B.A 1st Sem. हिंदी साहित्य की महामैराथन (All in One Class) नंबरों का पिठारा 🙌

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो हिंदी साहित्य के इतिहास पर एक व्यापक कक्षा है, जिसमें आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल को शामिल किया गया है। यह प्रत्येक काल की प्रमुख विशेषताओं, कवियों और साहित्यिक कृतियों पर प्रकाश डालता है।

  • हिंदी साहित्य के इतिहास को चार कालों में बांटा गया है: आदिकाल, भक्तिकाल, रीतिकाल और आधुनिक काल।
  • प्रत्येक काल की अपनी विशिष्ट विशेषताएं और साहित्यिक प्रवृत्तियाँ हैं।
  • वीडियो में प्रत्येक काल के महत्वपूर्ण कवियों और उनकी रचनाओं पर चर्चा की गई है।

परिचय

इस वीडियो में मी एंड माय यूट्यूब क्लास में आपका स्वागत है। यह क्लास आपको पास करवाने की पूरी गारंटी देगी। आज की स्पेशल क्लास में आप सभी का दिल से स्वागत है। इस क्लास को अपने मित्रों और विद्यार्थियों को शेयर कर दीजिए।

हिंदी साहित्य का इतिहास

हिंदी साहित्य के इतिहास को चार भागों में बांटा गया है: आदिकाल (1000-1350 ईस्वी), भक्तिकाल (1350-1650 ईस्वी), रीतिकाल (1650-1850 ईस्वी) और आधुनिक काल (1850 से अब तक)।

आदिकाल का नामांकन

आदिकाल को विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग नाम दिए हैं: रामचंद्र शुक्ल ने वीरगाथा काल, रामकुमार वर्मा ने संधि या सारण काल, राहुल सांकृत्यायन ने सिद्ध सामंत काल, मिश्र बंधु ने आरंभिक काल और गणपति चंद्र ने प्रारंभिक शून्य काल कहा है।

आदिकाल के साहित्य

आदिकाल में सिद्ध साहित्य, नाथ साहित्य, जैन साहित्य (रास साहित्य), रासो साहित्य और लौकिक साहित्य लिखे गए। सिद्ध, नाथ और रास साहित्य धार्मिक ग्रंथ हैं, रासो साहित्य वीर साहित्य है, और लौकिक साहित्य में नीति, श्रृंगार और भक्ति साहित्य शामिल हैं।

सिद्ध साहित्य

सिद्ध साहित्य में तंत्र मंत्र पर बल दिया गया, यह पूर्वी भारत में निवास करने वालों पर आधारित था, और इसमें पंच मकार का सेवन किया गया। पंच मकार (मछली, मांस, मैथुन, मुद्रा, मदिरा) का सेवन सिद्ध साहित्य के पतन का कारण बना। सरहपा ने दोहाकोश, शबरपा ने चर्यापद, लुइपा के फुटकर संकलन और डोंबिपा ने योगचर्या, अक्षरद्विकोश और डोंबिगीतिका लिखीं।

नाथ साहित्य

नाथ साहित्य में तंत्र मंत्र की जगह योग पर बल दिया गया और पंच मकार को नकारा गया।

जैन साहित्य

हेमचंद्र ने शब्दानुशासन, शालिभद्र सूरी ने भरतेश्वर बाहुबली रास, स्वयंभू ने स्वयंभू छंद और पुष्पदंत ने नागकुमार चरित लिखा। धनपाल ने भविष्यत कहा लिखा।

रासो साहित्य

रासो साहित्य वीर रस प्रधान था। दलपति विजय ने खुमान रासो, चंदबरदाई ने पृथ्वीराज रासो और जगनिक ने परमाल रासो लिखा। विसलदेव रासो श्रृंगार रस से संबंधित है, जो इस काल का अपवाद है। नरपति नाल्ह ने विसलदेव रासो लिखा।

लौकिक साहित्य

लौकिक साहित्य में ढोला मारू दुआ (कुशल लाभ द्वारा लिखित, श्रृंगार रस से संबंधित) और पदावली और कीर्ति पताका (विद्यापति द्वारा लिखित, भक्ति से संबंधित) शामिल हैं।

आदिकाल की विशेषताएँ

आदिकाल की विशेषताएँ हैं: वीर रस प्रधान काव्य, श्रृंगार रस की व्यंजना, ऐतिहासिकता की कमी, आश्रयदाताओं की प्रशंसा, राष्ट्रीयता की कमी, रासो शब्द का प्रयोग, काव्य के विविध स्वरूप, जन जीवन से कटा काव्य, अलंकारों का स्वाभाविक समावेश, विविध छंदों का प्रयोग और डिंगल पिंगल भाषा का प्रयोग।

भक्तिकाल

भक्तिकाल (1350-1650 ईस्वी) को दो भागों में बांटा गया है: सगुण और निर्गुण। सगुण में रामाश्रय (तुलसीदास) और कृष्णाश्रय (सूरदास) शामिल हैं, जबकि निर्गुण में ज्ञानाश्रय (कबीरदास) और प्रेमाश्रय (मलिक मोहम्मद जायसी) शामिल हैं।

भक्तिकाल की विशेषताएँ

भक्ति भावना वाले काव्य, रहस्यवाद (आत्मा का परमात्मा से मिलन), धार्मिक आडंबर का विरोध, सामाजिक सुधार हेतु काव्य, अंधविश्वासों के खिलाफ काव्य रचना, समन्वयवाद की भावना (हिंदू और मुस्लिम समन्वय), अहंकार का त्याग, लोक मंगल की कामना, सांसारिक मोह माया से दूर और श्रृंगार, भक्ति और नीति से संबंधित काव्य (साहित्य का संगम)।

रीतिकाल

रीतिकाल में दरबारी साहित्य लिखे गए, और इसे श्रृंगार काल भी कहा जाता है। रीतिकाल की मुख्य धाराएँ तीन हैं: रीतिबद्ध (मतिराम, भूषण, चिंतामणि, देव पद्माकर), रीतिसिद्ध (बिहारी, सेनापति) और रीतिमुक्त (घनानंद, आलम, बोधा, ठाकुर)। केशव को रीतिकाल का प्रवर्तक माना जाता है।

रीतिकाल की विशेषताएँ

रीतिकाल में तीन काव्य धाराओं की रचना हुई, पांडित्य प्रदर्शन, वीर श्रृंगार और नीति संबंधी काव्य रचनाएँ, वीर रस प्रधान काव्य रचनाएँ, अलंकरण की प्रधानता, प्रकृति सौंदर्य और नीति निरूपण हुआ।

आधुनिक काल

आधुनिक काल (1850 से अब तक) में भारतेंदु युग (भारतेंदु हरिश्चंद्र, राधा शरण गोस्वामी, बालकृष्ण भट्ट, बद्री नारायण प्रेमधन), द्विवेदी युग (महावीर प्रसाद द्विवेदी), छायावाद (जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा), हालावाद (हरिवंश राय बच्चन), प्रगतिवाद (नागार्जुन, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला), प्रयोगवाद (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय) और साठोत्तरी वाद (दुष्यंत, राजेंद्र यादव) शामिल हैं।

अष्टछाप कवि

अष्टछाप कवि (कृष्णदास, कुंभनदास, सूरदास, परमानंद दास, नंददास, गोविंद दास, चतुर्भुज दास, छितस्वामी) वल्लभाचार्य और विट्ठलनाथ के शिष्य थे, जिन्होंने भक्ति काल में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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Transcript

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0:00 दोस्तो आप सभी का स्वागत है मी एंड माय ट क्लास के अंतर्गत और यस वो एक ही क्लास आपको पास करवाने की पूरी गारंटी देगी अगर आप इसको ढंग से समझते हैं और जैसा मैं कहता हूं वैसा फॉलो करते हैं ठीक है तो अभी जो भी लाइव जुड़े हैं उन सभी का दिल से स्वागत है आज की स्पेशल क्लास में और अगर कुछ कंफ्यूजन है कुछ डाउट है तो आप बाद में पूछ लीजिएगा लेकिन अभी क्लास को फटाफट से अपने मित्रों को अपने प्यारे-प्यारे विद्यार्थियों को अपने दोस्तों को इस क्लास को शेयर कर दीजिए क्योंकि ये क्लास हो चुकी है लाइव और जटा जट फटाफट है ना क्लास को लाइक और शेयर भी कर लीजिएगा मैं पूरा कवर करवाने की कोशिश करूंगा क्योंकि देखो पूरे छ महीने की क्लास अगर एक ही दिन में करवानी है तो उसके लिए आपको पूरा कॉन्फिडेंस होना पड़ेगा ठीक है लिखने वाली है और समझने

0:46 वाली क्लास है तो बातें कम होगी क्योंकि एक ही क्लास है और सबके ऊपर भारी एक क्लास सबके ऊपर भारी देखिए आपका जो हिंदी साहित्य है ना वो हिंदी साहित्य का इतिहास है पेपर का नाम क्या है हिंदी साहित्य का इतिहास ओके तो हिंदी साहित्य का इतिहास है तो ध्यान रखिएगा हम आपको शुरुआत में यहां पर बताए हिंदी साहित्य का इतिहास ठीक है और ये पूरा जो पूरा का पूरा पेपर है ना वो इसी पर डिपेंड है हिंदी साहित्य का इतिहास और हिंदी साहित्य के इतिहास को जानने के लिए हम चार वर्गों में बांटते हैं कितने वर्गों में बांटते हैं चार वर्गों में बांटते हैं ठीक है यस भूगोल की क्लास बिल्कुल होगी डियर जरूर

1:31 होगी फटाफट सेय देख लीजिए और फटाफट से लाइक शेयर भी करते रहिएगा ताकि आपको कोई डाउट या कूजन ना हो तो देखिए हिंदी साहित्य को और जान लीजिएगा यह क्लास आपके नंब की आप एगजाम की जान की तरह बनेगी ओके तो हिंदी साहित्य के इतिहास को चार वर्गों में डिवाइड करते हैं पहला जो है आदि काल पहला क्या है आदिकाल दूसरा जो है भक्ति काल भक्ति काल जो हमें पढ़ना है हमें पढ़ना है इसमें तीसरा है रीति काल रीति काल ओके और जो चौथा जो हमें इसमें पढ़ना होगा वो होगा आधुनिक

2:16 काल आधुनिक काल इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों आपके है ना मतलब पूरी तरह से पूरा का पूरा ये जो हिंदी का जो पेपर है ना आपका आने वाला है वो यही से बनेगा ये कोशिश करेंगे और संभावित है कि आपको इंपोर्टेंट प्रश्न भी दिए मैंने और उसी में से एग्जाम में आएगा तो देखिए हिंदी साहित्य के इतिहास को चार वर्गों में भाटा गया इन चारों को ही हमें समझना है तो देखिए अगर पूछा जाए टाइम पीरियड में तो ध्यान रखना 1000 से अगर पूछा जाए समय तो 1000 से 1350 ईसवी तक का जो काल है वो आदि काल कहलाता है ठीक है इसी प्रकार से अगर पूछा जाए भक्ति काल तो भक्ति काल का याद रखना 1300 से लेकर 1650 तक का जो काल है वो कहलाता

3:04 है भक्ति काल क्या कहलाता है भक्ति काल यानी भक्ति काल का एक समय जिसमें भक्ति साहित्य लिखे गए वैसे तो मैं बताऊंगा सबके बारे में आगे बात करते हैं रीति काल जिसमें रीति बद कविताएं या मतलब मैं पूरा समझाऊ थोड़ा सा टाइम प बता देता हूं तो ये जो है व 1650 से लेकर ये जो काल है वो 1850 तक का है ठीक है फिर आधुनिक काल आधु आधुनिक काल सही लिखा हुआ है ठीक है आधुनिक काल तो आधुनिक काल है वो 1850 से शुरू होता है और अब तक चलता रहता है तो ये है आधुनिक काल तो फटाफट से प्यारे विद्यार्थियों इसको नोट कर लीजिएगा हां अगर कुछ भी याद नहीं है ना ऐसे भी मेरे प्यारे विद्यार्थी होंगे जिनको हिंदी में पाटिया साफ है लेकिन ध्यान रखिए ये क्लास आपको पास तो करवाई देगी और जिसने अच्छे से

3:52 पढ़ा है तो इसके लिए परसेंटेज काम आएगी मान लीजिए मेरी तरबी थोड़ा आप डाउन है लेकिन मैं आपके लिए पूरी मेहनत करूंगा जैसे पिछली बार भी कि है अगर कितनी भी आ जाए आपके और मेरे बीच में जो आज की क्लास में बहुत बड़ी बाधाएं थी उनको भी हमने ऐसे चुटकियों की तरफ फेंक दिया तो बिल्कुल जो लक्ष्य और मन से अगर कोई करता है काम तो व सफल जरूर होता है ठीक है तो बात करते आगे अब देखिए यह सभी विक्रमी स्वत ठीक है अब य पर बात करते हैं एक एक काल के बारे में आपको बताऊंगा तो सबसे पहले हम शुरू करेंगे आदि काल को सबसे पहले शुरू करेंगे आदि काल तो बात करते हैं आदि काल का नामांकन यानी आदि काल का जो नामांकन है वो कब और किस तरह से हुआ नामांकन ठीक है ना तो नोट कर लीजिएगा आदिकाल के नामांकन की और इसके बाद इन सभी की विशेषताओं को इन

4:38 सभी के कवियों के बारे में हम समझने वाले हैं तो फटाफट से ये आप एक नोट्स बना लीजिएगा बेहतरीन तरी से आपके काम आएंगे तो देखिए अब बात करते हैं कि आदिकाल को अलग-अलग विद्वानों ने अलग-अलग नामांकन से संबोधित किया है तो वो मैं आपको यहां पर समझा दूंगा और वो आपको यहां पर ध्यान रखना है तो सबसे पहले बात करते हैं रामचंद्र शुक्ल रामचंद्र शुक्ल रामचंद्र शुक्ल ने आदि काल को वीर घता काल का वीर घता काल नाम दिया ठीक है एग्जाम में प्रश्न यही से बनेंगे दूसरी तरफ बात करें राम कुमार वर्मा राम कुमार वर्मा की बात करें तो राम

