The Hindu Analysis | 9th May 2026 | The Hindu Newspaper - Practice Questions | Prashant Sir

Brief Summary

In this video from UPSC Wallah, various important topics related to current affairs and government schemes are discussed. Key highlights include the introduction of the NOTA option in voting, challenges in student retention in education, details on the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGS), and new defense technologies like the TARA weapon system and JANANI platform for maternal health. The discussion also touches on India's data management inefficiencies and a conversation about India's defense posture and related essays.

  • Discussion on NO-TA and its implications for elections.
  • Analysis of student retention issues and educational challenges.
  • Overview of MGNREGS and its updates.
  • Introduction of new weapons system and healthcare platforms.

Introduction

The session begins with the speaker greeting the audience and summarizing the key topics that will be covered, emphasizing the importance of continuous education. Due to connectivity issues, the session was recorded early in the morning to ensure timely delivery of the analysis.

Topics to be covered

The speaker outlines the day's main topics, including editorials around the fragmentation of data in India and defense-related articles. Important concepts such as the NOTA voting option, low student retention rates, MGNREGS, the TARA weapon system, and the JANANI platform for maternal health are introduced.

NOTA

NOTA, which stands for ‘None of the Above,’ was introduced following a Supreme Court judgment in 2013 to allow voters to express their disapproval of candidates. Despite a significant percentage of votes possibly going to NOTA, its votes are not counted toward election outcomes, meaning it does not impact who wins. The chapter also discusses how NOTA maintains voter privacy and emphasizes that it currently holds no election validity.

Low student retention

A report by NITI Aayog outlines concerns about low student retention rates in India. While students enroll in primary education, many drop out before completing higher classes due to increased costs, family pressures such as child marriage, and employment demands. Suggestions for improvement include establishing composite schools that span multiple grades, thereby minimizing dropout rates as students transition to higher levels of education.

MGNREGS

The Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (MGNREGS), which offers 100 days of guaranteed employment per year in rural areas, is undergoing changes. The scheme is being revised to the 'Vikasit Bharat Guarantee for Employment and Livelihood Mission' (developing grants of 125 days of work yearly). Concerns are raised about budget allocation and potential biases by the central government that could favor certain states.

TARA Weapon

The TARA weapon system, developed by DRDO and tested by the Indian Air Force, enhances conventional bombs by incorporating navigational capabilities for precise targeting. This development allows for safer and more effective strikes from a distance, reducing risk to pilots and aircraft.

The JANANI Platform

The JANANI platform launched by the Ministry of Health focuses on maternal and child healthcare. It serves as a digital record system for monitoring health from pregnancy through childbirth, providing families with portable health cards and aiding healthcare providers in tracking vaccinations and managing high-risk pregnancies.

India’s Data Room

India's fragmented data system among various ministries results in inefficiencies. The lack of integrated data leads to redundant records and higher management costs, hindering effective policymaking. A proposed National Data and Analytics Platform aims to streamline data across departments for better transparency and efficiency.

India’s defense Posture

The video discusses India's defense posture in light of recent military operations that indicate a shift in strategic threats from both Pakistan and China, highlighting the need for indigenous weapon development and the importance of technology in ensuring national security.

UPSC Essay Discussion

Three essay topics for UPSC preparation are shared. They focus on the balance of innovation and inclusion in society, the ethical implications of science and its applications, and the inner battles people face in life. The speaker encourages students to engage with these topics thoughtfully.

Thank You

The session concludes with the speaker encouraging viewers to remain dedicated to their studies and provides a reminder about their associated social media channels for further engagement.

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Transcript

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0:02 हेलो एंड गुड मॉर्निंग एवरीवन सुप्रभात नमस्ते कैसे हैं आप सभी मैं प्रशांत आप सभी का स्वागत करता हूं द हिंदू न्यूज़ पेपर एनालिसिस में दोस्तों आज 9 मई है और 9 मई में हम सभी करेंगे इतने सारे टॉपिक्स का एनालिसिस आप सभी जानते हैं कि मैं ट्रैवल कर रहा हूं एंड यहां पर बोर्ड की फैसिलिटी अवेलेबल नहीं है तो मैंने क्या किया है मॉर्निंग में उठकर इस लेक्चर को रिकॉर्ड किया है एंड फिर टीम को प्रोवाइड किया है कि वह आप सभी को बिल्कुल टाइम से यह पूरा का पूरा एनालिसिस प्रोवाइड कर सके। इसके लिए मुझे 3:00 बजे उठना पड़ा है जिससे यह सेशन आपके पास में टाइम से जा सके क्योंकि नेट की कनेक्टिविटी भी यहां पर अवेलेबल नहीं है। तो आज के इस सेशन को आप सभी मैनेज कर लेना क्योंकि कंटिन्यूटी

0:50 बनी रहनी चाहिए। लेक्चर्स में कोई भी ब्रेकडाउन नहीं होना चाहिए। ये मेन टॉपिक है। तो सबसे पहले अगर देखेंगे तो आज दो एडिटोरियल है जिसके अंदर में देखेंगे एक डेटा के बारे में है कि डेटा इंडिया में बहुत ज्यादा फ्रेगमेंटेड है। उसके अलावा देखा जाए इंडिया के डिफेंस से रिलेटेड आर्टिकल है। फिर एक नोटा ऑप्शन बहुत अच्छा आर्टिकल है। एग्जाम में पूछा जा सकता है। उसके बाद में स्टूडेंट्स का रिटेंशन रेशियो काफी लो है। मनरेगा से रिलेटेड है। जननी पोर्टल है एंड तारा वेपन सिस्टम। तो ये सारे टॉपिक्स आज हम डिस्कस करेंगे। एंड लास्ट में आप सभी को पता है क्योंकि आज सैटरडे है तो एस्स को हम कैसे मिस कर सकते हैं। तो आगे बढ़ते हैं और आप सभी को अगर इस सेशन की पीडीएफ चाहिए आपको द हिंदू न्यूज़पेपर चाहिए इंडियन एक्सप्रेस चाहिए तो आप सभी के सभी इस tlegram चैनल को ज्वाइन कर सकते हैं। यह Instagram है।

1:37 इसको भी आप सभी के सभी कनेक्ट कर सकते हैं। तो सबसे पहला टॉपिक है अभी आप सभी को पता है कि पांच स्टेट्स के अंदर में क्या हुए हैं? इलेक्शंस हुए हैं। एंड इलेक्शंस के बाद में क्या किया है? इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने डाटा पब्लिश किया है कि भाई किस स्टेट में कितना वोटिंग हुआ है एंड कितने परसेंटेज ऑफ इनक्रीस हुआ है। कितना वुमेन ने वोट किया है? कितना मेन ने वोट किया है। अब यहां पर हमारे लिए ज्यादा इंपॉर्टेंट क्या है? हमारे लिए इंपॉर्टेंट है ये नोटा। नोटा का मतलब क्या हो गया? नन ऑफ दी अबव। यह बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट है आपके एग्जाम के लिए। तो दरअसल आप सभी के सभी जब वोट देने के लिए जाते हैं तो आप सभी ने देखा होगा कि वहां पर ईवीएम मशीन में सबसे नीचे एक ऑप्शन होता है जिसको बोलते हैं नोटा यानी कि मुझे इनमें से कोई भी पसंद नहीं है। तो दरअसल अगर आप देखेंगे

2:24 पहले क्या होता था अगर आपको किसी को वोट नहीं देना है तो आपको वहां पर जो ऑफिसर होते थे उनको जाकर बताना होता था कि मैं इनमें से किसी को भी वोट देना नहीं चाहता हूं। आप समझिए आपके पास में कैंडिडेट्स ऐसे हैं जो इनमें से आपको कोई भी पसंद नहीं है। एंड आप इनमें से किसी को भी वोट देना नहीं चाहते। तो अगर आप वोट देना नहीं चाहते हैं तो आपको क्या करना पड़ता था? ऑफिसर को बताना पड़ता था कि भाई मेरी पसंद का कोई भी कैंडिडेट नहीं है। इस कारण से मैं इनमें से किसी को वोट नहीं देना चाहता। तो ये आपकी सीक्रेसी एंड प्राइवेसी का हनन हुआ ना। तो इसको लेकर कोर्ट में क्या किया गया? चैलेंज किया गया कि क्यों ना हम कोई ऐसा मैकेनिज्म लेकर आए जिससे यह जो प्राइवेसी एंड सीक्रेसी का भी हनन ना हो। एंड कोई भी पर्सन अपनी इच्छा को क्या कर सके? शो भी कर सके। तो सुप्रीम कोर्ट

