0:00 क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हमारी बॉडी बीमार हो सकती है तो वह खुद से ठीक भी क्यों नहीं हो सकती? क्या सिर्फ दवाइयां ही इलाज हैं या हमारे अंदर ही कोई ऐसी ताकत है जो हमें हील कर सकती है? क्वांटम हीलिंग हमें यही दिखाने की कोशिश करता है कि कैसे हमारे माइंड और कॉन्शियसनेस की ताकत हमारी बॉडी की हीलिंग को एक्टिवेट कर सकती है। नमस्ते दोस्तों, स्वागत है आपका सुनो बुक समरी में। जहां हम किताबों के छुपे हुए रत्न आपके लिए लेकर आते हैं। वह भी आपकी अपनी भाषा में। आज हम बात करेंगे डीपक चोपड़ा की एक बहुत ही दिलचस्प और रेवोल्यूशनरी किताब की क्वांटम हीलिंग। अब यह नाम सुनते ही कई लोगों को लग सकता है कि इसमें बहुत ज्यादा साइंस या कॉम्प्लिकेटेड थ्योरीज होंगी। लेकिन
0:46 घबराइए मत। हम इसे एकदम आसान समझने वाली भाषा में लेकर आए हैं। यह किताब मेडिसिन और स्पिरिचुअलिटी के बीच की एक ब्रिज है। जहां डॉक्टर चोपड़ा यह बताते हैं कि इंसान का दिमाग, उसकी इमोशंस और उसका बिलीफ सिस्टम एक्चुअली उसकी फिजिकल बॉडी को भी इन्फ्लुएंस करता है। डीक चोपड़ा खुद एक ट्रेंड मेडिकल डॉक्टर हैं। लेकिन उन्होंने देखा कि सिर्फ मेडिसिंस से हर पेशेंट पूरी तरह ठीक नहीं होता। कुछ पेशेंट्स बहुत जल्दी रिकवर कर जाते हैं। कुछ को दवाइयां भी असर नहीं करती। तो उन्होंने सवाल पूछना शुरू किया। क्या इसके पीछे कुछ और है? यहीं से शुरू हुई उनकी जर्नी और इसी जर्नी का नतीजा है यह किताब क्वांटम हीलिंग। इसमें वह बताते हैं कि हमारी सेल्स, टिश्यूस और ऑर्गन्स सिर्फ केमिकल से नहीं
1:34 चलते बल्कि एक इंटेलिजेंट सिस्टम से चलते हैं जो हमारी कॉन्शियसनेस से जुड़ा है। और अगर हम अपने माइंड की पावर को सही तरीके से यूज करें तो हम कई बार ड्रामेटिक हीलिंग भी देख सकते हैं। जैसे कि बिना किसी दवा के इंप्रूवमेंट्स या ऐसी बीमारी से रिकवरी जिसे डॉक्टर्स ने इनक्यूरेबल बताया था। किताब का मकसद यह नहीं है कि आप दवाइयां छोड़ दें या मॉडर्न मेडिसिन को इग्नोर करें। बल्कि इसका मकसद है एक इंटीग्रेटेड अप्रोच लाना। जहां हम ना सिर्फ बॉडी को बल्कि माइंड और स्पिरिट को भी साथ लेकर हीलिंग की तरफ बढ़े। इस समरी में हम जानेंगे कि क्वांटम हीलिंग क्या है? कैसे काम करता है? और हम अपनी डेली लाइफ में इसे कैसे यूज़ कर सकते हैं। चाहे वह किसी बीमारी से जुड़ा हो या इनर पीस और