5:26 कुमार वर्मा ने इस आदि काल कर तो आदि काल का जो नाम दिया संधि या सारण काल जैसे आपको उत्तर आ तो फटाफट दे दीजिएगा संधि या सारण काल ठीक है इसी प्रकार से नेक्स्ट बात करें प्यारे विद्यार्थियों तो राहुल साक ने इसी सिद्ध सामंत काल का है राहुल शकत राहुल की बात करें तो उन्होंने सिद्ध सामंत काल का है सिद्ध सामंत काल नाम दिया है किसको अधि

6:11 काल की बात कर रहे हैं कि क्या नामांकन हुआ है आगे बात करते हैं तो मिश्र बंधु मिश्र बंधु मिश्र बंधु जिसमें मिश्र भाई यानी मिश्र तीन भाई है जो मिश्र भाई के अंतर्ग आते हैं और इनकी बात करें तो इनको मैं समझा दूं इसमें तीन कवि थे विद्वान थे जिन्होंने इसको मिश्र मिश्र बंधु आधुनिक या आरंभिक काल काहा गया श्याम बिहारी कौन कौन थे इसमें श्याम बिहारी दूसरे कवि थे सुखदेव तीसरे जो थे वो थे गणेश कौन थे गणेश इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों यहां पर मिश्र बंधु काल मिश्र बंधु

6:59 आधुनिक काल मिश्र बंधु आधुनिक काल मतलब आरंभिक काल आरंभिक काल क्या क आरंभिक तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों आप सभी को यहां पर समझ में आ गया होगा कि हमने यहां पर अलग अलग तरह से आपको समझाने की कोशिश की है ठीक है ना तो अब सबसे पहले तो एगजाम में यही से प्रश्न आ सकता है कि आदि काल को किन विद्वानों ने क्या नाम दिया तो य से तो आपका उत्तर सीधा का सीधा निकल जाएगा अब इसके अलावा एक और विद्वान का नाम यहां पर लिखवा देता हूं जिन्होने आदिकाल को जो नाम दिया है प्रारंभिक शून्य काल गणपति सद्र प्रारंभिक शून्य काल और यह जो नाम दिया है वह हिंदी के कवि गणपति चंद्र

7:46 ने गणपति चंद्र तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों वैसे साफ चल रहा है एकदम सही है क्लिटी आप जूम एंड जूम आउट कर लीजिएगा अगर थोड़ा डाउट नहीं दिखे तो इस प्रकार से आपके आदि काल के नामांकन के बारे में मैंने आपको यहां पर समझाया इसको नोट कर लीजिए फिर मैं आपको आगे मिटा रहा हूं तुरंत और मिटा के फिर हम आगे वाले पॉइंट पर बढ़ते हैं तो जल्दी से इसको एडिट अपना नोट कर लीजिए आपने नोट कर लिया तो फिर मैं आगे बताता हूं स्पीड का ऐसा है कि कुछ स्टूडेंट नए हैं अगर मैं फुल स्पीड में पढ़ा दिया तो वो पीछे रह जाएंगे अब देखिए आदि काल के अंतर्गत हम बात करें साहित्य की आदि काल के अंतर्गत साहित्य किई कौन-कौन से साहित्य और किस प्रकार के साहित्य लिखे गए तो ध्यान

8:32 दीजिएगा आदिकाल के हम साहित्य की बात करें तो वो अलग-अलग कैटेगरी के जो साहित्य है वो लिखे गए यहां पर और ये मैं आपको यहां पर वन टू वन लिखवा देता हूं ठीक है सबसे पहले तो हम बात करते हैं सिद्ध साहित्य लिखे गए यहां पर सिद्ध साहित्य ठीक है नोट कर लीजिएगा दूसरी बात करें कि आदिकाल के अंतर्गत नाथ साहित्य लिखे गए नाथों के द्वारा नाथ साहित्य नेक्स्ट बात करें रासो मतलब रास या हम कहे जैन साहित्य क्या कहे जैन साहित्य जो इस काल के लिए इसकी विशेषता के अ लिख सकते हैं इसके अला नेक्स्ट बात करें रासो साहित्य रासो साहित्य इस काल के लिए

9:17 प्रमुख है एंड इसके बाद नेक्स्ट इस तरह के इस काल में लिखे गए व है लौकिक साहित्य लौकिक साहित्य इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों आप सभी को ध्यान दीजिएगा कि यहां पर आदिकाल के अंतर्गत किस कैटेगरी वाइज मतलब साहित्य लिखे गए तो सिद्ध साहित्य नास साहित्य रासो मतलब रास या जैन साहित्य फिर रासो साहित्य और लौकिक साहित्य अब यहां पर ये जो तीन ग्रंथ है ना सिद्ध नाथ और रास सि नाथ और रास ये धर्म से संबंधित है यानी धर्म ग्रंथ कह सकते हैं या धार्मिक ग्रंथ कह सकते हैं या धर्म के ऊपर लिखे गए साहित्य इसको हम धार्मिक साहित्य कह सकते क्या कह सकते हैं धार्मिक साहित्य कह सकते हैं ठीक है इसी प्रकार से प्यारे

10:03 विद्यार्थियों नेक्स्ट बात करें तो आपको ये ध्यान होगा कि राष्ट्र साहित्य वो किस प्रकार का साहित्य है वीर साहित्य किस प्रकार का साहित्य है वीर साहित्य की श्रेणी में आता है और इसके अलावा देखो हम बात करें कि यहा पर धर्म से संबंध लिखे गए वीर से संबंध भी लिखे गए तो फ लौकिक साहित्य में कौन किस प्रकार के साहित्य लिखे गए किस प्रकार की कैटेगरी के साहित्य लिखे गए तो इसके अंतर्गत नीति श्रंगार और भक्ति तीनों प्रकार के साहित्य इसमें लिखे गए नीति सार एवं भक्ति साहित्य यानी इनको समर्पित इस तरह से देखा जाए तो आदि काल के अंतर्गत इन तरह से साहित्य ग्रंथ की रचना की गई इसको अलग अलग तरह के हम डिवाइड कर सकते हैं और वो आप समझ गए होंगे अब मैं इनको वापस

10:50 कैटेगरी में ले जाता हूं इनके इनको डीप में पढ़ा देता हूं ठीक है और वो चीज आप नोट कर लीजिएगा चलो आगे बढ़ते है अब मैं आपको बता देता सिद्ध साहित्य के ठीक है तो एक-एक के बारे में बता देता हूं फटाफट से नोट कर लीजिएगा क्योंकि ये क्लास आपके मैंने कहा है ना एक क्लास ही सब पर भारी पड़ने वाली है और अगर आपने ये क्लास देख ली तो आपके अंदर ये कॉन्फिडेंस न ऑलवेज डेवलप हो जाएगा ये हम पूरी गारंटी के साथ कहते हैं तो अब मैं आपको इसके आगे वाली चीजें बताता हूं आपने नोट कर लिया नोट कर लिया तो मैं उसको एडिट मतलब मिटा देता हूं ठीक है चलो आगे बात करते हैं ये मिटा देते हैं चलो ठीक है देखिए अब आगे आपको बताए तो सिद्ध साहित्य है ना सबसे पहले इसके बारे में आपको समझा देता हूं ठीक

11:36 है छेद के बारे में ठीक है छेद साहित्य तो नोट कर लीजिएगा िद साहित्य है ना इसकी बात करें तो इसमें तंत्र मंत्र पर बल दिया गया इस तरह के साहित्य में किस पर मंत्र बल दिया गया तंत्र मंत्र पर बल दिया गया मतलब इस प्रकार के साहित्य लिखे इसमें तंत्र मंत्र के संबंध में जो ज्यादा है वो फोकस रखा गया इसमें ठीक है एक तो ये आप नोट कर लीजिए इसके बारे दूसरी बात करें तो पूर्वी भारत के अंतर्गत ये जो निवास करते थे उसके ऊपर ज्यादा डिपेंड किया गया पूर्वी भारत यानी पूर्वी भारत की जो व्यवस्था है उस पर ज्यादा ध्यान दि पूर्वी भारत में निवास ठीक है यह नोट कर लीजिएगा नेक्स्ट

12:23 बात करें तो हम ये कह सकते हैं कि पंच मकार का सेवन इसकी विशेषता तो सिद्ध साहित्य की आप अगर छाए तो इसको विशेषता के रूप में इसको प्रकृति के रूप में भी याद कर सकते हैं शि साहित्य की विशेषता क्या थी तो शि साहित्य की विशेषता क्या थी कि तंत्र मंत्र पर बल दिया गया पूरी भारत में निवास जो प्रवृत्ति है उस पर ज्यादा फोकस किया गया और पंच मकारों का सेवन किया गया और शि साहित्य के पतन का काल ही यही है पंच मकार इसके बारे में मैं आपको समझा देता ठीक है तो पहले तो फटाफट से नोट कर लीजिएगा की पंच मकार का सेवन और यही इसके पतन का कारण था साहित्य के स साहित्य के पतन का

13:11 कारण स साहित्य के पतन का कारण पंच मकार का सेवन पंच मकार मतलब म ऐसे पांच बात तो जिनका इनको नहीं करना था अनुसरण जैसे बात करें तो पंच मकार केत हम कहेंगे मछली का सेवन इन्होने अपने साहित्य के अंतर्गत इस चीज का जिक्र किया दूसरा मास ठीक है तीसरा बात करें म म सेही हो रहा पाच मकार मैथुन मैथुन गतिविधियों पर कुछ साहित्य लिखे गए जो मैथुन गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं इसके अलावा मुद्रा यानी बुना हुआ भोजन गुना भोजन इस संबंध के साहित्य पर जोर दिया गया

13:59 तीसरी बात करते हैं मदिरा उन्होंने अपने साहित्य में अगर कहे तो इन चीजों को और ये विद्वान है इन चीजों को बढ़ावा देते थे तो यही कारण थे यही व वजह थी कि जो सिद्ध साहित्य है वह पतन की ओर बढ़ा और यह इस आदिकाल के इस पहले साहित्य के हमने कुछ लकि आपके सामने रखी अब देखो मैं कुछ बुक यहां पर आपको इनके बारे में बता देता हूं जो शायद आपको पूरी तरह से जानकारी होनी चाहिए ठीक है आपने चलो आगे देखते हैं ये मिटा देता हूं ठीक है अब तो पॉइंट मिटा दिया आपने पहले कहा तो मिटाता नहीं आप दिख नहीं रहा पहले बता दिया होता तो गया ठीक है चलो अब बात करते

14:46 ने तो य पर बात करते हैं कि इसके अंतर्गत जो प्रमुख ग्रंथ लिखे ग जिसके ऊपर हम बता दे तो नोट कर लीजिएगा कि सर अपा सरपा दोहा कोस इसने बुक लिखी उसका नाम था दोहा कोस यह बुक है यह क्या है बुक है इससे संबंधित सरफ के द्वारा इसके अलावा सरपा सबर के द्वारा जो लिखा गया वो है चर्या पद य बुक है इससे संबंधित नोट कर लीजिएगा

15:32 नेक्स्ट बात करें तो लुपा इस समय का जो विद्वान है मतलब जो कवि है लुपा इसने जो बुक लिखी व कोई संकलित नहीं हुई या हम कह सकते फुटकर फुटकर संकलन तो फुटकर है यानी इसका कोई संकलन है व मौजूद नहीं होता है इसके बात करें डोपा डबी इस काल के जो कवियों के अंतर्गत है उन्होने जो लिखा तीन बुक लिखी क्या लिखी योग सरया इसके अलावा अक्षर दपा केस ठीक है कोस नेक्स्ट बात करें इन्होने

16:20 जो तीसरी जो बुक लिखी व है डप गतिका इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों यह आपको समझ में आ गया ठीक है यह आपको समझ में आ गया इंपोर्टेंट है जो समझ में आ गया कि नहीं आया तो ये आप नोट कर ली पा जुड़ा क्योंकि य एक ही कैटेगरी के ना इसलिए इसके पीछे पा वर्ड है जो आता है ठीक है ना तोय आपने नोट कर दिया बहुत बढ़िया चलो आगे बढ़े तो ये नोट कर लीजिएगा और क्लास ये एक अंतिम इंपोर्टेंट क्लास है इसलिए जितना चाहे शेयर कर लीजिएगा चलो आगे बात करते है तो ध्यान

17:05 रखिएगा कि इनके पतन के कारण भी क्या थे वो मैंने पांच मकार शब्द बताए जो इनके साहित्य के पतन के अंतर्गत आते हैं ठीक है अब आ मैं आपको आगे जो है व बताता हूं अब बात करते बाकी ना साहित्य राज साहित्य य तो इनके बारे में रेडी आप जानते हैं कि ना साहित्य किनके है और रा जैन साहित्य इनके बारे में डिटेल से बताते हैं तब तक हम बढ़ते हैं आगे आगे देखि ना साहित्य क्योंकि स साहित्य मैंने बता दिया शी साहित्य कंप्लीट हो गया अब दूसरा जो था वह नाथ साहित्य क्या था नाथ साहित्य

17:54 अब इसको नोट कर लीजिएगा जो पोर्टेंट बता रहा ठीक है तो इसके अंदर तंत्र मंत्र की जगह योग पर बल दिया यानी थोड़ा अपोजिट जैसे श साहित्य में तंत्र मंत्र था तो उन्होंने कहा कि तंत्र मंत्र है उसकी जगह योग है उससे संबंध में शास्त्र मतलब साहित्य लिखा जाए तो तंत्र मंत्र की जगह योग साहित्य युग साहित्य पर बल दिया गया नेक्स्ट बात करें पंच मकार जो सि साहित्य के अत जी पतन का कारण था तो नाथ साहित्य में पंच मकार को नकारा गया तो ये हम कह सकते हैं नाथ साहित्य की

