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संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में, वक्ता महात्मा गांधी के सिद्धांतों और उनके राजनीतिक महत्व पर चर्चा कर रहे हैं। सरकार के सामने आने वाली चुनौतियों और संघर्षों का उल्लेख करते हुए, वे गांधी जी के अहिंसक सिद्धांतों को अपनाने की कोशिश और उससे संबंधित कठिनाइयों पर प्रकाश डालते हैं।

  • गांधी जी के सिद्धांतो की अहमियत
  • सरकार की जिम्मेदारियां और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए संघर्ष

गांधी जी के सिद्धांतों की चर्चा

वक्ता दूसरे कठिन सवाल का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं जो उनके और सरकार के सामने हमेशा मौजूद रहता है। यह सवाल गांधी जी के सिद्धांतों को कैसे अपनाया जाए। वे बताते हैं कि वे गांधी जी के विचारों के बीच पले-बढ़े हैं, लेकिन अहिंसा और अर्थशास्त्र में उसे पूरी तरह नहीं अपनाया। फिर भी, उन्होंने कई सिद्धांतों को ग्रहण किया जो देश के लिए उपयुक्त रहें।

सामाजिक शांति और जिम्मेदारी

वक्ता अपनी सरकार के सामाजिक शांति और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पर जोर देते हैं। यदि शांति और व्यवस्था नहीं रखी जा सकी, तो देश की स्थिरता पर खतरा पैदा होगा। इस संदर्भ में, उन्होंने यह भी अनुभव किया है कि गांधी जी के सिद्धांतों को लागू करने में बार-बार असफलता का सामना करना पड़ा है।

नागरिक स्वतंत्रता का महत्व

वक्ता नागरिक स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण मानते हैं और बताते हैं कि जब तक नागरिक स्वतंत्रता का विस्तार नहीं होता, असली स्वतंत्रता संभव नहीं है। वे यह भी कहते हैं कि उन्होंने अपनी बुद्धि के अनुसार निर्णय लिए हैं, जिसमें गांधी जी के संदेश की यथार्थता को स्वीकार किया है, फिर भी आवश्यक कार्य किए हैं।

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Transcript

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0:00 स्टार्ट अब मैं आप से एक दूसरा और बड़ा कठिन सवाल पूछना चाहता हूँ जो की मेरे और मेरी सरकार के सामने सदा मौजूद रहता है अगर मैं कहूं तो हम लोग राजनेतिक द्रश्टी से गांधी जी के सिद्धानतों के बीच जनुद रहता है। गांदी जी के सिद्धान्तों के बीच जनमे और पले हैं यद्धपी हमने गांदी जी के बिचारों को ना तो अहिंसा के बिसे में ना अर्थसास्त्र के बिसे में पूरी तरह से ग्रहण किया

0:50 फिर भी हमने उनमें से बहतों को ग्रहण किया जो हमारे देश के लिए उपियुक्त जो हमारे देश के लिए उप्युक्त थे और हो सकता है संसार के लिए भी कुछ हद तक उप्युक्त हो अब आप जरा ऐसे लोगों की कलपना कीजिये की जो सदा सांती पूर्ण तरीकों को ग्रहड किये हुए अपनी सोतंतरता की लडाई लड़ते रहे हो उन्हें हर दो की लड़ाई लड़ते रहे हों उन्हें हर दर्जे की हिंसा का और राज्य की हतियार बंद

1:40 सकती का सामना करना पड़ा हो ऐसा करने में हमें कोई पिर्शनता नहीं हुई और इससे हमारे मन में बड़ी समस्याइं और संगर्स उत्पन हुए हैं हम लोग एक सरकार हुए हैं हम लोग एक सरकार की हैसियत से सानती और बैवस्था के लिए जिम्मेदार थे और यदी हम सानती और बैवस्था कायम नहीं रख सकते थे तो सारे देश के छिन्विन होने का भैथा उस

2:25 जिम्मेदारी को छोड़ देने का या किसी दूसरे रूप में कार्य करने का हमें अधिकार ना था, लेकिन हमारे मन में सदा यह संगर्स और खयाल रहा है कि महतमा गांधी जी ने जिन बड़े सिध्धान्तों को हमें सिखाया था, उनके बिसेह में हम कपटपूर्ण बेबार करें। चै में हम कपट पूर्ण बैवार कर रहे थे, हम बात तो गांधी जी के सिद्धान्तों की करते थे, पर हर

3:16 कदम पर हम उनको अमल में लाने में असफल होते थे, यह कश्ट कर परिस्तिती थी, परन्तु देश में उस समय जो बस्तु इस्तिती थी, उसे देखते हुए हमें एक विशेस पिरकार से कार्य तो करना ही था, मैं नहीं कह सकता कि हमने इस से भिन्न कार्य किया होता, तो भे अच्छा होता। हम लोगों ने अपनी बुद्धी के अनुसार काम किया

4:03 और किसी समय रहा है। उसार काम किया और किसी समय भी महत्मा गांधी के संदेश की यतार्थता या सत्य से इनकार ना करते हुए हमने वह किया जिसे की हम अत्यांत आवसक समझते थे अब जो पिर्शन बार बार अपने विभिद रूपों में हमारे समझते हैं अपने विभिद रूपों में हमारे सामने आता है बहे यह है कि हम एक ब्यापक रूप में

4:48 नागरिक सोतंतरता के लिए पृतिग्याबद हैं जब तक की नागरिक सोतंतरता का खूब विस्तार ना हो देश में असली सोतंतरता नहीं हो सकती वतांत्रता नहीं हो सकती, stop.

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