2:22 एनर्जी की तलाश से। तो चलिए शुरू करते हैं वह जर्नी जो शायद आपकी सोच बदल सकती है अपने ही शरीर और दिमाग को लेकर। अब सवाल उठता है क्वांटम हीलिंग। आखिर होता क्या है? यह कोई मशीन नहीं है ना ही कोई साइंस फिक्शन कांसेप्ट। असल में यह एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें हमारी बॉडी की नेचुरल इंटेलिजेंस यानी जो हीलिंग सिस्टम हमारे अंदर पहले से मौजूद है उसे एक्टिवेट किया जाता है हमारे माइंड इमोशंस और अवेयरनेस के जरिए। दीपक चोपड़ा कहते हैं कि हमारे शरीर में हर सेकंड लाखों केमिकल रिएक्शंस चल रही होती हैं। और यह सब कुछ ऑटो पायलट पर चलता है। बिना हमारे कॉन्शियसली सोचे। जैसे हार्ट बीट कर रहा है, सेल्स डिवाइड
3:08 हो रही हैं। वूंड्स धीरे-धीरे भरते हैं। यह सब एक इंटेलिजेंट सिस्टम के तहत होता है। वो कहते हैं, यह इंटेलिजेंस सिर्फ बॉडी तक सीमित नहीं है बल्कि यह माइंड और कॉन्शियसनेस से भी जुड़ी होती है। अब बात करते हैं क्वांटम की। क्वांटम वर्ड को चोपड़ा जी मेटाफर की तरह इस्तेमाल करते हैं। जैसे फिजिक्स में छोटे से छोटा पार्टिकल एटम से भी छोटा होता है। उसी तरह हमारे अंदर भी एक बेहद सल लेवल पर हीलिंग हो सकती है। अगर हम अपने बिलीफ सिस्टम और कॉन्शियसनेस को शिफ्ट करें। एक एग्जांपल लेते हैं। अगर कोई इंसान कास्टेंटली यह सोचता है कि मैं कभी ठीक नहीं हो सकता तो उसका दिमाग उस बिलीफ के हिसाब से सिग्नल्स भेजता है। लेकिन अगर वही इंसान अपने माइंड को ट्रेनिंग दे पॉजिटिव बिलीफ अडॉप्ट करे
3:54 कि मेरे अंदर खुद को हील करने की ताकत है तो यह बिलीफ बॉडी केमिस्ट्री को चेंज कर सकता है। जिससे हार्मोंस, इम्यूनिटी और रिकवरी स्पीड सब पर असर पड़ सकता है। डीपैक चोपड़ा इसे बायोलॉजिकल सॉफ्टवेयर कहते हैं। जैसे कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर अपडेट करने से सिस्टम अच्छा चलता है। वैसे ही अगर हम अपनी थॉट्स, इमोशंस और अटेंशन को सही दिशा में लगाएं तो हमारी बॉडी का सॉफ्टवेयर यानी बायोलॉजिकल सिस्टम खुद को ज्यादा इफेक्टिवली हील कर सकता है। एक और इंटरेस्टिंग बात यह है कि चोपड़ा जी का मानना है कि हीलिंग सिर्फ सेल्स या ऑर्गन्स की बात नहीं है। बल्कि यह एक होल पर्सन हीलिंग है। इसमें फिजिकल बॉडी के साथ-साथ इमोशनल, मेंटल और स्पिरिचुअल डिमेंशंस भी शामिल होते हैं। अब आप सोच
4:40 रहे होंगे क्या यह सिर्फ पॉजिटिव थिंकिंग है? नहीं। पॉजिटिव थिंकिंग इसका एक हिस्सा जरूर है। लेकिन क्वांटम हीलिंग उससे कहीं ज्यादा डीप कांसेप्ट है। यह बिलीफ पर भी आधारित है। अटेंशन पर भी और इनर अवेयरनेस पर भी। यह कांसेप्ट एंशिएंट इंडियन सिस्टम आयेदा से भी इन्फ्लुएंस है। जहां बॉडी को सिर्फ एक फिजिकल ऑब्जेक्ट नहीं माना जाता बल्कि एक डायनेमिक एनर्जी सिस्टम माना गया है। चोपड़ा जी कहते हैं कि अगर हम अपने शरीर को सिर्फ फ्लश और बोनस समझते हैं तो हम हीलिंग के डीपर लेवल को मिस कर रहे हैं। हमें समझना होगा कि हमारा शरीर हर सेकंड बदल रहा है। हर 5 दिन में हमारा स्टमक लाइनिंग बदल जाता है। हर कुछ हफ्तों में लिवर के सेल्स और कुछ महीनों में तो पूरा स्केलेटन तक नया बन जाता है। मतलब हमारा बॉडी तो पहले से ही हील कर रहा है,