18:42 बहुत ही इंपोर्टेंट उपलब्धि विशेषता के अंतर्गत जिसको आप याद रखें ठीक है यह जरूरी था ना साहित्य अब ना साहित्य के बाद जो हमने आपको बताया था वो था जैन या रा साहित्य ठीक है नाथ साहित्य ना साहित्य की बात करें तो इसके अंदर नोट कर लीजिएगा मैं कुछ बात करते विद्वानों के नाम भी बता देता हूं कि जिन्होने कौन कन सी बुक लिखी है तो जैन साहित्य के अंतर्गत आप नोट कर लीजिए मैं कुछ इंपोर्टेंट य पर समझा देता समझ आएगा हेम चंद्र क्या बात करें हेमचंद्र तो इसके

19:28 अनुसार लिखा गया शब्दा अनुशासन शब्दा ग्रंथ लिखा गया दूसरी तरह बात करें साली भद्र सूरी इनके द्वारा इसके अंतर्गत जो साहित्य लिखा गया वो नोट कर लीजिएगा भते स्वर बाहुबली रास श्वर बाहुबली रात नेक्स्ट बात करें स्वयंभू स्वयंभू जो रास और जैन साहित्य के अंतर्गत है उने स्वयंभू संध

20:17 लिखा सोमू सं लिखा नेक्स्ट बात करें पुष्य दत पुष्य दत पुष्य दत्त ने जो लिखा है नाग कुमार चरित नाग कुमार सरित ठीक है ये इंपोर्टेंट इसको नोट कर लेना नेक्स्ट बात करें धनपाल इस अध्ययन साहित्य का जो प्रमुख है धनपाल इन्होने जो साहित्य लिखा भविष्य भविष्यत कहा ठीक है इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों बात करें तो जैन साहित्य से जुड़े कुछ साहित्य और उनके इन्हीं साहित्य से हम कह सकते हैं आदिकाल के अंदर जुड़े हैं उन्होंने जो साहित्य लिखे हैं वो जैन

21:03 साहित्य के अंदर या रा साहित्य के अंदर आते है ठीक है क्लियर हो गया अब बात करते हैं जो इसके बाद मैंने लिखवाया था स्वता स्वता जो लिखवाया था वो रास साहित्य तो ये मिटा देता हूं और आपने नोट कर लिया होगा भविष्यत का हा भविष्यत काह का बिल्कुल आगे बात करें यस भविष्यत का यस थैंक यू माव आपने यहां पर इंपोर्टेंट समय दिया है आगे बात करें नेक्स्ट आपको बढ़ाता हूं यहां पर आगे बढ़ते हैं तो ये चीज अगर कंफ्यूजन है तो बता दीजिएगा बाकी हम सीधा आगे बढ़ते हैं और अब मैं आपको बता देता हूं नेक्स्ट रासो साहित्य रास साहित्य में कुछ कंफ्यूजन है तो बता दीजिएगा और बाकी आप क्लास को शेयर कर लीजिएगा क्योंकि आप सभी को पता है ना यह क्लास आपके लिए इंपोर्टेंट क्लास है और

21:49 हर इंपोर्टेंट चीजें आपको यहां से मिल जाएगी ऐसा उम्मीद करते हैं तो रा साहित्य की बात करें रासो साहित्य रासो साहित्य को हमय कहते कि इसमें जो ग्रंथ लिखे ग वो वीर ग्रंथ या वीर रस प्रदान थे क्या थे वीर रस प्रदान यानी मतलब युद्ध से संबंधित जैसे व साहित्य लिख जाते जिसम वीरस प्रदान होता है तो इसके अंतर्गत हम ये कह सकते हैं वीर रस ीर रस क्लियर तो फटाफट से इसके अंतर्गत जो लिखे गए हम उनकी बात करते हैं ताकि आप नोट कर लीजिएगा क्लियर तो बात करते हैं कुमान रास खुमान रासो तो खुमान रासो की बात करें तो खुमान रासो के ये जो काव्य जो कहते है कि

22:35 ग्रंथ जो लिखा गया वो लिखा गया दलपति विजय नोट कर लीजिएगा दलपति विजय ठीक है इसी तरह से नेक्स्ट बात करें यहां पर तो पृथ्वीराज रासो और इसका किसने लिखा है बताइए जल्दी पृथ्वीराज रासो किसने लिखा है पृथ्वीराज रासो यह किसने लिखा आप उत्तर दीजिएगा ठीक है ना बाकी तो कैसे हो सर बढ़िया है बढ़िया तो पृथ्वीराज रा किसने लिखाय उत्तर दीजिएगा तब तक मैं बता द परमाल रासो परमाल रासो परमाल रास किसके द्वारा लिखा गया है तो परमा लिखा है

23:26 जनक जग आगे बात करें इस कुछ क्यूज बताते हैं तब तक ने बात करते विल देव रास इसमें एक और लिखा गया विल देव रासो वैसे यह रासो है तो वीर ग्र से संबंधित होना चाहि था लेकिन अपवाद है क्यों क्योंकि यह वीर रस प्रदान से ना होकर श्रंगार रस से संबंधित है किससे संबंधित है श्रंगार चंद्रा चंद्र बदाई हा हा हा बिल्कुल बिल्कुल प्र किसने लिखा चंदर बरदाई ने चंदर बरदाई ओके चंदर बरदाई ठीक है सही है बिल्कुल जुग

24:11 निक हां इसको एडिट कर लेते हैं जगनिक क्लियर तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों चंद्र जिसका मूल नाम यस यहां पर बताया मूल नाम बलीद ओके सही है बलीद तो य से देखो ये विसल देव रासु है ना ये वैसे इस समय लिखा गया या इस काल का है लेकिन अगर ये जो वैसे लिखा जाए इसका मेन सब्जेक्ट तो ये श्रंगार काल से संबंधित यानी अपवाद ग्रंथ है ये अपवाद ग्रंथ क्यों क्योंकि शंगा रस से संबंधित है शंगा रस तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियो आप इसको नोट कर लीजिएगा ठीक है और यस विसल देव रासो नलपत लान यस सही बात है चलो आगे बात करें ये मैंने आपको समझा दिया जो रासो अब जो पांचवा वाला था ना जिसको हमने आपको कहा था लौकिक साहित्य तो अब मैं आपको लौकिक

24:57 साहित्य के बारे में बता देता हूं ठीक है और एक एक चीज क्योंकि आप ध्यान रखिएगा आज मैं जो भी बता रहा हूं वो आपके एग्जाम के लिए है आपके एग्जाम के लिए है और य एक ही क्लास है ना आपको सब कुछ कवर करवा देगी तो नोट कर लीजिएगा ठीक है हां एक और लिखना चाहे आप तो बिल्कुल यहां पर नरपत नालन की बात करें तो इन्होंने जो भी इंपोर्टेंट ग्रंथ लिखा था वो भी आप नोट कर सकते नलपत नाल इन्होने लिखा था नरपति नाल ठीक है यह लास्ट में था आप नोट कर लीजिएगा आगे बढ़ते हैं सोशलॉजी की जो क्लास है सर जी आप इग्नोर क कर किसको इग्नोर कर ऋ कोई इग्नोर नहीं कर मेरे लिए सभी स्टूडेंट इंपोर्टेंट है हर एक स्टूडेंट इंपोर्टेंट

25:44 है ठीक है किसी को इनोर नहीं करेंगे और अब चलो आगे बात करते हैं क्योंकि अब बात कम होगी तभी अपना टॉपिक कवर हो जाएगा लंबे टॉपिक है ना इसलिए चलो अब बात करते जो इसके अंदर पाचवा जिसको हम बात करें वो है लौकिक साहित्य वे साहित्य जो इनम नहीं लिखे गए थे वे लौकिक साहित्य केंद्र काउंट करेंगे हम तो इसके अंदर कह सकते हैं डोला मारु दुआ तो अब बताइए ढोला मार दुआ किसने लिखा है जल्दी से बता दीजिए आपको पता होगा इसके बारे में तो ऑलरेडी क्योंकि डोला मार दुआ किसने लिखा है ये आप जानते हैं देखो इसमें जो अभी मैंने बताया था कि इसके अंतर्गत जो

26:29 साहित्य लिख गए वो भक्ति से संबंधित भी थे रीति संबंधित श्रंगार से संबंधित या इस प्रकार से मिक्स अप कह सकते हैं डोला मार दुआ है वो किसके द्वारा लिखा गया यह बताइए और एक विद्यापति के द्वारा इंपोर्टेंट यहां पर लिखा गया ढोला मार दुआ य किसने लिखा आप बता दीजिए तो कुशल लाभ यस बात करते हैं यह जला दुआ है य श्रंगार है क्या है श्रंगार से संबंधित है क्या है श्रंगार कौन से संबंधित है शृंगार रस ठीक है यह नोट कर लीजिएगा अगर डाउट है तो बता दीजिएगा हिंदी भाषा के उत्पति विकास के विद्रोह टॉपिक भी सर करवाओ हा हा कोशिश तो

27:15 करेंगे कि वो भी हो जाए ठीक है चलो आगे बात करते हैं नेक्स्ट है पदावली और कृति पतास ये जो प्रमुख जो ग्रंथ इस लौकिक साहित्य संबंधित ये लिख विद्यापति विद्या पति और यह जो ग्रंथ है वह भक्ति से संबंधित यानी भक्ति काल भक्ति संपन्न ठीक है विद्यापति सही है वड को स कर लेते क्योंकि हिंदी की बात है ना तो हिंदी में हम पॉलिटिकल के जैसे उटपटांग वर्ड नहीं लग सकते ठीक है तो ये वाला नोट कर लिया चलो यहां तक तो आपको इंपोर्टेंट

28:02 हमने यह समझा दिया आदि काल के बारे में अब आपको आदिकाल की विशेषताओं के ऊपर ले जाते हैं जो बहुत ही जरूरी है आदिकाल की विशेषता प्रश्न है ना एग्जाम में टपकता है एग्जाम में टपकता है मतलब आप इसको ले लीजिएगा ग्रहण कर लीजिएगा हाथों हाथ आदिकाल से संबंधित इंपॉर्टेंट ठीक है विशेषता के बारे में तो फिर इसके बाद आदिकाल हो जाएगा समाप्त आदिकाल हो जाएगा समाप्त बात करते हैं आदिकाल के बारे में इसकी विशेषता ओके तो आदिकाल की

28:48 विशेषता ठीक है नोट कर लीजिएगा इंपोर्टेंट पॉइंट आदिकाल की विशेषता कृति पता का सही है और आपको जितने आ रही विशेषता आप भी अपने हिसाब से बता दीजिएगा सर मुझे या जल्दी रप मत किया करो स्पीड स्लो रखो ना देखो कोई तो कह रहा था कि सर आप ब स्लो काम करे कोई कहा स्पीड से लिखो तो थोड़ा सा कंफ्यूजन है कि क्या करें वैसे ऐसा करता हूं ना स्पीड करूंगा ना स्लो करूंगा मीडियम चलता हूं ठीक है कोई नहीं अब मिटा दिया आप थोड़ा पीछे जाक वीडियो में देख लीजिएगा स्क्रीनशॉट ले लीजिएगा अबकी बार में थोड़ा ध्यान रखूंगा कि थोड़ा आप लिखे पूछने के बाद मिंगा ठीक है भूगोल की क्लास हा भूगोल की लवेज होगी लेकिन अभी नहीं सर आज स्पीड जरूरी है देखिए कोई तो कह र है स्पीड जरूरी है फिर भी मैं ऐसा करता हूं मेंटेन रखता हूं मतलब एवरेज क्या करूंगा एवरेज कर रखता हूं ठीक है चलो विशेषताओं

29:36 के ऊपर सवाल आ गया है तो बात करते हैं विशेषताओं के बात करें तो अब तक हमने जो अभी पढ़ा है ना उसको आपने जान लिया होगा विशेषता का मतलब क्या होता है जब हम किसी को जानते और पहचानते हैं ना तो उसके बारे में विशेषता ऑटोमेटिक बाहर निकल आती है तो अब तक हमने आपको आधि काल से रूबरू तो करवा ही दिया है तो अब विशेषता भी ऑटोमेटिक बाहर आनी चाहिए तो हम बात करें इसके अंदर कुछ ग्रंथ जो लिखे गए कवियों के ह संभव एक मिक्स मिलाकर विशेषताएं निकलती है तो पहली जो विशेषता है कि इस संबंध में वीर रस प्रधान काव्य लिखे गए पहली विशेषता वीरस प्रदान काव्य क्या है पहली विशेषता क्या है कि इसके अंदर वीरस प्रधान से संबंधित काव्य लिखे गए बिल्कुल सही यहां पर लक्ष्मी अशो बिल्कुल सही आंसर दिया है नेक्स्ट बात

30:22 करें संगर रस बिल्कुल संगर रस की यहां पर व्यंजना होती है दूसरा यानी संग रेस के बारे में भी य पर वर्णन होता है नेक्स्ट य पर बात करें ऐतिहासिकता की कमी भले ही आदि काल है लेकिन इसमें इतना ऐतिहासिकता का वर्णन नहीं किया गया जो होना चाहिए था तो बात करें ऐतिहासिकता की कमी तीसरा तिस की क्लियर है ना इंपोर्टेंट है नेक्स्ट बात करें तो एक चीज भी है और वो क्या है कि आदि काल के अंदर जो ग्रंथ लिखे गए ना उसमें क्या है कि जैसे मान लीजिए कोई कवि है अगर वो किसी सम्राट के अकॉर्डिंग अंडर में काम कर रहा है किसी मालिक के अंडर में

