0:00 हेलो स्टूडेंट वेलकम बैक टू अनदर वीडियो तो आज की वीडियो में हम आपके साथ डिस्कस करने वाले हैं बीए फर्स्ट ईयर का जो आपका प्रथम सेमेस्टर है उसकी सोशियोलॉजी सोशियोलॉजी सब्जेक्ट पे ऑलरेडी हमने इसका सिलेबस डिस्कस कर दिया है अगर आपने नहीं देखा तो प्लीज चैनल पे विजिट करके वो देख लीजिएगा पहला जो यूनिट है इसका व आज हम इस वीडियो में पढ़ाने वाले हैं और पहला यूनिट सोशियोलॉजी का बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है अगर आप बीए फर्स्ट सेमेस्टर में मैं बता दूं इस यूनिट से ही ना आपके 30 पर सिलेबस कवर होने वाला है पूरे आपकी सोशियोलॉजी का फर्स्ट सेमेस्टर का 30 पर इस चैप्टर से कंप्लीट होने वाला है तो प्लीज वीडियो में अंत तक रहिए जिससे कि आपका ये एक बड़ा पोर्शन कवर हो सके केवल इस वीडियो में ओके तो आपका जो यूनिट नंबर वन है ना ये है आपका समाजशास्त्र परिचय अर्थ परिभाषा प्रकृति
0:45 विषय क्षेत्र यानी कि आप देख रहे हो कि एक तरीके से जैसे कि आप शुरुआत करते हो कोई भी चीज तो आपको एक बेसिक चीज समझाई जाती है कि आखिर ये चीज है क्या जैसे कोई भी सब्जेक्ट आप स्टार्ट कर रहे हो सोशियोलॉजी स्टार्ट कर रहे हो तो सबसे पहले बताया जा रहा है कि सोशियोलॉजी ये पूरा सब्जेक्ट ही क्या है मतलब मतलब पूरा का पूरा आपका जो सब्जेक्ट है ना वही पहले यूनिट में लाकर के रख दिया है कि सोशियोलॉजी आखिर है क्या समाजशास्त्र है क्या इसका परिचय दो इसका अर्थ बताओ इसकी परिभाषा इसकी प्रकृति इसका विषय क्षेत्र सारा कुछ इसमें डिस्कस करना है तो बेसिकली अगर हम सोशियोलॉजी की बात कर रहे हैं ना तो सोशियोलॉजी जो ये शब्द है जिसको हम आज समाजशास्त्र के नाम से जानते हैं ये जो समाजशास्त्र नाम दिया है ये अगस्ट कामटे महोदय ने 1838 ईसवी में दिया है 1838 ईसवी में अगस्ट कामटे ने बताया कि यह समाजशास्त्र है इससे पहले
1:32 इसको समाजशास्त्र के नाम से नहीं जाना जाता था बल्कि इसको जाना जाता था सामाजिक भौतिकी के नाम से किस नाम से सामाजिक भौतिकी के नाम से इसको जाना जाता था कि ये सामाजिक भौतिकी है भौतिक एक विज्ञान के रूप में समाज का अध्ययन करती है इसलिए इसको सामाजिक भौतिकी कह देते हैं बाद में अगस्ट कामटे जी ने देखा कि नहीं यार ये केवल एक भौतिक रूप में समाज का अध्ययन नहीं कर रहा है बल्कि एक वैज्ञानिक रूप में समाज का अध्ययन कर रहा है और वैज्ञानिक कोई चीज हो गई तो उसे शास्त्र कहते हैं तो इसलिए इन्होंने इसको समाजशास्त्र का नाम दिया था 1838 ईसवी में अब जो ये सोशियोलॉजी वर्ड है ना ये दो वर्ड से मिलकर के बना हुआ है सोशियस एंड लोगस दोनों अलग-अलग लैंग्वेज के वर्ड्स हैं एक लैटिन भाषा का शब्द है एक ग्रीक भाषा का शब्द है इनका अपना एक अर्थ है