5:27 रिकक्रिएट कर रहा है। सवाल यह है क्या हम इस नेचुरल प्रोसेस को सपोर्ट कर रहे हैं या ब्लॉक? तो क्वांटम हीलिंग का मतलब है कॉन्शियस एफर्ट से अपने अंदर की हीलिंग पावर को एक्टिवेट करना। यह कोई जादू नहीं है बल्कि एक माइंडसेट है, एक अवेयरनेस है, एक कोलैबोरेशन है बिटवीन बॉडी, माइंड एंड स्पिरिट। अब सवाल यह है कि अगर हमारे अंदर पहले से ही एक जबरदस्त हीलिंग सिस्टम मौजूद है तो हम उसे जागरूक रूप से कैसे एक्टिवेट करें? यहां कुछ तरीके हैं जिनके जरिए हम अपने शरीर और मन को एक साथ लाकर गहराई से ठीक होने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं ध्यान यानी मेडिटेशन की। जब हम रोज कुछ देर शांत बैठते हैं, बिना किसी सोच के सिर्फ अपनी सांसों पर ध्यान देते हैं, तो हमारा दिमाग
6:14 धीरे-धीरे एक शांत अवस्था में पहुंचने लगता है। इस दौरान शरीर में तनाव घटता है। हार्मोन संतुलित होते हैं और हीलिंग प्रोसेस तेज हो जाती है। ध्यान का असर सिर्फ मन पर नहीं शरीर पर भी सीधा पड़ता है। इससे हमारी हृदय गति धीमी होती है। रक्तचाप संतुलित होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह सब संकेत हैं कि शरीर अब रिपेयर मोड में आ गया है। दूसरी चीज है कल्पना शक्ति यानी विजुअलाइजेशन। जब हम अपनी आंखें बंद करके यह कल्पना करते हैं कि हमारा शरीर पूरी तरह स्वस्थ है। हर कोशिका सेल ऊर्जा से भरी हुई है और बीमारी खुद ब खुद गायब हो रही है। तो दिमाग उस कल्पना को असली अनुभव की तरह मानने लगता है। इससे दिमाग शरीर को
7:01 वही सिग्नल्स भेजता है जैसे वह सच में स्वस्थ हो रहा हो। तीसरी चीज है सांस पर ध्यान। हमारी सांस सिर्फ हवा लेने का जरिया नहीं है। यह हमारे मन और शरीर को जोड़ने वाली सबसे सीधी कड़ी है। धीरे-धीरे गहरी सांस लेना और उस पर ध्यान देना दिमाग को शांत करता है और शरीर को आराम की स्थिति में ले जाता है। जहां हीलिंग अपने आप शुरू हो जाती है। एक और बहुत महत्वपूर्ण चीज है विश्वास। अगर इंसान अंदर से यह मान ले कि वह ठीक हो सकता है तो उसका शरीर उसी दिशा में काम करने लगता है। लेकिन अगर मन में डर, शक या नकारात्मक सोच हो तो हीलिंग की प्रक्रिया रुक सकती है। और फिर आती है ध्यान देने की शक्ति। जहां हम अपनी अवेयरनेस को सिर्फ बाहर की