3:10 ने आर्डर दिया कि क्यों ना ईवीएम के अंदर में नोटा नन ऑफ द अबव के मैकेनिज्म को लाया जाए। तो 2013 के अंदर में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के जजमेंट के बाद में फर्स्ट टाइम इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने क्या किया? नोटा को इंट्रोड्यूस किया। अब एक बड़ी इंटरेस्टिंग बात याद रखिएगा कि नोटा की हमारे देश में कोई वैल्यू नहीं है। अब आप कहेंगे सर यह क्या कह रहे हैं? जी हां दोस्तों आप ये चीज समझने की कोशिश करिए कि मान के चलिए किसी भी कॉन्स्टिट्यूएंसी के अंदर में अगर वोटिंग होती है 20 लोगों की एंड 10 वोट्स किसको पड़ते हैं? नोटा को पड़ते हैं। ए को फाइव वोट बाकी सभी को एक-एक वोट पड़ते हैं। तो आइडियली देखा जाए तो सबसे ज्यादा वोट किसको है? नोटा को है। तो यहां पर दोबारा

3:56 से री इलेक्शन होना चाहिए। बट ऐसा नहीं है। हमारे देश के अंदर में नोटा की वैल्यू क्या है दोस्तों? जीरो होती है। तो यानी कि नोटा में चाहे हाईएस्ट नंबर ऑफ वोट पड़ जाए फिर भी उनकी वैल्यू को कंसीडर नहीं किया जाता। इनको साइड रख दिया जाता है। यानी कि उनको इनवैलिड काउंट कर लिया जाता है। एंड उसके बाद में जो लोगों को वोट पड़े उनमें से विनर को डिक्लेअ कर लिया जाता है। तो अगर देखा जाए तो नोटा सिर्फ और सिर्फ आपको अपना जो वोट का अधिकार है वह देने में हेल्प कर रहा है। कि आप कह रहे हैं कि मुझे कोई पसंद नहीं है। बट क्या इससे कोई इलेक्शन के ऊपर में इंपैक्ट पड़ रहा है? नो इससे कोई भी इंपैक्ट इलेक्शन पर नहीं पड़ता। तो इवन सुप्रीम कोर्ट में ये पिटीशन भी फाइल की गई है कि क्यों ना नोटा की कहते हैं ना वैलिडिटी को या फिर लेजिटसी को बनाया जाए जिससे अगर

4:44 कुछ सर्टेन परसेंटेज अगर नोटा को वोट पड़े तो वहां पर रीइलेक्शन कराया जाए। तो अभी सुप्रीम कोर्ट इसके ऊपर में विचार कर रहा है। बट अभी के लिए नोटा की कोई वैल्यू नहीं है। तो यूपीएससी में अगर आपको कंफ्यूज किया जाए कि अगर सबसे ज्यादा वोट नोटा को पड़ गए तो क्या होगा? इलेक्शन कैंसिल हो जाएगा, री इलेक्शन होगा। तो आप क्लियरली याद रखिएगा नो ऐसा नहीं होता है। तो नन ऑफ द अबव प्लीज याद रखिएगा नोटा बहुत इंपॉर्टेंट है आपके एग्जाम के लिए। एंड इसको ईवीएम में इंट्रोड्यूस किया गया जहां पर वोटर्स ये कह सकते हैं कि भाई इनमें से मुझे कोई भी चूज़ नहीं है। कोई भी पसंद नहीं आ रहा जिससे सीक्रेसी आपकी बनी रहेगी। ठीक है? और ये 2013 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने इलेक्शन कमीशन को क्या किया था? डायरेक्ट किया था। है ना? क्योंकि पहले क्या होता था? जो कंडक्ट ऑफ़ इलेक्शन रूल्स थे 1961 वहां पर आपको जाकर

5:30 खुद को बताना पड़ता था कि मैं इनमें से किसी को भी वोट देना नहीं चाहता हूं। तो और आपको सिग्नेचर करने होते थे, थंब इंप्रेशन देना होता था। तो ये आपके सीक्रेसी को क्या करता था? यह वायलेट करता था ना। तो 2004 में सुप्रीम कोर्ट में इसके अगेंस्ट में पिटीशन फाइल की गई कि कैसे राइट टू सीक्रेसी ऑफ़ वोटर्स को मेंटेन किया जाए। तो 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया और उसके बाद में नोटा पहली बार पांच स्टेट्स की असेंबलीज में यूज़ होता है। चंडीगढ़ चंडीगढ़ कह रहा हूं छत्तीसगढ़, मिजोरम, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश के अंदर में। फिर बाद में 2014 के अंदर में फर्स्ट टाइम जनरल इलेक्शन के अंदर में होता है। ठीक है? प्लीज याद रखिएगा। नोटा काउंट किए जाते हैं बट इनके वोट्स की कोई वैल्यू नहीं होती है। ठीक है? यह याद रखिएगा। नेक्स्ट एक बहुत इंपॉर्टेंट रिपोर्ट है दोस्तों।

6:16 नीति आयोग की रिपोर्ट है। एक डिकेडल रिपोर्ट है। यानी कि पिछले 10 साल का क्या है? एक प्रॉपर एनालिसिस है। जहां पर इन्होंने कुछ ऐसी चीजें फ्लैग करी हैं जो हमारे देश के लिए क्या है? एक बहुत बड़ा कंसर्न होना चाहिए। यहां पर सबसे पहली बात तो इन्होंने कहा कि भाई हमारे देश के अंदर में बच्चों का एडमिशन तो हो रहा है। चलो एडमिशन करा लिया बट उनका रिटेंशन नहीं हो रहा। यानी कि जैसे-जैसे वो हायर क्लास के अंदर में जाते हैं उनका रिटेंशन नहीं हो रहा है। वो ड्रॉप कर रहे हैं। एक तो ये सबसे बड़ा चैलेंज बताया। दूसरा एक और बहुत बड़ा चैलेंज बताया गया कि हमारे देश के अंदर में जो जो लोअर यानी कि कह लीजिए प्राइमरी स्कूल्स हैं उनके नंबर्स काफी ज्यादा हैं। है ना? एंड जो बड़े स्कूल्स हैं उनके नंबर क्या है? कम है। तो यहां पर

7:03 जो ट्रांजिशन होना चाहिए यानी कि बच्चे जो हैं वो छोटी क्लास में तो एनरोल कर ले रहे हैं। ये बात आपने भी देखा होगा। बट बड़ी क्लासेस के अंदर में ट्रांजिशन नहीं हो पा रहा। उसके मल्टीपल फैक्टर्स हैं। मल्टीपल फैक्टर्स का मतलब क्या? एक तो स्कूल जब शिफ्ट होता है तो एरिया यानी कि डिस्टेंस भी क्या होता है? इनक्रीस होता है। थोड़ा सा आपको डिस्टेंस ट्रैवल करके जाना पड़ता है। एक फैक्टर यह रोल प्ले करता है जिसके कारण में यह ट्रांजिशन नहीं हो पा रहा। दूसरा जो कॉस्ट है हायर एजुकेशन की यानी कि बड़ी क्लासेस की एजुकेशन की जो बुक्स की जो कॉस्ट है वह सब भी क्या करती है? बहुत ज्यादा इंपैक्ट करती हैं। आप सभी को ध्यान होगा कि राइट टू एजुकेशन की हम बात करते हैं तो 14 इयर्स तक क्या फ्री ऑफ कॉस्ट हम एजुकेशन की बात करते हैं। बट उसके बाद में जो एजुकेशन है उसकी जो कॉस्ट

7:50 है वो भी एक बहुत बड़ा बैरियर प्ले करती है। रोल प्ले करती है। तीसरा पॉइंट अगर आप इंटरेस्टिंग यहां पर देखेंगे तो फीमेल यानी कि गर्ल्स को शादी यानी कि जो चाइल्ड मैरिजेस होती हैं वो भी एक कारण प्ले करता है। दूसरा अगर आप देखेंगे जो मेल होते हैं जो बॉयज होते हैं उनको एंप्लॉयमेंट में क्या किया जाता है? इंगेज कर लिया जाता है। यह भी एक बहुत बड़ा कारण है। जिसके कारण में वह हायर एजुकेशन में स्टूडेंट्स का रिटेंशन नहीं हो पा रहा है। मैं फिर बता रहा हूं। छोटी क्लास के अंदर में बच्चे का एडमिशन हो जाता है। मिड डे मील मिलता है, प्री एजुकेशन है, स्कूल्स की बुक्स फ्री है, बैग फ्री है, सब कुछ फ्री है। बट जैसे-जैसे हायर ग्रेड्स आती हैं, वहां पर यह रिटेंशन हमें देखने को नहीं मिलता। और मैंने मल्टीपल रीज़ंस आपके साथ में डिस्कस किए कि ये क्यों हो रहा है? क्यों आखिर रिटेंशन नहीं हो रहा? दूसरा

8:37 इन्होंने एक और बहुत बड़ी बात कही कि लर्निंग आउटकम्स बहुत खराब है। आप यह देखें अगर क्लास एट के अंदर में आप देखें तो वहां पर सिर्फ 45% लोग ऐसे हैं जो एक बेसिक मैथ्स की प्रॉब्लम को सॉल्व कर पा रहे हैं। अगर आप देखेंगे एटथ क्लास के बच्चे को अगर यह कहा जाए कि आप क्लास टू के जो बुक है उसको अगर आप पढ़ लें, रीड कर लें तो उसमें चैलेंज है। यानी कि लर्निंग आउटकम भी एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। तो इसमें नीति आयोग ने फिर सजेशन दिया है। नीति आयोग ने सजेशन ये दिया है कि क्यों ना भाई यहां पर क्या किया जाए? कंपोजिट स्कूल बनाए जाए। कंपोजिट स्कूल का मतलब ऐसे स्कूल बनाए जाए जो क्लास वन से लेकर क्लास 12 तक रहे। यानी कि एक ही जगह पर सब

