ग्रामीण समाजशास्त्र का अर्थ, Rural Sociology meaning

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो ग्रामीण समाजशास्त्र का परिचय देता है, जिसमें इसकी परिभाषा, समाजशास्त्र की शाखा के रूप में इसका स्थान और विभिन्न समाजशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषाओं को शामिल किया गया है। यह ग्रामीण जीवन और शहरी जीवन के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है, और बताता है कि ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण समुदायों के विकास के नियमों का अध्ययन कैसे करता है।

  • ग्रामीण समाजशास्त्र समाजशास्त्र की एक विशिष्ट शाखा है जो ग्रामीण जीवन का अध्ययन करती है।
  • यह शाखा ग्रामीण पर्यावरण में सामाजिक घटनाओं और समूहों पर केंद्रित है।
  • विभिन्न समाजशास्त्रियों ने ग्रामीण समाजशास्त्र को अपने-अपने दृष्टिकोण से परिभाषित किया है, लेकिन सभी ग्रामीण जीवन के अध्ययन के महत्व पर सहमत हैं।

परिचय

यह वीडियो रूरल सोशियोलॉजी (ग्रामीण समाजशास्त्र) पर आधारित है, जो बीए थर्ड ईयर और एमए के छात्रों के लिए उपयोगी है। इसमें ग्रामीण समाजशास्त्र की परिभाषा और अर्थ को समझाया गया है। समाजशास्त्र एक पेड़ के समान है जिसकी कई शाखाएँ हैं, जैसे कि क्रिमिनोलॉजी, रूरल सोशियोलॉजी, अर्बन सोशियोलॉजी, सोशल साइकोलॉजी, पॉपुलेशन, विमेन एंड सोसाइटी और इंडस्ट्रियल सोशियोलॉजी।

समाजशास्त्र और उसकी शाखाएँ

समाजशास्त्र मानव व्यवहार और सामाजिक संबंधों का अध्ययन करता है। यह एक नवीन विज्ञान है जो मनुष्य के व्यवहार की जटिलताओं, सामाजिक संबंधों और सामाजिक अंतःक्रियाओं का अध्ययन करता है। समाजशास्त्र की कई शाखाएँ हैं, जैसे औद्योगिक समाजशास्त्र, धर्म का समाजशास्त्र, ज्ञान का समाजशास्त्र, शिक्षा का समाजशास्त्र, चिकित्सा का समाजशास्त्र, कानून का समाजशास्त्र, सामाजिक मनोविज्ञान, नगरीय समाजशास्त्र, राजनीतिक समाजशास्त्र और पारिवारिक समाजशास्त्र। ये शाखाएँ मनुष्य के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करती हैं। उदाहरण के लिए, दुर्खीम ने अपनी पुस्तक 'द डिवीजन ऑफ लेबर इन सोसाइटी' में उद्योगों में सामाजिक संबंधों के बारे में बताया है।

ग्रामीण समाजशास्त्र: एक विशिष्ट शाखा

ग्रामीण समाजशास्त्र समाजशास्त्र की एक विशेष शाखा है जो मानव के ग्रामीण जीवन का अध्ययन करती है। भारत और अन्य देशों में ग्रामीण संस्कृति पाई जाती है। ग्रामीण समाजशास्त्र में, मानव के ग्रामीण जीवन का संपूर्णता के साथ अध्ययन किया जाता है। आज भी विश्व की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। ग्रामीण समाजशास्त्र में ग्रामीणों का व्यवसाय जीवन नगरीय क्षेत्रों में निवास करने वालों से भिन्न होता है। ग्रामीणों का जीवन सरल और सादा होता है, और वे प्रकृति पर निर्भर होते हैं।