2:17 विशेष अर्थ है जैसे कि सोशियस का अर्थ होता है आपका समाज का एंड लोगस का अर्थ होता है विज्ञान या शास्त्र तो समाज का विज्ञान या समाज का शास्त्र इस तरह से इसको नाम दिया गया सोशियोलॉजी और समाजशास्त्रीय नाम आया अब इसको डिफाइन करने के लिए इसको समझाने के लिए अलग-अलग विद्वान आए जिन्होंने इस पर अपना पॉइंट ऑफ व्यू दिया समाजशास्त्र को समझाया कि किस तरह से ये समाजशास्त्र है किस तरह से इसकी इंपॉर्टेंस है ये सारा कुछ कई सारे विद्वान जैसे अगस्ट कामटे महोदय हो गए कार्ल मार्क्स हो गए स्पेंसर दुर्खीम सीमेल और भी लोग हैं जिन्होंने इस पर अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखा कि आखिर सोशियोलॉजी है क्या अगर आप पहली बार इस चैनल पे आए हो ना तो एक बार विजिट करके जरूर देख लेना ऑलरेडी इस पे 2400 वीडियोस अपलोड हो चुकी हैं बी से रिलेटेड तो ये चैनल आपके लिए बहुत इंपोर्टेंट है एक बार विजिट कीजिए इफ यू थिंक इट इज वैल्युएबल तो आप सब्सक्राइब भी जरूर कर लीजिएगा आइए समझते हैं सबसे
3:03 पहले बात करते हैं कि आखिर ये समाजशास्त्र है क्या पहला पॉइंट हमें यही करना है ना कि समाजशास्त्र का हमको परिचय देना है कि आखिर समाजशास्त्र है क्या तो समाजशास्त्र एक ऐसा विज्ञान या शास्त्र है जिसके अंतर्गत समाज का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है समाजशास्त्र क्या है ऐसा विज्ञान या ऐसा शास्त्र है जिसके अंदर हम समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं जिस तरह से वैज्ञानिक चीजों का अध्ययन किया जाता है कि एक चीज है इसके बारे में विशेष रूप से ज्ञान देखेंगे क्रिया एक क्रमबद्ध तरीके से किसी चीज का ज्ञान करेंगे इसी को तो विज्ञान कहते हैं कि क्रमबद्ध तरीके से किसी चीज का विशेष ज्ञान लेना ही विज्ञान है इसी तरीके से समाज के बारे में जानना उसको समझना उसके एक-एक एस्पेक्ट जो समाज के हैं उन सारे एस्पेक्ट को समझ करके उसको एक वैज्ञानिक रूप देना ही समाजशास्त्र कहलाता है तो अगर हम परिचय की बात करें तो
3:49 समाजशास्त्र का यह परिचय है कि समाजशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जिसके अंतर्गत हम समाज का वैज्ञानिक अध्ययन करते हैं तो पहला जो टॉपिक है आपका परिचय अब इस चीज को आपको ऑथेंटिक दिखाने आने के लिए कुछ विद्वानों के स्टेटमेंट तो देने ही होते हैं जब भी आपसे क्वेश्चन पूछ ले कभी अगर एग्जाम में मैक्सिमम टाइम पे ये क्वेश्चन पूछे जाते हैं कि समाजशास्त्र का परिचय अर्थ परिभाषा और विषय क्षेत्र के साथ समझाइए विस्तार से ये आपके 20 मार्क्स के क्वेश्चन आते हैं तो ये काफी इंपॉर्टेंट हो जाता है कि आप किस स्टेटस में लिखोगे किस पॉइंट ऑफ व्यू पे लिखोगे किस-किस तरह से एक-एक क्रम में कैसे बढ़ो ग जिससे कि आपको अच्छे मार्क्स मिल सके तो सबसे पहले जब भी इस तरह से क्वेश्चन आपसे पूछता है आपको अपना एक पॉइंट ऑफ व्यू ओवरव्यू देना पड़ेगा कि आप क्या सोचते हो सोशल को लेकर के उसके बाद कम से कम आपको दो विद्वानों के स्टेटमेंट देने होंगे जैसे कि यहां पर मैंने मैक्स बबर और
