0:00 दोस्तों अगर ध्यान में प्रवेश करना है तो आपको प्रत्येक दिन अपने ध्यान में बदलाव लाने होंगे यानी जैसे-जैसे आपके शरीर में बदलाव आएंगे और आपके सांस लेने की गति में स्थिरता आएगी वैसे-वैसे आप ध्यान की गहराई में जाना शुरू हो जाओगे आप जितना भी समय ध्यान में बिताते हैं उसके प्रभाव अगर आपकी बॉडी यानी शरीर पर आ रहे हैं तो आपका ध्यान बिल्कुल सही दिशा में है लेकिन अगर आप बहुत ही लंबे समय से ध्यान करने का प्रयास कर रहे हैं उसके बावजूद भी आपको ध्यान में कोई आनंद महसूस नहीं हो रहा और आप ध्यान करते-करते अपने ही विचारों में खो जाते हो कभी आपका ध्यान में मन ही नहीं लगता तो ऐसा आपके साथ क्यों हो रहा है क्योंकि आप लोगों को कभी भी ध्यान की टेक्निक्स बताई नहीं जाती है आप लोग केवल
0:45 अपनी आंखें बंद कर लेते हो और ध्यान में जाने का प्रयास कर लेते हो ऐसे तो आप लोग सालों साल ध्यान के अनुभव नहीं कर पाएंगे इसलिए बिल्कुल सिंपल मेथड आपको मेडिटेशन के करने होंगे और एक नहीं 10 से अधिक टेक्निक्स आपको ध्यान में जाने की अपनानी होगी उनमें से कोई एक टेक्निक्स आपके लिए काम कर जाती है क्योंकि सभी का शरीर एक जैसा नहीं होता है कभी आपने यह सोचा है कि जब आप ध्यान करते हो तो आपके शरीर में चलने वाले सांस आपका ध्यान समाधि तक बिल्कुल सरलता से कैसे पहुंच जाते हैं लेकिन ध्यान करने का जो सबसे बड़ा नियम है वह है समय अगर आप ध्यान करने का सही समय नहीं चुन पा रहे हैं तो ध्यान में काफी कठिनाइयां आपके साथ में हो सकती हैं और बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो बड़े ही लंबे
1:32 समय से ध्यान करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक उनका ध्यान उन्हें गहराई के अनुभव नहीं करा रहा है ऐसी स्थिति में आपको आवश्यकता पड़ती है कुछ नया अपनाने की जो हम आपको आज इस वीडियो में बताएंगे हम आपको बताएंगे कि कैसे आप ध्यान में बड़ी सरलता से प्रवेश कर सकते हो लेकिन यह जो विधि है उसके नियम भी हम आपको बताने वाले हैं और साथ ही इस ध्यान विधि को करने से आपके शरीर में पहले दिन से ही ध्यान के अनुभव आपको प्र प्राप्त हो सकते हैं लेकिन यह विधि आपको 10 दिन लगातार करनी होगी ध्यान करने से पहले आपको अपने सांसों को पहचानना होगा आप लोग हैरान हो जाओगे इस बात को सुनकर कि आपकी सांसें आपको ध्यान से समाधि तक ले जा सकते हैं अगर आप निरंतर सांसों की विधि का
2:17 प्रयोग अपने ध्यान में करते हैं तो आपका ध्यान आपके जीवन को बदल सकता है आइए सबसे पहले हम जानते हैं कि आपका शरीर जिसमें सवा हजार नाड़ी डिया काम करती है आपके लिए और वह नाड़ी आपके शरीर में रक्त संचार और सांस को सही रूप से आपके शारीरिक अंगों तक पहुंचती है लेकिन अगर हमारी यह नाड़ियों कमजोर है तो हमें ध्यान में काफी कठिनाइयां महसूस हो सकती है और बंथा भी हजार नाड़ियों का ध्यान में बहुत बड़ा बलिदान होता है क्योंकि ध्यान में आपके शरीर का रक्त संचार बिल्कुल सही दिशा में जाना चाहिए और आपकी सांस भी सही रूप में चलनी चाहिए एक गहरी और लंबी ली हुई सांस आपके पूरे शरीर में फैलती है अगर आप अपने ध्यान में सांस को मह महसूस कर लेते हैं कि यह सांस कैसे आपके पूरे शरीर में भ्रमण