ग्रामीण समाजशास्त्र का उदय

ग्रामीण समाजशास्त्र का उदय इसलिए हुआ क्योंकि ग्रामीणों का जीवन, व्यवसाय और दैनिक रूटीन शहरी क्षेत्रों से अलग है। शहरी क्षेत्रों में लोग देर से उठते हैं और विभिन्न सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग प्रकृति से जुड़े होते हैं और उनका जीवन अलग होता है। समाजशास्त्र सभी मानवीय समूहों और घटनाओं का अध्ययन करता है, जबकि ग्रामीण समाजशास्त्र केवल ग्रामीण पर्यावरण में सामाजिक घटनाओं और समूहों का अध्ययन करता है। चार्ल्स होफर के अनुसार, ग्रामीण समाजशास्त्र अन्य सभी सामाजिक विज्ञानों के साथ आवश्यकता के परिणामस्वरूप विकसित हुआ है।

विभिन्न समाजशास्त्रियों द्वारा परिभाषाएँ

विभिन्न समाजशास्त्रियों ने ग्रामीण समाजशास्त्र को अपने-अपने तरीके से परिभाषित किया है। बर्ट रेड के अनुसार, ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में मानवीय संबंधों का अध्ययन करता है। जेबी चितांबर के अनुसार, ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण मानव और उसके समूहों के साथ अंतःक्रिया का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। स्टुअर्ट चेपिन के अनुसार, ग्रामीण जीवन का समाजशास्त्र ग्रामीण जनता, ग्रामीण सामाजिक संगठन और ग्रामीण समाज में कार्यरत सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है। सेंडरसन के अनुसार, ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में निहित जीवन का समाजशास्त्र है। लॉरी नेल्सन के अनुसार, ग्रामीण समाजशास्त्र की विशेष सामग्री विभिन्न प्रकार के समूहों का विवेचन और विश्लेषण है जो ग्रामीण पर्यावरण में पाए जाते हैं। ए आर देसाई के अनुसार, ग्रामीण समाजशास्त्र का मूल कार्य ग्रामीण समाज के विकास के नियमों को खोज निकालना है। ग्रामीण पर्यावरण का अर्थ है प्रकृति के साथ लोगों का संपर्क, उनका दैनिक जीवन और उनकी सामाजिक गतिविधियाँ।

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Transcript

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0:00 गुड इवनिंग स्टूडेंट कैसे हैं आप सभी स्टूडेंट आज मैं आपको एक टॉपिक पढ़ाने जा रही हूं यह मेरा खास तौर पर जो मेरा न्यू टीरी में जो मेरे बीए थर्ड ईयर के स्टूडेंट हैं उनका एक पेपर है साथ ही एमए में भी यह पेपर चलता है रूरल सोशलॉजी ग्रामीण समाजशास्त्र आज मैं इसको पढ़ा रही हूं इसकी पूरी सीरीज में बनाऊंगी तो ध्यान रखिएगा आप सभी लोग मुझसे जुड़े रहे देखिए ग्रामीण समाजशास्त्र य पूरे पेपर का नाम है रूरल जीी देखिए ग्रामीण समाजशास्त्र इस पेपर में मैं सबसे पहले ग्रामीण समाजशास्त्र की परिभाषा और अर्थ की ग्रामीण समाजशास्त्र किसे कहते हैं उसको बताऊंगी सबसे पहले अगर हम बात करें स्टूडेंट रूरल सोशलॉजी की रूरल सोशलॉजी

0:52 देखिए समाजशास्त्र अगर हम बात करें एक पेड़ के समान है जिसकी कई शाखाए हैं बहुत सारी ब्रांचेस है ठीक है अगर मैं बात करूं समाजशास्त्र की बहुत सारी ब्रांचेस है जिसमें अगर हम बात करें क्रिमिनोलॉजी रूरल सोशलॉजी अर्बन सोशलॉजी सोशल साइकोलॉजी पॉपुलेशन विमन एंड सोसाइटी और इंडस्ट्रियल सोशलॉजी तो यह सब समाजशास्त्र की शाखाएं हैं शाखाएं इन द सेंस कि इसके अंतर्गत हम किसकिस चीज का अध्ययन किया जाता है समाजशास्त्र अपने आप में एक वृहद अवधारणा है आगे चलते हैं हम पढ़ेंगे ग्रामीण समाजशास्त्र के बारे में स्टूडेंट देखिए समाजशास्त्र के अंतर्गत हम ह्यूमन बिहेवियर का सामाजिक

