाप्ति एक्सला शफल की संधि होती है। इसके परिणाम स्वरूप भारत में भी युद्ध समाप्त हो जाता है।

कर्नाटक का दूसरा युद्ध

कर्नाटक का दूसरा युद्ध कर्नाटक के नवाब के पद के लिए संघर्ष। कर्नाटक के नवाब के लिए फ्रांसी सियों ने चांद साहब का समर्थन किया और वही अंग्रेजों ने अनवर उद्दीन का समर्थन। दक्कन के सूबेदार के लिए फ्रांसी सियों ने मुजफ्फर जंग का समर्थन किया और अंग्रेजों ने। चांद साहब और फ्रांसीसी सेना ने संयुक्त रूप से अनवर उद्दीन को हरा दिया। तीसरा कर्नाटक युद्ध यूरोप में शुरू होता है सप्त वर्षीय संघर्ष। भारत में अंग्रेज और फ्रांसीसी के बीच फाइनली एक शांति समाप्त जो कायम हुई थी युद्ध के बाद वह समाप्त होती है। इस युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसी सियों को पराजित किया और इसी हार के बाद भारत में फ्रांसी सियों का अस्तित्व लगभग समाप्त।

फ्रांसीसी कंपनी हार के कारण

फ्रांसीसी कंपनी हार के कारण फ्रांसीसी कंपनी के कंपनी थी और इसलिए निर्णय लेने में टाइम लग जाता था। इसके लाभ और हानि के प्रति कंपनी के डायरेक्टर उदासीन थे। यूरोप में संघर्ष में फ्रांसी सियों का उलझे रहना और भारत में कंपनी की गतिविधि पर अधिक ध्यान ना देना। अंग्रेजों का बंगाल पर नियंत्रण था जहां से अंग्रेजों को पैसे की बड़ी प्राप्ति भी हुई। अंग्रेजी कंपनी का राजनीतिक और सैनिक नेतृत्व फ्रांसीसी कंपनी के अपेक्षा ज्यादा बेटर था। फ्रांसीसी की पराजय का एक प्रमुख कारण था उनकी कमजोर नौसेना। भारत में ब्रिटिश सफलता के क्या कारण रहे कुशल नेतृत्व, आधुनिक हथियार, सबसे उन्नत नौसेना, 18वीं शताब्दी में भारतीयों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले हथियार बेहद धीमे और भारी थे, जबकि अंग्रेजों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले यूरोपीयन बंदु के ओर तोपे भारतीय हथियारों के बजाय ज्यादा एडवांस थी। सुशासन, कुशल नेतृत्व और पैसों की तो कमी थी नहीं और उनके अंदर राष्ट्रवाद की भावना थी।

डुपले

डुपले फ्रांसिस ईस्ट इंडिया कंपनी की व्यापारिक सेवा में भारत आया और 1731 ईवी में चंद्रनगर का गवर्नर बना। डुपले की कार्य कुशलता को देखते हुए उसे 1741 में अधिक महत्त्वपूर्ण क्षेत्र पदु चेरी का गवर्नर बना दिया गया। 1754 में डुप्ले को वापस बुला लिया गया। डुपले ने फ्रांसीसी कंपनी के अधिकारी और कर्मचारियों को निजी व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी थी। डुपले की गलती दक्षिण भारत में इतना जूझ गया डुपले कि भूल गया उत्तर भारत ही केंद्रीय सत्ता का केंद्र बिंदु है। डुपले प्रथम यूरोपियन था जिसने भू क्त्र अर्जित करने के उद्देश्य से भारतीय राजाओं के झगड़ों में में भाग लेने की नीति आरंभ की। डुपले ने ही पहली बार यूरोपियन सेना को भारतीय राज दरबारों में भारतीय व्यय पर नियुक्त करवाया। पहली बार यूरोपियन हितों के लिए भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप किया और भारत में यूरोपियन साम्राज्य की नीव रखी।

महत्वपूर्ण तथ्य

वास्को डिगामा भारत आने वाला पहला यूरोपियन यात्री। पेड्रो अल्वारेस के बाल दूसरा पुर्तगाली। फ्रांसिस्को अलमेड़ा भारत का पहला गवर्नर भी कह सकते या पुर्तगाल या यूरोपियन गवर्नर भी कह सकते हैं। जॉन मिल्न हॉल भारत आने वाला प्रथम ब्रिटिश नागरिक। कैप्टन हॉकिंस प्रथम अंग्रेज दूत जिसने सम्राट जहांगीर से भेंट की। गेरो अंगिया बंबई का संस्थापक। जॉब चरनॉक कोलकाता का संस्थापक। चार्ल्स फोर्ट विलियम 1781 का प्रथम प्रशासक।

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डचों का आगमन

डचों का आगमन मतलब मूल रूप से नीदरलैंड और हॉलैंड के निवासी। पुर्तगालियों के बाद भारत में व्यापारिक उद्देश्यों के लिए आने के क्रम में दूसरे नंबर पर। भारत में वस्त्रों के निर्यात सर्वप्रथम डचों को ही जाता है। डचों ने इससे पहले इंडोनेशिया में अपनी व्यापारिक गतिविधियां शुरू की। 1595 में डचो का भारत में प्रथम दल कार्नेलियस हाउट मेन के नेतृत्व में भारत आया था। डच व्यापारिक कंपनी का मूल नाम था यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी ऑफ नीदरलैंड। डचों ने इंडोनेशिया के बाट विया को अपना मुख्यालय बनाया। 1605 में डचो ने आंध्र प्रदेश के मछली पटनम में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की। डचों की बंगाल में पहली कंपनी बनी पीपली में 1627 में। इसके कुछ ही दिनों बाद डच पीपली से बालासोर चले गए। बंगाल में डचों ने 1635 से लेकर 1656 तक कई हुगली में कारखाने बना दिए। 1653 में स्थापित फैक्ट्री डचो का व्यापारिक मुख्य केंद्र बनी। 17वीं सदी की समाप्ति तक डच कंपनियां कासिम बाजार, पटना, ढाका, मालदा, बालासोर, बंगोर, जुगिया, फतवा इत्यादि स्थानों पर स्थापित हो चुके थे।

अंग्रेजों का आगमन

अंग्रेज 1600 में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कहां करेंगे कंपनी की स्ता ब्लिश ब्रिटेन में। कंपनी का औपचारिक नाम था द गवर्नर एंड Company ऑफ मर्चेंट ऑफ ट्रेडिंग इनटू द ईस्ट इंडीज। कंपनी का गठन मूलत पूर्वी देशों के साथ व्यापार के संदर्भ में। कंपनी का मुख्य उद्देश्य पूर्व के साथ मसाले और काली मिर्च। महारानी एलिजाबेथ ने 15 वर्षीय व्यापारिक एकाधिकार की अनुमति दी। 1608 में कैप्टन हॉकिंस के नेतृत्व में एक दल सूरत पहुंचा। 1613 में जहांगीर के द्वारा कंपनी को सूरत में व्यापारिक कोठी स्थापित करने की अनुमति मिली। भारत से मसालों के साथ ही सूत, सूती कपड़ा, नील, पोटेशियम नाइट्रेट और चाय का निर्यात करने लगी। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1623 तक सूरत, मछली पट्टनम, भड़क, अहमदाबाद और आगरा में भी कोठी खोली। अंग्रेजों की बढ़ती व्यापारी गतिविधियों के कारण पुर्तगालियों के साथ उनके संघर्ष प्रारंभ हुए। 1620 में नौसेना युद्ध में अंग्रेजों ने पुर्तगालियों को पराजित कर दिया। 1698 में बंगाल के सूबेदार अजीमो शान ने अंग्रेजों को सूता नाती, गोविंदपुर, कालीकट की जमींदारी प्रदान की। इन्हीं स्थानों को मिलाकर जॉब चरनॉक ने कलकत्ता में फोर्ट William की स्थापना की जिसका प्रथम अध्यक्ष चार्ल्स आयर था।

फरूक सियर

1717 में मुगल सम्राट फरूक सियर के द्वारा दस्तक नामक एक शाही फरमान जारी किया जिसके तहत ब्रिटिश कंपनी को पूरे बंगाल में बिना कोई शुल्क दिए व्यापार करने की अनुमति मिल गई। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में पहली अनौपचारिक कोठी की स्थापना मछली पट्टनम में लेकिन औपचारिक कोठी सूरत में। फ्रांसी सियों द्वारा भी भारत में अपने सबसे पहला कारखाना सूरत में ही लाया गया। लिवें कंपनी 1593 में स्थल मार्ग से भारत में व्यापार करने का अधिकार पत्र प्राप्त हुआ। 1

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0:00 हाय एवरीवन लेट्स क्रैक यूपीएससी सीएसई हिंदी में आप सभी का भरपूर स्वागत है इंतजार हुआ खत्म आपका अगला मैराथन जो कि काफी लंबे समय के बाद आया मैं आपको एक दावे के साथ बात बता दूं कि इससे ज्यादा बेहतर रिवीजन यदि आपको पूरे [संगीत] के साथ बिल्कुल लेटेस्ट डाटा के साथ सारी चीजों को मैंने अपडेट करवा दिया है यह मेरा थन आप पूरा कंप्लीट करिएगा तो यह जो पूरा का पूरा मैराथन क्लास है मेरी बस हाथ जोड़कर विनती है पूरा ईमानदारी से कवर

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4:41 इंग्लिश वालों को इंग्लिश मीडियम में बस एक छोटी सी विनती है शेयर लाइक जरूर करिएगा हर विद्यार्थी हर विद्यार्थी क्लास के बाद एक कमेंट जरूर छोड़कर जाए एप्रिसिएशन वाला सजेशन वाला जो भी आपको जैसा लग रहा हो हर विद्यार्थी एक कमेंट्स कर दे तो मान ली गुरु दक्षिणा मिल गई है तो हम आज बातचीत जो करने वाले हैं इंडियन मॉडर्न हिस्ट्री मतलब हमारा जो आज का टारगेट है आधुनिक भारत का इतिहास वैसे तो आधुनिक भारत का इतिहास यह शब्द ही गलत है क्योंकि क्या गुलामी आधुनिकता है अगर गुलामी आधुनिकता है तो फिर यह

5:29 वतमान क्या है तो आधुनिक भारत का इतिहास कहीं न कहीं वेस्टर्न कल्चर के कारण डिवाइड किया गया हिस्टोरिकल क्लासिफिकेशन है आधुनिक भारत का इतिहास वैसे तो शुरू होता है 1757 के प्लासी की लड़ाई से उसका कारण यह है क्योंकि शासकों के बदलाव से ही एक नए प्रकार की पूरी व्यवस्था कायम होती है जैसे प्राचीन काल का इतिहास हम मानते हैं कि 712 ईस्वी में समाप्त होता है क्योंकि भारत पर विदेशी कई प्रकार के लोग आक्रमण करना प्रारंभ करते हैं और हम कहते कि भारत में एक नई प्रकार की व्यवस्था का प्रारंभ हुआ तो हम इस कारण

6:17 से कहते कि 712 से कहीं ना कहीं मध्यकालीन भारत का इतिहास शुरू होता है लेकिन 712 से लेकर 1192 तक का जो इतिहास है उसको हम कहते पूर्व मध्यकाल क्योंकि वह बड़े बदलाव हम नहीं देख पाते जिसकी हम बातचीत कर रहे थे फिर 1112 से हम मानते हैं कि मध्यकालीन भारत का प्रॉपर इतिहास शुरू होता है क्योंकि दिल्ली की सल्तनत दिल्ली की राजगद्दी पर अब एक ऐसा शासक है जो भारत का रहने वाला नहीं है हम कह सकते हैं कि दिल्ली सल्तनत काल का शुभारंभ होता है इसी कड़ी में 1757 का वो प्लासी का युद्ध जिसमें एक ऐसी सत्ता कायम होती है एक ऐसा शासक आता है जो भारत का पड़ोसी

7:05 विदेशी ना होकर काफी दूर का व्यक्ति है यूरोप का ईस्ट इंडिया कंपनी का वास्तविक पहला जो हम कहेंगे कि बड़े राज्य को कैप्चर करने की रणनीति होती वह है बंगाल और 1757 की स् पलासी की लड़ाई में बंगाल जब वह जीतते हैं तो हम मानते हैं कि भारत में एक नई शासन व्यवस्था का शुभारंभ होता है और इसलिए एक नए प्रकार के शासक के कारण हम उसे आधुनिक भारत इतिहास का शुरुआत या शुभारंभ मानते हैं तो वैसे तो मॉडर्न हिस्ट्री 1757 से शुरू होनी चाहिए लेकिन क्योंकि इस मॉडर्न हिस्ट्री में 1757 के युद्ध से शुरुआत करने में कहानी एक अधूरी सी रह जाएगी कि यह 1757 का युद्ध करने

7:53 वाली ईस्ट इंडिया कंपनी कैसे भारत आई किन कारणों से भारत आ और ऐसा क्या हुआ कि यह भारत में सत्ता प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर बैठी जो कि पूरी तरह से व्यापार के माइंड सेट से आई थी तो कहने का अभिप्राय यह है इस आधुनिक भारत के इतिहास की जड़े कहीं न कहीं मध्य काल में छिपी हुई है तो उन जड़ों से शुरुआत करते हुए हम इसके आधुनिक भारत के इतिहास की उस कहानी को शुरू करेंगे जो खत्म होगी 1947 या हम कहेंगे कि 1947 के बाद भी 2022 तक खींचा उसे जा सकता है इस पूरी कहानी

