Bhagvati Sutra Vachana -204 I Shatak 8, Uddeshak 10 I Aaradhna I May 23 2026

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भगवती सूत्र आगम पर आधारित है, जिसमें कर्मों के बंधन और मोक्ष प्राप्ति के मार्ग पर चर्चा की गई है। इसमें ज्ञान, क्रिया और आचरण के महत्व को समझाया गया है, साथ ही यह भी बताया गया है कि किस प्रकार कर्म आत्मा के गुणों को ढकते हैं और किस प्रकार सही ज्ञान और विवेक से कर्मों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। वीडियो में जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीने के महत्व पर जोर दिया गया है।

मुख्य बातें:

  • कर्मों का बंधन और आत्मा के गुण
  • ज्ञान, क्रिया और आचरण का महत्व
  • जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार जीवन जीना
  • विवेक और सही ज्ञान से कर्मों पर नियंत्रण

प्रस्तावना

इस भाग में, स्वामी सत्य और चायजी का अभिवादन किया गया है। मंगलाचरण और स्तुति के साथ कक्षा की शुरुआत होती है, जिसमें गौतम स्वामी और सुधर्म स्वामी का स्मरण किया जाता है।

कर्मों का बंधन: पिछली कक्षा का पुनरावलोकन

पिछली कक्षा में कर्मों के बंधन के बारे में चर्चा की गई थी, जिसमें बताया गया था कि कार्मन शरीर कार्मन वर्गना के पुद्गलों से बना होता है, जो आत्मा के गुणों को ढकता है। भगवान बताते हैं कि आत्मा और अनंत काल में बार-बार प्रकृतिया बांधी जाती हैं। कर्म प्रकृति के अनुसार अलग-अलग काम करते हैं। ज्ञानावरणीय और दर्शनावरणीय कर्म ज्ञान का अनादर करने से बंधते हैं, जबकि वेदनीय कर्म सुख और दुख की अनुभूति कराते हैं। क्रोध, मान, माया और लोभ से मोहनीय कर्म बंधता है, और स्वभाव से सरल, विनम्र और दयालु होने से मनुष्य गति प्राप्त होती है।

कर्मों का सामूहिक नाम और शरीर पर प्रभाव

सभी कर्मों का सामूहिक नाम कर्म है, जिससे कार्मन शरीर भी कहा जाता है। मृत्यु के समय शरीर छूट जाता है, लेकिन आत्मा के साथ कर्म चलते हैं, जो उसे एक गति से दूसरी गति में ले जाते हैं। तेजस और कार्मन शरीर हमेशा साथ काम करते हैं।

भगवती सूत्र: आठवां शतक और आराधना

भगवती सूत्र में आठ शतक और दस-आठ चमत्कार हैं। आराधना शब्द का अर्थ आत्मा के आंतरिक गुणों की उपासना करना है। ज्ञानावरणीय कर्म ज्ञान गुण पर आवरण के रूप में कार्य करता है, जबकि मोहनीय कर्म दर्शन मोहनीय और चारित्र मोहनीय में विभाजित है।

ज्ञानावरणीय, दर्शन मोहनीय और चारित्र मोहनीय कर्म

ज्ञानावरणीय कर्म जानने की क्रिया को कम करता है, दर्शन मोहनीय कर्म सत्य को मानने से रोकता है, और चारित्र मोहनीय कर्म आचरण में बाधा डालता है। कर्मों का आवरण जितना कम होगा, जानने, मानने और आचरण करने की क्षमता उतनी ही अधिक होगी।

ज्ञान, क्रिया और आचरण: विभिन्न दृष्टिकोण

दुनिया के विभिन्न धर्मों में ज्ञान, क्रिया और आचरण को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। कुछ क्रिया को, कुछ ज्ञान को और कुछ दोनों को समान महत्व देते हैं। जैन धर्म ज्ञान और क्रिया दोनों को मोक्ष के लिए आवश्यक मानता है।

कर्मों का आवरण और उनका प्रभाव

ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय और चारित्र मोहनीय कर्म ज्ञान, दर्शन और चारित्र गुणों को ढकते हैं। कर्म एक प्रकार का ढक्कन है, जो हमारी क्षमताओं को सीमित करता है।

ज्ञान और क्रिया का संतुलन: जैन धर्म का दृष्टिकोण

जैन धर्म एकांतवादी दृष्टिकोण को नकारता है और ज्ञान और क्रिया दोनों को मोक्ष के लिए आवश्यक मानता है। जिसका ज्ञान रखते हो, उसी का आचरण व्यवस्थित करो, और जिसका आचरण कर रहे हो, उसी का ज्ञान भी सही ढंग से रखो।

विवेक का महत्व: खाने-पीने के उदाहरण

खाने-पीने के उदाहरण से विवेक के महत्व को समझाया गया है। क्या खाना है, कब खाना है, कैसा खाना है, और किसके साथ खाना है, इन सभी बातों का ज्ञान होना चाहिए। बिना विवेक के खाने से बीमारियां बढ़ती हैं।

इंद्रियां, ज्ञान और विवेक

इंद्रियों के पास विवेक नहीं होता है, वे सिर्फ दर्शन से काम करके मति ज्ञान में स्टोरेज करती हैं। श्रुत ज्ञान विवेक खड़ा करता है और निर्णय लेने में मदद करता है। श्रुत ज्ञान का उपयोग करके ही सही निर्णय लिया जा सकता है।

मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान और मोहनीय कर्म

मति ज्ञान स्टोरेज का काम करता है, जबकि श्रुत ज्ञान विवेक का उपयोग करके निर्णय लेता है। मोहनीय कर्म श्रुत ज्ञान के पास जाने से पहले ही स्टोरेज से जानकारी ले लेता है, जिससे गलत निर्णय लेने की संभावना बढ़ जाती है।

इच्छाओं पर नियंत्रण और धर्म

श्रुत ज्ञान का विवेक इंद्रियों पर नियंत्रण रखने में मदद करता है। धर्म विवेक से होता है, और सही विवेक से शरीर निरोगी रहता है। हर वस्तु के साथ ज्ञान को जोड़कर बात करनी चाहिए।

ज्ञान और क्रिया का समन्वय: जैन धर्म का सिद्धांत

जैन धर्म ज्ञान और क्रिया दोनों को साथ में जोड़ने पर जोर देता है। श्रुत ज्ञान मुख्य रूप से पालन करने योग्य है, और इच्छाओं पर नियंत्रण करके क्रिया को व्यवस्थित करना चाहिए।

ज्ञान का उपयोग और इच्छाओं पर नियंत्रण

ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी अगर उसका उपयोग न किया जाए, तो इच्छाएं बढ़ती हैं। खाने की इच्छाओं पर नियंत्रण न कर पाने से बीमारियां होती हैं। डायबिटीज इच्छा पर नियंत्रण न कर पाने का रोग है।

