Bimari Thik Kyun Nahi Hoti? Dr. N.K. Sharma reveals the bitter truth about your Diet! #diet

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो कॉन्शियस ईटिंग (Mindful Eating) के महत्व पर केंद्रित है। कॉन्शियस ईटिंग का अभ्यास करके, व्यक्ति ओवरईटिंग से बच सकते हैं, वजन कम कर सकते हैं, भोजन का अधिक आनंद ले सकते हैं, और अपने जीवन में जागरूकता और ध्यान का विकास कर सकते हैं।

  • कॉन्शियस ईटिंग से वजन कम करने में मदद मिलती है, भले ही आप वही खाना खा रहे हों।
  • यह जागरूकता और ध्यान विकसित करने में मदद करता है।
  • यह भोजन का अधिक आनंद लेने और ओवरईटिंग से बचने में मदद करता है।

कॉन्शियस ईटिंग का परिचय

इस वीडियो में, डॉक्टर एन के शर्मा कॉन्शियस ईटिंग के बारे में बता रहे हैं, जिसे माइंडफुल ईटिंग भी कहा जाता है। जब तक आप कॉन्शियस ईटिंग नहीं सीखते, तब तक आप ओवरईटिंग के शिकार रहेंगे, जिससे आपका वजन बढ़ता जाएगा और आप अपने आहार का पूर्ण आनंद नहीं ले पाएंगे। कॉन्शियस ईटिंग आपके अंदर जागरूकता और ध्यान का विकास करती है, जिससे आप वर्तमान में होश में रहकर अपने आहार को ग्रहण कर सकते हैं।

वजन कम करने में कॉन्शियस ईटिंग की भूमिका

जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए कॉन्शियस ईटिंग बहुत मददगार हो सकती है। कॉन्शियस ईटिंग से धीरे-धीरे वजन कम होता जाता है, जबकि खाना वही रहता है। अनकॉन्शियस ईटिंग में, आप अनावश्यक रूप से जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं, क्योंकि आपका ध्यान भोजन पर नहीं रहता। मन अतृप्ति पसंद नहीं करता, इसलिए आप थोड़ा और खा लेते हैं क्योंकि आप भोजन का पूरा स्वाद नहीं ले पाते।

कॉन्शियस ईटिंग के लिए प्रयोग

कॉन्शियस ईटिंग के लाभ पाने के लिए आप कुछ प्रयोग कर सकते हैं। पहला, जब आप पानी पिएं तो होशपूर्वक पिएं और एक-एक घूंट के साथ कॉन्शियस रहें। जब आप कॉन्शियस होकर पानी पिएंगे, तो आपको अनुभव होगा कि यह पानी कितना बड़ा वरदान है और इसमें कितना स्वाद छुपा हुआ है। भोजन करते समय भी आपको एक ऐसी स्थिति आती है जहाँ आपको एक निवाला भी एक्स्ट्रा लगता है।

भोजन का आनंद और तृप्ति

कॉन्शियस ईटिंग करने वाले लोग कभी भी अपने शरीर की जरूरत से ज्यादा नहीं खाते। वे भोजन को दिल से खाते हैं, अच्छी तरह से स्वाद लेते हैं, और आनंद लेते हुए चबाकर धीरे-धीरे खाते हैं। जितना आप किसी भोजन को प्यार से ग्रहण करते हैं और चबाते हैं, वह आपके अंदर अच्छी तरह पचता है और आप एक सीमा को पहचान जाते हैं कि आपको कहां रुकना है।

पानी पूरी का उदाहरण

अगर आप एक पानी पूरी भी खा रहे हैं, तो उसे आराम से लेकर मुंह में डालकर अच्छी तरह चबाकर खाएं। हर निवाले पर कॉन्शियस रहें। जब आप तीसरा निवाला लेंगे, तो आपको लगेगा कि वही स्वाद रिपीट हो रहा है। कॉन्शियस ईटिंग में स्वाद को बार-बार लेने से एक सीमा आ जाती है और आपको लगता है कि आपकी जीभ को संतुष्टि हो गई है।

निष्कर्ष

कॉन्शियस ईटिंग की आदत डालें। इससे आपके अंदर ध्यान, साक्षी भाव और वजन का कम होना जैसी चीजें घटित होंगी। दुनिया में आए हो तो हर पल भगवान तुम्हें भोग लगा रहा है। रोज भगवान को धन्यवाद दो कि तुम्हें बार-बार अवसर मिल रहा है स्वाद लेने का और आनंद लेने का। कॉन्शियस होकर आहार और जल का भोग करने से आप ओवरईटिंग से बच सकते हैं, स्वस्थ रह सकते हैं और आध्यात्मिकता की ओर बढ़ सकते हैं।

