0:00 झाल कि आज से हम एजुकेशनल सीरीज में एक नया चैप्टर शुरू करें टाइप-वन डायबिटीज मैनेजमेंट के बारे में तो आज के इस वीडियो में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि टाइप-वन डायबिटीज़ होती क्यों हैं और उसके इनिशियल सिम्टम्स क्या होते हैं नमस्कार दोस्तों मैं योगेंद्र तोमर और आप अपने चैनल टाइप सी जहां डायबिटीज मैनेजमेंट से रिलेटेड साइंटिफिक इनफॉरमेशन इन सिंपल लैंग्वेज के लिए आते हैं और प्राइवेसी के प्रोडक्ट्स आपको आसानी से ऑनलाइन Amazon फ्लिपकार्ट समेत बहुत से वेबसाइट पर मिल जाते हैं तो देर किस बात की है बैक सी भाषा आज ही आर्डर करें फायदा
0:46 जरूर होगा टाइप-वन डायबिटीज़ को समझने से पहले हम अ कुछ वर्ड समझ लेते हैं और अव्वल है बड़े इंपोर्टेंट वर्ड है वह होमियोस्टैसिस अगर आप गुड हेल्थ चाहते हैं तो होम मिनिस्टर एस वर्ड को समझना बड़ा ही इंपोर्टेंट है आपके लिए थे होम मिनिस्टर एस एस मतलब बॉडी के जो अंदर की जो फंक्शंस है उनको बैलेंस में रखना बॉडी की जो कंडीशन है उसको बैलेंस में रखना जैसे इस एक्ज़ांपल आप ले लें आपको बॉडी टेंपरेचर है हमारा बॉडी टेंपरेचर 37वें डिग्री सेंटीग्रेट रहता है और अगर मां लीजिए सर्दियां आ गई अब बाहर का जो एनवायरनमेंट का टेंप्रेचर है तो फॉर डिग्री फाइव डिग्री सेंटीग्रेट है तो हमारी बॉडी
1:32 शेयरिंग पैदा कर दिए शिवलिंग से हिट जनरेट होती और बॉडी टेंपरेचर मेंटेन करती है ऐसे ही अगर मां लीजिए गर्मी आ गई तो बाहर का जो टेंप्रेचर है वह तो forty-five डिग्री सेंटीग्रेट चल रहे हैं तो हमारी बॉडी स्वेटिंग करती है पसीना आता है हवा चलती है और स्किन को स्कूल करता ठंडा करता है और बॉडी टेंपरेचर डाउन करते हैं क्योंकि हमारी लाइफ के लिए बॉडी के टेंप्रेचर को रेगुलेट करना पड़ा इंपोर्टेंट है तो 3073 मेंटेन करने के लिए बॉडी यह होमियोस्टैसिस मैकेनिज़्म का सहारा ले है ऐसे ही हिमालयन रनिंग कर रहे हैं तो हमारा हार्ट रेट बढ़ जाता है हमारा रेट ऑफ respiration बढ़ जाता है लेकिन जब हम रात को सो रहे होते हैं तुम्हारा हार्ट रेट स्लोज जाता है और हमारा रेट ऑफ
2:17 respiration भी स्लो हो जाता है है तो यह भी होमियोस्टैसिस है तो यह जो बॉडी है होमियोस्टैसिस मेंटेन करती है ताकि हमारी लाइफ जो है चलती रही तो हमने स्ट्रेस इसको आप एक तराजू के बैलेंस की तरह देख सकते हैं कि तराजू अगर बैलेंस है तो ठीक है अगर तराज़ू डिसबैलेंस होगी तो गड़बड़ जाएगा तो उस तराज़ू को बैलेंस करके चलने का काम जो यह हमने स्पेस है और यह बैलेंस सिंह कर्ता कौन है इस बैलेंस सिंह में बड़ा इंपोर्टेंट रोल है और मुनक्का है तो जो हारमोंस है यह हमारी बॉडी में होमियोस्टैसिस मेंटेन करने में काम आते हैं और हमारी बॉडी के बहुत सारे फंक्शन है बहुत सारे काम है जिसको यह मोनिटर करते हैं रेगुलेट करते जैसे एग्जांपल हम ले लें
