भारत को पुरुषार्थ निरपेक्षता से बचाएँ || Puri Shankaracharya

Govardhan Math, Puri www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारत के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य और सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण पर केंद्रित है। इसमें गोहत्या के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्रियों के विचारों में बदलाव, पृथ्वी को धारण करने वाले तत्वों के विकृत होने, और पुरुषार्थ चतुष्टय के महत्व को कम करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया है। वक्ता देशभक्त राजनेताओं से इन मुद्दों पर विचार करने और भारत को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने का आग्रह करते हैं।

  • गोहत्या के मुद्दे पर पूर्व प्रधानमंत्रियों के बदलते विचार।
  • पृथ्वी को धारण करने वाले तत्वों का विकृत होना।
  • पुरुषार्थ चतुष्टय के महत्व को कम करने के प्रयास।

गोहत्या पर मोरारजी देसाई के विचार

वीडियो में बताया गया है कि जब भारत परतंत्र था, तब मोरारजी देसाई ने गोहत्या के काले कलंक को दूर करने के लिए भारत की स्वतंत्रता को आवश्यक बताया था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अपने विचारों को बदल दिया, जिससे पता चलता है कि राजनीतिक पद पर आने के बाद उनके आदर्शों में बदलाव आया। वक्ता वर्तमान प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे मोरारजी देसाई के मार्ग पर न चलें और गोहत्या के कलंक को मिटाकर एक उज्जवल इतिहास तैयार करें।

पृथ्वी के धारक तत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, पृथ्वी के सात धारक तत्व हैं: गौवंश, ब्राह्मण, वेद, सत्य, दान, क्षमा और सदाचार। वक्ता का कहना है कि इन तत्वों को विकृत करने का षडयंत्र चल रहा है। विकास के नाम पर विनाश हो रहा है, और संस्कृति को विकृत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साम्यवादियों और नास्तिकों के विचारों के कारण इन तत्वों का विलोप हो रहा है। देशभक्त राजनेताओं को इस पर विचार करना चाहिए।

पुरुषार्थ चतुष्टय का महत्व

महाभारत के अनुसार, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पृथ्वी के धारक हैं। वक्ता का मानना है कि पुरुषार्थ चतुष्टय को निरपेक्ष बनाकर भारत को पथभ्रष्ट किया जा रहा है। दिन और रात के विभाजन के विलुप्त होने के कारण धर्म के नाम पर अधर्म, अर्थ के नाम पर अनर्थ, काम के नाम पर कुकर्म और मोक्ष के नाम पर भ्रम फैलाया जा रहा है। वक्ता प्रधानमंत्री से आग्रह करते हैं कि वे अपनी मेधा शक्ति का उपयोग करें और विचारकों से संपर्क करके उज्ज्वल भारत की स्थापना का प्रयास करें।

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Transcript

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0:00 MP3 कर दो अजय को ओम नारायण आखिर घोड़ों भगवन नमस्ते शिवाय नमः शिवाय नमः तन्मय बानो शिवसंकल्पमस्तु अट कि भारत जब पढ़ तंत्र था तब मोरारजी देसाई ने कहा करते थे में गोहत्या के काले कलंक को दूर करने के लिए भारत की स्वतंत्रता अपेक्षित है कि भगवत्कृपा से भारत स्वतंत्र हुआ

0:45 इस कार्यक्रम से मोरारजी देसाई भारत के प्रधानमंत्री भी बने थे कि उस समय में शंकराचार्य के पद पर प्रतिष्ठित नहीं था हमारे पूर्व आचार्य स्वनामधन्य निरंजनदेव क्रेजी महासभा पूरी पीठ के शंकराचार्य जी ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य जी नाम धन स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज यह हमारे भाई नंद नंदना ने सरस्वती जी के पूर्व आश्रम का नाम था नंद लाल जी राजस्थान से रामराज्य परिषद की ओर से सांसद रह चुके थे यह तीनों महानुभाव मुरार जी देसाई प्रधानमंत्री से मिले हम लोग 4 व्यक्ति प्रधानमंत्री की कोठी के