4:35 सोरोकिन का दे करर के समझाया है इस तरह से आपको भी दो विद्वानों का देना पड़ेगा अब इस पर समाजशास्त्र पर अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखते हुए मैक्स बबर क्या कहते हैं कि समाजशास्त्र वह विज्ञान है जो सामाजिक क्रिया का विश्लेषणात्मक बोध कराने का प्रयास करता है मैक्स पेपर क्या कहता है कि समाजशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो समाज में जो भी क्रियाएं हो रही है जो भी काम हो रहे हैं जो भी जिस भी तरीके से जो एक्शन हमें समाज में देखने को मिलते हैं कि लोग इस तरह से कर रहे हैं सामाजिक राजनीतिक आर्थिक मानसिक जिस भी रूप में जिस तरह का एक्शन ले रहे हैं उन चीजों का विश्लेषणात्मक अध्ययन कि ये कर रहे हैं इसके पीछे रीजन क्या है ये क्यों कर रहे हैं ऐसा क्यों उन्होंने किया ऐसा क्यों समाज एक्शन ले रहा है तो वो सारी चीजों का बोध कराने का काम कौन करता है समाजशास्त्र कहता है ये मैक्स बेबर का अपना पॉइंट ऑफ व्यू था समाजशास्त्र प अब समाजशास्त्र पर अपना विचार रखते हुए सोरोकिन महोदय क्या
5:20 कहते हैं सोरोकिन कहते हैं कि समाजशास्त्र सामाजिक सांस्कृतिक घटनाओं के सामान्य स्वरूपों प्रारूपों और विभिन्न प्रकार के अंत संबंधों का सामान्य विज्ञान है सोरोकिन कहते हैं कि समाजशास्त्र जो है ये सामाजिक और सांस्कृतिक घटनाओं के बीच में कोई भी समाज है उसकी कुछ सामाजिक घटनाएं होती हैं और कहीं ना कहीं वो समाज की एक अपना कल्चर होता है और समाज की जो घटनाएं होती हैं किसी ना किसी तरीके से उसके कल्चर से कनेक्टेड होती हैं उसके रिलीजन से कनेक्टेड होती हैं तो समाज की जो सामाजिक है घटनाएं वो सांस्कृतिक घटनाओं से किस तरह से कनेक्टेड है उनके स्वरूप क्या है सामाजिक सांस्कृतिक घटनाओं के प्रारूप क्या है और किस तरह से से सामाजिक घटनाओं का सांस्कृतिक घटनाओं से या समाज का उसकी संस्कृति से किस तरह से कनेक्शन है किस तरह से उसके हर एक एक्शन पर उसकी
6:08 संस्कृति की झलक दिखती है ये हमें बताता है कौन समाजशास्त्र समाजशास्त्र में हम इन्हीं चीजों का अध्ययन करते हैं तो इस तरह से मैक्स बबर ने और सोरोकिन ने अपना-अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखा समाजशास्त्र को लेकर के तो हमको जो पहला टॉपिक पढ़ना था कि समाजशास्त्र क्या है तो वो हमने पढ़ लिया कि भाई समाजशास्त्र ये है समाजशास्त्र के परिचय के बारे में हमने पढ़ लिया कि ये है और हमने दो विद्वानों का स्टेटमेंट भी इस पे दे दिया कि हां यह समाजशास्त्र होता है सेकंड है हमारा अर्थ आइए अर्थ के बारे में देखते हैं तो समाजशास्त्र का अर्थ हमने देख लिया कि समाज का विज्ञान या समाज का शास्त्र इसके बाद हमको परिभाषाएं देखनी थी कि परिभाषा क्या है ये परिभाषा हमने देख लिया कि देखो मैक्स वेवर ने परिभाषा दिया है सोरोकिन ने दिया है और ये हमारी अपना पॉइंट ऑफ व्यू है समाजशास्त्र को देखने का तो यहां तक तो हमने चीजें कंप्लीट कर लिया कि इस इस तरीके से हमने परिचय अर्थ और परिभाषा समझा