3:03 कर रही है तो उसी दिन से आपकी ध्यान में यात्रा करने की शुरुआत हो जाती है और इस यात्रा को करने के लिए आपको अपने सांसों के साथ जुड़ना होगा आपको गहरे ध्यान में जाने के लिए अपने सांसों का सहारा लेने की आवश्यकता है जब आपकी सांस आपकी इड्डागा नाड़ी से होते हुए यानी आपके नाक के दाएं और बाएं छेद से जो सांस आपके शरीर में जाती है आप को वही से अपनी सांसों के साथ जुड़ जाना है यही 10 दिन का प्रयास आपको करना होगा कि आप अपने सांसों के साथ जुड़ सके और अपने शरीर के हर उस अंग को महसूस कर सके जहां पर आपकी सांस पहुंच रही है अब सबसे पहले बात आती है सही मुद्रा में बैठने की ध्यान में बैठने के लिए आपको
3:50 सुखासन मुद्रा का इस्तेमाल करना चाहिए या फिर अगर आपकी पीठ में दर्द रहता है या किसी भी प्रकार की कोई समस्या है जिसकी वजह आपकी की पीठ में दर्द बनता है तो आप इस ध्यान को लेट कर भी कर सकते हैं केवल एक बात आपको याद रखनी होगी कि जब आप अपने ध्यान में प्रवेश करना चाहते हैं और ध्यान की शुरुआत करते हैं तो आपकी रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए क्योंकि जब आपके शरीर में सांस अंदर की तरफ जाती है तो आपके शरीर में सीधी प्रवेश करती है और सीधा आपके मूलाधार चक्र के पास जाकर टकराती है वहां पर एक ऊर्जा पैदा करती है जो ऊर्जा सुषुम्ना नाड़ी यानी आपकी रीढ़ की हड्डी के पास एक ऐसी नाड़ी है जिसके अंदर एक लिक्विड भरा हुआ है यानी उस लिक्विड को शारीरिक ऊर्जा भी कहा जाता है
4:37 और इस नाड़ी की शुरुआत आपके मूलाधार चक्र से होती है और जब आपकी सांस इस नाड़ी के ऊपर प्रेशर डालती है तो सुषुम्ना नाड़ी के अंदर का लिक्विड ऊपर की तरफ चला जाता है और जब यह लिक्विड ऊपर की तरफ उठता है तो आपका ध्यान अपने आप ही गहरा होता चला जाता है यह तो हो गया कि कैसे यह विधि आपके लिए काम करेगी जो अब हम आपको बताने जा रहे हैं ध्यान में प्रवेश करना है तो 10 दिन का अभ्यास आप लगातार कीजिए आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब आपका ध्यान में अचानक ही प्रवेश हो गया अब आपको पहले पांच दिन ध्यान के दौरान अपने शरीर की आवाजों को महसूस करना है यानी जब आप ध्यान करते हो तो आपको अपने शरीर के भीतर जो भी हलचल महसूस होती है इस
5:22 हलचल को आपको केवल महसूस करते रहना है उसे ध्यान के दौरान बंद आंखों से देखने का प्रयास करना है यानी आपको अंतर्मन होकर अपने शरीर के भीतर होने वाली हलचल को पकड़ना है आपको इस दौरान अपने दिल की धड़कन महसूस होगी उसकी आवाज से आप सुनते रहे और उसके बाद आपको अपने शरीर के किसी भी अंग में अगर कोई हलचल महसूस हो रही है तो उसे अंदर ही अंदर देखते रहे और महसूस करते रहे जैसे कि जिस शरीर के हिस्से में चिटियों का काटना वाइब्रेशन होना और काफी व्यक्तियों को तो अपने पेट से आवाज आती हुई महसूस होती है तो जो भी आपके साथ में ध्यान की स्थिति में हो रहा है केवल उसे म महसूस करते रहे लेकिन इस दौरान कोई भी
6:07 विचार आपके मन में नहीं आना चाहिए केवल आप ध्यान में ऐसा विचार रखें कि आप अपने शरीर को बंद आंखों से देख पा रहे हैं और कुछ समय बाद आपका ध्यान अपने आप ही आपकी सांसों पर आ जाएगा और फिर लगातार कुछ समय अपनी सांसों को महसूस करते रहे कि कैसे यह सांस आपके शरीर में प्रवेश कर रही है और कैसे शरीर से बाहर की ओर जा रही है आप अपना ध्यान अपनी नाक पर भी लगा सकते हैं और अपनी नाभी पर भी बेहतर होगा कि आप सांस को अपने शरीर में खींचते समय अपना ध्यान अपनी नाभी पर रखें और सांस को छोड़ते समय अपना ध्यान आप अपनी नाक पर रखें ऐसा करने से आपका सांसों के साथ शांत रूप से संपर्क बनना शुरू हो जाएगा आपकी नाक में दो छेद