1:39 संबंधों का हम इनका अध्ययन करते हैं वास्तव में समाजशास्त्र एक नवीन विज्ञान है ऐसा माना जाता है कि वह मनुष्य की व्यवहार की जटिलताओं का सामाजिक संबंधों का सामाजिक अंत क्रियाओं का विभिन्नता से विभिन्नता पूर्वक और परिपूर्णता के संदर्भ में अध्ययन करता है अगर हम मनुष्य के व्यवहार की बात करें मनुष्य के व्यवहार जो होते हैं वह सामाजिक जीवन के विभिन्न पक्ष जो होते हैं उनके अध्ययन करने के लिए और साथ ही साथ उनकी अनेक विशेष शाखाओं का जन्म हुआ देखिए समाजशास्त्र के अंतर्गत हम ह्यूमन बिहेवियर का अध्ययन करते हैं मानव व्यवहार का सामाजिक संबंधों का अगर हम देखें मात्र सामाजिक संबंध समाज ही में ही नहीं अगर हम देखें औद्योगिक क्षेत्रों में

2:27 नगरीय क्षेत्रों में ग्रामीण क्षेत्रों में या फिर शैक्षिक संस्थानों में अन्य संस्थानों में इनके सभी संदर्भ में हम समाजशास्त्र का अध्ययन करते हैं अगर मैंने अभी अभी बताया था समाजशास्त्र की बहुत श शक है देखि देखिए मैंने यहां मेंशन किया है जैसे औद्योगिक समाजशास्त्र धर्म का समाजशास्त्र ज्ञान का समाजशास्त्र शिक्षा का समाजशास्त्र चिकित्सा का समाजशास्त्र कानून का समाजशास्त्र सामाजिक मनोविज्ञान नगरीय समाजशास्त्र राजनीतिक समाजशास्त्र पारिवारिक समाजशास्त्र समाजशास्त्र की विभिन्न हैं जो मनुष्य के विभिन्न पहलुओं का विभिन्न पहलू मतलब औद्योगिक समाजशास्त्र उद्योगों में जैसा कि दुर्खीम ने अपनी पुस्तक द डिवीजन ऑफ लेबर इन सोसाइटी बताया अब आप कहोगे उद्योगों से

3:13 सामाजिक संबंधों का क्या लेना देना है तो बिल्कुल लेना देना है बेटा दुर्खीम ने भी बताया था दुर्खीम ने जब अपना सिद्धांत बताया था श्रम विभाजन का सिद्धांत देखो श्रम विभाजन डिवीजन ऑफ लेबन काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देना देखिए जब कोई भी काम होता है फॉर एग्जांपल जब घर पर खाना बनाने का भी कार्य होता है यदि कोई सब्जी काट दे ठीक है सब्जी ला दे सबसे पहले सब्जी बाजार से लाना उन्हें काटना और उन्हें बनाना तीनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं यदि एक ही व्यक्ति वो कार्य करेगा तो कार्य में देरी होगी लगर लेकिन अगर अलग-अलग व्यक्ति उन कार्य को करेंगे तो कार्य शीघ्र होगा और कार्य में निपुणता आएगी औद्योगिक क्षेत्रों में जब कार्यों का विभाजन होता है बड़ी-बड़ी फैक्टर में तो लोग आपस में कहीं ना कहीं सामाजिक

3:58 संबंधों में बन जाते हैं तो सिर्फ हम यह नहीं कह सकते सामाजिक संबंध का संबंध सिर्फ सोसाइटी से है जो हमारे औद्योगिक समाजशास्त्र यहां देखिए मैंने इसको पॉइंट में लिखा है जो हमारे औद्योगिक समाजशास्त्र है धर्म है ज्ञान है शिक्षा है चिकित्सा है ठीक है कानून के समाजशास्त्र की यदि हम बात करें सामाजिक मनोविज्ञान की बात करें नगरीय समाजशास्त्र की बात करें राजनीतिक समाजशास्त्र की बात करें पारिवारिक समाजशास्त्र की बात करें यह समाजशास्त्र की वि ब्रांचेस है ब्रांचेस मतलब बहुत सारी शाखाएं हैं जो मानव के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करते हैं कि मनुष्य का व्यवहार पारिवारिक में राजनीति में नगर में कानून में इनमें किस प्रकार से रहता है तो ग्रामीण समाजशास्त्र

