0:01 तो कुछ चीजें जो नवरात्रि के समय में घर में अकेला था तो उसमें मन में विचार आ गए और जो आपके लिए फायदा करी आपके पेशेंट के लिए फायदा करेगी। ऐसी चीजें जो है ना वो दवाओं के हिसाब से उसके हाइपोथेटिकल आस्पेक्ट और दवाएं हम आपके लिए कहना चाहते हैं। इसलिए ये लेक्चर शुरू कर दिया है। हमारा रूटीन जो गनेकोलॉजी के लेक्चर चल रहे हैं। मेरे ख्याल से अभी गर्भ संस्कार चल रहे हैं। वो तो शुरू हो ही जाएगा। बहुत बीच में गैप हो गई है लेकिन नवरात्रि और बाकी चीजों के लिए ये गैप हो गई थी और अभी धीरे-धीरे हफ्ते में दो तीन मर्तबा तो हम मिलते जाएंगे। तो पहली चीज जो है वह वैद्य लोगों के लिए या बाकी के लोगों के लिए भी जो फायदा करने वाली है उसमें पित्त की
0:46 वृद्धि और वात की वृद्धि करने वाले ही हेतु ज्यादा रहते हैं। और जब कभी ये हम नहीं करते तो कफ पित्त को खराब करने वाली चीजें हम करते रहते हैं। तो उसमें तीखी चीजें, नमकीन चीजें, मीठी चीजें एक साथ मिक्स करके खा लेना वगैरह ये हो जाता है। तो आपको आपके खाने में कौन सी चीज़ें आनी चाहिए जिससे आपकी खुद की प्रकृति अच्छी रहे। तो उसके लिए तो यवा अध्याय का हमने पढ़ लिया था। सुबह शाम मूंग के दाल का पानी या यवाग को ले सकते हैं वाला। वैसा एक फल है अंजीर। जो भिगोकर या गीला अंजीर जो है ना वो खाने से आपके तबीयत में पित्त की बढ़ोतरी होगी नहीं। वात भी क्षमता जाएगा और पित्त जो है वो विरेचन से पेट साफ होने की वजह से आपका खून भी अच्छा रहता जाएगा। तो अंजीर का सेवन जो है ना वो
1:33 निरापद है। जब कभी आपको लगेगा भूख लगी है तो धान की खील जैसा हम खाते हैं मूंग की दाल का पानी पीते हैं वैसा अंजीर आप समावेश कर दे तो उसका फायदा आपके तबीयत के लिए हो सकता है। फकस फैमिली जो है ना जो यह जो है वत लक्ष पंचवकल या पंचरी वृक्ष तो उसका स्टडी करने के लिए जो आदेश आ गए वो मैं आपको बताता हूं कि ये फैमिली के जो जो घटक द्रव्य है यानी वनस्पति है सिर्फ भारतवर्ष की नहीं बाहर की जो है यहां माइग्रेट हो के यहां जो आ गई है उसका रिसर्च हमें देखना है तो ये काम आप बच्चे लोग करें यहां और उसका रिसर्च का हिस्सा और रस विभाग के हिसाब से जो चीजें है ना वो कस के हिसाब से हम हमारे पेशेंट के ऊपर
2:19 इस्तेमाल करने वाले हैं। इसका एक ही क्लासिकल एग्जांपल मैं देता है कि वट उद्भक्षप परिभाषा प्रकरण में या मिश्र गण जैसा सुश्रुत जी बोलते हैं वैसा एक साथ एक वनस्पतियां एक गुण की जब हो जाती है तो वो परिभाषा प्रकरण तैयार हो जाता है। जैसा पंचको पिपली पिपली मूल छ चित्र तो दीपन पाचन करना है कर्षण करने वाला है वगैरह अग्नि संरक्षण करने वाला है वैसा ही कसात्मक ये चीज है फिर भी बरगद के पेड़ को ये प्रारंभ आ जाती है आपको पता है उसकी जटाएं आ जाती है वगैरह वैसा पिपरी को भी आ जाती है और क्ष दोनों में भी आता है क्षर रहता है फिर भी जो रिसर्च है ना वो प्लक्ष का यानी जिसको पिपरी ऐसा मराठी में बोलते हैं उसके जड़ का या कोई भी हिस्सा ले लो वकल यानी
3:07 उसकी छाल ले लो और वो घिसकर आप पेट में लेते तो जिनको ब्लड प्रेशर है जिनको डायबिटीज है और जिनको कार्डियक प्रॉब्लम है उनमें एंजियोजेनेसिस जो है ना उससे जैसा होता है उससे बाकी चार पंचविकल का होता नहीं ये रिसर्च है तो वनस्पतियां एक ही ग्रुप की है फिर भी उसका कैरेक्टरिस्टिक अलग-अलग है समझ गए ना इसलिए दादा महाराज जी ने वो बताया था और उस वनस्पति की खोज कैसी लगी ये भी मैं बताता है दादा महाराज जी को जब तकलीफ हो गई और बाद में वो शांत हो गए तो उस वक्त हम बेलगांव में गए थे एक हॉस्पिटल में जहां वो एडमिट थे तो उन्होंने मुझे बताया कि मेरे जैसे हमारे जैसे लोग जो रहते हैं यानी ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जिनको रहता है उनके हार्ट की नसे अच्छी तैयार होने के लिए और खुलने के लिए आपको मैं एक दवा बताता है और उन्होंने वर्णन कर दिया कि
3:54 जंबू के पत्र रहते हैं वैसे रहते हैं। तीन-तीन पत्तियां जैसा रहता है और पारंबी जैसा रहता है व तो मैंने बहुत सारी खोज कर ली उसके लिए और यहां वहां घूमता रहा उनके लिए वो लाने की हमने कोशिश कर दी सासोड का जो पुरंदर किला है वहां भी हम गए थे और राज बला नाम की जो वनस्पति है या प्रसारणी उसके पत्ते मुझे वैसे लगे लेकिन वो वृक्ष बोल रहे थे तो मैंने बाद में वो छोड़ दिया कि मिल नहीं रहे महाराज भी शांत हो गए थे लेकिन उन्होंने बताया था कि आपको मिल जाएगी ये चीज तो डेढ़ बरस वैसा ही एक वर्ष वैसा ही निकल गया और बाद में गुरु चरित्र का पारायण जो है ना दत्त महाराज जी का गुरु चरित्र का पारायण हम करने के लिए विश्ववती में गए थे पंड इसमें कोल्हापुर में और वहां हम पढ़ रहे थे तो पढ़ते वक्त
4:40 जब रावण जो है ना वो एक-एक उसका शरीर का एक अंग निकालकर यानी सिर निकालकर उसका भोपड़ा तैयार कर देता है। आंतों से तंतु तैयार कर देता है और वाद्य करके उसको भगवान जी को प्रसन्न करने की कोशिश करता रहता है यानी महाशंकर को महादेव को तो उस वक्त उन्होंने राग जो आलाप कर दिए ना उसमें अलग-अलग शब्द आ गए और अलग-अलग वनस्पति आ गई है वैसा कंठ के लिए शालमली आ गई है मैंने वो सब लिख के दिए एक लेक्चर उसके लिए हम दे सकते हैं जरा हार्मिंग आता है जरा आवाज जरा कम करना तो वहां मुझे जो वनस्पति हम खोज रहे थे और महाराज जी को जो बोलनी थी ना तो वहां प्लक्ष नाम हृदय मूल ऐसा शब्द आ गया था। तो हृदय का और प्लक्ष का इकट्ठा संदर्भ मुझे वहां मिल गया और
5:28 हमने बाद में प्लक्ष इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और प्लक्ष हमने इस्तेमाल करने से लोगों को फायदा होना शुरू हो गया और बाद में रिसर्च पेपर भी मिल गया जो मैंने आपको बताया। एंजजेनेसिस उससे नई खून की नसे तैयार हो जाती है। तो वहां कहीं भी ब्लॉक आ गया वो निकालने की कोशिश कर तो हृदय मर्म है उसके ऊपर आप शस्त्र चलाते हैं तो ब्रेन के ऊपर या किडनी के ऊपर उसका असर होता है। ब्रेन में स्ट्रोक हो जाता है या किडनी फेलियर के लक्षण आना शुरू हो जाता है। तो हमें यह सोचना चाहिए कि ब्लॉक वहां आ गए तो एनास्ट्रोमोसिस जो है और बाकी की जो नसे है ना वो ज्यादा तैयार अगर हो गई कैपिलरीज तो उससे भी वही काम होने वाला है। है ना? तो उससे आदमी जो है वो उसका लेंथ ऑफ लाइफ और क्वालिटी ऑफ लाइफ दोनों भी इंप्रूव हो जाता है। ऑपरेशन करने से बहुत सारी बार वो मेकर के पास चला जाता
6:15 है। पेशेंट मर जाता है बहुत सारी बार ऐसा होता है। तो ये उसमें समझ में आ गया। ये चीज जब ध्यान में आ गई तो अभी इस चीज का वेट आपको पता हो जाएगा कि जो फकस फैमिली है है उंबर वगैरह वदंबर की जो फैमिली है उसके सब घटक आपको देखने हैं वनस्पतियां और उसका रिसर्च पेपर हम देखते जाएंगे और वो इस्तेमाल करने के लिए एक आदेश हो गया है। उसके रिसर्च पेपर भी पढ़ने हैं। हां। तो अभी हम सप्त धातु का रसायन सेवन करते हैं। अलग-अलग रसायन रहते हैं। उध शुक्र के ऊपर जाता है लेकिन वो रसायन नहीं है। लेकिन हरित की रसायन है। अमल का रसायन है वो शुक्र के ऊपर जाता है। हरित की जो है