7:47 दुनिया से हटाकर अंदर की ओर मोड़ते हैं। हमारा शरीर हर पल हमें सिग्नल्स देता है पर हम उन्हें अनदेखा कर देते हैं। जब हम अपनी अटेंशन शरीर की ओर लाते हैं तो हम उस नेचुरल इंटेलिजेंस के संपर्क में आते हैं जो हर मोमेंट हीलिंग का काम कर रही होती है। इन सभी उपायों में एक बात कॉमन है। शांति और भीतर की ओर ध्यान। कोई दवाइयों का विरोध नहीं किया गया है बल्कि यह सब चीजें मॉडर्न इलाज के साथ मिलकर काम कर सकती हैं। इनका मकसद है शरीर को उसकी खुद की ताकत याद दिलाना। अब तक हमने जाना कि हमारे अंदर एक गहरी हीलिंग पावर होती है जो सही माहौल और सही सोच मिलने पर सक्रिय हो जाती है। लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल है। अगर यह ताकत इतनी स्वाभाविक है तो फिर हम
8:34 बीमार क्यों होते हैं? या क्यों कई बार दवाइयां भी काम नहीं करती? इसका एक बहुत बड़ा कारण है मन का बोझ। हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ ऐसा जरूर होता है जो उसने सालों से दबा रखा होता है। कोई पुराना दुख, कोई डर, कोई अनजाना गिल्ट या बचपन की कोई तकलीफ। यह सब बातें चाहे हम उन्हें कॉन्शियसली याद रखें या नहीं। हमारे शरीर पर असर डालती रहती हैं। जब मन बार-बार डर, चिंता या गुस्से में डूबा रहता है तो शरीर हर वक्त सतर्क, अलर्ट स्थिति में चला जाता है। जैसे कोई खतरा पास हो। इसे कहते हैं स्ट्रेस रिस्पांस। अब अगर यह स्थिति कुछ समय के लिए हो तो ठीक है। लेकिन अगर यह महीनों और सालों तक चलता रहे तो शरीर थकने लगता है। उसकी इम्यूनिटी कमजोर पड़ जाती है। पाचन प्रणाली गड़बड़ा जाती है और
9:21 हीलिंग की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। कई बार शरीर की कोई बीमारी सिर्फ शरीर की नहीं होती। वह किसी अधूरी भावना, दबी हुई पीड़ा या माफ ना किए गए अनुभव का बाहरी रूप हो सकता है। यही वजह है कि सिर्फ दवा लेने से बात पूरी नहीं बनती। अगर मन का जख्म खुलकर ठीक नहीं हुआ तो शरीर की बीमारी बार-बार लौट कर आ सकती है। तो अब सवाल यह है इससे बाहर कैसे निकला जाए? सबसे पहला कदम है स्वीकार करना। जिस दर्द को हम दबाते हैं, वह और गहराता है। लेकिन जिस दर्द को हम पहचानते हैं और कहने की हिम्मत करते हैं, वह धीरे-धीरे हल्का पड़ने लगता है। दूसरा कदम है माफ करना। कई लोग सालों तक किसी की गलती को दिल में लिए
10:07 चलते हैं। लेकिन असल में माफ करना दूसरे के लिए नहीं खुद के लिए जरूरी है। क्योंकि जब हम माफ करते हैं तब हमारे मन से बोझ उतरता है और हीलिंग शुरू होती है। तीसरा कदम है आत्म जागरूकता। रोज कुछ समय अपने मन की बात सुनिए। डायरी में लिखिए, ध्यान कीजिए और खुद से सवाल पूछिए कि आप भीतर से क्या महसूस कर रहे हैं। जब आप अपने अंदर के पैटर्न्स को पहचानना शुरू करेंगे, तभी आप उन्हें बदल पाएंगे। एक और जरूरी बात हीलिंग में समय लगता है। यह कोई जादू नहीं, यह एक प्रक्रिया है। थोड़ा-थोड़ा करके जैसे धूप बर्फ को पिघलाती है, वैसे ही आत्मगरूकता आपके भीतर की गांठों को खोल देती है। क्वांटम हीलिंग कोई जादुई मंत्र