4:45 भी इसी प्रकार से समाजशास्त्र की एक विशेष शाखा है ध्यान रखिएगा फिर से रिपीट कर रही हूं ग्रामीण समाजशास्त्र भी इसी प्रकार से समाजशास्त्र की एक क्या है विशिष्ट शाखा है स्पेशल ब्रांच है जो मानव के ग्रामीण जीवन का सर्वागीण अध्ययन करती है देखिए अगर मैं भारत खास तौर पर भारत की बात करूं वैसे भारत के बाहर भी अनेक देशों में ग्रामीण कल्चर जो रूरल कल्चर है वह पाया जाता है ठीक है चा तुम इटली कह लो विभिन्न यूरोपियन कंट्री कह लो साउथ अमेरिका नॉर्थ अमेरिका सब में कहीं ना कहीं रूरल लाइफ जो है रूरल सोसाइटी जो है वह पाई जाती है ग्रामीण समाजशास्त्र के अंतर्गत हम किस चीज का अध्ययन करते हैं जो मानव के

5:31 ग्रामीण जीवन का जो ह्यूमन होता है उसकी ग्रामीण जीवन का संपूर्णता के साथ अध्ययन किया जाता है देखो मैंने यहां लिखा भी है विश्व की अधिकांश जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है देखिए आज भी विश्व की जो हमारी बहुत सारी जनसंख्या जनसंख्या का वृहत क्षेत्र है वोह ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करता है ग्रामीण समाजशास्त्र में ग्रामीणों का व्यवसाय जीवन नगरीय क्षेत्रों में निवास करने वालों से भिन्न होता है देखिए ग्रामीण जो लोग होते हैं उनके साथ क्या होता है नगरों में तो क्या होता है इजी टू अप्रोच आप पढ़ने जा रहे हैं हॉस्पिटल जा रहे हैं कोई बीमार हो तो तुरंत आप हॉस्पिटल पहुंच जाते हैं फिर कुछ आपको खाने का सामान लेना हो तुरंत आप

6:17 दुकान पहुंच जाते हैं अच्छे कपड़े खरीदने हो आप मॉल पहुंच जाते हैं लेकिन क्या आप यह सोच सकते हैं कि ग्रामीण लोगों के पास ऐसा कुछ उपलब्ध नहीं होता यदि उन्हें खाद्य सामग्री लेनी होती है तो गांव में दूर दराज के इलाको में छोटे-छोटे कस्बों में दुकाने होती हैं फिर यदि उन्हें कुछ लेना होता है तो वह प्रकृति के ऊपर निर्भर होते हैं जो उगाते हैं वही खाते हैं हमारी तरह नहीं कि आज मटर पनीर खाया तो कल छोले खाएंगे कल छोले खाए थे तो आज हम पनीर टिक्का खाएंगे ऐसा नहीं है उनकी लाइफ बहुत कठिन होती है वहां कोई रेस्टोरेंट नहीं होता वहां कोई होटल नहीं होता वहां का सरल सादा जीवन होता है उसमें वो जो लोग खेतों पर उगाते हैं उसी का उपभोग करते हैं तो ग्रामीण समाजशास्त्र के अंतर्गत बच्चों हम

7:03 पूरे संपूर्ण ग्रामीण जीवन का अध्ययन करेंगे ग्रामीण लोगों को देखो ग्रामीण लोगों का व्यवसाय और उनका जीवन नगरीय क्षेत्रों के व्यवसाय जीवन से अलग होता है ग्रामीणों का व्यवसाय क्या है कृति कृषि एग्रीकल्चर या उनके छोटे-मोटे लघु उद्योग होते हैं जबकि नगरीय क्षेत्रों में तो सरकारी नौकरियां हैं विभिन्न प्रा बैंक है सेक्टर्स हैं दुकाने हैं बहुत सारी चीजें हैं जहां नगरीय लोग व्यवसाय करते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों का व्यवसाय और उनका जीवन जो होता है नगरीय क्षेत्रों से बिल्कुल भिन्न होता है तो हम ग्रामीण जीवन उनका व्यवसाय उनका व्यवहार यहां पर देखिए मैंने लिख रखा है उनका व्यवहार जीवन की विधि विश्वास