ज्ञान और क्रिया का संतुलन: महावीर का सूत्र

महावीर स्वामी ने ज्ञान और क्रिया का संतुलन बनाए रखने का सूत्र दिया है। ज्ञान को 50% महत्व देना चाहिए और ज्ञान के अभ्यास को भी 50% महत्व देना चाहिए।

ज्ञान का महत्व: विचार क्षमता और आचरण

ज्ञान विचार क्षमता को सुधारता है। बिना सही ज्ञान के विचार सही नहीं आते हैं। विचारों को शुद्ध करने के लिए ज्ञान की शुद्धता परम आवश्यक है।

आचार और विचार: शास्त्रों का दृष्टिकोण

शास्त्रों में आचार और विचार दोनों को महत्व दिया गया है। आचारंग सूत्र में आचरण को परम धर्म कहा गया है, क्योंकि बाल्यावस्था में विचार क्षमता परिपक्व नहीं होती है।

बाल्यावस्था में धर्म का महत्व

बाल्यावस्था में धर्म का अभ्यास कराना चाहिए, ताकि संस्कारों में अच्छी तरह से व्यवस्थित हो जाएं। भविष्य में समझ आने पर यह ज्ञान उनके लिए सहायक होगा।

ज्ञानवरणीय कर्म और श्रुत ज्ञान

ज्ञानवरणीय कर्म के कारण कई लोग उम्र से बड़े होने पर भी ज्ञान में छोटे होते हैं। श्रुत ज्ञान ही प्रॉपर डिसीजन लेने की क्षमता प्रदान करता है।

आचार धर्म और ज्ञान का समन्वय

पहले आचार धर्म सिखाना चाहिए, ताकि आचरण सुधर जाए। क्रिया और ज्ञान को साथ में व्यवस्थित करते जाना चाहिए, ताकि जैसे-जैसे ज्ञान आता जाए, व्यक्ति खुद समझकर सही निर्णय ले सके।

ज्ञान की साधना और क्रिया का महत्व

ज्ञान के लिए साधना बहुत आवश्यक है। क्रिया के आचरण में ज्ञान का जुड़ना सकाम निर्जरा को बढ़ाता है।

प्रश्नोत्तर और समापन

अंतिम भाग में, श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर दिया गया और कक्षा का समापन मंगलाचरण के साथ हुआ।

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Transcript

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0:00 Swami Satya Chayji. Thank you, Vala Prasad. Thank Jankinchi apatiyam parpatiyam batte pane vinay vayavache. Aalave sanlave ucchasanai samasane andar basaye huri basaye. Jankinchi majj vinay parihinam sumam ba bairamb tabbe janah aham na janami tasam ichchami dhukkdam. Saibji, shokshatam hachoji? Dein Godbushayam.

0:50 Ichchami khamasam no vandiyun javani jayenisihayen mathayen vandami. God is the one Pasai Kari Marana Prasadkaraw Shoo Ji. Namoriyan taanam namo siddhaanam namo ayariyanam namo bachyayanam namo noya sabbhasaam. Esopanchya

1:35 namo karum sabbhava vapanasanam. Mangalanam chasabve simbhadamam havai mingalam. Jaya itagajeevajoni. Viyana ho jaga guru jaga nando. Jagana ho jaga bandu. Jayai jaga puyama ho mbaya. Jayai suyana bababu. Tetraya rana ho parchimo jayai. Jayai guru loga nando. Jayai maha pama havi. Sarvaarishta pranashan. Sarvavishtartha dhāyini Sarvulabdhi

2:23 nidhānaev Shri Gautam Swaminenam Shri Sudharma Swaminenam Agnyāna te mirāndhānam Jnānam janam sanākvayam Netramunmi litaṁ yeh Srasman Shri Guru Neda Thank you very much, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you,

3:14 sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you, sir. Thank you Today, our third class is the Bhagavati Sutra Agam Vashna. Today, our 204th class is our class. I will be proud of the Vibha Bint to hear the last class. Welcome, Hina Bint. Thank you. Hello, Baba. I am the Master of Matheny Vandami Sahib Ji. And welcome to everyone. लास्ट लास में साहिब जी ने हमें सिखाया था कि कार्मन शरीर कार्मन वर्गना के पुद्गलों से बना होता है जो आत्मा की गुणों को ढगता है और

4:00 सिमंद्र स्वामी से पूछा जाए कि हे बगवन यह कर्म प्रकृतिया हमने क्यों बांदी तो बगवन कहते हैं कि आत्मा और अनन्त काल में बार-बार प्रकृतिया बांदी है। अनन्त काल से जीव ने उस कर्म की प्रकृति के अनुसार व्यवार में जो प्रवृति की है वो अनन्त बार की है। सभी प्रकृति अलग-अलग है तो अलग-अलग ही काम करेंगे। कोई एक प्रकृति दूसरी प्रकृ तो भगवान बताते हैं जिन्होंने ज्ञान का निन्हाव किया, उपकरणों को जलाया,

4:50 ज्ञानी गुरु भगवन्तों का अपमान अनादर किया, इससे ज्ञानावणिया और दर्शनावणिया कर्म साथ में बांदे। वेदनिया कर्म सूख और दुख की अनुपुति कराता है करने से शाता वेदनिय कर्म बंदता है। जबकि दूसरों को दूख, तकलिफ और पीडा पहुंचाने से अर शाता वेदनिय कर्म बंदता है। जिन जीवों ने तीवर क्रोध, मान, माया, लोब, तीवर राग, द्वेश किया हूँ वो मोनिय कर्म बंदता है। नरगति का आय�

5:39 माया, प्रपंच, जूठ और कपट से तीरेंजगति का कर्म बंदिता है। बगवान बताते हैं स्वभाव से सरल, वीनम्र और दयालू होने से मनुष्य गति प्राप्त होती है। सराग से तपस्या करने वाले और अकाम निर्जरा करने से देव गति का आयुश्य बंदिता है। कौन से जीव बांदते हैं तो भगवान बताते हैं उच्छ गोत्र कर्म आठ प्रकार के अभीमान जाती कूल वन्ष सत्ता संपत्ति आईश्वर्य रूप रंग और शूत मद न करने से बंदते हैं जबकि मद और अभीमान करने से

6:25 निच्छ गोत्र कर्म बंदता है अंत्राय कर् कार्य के अनुसार बन जता है। यह सबी कर्मों का सामूहिक नाम कर्म है, जिससे कार्मन शरीर भी कहा जाता है। मनुश्य के समय, मृत्यों के समय शरीर छूट जाता है, मन भी चला जाता है। आत्मा के साथ सिर्फ कर्म चलते हैं। यह कर्म ही आत्मा को एक गती से दूसरी गत This is the most powerful body of the body from his heart, tears, vaykriya, and

