0:00 गुड आफ्टरनून। गुड आफ्टरनून सर। मैंने आप लोगों को कहा था कि थोड़ा पढ़ के आइएगा। चेहरे से लग नहीं रहा है। पढ़े हो? सही बताओ। सही में? इकोन क्या होता है? इकोन सही में पढ़े हो? नहीं। हां। पढ़ो, पढ़ो। जरूरी है। अच्छा। मतलब मैंने इसलिए कहा था कि थोड़ा अगर पढ़ करके आएंगे तो और कुछ कुछ चीजों को वैल्यू एडिशन हम कर सकते हैं। देखिए बड़ा इंपॉर्टेंट टॉपिक है एनवायरमेंट। इंपॉर्टेंट इसलिए है कि प्रारंभिक परीक्षा में ना सेलेक्ट करने में सबसे इंपॉर्टेंट रोल प्ले करेगा ये। 1820 सवाल हैं। कंसिस्टेंट है। जैसे अगर मान लीजिए कि
0:46 लगभग आपका सिलेबस कंप्लीट होने वाला है ना। काफी सारे टॉपिक्स हो गए। पॉलिटी, इकॉनमी, हिस्ट्री, ज्योग्राफी है ना इकॉनमी का लगभग आधा लेकिन जो कोर सब्जेक्ट हैं वो लगभग लगभग कंप्लीट होने की कगार पर होंगे। है ना? एनवायरमेंट का किसी ने एनालिसिस किया पिछले पांच सालों में कितना सवाल पूछा गया प्रारंभिक परीक्षा में? जी 18 से 20 तो पिछले 5 सालों का जो एनालिसिस है उसमें 100 सवाल पूछे गए एग्जैक्ट। मतलब एनवायरमेंट ने शतक मारा है पिछले पांच सालों में। तो 20 सवालों का औसत बनता है। मतलब फाइव इयर्स का अगर हम एवरेज निकालते हैं तो 20 क्वेश्चंस का एक एवरेज निकल कर के आता है हर साल का। तो इसी से इमेजिन करें कि 20% का वजन इस टॉपिक से है। और ये जो टॉपिक है ना इसका बहुत सारा समझ आप लोगों ने ज्योग्राफी वाली क्लास में बना
1:32 लिया है। बस इसमें बहुत सारी जगह पे सूचना एकत्रित करना है। कुछ रिपोर्ट्स करने हैं। है ना? देखिए करना क्या है? कुछ बातों को बताते हैं। इंटरनेट सब इस्तेमाल करते हैं ना? है ना? तो जब भी आप कुछ पढ़ें तो कभी-कभी ऐसे-जैसे हम बैठे रहते हैं ना तो बैठे रहने की जगह जरा ऐसे एनवायरमेंट के पॉइंट ऑफ व्यू से सोचिएगा कि चलो यार आईपीसीसी का रिपोर्ट बहुत सुने हैं। आज ना आईपीसीसी का वेबसाइट खोल लेते हैं जरा और देखते हैं ये कौन-कौन सा रिपोर्ट प्रकाशित करता है। पढ़ना नहीं है। बस देखें कि ये रिपोर्ट कौन-कौन सा प्रकाशित करता है। केवल एटलीस्ट नाम ही देख लें। यूपीएससी क्या करता है? यह रिपोर्ट किस संस्था के द्वारा प्रकाशित की जाती है। यही करता है ना। ऐसे सवाल पूछे जाते। कितना आसान सा सवाल है। तो कहने का यह मतलब है एनवायरमेंट में एक तो यह करना है कि मैं कई बार आपको कहूंगा वर्ल्ड मेटोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन डब्ल्यूएमओ कई बार उसके
2:19 रिपोर्ट्स की जरूरत पड़ेगी चर्चा करते समय। तो जब ऐसे संस्था के बारे में कहूं तो उसके वेबसाइट पे जाइएगा। डब्ल्यूएमए के वेबसाइट पे और जाकर के देखिएगा कि जरा देखें कौन-कौन सी रिपोर्ट प्रकाशित करता है। पढ़ना नहीं है। मतलब यह नहीं कि हजार जैसे आईपीसीसी का रिपोर्ट है। आईपीसीसी का रिपोर्ट 3000 पन्ने का है। 3000 पेजेस का है जो उसका सिंथेसिस रिपोर्ट है कि आर्कटिक पे क्या पड़ेगा? अटलांटिक मेरीडोनल ओशेिक सर्कुलेशन पे क्या होगा? भारत पे क्या प्रभाव पड़ेगा? मानसून पे क्या प्रभाव पड़ेगा? विषुवत रेखाई जलवायु पे क्या प्रभाव पड़ेगा? ऐसे करके दुनिया भर में प्रभाव को लेकर के 3000 पन्ने छाप दिए हैं। है ना? 11 प्रकार के बायोम किए हैं ना हमने हर बायोम पे तीन-ती 400 पन्ने लिखे गए हैं आईपीसीसी ने कि विषुवत रेखाई जलवाही पे क्या प्रभाव पड़ेगा मानसूनी जलवाही पे क्या प्रभाव पड़ेगा डेजर्ट
3:05 जलवायु पे क्या प्रभाव पड़ेगा तो काफी ज्यादा है वो है ना उसके लिए मैं हूं समराइज करने के लिए क्योंकि 3000 पन्ने मैं ये नहीं कह रहा हूं कि आप नहीं पढ़ सकते हैं लेकिन केवल वहीं नहीं पढ़ना है ना वही नहीं पढ़ना है तो वो 3000 पन्ने का खंगालने का काम कर रहे हैं है ना कि जहां-जहां पर भी इंपॉर्टेंट चीजें हो सकती हैं द पॉइंट इज इज़ कि बहुत सारे रिपोर्ट होंगे। बस आपको जाकर के नाम देखना है। पिछले पांच सालों के जब सवाल देख रहा था तो मैंने देखा कि यार कुछ रिपोर्ट पूछ लिया। सिंपल-सिंपल सा ये रिपोर्ट किसके द्वारा? वो रिपोर्ट किसको दो किसके द्वारा? कितना याद करेंगे? उसकी जगह इंटरेस्ट बनाए कि हफ्ते दिन 10 दिन में 15 20 मिनट के लिए स्क्रॉल करना शुरू करें। जो मन में आए नाम सुने यूनाइटेड नेशन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज। जरूर उसका वेबसाइट होगा। उसके वेबसाइट पे चले जाएं। जाकर के देखें कि करता क्या है।
3:51 है ना? डब्ल्यूएमओ का नाम सुने। डब्ल्यूएमओ के वेबसाइट पे चले गए। आईपीसीसी का नाम सुने हैं कि यार यह रिपोर्ट हमेशा ये इसकी बात होती रहती है। तो चलो आज उसके वेबसाइट पे चले जाते हैं। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का नाम सुने हैं। चलो मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल की वेबसाइट पे चले जाते हैं। आज देखते हैं कि ये करता क्या है? कौन-कौन से रिपोर्ट प्रकाशित करता है? क्या बातें कह रहा है। मतलब पढ़ना नहीं है। बस उसके रिपोर्ट्स देखने हैं। क्लियर है? मतलब उत्सुकता जगाना है अंदर से। तो जो पर्यावरण का टॉपिक है उसमें लगभग जो औसतन अगर हम प्रारंभिक परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से बात करें तो 100 सवाल है। मुख्य परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से पिछले तीन सालों का क्या औसत होगा? क्या लगता है? लगभग कितने सवाल हो? तीन क्वेश्चन। पिछले तीन सालों में 19 सवाल पूछे गए। 19
4:37 क्वेश्चंस। क्लियर है? तो इसका मतलब है कि मुख्य परीक्षा में भी इसकी महत्ता है। है ना? अब वजन उसमें से दो-तीन सवाल शॉर्ट नोट्स के हैं और बाकी अपेक्षाकृत बड़े वाले सवाल हैं। लेकिन द पॉइंट इस कहने का यह मतलब है कि 20 सवालों में से मान के चल कि अगर तीन सालों में 18 19 का औसत हो गया तो छह सवालों का औसत हो गया ना। आपदा प्रबंधन अभी बचा ही हुआ है। उससे भी एक दो सवाल आएंगे। इसका मतलब है कि जो पेपर थ्री का टॉपिक है उसमें एनवायरमेंट एक अच्छा खासा रोल प्ले कर रहा है। तो केवल प्रारंभिक परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से नहीं पेपर थ्री में भी अच्छा परफॉर्म करना है तो एनवायरमेंट की अच्छी समझ होनी चाहिए। क्लियर है? तो आगे जैसे-जैसे क्लासेस बढ़ेंगी मैं कुछ सवाल आपके सामने रखूंगा। लेकिन आज मैं चाहता हूं कि माइंड में किसी
5:23 भी प्रकार का कोई दुविधा ना रहे। और दुविधा ना रहे तो मैं आपके सामने कुछ सवाल रखूंगा। कुछ सवाल का मतलब है जो पिछले 3 साल 4 साल में यूपीएससी ने सवाल किया है। प्रारंभिक परीक्षा का नहीं प्रारंभिक परीक्षा का 100 सवाल है तो बीच-बीच में लेते रहेंगे वो सवाल मुख्य परीक्षा का ताकि आपको समझ में आए कि यार जो सवाल पूछ रहा है ना ये सवाल का प्रकृति क्या है मतलब स्टैटिक सवाल है करंट का सवाल है मतलब कैसे सवाल है ताकि हमारा एक आईडिया बन जाए कि एनवायरमेंट को लेकर के हमारी रणनीति क्या होनी चाहिए केवल स्टैटिक पार्ट पढ़ें करंट अफेयर्स भी पढ़ें है ना जनरली जो हम हर महीने करंट अफेयर्स एनवायरमेंट की क्लास करते हैं क्या उससे सवाल आ रहे हैं नहीं आ रहे हैं तो अगर मैं आपके सामने सवाल रख दूं तो सारे करंट अफेयर्स के मैगजींस पिछले तीन सालों के विज़न आईएस के वेबसाइट पे जाएंगे तो उसमें
6:08 मिल जाएगा ना। है ना? तो बड़े आराम से आप देख सकते हैं। अंदर नहीं देखना है। सिर्फ जो कंटेंट वाला पेज है ना उसमें भी जाएंगे तो आप देख सकते हैं कि यार इस टॉपिक का सवाल कवर हुआ था या नहीं हुआ था। उतना मेहनत नहीं करना चाहते तो मेंस 365 का ही निकाल लीजिए। एक पन्ना नहीं तो तीन पन्ने हो जाएंगे। 2020, 21, 22 है ना इन या 2023 इन तीन-चार सालों का केवल पहला कंटेंट निकाल करके देखें कि क्या करंट अफेयर्स के जो सवाल करंट अफेयर बेस्ड पर्यावरण के सवाल जो पूछे गए हैं क्या उसका कवरेज हो पा रहा है या नहीं हो पा रहा है। अगर हो पा रहा है तो दुविधा नहीं रहेगी। यानी कि जो मेंस 365 या जो हमारा मंथली मैगजीन है अगर उसको हम अच्छे तरीके से कवर करें तो मान लेते हैं कि 19 में से 19 नहीं आएगा 17 आएगा। 18 आएगा। कहने का ये मतलब है एक आध एक्सेप्शन लेकर के चलना चाहिए कि हो
6:55 सकता है कोई बाउंसर हो लेकिन वो तो सबके लिए होगा। है कि नहीं? अब उस एक सवाल को लेकर के चाय पीते-पीते कहीं चर्चा करें कि यार वो सवाल नहीं था विज़न के मैगज़ीन में। है ना? 18 की चर्चा नहीं हो रही है। चर्चा हो रही है एक सवाल की। और वो सवाल ना वहां पर था। अब वो सवाल वहां पर था। हो सकता है कि वहां पर बाकी के 15 सवाल ना हो। तो हमारा क्या होगा? ओरिएंटेशन डिस्टोर्ट हो जाएगा। हमको देखना है कि मेजॉरिटी ऑफ द क्वेश्चंस आ रहे हैं कि नहीं। एक्सेप्शन से हमारा रणनीति नहीं बनता है। हमारा रणनीति बनता है मेजर क्वेश्चन से। जो मुख्यत जो जितने भी सवाल हैं उसका स्रोत हमारे साथ एलाइन होना चाहिए। है कि नहीं? कि एक सवाल के लिए नहीं ना? तो कहने का ये मतलब है द पॉइंट इज़ कि ये खुद से जांचे। इसलिए मैंने यहां पर आपको फर्स्ट डे में पिछले तीन सालों के सवाल रखे हैं। आप चाहे