7:48 ग्रामीण पर्यावरण से काफी प्रभावित है इसलिए उन्हीं का अध्ययन करने के लिए समाजशास्त्र की एक विशिष्ट शाखा के रूप में ग्रामीण समाजशास्त्र का उदय हुआ है देखिए ग्रामीण समाजशास्त्र का उदय कैसे हुआ है क्योंकि ग्रामीणों का जीवन अलग है व्यवसाय अलग है उनका दैनिक रूटीन भी अलग है अगर आप रूटीन की बात करें शहरी क्षेत्रों में लोग देर से सो के उठते हैं ठीक है फिर दूध वाला आया अब सब्जी वाला आया अब सफाई वाला आया लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में क्या है वह लोग प्रकृति से खुद का संपर्क रखते हैं खुद ही गाय भैंस का दूध निकालना पशुओं को सुबह-सुबह उठकर चारा देना फिर पशुओं के करने के बाद खेतों पर जाना उनका टोटली जीवन अलग है तो ग्रामीण समाजशास्त्र के अंतर्गत हम सभी

8:35 समाजशास्त्र की एक विशिष्ट शाखा मानते हुए इसको प्रथक से अध्ययन करते हैं तो यह क्या है समाजशास्त्र की एक विशिष्ट शाखा के रूप में ग्रामीण समाजशास्त्र का उदय हुआ देखो ग्रामीण समाजशास्त्र समाजशास्त्र से अलग क्यों है जहां ग्रामीण समाजशास्त्र जो समाजशास्त्र है समाजशास्त्र क्या है सभी मानवीय समूह और घटनाओं का अध्ययन करता है समाजशास्त्र वृहद स्तर पर सभी मानवीय समूहों का सभी सामाजिक घटनाओं का सामाजिक संबंधों का अध्ययन करता है जबकि ग्रामीण समाजशास्त्र केवल ग्रामीण समाजशास्त्र केवल ग्रामीण पर्यावरण में सामाजिक घटनाओं का व समूहों का अध्ययन करता है तो ग्रामीण समाजशास्त्र की सीमा कहां तक सीमित है

9:21 केवल ग्रामीण पर्यावरण से ग्रामीण मतलब रूरल एनवायरमेंट से रूरल एनवायरमेंट से ड जितने भी सोशल इवेंट होते हैं सामाजिक घटनाएं होती हैं उनके समूहों से और उनके अध्ययन तक संबंधित है यही कारण है कि जो ग्रामीण समाजशास्त्र है उसकी सीमित के कारण व समाजशास्त्र से प्रथक है वर्ना इन दोनों में कोई भेद नहीं है वर्तमान समय की बात करें क्योंकि विश्व में आधी से अधिक आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है इसलिए ग्रामीण समाजशास्त्र का अध्ययन आवश्यक माना जाता जाता है इसके बारे में चार्ल्स होफर ने लिखा है यहां देखिए मैंने ये डेफिनेशन लिखी है इसके संबंध में चार्ल्स होफर लिखते हैं कि

10:08 ग्रामीण समाजशास्त्र अन्य सभी सामाजिक विज्ञानों के साथ किसी आवश्यकता के परिणाम स्वरूप विकसित हुआ है वैज्ञानिक विचारों के क्षेत्र में यह एक मूल तथ्य है कि जब कभी मानव मस्तिष्क को विचलित कर देने वाली घटनाओं का वर्तमान विज्ञानों अथवा पद्धतियों द्वारा संतोष अध्ययन नहीं किया जाता उस समय कोई ना कोई विज्ञान प्रकाश में आता है देखिए हम शहरों का शहरी संस्कृति का अपराधों का सबका अध्ययन करे थे लेकिन जिस परिवेश से मनुष्य निकल कर आया है क्या सभी लोग नगरीय क्षेत्रों में पैदा हुए हैं आज नगरीकरण तो कहीं ना कहीं औद्योगीकरण का परिणाम है भारत में अगर हम बात करें भारत की आज भी 65 प्र आबादी