8:40 में हमें केवल ज्यादा से ज्यादा समझना है कि किस तरीके की रणनीति किस तरीके की विचारधारा और किस तरीके के प्लानिंग के तहत यह पूरा जो शासन व्यवस्था है काम कर रही होगी तो अगर हमें 1757 समझना है तो हमें समझना होगा 1498 को हमें समझना पड़ेगा उस समय की रणनीतियों को अब यहां पिक्चर में दो सीन रहेंगे पिक्चर का एक सीन यूरोप का रहेगा जहां यूरोप में होने वाले बदलाव यूरोप में होने वाले परिवर्तन उस पिक्चर के सीन को हम इमेजिन करेंगे क्योंकि वह जो सीन वहां हो रहा है उसके असर हमें भारत में भी

9:26 दिखाई देंगे क्योंकि जो घटनाक्रम वहां होंगे उन्हीं घटनाक्रम को लेकर व्यापारी भारत की ओर मुड़ रहे हैं तो पिक्चर में हमेशा दो कहानियां चलेगी पैरलल एक कहानी यूरोप की होगी और दूसरी कहानी उसका हिस्सा भारत और जैसे ही 1757 के लड़ाई होती है फिर पिक्चर पूरी तरह से भारत पर फोकस्ड हो जाएगी क्योंकि अब हम देखेंगे कि भारत में उसके बाद किस तरीके के बदलाव और परिवर्तन आ रहे हैं तो एक छोटे तौर पर पहले मैं आपको थोड़ा इंट्रोड्यूस करा देता हूं सिलेबस के बारे में कितना इंपॉर्टेंस है इंडियन मॉडर्न हिस्ट्री और फिर हम शुरुआत करेंगे बिल्कुल रफ्तार के साथ इंडियन

10:11 मॉडर्न हिस्ट्री तो पहले एक नजर डालते हैं हमारी यूपीएससी ने प्रीलिम्स में केवल जो शब्द यूज किया है भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन अब जब भारत का इतिहास वर्ड आया तो इसमें एंस भी आ गया मिडिवल भी आ गया और मॉडर्न भी आ गया यूपीएससी ऐसी बातें कई बार करती है यूपीएससी ऐसा कई बार कर देती है चीजों को कि क्लियर नहीं करती और इसका परिणाम यह हो जाता है कि बाद में सवाल पूछो तो कहती है कि मैंने बता दिया था कि मैं कुछ भी पूछ सकती हो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन लेकिन मेंस में जीएस पेपर वन में डिफाइन है जो कि विश्व का इतिहास और भारतीय विरासत संस्कृति के रूप में लेकिन यहां पर

10:59 क्लियर उन्होने सिलेबस में दिया हुआ है कि यूनिट वन में आपको कल्चर पढ़ना होगा यूनिट दो यूनिट तीन और यूनिट चार इंडियन मॉडर्न हिस्ट्री को समर्पित है जैसे 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर तो 18वीं सदी 1700 से 1799 लेकिन वो कह रहा है 1700 18वीं सदी के लगभग मध्य से इसीलिए मतलब हमने कहा कि कब से शुरुआत करेंगे 1757 वहां से जो परिवर्तन आएंगे आधुनिक भारतीय इतिहास की महत्त्वपूर्ण घटनाएं व्यक्तित्व और विषय फिर यूनिट तीन में दिया हुआ है भारत का फ्रीडम स्ट्रगल इसके अलग-अलग स्टेजेस क्या थी देश के विभिन्न

11:45 भागों में इसने अपना योगदान उनमें महत्त्वपूर्ण लोग उनका क्या योगदान रहा और यूनिट चार है आजादी के बाद किस तरीके से भारत में इंटीग्रेशन हुआ हम कहेंगे कि राज्यों को या देसी रियासतों को जोड़कर कैसे राष्ट्र का निर्माण हुआ और पांचवी यूनिट में आ जाता है वर्ल्ड हिस्ट्री तो वर्ल्ड हिस्ट्री हमें पढ़ना नहीं मतलब मेंस में यूनिट दो यूनिट तीन और यूनिट चार जीएस पेपर वन मॉडर्न हिस्ट्री से जुड़ा हुआ है तो हम जरा सिलेबस देखें उसके पहले एक नजर क्वेश्चन पर डाल दीजिए 2017 में नौ क्वेश्चन तो 2018 में छह क्वेश्चन 2019 में 10 20 में सात 21 में पाच और 22 में

12:31 छह क्वेश्चन है तो मिनिमम पांच और मैक्सिमम 10 एक मोटे तौर पर सात से आठ क्वेश्चन आप मान के चलिए कि हम उसकी तैयारी कर रहे हैं अगर हम किताबों की बात करें तो सबसे बढ़िया किताब वैसे हिस्ट्री में एनसीआरटी की सीरीज मानी जाती है जो पुरानी वाली एनसीआरटी है जिसमें प्राचीन भारत में राम शरण शर्मा की किताब है मध्यकालीन भारत में सतीश चंद्र की किताब है और आधुनिक भारत में विपिन चंद्रा की ये किताब आती है पर कई लोगों का है कि दिल है कि मानता नहीं तो स्पेक्ट्रम है भारत का इतिहास अगर आपका फिर भी मन ना भरे तो आजादी के बाद का भारत आजादी के बाद का मतलब जिसे हम कह सकते हैं कि पोस्ट इंडिपेंडेंस विपिन चंद्रा के

13:16 साथ-साथ कुछ और राइटर और आधुनिक विश्व का इतिहास है लाल बहादुर वर्मा जी की किताब ठीक-ठाक कही जाती है यह केवल वर्ड हिस्ट्री के लिए है ये ओवरऑल हिस्ट्री वाले सेगमेंट को कवर करने के लिए फिर भी है ऐसा कि भा मन ना लगे कि नहीं फिर भी अच्छा नहीं लग रहा और कुछ पढ़ने का मन है तो तमिलनाडु बोर्ड में इंग्लिश मीडियम की किताबें अच्छी किताबें मानी जाती है क्योंकि सिस्टमिक ढंग से चीजों को बताने की कोशिश की गई है बट इसका मतलब यह नहीं कि आपके पास कोई और किताब हो आप उसे भी पढ़ सकते हैं क्योंकि इतिहास में हर व्यक्ति के विचारों में थोड़े बहुत बदलाव मिलेंगे लेकिन फैक्ट तो लगभग सब जगह पर सेम होते हैं अब हमने सिलेबस को कैसे तोड़ा है थोड़ा उसे समझ लेते हैं यूरोपियन कंपनियों का भारत आगमन सबसे पहला पड़ाव

14:03 हमारा यहां होगा हम जानेंगे कि वह वास्कोडिगामा क्यों घूम रहा है क्यों भारत का भ्रमण करना चाहता है भारत की ओर क्यों आकर्षित हुआ है वास्कोडिगामा के बाद फिर दूसरी कंपनियां क्यों भारत की ओर आई होगी फिर 18वीं सदी के मध्य का भारत सीधे 1757 की कहानी पर आएंगे बंगाल में किस तरीके से ब्रिटिश सत्ता की स्थापना हुई प्लासी की लड़ाई बंगाल का युद्ध इ बा की संधि ब्रिटिश साम्राज्यवाद यहां थोड़ा सा कांसेप्चुअल चीजें समझनी है कि ब्रिटेन का जो भी व्यक्ति यहां आ रहा है वह क्या माइंडसेट लेकर आ रहा है उसके दिमाग में क्या कहानी चल रही है फिर हमारे देश में इस परिवर्तनों ने कुछ पढ़े लिखे लोगों को जन्म दिया और इन पढ़े लिखे लोगों के कारण देश में सामाजिक और धार्मिक सुधारों की एक

14:51 बहुत लंबी श्रंखला शुरू होती है 1857 की क्रांति के पूर्व भी कुछ छोटे-छोटे विद्रोह हुए थे लेकिन 1857 का जो विद्रोह था वह अपने आप में बड़े स्तर पर था काफी लंबे समय तक रहा और पूरे भारत और पूरी राजनीतिक सत्ता को उसने हिलाने की ताकत रखी 1857 का विद्रोह हुआ उसके क्या परिणाम रहे सारी बातों के बाद 18582 इंडिया कंपनी एक समय में ब्रिटिश की प्रतिनिधि का काम करती थी उसको पूरी तरह से दरकिनार करते हुए ब्रिटिश स ने भारत को सीधे अपने नियंत्रण में लिया होता है यह

15:42 18581 में कांग्रेस की स्थापना के पहले भी कई छोटे-छोटे संगठन बने लेकिन उन सभी संगठनों की कार्य प्रणाली काफी क्षेत्रीय स्तर तक सीमित थी जिसके कारण एक ऑल इंडिया लेवल के बारे में कोई कल्पनाएं नहीं हो पाई जब इंडियन कांग्रेस की स्थापना हुई तो यह तय किया गया कि इसका स्वरूप इसकी कार्य प्रणाली किसी एक क्षेत्र तक सीमित ना होकर पूरे भारत को प्रभावित करने का मकसद रखेगी और यही से भारत और हिंदुस्तान का एकीकरण प्रारंभ भी होगा क्योंकि जब कोई संस्था पूरे भारत के विचार पर पहली बार अपने विचार प्रकट करेगी कहीं ना कहीं वहां भारतीय एकीकरण और भारत राष्ट्र के निर्माण के विचार प्रारंभ होंगे फिर 18 85 में

16:29 भारत के सबसे बड़ी पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना उससे जुड़े हुए कुछ पहलू भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन इसके विभिन्न चरण क्योंकि अब इसके बाद हम राष्ट्रवादी आंदोलन वर्ड यूज करना शुरू करेंगे क्योंकि इसके जो लक्ष्य थे इंडियन नेशनल कांग्रेस के उसका लक्ष्य था पूरे भारत के बारे में बातचीत करना इसीलिए उनके आंदोलनों को हम किसी क्षेत्रीय आंदोलन की जगह पर नेशनल मूवमेंट के रूप में जानेंगे और इसमें सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आता है जब महात्मा गांधी का इन आंदोलनों में आगमन होता है क्योंकि वे ऐसे व्यक्ति होते हैं जो भारत के एकीकरण और संपूर्ण भारत की विचारधारा के अनुसार ही सारी त बातों का निर्णय लेने की बातचीत प्रस्तुत करते हैं

17:16 फिर उसके अलावा भी कुछ गैर कांग्रेसी संगठन थे भले ही उन्होंने भारत की आजादी में योगदान ना निभाया हो लेकिन कई बार वह आज चर्चा में आ जाते हैं कई बार वो आज बहुत बड़े देशभक्त बन जाते हैं तो हमें जानना होगा कि उनका इतिहास क्या रहा होगा पर इसी दौरान कुछ घटनाक्रम भी हमें समझने हैं 1905 में जब स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई 1907 में अंग्रेजों की फूट डालो राज करो की नीति के मकसद आए जिसका परिणाम था मुस्लिम लीग साइमन कमीशन की घटना होती है गोलम सम्मेलन होते हैं कम्यून अवार्ड जैसी घटना आती है पुना पैक्ट की बात होती है आजाद हिंद फौज की बात होती है वेवेल योजना आती है इटली योजना आती है कैबिनेट मिशन

18:02 योजना आती है माउंट बेटन योजना आती है और फाइनली भारत का विभाजन एक भयानक घटना जो पूरे इतिहास में अभी तक की सबसे बड़े भयानक परिणाम लाने वाली मानी जाती है इसका श्रेय अगर जाता है तो पूरी तरह से ब्रिटिश हुकूमत को जाता है ना केवल प्राचीन काल की बल्कि हमेशा के लिए ब्रिटेन की सत्ता पर यह दाग रहेगा कि इन्होंने एशिया में आकर इतने बड़े लोगों की हत्याओं की जिम्मेदारी लेनी चाहिए कि उनके कारण यह पूरा विभाजन हो पाया फाइनली हम कहें तो कंपनी के शासन के दौरान कुछ कानून जो पारित हुए हैं हमें उस पर भी नजर डालनी होगी ब्रिटिश क्राउन काल के दौरान जो अधिनियम हुए हैं कंपनी

18:49 शासन काल के प्रमुख गवर्नर जनरल पर भी ध्यान देना होगा ब्रिटिश क्राउन काल के प्रमुख गवर्नर जनरल कंपनी के शासनकाल का मतलब होता है 18582 के बाद जो भी कानून बनेंगे वह ब्रिटिश क्राउन के कहलाएंगे और 1828 के पहले जो कानून पारित हुए थे वह डायरेक्टली ब्रिटेन ने हम पर लागू ना करते हुए भले कंपनी पर लागू कि और कंपनी ने फिर उसे हम पर लागू करवाया इसी के दौरान गवर्नर जनरल