7:42 तो इस टॉपिक को एक्सप्लोर कर सकते हैं, देख सकते हैं, समझ सकते हैं और उसके बेसिस पे एक बेहतर रणनीति बना सकते हैं। क्लियर है? तो आज की क्लास में थोड़ा सिलेबस पे चर्चा भी होनी चाहिए साथ में। तो एक तो सवाल दूसरा थोड़ा सा सिलेबस की एक समझ होनी चाहिए कि करना क्या है हमको? 18 20 जो क्लासेस हमारे पास हैं उसमें हम करें क्या? किस तरीके से एनवायरमेंट के क्वेश्चंस को या एनवायरमेंट के टॉपिक्स को एप्रोच करें। है कि नहीं? और उसके बाद फिर एक बेसिक कांसेप्ट के साथ शुरुआत करेंगे। देखिए ये जो नोट्स है ना आपके हाथ में अब जैसे मान लेते हैं सपोज करिए कि विभिन्न कांसेप्ट्स की चर्चा करनी है और विभिन्न कांसेप्ट्स की चर्चा करनी है तो उदाहरण चाहिए होंगे ना। नहीं बिना एग्जांपल्स के तो नहीं समझ में आएगा। या केवल अगर हम केवल याद करने की कोशिश करें वो भी रणनीति ठीक नहीं है कि कहीं समझ
8:28 वाले सवाल आ जाए तो फिर फंस जाएंगे क्योंकि जितना याद करके गए हैं उसके बेसिस पे हो सकता है कि समझ उतनी विकसित ना हो। है कि नहीं? तो समझ भी बनानी है। उदाहरण भी हमको चाहिए। और उदाहरण कौन से चाहिए? अभी हाल-हाल के। है ना? 10 11 12 महीने में कुछ इंपॉर्टेंट स्पीशीज अलग-अलग जो न्यूज़ में है उसकी हमको समझ बनाते रहनी चाहिए। जैसे हमको करना क्या है? कई बार आप न्यूज़पेपर्स पढ़ते हैं ना। न्यूज़पेपर्स पढ़ते हैं तो कई बार कुछ स्पीशीज का नाम आता है कि यार किसान को ना बड़ा लॉस हो गया। इनवैसिव स्पीशीज नहीं कहते हैं कि खरपतवार कोई उग आया और बेचारा काट काट के परेशान है। है ना? या अपेक्षाकृत बीजों का इतनी तेज गति से प्रसार होता है कि उसको बार-बार उसकी कटाई करनी पड़ती है और न्यूट्रिशन को लेकर के वो कमपीट करता है तो उसका उपज बहुत कम हो जाता है। तो
9:15 समय-समय पे ऐसे बहुत सारे इनवेजिव स्पीशीज न्यूज़ में रहते हैं। सपोज़ करते हैं तो हमको समझना पड़ेगा कि यार ये फैलते क्यों हैं? ये हमारे देश के जो पेड़-पौधे हैं बेचारे उनके साथ कमपीट क्यों नहीं कर पाते? यह बहुत जल्दी से फैल जाते हैं। और बाकी जो यहां का खुद का है इनवेसिव का मतलब है कि भारत का नहीं है। उस क्षेत्र का नहीं है। कहीं और से आया है और कहीं से और से आकर के वो फैल रहा है। और जो बेचारे खुद यहां के हैं वो विस्तार नहीं कर पा रहे हैं। तो डेफिनेटली कुछ मामले उनसे बेहतर होगा। तभी एक्सपेंड कर रहा है वो स्पीशीज। नहीं अगर एक्सपेंड कर रहा है उसके कुछ महत्व हो तब तो अच्छी बात है। और अगर संकट हो तो इन्वेसिव स्पीशीज हो जाएगा। प्रॉब्लम होगा। विभिन्न प्रकार के प्रॉब्लम्स क्रिएट हो सकते हैं। तो समय-समय पे बहुत सारी चीजें न्यूज़ में रहती हैं। जैसे आप लोग कई बार पढ़ रहे होंगे आर्कटिक आइस पिघल रहा है। पिघल रहा
10:00 है। हम लोगों ने देखा भी चर्चा भी किया हुआ है ज्योग्राफी वाली क्लास में अटलांटिक मेरडोनल ओशियनिक सर्कुलेशन। अब तो बहुत विस्तार से चर्चा करेंगे। क्लाइमेट चेंज जलवायु परिवर्तन का टॉपिक होगा तो। लेकिन एक बात तो तय है ना कि आर्कटिका बर्फ पिघल रहा है। अब आर्कटिका बर्फ पिघल रहा है तो जरा सोच करके देखें। बैक्टीरिया और फंगस जो होते हैं वह लंबे समय तक सोए रह सकते हैं। मतलब अपने आप को स्टैंड स्टिल कर लेते हैं। इनक्टिव कर लेते हैं। और जब बेहतर जलवायु आता है दोबारा से एक्टिवेट कर लेते हैं। तो जब आर्कटिक का बर्फ पिघलेगा तो बैक्टीरिया भी तो फ्री होंगे। नहीं होंगे? वायरस भी फ्री होंगे। और बैक्टीरिया और वायरस फ्री होंगे। तो जहां-जहां पर भी बैक्टीरिया मतलब जहां-जहां से भी आर्टिक बर्फ पिघल गया है, वहां घास-वास सूख गया आया है, उस घास के साथ बैक्टीरिया क्या करेगा? अपने आप को रिलेट कर लेगा। रिलेट करेगा तो ऐसा
10:48 बहुत सारा क्या होगा? वायरल और बैक्टीरियल इनफेक्शन होगा। एंथ्रेक्स का नाम सुने हैं? नाम सुने होंगे। एंथ्रेक्स एक बैक्टीरिया है। वायरस नहीं है। है ना? एक बैक्टीरिया है और बहुत ही डेंजरस बैक्टीरिया है। अगर वो हमारे शरीर में एंटर कर जाता है तो शरीर में ब्लैक ब्लैक कलर के धब्बे पड़ने लग जाते हैं। सेल्स वहां से डैमेज मतलब ब्लैक का मतलब है जैसे स्या हो जाता है जैसे कोई चोट नहीं लगता है तो स्याह रंग हो जाता है। तो सेल डैमेज करना शुरू कर देता है। आदमी धीरे-धीरे करके गुजर जाता है। है ना? यह हमारे फूड चेन का हिस्सा बन सकता है। बैक्टीरिया कैसे? हो सकता है गाय जाकर के उसको चरे घास को। उसके साथ बैक्टीरिया उसमें एंटर कर गया। फिर उसके थ्रू वो फूड चेन का हिस्सा बना तो हमारे अंदर एंटर कर गया या हम उसके कांटेक्ट में आए वो छींक
11:33 रहा है खांस रहा है गाय है ना या उसका जो भी लार्वा है उसके कांटेक्ट में आए उसके थूक के कांटेक्ट में आए कंटैमिनेट हुए हमारे शरीर में एंटर हो गया फूड चेन फूड वेव का हिस्सा बन सकता है कि नहीं तो इसका मतलब है कि बहुत सारे उदाहरण जो करंट के पॉइंट ऑफ व्यू से हैं उसको भी हमको विभिन्न कांसेप्ट्स के साथ जोड़-जोड़ करके लेना पड़ेगा तो मैं आपके साथ बहुत सारे एग्जांपल्स की चर्चा करूंगा और वो जो कंटेंपरेरी और रेलेवेंट है क्योंकि बहुत सारे सवाल ऐसे हैं जो प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए हैं जो सूचना आधारित थे। यानी कि करंट में कोई पर्टिकुलर स्पीशीज न्यूज़ में था। अच्छे कारणों से बुरे कारणों से है ना उसको लेकर के यूपीएससी ने पूछ लिया। उसके कैरेक्टरिस्टिक्स के बारे में पूछ लिया। अच्छा है, खराब है, क्या करता है? भूमिका क्या है? कहां रहता है? है ना? कहां से ग्रो किया? अलग-अलग चीजों के बारे में किस भौगोलिक क्षेत्र में निवास करता
12:20 है? ऐसे बहुत सारे सवाल पूछता है। तो ऐसे में हमको स्पीशीज मालूम होने चाहिए। फंगस बैक्टीरिया से लेकर के व्हेल मछली तक व्हेल पृथ्वी का सबसे बड़ा प्राणी तो उसके बीच में जो भी एयर है, वाटर है, लैंड है, है ना? उस पे जो भी विभिन्न प्रकार की स्पीशीज पिछले एक डेढ़ सालों में न्यूज़ में है, उसकी भी एक समझ अलग-अलग एग्जांपल्स के माध्यम से होनी चाहिए। क्लियर है? तो इन सब चीजों को इंक्लूड करना है। इन सब चीजों की एक समझ बनाते हुए आगे बढ़ना है। शुरू में जो क्लासेस होंगी शुरू में थोड़ा सा पेस स्लो रहेगा ताकि जो कांसेप्ट कांसेप्ट वाले टॉपिक है ना वो अच्छे हो जाए क्योंकि उन कांसेप्ट वाले शब्दावली का बार-बार इस्तेमाल होगा फिर आगे है कि नहीं? तो एक बार अगर कांसेप्ट अच्छे से बन गया उसके बाद तो फिर आसान है। पोलशन है, प्रदूषण है, वेस्ट मैनेजमेंट है, क्लाइमेट चेंज है। सब अप्लाइड टॉपिक है। बड़े आराम से उसको कर लेंगे। लेकिन
13:06 अगर मान लेते हैं कि इकोन नहीं समझ में आया। इकोलाइन समझ में नहीं आया है ना? कैरिंग कैपेसिटी का कांसेप्ट नहीं समझ में आया। मान लेते हैं पोटेंशियल नहीं समझ में आया किसी एक पर्टिकुलर प्राणी का या जो भी उससे जुड़े हुए इकोलॉजिकल फूड पिरामिड फूड चेन के जो कांसेप्ट्स हैं अगर वो बेहतर नहीं बने तो जैव विविधता की चर्चा अच्छे से नहीं हो पाएगी। तो जैव विविधता का एक पूरा टॉपिक ही है जिसमें वैश्विक रूप से भारत के द्वारा क्या प्रयास किए जा रहे हैं। भारत में जैव विविधता को लेकर के जो भी हॉटस्पॉट का बायोडायवर्सिटी का कांसेप्ट यूनेस्को का जो नेचुरल हेरिटेज साइड का कांसेप्ट है वो तो बहुत आसान सा है वो तो सूचना ही है। लेकिन उस जैव विविधता के लिए अल्फा, बीटा, गामा डायवर्सिटी के लिए हमको विभिन्न तरीके से कुछ कांसेप्ट्स फूड चेन, फूड वेव की समझ होनी चाहिए। कोई एक क्षेत्र है। ऐसे सोचें कि कोई एक क्षेत्र है उसमें घास खाने वाला
13:53 एक प्राणी है। हिरण है। हिरण को खाने वाला शेर है। मान लेते हैं। बस दो ही है। उस जंगल में जैव विविधता ज्यादा है कि कम है? कम। और अगर तीन चार चैन हो तो ज्यादा हो। और हिरण के साथ-साथ और विभिन्न प्रकार के लोग घास खाने वाले हो तो और भी ज्यादा कॉम्प्लेक्स और भी ज्यादा डायवर्स होगा। तो इसी को अल्फा, बीटा, गामा डायवर्सिटी के नाम से जाना जाता है। तो इसको समझने के लिए थोड़ा जैव विविधता का कांसेप्ट समझना पड़ेगा। है ना? तो अच्छे से उसको समझेंगे। उसके बाद फिर उससे जुड़े हुए जो भी सूचना है कि वैश्विक स्तर पर क्या प्रयास हो रहे हैं, सार्थक है, नहीं है, यही सब तो करना है। उसको देखते हुए चलेंगे आगे। देखिए ये जो डायग्राम है या आप ये जो आप सामने इमेज देख रहे हैं, कुल मिला के है एनवायरमेंट। यही। इसके अलावा एनवायरमेंट
14:38 है नहीं कुछ। हमको कहां से कहां तक पढ़ना है? हमको एक पर्टिकुलर इंडिविजुअल उसकी विशेषताओं उसके कैरेक्टरिस्टिक्स लेकर के यह जानवर जब एक पापुलेशन यानी कि एक कम्युनिटी बना लेता है अपना एक पर्टिकुलर स्पीशीज तो पॉपुलेशन हो जाएगा। जब ऐसे बहुत प्रकार के जानवर हो जाएंगे विभिन्न प्रकार के और एक जंगल में रह रहे होंगे। एक जगह क्षेत्र विशेष में रह रहे होंगे तो कम्युनिटी हो जाएंगे। और वही कम्युनिटी लार्ज स्केल पे इकोसिस्टम होगा। वही इकोसिस्टम एक पूरे भौगोलिक क्षेत्र में बायोम का कांसेप्ट कहलाएगा और विभिन्न बायोम को मिला लिया जाए तो बायोस्फीयर हो जाएगा। बायो मतलब जीवन का स्फीयर। क्लियर है? तो यहां से यहां तक जाना है। है कि नहीं? इन्हीं विशेषताओं के बारे में तो पढ़ना है। इंडिविजुअल के कुछ एग्जांपल्स देखने हैं। पॉपुलेशन का कुछ