6:55 अब हमें समझना है अगला पॉइंट ऑफ व्यू क्या है इसका प्रकृति कि आखिर समाजशास्त्र की प्रकृति कैसी है समाजशास्त्र को अगर हम समझने जा रहे हैं तो उसका नेचर कैसा है ये चीज तो समझना पड़ेगा अब अगर हम इसकी प्रकृति के बारे में बात करें कि समाजशास्त्र की प्रकृति कैसी है तो समाजशास्त्र की प्रकृति यद्यपि वैज्ञानिक है क्योंकि वैज्ञानिक है तभी तो इसको शास्त्र का नाम दिया गया तभी तो इसको सामा समाज का विज्ञान कहा गया तो समाज की जो प्रकृति है समाजशास्त्र की वो तो वैज्ञानिक है इसी के आधार पर आगस्ट कामटे से समाजशास्त्र का लेकिन ये भौतिक विज्ञान के समान पूर्ण यथार्थवादी नहीं है मतलब क्या इसका इसका मतलब यह है कि जैसे हम भौतिक विज्ञान में चीजों को देखते हैं एक जो फिजिक्स होता है या फिजिकल साइंस जिसको बोल सकते हो वो साइंस में जो चीजें हमें देखने को मिलती है वैसी समाजशास्त्र में देखने को नहीं मिलेंगी यानी कि जैसे कि
7:41 अगर भौतिक समाज के बारे में बात किया जाए तो भौतिक जो विज्ञान है ना वो पूरी तरह से यथार्थवादी होता है यानी कि उसमें जो भी चीजें होती हैं जो भी एक्शंस होते हैं रिएक्शंस होते हैं वो एकदम फिक्स्ड होते हैं यानी कि अगर आप हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को मिलाओ ग तो पानी ही बनेगा उसकी जो एक विशेष मात्रा है कि दो हाइड्रोजन एक ऑक्सीजन मिलाओ ग तो पानी ही बनेगा आज मिलाओ 10 साल बाद मिलाओ 100 साल बाद मिलाओ वो चीजें वही रहने वाली हैं वो चेंज नहीं होंगी लेकिन लोगों का कि आज दो इंसान एक साथ मिल रहे हैं एक समाज में रह रहे हैं वो अलग तरीके से रहेंगे अगले दिन देखोगे अगले दिन वो दोनों मिलेंगे जरूरी नहीं है कि सेम एक्शन ही होगा सेम तरह का रिएक्शन ही होगा वो डिफरेंट हो सकता है क्योंकि इंसान हर टाइम पर चेंज हो रहा है हर टाइम पर बदल रहा है उसकी मानसिक स्थिति सामाजिक स्थिति उसके सोचने समझने उसका मनोभाव हर
8:26 टाइम पर अलग हो सकता है तो इसको फिजिक्स की तरह भौतिक विज्ञान की तरह यथार्थवादी नहीं समझा जा सकता भौतिक विज्ञान का जो भी रूल है अगर गुरुत्वाकर्षण का रूल काम करता है तो वो आज भी काम कर रहा है हज साल पहले भी काम कर रहा था हजार साल बाद भी काम कर रहा होगा कि अगर पेड़ से कोई चीज टूटती है तो नीचे ही गिरेगी वो ऊपर नहीं जाएगी मतलब ये गुरुत्वाकर्षण का रूल है तो है तो इस तरह से जो समाजशास्त्र है ना ये वैज्ञानिक तो है इसकी प्रकृति इसके बारे में हम अच्छे तरीके से समझ सकते हैं जान सकते हैं लेकिन ये पूरी तरह से भौतिक विज्ञान की तरह यथार्थवादी नहीं है तो कई बार आपसे ऑप्शनल में इस तरह के क्वेश्चन पूछ लिए जाते हैं कि भौतिक विज्ञान की प्रकृति कैसी है वैज्ञानिक है पूर्ण यथार्थवादी है पूर्ण वैज्ञानिक है तो आपको वहां पर देखना है कि आपको वैज्ञानिक पे तो आप लगा सकते