7:13 the heart of the heart. The body of the body of the body cannot stay together. The body of the body of the body can be made of the heart of the body. Tejas and the heart of the body of the body always work with the body of the body of the body of the body. Yes, Saiji, please understand the next question. Very good. Good. Today, in the Bhagavati Sutra, there are eight shatak and ten-eight is a miracle. Because we all have ten-eight is a miracle. So, this is a miracle and after that, this shatak will be complete. Then the nine shatak will start. In one-one shatak, ten-eight are

8:01 ten. Who is here? The Araha Nam. आराधना ये है हमारा शब्द ये अर्दमाद्री की फ्राकरत वासा में हैं लेकिन यहाँ पर हमारे प्रचलित बोलचाल की वासा के अंदर हम लोग अपनी तरह से आराधना शब्द बोल करके चलते हैं साथ अब आराधना किसकी करनी है पहली बात यहाँ पर यह आत्मा के अं� यह ज्ञान गुण है और इसे पर आवरण के रूप में ज्ञाना वग्या कर

8:48 अब यहां पर यह मोहनिय कर्म जो है यह दो विठाग में है एक विठाग के अंदर जो है यह दर्शन मोहनिय है और इधर दूसरे विठाग के अंदर जो है यह चारी त्रम हमी है इसका क्या काम है? मानना है और इसका क्या काम है?

9:55 अब ये जो है सब के अंदेवलम मुल्बूत आत्मा का ही है विशेदो तो आत्मा के अंदर अपनी तरह से पड़े है संद्या और इस प्रकार इनका काम चलेगा सुआ अब बात ये है कि जिसके उपर जितना आवर्णिय कर्म आ जाएगा सुआ अगर कर्म आ गया तो क्या हुआ ज्याना वर्निय कर्म हो गया तो जब ज्याना वर्निय कर्म बढ़ जाएगा तो उसके जानने की क्रिया में पर्सेंटेज प्रमान काफी घटता जाएगा जानने की इच्छा नहीं होगी पढ़ने की इच्छा नहीं होगी अभ्यास करने की रस

10:44 अगर यह आवरण आपका प्रमान में जाता है, तो यह क्या हो गया साथ? अब यह मानने के लिए ना कहेगा. तो यह कौन सा हो गया? यह हो जाएगा अंदर जो है मिध्यात्व मोहनिया कर्म हो गया साथ. तो यह साप मना कर देगा, मैं नहीं मानता हूं. اس کی لینگویج بدل جائے گی آتما نہیں ہے موکشہ نہیں ہے کرما نہیں ہے پنی پاپ نہیں ہے سورگنی ہے نرک نہیں ہے یہ سب اس کی لینگویج بن جائے گا ادھر دیکھئے اب یہ بھی تو کرما ہے اب یہ کرما بھی اگر آپ کے اندر آ گیا سنجھے کے لئے یہ کونسا کرما بن گیا ہے

11:31 اس کا نام کیا دیں گے چاری ترمون یا کرما इसका चारित्र मोहनिय दो इसके लिए लिए कर्मत है, इसके अंदर यह आ गया, कसाय मोहनिय आ गया, बेद मोहनिय आ गया, नो कसाय मोहनिय तो यह क्या करेगा, यह जो आचरन करना है तो प्रैक्टिकल क्रियात्मत धर्म करने में इसका इस्ट नहीं रहेगा अब तीन हो गए तीनों के अंदर ख्याल आगें आपको निखिल भैं बुलो जी साहिब जी अपने दर्शन ग्नाचारी

12:18 तरह के बारित में बता है जो है ग्नाचारी जो है ग्नाचारी आता है वह जानने जीव को आत्मा को जानने नहीं देता ग्नाचारी नहीं देगा वैसे दर्शन दर्शन मु कर्म के वेज़े से जीव को मानने नहीं देगा स्वर्ग इत्यादी स्वर्ग निये देव निये देवी निये धर्मन ये कुछ मोक्ष नियान कुछ भी नहीं ऐसा मानने नहीं देगा और तीस तरह जो है चारीतर मुहने उसमें कशाय वेद कशाय नो कशाय मुहनी है उसके सब क इसमें से आपको क्या देखना है? अगर जितने प्रमार में हमारा आवर्निय

13:04 तर्म गटा हुआ, कम होगा, उतनी हुआ, उसकी प्रवरत्ति में जानने का, मानने का, आचरने का प्रमार बढ़ जाएगा। दोनों सेंटेंज बोलने हैं सिमा बेंजी, देखो, अगर कर्म बढ़ If you have a knowledge on knowledge, then you will not be willing to know about knowledge. If you have a knowledge on the Darshan, then you will be able to learn about the Kharam. There is no Atma, Punya, Paaf, Dev, Paramatma. If you have a

13:52 Kharitr, then you will be able to learn about Kishai, Ved and No Kishai. जो कि उसको practical धर्म करने में interest नहीं रहेगा और अगर उसकी परमान कम हो जाएगा तो उसका आवरन गटेगा और वो जानने की एक शमता रखेगा और चारित्र practical धर्म करने की एक शमता रखेगा अब यहां पर आपको क्या देखना है यह तो आप अंदर से सच्चा ही समझ गए اور ادھر اس کو الگ کر دیا ایسا تو یہ الگ کرنے سے کیا ہو گیا اب جیسے یہ شکل لکھ لو بھائی صاحب

14:45 اب یہ ہم نے لکھ دی یہ سمجھے کہ نہیں مولی پیجل بیندی آپ کو کیا لکھتا ہے آجار ہمارا اچھا ہونا چاہیے ویچار بھلے اچھے ہوئے نہیں ہوئے چلے گا आराज आचार विचार दोनों अच्छे होने शगी है अब यहां पर आप इसको देखिए और इसको देखिए समझे यह जो है हमारी हो गई क्रिया आचार मतलब क्या है प्रैक्टिकल लाइफ में आप क्या आचरन करते हो विचार मतलब यह क्या हो गया हमारे लिए एक ज्ञान � क्या करना कैसे करना इनके अंदर दुनिया के अन्य अन्य धर्म जो

15:35 है सबने अलग अलग तरीके से अपना डिवीजन कर लिया अब क्या डिवीजन कैसे किया है तो कुछ वर्ग ऐसे है नंबर एक वाले वो कहते हैं क्रियर्यां गोक्षा हम तो क्रिया करके मुक्षप्राप्त कर लेंगे साथ हम तो चारितरा चार से आचरम से मुक्षप्राप्त कर लेंगे तो उसने क्रिया को प्राधा नेता दि और दूसरा क्या कर रहा है ग्ञाना देवत व्मुक्ति ही