9:22 कुछ मिले। जिससे यह ली की जो पाइपलाइन है मतलब एक स्कूल से दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने में जो बच्चे नीचे निकल जाते हैं यानी कि ड्रॉप अप कर लेते हैं। क्यों ना उनको रोका जाए। है ना? तो उसके लिए क्यों ना एक कंपोजिट स्कूल बनाया जाए जहां पर क्लास वन से लेके 12थ तक किया जाए कि बच्चे ने एक बार एनरोल कर लिया तो मैक्सिमम चांस रहे कि उसको हम रिटेन कर पाएं। दूसरा एक और बड़ा इंटरेस्टिंग चैलेंज यहां पर देखने को मिलता है। पीने का पानी अवेलेबल नहीं है। वाशरूम अवेलेबल नहीं है। हाथ धुलने की फैसिलिटीज अवेलेबल नहीं है। जिससे हाइजीन को मेंटेन कर सकें। इवन नीति आयोग ने तो एक और बहुत बड़ी चीज को फ्लैग किया है। कहा है कि अभी कहा जा रहा है कि भाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्कूल करिकुलम में ऐड किया जाएगा। इवन कहा जा रहा है

10:07 क्लास थ्री से ऐड किया जाएगा। तो इन्होंने एथिकल फ्रेमवर्क के ऊपर में भी क्वेश्चन उठाया कि क्या यह कहीं ना कहीं बच्चों की जो ग्रोथ है या बच्चों की जो क्या नाम है लर्निंग कैपेबिलिटीज है उसके ऊपर में तो इंपैक्ट नहीं करेगा। साथ में यह भी कहा है कि हो सकता है एआई जो इंडिपेंडेंट थिंकिंग मॉडल है या इंडिपेंडेंट जो हम कॉग्निटिव स्किल्स कहते हैं थिंकिंग स्किल्स हैं उसको भी क्या कर सकता है? यंग लर्नर के अंदर में इंपैक्ट कर सकता है। जैसे आप अपना एग्जांपल लीजिए आप सभी के सभी क्या कोई टॉपिक जब आप पढ़ते हैं तो क्या उसके बारे में खुद से सोच पाते हैं शुरू से? आप सभी के सभी को अब आदत हो चुकी है चैट जीपीटी करने की सर्च करने की। तो ये बहुत बड़ी प्रॉब्लम है जिसको नीति आयोग ने भी क्या किया है? काफी ज्यादा प्लैग किया है कि यह बहुत यंगर एज से ही बच्चे के अंदर

10:52 में सर्च करने की या सपोर्ट की क्या करेगा? स्किल्स को या फिर कह लीजिए उसकी डिपेंडेंसी को बढ़ा देगा। जिसके कारण में जो इंडिपेंडेंट थिंकिंग है उसको क्या करेगा? ये इंपैक्ट करने वाला है। तो ये बहुत इंपॉर्टेंट है। यह डीकेड की रिपोर्ट है। 2014 से लेकर 2024-25 तक की रिपोर्ट है। एंड इस इस रिपोर्ट का टाइटल है स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया टेंपोरल एनालिसिस पॉलिसी रोड मैप जिससे क्वालिटी एनहांसमेंट किया जा सके। बहुत सारे डेटाज़ का यूज़ करके नीति आयोग ने इस रिपोर्ट को बनाया है। तो वो कहते हैं सबसे पहली बात तो भारत के अंदर में वर्ल्ड के लार्जेस्ट स्कूल सिस्टम है। 14 लाख 14.71 लाख स्कूल्स हैं। जहां पर 24 69 करोड़ स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं। एंड टीचर्स अगर देखें तो 1.01 करोड़ टीचर्स हैं। यहां पर

11:39 हमारा ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो बढ़ा है। यानी कि एडमिशन रेश्यो तो बढ़ा है। इस समय पर 58% है। यानी कि अभी भी देखा जाए आधा ही है। अगर 100 बच्चे हैं तो उनमें से 58.4 यानी कि मान लीजिए 59 बच्चे ही क्या कर रहे हैं? स्कूल सिस्टम में एडमिशन ले रहे हैं। एंड उसमें भी देखा जाए तो गवर्नमेंट स्कूल 68.1 स्कूल्स ऑल स्कूल का जो सबसे ज्यादा स्कूल है वो क्या है? गवर्नमेंट स्कूल हैं। और जो स्टूडेंट्स की पॉपुलेशन है वो कहां पर है? आप एक और बड़े इंटरेस्टिंग यहां पर डिस्पैरिटी देख सकते हैं कि 68.1% स्कूल गवर्नमेंट स्कूल हैं। हमारे देश में जितने भी स्कूल हैं लेकिन उनमें पॉपुलेशन स्टूडेंट्स कितने हैं? सिर्फ 49% है। आधे से कम। यानी कि ज्यादा बच्चे कहां जा रहे हैं? प्राइवेट स्कूल्स में जा रहे हैं। आप

12:25 खुद सोचो ना कि अराउंड 30% के आसपास में स्कूल्स में 50% के आसपास में बच्चे जा रहे हैं। एंड दूसरी तरफ में 68% के आसपास स्कूल में 50% के आसपास बच्चे जा रहे हैं गवर्नमेंट स्कूल में। है ना? तो डिफरेंस आपको समझ आ रहा है। यानी कि प्राइवेट स्कूल्स में बच्चे ज्यादा जा रहे हैं। दूसरा अगर देखा जाए तो कई सारी क्या नाम है? कैबिनेट का कई सारी कमीशंस का जिक्र किया। जैसे मुदलियार कमीशन 1952, कोठारी कमीशन 1964। ठीक है? ये भी चीज याद रखिएगा। ऐसे सर्व शिक्षा अभियान जो 2001 में शुरू किया गया। अभी आपको ध्यान होगा 2020 में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी शुरू किया गया। अच्छा एक क्वेश्चन है आपके लिए कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी जो 2020 की आई है। इससे पहले और कौन-कौन सी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी आ चुकी है? तो यहां पर इस एनालिसिस में बताया गया सबसे पहला तो यही प्रॉब्लम

13:12 बताया गया कि भाई प्राइमरी लेवल पर तो यूनिवर्सल क्या हो चुका है? आपका एनरोलमेंट हो चुका है। यानी कि बच्चे अगर छोटे हैं तो वो एडमिशन ले रहे हैं। बट जैसे ही दोस्तों बड़ी क्लासेस में जाते हैं बच्चे क्या करते हैं? ड्रॉप कर लेते हैं। यानी कि हर 10 में से चार बच्चा एव्री 10 चाइल्ड में से चार बच्चे जो इस सिस्टम में एनरोल करते हैं, वह ड्रॉप आउट कर लेते हैं अपनी हायर सेकेंडरी एजुकेशन को कंप्लीट करने से पहले। एक और बड़ी इंटरेस्टिंग चीज बताई कि हमारे देश में बहुत सारे स्कूल्स हैं जहां पर जीरो स्टूडेंट हैं। जैसे कि आप देखेंगे वेस्ट बंगाल में 3000 से ज्यादा स्कूल्स हैं जहां पर जीरो स्टूडेंट्स हैं। तेलंगाना में 2000 से ज्यादा स्कूल्स हैं। लेकिन अब

13:59 आप खुद सोचिए इन स्कूल में सैलरी जारी है। इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया। कागजों पर यह फंक्शनल है। बट एक भी स्टूडेंट यहां पर नहीं है। तो रिपोर्ट ने कहा कि भाई क्यों ना हम एक कंपोजिट स्कूल बनाएं। 11 एक से लेकर 12 तक के क्लास वन से लेकर 12 तक का स्कूल पूरा का पूरा कंप्लीट एक ही जगह पर रखें। अभी मैंने आपको जस्ट बताया कि ये राइट टू एजुकेशन एक्ट एज 14 तक की बात करता है। उसके बाद में जो ट्यूशन की फीस, बुक्स, ट्रांसपोर्टेशन यह सारी की सारी कॉस्ट किस पे आ जाती है? फैमिली पे आ जाती है। तो यह भी एक रीजन है क्या? ड्रॉप आउट का एक और बड़ी इंटरेस्टिंग चीज आप देखें। रिपोर्ट कहती है कि 1 लाख से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं जहां पर फंक्शनल इलेक्ट्रिसिटी ही नहीं है। पानी हाइजीन