7:00 मेद के ऊपर जाता है। शीला जी जो है वो मेद के ऊपर जाता है। लेकिन पूरे शरीर की व्याधि निकालने के लिए उसका रसायन फायदा हो जाता है। लेकिन सप्त धातुओं का अग्नि जो है वो अच्छा रहा तो सब चीजें अच्छी है। भूख नहीं है अच्छी आपको तो आपका दिन कैसा खराब जाता है लेकिन अच्छी भूख लग गई तो खाने का समाधान भी मिलता है शरीर भी अच्छा रहता है तो हमारे शरीर में जाठ अग्नि एक बताया सप्त धात्वाग्नि बताया और पंच महा महाभूत अग्नि बताया है तो एक आदेश ऐसा आ गया था कि ये सप्त धातुओं का अग्नि आप बढ़ाए कैसे तो हमने जोर से बता दिया उसमें कि ये जो है वो रस रक्त माउस में अस्थि मज्जा का पाचन दे रही है और शुक्र का पाचन जो है वो शारीर स्थान अध्याय में आ गए है आप सब लोगों को यह पता है अभी है ना लेकिन उन्होंने बताया कि अभी कई कई लोगों को
7:47 काढ़ा पीने की आदत नहीं रहती है वह पिएंगे नहीं तो आप क्या करेंगे बच्चा और ज्यादा काढ़ा आप नहीं दे सकते तो आप क्या करेंगे गर्मीणी है तो क्या करेंगे तो हमने बोला आप ही बताओ अभी क्या करना चाहिए तो उन्होंने बताया आप एक्सटर्नल ट्रीटमेंट क्यों नहीं करते हर एक धातु को का अग्नि बढ़ाने के लिए एक्सटर्नल ट्रीटमेंट करो ना तो हमने बता दिया कि हम अभ्यंग तो करते ही रहते हैं तो बोले उससे क्या होने वाला हर एक धातुओं का वर्जन हो जाएगा नहीं हो जाएगा लेकिन तेल लगाने से यह चीजें हो सकती है हमने फिर से सवाल पूछा तो उन्होंने बताया कि पाव में पादाभिंग करने से पाव तेज के उसको तेल लग गया तो अग्नि संदूषित हो जाता है तो इससे आपको यह पता चल जाएगा कि हाइपोथेसिस आपके आयुर्वेद में है तेल लगाने से अग्नि संदूषित हो जाता है स्पेशली पाव को और ऐसा
8:32 करके उन्होंने जो चीजें बताई वह मैं आपको बताऊंगा रस धातु का पाचन करना है तो आप हृदय के ऊपर तेल दवा लगाना शुरू कर दो। दूसरा उन्होंने बताया रक्त के ऊपर आपको अगर धातु अग्नि वर्धन करना है तो यकृत के ऊपर दवा लगा दो। माउस के ऊपर आप काम करना है तो पूरे शरीर को आप माउस धात अग्नि वर्धन के लिए दवा लगा दो। मेद के ऊपर काम करना है तो आप उधर को वपा उसको दवा लगाना शुरू कर दो। अस्थि के लिए आप उधर का राइट वाला हिस्सा जो उंडू का है वहां दवा लगाना शुरू कर दो। और मज्जा के लिए आप क्या करो? नाभि में और आंखों में दवा लगाने की कोशिश करो। आंखों के ऊपर और नाभि में डालने के लिए आंखों
9:17 में डालने के लिए दवा इस्तेमाल करो। और शुक्र के लिए क्या करो? जनेंद्र के ऊपर दवा लगाओ और चेहरे के ऊपर दवा लगाओ। दवा लगाओ दवा लगा दो। कौन सी दवा लगा दो। ऐसा हो जाता है ना। तो उन्होंने जो बताया वो इतना अच्छा बताया है मेरे ख्याल से और इसका पक्का आप सब लोगों को फायदा हो जाएगा। एरंडी का जो तेल है ना उसमें शंख भस्म मिलाना है और वो लगाना है हर जगह इसका अग्नि जहां का आपको बढ़ाना है वहां तो उसका वो अग्नि बढ़ना शुरू हो जाएगा तो मैंने बोला मैं कप किया शक्ति क्यों नहीं इस्तेमाल कर प्र वग बोले जो धर्म शास्त्र में बताया है जो पूजा पाठ में आ गया ऐसी चीज कौन सी है शंख है जो आवाज निकालती है जिसकी गर्त जो है वो अंतो जैसी है और हर एक भगवान जी के हाथ में शंख है तो पवित्र
10:03 का वो लक्षण है और आपका जो शरीर की एनर्जी है उसके लिए वह फायदा करेगा। कपरदी भी चलेगा क्योंकि कपर यानी कौन शंकर और वो पहनते हैं उसकी माला लेकिन बुध मार्ग के ऊपर उसका काम है। तो त्याज जो ऑर्गन है उसके ऊपर ज्यादा जाने वाला है। शंख वहां भी जाएगा और बाकी जगह भी जाएगा। तो शंख इस्तेमाल करना है। जैसा हम यहां रक्त मोक्षण अलग-अलग चीजों से होता है। लेकिन हम जलों का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि भगवान जी के धनवंतरी के राइट हैंड में वो है। वो हाथ नीचे है। और अमृत कलर जो है उसका हाथ ऊपर है। यानी अमृत से भी जलवा जो है वो क्या है? गरीसी है। है ना? तो इसलिए हम यहां सिर्फ वही करते हैं। ब्लड लेटिंग बाकी खून जो है क्यूबइडल से जो निकालते
10:49 हैं वो सार्वहिक रक्त मोषण के लिए करते हैं। बाकी सब जगह हम तुमी आला वाला नहीं इस्तेमाल करते। धनवंतरी के हाथ में तुम है क्या? अलाब है क्या? क्या है? येलो का है। जिंदी चीज है। उसका खुद का ब्रेन है। आपको पता है आपने अर्थम का डिसेक्शन किया होगा 12 स्टैंडर्ड में। तो उसकी जो इसकी रिंग रहती है ना सेरीब्रम की वो जब निकाल लेते हैं तो नॉनस्टॉप वो चलता रहता है कौन अर्थम इसका उसका कंट्रोल जो है ना उसके हरपो है दोनों उसमें सेक्स जो है एक ही बॉडी में है उसके तो ये सब चीजें ध्यान में रखते हुए जैसा ये है ना वैसा ही है अभी एंड का तेल क्यों तो एंड तैलम मधुर उष्णम सूक्ष्मम कषाय रसम श्रोतो विषदनम च खत्म भजत पित्त पिक्चर
11:37 में आ गया धर्म ग्रंथि और उसका स्रोतस आ गया और उससे से पेनिट्रेटो के अंदर जाने का जो हिस्सा है वो कलाओं का क्रमण करता रहता है। जितना तेल आप रगड़ते जाएंगे एक-एक धातु का कलाओं का क्रमण करके अंदर जाता है। तो आप ये करके देख लेना। ये बहुत अच्छी चीज मुझे लगता है कि हमें मिल गई इस नवरात्रि में तो हमने शेयर कर दिया और आप सब लोग जो सुन रहे हैं ना वो करके देख लेना। ये आपको फेंटसी कल्पना विलास लगेगा लेकिन करके देख लो तो सही तो अपने आप डाटा तैयार होता जाएगा और उसका इफेक्ट क्या आता है वो समझना शुरू हो जाएगा। तो लीवर के ऊपर लीवर के मैलिगनेंसी के लिए हम अस्थदी का लेप देते थे। अभी हम उसके साथ क्या करेंगे? हिरण्य का तेल और यह भी लगाना शुरू कर देंगे। तो ये सोच है। अलग-अलग रूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ ड्रग जो है ना वो हमें खोजने चाहिए। वैसे ये चीज है। वहां
12:25 फासनी या प्रख्यान कर्म करके शंख लगाना है तो भी चलेगा। और एरंड का तेल आपने अगर लगा दिया तो शस्त्र इस्तेमाल करते बगैर करते हुए भी यह चीज आपको मिल सकती है। तो यह एक चीज मुझे लगता है कि बहुत प्यारी लग गई है हमें और उन्होंने यह बताई कि श्वास कुठार सुबह को कफ कम करने के लिए दोपहर को दािस के साथ त्रिभुवन कीर्ति पित्त कम करने के लिए और शाम को घी या गरम पानी या शक्कर के साथ त्रिभुवन कीर्ति वात शमन करने के लिए ये हम देते हैं। रस पाचक का काढ़ा सुबह शाम सात दिन रक्त का पाचक का काढ़ा सुबह शाम रात दिन ऐसा हर एक धातुओं के ऊपर भी हम काम करते थे और दोषों के ऊपर काम करते थे। ये हमारे पास है चीजें रात को पेट साफ होने के लिए अपित चूर्ण या हरित की चूर्ण जैसा करते थे। तो
13:12 उसके उससे क्या होता है? दोष धातु मलम मूलम ही शरीरस तीनों चीजें पहले दिन से ही नॉर्मल होना शुरू हो जाता है। इसके साथ अगर कोई परहेज करता है ना तो उस पेशेंट के शरीर की सब जो चीजें है ना धीरे-धीरे कम आना शुरू हो जाता है। बाकी छोटे-छोटे लक्षण जिसको हम नाले वगैरह बोलते हैं ना ओढ़ा नाले वगैरह सब खत्म होते हैं। जो मेन स्ट्रीम बीमारी है उसकी संप्राप्ति उभर के ऊपर आ जाती है। उसकी व्याधि प्रतिनिध दवा दी तो काम होता जाएगा। तो यह एक हमने काम तैयार करके रख दिए हैं। तो वह उन्होंने बताया कि आप यह जो काढ़े दो बार देते हो वह आप हटा दो। तो क्या करूं मैं फिर? तो आप रस पाचक वगैरह जो सुबह शाम देने के बदले शाम को देते जाना उसका काढ़ा। और सुबह को क्या करना है? ये इतना अच्छा बताया उन्होंने कि रसायन क्या चीज है? शरीर को अच्छा कर देती