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Transcript

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0:08 दोस्तों नमस्कार मैं डॉक्टर एन के शर्मा द एक्टिंग कार्यक्रम में मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूं। दोस्तों इस वीडियो में मैं आपको कॉन्शियस ईटिंग के बारे में बताना चाहता हूं। क्यों कॉन्शियस ईटिंग? जिसको माइंडफुल ईटिंग भी कहते हैं। क्योंकि आप जब तक कॉन्शियस ईटिंग नहीं सीखोगे तब तक आप ओवर ईटिंग के शिकार भी रहोगे और आपका वजन बढ़ता जाएगा और आप जो भी आहार जीवन में खा रहे हैं आप उसका पूर्ण भोग आप नहीं कर पाएंगे। इसलिए कॉन्शियस ईटिंग बहुत जरूरी है। कॉन्शियस ईटिंग इसलिए भी जरूरी है कि कॉन्शियस ईटिंग के कारण आपके अंदर जीवन में एक जागरूकता का विकास होगा। आपके अंदर

0:54 ध्यान का विकास होगा। और आप वर्तमान में होश में रहकर आप अपने आहार को ग्रहण कर रहे होंगे। दोस्तों यह बहुत बड़ी अद्भुत बात बताने जा रहा हूं कि जो लोग वजन कम करना चाहते हैं वो लोग अगर कॉन्शियस ईटिंग जान लें और उसका उपयोग कर लें तो उनका वजन धीरे-धीरे कम होता जाएगा। जबकि खाना सेम वही खा रहे हैं। यानी कि उनकी जो पुरानी आदतों वाला जो खाना है जो उनको नुकसान कर रहा था। आप हैरान हो जाएंगे। खाना सेव वही खा रहे हैं आप के बावजूद भी आपका वजन धीरे धीरे धीरे डाउन होता जा रहा है। कारण क्या

1:42 है? क्योंकि अनकॉन्शियस ईटिंग में यानी कि जब आप बेहोशी में भोजन करते हैं तो आप अनावश्यक जरूरत से ज्यादा आप अपने शरीर को दे देते हैं। आप अगर बातचीत कर रहे हैं, आप अगर टीवी देख रहे हैं, आप गपशप कर रहे हैं, आप पार्टी में खड़े-खड़े लोगों के साथ वार्तालाप कर रहे हैं तो उस कंडीशन में क्या होता है कि आपका ध्यान भोजन पर नहीं रहता। और मन की एक आदत है कि वह अतृप्ति पसंद नहीं करता। वह फिर तृप्त होना पसंद करता है। तो फिर जो चीज आपने खाई जब आप उसका पूरा स्वाद ले नहीं पाते हैं ना तो फिर आपको लगता है कि मैं थोड़ा और खा लूं। मैंने इसको इसका मजा नहीं लिया। तो इसीलिए आज के बाद आप छोटे-छोटे कुछ प्रयोग करें

2:29 अपने जीवन में जिससे आपके जीवन में कॉन्शियस ईटिंग का बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। पहला प्रयोग क्या करना है कि यह तो नियम ही बना लें कि जब मैं कोई पानी पियूंगा तो फिर पानी ही पूंगा और पानी के एक-एक घूंट के साथ मैं उस समय कॉन्शियस रहूंगा। यानी कि होश पूर्वक मैं पानी को पूंगा। इसका मतलब यह नहीं है कि आप यूं मत समझ लेना कि ये ये तो पागलपन है भाई साहब। ऐसा कौन आदमी होश में रहता है। पर सवाल क्या है कि क्या तुम बेहोशी की आदत को अभी भी मेंटेन करना चाहते हो? क्योंकि तुम अनजाने में जरूरत से ज्यादा भी पानी पी जाते हो या कम पी जाते हो। इसीलिए आप जब कॉन्शियस होकर आप पानी पिएंगे और एक एक घूंट को निवाले को पिएंगे तो पहली बात आपको जीवन में अनुभव में आएगी कि यार आज मैं जो यह

3:16 पानी पी रहा हूं यह पानी कितना बड़ा परमात्मा का वरदान है मेरे लिए और इसमें कितना स्वाद छुपा हुआ है कि आज यह मेरी प्यास को बुझा देता है। तो यह अनुभव उस समय नहीं होता क्योंकि आप अनजाने में पानी पी जाते हैं। और आप जब पानी पीते हैं तो कहीं ना कहीं जाकर है ना आपको यह फील आता है कि अभी एक घूंट भी मेरे लिए एक्स्ट्रा हो रहा है। देखिए आप भोजन भी करेंगे ना तो भोजन में भी आपको ऐसी एक स्थिति आती है जहां आपको एक निवाला भी आपको एक्स्ट्रा लगे। तो इसीलिए जो लोग कॉन्शियस ईटिंग करते हैं ना वह कभी भी अपने शरीर की रिक्वायरमेंट से ज्यादा खा ही नहीं सकते और कॉन्शियस होंगे तो ही तो आप उसको दिल से खाओगे