31:09 कोई कवि काम कर रहा है तो इस प्रकार से वो आश्रय दता हुआ तो आदि काल में जो कवि कुछ आश्रय दाता थे उन्होंने अपने आश्रय दाताओं के प्रशंसा स्वरूप यहां पर लिखे गए हैं तो हम य कहेंगे आश्रय दाताओं की प्रशंसा आश दाताओं की क्या है प्रशंसा इस ग्रंथ में की गई है नेक्स्ट बात करते हैं तो आदि काल है तो इसमें भक्ति काल संक ये वगर है लेकिन यहां पर हम बात करें राष्ट्रीयता के संबंध में कोई भाव इन साहित्य में प्रकटन नहीं होता है तो हमय कह सकते राष्ट्रीयता की कमी राष्ट्रीयता की कमी नेक्स्ट बात करें मतलब विशेषताओं में तो सटा लिखना है कि

31:55 रासो रा शब्द का प्रयोग हुआ है इसमें जो सबसे जरूरी है रासो शब्द का प्रयोग और यह इसकी इंपोर्टेंट विशेषताओं के अंतर्गत शामिल है नोट कर लीजिएगा नोट कर लीजिएगा राष्ट्रीयता की कमी यानी राष्ट्रीय एकता की कमी जो आप समझ गए नेक्स्ट बात करें काव्य के विविध स्वरूप यहां पर लिखे गए हैं काव्य के विविध स्वरूप क्योंकि एक ही प्रकार का काव्य नहीं है जैसे भक्ति काव्य है श्रंगार काव्य है और जैसे मैंने वीर काव्य इस प्रकार से विविध प्रकार के काव्य इसमें लिखे गए हैं यानी प्रबंध काव्य मुक्त

32:48 काव्य ठीक है तो प्यारे विद्यार्थियों समझ में आ गया यानी ये जो है वो आदि काल की विशेषता बताई हैने किस विशेषता बताइए आदि काल की विशेषता ठीक है आदि काल की विशेषताएं वो हमें समझनी है क्योंकि एग्जाम में पूछा जाएगा कि आदि काल की प्रमुख विशेषताएं बताइए और प्रश्न तो यह भी आ सकता है कि भाई इन के बारे में प्रकृति बताइए तो अगर प्रकृति का प्रश्न भी आता है तो यह भी यही है प्रकृति के संबंध में प्रश्न पूछा जाए कि आदिकाल की प्रकृति बताइए तो यही प्रकृति के अंदर आप लिखिए विशेषता के अंदर भी लिखिए जो आपको समझ में आ जाना चाहिए ठीक है आगे बात करें जन जीवन नेक्स्ट यहां पर कुछ विशेषताओं में बात करें तो ये काव्य है ना वो थोड़े अलग

33:36 प्रकृति के भी नेचर होते हैं तो वो नोट कर लीजिए यहां पर ठीक है जन जीवन से कटा काव्य है यहां पर जन जीवन से यानी ये जो काव्य है ना इसका जन जीवन के संबंध में इतना उल्लेख नहीं होता तो जन जीवन जैसे कि राजा रानी राजकुमार राजकुमारी हेतु लिखा गया काव्य य यानी प्रशंसा के लिए क्योंकि अभी हमने क्या क प्रशंसा के लिए तो इसके अंतर्गत जो काव लिखे गए ना वह

34:23 पूरी तरह से वह पूरी तरह से किसी के प्रशंसा के रूप में भाई राजा जी बहुत बढ़िया है उसके संबंध में लिखते हैं तो किसी राजकुमार के संबंध में या किसी के मतलब राजकुमार के तो इस प्रकार से ये डिपेंडेबल कह सकते हैं कि जन जीवन से कटे काव्य है मतलब यहां पर जन जीवन के बारे में झलकियां नहीं मिलती है लोग कैसे थे लोगों का जीवन या उसके बारे में को टीपनी नहीं की है जन जीवन से संबंधित काव्य नहीं थेय ठीक है यस और अलंकारों का स्वाभाविक समावेश सही बात बताइए यह भी आप इसमें नोट कर लीजिएगा कि अलंकारों का स्वाभाविक समावेश है ऐसा नहीं अलंकार होने ही चाहिए स्वाभाविक रूप में यहां प अलंकार को समावेश किया गया

35:09 है ठीक है ये ब्लॉक में वो अलग से अलग से मतलब इनके ही अंतर्गत है मतलब ये आप इनकी प्रकृति या विशेषता में भी जोड़ सकते हैं तो यह अलग नहीं है अलग का मतलब इसके साथ ही है बट ये है ना जगह कम थी तो मैंने इसको थोड़ा ऐसे कर दिया ताय मिक्स नहीं हो जाए ये और ये साथ में लिख तो मिक्स नहीं हो जाए इसलिए मैंने इसके नीचे ये लिखे मतलब इसका ही पार्ट है य इसका ही पार्ट है ठीक है समझ में आ गया आगे बढ़े ठीक है तो आम जनता से संबंधित नहीं है आदिकाल के काव्य और विविध संधों का इसमें प्रयोग किया गया है यह भी नोट कर लीजिएगा

35:59 विविध संधों का प्रयोग आपको पता है इतना बड़ा य प्रश्न क्यों करवा रहा हं क्योंकि एग्जाम में आने वाला है तो इस प्रकार से मुझे लिखवाना जरूरी था नेक्स्ट बात करते हैं तो डिंगल भाषा का इसमें प्रयोग हुआ है कौन सी भाषा ंगल तो यहां तक मैं यह करवा रहा हूं ओके डिंगल भाषा का प्रयोग और लास्ट के चरित्र काव्य लिखने की परंपरा यहां से विकसित होती है

36:52 ऊपर तो इस प्रकार से आपके सामने आदिकाल हमने पूरा कर लिया है और आपके एग्जाम में सम समाते नंबर लाएगा अगर आपने मैंने अभी जो पढ़ाया है डिंगल पिंगल यस डिंगल पिंगल तो दोनों लिख सकते हैं यहां पर डिंगल और पिंगल डिंगल और पिंगल ये दोनों मतलब प्रारंभिक जो भाषा है जो कहते थे ना जो सामान्यत भाषा के तौर पर यूज होती है पहले की तरह तो वो डिंगल और पिंगल भाषा के अंतर्गत यह जो सा है मतलब काव आदिकाल के वो लेख गए हैं तो ये क्मत नंबर के लिए आपको समझ में आ चुका होगा अब मैं आपको ले चलता हूं भक्ति काल भक्ति काल की ओर और यह भी अपने इंपोर्टेंट है ओके बहुत ही ज्यादा इंपोर्टेंट है यानी अगर मैं आपको कहू तो एक क्लास वो कहता है ना एकलो रबड़ी सब

37:39 माते भारी वो वाली क्लास यहां पर ये बन सकती है आपके लिए तो मेहनत कीजिएगा जो भी आपको समझा रहा हूं उसको एक बार रिवीजन जरूर कीजिएगा जो भी बताया है उसको रिवीजन कीजिएगा और बाकी आप अपने स्तर पर मैंने आपको बताया कि उसकी भी तैयारी होनी चाहिए चलो आगे बात करते हैं तो ये मिटा देता हूं नोट कर लिया ना आपने क्योंकि अभी कुछ कह रहे थे सर हमने तो नोट किया ही नहीं आपने मिटा दिया तो अब ये नोट कर लीजिएगा क्योंकि मैं अ मिटाने जा रहा हूं ओके ओके तो अब बढ़ते हैं अपने जो इंपोर्टेंट है नेक्स्ट की

38:25 र इंपोर्टेंट उसके ऊपर बढ़ते हैं ठीक है भक्ति काल तो अब लिख भक्तिकाल के बारे में पॉइंट नोट कर लीजिएगा क्योंकि भक्तिकाल के ऊपर भी आपके लिए कुछ बहुत ही ज्यादा इंपोर्टेंट है वो मैं आपको यहां पर बताने वाला हूं जिसको पूरी तरह से आपको नोट करना है ठीक

39:14 है यस शुरू करते हैं सर जी बहुत मेहनत की है उनके बनाए नोट्स लग रहे हां हां देखो आपने कहा था ना कि सर हमारे लिए क्लास लेकर आ जाइए क्योंकि हम आपके भोसे हैं आपका पॉलिटिकल का आपके लिए पूरी मेहनत की थी वो आपका अच्छा हुआ है हिस्ट्री का अच्छा हुआ है तो हम चाहते कि हमारे हिंदी साहित्य के जो स्टूडेंट जो लाडले विद्यार्थी है उनका भी कल्याण होना चाहिए तो बस यह आप सबके लिए आप सबकी मेहनत की ही क्लास है ठीक है ना हमारा तो एक सहयोग है कि हम आप तक यहां पर पहुंचा रहे हैं आपके नंबर अच्छे आरहे वो आपकी मेहनत पे होता है चलो बात करते हैं अब तो भक्तिकाल से आपके सामने लिखा हुआ है 1350 से आगे का जो काल है

40:01 गला सूख गया था चलो अब वापस गाड़ी पटरी में लेते आते भक्ति तो भक्तिकाल को थोड़ा और बढ़िया भक्त में बना लेते हैं इसको और अच्छा समझा लेते हैं ताकि एग्जाम में सीधा टपक जाए तो नोट करते हैं 1300 50 1600 1700 नहीं है कंफ्यूजन वाला है कहीं गलत हो सकता है लेकिन यह भी कह सकते हैं कि कभी कबार क्या होता है कि देखो मोस्ट ऑफ तो यही है 1300 से 1650 लेकिन कभी कबार एग्जाम में यह भी आता है मतलब बड़े कंपटीशन एग्जाम हो है ना तो उसम यह काल 1700 तक भी खींच के आ जाता है लेकिन आपको कितना याद रखना है 1350 से 1600 ये 1700 कब होता है कंपटीशन एग्जाम है ना उसम कंफ्यूजन हो जाते है आपको फिलहाल के लिए याद रखना है 1350 से 1650 ओके तो ये कंफ्यूजन है तो क्लियर हो जाए सर जियोग्राफी की क्लास हां वो भी क्लास होगी

40:47 फिलहाल के लिए हम बात करते हैं यहां पर तो देखिए यहां पर बात करें तो भक्ति काल है ना उसको हम दो कैटेगरी में बांटते हैं कि इसके अंतर्गत दो प्रकार के काव्य लिखे गए एक तो सगुण क्या बात करें सगुण एक चीज नोट कर लीजिएगा सगुण क्या बात करेंगे सगुण दूसरी है निर्गुण इसमें जो काव्य लिखे गए सगुण और निर्गुण और एगजाम में ध्यान रखिएगा कि भक्ति काल की या तो विशेषता प्रश्न आएगा 100 पर ऐसे कॉपी में नोट कर लीजिएगा कि सर इसी समय कह रहे थे भक्ति काल की या तो विशेषता प्रश्न आएगा पूरा या प्रश्न आएगा कि हिंदी के इतिहास में भक्ति काल को स्वर्ण काल क्यों माना जाता है इतिहास के अंतर्गत भक्ति काल को स्वर्ण काल क्यों कहा जाता है यह प्रश्न टपकने

41:32 वाला प्रश्न है एग्जाम में या फिर आएगा भक्ति काल की सगुण शाखा की विशेषता बताइए निर्गुण की विशेषता बताइए प्रश्न यहां से बनेगा आपके लिए बस यह ध्यान रखिएगा ठीक है ना सगुण और निगुण क्लियर सगुण निर्गुण चलो आगे बात करते हैं यस बिल्कुल मा सगुण निर्गुण सही बात है अब बात करते य पर तो देखिए सगुण जो काव्य है ना इसकी मैं आपको कैटेगरी बता देता हूं यहां पर कि इसके अंतर्गत जो काव्य जो लिखे गए या जो भक्ति प्रधान काव्य थे क्योंकि भक्ति है तो भक्ति प्रधान है तो इसके अंदर जो राम से संबंधित जो काव्य लिखे गई उसको कहेंगे रामाश्रय ठीक है और एक है

42:19 कृष्णाश्रय तो प्यारे विद्यार्थियो इस प्रकार से ध्यान रखिएगा सगुण सगुण भक्ति काल का सगुण जो काव्य है इसके अंतर्गत हम दो कैटेगरी में बांटते हैं तो रामाश्रय शाखा से संबंधित और कृष्णाश्रय रामाश्री और कृष्णाश्रय अगर कंफ्यूजन है तो बता दीजिएगा ठीक है निर्गुण तो निर्गुण को भी हम दो तरह से बांट सकते हैं इसके अंदर जो काव्य लिखे गए एक तो लिखे गए ज्ञाना श्रय ज्ञान से संबंधित जो काव्य थे ज्ञानाश्रई और दूसरी हम बात करें यहां पर जो प्रेम से संबंधित जो ग्रंथ यानी प्रेमा श्री प्रेमा श्री इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों आप बहुत अच्छे से बेटर वे पर सीधे-सीधे समझ पा सकते हैं कि भक्ति काल है हिंदी का हिंदी साहित्य का उसके

43:04 अंदर जो काव्य सगुण और निर्गुण के अंद है सगुण का मतलब होता है रामाश्री और कृष्णाश्री से संबंधित निर्गुण के अंतर्गत ज्ञाना श्री और प्रेमा श्री शाखा से संबंधित काव्य क्लियर चलो आगे बात करते हैं नेक्स्ट यहां पर बताए तो एक चीज यहां से ये नोट कर लीजिएगा जैसे रामाश्री शाखा के अंतर्गत जो काव्य लिखे ग इसके प्रधान कवि कौन है प्रधान कवि यानी प्रतिनिधि प्रतिनिधि कवि इस रामाश सागर के जो प्रतिनिधि कवि कौन है आप सबको याद होगा क्योंकि हमने ऑलरेडी पहले बताया अगर नहीं बताया तोलो आप लिख लीजिएगा तुलसीदास वेरी वेरी इंपोर्टेंट कौन है तुलसी दास कौन है तुलसीदास करेक्ट है नोट कर लीजिएगा ओके मॉडल पेपर तो मिल