13:58 है। शरीर में अग्नि अच्छा कर देती है। आयुष को बढ़ाती है। तारुण्य जो है वो मेंटेन कर देती है। और वो दवा भी है। तो आप क्या करें? सपोज कोई पेशेंट है और उसको श्वास की बीमारी है तो श्वास अध्याय आप निकाल लो और रसायन अध्याय निकाल लो चरक जी का और उसमें जो कॉमन दवाइयां आती है उसका कड़ा आप सुबह को देते जाना सुबह काल रसायन का काल है उस वक्त अगर हो गया तो व्याधि भी कम होती जाएगी दूसरा कोई अर्श का पेशेंट है तो क्या करें अर्श और रसायन अध्याय इसकी दवा ले लो अभी हम क्या करते थे दोनों कॉमन कॉमन करके देते थे तो मैंने टेढ़ा सवाल पूछ लिया क्योंकि आप मुझे पूछने वाले हैं इसलिए हमने पूछ लिया कि अगर श्वास भी है, अर्श भी है और त्वचा रोग भी है। तो मैं क्या बोलूं? तो उन्होंने बताया कि श्वास अर्श अर्श कुष्ठ और कुष्
14:46 श्वास इसमें जो कॉमन आती है वो दवा पहले ले लो बाद में रसायन आद से काट लो और कॉमन आने की दवा का सुबोध का दो तो बात खत्म। ये करने से आपका प्रैक्टिस जो है ना वो कुछ भी नहीं है। कोई आ गया उसको दवा दे दी उसके उसने लक्षण बताए और वो काम हो गया। ऐसी चीजें इससे हो जाएगी। 70% लोग आपके इससे अच्छे होने वाले हैं। 30% के लिए और कोशिश करनी चाहिए। लेकिन जितना इजी स्पेशली औरतों का ही औरतों का नहीं बोलना है। देवों का जो होता है उसके लिए मैं चीज बताता हूं कि उनकी शादी हो गई चांस लेना है तो डेढ़ अढ़ाई बरस का पीरियड बीच में चला जाता है यहां सीखने के बाद और वो बोलती है कि हमारा कॉन्फिडेंस अभी कम हो गया है। मैं कुछ नहीं कर पा सकूंगी ऐसा मुझे लगता है। तो ऐसे डर तो ये निकालनी चाहिए। आप कहां सीखे अंदर आपके तत्व कौन
15:32 सा है? जरा जा लो ना तो आपको ये टेंशन आना ही नहीं सच बोले तो फिर भी आ गया तो उनके लिए रेडी टू मेड रेडी टू ईट ऐसी ये डिश है जो आपको मैंने अभी बताई मस्तानी आने वाली है लेकिन तब तक ये खा लो तो ये चीज हमें समझनी होगी और ये सब रिकॉर्ड हो रहा है आप बाद में लिख दे सकते हैं ये कागज यहां ही रहेगा इसकी कॉपी भी हम दे सकते हैं पेट साफ होने के लिए रात की जो दवा हमने हारी हरित की और अभिपत्र चूर्ण बोला ना उसके बदले उन्होंने बताया कि सुबह शाम अगर मूंग की दाल की खिचड़ी या मूंग की यवा आप देते तो रात को आप हरित की नाम चूर्णा पीपली मरी जो योग आ गया है ना चरक जी ने या वागभ जी ने बताया हरित की है मरीज है वचा है हरिद्रा है
16:19 गुड़ है ऐसी आमल की है ऐसी चीजें का एक चूर्ण है वो लेने से क्या होता है पेट साफ हो जाता है उसमें एक थोड़ी सी चीज मैं आपको बताना चाहूंगा उसमें वछा का प्रमाण थोड़ा ज्यादा ज्यादा हो जाता है ग्रंथोक्त और हमने शादी होने के बाद एक डेढ़ बरस के बाद हम प्रभाकर सुरति ढानोकर कॉलेज में रहते थे वहां मैंने और मेरे बीवी ने वो दवा ले ली तो मुझे उल्टी वगैरह ज्यादा होती नहीं कभी लेकिन मिसेज को वो जाने के बाद इमीडिएट उल्टियां वगैरह होना शुरू हो गया रात हमने ले लिया था 6:00 बजे वगैरह पेट साफ होने के लिए ले लिया था लेकिन 8 9:00 बजे उल्टियां उसको शुरू हो गई तो आजूबाजू के लोग आ गए क्या अच्छी खबर है क्या वगैरह वगैरह तब तब मुझे दो तीन उल्टियां हो गई
17:05 और तो उसमें बच्चा जो है ना बच्चा उसका डोस थोड़ा कम रख दे नहीं तो लोग बोलेंगे अच्छी खबर है क्या उनको बोलना है अच्छी खबर है लेकिन रसायन लेने के लिए तो ये मैंने क्यों बताया कि हम जो चीजें इस्तेमाल करते हैं वो रसायन अध्याय से आप लेते हैं वो दवा भी हो जाएगी और आपका शरीर जो है उसके लिए वो तगड़ा होने के लिए और तरुण होने के लिए जो कुछ चीज है ना वो रसायन अध्याय में कूट कूट कर भरी हुई उसका और एक अलग हिस्सा मैं बताता है। आपको रसायन चूर्ण नाम का एक यहां चूर्ण मिलेगा हमारे यहां सर्व रसभ्यासा बल वर्ण करा नाम श्रेष्ठा ऐसा बताया छ रस का अभ्यास हो गया तो और मोनोटोनस खाना अगर आप खाते एक रसभ तो धर्म श्रेष् ऐसा बताया तो आपको रसायन चूर्ण अगर तैयार करना है तो आप इधर उधर मत भटको आप
17:54 रसायन अध्याय निकालो और वहां जो जो चीजें आ गई है उसमें से मधुरमल लवण क निकालो तो ज्यादा फायदा करेगा ना रसायन अध्याय के वो चूर्ण है हमारे यहां तो यह सोच हमें आपको लगानी है हर एक जगह तो रसायन अध्याय हमारे मन में होना चाहिए। जैसे देवी जी के चरण रहेंगे ना वैसे ये मन में रहना चाहिए तो प्रैक्टिस में आसानी आ जाएगी। तो पेट साले का हिस्सा मैंने बताया। वात पित्त कफ और सप्त धातु और तीन मल का भी काम हो गया। यवागो का हमने बता दिया। 35 बरस के आगे जो पेशेंट रहता है या आप खुद रहते हैं ना तो आपको प्रवाल पंचामृत की जो पाउडर है वह सुबह को अर्ली इन द मॉर्निंग दूध के साथ या पानी के साथ लेनी है। दो अाई ग्राम लेनी है। तीन महीना लेनी
18:40 है। एक महीना गैप रखनी है। ऐसा लगातार करना है। तो हड्डियों की बीमारियां और हड्डी अच्छी हो गई तो रक्त की और मज्जा की बीमारी आपको आएगी नहीं। ऐसा एक आदेश आ गया है। यह मैंने आपको बताया। आप बोर नहीं हो रहे ना? हम रात को नींद अच्छी नहीं आती है। रावा सर्पगंधा जटा मौसी धमासा या खुरासिमा कुछ भी दे दिया तो या प्रश वगैरह जैसी चीजें दी तो भी लोगों को कंपोज या ट्राइका वगैरह सब की नींद नहीं आती तो हमने बोला कि इन लोगों के लिए क्या
19:29 करें तो हमें तो पता है कि शिरोधारा करने उसका फायदा होता है लेकिन फिर भी लोग जो बोलते रहते हैं हमें नींद नहीं आती तो प्रमेह के लिए मैंने बताया प्रमेय है और नींद नहीं आती है तो नींद नहीं आना यह आमतौर पर जब होता है ना 30 बरस तक वगैरह तो शारीरिक बीमारी की वजह से हो सकता है। लेकिन 35 के बाद आपको नींद अगर नहीं आती है बार-बार खुलती है या रात को जागने को दिल करता है ना तो पितु दोष रहता है। पितर का दोष रहता है। ये एक चीज रहती है। तो उसका जो हिस्सा है वो मैंने मंत्र वगैरह जो बताया या आपकी जो साधना रहेगी उससे वो आप रेक्टिफाई कर सकते हैं। लेकिन प्रमेय और उसमें आपको अगर नींद नहीं आती तो दादा महाराज जी ने एक योग हमारे गुरु माई के लिए बताया था और वो कैला जीवन नाम का जो क्रीम रहता है वो एक चम्मच लेना
20:14 है उसमें उतना ही पाचक चूर्ण यानी भास्कर चूर्ण डालना है और वो खाना है तो उससे बहुत अच्छी आ जाती है डायबिटिक लोगों को जिनको इंसुमिनिया की तकलीफ रहती है तो उन्होंने एक कल्प हमें बताया है और उन्होंने बताया तीन महीना आप सेवन करते जाए तो उसके बाद उसका असर आ जाएगा वो फॉर फॉर एवर आ जाएगा तो बहुत सारे लोगों को नींद लगती है सोते रहते हैं और खर्राटे लगाते रहते फिर भी उनको समाधान नहीं मिलता तो वो बोलते हमें नींद मिली नहीं है और दूसरा जो रहता है वो टक जाग रहना ना यानी रात भर वो जागे ही रहते हैं दिन में थोड़ी सी नींद आती है या रात को एक घंटा वगैरह आती है इंटरप्टेड रहती है तो रम नॉन रम अवस्था जो रहती है 90 90 मिनट 15 मिनट की वो उसमें रहती नहीं तो उन लोगों के लिए जो चीज आ गई तो वो मैं हैरान हो गया लेकिन
21:01 बहुत अच्छी दवाई है अक्षोटक जो है अखोड़ वो लेने के लिए उन्होंने बताया तो हमने बोला ये हमने इस्तेमाल किया है ब्रेन जैसा टाका तेल रहता है वगैरह तो नहीं बोला थोड़ा ठहरो उसको आप ककड़ी के रस की भावना लगा दो ककड़ी जो रहती है वो एक वेली का फल है और दूसरा वृक्ष का फल है देखो कैसा है उन्होंने ये कर दिया तीन भावनाएं लगाकर वो चूर्णना अगर आम आप देते हैं और तीन महीना लगातार रात को देते हैं ना तो लोगों को नींद आना शुरू हो जाए चाहे किसी भी चीज से उनकी नींद आती नहीं तो उसके लिए फायदा करेगा कैंसर के लोगों को भी वेदना जब ज्यादा रहती है ना तो बाकी की मेडिसिन के साथ ही इस्तेमाल करने का आदेश उन्होंने दे दिया। तो अभी ककड़ी दर बार लाना है हर बार और यहां करना है। वो जो रहता है अक्षुटक उसमें कीड़े इमीडिएट पड़ जाते हैं। कोचे