16:24 इसने दूसरे ने जो है कहा दिया कि ने कोई ग्ञान से ही क्या जरूरे क्रिया आचरन करने की कोई आवश्यक्ता नहीं है, उसने दूसरा रस्ता ले लिया साम। अब आप किसको कहेंगे सही। याद रखें ये शब्द जो मैंने आपको कहें, अन्य अन्य डिफेर्ट स्कूल्स अफिलोसोफी की अपनी अपनी ये मान्यता है। कुछ द Some people

17:20 say लेकिन ज्यान गुण के उपर आगया आवरन ज्याना बढ़निया, दर्शन गुण के उपर आगया दर्शन मोनिया, फिर इधर आगया चारित्र मोनिया, अब कर्म जिनका जितने प्रमान में होगा, वो उसको ढख देगा, कर्म क्या है, कर्म एक प्रकार का ढखकन है, हमारी भा इसलिए ग्ञाना वरण, दर्शना वरण, चारित्रा वरण, ये नाम देने से उन्होंने क्या क्या, ये ग्ञान को ढखने वाला, ये दर्शन गुर्ण को

18:07 ढखने वाला है, ये चारित्रा गुर्ण को ढखने वाला है, ऐसे ऐसे करके सब ने अलग-अलग नाम दे दिये से, अब करम को मानते हैं, नहीं मानते हैं, करम का अर्था समझते हैं, नहीं समझते हैं, वो भी बात अलग हो गई, लेकिन जो जिसका विधान करें, और सामने दूसरे का निसेद करें, अब दूसरे का निसेद करना इसका मतलब क्या है, ये भाई साथ है नमबर एट, ये क्या कहता है कि

18:55 आचरण करता हूं लेकिन सामने ज्ञान को कोई प्राधान्यता नहीं देता हुआ अग्यान को प्राधान्यता देता हुआ अग्यान को ही प्राधान्यता देता हुआ तो ज्यान से सुन लेना ये ग्ञानवादी है। ये अपने परफ से ये ग्ञानवादी बन गया है। ये क्रियावादी बन गया से।

19:42 अब तीसरा जो है वो आ रहा है। तो ये तीसरा कहता है मैं ग्ञान पूंधी उतने ग्रिया भी उतनी ही विवस्थित करूगा आचरण में। And in the knowledge, the plus point of knowledge is that people in the good way of life are given to the good of life. What is it? Number 4, the fourth one that comes, the chief says, don't understand, don't understand anything. You don't need to do any doctrine of the dharma, or any soul of the universe. You don't need to eat it, and eat it. बुलिया आशा मैंजी, आप चारों को समझा सकेंगे?

20:28 मैं च्राइ करूंगी. हाँ, आपने पहला बता है कि क्रिया का आचरण करता है, लेकिन ग्नान का नहीं करता है, वो क्रिया वादी है, यानि कि वो ग्यान से क्रिया नहीं करता है, सिर्फ क्रिया का आचरण ही करता है. मेरे The second thing is that he does not do the brain, only the knowledge. If he has taken knowledge and not done the brain, then what does it mean? Nothing. The third thing is that he does the brain and the knowledge. But he does the brain and the knowledge. He does the right path. And if he does anything, he does the brain.

21:14 He does the brain. पहले में क्रिया होती है, विदाउट ग्नान होती है, तो जैसे कोई भी फिलोसफी बिलीव करती है, बट वो सही ग्नान के बिना वो गलत हो जाएगा, second example में ग्नान लेते हैं, for example, हम यहाँ पे स्वाध्य में बैठते हैं, बट हमारा आचरण स्वाध्य के अनुरूपन यह वि वो क्रिया भी करते हैं और ग्नान भी लेते हैं तो हम जो सीखते हैं आपसे जो सीखते हैं उसी प्रमाण आच्रण भी करते हैं दिवारादना ग्नाना अरदना सब कुछ

22:00 करते हैं तो तीसरे वो परफेक्ट एक्जामपल है बेस्ट है और चौथा जो है कंप्लीट मिध्या तो क होजन करना है चलो शोडिय जी बोलो देखो खाना पीना है इस बारे में आपको चारों कटा रहा है मार सब खाना पीना है वो किरिया कर रहा है पर ग्यान नहीं है क्या खाना

22:45 चीए क्या नहीं करे तो फिर वो किरिया अच्छे नहीं होगी तो ग्यान और किरिया खाली ज्यान से नहीं होगा ज्यान भी चाहिए क्रिया भी चाहिए दोनों चाहिए ज्यान क्रिया ज्यान अच्छा होगा तो क्रिया अच्छी अपने अप्य हो जाएगी बिना ज्यान के आपने एक बार क्लास में एक जामपल बता था एक आप में मेमरी खाली मत करो आपने पॉ अब driving के लिए आपको चारों कैसे गटाएंगे चोड़े जी जैसे मत कर देना नहीं साइब जी

23:33 driving करना है मुझे लेकिन मैं driving करता हूँ लेकिन सही नहीं करता या उसका ज्यान नहीं लेती हूँ कि कैसे करना है तो फिर वो accident हो सकता है फिर चलो चलो बोलो अंसर जी बोलो गरोबर नहीं सहीज जो पहले वाला है वो क्रिया ड्राइविंग गाड़ी में बैठा लेकिन उसने मैप नहीं देखा कहा जाना कैसे जाना है

24:18 So he has not taken the knowledge, he has not seen the map, so he will be wrong. The second one is that he has seen the map, but he will sit in his house. If he will sit in the car or not, he will not go, then he will reach the car. That's the second one. The third one is that he has seen the map, where to go, how to go, which route to go, he has taken the knowledge, then he has sat in the car and he has gone, so he will reach the car. شلو بہت دنے واد آپ کو برو برو پرفیکٹ جو ہے انسہ بینٹی کا فرس پرائز آیا بولی بندہ مہتہ جی آپ کونسا ایکزامپل لے کے سمجھائیں گے سامائک کے بارے میں بولی ہمارے سب ایک انسان سامائک کی قریہ تو کرتا ہے مگر اس کو پورا گیان ہی نہیں

25:07 ہے کہ یہ کرموں کی نرجرہ کرنے کے لیے ہے آشرف رکھنے کے لیے ہے تو کیریہ کرے گا گیاں کے ساتھ نہیں کرے گا تو پورا فائدہ نہیں اٹھا پائے گا جو دوسرے اس کو گیاں بھی ہے کہ میں ایسے اپنے کرم کر سکتا ہوں مگر وہ کیریہ ہی نہیں کرے گا جو تیسرے उसके पास किरिया भी है, उसको ज्ञान भी पूरे और वो समाय की किरिया भी ठीक धंग से करेगा, तो इस तरह से वो पूरा संवर, नेचरा सब कुछ कर पाएगा, जो चोथा है उसको ज्ञान भी नहीं है, उसके पास किरिया भी नहीं है, वो पूरा मिध्यात भी है, बहुत � What should we