19:35 की बात आएगी और ब्रिटिश क्राउन से हम गवर्नर जनरल की जगह वर्ड यूज करेंगे वाइस राय फिर ब्रिटिश शासन का भारत का इकोनॉमिकल क्या इंपैक्ट पड़ा सोशल क्या इंपैक्ट पड़ा पॉलिटिकल क्या इंपैक्ट पड़े इन सभी कहानियों पर भी हम गौर करेंगे ब्रिटिश शासन के रिलीजन और कल्चर पर क्या इंपैक्ट पड़े एजुकेशन सिस्टम प्रेस की स्वतंत्रता आजादी के बाद देशी रियासतों का एकीकरण रियासतों के एकीकरण की नीति और सिद्धांत एकीकरण के बड़े चैलेंज क्या-क्या थे और उसमें सरदार पटेल जी की क्या बड़ी भूमिका रही हम इस पर भी चर्चा करेंगे आजादी के बाद रियासतों के एकीकरण में जो भी चर्चाएं रही है लेकिन अब उससे पहले मैं एक बड़ी और इंपॉर्टेंट बात आपको बता दूं

20:22 हम इतिहास पढ़ने जा रहे हैं जिस लोगों ने इतिहास देखा था वह आज जीवित नहीं है जिन लोगों ने इतिहास लिखा है उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर बातें लिखी है एक इतिहासकार को जब पढ़ोगे और दूसरे इतिहासकार को जब पढ़ोगे तो इतिहास की एक बहुत बड़ी समस्या है कि इतिहास इतिहास पर निर्भर ना करके इतिहास लिखने वाले पर ज्यादा निर्भर करता है आज इतिहास लिखने वाला व्यक्ति हो सकता है कि मुगलों को महत्व ना दे लेकिन आज से 200 साल पहले इतिहास लिखने वाले ने मुगलों को महत्व दिया होगा हो सकता है 1947 के उस विभाजन के दुखों से पीड़ित होकर इतिहास लेखन कर्ता ने अंग्रेजों को कई प्रकार से

21:10 आरोपित किया होगा लेकिन हो सकता है आज की सत्ता अंग्रेजों को अच्छा मानती हो कहने का अभिप्राय यह है कि इतिहास को इतिहास के दृष्टिकोण से देखोगे तो बड़े परिवर्तन महसूस कर पाओगे लेकिन लेखक के दृष्टिकोण से देखोगे तो शायद मुझ पर भी आरोप लगा दोगे कि सर आपने यहां पर गलत बता दिया है क्योंकि हमारा मास्टर तो कह रहा था कि अंग्रेज आए और उन्होंने आधुनिकता लाई और आप कह रहे कि अंग्रेज आए और उन्होंने गुलाम बनाया तो दुनिया में इतिहास इतिहास पर निर्भर ना करके इतिहास के राइटर पर ज्यादा निर्भर करता है 1857 की क्रांति को जब भारतीय इतिहासकार लिखेगा तो 1857 की क्रांति में भारतीय जिन लोगों ने भी इसमें

21:55 पार्टिसिपेट किया था उन्हें कहेगा कि व भारत के शूरवीर थे भारत के वे पहले राष्ट्रवादी थे उन्होंने भारत की आजादी का सपना देखा उन्होंने भारत को पहली बार विदेशी हुकूमत से समाप्त करने का लक्ष्य रखा लेकिन क्या अंग्रेजी इतिहासकार हमारे भारतीयों को वह शूरवीर का दर्जा देगा क्या अंग्रेज इतिहासकार यह सोचेगा कि वह भारतीय शूरवीर थे वह अपने नायकों को हीरो बताएगा वो कहेगा कि हमने भारतीय आतंकवादियों को कुचल दिया था तो क्या यहां पर इन दोनों शब्दों के शब्द जाल में हम फसना चाहते हैं कि हम जानना चाहते हैं घटनाक्रम क्या हुआ था तो इतिहास पढ़ते समय थोड़ी सावधानी

22:40 बढ़ते सभी विद्यार्थी इतिहास को पूर्ण सत्य ना माने और ना ही इसे पूर्ण असत्य माने बल्कि अपनी तार्किकता हों के आधार पर इस इतिहास से सीखे समझे जाने कि कहां हमसे गलतियां हुई कहां उन गलतियों से हमें समझना चाहिए ना कि हम इतिहास को बदलने और इतिहास के बारे में अपनी विचारधारा प्रस्तुत करने का विचार रखें इस पूरी कहानी में क्योंकि फैक्ट बहुत से आएंगे हो सकता है कोई दो चार फैक्ट मुझसे भी गलत होंगे अगर होते तो आप इसको स्वयं सुधार करेंगे क्योंकि फाइनली मैं कोई कृतिम बुद्धिमत्ता वाला व्यक्ति नहीं हू मानवीय स्वरूप हूं इसलिए

23:26 गलती होने की पूर्ण संभावना निहित है खास करके इतिहास में यह विज्ञान होता तो मैं दावा करता कि कुछ भी गलत नहीं होगा क्योंकि वहां सिद्धांत और कहानी के परिणाम हैं यहां पर लोगों की विचारधाराएं हैं जिन्होंने अपने अनुसार इस इतिहास को समझाने की कोशिश की है तो अपनी बुद्धिमत्ता और तार्किकता के आधार पर कहानी को समझना है हम पहले चैप्टर की शुरुआत कर रहे हैं जिसका नाम है यूरोपियन कंपनियों का भारत आगमन कहानी में सबसे पहले हम आपको लेकर जा रहे हैं यूरोप में देखो यूरोप में इस समय जिसकी हम बातचीत करने जा रहे हैं वह 15वीं सदी है इस 15वीं सदी में यूरोप मध्यकाल में नहीं है इस

24:14 15वीं सदी में वहां ऐसे वैज्ञानिकों के जन्म हुए जिन्होंने चर्च के प्रभुत्व को बहुत पहले ही चैलेंज कर दिया था धर्म के प्रभुत्व को पहले ही चैलेंज कर दिया था कि आप धर्म के आधार पर जो बातचीत करने जा रहे हैं यह पूर्ण रूप से असत्य है और आपकी मान्यताओं पर आधारित है इसलिए 12वीं 13वीं सदी से ही यूरोप में ना केवल धार्मिक आंदोलनों का उदय हो चुका था बल्कि यूरोप में नए विचारों का जन्म भी प्रारंभ हो चुका था और जब तक हम 15वीं सदी पर पहुंचते हैं तो यूरोप आधुनिकता के दौर में कदम रख चुका था इस दौरान ना केवल राजा बल्कि प्रजा भी काफी ज्यादा उत्सुक थी नए प्रकार

24:59 की चीजों को जानने और वैज्ञानिक रूप में चीजों को समझाने के लिए और इसी का परिणाम होता है कि जब पूरी दुनिया मध्यकाल में जीवन यापन कर रही है तब यूरोप पूरी तरह से आधुनिकता में कदम रख चुका है और इसका परिणाम होता है कि वह दुनिया भर के कई देशों को गुलाम कर सकता है क्योंकि आधुनिकता या एक कदम आगे वाले व्यक्ति अपने पीछे वाले लोगों का शोषण हमेशा ही करते रहे हैं एक यूनिवर्स असल सत्य है इस कहानी में जब हम यूरोप की ओर जाते हैं तो यहां जो राजा महाराजा बैठे हैं यह बहुत ही छोटे-छोटे क्षेत्रों में बटे हैं आज भी आप फ्रांस को देख लो इटली को देख लो ब्रिटेन को देखो ये कोई बड़े भूभाग नहीं है और इस

25:45 कारण से यहां के राजा महाराजा अपने यहां के लोगों को मोटिवेट कर रहे हैं कि आप नई-नई जमीन खोजो और वहां पर अपने नए तरीके से सिस्टम कायम करो हम आपकी उसमें मदद करेंगे उसके पीछे एक और बड़ा कारण रहा कि यूरोप के लोग राजमार्ग जो समुद्री मार्ग है उसके नए-नए विकल्पों की खोज भी करने लगे उसका कारण था कि जमीन को समुद्र के माध्यम से ही खोजने का उनका अपना एक अलग माइंड सेट था तो पिक्चर का एक सीन है यूरोप में जहां आधुनिकता अपने चरम सीमा पर भले ही ना हो लेकिन प्रारंभिक दौर में आ चुकी है यूरोप के इस जगह पर अगर हम बातचीत करें तो तो राजा महाराजा अब धर्म की जगह

26:30 पर साइंस और विज्ञान की ओर झुकाव दर्शा रहे हैं कई वैज्ञानिक उस समय अपने अपने सिद्धांतों से दुनिया को अचरज में डाल चुके हैं अब आते हैं थोड़ा दूसरी ओर भारत की तरफ आप ध्यान दीजिए तो यह 15वीं सदी की अगर हम बातचीत करें तो अभी भी दिल्ली सल्तनत काल चल रहा है और बिल्कुल अंतिम पड़ाव पर है दिल्ली सल्तनत काल लोधी वंश का शासन चल रहा है 16वीं सदी जब शुरू होगी लगभग 1526 की अगर हम बातचीत करें 1528 की अगर हम बातचीत करें तो इस दौरान भारत की ओर एक नई सत्ता का आगमन आना प्रारंभ होगा जो कि मुगल सत्ता के रूप में जानी जाएगी पानीपत की पहली लड़ाई होगी बाबर और इब्राहिम लोदी

27:19 के बीच इब्राहिम लोदी की पराजय होगी और दिल्ली की राजगद्दी पर बाबर अपना शासन स्थापित करेगा तो भारत की चीन में दूसरी जगह पर हम एक देख रहे कि अभी युद्ध चल रहे हैं वे अभी जमीनों के लिए लड़ रहे हैं उनके पास विज्ञान जैसे विषय के लिए शायद उतनी फुर्सत नहीं है दूसरा भारत कोई साधारण देश नहीं है बहुत बड़ा अफगानिस्तान पाकिस्तान जो वर्तमान में है उसका पूरा हिस्सा लेते हुए आप म्यानमार की सीमाओं तक जाइए तो इतनी बड़ी जमीन है कि यहां के लोग अपनी ही जमीन को अभी प्रॉपर तरीके से यूटिलाइज नहीं कर पा रहे हैं वो नवीन टॉप खोजने की बात बातचीत ही नहीं करेंगे तो नवीन टापू कौन खोजें जिनके पास छोटे-छोटे

28:04 द्वीप है हम नवीन टापू इसलिए नहीं खोजें क्योंकि हमारे पास उपमहाद्वीप है जिस पर एक तरफा पूरी तरह से एक राजा ही शासन कर रहा है अब सवाल यह है कि आखिर ये यूरोपियन लोग कहीं ओर नहीं जा रहे हैं भारत की ओर ही क्यों आना चाहते हैं तो जरा पिक्चर के दूसरे सीन पर आते हैं यूरोप के किसी मंडी पर चले जाओ यूरोप के किसी बाजार में एंट्री करो तो पूरे बाजार में पूरी दुनिया भर के सामान पड़े हैं लेकिन सबसे ज्यादा कीमत भारतीय कपड़े की है वह पतला है मजबूत है सूत उसका शानदार है और उसकी क्वालिटी दुनिया में सबसे टॉप की है दूसरा भारत के

28:49 मसाले पूरी दुनिया भर में इसलिए भी फेमस थे और यूरोप के लिए इसलिए भी फेमस थे क्योंकि यूरोप में आठ महीने बर्फबारी होती है खेती के लिए बहुत ही कम समय मिलता है 4 महीने की खेती में व क्या पैदा कर लेंगे तो अधिकतर वह नॉन वेजिटेरियन लोग हैं मांस खाते हैं क्योंकि कृषि का उत्पादन उतना ज्यादा नहीं है और मास की प्रॉब्लम है कि उस जमाने में फ्रिज तो होते नहीं थे तो मास कीय प्रॉब्लम है कि दो दिन के बाद वो बदबू मारने लगता है मास का इशू है कि उसका टेस्ट बिगड़ जाता है 5 दिन के बाद और इतने अमीर लोग यूरोप में नहीं थे कि वो डेली नया और ताजा मास खरीद सके वे जानते थे कि यदि इस मास को टेस्टी और बेहतर बनाना है तो उसमें केवल एक ही चीज का तड़का डाला जा

29:35 सकता है वह है इंडियन स्पाइसेज भारतीय मसाले और इसलिए यूरोप का यह पूरा बाजार भारतीय कपड़े और भारतीय मसालों के लिए चर्चा में है वहां का हर व्यक्ति हर दुकान पर भारतीय मसालों की मांग कर रहा है इसी कारण से यूरोप का हर देश इस मसाले और इस कपड़ों के व्यापार पर मोनोपोली चाहता है जिस देश की मोनोपोली हो जाएगी पूरे यूरोप के मार्केट में उसका दबदबा होगा यूरोप में मार्केट में दबदबा होगा सबसे ज्यादा कमाई वह करेगा जिस देश की कमाई ज्यादा होगी उसके पास आर्थिक सत्ता ज्यादा होगी जिसके पास आर्थिक सत्ता ज्यादा होगी उसके पास सैनिक उतने ज्यादा होंगे जिसके पास सैनिक

30:20 ज्यादा होंगे वह उतना ही शक्तिशाली साम्राज्य स्थापित कर पाएगा तो इन पूरे सा राज्य की बागडोर का शुभारंभ भारतीय मसालों और कपड़ों पर आधारित है और इसीलिए यूरोपियन अलग-अलग देश इस प्रयास में है कि किसी तरीके से भारत से हम बड़ी मात्रा में मसाले और कपड़े लेकर आ सके अब इस पिक्चर में तीसरा सीन आता है जो कहानी में ट्विस्ट पैदा करता है पर शॉर्ट की मूवी है उसी में खत्म करके वापस दोनों सीन पर लौटेंगे अभी तक भारत और यूरोप के बीच में समुद्री मार्ग तो नहीं खोजा गया था लेकिन जमीनी मार्ग तुर्की के रास्ते इस्तांबुल से होते हुए भारत तक पहुंच रहा था यहां का जो क्षेत्र था उसको कुस्तु