21:48 लग्नता मराठी तो उसकी बू भी गंदी आ जाएगी। ये सब हमारे मन में आ गया। तो हमने बताया इसका हम डेरिवेटिव कर सकते हैं क्या? वो बोले कि ये दोनों मिक्स करना है। आप इसकी कोई भी कल्पना इस्तेमाल करो। तो हमने दिमाग थोड़ा सा लगाया और इस चूर्ण ये जो चूर्ण है उसका तेल निकालना है किसका? अक्षोटक का और ककड़ी के साथ वो खाने के लिए देना है। यह हो सकता है या ककड़ी का पानी के साथ दे सकते हैं। अक्षोटक का तेल निकालना है और ककड़ी से वो सिद्ध करना है। ये दूसरी चीज है। और तीसरा क्या है? ककड़ी को भावनाएं देनी है। ककड़ी की रस की भावना देनी है और जो अक्षोटक रहेगा उसका तेल निकालना है। ये तीन चीजें आप कर सकते हैं। तो यह एक चीज हो गई। शंख का वारा हमने
22:36 बताया। [संगीत] हां कलयुग का परिणाम हमारे हर एक के मन के ऊपर आता है। शरीर के ऊपर आता है। अंतकरण चतुष्टय के ऊपर आता है। और गलत गलत चीजें हम सोचते या करते तो मन गया तो चलेगा कहीं भी लेकिन शरीर को नहीं जाना चाहिए। ऐसा बोलते हैं ना तो वो तगड़ा होने के लिए और शरीर के ऊपर उसका असर नहीं आने के लिए या हमारी सबसे बड़ा ऑर्गन हमारे शरीर में क्या है? हमारी त्वचा है। तो अलग-अलग लोगों का हमें स्पर्श होता रहता है। अलग-अलग वातावरण में हम जाते हैं। अलग-अलग ऋतुओं का हमारी स्किन के ऊपर असर आता है।
23:21 तो कली की बाधा किसको होती नहीं? ये धर्म शास्त्र में बताया। उसमें तुलसी बताई है। जो नित्य सेवी तुलसी सी उसको ये तकलीफ नहीं होती। सेवन का अर्थ जो है वो दो तरह का किया जाता है। एक सेवन यानी पीना और दूसरा सेवन यानी उसकी ये श्री सेवन कर दिया तो स्त्री को क्या कूट कर खा लिया क्या? ऐसा नहीं है। वैसा ही वो चीज रहती है। तो आपको तुलसी का सेवन यानी उसको परिक्रमा लगानी है। प्रदक्षिणा जो बोलते हैं वो वो खाना है। उसका रस लेना है। उसका तेल बनाकर नाक में डालना है वगैरह वगैरह। तो एक उन्होंने चीज बताई है। तुलसी सिद्ध गुरुत का शरीर को अभ्यंग होना चाहिए। तेल के बदले तेल आप इस्तेमाल मत करो। पहले तीन महीना तो आप पेशेंट लोगों को यही घूत लगाने के
24:06 लिए दे दो। हम तेल इस्तेमाल करते हैं। आप लोगों को पता है हर एक पेशेंट के लिए हम अभ्यंग देते ही देते हैं क्योंकि हमारे विलास नानंद सर जो है वो करते थे और उसका फायदा होता है। हमें पता है इसलिए हम करते हैं। आम वात वगैरह के या स्थौल्य या आम के या कामला के ज्वर के या स्थौल्य के शोध के पेशेंट छोड़कर सब लोगों को हम ये देते हैं। तो ये घृत जो है ना वो तुलसी से सिद्ध करके आपको लगाना है। तीन बार सिद्ध किया हुआ घुत इस्तेमाल करना है। गुरुत की जो विधि बताई है ना चतुर्गुण वगैरह लेकर वैसा नहीं करना है। घी लेना है उसके 1/4 उसमें तुलसी डालनी है। उसका रस डाले या कल्क डाले और उसको कढ़ाना है यानी तड़का लगाते हैं वैसा वो तैयार करना है। ऐसा तीन बार करना है और वो लगाने के लिए तो हमने बोला कि ये बहुत महंगा हो जाएगा। क्योंकि
24:53 गाय का घी लाकर कैसा लगे तो बोले कि भैंस का घी इस्तेमाल करो। वो ज्यादा स्निग्ध रहेगा। उसका ज्यादा अच्छा असर आ जाएगा और तुलसी वगैरह वैसे तो तीष्ण है ही है ना। तो तुलसी कौन सी ले ले तो कोई भी चीज सफेद लेना ज्यादा फायदा रहता है। तो तुलसी सफेद वाली या काली वाली कौन सी भी चलेगी? वनस्पति में भी चतुर्व रहते हैं। चतुर्व यानी आप बुरा मत माने या मनु को इमीडिएट गालियां देना मत शुरू कर दे। हम सब लोग जो रहते हैं वो चतुर्व के रहते हैं। सुबह को संडास के लिए गए। बुध प्रक्षालन किया। आप शूद्र हो गए। है ना? पैसा कमाने के लिए आपने कहीं नौकरी कर दिया। व्यवसाय शुरू कर दिया। आप वैश्य हो गए। आपके यहां कुत्ता या कोई जानवर अगर आपके पीछे
25:39 लग गया तो उसको मारेंगे। आप क्षत्रिय हो गए और आप जो शिक्षण ले रहे हैं वो क्या है? ब्रह्म का ज्ञान मिलने के लिए आप कर रहे तो आप ब्राह्मण हो गए। तो हमारे शरीर में ही चातुरण व्यवस्था भगवान जी ने दी है। उसका गलत स्वरूप स्वरूप जो है वो पूरे जगत में आ गए। सिर्फ भारत में ही नहीं वॉरियर इस हिसाब से क्षत्रिय की कल्पना कर दी है। वाइज मैन इस हिसाब से ब्राह्मण की कल्पना कर दी है। ये ग्रीक संस्कृति में वगैरह भी सब चीजें रहती है। सिर्फ भारत में ऐसी नहीं है। और उसकी गलत बातें तो अभी खत्म हो गई। सब लोग हम मानवतावादी के हिसाब से ही देखते रहते हैं। फिर भी ये चीज मैंने क्यों बताई? तो ये अपने आप नहीं आ गया है। हमारे शरीर में भगवान जी ने ये चीजें रखी है। हमें पता नहीं चलता। से हम जातप पात वगरा जो है ना उसके पीछे लगते हैं और मन गंदा कर देते हैं। कभी भी देखो
26:25 101 अच्छे-अच्छे मुस्लिम भैया सिख आदमी और कोई नव बौद्ध ब्राह्मण कोई क्षत्रिय आ गया तो बच्चे लोग सब कितना अच्छा काम करते रहते हैं तरुण लोग वगैरह भी और उसमें एक टिपका सिर्फ डाल दिया जात का तो गुस्सा गुस्सा शुरू हो जाता तो काहे के लिए वो फेंक दो ना बावजूद किस चीज से वो आ गया यह समझने के लिए मैंने बातें बताई है और किसको पकड़ना है नित्यानित्य विवेक किसका फायदा होने वाला है वह देखना है उस तरह से आपको जाना तो यह तुलसी का एक हो गया। मुझे लगता है कि ये चीजें सब पूरी की पूरी हो गई। सब ये दो कागज लिखने के लिए मुझे आधा पौना घंटा लग गया। आठुन आठुन लेला लेकिन ये इसमें सब चीजें आ गई है। ये सब चीजें नवरात्रि के
27:13 नौ दिन में जो मिल गई तो वो आपके लिए मैंने शेयर कर दी। यह हमारा खुद का जो सोचना है ऐसा नहीं है जो कुछ चीजें आ गई है वो हमने बताई है तो जो कुछ गलत है मेरा है जो कुछ अच्छा है वो आइए भगवती गाय धन्यवाद बोलो और ये हिंदी में मैंने बताने की कोशिश कर दी हमारा हिंदी हमारा मराठी आपने बिगाड़ दिया हिंदी बोलने की वजह से लेकिन फिर भी आपको हजम हो गया होगा है ना अभी सवाल जवाब पूछेंगे बाद में मस्तानी मस्तानी यानी एक पे रहता है जो सुनने वाले बाकी लोग हैं ना ये मस्तानी क्या चीज रहती है तो पुणे में बाजीराव नाम के पेशवे थे
28:00 आपको पता है छत्रपति शिवाजी महाराज के बाद उन्होंने गद्दी संभाली थी तो मस्तानी और बाजीराव ऐसा एक कपल था तो यहां बहुत ज्यादा जो बाजीराव है उनके लिए वो मस्तानी है और मस्तानी मस्तानी पिएंगे है ना बोलो मौन करने से क्या होता है वो भी आपको पता चल जाएगा। जितना मौन आप रखेंगे ना तो उससे काम क्रोध लोभ मोह मच्छर के ऊपर भी असर अच्छा आता है। मौन दो तरह का रहता है। एक काष्ट मौन रहता है। लकड़ी की कट ये रहती है। छड़ी रहती है। उसके ऊपर आप गम पानी डालो गार डालो। उसको कुछ फर्क पड़ता है।
28:46 कास्ट मौन कुछ भी बोलना नहीं है। ऐसा जो मौन रहता है वो कास्ट और आकार मौन जो रहता है वो वगैरह जो रहता है ना वो सब आकार मौन रहता है। तो ये आकार मौन बहुत खराब रहता है। उसमें गुस्सा अगर आ गया तो और ज्यादा तकलीफ हो जाती है। है ना? तो जितना हो सके उतना काष्ट मोहन आपको करना है। बोलने की इच्छा या जरूरत ही नहीं पड़नी चाहिए। लोग क्या करते हैं? अष्टमी को वहां ओटी रखनी है ना तो भूल जाते हैं। तो बाजार से खरीदने से उनकी शुरुआत होती है। चरक जी क्या बोलते हैं? पंचकर्म करना है तो उसके व्यापत की ट्रीटमेंट पहले तैयार कर दो। है ना? तो वो कागज पढ़ने के बाद सब चीजें आप लिख के रखना। पहले लाकर खुद वो एक कमरे में रखनी है। तो किसी को मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नहीं तो कितना मांगेगी आप