6:53 हैं जहां से आपकी सांस अंदर की तरफ यानी आपके शरीर में जाती है केवल आपको इस मार्ग से ध्यान में प्रवेश करना है इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना होगा कुछ समय बाद बाद आपको अपनी सांसों की आवाजें अपने कानों में सुनाई देना शुरू हो जाएगी और फिर आप अपना ध्यान अपने कानों पर ले आए और पूरे ध्यान के अनुसार अपनी सांसों की आवाज को सुनते रहे लेकिन किसी भी प्रकार का कोई विचार आपके मन में ना आए इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना है केवल अपनी सांसों की आवाज आप सुनते रहे और जैसे-जैसे आपकी सांस आपके शरीर में जा रही है और बाहर आ रही है और उससे जो भी आवाज आपको सुनाई दे रही है केवल उसे सुनते सुनते आप अपने ध्यान में जाने का प्रयास करें यानी अपने शरीर को
7:40 ढीला छोड़ना शुरू कर दीजिए आप देखेंगे कि जैसे-जैसे आपका शरीर ढीला होता रहेगा वैसे-वैसे आपका शरीर स्थिर अवस्था में जाना शुरू हो जाएगा सबसे पहले आपके पास आपका पेट आपकी दोनों बाजू या श्य पड़ना शुरू हो जाएगी उसके बाद आपका पूरा शरीर शून्य अवस्था में चला जाता है और और जो भी हिस्सा आपके शरीर का अगर अभी भी शून्य नहीं हो पाया है क्योंकि ऐसे कुछ अंग रह जाते हैं जो पूर्ण रूप से शन अवस्था में नहीं आ पाते जो केवल उसी हिस्से पर आपको अपना ध्यान ले जाना है और उसे महसूस करते रहना है आप देखेंगे कि कुछ समय बाद वह शरीर का हिस्सा भी अचानक ही शून्य हो चुका है तो सबसे पहले और पांचवें दिन तक आपको यही अभ्यास करना है जब आप लगातार इसी अभ्यास को पाच दिन करेंगे यानी सबसे पहले
8:28 आपके शरीर में होने वाली हलचल को महसूस करना अपने शरीर की आवाजों को सुनना और अपने शरीर को डीला छोड़ते चले जाना अगर आप ऐसा करेंगे तो पा दिन के भीतर ही आपके शरीर में और आपके ध्यान में जो अनुभव आपको आएंगे वह बड़े ही लाजवाब होंगे इसके बाद आपको अगले पांच दिन का प्रयास करना है अब जो मैं बताने जा रहा हूं आपको ऐसा करना है सेम वही प्रोसेस पाच दिन करने के बाद छठे दिन जब आपका शरीर स्थिर अवस्था में आना शुरू हो जाए तो आपको महसूस होगा ध्यान में विचारों की संख्या काफी हद तक बढ़ रही है जो कि ऐसी स्थिति में आपका ध्यान अपने आप ही आपकी आज्ञा चक्र पर चला जाता है जिसकी वजह से आपको अपने सर के नीचे का हिसाब महसूस ही नहीं होता यह ऐसी अवस्था होती है
9:14 जिसमें आपके मन में बड़ी उत्सुकता जागती है आपके मन में हमेशा यही रहेगा कि मैं ध्यान में प्रवेश करने वाला हूं अब मैं ध्यान में जाने वाला हूं मुझे जो भी ध्यान में दिखाई दे रहा है मुझे इसके अंदर प्रवेश करना है मैं ध्यान में चला जाऊंगा तो यह सब कुछ विचार आपको अपने मन में नहीं लेकर आने हैं क्योंकि यही से आपका मन आपको भटकाने का पूर्ण प्रयास करता है आपको बिल्कुल निर्विचार होकर बैठना है और किसी भी प्रकार का कोई बुरा विचार अपने मन में लेकर नहीं आना है आपको यह महसूस ही नहीं करना है कि आप ध्यान की अवस्था में बैठे हुए हैं और आप ध्यान में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं इन बातों को जब तक आप नहीं भूलोगे तब तक आप ध्यान में प्रवेश नहीं कर पाओगे