25:53 do? We should give a look at some of our own dreams. What should we do? We should give a look at some of our dreams. What company has made a car? What should we do? Why should we know about the car? I should give a car. I should take a car. I should take a car. वो इस प्रकार की ब्रत्ती से चलता है, दूसरा कहता है कि नहीं, नहीं, ओपो इक रिया नहीं करें, मैं तो बिल्कुल जो है, गारी के एक-एक पार्ट के स्टड़ी करूगा साथ, उसका मेकेनिजम समझूगा साथ, कहां कौन

26:44 सा पार्ट लगाया है, किदर कह लगाया, अब व लेकिन वो जो है अपनी दरश से क्लिया नहीं कर सकता है अब तीसरा जो है बिलकुल परफेक्शन अब तीसरे के अंदर परफेक्शन के अंदर परसेंटेज कम जाना हो जाएंगे क्रिया पचीश परसेंट और ज्ञान पच्छतर परसेंट क्रिया पच्छतर परसेंट और ज्य दोनों में मानने के इच्छा रखता है लेकिन परसेंटेज उसके काउट है सामाइक करनी चाहिए मैं सामाइक के उपर बोलो मैं दो कला का भासन कर दो लेकिन अभी तक मैंने एक मेने में एक भी सामाइक

27:34 नहीं किये कभी ऐसा नहीं होना चाहिए समझे के ने खाने पिने की बात क्या खाना है क्या नहीं खाना है बनाना आता है बनाना नहीं आता है कैसे बनती है कैसे नहीं बनता मेरे को क्या लेना देना है मैं क्यों उसकी पंचा करू मॉल में गया पैकेट खरेद लिया खाया हो गया खेल कतम मैं क्यों उस पर पहुंड पैकेट के उपर लिखा भी क्यों � Either it is good or bad, or you want to think anything. Now, let's take a percentage of the universe. Tell us, Kushabendji, who

28:22 will have a percentage of the universe in the universe? Sir, I should have asked you to answer the second number. I have not asked the correct and wrong. Don't go anywhere, don't go anywhere. I have asked you, परसेंटेज वाइस किसके परसेंटेज संसार में जादा है किसके कम भूलिये साम ने कि जादा है ज्यान के कम है निकिल यहां वो रोग्या बोलना चाहिए चार नम्मर वाले परसेंटेज जादा होगे पॉपलिशन की साथ से दिखा जाए तो हां फिर बाद में उससे कम उससे

29:12 एक आएगा यह तो दू आएगा दू और सबसे लास में तीन वाल आएगा चलो बिजल बेंटी बोलो क्या बोलेंगे मारा सबसे जादा चार नंबर वाले हैं सबसे कम तीन नंबर वाले हैं और ख्रियावादी जादा है ग्नानवादी उससे कम चलो बरोबर लग रहा है चोड� اب ان کے اندر ہم کیسے صدار نہ کریں؟ کیا کریں بھولی اسلام؟ اب یہ تو ہو گئی ایک ایک ایک متوانوں کی بات ایک ایک متوانے اپنی طرح سے کوئی کیا کہہ رہا ہے کوئی کیا کہہ رہا ہے کوئی کیا مان رہا ہے سب ایک آنتوادی کھلائے کہ نہیں ان کو کہتے ہیں ایک

30:00 آنتوادی اب یہ ایک آنتوادی ہے ये एक अंतवादी है, ये अनेक अंतवादी हो गया समझे हैं। अब चौथे की तो बात नहीं करना है, ये तो मिध्यात्वी है, मिध्या मतिवाला है, न मानना है, न जादना है, न आचरना है, इसके लिए कुछ भी रहे हैं। ऐसी स्थितिति में, अब जेन धर्म ने अपने सिध्धान्त को किस तरह से कहा है, तो ये जो एकांतवादी, एकांतवादी को अगर आप निकाल दो, तो जेन धर्म ने ये बात अपनी

30:50 तरह से ज्ञान, क्रियाभ्याम, मुक्षह, तो उन्होंने अपनी तरह से स्पॉष्ट कर दिया, ना तो अकेले आचरन से मोक्ष मिलेगा, ना आपको अकेली क्रिया से मोक्ष मिलेगा, आपको कंपल सरी दोनों साथ में चूड़ने ही पड़ेगे। जिसका ज्यान रखते हो उसी का आचरन व्यवस्तित करो, जिसका आचरन कर रहे हो उसी का ज्यान भी सईडन से रखो, बले ख लेकिन क्या खाना, क्या नहीं खाना, कब खाना, कब नहीं खाना, कैसा खाना, कैसा

31:35 नहीं खाना, किस के साथ खाना, किस समय खाना, किस समय नहीं खाना, ये सारी बातों का ज्ञान भी उसको साथ में होना चाहिए. ये विवेक भी तो आना चाहिए, खाना क्रिया, खाना क्रिया, آنکھ مون کر کے کھا رہے ہیں اچھا نوسا جیسا دیسا کھا رہے ہیں اسی کا پرنام ہے کہ بیماریاں بھی اتنی بڑھ رہی ہیں اتنی زیادہ بیماریاں بڑھ رہی ہیں اتنی زیادہ بیماریاں پھائی رہی ہیں آج لوگوں کو کھانا ہے کریہ کرنی ہے کھانے کی اور اس کے پیشے سمجھ ہی نہیں ہے ویویک ہی نہیں ہے حساب कि

32:21 मैं इसके साथ ये खाऊं कि ना खाऊं, इसके साथ ये खाना चाहिए कि नहीं खाना चाहिए विवेक नहीं है। उल्टा हो रहा है समझे कि नहीं। आम का रस खाना है, रस पुड़ी खाने है। लेकिन आम के रस में दूद डालना चाहिए क्या है। अरे ये तो गलत हो रहा यह समझ नहीं है, यह विवेक नहीं है. अब खाने की क्रिया, क्या हम जानवर है, पशु है, आग लोग न खाने जैसा खा रहे हैं, उसका खुश खा रहे हैं, जहर भी खा रहे हैं, वो क्या तंबा को भी खा

33:07 रहे हैं, खुत्य को डालो या गदे को डाले तो भी नहीं खाएग मतलब इंसान जो है इन जानवरों से भी बदतर हो गया क्यों समझ नहीं है ये क्या बात हो गए इसका मतलब तो ये हुआ कि पुत्ते भी सुंग करके नहीं खाते हैं तो उनके अंदर भी विवे उनके अंदर भी वो भी वे क्योंकि हमारे पास क्या है पांचों इंद्रिया ज् इंद्रियों के पास विवेक नहीं है, शुत्र ज्ञान नहीं है इंद्रियों के पास, इंद्रियां सिर्फ