43:52 जाएगा फिलहाल के लिए ये तो पढ़ लीजिए मॉडल पेपर में भी क्या है पढ़ने वाली चीज है तो फिलहाल ये पढ़ जी मौल ऑलरेडी क्लियर हो जाएगा यस तुलसीदास आगे बात करते हैं तो कृष्णाश्री शाखा यानी भक्ति काल की कृष्णाश्री शाखा की जो शुभारंभ करते हैं इसकी जो प्रधान मूल जो प्रधान जो पुरुष है वो है सूरदास प्रतिनिधि कवि कौन है सूरदास वन टू वन इंपोर्टेंट नोट कर लीजिएगा सूरदास यस बिल्कुल आपने सही बताया सूरदास यानी आप पूरी तरह तैयार होके आए हैं बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया डियर चलो आगे बात करते हैं तो ज्ञाना श्री शाखा ज्ञानश्री शाखा से संबंधित इसका मतलब आपको पता होगा तो ज्ञानश्री शाखा के जो प्रतिनिधि है कवि वह है कबीर दास सभी

44:39 अच्छा आंसर दे रहे हैं कबीर दास इसी प्रकार से जो भक्ति काल की निर्गुण शाखा के अंतर्गत प्रेमास यानी प्रेम से संबंधित ज्यादातर काव्य लिखे उसकी जो प्रधान कवि है व है मलिक मोहम्मद जायसी प्रतिनिधि कवि कौन है मलिक मोहम्मद जयसी मलिक मोहम्मद जायसी ठीक है नोट तो दिख रहा होगा मलिक मोहम्मद जायसी यस बिल्कुल बिल्कुल करेक्ट है करेक्ट है बिल्कुल एकदम सही उत्तर दे रहे हैं आप सभी टैलेंटेड हो न ऑलवेज आप टैलेंट यानी आपकी तैयारी इससे मुझे लग रही है कि आपकी तैयारी अच्छी है बहुत बढ़िया ऐसी तैयारी होगी तो आपके काम

45:27 आ जाएगी तो अब मैं आपको बता देता हूं इस काल की विशेषताओं को लेकर ठीक है ये नोट कर आपने नोट कर लिया होगा मिटा दे क्या ठीक है मिटा देते हैं ओके आपने नोट कर लिया होगा तो अब मैं मिटा रहा हूं चलो अब बात करते हैं कि भक्तिकाल की विशेषता वैसे ध्यान रखिएगा कि मैंने आपकी हिंदी की वैसे जो इंपोर्टेंट क्लास ली थी ना वो छोटे-छोटे क्वेश्चन वाली उसमें हर एकही कवि की रचनाओं के बारे में ऑलरेडी मैंने आपको बताया हुआ ठीक

46:13 है यस निर्गुण ईश्वर में विश्वास नाम स्मरण को महत्व गुरु की महत्व बाय आडंबर का विरोध बिल्कुल सही बात है कोष पूरा करा दो हां तभी तो कोशिश कर रहा हूं क्योंकि पूरी तरह से छ महीने का कोर्स होता लेकिन आपके लिए कितना शॉर्ट इजी और समझ में आ सके बस वही हम प्रयास कर रहे हैं तो इस काल के अंतर्गत हम बात करें कि भक्ति काल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण काल क्यों कहा जाता है यह प्रश्न नोट कर लीजिएगा परीक्षा में टपकने वाला प्रश्न है और याद कर लीजिएगा मतलब आपकी वन स तो होगी ना आपके पास बिल्कुल होगी तो इस प्रश्न को रख लीजिएगा हिंदी साहित्य को मतलब भक्ति काल को हिंदी साहित्य का स्वर्ण काल क्यों कहा जाता है ठीक है यह नोट कर लीजिएगा आपके

46:59 जबरदस्त और इंपॉर्टेंट काम आएगा क्लियर चलो अब बात करते हैं विशेषताओं के ऊपर तो भक्ति भावना वाले काव्य रच गए यहां पर लिखे या रचे गए ठीक है इस प्रकार दूसरा इंपोर्टेंट यहां पर बताऊ तो हम यह कह सकते कि रवाद के काव्य यहां लिखे गए रवाद से

47:50 संबंधित और जैसा कि रवाद का मतलब होता है जिसमें कुछ गुप्त रस्य सु कहने का मतलब यहां पर मैं आपको अगर बताऊ तो रवाद को हम इस प्रकार से यहां पर इंट्रोड्यूस करेंगे जो आपको समझ में आ सके कि ऐसे काव्य जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ते हैं यह पहले लिख रहा हूं फिर मिटा भी दूंगा आत्मा का परमात्मा से मिलन ठीक है आत्मा का परमात्मा से मिलन यानी हम कहेंगे यहां पर पर आत्मा का मतलब है दूसरी यानी पुरुष तो पुरुष का आत्मा यानी ईश्वर आत्मा यानी ईश्वर तो इस प्रकार

48:37 से हम कह सकते हैं कि इसके अंतर्गत जो काव्य लिखे गए उन काव्यों में ज्यादातर आत्मा का परमात्मा से मिलन जैसी बातें यहां पर बताई गई है और इस प्रकार के काव्य यहां पर लिखे गए हैं जिस लिए हम कहते हैं रहस्यवाद क्या कहेंगे रहस्यवाद कहेंगे ठीक है चलो आगे बात करते हैं इसकी विशेषता के बारे में ये आपने नोट कर लिया होगा क्योंकि ये बीच में लिखा पॉइंट इसलिए मिटा रहा हूं इसको ठीक है चलो आगे बढ़ते हैं आगे नोट कर लीजिएगा इस काल में धारमिक आडंबर का विरोध हुआ

49:24 है क्यों क्योंकि आपने देखा निर्गुण निर्गुण शाखा तो इससे आप समझ जाइएगा कि इसके अंकर अगर ऐसे कोई धर्म लिख ऐसे ग्रंथ लिखे जो धार्मिक आडंबर से संबंधित है ज्यादा तो उसका विरोध इसमें हुआ है क्या हुआ है इसका विरोध हुआ है ठीक है सर विशेषता प्रवृत्ति का अर्थ अलग-अलग होता है क्या विशेषता और प्रवृत्ति मोटे तौर पर आप समझ लीजिएगा दोनों एक ही होते हैं ज्यादा प्रकृति का मतलब प्रवृति मब थोड़ी गहराई में देख थोड़ी अलग विशेषताओं से ही संबंधित होती है थोड़ी डीप लेकिन मोटे तौर पर आप दोनों अगर एक तरह से समझ शामिल लिखोगे तो गलत नहीं होगा ठीक है आगे बात करते हैं इस तरह के काव्य में भक्ति काव्य में हम यह कह सकते हैं कि

50:09 सामाजिक सुधार हे तो काव्य लिखे हैं सामाजिक सुधार हेतु काव्य ठीक है समाज में सुधार हो उस प्रकार को ध्यान में रखते हुए नेक्स्ट बात करें अन विश्वासों के खिलाफ है यानी आडंबर और अंधविश्वास पांचवा पॉइंट अविश्वास के खिलाफ काव्य रचना अन

50:54 विश्वासों के खिलाफ काव्य रचना नेक्स्ट बात करते हैं तो समन्वय वाद की भावना मोस्ट इंपोर्टेंट चट्टी विशेषता समन्वय वाद की भावना देखो समन्वय का मतलब क्या होता है कि जो भक्ति काल में जो काव्य लिखे गए ना वो हिंदू और मुस्लिम दोनों के मध्य समन्वय करते हैं ऐसे नहीं बांटने वाला काम नहीं है जैसे किसी ने मतलब विरोध होता है ना कि भाई ये धर्म या उस धर्म तो इस काव्य में किसी एक दूस का विरोध नहीं किया गया

51:42 समन्वय ठीक है तो यह नोट कर लीजिएगा एग्जाम में ऐसा पूछा जा सकता है यस गरु का महत्व हम ले सकते है कि गरु का महत्व और मैं वसे लिख इसको मिटा देता हूं क्योंकि अ मुझे वापस पाच छ के बाद दूसरी विशेषता लगानी है ना यानी विशेष नंबर सात तो फिलहाल के लिए मैं मिटा रहा हूं आपने नोट कर लिया होगा नोट कर लिया आपने अगर ये नोट कर लिया तो मैं मिटा रहा हूं क्योंकि मुझे वापस आपको अगर नेक्स्ट विशेषता बतानी है ठीक है तो मिटा रहा हूं ओके तो अब नेक्स्ट लिखिए अहंकार का इसमें त्याग किया गया या ऐसे ग्रंथ जिसम अहंकार को त्यागा गया है

52:31 अहंकार का क्या है त्याग है ठीक है इसके अलावा सर जी आपने मेरा आग्रह मान कर ऊपर कर दिया आप हमेशा हमारे लिए प्रेरणा स्त है जी थैंक यू यस शोभा ने गाय की लाली मेरे लाल की जिद देखो सित लाल सही बात है इससे संबंधित है और बहुत अच्छे यहां पर कही ग आपने फिर बात कर लोक मंगल की भावना यानी इसमें जो काव्य है उसकी विशेषताओं की बात करें लोक मंगल मतलब लोक कल्याण और लोगों के अच्छे के लिए उसको दिशा देने के लिए जो काव्य है आज थोड़ा गले की बैंड बजी हुई है लोक मंगल की कामना या इसमें जो काव्य लिखे गए वो लोग

53:18 मंगल की भावना से विभूत है इस काव्य में लोक मंगल की भावना प्रतीत होती है नेक्स्ट जो इसकी विशेषता की बा करें तो हम कहे सांसारिक मोह माया त्यागे गए ग्रंथ है सांसारिक मुह माया से दूर इन ग्रंथों के अंतर्गत भावनाए है वो अभिव्यक्त होती है सांसारिक मोह माया त्यागे हुए क्लियर समझ में आ गया चलो आगे बात करते हैं तो हम ये कह सकते हैं कि विशेषण नंबर 10 10 ऑन 10 और ये कर द तो तो आपकी बेहतरी मतलब गाड़ी टॉप गियर पर जाएगी संग और भक्ति साथ साथ नीति से संबंधित भी काव्य है

54:03 इसमें सार भक्ति और नीति से संबंधित यानी इन तीनों का भक्ति शक्ति सार से संबंधित काव्य य पर मिलते हैं इसको हम कहेंगे संगम साहित्य का संगम साहित्य का संगम ठीक है साहित्य का क्या कहेंगे संगम कहेंगे तो अब फटाफट और जटा जट से इसको लिख लीजिए क्योंकि अब मैं बढ़ रहा हूं रीति काल की ओर ताकि इंपोर्टेंट आपको

54:50 एक एक चीज याद रहे और एग्जाम के लिए प्रश्न इन्ही में से सम आए तो इसलिए आप इसको रिवीजन भी जरूर करें कोई डाउट या कंफ्यूजन है तो व पू लेकिन अब मैं आगे बढ़ता हूं और रीतिकाल की ओर जाता हूं तब तक नोट कर लिया होगा नोट कर लिया तो अब मैं मिटा देता हूं ठीक है चलो मिटा देते हैं बहुत बढ़िया यस स्वर्ण युग कह सकते हैं लिख दिया चलो बढ़िया है और लिख भी दिया और लाइक भी कर दिया ना लिक से मुझे लाइक याद आ गया तो प्यारे विद्यार्थियों क्लास को आगे बात करते हैं अब रीति काल की की ओर बढ़ते हैं यह भी मिटा दिया लेकिन आता

55:36 था अब रीतिकाल ठीक है रीतिकाल को इंपोर्टेंट मानते हैं इनके बारे में हम लिखेंगे तो हम यह कहेंगे कि रीति काल के अंतर्गत तीन प्रकार के साहित्य है वो लिखे गए हैं जिसमें कहेंगे दरबारी साहित्य क्या कहेंगे दरबारी साहित्य या हम यह भी कहे कि रिध काल के अंदर जो काव्य लिखे गए हैं वह आश्रय दाताओं के साध में लिखे गए ठीक है ना तो आश्र दाताओं के साहित्य

56:35 रीति काल को शृंगार काल भी कहते हैं इसे कहते कम समय में अच्छा पढ़ना हां यह वही क्लास है जो कम समय में आपको पूरा करवा रही है चलो बढ़िया है यस तो इसको सार भी कहते हैं क्योंकि अलग अलग विवान इसको अलग संबोधित किया अगर आप चाहे तो इसको नोट कर सकते हैं एग्जाम में यह अगर आपके मान लीजिए अगर प्रश्न आए तो आपको इस तरह से लिख सकते हैं ठीक है कंफ्यूजन नहीं होगा चलो आगे बात करते हैं यह आपने लिख द फिर हम कहेंगे कि रीति काल में त्रिवेणी संगम पाया जाता

57:22 है अब देखिए भक्ति काल से संबंधित एक टॉपिक है वोने वापस करवाऊंगी अष्ट साब कवियों के बारे में अष्ट साब कवियों के बारे में आपको समझाऊ ठीक है यस तो बात करते हैं इनसे संबंधित रीति काल ठीक है और जैसा कि य य पर उत्तर आ भी गया है रीति काल की मुख्य धाराए तीन है रीति काल की मुख्य धाराए तीन है और आप सभी ने उत्तर वैसे ही दे दिया है लक्षणों के आधार पर लिखे गए काव्य सही बात है लक्षणों के आधार पर तो यह आप इसमें बिल्कुल नोट कर लीजिएगा लक्षणों के आधार