1:31 बाहर खड़ी है ना कुछ छुपा कर रखती है प्लेन मोड व्यवसायिक व तीनों महानुभाव ने बताया कि आप पहले कहा करते थे 12 स्वतंत्र होगा तो क़लम की नोक से गोहत्या के काले कलंक को मिटा देंगे आपको याद है ना अब तो आप प्रधानमंत्री के पद पर प्रतिष्ठित हम मौजूदा व्यवसाय ने कहा उन बातों को भूल जाइए अब मैं कसाइयों का भी प्रधानमंत्री हूं मैं 9th मे संकेत करना चाहता हूं को कम से कम वर्तमान जो प्रधानमंत्री एवं भारत के गृहमंत्री एवं कि गोहत्या के काले कलंक को मिटा कर एक

2:18 अपना उज्जवल इतिहास तैयार करें मोरारजी देसाई के मार्ग पर न चलें तो अच्छा है है तो कि पृथ्वी के साथ धारक तत्वों का वर्णन स्कंद पुराण में है एक ही श्लोक माहेश्वर कुमारिका खंड के दूसरे अध्याय में काशी खंड के दूसरे अध्याय में आया है वह भै बृष्टि अधीक्षक सत्यवीर सत्यवादी वे अल्प धन दान शील ऐसा शब्द विधायक तंबाकू सावधान सातवां पर विचार करें गोवंश पृथ्वी का धारक है उसकी दुर्दशा फाल गोवंश को विकृत अभिव्यक्त करने का षडयंत्र भारत में ही विश्वस्तर पर आए थे आज भी प्राइस चा सदाचार संयम संपन्न

3:04 व्यक्ति ब्राह्मणों को फिफ्त अभिव्यक्त करने का षड्यंत्र चल रहा है विकास के नाम पर विनाश वैद्य सुषेण वैद्य शास्त्रों के भी आप क्रश का पिछला गाना डीजे के गीत इत्यादि के माध्यम से चली रहा शांति शांति देवियों को भी संस्कृति का नाम पर विकृत करने का अभियान चले आए साम्यवादियों का विलोप हो रहा है यह लो व्यक्तियों का विलोप हो रहा है दा मशीनों का विलोप हो रहा है तो वह विपरीत सफेद हिस्सा सत्य भी असत्य वादीवेलु उधर दानशील हिस्सा सबसे विधायक एवं मानव पृथ्वी के धारक सातवां तत्वों को विकृत अब विलुप्त करने का विकास के नाम पर जो ऑप्शंस चल रहा है इस पर

3:51 एक देशभक्त अमान्य राजनेताओं को विचार करना चाहिए दूसरी बात है धान मक्का मस्जिद का नक्शा व शहरवासियों के लिए बचा अनंतपुरा सेवा सप्ताह इधर-उधर आफ महाभारत का श्लोक है के आधार में पृथ्वी के धारा कहें अर्थ पृथ्वी का धारक कह काम पृथ्वी का धारक वैदिक काल पृथ्वी का धारक है यहां वस्त्र वास्तु के लिए बचा अर्थ पुरुषार्थ को दो रूपों में व्यक्त किया है वसूल अष्ट वसुओं होते हैं अ वासुकि नाग यार थे के देवता हैं चल-अचल संपत्ति के मोक्ष के दो आचार्यों का नाम ले लिया गया सीधे पुरुषार्थ का नाम नहीं लिया गया

4:41 कि कपिला ने का नाम लिया है कि वह यह धर्म का मजाक का लक्ष्य वस्त्र व सूखे चैनल तक अपना सेवक शेषनाग और कपिल जो है मोक्ष पुरुषार्थ के देवता कम पढ़ा व्याख्या इसका अर्थ है कि काल के अवशेष पुरुषार्थ चतुष्टय पृथ्वी के धारक गंभीरता से विचार करें तो काल को कॉल बना दिया गया है दिन रात्रि के विभाजक रेखा विलुप्त हो जाने के कारण धर्म के नाम पर अधर्म नहीं अर्थ के नाम पर अपने काम के नाम पर काम नहीं मोक्ष के नाम पर मोक्ष नहीं पुरुषार्थ चतुष्टय निरपेक्ष अब भारत को बनाया जा रहा है वह ड्रिंक की पराकाष्टा हैव मान्य प्रधानमंत्री आदि

5:27 मौजूद थे अपनी मेधा शक्ति का आलंबन लें और जो मनुष्य विचारक विशेषज्ञों से संपर्क साधा करके उज्जवल भारत को स्थापित करने का प्रयास करें नारायण

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