14:47 फैसिलिटीज इनकंसिस्टेंट है। ड्रिंकिंग वाटर अवेलेबल नहीं है। एंड वाशिंग फैसिलिटीज नहीं है। आप देखेंगे मैंने आपको कई बार ये बोला है कि इवन टीचर्स के लिए भी वाशरूम अवेलेबल नहीं है। तो यह बहुत बड़ा चैलेंज है। दूसरा मैंने आपको अभी जस्ट बताया था एआई को इंटीग्रेट करना। तो यहां पर एआई कुड डिमिनिश इंडिपेंडेंट थिंकिंग इन यंगर जनरेशन। नीति आयोग ने इसके बारे में वर्न किया है। टीचर्स क्या हमारे पास में उतने अवेलेबल हैं जो एआई ट्रेनिंग प्रोवाइड कर सकते हैं? क्या उतने ट्रेंड अवेलेबल हैं? ठीक है? एंड बहुत इंपॉर्टेंट चीज जो लास्ट में अभी हमने एनरोलमेंट की बात करी, एडमिशन की बात करी। एनरोलमेंट का मतलब होता है एडमिशन। है ना? अब बात कर रहे हैं यहां पर रीडिंग प्रोफिशिएंसी। क्या पढ़ना आ रहा है? आपने

15:34 क्लासेस तो पास कर रहे हैं। नहीं क्लास ए के बच्चा क्लास टू के टेक्स्ट को नहीं पढ़ पा रहा है। यह सोचिए क्लास एट का बच्चा एक बेसिक सी क्लास टू की जो डिवीजन की प्रॉब्लम है, मैथ्स की प्रॉब्लम है उसको सॉल्व नहीं कर पा रहा। यह एक बहुत बड़ा चैलेंज है कि हमारे पास में जो आप देखेंगे थ्योरी में यानी कि बुक्स में नंबर्स तो ऐसे नजर आएंगे कि भाई साहब 100 बच्चे पढ़े लिखे हैं। लेकिन ये बच्चे क्या सही में पढ़े हैं? क्या सही में इनकी स्किल्स में भी इंप्रूवमेंट हुई है। ये बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है। नेक्स्ट टॉपिक वैसे तो हमने पढ़ा हुआ है। अभी ट्रांजिशन फज़ चल रहा है। है ना? आप सभी को ध्यान होगा। महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट आया था ना

16:20 मनरेगा इसमें ये कब आया था? 2005 के अंदर में स्कीम आई थी जिसमें ये और सिर्फ ये स्कीम रूरल एरिया के लिए है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जहां पर 100 डेज का गारंटीड वर्क प्रोवाइड किया जाता था। यानी कि अगर आप गांव से बिलोंग करते हैं और आपकी उम्र 18 साल से ज्यादा है तो आप गवर्नमेंट से क्या कहेंगे? भाई साहब मुझे काम दो। तो गवर्नमेंट आपको 1 साल के अंदर में 100 डेज का काम देगी ही देगी। अगर नहीं दे पाते हैं तो वह क्या करेंगे? आपको इसका भत्ता देंगे यानी कि अलाउंससेस देंगे। तो ये स्कीम बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट रही। जहां पर आप देखेंगे रूरल एरिया के अंदर में एंप्लॉयमेंट में काफी एनहांस हुआ। वुमेन एंप्लॉयमेंट में भी काफी कुछ इनक्रीस हुआ। एंड इवन यह भी कहा गया कि जो पावर्टी रेट है जो गरीबी रेखा

17:05 से लोगों को बाहर निकाला गया उसके अंदर में भी इस स्कीम ने काफी ज्यादा हेल्प करी। अब आपको ध्यान होगा लास्ट ईयर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने इसको रिप्लेस किया एंड काफी कुछ चेंजेस किए हैं। जैसे कि फॉर एग्जांपल जिसका नाम है विकसित भारत गारंटी रोजगार एंड आजीविका मिशन है ना याद होगा आप सभी को जो 2025 में पास किया गया और उसमें चेंजेस क्या किए गए उसमें 100 डेज को बढ़ाकर 125 डेज कर दिया गया है। सबसे पहली चीज तो यह करी गई है। लेकिन कुछ उसमें चैलेंजिंग चेंजेस भी किए गए हैं। जैसा कि अब ऐसा नहीं है कि जितने लोग आएंगे उतना काम देना पड़ेगा। अब ऐसा कर दिया गया कि भाई हर एक स्टेट को बजट एलोकेट किया जाएगा। एंड उस बजट के

17:54 अकॉर्डिंग में क्या करेगा? स्टेट काम करेगा। तो फॉर एग्जांपल मान के चलो यूपी को कहा गया कि आपके पास ₹100 हैं। तो यानी कि अब उनके पास में सिर्फ 100 ही लोगों को काम देने का ऑप्शन बचा। लेकिन पहले ऐसा नहीं था। पहले चाहे 1000 लोग काम मांगे उसमें फंड की कोई ऐसी लिमिट नहीं थी। पहली बात तो ये याद होगा। प्लस में सेंटर एंड स्टेट का शेयर को क्या किया गया? इनक्रीस कर दिया गया। जिसके कारण में स्टेट्स के ऊपर में जो बर्डन है वो और ज्यादा क्या होगा? इनक्रीस होगा। चौथा पॉइंट अगर यहां से आप कनेक्ट करने की कोशिश करेंगे तो सेंट्रल गवर्नमेंट के पास में यह अधिकार है कि वह स्कीम को पॉज भी कर सकते हैं। एक सबसे बड़ा कंसर्न है कि अगर स्टेट्स को अलग-अलग पैसा एलोकेट किया जाएगा तो वहां पर एक सबसे बड़ी प्रॉब्लम आ रही है कि शायद

18:39 सेंट्रल गवर्नमेंट पॉलिटिकल पार्टीज के अकॉर्डिंग कहीं किसी एक पर्टिकुलर पार्टी को फेवर ना करें। किसी स्टेट को फेवर ना करें। ऐसी कोई प्रॉब्लम तो क्रिएट नहीं होगी। ऐसे करके बहुत सारे कंसर्न्स निकल कर आ रहे हैं। यह जो नई स्कीम आई है, अभी इसकी इंप्लीमेंटेशन नहीं हुई। तो, अभी इस स्कीम से इस स्कीम में ट्रांज़िशन हो रहा है। तो, अब स्टडी हुई है जो बता रहे हैं कि 2025-26 के अंदर में जो वर्क डज़ हैं, यानी कि जो वर्कर को वर्क डज़ एलोकेट किए गए हैं, उनमें ड्रॉप है। लोगों का एनरोलमेंट तो बढ़ रहा है लेकिन वर्क डेज़ उसमें क्या है? ड्रॉप हमें देखने को मिल रहा है। तो ये स्कीम थी मुझे जो आपके साथ में डिस्कस करना था। बट ये बहुत इंपॉर्टेंट है आपके एग्जाम के लिए। जीएस पेपर टू में भी इंपॉर्टेंट है। जीएस पेपर

19:25 थ्री में भी बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है। खासतौर पे ये आपके रूरल इकोनॉमी के लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है। रूरल एरिया के अंदर में एंपावरमेंट में बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट रोल प्ले किया। वुमेन को एक कलेक्टिव वॉइस प्रोवाइड करने के अंदर में इस स्कीम ने काफी कुछ हेल्प किया। बट इस स्कीम के अंदर में सबसे बड़ी प्रॉब्लम क्या थी? एक मिडिलमैन वाला प्रॉब्लम था। जहां पर बिचौलिए बने हुए थे जो क्या करते थे? पैसा ले लेते थे पर्सन का जॉब कार्ड बनाने के लिए। प्लस में जिसको नीड होती थी उसको वर्क मिलता ही नहीं था। तो गवर्नमेंट ने क्या किया? आधार, मोबाइल और अकाउंट को क्या किया? कनेक्ट कर दिया। ठीक है? जिसके बेसिस पर जो नीडी पर्सन है उसी के अकाउंट में क्या जाएगा? पैसा जाएगा। जिससे यह जो बिचौली ये मिडिल मैन वाले थे इनको क्या किया जाए? कम किया जाए। तो ऐसे ही आपको

20:12 ध्यान होगा कि Jio टैग करके अटेंडेंस लगाना यह भी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने शुरू किया था। जिसके कारण में गवर्नमेंट ने कहा था कि बहुत सारे जो डुप्लीकेट एंड बोगस जो जॉब सीकर हैं, जॉब कार्ड बने हुए हैं उनको हमने क्या किया? डिलीट कर दिया है। जिससे बहुत सारे पैसे को हम क्या कर रहे हैं? बचा रहे हैं। बट रिसेंटली जो 2025 के अंदर में अमेंडमेंट किया गया है वो अमेंडमेंट नो डाउट 125 डेज बढ़ा रहा है। बट उसमें इंप्लीमेंटेशन लेवल पर बहुत सारे चैलेंजेस आ रहे हैं। जहां पर सेंट्रल गवर्नमेंट को कहते हैं ना ओवर सेंट्रलाइजेशन यानी कि उनके पास में पावर ज्यादा आ रही है। तो स्टेट्स का ये कहना है कि ये एक तरीके से स्टेट्स की ऑटोनोमी के ऊपर में क्या करेगा? इंपैक्ट कर सकता है। एंड तीसरी चीज जो स्टेट बार-बार एलगेशन लगा रहे हैं कि