29:32 लोगों को? और हमारे यहां तो ऐसा किस्सा हो गया ना मैंने एक औरत को बुलाया। तो बोले मुझे पढ़ने नहीं आता। खलास बात ही खत्म मैं उसको इससे बता रहा है बॉडी लैंग्वेज से बता रहा है उसको कि ऐसा वो दे दो वो नहीं तो दूसरा संगीता नाम की थी उसको ऐसा क्रेने बताया वो आ गई बोली मुझे कन्नड़ पढ़ना आता है बात ही खत्म तो मैं खुद उठा और जाकर जो चीजें थी वो हमने लेके पूजा की शुरुआत कर दी तो ऐसा किस्सा हो जाता है तो जितना हो सके जिससे हमें बोलने के लिए जरूरत पड़ेगी या गुस्सा होने की चीज होने वाली है ऐसे आप पहले ही मैनेज कर और आपको खुद को पता है काम क्रोध लोभ सर से कौन आपको तगड़ा धक्का देने वाला है उसके पहले ही कोशिश करके रख देना प्रार्थना करके है ना मैं खुद कर रहा है
30:18 ऐसा बोले तो आज से होगा नहीं पक्का नहीं होगा उसको शरण जाके वो करना चाहिए है ना अगली मर्तबा है ना ठीक है प्रणाम सर सर अभय आम्ल रसायन अध्याय में जो हरित की है वो पंच रस रस लवण अनुवर्जित है। मतलब उसमें लवण रस नहीं है। तो अगर हरितकी के साथ में सेंधव लवण का सेवन किया जाए मतलब मिला के तो वो हमारे रसात्मक चूर्ण तैयार हो जाता है। तो वो रसायन काम करेगा। हां करेगा। इसलिए ऋतु हरित की सेवन करनी है। नेचर में जो ऋतु में जो रस तैयार होता है उसको कंपनसेट करने के लिए ऋतु हरित की आ गई है। तो इधर हरित की प्लस सेंधव और ऋतु हरित की
31:05 या रसायन चूर्ण हमारी यहां का और सर आपने अक्षोटक के बारे में बताया तो आपने तीन कल्पना बताई कि कैसे-कैसे हम उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। तो अक्षोटक का अगर हम फाइन चूर्ण बना के ककड़ी के रस के साथ में ही अनुपान के रूप में अगर ले ले तो भी वो काम हो जाएगा। चलता है ना? ककड़ी घर पर हर बार दिखने शुरू हो गई ना तो एक वर्ष चलेगा, दो वर्ष चलेगा बाद में गुस्सा आना शुरू हो जाएगा। ककड़ी है ना? ककड़ी है ना? वो खोल दिया तो ककड़ी सामने ऐसा होता है। है ना? सब लोग अच्छे नहीं रहते। वो बार-बार आए सामने तो दिक्कतें होती है। कई कई लोग अच्छे रहते हैं। है ना? तो आप उसको रस की भावना देकर अखरोट का भी ऐसा ही है। है ना? और एक बात मैं आपको बताएगा एंटी नट्रिएंट्स नाम की जो
31:51 कांसेप्ट होती है उसके बारे में कोई बोलता नहीं है। इसमें ये विटामिनस है। इसमें ये मिनरल्स है। इसमें कार्बोह ये वगैरह सब बोलते हैं। लेकिन एंटीट्रिएंट्स नाम की जो कांसेप्ट है उसमें मूंगफली जो रहती है ना वो हां ग्राउंड नट जो रहता है वो। उसके बाद ये रहता है ना हमारा सेंगदाना वो है और तीसरा जो रहता है वो अक्षोटक इन तीन को जब अंदर कीड़ लग जाती है ना तो उससे वो खवट हो जाता है उसकी टेस्ट बदल जाती है वो जो तैयार होने वाला एंटीट्रिएंट है ना उससे लीवर का कैंसर पक्का होता है तो इससे चीज कौन सी उभर के आ जाएगी तो आप यह चीजें घर पर जब रहते तो वह देखकर आप ले सकते लेकिन आप मूंगफली की
32:39 चिक्की कभी मत खाना। उसमें गंद गंदी चीजें वाला सब्जी जो है ना वो एक साथ उनको क्या लेना देना है आपके तबीयत का और उसमें मीठा कुछ भी डाल दिया तो वो मीठा लगता है आपको मुंह में। लेकिन उसमें ये फंगस अगर रहा ना तो वो इतना गंदा एंटीऑक्सीडेंट है कि 100 में से 10 लोगों को कैंसर कर देता है वो। लगातार अगर आपके पेट में एक महीने तक गया तो इतना गंदा है वो। इसलिए आप यह अक्षोटक वगरा जब ये करते हैं ना चूज करेंगे तो उस बात आपके मन में होनी चाहिए। है ना? फल और पत्ता सब्जी उसके बारे में समझ और गैर समझ का हमने वो टीवी के ऊपर लेक्चर था ना तो उसमें ये सब चीजें हमने बताई है लेकिन मैं अभी ध्यान में आ गया बहुत इंपॉर्टेंट है इसलिए मैंने फिर से दोहराया
33:25 है सर नवरात्रि के सर नौ देवी के ऊपर से सर एक एक वनस्पति बताइए तो सर उसका चिकित्सा में और कैसे सोचना चाहिए नहीं अभी भगवती के लिए तो उसका जो गुण गुण रूप वर्णन जो रहता है ना कैरेक्टर वो शरीर में बढ़ने के लिए वो करना है। त्रदोषणी विड़ा जो है ना उसमें हर एक विड़े का जो द्रव्य उसके ऊपर गौरी वर्कर मैडम ने किताब लिखी है एक त्रदणी विड़ा की वैसे अर्घ को देने के लिए जो जो वनस्पतियां द्रव्य रहते हैं ना तिल है सातु रहते हैं शहद रहता है गन्ने का रस रहता है वगैरह ऐसे अलग-अलग उसमें आ गए तो शरीर में जब प्रकृति की विकृति रहती है यानी शरीर जो माया की
34:11 विकृति रहती है ना और उसका अभी देखो लज्जा भाव कम हो गया तो बहुत सारे औरत और बच्चियां बोलती है कि हमें लज्जा नहीं लगती। कुछ भी बोलते रहते हैं तो अच्छी बात नहीं है। लज्जा ये स्त्री का स्वभाव है और वो आई भगवती का एक रूप है यानी विभूति है वो तो वो होनी चाहिए ना। तो वो अगर कम हो गए तो आप पुरुष जैसे हो गए ना तो आपको पीसीओडी हो जाएगी। आपको बच्चे नहीं होंगे। हसोटिज्म हो जाएगा। तो हटिज्म तक की जो चीजें है उसके लिए अर्घ के वो द्रव्य इस्तेमाल करना है। ऐसा कुछ उसमें से जो साउंड करता है ना वो आपको इस्तेमाल करना होगा। यही धर्म शास्त्र में जो चीजें बताई उसका वर्णन होता है। आप बिलीव नहीं करेंगे। 10 11 तरह के जो दर्भ बताए दर्भ नाम की एक वनस्पति है कुष काश नल दर्भ कांडेशु पांच तण पंचमूल बताए उसमें दर्भ
34:58 बताए लेकिन धार्मिक लोग जो है वो 10 या 11 तरह के दर्भ बताते हैं और दर्भ एक जाति का प्रमाण रहता है जिसमें एक संच दे दिए वनस्पतियों का जिसका इस्तेमाल करने से आपको भगवान जी की प्राप्ति के लिए जो चीजें उसका एक दरवाजा खुला हो जाता है द की ये लगा देते हैं श्राद्ध वगैरह को उसके लिए रहता है तो उसमें चावल गेहूं इसके जो पत्ते हैं ना उसका वर्णन उन्होंने उस वक्त करके दे दिया है। हम यहां वीट ग्रास जूस वीट ग्रास जूस उन्होंने उस वक्त वो बता के रख दिया है कि गेहूं जो होता है गोद उसका ये तैयार हो गया पौधा तो उसका रस निकाल कर पीना है वग तो सब उन्होंने लिख के रख दिया है। तो अभी उसके बाद उन्होंने पंचगव्य जो है ना वो इस्तेमाल किया उसमें डालकर और वो पीने से
35:45 अस्थि मज्जागत पाप भी नष्ट हो जाता है। ऐसा बताया। अभी अलग-अलग बीमारियों का कारण क्या है? पाप किए हैं। तो कैंसर के लोगों को जब कभी मेटास्टेसिस ऑफ मेलिगसी होता है तो हमने दो तरह का विचार कर दिया था। एक विसर्प रहता है वो बाह्य भी रहता है। अभ्यंतर रहता है। अभ्यंतर ग्रंथि विसर्प नथिंग बट मेटाफेसिस ऑफ़ मेनसी। है ना? तो दूसरी सोच हमने क्या लगाई कि इसमें पाप कर्म किया है या उसके शरीर में पाप कर्म यानी गंदा बर्ताव दश पाप कर्म ऐसा ही आप अर्थ मत ले ले। ब्राह्म मूर्त उतक्षार्थ ये शरीर का धर्म है कब उठना है तो ब्राह्म के ऊपर उठना है सूर्यास्त सूर्योदय के पहले डेढ़ घंटा कम से कम उस वक्त वो उठता नहीं और बीमार हो गया तो उसने पाप कर दिया
36:31 शरीर धर्म है तो पाप का यह भी अर्थ ले सकते हैं और अस्थि मज्जागत पाप अगर हो गया तो मेटा मैगेंसी इन बोन ऐसा सोचकर हमने दर्भ का रस निकालकर उसमें पंचद्र डाला था और वो देते हम अभी भी देते हैं एक कोसी वगैरह हमारे यहां जो रहता है ना उसमें ये सब चीजें हम दे देते हैं। तो उससे वहां की कैंसर की गाठे कम होना शुरू हो जाता है। पित्त कम होने के लिए बाकी दवा हम देते हैं। लेकिन एक हिस्सा रहता है उस केटॉन का उस दवाओं के स्केलिटॉन का जिसमें ये सोच हमारी रहती है। तो वैसा आप वो नौ जो देवियां है उनका जो रूप कर्म है उसके हिसाब से वो वनस्पति देनी है। जब कभी वो रूप कर्म हमारे शरीर में कम हो जाता है। चाहे वह औरत रहे या पुरुष रहे क्योंकि आध्यात्म में पुरुष शब्द स्त्री और पुरुष