9:12 हो लेकिन अगर आपके ऑप्शंस में पूर्ण यथार्थवादी आ रहा है तो वो करेक्ट नहीं होगा क्योंकि समाजशास्त्र पूर्ण यथार्थवादी विज्ञान नहीं है तो ये रही समाजशास्त्र की क्या प्रकृति कि इसकी प्रकृति वैज्ञानिक तो है लेकिन ये भौतिक विज्ञान के तरह से पूरी तरह से यथार्थवादी नहीं है अब हमारे पास बचता है इसका लास्ट विषय क्षेत्र विषय क्षेत्र के बारे में बात करें कि इसका विषय क्षेत्र क्या है तो अगर आप समाजशास्त्र की बात करोगे ना तो समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र अपने आप में बहुत ब्रॉड है क्योंकि समाज ही बहुत ज्यादा ब्रॉड है ना समाज में हर एक चीज का अपना एक अलग नजरिया होता है अलग पर्सपेक्टिव होता है अगर आप इंडिया में रह रहे हो इंडिया का समाज अलग है इंडिया में भी हर एक स्टेट का समाज अलग है स्टेट के हर एक राज्य राज्य में जो डिस्ट्रिक्ट है ना हर एक डिस्ट्रिक्ट एकएक छोटे-छोटे गांव
9:57 में भी हर एक तरह का समाज अलग है तो समाज के बारे में अगर समझना है तो बहुत विस्तृत होगा इसका विषय क्षेत्र इसको समझने के लिए बहुत सारे पॉइंट ऑफ व्यू आपको रखने पड़ेंगे बहुत सारी चीजें देखनी पड़ेंगी कि इंडिया में ये है फॉरेन में ये है इस कॉन्टिनेंट में इस तरह का है बहुत सारे कल्चर देखने को मिलेंगे आपको तो समाजशास्त्र की विषयवस्तु अपने आप में कोई छोटी सी नहीं है कि आप जाक के पढ़ लोगे इसके लिए आपको बहुत ज्यादा रिसर्च करना पड़ेगा बहुत ज्यादा समझना पड़ेगा तो यानी कि इसका विषय क्षेत्र अपने आप में बहुत ब्रॉड है अगर आप विषय क्षेत्र ही ढूंढने चले जाओगे जैसे आप अगर इंडिया में हो इंडिया में अगर आप साउथ में गए हो तो आपको दूसरी तरफ का पूरा कल्चर मिलेगा उनका समाज उनका रहन सहन उनका खाना पना उनका पहनना उनका कल्चर मतलब हर एक चीज कहीं ना कहीं डिफरेंट मिलेगी अगर आप नॉर्थ इंडिया से उसके कंपेरिजन करोगे तो तो समाजशास्त्र का जो विषय क्षेत्र है अपने आप में बहुत ब्रॉड है इस पर अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखते
10:45 हुए विषयवस्तु पर अपना रिसर्च रखते हुए गंस वर्ग ने रिसर्च किया था और इनके अनुसार इन्होंने समाजशास्त्र के कुछ रूप रखे हैं जैसे कि इन्होंने पहला रूल जो रखा हुआ है वो है इन्होंने कहा है कि स्वरूप शास्त्र है समा समाजशास्त्र का जो पहला विषय क्षेत्र है वह है कि समाजशास्त्र स्वरूप शास्त्र की तरह काम करें यानी कि वो समाजों के स्वरूपों का अध्ययन करें कि कौन सा समाज का स्वरूप कैसा है ये समाज किस तरह से एक्ट कर रहा है किस तरह से इस समाज की चीजें काम कर रही है तो स्वरूपों का अध्ययन करना पहला काम है विशेष क्षेत्र है समाजशास्त्र का दूसरा इन्होंने कहा सामाजिक नियंत्रण को समझना भी समाजशास्त्र का विशेष क्षेत्र है यानी कि हर एक समाज है ना हर एक समाज के अपने कुछ नियंत्रण होते हैं हर एक समाज आप प्राचीन से प्राचीन समाज उठा कर के देख लोगे और आज के समाज को भी उठा कर के देख लोगे ना आपको