20:58 शायद सेंट्रल गवर्नमेंट फंडिंग के अंदर में भी क्या कर सकती है? एक तरीके से पार्शियलिटी शो कर सकती है। जैसा कि आप कई जगह पर देखते भी हैं। तो ये एक बहुत बड़ी चैलेंज है। और कई सारे लोग इसीलिए कह रहे हैं कि जो एमजी नरेगा है वो उसकी जो कहते हैं ना सोल वो क्या हो गई? खत्म हो गई है। एंड जो एक रूरल एरिया के अंदर में एक एंप्लॉयमेंट गारंटी एक्ट स्कीम थी वो क्या हो चुकी है? अब डाइल्यूट हो चुकी है। बट प्लीज प्रीलिम्स के लिए फैक्ट नोट कर लीजिएगा। 100 डेज वर्क के बारे में जो अभी एमजी नरेगा के तहत में एंड ट्रांजिशन के बाद में 125 डेज का है वीवी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन। ठीक है? प्लीज याद रखिएगा। बहुत इंपॉर्टेंट है। क्लियर है? तो वही सब चीजें इसके अंदर डिस्कस की गई है कि यह एक्ट आ चुका है एंड

21:44 आने वाले समय में बहुत जल्दी ये फोर्स में आने वाला है। मनरेगा को रिप्लेस कर देगा। तो मनरेगा से जो आपका नया वीबी गारंटी फॉर रोजगार ग्रामीण एक्ट है उसमें जो ट्रांजिशन हो रहा है उसमें फंड जो एलोकेट किया गया है वह भी काफी कम एलोकेट किया गया है। बहुत कम फैमिलीज़ हैं जो गारंटीड 100 डेज के वर्क को कंप्लीट कर पा रही हैं। लोग एनरोल ज्यादा हो रहे हैं बट उनको वर्क डेज उतने नहीं मिल रहे हैं। ये सारी की सारी चीजें इसी चीज से निकल कर आ रही हैं। कि जो नंबर हैं एनरोलमेंट के वो बढ़े हैं बट एंप्लॉयमेंट उतना नहीं बढ़ा है। रिपोर्ट कहते है कि 44 लाख फ्यूअर हाउसहोल्ड एंड 67 लाख फ्यूअर वर्कर्स उनको एंप्लॉय किया गया है प्रीवियस ईयर के रिस्पेक्ट में। आप समझिए कि लोग जो एनरोल कर रहे हैं वो ज्यादा हैं। बट जो एंप्लॉयमेंट प्रोवाइड किया जा रहा है वो

22:31 कम किया जा रहा है। ठीक है? तो ये इसके अंदर हम बताने की कोशिश कर रहे हैं। प्लस में आप देखेंगे यहां पर ये कहने की कोशिश कर रहे हैं कि जो गारंटेड एंप्लॉयमेंट था उसके अंदर में भी जो काम कंप्लीट करने की बात करते थे 100 डेज की उसके अंदर में भी हमें डिक्लाइन देखने को मिला। तो ये स्कीम काफी ज्यादा न्यूज़ में रहती है। एग्जाम के अंदर में क्वेश्चन आ सकता है आपसे एमजी नरेगा और उसके बीच में कंपैरिजन और नए स्कीम्स के बीच में। तो एग्जाम के लिए प्लीज प्रिपेयर करिएगा। एंड मेंस के लिए जो मैं एनालिसिस बार-बार आपको बताता रहता हूं कि मेंस के पर्सपेक्टिव से आपसे क्वेश्चन पूछ सकते हैं एमजी नरेगा का इंप्लीमेंटेशन और क्या-क्या चैलेंजज़ थे। ठीक है? एंड आपसे सीधा-सीधा क्वेश्चन ये भी पूछा जा सकता है कि जो न्यू स्कीम आई है उसमें क्या-क्या पॉजिटिव्स हैं और क्या-क्या नेगेटिव है या फिर उसको कहेंगे क्रिटिकली एनालाइज़ करिए। ठीक है? नेक्स्ट दोस्तों डीआरडीओ ने एंड आपके

23:17 इंडियन एयरफोर्स ने एक तारा वेपन सिस्टम को क्या किया है? टेस्ट किया है। तो अभी आप देखेंगे जैसे कोई बॉम्ब होता है। है ना? उसको उसके पास में खुद का कोई नेविगेशन सिस्टम नहीं है। आप एयरक्राफ्ट में उसको लोड करके लेके जाते हैं और वहां पर क्या करते हैं? उसको गिरा देते हैं। अब क्योंकि आपको बिल्कुल पास जाकर उसको क्या करना पड़ता था? गिराना पड़ता था। एनमी की बिल्कुल क्लोज जाकर। मान के चलिए यह टारगेट है यहां पर। तो यहां पर गिराने के लिए आपको बिल्कुल पास जाकर उसको क्या करना पड़ता था? गिराना पड़ता था। तो वहां पर प्रॉब्लम क्या आती थी कि आपके जो एयरक्राफ्ट है या फिर जो उसको कैरी कर रहे हैं उनके लिए भी खतरा रहता था। इसीलिए आप देखेंगे आजकल क्या यूज़ किया जाता है? यूएवी का यूज़ किया जाता है। है ना? कि भाई उनको यूज़ किया जाए अनमैंड एरियड व्हीकल्स का जिसके कारण में हमारे जो खुद के पायलट्स हैं या वेपन्स को या फिर हमारे एयरक्राफ्ट को नुकसान ना हो। तो अब ये

24:05 तारा ग्लाइड वेपन है। ग्लाइड वेपन समझने की कोशिश करिए। लास्ट ईयर भी ग्लाइड वेपन न्यूज़ में था ग्लाइड बम। तो यह बॉम्ब होता है जिसके अंदर में हम क्या करते हैं? नेविगेशनल कैपेबिलिटीज ऐड करते हैं। तो ऐसी दोस्तों तारा ग्लाइड वेपन सिस्टम है जो क्या करेगा? जो कन्वेंशनल बॉम्ब्स थे या वॉर हेड है उसको क्या करेगा? एडवांस बना देगा। जिसके अंदर में गाइडिंग कैपेबिलिटी आएगी एंड वो क्या करेगा? एक प्रसीजन टारगेट के पास में जाकर क्या करेगा? अटैक करेगा। तो एक तो इससे आपकी रेंज बढ़ गई। मैं यहीं से ही क्या करूंगा? इसको लॉन्च करूंगा। एंड यह बॉम्ब के अंदर में गाइडिंग कैपेबिलिटी है। गाइड करते हुए उस रेंज पर चला जाएगा जहां पर मुझे टारगेट करना है। दूसरा यहां पर क्या होगा कि जो आपके कन्वेंशनल वॉर हेड थे। है ना? वो

24:51 क्या करेंगे? हेल्प करेंगे हमें जो एनिमी है जो दुश्मन है उसके टारगेट्स को क्या करने में? डिस्ट्रॉय करने में। तो ये हमने इंडीजीनस बनाया है। ये हमारी जो टेक्नोलॉजी आप देखिए ये अगर नॉर्मल बॉम्ब होता तो आप उसको क्या करते? सीधा डाल देते जाकर आपका प्लेन लेकर जाते वहां से। अब हमने बॉम्ब के साथ में विंग्स लगा दिए। ठीक है? उस तो यानी कि अब ये विंग्स लग गए तो ये बॉम्ब ग्लाइड होते हुए उस टारगेट पर जाएगा। तो ये चीज समझने की कोशिश करिए। लास्ट ईयर भी ग्लाइडिंग बॉम्ब न्यूज़ में था। तो डीआरडीओ ने डेवलप किया है इंडीजीनसली डेवलप किया है तारा वेपन सिस्टम जिसको हम बोलते हैं टैक्टिकल एडवांस रेंज ऑर्गुमेंटेशन। तो ये फर्स्ट इंडीजीनस ग्लाइड वेपन सिस्टम है जो कन्वर्ट कर देगा कन्वेंशनल अनगाइडेड वॉर हेड। मैंने बताया ना अनगाइडेड वॉर हेड यानी कि आपके पास यह बॉम्ब है। इसको कोई

25:38 गाइड करने का प्रिंसिपल नहीं है। इसको बस जाकर आपको क्या करना है? सीधा गिरा देना है। ठीक है? तो इसको आप कन्वर्ट कर देंगे प्रसीजन गाइडेड वेपन सिस्टम के अंदर में। जहां पर आप एक्यूरेटली ग्राउंड बेस्ड टारगेट को क्या कर पाएंगे? डिस्ट्रॉय कर पाएंगे। ठीक है? तो ये किसके द्वारा बनाया गया? रिसर्च सेंटर इमारत के द्वारा डेवलप किया गया है। इससे क्या होगा? जो लो कॉस्ट एरियल वेपंस हैं उनकी क्या होगी? रेंज और लिथैलिटी क्या हो जाएगी? बढ़ जाएगी। आप समझ रहे हैं? दूसरे देश के ग्राउंड के ऊपर में बहुत सारे टारगेट्स हैं। अब हमें उनको डिस्ट्रॉय करना है। तो जो पहले बॉम्ब हुआ करते थे उसके लिए या तो क्या करना पड़ा था? हमारे एयरक्राफ्ट को बिल्कुल क्लोज जाकर तब बॉम्ब गिराना पड़ता था। अब हमने इस बॉम्ब के अंदर में ही क्या किया है? इस बॉम्ब के अंदर में ही हमने ग्लाइडिंग यानी कि विंग्स को ऐड कर दिया है। फ्लाइट कंट्रोल सरफेससेस को ऐड कर दिया है।