37:18 दोनों के लिए आ गए हैं। है ना? रे मस्तानी [संगीत] लोह कल्पना अपन लान मु दे ते नशियाटिक होता ते वोमिट करतात म तचा एवजी अपन तना ती अल्टरनेटिव मनुन का कर का तना थोड़ा-थोड़ा प्रमाणत माइक्रो डोसिंग कर के लोगों को कल्पना देते हुए अगर ये है ना मदन मधु लंबा निमशाला जो श्लोक है ना वागवट का सूत्र का 15वा अध्याय जो है उसमें तो उसमें उल्टी आने वाली जो दवा है
38:05 इसमें आ गई है बटी में आ गई है लेहन में आ गई है वो नहीं इस्तेमाल करनी है या कम करनी है तो उल्टी होनी होगी और उल्टी हो गई समझो तो वमनम सर्वो विशेषण कुके बच्चे लोगों को उल्टी होनी चाहिए तो पहले दो तीन उल्टी हो गई दिन तो डोस कम कर दो और वही ले दो और जबान के पीछे वह लगाना है तो अंदर अपने आप चला जाता है या लेहन के बदले आप क्या करें उसका पतला सा पानी बना दे काढ़ा बना दे या फट हीम बना दे उसमें शर्ट डालकर दे सकते हैं इससे भी काम हो जाएगा फिर भी यह नहीं हुआ तो क्या करना है शतावरी कल्प वगैरह जैसा उसका ग्रन्यूल्स बनाने है और वो खाने के लिए देना है यह भी नहीं हो गया तो शिरानादा अवस्था उसकी आ गई तो उसको या अन्नादा अवस्था भी रहे तो खाने में डाल
38:50 करो दावा देते जाए फिर भी नहीं हो गया तो सात धातुओं के हमने अभी स्थान बताए वहां वो लगाते जाओ है ना प्रणाम सर सर 40 के बाद आप हमेशा बताते हैं कि कोई ना कोई स्वर्ण भस्म लेनी चाहिए तो किसी को स्वर्ण भस्म ऐसे ही लेना हो तो उसका अनुपान मात्रा क्या होनी चाहिए और क्या पहले जितना भस्म आप सूक्ष्म इस्तेमाल करेंगे ना उतना वो ज्यादा फायदा होता है यानी सोने की कीमत अभी 1 लाख 10,000 वगैरह कुछ तो है। है ना? आज दशहरे का सोने का दिन लूटना होता है सोना। काहे के लूटते हैं। है ना? मन में ही लूटना है धीरे। तो जितना सूक्ष्मीकरण उसका होता जाएगा वो अच्छा रहेगा। तो सपोज 500 मिलीग्राम आपने सोने का भस्म ले लिया तो उसमें आप 10
39:38 ग्राम पीसी शक्कर या लैक्टो शुगर इसे डाल सकते हैं। और उसको घोटना है। आधा पौना तीन घंटा। उसमें से 1 ग्राम निकालना है। उसमें फिर से 9 ग्राम शक्कर डालनी है। फिर से घुमाना है। 1x हो गया। फिर से निकालकर यह करना है। तो आपको 500 मिलीग्राम जो है ना बहुत सारे लोगों को आप बहुत दिन तक इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा फोर एक्स करके इस्तेमाल करते हैं ना तो भी अच्छा असर आ जाता है। बीमारी जितनी पुरानी रहेगी उतनी सूक्ष्म दवा ज्यादा काम करती है। आप कभी भी यह मत सोचना कि दवा की क्वांटिटी ज्यादा होनी चाहिए। भस्म तो 125 मिलग्र यानी मोर देन सफिशिएंट। हमारी जो जरूरत रहती है ना वह भी कम रहती है और हम जो देते हैं बस वह भी कम ही देना चाहिए। क्या होता है जबान जो है ना हमारी वो ज्ञानेंद्र भी है और कर्मेंद्र भी है।
40:25 जबान को आदत रहती है पकोड़े खाने की मस्तानी पीने की तो ढेर सारी लगती है वो सब चीजें। लेकिन शरीर में जो अंदर अंतरात्मा है जो जीवन शक्ति के हिसाब से काम करता रहता है। उसको एनर्जी खुद की है भाई। उसको सिर्फ दवाओं की जरूरत काहे के लिए? शरीर जो है वह घटनात्मक है। उसको चेंज करने के लिए वो चाहिए। वो बहुत कम चलता है। एक बूंद किंग कोबरा रहे ना तो उसमें 150 लोग मर सकते हैं। तो विष और दवाओं का साधन क्या है? वीर्य से काम करते हैं। अव्यक्त रस का विष है और रस और वीर्य जो है दवा में व्यक्त होता होता रहता है। है ना? तो आपको बहुत दवा कम इस्तेमाल करने इस हिसाब से आप करते जाए। लैक्टो शुगर ले सकते हैं। गुडजी तत्व ले सकते हैं। मधु ले
41:11 सकते हैं। या सादी शक्कर जो है वह ले सकते हैं। कोई भी ले सकते हैं। और सोने का जो यह रहता है खल रहता है वो अलग ही रख दो। छोटा सा पोसिलिन कांप ले रख देना। उसमें सिर्फ सोने का करना है। तो अंदर जो पड़ी हुई दवा रहती है छोटी-छोटी वो भी काम में आना शुरू हो जाता है। फॉर एवर आप इस्तेमाल करते हैं ना। उसमें बाद में जस डाला या स्वर्णक्ष डाला मत करो। स्वर्णक्ष के बार चलेगा क्योंकि सोना नहीं मिलता। स्वर्ण इस्तेमाल करने के लिए ग्रंथ का आदेश है। फिर भी बाकी धातुओं के लिए एक अलग पोसलिंग का इमाम दस्ता और इसके लिए एक अलग ऐसा करके आप करते जाए। ये मैं जब खुद करता था वो करता था। अभी दूसरे लोगों से काम होता है ये कितना होता है पता नहीं। है ना? लेकिन मन में ये जो विचार है वो आप एग्जीक्यूट करें। पहले काम आपको ही ज्यादा करना है। आप लोग लगाए काम के लिए लेकिन
41:58 खुद आप जितना उसमें इन्वॉल्व होते जाए आपकी इच्छा शक्ति काम करेगी। आपने महा कल्याण गुरु दिया और रिजल्ट आना तय है। यह क्यों होता है? आपने खुद ने बनाया है। सेल्फ बिलीफ है और उस वक्त आपने काम किया है तो उसकी आपकी भावना उसमें आ जाती है। मैंने दे दिया तो उससे काम हो ही जाएगा। ये पक्का रहता है। है ना? महाराज [संगीत] बहुत दिन के बाद बोलने से मुझे इतनी तसल्ली मिल रही है और ये जब अष्टमी का हो गया तो मुझे लग रहा था कि कल ही मैं आज और लेक्चर दे दूं क्योंकि बहुत अच्छी चीजें है इसमें है ना
42:44 अब जितना बढ़ाता जाएंगे बढ़ता जाएगा वो यह सब आपको भी होने वाला है अगले अष्टमी से। तो देखो कितना आयुर्वेद का प्रचार प्रसार अपने आप होता होना शुरू हो जाएगा। आप हर एक के मन में थोड़ी-थोड़ी भी दवा आ गई विचार आ गए तो जो कुछ ग्रंथ हमारे नष्ट हो गए वो सब उसमें से जो विचार है वो आना शुरू ही हो जाएगा। है ना? ये इथर में रहता ही है सब जगह विचार आप सिर्फ आपको रेडियो बनना है उसको एक्सेप्ट करना है और बाद में रेडियो बजाना है ना सर सर जब हम साधना करते हैं तो कभी-कभी साधना में मतलब कभी-कभी हम डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं या तो कभी-कभी गलत पढ़ लेते हैं या तो कभी-कभी हमें गुस्सा आ जाता है तो उन सब
43:30 चीजों की मतलब माफी कैसे मांगनी चाहिए या तो फिर कैसे कंपनसेट करना चाहिए अभी क्षमापना जो रहती है ना वो पहले देखो को आई भगवती हम बोलते हैं। आई उसको प्रीफिक्स लगाते हैं। तो मम्मी चीज ऐसी रहती है वो गुस्सा नहीं होती। एक कान के नीचे लगा दी ना तो भी उठाकर फिर से चूम लेती है। है ना? तो उसको ही बोलना है। माफ कर देगी वो। नहीं तो लोग बोलते हैं ना मंत्र का जो रहता है हिस्सा वो अगर गलत तरीके से उसका उच्चारण हो गया तो वो उससे ज्यादा तकलीफें हो जाती है। तो गायत्री वगैरह का ऐसा नहीं होगा। उसको आप मां मानते गए ना तो माफ ही करेगी ना। अपने आप उच्चार अपने आप अच्छे आना शुरू हो जाएंगे। अच्छे लोगों से वह सीखना चाहिए। नेट के ऊपर वह अच्छे लोगों ने किसी ने वो पढ़ के
44:15 बताया तो वो पढ़ने चाहिए। सब लोगों का उच्चारण वहां अच्छा रहता है। ऐसी कोई बात नहीं रहती। थोड़ा सोच समझ के करना है। और कोई नहीं जो गलती करता है ना वो ही सुधर सकता है। है ना? गलतियां अच्छी है। एक ही गलती फिर से नहीं होनी चाहिए। सर ये हां दोनों बोल सर यंत्र का शरीर के ऊपर कैसा इफेक्ट करता होगा स्पिरिचुअल एनर्जी पे क्योंकि हर जगह पे यंत्र ही दिखता है जैसे कि आप मंदिर देख लो तब भी हर एंगल दिखता है एक यंत्र फॉर्म होता है स्त्री यंत्र देख लो या कोई भी यंत्र बने बराबर है कैसा है मंत्र यंत्र जो है ना उसमें अंदर शब्द भी रहते हैं यानी व्यंजन