10:00 तो सबसे पहले बात आती है कि आपको अपने भीतर से उत्सुकता को नष्ट करना होगा और वह कैसे होती है आइए जानते हैं इसके लिए आपको फॉर्मेशन की आवश्यकता पड़ती है यानी आपको अपने ध्यान में यह बोलना है कि मुझे कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है सब कुछ मेरे पास पहले से ही मौजूद है मैं केवल अब यहीं पर हूं जो मुझे ध्यान में दिखाई दे रहा है मुझे कुछ भी इससे आगे का रहस्य नहीं जानना है मैं आज भी अच्छा हूं मैं कल भी अच्छा रहूंगा मुझे तो बस जो यह अंधेरा अपने ध्यान में दिखाई दे रहा है केवल इसी के अंदर प्रवेश करना है और इसे पहचानना है कि यह कहां तक जा रहा है यह रास्ता कितना लंबा है केवल मुझे यही पहचानना है यह बात
10:45 आपको ध्यान के दौरान अपने मन ही मन दोहरा है और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके अंदर से उत्सुकता काफी हद तक कम होने लगेगी और जब आपके शरीर से आपके मन से यह उत्सुकता कम हो जाती है तो आप खुद ध्यान में प्रवेश कर जाते हो क्योंकि जब आप अपने शरीर से अपना ध्यान दूर ले जाते हो और इस ब्रह्मांड से दूर ले जाते हो अपने घर से दूर ले जाते हो तो आप ध्यान में गहरा प्रवेश करना शुरू कर देते हो यह बड़ी ही रहस्यमय बात है आप इस विधि को दोहरा करर जरूर देखना 10 दिन के बाद जो भी अनुभव आपको आए आप कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें ज्ञान के अंतिम परिणाम मतलब परम अवस्था कुपन मैं होता है परंतु बहुत से साधक ध्यान के अभ्यास में इन्हीं बदला के कारण आने वाली परेशानियों को बिना
11:31 समझे घबराहट में या दरकार या उसे बदलाव को कोई शारीरिक बीमार सोचकर बिना उसके कारण या उसके हल खोज ध्यान छोड़ देते हैं या बहुत से साधक उसे पॉइंट पर पहुंचकर ध्यान से उठ जाते हैं जैसे किसी साधक को अगर 20 मिनट बाद ऐसी कोई समस्या महसूस होती है तो ऐसे साधक अपने ध्यान के समय को ही घटाकर 20 मिनट कर देते हैं आज आप इस पूरे वीडियो को ध्यान से देख लीजिए यह मैं आपको अपने अनुभव से बता सकता हूं कि अगर आप इन समस्याओं परेशानियों के पीछे के मुख्य कारण उनके हल को समझ लेंगे तो आप कभी भी इन समस्याओं की वजह से ध्यान नहीं छोड़ेंगे या आपके ध्यान की गति इन समस्याओं की वजह से तो नहीं रुकेगी ध्यान के समय एक साधक को महसूस होने वाली यह कुछ समस्याएं हैं जैसे कि सिर में दर्द सर
12:19 भारी महसूस होना थर्ड आय या तीसरे तिल माथे के बीच अजीब सा खिंचाव महसूस होना ध्यान के समय चेहरे पर पसीना आना गर्मा सी महसूस करना या झुंझलाहट सी महसूस करना पेट और छाती में हलचल से महसूस होना जैसी कोई चीज अंदर घूमने लगी हो अचानक से शरीर में पैरों से लेकर सर की तरफ एक झटका सा महसूस होना अचानक पूरे शरीर में झनझनाहट वाइब्रेशन से महसूस होना कई बार साधक को महसूस होता है कि उसका गला रौंद गया है या सांसें ही स्लो हो गई हैं कम हो गई है या दिल की धड़कन बढ़ी हुई महसूस होती है एकदम आप पाते हैं कि आपके दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई है हाथों में या हथेली और उंगलियों में बिजली का करंट या एनर्जी से महसूस होना ध्यान
13:08 में बैठे हुए शरीर का हिलना महसूस होना गले में से कोई चीज गुजरती हुई सी महसूस होना जैसे ऊपर की ओर कोई चीज बहने लगी है हाथों में भारीपन महसूस होना और गर्दन में अजीब सा अकड़ा हट महसूस होना जैसे आप अभी ध्यान से नहीं उठे तो आपको पैरालिसिस अटैक या लखवा मार जाएगा यह वह एहसास है सम समस्याएं हैं परेशानी है जो एक साधक के जीवन में हमेशा आती है इन सभी बदलावों का जो मुख्य कारण है वह है हमारी चेतना एनर्जी क्रिएटिव पावर कॉन्शियस आप उसे किसी भी नाम से समझे इसी शक्ति से हम बात कर पाते हैं चलते फिरते हैं दिन भर के सभी काम करते हैं यही वह एनर्जी है पावर है जो हमें दिन भर दौड़ाई रखती है लेकिन जब हम ध्यान में बैठते हैं तो क्या होता है कि