3:04 कि हमारे ब्लड में कैल्शियम का लेवल मेंटेन है तो दो हार्मोन है एक तो यह थायराइड हार्मोन ऑक्सीटोसिन हार्मोन तो एक हार्मोन कैल्शियम बढ़ाता है और दूसरा कैल्शियम घटाता है तो यह दोनों मिलकर ब्लड में कैल्शियम का लेवल मेंटेन करते हैं ऐसे ही कई बार हार्मोन दो मिलकर तीन मिलकर एक काम भी करते हैं जैसे कि आप समझ लीजिए कि ब्रेस्ट फीडिंग कराने है बच्चे को मदर बच्चों को फ्रेंड कराना चाहती है और ब्रेस्ट मिल्क की जरूरत है तो ब्रेस्ट मिल्क जो प्रोडक्शन है उसमें ऑक्सिटॉसिन हॉर्मोन और एस्ट्रोजन हार्मोन दो हार्मोन मिलकर काम करते हैं ऐसे ही हमारा ब्लड शुगर है ब्लड शुगर को मेंटेन करने के लिए हमारे पास दो हार्मोन है एक है इन इन
3:50 हार्मोन और दूसरा है ज्ञान हारमोन इंसुलिन हार्मोन का काम है ब्लड शुगर लेवल को कम करता है और ब्लू का डॉन का काम है कि वह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाता है तो इंसुलिन और ग्लुकेगोन यह दोनों हार्मोन मेल के ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने की कोशिश करते हैं ठीक है तुम बैलेंस सिंह होमियोस्टैसिस के लिए और मोहित यूज फूल रहते हैं तो अगर हमें हल्दी लेना है तो हमने स्ट्रेसेस चाहिए और होमियोस्टैसिस के लिए हमें और मौत से और हारमोंस प्रोटीन के बने हुए होते हैं और हारमोंस फैट के बने हुए होते हैं जैसे कि कोलेस्ट्रोल कॉलेस्ट्रॉल हमारी बॉडी के जितने भी सेक्स हार्मोंस है जैसे मेल में टेस्टोस्टरॉन ले लीजिए फीमेल में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन ले लीजिए यह सारे कोलेस्ट्रोल के बने हुए हैं तो फट
4:37 इंपोर्टेंट है और जो आर्म इंसुलिन और ग्लुकेगोन और मन की बात कर रहे थे यह प्रोटीन के बने हुए होते हैं कि पिछले अब एक और वर्ड समझते हैं इम्यून सिस्टम इम्यूनिटी तो जो इम्यून सिस्टम है वह में प्रोटेक्शन देता है जैसे कि हमारी कंट्री में आर्मी है पुलिस है वह में प्रोटेक्शन ढेर कंट्री को प्रोटेक्ट करके रखते हैं तो पुलिस वाले जो है वह अंदर का प्रोटेक्शन देखते हैं कंट्री के और जो बाउंड्रीज है वह आर्मी वाले देखते हैं लेकिन जरूरत पड़े तो आर्मी वाले भी कंट्री के अंदर कहीं प्रॉब्लम हो तो उसको कॉल करने के लिए आ जाते हैं तो ऐसे ही हमारी बॉडी में डब्ल्यूबीसी व्हाइट ब्लड सेल्स होती हैं और इसके अलावा 20 हेल्थ और t-shirts बोन मैरो सुने जो निकलती है वह 20 साल और जो हमारी थायमस ग्लैंड से निकलते वह टीनशेड तो 20 पार्टी सैर डब्ल्यूबीसी यह कुछ आर्मी पुलिस वाले हैं
5:24 जो हमारे प्रोटेक्शन करते हैं तो फौरन ऑब्जेक्ट कोई पहचान गई वह तुरंत गोली मारकर खत्म कर देते हैं तो पता कैसे चलेगा कि यह फोन है और यह अपना और घंटी का है तो वह यूनिफार्म से पता लगता है वहीं दूसरी कंट्री कि अगर आर्मी है उसकी यूनिफार्म अलग है और हमारी कंट्री की यूनिफार्म अलग है तो डिफरेंटशिएट कर पाएंगे कि हमारी कंट्री का आर्मी है और दूसरी कंट्री कार भी ऐसे ही हमारी बॉडी में जो सेल्स है वह प्रोटीन की बनी हुई होती है तो प्रोटीन का जैकेट पहनना होता है प्रोटीन की ड्रेस पहनी होती है ऐसी जो बाहर का फैक्ट्री है उसने अपनी प्रोटीन की जैकेट पहनी होती है लेकिन उसकी जैकेट हमारी जैकेट से नहीं मिलते तो जो प्रोटीन की जो स्ट्रक्चर है उससे हमारी बॉडी यह पता लगाती है कि यह