15:24 कैरेक्टरिस्टिक्स देखना है। कम्युनिटी का इकोसिस्टम का। बायोम का 11 प्रकार का बायोम होता है। इकोसिस्टम में क्या होता है? लैंड, वाटर यही होता है मेनली। उसके बारे में पढ़ना है। है ना? कि विभिन्न प्रकार के इकोसिस्टम्स होते हैं। उनके विशेषताएं क्या होती हैं? फूड चेन इसी में फूड चेन, फूड वेव क्या होता है? इन्हीं सब कांसेप्ट्स को समझना है कुल मिलाकर के। तो ये सब तो अप्लाइड पार्ट है। मतलब अपेक्षाकृत इंटरेस्टिंग एरिया है। इसके साथ-साथ अगर हम देखें तो ओवरऑल जो एनवायरमेंट का सिलेबस डिजाइन किया है यूपीएससी ने बड़ा शानदार किया है। मतलब आपसे एक अच्छी समझ का डिमांड करता है और जो इसमें आप पढ़ेंगे ना उसको आप जीवन पर्यंत इस्तेमाल करने वाले हैं। यानी कि फ्यूचर में जब आप ब्यूरोक्रेट बनेंगे, जमीनी स्तर पर काम करेंगे तो पर्यावरणीय नियमों को लेकर के जो चेतना आपकी होगी वो बेहतर होगी। क्योंकि आज का जो समय है या
16:12 आप कह सकते हैं जो प्रदूषण का स्तर है उसमें लगातार एनवायरमेंटल कंसर्न्स जो है वो सुपीरियर है। यानी कि हमारी प्लानिंग प्रोसेस का इंटीग्रेटेड पार्ट है। तो जो सिलेबस जिस तरह से डिजाइन किया गया है वो आज ही नहीं सिलेक्ट होने के बाद भी आपको लगातार मदद करेगा। यूपीएससी के सिलेबस में बात लिखा गया है ऐसे कंजर्वेशन। कंजर्वेशन मतलब संरक्षण। मैंने जानबूझकर के इंग्लिश का सिलेबस आपके सामने रखा है। इसलिए रखा है कि पर्यावरण में बहुत सारी शब्दावली जो हिंदी में है ना उसमें एक ही चीज का ट्रांसलेशन या पर्यायवाची कह सकते हैं कि बहुत सारा है। तो कई बार बहुत क्लिष्ट शब्दों का इस्तेमाल सवाल बनाते समय यूपीएससी करता है पर्यावरण में। तो ऐसे में इंग्लिश का जो शब्द है ना सबका वो कॉमन है। कि कितना भी पर्यायवाची शब्द का इस्तेमाल करें लेकिन इंग्लिश का एक ही शब्द इस्तेमाल करेगा। तो हमारा झिझक नहीं
16:58 होना चाहिए थोड़ा सा कि कोई भी एक शब्द है हिंदी में उसका इंग्लिश मतलब भी हमको थोड़ा मालूम होना चाहिए। किस लिए कि इन केस हमको कांसेप्ट मालूम है लेकिन जो पर्यायवाची शब्द का इस्तेमाल यूपीएससी ने किया हो सकता है कि वो शब्द एग्जैक्टली आपको ना मालूम हो और नहीं मालूम हो तो आते हुए भी सवाल नहीं कर पाए। क्यों? क्योंकि कंफ्यूजन रहेगा। तो ऐसे में कई बार क्या करिएगा कि जब भी ऐसा कंफ्यूजन एग्जामिनेशन हॉल में हो तो वहीं पर हिंदी के साथ-साथ इंग्लिश में भी लिखा होगा। जो शब्द ना समझ में आए इमीडिएटली उसको इंग्लिश में जाकर के देखें ताकि वो क्लिक कर जाए। क्लियर है? तो यहां पर सिलेबस को इंग्लिश में रखने का एक अपना तर्क है ताकि झिझक आपका खत्म हो जाए। जैसे-जैसे सिलेबस कंप्लीट होगा आप इन सब शब्दों को खुद ही हिंदी में बोलना शुरू कर देंगे। इसका मतलब यह होता
17:43 है। इसका मतलब यह होता है। इसका मतलब यह होता है। देखिए यूपीएससी ने जो सिलेबस कहा है कंजर्वेशन संरक्षण करना है। संरक्षण किसका करना होगा? इंडिविजुअल का। प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट, प्रोजेक्ट राइनो है ना? यही करना होगा पापुलेशन का गिर का नेशनल पार्क में कहीं अगर शेर गुजर गए तो एशियाटिक लाइन खत्म तो उसको रीोकेट करते हैं कहीं और पर है ना तो इसके बारे में पढ़ना। संरक्षण किसका? इंडिविजुअल का, पॉपुलेशन का, कम्युनिटी का। कम्युनिटी के लिए नेशनल पार्क का कांसेप्ट, बायोस्फीयर रिजर्व का कांसेप्ट कि उस पूरे कम्युनिटी जो उस क्षेत्र में निवास कर रहा है, उसको संरक्षित किया जाए। बायोस्फीयर रिजर्व का कांसेप्ट निकल के आया। नेशनल पार्क का कांसेप्ट निकल कर के आया। है ना? वाइल्ड लाइफ सेंचुरी का कांसेप्ट निकल कर के आया। उसी के बारे में चर्चा करना है। इसी से इकोसिस्टम बनता है।
18:31 समुद्र का इकोसिस्टम, पानी का इकोसिस्टम तो पानी दो प्रकार का होगा। मीठा और खारा। है कि नहीं? तो मीठे पानी का इकोसिस्टम अलग होगा। खारे पानी का अलग हो सकता है। जमीन में भी अलग-अलग प्रकार के होंगे। है कि नहीं? जमीन का मतलब है कि कहीं खूब वर्षा हो रही हो, कहीं कम वर्षा हो रही होगी। तो जो सूखा ग्रस्त क्षेत्र होगा, उसका इकोसिस्टम अलग होगा। वहां पर जो जीव-जंतु रहेंगे उनका एडप्शन एडप्टेशन प्रकृति के साथ अलग होगा। नहीं होगा कि नहीं होगा? अलग-अलग होगा। ऊंट बेचारा 15 दिन में एक बार पानी पीता है। क्यों? उसको मालूम है कि नहीं मिलेगा पानी। जब मिलता है भर लेता है पेट। अगर विषुवत रेखाई क्षेत्र में होता तो 15 दिन में एक बार पानी पीता क्या? उसको मालूम होता कि यार हर दिन पानी मिलेगा। है ना? तो उसका एडप्टेशन ऐसा है। है ना? कि बिना पानी के लंबे समय तक रह सकता है। हम नहीं रह सकते।
19:18 लेकिन जो सूखाग्रस्त क्षेत्र में लोग रहते हैं उनकी एडप्टेबिलिटी हमसे ज्यादा बेहतर है। है ना? ध्यान है अलग-अलग प्रकार के तोरे याद है? नीले रंग का टरबन लगाते हैं। नीले रंग का कपड़ा पहनते हैं। पूरा शरीर ढक करके चलते हैं। जितने भी मरुस्थलीय क्षेत्र में होंगे वो पूरा तन ढक करके चलते हैं। क्यों? वाष्पीकरण को रोका जा सके। और हम जाएंगे तो हमको लगे यार बड़ा गर्मी वाला क्षेत्र है। वह इतनाइतना वाला टीशर्ट पहन लेंगे। हाफ पेंट पहन लें और एोपो ट्रांस्पिरेशन होगा। हम तो यही सोचेंगे ना हम तो यही सोचेंगे। नहीं तो ये एडप्टेशन है। कल्चरल एडप्टेशन है। हमको लग रहा है गर्मी तो हमने वो किया लेकिन उनको मालूम है किसी स्थिति से वाष्पीकरण या एोगो ट्रांस्पिरेशन ज्यादा होगा। तो सरफेस एरिया को रिड्यूस करो तो
20:06 ऊपर कपड़ा डाल लेते हैं। जितना ज्यादा तन ढक सकते हैं ढक लेते हैं। उससे भले ही थोड़ी सी गर्मी महसूस होगी लेकिन ओवरऑल हम कह सकते हैं कि एोप या एोपोट ट्रांसिशन की तरह अपेक्षाकृत कम हो जाए। तो एडप्टेशन है अलग-अलग प्रकार का। तो यहां पर यूपीएससी ने जो सवाल रखा या जो सिलेबस रखा उस सिलेबस में जो पहला शब्द रखा वो था संरक्षण या कंजर्वेशन। बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है। और क्लाइमेट चेंज के संदर्भ में तो सबसे इंपॉर्टेंट टॉपिक है संरक्षण। नहीं। बार-बार पढ़ेंगे, हर जगह पढ़ेंगे। हर जगह हर चीज को चिंता है। क्या मानव हो, क्या जानवर हो। हर लोगों को संरक्षण की जरूरत है। जो तटीय क्षेत्र में उनको अलग प्रकार के संरक्षण की जरूरत है। है ना? अलग प्रकार का इरोजन हो रहा है। चक्रवात मजबूत हो रहे हैं तो उनको भी उससे
20:53 संरक्षण की जरूरत है। जो ब्रह्मपुत्र नदी की घाटी में उनको अलग प्रकार के संरक्षण की जरूरत है। जो राजस्थान के क्षेत्र में उनको अलग प्रकार के संरक्षण की जो पर्वतीय क्षेत्र में लैंडस्लाइड हो जाता है। है ना? अलग-अलग प्रकार से संरक्षण कहीं पर मृदा का संरक्षण करना है, कहीं पर पानी का संरक्षण करना है। कहीं पर जमीन जो है वह पानी में डूब रहा है तो वहां पर उसको बचाना है कि वो जमीन में या सी लेवल के नीचे ना चला जाए। नीदरलैंड्स उसमें बेहतरीन काम कर रहा है। चर्चा करेंगे। अलग-अलग प्रकार से संरक्षण करना है। ऐसा कोई भी जलवायु कटिबंध नहीं है जहां पर संरक्षण की जरूरत नहीं पड़े। आर्कटिक का क्षेत्र तेज गति से पिघल रहा है। बेचारे भालू का क्या होगा? आर्कटिक तो महाद्वीप तो है नहीं ना। जिस दिन पानी पिघला बेचारा डूबेगा या तो माइग्रेट करे कनाडा वनानेडा की तरफ ग्रीनलैंड का जगह खोज ले और कहीं
21:39 समुद्र के बीच में रह गया और इतना छोटा साइज रहा तो कुछ समय के बाद तो डूब जाएगा तो बेचारा वो अलग परेशान है नहीं संरक्षण एक इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है लगातार इसकी चर्चा करेंगे इसी में पर्यावरणीय प्रदूषण है ना एनवायरमेंटल पोलशन उसमें एयर पोलशन लैंड पोलशन वाटर पोलशन ये महत्वपूर्ण टॉपिक्स हैं इसकी चर्चा मतलब कुल मिलाकर के ये तीन-चार शब्दों में ना यूपीएससी ने कहा कि भैया देखो यह एनवायरमेंट है। अब देख लेना आप है ना इसको अगर हम डिकोड करेंगे तो एक जो बात निकल के आती है जो यूपीएससी ने पिछले कुछ समय में सवाल पूछा वो है बेसिक समझ या ये इकोलॉजी क्या है ना इकोलॉजी का कांसेप्ट क्या है तो इसके कुछ कांसेप्ट्स के बारे में विस्तार से समझना पड़ेगा इसको समझने के लिए इकोसिस्टम का कांसेप्ट समझना पड़ेगा उसमें जो भी जैविक
22:25 और जैविक और अजैविक फैक्टर्स हैं उसको समझना पड़ेगा कोई भी इकोसिस्टम स्थाई नहीं होता है डायनेमिक होता है और डायनेमिक कौन बनाता है पवन वर्षा है ना वहां का सोॉइल वहां का तापमान वहां की सापेक्षिक आद्रता ये क्या होंगे एबायोटिक फैक्टर्स होंगे कोई एक जगह एक जंगल है जरूरत से ज्यादा अगर संख्या बढ़ जाए तो किसी एक पर्टिकुलर पापुलेशन का जंगल डिक्लाइन करने लगे तो जो इकोसिस्टम है वो डायनेमिक है बहुत तो डायनेमिक फैक्टर दोनों ही है बायोटिक मतलब जैविक और अजैविक जो फैक्टर्स हैं वो लगातार गतिमान है डायनेमिक है स्थिर नहीं है एक जैसे से नहीं है। तो यहां पर ऐसे कुछ बेसिक कांसेप्ट्स को समझेंगे इकोसिस्टम के संदर्भ में। ये आपका पहला टॉपिक है। इसके बाद वही दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के
23:10 इकोसिस्टम्स हैं। जैसे ऐसे समझते हैं। हमने पुलिकट लेक देखा था ना पुलिकट, चिल्का झील, मेमनाार्ड लेक ऐसे कुछ हम लोगों ने देखा था। एक ऐसा क्षेत्र है जहां खारा पानी मीठा पानी मिल रहा है। तो एक तरफ जमीन है, एक तरफ समुद्र है और दोनों के बीच में एक उनका संगम है। जहां पर खारा पानी और मीठा पानी मिल रहा है। यह खारे पानी और मीठे पानी का जहां संगम हो रहा है, यहां पर जो जीव-जंतु रहते होंगे, यह संभवतः यह संभवत यहां जो रह रहे होंगे, इनमें से बहुत सारे जीव-जंतु ना जमीन पर रह पाते होंगे और इनमें से बहुत सारे जीव-जंतु ना खारे पानी में अत्यधिक खारे पानी में रह पाते होंगे। उनको एक ऐसा हिस्सा चाहिए होगा जो ना बहुत ज्यादा खारा हो ना बहुत ज्यादा मीठा हो। एक यूनिक प्रकार का इकोसिस्टम विकसित होगा कि नहीं?