4:04 अच्छी तरह से स्वाद लोगे और उसका आनंद लेते हुए उसको चबाकर धीरे-धीरे मस्ती से खाओगे तो दोस्तों जितना आप किसी भोजन को बड़े प्यार से उसको ग्रहण कर रहे होते हैं और चबा रहे होते हैं ना तो आपके अंदर धीरे-धीरे धीरे वह जाकर जो है आपके अंदर अच्छी तरह पचने लगता है और आप एक सीमा को पहचान जाते हैं कि मुझे कहां रुकना है। अगर कॉन्शियस है तो अनकॉन्शियस है तो आप नहीं जान पाएंगे और आप अनावश्यक आप ज्यादा खा जाएंगे। अभी एग्जांपल दे रहा हूं। मान लीजिए आप एक पानी पूरी खा रहे हैं या आप एक समोसा खा रहे हैं। दोस्तों आप आज के बाद जो भी अब वो मैं उसको जंक या खराब नहीं कहता पर आप चाहे मिठाई भी खा रहे हैं

4:50 ना रसगुल्ला भी खा रहे होंगे या आप कोई पेड़ा भी खा रहे होंगे जो भी आपके आपकी आदतें जो भी है तो आज के बाद क्या करना कि अगर आप एक पानी पूरी भी खा रहे हैं ना तो आप उस पानी पूरी को आराम से लेकर उसको मुंह में डालकर उसको अच्छी तरह से पूरा मुंह में घुमाते हुए उसको अच्छी तरह चबा के आप खाएंगे और फिर निगलेंगे फिर आप दूसरा लेंगे उस निवाले के ऊपर भी आप कॉन्शियस है ना तो आप अनुभव करोगे कि अब कि आप दूसरा निवाला ले रहे हैं। फिर आप जब तीसरा लेने लगेंगे तो आपको फिर लगेगा कि वापस फिर वही स्वाद जो है मैं रिपीट करता जा रहा हूं। तो आपको फिर चौथे में आपको लगेगा कि वही स्वाद फिर रिपीट हो रहा है। देखिए जब आप कॉन्शियस ईटिंग करते हो ना तो

5:37 आप जो स्वाद को बार-बार ले रहे होते हैं ना तो फिर कहीं ना कहीं एक उसके अंदर एक सीमा आ जाती है। तो आपको लगता है बस मेरा मेरी जीभ को संतुष्टि तो हो गई। मुझे मजा तो आ गया। अब मैं खा क्यों रहा हूं? क्योंकि वो पानी पूरी वाला कहेगा मैं तो छह आपको तो देनी पड़ेगी जी। आपको पूरी खानी पड़ेगी जी। या नहीं तो या नहीं तो आपको लगता है कि भाई प्लेट में आ गया है इसको खत्म ही कर दूं मैं तो इस तरह से यह आपको भले ही आधा खाना पड़े तो हमेशा पार्टनर अपने साथ में रखा करो कि भाई कोई भी अपने साथ दोस्त मित्र या पतिप होते हैं आप वो बच्चे होते हैं उनको है ना आधा उसको बांट दो तो आपको लगता है कि मैं अगर ध्यान से समोसा खा रहा हूं कि कचोरी खा रहा हूं कि कोई छोले भटूरे खा रहा हूं कि कुछ भी मजेदार चीज खा रहा हूं तो आप कॉन्शियस जब

6:24 खाओगे और बड़े ध्यान से खाओगे ना तो आपको कहीं ना कहीं जाके अंदर है ना उसका स्वाद लेने के कारण आपके अंदर तृप्ति होने लगेगी और यह तृप्ति केवल कॉन्शियस ईटिंग में हो सकती है अनकॉन्शियस में नहीं हो सकती इस तरह से तो थोड़ी आप आदत डालें तो आप देखोगे कि आपके अंदर ध्यान साक्षी भाव और साथ-साथ में वजन का कम होना और खाने का अच्छी तरह पचना यह सारी चीजें आपके साथ में घटने लगेगी। तो दोस्तों कॉन्शस ईटिंग की प्रैक्टिस करें। आपको बहुत मजा आएगा जीवन जीने का। और जब दुनिया में आए हो और तुम हर पल तुम्हें बार-बार भगवान तुम्हें भोग लगाया जा रहा है। अब मानो भगवान भोग नहीं लगाता तुम्हारे शरीर में तो कितना बड़ा तुम नुकसान कर रहे होते। तो इसलिए रोज भगवान को धन्यवाद दो कि यार फिर भूख

7:10 लग गई यार। फिर खाने के लिए फिर मेरा शरीर तैयार हो गया। और तुम्हें कितनी बार अवसर दे रहा है। वह फिर तुम्हें नया अवसर दे रहा है कि फिर दोबारा उस स्वाद को चको फिर उसका आनंद लो। आप जरा सोचो कितना बड़ा वरदान है ये हमारे लिए। तो इसीलिए कॉन्शियस होकर जब आप एक-एक पल आप आहार को जल को अपने कोई भी पीने को आप जब भोग रहे होंगे ना तो आपको लगेगा कि आप उसमें ज्यादती नहीं कर सकते। ओवर ईटिंग नहीं कर सकते। इस तरह से आप लोग जो है अपने आप को स्वस्थ रख पाएंगे और धीरे-धीरे अनजाने में आप आध्यात्मिकता की और आगे बढ़ जाएंगे। तो चलिए दोस्तों मुलाकात करता हूं अगले वीडियो में ऐसा ही कोई नया विषय लेकर। धन्यवाद।

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