33:53 दर्शन से काम करके मति ज्ञान में लाके स्टोरेज कर लेगा, शुत्र ज्ञान उसमें विवेक खड़ा करेगा, शुत्र ज्ञान से उसमें करना नहीं करना, खाना न یہ جو بیویک کرنا ہے وہ سروتگ نیان کا بھی سہ ہے اب بتائیے چھوڑیا جی کیا زیادہ ہونا چاہیے آپ کے پاس مطیق نیان زیادہ ہونا چاہیے کیسے زیادہ ہونا چاہیے یہ مہار صاحب سروتگ نیان زیادہ ہونا چاہیے اب یہ جب انہوں دیکھنے جاتے ہیں تب انہوں کو یہ خیال آ جاتا ہے کہ یہ ہماری پانچوں پرکار کی اندریوں سے

34:39 آپ بیوہار تو کر لیتے ہیں अब ये पांचों इंद्रियां आपका विभार किसके साथ क्या करेगी तो ये जब अंदर आक्मा है इधर देखिए ये इंद्रियां आपको लाकर के यहां दर्शन में लिखे अब जो दर्शन में लाकर के दे तो दर्शन कोई विवेक नहीं कर सकता है ये खाली मेकनीजर इसक تو وہ جو بھی ہوگا وہ پانچوں اندریوں سے اپنا کام کر لے گا سم. کھلائے گا کہ نہیں اب ایسی استطیق کے اندر ایک بالک کے جیسے استطیق ہو گئی. بالک نے دیکھی بس تو ممی مجھے کھانی ہے چوکلیٹ دیکھ لی تو اس

35:28 کو تو اچھا ہوگی مجھے کھانی ہے اس کو یہ بھی دیکھ نہیں ہے کہ چوکلیٹ کھاؤں گا پیٹ میں غمز ہو جائیں گے بیماری آ جائے گی تکلیف ہو جائے گی یہ سمجھ ہی نہیں ہے उसको तो जीब पर मीठी लग रही है, तो खानी है, दूद में तो मम्मी मुझे दूद ने, मुझे तो शक्कर डालोगे तो क्यों खासे, उसके लिए दूद का कोई महत्व नहीं, उसको तो शक्कर वाला मीठा पिना, तो यह विवेग नहीं कर रहा है, अब यहां से इसने भे इकटा हो गया ऐसा, यह कहता है मेरा विवेक करने का काम नहीं है, आप लाके दो मैं स्टोरेज करूँगा, आप बाहर से लाके दो मैं स्टोरेज करूँगा, तो यह

36:18 मैकेनिजम जो चल रहा है, बाहर के पदार्थ जो आपने लाए, अब यह दर्शन में होकर के मति ज्ञान की म अब यहां से सुत्र ज्ञान में जाएगा, तो यह अपनी समझ शक्ति का उपयोग करेगा, यह विवेक का उपयोग करेगा, अब यह विवेक करके निर्ने करेगा खाना की नहीं खाना, इसका काम है, अब यह अगर हमारे में कमजोर हो गया, क्योंकि यह कौन सा है, यह मतीक ज्

37:04 اگر یہ مطیق جانا برنیا کمجور ہو کر کہ اس کو روک رہے تو میں ہماری پہ تکلیف ہو جائیں۔ یہ آگیا سمتر جانا برنیا کرما آگیا۔ اب یہ اپنی اکل کا اپیوگ نہ کر سکے، سمجھ شکتی کا اپیوگ نہ کر سکے، بھکتی کا اپیوگ نہ کر سکے، ویبیک کا اپیوگ نہ کر سکے۔ اور ادھر کیا پڑا ہے ہمارے پاس یہ جو پڑا ہے یہ اندر پڑا ہے مہنی اکرک कोने कर्म के पास वीवेक नहीं है कि वीवेक काम सिर्फ अस्रुत ज्ञान का काम है वीवेक काम उपयोग करना

37:49 मतलब आने लेसिस करना है आपको मैं आम का रस खाना चाहता हूं रस पूरियुका भोजन मुझे करना है लेकिन रस में दूड डालना की नहीं डालना है तो आप जो है जो है जो आप जो है जो आप जो है जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप

38:38 जो आप जो आप जो आप जो आप जो आप � क्यों करता है यह जब अंदर जाकर उसने लिवर को डैमेज किया तो अब अब अब अब अब आ गया तो ब्लड के स्किन पर आगे स्किन के उपर आया तो मैलेगनिंग गिरंती जो बनने वो नहीं बने दे तो यहां वाइट स्पोर्ट यहां वाइट स्पोर्ट यह साथी भी प یہ جو چل رہا ہے یہ میکنیزم ہمارا جو ہے اوبجیکٹ ادھر باہر ہے یہ جو جو بھی آپ کے پاس میں اوبجیکٹ جس طرح سے ہے اب یہ کیا کرے گا ترشنہ ورنیت کرو ترشنگون یہ کہتا بھی پانچو اندریوں کے

39:26 دروازے کھول دیتا ہوں جو آئے اندر پھیج دے اچھا خراب مجھے کچھ نہیں دیکھنا ہے بس یہ میرا کام نہیں ایسا میں تو آپ کو سیڑا اندر پاس آن کرتا ہوں इसलिए एक भी इंद्रिय में कुछ रहता ही नहीं है। यह हमने अब्जेक्ट देखा तो यह इंद्रिय में नहीं रहेगा कुछ लिए। उसकी प्रिंट नहीं रहेगी। उसकी मेमरी नहीं रहेगी। इंद्रिय ने बेच दिया अब्टिक नर्ज को। अब्टिक नर्ज ने � आप यह मत बोले कि नहीं दो कान खुले है तो क्या हो गया कुछ

40:14 भी सुनों कि प्रिप्पी आएगा दिमाद में नहीं साथ यह ना कहता है तो यहां पर अब इसके अंदर क्या है इसमें सब प्रकार की इच्छाय बना दी गई है अब पांचों हिंद्रियों का फंक्शनिंग य तो मोनिय कर्म क्या कहता है, सुरुतक ज्ञान के पास जाने के पहले मैं ही स्टोरेज में से ले लूँ, यह अंदर जो है मतिक ज्ञान वाला, यह तो स्टोरेज वाला है, तो यही से खीच करके मैं ले लूँ, वापिस सुरुतक ज्ञान में जाएगा तो वो ना बोलेगा, इस