26:24 इक्विप कर दिया है उनसे। तो इससे क्या होगा? यह ग्लाइड कर सकते हैं टुवर्ड्स द टारगेट फ्रॉम लॉन्ग रेंज। जिसे एयरक्राफ्ट आउटसाइड एनमी एयर डिफेंस ज़ोन रहेंगे। वहीं से ही आप इसको लोड कर देंगे। लो कॉस्ट है, एक्यूरेट है और डिफिकल्ट टू इंटरसेप्ट है। ठीक है? यानी कि जो जिनको हम पहले बोलते हैं डम बम को ये स्मार्ट बम में क्या करेगा? कन्वर्ट कर देगा। लॉन्ग रेंज वेपंस बन जाएंगे। तो ग्लाइडिंग बम दरअसल लास्ट ईयर भी न्यूज़ में था जब आपके रशिया ने यूज़ किया था। तो ग्लाइडिंग बम का मतलब यही कांसेप्ट है कि एक नॉर्मल सा बॉम्ब है। उसको आप जाकर सीधा क्या करें? ड्रॉप करें। वहां पर जाकर गिर जाए। ठीक है? और एक क्या होगा? जैसे फॉर एग्ज़ांपल आपने हैंड ग्रेनेड देखा होगा ना हथगोला तो हाथ से उठाकर आपने फेंका किसी के ऊपर में तो वो जाकर वहीं पर डिस्टर्ब हो जाए। अब सोचो उस

27:11 हथगोले में यानी कि उस बम के अंदर में उस वॉर हेड में यह कैपेबिलिटी आ जाए कि वो ग्लाइड कर सके। यानी कि वो नेविगेट कर सके। तो आप दूर से खड़े होकर उसको फेंके हाथ से अपने एंड वो नेविगेट करते हुए उस टारगेट पर जाकर क्या करें? डिस्ट्रॉय कर दे। तो ऐसे ही जो कन्वेंशनल वॉर हेड हैं उनको क्या करेगा? कन्वर्ट कर देगा स्मार्ट वॉर हेड के अंदर में बॉम्ब्स के अंदर में तो यह बहुत इंपॉर्टेंट है तारा है ना तो यह चीज़ याद रखिएगा बहुत इंपॉर्टेंट क्वेश्चन आपके एग्जाम में पूछा जा सकता है कोई डाउट इससे रिलेटेड प्लीज मतलब मेरे ख्याल में बहुत मजेदार ये टॉपिक है नेक्स्ट है जननी पोर्टल तो प्रीलिम्स अब में आप समझ गए होंगे नाम से ही जननी पोर्टल का मतलब क्या मेरे प्यारे दोस्त यह आपके मदर एंड जो आपका किड है यानी कि जो

27:58 चाइल्ड उसकी हेल्थ केयर से रिलेटेड है। तो मिनिस्ट्री ऑफ़ फैमिली मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर ने जननी पोर्टल एक ल्च किया। जर्नी ऑफ़ एंथिनातल नातल एंड न्यूथल इंटीग्रेटेड केयर जो क्या करेगा? हेल्प करेगा। एक डिजिटल प्लेटफार्म है। जहां पर क्या किया जाएगा? मॉनिटर किया जाएगा, मेंटेन किया जाएगा डिजिटल हेल्थ ऑफ वुमेन रिप्रोडक्टिव एज से लेकर बर्थ से लेकर एंड बच्चे की केयर तक। तो, इसको सिंपल सा तरीका समझने की कोशिश करिए। यह फैमिली प्लानिंग से लेकर कितनी बार बच्चे का टेस्ट हुआ है। डिलीवरी फिर उसके बाद में उसका पूरा का पूरा हेल्थ रिकॉर्ड कितने उस पे वैक्सीन लगी हैं। यह सारा का सारा रिकॉर्ड आपके पास में रहेगा। यानी कि एक पोर्टेबल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ कार्ड मिल

28:45 जाएगा जिसको आप पूरे वर्ल्ड के अंदर में पूरे इंडिया में कहीं पर भी क्या कर सकते हैं? एक्सेस कर सकते हैं। तो यह जननी एक पोर्टल है जहां पर आप देखेंगे ऑटोमेटिकली हाई रिस्क जो प्रेगनेंसीज होंगी उनको क्या करेगा? फ्लैग करेगा। ठीक है? इसमें यूविन जहां पर वैक्सीनेशन रिकॉर्ड्स हैं उनको भी क्या किया जाएगा? इसी में इंटीग्रेट कर लिया जाएगा। इवन जो पोशन न्यूट्रिशन के रिकॉर्ड हैं वो भी इसी में इंटीग्रेट कर लिए जाएंगे। तो एक जननी पोर्टल सिंपल सी बात है जहां पर सिटीज़ंस रजिस्टर करेंगे। एंड मदर की एंड चाइल्ड की जो पूरा का पूरा रिकॉर्ड है हेल्थ रिकॉर्ड है डिलीवरी के टाइम बर्थ के टाइम पर कितने वैक्सीन लगे हैं कितना न्यूट्रिशन हो रहा है यह सारा रिकॉर्ड रहेगा एंड इसका सबसे बड़ा बेनिफिट क्या है कि इस पोर्टल के थ्रू आपको एक

29:31 क्यूआर बेस्ड एक पूरा का पूरा प्रोफाइल मिल जाएगी जिसको आप कहीं पर भी क्या कर सकते हैं एक्सेस कर सकते हैं वरना अभी क्या रहता है अरे भाई यह वाली वैक्सीन लगी है क्या इसकी डेट कब की है कब लगी थी किसने लगाई थी पता ही नहीं तो कई सारे बच्चों को वैक्सीन इसलिए नहीं लग पाती है कि भाई उनको पता ही नहीं चलता है कि कब उनकी डेट आई और कब डेट निकल गई। तो उसके अंदर में हेल्प करेगा। प्लस में ऐसे देखेंगे मदर की हेल्थ के लिए अंदर में भी क्या करेगा? हेल्प करेगा। अगर कोई हाई रिस्क प्रेगनेंसी है तो वो इस डेटा के थ्रू क्या किया? तुरंत मेडिकल इंटरवेंशन कराया जा सकता है। तो सिंपल सा प्रीलिम्स का फैक्ट है जननी पोर्टल। ठीक है? प्रीलिम्स के लिए सिंपल सा है। नेक्स्ट है इंडियास डेटा रूम। कोई बहुत बड़ा टॉपिक नहीं है। इसको ऐसे समझने की कोशिश करिए कि भारत में जो डाटा है हर मिनिस्ट्री के पास

30:17 में अपना एक डाटा है। एक ही प्रोग्राम के अलग-अलग जगह पर डेटा को क्या किया जाता है? स्टोर किया जाता है। है ना? जैसे फॉर एग्जांपल पीएम किसान स्कीम है। तो पीएम किसान स्कीम मिनिस्ट्री ऑफ़ रूरल डेवलपमेंट के पास में, फाइनेंस के पास में, बैंक के पास में भी अलग-अलग क्या होंगी? रिकॉर्ड्स मेंटेन किए जाएंगे। तो इससे डाटा रिडंडेंसी होती है। है ना? तो वही इस आर्टिकल में कहना चाह रहे हैं कि इससे क्या प्रॉब्लम आती है? एक तो डेटा को मैनेज करने की जो कॉस्ट है वो भी बढ़ती है। प्लस में डेटा रिडेंडेंसी एक बहुत इंपॉर्टेंट रोल प्ले करता है। जहां पर हम सभी के सभी पॉलिसी मेकिंग उतनी बेटर नहीं कर पाते। इवन आप देखेंगे जो लीकेजेस हैं, मल्टीपल प्रोग्राम्स, मल्टीपल बेनिफिशरीज उसके कारण में जो कॉस्ट है वह बढ़ तो जाती

31:05 है। साथ में जब इसको आप क्लीन अप करने लग जाते हैं तो भी उसकी कॉस्ट बढ़ जाती है। तो क्यों ना हमें एक ऐसा डेटा सिस्टम बनाना चाहिए जो क्या करे? हमें हेल्प करे एक ऐसे डेटा सिस्टम को बनाने में जिससे डेटा रिडेंडेंसी को हम हटा सकें। एंड उसके बेसिस पर क्या है? हमें इकोनॉमिक लेवल पर भी बेनिफिट मिलेगा। पॉलिसी मेकिंग में भी हमें बेनिफिट मिलेगा। एंड हमें एक ट्रांसपेरेंसी को भी हम क्या कर पाएंगे? अचीव कर पाएंगे। जैसे कि उन्होंने एग्जांपल दिया आजकल पार्लियामेंट में बहुत सारे क्वेश्चन पूछे जाते हैं कि भाई कहां पर कितने वाशरूम हैं? कितने सीसीटीवीज हैं? कितने सारे क्या नाम है? बेसिक क्वेश्चंस पूछे जाते हैं। तो ये कह रहे हैं यार ये बेसिक क्वेश्चंस पूछने थोड़ी होते हैं। ये तो डेटा के अंदर में अवेलेबल होना चाहिए। बट क्योंकि हमने डेटा को हमने