31:08 दुनिया नामक जगह के नाम से संबोधित करते थे वर्तमान के तुर्की तुर्की के पास का इस्तांबुल वाली जगह मान के चलो कि यही वह जगह है मैं मैप में आपको इमेजिन कराऊंगा कहां है उस जगह पर पहले तुर्की के शासक थे तुर्की के शासन के कारण वहां से यूरोपियन आना जाना करते थे लेकिन 1453 में वहां पर अरब प्रायद्वीप के या अरबिंजर पर और यह अरब वासी पूरा रास्ता ब्लॉक कर देते हैं कि ना कोई यूरोप का भारत में आएगा ना भारत का यूरोप में जाएगा अब इसका मतलब क्या रहा याय अरबी ऐसा क्यों कर रहे क्योंकि इन्हें भी पता है कि यही वह रास्ता है जहां से पूरा मसाला और कपड़ा यूरोप पहुंच रहा है इस जगह जिसका कब्जा

31:55 वही शक्तिशाली क्योंकि वही उतना चुंगी कर वसूल कर पाएगा इसलिए उन्होंने पूरी तरह से रास्ते को रोक दिया इसका परिणाम हुआ कि भारतीय मसाले और कपड़ों की आपूर्ति यूरोप में कम हो गई और जो भी थोड़ी बहुत आपूर्ति होने लगी उसकी कीमतें आसमान छूने लगे अब ऐसी सिचुएशन में जो नई-नई कंपनियां खोल रहे हैं उनके दिमाग में बस एक ही पॉइंट है किसी तरीके से भारतीय मसाले तक पहुंच हो जाए तो आज जो भाव चल रहा है उस भाव में भी अगर मैंने बेच दिया तो एक साल में अरबपति बन जाऊगा और इसी कल्पना में नई नई व्यापारी कंपनियां अपनी स्थापना करने के साथ ही अपना जहाज समुद्र में डालती है और निकलती है भारत की खोज में कुछ भारत की

32:41 खोज में अमेरिका पहुंच गए कुछ भारत की खोज में अफ्रीका पहुंच गए कुछ भारत की खोज में ऑस्ट्रेलिया पहुंच गए एक भारत की खोज में पहुंच पाया उसे भी भारतीय व्यापारी की मुलाकात हुई नहीं तो वह भी कई ओर भटक जाता इसलिए वास्को डिगामा नामक ये व्यक्ति 1498 में पुर्तगाली राजा की मदद से ना केवल उसका दिशा सूचक यंत्र लेकर आता है और भारत की खोज करता है भारत की खोज का मतलब उनके लिए भारत की खोज भारत कहीं घुमा हुआ नहीं था भारत जहां था वहीं पर है लेकिन उन लोगों ने समुद्र मार्ग से भारत को ढूंढ लिया और जब कोई चीज ढूंढी जाती है मोबाइल जब आपका कमरे में गुम हो जाता है तो क्या

33:26 मोबाइल गायब हो गया था तब भी आप कहते कि मुझे मिल गया मैंने खोजा इसका मतलब वह उन लोगों के लिए कहीं गायब था लेकिन अब वो पुनः प्रकट हुआ वास्कोडिगामा के द्वारा जब भारत की खोज होती है और वास्कोडिगामा जब भारत से मसाले और कपड़े भरा हुआ जहाज कई संख्या में जहाज जब व ले जाता है तो 60 गुना मुनाफा कमाता है 60 गुना सोच लीजिए कि उसने मान लीजिए पूरी यात्रा में एक लाख खर्च किए हो तो एक बार में ही 0 लाख रप की कमाई करता है उसके इस खोज के और इस तरीके की कमाई के बाद बाकी कंपनियों में एक आनंद की लहर उठती है और उन्हें अब पता चलता है

34:14 कि अब हमें इस्तांबुल और कुस्तु दुनिया वाली जगह पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है सभी लोग वास्कोडिगामा और पुर्तगीज के जहाजों से संपर्क करते हैं और पूछते हैं कि हमें केवल आप मोटे तौर पर रास्ता बताओ कई लोगों को रास्ता ना भी पता हो तब उन्हें यकीन हो गया है कि भारत समुद्र मार्ग से कहीं ना कहीं जुड़ता है हर कोई अपने-अपने जहाज लेकर भारत की ओर अग्रसर हो रहा है यह लोग भारत पर शासन करने के दिमाग से नहीं आ रहे हैं इनका दिमाग तो केवल एक ही चीज में लगा है भारत के मसाले और भारत के कपड़े किस तरीके से प्राप्त करें ताकि अपने देश में मुनाफा ज्यादा से ज्यादा कम सके यह लोग अपने जहाजों में सोना चांदी

35:01 ऐसे कई सारे सिक्के लेकर आ रहे भारत की ओर हमें सिक्के दे रहे और हमसे क्या लेकर जा रहे हैं मसाले और कपड़े तो एक समय कह सकते हैं कि लगातार भारत की ओर धातु का आगमन हो रहा है और भारत लगातार अमीर पर और अमीर होता जा रहा है वास्कोडिगामा के जब कदम भारत पर पड़े थे तब पूरे इस दुनिया में अगर 100 चीजों का व्यापार होता था ₹ रुपए का व्यापार होता था तो अकेला भारत 33 का व्यापार करता था तो वास्कोडिगामा के जिस समय कदम रखे थे तो भारत की विश्व व्यापार में हिस्सेदारी एक तिहाई थी आज भी दुनिया में किसी देश की इतनी हिस्सेदारी नहीं रही लेकिन हम अपनी

35:49 प्राचीन जो भी हमने नए-नए हम कहेंगे कि मील के पत्थर साबित किए थे उनकी कहानी से खुश नहीं होंगे और दुख की बात यह है कि जब भारत को छोड़कर अंग्रेज गए तो भारत के विश्व व्यापार में हिस्सेदारी 1 प्र की थी मतलब मात्र 1 प्रत या एक रुपए का सामान भारतीयों का पूरे विश्व में बिकने लगा मतलब इन 200 250 300 वर्षों में इन गंदे लोगों ने हमारे देश को जिस तरीके से शोषित किया उसका सबसे बड़ा नुकसान हमारे विदेशी व्यापार पर हुआ हम भले ही कुछ भी कहे पर मुगलो ने क्या हमें हमारी कमाई या हमारी जो संपत्ति थी उसे इतनी क्षति पहुंचाई थी नहीं भयानक क्षति पहुंचाई हमें इन

36:37 अंग्रेजों ने इन यूरोपियन लोगों ने जिन्होंने भारत को केवल और केवल कच्चे माल के सामान का निर्यातक बनाकर छोड़ दिया बाकी कोई उद्योग पनपने नहीं दिए तो इस कहानी में अब थोड़े से फैक्ट को देखते चलते हैं यूरोपियन कंपनियों का भारत आ 15वीं सदी के अंत तथा 16वीं सदी के प्रारंभ में 15वीं सदी का अंत मतलब 1490 के आसपास 1498 वाली घटना दिमाग में रखना भारत में व्यापारिक उद्देश्यों से यूरोपियन कंपनियों का भारत में प्रवेश प्रारंभ हुआ इस समय भारत में दिल्ली सल्तनत काल था मतलब भारत में मध्यकालीन

37:26 भारत का इतिहास इतिहास जिन्होंने पढ़ा होगा उसे दो भागों में बांटते हैं दिल्ली सल्तनत काल और मुगल काल तो वो दिल्ली सल्तनत काल है अंतिम पड़ाव पर है दिल्ली सल्तनत काल में भी पांच वंश आते पांच डायनेस्टी आती है उसमें पांचवी डायनेस्टी थी लोदी तो एक तरीके से हम कहेंगे कि लोधी वंश के आसपास का शासन चल रहा है उत्तर वर्ती दिल्ली सल्तनत और पूर्ववर्ती मुगल काल में केंद्रीय सत्ता के मजबूत होने के कारण यूरोपियन कंपनी ने केवल अपने व्यापारिक हितों को महत्व दिया इस समय जो भी दिल्ली सल्तनत हो या शुरुआत का मुगल काल हो सबसे बड़ी खासियत क्या रही यहां के राजा यहां का नवाब जो भी दिल्ली की

38:12 राजगद्दी पर बैठा उसकी पकड़ पूरे भारत के सभी राजाओं पर सभी क्षेत्रों पर इतनी मजबूत थी कि किसी यूरोपियन कंपनी की हिम्मत नहीं थी कि वो यह सोच पाता कि मैं यहां के क्षेत्र पर शासन करूंगा क्योंकि अगर वो केवल ऐसा सोचता भी तो उसी समय उसे राजा समाप्त कर देता क्योंकि इतना मजबूत राजतंत्र था कि उसे चैलेंज करना लगभग नामुमकिन था पानीपत का प्रथम युद्ध 21 अप्रैल 1526 कुछ जगह 20 लिखा हुआ है पर अधिकतर जगह 21 अप्रैल 1526 माना गया है इब्राहिम लोदी पराजय होता है और एक और दिल्ली सल्तनत के स्थान पर मुगल सत्ता कायम होती है और शासक के रूप में आता है

38:57 बाबर वही दूसरी ओर पुर्तगाल डच डेनिश की कंपनियां भी अपने व्यापारिक हितों को विकसित करने के लिए क्षेत्रीय संघर्ष में संलग्न है देखो यह जो उधर के कम कम देश है कौन यूरोपियन देश वे जानते हैं जिसकी व्यापार में मोनोपोली होगी वही कमाए देखो आज के जमाने में हम कंपटीशन को बेटर मानते हैं क्योंकि आज के जमाने में हम यह मानते हैं लोगों का कल्याण कैसे बेहतर किया जाए पर उस जमाने में लोगों का कल्याण उतना इंपॉर्टेंट नहीं था बल्कि पैसा इंपॉर्टेंट था कमाई इंपॉर्टेंट थी जिसके पास आर्थिक संपत्ति होती थी वह अपने आप शक्तिशाली बन जाता था तो वे कंपनियां यह सोचती थी कि

39:45 अगर हम सब मिलकर काम करेंगे तो निपट जाएंगे वही सक्सेसफुल होगा जो केवल एक आखिरी कंपनी के रूप में शेष बचेगा मतलब सभी कंपनियां आपस में भी लड़ रही है मतलब उनका कंपटीशन अभी हमसे नहीं है उनका कंपटीशन अपने ही देश अपने ही यूरोप के अलग-अलग देशों की कंपनियों से डच पुर्तगीज से लड़ रहे हैं पुर्तगीज डेनिश से लड़ रहे हैं और इस तरीके से अलग-अलग कंपनियां केवल इसलिए युद्ध कर रही हैं ताकि वह चाहती हैं कि किसी तरीके से अपनी ही कंपनी बच जाए ताकि मैं ही मैं रहूंगा तो चीजें अपने आप क्या हो जाएगी बेहतर इनके आपस में मतलब अगर मान लीजिए ये

40:33 इतनी स्थिति खराब थी इन गंदे लोगों की कि अगर गलती से भी गलती से भी इनका जहाज पुर्तगीज का जहाज समुद्र में मिल जाए डच के जहाज हों को तो वे यह नहीं सोचते थे कि भई अपना सामान खत्म हो जाएगा वे पहले युद्ध करना शुरू कर देते थे पहले एक जहाज को खत्म तो कर दें फिर हम पहुंचेंगे तट पर इस तरीके की हम कह सकते हैं कट्टर विचारधारा से प्रभावित लोग थे ये तो मोटे तौर पर मैं कह सकता हूं कि यूरोप में उस समय एक प्रकार से जो लोग कहते हैं ना कि हम सभ्यता के वाहक हैं सबसे ज्यादा असभ्य लोगों का झुंड था जिसके हाथ में लाठी भेस उसी की इससे ज्यादा असभ्य लोग नहीं होंगे

41:18 और यह अंग्रेज भारतीयों को सभ्य करने के मकसद से भारत पर शासन करने की नीव रखते हैं तो यह वो दौर है 15वीं और 16वीं सदी जिस समय भारत अपने मध्यकाल में है जबकि यूरोप अपने आधुनिक काल में इसी क्रम में यूरोपियों द्वारा नवीन भौगोलिक खोजें की जाने लगी ताकि अपने व्यापार को वैश्विक स्तर पर प्रसारित कर सके पर इनका मेन मकसद था व्यापार को प्रसारित नहीं करना बल्कि यूरोप में अपने व्यापार को इतना बेहतर करना कि वह यूरोप से बहुत पैसा कमा सके और मैंने आपको बताया आर्थिक शक्ति का ही पूरा केंद्र जुड़ा हुआ है राजनीतिक शक्ति से साम्राज्यवादी शक्ति से और इसीलिए वह चाह

42:03 रहे हैं कि जितनी नई जगह खोजी जाएगी उतनी कमाई बढ़ेगी इसी क्रम में यूरोपियन द्वारा नवीन भौगोलिक खोजें की जाने लगी ताकि अपने व्यापार को वैश्विक स्तर पर प्रसारित किया जा सके यूरोपियन देशों द्वारा भारत के जलीय मार्ग के माध्यम से खोज के प्रयास प्रारंभ हुए उल्लेखनीय कि प्राचीन काल सेही भारत और यूरोपियन देशों के मध्य स्थलीय के माध्यम से व्यापारिक संबंध थे मतलब यह मत सोचिए कि भारत और यूरोप के व्यापार तब शुरू हुए जब वास्कोडिगामा आया उसके पहले भी भारत और यूरोप के व्यापार लंबे समय से थे भारत में ईसाई धर्म बहुत पहले आ चुका था केरल में वास्कोडिगामा के आने से पहले ही लेकिन वह समुद्र के मार्ग