23:56 है ना? तो इसका मतलब है कि मान लेते हैं पानी में है तो वाटर वाला एक्वेटिक इकोसिस्टम है। लैंड पे आएगा तो लैंड का और उन दोनों के बीच का एक ट्रांजिशनल एरिया। ना पूरी तरह से जमीन है ना पूरी तरह से पानी। ऐसा हो सकता है कि साल के कुछ महीनों में पानी भर जाए उस क्षेत्र में। साल के कुछ महीनों में पानी ना भरा हो। है ना? देखेंगे इसी को इकोन का कांसेप्ट कहा जाता है। विस्तार से इसको समझेंगे। तो यहां पर विभिन्न प्रकार के इकोसिस्टम्स हो सकते हैं। उसमें से एक टेररिस्ट्रियल टेरिस्ट्रियल मतलब जो जमीन पे है। एक्वेटिक मतलब पानी में है। है ना? चेंजज़ इन इकोसिस्टम में इन दोनों के बीच का एक ट्रांजिशनल एरिया हो सकता है। क्या टेररिस्टियल और एक्वेटिक इकोसिस्टम में कोई बदलाव हो रहा होगा कि एक जैसा ये होगा। क्या लग रहा है? प्रवाल भित्तियां गुजर नहीं रही होंगी। विरंजन नहीं हो रहा होगा? और प्रवाल विरंजन होगा तो जो
24:43 समुद्री इकोसिस्टम है पानी के नीचे का इकोसिस्टम है क्या उसमें बदलाव होंगे पॉजिटिव होंगे नेगेटिव होंगे उसका क्या प्रभाव होगा ये सब देखना पड़ेगा समझेंगे इसको अब उनका संरक्षण कैसे करें है ना क्या इकोलॉजी और इकॉनमी के बीच में क्या एक द्वंद हो सकता है क्या इकोलॉजी इकॉनमी को भी प्रमोट कर सकता है ना तो इसको भी समझना पड़ेगा इसको भी देखना पड़ेगा फिर पॉपुलेशन का एक कैरेक्टरिस्टिक है जैसे आपके सामने बात रखते हैं है ना ग्रोथ ग्रोथ पोटेंशियल मान लेते हैं एक खरगोश है और एक हाथी है। एक साल के बाद दोनों की जनसंख्या समान होगी। नहीं होगी। खरगोश की संख्या हो सकती है 72 हो। एक साल में 72 खरगोश हो सकते हैं। है ना? 72 या 60 से 65 खरगोश का प्रजनन हो
25:31 सकता है। और हाथी बेचारा एक। क्लियर है? तो इसका मतलब है कि विभिन्न स्पीशीज का ग्रोथ पोटेंशियल अलग-अलग होता है। अब यह बताएं कि अगर नंबर ऑफ नंबर ऑफ बर्थ रेट ज्यादा है तो क्या जनसंख्या भी ज्यादा होनी चाहिए? क्या नंबर ऑफ बर्थ रेट मतलब अगर मान लेते हैं जन्म दर ज्यादा है तो इसका मतलब जनसंख्या भी ज्यादा होना चाहिए? होना चाहिए। तो डॉग और आदमी कुत्ता और इंसान का ही तुलना कर लीजिए। है ना? लॉजिकली सोच लीजिए। उसमें सिक्स से एट बर्थ रेट्स हैं साल के और इंसान का एक है ईयर में तो 140
26:21 करोड़ कैसे पहुंच गए? और पूरी दुनिया के डॉग का भी जनसंख्या मिला लें तो भी 140 करोड़ नहीं होगा। इसका मतलब कुछ और कांसेप्ट भी लगता होगा ना। ये कहना चाहते हैं। क्लियर है? मतलब प्रजनन दर से ही सब कुछ नहीं होता है। सर्वाइवल भी एक कांसेप्ट हो सकता है। फूड सिक्योरिटी भी एक कांसेप्ट हो सकता है। क्लियर है? इन सबको जोड़ करके देखना पड़ेगा कि किसी क्षेत्र विशेष में अगर जनसंख्या बढ़ रही है पर्टिकुलर स्पीशीज की तो केवल और केवल उसके प्रजनन दर के कारण नहीं होगा। उसके साथ विभिन्न अन्य कांसेप्ट्स की भी जरूरत पड़ेगी। क्लियर है? तो अगर कहीं पर कोई इकोसिस्टम है वहां पर ग्रोथ रेट तेज है पर्टिकुलर स्पीशीज का और दूसरी जगह पर्टिकुलर स्पीशीज का ग्रोथ रेट नहीं है तो इसका मतलब है वहां पर बेहतर कंडीशंस होंगे वो क्या-क्या कंडीशंस
27:09 हो सकते हैं उसको देखना पड़ेगा समझना पड़ेगा और इसी के बेसिस पर निर्णय लिया जाता है ना कि चीता को यहां इंट्रोड्यूस करते हैं यहां इंट्रोड्यूस किया जाए यहां इंट्रोड्यूस किया जाए उसका सर्वाइवल की संभावना बेहतर होगी तो क्या प्रजनन की बात नहीं है केवल सर्वाइवल की भी बात है और सर्वाइवल कैसे आएगा वहां वहां पर बीमारियां नहीं होनी चाहिए। वहां पर फूड सिक्योरिटी होना मतलब खाने पीने की व्यवस्था होनी चाहिए। है ना? ये ग्रोथ पोटेंशियल को मजबूत करता है। तो देखेंगे पॉपुलेशन इकोलॉजी कि कैसे पापुलेशन कैरिंग कैपेसिटी का कांसेप्ट क्या है? मैक्सिमम कितना पापुलेशन कोई एक पर्टिकुलर इकोसिस्टम सस्टेन कर सकता है? उसके क्राइटेरिया क्या होंगे? है ना? इस पे यूपीएससी आपसे कई बार सवाल पूछेगा। जब भी पापुलेशन ओवरशूट होगा तो बीमारियां बढ़ेंगी। खाद्य सुरक्षा बढ़ेगी। पापुलेशन डिक्लाइन करेगा। क्या किस-किस तरीके से हो
27:55 सकता है? उसके क्या-क्या प्रभाव हो सकते हैं? इस पॉपुलेशन इकोलॉजी में समझना है। क्योंकि पॉपुलेशन जनसंख्या वही जैव विविधता का आधार है। तो उसको किस किस प्रकार के संकट हो सकते हैं? किस-किस प्रकार की चुनौतियां हो सकती हैं? इसको भी समझना जरूरी है। इसके बाद ओवरऑल बायोम का कांसेप्ट है। हमने 11 प्रकार के जलवायु प्रदेश किए थे। याद है ना? अब उसी जलवायु प्रदेश में कुछ स्पीशीज का नाम करना पड़ेगा। फ्लोरा और फौना और उसकी विशेषताएं देखनी पड़ेगी। है ना? बायोम का कांसेप्ट तो हम लोग देख लिया था ना। आद्रता क्या होगा? तापमान कहां होगा? किस अक्षांश में अवस्थित होगा? ये सब कांसेप्ट हमने देखा है। अब उसमें कुछ सूचना ऐड कर लेंगे कि क्या हो रहा है इस क्षेत्र में? क्या चुनौतियां हो रही हैं? कौन-कौन से स्पीशीज पाए जाते हैं? क्या कुछ स्पीशीज उसमें से न्यूज़ में है? चाहे फ्लोरा हो मतलब पेड़-पौधे हो चाहे कुछ जीव-जंतु हो। है ना? उसके बारे में देखना पड़ेगा। कौन-कौन
28:42 से स्पीशीज हैं? क्यों पाए जाते हैं? उसका कारण क्या है? तो यहां पर बायोस्फीयर का कांसेप्ट है। मेजर बायोम्स ऑफ द वर्ल्ड। तो दुनिया में 11 जलवायु प्रदेश हमने किया है। वो 11 बायोम्स हैं। उसको देखेंगे। इसके अलावा है ना इंडिया में कौन-कौन से बायोम्स पाए जाते हैं और वही जैव विविधता में अल्फा, बीटा, गामा डायवर्सिटी जो अभी थोड़ी देर पहले आपको बता रहे थे इन सब चीजों के बारे में चर्चा करेंगे। एक इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। ध्यान होगा आपको मैंने आपके साथ एक [संगीत] रॉक साइकिल के बारे में चर्चा किया था। आग्नेय चट्टाने, अवसादी चट्टाने, केंद्रीय चट्टाने इस तरीके से। और जब हम पर्यावरण वाली क्लास में आ रहे थे तो मैंने थोड़ा नाइट्रोजन साइकिल के बारे में ऑक्सीजन साइकिल के बारे में चर्चा किया था। याद आ रहा है ना? ये वही टॉपिक है। है ना? थोड़ा सा इसमें और डिटेलिंग में जाना पड़ेगा।
29:28 ऑक्सीजन साइकिल, नाइट्रोजन साइकिल, हाइड्रोलॉजिकल साइकिल क्योंकि ये इंपॉर्टेंट है क्योंकि न्यूट्रिशन की रिसाइक्लिंग हो रही है। और न्यूट्रिएंट की रिसाइक्लिंग होगी तो जैव विविधता या आप कह सकते हैं कि जो भी विभिन्न जीव-जंतु हैं उनके लिए रिसोर्सेज उपलब्ध हो सकते हैं। तो ये थोड़ा सा समझना पड़ेगा। सल्फर की क्या भूमिका है? फास्फोरस की क्या भूमिका है? नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश याद है ना? यह सल्फर क्या रोल प्ले करेगा? सल्फर का होना चाहिए नहीं होना चाहिए? सल्फर को कैसे हटाया जा सकता है? सल्फर साइकिल, ऑक्सीजन साइकिल, नाइट्रोजन साइकिल, हाइड्रोलॉजिकल साइकिल, कार्बन साइकिल यानी विभिन्न साइकिल्स यानी कि ये जैविक साइकिल है। जीव-जंतुओं को इसकी जरूरत पड़ती है। तो जैव विविधता के पॉइंट ऑफ व्यू से, जीव-जंतुओं के विकास के पॉइंट ऑफ व्यू से इनकी भूमिका क्या है? इस पे यूपीएससी कई
30:14 बार कुछ प्रारंभिक परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से सवाल पूछता है। मुख्य परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से तो नहीं लेकिन हां ऐसा सवाल पूछता है। तो देखेंगे जैव विविधता एक इंपॉर्टेंट टॉपिक है। यूपीएससी का बहुत ही फेवरेट एरिया है। अभी देखेंगे है ना? अभी कुछ क्वेश्चंस आपको दिखाते हैं। जैव विविधता एक इंपॉर्टेंट टॉपिक दुनिया में 11 बायोम्स है ना। 11 प्रकार के जलवायु प्रदेश हैं। तो हर जगह का पे जीव-जंतु का एडप्टेशन उस जलवायु के अनुसार होगा। होगा तो जैव विविधता अपने आप दुनिया भर में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु पाए जाएंगे। इनको लेकर के कुछ कांसेप्ट्स होंगे। टाइप्स ऑफ बायोडायवर्सिटी, अल्फा, बीटा, गामा क्या बायोडायवर्सिटी को लेकर के चुनौतियां हैं? ल मतलब लॉस हो रहा है, थ्रेट्स हैं। क्यों हैं? तो कॉजेस क्या हो सकते हैं? इन्वेसिव स्पीशीज जैसे मैंने अभी आपको बताया था कि कोई एक पर्टिकुलर जगह पे कोई बाहरी प्लांट आकर के ग्रो कर जाए। वो इन्वेसिव हो जाएगा उसके लिए। वो
31:01 क्या करेगा? तेज गति से ग्रो करेगा तो बाकी के साथ कमपीट करेगा। बाकी के साथ कमपीट करेगा तो संकट की स्थिति होगी। जैसे सफेदे वाला एक एग्जांपल दिए थे जग्राफी की क्लास में। याद है? यूक्लिपस का पेड़ कहा जाता है उसको। उसकी जड़े बहुत गहरी होती हैं। उसके आसपास कोई भारतीय पेड़ नहीं ग्रो कर पाता है। क्योंकि उसकी जड़े कम गहरी होती हैं। उसकी जड़े ज्यादा गहरी तो बेचारा ऊपर का भी पानी पीता है। बेचारा तो नहीं नीचे का भी पीना है। और जो दूसरे उसके बगल वाला वो बेचारा वो ऊपर का पानी उसको मिलता नहीं है। जड़े उसकी गहरी है नहीं। तो बेचारा प्यास से धीरे-धीरे करके गुजर जाता है। क्लियर है? देखता है सफेद आ गया तो यहां पर तो अंकुरण उसका नहीं हो सकता है। क्लियर है या वहां पर उसका ग्रोथ नहीं हो सकता। तो इन्वेज़िब स्पीशीज़ इफेक्ट क्या होगा? बायोडायवर्सिटी का लॉस होगा तो उसका
31:47 प्रभाव हम पे क्या पड़ेगा? विभिन्न प्रभाव पड़ सकते हैं। एस्थेटिक हो सकता है, इकोनॉमिक हो सकता है, सोशियो कल्चर हो सकता है। है ना? अलग-अलग प्रभाव हो सकते हैं। एनवायरमेंटल पॉइंट ऑफ व्यू से हो सकता है। इसको देखेंगे। बहुत सारी स्पीशीज न्यूज़ में रहते हैं। एक्सटेंट हो गए, खत्म हो गए, गायब हो गए, दिखे ही नहीं। और कुछ समय के बाद कुछ 70 साल 90 साल 100 साल के बाद अचानक से देख जाते हैं। तो आईयूसीएन उसका लिस्ट जारी करता है। इंटरनेशनल यूनियन फ्रॉम कंजर्वेशन ऑफ नेचर इनडेंजर्ड क्रिटिकली इंडेंजर्ड है ना सुने होंगे ऐसा है ना वलनेरेबल एक्सटेंट है ना नियर एक्सटेंट ऐसे करके अलग-अलग कैटेगरीज बनाता है। इसको देखेंगे, है ना? इसको समझने की कोशिश करेंगे। और इस जैव विविधता को बचाने के लिए जो भी कन्वेंशन दुनिया भर में है, जैसे सीबीडी सबसे महत्वपूर्ण है। कन्वेंशन