58:08 पर लिखे गए काव्य और इसमें तीन प्रकार मतलब हम यह कह सकते हैं कि रीतिकाल की मुख्य धाराएं है वह तीन है और आप सभी ने बेहतरीन उत्तर दिया है धाराएं तो तीन धाराएं यहां पर रीतिकाल की है ठीक है इसके संबंध में बता रहा हूं एक दो और तीन तीन यहां पर बता देता हूं तो सबसे पहले नोट कर लीज रीति बद रीति बद काव्य धारा दूसरा आप य पर नोट कर लीजिएगा रीति सिद्ध

59:00 ित काव्य धारा और तीसरा है रीति मुक्त काव्य धारा ठीक है और यह चीज आपको यहां पर पता होगी क्योंकि रीति बत काव्य में यानी इसमें रीति से संबंधित जो काव्य है उसका उल्लेख होता है रीति सिद्ध यानी तियो को सिद्ध करने के ऊपर जो काव्य है रीति मुक्त यानी रि से तियो से परे हम ये क्या कहेंगे कि रीति हों से परे जो काव्य लिखे गए हैं ठीक है रीतिबद्ध रीति मुक्त और रीति छेद तो ये बिल्कुल आप इसको अच्छे से याद रखिएगा अन्य नाम अलंकृत कर कला और श्रंगार काल यस बिल्कुल इन इन काल को जैसे मैंने संक तो लिखा ही है इसके अलावा आप नेक्स्ट

59:46 य यहां पर नोट कर लीजिएगा इसको अलंकार कह सकते हैं या फिर कला काल भी कह सकते हैं चलो अब जस्ट ये तो आपने नोट कर लिया इसके बारे में भी मैं आपको और थोड़ा अच्छे से समझा देता हूं तो नोट कर लीजिए ऋति काल में

1:00:33 रीति हों से बंद त से संबंधित बंद तियो से बंद कर काव्य किए है ठीक है ये नोट कर गा आगे मैं आपको बताऊ तो अब मैं क्या करता हूं थोड़ा मुझे बोट है ना इतना बड़ा तो बोट है लेकिन ये भी छोटा पढ रहा है अने पढ़ने के लिए मैं ये लाइन वापस मिटा देता हूं क्योंकि अब थोड़ा थोड़ा तीनों के बारे में बता देता हूं ताकि आपको थोड़ा समझने में इजी रहेगा ठीक है ओके तो ये वापस मिटा देता हूं क्योंकि बस यही है लिखो और फेटो मारवाड़ी में लिखो और फेटो तो बस ये वाला काम ही मैं यहां पर कर रहा हूं आपके लिए तो नोट कर लीजिएगा तीनों के

1:01:19 बारे में बता रहा हूं कि रीति बद इसके अंतर्गत हम एक एक के बारे में बात करें रीति बद तो इसके संबंध में जो कवि है रीति बद तो पहले इनके लिए हम संबंध इंपोर्टेंट करेंगे ठीक है रीति बद के तो इसके संबंध में जो कवि है व मतिराम मतिराम दूसरा है भूषण क्या कहेंगे भूषण तीसरा हम यहां पर कहेंगे चिंतामणि क्या कहेंगे चिंतामणि और इसके अलावा एक आप देव पद्माकर देव पद्माकर ठीक है ये नोट कर लीजिएगा एक एक बहतर इंपोर्टेंट चीज आपके

1:02:05 लिए बता रहा हूं तो ये यहां पर ध्यान रखिएगा अब इस प्रकार से अगर हम देखा जाए तो रीति ब या रीति से बित होकर जो काव रचना की गई है वो नोट करना है और यह आपके एग्जाम में आ सकता है ठीक है ना अब रीति सिद्ध काव्य को इसके बारे में लिखवा देता हूं तो य आपने नोट कर लिया होगा बोर्ड को ऊपर से साफ कर दो ताकि अच्छे से पूरा लिख पाए हां ममता य बात तो सही है ठीक है तो ऐसा करते हैं कि अब मिटा

1:02:51 देता हूं ठीक है थोड़ा और इजी रहेगा आपको समझाने में क्योंकि बारबार नीचे नी भी कम हो रहा है चलो ठीक है तो ये मिटा देता हूं मैं ति काल चल रहे हैं अब इनके बारे में आपको समझा देता हूं यहां पर क्लियर रीति काल का प्रवर्तक आचार्य केशव सही बात है यह मैंने नहीं लिखवाया क्या यहां पर नोट कर

1:03:40 लीजिए क्या है केशव वेरी वेरी इंपोर्टेंट और मोस्ट मान लीजिएगा वेरी वेरी इंपोर्टेंट और मोस्ट मान लीजिएगा बिल्कुल सही बात है आपने उत्तर बिल्कुल सही दिया जितेंद्र चलो आगे बात करते हैं इसी प्रकार से अपने महत्त्वपूर्ण कड़ी के अंतर्गत तो रीति सिद्ध प्रमुख कवि है बिहारी जिने रचना की थी सत स की किसकी रचना की थी बिहारी ससई और य आपको पता होगा इसके बारे में ठीक है यस इसके अलावा बिल्कुल आस्था ने भी आंसर दिया है कि सर ना गाना के ठाकुर आलम बोध दती मुक्त कवि थे सही बात है और मावल

1:04:28 रीति सिद्ध कवि बिहारी यस नेक्स्ट है चिंतामणि काव्य विवेक काव्य प्रकाश और रस मंजरी चलो आपने कहा है तो हम इसके बारे में नोट करेंगे तो फटाफट से अब मुझे ये बताइए कि इन्होंने और कौन सी रचना की या मैं अगर आपसे ये पूछता हूं सर रीति काल को श्रंगार काल क्यों कहा जाता है क्योंकि श्रृंगार से संबंधित काव्य रचना हुई है और श्रंगार तो आप जानते हैं इसके बारे में तो आप जानते हैं ठीक है तो बताइए रीति सिद्ध काव्य से संबंधित बिहारी के अलावा और जो कवि है यान कि कवि रचना है उनके बारे में मुझे बताइए तो रीति सिद्ध यानी इसमें तियो को सिद्ध करने के संबंध में काव्य लिखे

1:05:23 गए ता बिल्कुल बिहारी स सही 719 ो यह भी सही है नेक्स्ट बात करें उत्तर सही सेनापति ठीक है और इनकी बात करें तो ऋतु वर्णन इन्होने क्या किया है ऋतु वर्णन ऋतु वर्णन तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों मुझे लग रहा है कि आपको रीति बद काव्य से संबंधित पूर्ण तरह से जानकारी प्राप्त हो गई है अब हम बढ़ते हैं रीति मुक्त इसकी और बढ़ते हैं रीति मुक्त यस गना नन बिल्कुल आप यहां पर नोट कर सकते

1:06:09 हैं सर जी क्लियर दिख रहा है क्लियर दिख रहा है कि भूषण तिब कवि धारा के कवि है हम इसको भी ऐड करते हैं भूषण ठीक है तो यह नोट कर लीजिए और मुझे लग रहा आपने कर लिया होगा क्योंकि अब तो कल एग्जाम है और इसलिए देरी मत कीजिएगा पढ़ने के यानी अच्छे काम में देरी मत कीजिएगा चलो आज अब बात करते हैं रीति मुक्त के बारे में रीति मुक्त के बारे में चले ठीक है ओके इस प्रकार से समझा इसके बारे में

1:06:56 समझा रहा हूं सर जी भूगोल की तैयारी खुद करे या आप करवाओ हर्ष मैं आपको इंपोर्टेंट क्वेश्चन दूंगा और हो सकता है एक आद क्लास आए लेकिन मैं भूगोल के लिए कहूंगा आप अपनी और से भी तैयारी करें अगर मेरी क्लास आ गई तो आपका डबल रिवीजन एक्स्ट्रा रिजन बेनिफिट होगा ठीक है तो यह आप करिएगा यानी जियोग्राफी अपने और से मजबूती कर लीजिए पूरी तरह से जियोग्राफी को अच्छा कर लीजिए बाकी मैं सपोर्टेड के लिए आपके आता रहूंगा ठीक है अब आगे बात करते हैं रीति मुक्त रीति मुक्त का मतलब रीति से मुक्त काव्य की

1:07:44 रचना ती से मुक्त काव्य रचना हुई है ठीक है नेक्स्ट बात करें तो रिति मुक्त के अंतर्गत मैं बात करूंगा तीन प्रमुख जो कवि है जिनको आप नोट यस बिल्कुल काव्या घनानंद ठाकुर रस कान आलम बिल्कुल सही बात है तो नोट कर लीजिए इससे संबंधित कवि कवियों के अंद आपको लिखना है नानंद नानंद दूसरी मैं आपको बात करू आलम तीसरा य पर जो है बोधा एंड नेक्स्ट है ठाकुर य तियो से मुक्त काव्य रचना करने वाले विद्वान है इन्होंने रीति मुक्त काव्य रचना की

1:08:33 है इक नामा क्या आंसर दिया बहुत बढ़िया सुजान नेक्स्ट बात करते हैं मैं दो तीन रचना आपको करवाऊंगी यमुना यमुना नोट कर लीजिए नेक्स्ट बात करें कोक सार और वीर लीला गर लीला तो पाटिया साफ हो गया नानंद का तो आपका रिवीजन हो रहा है ना मैं य सोच रहा हूं कि आपका रिवीजन हुआ कि नहीं हुआ और कितना अच्छे से करवा रहे इनके है

1:09:19 आलम ठीक है ना इसको नोट कर लीजिएगा और ने सुदामा चरित्र ओके तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों आपके समय सामने रीति मुक्त काव्यधारा से संबंधित चारों कवियों के बारे में इनकी रचनाओं के बारे में आपके सामने उत्तर आ गए हैं और मुझे अच्छा लग रहा है कि आप सभी के लिए बड़ी मात्रा है आपने सही याद ला बड़ी मात्रा है ठीक है तो प्रकार से यह जो है ना वो आपके एग्जाम के लिए इंपोर्टेंट है और एग्जाम के लिए इंपोर्टेंट है और ही बताया आपने ठाकुर सतक ओके तो यह तो हो गई अपने

1:10:08 इसके बारे में अब आपको यहां पर काव्य के अंदर बताते हैं कि इसमें विशेषता बता ण संगम त्रिवेणी संगम यह क्या है तो यह भी मैं आपको यहां पर हाथ हाथ बता देता हूं तो इसको नोट कर लीजिएगा ठीक है तो ये मिटा देते आपके सामने ऊपर से रीति काल को ही पढ़ रहे अभी तक ठीक है रीतिकाल तो रीतिकाल के अंदर त्रिवेणी संगम का जिक्र हुआ था किसका संगम हुआ था त्रिवेणी संगम क्या है यानी इसमें जो कवि हुए ना उन्होंने मतलब तीनों ही रसों के संबंध में काव्य रचना की है जितेंद्र सुधार बहुत ही अच्छा बड़ा थैंक यू डियर जब आप हो क्लास में इतने टैलेंटेड तो ये

1:10:53 क्लास बेहतरीन क्यों नहीं हो सकती मतलब बेहतर से बेहतर वो होती है तब जब मिलकर काम करते तो यह मिलकर पढ़ने और पढ़ाने का काम बढ़िया रहता है ठीक है चलो आगे बात करते हैं तो त्रिवेणी संगम का मतलब है कि इस काल में कु कुछ कवि है उन्होंने तीनों से मतलब तीनों ही रस संबंधित काव्य रचनाए की है तो इसलिए इसको हम कह सकते हैं रीति मतलब संगम त्रिवेणी संगम जिसके अंदर हम बात करते भूषण भूषण ठीक है ना इन्होने मतलब बात करें कि तीनों रसों से प्रधान रचनाए रखी है जिसमें नीति सार और वीर तो इसलिए इसको त्रिवेणी भी कहते हैं त्रिवेणी संगम हुआ है इसमें नेक्स्ट बात करते बिहारी इन्होंने भी तीनों रस से प्रधान

1:11:40 अपनी काव्य रचना की में नीति श्रंगार और भक्ति नीति श्रृंगार और भक्ति ठीक है भक्ति अब हो गया रीति काल के बारे में पूरा ठीक है अब आते आधुनिक काल प आता हूं किस पर आता हूं आधुनिक काल अब आते हैं आधुनिक काल

1:12:30 1850 से अब तक ठीक है यस भूषण शिवराज भूषण शिवा और भूषण बावनी सही बात है भूषण की शिवराज भूषण सर 500 वर्ड में कितना पेज भरना होता चार से पाच पेज भरना होता आपको रीति काल की विशेषता बतानी थी नहीं ओके ओके बताता हूं और आप भी शामिल हो जाइए फटाफट से तो रीति काल की तब तक इसको डी रखता डी मतलब ओल्ड रखता हूं ठीक है ना देखि रीतिकाल की विशेषता के बारे में जल्दी रीति काल

1:13:16 में तीन तीन काव्य धाराओं की रचना हुई है जिसमें आपको यस दूसरा है य बिल्कुल सही बताया पं पांडित्य प्रदर्शन पांडित्य प्रदर्शन कहने का मतलब है पंडिताई ज्यादा दिखाई गई है क्या दिखाई पंडित ठीक है ना इसके अलावा हम कह सकते हैं कि यहां पर यस वीर भावना का बोध भी होता है क्योंकि कुछ काव्य है वो मिक्स थे तो वीर शृंगार

1:14:03 और नीति संबंधी काव्य रचनाए काव्य रचनाए ठीक है नेक्स्ट बात करें तो तीन विशेषता ये लिख दीजिएगा इसमें रीति बद में ये हुआ उसम ये हुआ तो वो भी आप लिख सकते हैं एम के लिए यह ध्यान रख लीजिएगा ठीक है तो वीर श्रृंगार नीति संबंधी काव्य रचना है और बात करें कि वीर रस प्रधान काव्य रचनाए हुई है ठीक है इसके अलावा इसमें अल यस यस बिल्कुल सही बात बताया अलंकरण की भावना अलंकरण की प्रधानता