42:49 से नहीं जमीन के मार्ग से पहुंचा था वह पहुंचा था अफगानिस्तान पाकिस्तान होते हुए कश्मीर या फिर वर्तमान के पंजाब के रास्ते से और इस तरीके से भारत में इनके पहले से ही पहचान पहले से ही अपने व्यापारिक संबंध रहे थे कई व्यापारियों के माध्यम से सामान यूरोप तक पहुंचाया जाता था किंतु 14वीं और 15वीं सदी में इन स्थलीय व्यापारिक मार्गों में बाधाएं उत्पन्न होने लगी जिसके कारण यूरोपियन द्वारा भारत और पूर्वी देशों के साथ याद रखेंगे कि यह लोग क्योंकि मैप में यह आता जाता है जीएमटी तो जनरली ब्रिटेन को मेनली या यूरोप को और इसको देखेंगे तो हम नॉर्थ ईस्ट नॉर्थ साउथ ईस्ट और वेस्ट तो

43:38 इधर वाले जो अधिकतर देश है इनको यह लोग क्या कहेंगे पूर्व के यूरोपियन लोग पूर्वी देश फिर उसमें चाइना भी आ गया म्यांमार भी आ गया भारत भी आ गया जो भी है तो इन सभी को क्या कहते हैं पूर्वी देश तो यूरोपियन लोग पूर्वी देशों के साथ अपने व्यापार को बतर करने के लिए नवीन जल मार्गों की खोज करने लगे यूरोपियन देशों द्वारा नवीन जलीय मार्गों की खोज क्यों कहानी का वह तीसरा भाग जगह का नाम है कुस्तुनतुनिया अरबों का अधिकार होता है पहले तुर्की का था यूरोपियन द्वारा नई भौगोलिक खोजे क्योंकि यूरोप के कई सारे वैज्ञानिक कई सारे राजा वैज्ञानिक खोजों की ओर आकर्षित हुए और उन्होंने दिशा सूचक यंत्र बनाने शुरू किए

44:25 जो उन्हें समुद्र में बेहतर दिशा बताने में मदद कर सके वहां पर जिस समय भारत का मध्यकाल चल रहा है बाबर जीत कर आया होगा तो क्या बाबर यह सोचेगा कि हमें बड़े-बड़े जहाज बनाने हैं क्यों नहीं सोच रहा है क्योंकि दिल्ली से ज समुद्र वैसे भी बहुत दूर है अगर बाबर का केंद्र या बाबर अपना शासन मुंबई में करता कोलकात्ता में करता चेन्नई में करता तो बाबर यह दिमाग में रखता कि मुझे भी बड़े-बड़े जहाज बनाने हैं लेकिन वह पूरी तरह से दिल्ली के आसपास पर ही सिमट कर रहा भले ही उनका शासन बहुत दूर तक फैला लेकिन इतनी बड़ी जमीन जब मिल गई तो फिर कहीं ना कहीं समुद्र की खोज उनके दिमाग में नहीं रही वो थोड़ा बहुत

45:11 समुद्र पर जरूर ध्यान देंगे लेकिन क्या यूरोपियन जैसा ध्यान देंगे क्योंकि यूरोप का प्रत्येक देश अपने आप में प्रायद्वीप कहलाता है जियोग्राफी में पढ़ा होगा यूरोप को प्राय द्वीपों का प्रायद्वीप कहते हैं पेनिंस सुला ऑफ पेनिंस सुला जहां तीन जगह पर ऑलरेडी पानी से घिरा हुआ क्षेत्र है इसलिए वे लोग तो जमीन को जितना डेवलप ना करें उससे ज्यादा जहाजों को डेवलप करेंगे जहाजों पर फोकस करेंगे बंदरगाहों पर ध्यान देंगे और यही परिणाम रहा कि उन्होंने बहुत पहले ही समझ लिया कि यदि जमीनों पर अधिकार करने हैं तो पहले समुद्र पर अधिकार करो जो समुद्र पर अधिकार कर लेगा उस उसके जमीन पर अधिकार अपने आप हो जाएंगे और इसीलिए वहां

45:58 पर समय से पहले ही शिपिंग इंडस्ट्री और नेविगेशन इंडस्ट्री जैसी चीजें आ गई नेविगेशन जैसे आज के जमाने में जीपीएस आज सभी को बिना जीपीएस के कई नई जगह जाना बड़ा मुश्किल है उस जमाने में नई जगह जाने के लिए वह दिशा सूचक यंत्र से पहुंच जाते थे तो जिसके पास वह दिशा सूचक यंत्र होता था वह कहीं ना कहीं नई जगहों की आसानी से खोज कर लेते थे आइए जरा मैप के अनुसार अगर आप देखेंगे तो ये वो तुर्की वाला जगह है ये भारत का जो हम मैप की बात करें और ये यूरोप है तो ये यूरोप के वासी इस रास्ते से होकर भारत पहुंचते थे इस रास्ते से होकर भारत से साथ-साथ वो कहां

46:44 पर जाते थे चाइना में भी यह तुर्की का यह वाला जो रीजन है इसी को नाम दिया गया है कुस्तुनतुनिया इस्तांबुल के पास वाली यह जगह है अगर हम बात करें तो य से पूरे व्यापारिक मार्ग चल रहे थे और जब यह वास्कोडिगामा आना चाहेगा तो वास्कोडिगामा भारत पहुंचेगा इस रास्ते से नो डाउट यह रास्ता ज्यादा छोटा है और यह रास्ता बहुत ही बड़ा है लेकिन जैसे आप जानते हैं कि शॉर्टकट मिल जाता है जो जमीन से भी छोटा

47:31 और जमीन पर चलने में रफ्तार कम होती है पानी पर चलने में रफ्तार ज्यादा तो जमीन से भी बहुत छोटा रास्ता और बहुत ही कम समय में वह भारत पहुंचने की संभावनाओं में जुड़ जाते हैं यह घटना 69 सॉरी सॉरी फिर 69 दोनों ही 69 मतलब यह अद्भुत सहयोग है इधर गांधी जी का जन्म भारत में हो रहा है और उधर ब्रिटिशर्स के लिए एक नया शॉर्टकट खुल रहा है मतलब ऊपर वाला पूरा मजे लेने के मूड में है कि तुम भी पहुंचो मैं भी एक आदमी

48:18 भेज रहा हूं वह तुम्हारी तकलीफ बढ़ाएगा तो इधर गांधी जी को जन्म दिया नेहर को खुलवा दिया 18697 दी पर कुस्तु दुनिया पर अरबों का अधिकार पहले कुस्तु दुनिया जिसे आधुनिक स्थान बुल यूरोप के पूर्वी भाग में तुर्की के अंतर्गत था किंतु 1453 में मध्य एशिया के अरबों ने कुस्तु दुनिया पर अपना अधिकार स्थापित कर लिया इसी कारण पूर्वी एशिया और यूरोपियन देशों के बीच व्यापार का जो स्थलीय मार्ग था व रुक गया था उल्लेखनीय कि कुस्तु दुनिया रूम सागर जिसको हम

49:03 भूमध्य सागर का एक भाग कहते हैं रूम सागर क्योंकि मेडिटेरियन सी बहुत ही बड़ा सागर है मेडिटेरियन भूमध्य सागर एक बड़ा सागर है उसमें एक छोटा सा हिस्सा है जिसका नाम है रूम सागर तथा काला सागर के मध्य स्थित एक महत्त्वपूर्ण मार्ग था यूरोप को एशिया से जोड़ने का एकमात्र स्थलीय मार्ग था अब देखो सवाल यह भी नहीं है कि केवल भारत का माल रुक गया पर चाइना से आने वाला बेस्ट क्वालिटी का रेशम यह भी रुक गया जो कि यूरोप में काफी ज्यादा डिमांडेबल था तो कहने का अभिप्राय यह है कि पूरे पूर्वी देशों से आने वाले सामान अब यूरोप में आने के लिए तरस रहे हैं या फिर पहुंच रहे हैं

49:50 तो केवल अरब लोगों की मर्जी से तो वो सभी लोग अब उस सामान को प्राप्त करने के लिए नए रास्तों की खोज करेंगे उनकी मजबूरी भी है और जरूरत भी और इसी कारण से वह नए नए रास्ते खोजना शुरू करेंगे आधा हिस्सा कुछ तो दुनिया का यूरोप में है और आधा हिस्सा एशिया में यह सागर अगर आप देखेंगे तो अगर हम यह भारत का रास्ता जाते हुए तो यह ब्लैक सागर यहां है और यह रूम सागर है यहां पर और यह पूरा का पूरा हि भूमध्य सागर है मेडिटेरियन सी है तो यह रूम सागर और ये काला सागर इनके बीच की जमीन को कहते थे कुस्तु दुनिया वर्तमान

50:37 में उस जगह का नाम तुर्किया इस्तांबुल वो जगह कहलाए गी थोड़ा याद रखना इस बार क्योंकि तुर्की में भूकंप आए हैं तो संभावनाए वहां आसपास की रहेगी अब आते हैं यूरोपियन द्वारा नई भौगोलिक खोजे व्यापार के स्थलीय मार्ग में अवरोध आने से तथा पुनर्जागरण काल यह क्या काल है भाई पुनर्जागरण काल का मतलब है उस जमाने में यूरोप में भी हम ही नहीं मूर्ख थे वे भी गधे थे वहां भी धर्म इतना प्रभुत्व कर लिया था कि व्यक्ति की बुद्धि को सोचने का मौका भी नहीं देता था वहां का जो पादरी होता था वह राजा के निर्णयों को चैलेंज देने की ताकत रखता था और इसी कारण से वहां पर भी चर्च का एक तरफा प्रभुत्व था हर जगह

51:23 पर धर्म ने काफी लंबे समय तक ना केवल शासन किया बल्कि बहुत प्रभावित भी किया और इसी कारण से वहां पर जब वैज्ञानिक खोजें होने लगी और वहां वैज्ञानिक खोजों में गैलीलियो जैसे लोगों ने कहा कि सूर्य मध्य में है पृथ्वी मध्य में नहीं तो वहां के चर्च के लोगों ने धमकी दी गैलीलियो को कि अपना निर्णय बदल दो नहीं तो तुम्हें निपटा देंगे आज भी कई बार लोग ऐसा कर देते हैं कि हमारी भावनाएं आहत कर दी आजकल भावनाएं बहुत जल्दी आहत हो जा रही हैं क्योंकि पहले वो रेशम के कपड़े की थी और अब वह सूत के कपड़े की बन गई हैं जो बहुत जल्दी ही झटका खा जाती है और कई लोगों को तकलीफ हो जाती है और इसी उसी समय ऐसे कट्टरवादी लोग

52:08 थे जिनकी धार्मिक भावनाएं आहत हो गई गैलीलियो की सच्चाई हों से और उन्होंने गैलीलियो को धमकियां देना शुरू की लेकिन बहुत जल्द ही उन लोगों ने जान लिया कि विज्ञान के अंदर सच छिपा है हमें उसे स्वीकार करना पड़ेगा और उसी का परिणाम हुआ कि यूरोप में समय से पहले ही कौन सा युग आ गया वे लोग वापस समझ गए कि हम कहां गलत कर रहे थे और समय रहते इतिहास में उन्होंने सीखा कि हम यदि इन्हीं तरीके के विचारों से जुड़े रहेंगे तो इसमें हमारा कभी कल्याण नहीं होगा समय रहते पुनर्जागरण के कारण यूरोपियन देश विशेषकर पुर्तगाल और स्पेन के द्वारा नई भौगोलिक खोजें की जाने

52:53 लगी ताकि व्यापार को पुनः रंभ किया जा सके भाग्य वश इस समय पुर्तगाल का शासन हेनरी था और हेनरी एक खोजी प्रवृत्ति का शासक था कभी-कभी शासक का बढ़िया होना देश के लिए काफी अच्छी किस्मत ले आता है जैसे पुर्तगाल के लिए उस समय हेंद्री जैसा शासक विज्ञान का बहुत बड़ा समर्थक नई चीजों में दिलचस्पी रखता है नई खोजों को सपोर्ट करता है नई खोजों के लिए लोगों को मोटिवेट करता है और सी कारण से हेनरी के इस शासनकाल में पुर्तगीज बड़ी संख्या में अपने अपने जहाज लेकर दुनिया भर की चीजों को खोजने निकलते हैं उसी समय स्पेन के भी कई जहाज अलग-अलग जगह निकल रहे हैं गलती से

53:40 भी दोनों जहाज मिल गए तो वे बातचीत नहीं करेंगे वह कहेंगे खोजें बाद में पहले तुम्हें निपटा के जाएंगे तो यह युद्ध बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो पुर्तगीज का शासन हेंद्री जो खोजी प्रवृत्ति का था केंद्री द्वारा समुद्री व्यापार को प्रोत्साहन देने के लिए दिशा सूचक यंत्र के निर्माण को प्रोत्साहन देने के साथ नक्षत्रों की गणना करना नक्षत्र मतलब तारों को देखना उनकी लोकेशन आइडेंटिफिकेशन भी कहा जाता इन दिशा सूचक यंत्रों की