6:10 नॉन सेल यह हमारा नहीं और यह सेल यह हमारा है ठीक है तो जो नॉट हेल्प अगर हमारी बॉडी में घुस जाता है तो हमारा इम्यून सिस्टम उसको गोली मारकर खत्म कर देता ए कमेंट है अब हम टाइप-वन डायबिटीज़ को समझने की कोशिश करते हैं तो हमारे पेट के लेफ्ट साइड में एक ग्लैंड है जिसका नाम है प्रिंस विकास और यह पैंक्रियाज से इंसुलिन और ग्लुकेगोन दोनों हार्मोन बना दिया तो जब हम इसको देखते हैं तो इसमें आयरलैंड दिखाई देते छोटे-छोटे सपोर्ट दिखाई देते हैं तो यह जैसे यह आप वह धरती का स्ट्रक्चर देखेंगे तो उसमें आयरलैंड दिखाई देते तो आयरलैंड बड़े-बड़े होते लेकिन जो छोटे-छोटे आईलैंड होते हैं उनको आईलेट्स करते हैं तो ऐसे ही एक साइंटिस्ट था लैंगरहैंस तो उसने पायलट यह पैंक्रियाज के
6:57 अंदर ढूंढो इसलिए उनका नाम होगा आयरलैंड सौंफ लैंगरहैंस और यह आयरलैंड जो आयरलैंड है छोटे-छोटे आईलैंड इन में दो टाइप की सैर होते हैं एक अल्कोहल और ट्विटर सिर्फ तो जो अलार्म सेट है वह उसका यौन हार्मोन बनाती है जो बीटा सेल है वह इंसुलिन बनाती है हैं तो ऐज और बीटा सेल दोनों मिलकर अपने-अपने हार्मोन बनाते हैं ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करने का काम करते हैं कि अब कई बार क्या होता है जो इम्यून सिस्टम है वह मिस्टेक कर जाता है यह तो जेनेटिकली जो हमारी जो बीटा सेल्स है वह ऐसी बनी कि जो इम्यून सिस्टम है हमारा वह कहते हैं कि यह मेरे वाला नहीं है यह हमारी कंट्री का नहीं है तो जाग उसको गोली मार देते हैं अच्छा ठीक है तो हमारा इम्यून सिस्टम हमारी बीटा सेल्स को जाकर खत्म करना शुरू
7:45 कर देते हैं मैं तुझे बीटा सेल्स बीटा सेल क्या हो तेजी से ए प्रोलिफिक होते रीजेनरेट होती है रिप्लिकेट करते हैं एक बेटा से अलग दो बीटा सेल चार बेटा सेलआउट भी तो इसे लाइक जरूर एप्लीकेटर होती गतिशील डिविजन होते रहते हैं और बच्चों में बड़ी स्पीड होता है और यह बीटा सेल का जो एप्लीकेशन है जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती स्पीड स्लो जाती है पर बच्चों में बड़ी स्पीड से हो रहा है लेकिन समस्या है कि इम्यून सिस्टम आया उसने एक बेटा सेल को खत्म किया अब इसमें तुरंत दो बनाई तो आकर दोनों फिर गोली मार देते हैं तो ऐसे धीरे-धीरे बीटा सेल की जो संख्या है वह रिड्यूस होने लगता है इनिशियली आप यह लगा लीजिए कि हमारे बॉडी में एप्रोक्सीमेटली 12 लाख के आसपास बीटा सेल्स होती है है और 12 लाख बीटा सेल्स व हमारा इम्यून
8:32 सिस्टम खत्म करना शुरू कर दे तो धीरे-धीरे हमारे जो बीटा सेल्स है वह खत्म होने लगती है तो हमारे इंसुलिन प्रोडक्शन कैपेसिटी डाउन होने लगती है तो जो बैलेंस करा था तराज़ू इंसुलिन और ग्लुकेगोन दोनों हार्मोन का अब ग्लूकोज और नॉर्मल तो पूरा बन रहा है खूब स्पीड से बन रहा है लेकिन धीरे-धीरे इंसुलिन बनना बंद हो गया और जब सारी बीटा सेल खत्म कर दी हमारे इम्यून सिस्टम ने खुद ही सब को गोली मार दिया तो आप क्या है तराज़ू के दो पलड़े में एक ही रह गया दूसरा गायब हो गया इंसुलिन गायब खाली बोलो भगवान रहेगा अब इंसुलिन का काम था ब्लड शुगर लेवल को कम करना रुखा कौन का काम था ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाना तब गुरु का कौन कंटीन्यूअसली ब्लड शुगर लेवल बढ़ाता रहेगा क्योंकि यह आता है इसको कम करना तो इंसुलिन के पास है