10:55 ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है मात्र 32 से 35 प्रतिशत ही नगरीय क्षेत्रों नगरीय कस्बों नगरीय एरिया में निवास करती है लेकिन कहीं ना कहीं वो पलायन करके ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों की ओर गए हैं तो ग्रामीण समाजशास्त्र एक विशेष विज्ञान के रूप में ग्रामीण जीवन का संपूर्णता के साथ अध्ययन करता है बच्चों अब मैं बहुत सारी आपको परिभाषाएं बताऊंगी जो विभिन्न समाजशास्त्र हों ने दी है देखिए ग्रामीण समाजशास्त्र समाजशास्त्र में ग्रामीण समाजशास्त्र या अन्य कोई टॉपिक हो समाजशास्त्र हों ने उन्हे अपने अपने स्तर से परिभाषित करने का प्रयास किया है यह ग्रामीण समाजशास्त्र को विभिन्न समाजशास्त्र हों ने अपने अपने स्तर से परिभाषित किया जैसे बर्ट रेड यहां देखिए आप बर्ट रेड ने लिखा है कि इसकी

11:42 विस्तृत परिभाषा के रूप में ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में मानवीय संबंधों का अध्ययन करता है यहां बरट्रेड लिखते हैं बच्चों बटेड ने साफसाफ लिखा है जो ग्रामीण समाजशास्त्र है ग्रामीण समाज शास्त्र क्या है ग्रामीण समाजशास्त्र है कि ग्रामीण पर्यावरण में मानवीय संबंधों का अध्ययन करता है तो यह बटेड की परिभाषा है कि जो ग्रामीण समाजशास्त्र है वह ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में ग्रामीण पर्यावरण मतलब उसी संदर्भ में मानवीय संबंधों का अध्ययन करता है यह है बर्ड रेट की परिभाषा फीर है जेबी चितांबर के अनुसार जेबी चितांबर के अनुसार ग्रामीण समाजशास्त्र को

12:28 ग्रामीण मानव और उसकी समूहों के साथ अंतःक्रिया का अध्ययन करने वाले विज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है चितांबर जी ने कहा था कि जो ग्रामीण समाजशास्त्र है वह ग्रामीण समाजशास्त्र को ग्रामीण मानव और उसके समूहों के साथ अंतःक्रिया समूह के साथ मतलब जो ग्रामीण व्यक्ति होते हैं उनकी विभिन्न समूहों के साथ जो अंत इंटरेक्शन होती है आमने सामने की स्थिति में जो वार्तालाप होता है अंतःक्रिया अध्ययन जब उनका अध्ययन किया जाता है उस अध्ययन करने वाले विज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है इसी प्रकार स्टुअर्ट चेप क्या लिखते हैं स्टर चेप लिखते हैं बच्चों ग्रामीण जीवन का समाजशास्त्र ग्रामीण जनता ग्रामीण सामाजिक

13:14 संगठन ग्रामीण समाज में कार्यरत सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है वो क्या कहते हैं कि जो व ग्रामीण स्टर्ट चैपिन लिखते हैं जो ग्रामीण जीवन का समाजशास्त्र है यह ग्रामीण जनता ग्रामीण ता ग्रामीण सामाजिक संगठन ग्रामीण समाज में कार्यरत प्रक्रियाओं का सामाजिक प्रक्रियाओं का अध्ययन है कार्यरत सामाजिक प्रक्रियाओं से मतलब सहयोगी और असहयोग प्रक्रिया यह उनका अध्ययन करता है उसे स्व चैपिन ने कहा है ग्रामीण समाजशास्त्र आगे चलते हैं सेंडरसन के अनुसार देखिए यहां सेंडरसन के अनुसार ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में निहित जीवन का का समाजशास्त्र है बहुत ही सिंपल शब्दों में