1:14:57 अलंकरण की प्रधानता यानी अलंकरण वशीभूत जो वर्ड होता है ना उसको अलंकरण कहा जाता है तो अलंकरण की प्रधानता ठीक है तो यह विशेषता मुझे लग रहा है काफी है इतनी क्योंकि हर एक के ऊपर कम से कम पांच विशेषता तो आपको पता होनी चाहिए और यह मैंने आपके सामने समझा दी है इसके संबंध में इसको नोट कर लीजिएगा रिवीजन कर लीजिएगा सबसे जरूरी है और यस इसके अलावा हम कह सकते हैं संगिता प्रकृति सौंदर्य यस सही बात है प्रकृति सौंदर्य ये आप नोट कर लीजिए जी और यानी इसमें जो काव्य है उसमें प्रकृति की सौंदर्य के बारे में भी वर्णन किया गया प्रकृति सौंद्र मनी प्रकृति सांद्रता के बारे में ठीक है यह आप नोट कर लीजिएगा और हम ये भी बात करते हैं कि इसमें अहंकार

1:15:53 है तो अब बात करते हैं आगे नीति निरूपण यस नीति निरूपण इसलिए है क्योंकि अभी मैंने क्या कहा है नीति से संबंधित तो अगर आप चाहे तो यह अलग से पॉइंट लिख सकते हैं नीति निरूपण हुआ इसम नीति निरूपण तो प्यारे विद्यार्थियों अब मुझे लग रहा है कि आपको आगे बढ़ना चाहिए कवियों का अद्भुत एकीकरण है इसमें यस संगम क्या कहा था संगम तो अब हम बढ़ते हैं भक्ति काल मतलब आधुनिक काल और एग्जाम में टपकने वाला प्रश्न है

1:16:39 इसके ऊपर चलते हैं ठीक है तो फटाफट से जटा जट से आप यह नोट कर लीजिए कर लिया आपने नोट तो फ सीधा चलता हूं मैं आधुनिक काल की ओ ठीक है आधुनिक काल आधुनिक काल में तो इसमें काव्य रचनाए मस्त मोला वाली काव्य रचनाए भी आएगी हिंदी साहित्य के मॉडल पेपर के बारे में अभी कोशिश तो कर रहे हैं य आसार बनने की ड़ यानी पांडित ति काल में यही था हर कोई अपने आप को अलग एक अच्छा पंडित बनाने की ड़ कर रहा था ठीक के

1:17:26 समय का काल है इस वजह सेको आधुनिक काल कहते हैं अब इसके अंतर्गत हम बताएंगे कि किसकिस प्रकार की रचनाएं हुई है अलग अलग कवियों के द्वारा लिखे गए काव्य रचनाए हुई है तो इस प्रकार से आधुनिक काल में भी मतलब मोटे रूप में तो आधुनिक काल कहेंगे लेकिन इसमें कवि और कवियों की रचनाए है व बहुत ही ज्यादा प्रभावपूर्ण थी तो इस वजह से उनके आधार पर ही आधुनिक काल के अलग-अलग कालखंड बनते हैं आधुनिक काल के भी अलग-अलग कालखंड बनते हैं ठीक है तो अब मैं वही कालखंड बता रहा हूं कि आधुनिक काल के अंतर्गत किस तरह के काल कवि यहां पर प्रतिभूति होते हैं तो फटाफट पहले बात करते हैं भारतेंदु

1:18:17 युग भारतेंदु युग जिसके अंतर्गत हम बात करें जो कवि हुए हैं वह है भारतेंदु हरिचंद्र इसके अलावा राधा शरण गोस्वामी नेक्स्ट बात करें बालकृष्ण भट्ट इसके अलावा बदी नारायण प्रेम

1:19:07 धन ठीक है अब य पर ध्यान रखिएगा आगे बात करता हूं द्वेदी युग ठीक है दवे युग तो यानी आधुनिक काल के दवे युग भी जिसके अंदर प्रम प्रधान जो कवि थे वो महावीर प्रसाद दिवेदी कौन है महावीर प्रसाद द्विवेदी ठीक है और इसी तरह से हम य पर कहेंगे कि यह जो काल है ना व 1920 से देख इसमें काल विभाजन भी अच्छे से बताया गया है कि भाई 1850 से लेकर भारत युग

1:19:52 है वो है 1900 तक का द्वेदी जो युग है व 1900 1900 से लेकर 1920 तक का युग है देखि इसमें अगर मैं आपको एकसे प्रकृति बता देता हूं साथ साथ में लगे तो मैं आपको व भी समझा देता हूं ठीक है तो यहां पर बता देते हैं कि भारत युग में जो काव रचना हुई है ना वह अंग्रेजों के शासन काल को याद दिलाती है

1:20:43 ठीक है ना यह समझ लीजिएगा यानी भारतेंदु युग में जो रचना हुई है वो 18 से 1900 के बीच हुई है और इसके अंतर्गत जो जितने भी काव्य रचनाए हुई है ना उस काव्य रचना को अगर देखा जाए तो उसमें सीधी तरह से अंग्रेजों को मतलब जिसे अंग्रेजों को निकालना है तो कैसे हम अंग्रेजों की लड़ाई करते कि भाग जाओ यहां से और इस प्रकार से हमारे देश को लूट लिया है तुम तो लूटे रहे हो देश को कंगाल कर दिया है शोषण कर दिया है तो इस प्रकार की भावनाओं से अभिभूत होकर जो काव्य रचना हुई है वो भारत ंद युग के अंतर्गत हुई है और इस प्रकार से जो काव्य रचनाए हैं वे अंग्रेज भी इसमें अब अंग्रेज भी समझ गए थे अंग्रेज भी होशियार थे उसने देखा कि भाई इस समय जो रचनाए जो बनी है भारत युग में वो सीधी तरह से हमारे या अंग्रेजों के खिलाफ यह बात हो रही है तो अब इसके बाद 1900 से 1920 के मध्य जो

1:21:28 युग आया वो आया द्विवेदी युग कौन सा युग आया द्विवेदी युग आया कौन सा आया द्विवेदी युग ठीक है द्विवेदी युग में क्या होता है कि इसमें क्योंकि द्विवेदी युग के अंतर्गत क्या था कि इससे पहले तो अंग्रेज समझ गए थे अंग्रेजों को पता था कि हमारे खिलाफ बातें हो रही है विरोध हो रहा है तो हिंदी आधुनिक काल के अंतर्गत द्वेदी युग आया उसमें उन्होंने जो रचना की ना वो बड़े अलग अंदाज में रचना की जिससे अंग्रेजों को भी पता ना चले यानी हम कहे इ वतम इति वतामु कवि कह सकते हैं कि इन्होंने जो रचना की ना वो बिल्कुल एक अलग वे पर जाती है बिल्कुल अलग वे पर जाती है अलग वे का

1:22:15 मतलब है कि भाई इस समय इन्होने जो रचना की थी तो अंग्रेजों के खिलाफ लेकिन उसमें जो अंग्रेजों के विरुद्ध लोगों में जो आजादी की अलग जगह ना वो अलग तरह से कई जैसे शेर की माध में कुछ आए [संगीत] सियार ओके अब य पर देखिए यहां परर मैं आपको बताऊ तो शेर शेर मतलब हिंदुस्तान शेर मतलब हिंदुस्तान माद मा या जैसे शेर शेर की जो गुफा होती है ना माद कहते उसको तो यहां पर मतलब भारत ठीक है ना तो और घुस आए सियार सियार

1:23:04 कौन मतलब अंग्रेज तो इस प्रकार से एक उदाहरण दिया है कि इस समय जो रचना की गई ना उसमें अंग्रेजों के विरोधी थी लोगों को आजादी अलग जगाने की तरह से लोगों को अभिभूत करने के लिए लेकिन अंग्रेजों को पता नहीं चल रहा था कि ये हमारे खिलाफ रचनाए हो रही है क्योंकि यहां प इति व्रता आत्मक थी जैसे शेर की माध में घुस आए यार मतलब कहा गया कि हिंदुस्तान की इस माद यानी भारत के अंतर्गत है ना वो अंग्रेज घुस आए हैं तो इसको गेट आउट करना है इसके लिए जो रचनाएं है वो बहुत ही प्रभावशाली रूप में अभिव्यक्त होती है समझ में आ गया समझ में आया कि नहीं ठीक है तो ये चीज यहां पर समझाना चाहता था अब आगे बात करें यस आवाज आ रही है वो पहले नहीं आ रही थी अब तो आ रही है अब बात करते हैं यहां पर तो द्विवेदी तो मैंने आपको समझा दिया

1:23:50 इसमें प्रमुख है महावीर प्रसाद द्विवेदी अब बात करते हैं इसके बाद दूसरा जो है आधुनिक काल में वो आया छायावाद छायावाद सवाद को हम कह सकते प्रकृति है प्रकृति का मतलब है कि इस काल के अंदर जो रचनाए हुई ना प्रकृति से संबंधित रचना ई प लि विद्वान कौन है तो एक है जयशंकर प्रसाद जय शंकर प्रसाद इसके

1:24:36 अलावा सचिदानंद सुमित सुमित्रा [संगीत] नंद ठीक है नेक्स्ट बात करते हैं सूर्य कांत त्रिपाटी निराला ओके तो यह विद्वान है आगे बात करते हैं तो छायावाद या इसमें जो रचना है वो प्रकृति से संबंधित है

1:25:29 इसमें जो रचना है वह प्रकृति से संबंधित है जय सूर्य कांत त्रिपाठी निराला सूर्यकांत त्रिपाठी निराला यस और सुमित्र आनंद पंत और महादेवी वर्मा हा और और भी लिखना चाहे तो महादेवी वर्मा और भी जोड़ सकते हैं महादेवी वर्मा ठीक है इसमें प्रकृति यानी जैसे जीव जंतु पक्षी पेड़ पौधे जो है इसको अभिभूत या इसको ध्यान में रखते हुए जो रचना की गई है उसको हम कहते हैं साया बाद क्या कहते हैं छायावाद कहते हैं याद आ गया समझ में आ गया नोट कर लीजिएगा आगे बात करते हैं हालावाद अलाबाद के अत नोट कर लीजिएगा कि इसके

1:26:16 अंतर्गत मस्ती या मौज से संबंधित रचना हुई जिसमें प्रमुख कवि थे हरिवंश राय बच्चन यानी अमिताभ बच्चन के पप्पा जी अमिताभ बच्चन के पप्पा जी ने ये रचना करी थी हां समाजशास्त्र के इंपोर्टेंट प्रश्न आपको आज शाम को मिलेंगे ठीक है आज शाम को मिलेंगे बिल्कुल आज शाम को मिल जाएगा सर अभी खाना खाने का टाइम हो गया है हो तो गया है ठीक है इकोनॉमी के इंपोर्टेंट क्वेश्चन दे दिए हैं क्लास तो नहीं लगेगी लेकिन प्रश्न दे दिए मस्ती और मौ से संबंधित रचनाए हैं वह यहां पर हुई है ठीक

1:27:18 है देखो अलाबाद कहने का मतलब है कि इस काल में जो काव्य र हुई ना वो रचनाएं हस्ते हस्ते मजाक मजाक में बहुत ही गहराई वाली बात कह गई हालावाद को तो समझना है कि आधुनिक काल के अंतर्गत जो समय एक युग आया हालावाद वो उसके अंतर्गत आप याद रखिएगा कि इस समय जो काव्य रचनाए जो हुई है वो बड़ी गंभीर विषय को भी बड़े मस्तमौला अंदाज में जनता के सामने रखे जाने की बात हुई थी जैसे मैं एक उदाहरण दे देता हूं उसका उदाहरण समझ लीजिएगा ठीक है जैसे बात करें बेर कराते मंदिर

1:28:11 मस्जिद बर कराते मंदिर मस्जिद मेल कराती मधुशाला देखिए बेर का मतलब होता है दुश्मनी बेर का मतलब क्या होता है दुश्मनी दुश्मनी यानी मंदिर मस्जिद यानी हिंदू मुस्लिम संबंधी दुश्मन पैदा कर देते हैं आज के समय हिंदू मुस्लिम संबंधी दुश्मन हो रही है यानी दुश्मन हो रहे हैं धर्म के नाम पर लेकिन मेल यानी दोस्ती कराने के लिए मधुशाला मधुशाला यानी जो शराब का ठेका होता है और जो शराब होती है ना वह जब लोग पीते हैं तो कोई नहीं समझता है कि कौन मेरा हिंदू है और कौन मुस्लिम है सभी एक साथ मिल जाते हैं इस प्रकार से यहां पर

1:28:57 हिंदू मंदिर यानी धर्म के मध्य विवाद और शराब के बारे में बात यहां पर की गई है जो एक तरह से समझने के लायक बात यहां पर होती है और इस प्रकार से मस्ती मजाक में हस्ती मस्ती में जो बड़ी बड़ी अच्छी अच्छी बातें कही गई है और यह इशारा करती है हालावाद की और किसकी और इशारा करती है हालावाद की और समझ में आ गया तो आगे बात करें ये इंपोर्टेंट था और इंपोर्टेंट मैंने आपको बता दिया थैंक यू डियर थैंक यू एनके बलग तो ये चीज आपको समझ में आई कि नहीं यह चीज आपको समझ में आई कि नहीं बहुत ही गहराई से आपको यह समझाया है कि भाई हालावाद क्या है और उससे संबध विद्वान क्या है इसके बाद आया अलग प्रगतिवाद तो यह मिटा देते