31:52 उतना ज्यादा रैशनलाइज नहीं किया है। हमने डेटा को फॉर्मलाइज नहीं किया है। तो ये क्या करता है? एक तो ट्रांसपेरेंसी के ऊपर में भी क्या करता है? इंपैक्ट करता है। तो सिंपल सा एक प्रॉब्लम ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत के अंदर में एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम है कि हमने जो डेटा है जो पब्लिक डोमेन में होना चाहिए था। ना ही उसको क्लियर किया है, ना ही स्टैंडर्डाइज किया है, ना ही उसको इजी एक्सेबल फॉर्मेट में रखा है। तो इस कारण से लोग इन्हीं के ऊपर में क्वेश्चंस पूछते रहते हैं। तो कह रहे हैं नेशनल डाटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफार्म जो कि नीति आयोग ने रिलीज किया था। उन्होंने कहा कि क्यों ना हम इंडिया के डाटा इकोसिस्टम को क्या करें? ऐसा बनाएं जहां पर डाटा रिडेंडेंसी भी कम हो। साथ में मल्टीपल मिनिस्ट्रीज गवर्नमेंट के डिपार्टमेंट्स वो एक ही जगह के डाटा को

32:38 क्या कर सके? एक्सेस कर सके। हर कोई अलग-अलग डेटा सिस्टम ना बनाए। ठीक है? तो ये चीज के ऊपर में नीति आयोग ने ये नेशनल डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफार्म विज़न एक डॉक्यूमेंट दिया था। जहां पर उन्होंने कहा कि ऐसी चीजें होनी चाहिए। क्योंकि इंडिया के अंदर में इतना डेटा जनरेट हो रहा है। इतना अबंडेंस में है लेकिन उसको हम यूज़ ही नहीं कर पा रहे। डाटा कलेक्टेड बाय इंडिविजुअल मिनिस्ट्रीज अपने-अपने प्रोग्राम के लिए। उसको हम इंटीग्रेट ही नहीं कर पा रहे। जिसे हम दूसरी जगह पर क्या कर सके? यूज़ कर सके। नीति आयोग की रिपोर्ट कहती है जून 2025 में कि बहुत सारे वेलफेयर प्रोग्राम जो हम चलाते हैं वहां पर सेम बेनिफिशरी के डाटा को मल्टीपल टाइम्स हमें रखना पड़ता है जिसके कारण में फिसिकल लीकेजेस होते हैं जिसके कारण में जो एनुअल जो एक्सपेंडिचर है वो बढ़ जाता है। एग्जांपल देते हैं। जैसे उन्होंने कहा

33:24 कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि उसके अंदर में डाटा को रिमूव करने से क्या होगा? 17.1 मिलियन इन एएलिजिबल नेम्स को डिलीट करने से पोटेंशियल सेविंग होगी। जैसे कि एग्जांपल दिया आप यहां पर देख सकते हैं 90 बिलियन की क्या होगी? सेविंग होगी। इतनी दूसरा अगर देखा 35 मिलियन की जो बोगस एलपीजी कनेक्शंस हैं उनको अगर आप डिलीट करेंगे तो 210 बिलियन की क्या रुपए की क्या होगी? हमें हेल्प मिलेगी। जिससे 16 मिलियन फेक राशन कार्ड्स को हम क्या करेंगे? अगर डिलीट करेंगे तो 100 बिलियन एनुअली हम बचा सकते हैं क्योंकि डेटा रिडंडेंट है। सेम डेटा अलग-अलग जगह पर है। तो इस कारण से आप एक सीमलेस एंड एक

34:10 कॉम्प्रिहेंसिव डेटा सिस्टम भी नहीं बना पा रहे जिसके कारण में लीकेजेस बहुत होती है। डुप्लीकेसी बहुत होती है। मल्टीपल जगह पर क्या है? पैसा जाता है। तो इन एफिशिएंसी से आपको एक और चीज आप देखिए पॉलिसी के ऊपर भी इंपैक्ट पड़ता है। जैसे हेल्थ सेक्टर का एग्जांपल लें जो चाइल्डहुड ट्यूबरक्लोसिस के केसेस हैं उनको हेल्थ मैनेजमेंट इनेशन में रखा जाता है। डिसीज सर्विलंस नेटवर्क में रखा जाता है। इम्यूनाइजेशन रजिस्ट्रीज में रखा जाता है। एंड आप खुद सोचिए कि सेम पेशेंट को आप मल्टीपल टाइम्स काउंट कर लेते हैं। और यह डुप्लीकेशन क्रिएट करता है कॉन्फ्लिक्टिंग एस्टीमेट्स। जिसके कारण में डिसीजन मेकिंग के ऊपर में भी इंपैक्ट पड़ता है। तो नीति आयोग जो डाटा गवर्नेंस क्वालिटी इंडेक्स की बात करता है वो यह कहता है कि क्यों ना हमें डाटा क्वालिटी को इंक्रीस करना चाहिए

34:57 जिसके बेसिस पर हमें आप समझिए एक तो पॉलिसी मेकिंग में हेल्प मिलेगी। एक्चुअल नंबर हमें पता चलेंगे जिससे जो गवर्नमेंट का जो एफर्ट है जो एक ही चीज के ऊपर में मल्टीपल डायमेंशन से लग रहा है उसके अंदर में भी कमी आएगी एंड कॉस्ट के ऊपर में भी कमी आएगी। ठीक है? तो इसलिए वो कह रहे हैं कि डेटा एक बहुत इंपॉर्टेंट टूल है। इवन कई बार कहा भी जाता है कि आने वाला समय डाटा ही क्या है? फ्यूचर है। डेटा ही नया ऑइल है। ठीक है? तो तो पॉलिसी इंप्लिकेशन के साथ-साथ में देखेंगे बहुत सारे परसेप्शन इकोनॉमिक कॉस्ट भी इसके साथ में कनेक्टेड है। जैसे आपको एग्जांपल देता हूं। ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स है। वो ये कहता है कि इंडिया के पास में डाटा ही नहीं है दो इंडिकेटर्स को लेकर। आप सोचो कोई रैंकिंग है, कोई डाटा है, कोई

35:43 इंडेक्स है। वो कहते हैं भाई साहब इस चीज का डाटा दे दो। तो हमारे पास में दो इंडिकेटर्स के डेटा ही नहीं है। एंड कुछ के जो डेटा है वो आउटडेटेड हैं। तो अगर उनको कंबाइन किया जाएगा तो हमारी जो रैंकिंग आएगी वो बहुत पुरानी आएगी ना। मतलब समझ रहे हो इस टॉपिक को? तो कोई बड़ा टॉपिक नहीं है। सिंपल सा कह रहे हैं कि भाई इवन आप देखें एआई के साथ में तो इस समय डाटा बहुत इंपॉर्टेंट है। तो इसलिए वो कह रहे हैं कि इंडिया को अपने जो डेटा है और आप खुद सोचिए कि भारत के पास में सबसे ज्यादा डेटा है गवर्नमेंट के पास में उसको हम बेस्ट तरीके से क्या कर सकते हैं? यूज़ कर सकते हैं पॉलिसी मेकिंग के अंदर में, प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन के अंदर में एंड रेड इंडेंजेंसी को खत्म करने के लिए। ठीक है? डुप्लीकेसी एक ही डाटा मल्टीपल जगह।

36:29 नेक्स्ट टॉपिक यह टॉपिक थोड़ा सा सिंपल सा टॉपिक है। आप सभी को पता है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात की जा रही है। तो ये कह रहे हैं ऑपरेशन सिंदूर ने दो चीजें बिल्कुल क्लियर करी। एक हमेशा पाकिस्तान हमें एक थ्रेट देता था कि हम एक एटम मुल्क है। एटमी मुल्क है ना बोलता एटमी मुल्क है। एटमी मुल्क है। तो वो जो उसकी न्यूक्लियर थ्रेट की जो धमकी थी उसको हमने क्या किया? सबके सामने रख दिया कि भाई यह सिर्फ और सिर्फ धमकी है। दूसरा ऑपरेशन सिंदूर ने एक और चीज क्रिएट करी है। जहां पर हमने ये क्लियर किया कि जीरो टॉलरेंस है हमारा टेररिज्म के अगेंस्ट में। ठीक है? ये भी चीज आपको ध्यान होगी। तीसरी सबसे इंपॉर्टेंट चीज ऑपरेशन सिंदूर से जो मुझे सबसे ज्यादा हेल्प मिली या सबसे बढ़िया चीज मुझे पता चली यह वो यह पता चली