13:55 जो एनर्जी बोलने चलने फिरने काम करने में लग रही थी सबसे पहले तो आसन में बैठते ही उस एनर्जी का खर्च होना रुक जाता है अब आसन में बैठने के बाद साधक अपने ध्यान को सिर्फ तीसरे तिल पर टिकाने की सोचता है साथ में सुमिर या मंत्र जप कर रहा है लेकिन जब आपका ध्यान आंखों के ऊपर धीरे-धीरे टिकने लगता है जिसे आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि ध्यान में जैसे-जैसे आपकी एकाग्रता बढ़ती है तो आपकी चेतना शक्ति जो हमारे पूरे शरीर में फैली हुई है वह पैरों के अंगूठे से लेकर सिमटना शुरू होकर वापस ऊपर की ओर चलती है जबकि हमारे शरीर को जब से हमने इस दुनिया में जन्म लेकर पहली सांस ली थी तब से वह शक्ति ऊपर से नीचे बह रही थी तो यह सभी बदलाव परेशानी समस्याएं इसीलिए आपको
14:43 महसूस होती है क्योंकि हम ध्यान के समय अपने शरीर की चेतना शक्ति के बहाव को एकदम उल्टी दिशा टोटली अपोजिट रिवर्स कर रहे होते हैं तो जिस प्रकार आपका मन ध्यान से धीरे-धीरे सहज होकर प्रेम श्रद्धा विश्वास से भर जाता है उसी प्रकार आपके शरीर को भी चेतना शक्ति के इस एस मिटावल का धीरे-धीरे अभ्यास होता है और एक समय ऐसा आता है कि आपकी चेतना को पैर के अंगूठे से लेकर सर की छोटी तक सि मटने में सिर्फ दो मिनट से भी कम का समय लग सकता है एक सिंपल से उदाहरण से समझिए कि जब आप जिम करना शुरू करते हैं या कोई एक्सरसाइज शुरू करते हैं तो शुरुआत के कुछ दिन आपके शरीर के कई हिस्सों में कई तरह का दर्द महसूस होता है लेकिन धीरे-धीरे जब आप हर रोज एक्सरसाइज
15:29 करते हैं या जिम करते हैं तो आपका शरीर उन एक्सरसाइज के अनुसार ढल जाता है तो इसी प्रकार ध्यान के दौरान भी आपका शरीर चेतना के सिमटा चेतना के उलट दिशा में बहाव के कारण हमें भी ऐसी सभी परेशानियां महसूस कराता है लेकिन अगर आप इन परेशानियों को सोचकर इसी पॉइंट पर खड़े रहेंगे तो माफ कीजिएगा ध्यान में आप आगे कभी नहीं बढ़ पाएंगे आपके ध्यान न की अवस्था वैसे ही बने रहेगी जैसी अभी है आइए अब इन सभी परेशानियों को तीन गरी में डिवाइड कर लेते हैं क्योंकि एक को समझने में आपका बहुत समय लग सकता है तो पहले हम इन दो समस्याओं को समझ लेते हैं सर में दर्द भारीपन या माथे के बीच खिंचाव सा महसूस होना चेहरे पर ध्यान के समय पसीना अधिक आना झुंझलाहट
16:14 सी महसूस होना बेचैनी सी महसूस होना असल में जब आप ध्यान में मंत्र जब सुमिर करते हैं तो आपका ध्यान शुरुआत में एकदम से नहीं लगता लेकिन आप शुरू शुरू में अपनी तरफ से शारीरिक कोशिश या दबाव खुद ही बना देते हैं जबकि आपको आपके शरीर के किसी भी हिस्से पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं बनाना होता अगर आपको ध्यान से उठने के बाद भी सर में यही दर्द भारीपन या खिंचाव सा महसूस होता है तो आप समझ जाइए कि यह आपके द्वारा अधिक दबाव या प्रेशर की वजह से हो रहा है ज्यादातर साधक इसी माथे के बीच में मूवमेंट सेंसेशन को ऐसे समझ लेते हैं कि अभी कुछ घटित होने वाला है या अभी अगले पल आपको कुछ दिखाई या सुनाई देने वाला है मैं आपको अपने अनुभव से बता सकता हूं कि जब तक