32:33 ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी। इसको लेकर के देखना पड़ेगा कि क्या उसका रणनीति है? अब दुनिया भर में अगर आपको जैव विविधता को बचाना है तो उसके लिए कुछ फंड की जरूरत पड़ेगी ना। क्या फंड है? जैव विविधता के लिए नहीं है। अगर फंड है तो क्या प्रभावी है? या उतना प्रभावी नहीं है? उसको प्रभावी बनाने के लिए और क्या किया जाना चाहिए जो क्लाइमेट चेंज को लेकर के चर्चाएं चल रही हैं। कॉप 28 कॉप 29 मतलब अभी तो कॉप 28 हुआ है। नेक्स्ट डे कॉप 29 होगा। तो क्या उसमें जैव विविधता को लेकर के भी क्या उसमें चर्चाएं होती हैं? क्या उसको इंक्लूड किया जाता है उसके फंडिंग मैकेनिज्म पे? क्योंकि जैव विविधता का लॉस लॉस एंड डैमेज का फंड होना चाहिए। है ना? जैव विविधता अगर गुजर जाता है, लॉस हो जाता है तो इसका मतलब है कि उसके लिए एक अलग से फंड बनाया जाना चाहिए जिसको लॉस
33:18 एंड डैमेज फंड कहा गया। अभी क्रिएट किया गया है। है ना? क्या उस फंड का इस्तेमाल जैव विविधता को साधने के लिए किया जाएगा? नहीं किया जाएगा? ऐसे कुछ सवाल होंगे और फंडिंग मैकेनिज्म अच्छा होना चाहिए क्योंकि दुनिया भर में ऐसे संकट की स्थिति उत्पन्न होगी। अमेजन रेनफॉरेस्ट में बताए थे ना 75,000 बार आग लग रही है। 75,000 टाइम्स आग लग रहा है। तो इसका मतलब क्या होगा? जैव विविधता का हास होगा। आग ना लगे या आग को प्रभावी रूप से कंट्रोल किया जाए उसके लिए कुछ निवेश करना पड़ेगा ना। है ना? तो उसके लिए कुछ कार्य करना पड़ेगा। कहां से आएगा फंड? तो इसमें ही देखेंगे इसी में उसके बारे में चर्चा करेंगे कि संरक्षण को लेकर के रणनीतियां क्या है और रणनीतियों में सब कुछ राजनीतिक रूप से क्या कर रहे हैं? वैश्विक स्तर पर क्या कर रहे हैं? राज्य के स्तर पर मतलब हर देश जैसे भारत क्या कर रहा है? फंडिंग
34:03 मैकेनिज्म को लेकर के हम भारत क्या कर रहे हैं? वैश्विक स्तर पर क्या फंडिंग मैकेनिज्म है? प्रभावी है, निष्प्रभावी है और क्या किया जाए? इस पे एक चर्चा होनी चाहिए। और ये एक एरिया है जिस पे यूपीएससी सवाल पूछेगा प्रदूषण पे। है ना? जैसे गंगा का पोलशन एक इंपॉर्टेंट टॉपिक है। है ना? वाटर के पॉइंट ऑफ व्यू से देखा जाए, पानी के पॉइंट ऑफ व्यू से देखा जाए तो गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का काफी ज्यादा फोकस है नमामी गंगे पे या नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा पे। है ना? और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने कमिटमेंट किया था कि 2022 तक मतलब हम बहुत हद तक उसके प्रॉब्लम को सॉल्व कर लेंगे। लेकिन अभी उसका 40% प्रॉब्लम भी सॉल्व नहीं हुआ है। 40% क्या 25 30% भी नहीं सॉल्व हुआ है। 20% ही सॉल्व हो पाया है। तो इसका मतलब है कि अभी काफी एफर्ट लगाने की जरूरत पड़ेगी। तो यूपीएससी आपसे
34:50 कई बार प्रदूषण वाले सवाल पूछेगा और मैंने पानी का टॉपिक आपके साथ चर्चा नहीं किया है। तो पानी का टॉपिक विस्तार से देखेंगे और उसके साथ-साथ जो भी पानी का प्रदूषण का टॉपिक है उस टॉपिक को देखेंगे। इसके साथ-साथ लैंड डिग्रेडेशन भी एक इंपॉर्टेंट टॉपिक है। है ना? भूमि का डिग्रेड होना। उसके लिए हमने मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया देखी है। लेकिन और बहुत सारे प्रॉब्लम्स हमको देखने हैं। सो सॉइल इरोजन का प्रॉब्लम हम लोगों ने देख लिया है। डिजर्टिफिकेशन वाला देख लिया ये प्रॉब्लम। लेकिन इस है ना ये सब याद है? मृदा अपरदन वाला प्रॉब्लम डिजर्टिफिकेशन वाला मृदा संरक्षण वाला है ना एक्सेस इरीगेशन लवणीकरण क्या मतलब ये सब चीजें हम लोगों ने देखा है। लेकिन इसके साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट भी एक मेजर प्रॉब्लम है। तो उसको भी समझना पड़ेगा। वो भी लैंड डिग्रेडेशन का एक कारण होगा। है ना? इसके साथ ही साथ ओवर ग्रेजिंग। ओवरग्रेजिंग का
35:37 मतलब है अत्यधिक चराई। यह भी क्या होगा? लैंड डिग्रेडेशन का एक कारक होगा। इसके बारे में चर्चा आपसे नहीं हुई है। इसके बारे में हमारी रणनीति होनी चाहिए। क्या करें? क्यों हो रहा है ओवरग्रेजिंग? है ना? उसको साधने के क्या उपाय हो सकते हैं? इसको समझना पड़ेगा। देखना पड़ेगा। वायु प्रदूषण तो एक एवर ग्रीन टॉपिक है। है ना? तो इस पे चर्चा करेंगे। देखेंगे इस पे। मैरिन पोलशन पे एक टॉपिक पे आपसे चर्चा किए थे प्लास्टिक पोलशन पे। लेकिन बार-बार वहां पर बोले थे कोस्टल रेगुलेशन जोन और इन सब चीजों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। याद आ रहा है? अब उसका समय आ गया है। तो मैरिन प्रदूषण में ओवरऑल केवल प्लास्टिक पोलशन नहीं प्लास्टिक एक मेजर प्रदूषक है। लेकिन और क्या-क्या समुद्र में प्रदूषक हैं? और उसको लेकर के हम क्या कर रहे हैं? तो हमारे पास सीआरजेड का एक कानून है। है
36:23 ना? एक रेगुलेशन है। उसको समझेंगे। उसमें अच्छी बातें क्या हैं? उसकी सीमाएं क्या हैं? और क्या किया जाना चाहिए? ऐसे ही माइनिंग है। माइनिंग एंड पोलशन। तो माइनिंग में जैसे माइनिंग के बारे में मैंने आपसे चर्चा जरूर किया। अगर ध्यान होगा कोयलेवले के बारे में चर्चा किया। माइनिंग के बारे में चर्चा किया। सरकार की नीतियों के बारे में भी आपसे चर्चा किया। है ना? जो भी कोल को लेकर के और अलग-अलग आवंटन की नीतियां थी वो सब हम लोगों ने देखा। लेकिन पर्यावरणीय दृष्टिकोण से हमने बहुत ज्यादा चर्चा नहीं किया। जैसे सपोज़ करते हैं कोयले को अगर जलाया जाए, है ना? तो कोयले से प्रदूषक कम से कम कैसे अह रिलीज़ हो? मतलब बहुत बहुत से प्रदूषण को हम कैसे रोक सकें इसको लेकर के सरकार प्रभावी रूप से काम कर रहा है। मैंने कुछ कोल वाशिंग टेक्निक और इन सब पे बात किया था। लेकिन
37:08 थोड़ा और विस्तार से चर्चा करना पड़ेगा कि जो भी स्क्रबर्स का नीति है स्कबर्स को लेकर के जो सरकार ने भी नीतियां बनाई थी उसको लेकर के अभी समय सीमा बढ़ाया है। उसको भी समझना जरूरी होगा। तो इसको देखेंगे पोलशन को लेकर के खास करके जैसे गवर्नमेंट ऑफ इंडिया ने कहा कि कोयले को बैन नहीं कर सकते। इस बार भी कॉप 28 में भारत के ऊपर दबाव था। भारत क्या लिया? पोजीशन। कोयले के बारे में चर्चा नहीं करेंगे। मतलब कोयले के बारे में भारत ने कोई कमिटमेंट नहीं किया। देखेंगे इसको समझेंगे। इसके अलावा नॉइज़ पोलशन बड़ा टॉपिक तो नहीं है। है ना? रेडियोएक्टिव पोलूशन एक टॉपिक निकल सकता है। रीजन ये है कि जापान में जो अभी अर्थक्वेक आया उससे रेडियोएक्टिव लीकेज की संभावना मतलब उस क्षेत्र में बढ़ी। तो ऐसी स्थिति में थोड़ा सा रेडियोएक्टिव पोलशन करंट के
37:54 पॉइंट ऑफ व्यू से इंपॉर्टेंट हो गया तो इस टॉपिक को देखेंगे। है ना? इसके बारे में समझने की कोशिश करेंगे और पानी के बारे में जैसे मैंने नमामिंगे और इसके माध्यम से बताया तो वाटर डिग्रेड हो रहा है। और इसमें दोनों ही प्रकार के पानी होंगे। एक सतही जल और एक भूमिगत जल। उन दोनों का कारण क्या है? उसका प्रभाव क्या है? इसको दूर करने की रणनीतियां क्या हो सकती हैं? इसकी एक समझ हमारी होनी चाहिए। तो ये जो पोलशन एक ऐसा टॉपिक है जनरली यूपीएससी इस पे सवाल पूछता है। अलग-अलग तरीके से इस पे सवाल पूछे जाते हैं। एक ये इमर्जिंग टॉपिक इंपॉर्टेंट टॉपिक है क्या है? वेस्ट मैनेजमेंट। इसी को सर्कुलर इकॉनमी कहा गया ना चक्रीय अर्थव्यवस्था जो आप लोग बार-बार इकोनॉमिक्स में पढ़ रहे होंगे। सर्कुलर इकॉनमी। तो वेस्ट मैनेजमेंट का क्या पर्पस है? एक पंथ दो काज है। एक ओवरऑल प्रदूषण को कम किया जाए
38:41 और दूसरा सर्कुलर इकॉनमी को प्रमोट किया जाए। तो ऐसी स्थिति में देखेंगे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर के हमारे देश में क्या है? जैसे जो भी हम एक शहर में रह रहे हैं। इस शहर में जो भी सॉलिड ठोस अवशिष्ट जनरेट हो रहा है। इसका मैनेजमेंट कैसे किया जाए? है ना? इसको लेकर के हमारी क्या रणनीतियां हैं? तो इसको देखेंगे, समझेंगे। अब इस सॉलिड वेस्ट में ई वेस्ट हो सकता है। इस सॉलिड वेस्ट में बायोेडिकल वेस्ट हॉस्पिटल से निकला हुआ है ना। मान लीजिए किसी को टीबी है। अगर उस जो भी उसका इलाज हो रहा है उससे रिलेटेड जो भी चीजें हैं वो हज़ार्डस चीज हो गया। मतलब इमेजिन करें कि अगर सेफ तरीके से डिस्पोजल नहीं हुआ तो वो बैक्टीरिया एक्सपेंड करेगा कि नहीं करेगा? एक्सपेंड करेगा। तो ऐसे में बायोेडिकल वेस्ट का मैनेजमेंट कैसे किया जाए? उसको लेकर हमारे पास कुछ नीतियां
39:27 हैं। तो 2016 का एक नीति है। है ना? इसके अलावा जो भी अनहज़ार्डस वेस्ट हैं जैसे मान लेते हैं लोहा ही है। है ना? मान लेते हैं किसी फैक्ट्री से निकला और किसी फैक्ट्री से निकला और जिस फैक्ट्री में उसका इस्तेमाल हो रहा था उसमें विभिन्न प्रकार के हैवी मेटल्स का इस्तेमाल हो रहा था। लीड का इस्तेमाल हो रहा था। मरकरी का इस्तेमाल हो रहा था कुछ प्रोडक्ट बनाने के लिए। तो ऐसे में जो भी व्यक्ति उसके कांटेक्ट में आएगा उसको ब्रेक करने जाएगा तो हो सकता है कि मरकरी का कंटैमिनेशन हो जाए। लीड का कंटैमिनेशन बढ़ जाए। तो ऐसे में ऐसे वेस्ट का मैनेजमेंट कैसे किया जाए इसको लेकर के भी हमारे पास कुछ रूपरेखा होनी चाहिए। तो एक वेस्ट मैनेजमेंट आपका एक इंपॉर्टेंट टॉपिक है जिसकी एक समझ बनाएंगे। किसी ने अपना मुख्य परीक्षा वाला जो पेपर