54:28 सहायता से यूरोपियन व्यापारी समुद्री मार्ग के माध्यम से विदेशी व्यापार के लिए प्रेरित हुए साथ ही हेंद्री ने विदेशी व्यापार के लिए व्यापारी कंपनियों को आर्थिक सहायता भी दी पैसे भी दिए कि तुम जाओ खोजो मेरा पूरा समर्थन है अब एक छोटी सी बात इतिहास में कई बार जो राजा महाराजा होते हैं उन्हें बड़े-बड़े नामों से संबोधित किया जाता है कहा गया कि कई सूचियां बनाई कई यंत्र खोजे क्या वह इतने फुर्सत में होंगे एक हाथ खोज भी ली होगी बट उन्होंने उन लोगों को मोटिवेट किया जो इस तरीके के यंत्र बनाते उनसे कहा तुम यंत्र बनाओ जो यंत्र की कीमत कहोगे मैं तुम्हें दूंगा यदि वोह यंत्र उतना बेहतर

55:13 रहा जिसने बनाया उसको पैसा मिला वह खत्म हो गया कि मैंने बनाया नहीं बनाया वो किसका हो गया राजा का और इसलिए फिर बाद में इतिहासकार नाम दे देते हैं कि महाराज ने बनाया था तो पुराने समय से ये काफी लंबी प्रथाएं चली आई क्योंकि जिनके पास पैसा था बाकी को पैसों की जरूरत थी तो वह हर चीज बेचने को तैयार होते थे क्योंकि जो बना रहा है वह जानता है कि मुझे दुनिया में वैसे भी कोई जानता नहीं है उस यंत्र को मैं अपने जेब में रखकर कर क्या लूंगा उससे ज्यादा बेटर है कि राजा को गिफ्ट करूंगा राजा खुश होगा मुझे कुछ उपहार मिलेगा और उसी से अपनी जिंदगी क्या कर लूंगा बेहतर तो पुराने जमाने में कई राजाओं ने जो खोजें की है उस पर उ ना यकीन ना करें वह थोड़ा बहुत आंशिक सत्य हो सकता

56:00 है लेकिन वह पूर्ण सत्य हो इस पर हमेशा ही संचय रहेगा यह महोदय थे और इस तरीके के बेहतरीन जहाजों का निर्माण उन्होंने करना शुरू किया जहाज रानी और नव परिवहन का उच्च स्तर पर विकास यूरोप में 15वीं शताब्दी में जहाज रानी और नव परिवहन का उच्च स्तर पर विकास हुआ पुर्तगाल जैसे देश द्वारा निजी व्यापारियों को भी समुद्री जहाजों के निर्माण के लिए मोटिवेट किया गया देखो यह कोई साधारण निर्णय नहीं है उस जमाने में केवल राजा ही बड़े-बड़े जहाज बनाने का हक रखता था क्योंकि राजा को हमेशा डर रहता था कि किसी व्यापारी ने बड़ा जहाज बनाया वह कोई नई खोज कर बैठे नई क्र खोज में उसे बहुत मालामाल हो जाए तो वह मुझे कल के दिन

56:47 क्या कर सकता है चैलेंज और इसी कारण से वह डरे रहते थे लेकिन पुर्तगीज के शासक ने कहा कि जो भी व्यापारी कंपनियां है वह जहाज बना बनाए जिस साइज का बनाना है जैसा बनाना है बनाते चले और ताकि समुद्री व्यापार को गति मिल सके इस प्रकार नौ परिवहन के विकास ने भी पूर्वी देशों के साथ यूरोपियन देशों के समुद्री संपर्क को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया यह वह कारण रहे जिसके कारण पूरे यूरोप में एक नए प्रकार की क्रांति देखने को मिली अलग-अलग खोज कर्ताओं ने किन-किन की खोज की तो एक टेबल है पुर्तगाल के वास्कोडिगामा 1498 में भारत की जमीन पर कदम रखते हैं और

57:32 भारत की खोज करते यह हमारे लिए खोज नहीं थी उनके लिए खोज थी स्पेन का कोलंबस खोज करने निकला था भारत की पर बिचारा पहुंच गया और इसीलिए कुछ समय तक तो वह भ्रमित रहा कि क्या सच में यही भारत है पर जब उसने वहां के आदिवासी वहां के कल्चर को देखा तो यह समझ यह तो बहुत ही पुराने जमाने का कल्चर है पुराना मतलब आदिवासी कल्चर है और भारत की कहानियां वह जानता था कि भारत में बड़े-बड़े महल बन चुके हैं भारत के राजा महाराजा भारत की संपन्नता भारत के लोगों के बारे में उसे दिलचस्प कहानियां पता थी जल्दी वह समझ गया कि वह कहीं और पहुंच गया है तो 1492 में कोलंबस

58:20 ने खोज लिया था अमेरिका को ब्रिटेन का कैप्टन कुक भी निकला था खोज कर करने और वह पहुंच गया ऑस्ट्रेलिया और हॉलैंड का तस्मान वन डी मंस लैंड या तस्मानिया या न्यूजीलैंड की खोज की थी हॉलैंड के तस्मान ने तो अलग-अलग देश के अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग द्वीपों को अलग-अलग महाद्वीपों को खोजा यह उनके लिए खोज है हमारे लिए खोज नहीं हम कहेंगे ठीक है तुमने समुद्र का मार्ग ढूंढ लिया यूरोपियन के भारत आगमन का उद्देश्य क्या इस समय यूरोपियन शासन करने के लिए आ रहे हैं उनका मकसद है किसी तरीके से मसाले

59:05 कपड़े और चाइना का रेशम या किसी तरीके से पूर्व से प्राप्त होने वाले देशों के उत्पादों को अपने देश में ले जाना हां थोड़ा बहुत मकसद अपने धर्म का प्रचार करना रहेगा लेकिन वह प्रारंभिक मकसद नहीं है वैसे याद रखिएगा व्यापारी कोई भी हो वह प्राचीन काल का हो या आधुनिक काल का धर्म बाद में रखता है वो पहले व्यापार देखता है बाद में वो कहता है धर्म मेरी आस्था और मेरा व्यक्तिगत विषय है और व्यापार मेरा अपना अलग काम धंधा इसलिए भारत के लोग पूरे साल भर कई बार ऐसी चीजें करते हैं जिसमें मिलावट और गंदे काम भी हो सकते हैं पर वह

59:52 साल भर में कई बार कुछ जगह पर यात्राएं करते ता उन्हें लगता है कि अब वह पाप धोने का समय आ गया है यूरोपियन कंपनियों के भारत आगमन का मुख्य उद्देश मसालों का व्यापार था भारत में आकर यूरोपियन कंपनियों ने विभिन्न स्थानों पर अपनी व्यापारिक बस्तियां स्थापित की हालांकि य बस्तियां अथवा फैक्ट्री उत्पादन के केंद्र नहीं थे अब थोड़ा शब्द समझना हम यहां पर जो बस्ती वर्ड या फैक्ट्री वर्ड यूज करेंगे उस जमाने की फैक्ट्री और आज की फैक्ट्री में जमीन आसमान का फर्क है आज फैक्ट्री वर्ड कहती दिमाग में आता है कोई बहुत बड़ी मशीन लगी होगी जहां प्रोडक्शन हो रहा होगा लेकिन उस जमाने में फैक्ट्री का मतलब होता था एक

1:00:37 ऐसा गोडाउन जहां दुनिया भर से भारत के अलग-अलग जगह से या कहीं से भी सामान लाकर रखेंगे अब मुझे बताओ जहां गोडाउन है उस जमाने में पुलिस व्यवस्था इतनी सशक्त नहीं थी दूसरी सशक्त होगी भी तो यह तो विदेशी है ना इनको तो डर रहेगा तो ये अपना गोडाउन कैसा बनाएंगे किले बंद पूरे चारों तरफ ऊंची ऊंची दीवार बनाएंगे भले ही गो डाउन दो कमरे का हो लेकिन उसकी दीवारें काफी ऊंची रखेंगे हर दीवार पर 20-20 तैनाती रखे रहेंगे क्यों क्योंकि इतनी लंबी यात्रा करके जिस चीज के लिए आए थे वो यहां पर लुट ना जाए क्योंकि अगर वो लुट भी गई तो वो कर क्या लेंगे हो सकता है कि उन्हीं पर कोई

1:01:23 झुंड हमला कर दे और निपटा दे तो वह किले बंद रखेंगे और इसीलिए वह उस समय व्यापार के लिए जो जगह चुनते थे वह समुद्र के कली करीब होती थी और उसी के आसपास वो अपना पूरा किला बनाते थे वहीं पर जहाज में आए हुए 500 हज लोग भी रहते थे अब एक जहाज में 500 नहीं क्योंकि अकेला जहाज लेकर क्या करेंगे एटलीस्ट पाच पाच 10-10 20-20 जहाजों का बेड़ा लेकर आते थे क्योंकि उन्हें पता है कि एक बार आएंगे चार महीने जाने में लगेंगे तो जब जाएंगे तो थोड़ा सा सामान बड़ी मात्रा में तो एक एक जहाज पर 50 50 लोग भी हो तो 500 हजार लोग होते थे जिसमें मुख्य रूप से 100 1 स लोग उसी फैक्ट्री के आसपास रहते थे चार महीने तक

1:02:09 रहना है तो झोपड़िया बना देंगे वहीं पर रहने की जगह बना लेंगे तो उसी को हम कह देंगे कि किले के आसपास ही वह अपनी बस्ती बसा लेते थे कहानी दिमाग में वर्तमान के नजर से मत देखना नहीं तो आप कहोगे व्यापार करने आया शाम को तो लौटना है उसको वो क्यों बस्ती बसा रहा है क्यों झोपड़ी बना रहा है तो उसे पता है कि यहां दो महीने रुकना है सामान बटोर है फिर चार महीने की यात्रा करनी है तो बकायदा पूरे रहने की व्यवस्था के साथ वह पहुंचते थे यहां पर वस्तु और मसालों आदि का संग्रह कर उन्हें यूरोप भेजा जाता था यह बस्तियां किले बंद क्षेत्र की तरह होती थी जिनमें वस्तुओं के भंडारण के अलावा कार्यालय और व्यापार के व्यापारियों के आवास ग्रह भी होते थे उल्लेखनीय कि भारत में बस्तियों के निर्माण की यह कला पुर्तगालियों द्वारा

1:02:56 मूलत इटली के व्यापारियों से प्राप्त की गई पुर्तगाली जब भारत आए तो उन्होंने ऐसा किया हमने कहा तुमने कहां से सीखा तो उन्होंने कहा हमने यह सीखा है इटली के व्यापारियों से जिसे बाद में पूरी यूरोपियन कंपनियों ने अनुसरण करना शुरू किया थोड़ा कंपनी के बारे में समझते हैं भारत में जो यूरोपियन कंपनी आई उसका सीक्वेंस क्या है यह जो मैंने लिखा यहां पर यह कंपनी की स्थापना की बातचीत है कंपनी की स्थापना का मतलब कंपनी का बनना कहां भारत में नहीं अपने अपने देश में पुर्तगीज की कंपनी कहां बनेगी पुर्तगाल में डचों की कंपनी डच में डेनिश की कंपनी डेनिश हॉलैंड में बनेगी

1:03:43 वैसे ही स्पेन की कंपनी स्पेन में बनेगी तो कंपनी का बनना जैसे मान लीजिए भाई अन अकेडमी है तो अनअकैडमी 2015 में बनी तो ये उसका क्या हुआ स्थापना वर्ष और मान लेते कि वह दूसरे देश में बच्चों को पढ़ाने के लिए गई 2024 में तो हम कहेंगे 2024 में उस देश में अपना पहला कार्यालय खोला क्या कहानी समझ में आ रही है तो सबसे पहले आए पुर्तगीज या पुर्तगाली ईस्ट इंडिया यह सब लोग कंपनी का नाम ईस्ट इंडिया क्यों रख रहे हैं क्योंकि उनके लिए पूर्व मतलब भारत ही है अभी भी तो पुर्तगालियों ने अपनी कंपनी का नाम रखा पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी इसके पीछे एक और रीजन

1:04:30 समझना इनके दिमाग में एक बात थी कि मोनोपोली ही व्यापार का सबसे बेहतर तरीका है और इसके लिए वह सभी लोग राजाओं से रिक्वेस्ट करते थे कि अगर किसी एक कंपनी को आपने किसी क्षेत्र में व्यापार की अनुमति दी तो उस देश की अपने ही देश की कोई दूसरी कंपनी उस क्षेत्र में कंपटीशन करने क्या यह बात समझ में आ रही है इसीलिए जब नाम आ गया पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी तो आपके दिमाग में आना चाहिए फिर सर पुर्तगाल की दूसरी कंपनियां क्यों नहीं आई क्योंकि राजा ने पहले ही तय कर दिया है व्यापारियों ने तय कर लिया है कि हम वहां कंपटीशन अपने ही लोगों को नहीं देंगे मैंने बताया कि वह इतने गंदे लोग थे कि दूसरे देश की जहाज मिले तो आगे बढ़ने की