45:03 स्वर वगैरह जो है ना उस उसका भी उसमें उल्लेख रहता है। तो कोई भी शरीर से संबंध रखने वाली ये चीज है और पिंड और ब्रह्मांड न्याय जो है ना उसकी वजह से वो तैयार किया है। अभी हमारी जो कुंडली रहती है उसमें पृथ्वी कहां है? तो वो बीच में है। है ना? वैसा शरीर में जो यंत्र का असर आ जाता है ना वह सिर्फ यंत्र का नहीं है। यंत्र और मंत्र दोनों का है और वह सिद्ध करना पड़ता है। सिद्ध जब खुद करते हैं तो उसका ज्यादा अच्छा असर आ जाता है। बाकी लोगों से अगर वो आप कर लेते हैं ब्राह्मण से वगैरह तो उसका उतना अच्छा नहीं असर आ जाएगा क्योंकि उसकी जो अच्छी चीजें और गलत चीजें उसका उसके ऊपर असर आना तय रहता है। तो मंत्र और अह यंत्र जो है
45:50 वह तंत्र की परिभाषा है। वहां से वह जानकर उसका अधिकारी जो व्यक्ति है उसे वो सिद्ध होना चाहिए और उसे वो करना चाहिए। हम ये चीजें जो पहले करते थे ना कुंडली वगैरह देखकर दवा देते थे। तो एक बार महाराज जी आ गए शनि पार के यहां हमारा दवाखाना था और उन्होंने बोला ये क्या कर रहे हैं आप? मैंने बोला कि ऐसी कुंडली वगैरह देखते हैं उस हिसाब से दवा देते हैं। तो उन्होंने बताया कि आप कौन है? मैंने बोला मैं वैद्य हूं। तो आप ये काहे के लिए कर रहे हैं? तो यह सब छोड़ दो। आपको सिर्फ आयुर्वेद का ही ज्ञान जो है ना वह लेना है। लोगों को देना है और उससे ही पेशेंट को अच्छा करना है। शनि ग्रह की विकृति है या शुक्र खराब है। नीच स्थान में वो है तो आप काहे के लिए सोचते हैं? उसके परे उनको तैयार करने वाला परमात्मा तत्व की आपको अगर अनुग्रह हो
46:35 गया, दीक्षा हो गई है तो आप बाकी चीजों का मत सोच ले। तो तब से हमने वो चीजें बंद कर दी। नहीं तो यह और ज्योतिर वैद निरंतरम बताया ना तो वैद्य है तो वैद्य का हिस्सा समझ के ही काम करना चाहिए। कोई अगर बोलता है कि हम ये यंत्र और तंत्र का मंत्र का अभ्यास करना हम चाहते हैं तो अच्छी व्यक्ति अगर कोई योग्य रहे तो उसके पास उसको भेज देना है। है ना? सर कोई ऐसा यंत्र फॉर्म हो जिसके बीच में पेशेंट भी आए तो क्या हम उसकी ऊर्जा बदल सकते हैं? हां ऊर्जा बदलना, कन्वर्ट करना, चैनलाइज करना यह आसान बातें रहती है। ऊर्जा कम हो रही है और बढ़ रही है तो कम होते वक्त बीमारी कौन सी है वो साध्य है या असाध्य है या कष्ट साध्य है या उसके
47:22 ऊपर एनर्जी का उसका जो फ्लो है वो निर्भर रहता है। जब कभी हम जन्म लेते हैं ना तो हम क्या है एक खाने का बंच है और एनर्जी का बंच है। है ना? उतनी जितनी चाबी भरी है राम ने उतना वो चलता जाएगा। वह शक्ति मेंटेन करना ही इंपॉर्टेंट है। अभी मौन करते हैं तो हमारी उदानो बल उच्चते बोलते हैं। वह बंद हो गया तो क्या हो जाएगा? एनर्जी बचेगी ना। या सांस हम लेते हैं। अभी सांप है तो 140 मिनट में एक 140 सांस एक घंटे में वो लेता है। वो बहुत कम लेता है ना। तो वह जिंदा ज्यादा रहता है। पानी के जो सांप रहते हैं वह हजार बरस तक जिंदा रह सकते हैं। कछुए का भी ऐसा ही रहता है। 500 बरस वो क्यों रहता है? सांस के ऊपर रहता है। तो सांस
48:08 धीरे-धीरे अंदर ले ली अंदर ही रुकवा दी और धीरे-धीरे बाहर निकाली। तो वो जो गैप 18 बार जो हम एक मिनट में सांस लेते हैं तो अगर हो गया तीन चार मिनट तक तो अपने आप आपकी एनर्जी बचने वाली है और मरने से बचने वाली है। है ना? इसलिए देखो ड रिपु जो होते हैं काम रहे क्रोध रहे कुछ भी रहे आपका श्वास की गति और हार्ट की गति बढ़ जाती है। यानी मरने के कतार के ऊपर आप खड़े हो जाते हैं। है ना? तो स्वास का शास्त्र क्या है? उसके ऊपर साधना क्यों करनी है? वो अगर धीरे-धीरे होता गया तो आप उसका सेल्फ रियलाइजेशन अच्छी तरह से कर सकते हैं। अभी देखो आपने एक छोटी सी बात बताता है। काल फ्लो हो रहा है आपके ऊपर से। आप बीच में बैठे हो और आपने सांस रुकवाना इस हिसाब से ही शुरू कर दिया। काल
48:54 बहता जाएगा और आप उल्टी तरफ प्रवाह शुरू कर देंगे तो आपका वह स्थापन हो जाएगा और त्रिकाल दर्शी ज्ञान जो है ना वो काल का अपने आप होना शुरू हो जाता है तो ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है सीधी सी बात है उन्होंने बताई हुई है लेकिन वो लोगों को होता क्यों नहीं काम क्रोध लोभ मत्स मन में आ गए तो आप सांस रुकवा नहीं सकते रुकाने चाहिए डीप ब्रीथिंग करने से ये सब चीजें अपने आप कम हो जाती है ना तो सांसों का ये शास्त्र है कैसा श्वास लेना है कैसा रुकवाना है कैसा छोड़ना है ना सप हां बोलो बोलो प्रणाम सर जी वो आपने बोला था अग्नि संदूक्षण जो काढ़ा है वो सुबह शाम ना देते हुए सुबह में अपन रसायन सेवन कर सकते हैं तो रसायन सेवन के लिए हम
49:42 मतलब ऐज का कैसे ध्यान रख सकते हैं मतलब कौन से ऐज में जो ग्रंथ में बताया पूर्वी मध्य में हुआ 35 वर्ष तक चलता है इधर उधर उल्टा सीधा वगैरह उसके बाद को संभाल के सुबह को रसायन शुरू करना चाहिए। और सर शराद अवस्था अगर है किसी किसी की अगर शराद अवस्था है और उसको बहुत खांसी है तो शीतोप्लादी चूर्ण दे सकता है बट उससे बहुत ज्यादा वोमिटिंग्स होती है तो फिर क्या कर सकते हैं? शीतोप्लादी से वोमिटिंग पिपली उसमें ज्यादा रहेगी है ना वो छरजना नहीं है। लेकिन उल्टी होती है और सूखी खांसी रहे तो तकलीफ हो जाएगी। गीली रहे तो उसे उल्टी से ही आराम हो जाएगा। तो हमें यहां शस का चिंतामणि का योग है वह दे दो भारंग कई दे दो श्रंग का दे दो या फिर उसमें पिपली ना देके बाकी के सारे
50:27 कंटेंट दे जब कभी सूखी खांसी रहती है या गले में ये रहता है दाह रहता है ना तो तीखी चीजें इस्तेमाल करनी ही नहीं है सिद्ध प्रकाश का कांस रोग प्रकरण आप देख लो तो उसमें ये सब चीजें आ गई है तो ये तो सिंपल सा विचार है कि वहां दाह है तो आपको स्निग्ध चीजें इस्तेमाल करनी है तीखी नहीं सिर्फ दालचीनी चटाना ज्यादा बेटर रहेगा ना दालचीनी भी तीखी रहती यष्टि ज्यादा अच्छा रहेगा। रिंगणी कल्प सबसे अच्छा वासा कल्प सबसे अच्छा। थैंक यू सर। और क्षराध अवस्था में अगर ये हो गया है तो मम्मी का दूध बिगड़ रहा है। मम्मी के यहां अगर दूध वो पीता है तो मम्मी को पहले श्वास और कास की दवा तो बच्चा अपने आप बाल कृष्णा अच्छा हो जाएगा। सर जो साधना या पूजा करते हैं तो वो उसके
51:16 बाद पूजा पूरी हुई है नहीं हुई है वो मन में ऐसी खंत रह जाती है कि मैंने ठीक किया है या पूरी भी की है कि नहीं इसलिए संस्कृत मंत्र यहां वहां रहता है कि मुझे अक्षरों का ज्ञान नहीं मंत्र का ज्ञान नहीं जो कुछ चीजें है वो मैंने इस्तेमाल कर दिए आपको पसंद है वो भी चीजें मैं नहीं ला सका इसलिए मुझे माफ कर दो बात खत्म हम ये चीजें करते थे। मम्मी डैडी गुस्सा करते थे। डैडी के सामने कुछ नहीं बोलते थे। वो कुछ भी हो गया तो ठोक ही देते थे। लेकिन मम्मी वगैरह को आने के बाद गलती हो गई ना तो पहले क्या कर दो? मेरे से गलती हो गई मां। ऐसा बोल फिर भी वो बोलना शुरू कर देना। माफी मांगी है ना काहे के लिए चिल्ला रही हो? ऐसा करते तो ऐसा भगवान के बाद भी ऐसा ही करना है। है ना? और इसलिए