11:30 दिखेगा कि कहीं ना कहीं निषेध है कोई चीज प्राचीन समाजों में ये चीज निषेध है ये तुम नहीं कर सकते हो मतलब वो चीज मनाही ही है यह चीज तुम्हारे लिए नहीं है हर एक समाज के अपने कुछ ना कुछ नियंत्रण है कि यह कर सकते हैं या नहीं कर सकते हैं ये अच्छा है ये बुरा है तो हर एक समाज में कौन-कौन से नियंत्रण काम करते हैं किस तरह के सामाजिक नियंत्रण वर्क करते हैं ये चीजों का पता लगाना भी समाजशास्त्र का काम है और समझना कि कौन-कौन से चीजों का निषेध किस समाज में है अगला है आपका सामाजिक व्याधि की यानी कि इसको भी समझना जरूरी है कि कौन सा समाज है जो अगर आगे नहीं बढ़ पा रहा या समाज में व्याधि आ रही है प्रॉब्लम्स आ रही है कि कौन सी चीजें हैं जो समाज को आगे बढ़ने से रोक रही है उन चीजों का अध्ययन करना भी समाजशास्त्र का काम है अगला चीज है आपका सामाजिक प्रक्रियाएं कि हर समाज की अपनी एक
12:15 सामाजिक प्रक्रिया होती है तो आपको समझना है कि कौन सा समाज किस तरह से एक्ट कर रहा है उसकी प्रक्रिया किस तरह से है ये सारा कुछ समझना समाजशास्त्र का काम है गंसबर्ग के दिए गए सिद्धांत के अनुसार इसके बाद क्या हुआ कि 1957 में 1957 में अमेरिका में एक समित स्थापित किया गया जिसमें सभी लोगों को निमंत्रण दिया गया सभी को बुलाया गया कि एक पेज पर बैठ कर के एक जगह पर बैठ कर के सभी लोग एक अपना समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र का ओवरव्यू दें कि क्या हो सकता है तो अमेरिका में समाजशास्त्रीय समिति रखी गई और इस समिति में के अनुसार कुछ चीजें डिफाइन किया गया कि यह ये समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र में रखा जा सकता है अब इसमें बताया गया कि सबसे पहली चीज कि समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र में पहला आता है सामाजिक समाजशास्त्रीय
13:01 विश्लेषण यानी कि समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र यह है कि वह समाजशास्त्र का विश्लेषण करें समाज का विश्लेषण करें कि कौन से जगह पर कौन सा समाज काम करता है उस समाज के काम क्या है क्रियाएं क्या है वो किस तरह से सोचता है उसके आर्थिक सामाजिक राजनीतिक मानसिक वो स्थिति क्या है उन सारी चीजों का अध्ययन करना उसको विश्लेषण करके यानी कि विशेष तरीके से उसका अध्ययन करना ही समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र है दूसरा कहा गया कि मूलभूत सामाजिक संस्थाएं यानी कि मूलभूत सामाजिक संस्थाएं क्या है वो कौन सी चीजें हैं जो आपको हर एक समाज में देखने को मिलती है वो मतलब प्राइमरी चीज क्या है जो आपको हर समाज में देखने को मिलती है यह आपको समझना जरूरी है और ये आपको समझना पड़ेगा तो ये एक तरीके से विषय क्षेत्र के रूप में रखा गया कि हर एक समाज का अगर आप समाजशास्त्रीय अध्ययन करने जा रहे हो तो आपका विषय क्षेत्र होगा कि उनकी