41:05 गुण धर्मों के अंदर जब परिटा आएगी तब उल्टा होता होता जाएगा संजेगा तो यह कंट्रोल कौन करेगा अब इन सब के ऊपर नियंत्रन करना है यह शुरुत ज्ञान का विवेएक जो आए वो जाकर के इसके ऊपर नियंत्रन करेशे क्योंकि यहां से तो अल्ड تو وہ سنتگیان جا کر کے مدبتی میں سے میموری میں سے ڈیلیٹ نہیں کر سکتا ہے کیونکہ یہاں سے آنے کا دروازہ ہے یہاں سے سب آتا ہے مجھے کنٹرول کرنا ہے یہاں پر ویویق جو کرنا ہے مہنی کرم کے گھر میں ہے تاکہ میں اپنی طرح سے کس اچھاؤں کو روک سکتا ہوں

41:55 کیسی اچھاؤں کو میں گھٹا سکتا ہوں کتنی اچھاؤں پر کنٹرول کر سکتا ہوں वो जाकर करेगा, ये विवेक करना, ये धरम हो जाएगा, धरम विवेक से होगा, अब आप नहीं करो, नहीं खाओ, छोड़ दो, आपका शरीर निरोगी रह जाएगा, तोनों बात है, हर वस्तु के साथ ये जोड़ कर बात किये, दुद्नी साथे कहलो खवाय के नहीं, रूठ तो वहां पर भी आपको दूद, दई, छास या श्रीखन के सार पी दई, लोग नहीं जानते हैं वो दई में भी केला डालेंगे, श्रीखन में भी डालेंगे, सब कुछ पर कुछ

42:45 प्रियाल देखे हैं, अब इसका क्या को द्रैफ्रूट डालके श्रीखन बना रहे हैं, बुलो اور قریہ سے آپ کا کام ہو گیا تو یہاں پر جائن درم کے صدیانت نے اب آپ کو دونوں ساتھ میں چھوڑا ہے یہاں کی اس قریہ اور یہ گنان ادھر دیکھئے یہاں پر آپ نے کہل آیا ہے سوطر گنان جو ہے یہ آپ کو مکھے روپ میں پالن کرنا ہے سوطر گنان بہت ضروری ہو گیا کہ جتنا بڑھا سکو और फिर यहां के इचाओं का नियंत्रन करके आपको प्रिया इस पर तर। ज्ञान

43:35 प्राप्त करने के बाद भी अगर ज्ञान का उपयोग न कर सको तो ज्ञान है फिर भी उसको आप न उपयोग करो तो मतलब इच्छा आपकी तिवरता में बढ़ेए। आप चाहते हुए भी या ज्यान होते हुए भी आप उसका कोई उपयोग नहीं कर सकते हो, परिणाम नहीं ला सकते हैं, सौ में से 99 प्रतिशक लोगों को देखो, खाने के इच्छाओं को रोक नहीं सकते हैं, खाने के इच्छा में विवेक नहीं कर सकते हैं, वो बिमारियां ला करके अस्पतालों मे

44:21 अब क्या है डाइबिटीस किसका रोग है इच्छा पर नियंत्रम नहीं कर पाए उसका रोग है तो डाइबिटीस होने से सिर नहीं दुखता है पैर नहीं दुखते है क्या लाइकर ने डाइबिटीस होने से आपके अंदर की सारी सिष्टम भिगड़ करके लिवर खराब हो अ� No, no, every 2-2 hours, don't eat a little bit, you will get damaged. If you get the right knowledge that you have to get out of it, you will get out of it. Look, your pancreas are active. If

45:06 you get out of it, you will get detoxification of liver. If you get out of it, you will get detoxification of your blood. No, وہ ایسی الٹی سلا دیں گے کہ بچھرا جندگی بھر ڈائپ کس کبھی مٹے نہیں سکتے اب ایسی ستی میں کیا کرنا بتائی آپ تو یہاں پر محاویر یہ کہیں کہ آپ دونوں کا بیلنس کیسے کریں ادھر کنیا ادھر گناہ اب دونوں کا بیلنس کرنے کے لیے اب محاویر نے آپ کو جو ستر دیا ہے So, you have to be aware that you have to be aware of the knowledge

45:53 that you have created in it. Now, as much as 50% of importance you have to be aware of the knowledge, you have to be able to practice the knowledge of the knowledge. If the student says that, I remember the whole book, whatever I read, you say, I know it very well, then the teacher will say, please, एक्सामिनेशन फॉल के अंतर पर्फेक्ट लिगो। लिखना आपकी क्रिया है, पढ़ना आपका ज्ञान है। जब आपने स्टड़ी की हुई अच्छी तरह से, आपका स्टड़ी में नॉलेज परुबर पर्फेक्ट है, अब उसका प्रैक्टिकल लाइफ में ये क्या करना है

46:46 ये ज्ञान आपती विचार क्षमता सुधाता है। आज भी देखिए निकिलवाई कई लोगों के पास विचारों में दारीद्र है। दारीद्र का मतलब समझ गया आप। विचार नहीं अच्छे हैं। विचार कर नहीं पाते हैं अच्छे। विचार ला नहीं पाते हैं अच् बिना सही ज्ञान के विचार सही नहीं आएंगे, बिना सम्यद ज्ञान के विचार भी सम्यद नहीं बनेंगे, आपके विचारों को शुद्ध करने के लिए

47:32 अंदर ज्ञान की शुद्धता परम आवश्यक्ता, खिरा प्रैक्टिकल लाइप में आचल करिया, आपकी क्रियात्म अब क्या हुआ कि शास्त्रों में कुछ बातें आई वि आचार में और विचार में अब पहले प्राधान देता किस खोदे हम तो जैसे आचारंग सुत्र आगम शास्त्रे में कह दिया कि आया रो ये परमो धम्वो This is what we have told you about

48:18 this. What does this mean? That is a chara. Prathamodhar. Now what they have said, then? This is a chara. प्रत्वन दर्म है क्यों कहा यहां पर अभी तक विद्यार्ति या बाल्या वस्ता में विचार क्षमता परीपक्व नहीं हुई लिए बच्चा बालक जो है 10 बरस का हो गया कि 15 बरस का हो गया कि 20 बरस का हो गया जब तक सुरुत तक ज्ञान से विवेक की क्षमता

49:06 न चगे وہاں تک وہ ممی کے آدین رہے گا. کہہ لے ممی بنا کے دے گی کوئی کھا سکے گا. اب ممی نہ بولے گی کہ یہ نہیں کھانا ہے وہ نہیں کھانا ہے بارکہ نہیں کھانا ہے یہ نہیں کھانا ہے میں جو بنا کے دیتی ہوں وہ کھانا. تو وہاں بیویک ممی کے ہاتھ میں رہ گیا اور کریا کرنے کا اس کے آت میں اس لیے پہلے کا اب آپ یہ کہو کہ نہیں بالت تو کچھ بھی سمجھتا نہیں ہے تو اس کو دھرم کیوں سکھائے دھرم کیوں کرائے دھرم کیوں کرائے بھائی صاحب کرائیے کل اس کا عیوشہ کم ہو اور بالے عوستہ میں مرتی ہو جائے تو بینا دھرم کیے جائے گا دوسری بار