10:52 नहीं है जिसे सिर्फ एक बार बोल दिया और चमत्कार हो गया। यह एक जीने का तरीका है। एक ऐसा तरीका जो हमें अपने शरीर, मन और आत्मा के साथ गहरा जुड़ाव देता है। तो आइए जानते हैं वह आसान लेकिन असरदार तरीके जिनसे आप क्वांटम हीलिंग को अपने दिन का हिस्सा बना सकते हैं। सुबह की शुरुआत सुकून से करें। जैसे ही आप नींद से जागे, कुछ देर आंखें बंद करके शांति में बैठिए। अपनी सांसों पर ध्यान दीजिए। कोई अच्छी सोच, पॉजिटिव अफमेशन दोहराइए। जैसे मेरा शरीर हर पल खुद को ठीक कर रहा है। इससे दिमाग में हीलिंग का एनवायरमेंट बनता है। खाने के साथ माइंडफुलनेस जोड़ें। जो भी खाएं उसे प्यार और अवेयरनेस के साथ खाइए।
11:38 खाने से पहले एक सेकंड रुककर उसे देखकर थैंक यू कहिए। क्योंकि आप जो खा रहे हैं वही आपका शरीर बनने वाला है। दिन भर में दो-तीन बार डीप ब्रीथिंग लीजिए। जबजब आप स्ट्रेस महसूस करें या कोई भारी सोच आने लगे बस पांच गहरी सांसे लीजिए और ध्यान को अपनी सांस पर टिकाइए। यह छोटा सा काम आपके नर्वस सिस्टम को रिसेट कर सकता है। नेगेटिव सोच को पकड़िए और बदलिए। जैसे ही कोई डर या डाउट वाला विचार मन में आए उसे रोकिए और तुरंत एक हीलिंग वाला सोच लाइए। जैसे मैं ठीक हो रहा हूं या मेरे अंदर गहराई से बदलाव हो रहा है। शाम को एक छोटा रिफ्लेक्शन टाइम रखिए। दिन के आखिर में 5 मिनट खुद से पूछिए। आज मैंने अपने शरीर और
12:24 मन का कितना ख्याल रखा? क्या आज मैंने खुद से प्यार से बात की या खुद को टाला? इससे अवेयरनेस बढ़ती है और धीरे-धीरे हीलिंग आपकी आदत बन जाती है। सोने से पहले शरीर को धन्यवाद दीजिए। रात में सोने से पहले अपने शरीर से यह कहिए धन्यवाद मेरे शरीर। तू आज भी मेरे लिए काम करता रहा। मैं तुझे हील करने का पूरा समय और प्यार दूंगा। इस सिंपल ग्रेटट्यूड से बॉडी डीपली रिलैक्स होती है और हीलिंग स्लीप शुरू हो जाती है। टेक्नोलॉजी से थोड़ा ब्रेक लीजिए। दिनभर फोन, लैपटॉप, नोटिफिकेशंस के बीच दिमाग बहुत ज्यादा स्टिमुलेटेड हो जाता है। लेकिन हीलिंग के लिए शांति और खालीपन चाहिए। हर दिन कुछ समय अनप्लग करके खुद के
13:09 साथ बैठिए और सबसे जरूरी बात खुद पर भरोसा रखिए। आपका शरीर, आपका मन और आपकी आत्मा तीनों मिलकर एक इंटेलिजेंट सिस्टम बनाते हैं। बस इन्हें सही माहौल चाहिए और यह अपने आप अपना काम शुरू कर देते हैं। अब चलते हैं इस खूबसूरत सफर के आखिरी और सबसे प्रेरणादायक हिस्से की ओर। जहां जानेंगे कुछ असल जिंदगी की कहानियां। ऐसे लोगों की कहानियां जिन्होंने क्वांटम हीलिंग को अपनाकर ना सिर्फ अपनी बीमारियां ठीक की बल्कि पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। यह कहानियां सिर्फ मोटिवेशन नहीं है बल्कि सबूत हैं इस बात के कि अगर इंसान अंदर से हीलिंग के लिए तैयार हो तो कुछ भी असंभव नहीं है। पहली कहानी एक महिला की है जिन्हें कई सालों से क्रॉनिक पेन था। हर वक्त बदन में दर्द, थकान और बेचैनी रहती