40:12 है विज़न का देना शुरू किया किसी ने? नहीं संभाल के रखना है। है ना? आगे काम आएगा। भूगोल का टॉपिक तो कंप्लीट हो गया ना ज्योग्राफी। हां। कोई भी टेस्ट नहीं दिया अभी तक। नहीं नहीं मिनी नहीं वह जो 30 35 30 टेस्ट है फुल लेंथ में कल से तो जमा करने से पहले वो कॉपी दिखाइएगा हमको। कल क्लास है। ठीक है ना? या परसों दिखा दीजिएगा। पक्का हां। नहीं चेक होंगे फिर तो कहेंगे अभी आया नहीं आया नहीं है। है ना? हां। कल दिखाइएगा। कहने का मतलब यह है
40:59 कहने का मतलब लिखना जरूरी है। अब देखिए ध्यान से बहुत प्रकार के सवाल इस पे बन सकते हैं। ये जो टॉपिक है ना आपका ये इस टॉपिक में क्या सवाल बन सकता है? जैसे मैं आपको एक उदाहरण रखता हूं आपके सामने। एक हमने एएमओसी का टॉपिक किया था। अटलांटिक मैरडोनल ओशन इसी के कारण है ना? एक एप्लीकेशन हो सकता है ना उसका। आर्कटिक सागर अगर पिघलता है तो अटलांटिक मेरीडोनल ओशेनिक सर्कुलेशन छोड़ें। ऐसे सोचें कि ओवरऑल उस पूरे क्षेत्र पर क्या पड़ाव और वैश्विक प्रभाव क्या होगा? आर्कटिक के पिघलने मात्र से है ना? अटलांटिक मेरीडोनल ओशेनिक सर्कुलेशन तो महासागरीय धाराओं का ही कांसेप्ट हो गया ना। वो कैसे प्रभावित करेगा? उसके माध्यम से भी आप आंसर लिख सकते हैं। लेकिन एक सवाल केवल आर्कटिक आर्कटिक तेज गति से पिघल रहा है। इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? तो विभिन्न तरीके से
41:45 प्रभाव चर्चा करना पड़ेगा। तापमान पे, आद्रता पे, वर्षा पे, नॉर्थ अमेरिका पे, यूरोप पे, भारत पे अलग-अलग तरीके से नहीं जैव विविधता के पॉइंट ऑफ व्यू से अलग-अलग तरीके से तो एक सवाल बन सकता है। इस मतलब सिर्फ इसके पॉइंट ऑफ व्यू से। अब क्लाइमेट चेंज में केवल बर्फ-बर्फ की बात करूं तो हिमालय भी तो पिघल रहा होगा। तो अगर हिमालय के ग्लेशियर्स तेज गति से पिघल रहे होंगे तो उसके क्या प्रभाव होंगे? कारण क्या होगा? प्रभाव क्या होगा? तो एक सवाल हिमालय हिमालय के क्षेत्र का बन सकता है कि नहीं? है कि नहीं? अब इसी में अंटार्कटिका का पोलर वर्टेक्स ध्रुवी भवर वाला कांसेप्ट ध्यान है? ध्रुवी भवर ध्रुवी भवन नहीं कराए क्या? अच्छा अच्छा किसी एक टॉपिक में करा दिए
42:30 हैं। मतलब किसी एक क्लास में करा दिए हैं। आपका नहीं हुआ है। अच्छा चलिए कोई बात नहीं। याद दिलाइएगा लेकिन वो इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। ठीक है। ध्रुवीय भवर पोलर वर्टेक्स है ना? जब जेड धारा कमजोर पड़ेगी तो ध्रुवीय भवर विकसित होगा। यानी कि अंटार्कटिका में ओजोन का जो है एक क्षरण तेज गति से होगा। इसके लिए ध्रुवीय भवर को कमजोर होना पड़ेगा। और ध्रुवीय भवर को कमजोर होने के लिए जेट धारा का कमजोर होना पड़ेगा। और जेट धारा के कमजोर होने के लिए जेट धारा कहां बनता है? जहां पर गर्म और ठंडी हवाएं मिल रही थी। याद है? तो गर्म और ठंडी हवाएं मिल रही थी तो गर्म और ठंडी हवाएं अच्छे से मिक्स नहीं हो पाई ना। तो कुछ पार्सल ऑफ एयर ऊपर छूट गया। अब यह ठंडी हवा भी गर्म हो जाए तो दोनों गर्म हो गए कि नहीं? तो ऊपर कुछ छूटेगा क्या?
43:18 ऊपर क्यों छूट रहा था? जेट धारा क्यों चल रहा था? क्योंकि गर्म और ठंडा जो पवन मिल रहा था उसके तापमान में अंतर ज्यादा था। तो कुछ पार्सल ऑफ एयर छूट गया। और दोनों का तापमान एक जैसा हो जाए तो ऊपर कुछ छूटेगा क्या? जड़ धारा कमजोर हो गई। आर्कटिक का क्षेत्र तेज गति से गर्म होगा तो ध्रुवीय क्षेत्रों से आने वाला जो ठंडा वायु है उसका तापमान बढ़ेगा कि नहीं और गर्म क्षेत्रों से आने वाला वायु उसका तापमान भी बढ़ा हुआ होगा तो दोनों का तापांतर कम हो जाएगा तापांतर कम होगा तो जड़ धारा कमजोर होगी तो उसमें यूपीएससी पूछेगा ध्रुवीय भवर के संदर्भ में और आर्कटिक के क्षेत्र के कमजोर होने से ध्रुवीय भवर का कांसेप्ट क्या है? कैसे वैश्विक जलवायु को प्रभावित करेगा और मुख्यत अंटार्कटिका के क्षेत्र में इसके क्या प्रभाव होंगे? ऐसा कुछ सवाल आपसे
44:04 केवल और केवल बर्फ-बर्फ वाले सवाल पे मतलब अभी जलवायु परिवर्तन के अन्य आयामों की चर्चा भी नहीं है। केवल आइस आइस के पॉइंट ऑफ व्यू से आपसे काफी सवाल पूछ सकता है। तो क्लाइमेट चेंज एक बड़ा इंटरेस्टिंग टॉपिक है। इसके बारे में देखेंगे। ओवरऑल फैक्टर्स अफेक्टिंग क्लाइमेट चेंज कौन-कौन से फैक्टर्स हैं जो जलवायु परिवर्तन को प्रभावित कर रहे हैं? इसका इंपैक्ट क्या होगा? प्रभाव क्या होगा? जैसे मैंने आर्कटिक का एक उदाहरण लेकर के आपके सामने रखा कि आर्कटिक क्षेत्र पे उसका प्रभाव पड़ेगा। दुनिया के जितने भी 11 प्रकार के बायोम्स हैं सब पर उसका प्रभाव पड़ेगा कि नहीं? तो थोड़ा उसका एक समझ हमको बनाना पड़ेगा कि क्या-क्या प्रभाव पड़ेगा। जैसे भारत का मानसून एक होना चाहिए कि उस पे इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? पॉज नेगेटिव क्या पड़ेगा? कुछ अर्थव्यवस्था के पॉइंट ऑफ व्यू से होना चाहिए कि इकोनॉमीज़ पे
44:49 क्या प्रभाव पड़ेगा? चक्रवातों के पॉइंट ऑफ व्यू से या आपदा पे क्या प्रभाव पड़ेगा? क्लाइमेट चेंज के पॉइंट ऑफ व्यू से अगर तापमान बढ़ता है तो हीट वेव याद है? बैरियन हीट वेव है ना वो भी करना पड़ेगा। हीट वेव का फेनोमिना चक्रवातों पे क्या प्रभाव पड़ेगा? तो मैंने चक्रवात आपके साथ चर्चा किया है। याद है अब चक्रवात में एक नया डेवलपमेंट है जिसका नाम है फूजीवारा इफेक्ट। है ना? फूजीवारा इफेक्ट। तो उसकी चर्चा यहां पर करेंगे थोड़ा। मतलब थोड़ा क्या अच्छे से कर लेंगे ताकि कुछ है नहीं। चक्रवाती है वो भी। लेकिन फूजी वाला इफेक्ट का मतलब है कि एक ही समय पे एक से ज्यादा चक्रवात बन सकते हैं। क्यों? क्योंकि पानी अपेक्षाकृत गर्म हो रहा है। और गर्म हो रहा है तो मान लेते हैं कि समुद्र का पानी अत्यंत गर्म हो गया और उसी महासागर में एक साथ एक ही समय पे दो चक्रवात बन गए और दो चक्रवात बन गए तो
45:36 दोनों घूम रहे हैं और दोनों घूमते-घूमते आपस में टकरा गए तो एक बहुत बड़ा चक्रवात बन जाएगा जिसका नाम होगा फूजी इफेक्ट। तो विश्व के जो महासागर गर्म हो रहे हैं उससे क्या ऐसे चक्रवातों की संख्या बढ़ सकती है? तो उसकी एक समझ बनाएंगे थोड़ा। मतलब देखेंगे कि यह भी इसका प्रभाव है ना। तो फूजी इफेक्ट के बारे में चर्चा करेंगे। जो भी अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशंस हैं क्लाइमेट चेंज को साधने के लिए उसमें से इंपॉर्टेंट क्या है? यूएफसीसी यूनाइटेड नेशन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज। और उसमें अभी हाल ही में जो कॉप 28 की मीटिंग हुई उसकी समझ बनानी पड़ेगी कि क्या बात है। मतलब 1992 से लेकर के अभी तक क्या यात्रा रही है और अभी हम क्या कर रहे हैं जलवायु परिवर्तन को साधने के लिए? कन्वेंशन क्या है? अब इसी में कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं हैं। जैसे यूएनईपी है, यूनाइटेड नेशन एनवायरमेंट प्रोग्राम,
46:21 वर्ल्ड मेटोलॉजिकल ऑर्गेनाइजेशन ये भी उसको लेकर के चर्चा करता है। जलवायु परिवर्तन को लेकर के कार्य करता है। तो इनके कुछ रिपोर्ट्स है ना कहां पर अवस्थित हैं? हेड क्वटर्स क्या है? ऐसा कुछ प्रारंभिक परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से भी मेहनत करना पड़ेगा। एनवायरमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट है ना कोई भी प्रोग्राम कोई भी प्रोजेक्ट जब शुरू करते हैं तो प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले क्या आकलन नहीं कर लेना चाहिए कि अगर ये प्रोजेक्ट यहां पर लागू कर दिया जाए आ जाए तो उस क्षेत्र पे इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? 2006 का हमारा एक कानून है। 2020 में इसको अपडेट किया गया और यूपीएससी ने भी सवाल पूछा कि अभी हाल ही में जो बदलाव किया गया है ईआईए में उसका आलोचनात्मक परीक्षण करें। पॉजिटिव क्या है? उसका नेगेटिव क्या है? ऐसा सवाल पूछा गया। तो इसको देखेंगे। एनवायरमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट। मैंने कृषि के बारे में
47:07 आपसे चर्चा किया था। लेकिन उसमें से संधारणीय कृषि के बारे में चर्चा नहीं किया था। ऑर्गेनिक फार्मिंग बोला भी था। यह बात मैंने आपको ऑर्गेनिक फार्मिंग, जीरो बेस या जीरो बजट फार्मिंग है ना इन सब चीजों के बारे में कहा था कि मैंने विस्तार से आपके साथ चर्चा करेंगे। है ना? तो देखेंगे जीरो बजट फार्मिंग क्या होता है? ऑर्गेनिक फार्मिंग क्या होता है। है ना? विभिन्न तरीके की जो मतलब कृषि में संधारणीय कृषि का जो कांसेप्ट है उसको देखेंगे। भारत सरकार क्या प्रयास कर रहा है? क्या सीमाएं हैं और क्या किया जाना चाहिए। और इको टूरिज्म का एक कांसेप्ट है। टूरिज्म को प्रमोट करना है। लेकिन पर्यावरणीय दृष्टिकोण से प्रमोट करना है। तो इको टूरिज्म का कांसेप्ट क्या है? क्या भारत में संभावनाएं होंगी? है ना? भारत में संभावनाएं हैं। भारत के लिए चुनौतियां
47:52 क्या हैं? भारत सरकार क्या कर रहा है? इको टूरिज्म को प्रमोट करने के लिए? है ना? इन सब चीजों के बारे में एक समझ बनाएंगे और ये हमारा सिलेबस हो जाएगा। तो कुल मिलाकर के ये जो सिलेबस है ये काफी विस्तारित सिलेबस है। है ना? काफी एक्सटेंडेड सिलेबस है। अब यह जो आपके पास बुकलेट है, इस बुकलेट में समय-समय पे कुछ अपडेट करने की जरूरत पड़ेगी। ठीक है? और आज जो पीपीटी अपलोड किए हैं, उसको आप ध्यान से जाकर के पढ़िएगा। कई-कई जगह पे एग्जांपल्स की कमी लग रही थी और खास करके चकि एक डेढ़ साल पहले ये प्रिंट हुआ है। तो एग्जांपल्स तो नहीं थे। कहीं-कहीं पर थे। लेकिन हमको ऐसे एग्जांपल्स चाहिए थे जो करंट के पॉइंट ऑफ व्यू से हो ताकि अगर यूपीएससी सवाल पूछे तो मतलब आप उसको करने की स्थिति में हो। तो मैं लगातार ऐसा अपडेट करता रहूंगा। अगर