1:05:16 जगह पहले युद्ध शुरू करेंगे और जहाज को खत्म करेंगे क्योंकि उन्हें लगता था मोनोपोली ही व्यापार का इकलौता मार्ग है और इसी परिणाम स्वरूप इन लोगों ने काफी लंबे समय तक मोनोपोली के तहत ही व्यापार किया तो पुर्तगाल की जो ईस्ट में व्यापार करने वाली मोनोपोली करने वाली कंपनी थी उसका नाम था पुर्तगाली ईस्ट इंडिया कंपनी कब बनी थी वास्को डिगामा के कदम रखने पर ही 1498 में और इसने अपनी पहली कोठी कोठी मतलब वह जमीन जो किले बंद वाला जगह जहां वह स्टोर करेगा कब खोली 1503 में कहां पर खोली कोचीन में दूसरी थी डच ईस्ट इंडिया

1:06:03 कंपनी देखो कितने साल के बाद आ रही है दूसरी कंपनी 100 च साल के बाद पहुंची भारत में मतलब एक तरफा पुर्तगीज ने काफी लंबे समय तक मोनोपोली बनाए रखी डच ईस्ट इंडिया कंपनी 1602 में बनी थी लेकिन भारत में 1605 में मछली पटनम अकबर का आखिरी शासनकाल का दौर चल रहा है अकबर की इसके बाद मृत्यु हो जाएगी तो अकबर के होते हुए और तीसरी फिर पहुंचे अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी कंपनी बनी थी 1600 में लेकिन पहली औपचारिक शुरुआत फैक्ट्री की हुई सूरत में

1:06:50 1613 में देखो कंपनी बनी 1600 में आ गई थी 16 में भारत में लेकिन उस समय जो मुगल सत्ता थी उसने उसे आसानी से स्टब्स होने क्योंकि पुर्तगीज ने बहुत भड़का के रखा था उन्होंने कहा था कि यह ठीक लोग नहीं है हमारे जैसे नहीं है हम बड़े अच्छे लोग हैं यह गंदे लोग हैं इनको आने ना दो काफी लंबे समय लेकिन यहां पर पुर्तगीज और अंग्रेजों का एक झुंड आगरा के करीब उनमें युद्ध हुआ और पुर्तगीज हार गए यह खबर राजा को पता चली तो राजा ने कहा अच्छा पुर्तगीज डरपोक थे और इसलिए फिर उन्होंने ईस्ट इंडिया

1:07:35 कंपनी को अनुमति दी 1613 में इन्होंने पहली औपचारिक शुरुआत सूरत में की लेकिन यह अंग्रेज इतने बदमाश थे कि मछली पट्टनम में ऑलरेडी शुरुआत कर चुके थे बगैर अनुमति के लेकिन अगर प्रश्न आया कि ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी पहली कंपनी कहां स्थापित की तो हम सूरत ही लिखेंगे मछली पट्टनम नहीं क्योंकि मछली पट्टनम औपचारिक शुरुआत नहीं है वह चोरी छिपे की गई है और उसके बाद फिर आए डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी अब देखो कंटिन्यू आ रहे हैं आप अगर देखेंगे तो 1605 1613 1620 और 1668 अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी के बाद

1:08:21 डेनिश आए 1616 में उन्होंने अपनी कंपनी बनाई थी और वह ट्रंक बेर में अपनी पहली शाखा खोलते हैं फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी जो कि सबसे अंत में आती है क्योंकि वास्तविक रूप में फ्रांस एक ऐसा देश यूरोप का बन गया जहां पर राजाओं का शासन लंबे समय तक रहा और वह कहीं ना कहीं गृह युद्ध से भी पीड़ित रहा बाकी देशों ने बहुत जल्दी ही राजाओं की शक्तियां छीन ली पार्लियामेंट बना ली थी ब ये लंबे समय तक अपनी ही चीजों में डूबे रहे तो सबसे अंत में कौन पहुंचा फ्रांस और सबसे पहले पूर्त गीत पुत्र ने डच में

1:09:06 अंग्रेजी डिश फ्री में ली तो पू का मतलब हुआ पुर्तगीज डच अंग्रेजी डेनिश और फ्रांस तो पुत्र ने डच में अंग्रेजी डिश फ्री में ली पुर्तगीज डच अंग्रेजी डेनिश फ्रांसीसी 1503 1605 1613 1620 1668 अगर देखा जाए तो वैसे वह 102 साल के बाद दूसरी कंपनी का प्रारंभ होता है तो मोटे तौर पर अगर हम कहे तो यूरोपियन कंपनियां इस क्रम में भारत आती हैं वह भारत में आने वाले क्रम है और यह उनकी कंपनियों का एस्टेब्लिशमेंट ईयर है

1:09:51 क्लियर है बातें अब हम इस पड़ाव में शुरू कर रहे हैं पुर्तगीज का आगमन थोड़ा पुर्तगीज डिटेल में पढ़ेंगे उसके बाद अंग्रेजों को ही पढ़ना है और फ्रांसीसी को थोड़ा पढ़ेंगे क्योंकि आखिरी में अंग्रेजों को चैलेंज देने का जो जिम्मा था वह फ्रांसी सियों का था पर डच और डेनिश को बहुत संक्षिप्त में पढ़ेंगे क्योंकि उन्होंने उतने कोई बड़े परिवर्तन भारत में नहीं किए तो यह पुर्तगीज को पढ़ने का बड़ा कार क्योंकि पहले है ये पहला पुर्तगीज जो भारत आया वास्कोडिगामा कहां पर कालीकट केरल में अरबों के व्यापारिक

1:10:38 प्रभाव को समाप्त करना कहानी जुड़ रही है अरब वाली मसालों के व्यापार पर मोनोपोली चाहते यही है भारत में ईसाई धर्म का प्रसार लेकिन वैसे मैं कहूंगा कि ईसाई धर्म भारत में ऑलरेडी था लेकिन प्रसार के रूप में नहीं वैसे पुर्तगीज का मेन मकसद धर्म का प्रसार नहीं है पर ये क्यों धर्म के प्रसार की आड़ लेते थे क्योंकि पुर्तगीज में राजाओं का भले ही प्रभुत्व रहा लेकिन धर्म का प्रभुत्व उतना तेजी से खत्म नहीं हुआ तब कई बार चर्च के लोग विरोध करते थे कि आप ऐसी यात्राएं ना करें तो वह चर्च को क्या बोलकर मनाते थे कि हम आपके धर्म का प्रसार करने जा रहे हैं तो अब रास्ता देखिए ये है पुर्तगाल मैं मैप

1:11:25 में पुराना मैप आपको पहले दिखा देता हूं जो यह देखो यह वाला जो क्षेत्र है ना यह फ्रांस है यह ब्रिटेन है स्पेन और यह पुर्तगाल है तो यह यहां के लोग है यह ठीक है अब इसी मैप को मैं बड़ा कर रहा हूं यह वाली जगह पर हम जा रहे हैं ठीक है यह वाली जगह पर हम आ गए तो यह रास्ता शुरू हुआ इनका पुर्तगीज का और पुर्तगीज जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है तो केप वर्डे मिला उसे यह एरो पर ध्यान देना फिर यहां पर कैप ऑफ गुड हो यहां उसकी

1:12:14 मुलाकात अब्दुल मजीद से हुई अब्दुल मजीद से कहा मैं भारत ढूंढ रहा हूं अब्दुल मजीद ने कहा आओ मेरे साथ मैं तुम्हें भारत ले जाता नहीं तो वो गरीब भी कहीं भटक जाता फिर इस तरीके से वह अब ये जो ऐसा बना दिया है क्योंकि रास्ता एग्जैक्ट किसी को पता नहीं कोई वीडियो रिकॉर्डिंग तो ऊपर से हो नहीं रही थी तो एक आईडिया लगा दिया कि ठीक है भा वो भारत पहुंच गए भारत पहुंचा कहां पर केरल वाली जगह अगर आप केरल जाएंगे तो एक चर्च बना हुआ है केरल में और उस चर्च में एक पत्थर लगा हुआ है जिस पर लिखा हुआ है यही वह जगह है जहां वास्कोडिगामा ने अपने गंदे कदम रखे थे आज भले अच्छे कदम के

1:13:01 रूप में रखा गया ठीक है गंदे कदम का मतलब ऐसा कुछ नहीं है कि वह बुरे थे बट उनके कारण कहीं ना कहीं भारत की व्यापारिक क्षति बहुत बड़ी मात्रा में हुई उनका तो बहुत लाभ हुआ लेकिन भारत बहुत घाटे में चला पुर्तगीज तो बुरे नहीं थे लेकिन जो अंग्रेज आए उसने फिर बहुत चीजें खराब की वास्कोडिगामा यह वह महोदय हैं जो समझ सकते हैं कि पूरी प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रहे हैं तत्कालीन राजकुमार मैनुअल प्रथम के आवान पर पुर्तगाली व्यापारी और नाविक वास्कोडिगामा द्वारा मई 1498 में भारत की खोज की गई वास्कोडिगामा गुजराती व्यापारी अब्दुल मजीद की सहायता से कैप ऑफ गुड होप

1:13:48 होते हुए कालीकट तट पर स्थित कथा कडा बू नामक स्थान पर पहुंचता है 1500 ईसवी में पेड्रो अल्वारेज कैब्राल भारत आने वाला दो साल के बाद ही जैसे ही वहां पहुंचा होगा वास्कोडिगामा और उसकी कमाई देखी तो पुर्तगीज के बीच में इच्छाएं जागी कि अब मैं भी जाऊंगा देखो जाना जाने का निर्णय बहुत कठिन निर्णय है क्योंकि रास्ता बहुत ही लंबा रास्ता है दो महीने का रास्ता भी पकड़ लो कई जहाज और ना जाने कौन-कौन बीच में मिलेगा ब्रिटिशर्स मिल गए स्पेनिस मिल गए तो वहीं पर युद्ध शुरू कर देंगे तो चैलेंजिंग बहुत सारे हैं दूसरा

1:14:34 समुद्र का मार्ग नया मार्ग है वहां उठने वाले तूफानों के बारे में और उतने जहाज ऐसे थोड़ी है जो आज के जमाने के विमानवाहक पोत जैसे बनते हैं भाई जहाज जहाज ही थे लकड़ी के बने हुए तो भी कितना बड़ा जहाज बना लेंगे 1502 में वास्कोडिगामा पुनः भारत आया था दिल है कि मानता नहीं क्योंकि अब लालच और भी बढ़ गया तो तीन लगातार 1498 में वास्कोडिगामा 1500 में पेड्रो अल्वारेस कैब्राल 1502 में पुनः वास्कोडिगामा वास्कोडिगामा जब पुर्तगाल वापस लौटा तो उसने भारत से लेकर लेकर गए मसालों को 60 गुना अधिक मूल्य पर बेचा

1:15:20 इससे अन्य पुर्तगाली व्यापारी भी भारत के आगमन के लिए आक हुए उल्लेख नहीं कि कैप ऑफ गुड होप की खोज जो अफ्रीका का सबसे आखिरी पॉइंट है पुर्तगाली नाविक बार्थो लोमू द्वारा की गई थी कालीकट का जो राजा था उस समय में जमोरिन था वास्कोडिगामा का स्वागत किया देखो वास्कोडिगामा का स्वागत मतलब राजा को किसने बताया कि कोई व्यक्ति इतनी लंबी यात्रा करके हमारे तट पर पहुंचा है तो भई हमारे यहां के लोगों ने कहा अद्भुत हम स्वागत करेंगे तो जमोरिन ने स्वागत किया जमोरिन स्वागत किया हालांकि भारत में पहले से विद्यमान अरब व्यापारी अब वहां अरब व्यापारी क्यों होंगे क्योंकि केरल

1:16:06 मसालों का सबसे बड़ा उत्पादन क्षेत्र था तो अरब के व्यापारी तो वहां ऑलरेडी बसे हुए उनको पता चला होगा कि भाई पहुंच गया यूरोप का एक जहाज जो रास्ते हमने लोके थे 1453 से 1498 लगभग 45 वर्ष से जहां रास्ता रोक के रखा था उनको तो झटका लग गया होगा कि रास्ता खोज लिया मतलब अब हमारी जो मोनोपोली थी वह तकलीफ में आएगी तो थोड़ा सा जमोरिन के इस कदम का विरोध करेंगे अरब के व्यापारी इस प्रकार पुर्तगाली व्यापारियों के भारत आगमन का क्रम प्रारंभ होता है और मध्यकाल में सर्वप्रथम भारत से व्यापारिक संबंध स्थापित करने वाला पुर्तगाली वास्कोडिगामा बनता है फल स्वरूप

1:16:53 1503 में पुर्तगालियों ने कोचीन में अपनी पहली व्यापारी कोठी की स्थापना देखो 1503 तक तीन पुर्तगीज आ गए ना वास्कोडिगामा कैब्राल फिर वास्कोडिगामा तो अब उन्हें गारंटी हो गई ना कि हां भाई रास्ता सिक्योर है आना जाना बिल्कुल होगा तोब उन्होंने तय किया कि अब हम अपनी एक कोठी वहां बनाएंगे अब कोठी बनाने का मतलब यह वो दौर नहीं है कि जहां जमीन करोड़ों के भाव में बिल रही है समुद्र के किनारे भारतीय लोग उतना रहना पसंद नहीं करते छोटी-छोटी बस्ती गांव समझ लो अब गांव में आज भी कोई विदेशी व्यक्ति आ जाए और अपनी झोपड़ी बना ले तो क्या आपको लगता है सरपंच साहब पहुंच