52:04 पूजा कैसी करनी है? क्या करनी है? संपूर्ण चातुर्मास नाम की एक मराठी किताब है। उसमें चातुर्मास में कैसे-कैसे देव पूजे जाते हैं, क्या-क्या व्रत वगैरह रहता है वो दे दिए। तो मनोभाव से होना चाहिए। पानी सिर्फ रहे तो भी चलता है। पानी नहीं तो आंखों में तो पानी है यार। वो निकल गया तो भी वो बात पूरी हो जाएगी। है ना? तो अंदर तसल्ली होनी चाहिए। अंदर का जो देवता बाहर जो अंदर भी है ना हमारे पंचायतन जो है ना उसमें तो उसकी पूजा हो जाती है। है ना? आखरी सवाल अभी मस्तानी जो है बोर हो रही है पतली हो रही है वो सर हां आदि सुश्रुत में जो बताया गया है गर्भ जैसे तैयार होता है तो वो मां के खून के हिसाब
52:52 से या उनके जो सप्त धातु है उनके हिसाब से ही अंग प्रत्यंग तैयार होते हैं ना मृदु अवयव जो है वो मम्मी के और कठिन अवयव जो है पिता के ऐसा बता बताया और वहां रक्त ये शब्द अर्थों के हिसाब से बताया तो वो पढ़ते समय एक सोच आई थी लेकिन बाद में ऐसा माफी मांगी ऐसी सोच थी वो कि अगर रक्त को जीवन बताया गया है और आगे जाके किसी बच्चे को बच्चे को यानी प्रौढ़ अवस्था में भी अगर किसी अवयव की कर्मिनि होती है जैसे किडनी फेलर हो या कुछ हो तो मासानोमासिक के काढ़ा जो यूज़
53:39 बताए गए कि हर महीने में कौन सा अंग प्रत्यंग तैयार होता है उसकी दवा और खून की बस्ती ऐसे भी बोला गया है तो वो थोड़ा बाद में मुझे अधूरा लगा कि ये सोच बहुत ही गलत जा रही है लेकिन ब्लड ट्रांसफ्यूजन ये तो आसान है अभी उतनी मात्रा में नहीं किया लेकिन अगर दो बच्चा और मां इनका ब्लड अगर सेम ग्रुप का है। तो अगर मासानोमासिक का वो काढ़ा निकाल के जो अवयव है वहां से हम और ब्लड ट्रांसफ्यूजन चाहे वो 50 एमl हो या 100 एमएल हो तो इससे कुछ असर वैसा आ सकता है क्या? पहले तो सिरा पूर्ण करके खून देने की कल्पना जो है आयुर्वेद ने आगे बढ़ाई नहीं
54:24 है। सूचिकावरण रस वग सब बताए क्योंकि ब्लड ग्रुप का उस वक्त कुछ पता नहीं था और लोग मरे होंगे इसलिए उन्होंने वो बंद कर दिया होगा क्योंकि ग्रुप वगैरह क्रॉसिंग जो ग्रुपिंग और क्रॉस मैचिंग जो करना होता है वो अभी का शास्त्र है। लेकिन गुद बस्ती जो है वह दे सकते हैं रक्त बस्ती और कभी भी रक्त बस्ती देना है तो डेड ब्लड भी चलता है और कौन से ग्रुप का भी चलता है क्योंकि उसका एडमिनिस्ट्रेशन का रूप जो है वो एलिममेंट्री कैनल का हिस्सा है तो उसके ऊपर जागने की प्रक्रिया हो जाती है तो ओ पॉजिटिव रहे या एबी रहे कौन सा भी ग्रुप का खून हम इस्तेमाल कर सकते हैं मम्मी का कुछ भी रहे तो रिलेटिव का भी दे सकते हैं लेकिन उसमें दुर्वा का कल्क डालने के लिए बताया दुर्वा का रस तो वो जो खून है वो एसिमलाइज अच्छी तरह से हो जाता
55:11 है। अब्सॉर्ब हो जाता है और बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन देने से जैसा लीवर खराब होता है वैसा बस्ती देने से पेट और लीवर दोनों खराब नहीं होते। तो जो अतिसार विरेचन के अतियोग में या बस्ती के अतियोग में जो रक्त बस्ती आ गए वो आप इस्तेमाल कर सकते हैं। इस सोच से अच्छा विचार है। लेकिन बाद में पी ऐसा हुआ कि फिर से माकार खून निकालना पड़ेगा। हां बराबर है। वैसे तो हम माता का खून चूसते ही रहते हैं सब लोग है ना बहुत अच्छी जलोक है हम सब लोग आप एक सोच करते जाओ आप कौन सा भी बर्ताव चाहे मन का रहे या शरीर का रहे आपको व्यसन रहे सिगारेट रहे दारू पीते दूसरे लोगों को आप पिलाने के लिए उदुक्त करते हैं या गलत बर्ताव करते हैं तो आप
55:58 क्या करें रात को आपके घर पर रूम से उठना है और मम्मी डैडी के रूम में जाना है और उनके सोए हुए चेहरे की तरफ देखना है इसे बस तो आपका मन जो है ना एकदम नॉर्मल हो जाएगा और आप क्या झक मार रहे हैं तो आपके मन में विचार आ जाएगा क्योंकि आपके लिए जो कुछ चीजें उनको मिली नहीं है और कर नहीं पाए उसके लिए वो मर रहे हैं और आप क्या झक मार रहे हैं देखो ये मन में विचार आ जाता है और इससे बहुत सी आदतें छूटती है मैंने ये देखा है लोगों के ऊपर ये सोच करके देखते जाना मम्मी डैडी अलग चीज रहती है हम पहली मम्मी हम मुझे लगता है यहां जो आ गए उनमें ऐसी कोई खराबी नहीं लेकिन मैं थोड़ा सा कुछ दारू का वगरा बोलता है ना तो बच्चे लोग बहुत जोर से हंसते या बहुत अच्छा रिप्लाई दे देते हैं
56:44 मुझे तो लगता है अंदर क्या चल रहा है इनका तो मम्मी डली ये करके देख लेना और जब आप न विना विप्रलंबेन संयोगो याति पुष्टिताम ऐसा कालिदास ने सूत्र बताया है दूर रहने से प्यार बढ़ जाता है इसका सीधा सा हमारा हिंदी अर्थ मैंने बताया तो आप अभी मम्मी डैडी से दूर हो ना तो आपको ज्यादा प्यार आ जाएगा अभी ये मोबाइल वग इसलिए आप वीडियो ये कॉल वगैरह कर सकते हैं। पुराने जमाने में चीजें नहीं थी। खत जो है ना वो लिखना बहुत अच्छी अलग चीज रहती थी। बस सिर्फ मजा ही अभी जो है ना किरकिरा हो गया है। लेकिन फिर भी आप जब जाएंगे तो ये कोशिश करके देख लेना। आपकी बहुत सारी खराबियां जो है वो नष्ट हो जाएगी। सिर्फ उनके चेहरे के दर्शन से।
57:29 ठीक है। बोलो तुझा प्रश्न आता। आखिरी सवाल प्रणाम सर हैप्पी दशहरा सर थैंक यू जब कोई पेशेंट सर व्याधि को लेकर आता है तो ट्रीटमेंट देते वक्त सर उस व्याधि की कॉमन दवाई और रसायन रसायन अध्याय में जो आयु जो दवाई है इसमें जो कॉमन दवाई इसका सुबह उसको काढ़ा या चूर्ण के फॉर्म में दवाई दी जाएगी और रात को वाजीकरण अध्याय में जो दवाई आई वाली है और जो व्याधि लेकर पेशेंट आने वाला है तो उसमें की कॉमन दवाई ये दोनों में की कॉमन दवाई रात को देने के बाद जो अपनी कॉमन लाइन ऑफ ट्रीटमेंट जो है
58:17 उसमें कुछ चेंजेस दिख सकते हैं सर बीमार जब आदमी रहता है तो बंदेज रखना होता है और शुक्र का रक्षण करना है वाजीकरण द्रव्य का दो तरह से असर रहता है वाजीकरण द्रव्य के साथ अगर ब्रह्मचर्य का पालन नहीं हो गया तो दुगना तकलीफ बढ़ती जाएगी। है ना? शुक्र वृद्धि कर शुक्र श्रुति कर और शुक्र वृद्धि श्रुति कर। ऐसे तीन प्रकार के शुक्रवर्धन द्रव्य रहते हैं। है ना? अगर ऐसा है तो यह देना वाण द्रव्य नहीं देना ज्यादा अच्छा है। वैसे तो शतावरी अगर यष्टि वगैरह आ गई तो बला वगैरह आ गई तो उससे वृश्य काम होने वाला है। लेकिन अलग अगर दे दिया तो उससे अगर टेस्टोस्टरॉन बढ़ना शुरू हो गया है पुरुषों का तो उसका सेक्सुअल एक्ट शुरू हो जाएगा और वो सिर्फ सेक्सुअल इंटरकोर्स इस तरह से नहीं बताया गया है। वो अष्टविद
59:04 मैथुन बताए गए हैं। देखना, स्पर्श करना, हंसना मुस्कुराना याद करना यह सब चीज़ है ना शुक्र का स्खलन कर देते हैं पुरुषों से। वह टेस्ट से शेप से बाहर आना चाहिए। ऐसी बात नहीं है। शरीर में सब जगह शुक्र है। उसका क्षवन भी हो गया तो बीमारी बढ़ती जाएगी। इसलिए हार्ट डिसीज और स्किन के प्रॉब्लम्स। इसमें बंदे बहुत जरूरी रहता है। तो इट इज़ बेटर टू अवॉयड वजन। एक बार अच्छा हो गया तीन 11 महीने के बाद तो खाने से ही सात महीने में अपने आप शुक्र तैयार होने वाला है। फिर भी आगे बहुत थकेला आदमी है। 70 प्लस उम्र वगैरह है तो देव है ना ठीक है। चलो
59:50 अभी हम पसायदान बोलते हैं और बाद में बंद कर देते हैं। आता विश्वास देवे ये वाषवे तो वेटी सांडो तया सत्कर्मी रतिो भूता परस्परे से जाओ विश्व स्वधर्म सूर्य पावो जो ते लाो प्राणी जा सकल मंगली ईश्वर निष्ठा अनवर भूमंडलीता चला कल्प तरुण से आरव चेतना चिंतामणि से गाव बोलते चंद्र में मार्कंड देता ते सर्वा सदा सज्जन सोरे कि
1:00:39 सर्व सुखी पूर्ण हो लोकी जो आदि पुरुष अखंडित ग्रिए विशेष लोवे श्री विश्वेश्वरा आो ज्ञान देव हे हरे ज्ञान देव सुख हरे ज्ञान देव