1:29:50 है देखिए प्रगतिवाद क्या है प्रकृतिवाद का मतलब है कि प्रोग्रेस प्रोग्रेस होना कि भाई प्रोग्रेस हो गई क्या हो गई सर आप भगवान हो इसलिए आप इनम के शट क्वेन भेज देना अरे डियर हम इंसान ही है और आपको कल भी कहा था हम इंसान ही रखिए और मैंने इंपोर्टेंट क्वेश्चन तो आपको दिए है ना बाकी देखते समय मिलता है आपके लिए करता हूं ठीक है स हिंदी साहित्य के इंपोर्टेंट क्वेश्चन कहां मिलेंगे ग्रुप में डाले मैंने ग्रुप में ओके तो प्रकृतिवाद का मतलब प्रकृति की और यानी अगर हम कहे तो इसके अंदर जो रचनाएं लिखी गई है वो कुछ उदाहरण के रूप में बताए जैसे एक तो है नागार्जुन नागार्जुन इसके अलावा बात करते

1:30:37 हैं यहां पर सूर्यकांत त्रिपाठी सूर्यकांत त्रिपाठी निराला यानी निराला शॉर्ट में नाम लिख देते हैं निराला ठीक है ये आपको मैंने अभी जस्ट लिखवाया है यह दोनों कवि इसमें आते हैं और इस प्रकार से देखा जाए तो प्रकृतिवाद में जो कविताए जो लिखी गई है ना वो पूरी तरह से मार्क्सवाद पर आधारित है इसका मतलब क्या होता है प्यारे विद्यार्थियों इसका मतलब होता है कि मार्क्सवाद तो आप जानते हो ना मार्क्सवाद कहता अमीर जो है ना हमेशा गरीबों का शोषण

1:31:25 करते हैं तो इस बात करें प्रगतिवाद के अंतर्गत प्रगतिवाद के अंतर्गत जो रचनाए लिखी गई ना उसमें शोषक और शोष के मध्य रचना लिखी गई ध्यान बिंदु या के केंद्र बिंदु शोषक और शोषित मतलब जैसे कहने का मतलब होता है कि हम यह भी बात कर सकते हैं कि सुनीता राम विलास शर्मा इसके हा राम विलास शमा भी

1:32:11 लिख सकते हैं मतलब एक तरह से जैसे मार्क्स का समय था कॉल मार्क्स कॉल मार्क्सस ने कहा था कि हर युग में दो वर्ग हुए हैं जहां पर अमीरों ने गरीबों का शोषण किया है ठीक है जैसे पहले के समय सामंत वर्ग थे जिन्ने मजदूरों का शोषण किया है पूंजीवादी युग आया जिसमें पूंजीपतियों ने गरीबों का शोषण किया है आज के समय मालिक अ नौक का शोषण करते हैं इस प्रकार से उस विषय को ध्यान में रखते हुए जो रचना की गई है ना उसको हम कहते हैं प्रगतिवाद जिसके केंद्र बिंदु में ये जो थ्योरी है ना वो मार्क्सवाद से संबंधित होती है इस प्रकार जो रचना है वो प्रकृतिवाद में आती है और इसमें जो रचना हमें कहां मिलती है नागार्जुन और निराला की कविताओं में ये मिलती है ठीक है नोटे समझ गया प्रति समझ ग कि नहीं चलो

1:32:56 अब बात करते शोषण के बारे में शोषक शोषित या शोषण का य पर ज्यादा उल्लेख किया गया किसका शोषण का ट इ क्लियर पॉइंट शोषण का किया गया स समयावधि बता सम के थो कंफ्यूजन है य पर तो बता य पर थोड़ा कंफ्यूजन है लिए कन्फ्यूजन है इसलिए मैं इसको थोड़ा आगे बढ़ना चाहूंगा कंफ्यूजन को हम य पर लिखे य तक हो गया चलो आगे बात करते हैं इंपोर्टेंट न्यूज भारत अब प्रगतिवाद के बाद एक और आ जाएगा फिर मैं मिटा दूंगा इसके व है सट य आगे वाला है व या आगे वाला सम रहा व

1:33:48 देखि दिव्या क्या कह रही है शा शटा तर शट इस वर्ड में थोड़ा कंफ्यूजन है अगर आपको बेटर आरहा तो बता अब इसको बताऊ तो नोट कर लीजिएगा य ू है ठीक ना कभी कभार की मात्रा भी आती है

1:34:33 शतर यह सही है ओके अब इसको नोट कर लीजिए ठीक है अब इसको नोट कर लीजिए श रवाद यह थोड़ा अ लग रहा है लेकिन आप इसको लिख दीजिएगा ठीक है ना प्रगतिवाद के प्रवर्तक कुदर सिंह यह लिख देना है श रवाद अब इसका मतलब यहां पर यह षटो तरी टो तरी चलो यह वर्ड है ना क्यक मुझे थोड़ा कंफ्यूजन वाला लग रहा था क्योंकि थोड़े वड ऐसे ही है छटो तरी

1:35:25 ओके तो अब ये वर्ड सही आ गया आपके सामने अब लिख दीजिएगा ठीक है ना सोतरी यानी हम यहां पर कहेंगे यूनिट पाच भी करवाओ ग देखो कोशिश करते हैं थोड़ा सा यहां तक तो हमने करवा ही दिया आपको इसमें हम क्या कहेंगे यह जो काल है ना यह काल है वो 1960 का है 60 यानी 60 ये 60 तो फिर ये साटो तरी हो गया क्या हो गया साठोत्तरी वाद समझ में आ गया यानी 1960 में रचना लिखी गई है तो पीछे वाला 1900 60 है ना इसलिए साटो तरी वाद कहा जाता है ठीक है सोतरी समझ में आ गया सोतरी वाद अगर कंफ्यूजन है तो बता दीजिएगा बट मैंने यहां पर आपको कंफ्यूजन क्लियर करवा दिया सोतरी वाद क्योंकि 1960 में जो रचना रखी गई उस 60 में जो काल आया उसको हम कहते

1:36:11 हैं साटो तरी वाद अब इसके अंतर्गत आपको मैं लिखवा देता हूं मैंने एक एक मिस कर दिया क्या प्रगतिवाद मिस कर दिया नहीं एक मिनट एक मिनट प प्रगतिवाद कर लेते हैं मैंने मिस प्रगतिवाद स समझा दिया आपको प्रगतिवाद प्रयोगवाद लिखवाना था हा प्रयोगवाद लिखवाना था एक वर्ड मिस हो गया चलो इसको बाद में लिखते हैं प्रयोगवाद ठीक है कोई बात नहीं हमने आगे बढ़ के थे बट अब करवा दिया है आगे बढ़ सर कल तो हमने इतिहास र दिया उम्मीद थी कि आने वाले पेपर यस बिल्कुल साहित्यकार ब जाओगे आप यस प्रयोगवाद रह गया था चलो अब इसको करवा देते तो प्रयोगवाद के अंतर्गत हम कहेंगे कि इसके

1:36:57 अंतर्गत जो रचनाए हुई है ना उसको हम सबसे तरह से यह मान सकते कि चार शतक विशेषता थी यहां पर वैसे प्रयोगवाद के कवि कौन है यह बताइए मुझे कहने का मतलब थ इस काल में चार शब तक कहने का मतलब है जैसे एक कवि दो कवि तीन कवि चार पाच छ और सा सात कवि इस प्रकार के सात कवि मिलकर रचना करते थे ठीक है जैसे एक और एक दो तीन चार पाच छ सात कवि ये सात कवि मिलकर रचना कर रहे हैं एक दो तीन चार पाच छ सात सात कवि मिलकर रचना कर रहे हैं एक दो तीन चार पाच छ सात इस प्रकार से सात कवि

1:37:44 यानी चार सप्तक तो कवियों की मंडली होती थी साथ साथ कभ एक साथ मिलकर जो रचनाए अपने लिए करते थे इसलिए हम इसको कहते हैं ठीक है ना और बात करते यहां पर तो सोत्री के अंतर्गत यस इसके अंतर्गत जो है इसके जो प्रमुख सर मेरे और जरूर डीपीटी बनाओगे थैंक यू डियर तो प्रयोगवाद के जनक है अञ कौन है इसके अञ देख अ का अगर मैं पूरा नाम बताऊ आपको एगजाम केडिंग ध्यान रखिएगा तो काफी बार में आता रहता

1:38:51 है ओके इसका पूरा नाम बता देते तो देखिए आगे का पूरा नाम है सच्चिदानंद रानंद सच्चिदानंद रानंद वास्ता ययन ठीक है य का पूरा नाम है ठीक है सचिदानंद हीरानंद वास्त अज्ञ यह इसका पूरा नाम है वास्त का अब बात करते हैं तो इसके अंदर मैंने यहां पर आपको यह तो समझा

1:39:36 दिया हा यहां पर ज इसमें जैसे तार सप्तक बिल्कुल सचिदानंद बिल्कुल सही है सार तार सप्तक क्या कहेंगे अलग अलग तार सतक सतक है सर सतक कहते हैं ठीक है यानी इसमें क्या कि सात विद्वान एक साथ मिलकर रचना करते थे सात विद्वान मिलकर एक तरह की रचना करते थे तो इसलिए इसको हमें सार सतक कहते हैं और कभी कभार ऐ सतार सब तक आप कह रहे हैं तो शायद मुझे ऐसा लग रहा है कि कुछ मैंने शायद नोट्स में कंफ्यूजन नहीं किया हो मुझे ऐसा लग सकता है तो आपको इसको यहां पर तार के रूप में भी ऑब्लिक में याद कर लेना ऑब्लिक में लिख देना कि हो सकता है कि भा तार सब तक इसको संबोधित किया जा रहा हो ठीक है देखिए अब इसके अंदर जो रचना लिखी गई वो

1:40:22 मैंने आपको समझा 1960 के दशक में जो रचनाए लिखी जाती थी उसको साटो तर सॉरी वो तो हो गया अलग प्रयोगवाद की बात करते हैं इसमें क्या था कि कविताओं में कहानियों में उपन्यास में नए नए प्रयोग किए जाते थे तो यह इसको मैं यहां पर लिखवा देता हूं

1:41:49 ठीक है य आपको दिख रहा है दिख रहा है तो नोट कर लीजिएगा यानी प्रयोगवाद में प्रयोग पर आधारित रचनाए लिखी गई जैसे बात करते हैं इस युग में कविताओं कहानियों एव विभिन्न का विभिन्न रचनाओं में नए-नए प्रयोग करकर रचनाएं या काव्य लिखे गए यही कहते हैं प्रयोगवाद ठीक है ना समझ में आ गया तो इस प्रकार से मैंने आपको यह करवा दिया है समझ में आ गया होगा आपको क्लियर है मिटा दूं अब मैं आपको चलो अब मैं मिटा देता हूं ठीक है अब मैं आ जाता हूं आपके नेक्स्ट प्रयोगवाद के बाद शो तर

1:42:34 वाद के अंदर सोतरी जिसको कहा था अभी ठीक है सा की एक और क्लास लेना जी बिल्कुल कोशिश तो करेंगे डियर लेन क्या कि थोड़ा तबी थोड़ा डाउन चल रहा है इसलिए कह नहीं सकते देखिए अब यह तो मैंने करवा दिया थोड़ा स्पेस कम मिल रहा है इसलिए मैं ये पूरा मिटा रहा हूं यहां तक आगे है चाटो त्री

1:43:48 क्लियर तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों साी का मतलब 19660 में 60 60 60 के दशक में लिखे गए काव्य को सोत्री कहा जाता है प्रयोग कालांतर में नई कविता के रूप में हुआ हां वो भी मैं आपको करवाने वाला हूं ठीक है इस प्रकार से कह सकते हैं 60 के अंतर्गत जो विद्वान हुए हैं इसके अंदर हम बात कर दुष्यंत और राजेंद्र यादव ठीक है एक इस प्रकार से दिखा जाए टो तरी आपको समझ में आ गया नेक्स्ट बाद है नया वर्तमान

1:44:35 या प्रजेंट के टाइम में बात कर नई कविता ई कविता समझ में आ रहा है आगे देखते हैं तो प्रयोगवाद का कालांतर में जो विकास हुआ वह नई कविता के रूप में हुआ

1:46:25 ठीक है य नोट कर लीजिए शांत का मुह टेड बुरी बुरी खाक ल जाए यस सर मैं ईश्वर से आपके अच्छी स्वास्थ्य कामना करता हूं अच्छे म क्लास और मार्गदर्शन हो जाए ठीक है जी कोशिश तो करेंगे तो इस प्रकार से प्यारे विद्यार्थियों आपको यह बता दिया अब एक लास्ट बता देता हूं अष्ट साप कवि के बारे में अष्ट साप कवि के बारे में ठीक है इंपोर्टेंट है जो समझ लीजिएगा आप आधुनिक काल की विशेषता ऑटोमेटिक प्रकट हो जाएगी आपके सामने क्योंकि वो सब कुछ इस में आ जाता है

1:47:11 आधुनिक काल के अंतर्गत ठीक है आधुनिक काल की विशेषताए आप अपने आपकी जो सीरीज होगी वन वक सीरीज वगैरह उसमें आपको मिल जाए क्योंकि इसमें अभी तक हमने जितना भी पढ़ाया वो सब शामिल हो जाता तो विशेषताए 20 प विशेषता निकल के आ जाएगी आधुनिक काल की विशेषता कम थोड़ी ना है बस आपको इसको रिवीजन कर लीज आपके अंदर मिल जाएगी बुक सज के अंतर्गत अब बात करते हैं जो अष्ट साब कवि है उससे संबंधित ह पर प्रश्न आपके एग्जाम में आएगा तो वह मैं यहां पर आपको करवा देता हूं छोटा बड़ा प्रश्न ठीक है य भक्ति काल से संबंधित अ सा कवि ठीक यह

1:47:58 थोड़ा ध्यान रखिएगा अष्ट साप कवि ठीक है तो ध्यान दीजिए कि अ कवि का मतलब है कि इसके अंतर्गत आठ कवि थे जिन्होंने अपनी रचनाए लिखी है अष्ट साब कवि सुरेश क मैंने अ तक कुछ नहीं पढ़ा है क्या करू अरे डियर यह क्लास देख लीजिए कुछ

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