घट ही में अविनाशी साधु भाई घट ही में //गायक रामवीर गुर्जर

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो कबीर के दोहों पर आधारित है, जिसमें शरीर के भीतर ही ईश्वर को खोजने का महत्व बताया गया है। कबीर कहते हैं कि ईश्वर न तो स्वर्ग में है, न पाताल में, बल्कि हर व्यक्ति के हृदय में निवास करता है। यदि कोई व्यक्ति सांसारिक मोह-माया से दूर होकर एकांत में ध्यान करता है, तो उसे अपने भीतर ही ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं और जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल सकती है।

  • ईश्वर हर व्यक्ति के हृदय में निवास करता है।
  • सांसारिक मोह-माया से दूर होकर एकांत में ध्यान करने से ईश्वर के दर्शन हो सकते हैं।
  • ईश्वर के दर्शन से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल सकती है।

श्री राम

यह भाग "श्री राम" शब्द से शुरू होता है, जो एक पवित्र अभिवादन है और हिंदू धर्म में भगवान राम के प्रति सम्मान व्यक्त करता है।

बुरा जो देखन में चला

कबीर कहते हैं कि जब मैं बुराई खोजने निकला, तो मुझे कोई बुरा नहीं मिला। जब मैंने अपने भीतर झाँका, तो पाया कि मुझसे बुरा कोई नहीं है। इसका अर्थ है कि हमें दूसरों में दोष देखने के बजाय अपने भीतर की बुराइयों को दूर करना चाहिए।

घट में अविनाशी

कबीर कहते हैं कि अविनाशी (ईश्वर) हर व्यक्ति के घट (शरीर) में निवास करता है। हमें उसे बाहर खोजने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह हमारे भीतर ही मौजूद है।

गा रे नर मथुरा जावे

कबीर पूछते हैं कि लोग मथुरा और काशी क्यों जाते हैं, जबकि अविनाशी (ईश्वर) तो हर घट (शरीर) में ही विद्यमान है। इसका तात्पर्य है कि तीर्थ यात्राओं का बाहरी महत्व नहीं है, जब तक कि हम अपने भीतर ईश्वर को नहीं पहचानते।

तेरे मन में बसे निरंजन

कबीर कहते हैं कि निरंजन (ईश्वर) तुम्हारे मन में ही बसता है। वह बैकुंठ का निवासी है, लेकिन उसे तुम्हारे हृदय में भी पाया जा सकता है।

नहीं पाताल नहीं वो सूर में

कबीर कहते हैं कि ईश्वर न तो पाताल में है, न स्वर्ग में और न ही सागर की गहराई में। वह तो हर घट (शरीर) में विद्यमान है।

जो जन सुमिरन करत निरंतर

कबीर कहते हैं कि जो व्यक्ति निरंतर ईश्वर का सुमिरन करता है, वह हमेशा आनंद में रहता है।

जो तू उसको देखना चाहे

कबीर कहते हैं कि यदि तुम ईश्वर को देखना चाहते हो, तो संसार से उदास रहो, यानी सांसारिक मोह-माया से दूर रहो।

बैठिए एकांत ध्यान नित कीजिए

कबीर कहते हैं कि एकांत में बैठकर नित्य ध्यान करो, जिससे तुम्हारे हृदय में ज्योति प्रकाशित होगी।

हृदय में जब दर्शन होवे

कबीर कहते हैं कि जब हृदय में ईश्वर के दर्शन होते हैं, तो सारे मोह और अंधकार नष्ट हो जाते हैं।

ब्रह्मंद मोक्ष पद पावे

कबीर कहते हैं कि जो व्यक्ति अपने घट (शरीर) में ईश्वर को पहचान लेता है, वह ब्रह्मानंद को प्राप्त करता है और जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।

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Transcript

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0:11 श्री राम बुरा जो देखन में चला बुरा ना मिलिया कोई जो घट खोज जाया अपना तो मुझसे बुरा ना घट में अविनाशी साधु भाई घट में घट में अविनाशी साधु भाई घट

1:09 घट में अविनाशी साधु घट में अविनाशी साधु भाई घट में अविनाशी घट में अभिनामी साधु भजनी गाई रे नर मथुरा जावे

1:57 का रे नर मथुरा जावे काहे जावे काशी साध घट घट अविनाशी साधु घट कहता है कबीर कि अरे साधुओं कहां ढूंढ रहे हो तुम अरे घट में ही जो घट घट वासी है उसी को पहचानो

2:45 तेरे मन में बसे निरंजन जो बैकुठ निवासी साधु घटनी है घट है अविनाशी साधु भाई घटनी है

3:31 नहीं पाताल नहीं वो सूर में नहीं पाताल नहीं स्वर्ग लोक में ना पाताल ना स्वर्ग लोक में नहीं सागर जल राशी साधु घट घट अविनाशी साधु भाई घट में

4:19 जो जन सुमिरन करत निरंतर जो जन सुमिरन करे निरंतर सदा रहे पा सारी भरी में है अविनाशी साधु भक्त जो तू उसको देखना चाहे

5:05 जो तू उसको देखना चाहे सबसे ओ उदासी साधु घट अविनाशी सारी घट में बड़े पचे की बात कही है कबीर दास ने के जो तू उसको देखना चाहे तो जग से रहो उदासी

5:51 अगर ईश्वर को देखना है तो संसार से उदास रहना पड़ेगा संसार से मोह तोड़ना पड़ेगा बैठिए एकांत ध्यान नित कीजिए बैठिए एकांत ध्यान नित हो ज्योति प्रकाशी साधु घट अनाशी

6:38 साधु घट दुनिया से उदास हो के एकांत में जब परमात्मा से लौ लगेगी तो घटना ही प्रकाश होने लगेगा। हृदय में जब दर्शन होवे

7:33 सकल मोह तमनासी साधु सरा जब भट में प्रकाश होने लगेगा अपने आप मोह नष्ट हो जाएगा और लो लगने लगेगा ब्रह्मंद मोक्ष पद पावे ब्रह्मंद

8:19 मोक्ष पद पावे घट जन्म की फांसी साधु घट घटना साधु घट रही है घटना साधु घट

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