16:59 आपके मन में इस दर्द या खिंचाव के लिए यह विचार है तब तक ना कुछ दिखाई देगा और ना ही कुछ सुनाई देगा तो कृपया इस पर ध्यान ना देकर आप बिल्कुल सहज तरीके से मंत्र जप करें और आपको ध्यान में आंखों के पीछे के अंधकार में कुछ भी ढूंढने या देखने की कोशिश नहीं करनी है और ना ही अपनी आंखों पर कोई दबाव डालना है हालांकि शुरुआत में आपके सिर के हिस्से को आपके पूरे शरीर की एनर्जी को संभालने की आदत नहीं होती तो हल्का सा भारीपन यह खिंचाव महसूस होना बहुत नॉर्मल है इसीलिए कभी-कभी साधक को सर में और चेहरे पर पसीना और गर्माहट सी महसूस होती है ध्यान से उठने के बाद अगर आपको कोई खिंचाव या दर्द महसूस नहीं होता तो इससे आपको
17:44 परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है धीरे-धीरे अभ्यास से यह अपने आप नॉर्मल हो जाता है इसके बारे में आप चिंता ना करें बल्कि जब यह आपको महसूस होना शुरू होता है तो आप उस वक्त पर इस पर ध्यान ना लगाकर अपने मंत्र जप में पूरा ध्यान लगाए रखें कुछ ही दिन में आप महसूस करेंगे कि यह दर्द ऑटोमेटिक ही कम हो गया है या खत्म हो गया है उसके बाद आपका इसकी तरफ ध्यान जाना ही बंद हो जाएगा दूसरी कैटेगरी है जिसमें साधक बहुत डर या घबरा जाते हैं कि उनको कोई शारीरिक बीमारी हो गई लगती है कभी-कभी ऐसा लगता है कि आपका गला रौद गया हो जैसे आपको सांस लेने में दिक्कत हो रही है ऐसा भी लगता है कि सांसें उल्टी चल पड़ी हो या सांसें बंद सी हो गई हो कम हो
18:31 गई हो या दिल की धड़कन बढ़ गई हो हाथ और गर्दन भी भारी से महसूस होते हैं ऐसी अवस्था में साधक का डरना बहुत नॉर्मल है आइए इनको समझ लेते हैं पहला कारण है कि जब आपकी चेतना सिमर है तो जहां-जहां तक आपकी चेतना सिमर चुकी है जैसे कि आपकी बॉडी कंधों तक शन हो गई है इसका मतलब आपकी चेतना कंधों तक सिमट चुकी है तो शरीर के निचले हिस्सों को अब एनर्जी की उतनी जरूरत नहीं है जितनी कि हमें दिन भर के काम के लिए चाहिए होती है तो इस अवस्था में ऑटोमेटिक आपकी सांसें धीरे स्लो हो जाती हैं सांसों के स्लो हो जाने की वजह से आपके दिल की धड़कन भी स्लो हो जाती है लेकिन इस अवस्था में अगर आपका ध्यान एकदम किसी भी वजह से टूट जाए जैसे कोई बाहरी आवाज इतनी तेज सुनाई दे या आपको कोई ऐसा
19:17 विचार एकदम आ जाए कि आप एकदम जाग उठे या आंखें खोल ले तो इस अवस्था में जैसे ही आपका ध्यान नीचे गिरता है तो जो चेतना शक्ति सिमटकर कन तक आ चुकी थी दोबारा पूरे शरीर में दौड़ने लगती है इस अवस्था में आपको एकदम गहरी सांस आती है तो आपको वहम सा होने लगता है कि कहीं आपकी सांस तो नहीं रुक गई थी और फिर आप पाते हैं कि आपका दिल जोर से धड़कने लगता है फिर आप डर जाते हैं कि कहीं बीपी घट गया है या बीपी बढ़ गया है क्या हुआ था जबकि आपके दिल की धड़कन को पेश बनाने के लिए जैसे ही आपकी सांसें नॉर्मल होती हैं जो कि पहले स्लो हो गई थी तो दिल की धड़कन भी कुछ सेकंड्स के लिए बढ़ेगी और फिर नॉर्मल हो जाती है इसमें आपको घबराने की जरूरत नहीं है दूसरा
20:03 कारण है नॉर्मल लाइफ में हम हमेशा बिना सांसों पर ध्यान लगाए सांसें लेते रहते हैं ना ही हमें इसके लिए कोई विचार करने की जरूरत है ना ही कोई प्रयास करने की जरूरत है तो कुछ साधक जो ब्रीदिंग मेडिटेशन करते हैं जिसमें सांसों के आने जाने के ऊपर ध्यान किया जाता है ऐसे साधक कई बार अपनी तरफ से सांसों की स्पीड पर बंद लगाने या उन्हें कम या ज्यादा करने की कोशिश करते हैं जो कि बिल्कुल गलत है आपको अपने शरीर के किसी भी नर्वस सिस्टम के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करनी है यह जो लोग पहले किया करते थे वह हमेशा अपने गुरु के व्यक्तिगत पर्सनल गाइडेंस में करते थे तो आपको यह सब नहीं करना है आपको गले के आसपास और सर के पिछले हिस्से में जो महसूस होता है अकड़ा हट सी महसूस होती है या ऐसा