13:57 थी। डॉक्टर्स ने कहा कि यह फाइब्रोमाइजिया है और इससे छुटकारा पाना मुश्किल है। उन्होंने दवाइयां ली, इलाज करवाया लेकिन दर्द बना रहा। फिर उन्होंने क्वांटम हीलिंग के बारे में जाना। उन्होंने रोज सुबह ध्यान करना शुरू किया। हर दिन अपने शरीर से प्यार से बात करती। मैं ठीक हो रही हूं। मेरा शरीर मेरा साथी है। धीरे-धीरे उनका दर्द कम होने लगा। 6 महीने में उन्होंने सारी पेन किलर्स बंद कर दी। और एक साल के अंदर वो नॉर्मल लाइफ जीने लगी। इस बदलाव में सबसे बड़ा रोल उनके माइंडसेट का था। उनका विश्वास कि शरीर खुद को हील कर सकता है। दूसरी कहानी एक बुजुर्ग व्यक्ति की है जिनका हार्ट बहुत कमजोर हो चुका था। डॉक्टर्स ने कहा था कि ज्यादा समय नहीं है। लेकिन उन्होंने हार
14:43 नहीं मानी। उन्होंने खुद को पॉजिटिव सोच, शांत वातावरण और इंटरनल अवेयरनेस से घेर लिया। हर दिन सांसों पर ध्यान, शरीर के साथ संवाद और ग्रेटट्यूड से भरपूर दिनचर्या। वो अपने दिमाग में रोज विजुअलाइज करते कि उनका दिल मजबूत और ऊर्जा से भरा हुआ है। धीरे-धीरे उनके टेस्ट रिपोर्ट्स बेहतर आने लगे। और 2 साल बाद डॉक्टर्स ने कहा, "आपके हार्ट की कंडीशन मेडिकलली एक्सप्लेन नहीं की जा सकती।" यह चमत्कार है। तीसरी कहानी एक छोटे बच्चे की है जिसे ऑटोइ्यून डिसऑर्डर था। उसके माता-पिता ने क्वांटम हीलिंग के प्रिंसिपल्स को अपनाया। घर में एक पीसफुल माहौल बनाया गया। बच्चे को प्लेफुल मेडिटेशन सिखाया गया और पूरा फोकस उसके माइंड बॉडी कनेक्शन पर रखा गया। कुछ महीनों में इंप्रूवमेंट्स दिखने लगे और एक
15:30 साल में डॉक्टर खुद हैरान रह गए। इन कहानियों में एक कॉमन चीज थी। इन लोगों ने अपने शरीर को दुश्मन नहीं माना बल्कि उसे समझा, सुना और हीलिंग की प्रोसेस में एक पार्टनर बनाया। क्वांटम हीलिंग हमें याद दिलाता है कि हमारा शरीर सिर्फ हड्डियों और मांस का ढांचा नहीं है। यह एक इंटेलिजेंट लिविंग एनर्जी सिस्टम है जो हर वक्त हमें हील करने की कोशिश करता है। हमें बस थोड़ी सी शांति, थोड़ी सी अवेयरनेस और थोड़ा विश्वास देना होता है। तो अब जब आपने इस पूरी जर्नी को सुना है तो एक छोटा सा सवाल खुद से पूछिए। क्या मैं आज से अपने शरीर को एक नई नजर से देख सकता हूं? क्या मैं उसे सिर्फ बीमारी से लड़ने वाली मशीन नहीं बल्कि हीलिंग करने वाला साथी मान सकता हूं? अगर हां, तो यकीन