14:01 सेंडरसन देखिए बच्चों मैं जो ये आपको परिभाषाएं बता रही हूं मात्र बीए एमए तक नहीं आजकल यूजीसी नेट और सेट का जो पैटर्न चल गया है वो लोग परिभाषा या स्टेटमेंट पूछते हैं फिर संबंधित समाजशास्त्री का नाम देते हैं कि बताइए यह किसकी परिभाषा है तो आप सभी के लिए यह काफी लाभदायक भी है तो सेंडरसन क्या कहते हैं ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में निहित जीवन का समाजशास्त्र है यानी ग्रामीण पर्यावरण ग्रामीण पर्यावरण से एक आप यह मत लिख मैं बहुत विस्तार से तुम्हें बताती हूं देखो बार-बार आ रहा है ग्रामीण पर्यावरण यानी रूरल एनवायरमेंट रूरल एनवायरमेंट आते कभी आप यह तो नहीं सोच रहे बादल वर्षा यह सब नहीं रूरल एनवायरमेंट का

14:49 मतलब इससे नहीं है रूरल एनवायरमेंट का मतलब है प्रकृति के साथ लोगों का संपर्क फिर उनके साथ उठना बैठना कैसा होता है वो लोग अपना दैनिक जीवन कैसे व्यतीत करते हैं उनका दैनिक रूटीन कैसा है कैसे वह पशुओं के साथ संपर्क रखते हैं खेतों पर जाते हैं उनकी जीवन सरल और साधा होता है तो वास्तव में ग्रामीण समाजशास्त्र ग्रामीण पर्यावरण में निहित समाज का अध्ययन कहलाता है आगे चलते हैं आगे जो है नेलसन है लॉरी नेल्सन आपने क्या लिखा है ग्रामीण समाजशास्त्र की विशेष सामग्री विभिन्न प्रकार के समूह जैसे कि वे ग्रामीण पर्यावरण में पाए जाते हैं का विवेचन व विश्लेषण है फिर से अ मैंने अभी-अभी बताया आप बार-बार ग्रामीण

15:36 पर्यावरण की बात करें हैं तो ग्रामीण पर्यावरण का मतलब पेड़ पौधे हरियाली तो है ही है एनवायरमेंट का मतलब होता है पूरी सराउंडिंग से लोग कैसे रहते हैं कैसे उठते हैं कैसे उनके कार्य होते हैं शादी विवाह उत्सव वो कैसे बनाते हैं त्यौहारों का आयोजन कैसे किया जाता है ठीक है कैसे वो लोग जैसे वहां मार्केट नहीं है कोई शॉपिंग मॉल नहीं है कोई दुकान नहीं है वो लोग कैसे पीठ या हाट तुमने सुना होगा हफ्ते में एक दिन उनके यहां पीठ लगती है या हाट लगती है हाट मतलब लोग दुकाने लगाकर टेंपरेरी लगाते हैं कुछ घंटों के लिए लोग सामान खरीदते हैं हफ्ते भर का खरीद के रख लेते हैं तो कैसे वह लोग अपना जीवन व्यतीत करते हैं पूरा सराउंडिंग या एटमॉस्फेयर के

16:22 लिए ग्रामीण पर्यावरण का इस्तेमाल हुआ है बहुत इंपॉर्टेंट डेफिनेशन अब आ रही है ए आर देसाई के अनुसार ए आर देसाई ने कहा है कि ग्रामीण समाजशास्त्र का मूल कार्य ग्रामीण समाज के विकास के नियमों को खोज निकालना है देखो उन्होंने एआर देसाई ने क्या है क्या कहा है ए आर देसाई ने कहा है कि जो ग्रामीण समाजशास्त्र का मूल कार्य है वह ग्रामीण समाज के विकास में नियमों को खोज निकालना है कि ग्रामीण समाज के विकास के लिए कौन-कौन से ऐसे नियम हो सकते हैं जो ग्रामीण जीवन को सुधार सकते हैं तो यह है बच्चों ग्रामीण समाजशास्त्र का अर्थ और इसकी परिभाषा

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