1:17:38 कर कहेंगे चलो उड़ो झोपड़ी निकलो यहां से क्योंकि हम कहते आया है रहने रह रहा है शांति से तो उस जमाने में जो छोटे-छोटे शहर हैं या जो गांव बसे हैं उन्होंने कोठी जमीन बस जमोरिन ने अनुमति दी और उनको वोह मिल गई कोई जमीन खरीदने का खर्चा तो हुआ नहीं होगा आज चैलेंजिंग है आज कहीं भी व्यापार करने जाओगे कोई भी जमीन खोलनी होगी कमरा रेंट पर लेना हो अमेरिका हो भारत हो कहीं भी हजारों रुपए लग जाएंगे रेंट के ही उस जमाने में किस्मत थी कि रेंट वेंट नाम की कोई घटना नहीं थी जहां टेंट वही रेंट पुर्तगालियों के भारत में प्रथम दुर्ग प्रथम दुर्ग मतलब किला पर किले का मतलब वो किला नहीं जो हमने देखे लाल किले

1:18:27 क्योंकि किला दिमाग में आता है तो बच्चे को लगता है कि किला आ भी गया इसका तो किले का मतलब गोडाउन गोडाउन के चारों तरफ ऊंची ऊंची वो बेचारे डरे हुए हैं इसलिए वह किले बना रहे हैं दुर्ग बना रहे हैं का निर्माण और इस समय अल्बू कर्क जो कि अभी गवर्नर नहीं आगे यह पुर्तगीज का गवर्नर बन के आएगा आप समझना उस जमाने में गवर्नर उसे कहते थे जिसको किसी जग पर कंपनी की पूरी जिम्मेदारी दे दी जाती आज जिसको हम कहते हैं चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर सीईओ कि भाई यही कंपनी का करता धरता है उस जमाने में उन्हें क्या कह देते थे तो कई बार बच्चे के दिमाग में आता है गवर्नर तो

1:19:13 राज्यपाल होता है तो कोई राज्यपाल राज्यपाल नहीं उस किले का पूरा अंतिम निर्णय वो व्यक्ति लेगा उसको हम कहते थे उस जमाने का गवर्नर तो अल्बूकर कभी गवर्नर नहीं था लेकिन पुर्तगालियों के भारत में प्रथम दुर्ग का निर्माण 1503 में किसने किया अल्बूकर्क ने तो अल्बुकर्क ने किया तब उस समय उसका पद इतना बड़ा नहीं था लेकिन जब यह लौटेगा क्योंकि इसके पास भारत का अनुभव है 1509 में इसी को गवर्नर बनाकर भेजेंगे अब गवर्नर का मतलब दिमाग में आना चाहिए अप किले की जिम्मेदारी वाला व्यक्ति और किला मतलब गोडाउन है इनका नाम ही ऐसे

1:20:00 यूज करते थे गंदे लोग कि आज के जमाने में लगता है कि बहुत ही बड़ी चीज लेकर आए होंगे अगर वह यूज करते कि पहला गोडाउन बनाया था कोचीन में तो अंदर से आवाज आती ग डाउन बनाया गरीबों ने पहला जो कंपनी का जिम्मेदार ना मतलब पूरा कर्मचारी था वो था अल्बूकर्क जिसको जिम्मेदारी दी गई ऐसा कह देते तो हमारे नाम में कंफ्यूजन है गवर्नर किला दुर्ग कोठी ऐसे शब्दों के कारण भारतीय जो इतिहास पढ़ते हैं वह डर जाते कि शुरुआत य कोठियों से कर रहे हैं हमारी झोपड़ी पूरी तरह से बननी बारी हो र सीधा कोठी बना देते थे तो गोडाउन पहला जो बनाया व अल्बुकर्क ने बनाया 1503 में कोचीन में

1:20:48 पुर्तगालियों के द्वारा जो पहला गवर्नर नियुक्त किया था उसका नाम था था फ्रांसिस्को डी अलमेडा नाम में फ्रांस है लेकिन इसके दिमाग में कोई फ्रांस नहीं है यह शुद्ध रूप से पुर्तगीज है फ्रांसिस्को डी अलमेडा अपनी व्यापारिक गतिविधियों को कुशलता पूर्वक संचालित करने के लिए शब्दों पर गौर करेंगे मकसद क्या केवल और केवल अपने ट्रेड से जुड़ी हुई एक्टिविटी को एफिशिएंटली बेटर करने के लिए इन्होंने पढ़ा लिखा व्यक्ति भेजा जिसको व्यापार का लंबा अनुभव था कुशलता पूर्वक संचालित करने के लिए फ्रांसिस्को

1:21:33 डी अलमेडा को 1505 में भारत में पहला पुर्तगाली गवर्नर नियुक्त किया गवर्नर मतलब वह कंपनी पूरी तरह से कंट्रोल करेगा 1509 में फ्रांसिस्को डी अलमेडा ने दीव पर अधिकार कर लिया दीव मतलब जो वर्तमान में दमन दीव है छोटा सा द्वीप अब भारतीय जो है राजा महाराजा व द्वीप पर क्यों नहीं ध्यान दे रहे दिमाग में रखिए उनका साम्राज्य कोई साधारण तो भाई छोटे-छोटे द्वीप पर ध्यान देंगे तो इतना बड़ा कैसे ध्यान रख पाएंगे साथ ही अलमेड़ा ने हिंद महासागर के व्यापार पर नियंत्रण स्थापित किया तो जो हिंद महासागर का क्षेत्र था क्योंकि अभी

1:22:18 तक तो कोई दूसरा पहुंचा ही नहीं था तो अरब सागर कहे थोड़ा सा बंगाल की खाड़ी कहे यहां पर उन्होंने एक तरफा अपना कब्जा किया कब्जा मतलब कोई दूसरा जहाज खत्म कर डालते थे नियंत्रण स्थापित करके ब्लू वाटर पॉलिसी या शांत जल की नीति को अपनाया हमारी बगैर अनुमति के आप यहां से जहाज अब यहां कौन से जहाज थे यहां पर भाई भारत है यह तो बहुत दूर से आए लेकिन मेडागास्कर यह जो अफ्रीकन है देश इन अफ्रीकन देशों के साथ भारतीय लोगों के व्यापार तो चल रहे थे ना अब्दुल मजीद नहीं गया था जहाज लेकर तो उनके जहाज उनके जहाज को भी अनुमति लेनी पड़ती थी किनसे

1:23:06 पुर्तगीज से क्योंकि उनके राजा ने कहा भाई पानी पर हम क्या करेंगे जमीन पर कोई तकलीफ दे तो मुझे बताओ तो पानी में उनका पूरा शासन कायम हो गया किनका पुर्तगीज का तो पहला गवर्नर जो पुर्तगीज का आया वो था फ्रांसिस्को डी अल्मेरा पिक्चर यह क्लियर हो रही कि गवर्नर बोल जरूर रहा हो पर गवर्नर का मतलब किसी क्षेत्र का शासक नहीं है वह इस तरीके की वह बस्तियां बसाने लगे थे एक तरीके से समुद्र का किनारा और यहीं पर ऐसे अपने मकान बनाते थे लोग इस तरीके के कपड़े पहनते थे तो यह भी वह दौड़ था जहां छोटी-छोटी जगह पर झोपड़िया और चारों तरफ सुरक्षा के

1:23:51 लिए देख रहा है ये पूरी वॉल काफी मजबूती के साथ इन्होंने निर्माण किए वस्तुत अलमेड़ा का दूर दृष्टि का परिणाम था कि उसने उस समय भारतीय शासकों के विपरीत समुद्री व्यापार के महत्व को समझ लिया इस समय पुर्तगालियों का प्रमुख उद्देश्य शांतिपूर्वक व्यापार करना और भारत में मसालों के व्यापार पर मोनोपोली करना परंतु ब्लू वाटर पॉलिसी ने समुद्री क्षेत्र में पुर्तगालियों की व्यापारिक महत्वाकांक्षा को बढ़ा दिया मतलब अब उन्हें लगा कि अगर यह पूरा क्षेत्र हमारे कब्जे में रहेगा पानी वाला तो हमारे से बगैर पूछे कोई भी यूरोप में सामान तक नहीं भेज पाएगा अब पुर्तगाली कंपनी ने भारत और

1:24:37 यूरोप के मध्य होने वाले समस्त समुद्री व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करने की अपनी रणनीति बनाई फिर 1509 में कौन लौटा अल्बूकर्क जिसने कोठी बनाने में पूरी मदद की थी फ्रांसिस्को डी अलमेडा के बाद 1509 में अल्बुकर्क भारत में पुर्तगाली गवर्नर बनकर आया अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है क्योंकि इसने विस्तार शुरू किया फिर एक कोठी की जगह पर कई कोठियां बनाना शुरू हुई कोचिन के बाद ये अलग-अलग जगह पर अपनी कोठी बनाना शुरू करेंगे कोठी मतलब वही गोडाउन क्योंकि जहां-जहां से भी चीजें जमा हो सकती वो जमा करते चलेंगे इस समय अभी इनके दिमाग में केवल यही है कि किसी तरीके से

1:25:24 भारत से सामान प्राप्त करते चले अल्बूकर्क ने जहां एक और पुर्तगाली शक्ति को भारत में बढ़ाया वही दूसरी और भारतीय और पुर्तगाली संबंधों की आधार शिला निर्मित की अभ अल्बूकर थोड़ा बदमाश नेचर का था इसने कहा कि जो भी पुर्तगीज में भी उच्च जाति और निम्न जाति के लोग मिलते थे तो पुर्तगीज के जो निम्न जाति के लोग थे उनसे कहा कि वोह यहीं पर रह जाए यहीं पर अपना परिवार बसाए भारतीय महिलाओं के साथ भारतीय जो पुरुष है अगर उनके साथ महिला है तो यहीं पर विवाह करे और यहीं पर रहे क्यों क्योंकि पूरे टाइम पुर्तगीज का एक कॉलोनी बस जाएगी तो कभी भी पुर्तगीज उन्हें मदद कर पाएंगे तो पुर्तगाली संबंधों के आधार

1:26:09 शिला निर्मित की अल्ब अल्बुकर्क ने भारतीयों को भी पुर्तगाली सेना में छोटे पदों पर भर्ती किया अब जैसे मान लो कोई भारतीय व्यक्ति है गांव का फुरसत का व्यक्ति था भैसे चराता था उसने कुछ समय तक इसकी गोडाउन को देखा और पुर्तगीज का कोई व्यक्ति आया उसने कहा कि काम करोगे अपनी लैंग्वेज में वह शायद ना समझ पाया हो लेकिन काम करने का यहां पर एक मान लो उसने दिखा दिया कि यहां खड़े रहो बस दरवाजे के पास उससे फायदा क्या होगा उससे फायदा यह होगा कि वह जानते है कि यही का नागरिक है अगर यहां पर यह रहेंगे चार पांच लोग तो यहां पर कुछ भी इशू होता है तो ये संभाल सकेंगे जैसे भाई हर कोई व्यक्ति जब कोई कोई नए शहर में ऑफिस खोलता है तो कुछ वही

1:26:56 के लोकल लोग रखना चाहता है ताकि कुछ भी मामला हो तो इजू सॉल्व हो सके क्योंकि नए व्यक्ति को वहां के बारे में उतनी जानकारी नहीं होती है तो उन्होंने वहां पर छोटे-छोटे पदों पर सिक्योरिटी गार्ड के रूप में मतलब भारतीयों को भी भर्ती करना शुरू किया निम्न वर्गीय पुर्तगालियों को भारतीय स्त्रियों से विवाह करने हेतु प्रेरित किया ताकि भारत में पुर्तगाली बस्तियां बसाई जा सके और सुगमता पूर्वक व्यापार किया जा सके अल्बुकर्क ने कोचन के क्षेत्र में सती प्रथा पर रोक लगा दी मतलब सती प्रथा का विरोध उस जमाने में अल्बूकर्क ने कर दिया था पर वह कोचीन मतलब कोई बहुत बड़ा क्षेत्र उस जमाने का वह नहीं है वह बहुत ही सीमित क्षेत्र की बात कर रहे 1510 में अल्बूकर्क ने बीजापुर के

1:27:44 शासक आदिल शाह यूसुफ से सैन्य अभियान के माध्यम से गोवा जीत लिया यह जो गोवा का क्षेत्र था ये वाला क्षेत्र यहां के बीजापुर के शासक के कब्जे में था तो अभी अपने साथ 500 हजार जवान तो रखते थे उसमें 200 भी अगर सैनिक है तो इतना क्षेत्र में बीजापुर के शासक ने भी थोड़ी सी सेना रखी होगी युद्ध हुआ और वो क्षेत्र उन्होंने पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया किनसे जीता था आदिल शाह यूसुफ से इसके अलावा अल्बूकर्क ने 1511 में दक्षिण पूर्व एशिया के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र मलक्का मलक्का कहां पर है इंडोनेशिया का जो क्षेत्र आता है जिससे

1:28:30 हिंद महासागर और प्रशांत महासागर आपस में जुड़ते हैं उसको कहते हैं मलक्का जल संधि इस जगह पर भी कब्जा कर लिया किसने अल्बूकर्क ने 1515 में फारस की खाड़ी पर्शियन वाली जो खाड़ी है तट पर स्थित

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