37:16 कि भाई हमारा जो इंडीजीनस वेपन सिस्टम है वो कई सारे वेपन सिस्टम से सुपीरियर है अगर हम उसके ऊपर में क्या करें इन्वेस्ट करें तो तो इसीलिए आप देखेंगे ऑपरेशन सिंदूर के बाद में जो हमारा इंडीजीनस डिफेंस ग्रोथ है उसके ऊपर में हमें फोकस करने की जरूरत है यह हमें पता चलता है। तीसरी बड़ी इंटरेस्टिंग चीज मतलब ऑपरेशन सिंदूर के मल्टीपल चीजें हमें पता चलती है। मल्टीपल चीजें क्या कि अब टू फ्रंट वॉर जैसा कांसेप्ट नहीं है। आप कहेंगे अच्छा सर ये तो खुशी की बात नहीं। अब ऐसा नहीं है कि चाइना अलग लड़ेगा और पाकिस्तान अलग लड़ेगा। अब ये दोनों फ्रंट चाइना ही है। पाकिस्तान नहीं है। ये हमने क्लियरली ऑपरेशन सिंदूर के टाइम पर देखा कि पाकिस्तान पूरी तरीके से इंटीग्रेट हो चुका है चाइना के साथ में इसके अंदर में। तो इसलिए अब टू फ्रंट वॉर पर पाकिस्तान और

38:02 चाइना अलग-अलग नहीं है। दो फ्रंट पर लड़ेंगे लेकिन एनमी अब कॉमन चाइना ही हो चुका है। ठीक है? और इंडीजीनस मैंने आपको मल्टीपल टाइम बताया कि इसके बाद में जैसे हमारा जो आकाश एयर सिस्टम है जब हम प्रोजेक्ट कुशा की बात करते हैं। हमारे खुद के जब S400 को हमने देखा तो सिर्फ S400 ही नहीं था। हमारे एयर डिफेंस सिस्टम में हमारे डोमेस्टिक जो मिसाइल्स थी, हमारी जो शॉर्ट रेंज मिसाइल्स थी, सरफेस टू एयर मिसाइल्स थी, उन्होंने भी क्या किया? एयर डिफेंस सिस्टम के अंदर में काम किया। प्लस में ऑपरेशन सिंदूर ने हमें एक और पोटेंशियल जो थ्रेट है, उसके बारे में बताया। वो क्या है? कहते हैं जिसको हम बोलते हैं स्वैंप ऑफ यूएवीस ड्रोंस। तो ये भी एक हमें पता चलता है कि आने वाले समय

38:49 ड्रोंस का रहने वाला है। तो ड्रोंस के ऊपर में भी क्या किया जा रहा है? बहुत ज्यादा फोकस किया जा रहा है। तो ये इंडिया के डिफेंस पोश्चर से रिलेटेड है। एंड फ्यूचर के लिए यही सबसे बड़ी चीज है जहां पर हमें क्या करना पड़ेगा? फोकस करना है इंडजीनस डिफेंस ग्रोथ के ऊपर में। एंड डिफेंस फोर्सेस अगर तभी रेडी रह पाएंगी जब हमारे पास में सफिशिएंट वेपंस होंगे। एंड वो वेपंस कैसे डेवलप होंगे? उसके लिए हमें इनोवेट करना पड़ेगा, डिजाइन करना पड़ेगा एंड मैन्युफैक्चर करना पड़ेगा स्केल पर यानी कि लार्ज नंबर में करना पड़ेगा। इवन हमें आने वाले समय में जैसे डिफेंस, एयररोस्पेस स्पेस साइबर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डोमेन में भी पब्लिक एंड प्राइवेट दोनों की ही क्या है? जरूरत है। ये ऑपरेशन सिंदूर ने हमें क्लियरली बताया। तो कोई बहुत इंपॉर्टेंट या अलग से कुछ

39:36 प्रीलिम्स का फैक्ट नहीं है। ये एक एडिटोरियल है क्योंकि अभी आप सभी को ध्यान होगा ऑपरेशन सिंदूर को एक साल हुए। तो ऑपरेशन सिंदूर के बाद में इंडिया कहां पर है? एंड इंडिया के डिफेंस पोस्टरिंग क्या है? तो आप सभी को पता है हमें डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाना होगा। यह फर्स्ट एंड फर्स्ट प्राइम हमारी क्या होनी चाहिए? प्रायोरिटी होनी चाहिए। इसके ऊपर में बात की जा रही है। ठीक है? क्लियर है? चलिए अब दोस्तों क्योंकि आज सैटरडे है और सैटरडे को हम एस्स डिस्कस ना करें। ऐसा कैसे हो सकता है? तो तीन एस्स आपके सामने हैं। तो सबसे पहला एस्स है द फ्यूचर बिलोंग्स टू सोसाइटीज दैट कैन बैलेंस इनोवेशन एंड इंक्लूजन। बहुत अच्छा टॉपिक है। इंक्लूसिव ग्रोथ की बात कर रहे हैं।

40:21 कई बार हम इनोवेशन की बात तो करते हैं बट वो इंक्लूसिव नहीं होता। इवन कल भी हम बात कर रहे थे। वेस्ट के बारे में बात कर रहे थे। इंक्लूसिव की बात कर रहे थे। है ना? तो ये उससे रिलेटेड है कि उस फ्यूचर उन्हीं सोसाइटीज को बिलोंग करेगा जो एक बैलेंस बना पाएंगे इनोवेशन ऑन इंक्लूजन के ऊपर। ठीक है? तो ये बात बहुत अच्छा है और आप सभी को पता है एस्स के अंदर में 1200 वर्ड्स आपको लिखने होते हैं। नेक्स्ट है साइंस गिव्स पावर बट वैल्यू डिसाइड इट्स डायरेक्शन। जैसे फॉर एग्जांपल न्यूक्लियर। साइंस ने आपको न्यूक्लियर दे दिया। अब आपकी क्या वैल्यू सिस्टम है? ये डिसाइड करेगा कि आप उसको कहां यूज़ करेंगे, कैसे यूज़ करेंगे। तो ऐसे ही जैसे एआई है उसने आपको पावर दे दी बट आपके वैल्यू सिस्टम

41:06 डिसाइड करेंगे कि आप उसको कहां यूज करेंगे। तो बहुत अच्छा है। साइंस गिव्स पावर बट वैल्यू डिसाइड करता है कि आप उसको कैसे और कहां पर यूज़ करेंगे। ठीक है? एंड लास्ट बट मेरा फेवरेट द हार्डेस्ट बैटल इन लाइफ इज़ ऑफन द बैटल विद इन वनसेल्फ। कई बार जो बाहरी लड़ाई होती है उससे ज्यादा हमें जो अंदर हमारी लड़ाई चल रही है वह सबसे कठिन और सबसे संघर्ष वाली होती है। है ना? तो यहां पर आप सेल्फ इंप्रूवमेंट की बात कर सकते हैं। सेल्फ ग्रोथ के बारे में बात कर सकते हैं। एक तो ये क्या हो गया? इंडिविजुअल लाइफ के बारे में हमारी यूपीएससी इन सब के बारे में। इवन इसको आप बुद्ध जी से, महावीर जी से,

41:54 इवन गांधी जी से, विवेकानंद जी से, अंबेडकर जी की लाइफ से भी आप कनेक्ट कर सकते हैं। इवन इसको आप फ्रीडम स्ट्रगल से भी कनेक्ट कर सकते हैं। यह हार्डेस्ट बैटल वही है। एंड एक बड़ी इंटरेस्टिंग इसको आप सोशल रिफॉर्म से भी कनेक्ट कर सकते हैं। जहां पर आप देखेंगे बहुत सारे सोशल एल्स हैं। रिजर्वेशन जो कास्ट बेस डिस्क्रिमिनेशन, रेसिज्म इनसे भी आप इसको कनेक्ट कर सकते हैं। है ना? समझ रहे हैं? तो कितने पांच अलग-अलग डायमेंशंस मैंने आपको यहां पर दे दिए। तो ये तीन अलग-अलग एस्स हैं। एंड मेरी रिक्वेस्ट है, मेरी हम्ल रिक्वेस्ट है आप सभी से कि एटलीस्ट इनमें से एक एस्स आपको जरूर लिखना है। तो अगर हम आप दोनों

42:41 मिलकर इतनी मेहनत करेंगे। देखिए मैं आपके लिए मेहनत करने के लिए तैयार हूं। मुझे आप सबका प्रॉमिस चाहिए कि आप सभी उतनी मेहनत करने के लिए तैयार हैं। और ट्रस्ट मी हम इस मेहनत से एक ऐसी कम्युनिटी बनाएंगे जिसको देखकर आसपास के लोग अलग-अलग इंस्टीटशंस के लोग कहेंगे कि भाई यह बेस्ट स्टूडेंट हैं। बेस्ट एफर्ट कर रहे हैं एंड इनको बेस्ट रिजल्ट मिलेगा। थैंक यू सो मच दोस्तों। और ये है Telegram। इस पे ज्वाइन कर लीजिएगा। ये Instagram है इस पे कनेक्ट कर लीजिएगा। थैंक यू सो मच। अपना ध्यान रखिए, मुस्कुराते रहिए, पढ़ते रहिए। बाय-बाय। टेक केयर दोस्तों। जय हिंद।

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