20:50 महसूस होता है कि वहां से कुछ गुजर रहा है ऊपर जा रहा है तो जब आपकी चेतना सिमटकर कंधों से ऊपर चलती है तो आपके गले में से गुजरती है इस अवस्था में शुरुआत में का गला सूख जाता है और फिर गर्दन में अकड़ा हट सी महसूस होती है जब चेतना शक्ति गले में से गुजरती है उस वक्त आपको शरीर के निचले हिस्सों में भारीपन महसूस होता है लेकिन कोई दर्द या परेशानी उस वक्त नहीं होती तो आप पहली बार अपने शरीर को एक पत्थर की तरह टिका हुआ सा महसूस करते हैं जिसमें कोई सेंसेशन फीलिंग नहीं है जब तक चेतना का ध्यान नीचे नहीं पहुंचा जाता आपको महसूस हो है कि आपका आपके शरीर पर कोई कंट्रोल नहीं है ऐसे में डर लगना स्वाभाविक है तीसरी और अंतिम
21:35 कैटेगरी की समस्याएं जैसे कि पेट और छाती में हलचल से महसूस होना जैसे कोई चीज इधर उधर घूमने लगी हो अचानक पूरे शरीर में झनझनाहट सी महसूस होना अचानक से शरीर में पैरों से लेकर सर तक एक अजीब सा झटका महसूस होना यह सभी फीलिंग परेशानी समस्याएं आपको जब फील होती है जब आपकी चेतना शक्ति सिमटकर ऊपर की ओर बहती है और शरीर के किसी भी हिस्से में जहां कोई ब्लॉकेज होती है वहीं पर चेतना शैश शक्ति सीधे ऊपर ना जाकर दाईं और बाईं तरफ फैलने लगती है अब वो फोर्स पैरों से सिमट चुकी है और दूसरी तरफ आप ध्यान आज्ञा चक्र पर टिकाए हुए हैं ध्यान की एकाग्रता से उस एनर्जी को और ऊपर सि मटने के लिए प्रेरित कर रहे हैं इस अवस्था में अगर एनर्जी की
22:23 फोर्स कम है तो आपके हाथों पैर और जांघों कमर पर पेट में छाती में गर्माहट या कुछ घूमता हुआ या कुछ मूवमेंट सी फीलिंग होती है लेकिन अगर आपके ध्यान की एकाग्रता अधिक है और की फोर्स ज्यादा है आपको ऐसे झटके महसूस होते हैं कि आपके शरीर को झक छोड़ देते हैं जिससे आपका ध्यान एकदम टूटता है सांस से एकदम तेज महसूस होती है उसी के अनुसार दिल की धड़कन बढ़ जाती है ऐसी अवस्था में साधक डर जाता है तो यह इस तरह की वाइब्रेशन भी आपको महसूस होती है इनसे घबराने की जरूरत नहीं है आपको शरीर में इस तरह की कोई भी हलचल महसूस हो यह आपके ध्यान को नीचे ले आता है आपको तुरंत इन सब चीजों की चिंता के बगैर अपने ध्यान को
23:09 आंखों के ऊपर माथे के बीच में ले जाना है जब तक आपकी बॉडी की सभी ब्लॉक क्लियर नहीं होंगी आपको इस तरह के झटके वाइब्रेशन और सेंसेशन ही महसूस होती रहेंगी लेकिन अगर आप इसे किसी पॉइंट पर छोड़ देंगे तो यह सेंसेशन कभी भी क्लियर नहीं हो सकती आप 20 साल भी इसी पॉइंट पर अटके रहेंगे 20 साल आपको झटके ही महसूस होते रहेंगे जैसे ही आप ऐसी किसी अवस्था में खुद को महसूस करें तो अपने गुरुजी या परमात्मा को याद करें और दोबारा से ध्यान को एकाग्र करें कुछ दिनों में आप पाएंगे कि वह सेंसेशन जैसे बंद हो गई है पूरे प्रेम श्रद्धा व संपूर्ण विश्वास के साथ ध्यान करें आप परमात्मा को याद कर रहे हैं ऐसे में आपके साथ क्या गलत हो सकता है एक बार की बात है