13:46 सामाजिक संस्थाएं क्या हैं किस तरीके से वोह समाज वर्क करता है सामाजिक संस्था में कौन सी चीजें आती हैं आपके रिश्तेदारी आती है नातेदारी आती है विवाह आता है ये सारे जो आपके संबंध हैं उन संबंधों का अध्ययन करना बहुत इंपॉर्टेंट है कि किस तरीके के एक समाज वर्क करता है अगला है आपका सामाजिक जीवन की प्राथमिक इकाइयां कि एक समाज जो है उसका जो सामाजिक जीवन है उसकी प्राथमिक इकाइयां क्या है मतलब बहुत बेसिक नीड क्या है कि एक समाज है उस समाज की बेसिक नीड क्या है उसको समझना जरूरी है कि प्राथमिक इकाई क्या है उनकी फर्स्ट प्रायोरिटी क्या होती है हर एक समाज की एंड अगला है आपका मौलिक सामाजिक प्रतिक्रियाएं यानी कि हर एक समाज का अगर आप सामाजिक अध्ययन करने जा रहे हो तो उनकी मौलिकता क्या है उनके लिए मौलिक रूप में कौन सी चीज इंपॉर्टेंट है उनकी
14:32 प्रतिक्रियाएं किस चीज पर किस तरह से उनका रिएक्शन आता है किस तरह से वह किस चीज़ को समझते हैं यह बहुत विशेष रूप से अध्ययन करना समाजशास्त्र के विषय क्षेत्र के अंतर्गत आता है तो हमने यह चीज़ तो समझ लिया कि समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र यह है यह यह चीजों को समझना है अब इसको समझने के लिए या इसको अच्छे तरीके से एक्सप्लोर करने के लिए कुछ इसके विषय क्षेत्र हो सकते हैं या इनको पढ़ने का एक तरीका हो सकता है कि इस तरीके से हमको यह चीज़ करना है मतलब इसमें भी बहुत सारे सारे कॉन्फ्लेट देखने को मिलते हैं कि कुछ लोग बोलते हैं कि इस तरीके से इसका अध्ययन किया जा सकता है या इसमें ये चीजें सम्मिलित की जा सकती है कुछ बोलते हैं नहीं नहीं इसमें ये चीजें सम्मिलित की जा सकती है तो वो भी हमको समझना पड़ेगा और जानना पड़ेगा तो आइए देखते हैं कि वो कौन-कौन सी चीजें हैं या कौन-कौन सा ब्रॉड एस्पेक्ट है या किस तरीके का स्वरूप है जिसके अंतर्गत हमको वो चीजें पढ़नी है तो
15:17 आओ समझते हैं तो समाजशास्त्र के अध्ययन की ये विचारधाराएं हैं कि समाजशास्त्र को अगर आपको अध्ययन करना है तो इन दो विचारधाराओं के माध्यम से हम समझ सकते हैं ब्रॉडली जितने भी विद्वान थे उन्होंने इन दो विचारधाराओं में अपना-अपना पॉइंट ऑफ व्यू रखा है अपना मत रखा है कुछ लोग इसको मानते हैं कुछ लोग इसको मानते हैं पहली विचारधारा है आपका स्वरूपा मेंक विचारधारा और दूसरा है आपका समन्वयक विचारधारा अब ये है क्या इस विचारधारा का अपना मानना क्या है और इनका पॉइंट ऑफ व्यू क्या है किस पॉइंट ऑफ व्यू पर ये दोनों अलग हुए हैं डिफरेंशिएबल बात करते हैं स्वरूपा मेंक विचारधारा की तो स्वरूपा मेंक विचारधारा क्या कह रहा है कि इस विचारधारा के अनुसार समाजशास्त्र एक विशेष विज्ञान है जिसमें मात्र कुछ विशेष प्रकार के संबंधों का ही अध्ययन किया जाता है स्वरूपा मेंक विचारधारा का मानना है कि समाजशास्त्र एक विशेष विज्ञान है यह समाज के हर एक पहलू
16:05 का अध्ययन नहीं करता है ये कुछ स्पेसिफिक पार्ट्स का अध्ययन करता है कि किसी समाज को अगर समझना है तो स्पेसिफिक पार्ट का अध्ययन कर लिया स्पेसिफिक पार्ट का अध्ययन कर लिया और इस तरीके से हम पूरी दुनिया का पूरे विश्व का अध्ययन कर सकते हैं अगर हम समाज के हर एक एस्पेक्ट को अध्ययन करने चले जाएंगे तो हम समाजशास्त्र को पूरी दुनिया में नहीं समझ पाएंगे क्योंकि बहुत ब्रॉड है दुनिया बहुत सारी चीजें हैं तो हम केवल