48:38 आपको लगेगा कि पीडीएफ में कुछ ऐसे एग्जांपल्स को आप उसमें लिखना चाहें तो उसमें लिख लीजिएगा। अगर आपको लगे कि नहीं इसी को पढ़ना चाहिए तो आप इसको पढ़ लीजिएगा। जो भी आपको ठीक लगे। लेकिन ओवरऑल ये जो स्ट्रक्चर है, हम इसी स्ट्रक्चर पे आगे बढ़ेंगे। बस इसी स्ट्रक्चर में जहां-जहां बदलाव की जरूरत पड़ेगी, जहां हमको व्याख्या करना पड़ेगा, हमको अपनी जरूरतों के हिसाब से उसमें कुछ चेंजेस लाने की जरूरत पड़ेगी, वो करते रहेंगे ताकि एक बेहतर तरीके से हम सारी चीजों को एड्रेस कर पाए। क्लियर है? सिलेबस का एक मोटा-मोटा समझ बना है ना? अब आगे जैसे-जैसे थोड़ा कुछ क्लास हो जाए तो कुछ सवालों के माध्यम से हम देखेंगे या हर टॉपिक के पीछे कुछ सवाल दिए हुए हैं। तो अच्छी बात है कि हर क्लास के बाद यानी कि एक जब चैप्टर वन कंप्लीट हो जाए या एक दो
49:24 टॉपिक्स जब कंप्लीट हो जाए तो पीछे जो सवाल है उनको देखिएगा कि वो सवाल आपसे हो रहे हैं या नहीं हो रहे। दिया है ना पीछे सवाल? है ना? तो इसका मतलब है कि पढ़ने के बाद जब हमारा एक टॉपिक कंप्लीट हो जाए तो ये सवाल आपसे होने चाहिए। और अगर सवाल ना हो तो उन सवालों को लेकर के आइए चर्चा करेंगे कि सर यह वाला सवाल नहीं हो रहा है। इस पर डिस्कशन हम करते हैं। यह प्रारंभिक परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से 2019 से लेकर के 2023 के बीच में जो सवालों की संख्या है 17, 19, 21, 18, 22 सब आसपास ही है। मतलब कहने का मतलब है कि कंसिस्टेंटली यूपीएससी वही 18 से 20 सवाल हर साल इस टॉपिक से पूछ रहा है। लास्ट थ्री इयर्स में इन सबको जोड़ लें तो सवालों की संख्या 100 हो जाएगी। तो ऑन एन एवरेज क्या निकल के आता है? 20 सवाल। ठीक है? अब आगे देखेंगे इसी टॉपिक में मैंने कुछ सवाल
50:09 अलग-अलग से भी इंक्लूड किए हैं ताकि आपको समझ में आ जाए कि ऐसे सवाल पूछे गए हैं। तो इस पर ज्यादा चर्चा नहीं कर रहे हैं। ये क्लास के साथ जैसे-जैसे आगे बढ़ेंगे इसकी समझ हमारी बढ़ती चली जाएगी। यहां पर कुछ सवाल मुख्य परीक्षा के पॉइंट ऑफ व्यू से है।
51:22 ठीक है। चलिए मुख्य परीक्षा में पिछले तीन सालों में पिछले तीन सालों में 19 सवाल पूछे गए हैं। मतलब एग्जैक्ट अगर नंबर्स कहें तो 19 सवाल पूछे गए हैं। एक दो क्लासेस हो जाने दीजिए। ठीक है? उसके बाद इन सवालों को लेंगे। इन सवालों को लेकर के थोड़ा सा एक समझ बना लेंगे। जैसे थोड़ा सा एक समझ बन जाए आपका दो-तीन क्लास में तो उसके बाद उन सवालों को लेकर के देखेंगे कि उन सवालों का एप्रोच क्या है? अभी आपके सामने वो बात रख देते हैं। बहुत सारे सवाल ऐसे हैं जो कि एनवायरमेंट का
52:07 अगर हम एक साल का करंट अफेयर्स कर लें अच्छे से तो छह में से दो से तीन सवाल जनरली रेंज में हैं। ऐसा नहीं कह रहा हूं कि सारे सवाल लेकिन दो से तीन सवाल रेंज में हैं। क्लियर है? लेकिन वो दो-तीन सवाल ऐसे भी हैं कि अगर हमारा फंडामेंटल अच्छा हो ना तो भी हम उसके बारे में लिख सकते हैं। जैसे क्लाइमेट चेंज वाला टॉपिक एवरग्रीन है। एवरग्रीन का मतलब है कि 2020 से लेकर के 2022 के बीच में आईपीसीसी को जो बोलना था क्लाइमेट चेंज में उसने बोल दिया। अब छ सात साल के बाद जो उसको बोलना होगा वो बोलेगा। क्लियर है? मतलब अभी आंकड़े एकत्रित कर रहे होंगे सब। फिर उसके बाद उस आंकड़ों के बेसिस पे आगे उसका एनालिसिस करेंगे। तो अभी दुनिया भर में जो भी बातें चल रही हैं कोई भी सरकार कोई भी देश कोई भी संस्था कोई भी बात कह रहा है तो उसका आधार है आईपीसीसी का रिपोर्ट जो कि 2023 में है तो 2020 में पहला रिपोर्ट
52:54 आया था लास्ट रिपोर्ट 2022 तक आया 2023 में भी उसका लास्ट सिंथेसिस रिपोर्ट आया मतलब वो सबका सिंथेसिस था तो कुल मिलाकर जो बात आईबीसीसी को कहना था उसने कह दिया क्लाइमेट चेंज को तो अगर हम उस रिपोर्ट की कुछ मूल बातों को तैयार कर लें अच्छे से तो क्लाइमेट चेंज से रिलेटेड कुछ भी सवाल हो करंट का आपका टॉपिक वही होगा कुछ भी न्यूज़ पेपर में मैगजीन में कुछ भी बातें चल रही हो लेकिन कुल मिलाकर के बात चल रहा होगा आईपीसीसी का क्लियर है तो देखेंगे चर्चा करेंगे विस्तार से थोड़ा सा सिलेबस आगे बढ़ जाने देते हैं देखिए पारिस्थितिकी की समझ के पॉइंट ऑफ व्यू से कुछ-कुछ बेसिक टर्मिनोलॉजी पहले ले लेते हैं जैसे जो पहला शब्द है इकोलॉजी है ना इकोलॉजी एंड एनवायरमेंट ये हमारा शब्द है या हमारा ये अंडरस्टैंडिंग है तो इकोलॉजी का सिंपल
53:40 मतलब क्या है अगर देखें तो ट अर्नस्ट हैकल नाम के एक व्यक्ति थे। इन्होंने सबसे पहली बार इस शब्द का परिकल्पना किया था। ये शब्द इन्होंने दिया था इकोलॉजी। इको मतलब क्या होता है? इको मतलब होता है ना? इको मतलब क्या होगा? इको मतलब अर्थ। लॉजी मतलब लोगस मतलब अध्ययन। इको का मतलब है या यहां इकोलॉजी का मतलब है कि एक पर्टिकुलर क्षेत्र है। उसमें जो भी जीव-जंतु हैं उनका आपस में संबंध कैसा है? वो आपस में इंटरेक्ट कैसे कर रहे हैं। है ना? उस चीज का अध्ययन करना यह इकोलॉजी का सब्जेक्ट मैटर है। मान लेते हैं जैसे यहां पर ये डायग्राम बना हुआ है। इसको इमेजिन
54:26 करें कि एक बड़ा सा घर है। उस बड़े से घर में यह भी है बंदर। है ना? ये ये भी है। ये भी है। ये सब है। है ना? ये सब खेल कूद रहे हैं। और जब जिसको भूख लगता है एक दूसरे को पकड़ के खा लेते हैं। है कि नहीं? मतलब कहने का यह मतलब है द पॉइंट इज़ कि एक इनका अपना परितंत्र है। एक सेटअप है। अब ये यहां पर क्यों है? इसका कुछ कारण होगा। इसकी कुछ व्यवस्था हो रही होगी ना? खाने पीने, भोजन की कुछ तो व्यवस्था हो रही होगी। यह पानी है। यह यहां आ गया। मछली खा रहा है। यह यहां क्यों है? डेफिनेटली यह जो परितंत्र है या आप कह सकते हैं कि जो एक सिस्टम है या जो स्फीयर है एक लाइफ का यह इसको कुछ संभावनाएं क्रिएट करके दे रहा है। तो इकोलॉजी कुछ नहीं है। यह सजीवों की
55:14 उनके भौतिक पर्यावरण और एक दूसरे के साथ पारस्परिक क्रियाओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। यानी कि ध्यान से देखें सजीवों का जो भी जीव-जंतु हैं चाहे पेड़-पौधा हो चाहे जीव-जंतु उनके भौतिक पर्यावरण यानी कि जिस पर्यावरण में है एक दूसरे के साथ उनका क्या क्रियाकलाप चल रहा है और है ना उसका एक साइंटिफिक अध्ययन है। एक साइंटिफिक अध्ययन है। इसका मतलब है कि किसी क्षेत्र विशेष में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु अगर आते हैं तो वो कोल कोइंसिडेंस नहीं है। उसका एक लॉजिकल प्रक्रिया है। एक साइंटिफिक प्रोसेस है। इसको समझना इसका अध्ययन करना इकोलॉजिकल सब्जेक्ट मैटर है। यही कह रहा है यह पादपों, मनुष्यों, जीव-जंतु और सूक्ष्म जीवों के पर्यावेश के रूप में पृथ्वी का अध्ययन करता है। पृथ्वी के हिस्से को मान लेता है कि उनका घर है।
56:00 अब ये समझने की कोशिश करता है कि ये सारे जीव-जंतु इस क्षेत्र में निवास क्यों कर रहे हैं। है ना? डेफिनेटली कुछ जरूरतें उनकी पूरी हो रही होंगी। पर्यावरण पे उनकी निर्भरता हो रही होगी। अलग-अलग प्रकार से। उन सारी जरूरतों को अगर पूरा वो हो रहे होंगे तो डेफिनेटली वो ग्रो करेंगे। एक पूरा का पूरा जीव-जंतुओं का इंटरेक्शन उसके साथ स्थापित हो जाएगा। यह है हमारा इकोलॉजी का कांसेप्ट। या इसी को जरा सोच करके देखते हैं। मान लेते हैं दुनिया भर में बीज है ना? बीज का मतलब क्या हो गया? मधुमक्खियां। मधुमक्खियां को माना जाता है पॉलनेटर्स हैं। है ना? वो एक जगह से जैसे मान लेते हैं कि सीड्स हैं या एक जगह से क्या करते हैं? पोलिनेशन करते हैं। जैसे फल जैसे फूल ही है। है ना? फूल के बीजों को दूसरी जगह
56:46 पे जाकर के स्थापित करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में विकास में एक महत्वपूर्ण रोल प्ले कर रही हैं। तो अगर कहीं पर बी है, मधुमक्खी है तो क्या वहां पर लगातार पेड़-पौधों का विकास होगा? तेज गति से? क्लियर है? तो अगर हम इकोलॉजी के पॉइंट ऑफ व्यू से बात करें तो जो बी है एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले कर रहा है कि नहीं? इंटरेक्शन क्या है? सजीवों के साथ भौतिक पर्यावरण और एक दूसरे के साथ पारस्परिक क्रिया। तो यहां पर जो भी एक वहां पर उसका फिजिकल एनवायरमेंट है उसमें पेड़-पौधे कह रहे हैं कि भैया प्लीज मुझे थोड़ा सा एक्सपेंड कर दो। तो पेड़-पौधों के एक्सपेंशन के पॉइंट ऑफ व्यू से क्या कर रहा है? बी या मधुमक्खी एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले कर रहा है। कर रहा है कि नहीं? इसका मतलब है पेड़-पौधे किस पे निर्भर है? बीज पे। अगर बीज मधुमक्खियों की संख्या कम होती है, मधुमक्खियों की संख्या कम होती
57:32 है, तो ये जो पेड़-पौधों का विकास होना है, जो एक्सपेंशन होना है, वो क्या स्लो डाउन होगा? दोनों एक दूसरे पे निर्भर हो गए कि नहीं? पेड़-पौधे मधुमक्खियों के लिए भोजन प्रदान कर रहे हैं और यह उनके विस्तार को एक रोल प्ले कर रहे हैं। है कि नहीं? इनका इंटरेक्शन हो गया। यानी कि जहां-जहां मधुमक्खियां होंगी वहां पर फूलों के पौधे पेड़-पौधे जो हैं तेज गति से एक्सपेंड करेंगे। अगर बीज की संख्या कम होगी तो इसका मतलब है कि जो फ्लोरा है जो पेड़-पौधे हैं उनका जो क्षेत्रफल का विस्तार होना है वह प्रक्रिया स्लो डाउन हो जाएगी। हो जाएगी। तो ये इंटरेक्शन है। हमने देखा बी हमने देखा पेड़-पौधे। हम उसके बीच में इस्टैब्लिश नहीं कर पा रहे हैं कि कैसे हैं दोनों। लेकिन दोनों एक दूसरे पे निर्भर है। इसको हमने कहा इकोलॉजी। क्लियर है? अब फैक्ट के पॉइंट ऑफ