9:17 काम वह इसको आता है तो यह गुरु का ज्ञान हारमोन इंसुलिन की रेफ्रेंस में हमारी बॉडी में जितना भी फैट है और जितनी भी मसल से उन सबको तोड़ तोड़ के समुद्र में कंवर्ट कर देता है तो यह तोड़-तोड़कर बिल्कुल में कंवर्ट कर देते हैं तो क्या होता है बॉडी काम मलमास कम होने लगता है बॉडी में फैट परसेंटेज का मोल लेने लगते हैं और आदमी एकदम हटी कंकाल जैसा बन जाता है टाइप-वन डायबिटीज़ वाला अ मैं तो एकदम वेट लॉस होना शुरू हो गया दूसरा यह कि जो यह ब्लूटूथ बहुत ज्यादा बन गया और ब्लड में आ रहा है तो ज्यादा ब्लड में जो शुगर होता है उनको है वह व फल होता है फिर किडनी के थ्रू यूरिन के थ्रू बाहर निकलते हैं तो अगर हमारे ब्लड शुगर लेवल
10:02 118 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर जाता है तो किडनी के थ्रू ओवरफ्लो होने लगते हैं और जब किडनी के थ्रू बिल्कुल बाहर निकलते तो उसे बहुत सारे पानी की रिक्वायरमेंट होती है तो इसलिए बहुत सारी प्यास लगने लगती है आदमी खूब सारा पानी पीते और वह यूरिन के थ्रू बाहर निकलने लगता है तो पॉलिसियां मतलब ज्यादा प्यास लगना पोली यूरिया मतलब ज्यादा urination होना तो टाइप-वन डायबिटीज़ का symptom क्या हुआ बहुत सारे क्लास लग रही है और बहुत सारे urination हो रहा है और वेट लॉस हो रहा है और इसके अलावा पर ब्लड में शुगर तो है लेकिन सेल के अंदर शुगर नहीं जा रहा था तो हमारी सेल्स कहते हैं वहीं मुझे कुछ खाने पीने को मिल रहा है कुछ खाने को तो दो कि स्टार्वेशन फील करता है तो बहन के पास सिग्नल भेजता भी मुझे कुछ नहीं मिला खाने
10:49 का यार कुछ तो अरेंजमेंट करो खाने-पीने का और थे तो प्रिंस है फिर हंगर सेंटर को मैसेज देता भाई वह बच्चे भूखे मर गए कुछ तो खाने का अरेंजमेंट कर दो है तो भूख लगने लगती है तो आदमी खाबी खूब रहा है पानी भी खूब पी रहा है खूब सारे urination हो रहा है और खूब स्पीड से बैठ और है तो यह सिम्टम्स हो गए टाइप-वन डायबिटीज़ के है है तो टाइप-वन डायबिटीज़ में समस्या त्यागी खाली ग्लुकागोन हार्मोन है इंसुलिन नहीं है है और उसके कारण यह सारे सिम्टम्स हो रहे हैं और अगर हमने इस तराजू को बैलेंस नहीं किया बाहर से इंसुलिन नहीं दिया तो आदमी की डेथ हो सकती है है तो आप बैलेंस सिंगर मतलब समझ रहें ना कि इंसुलिन भी इंपोर्टेंट है ज्ञान इंपोर्टेंट है इंसुलिन और ग्लुकेगोन दोनों