16:16 मानिए आपने अपनी पहली क्वांटम हीलिंग की शुरुआत कर दी है। आपका शरीर आपकी सबसे बड़ी ताकत है। बस उसे मौका दीजिए। सोचिए अगर आपका शरीर हर पल चुपचाप खुद को ठीक कर रहा हो। अगर हर सांस के साथ आपके अंदर हीलिंग की एक सल एनर्जी बह रही हो तो क्या आपको उसे महसूस करने के लिए दवाइयों या अस्पताल की जरूरत होगी? क्वांटम हीलिंग यही बताता है कि हर इंसान के अंदर एक शक्तिशाली हीलिंग सिस्टम मौजूद है। यह शरीर और मन की नहीं शरीर, मन और चेतना की एक सांझा यात्रा है। एक ऐसी यात्रा जहां बीमारी सिर्फ एक चेतावनी है और स्वास्थ्य एक स्थाई संभावना। इस किताब के जरिए आपने जाना कि कैसे हमारी सोच, भावनाएं और आसपास
17:04 का वातावरण हमारे शरीर की हीलिंग पर सीधा असर डालता है। कैसे सिर्फ दवाइयां नहीं बल्कि ध्यान, सांसे, विश्वास और प्यार भी उतने ही जरूरी हैं। आपने सीखा कि जब हम अपने शरीर से दुश्मन जैसा बर्ताव करना छोड़ देते हैं और उसे एक साथी मानते हैं तो हमारा शरीर हमारी उम्मीदों से ज्यादा तेजी से ठीक होने लगता है। क्वांटम हीलिंग कोई नया इलाज नहीं बल्कि एक पुरानी सच्चाई की याद है कि शरीर में वह सब है जिसकी उसे जरूरत है। बस हमें उसमें इंटरफेयर नहीं करना है बल्कि उसे स्पेस और सिग्नल देना है। सिग्नल की मैं तैयार हूं ठीक होने के लिए। इस पूरे सफर में आपने सिर्फ एक कांसेप्ट नहीं बल्कि एक नया नजरिया सीखा। एक ऐसा नजरिया जिसमें सुबह की हर सांस
17:51 हीलिंग का दरवाजा बन जाती है। हर सोच आपके सेल्स को इन्फ्लुएंस करती है और हर भावना आपके शरीर के रिस्पांस को बदल सकती है। अब यह आपकी बारी है। अब आप जान चुके हैं कि आपका शरीर कोई मशीन नहीं, एक मिरेकल है। आपकी चेतना पैसिव नहीं, एक्टिव और ट्रांसफॉर्मेटिव है और हीलिंग। कोई बाहरी प्रक्रिया नहीं एक अंदरूनी जागृति है। तो आज से एक छोटा संकल्प लीजिए कि आप अपने शरीर को समझेंगे, सुनेंगे और उसे वह प्यार और शांति देंगे जिसकी उसे जरूरत है। याद रखिए क्वांटम हीलिंग का रास्ता बहुत पर्सनल होता है। हर किसी का सफर अलग होता है। लेकिन एक बात सब में कॉमन होती है। जब आप अपने शरीर से सच्चा संबंध बनाते हैं तो
18:38 वह आपको जिंदगी का सबसे सुंदर तोहफा लौटाता है। स्वास्थ्य, ऊर्जा और शांति। अगर आपने इस समरी को दिल से सुना और कुछ भी नया जाना, महसूस किया या सीखा तो अब समय है उस लर्निंग को एक कदम आगे ले जाने का। आज ही कुछ छोटा बदलिए। सुबह की शुरुआत शांति से कीजिए। एक पॉजिटिव सोच अपनाइए या सिर्फ 5 मिनट खुद से जुड़ने का वक्त निकालिए। आपका शरीर आपका साथ देगा। बस आपको शुरुआत करनी है और अगर आप ऐसी ही और लाइव चेंजिंग किताबों की ऑडियो बुक समरीज को आसान हिंदी में सुनना चाहते हैं तो अभी हमारे YouTube चैनल सुनो बुक समरी को सब्सक्राइब जरूर कीजिए। यहां हम लाते हैं हर हफ्ते नई किताबों का सार। वो भी एकदम सिंपल भाषा में ताकि आप ना सिर्फ सुने
19:26 बल्कि अपनी जिंदगी में बदलाव भी लाएं। तो जुड़िए हमसे सीखिए और खुद को हर दिन बेहतर बनाइए। धन्यवाद।