58:19 व्यू से जो चीजें न्यूज़ में है वो ये हैं कि सबसे बेस्ट पॉलनेटर्स माने जाते हैं मधुमक्खी। और इनकी संख्या नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में लगातार कम हो रही है। कहां कम हो रही है? नॉर्थ अमेरिका और यूरोप में। लगातार इनकी संख्या में कमी आ रही है। यह नॉर्थ अमेरिका और यूरोप के लिए अच्छा सूचक है या चिंताजनक है? चिंताजनक है। तो नॉर्थ अमेरिका और यूरोप चाहेंगे कि यार प्लीज मधुमक्खी कैसे भी जिंदा रहो, कैसे भी ग्रो करो। हम हर कोशिश करेंगे जिसके माध्यम से आप बेहतर हो। तो यहां पर बीज को लेकर के भी मतलब जैव विविधता के पॉइंट ऑफ व्यू से एक इंपॉर्टेंट रोल प्ले कर रहा है। तो अगर यूपीएससी आपके सामने कहता है मधुमक्खियों पे किसी पे तितली पे सवाल बना सकता है ना। तो यहां पर जैसे हमने एक उदाहरण लिया मधुमक्खी का और मधुमक्खी का हमने वैश्विक डिस्ट्रीब्यूशन देखा। वैश्विक डिस्ट्रीब्यूशन जो करंट का
59:05 है अगर हम इसको देखते हैं अभी का आंकड़ा जो है वो लास्ट 2019 का ही है सारे महाद्वीपों को लेकर के तो यहां देखें अफ्रीका है, अमेरिका है, यूरोप है, एशिया है। देखिए अमेरिका का मतलब है नॉर्थ अमेरिका और साउथ अमेरिका। ठीक है? साउथ अमेरिका में मधुमक्खियों की संख्या ग्रो कर रही है। लेकिन नॉर्थ अमेरिका में डिक्लाइन कर रही है। क्लियर है? अफ्रीका में देखिए 7.9 ओवरऑल 7.9 था। अभी बढ़कर के 17 इसका मतलब है ग्रोथ हुआ है। अगर हम अमेरिका की बात करें तो 8.7 था 11 हो गया है। लेकिन ये मुख्यत ग्रोथ कहां है? साउथ अमेरिका में ना कि नॉर्थ अमेरिका में। यूरोप में 21% था अभी 16% अफ्रीका सॉरी एशिया और मिडिल ईस्ट में 14% था अभी 43% तो अफ्रीका में तेज गति से 20
59:50 के पॉपुलेशन का विस्तार हो रहा है। मतलब यूपीएससी अगर आपसे कहे कि दुनिया भर में सभी महाद्वीपों पे मधुमक्खियों की संख्या में कमी आ रही है तो स्टेटमेंट गलत होगा। मतलब कहना यह चाहते हैं आपसे। क्लियर है? अच्छा सॉरी क्लियर है तो मधु अब देखिए अब अब यही सब करना पड़ेगा मधुमक्खी तितली है ना पर्यावरण में अलग-अलग तरीके से तो विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं की समझ हमारी रखनी पड़ेगी मधुमक्खी को मधुमक्खी ना समझें ये पेड़-पौधे फ्लोरा के विकास में सबसे इंपॉर्टेंट और क्रिटिकल रोल प्ले करते हैं। अगर इनकी संख्या कहीं पर भी कम होती है तो फ्लोरा और फौना का जो विकास होना है जो मतलब एक्सपेंशन होना है उसकी गति बहुत ही धीमी होगी। तो एक इंपॉर्टेंट रोल ये
1:00:38 प्ले करते हैं। क्लियर है? इस संदर्भ में अगर इनकी संख्या किसी महाद्वीप पे कम हो रही है तो उस महाद्वीप के जैव विविधता के पॉइंट ऑफ व्यू से खतरे की घंटी। क्लियर हो गया? तो मधुमक्खियों की भूमिका है इकोलॉजी के पॉइंट ऑफ व्यू से। क्लियर हो रहा है? करेंगे आगे। है ना? उस पे यूपीएससी ने 2023 में सवाल पूछ लिया ना? है ना? वेबल डांस था। है ना? बुलाने के लिए करती है। जैसे मान लीजिए कहीं भोजन मिल गया ना तो अब आवाज लगा लगा के तो बुला नहीं सकती कि आ जाओ आ जाओ आ जाओ। तो वाइब्रेट करती है। और उस वाइब्रेशन वाइब्रेशन से जो आवाज निकलता है ना वो एक विशिष्ट प्रकार का वाइब्रेशन होता है। कहता है कि सब यहीं आ जाओ। खाने पीने की व्यवस्था है। है ना? भोजन जब मिल जाता है किसी एक मध्य मधुमक्खी हमेशा शेयर करके खाता है। कॉलोनी में रहता है। क्लियर
1:01:24 है? तो जब भी उसको भोजन मिलता है तो वो डांस करता है ताकि सब लोगों को बुला सके और फिर सब लोग मिलकर के भोजन करते हैं। इसलिए वो डांस करता है। यूपीएससी ने सवाल पूछा था आगे चर्चा करेंगे। है ना? ये क्लियर हुआ पॉइंट ये वाला मतलब कहने का मतलब यह है इकोलॉजी का कांसेप्ट क्लियर हुआ? सजीवों की उनकी भौतिक पर्यावरण एक दूसरे के साथ पारस्परिक क्रिया है। यानी कि अगर हम कह रहे हैं कि एक जीव जंतु एक क्षेत्र में निवास करते हैं। इकोलॉजी है। नहीं उनके बीच में इंटरेक्शन है ना उनका इंटरेक्शन कैसा है? इसकी समझ को समझना इकोलॉजी है। तो इसका मतलब है अलग-अलग कांसेप्ट्स के माध्यम से इसको समझना पड़ेगा। अलग-अलग तरीके से इसको देखना पड़ेगा। जैसे इसी को देखें। यह मशरूम है। मशरूम क्या होता है? बैक्टीरिया, फंगस या कुछ और फंगी होता है।
1:02:13 है ना? मतलब आगे चर्चा होगा। बायो की क्लास में आपने बैक्टीरिया फंगस के बारे में चर्चा किया था ना? किया होगा। सारे फंगस खराब नहीं होते। कुछ काम के भी होते हैं। इसमें से एक मशरूम भी क्लियर है? तो मशरूम क्या हो गया? फंगस। एंथरेक्स क्या हो गया? बैक्टीरिया। मतलब कुछ-कुछ ऐसे सूचना मिल रही है ना? है ना? तो यहां पर यह जो मशरूम है यह एक प्रकार का फंगी है और यह एक लकड़ी पे ग्रो कर रहा है और ये लकड़ी जो है पेड़ से टूट गया है। पेड़ से खत्म हो गया है। कट गया है। कई बार आप बारिश के दिनों में देखते हैं ना कि कई जगह पे लकड़ियां पड़ी होती हैं। उस पे मशरूम ग्रो करना शुरू कर देता है। यह भी तो इकोलॉजी है। नहीं कि वो जो पेड़ जो पेड़ या जो फ्लोरा
1:03:00 था वो टूट गया है। वह खराब हो गया है। वह डीकंपोज कर रहा है। लेकिन उस पे छोटे-छोटे मशरूम ग्रो कर रहे हैं। क्यों? डेफिनेटली उसके अंदर कुछ न्यूट्रिएंट्स होंगे जिसके जिसके माध्यम से उस मशरूम का ग्रोथ हो रहा है। ये भी तो इकोलॉजी है। समझ रहे हैं? तो इन बारीकियों को समझना इकोलॉजी का कांसेप्ट है कि ऐसा कैसे हो रहा है? तो डेफिनेटली रिसोर्स अवेलेबल है। न्यूट्रिशन की सप्लाई बनी हुई है। तो जब तक न्यूट्रिशन की सप्लाई बनी रहेगी, आद्रता बनी रहेगी, यहां पर मशरूम का ग्रोथ हमको देखने को मिलेगा। यह क्या है? इकोलॉजी कहने का मतलब है सजीवों की उनकी भौतिक पर्यावरण एक दूसरे के साथ पारस्परिक क्रिया है ना तो यहां पर एक आप कह सकते हैं कि ये एक स्थिति है इस स्थिति को तो समझना इकोलॉजी का कांसेप्ट है। बढूं आगे मतलब
1:03:46 आगे और चर्चा होती रहेगी। पूरा का पूरा तो टॉपिक ही इकोलॉजी का कांसेप्ट है। है ना? लेकिन यहां मतलब आपसे अगर इकोलॉजी पूछे तो आपको इस तरीके से अपनी बात रखनी है। इसी में एक शब्द है इकोसिस्टम। अब इकोसिस्टम में इस शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले टेंसले यहां ध्यान रखिएगा अर्नस्ट हैकल और यहां पर टेंसले ने इस शब्द का इस्तेमाल किया था। यह सजीवों का समुदाय है। सजीवों मतलब जीवित प्राणियों का। इसमें अजैविक घटक भी शामिल होते हैं। ये एक दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। एक दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं का मतलब है कि हम जैसे यहां पर हमने एक सिंपल प्रोसेस देखा। सिंपल प्रोसेस देखा। एक मशरूम और एक लकड़ी। हमने यहां पर एक सिंपल प्रोसेस क्या देखा? हमने एक बी देखा। मतलब एक मधुमक्खी देखा और वह
1:04:32 पोलिनेशन का काम कर रहा है जिससे कि फ्लोरा का विकास हो रहा है। एक हमने एक सिंपल प्रक्रिया समझी। इकोसिस्टम का मतलब है कि हर चीजें एक दूसरे से जुड़ी हुई होंगी। हर जीव एक दूसरे से जुड़ा हुआ होगा। उस पूरे चैन में अगर किसी पे भी संकट आता है तो बाकी सब उससे प्रभावित होंगे। इन चीजों को समझना इकोसिस्टम का कांसेप्ट है। क्लियर है? दो के बीच में संबंध स्थापित कर रहे हैं। उन चीजों को समझना इकोलॉजी है। और उस पूरे क्षेत्र में जो भी जीव-जंतु हैं क्या वह आपस में जुड़े हुए हैं? अगर आपस में जुड़े हुए हैं तो ये कांसेप्ट क्या हो गया? इकोसिस्टम का। अब इसको थोड़ा सा उदाहरण के माध्यम से हम समझते हैं। उन उदाहरणों को ले रहे हैं जिसकी चर्चा पहले भूगोल की क्लास में आपके साथ किए हैं। है ना? फाइटोप्लैंक ज़ूपटॉन
1:05:17 अगर फाइटोप्लंटोन खत्म हो गया तो जुप्लंटोन की संख्या कम हो जाएगी। और इन दोनों की संख्या कम हो गई तो मछली छोटी मछलियां खत्म उनके लिए भोजन नहीं होगा छोटी से उससे बड़ी नहीं होंगी उससे बड़ी से शार्क नहीं होगा शार्क से व्हेल नहीं इकोसिस्टम था समुद्र का जिसमें सब चीज चीजें यानी कि फाइटोप्लटॉन व्हेल से जुड़ा हुआ था अगर फाइटोप्लंकटोन में कमी आएगी तो उस चेन में जो भी हैं वह सब उससे प्रभावित और अगर स्थिति बेहतर हो गई फाइटोप्लंटोन का खूब ग्रोथ हुआ तो ज़ंकटोन का भी खूब ग्रोथ ज़ प्लैंकटॉन होगा तो छोटी-छोटी मछलियां भी तेज गति से ग्रो करेंग क्योंकि खाने की मतलब उस इकोसिस्टम का कैरिंग कैपेसिटी है ना ज्यादा से ज्यादा जीवों को रखने की क्षमता बढ़ जाएगी तो संख्या बल बढ़ बढ़ेगा
1:06:04 उसके ऊपर बढ़ेगा ओवरऑल ग्रोथ होगा और अगर डिक्लाइन किया तो सब डिक्लाइन करेंगे इस चीज का अध्ययन करना क्या है इकोसिस्टम इसी को जरा देखें कि देश में सबसे ज्यादा बाघ कहां पर है किस नेशनल पार्क में है शेर नहीं बोल रहे बाघ कह रहे हैं। बाघ और शेर में अंतर होता है ना। टाइगर को कहा जाता है बाघ और शेर का मतलब है लायन। लायन तो एक ही जगह है गिर नेशनल पार्क पे। बहुत सारे नेशनल पार्कक्स हैं। करंट अफेयर्स में कोई तो नेशनल पार्क सुने होंगे जहां संख्या ज्यादा है। अभी उत्तराखंड में उत्तराखंड में जिम कॉर्बेट। अब जिम कॉर्बेट में टाइगर की संख्या ज्यादा है तो हिरण की संख्या कम होगी क्या? लॉजिक से सोच के देख। है कि नहीं? बेचारे को हर 7 से 10 दिनों
1:06:49 में शिकार करता है। एक बार शिकार करता है। फिर छ सात दिन तक शांत रहता है। फिर छ सात दिन तक उसको खाता पीता है। उसके बाद फिर सात दिनों के बाद शिकार के लिए निकलता है।
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