11:37 इंपोर्टेंट है हमारी बॉडी के लिए और जब इंसुलिन वेबसाइट हो जाता है तो यह टाइप-वन डायबिटीज़ हो जाती है तो टाइप-वन डायबिटीज़ की जो केस है हमारे इंडिया में जो एशियन कॉन्टिनेंट है वहां पर चार पांच परसेंट कैसे सोते हैं टाइप-वन डायबिटीज़ के लेकिन यूरोप और अमेरिका में दस परसेंट कैसे सोते हैं तो फिर भी हम एक तरफ कैलकुलेशन ले लें टाइप-वन डायबिटीज़ के कैशलेस Ben10 परसेंट होता है हमारी कंट्री है है और उनको बाहर से इंसुलिन देने की जरूरत पड़ती है क्योंकि उनकी बीटा सेल सारी खत्म हो गई है तो अब यह जो सवाल आता है कि क्या टाइप-वन डायबिटीज़ को हम रिवर्स कर सकते हैं तो टाइप-वन डायबिटीज़ को रिवर्स नहीं कर सकते क्योंकि हमारी इंसुलिन प्रोडक्शन कैपेसिटी खत्म हो गई है और इंसुलिन
12:24 प्रोडक्शन कैपेसिटी इसलिए खत्म हो गई है कि हमारे अपने इम्यून सिस्टम ने हमारी अपनी बीटा सेल्स को खत्म कर दिया गोली मार मार के सब को खत्म कर दिया तो हमेशा हमें बाहर से इंसुलिन लेना पड़ेगा क्योंकि जैसी रीजेनरेट करने की कोशिश करेंगे बीटा सेल इम्यून सिस्टम फिर खत्म कर देगा तो जिंदगी भर वह कभी भी बीटा सेल जनरेट नहीं हो पाएंगे और बीटा सेल नहीं होंगी तो इंसुलिन की जरूरत पड़ेगी हमें बाहर से तो इसलिए बाहर से कंटीन्यूअसली हमें इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ती है है इसके अलावा एक और बात देखिए कि जो इंसुलिन प्रोड्यूस होता है जैसे हमारे बेटा से इंसुलिन बनाया और वह बाहर चला गया तो आधे घंटे के अंदर खत्म हो जाता है ऐसा नहीं कि इंसुलिन निकला अपना काम करके
13:09 घूम फिर के बॉडी में वापस आ गया ऐसा नहीं होता इंसुलिन बना बॉडी से निकला आधे घंटे के अंदर खत्म फिर दूसरा इंसुलिन बना आधे घंटे के अंदर खत्म इंसुलिन बना रिलीज हुआ आधे घंटे के अंदर खत्म हो है तो इंसुलिन की लाइफ वाली आधे घंटे की है तो आप सोचिए पेंक्रियाज के ऊपर कितना वर्णन रहता है कि कंटीन्यूअसली इंसुलिन बनाना है बॉडी के सिस्टम को बैलेंस करने के लिए लेकिन बीटा सेल ही नहीं इंसुलिन की रिक्वायरमेंट है पर वह बन नहीं रहा तो इस कारण टाइप-वन डायबिटीज़ में प्रॉब्लम होती है कांप्लेक्शन सोते हैं तो टाइप-वन डायबिटीज़ रिवर्स नहीं हो सकती क्योंकि बीटा सेल खत्म हो गई है इंसुलिन नहीं बना पा रही है और अगर हम इसको कंडीशन को ऐसे ही छोड़ दें बिना इंसुलिन के तो डेथ हो
13:55 सकती है क्योंकि डिसबैलेंस हो गया कि डिसबैलेंस दिस इज व्हॉट पर फोकस कीजिए डिसबैलेंस डिजीज डिजीज हो गया टाइप-वन डायबिटीज़ है तो टाइप-वन डायबिटीज़ को रिवर्स नहीं किया जा सकता है लेकिन मैनेज किया जा सकते हैं को क्यों क्योंकि अब इंसुलिन कम है बाहर से आपने इंसुलिन लगाया तो बैलेंस गया लेकिन अगर आपने जरूरत से ज्यादा इंसुलिन लगा दिया तो फिर डिसबैलेंस हो गया फिर गड़बड़ हो जाएगी तो यह जो बैलेंस सिंह है यह बहुत इंपोर्टेंट है टाइप-वन डायबिटीज़ में बैलेंस सिंह करना सीख है इसके अलावा अगले वीडियो में हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि जो हमने यह सिम्टम्स देखे टाइप वन डायबिटीज के क्या इसके अलावा कुछ लैबोरेट्री टेस्ट हो सकते
14:42 हैं जिससे हमें कंफर्म कर सकेगी टाइप-वन डायबिटीज़ है तो अगले वीडियो में हम उन टेस्ट के बारे में जानेंगे जिससे यह कंफर्म किया जा सकता है कि टाइप-वन डायबिटीज़ है निवेश से जुड़े है कुछ ना कुछ फायदा जरूर होगा आपका थैंक यू अजय को आप कौन हो हुआ है