23:55 एक महान गुरु के दो शिष्य गुरु के घर के बगीचे में टहल रहे थे उन्हें रोज सुबह शाम बगीचे में घूमने की अनुमति गुरु के द्वारा दी गई थी कि सुबह शाम बगीची पर घूमना एक प्रकार का ध्यान था चलने वाला ध्यान जैसा कि जैन शुरू करते हैं चलते हुए ध्यान है यानी कि चलते हुए पूरी तरह से जागरूक होना आप 24 घंटे बैठ नहीं सकते पैरों को थोड़ी गति की आवश्यकता होती है रक्त को थोड़े संचालन की आवश्यकता होती है इसलिए जैन और सूफीवाद दोनों में अब कुछ घंटों के लिए ब बैठक ध्यान करते हैं फिर आप चलते हुए ध्यान करना शुरू कर देते हैं लेकिन आप हमेशा ही ध्यान में रहते हैं चाहे आप बैठे हो या चल रहे हो आपके अंदर की ध्यान की धारा टूटनी नहीं चाहिए उन दोनों शिष्यों
24:41 को धूम्रपान करने की आदत थी और इसके लिए वह गुरु की अनुमति मांगना चाहते थे लेकिन काफी दिनों से वह गुरु से पूछ नहीं पा रहे थे इसलिए आज उन दोनों शिष्यों ने निश्चय किया था कि जब कल सुबह फिर से बगीचे में घूमने आएंगे तो आखें सबसे पहले गुरु से धूम्रपान की अनुमति लेंगे ज्यादा से ज्यादा क्या होगा गुरु धूम्रपान के लिए मना कर देंगे लेकिन हम कल उनसे पूछ ही लेते हैं एक शिष्य ने कहा यह सुन दूसरे ने कहा मुझे लगता है गुरुजी हमें अनुमति दे देंगे मुझे नहीं लगता कि बगीचे में धूम्रपान करना कोई गलत बात नहीं है और फिर हम उनके घर के अंदर तो धूम्रपान कर नहीं रहे इसके बाद कल सुबह गुरु से उम्र पान की अनुमति लेने के वादे के साथ वे दोनों
25:27 अपने-अपने घर चले गए अगले दिन वे दोनों फिर बगीचे में मिले एक बहुत गुस्से में था वह गुस्से में था क्योंकि दूसरा धूमर पान कर रहा था उस दूसरे शिष्य ने तंबाकू की एक गस भरते हुए पूछा क्या हुआ पहले शिष्य ने बड़े गुस्से में कहा मैंने भी पूछा था लेकिन मुझे साफ मना कर दिया और कहा कि नहीं कर सकते हैं और तुम यहां धूमर पान कर रहे हो अपने गुरु के आदेश का अपमान कर रहे हो दूसरे ने कहा लेकिन उन्होने तो मुझे हां कहा है यह सुन पहले शी ने कहा यह तो बहुत अन्यायपूर्ण बात है मैं अभी जाकर गुरु जी से पूछता हूं कि उन्होंने मुझे ना और तुम हां क्यों कहा दूसरे ने कहा एक मिनट रुको तुम पहले मुझे
26:13 यह बताओ कि तुमने उनसे पूछा क्या था पहले ने कहा मैंने क्या पूछा था मैंने तो बस एक साधारण सा प्रश्न पूछा था कि क्या मैं ध्यान करते हुए धुम्रपान कर सकता हूं और उन्होंने कहा नहीं यह सुन दूसरा हंसने लगा उसने कहा अब मुझे समझ में आया कि मामला क्या है मैंने गुरुजी से पूछा था कि क्या मैं धूम्रपान करते हुए ध्यान कर सकता हूं और और उन्होंने कहा हां यहां बस हमारे प्रश्न पूछने के तरीके और शब्दों के चुनाव में फर्क था और तुमने देखा कि हम दोनों के उत्तर बिल्कुल अलग थे जबकि हम दोनों एक ही प्रश्न पूछना चाहते थे यह पूछना कि क्या मैं ध्यान करते समय धूम्रपान कर सकता हूं
27:00 कितना बदसूरत सवाल है इसका उत्तर भी ना ही होना था क्योंकि अगर कोई ध्यान कर रहा है फिर वह ध्यान के बीच में धूम्रपान कैसे कर सकता है लेकिन यह पूछना कि क्या मैं धूम्रपान करते हुए ध्यान कर सकता हूं एकदम सही सवाल है क्योंकि कि कोई भी इंसान धूम्रपान को तो ध्यान से कर ही सकता है वह धूम्रपान करते समय उसकी एक प्रक्रिया को जागरूक होंगे बड़े ध्यान से कर सता है सब कुछ ही प्रश्न पूछने का खेल है यदि आप सही प्रश्न पूछते हैं तो यह ब्रह्मांड खुद संगीत बखुदा है और अंत में उस दूसरे शिष्य ने गंभीर होकर कहा जीवन ना तो दुख है और ही आनंद जीवन एक खाली कैनवास है और हमें
27:45 इसके बारे में बहुत कलात्मक होना चाहिए आशा करता हूं आज की जानकारी से आपको आपके ध्यान में कुछ फायदा मिलेगा दोस्तों वीडियो को यही समाप्त करते हैं यदि वीडियो अच्छा लगा हो तो चैनल को सब्सक्राइब और वीडियो को लाइक जरूर करें