49:54 اگر ماں باپ دھرم کراتے ہیں تو اس کے سنسکاروں میں سنسکاروں میں اچھی طرح سے संसकार कहां रहेंगे, मेमरी में जाके रहेंगे साथ, अब संसकार अगर उसके अच्छे व्यवस्तित बन गए, तो बविश्य में उसके लिए प्रॉप्लेम नहीं रहेगी, जब समझ आ जाएगी, क्या विवेक आ जाएगा, सुनतक ज्यान डेवलप हो जाएगा, तब उसके � लेकिन as being a parent or father होकर के भी आप बोलो कि नहीं नहीं मैं उसको रोकूंगा नहीं मैं नहीं कहूंगा यह नहीं करना यह नहीं कहाना वो जब समझेगा तब नहीं एस बिए पैरेंट नौ इट इस यूर ड्यूटी

50:44 आपका कर्तब है कि जब तक उसकी समझ डेवलप नहीं हुए वह ये बात यहां पर समझाएगे हर एक मैं सब में ज्ञान कहां से शुरुआतना अच्छा कल मान लो कि उम्र से तो बड़ा हो गया लेकिन ज्ञाना वर्मिय कर्म उसका बारी है तो आपको क्या करना चाहिए अब आपको उस शरीर की उम्र नहीं देखनी है उसके आप उसको जो है وہ اپنی طرح سے پیشن کی سمجھ دے کر کے سمبھالے کے تب کی اس

51:33 کا کام سبھی ایک سریعے نہیں ہوتے ہیں نیانہ ورنی کرما کا کشیو پشم کم جیدہ پرسنٹ میں سب کا الگ الگ ہوتا ہے کیا رہے کے نہیں اب مونی کرما تو سب میں پڑھائیں مونی کرما تو جنم جنم کا بندہ ہوا ہے وہ تو سب میں چل رہا ہے ساتھ میں ज्ञाना वरनिय कर्म जब कम जादा है तो वो खुद ही अपना decision नहीं ले पादा है। प्रॉपर decision लेने की capacity किसमें रहती है। प्रॉपर decision लेने की capacity सुरुत ज्ञान में रहती है। सुरुत ज्ञान ही एक ऐसा है और वो

52:19 भी सुरुत ज्ञान जिस प्रकार से आपने उपारजन and some of the person having the knowledge of the book. Now, the two messages that have studied, because the parents and grandfather, we will get experience and knowledge. It is coming from the grandfather. So he is giving us the proper experience and knowledge. تو یہ ہمارے لائف میں بہت ضروری ہے۔ اب یہاں پر آپ یہ کہو کہ نہیں نہیں ہم تو یہ نکال دیں کہ چلو بھائی۔ اب آپ کہو کہ نہیں

53:05 نہیں ہم تو یہاں پر جنہی پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ایک پر ا अज्जारों लाकों बच्चे पाट-दस-पीस बरस की उम्र में ही मर जाते हैं अब उनका क्या होगा उनका क्या होगा सोचे ऐसी सिति में आप क्या करोगे तो इसलिए यहां पर कहा है आप पहले उसको जो है आचार धर्म शिखाईए ताकि उसके आचार धर्म के अंदर आचर

53:56 اب جیسے اس کے اندر آچرن سُدھر جائے کریا اس کے آچر بولیے یا کریا بولیے یہاں پر بات ایک ہی ہے کریاتما دھرما جو ہم کہتے ہیں اب اس کے اندر کریا کراتے جاؤ اور کریا کے ساتھ میں اس کا جنان سمجھ بھی اچھی طرح سے بیل سیٹ کرتے ہیں ताकि जैसे जैसे उसका सक्षम बनता जाएगा ज्शयोपशम बनता जाएगा उसके अंदर ज्ञान आता जाएगा तो खुद ही समझ कर करेगा और उसको सही लगे का मैं जो कर रहा हूं मैंने इतने बरसों तक किया मुझे ज्ञान नहीं

54:46 थी लेकिन मैंने किया मैंने सही किया इ मैं क्या तो क्यों हूं आप पेरेंट्स क्यों हूं? विकॉस प्रेज्ट प्रेज्ट प्रेज्ट प्रेज्ट प्रेज्ट प्रेज्ट अब बच्चे छोटे हैं तो तो नादा नहीं तो आपका करता भी होता है आप अपने करता जो सही ज्यान देखर के बिल्कुश सब्सक्रा� लेकिन हम कई बार पचास साथ के उपर पहुंच गए लेकिन ज्ञान में तो छोटे हैं, तो हम यहां पर उम्र से भी बाल कहलाएंगे, शरीर की उम्र है, ज्ञान तो नहीं आया से, तो

55:33 आप पचास बरस की उम्र में भी ज्ञान प्राप्त करें, साथ बरस की उम्र में ज्ञान گیان کے لیے تو ساتھنا بہت عابص ہے اور اگر جو ہے دودھ میں شکر مل جائے ویسے قریہ کے آچر میں ہمارا گیان جھڑ جائے وہ سکام نیجرہ آپ کی سو گنی دس گنی نہیں سو گنی جادہ وہ لیے بیجل میں گے کھانایا آپ کو If the Lord has given us a prayer with the Lord, then the Lord will

56:19 be able to create a peace. That's why we need to increase our patience. Understand that we need to keep everyone's attention. Tell us, who wants to ask? Whoever has a question, please raise your virtual hand and unmute yourself, please. Please raise your hand. Yes. What is this with this? The first sutra in this is the first sutra, then within it is the jagnya madhyam utkrashta, the sunmikdarshi jnjani brani mokshamarga. This base is made, so tomorrow we will have more detail in detail. Namoriyan dharam namosiddharam namaribhyaan

57:12 Namo bachhaya nam namalo esabhasa akunam. Esoparcha namukkaro sabdha pavakmanasam. Mangala nam chasabhvesimparamam. Avai mangalam. Mangalam Bhagavanavira. Mangalam Gautama Pram. Mangalam Sto Lipadradhyaya. Jainagar. Omstu Mangalam. Chattari Mangalam. Aritamita Mangalam. Siddha Mangalam. Aritamita Mangalam. Kewalipannatthodamunyundalam. Chattari lobhatma, harihanthalo vhatma, siddha lobhatma, sahulogutma. Kewalipannatthodungvamgabhutma. Chattari saranam pabajyami, harihanthesaranam pabajyami.

58:02 Siddhesaranam pabajyami, sahusaranam pabajyami. Kewalipannatthamdambam saranam. Vigil, can you turn off the video recording? Yeah. Thank you so much. You can

58:51 end the meeting. Yeah, yeah, yeah. I have unmuted. So I have ended.

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