कुछ स्पेसिफिक चीजों को देखते हैं और उन स्पेसिफिक चीजों के बदौलत उन चीजों की मदद से हम समाजशास्त्र का एक ओवरव्यू रच सकते हैं कि हां यह समाजशास्त्र होता है ऐसा समाजशास्त्र होना चाहिए यह विषय क्षेत्र के अंतर्गत आ सकता है ये किसका मानना है यह स्वरूपा मेंक विचारधारा का मानना है कि हम केवल कुछ विशेष चीजों का ही अध्ययन करते हैं समाजशास्त्र में इस तरह की विचारधारा रखने वाले विद्वानों में नाम आता है जर्ज सिमेल का मैक्स बेवर का टोनीज का वान विज का और भी विद्वान है जो
16:53 इस विचारधारा को सपोर्ट करते हैं इसके बाद जो दूसरी विचारधारा है वो है आपका समन्वयक विचार विचारधारा अब यह विचारधारा क्या कहती है तो इस विचारधारा के अनुसार समाजशास्त्र एक सामान्य विज्ञान है इसके अंतर्गत सभी सामान्य संबंधों का अध्ययन किया जाता है इस विचारधारा का मानना है कि समाजशास्त्र एक सामान्य विज्ञान है ना कि एक विशेष विज्ञान है और यह समाज के हर एक पहलू का हर सामान्य विज्ञान का अध्ययन करती है मतलब इसमें हर एक चीज का अध्ययन किया जाता है इसमें किसी स्पेसिफिक संबंध का ही केवल अध्ययन नहीं किया जाता है तो ये डिफरेंस है दोनों में एक कह रहा है कि केवल विशेष संबंधों का अध्ययन किया जाता है एक कह रहा है कि सभी सामान्य संबंधों का अध्ययन किया जाता है इसके मानने वालों में है सोरोकिन का नाम आता है दुर्खीम का नाम आता है हॉब हाउस का नाम आता है गंस
17:39 वर्ग का नाम आता है और भी विद्वान है जो इसको सपोर्ट करते हैं तो इस तरह से इन दो विचारधाराओं के अध्ययन करते हुए हम समाजशास्त्र की विचारधारा को समझ सकते हैं कि समाजशास्त्र क्या है तो बेसिकली हमने इस वीडियो में आपका परिचय अर्थ परिभाषा प्रकृति और विषय क्षेत्र इसको समझने के लिए कौन सी विचारधाराएं आएंगी ये सारा कुछ इस वीडियो में अध्ययन कर लिया है तो ये रहा हमारा पूरा यूनिट नंबर वन जो कि हमने इस वीडियो में कवर कर लिया और आई होप आपको समझ में आया होगा अगर आपने इसको अच्छे तरीके से समझ लिया है तो डेफिनेटली आपके सिलेबस का 30 पर आपने कवर कर लिया क्योंकि आगे जो भी चैप्टर्स आने वाले हैं यूनिट आने वाले हैं ना ये कहीं ना कहीं इन चीजों से कनेक्टेड होंगे कोई यूनिट आ जाएगा समाजशास्त्र की प्रकृति को लेकर के कोई इसके विषय क्षेत्र का एक अपना पार्ट पकड़ कर के मान लिया कि समाजशास्त्र के अध्ययन की विचारधाराएं अब इसी विचारधाराओं पे एक यूनिट आ गया है तो अगर आपने इसको समझ लिया
18:25 है तो काफी कुछ मात्रा में आपने ये चीजें समझ रखी है तो आई होप यह वीडियो तुम्हें समझ में आया होगा वीडियो पसंद आए तो लाइक जरूर कीजिए पहली बार इस चैनल पे आए हैं तो प्लीज विजिट द चैनल इफ यू थिंक इट इज वैल्युएबल तो आपको सब्सक्राइब करनी चाहिए एंड शेयर टू योर फ्रेंड्स जिससे कि उनकी भी हेल्प हो सके और वो भी अपने एग्जाम में अच्छे मार्क्स ला सके तो मिलते हैं आपसे अगले वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद जय भारत